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किसानों पर मौसम की दोहरी मार, फसलें बर्बाद और मंडी में धान के भाव गिरे

अलीगढ़ यूपी के अलीगढ़ में शुक्रवार की रात को आसमान से गिरी हल्की बौछार आधी रात के बाद रिमझिम बारिश में बदल गई। इस दौरान तेज ठंडी हवाओं ने जहां एक तरफ गर्मी से राहत दी तो वहीं ये हवाएं किसानों पर आफत बनकर टूटी। कई ग्रामीण इलाकों में किसानों की पकी फसल जमींदोज हो गई। धान, बाजरा और ज्वार की फसल में नुकसान बताया गया है। रिमझिम बारिश गर्मी से राहत प्रदान करने वाली तो रहीं लेकिन इस बारिश ने किसान का हिसाब बिगाड़ दिया। इस समय अधिकतर खेतों में धान की फसल खड़ी है। कुछ की फसल पक चुकी है तो कुछ पर बालियां आ रही हैं। ऐसे में तेज हवा ने फसल को जमीन पर बिछा दिया। इस प्राकृतिक आपदा में किसान कुछ न कर सके। सिर पर हाथ रखे किसान अपने नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। जिले में धान का रकबा 1 लाख 64 हजार हेक्टेयर है। लगभग सभी जगहों से नुकसान की सूचनाएं आ रही हैं। कृषि विभाग की टीम भी बारिश के दौरान विभिन्न ब्लॉक में भ्रमणशील रही। इस दौरान अकराबाद, गोंडा, गभाना, हरदुआगंज, गंगीरी में फसल नुकसान की बात कही जा रही है। वहीं धनीपुर में भी खेतों में धान जमीन पर आ गया है। धान पानी में डूबने से गुणवत्ता प्रभावित होती है। बाबूपुर के किसान चौ. नवाब सिंह ने बताया कि उनकी पांच एकड़ में लगी धन की फसल जमीन पर बिछ गई है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार रविवार को भी इसी तरह बारिश की स्थिति रह सकती है। ऐसे में किसानों को आशंका सता रही है कि बचा हुआ धान भी न गिर जाए। धान के अलावा किसानों की बाजरा और ज्वार की फसल में भी नुकसान बताया गया है। जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि टीम जगह-जगह जाकर खेतों की स्थिति देख रही है। खेतों की स्थिति को सूचीबद्ध किया जा रहा है। तेज हवा व बारिश से फसल को नुकसान गभाना में शनिवार को सुबह से तेज हवा के साथ पड़ी बारिश धान की फसल के लिए नुकसानदायक रही। धान के साथ ही बाज़रा की फसल खेतों में गिर गई। तहसील क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ धान की फसल जमीन पर लेट गई है। किसानों को इस बात की आशंका सता रही है कि, कही फिर इसी तरह तेज बारिश हो गई तो खेत में पानी लग जायेगा और गिरी फसलों की बालियां अंकुरित होने लगेंगी। किसान लालपुर निवासी ललित, पनिहावर निवासी वीरपाल, भरतरी निवासी हीरेश कुमार मलिकपुरा निवासी शेरपाल सिंह का कहना है कि यह बारिश नुकसानदायक है। किसानों ने प्रशासन से जांच कर कर मुआवजे की मांग की है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें चंडौस में शनिवार सुबह से रही लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने से जहां धान की फसल जलमग्न हो गई है, वहीं तेज बारिश के चलते कई खेतों में खड़ी फसल गिर गई। इससे किसानों को नुकसान की आशंका है। ताजपुर के किसान रुकनपाल् सिंह तोमर पुत्र जोगिंदर सिंह तोमर की करीब 10 बीघा धान की फसल बारिश के कारण खेत में गिर गई। किसान के अनुसार फसल गिरने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। मंडी में धान की बंपर आवक बारिश से भाव धड़ाम खैर में कृषि उत्पादन मंडी समिति में धान की बंपर आवक के बीच शनिवार को हुई बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी। बारिश से मंडी में खुले में पड़ा धान भीग गया। वहीं धान के भाव में भी अचानक गिरावट आ गई। शुक्रवार तक करीब चार हजार रुपये क्विंटल तक बिक रहा धान शनिवार को घटकर 3000 से 3500 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया। भाव गिरने से किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है। वहीं मंडी में धान की खरीद भी प्रभावित हुई।

छह महीने बाद बीसलपुर बांध में मछली ठेका प्रक्रिया शुरू, सरकार ने निकाला टेंडर

 राजमहल  बीसलपुर बांध में मछली ठेके को लेकर करीब छह माह से चला आ रहा गतिरोध अब खत्म होने की राह पर है। उच्च न्यायालय की ओर से रोक हटाए जाने के बाद मत्स्य विभाग ने बांध में मत्स्य ठेके के लिए नए सिरे से निविदा जारी कर दी है। निविदा में सालाना पांच करोड़ रुपए से अधिक की न्यूनतम राशि निर्धारित की गई है। इससे बांध के जलभराव क्षेत्र में मछली पकड़ने और इससे जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों के फिर से व्यवस्थित होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि बीसलपुर बांध में मत्स्य आखेट को लेकर गत मार्च में पूर्व संवेदक की ओर से राशि जमा नहीं करवाने तथा जनहित याचिका के चलते राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब छह माह तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। न्यायालय की रोक हटने के बाद विभाग ने अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। बीसलपुर बांध में मत्स्य ठेके से सरकार को हर साल करीब पांच से छह करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। ठेका प्रक्रिया अटके रहने से अब तक करीब ढाई से तीन करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। रोक हटी, फिर भी लैंडिंग सेंटर पर सामान का जमावड़ा राजस्थान हाईकोर्ट की रोक हटे करीब एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन बीसलपुर बांध के मत्स्य लैंडिंग सेंटर पर अभी भी पूर्व संवेदक का सामान जमा है। सेंटर पर दर्जनों नावें, मोटर बोट सहित अन्य सामान पड़े हुए हैं। लंबे समय से सामान नहीं हटाए जाने से लैंडिंग सेंटर के उपयोग और व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नोटिस देकर सामान हटवाने की तैयारी मत्स्य विभाग टोंक के बीसलपुर बांध विकास अधिकारी मदन सिंह ने बताया कि न्यायालय की रोक हटने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लैंडिंग सेंटर पर पूर्व संवेदक का सामान पड़ा होने के संबंध में जल्द नोटिस जारी कर सामान हटवाने की तैयारी की जा रही है। बीसलपुर बांध की इन मछलियों की मांग अधिक बीसलपुर बांध से मत्स्य विभाग को प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिलता है। बांध में मछली पकड़ने का ठेका 5 वर्षों के लिए होता है, जिसमें हर साल 12 फीसदी राशि बढ़ा दी जाती है। मछली पालन का ठेका 2 साल से नहीं हो पाया। मामला हाईकोर्ट मे विचाराधीन होने से सरकार को करीब 10 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। बीसलपुर बांध में एक मछली एक बार में हजारों अंडे देती हैं। अंडे देने के दौरान मत्स्य विभाग की ओर से मत्स्य आखेट पर रोक लगाई जाती है। विदेशी व फार्मी मछली के तौर पर टाइगर, कोमलकार, सिल्वर, सिलोन, गिलासकार आदि प्रजाति की मछलियां पाई जाती है। जिनका बीज विभाग व ठेकेदार की ओर से डाला जाता है। मंडियों में इनके दाम देशी की अपेक्षा कम लगते हैं। सिंघाड़ा, लैची, बाम, समल आदि होती है, जिसमें कांटे कम होने से अधिक दामों पर बिकती है।

बाजरा किसानों के लिए खुशखबरी, हरियाणा सरकार ₹2900 प्रति क्विंटल का भाव करेगी सुनिश्चित

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार इस बार भावांतर भरपाई योजना के तहत बाजरा उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2900 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ देना सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को बाजरा और धान खरीद की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए। सरकार बाजरे की खरीद 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करेगी। वहीं, खुले बाजार में इससे अधिक भाव मिलने पर किसान अपनी उपज बाजार में बेच सकेंगे और एमएसपी 2900 रुपये तक पहुंचाने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार भावांतर की भरपाई सरकार करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को बाजरे का 2900 रुपये प्रति क्विंटल का भाव देना सुनिश्चित किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी किसान को खुले बाजार में बाजरे का भाव 2500 रुपये प्रति क्विंटल मिलता है तो 2900 रुपये के एमएसपी और बिक्री मूल्य के बीच 400 रुपये प्रति क्विंटल के अंतर की भरपाई सरकार की ओर से की जाएगी। वहीं, यदि खुले बाजार में भाव 2300 रुपये से कम रहता है तो सरकार 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बाजरा खरीदेगी और बाकी छह सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से भाव के अंतर की भरपाई करेगी। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष बाजरे की खरीद के लिए सरकार ने पहले 2150 और बाद में 2200 रुपये प्रति क्विंटल की दर निर्धारित की थी। ।  

योगी सरकार ने बढ़ाई वृद्धावस्था पेंशन, अब हर महीने मिलेंगे ₹1500

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में बुजुर्गों के लिए योगी सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया है. वृद्धावस्था पेंशन की राशि बढ़ाकर ₹1,500 प्रतिमाह कर दी गई है. पहले पात्र बुजुर्गों को ₹1,000 प्रतिमाह की दर से पेंशन मिलती थी. यानी अब सालाना पेंशन राशि बढ़कर ₹18,000 हो गई है. तीन महीने की ₹3,000 पेंशन अब दो किस्तों में पेंशन भुगतान की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. सितंबर 2026 से सामने आई नई व्यवस्था के अनुसार तीन महीने की कुल ₹3,000 पेंशन अब एक साथ मिलने के बजाय ₹1,500-₹1,500 की दो किस्तों में बैंक खाते में भेजी जा रही है. भुगतान DBT के जरिए सीधे लाभार्थियों के खाते में किया जा रहा है. सरकार ने बजट में भी बढ़ाया इंतजाम बुजुर्गों की पेंशन के लिए सरकार ने अनुपूरक बजट 2026-27 में भी बड़ा प्रावधान किया है. राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लिए ₹1,500 करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है. समाज कल्याण विभाग के लिए कुल ₹1,655 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है. किसे मिलेगा पेंशन का लाभ? वृद्धावस्था पेंशन के लिए पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया के तहत बुजुर्गों की उम्र, आर्थिक स्थिति और अन्य निर्धारित शर्तें देखी जाती हैं. पेंशन का लाभ लेने के लिए रिकॉर्ड में आधार, बैंक खाता और अन्य जरूरी विवरण सही होना महत्वपूर्ण है. पेंशन नहीं आई तो ये काम जरूर करें अगर नई किस्त खाते में नहीं पहुंची है तो सबसे पहले e-KYC, आधार-बैंक लिंकिंग, NPCI मैपिंग और बैंक खाते की जानकारी जांचनी चाहिए. इनसे जुड़ी गड़बड़ी होने पर भुगतान अटक सकता है. पेंशन का स्टेटस ऑनलाइन चेक किया जा सकता है और समस्या होने पर समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया जा सकता है. बुजुर्गों के लिए क्या बदला?     पेंशन: ₹1,000 से बढ़कर ₹1,500 प्रतिमाह     सालाना सहायता: ₹18,000     तीन महीने की राशि: ₹3,000     नई भुगतान व्यवस्था: ₹1,500 + ₹1,500 की दो किस्तें     वृद्धावस्था पेंशन के लिए अनुपूरक बजट में ₹1,500 करोड़     भुगतान: DBT के जरिए बैंक खाते में इस तरह 2026 में यूपी के पात्र बुजुर्गों के लिए सबसे अहम बदलाव पेंशन राशि बढ़ने और भुगतान व्यवस्था में बदलाव का है.

पारा शिक्षकों की नौकरी बची, हाई कोर्ट ने मानदेय रोकने का आदेश किया निरस्त

रांची  हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत से पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने शैक्षणिक प्रमाण पत्र सही नहीं होने का हवाला देकर पारा शिक्षकों को सेवा से हटाने और मानदेय रोकने के जिला शिक्षा अधीक्षक के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने प्रार्थियों को अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है। इ स संबंध में मेरी मुर्मू एवं अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। मामला पारा शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ा है। दरअसल, इलाहाबाद और देवघर के कुछ गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों से मैट्रिक और इंटरमीडिएट का प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले पारा शिक्षकों की शैक्षणिक अर्हता को लेकर सवाल उठाए गए थे। इनमें इंटर प्रयाग महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद, हिंदी महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद और हिंदी विद्यापीठ, देवघर आदि संस्थानों के प्रमाण पत्र शामिल थे। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ तक पढ़ाने वाले पारा शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सात नवंबर 2025 को पत्र जारी किया था। इसके बाद राज्य के विभिन्न जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों ने संबंधित ब्लाक एक्सटेंशन आफिसर, टाउन रिसोर्स सेंटर और स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को कार्रवाई का निर्देश दिया था। इसी क्रम में पूर्वी सिंहभूम के जिला शिक्षा अधीक्षक ने संबंधित पारा शिक्षकों को काम से हटाने और उनका मानदेय रोकने का आदेश जारी किया था। इस आदेश को पारा शिक्षकों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में जिला शिक्षा अधीक्षक के आदेश को रद करने और बकाया मानदेय का भुगतान करने का आग्रह किया गया था।

IIT पटना के सहयोग से बदलेंगे 46 पॉलिटेक्निक, ड्रोन-रोबोटिक्स की मिलेगी ट्रेनिंग

पटना आईआईटी पटना के सहयोग से सभी 46 राजकीय पाॅलिटेक्निक संस्थानों को 122 करोड़ रुपये की लागत से उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। इसके तहत हब-एंड-स्पोक माॅडल के माध्यम से इलेक्ट्रिक व्हीकल, ड्रोन टेक्नोलाॅजी, 3डी प्रिंटिंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों में विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स, स्पोकन ट्यूटोरियल, कुशल युवा कार्यक्रम, उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों की रोजगारपरक क्षमता बढ़ाने पर भी जोर होगा। ड्रोन टेक्नोलॉजी, 3डी प्रिंटिंग व रोबोटिक्स में प्रशिक्षण विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी के मुताबिक राज्य सरकार का उद्देश्य सिर्फ विद्यार्थियों को तकनीकी संस्थानों में प्रवेश दिलाना नहीं है बल्कि उन्हें ऐसी शिक्षा देना है, जो ज्ञान, कौशल, रोजगार और नवाचार से जुड़ी हो। नई तकनीकी में प्रशिक्षण की व्यवस्था से विद्यार्थियों को रोजगार पाने में मदद मिलेगी, बेहतर प्लेसमेंट का भी लाभ मिलेगा। विभाग की ओर से तकनीकी संस्थानों में स्मार्ट कक्षाओं, आधुनिक प्रयोगशालाओं और कार्यशालाओं, भाषा प्रयोगशालाओं, छात्रावास, रोजगारपरक प्रशिक्षण, खेल मैदान, ओपन जिम और स्वास्थ्य उपकेंद्र जैसी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। एनईपी के अनुरूप होंगे सभी पाठ्यक्रम विभाग के मुताबिक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (एनईपी) और राज्य सरकार के कौशल विकास अभियानों के तहत राजकीय पालिटेक्निक संस्थानों के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह बदने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है। इतना नहीं, एनईपी के निर्धारित मापदंडों के अनुरूप पाठ्यक्रम को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसीलिए उसी के समान व्यावहारिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है इसका उद्देश्य पारंपरिक डिप्लोमा डिग्री धारकों को उद्योग की वर्तमान जरूरतों के अनुकूल बनाना है ताकि उन्हें रोबोटिक्स, एवियोनिक्स और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में अच्छी नौकरियां और प्लेसमेंट मिल सके। सैद्धांतिक कक्षाओं के बजाय छात्र-छात्राओं को लाइव असेंबली, कैलिब्रेशन, कोडिंग और फील्ड टेस्टिंग पर व्यावहारिक अनुभव देने पर भी जोर दिया जा रहा है।  

MP-UP में पानी की बड़ी पहल, केन-बेतवा परियोजना पर तेज काम; 7 दशक पुराना जल विवाद भी चर्चा में

छतरपुर   मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में पेयजल व सिंचाई के लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट पर काम तीव्र गति से चल रहा है. ये परियोजना 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य. वहीं, एक ऐसी परियोजना भी है, जिस पर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के दो जिलों के किसानों के बीच 7 दशक से तनाव व्याप्त है।  बांध हमारा तो पानी तुम्हारा क्यों? सिंचाई के मौसम में रनगुवां डैम का पानी लेने के लिए छतरपुर व बांदा जिले के किसान आमने-सामने आ जाते हैं. दोनों जिलों के किसानों के बीच ये विवाद करीब 7 दशक से चल रहा है. अब फिर रबी फसल की सिंचाई का मौसम सामने है, ऐसे में दोनों जिलों के किसान फिर आमने-सामने हैं और प्रशासन इनके सामने असहाय की मुद्रा में. ये डैम बना तो छतरपुर जिले में है लेकिन अधिकांश पानी पर हक बांदा जिले का है।  डैम पर पूरा नियंत्रण उत्तर प्रदेश के पास बीते दो साल छोड़ दिए जाएं तो मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका सूखे के लिए बदनाम रहा है. इसलिए यहां पानी को लेकर हमेशा युद्ध जैसी स्थिति रहती है. छतरपुर में आधा दर्जन से अधिक बांध होने के बावजूद सिंचाई साधनों की कमी है. रनगुवां बांध छतरपुर जिले में होने के बावजूद इसका पानी उत्तर प्रदेश के खेतों के लिए अमृत बना हुआ है. छतरपुर जिले के किसान हर साल सिंचाई के पानी के लिए तरसते हैं।  छतरपुर जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर राजनगर इलाके से निकली केन की सहायक पर रनगुवां डैम बना है. इस डैम का निर्माण 1957 में एमपी और यूपी के संयुक्त उपक्रम के रूप में किया गया. ये बांध भले ही मध्य प्रदेश के छतरपुर सीमा में है लेकिन इसका प्रशासनिक नियंत्रण और रखरखाव उत्तर प्रदेश का बांदा जिले का सिंचाई विभाग करता है।  किसानों में फिर रोष, आंदोलन की चेतावनी छतरपुर के रनगुवां के किसान कमलेश रैकवार कहते हैं "बांध उनके क्षेत्र में होने के बावजूद उनके हक का पानी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती गांवों में जाता है. यूपी के बांदा जिले को पानी ज्यादा दिया जाता है, जिससे यहां के किसानों की फसलें सूखने लगती हैं. हमारे हिस्से का पानी भी यूपी के किसान निकालते हैं. हम लोगों की खेती समय से नहीं हो पाती।  कम बारिश होने की स्थिति में बांध में पानी का स्तर कम होता है, तब यह विवाद उग्र होने लगता है. छतरपुर जिले के किसान संघ के अध्यक्ष अयोध्या प्रसाद पटेल कहते हैं "यह विवाद पीढ़ियों से चला आ रहा है. कई बार यह मुद्दा किसानों ने उठाया है. छतरपुर जिले की सीमा में बांध बना है लेकिन यहां किसानों को पानी नहीं मिल रहा. अब किसानों के पास आंदोलन के अलावा कोई चारा नहीं है. किसानों को उनके हक का पानी मिलेगा।  52 साल पहले हुआ था दोनों राज्यों के बीच एग्रीमेंट रनगुवां डैम के पानी के बंटवारे को लेकर एग्रीमेंट 1 अगस्त 1972 को हुआ था. उस समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रकाश चंद सेठी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलपति त्रिपाठी ने इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे. अनुबंध के अनुसार रनगुवां डैम का 30 प्रतिशत पानी मध्य प्रदेश के छतरपुर और 70 प्रतिशत पानी यूपी के बांदा को मिल रहा है।  रनगुवां के किसान मुन्ना अहिरवार कहते हैं "जब सिंचाई का सीजन शुरू होता है तो यूपी वाले पानी रोक देते हैं. हम लोगों की फसल चौपट हो जाती है. कई बार आवाज उठाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ." छतरपुर के जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री राकेश वर्मा कहते हैं राजनगर इलाके में बने रनगुवां बांध से राजनगर इलाके के 35 गांवों मे सिंचाई होती है. यूपी के बांदा जिले के लगभग 95 गांवों की खेती को रनगुवा बांध पानी देता है. रनगुवा बांध की लंबाई 2 हजार 72 मीटर और ऊंचाई 27.400 मीटर है. इसकी जलभराव क्षमता 155 MCM है।  केन-बेतवा लिंक परियोजना पूरी होने पर खत्म होगा विवाद रनगुवां डैम के पानी वितरण को लेकर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव केन-बेतवा लिंक परियोजना का काम पूरा होने के बाद खत्म होने की संभावना है. इस परियोजना पर काम तेज गति से चल रहा है. छतरपुर के ADM विनय द्विवेदी कहते हैं " केन-बेतवा लिंक परियोजना से सूखे बुन्देलखंड में पानी के संकट से लोगों को छुटकारा मिलेगा. किसानों के खेतों में हरियाली लहराएगी. परियोजना वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है. परियोजना की कुल लागत ₹44,605 करोड़ रुपये है. परियोजना के तहत केन नदी पर 96.7 मीटर ऊंचा और 2 से 2.5 किमी चौड़ा डैम बनेगा।  सिंचाई के अलावा पेयजल संकट सुलझेगा केन-बेतवा लिंक परियोजना से मध्य प्रदेश के 10 जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर और उत्तरप्रदेश के 4 जिलों में 2.51 लाख हेक्टेयर मिलाकर कुल 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी. दोनों राज्यों के करीब 65 लाख लोगों को पेयजल की सुविधा मिलेगी. MP के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी, रायसेन और UP जिले बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिलों के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना वरदान साबित होगी। 

डिग्री-डिप्लोमा के बाद नौकरी की तलाश? MP की सीखो-कमाओ योजना में 29 साल तक के युवाओं को मौका

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब 'सीखो-कमाओ योजना' के जरिए मोहन सरकार की युवाओं को रोजगार देने की तैयारी है. डिग्री डिप्लोमा के बाद नौकरी तलाश रहे नौजवान इस योजना के जरिए एक साल की ट्रेनिंग ले सकेंगे. खास बात ये है कि ट्रेनिंग के दौरान भी इन्हें कमाने का अवसर मिलेगा. इस योजना के लिए आयु सीमा 18 से 29 वर्ष है. 15 अक्टूबर तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है।  ऑन द जॉब ट्रेनिंग, एक साल की ट्रेनिंग में इतना स्टाइपेंड पॉवर प्रोडक्शन के क्षेत्र में व्यावहारिक प्रशिक्षण का ये मौका है. मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना में ये मौका दिया है. इसमें 559 ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग पद उपलब्ध कराए हैं. डिग्री, डिप्लोमा के अलावा अन्य निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के बाद नौकरी की तलाश कर रहे नौजवान इस योजना के जरिए कंपनी के विभिन्न कार्यालयों एवं विद्युत गृहों में एक वर्ष का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे. ट्रेनिंग लेने पर प्रशिक्षण अवधि के दौरान 8 हजार रुपये से लेकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह तक स्टाइपेंड भी दिया जाएगा।  यहां होगी ट्रेनिंग और ऐसे मिलेगा नौकरी का मौका मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के अंतर्गत युवाओं को जबलपुर स्थित पावर कंपनी मुख्यालय के साथ प्रदेश में स्थित विभिन्न जल एवं ताप विद्युत गृहों में कार्य करते हुए व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा. योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रीशियन, इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एवं सिस्टम मेंटेनेंस, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, स्टेनो (हिन्दी/अंग्रेजी), सिविल इंजीनियरिंग, मानव संसाधन, अकाउंट्स सहित विभिन्न कार्यश्रेणियों में प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं. इससे युवाओं को अपनी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप विद्युत उत्पादन एवं कंपनी के विभिन्न कार्यक्षेत्रों की कार्यप्रणाली को नजदीक से समझने का अवसर मिलेगा।  एक वर्ष की प्रशिक्षण अवधि, प्रशिक्षण के बाद स्टाइपेंड ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद निर्धारित पात्रता के अनुसार अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा. चयनित प्रशिक्षणार्थियों को उनके द्वारा चयनित कार्यश्रेणी व जिले के अनुरूप कंपनी के विभिन्न विद्युत गृहों एवं कार्यालयों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा. प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ होने के एक माह बाद प्रशिक्षणार्थियों को पात्रता के अनुसार 8 हजार से 10 हजार प्रतिमाह स्टाइपेंड का भुगतान प्रारंभ होगा. प्रशिक्षण की कुल अवधि एक वर्ष निर्धारित है।  18-29 वर्ष के मध्य प्रदेश के स्थानीय निवासी कर सकते हैं आवेदन योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का मध्य प्रदेश का स्थानीय निवासी होना आवश्यक है. अभ्यर्थी की आयु 18 से 29 वर्ष के मध्य होनी चाहिए. शैक्षणिक योग्यता के अंतर्गत निर्धारित कार्यश्रेणी के अनुसार 12वीं, आईटीआई, डिप्लोमा अथवा स्नातक उत्तीर्ण होना आवश्यक है. मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया 23 सितंबर 2026 से प्रारंभ हो चुकी है. इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी 15 अक्टूबर की रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।  ऑनलाइन पोर्टल से ही होगा आवेदन इच्छुक अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के ऑनलाइन पोर्टल https://mmsky.mp.gov.in/Web/Candidate/Registration के माध्यम से आवेदन करना होगा. योजना में पंजीयन के लिए समग्र आईडी एवं आधार की ई-केवाईसी आवश्यक है. अभ्यर्थियों को ध्यान रखना होगा कि मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के अंतर्गत उपलब्ध ये पद प्रशिक्षण हेतु हैं तथा इन्हें नियमित नौकरी अथवा स्थायी रोजगार के रूप में नहीं माना जाएगा. आवेदन से संबंधित किसी भी प्रकार की कठिनाई अथवा जानकारी के लिए अभ्यर्थी अपने संबंधित जिला स्तरीय आईटीआई से संपर्क कर सकते हैं। 

MP में पानी के सफर का बदलेगा सिस्टम! क्रूज-बोट के लिए बनेगी अलग अथॉरिटी

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब पानी के रास्ते सफर का पूरा सिस्टम बदलने की तैयारी है। बड़े तालाब, नदियों और बांधों में चलने वाले क्रूज, बोट और दूसरे जल परिवहन साधनों के लिए अलग अथॉरिटी बनाई जाएगी। इसके जरिए यह तय होगा कि पानी के जहाजों का रजिस्ट्रेशन कौन करेगा, संचालन के नियम क्या होंगे और जल परिवहन की जिम्मेदारी किस विभाग के पास रहेगी। अभी राज्य में जल परिवहन का इस्तेमाल मुख्य रूप से पर्यटन गतिविधियों के लिए किया जाता है। नई व्यवस्था के बाद इसे पर्यटन से आगे ले जाकर व्यवस्थित इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट सिस्टम के रूप में विकसित करने की तैयारी है। क्रूज-बोट के लिए अलग नियम होंगे अथॉरिटी बनने के बाद क्रूज, बोट और अन्य जलयान मनमाने तरीके से संचालित नहीं होंगे। इनके संचालन और रजिस्ट्रेशन के लिए नियम तय किए जाएंगे। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अलग-अलग जल क्षेत्रों में किस तरह के जलयान चल सकेंगे और उनकी संचालन व्यवस्था किस विभाग के अधीन होगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी अथॉरिटी के गठन और नियमों का खाका तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में वित्त, परिवहन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, विधि और पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। यानी नई व्यवस्था तैयार करते समय परिवहन के साथ पर्यटन और जल संसाधन से जुड़े पहलुओं को भी साथ रखा जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल. कौन करेगा संचालन? नई अथॉरिटी के सामने अहम काम यह तय करना होगा कि जलयानों का रजिस्ट्रेशन और संचालन किस विभाग के जिम्मे रहेगा। अलग-अलग राज्यों में इसकी व्यवस्था अलग है। उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्यों में परिवहन विभाग की भूमिका है, जबकि गुजरात और तटीय क्षेत्रों में मरीन विभाग इस तरह की जिम्मेदारी संभालता है। मध्यप्रदेश में किस मॉडल को अपनाया जाए, इस पर कमेटी की सिफारिश के आधार पर आगे फैसला होगा। पर्यटन से ट्रांसपोर्ट तक बढ़ेगा दायरा अभी भोपाल के बड़े तालाब समेत प्रदेश के कई जल क्षेत्रों में बोट और क्रूज मुख्य रूप से पर्यटन का हिस्सा हैं। नई अथॉरिटी का उद्देश्य केवल पर्यटकों के लिए जलयान चलाना नहीं होगा। इसके जरिए इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट को एक अलग परिवहन माध्यम के तौर पर विकसित करने की संभावनाएं भी देखी जाएंगी। इससे भविष्य में जल मार्गों का इस्तेमाल यात्री या अन्य परिवहन गतिविधियों के लिए किए जाने का रास्ता तैयार हो सकता है। दूसरे राज्यों तक भी पहुंच सकता है जल परिवहन नई व्यवस्था का दायरा मध्यप्रदेश की सीमाओं तक सीमित रखने की योजना नहीं है। अथॉरिटी बनने के बाद अंतरराज्यीय जल परिवहन की संभावनाओं पर भी काम किया जा सकता है। इसके लिए दूसरे राज्यों के साथ जल मार्गों की कनेक्टिविटी, नियम और संचालन व्यवस्था जैसे पहलुओं पर आगे रूपरेखा तैयार होगी। अब पानी पर भी बनेगा ट्रांसपोर्ट का सिस्टम मध्यप्रदेश में बड़ी नदियों और जलाशयों का नेटवर्क है। ऐसे में नई अथॉरिटी के गठन से पहली बार जल परिवहन को लेकर एक केंद्रीकृत नियामक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ेगा। क्रूज और पर्यटन बोट से शुरू होने वाली यह व्यवस्था आगे यात्री परिवहन और अंतरराज्यीय जल कनेक्टिविटी तक पहुंचती है या नहीं, यह अथॉरिटी के नियम और सरकार के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।

माध्यमिक कक्षाओं की पढ़ाई में आएगा बदलाव, 28 सितंबर से विशेषज्ञों का प्रशिक्षण

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा से और समृद्ध होगी माध्यमिक कक्षाओं की शिक्षण पद्धति 28 सितम्बर से राज्य स्तरीय विषय विशेषज्ञों का उन्मुखीकरण, शिक्षण में नए आयामों और नवाचारों पर होगा फोकस भोपाल  मध्यप्रदेश में कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों के शिक्षण-अधिगम को नई दिशा देने के लिए माध्यमिक शिक्षकों को नई एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकों की शिक्षण पद्धति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 की अनुशंसाओं के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा। संचालक राज्य शिक्षा केंद्र हरजिंदर सिंह ने बताया कि सत्र 2026-27 में गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण की श्रृंखला शुरू की जा रही है। प्रथम चरण 28 सितम्बर से शुरू होगा और 1 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान चयनित एसआरजी (राज्य संसाधन समूह) विषय विशेषज्ञों का चार दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा किया जाएगा। इस श्रृंखला के अगले चरण में राज्य से चयनित मास्टर ट्रेनर्स का 5-दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण 5 अक्टूबर से 6 नवम्बर तक संभागीय मुख्यालयों की डाइट में होगा। इसके पश्चात ब्लॉक स्तर पर कक्षा 6वीं से 8वीं तक गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान पढ़ाने वाले समस्त माध्यमिक शिक्षकों का प्रशिक्षण 12 अक्टूबर से 20 नवम्बर तक आयोजित किया जाएगा। नई पाठ्य पुस्तकों की नई एप्रोच पर होगा फोकस संचालक सिंह ने बताया कि एसआरजी उन्मुखीकरण कार्यक्रम में कक्षा 7 की नई पाठ्य पुस्तकों में अपनाई गई नई एप्रोच, गतिविधि आधारित शिक्षण तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 की अनुशंसाओं के अनुरूप प्रभावी शिक्षण पद्धतियों पर विषय विशेषज्ञों का उन्मुखीकरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य एसआरजी को इस प्रकार तैयार करना है कि वे आगामी प्रशिक्षणों में मास्टर ट्रेनर्स एवं शिक्षकों को नई पाठ्य पुस्तकों की अवधारणा और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से समझा सकें। चार दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में विषय आधारित प्रशिक्षण के साथ शिक्षकों के समग्र व्यावसायिक विकास से जुड़े नवाचारी विषयों को भी शामिल किया गया है। इनमें जॉयफुल लर्निंग, मानसिक स्वास्थ्य, नैतिकता एवं मूल्य, आईजीओटी पोर्टल-केकेके, कौशल बोध तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषय प्रमुख हैं। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) तैयार करने की गतिविधि भी कराई जाएगी, जिससे शिक्षक कक्षा में अवधारणाओं को अधिक प्रभावी और रोचक तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचा सकें। उन्होंने बताया कि एसआरजी के राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण में राज्य शिक्षा केंद्र के विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पीपल संस्था द्वारा सहयोगी भूमिका निभाई जाएगी। शिक्षकों के प्रशिक्षण तक यह पूरी श्रृंखला नई एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकों के अनुरूप शिक्षण प्रक्रिया को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।