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जिलों की मांग पर सरकार का फैसला, राशन वितरण की डेडलाइन बढ़ी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के राशन कार्डधारकों के लिए राहत की खबर है। योगी सरकार ने जून माह के राशन वितरण की डेट बढ़ाते हुए अब 15 जून तक राशन वितरण कराने का फैसला किया है। पहले राशन वितरण 10 जून तक पूरा किया जाना था। दरअसल,कुछ जिलों के जिलाधिकारियों ने शासन को पत्र भेजकर निर्धारित समय सीमा के भीतर राशन वितरण पूरा करने में असमर्थता जताई थी। इसके बाद स्थिति की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव एवं खाद्य आयुक्त रणवीर प्रसाद ने राशन वितरण की अंतिम डेट बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। खाद्य एवं रसद विभाग के निर्देशों के अनुसार, उत्तर प्रदेशकी सभी कोटे की दुकानों पर अब 15 जून तक पात्र लाभार्थियों को राशन वितरित किया जाएगा। इससे उन कार्डधारकों को भी राहत मिलेगी जो किसी कारणवश अब तक राशन नहीं ले सके हैं। जून माह के राशन का वितरण 25 मई से शुरू हो गया था। राशन 10 जून तक वितरित किया जाना था। वितरण सुबह छह बजे से शुरू होकर रात नौ बजे तक चलेगा अब डेट बढ़ने से 15 जून तक राशन का वितरण सुबह छह बजे से शुरू होकर रात नौ बजे तक चलेगा। इस दौरान अंत्योदय कार्डधारकों को 14 किलो गेहूं व 21 किलो चावल (कुल 35 किलो) नि:शुल्क राशन मिलेगा। जबकि पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट दो किलो गेहूं व तीन किलो चावल मिलेगा। शिकायत टोल फ्री नम्बर 1967 व 1800-1800-150 पर कर सकते हैं कार्डधारक नि:शुल्क राशन वितरण से संबंधित शिकायत टोल फ्री नम्बर 1967 व 1800-1800-150 पर कर सकते हैं। जांच के बाद शिकायत सही पाये जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही हर राशन की दुकान पर पोर्टेबिलिटी की सुविधा उपलब्ध रहेगी। यानी कहीं का भी कार्डधारक किसी भी कोटे के दुकान से राशन ले सकेंगे। लाभार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न होने दी जाए आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में लगभग 3.64 करोड़ राशन कार्ड धारक हैं, जिनके माध्यम से करीब 14.62 करोड़ लाभार्थियों को हर महीने राशन उपलब्ध कराया जाता है। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी पात्र व्यक्ति खाद्यान्न से वंचित न रहे और सभी लाभार्थियों तक समय पर राशन पहुंचे। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि राशन वितरण प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित किया जाए और लाभार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न होने दी जाए। राशन कार्ड धारक निर्धारित अवधि के भीतर अपनी नजदीकी उचित दर की दुकान से खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग तथा वाधवानी फाउंडेशन की अनुषांगिक संस्था स्किल्स डेवलपमेंट नेटवर्क (एसडीएन) के मध्य रोज़गारपरक शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार प्राप्ति के लिए हुआ एमओयू

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रथम चरण में सहकारी गन्ना समितियों के सहयोग से संचालित इंटर कालेजों एवं महाविद्यालयों के जर्जर भवनों को ठीक कराया गया। यहां अतिरिक्त शैक्षणिक कक्षों का निर्माण भी कराया जा रहा है। इन कॉलेजों में दी जा रही शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के उ‌द्देश्य से चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने युवाओं को कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग ने वाधवानी फाउंडेशन के "स्किल्स डेवलपमेंट नेटवर्क (एसडीएन) के साथ एमओयू किया है। इसका उद्देश्य सहकारी गन्ना समितियों के सहयोग से संचालित शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक कौशल प्रदान करना है, जिससे वे रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में सफलतापूर्वक आगे बढ़ सकें। 75 से 90 घंटे का दिया जाएगा विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. ने बताया कि प्रदेश में सहकारी गन्ना समितियों द्वारा संचालित 09 इंटर कॉलेजों/महाविद्यालयों में लगभग 15,440 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। वर्तमान परिदृश्य में उद्योगों की मांग के अनुरूप व्यावहारिक ज्ञान, संचार कौशल, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क, समस्या समाधान तथा कार्यस्थल के अनुरूप व्यवहार विकसित करना भी आवश्यक है। यह एमओयू इसे ध्यान में रखकर किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 3,500 विद्यार्थियों को 75 से 90 घंटे का विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के अंतर्गत बालिकाओं के समग्र विकास व कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्हें रोजगारोन्मुखी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।  प्रशिक्षण कार्यक्रम में "एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स कार्यक्रम" के अंतर्गत विद्यार्थियों को प्रभावी संचार कौशल, साक्षात्कार की तैयारी, शैक्षणिक लेखन, व्यक्तित्व विकास, प्रस्तुतिकरण, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता, व्यावसायिक नैतिकता, नेतृत्व क्षमता तथा कार्यस्थल पर अपेक्षित व्यवहार संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।  शिक्षकों व विद्यार्थियों को निःशुल्क उपलब्ध होगी शिक्षण सामग्री फाउंडेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष सुनील दहिया ने बताया कि एआई (ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर आधारित अत्याधुनिक लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) डिजिटल कंटेंट एवं इंटरएक्टिव शिक्षण सामग्री सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को निःशुल्क उपलब्ध करायी जायेगी। इस प्लेटफॉर्म पर डिजिटल कंटेंट, वीडियो लेक्चर, मूल्यांकन मॉड्यूल, अभ्यास सामग्री तथा इंटरैक्टिव शिक्षण संसाधन उपलब्ध रहेंगे। इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक "एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट प्रोग्राम" भी होगा, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों में उद्यमशीलता की भावना विकसित की जाएगी। कार्यक्रम के अंतर्गत युवाओं को नवाचार, स्टार्टअप, व्यवसाय प्रबंधन, जोखिम प्रबंधन, अवसरों की पहचान तथा स्वरोजगार के विभिन्न आयामों की जानकारी प्रदान की जाएगी।  राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ देंगे परामर्श समय-समय पर 'राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन कार्यशालाएं, मास्टरक्लास, करियर परामर्श सत्र भी होंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योग जगत की वर्तमान प्रवृत्तियों, रोजगार के अवसरों, नई तकनीकों एवं भविष्य की आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त होगी। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगार एवं इंटर्नशिप के अवसरों से जोड़ना भी है। कार्यक्रम की नियमित समीक्षा भी होगी।  उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 20 विद्यार्थियों को दिया जाएगा पारितोषिक  गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने बताया कि प्रतिभाशाली गरीब विद्यार्थियों के लिए गन्ना समितियों एवं चीनी मिलों के सहयोग से अध्ययन सामग्री-पुस्तकें व मोबाइल निःशुल्क उपलब्ध कराये जाने के साथ साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले टॉप 20 विद्यार्थियों को चीनी मिलों के सहयोग से पारितोषिक भी प्रदान किया जाएगा।  इस एमओयू पर वाधवानी फाउंडेशन की ओर से कार्यकारी उपाध्यक्ष सुनील दहिया एवं गन्ना आयुक्त की ओर से डॉ. वी.बी. सिंह, अपर गन्ना आयुक्त (समितियां) द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान अपर गन्ना आयुक्त (प्रशासन) अभिषेक आनंद, अपर गन्ना आयुक्त (विकास) वी.के. शुक्ल, अपर गन्ना आयुक्त (क्रय) विश्वेश कनौजिया आदि मौजूद रहे।

राज्यसभा सांसद डोला सेन की अध्यक्षता में निर्यातकों को वित्तीय सहायता, ऋण और बीमा सुविधाओं के विस्तार पर रायपुर में विचार-विमर्श

रायपुर राज्यसभा सांसद एवं वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्ष डोला सेन की अध्यक्षता में आज रायपुर के एक निजी होटल में समिति की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक 10 से 12 जून 2026 तक अहमदाबाद, रायपुर और भुवनेश्वर के अध्ययन दौरा कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। बैठक में ‘‘भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का मूल्यांकन’’ विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। समिति के सदस्यों द्वारा व्यापार, निवेश, निर्यात-आयात तथा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। अध्ययन दौरे का उद्देश्य संबंधित हितधारकों एवं अधिकारियों से जानकारी प्राप्त कर विषय पर व्यापक एवं तथ्याधारित रिपोर्ट तैयार करना है। बैठक के दौरान भारत से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के व्यापार एवं निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता, ऋण एवं बीमा सुविधाओं तथा इनके विस्तार हेतु उठाए गए उपायों पर विशेष चर्चा की गई। इस संबंध में पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया तथा नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) के प्रतिनिधियों ने समिति के समक्ष अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।  प्रतिनिधियों ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यातकों को उपलब्ध कराई जा रही वित्तीय सेवाओं, ऋण सुविधाओं, जोखिम प्रबंधन तंत्र तथा बीमा योजनाओं की जानकारी साझा की। समिति ने निर्यात संवर्धन, किसानों एवं उद्यमियों को वित्तीय सहायता की सुगमता तथा वैश्विक बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्य सांसद श्री अमरा राम, श्री बिश्वजीत सिन्हा, श्री रमेश अवस्थी, श्री अतुल गर्ग, श्री धनंजय भीमराव महाडिक, श्रीमती रेणुका चौधरी, श्रीमती रोजी सैलो दामोदरन, श्रीमती लामनेई सिंगसित, श्री दिलीप यादव, श्री सदानंद महालू शेट तानवड़े, श्रीमती अनीता शुभदर्शिनी, डॉ. शिवपाल सिंह पटेल, श्री आनंद भदौरिया, डॉ. प्रशांत यादवराव पडोले, डॉ. संगीता बलवंत, श्रीमती विजया एस. राजशेखर, श्री राजेन्द्र कुमार तथा श्री गिरधारी यादव उपस्थित थे। बैठक में समिति के सदस्यों ने विषय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए तथा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करने, वित्तीय एवं बीमा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने तथा भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की।

1098 और 181 हेल्पलाइन के इंटीग्रेशन के निर्देश, बाल संरक्षण होगा मजबूत

 जयपुर राज्य सरकार की मंशानुसार आमजन की शिकायतों के त्वरित, पारदर्शी और संवेदनशीलता के साथ निवारण के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को बाल अधिकारिता विभाग के आयुक्त श्री निकया गोहाएन ने राजस्थान संपर्क (181) हेल्पलाइन केंद्र का  निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभाग से संबंधित तथा फलोदी जिले के प्रभारी सचिव के रूप में जिले से संबंधित दर्ज प्रकरणों, उनके निस्तारण की स्थिति और आमजन को मिल रहे फीडबैक का गहनता से विश्लेषण किया।   तकनीकी सुदृढ़ीकरण- 1098 और 181 हेल्पलाइन का होगा इंटीग्रेशन आयुक्त श्री निकया गोहाएन ने हेल्पलाइन केंद्र पर कॉल टेकर और शिकायत निवारण प्रक्रिया को देखते हुए कहा कि बाल अधिकारों के संरक्षण और बच्चों से जुड़ी आपातकालीन सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन '1098' तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन '181' को आपस में एकीकृत किया जाए। इस एकीकरण से बाल संरक्षण से जुड़े संवेदनशील मामलों में बिना किसी तकनीकी विलंब के तुरंत सहायता पहुंचाई जा सकेगी और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। श्री गोहाएन ने फलोदी जिले के प्रभारी सचिव होने के नाते अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए, फलोदी क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न विभागों की जन-शिकायतों को भी सुना और उनकी लाइव मॉनिटरिंग की। उन्होंने फलोदी क्षेत्र के नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गई समस्याओं की त्वरित समीक्षा की, जिनमें जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड से जुड़े नयापुरा फलोदी में पिछले 3 दिनों से खराब पड़ी स्ट्रीट लाइट को तुरंत ठीक करने, तथा उदय नगर व अन्य ग्राम पंचायतों में जर्जर व टूटे हुए 11KV और एलटी विद्युत पोलों को तत्काल बदलकर संभावित जनहानि को रोकने के निर्देश दिए गए। ठीक इसी प्रकार अन्य विभागों से संबंधित जन शिकायतों को सुना तथा समस्या निवारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार आमजन की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए सभी विभागों के सचिव निर्धारित तिथियों पर राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम में उपस्थित होकर परिवादियों से सीधे संवाद कर रहे हैं। इस पहल के माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर शीघ्र समाधान प्राप्त कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं आईटी विंग के तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

पीवीवीएनएल, डीवीवीएनएल, पीयूवीवीएनएल और केस्को में शिकायतों का शत-प्रतिशत समाधान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेशवासियों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। एक ओर जहां तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है और बिजली की मांग में भारी वृद्धि दर्ज की जा रही है, वहीं दूसरी ओर उप्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निस्तारण में भी नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। मई में प्राप्त कुल शिकायतों में से 99.24 प्रतिशत शिकायतों का सफल समाधान कर विभाग ने अपनी कार्यकुशलता और जवाबदेही का परिचय दिया है। 99.24 प्रतिशत शिकायतों का निस्तारण हुआ आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में प्रदेश भर से कुल 1855713 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 1841683 शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण कर दिया गया। शिकायतों के निस्तारण की दर 99.24 प्रतिशत रही, जो उपभोक्ता सेवा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सतत मॉनिटरिंग और ऊर्जा विभाग की सक्रिय कार्यशैली के चलते उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। एमवीवीएनएल में 6 लाख 30 हजार से ज्यादा शिकायतों का हुआ निस्तारण प्रदेश के सभी डिस्कॉम पर प्राप्त शिकायतों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) में 404173 शिकायतें दर्ज की गईं, जबकि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) में 359501 शिकायतें प्राप्त हुईं। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एमवीवीएनएल) में 633102 शिकायतें, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीयूवीवीएनएल) में 338104 शिकायतें और कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (केस्को) में 1,20,833 शिकायतें दर्ज हुईं। इन सभी डिस्कॉम पर आने वाली लगभग सभी शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। शिकायतों का सफल समाधान हुआ जिसमें बिजली आपूर्ति से संबंधित शिकायतें सबसे अधिक रही है। इसके अलावा बिल भुगतान, बिल संशोधन, स्मार्ट मीटर, मीटर संबंधी समस्याएं, सेवा संबंधी शिकायतें तथा कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें भी बड़ी संख्या में प्राप्त हुईं। हालांकि विभागीय टीमों ने इन सभी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकतर मामलों का सफल समाधान किया है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में बिजली सप्लाई से संबंधित सबसे अधिक 4 लाख 80 हजार से ज्यादा शिकायतें प्राप्त हुईं। इन शिकायतों पर लगातार निगरानी रखी गई और लगभग सभी मामलों का निस्तारण कर दिया गया।  पीयूवीवीएनएल की सभी शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण इसी प्रकार पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में 2 लाख 97 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं, जिनका शत-प्रतिशत निस्तारण किया गया। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में 2 लाख 52 हजार से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं और सभी शिकायतों का समाधान सुनिश्चित किया गया। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में 2 लाख 13 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं, जिनका भी 100 प्रतिशत निस्तारण किया गया। वहीं केस्को क्षेत्र में 94,944 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिन पर प्रभावी कार्रवाई करते हुए सभी शिकायतों का समाधान किया गया है। अब उपभोक्ता ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं शिकायत यूपीपीसीएल ने डिजिटल सेवाओं के विस्तार के माध्यम से भी उपभोक्ताओं को बड़ी सुविधा प्रदान की है। अब उपभोक्ता न केवल अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं, बल्कि उसकी स्थिति की जानकारी भी घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं। 1912 शिकायत प्रबंधन प्रणाली और ऑनलाइन ट्रैकिंग सुविधा के माध्यम से शिकायतों की निगरानी पहले की तुलना में अधिक आसान और पारदर्शी हो गई है। उपभोक्ता वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जाकर अपनी शिकायत की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं उप्र. पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल 1912 पर आने वाली शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के लिए लगातार निर्देशित करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि 1912 पर आने वाली शिकायतों को तब तक समाप्त न माना जाए, जब तक उपभोक्ता संतुष्ट न हो।

सेज करियर डे-2026 में 4500 से अधिक चयनित विद्यार्थियों की उपलब्धियों का हुआ सम्मान

भोपाल : गुरूवार, जून 11, 2026, 20:17 IST उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि शिक्षा केवल विषयविद बनाने का साधन नहीं, बल्कि श्रेष्ठ नागरिक निर्माण का सबसे प्रभावी उपक्रम है। शिक्षित और संस्कारित युवा ही विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। मंत्री  परमार भोपाल स्थित सेज यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित "सेज करियर डे-2026" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में वर्ष 2024 से 2026 के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठित कंपनियों में चयनित 4 हजार 500 से अधिक विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव मनाया गया तथा चयनित विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। मंत्री  परमार ने कहा कि सेज यूनिवर्सिटी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ आगे बढ़ें तथा अपनी प्रतिभा का उपयोग देश और समाज के विकास में करें। मंत्री  परमार ने सभी विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। मंत्री  परमार ने युवाओं से कहा कि" आपने अभी अपने पंख फैलाए हैं, आपकी उड़ान अभी बाकी है। जीवन की प्रत्येक चुनौती आपको और अधिक सशक्त बनाती है।" उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। सेज ग्रुप के डायरेक्टर जनरल डॉ. सर्वेश शुक्ला ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रख्यात प्रबंधन गुरु एवं कॉलमिस्ट  एन. रघुरामन ने विद्यार्थियों को सफलता के लिए प्रतिबद्धता, मानवीय मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी। सेज ग्रुप की कार्यकारी निदेशक आर्किटेक्ट शिवानी अग्रवाल ने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, कौशल विकास और समय प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रदेशवासियों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की अपील

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समस्त प्रदेशवासियों से ऑनलाइन योग सत्र में शामिल होने की अपील की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसने आज सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का मार्ग दिखाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक वैश्विक जनआंदोलन के रूप में स्थापित हुआ है। आज अनेक राष्ट्र योग के महत्व को स्वीकार और अंगीकार कर चुके हैं। योग दिवस 21 जून पर अनेक आयोजनों के साथ ही 14 जून को विशेष ऑनलाइन सत्र आयोजित किया जा रहा है। बीस मिनिट के इस ऑनलाइन सत्र में कोई भी नागरिक हिस्सा ले सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : 2026 के सातवें काउन्ट डाउन के अवसर पर आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने 14 जून, 2026 को प्रातः 06:15 बजे से 07:35 बजे तक एक विशेष ऑनलाइन योग सत्र के आयोजन का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को योग से जोड़ते हुए स्वस्थ, जागरूक एवं निरोग समाज का निर्माण करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठजनों, विद्यार्थियों, शासकीय सेवकों एवं सामाजिक संगठनों से आग्रह किया है कि वे इस ऑनलाइन योग सत्र में अधिकाधिक संख्या में सहभागी बनें और योग को अपनी दैनिक जीवन शैली का अभिन्न अंग बनाएं। टोल फ्री नंबर सुविधा कार्यक्रम से जुड़ने के लिए टोल-फ्री नम्बर 1800-315-7008 पर मिस्ड कॉल देकर पंजीयन किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से की गई अपील में कहा है कि आइए, हम सभी मिलकर "घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग" के संकल्प के साथ अब हर घर योग को गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाने में सहभागी बनें और स्वस्थ मध्यप्रदेश और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर उत्तर प्रदेश में भी होगा भव्य आयोजन

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर शुक्रवार को भव्य आयोजन होगा। योगी सरकार पूरे प्रदेश में विश्वास, विकास व जनकल्याण के गौरवपूर्ण 12 वर्ष की उपलब्धि को धूमधाम से मनाएगी। मुख्यमंत्री सुबह लखनऊ व शाम को वाराणसी में होने वाले भव्य समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। वहीं लोकभवन में होने वाले कार्यक्रम में राजग सरकार के सहयोगी दलों (अपना दल एस, सुभासपा, राष्ट्रीय लोकदल व निषाद पार्टी) के प्रमुख/मंत्री भी मौजूद रहेंगे।  पीएम मोदी के सुशासन के 12 वर्ष की उपलब्धियों को बताएगी योगी सरकार सुशासन को समर्पित पीएम मोदी के द्वारा 140 करोड़ भारतीयों की निरंतर सेवा के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकभवन में मीडिया संवाद करेंगे। मोदी सरकार के नेतृत्व में जनकल्याण, अवस्थापना एवं आस्था को मिले सम्मान के विषय में संपूर्ण जानकारी भी देंगे। मोदी सरकार के 12 वर्षों की विकास यात्रा को लेकर यहां प्रदर्शनी भी लगेगी। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।  सरकार के साथ ही भाजपा संगठन व सहयोगी दल के नेता भी रहेंगे मौजूद   भव्य समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संगठन की तरफ से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष/केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी भी रहेंगे। साथ ही उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के मंत्री व सहयोगी दल अपना दल (एस) के आशीष पटेल, निषाद पार्टी के डॉ. संजय निषाद, सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर व राष्ट्रीय लोकदल के अनिल कुमार भी रहेंगे।  इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाएंगे सीएम योगी लोकभवन में मुख्य कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अपने सरकारी आवास से इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। सीएम योगी नोएडा में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की 110 में से 45 इलेक्ट्रिक बसों (प्रथम चरण) का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फ्लैग ऑफ करेंगे। साथ ही नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी शुभारंभ करेंगे। यहां कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता ‘नंदी’ व परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी मौजूद रहेंगे।  शाम को वाराणसी में होने वाले कार्यक्रम में पहुंचेंगे मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार शाम को बाबा विश्वनाथ की नगरी व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी पहुंचेंगे। वे यहां गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल चौकाघाट में होने वाले कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। मुख्यमंत्री यहां शहरी आजीविका मिशन, उद्योग विभाग समेत विभिन्न विभागों की योजना के लाभार्थियों को भी सम्मानित करेंगे। यहां एक जनपद-एक व्यंजन समेत अनेक विभागों के स्टॉल भी लगेंगे।

सपा सरकार में ठहरे निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार को मुख्यमंत्री योगी ने दी रफ्तार

लखनऊ कभी निवेशकों की प्राथमिकता सूची में पीछे रहने वाला उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था में शामिल हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले 9 वर्षों में प्रदेश ने औद्योगिक विकास, निवेश, बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन के क्षेत्र में बड़े स्तर पर उपलब्धियां हासिल की हैं। केंद्र व राज्य सरकार के अभूतपूर्व तालमेल ने विकास की कई अहम पहलों के जरिए यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर किया है। सपा सरकार में उपेक्षित, योगी सरकार में रिकॉर्ड निवेश 2017 से पहले सपा सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश की गति लगभग ठहर सी गई थी। कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और निवेश-अनुकूल माहौल की कमी को निवेशकों की बड़ी चिंता माना जाता था, लेकिन 2017 के बाद स्थिति तेजी से बदली। पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों से लगभग 1.10 करोड़ रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के चार चरणों में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रोजेक्ट धरातल पर उतारे जा चुके हैं, जिनसे लगभग 60 लाख रोजगार अवसर पैदा हुए हैं। वहीं 7.5 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट के साथ 5वीं जीबीसी प्रस्तावित है। पिछली सपा सरकार के मुकाबले यह बदलाव दर्शाता है कि निवेशकों का विश्वास उत्तर प्रदेश में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुआ है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत जटिल प्रक्रियाओं के अनुपालन में कमी लाने के लिए यूपी को भारत में प्रथम स्थान मिला है। 65 विभागों में प्रक्रियागत 4,675 अनुपालन कम किए गए है। व्यापार में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 13 राज्य अधिनियमों में लगभग 99 प्रतिशत छोटे दंडात्मक प्रावधानों को हटाया गया है। एक्सप्रेसवे क्रांति से औद्योगिक विकास में तेजी उत्तर प्रदेश की औद्योगिक सफलता के पीछे सबसे बड़ा आधार मजबूत बुनियादी ढांचा है। 2017 तक प्रदेश में सीमित एक्सप्रेसवे नेटवर्क था, जिनकी संख्या महज दो थी। वहीं आज उत्तर प्रदेश 22 एक्सप्रेसवे वाले राज्य के रूप में विकसित हो रहा है। फिलहाल यूपी में 9 एक्सप्रेसवे संचालित, 3 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित हैं। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा है। एक्सप्रेसवे के किनारे 26 जिलों में 27 स्थानों पर 5,300 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित की गई है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीआईडीए) के माध्यम से 56,662 एकड़ क्षेत्र में नया औद्योगिक शहर विकसित किया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास का बड़ा केंद्र बनेगा। जल-थल-आकाश: हर तरफ खुले रास्ते वर्ष 2017 से पहले यूपी में केवल दो हवाई अड्डे (लखनऊ, वाराणसी) पूरी तरह और गोरखपुर हवाई अड्डा आंशिक रूप से क्रियाशील था। मोदी सरकार के मार्गदर्शन में योगी सरकार ने 9 वर्षों में इस क्षेत्र में तेजी से विकास किया। नतीजा यह कि प्रदेश में 17 हवाई अड्डे वर्तमान में चालू हैं और 7 अन्य हवाई अड्डों का विकास जारी है। नोएडा (जेवर) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन के साथ ही यूपी 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला पहला राज्य बन गया। माल ढुलाई के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के तहत पूर्वी फ्रेट कॉरिडोर का 1,050 किमी से अधिक हिस्सा यूपी से गुजरता है। पूर्वी और पश्चिमी डीएफसी का जंक्शन दादरी में स्थित है। भारत के 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से 11 यूपी में हैं। भारत का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल और फ्रेट विलेज (100 एकड़ से अधिक) वाराणसी में निर्माणाधीन है। एफडीआई, फैक्ट्रियों और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि औद्योगिक विकास का सबसे बड़ा संकेतक विदेशी निवेश, फैक्ट्रियों की संख्या और निर्यात होता है। इन तीनों क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। जून 2000 से मार्च 2017 तक प्रदेश में मात्र 3,303 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया था। जबकि अप्रैल 2017 से जून 2025 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 17,004 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। योगी सरकार के कुशल नेतृत्व में इसमें पांच गुना से अधिक वृद्धि हुई है। इसी तरह फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के तहत पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या सपा सरकार में 2016-17 में 14,169 थी, जो फरवरी 2026 तक बढ़कर 31,459 हो गई। यानी प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की संख्या दोगुने से अधिक हुई। निर्यात के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। 2016-17 में प्रदेश का कुल निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये था, जो फिलहाल दो लाख करोड़ से आगे निकल चुका है। आईटी और आईटीईएस निर्यात में और भी अधिक वृद्धि हुई है। यह 2015 के 15 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 82 हजार करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी 7 वर्षों में लगभग 1,058 प्रतिशत बढ़ा है। यह 3,862 करोड़ (2017-18) से बढ़कर 44,744 करोड़ (2024-25) हो चुका है। एमएसएमई व ओडीओपी बने गेमचेंजर योगी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में एक एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाना है। वर्तमान में प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में 3.11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। योजना के तहत 20,396 उद्यमियों को 903.63 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई, जिससे सवा तीन लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित हुए। कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए 8,435 लाभार्थियों को 80.48 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। इसके साथ ही 24 जिलों में 30 कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से सवा चार लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। प्लेज योजना के तहत 12 औद्योगिक पार्कों (10 से 50 एकड़) के विकास पर भी काम चल रहा है। रक्षा, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर में नई पहचान पहले उत्तर प्रदेश को मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य माना जाता था, लेकिन गुजरे 9 वर्षों में यूपी हाई-टेक उद्योगों का केंद्र बनकर उभरा है। रक्षा औद्योगिक गलियारे के 6 नोड झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और कानपुर विकसित किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में अब तक … Read more

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात संवर्धन हेतु राज्य सरकार की पहलों पर विशेष फोकस

रायपुर  राज्यसभा सांसद एवं वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्ष  डोला सेन की अध्यक्षता में आज रायपुर के एक निजी होटल में समिति की बैठक आयोजित की गई।  बैठक में ‘‘भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का मूल्यांकन’’ विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। समिति के सदस्यों द्वारा व्यापार, निवेश, निर्यात-आयात तथा दोनों देशों के मध्य आर्थिक सहयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। अध्ययन दौरे का उद्देश्य संबंधित हितधारकों एवं अधिकारियों से जानकारी प्राप्त कर विषय पर व्यापक एवं तथ्याधारित रिपोर्ट तैयार करना है। बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ‘‘भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का मूल्यांकन’’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में विशेष रूप से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों, उपलब्ध सहायता तंत्र, निर्यात प्रोत्साहन उपायों तथा इस क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। समिति ने कृषि आधारित उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, निर्यात संवर्धन तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में छत्तीसगढ़ के उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने से संबंधित विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने राज्य में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात संवर्धन, निवेश आकर्षित करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा व्यापारिक अवसरों के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत की। समिति ने इन पहलों की समीक्षा करते हुए निर्यात क्षमता के बेहतर उपयोग तथा वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के संबंध में भी चर्चा की। इस अवसर पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्य सांसद  अमरा राम,  बिश्वजीत सिन्हा,  रमेश अवस्थी,  अतुल गर्ग,  धनंजय भीमराव महाडिक, मती रेणुका चौधरी, मती रोजी सैलो दामोदरन, मती लामनेई सिंगसित,  दिलीप यादव,  सदानंद महालू शेट तानवड़े, मती अनीता शुभदर्शिनी, डॉ. शिवपाल सिंह पटेल,  आनंद भदौरिया, डॉ. प्रशांत यादवराव पडोले, डॉ. संगीता बलवंत, मती विजया एस. राजशेखर,  राजेन्द्र कुमार तथा  गिरधारी यादव उपस्थित थे। बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव  अंकित आनंद, छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीएसआईडीसी) के प्रबंध संचालक  विश्वेश झा, कृषि विभाग के संचालक  राहुल देव सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भी भाग लिया।