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कक्षा 9 में प्रवेश का मौका: प्रयास आवासीय विद्यालयों के लिए आवेदन शुरू, 10 मई को परीक्षा

रायपुर. मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना अंतर्गत संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9वीं में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने बताया कि इच्छुक विद्यार्थी 17 अप्रैल 2026 तक विभागीय वेबसाइटhttps://eklavya.cg.nic.in/ पर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन भरे गए आवेदनों में 18 अप्रैल से 21 अप्रैल 2026 तक त्रुटि सुधार भी कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्राक्चयन परीक्षा का आयोजन 10 मई 2026 को किया जाएगा। उक्त संबंध में अधिक जानकारी सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कार्यालय से भी संपर्क किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट स्कूली शिक्षा के साथ-साथ मेडिकल, इंजीनियरिंग, सीए, सीएमए, एनडीए, क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।

भोपाल में शुरू हुआ सूखे कचरे से कोयला बनाने का ट्रायल, 220 करोड़ में बना प्लांट

भोपाल भोपाल के आदमपुर छावनी में अब शहर के सूखे कचरे से कोयला बनाया जाएगा। नगर निगम ने पीपीपी मोड में 220 करोड़ रुपये की लागत से टोरिफाइड चारकोल प्लांट स्थापित किया है। इस प्लांट के माध्यम से प्रतिदिन 400 टन सूखे कचरे का निपटारा किया जाएगा और इसका ट्रायल रन भी शुरू कर दिया गया है। टोरिफाइड चारकोल प्लांट का महत्व स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम ने यह कदम शहर में सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा देने के लिए उठाया है। आदमपुर छावनी में स्थापित यह प्लांट नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) के सहयोग से संचालित होगा। यहां से निर्मित टोरिफाइड चारकोल का उपयोग एनटीपीसी अपने औद्योगिक उपयोग में करेगी। ट्रायल रन और कचरे का प्रबंधन नगर निगम ने ट्रायल रन के लिए 3 दिनों में कुल 800 टन सूखा कचरा प्लांट को दिया है। पूरे ट्रायल रन के दौरान लगभग 1800 टन सूखे कचरे को प्रोसेस किया जाएगा। यह प्रक्रिया शहर से निकलने वाले सूखे कचरे के निपटान के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगी। तीन दिन में 800 टन कचरा पहुंचा ट्रायल के शुरुआती तीन दिनों में ही प्लांट में 800 टन सूखा कचरा पहुंचाया गया है। अधिकारियों के अनुसार ट्रायल के दौरान कुल 1800 टन कचरे का उपयोग किया जाएगा हर दिन 400 टन कचरे की प्रोसेसिंग 15 एकड़ में फैले इस प्लांट में प्रतिदिन 400 टन सूखे कचरे को प्रोसेस कर टोरिफाइड चारकोल तैयार किया जाएगा। यह तकनीक कचरा निपटान के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन के लिए भी उपयोगी साबित होगी।  बनारस के बाद दूसरा संयंत्र, जहां बिजली का कोयला बनेगा  बनारस के बाद देश में दूसरे टोरिफाइड चारकोल प्लांट के रूप में आदमपुर खंती में स्थापित संयंत्र का ट्रायल रन शुरू हो गया है। इस प्लांट के जरिए रोज 400 टन सूखे कचरे को प्रोसेस कर चारकोल में बदला जाएगा 2021 में हुआ था अनुबंध 12 अक्टूबर 2021 को अनुबंध होने के करीब पांच साल बाद प्लांट का ट्रायल शुरू हुआ। इस दौरान 2023 में खंती में आग लगने, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति में देरी और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण प्रोजेक्ट तय समय से पीछे चला गया। बनारस में सेग्रीगेशन की कमी से प्लांट प्रभावित, यहां भी यही चुनौती बनारस में एनटीपीसी का करीब 200 टन प्रतिदिन क्षमता वाला टोरिफाइड चारकोल प्लांट 2021-22 में शुरू हुआ था। वहां संचालन के दौरान सबसे बड़ी समस्या साफ और अलग किया हुआ सूखा कचरा लगातार उपलब्ध न होना रही। इसके कारण प्लांट पूरी क्षमता पर नहीं चल पाया। भोपाल में भी ‘सेग्रीगेशन एट सोर्स’ कमजोर है। ऐसे में यदि घर स्तर पर कचरे का सही तरह से अलग नहीं हुआ, तो प्लांट को पर्याप्त गुणवत्ता वाला कचरा मिलना मुश्किल होगा। इससे इसका संचालन प्रभावित हो सकता है। एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह प्लांट केवल नए सूखे कचरे को ही प्रोसेस करेगा, जबकि खंती में पहले से जमा करीब 6 लाख टन लिगेसी वेस्ट जस का तस बना हुआ है। 400 टन क्षमता वाला बायो-सीएनजी प्लांट अब तक शुरू नहीं आदमपुर छावनी में प्रस्तावित 400 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो-सीएनजी प्लांट भी अब तक शुरू नहीं हो सका है। यह प्लांट, जिसे देश का दूसरा सबसे बड़ा बताया गया था, अगस्त 2023 तक शुरू होना था, लेकिन पर्यावरणीय मंजूरी और तकनीकी अड़चनों के कारण इसमें देरी हो रही है। आयुक्त ने किया निरीक्षण नगर निगम आयुक्त Sanskriti Jain ने प्लांट का दौरा कर कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया। उन्होंने इसे भोपाल के लिए गौरव का क्षण बताते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम बताया। एक नजर में प्रोजेक्ट 12 अक्टूबर 2021 को हुआ अनुबंध 220 करोड़ रुपये की लागत 15 एकड़ में स्थापित प्लांट प्रतिदिन 400 टन कचरे की प्रोसेसिंग क्षमता पर्यावरण को मिलेगा फायदा यह प्रोजेक्ट कचरे के वैज्ञानिक निपटान के साथ कोयले के विकल्प के रूप में उपयोगी होगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भोपाल देश के चुनिंदा शहरों में शामिल हो सकेगा, जहां कचरे का शत-प्रतिशत उपयोग किया जा रहा है। निगम को होगी लागत में बचत 15 एकड़ क्षेत्र में स्थापित इस प्लांट के संचालन से नगर निगम को सूखे कचरे के निपटान में होने वाले खर्च में बड़ी बचत होगी। पीपीपी मोड में लगाए गए इस प्लांट से नए लेगसी तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और शहर का कचरा प्रबंधन अधिक व्यवस्थित तरीके से होगा। बनारस के बाद भोपाल में दूसरा प्लांट एनटीपीसी के अधिकारियों के अनुसार, बनारस के अनुभव से सीख लेकर भोपाल प्लांट में अपग्रेड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। यह मध्यप्रदेश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है जो शहर के कचरे से टोरिफाइड चारकोल का उत्पादन करेगा। नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने शुक्रवार को प्लांट का निरीक्षण किया और ट्रायल रन की सफलता की जानकारी ली। इस प्रोजेक्ट से शहर का कचरा प्रबंधन और स्वच्छता दोनों ही स्तरों पर मजबूत होगा। निगम को बचत होगी पीपीपी मोड पर लगभग 220 करोड़ रुपए की लागत से आदमपुर छावनी में 15 एकड़ भूमि पर एनटीपीसी ने यह प्लांट स्थापित किया है। प्लांट के संचालन से निगम को सूखे कचरे के निष्पादन पर व्यय होने वाली राशि की बचत होगी और नया लेगसी तैयार नहीं हो पाएगा। बनारस के बाद भोपाल में ही लगा है प्लांट निगम कमिश्नर जैन को एनटीपीसी के अधिकारियों ने बताया कि बनारस के बाद भोपाल में देश का दूसरा ऐसा शहर है, जिसने टोरिफाइड चारकोल प्लांट स्थापित करने के लिए अनुबंध किया था। बनारस के प्लांट के संचालन के अनुभव एवं कार्य व्यवहार से सीख लेकर भोपाल के संयंत्र में अपग्रेड टेक्नालॉजी का उपयोग किया गया है। यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश में अपने किस्म का पहला प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से नगर निगम हर रोज सूखे कचरे का निपटारा कर सकेगा।

चंडीगढ़ एयर-शो: एयरफोर्स की सूर्यकिरन टीम ने किया डायमंड-Y फॉर्मेशन, पंजाब और हरियाणा के CMs ने भी लिया हिस्सा

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में सुखना लेक पर सूर्यकिरण एयर शो का आज दूसरा दिन है। दूसरे दिन शो में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के सीएम नायब सैनी भी पहुंचे। वहीं दोनों प्रदेशों के गवर्नर भी पहुंचे।   पहले दिन के शो ने पूरे शहर को रोमांच से भर दिया, वहीं इस आयोजन ने बेटियों के सपनों को भी नई दिशा दे दी। आसमान में जांबाज पायलटों के हैरतअंगेज करतब देखकर कई छात्राओं के मन में देशसेवा का जज्बा जगा और उन्होंने पायलट बनने का संकल्प लिया। चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से इस एयर शो में स्कूली बच्चों को भी शामिल होने का मौका दिया गया। चार सरकारी स्कूलों के 50-50 बच्चों को विशेष अनुमति देकर लाया गया। स्नेहालय के बच्चों ने भी इस आयोजन में भाग लिया। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर किशोर छात्राओं तक, हर किसी के चेहरे पर उत्साह और गर्व दिखा। स्नेहालय के छोटे बच्चों ने भी पायलट बनने की इच्छा जताई। शिक्षकों ने प्रशासन के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के भविष्य को नई दिशा देते हैं। इस तरह के कार्यक्रमों से आत्मविश्वास बढ़ता है और बच्चे देश सेवा के लिए प्रेरित होते हैं। चंडीगढ़ में सुखना लेक पर चल रहे एयर शो का आज दूसरा और आखिरी दिन है। करीब एक घंटे चले एयर-शो में एयरफोर्स की टीम सूर्यकिरन ने आसमान में कई करतब दिखाए। टीम ने हवा में डायमंड, Y, तेजस, DNA जैसे फॉर्मेशन बनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर किया। साथ ही कभी 360 तो कभी 90 डिग्री पर घूमकर हैरतअंगेज कारनामे किए। अंत में टीम के 2 फाइटर जेट ने हवा में धुएं से हार्ट बनाकर दर्शकों को धन्यवाद कहा। इसी के साथ एयर-शो संपन्न हुआ। इसे देखने के लिए हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी और पंजाब के CM भगवंत मान भी पहुंचे। उनके साथ चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया और हरियाणा के गवर्नर अशीम घोष मौजूद रहे। एयर-शो संपन्न होने के बाद सुखना लेक को आम जनता के लिए दोपहर 2 बजे खोल दिया जाएगा। इस एयर शो के चलते 26 मार्च से आम जनता के लिए सुखना लेक बंद है। एयर शो के दौरान जैसे ही सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने आसमान में कलाबाजियां दिखाईं, पूरा माहौल तालियों और जयकारों से गूंज उठा। इस रोमांच ने खासतौर पर बेटियों के दिलों में एक नई ऊर्जा भर दी। कई छात्राओं ने कहा कि अब वे भी पायलट बनकर देश का नाम रोशन करना चाहती हैं। अब सपना नहीं, लक्ष्य बन गया सरकारी स्कूल की छात्रा तराना ने कहा कि वह पहले से ही डिफेंस में जाना चाहती थी लेकिन इस शो को देखने के बाद उसका हौसला और मजबूत हो गया है। अब पूरी मेहनत से तैयारी करूंगी और पायलट बनकर देश का नाम रोशन करूंगी। इस क्षेत्र में लड़कियों की भागीदारी और बढ़नी चाहिए। डर पर जीत, सपनों को मिली उड़ान छात्रा सादिया ने बताया कि एयर शो ने उसके सपने को और मजबूत बना दिया है। पहले मुझे ऊंचाई से डर लगता था लेकिन आज का शो देखने के बाद मेरा डर खत्म हो गया। अब देश सेवा के अपने लक्ष्य को जरूर पूरा करूंगी। वर्दी पहनने का सपना और मजबूत हुआ भारती ने कहा कि वह भारतीय सेना में जाकर आगे चलकर कर्नल बनना चाहती है। अगर मौका मिला तो वायुसेना में जरूर जाऊंगी। इस एयर शो ने मुझे पायलट बनने के लिए प्रेरित किया है।

मध्य प्रदेश में महावीर जयंती पर छुट्‌टी पर मंथन, विधायकों ने 30 मार्च को अवकाश की मांग की

भोपाल  मध्यप्रदेश में महावीर जयंती की सरकारी छुट्‌टी की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 31 मार्च के बजाय 30 मार्च को शासकीय अवकाश घोषित करने की मांग की है। वहीं, सरकार के पास ऐसे सुझाव भी पहुंचे हैं जिनमें अवकाश की तारीख 31 मार्च ही बनाए रखने की बात कही गई है। इसी को लेकर सरकार स्तर पर विचार-मंथन जारी है।मुख्य सचिव कार्यालय ने इस संबंध में विभिन्न विभागों और पक्षों से राय लेना शुरू कर दिया है। अंतिम निर्णय राज्य सरकार द्वारा जल्द लिया जा सकता है।  जैन परंपराओं के अनुसार 30 मार्च को जन्म कल्याणक  पृथ्वीपुर विधायक नितेंद्र बृजेंद्र सिंह राठौर ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि जैन धर्म की धार्मिक परंपराओं और पंचांग के अनुसार भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक इस वर्ष 30 मार्च को मनाया जा रहा है। ऐसे में 31 मार्च को घोषित अवकाश को संशोधित कर 30 मार्च किया जाना चाहिए। विधायक ने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी मध्य प्रदेश राजपत्र (असाधारण) में 31 मार्च को अवकाश दर्शाया गया है, जिसे जनभावनाओं को देखते हुए बदला जाना जरूरी है।  हाईकोर्ट की अधिसूचना का भी दिया हवाला  पत्र में यह तर्क भी दिया गया है कि जबलपुर हाईकोर्ट ने भी अपनी अधिसूचना में आंशिक संशोधन करते हुए 30 मार्च को ही अवकाश घोषित किया है। विधायक ने पूर्व में होली पर्व के दौरान शासन द्वारा की गई तारीख़ में बदलाव की मिसाल देते हुए सरकार से सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लेने का अनुरोध किया है।  भाजपा विधायक ने भी उठाई मांग  बंडा (सागर) से भाजपा विधायक वीरेंद्र सिंह लंबरदार ने भी शासन को पत्र लिखकर 31 मार्च 2026 के स्थान पर 30 मार्च 2026 को शासकीय अवकाश घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि देशभर में जैन समाज 30 मार्च को ही भगवान महावीर का जन्म कल्याणक मना रहा है, ऐसे में 31 मार्च को अवकाश का कोई औचित्य नहीं बनता। विधायक ने इसे “आंशिक संशोधन” की श्रेणी में रखते हुए जनभावनाओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप निर्णय लेने की अपील की है।  

पंजाब में बाढ़ के बाद पर्यावरण में बदलाव, वेटलैंड्स में पक्षियों की संख्या घटी, प्रजातियां बढ़ीं

 चंडीगढ़ पंजाब के वेटलैंड्स से इस बार मिले आंकड़े मिश्रित तस्वीर पेश कर रहे हैं। जहां प्रवासी पक्षियों की कुल संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं प्रजातियों (स्पीशीज) की विविधता बढ़ना पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव का संकेत दे रहा है। जनवरी 2026 में हुए बर्ड सेंसस के अनुसार, 2025 में 77,772 पक्षी दर्ज किए गए थे, जो 2026 में घटकर 71,129 रह गए। वहीं प्रजातियों की संख्या 270 से बढ़कर 304 हो गई। यह सेंसस हरिके वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, नंगल वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, केशोपुर वेटलैंड्स, रंजीत सागर वेटलैंड्स, रोपड़ वेटलैंड्स और कंजली वेटलैंड्स में एशियन वाटरबर्ड सेंसस प्रोटोकॉल के तहत किया गया। सर्वे के दौरान प्रजाति-वार गिनती, फ्लॉक (झुंड) साइज, हैबिटैट उपयोग और डिस्टर्बेंस फैक्टर्स का भी आकलन किया गया। राज्य के सबसे बड़े हरिके वेटलैंड में पक्षियों की संख्या 57,251 से घटकर 52,707 हो गई, लेकिन प्रजातियों की संख्या 80 से बढ़कर 87 दर्ज की गई। केशोपुर वेटलैंड में भी पक्षियों की संख्या 13,675 से घटकर 10,450 रह गई, जबकि प्रजातियां 75 से बढ़कर 78 हो गईं। रोपड़ वेटलैंड में पक्षियों की संख्या में हुआ इजाफा वहीं रोपड़ वेटलैंड में पक्षियों की संख्या 1,486 से बढ़कर 2,313 और प्रजातियां 44 से 46 हो गईं। नंगल वेटलैंड में भी संख्या 2,411 से बढ़कर 3,189 और प्रजातियां 36 से बढ़कर 44 दर्ज की गईं। कंजली वेटलैंड में भी सकारात्मक रुझान रहा, जहां पक्षियों की संख्या 440 से बढ़कर 623 और प्रजातियां 23 से बढ़कर 29 हो गईं। रंजीत सागर वेटलैंड में पक्षियों की संख्या 2,500 से घटकर 1,867 हो गई, हालांकि प्रजातियों की संख्या 20 से बढ़कर 21 हो गई। मुख्य वन्यजीव संरक्षक बसंता राजकुमार के अनुसार, पिछले वर्ष आई भीषण बाढ़ का असर वेटलैंड्स पर पड़ा, जिससे हरिके, केशोपुर और रंजीत सागर जैसे क्षेत्र अधिक प्रभावित हुए। इसके विपरीत रोपड़, नंगल और कंजली अपेक्षाकृत कम प्रभावित रहे, जिससे वहां पक्षियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। नई प्रजातियों के आने से मिले सकारात्मक संकेत इसके बावजूद कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। केशोपुर में 441 कामन क्रेन (सारस) का बड़ा फ्लॉक दर्ज किया गया, जो पंजाब में सीमित क्षेत्र में ही पाया जाता है। नंगल में 11 ब्लैक-नेक्ड ग्रीब्स का देखा जाना भी खास माना जा रहा है, क्योंकि यह प्रजाति उत्तर-पश्चिम भारत में कम ही रिपोर्ट होती है। पंजाब के वेटलैंड्स वैश्विक स्तर पर भी अहम हैं। हरिके, रोपड़, कंजली, केशोपुर और नंगल को रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। राज्य में 7 प्रतिशत से कम फॉरेस्ट और वाइल्डलाइफ कवर होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड्स की संख्या के मामले में पंजाब देश में तीसरे स्थान पर है। जानें: कैसे हुआ बर्ड सेंसस 2026     जनवरी 2026 में एशियन वाटरबर्ड सेंसस प्रोटोकॉल के तहत सर्वे     वेटलैंड्स को अलग-अलग सर्वे ब्लॉक्स में बांटा गया     डबल काउंटिंग से बचने के लिए वैज्ञानिक तरीका अपनाया गया     स्पीशीज-वार गिनती, फ्लॉक साइज, हैबिटैट उपयोग और डिस्टर्बेंस का आकलन     पंजाब फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस), वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर), डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू), गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) और पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) की भागीदारी प्रमुख वेटलैंड्स का प्रदर्शन     हरिके: संख्या घटी, स्पीशीज बढ़ीं     केशोपुर: संख्या में गिरावट, स्पीशीज में इजाफा     रोपड़: संख्या और स्पीशीज दोनों बढ़ीं     नंगल: दोनों में मजबूत सुधार     कंजली: सकारात्मक ट्रेंड     रंजीत सागर: संख्या घटी, स्पीशीज में हल्की बढ़ोतरी जानें इस स्थ्डी से क्या अहम संकेत मिले     कुल बर्ड काउंट घटा, लेकिन स्पीशीज डाइवर्सिटी बढ़ी     बाढ़ का असर कई वेटलैंड्स पर साफ दिखा     कुछ वेटलैंड्स में इकोलॉजिकल बैलेंस बेहतर हुआ     रेयर स्पीशीज की मौजूदगी उम्मीद बढ़ाने वाली  

CM साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कमिश्नर, आईजी और कलेक्टरों के साथ की बड़ी बैठक

पेट्रोलियम पदार्थों और गैस सिलेंडरों की उपलब्धता पर ले रहे हैं जानकारी पेट्रोलियम पदार्थों और गैस की पर्याप्त उपलब्धता, अफवाहों पर न दें ध्यान परिस्थिति का फायदा लेकर आवश्यक वस्तु की कालाबाजारी करने वालों पर हो कड़ी करवाई रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी संभागीय आयुक्तों, आईजी, कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। यह बैठक मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में उपजी वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए बुलाई गई थी, ताकि राज्य में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित न हो। बता दें कि मुख्यमंत्री ने बैठक में रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल और खेती के लिए उर्वरकों की उपलब्धता की बारीकी से जांच की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन चीजों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाए ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। दरअसल, बैठक में भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग पर भी चर्चा की गई है। मैदानी सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट कहा है कि बाजार में सामानों की कमी को लेकर फैलने वाली किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक सूचना पर तुरंत एक्शन लिया जाए। मुख्यमंत्री ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यापारी या बिचौलिया जमाखोरी या कालाबाजारी के जरिए कृत्रिम संकट पैदा करने की कोशिश करता है, तो उस पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि इस महत्वपूर्ण बैठक में खाद्य, कृषि, परिवहन और ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तेल विपणन कंपनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। शासन की कोशिश है कि वैश्विक तनाव के बावजूद छत्तीसगढ़ के बाजारों में जरूरी सामानों की आपूर्ति और कीमतें सामान्य बनी रहें।  

पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर पूरे इलाके में 5000 पुलिसकर्मी तैनात

5 स्तरीय सुरक्षा घेरे में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हाईटेक निगरानी से चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर पूरे इलाके में 5000 पुलिसकर्मी तैनात  एंटी-ड्रोन, सीसीटीवी और इंटेलिजेंस नेटवर्क से कड़ी निगरानी 100 से अधिक प्रवेश द्वारों पर 200 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर स्थापित एंटी-सैबोटाज चेक, बम डिस्पोजल स्क्वाड, एंटी-माइंस चेकिंग और स्निफर डॉग्स की तैनाती नोएडा/जेवर नवनिर्मित जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह और प्रस्तावित जनसभा को लेकर पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति के मद्देनजर पूरे क्षेत्र को 5-स्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक, खुफिया समन्वय और व्यापक पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप यह पूरी व्यवस्था पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में संचालित की जा रही है।  5-स्तरीय सुरक्षा घेरा, एसपीजी के साथ समन्वय नोएडा के जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि कार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे क्षेत्र में मल्टी लेयर सिक्योरिटी आर्किटेक्चर के तहत 5 सुरक्षा रिंग बनाईं गईं। एसपीजी के साथ निरंतर समन्वय रखते हुए सभी एंट्री प्वाइंट्स पर सघन चेकिंग, बैगेज स्क्रीनिंग और पहचान सत्यापन किया जा रहा है। 100 से अधिक प्रवेश द्वारों पर 200 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए गए, जबकि महिलाओं के लिए अलग चेकिंग एन्क्लोजर की व्यवस्था की गई। 5000 से अधिक सुरक्षाकर्मी, कई एजेंसियों की तैनाती सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के करीब 5000 राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारियों की तैनाती की गई। इसके अलावा पीएसी, आरएएफ, एटीएस और सीआईएसएफ की संयुक्त तैनाती कर सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया। एयरपोर्ट परिसर और आसपास पहले से स्थापित पुलिस चौकियों पर भी अतिरिक्त बल तैनात किया गया। एंटी-ड्रोन, बीडीडीएस और स्निफर डॉग से निगरानी कार्यक्रम स्थल पर एंटी-सैबोटाज चेक, बीडीडीएस (बम डिस्पोजल स्क्वाड), एंटी-माइंस चेकिंग और स्निफर डॉग्स की तैनाती की गई। एंटी-ड्रोन टीमों द्वारा आसमान से निगरानी रखी गई, जबकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई के लिए क्विक रिएक्शन टीम्स को रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया। इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया पर कड़ी नजर आईबी और स्टेट इंटेलिजेंस यूनिट्स के साथ रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन स्थापित किया गया है। नोएडा के जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए अफवाहों और संभावित खतरों को लेकर नजर रखी गई, जिससे किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। सीसीटीवी कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क की व्यवस्था पूरे कार्यक्रम स्थल और एयरपोर्ट परिसर में सीसीटीवी निगरानी के लिए विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। साथ ही आमजन की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर पुलिस हेल्प डेस्क भी बनाए गए हैं, जिससे लोगों को त्वरित सहायता मिल सके। आपदा प्रबंधन और चिकित्सा सुविधाएं अलर्ट मोड पर आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। फायर ब्रिगेड और फायर टेंडर स्टैंडबाय पर रहे, जबकि मेडिकल डेस्क, एम्बुलेंस और विशेष एम्बुलेंस कॉरिडोर की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। यही नहीं, एवैक्यूएशन रूट और असेंबली प्वाइंट पहले से तय कर मॉक ड्रिल भी कराई गई है।  ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग का विशेष प्लान यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग के साथ विस्तृत डायवर्जन प्लान लागू किया गया। करीब 15 निर्धारित पार्किंग स्थलों पर 20,000 से अधिक वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है।  हाईटेक कम्युनिकेशन और कंट्रोल सिस्टम सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए डेडिकेटेड वायरलेस नेटवर्क और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल डैशबोर्ड के जरिए सभी व्यवस्थाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की गई। नदी क्षेत्र में भी सुरक्षा, ड्रोन पर प्रतिबंध यमुना नदी के नजदीक होने के कारण उस क्षेत्र में भी पेट्रोलिंग की भी विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही कार्यक्रम क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन घोषित कर एंटी-ड्रोन सिस्टम सक्रिय रखा गया।

अब गांव में ही सुलझेंगे जमीन विवाद: पटवारी आपके द्वार पहुंचेंगे

जिले में राजस्व पखवाड़ा का मेगा प्लान जारी अब गांव में ही होगा जमीन विवादों का हलः पटवारी पहुंचेंगे आपके द्वार मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में राजस्व संबंधी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए प्रशासन ने एक बड़ा और प्रभावी कदम उठाया है। “राजस्व पखवाड़ा” के तहत विस्तृत ग्रामवार शेड्यूल जारी कर दिया गया है, जिससे अब ग्रामीणों को अपनी जमीन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इस अभियान के तहत तहसील मनेन्द्रगढ़ सहित जिले के 100 से अधिक गांवों में शिविर लगाए जाएंगे, जहां पटवारी और राजस्व अमला मौके पर ही समस्याओं का समाधान करेंगे। तीन चरणों में चलेगा अभियान राजस्व पखवाड़ा को तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा: 01 से 15 अप्रैल 2026 04 से 18 मई 2026 01 से 15 जून 2026 प्रत्येक गांव के लिए अलग-अलग तिथियां तय की गई हैं, ताकि अधिकतम ग्रामीणों को लाभ मिल सके। सैकड़ों गांवों में पहुंचेगा प्रशासन घोषित कार्यक्रम के अनुसार मनेन्द्रगढ़ तहसील के उजियारपुर, बरबसपुर, राधारमणनगर, सोनवर्षा, नवापारा, महाराजपुर, अमृतधारा, चैनपुर, परसगढ़ी, पिपरिया, लालपुर, शंकरगढ़, खोंगापानी, मनेन्द्रगढ़ सहित कई गांवों में शिविर आयोजित होंगे। जिलेभर में यह अभियान व्यापक स्तर पर संचालित होगा: भरतपुर तहसील: 108 ग्राम केल्हारी तहसील: 74 ग्राम कोटाडोल तहसील: 75 ग्राम चिरमिरी तहसील: 16 ग्राम खड़गवां तहसील: 44 ग्राम _कुल मिलाकर 376 ग्राम पंचायतों में शिविर लगाए जाएंगे। _मौके पर होगा हर समस्या का समाधान। इस विशेष अभियान में निम्न राजस्व मामलों का प्राथमिकता से निराकरण किया जाएगा: _नामांतरण (Mutation) _बंटवारा _सीमांकन _भू-अभिलेख सुधार _ऋण पुस्तिका _फौती नामांतरण साथ ही ग्रामीणों को उनके अधिकारों और राजस्व प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक भी किया जाएगा। पटवारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी कलेक्टर के निर्देशन में तैयार इस मेगा प्लान के तहत जिले के कई पटवारियों और राजस्व अधिकारियों को ग्रामवार जिम्मेदारी दी गई है, जो तय तिथियों पर गांवों में पहुंचकर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करेंगे। प्रशासन की अपील जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने-अपने गांव में निर्धारित तिथि पर आयोजित शिविर में पहुंचकर इस जनहितकारी अभियान का अधिकतम लाभ उठाएं। लक्ष्य साफ है “समस्या का समाधान गांव में ही” और ग्रामीणों को राहत देना।

पश्चिम एशिया की स्थिति पर CM साय की आज समीक्षा बैठक, जरूरी वस्तुओं और कानून-व्यवस्था पर होगा चर्चा

CM साय आज लेंगे उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक: पश्चिम एशिया की स्थिति के मद्देनज़र आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और कानून-व्यवस्था पर रहेगा फोकस रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज 28 मार्च को प्रातः 11:00 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी संभागीय आयुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, पुलिस आयुक्त रायपुर, सभी कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेंगे। यह बैठक वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखते हुए आयोजित की जा रही है, ताकि राज्य में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था सुचारु रूप से बनी रहे और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बैठक में रसोई गैस (LPG), पेट्रोल, डीजल एवं उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग और संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी, ताकि दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री साय कानून-व्यवस्था की स्थिति की भी समीक्षा करेंगे और अफवाहों एवं भ्रामक सूचनाओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश देंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसी भी प्रकार की जमाखोरी, कालाबाजारी या कृत्रिम संकट उत्पन्न करने की कोशिशों पर तत्काल प्रभाव से कड़ी कार्रवाई की जाए। बैठक में खाद्य, उद्योग, कृषि, खनिज, परिवहन, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) एवं ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

उत्तर भारत के लिए यूपी लाएगा नई उड़ान, पीएम मोदी करेंगे नोएडा एयरपोर्ट के फेज-1 का उद्घाटन

पीएम मोदी करेंगे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फेज-1 का लोकार्पण, उत्तर भारत को नई उड़ान देगा यूपी कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन और मेंटिनेंस, रिपेयर व ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा का शिलान्यास भी करेंगे प्रधानमंत्री मोदी जेवर बनेगा देश का एविएशन हब, यूपी होगा 5 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाला पहला राज्य यूपी, एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को मिलेगा बूस्ट रोजगार, निर्यात और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, अधिक सुगम होगा हवाई यातायात जेवर/लखनऊ  देश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण लोकार्पण के लिए तैयार है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके फेज-1 का लोकार्पण करने के साथ ही एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल का भी उद्घाटन करेंगे और मेंटिनेंस, रिपेयर एवं ओवरहालिंग (एमआरओ) सुविधा का शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे, जिनके नेतृत्व व मार्गदर्शन में यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ी है। यह परियोजना न केवल यूपी, एनसीआर बल्कि पूरे उत्तर भारत की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाली साबित होगी। प्रदेश का पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भारत सरकार से मई 2018 में सैद्धान्तिक मंजूरी मिली थी। यह परियोजना चार चरणों में विकसित की जा रही है, जिस पर कुल 29,560 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। एयरपोर्ट को आधुनिक, डिजिटल और ऊर्जा दक्ष तकनीकों के साथ विकसित किया जा रहा है। पीएम मोदी द्वारा जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन किए जाने के साथ ही उत्तर प्रदेश 5 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी क्षमता फेज-1 में एयरपोर्ट के विकास में कंसेशनायर द्वारा 6,876 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने भूमि अधिग्रहण पर 4,406 करोड़ रुपये व्यय किए हैं। इस तरह फेज-1 की कुल लागत लगभग 11,282 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें 12 मिलियन (1.2 करोड़) पैसेंजर प्रति वर्ष की प्रारंभिक क्षमता विकसित की गई है। मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी से मिलेगा बड़ा फायदा यह एयरपोर्ट देश का एक अत्याधुनिक मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब होगा, जहां सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय ट्रांजिट सिस्टम का सहज एकीकरण किया गया है। इससे यात्रियों और कार्गो परिवहन दोनों के लिए समय और लागत में भारी कमी आएगी। कार्गो हब व एमआरओ से मिलेगा इंडस्ट्री को बूस्ट प्रधानमंत्री मोदी एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन और एमआरओ सुविधा का भी शिलान्यास करेंगे। एयरपोर्ट पर विकसित मल्टी-मोडल कार्गो हब की शुरुआती क्षमता 2.5 लाख मीट्रिक टन सालाना होगी, जिसे बढ़ाकर 18 लाख मीट्रिक टन तक किया जा सकेगा। साथ ही, 40 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली एमआरओ सुविधा से विमानों का मेंटिनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग देश में ही संभव होगी। इससे एविएशन सेक्टर में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। औद्योगिक व सर्विस सेक्टर का बनेगा नया केंद्र यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित हो रहा यह एयरपोर्ट आसपास के औद्योगिक सेक्टरों को नई गति देगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन से रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी, विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, हवाई यातायात अधिक सुगम होगा और पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलेगी। इस तरह यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ताकत देने वाला साबित होगा। इस अवसर पर भारत सरकार के नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत अन्य मंत्री एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित होंगे।