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जल संरक्षण को दिनचर्या का हिस्सा बनाने, जल संरचनाओं की रक्षा और जल के प्रति जिम्मेदार सोच अपनाने का मुख्यमंत्री ने किया आह्वान

मुख्यमंत्री  साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी. आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान के क्रियान्वयन की हुई गहन समीक्षा केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे कार्यों और नवाचारों की सराहना की 31 मई तक 10 लाख जल संरचनाओं का लक्ष्य, जल सुरक्षा को मिलेगा नया आधार डबरी निर्माण से बढ़ेगा भू-जल स्तर, किसानों को मिलेगा अतिरिक्त लाभ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री श्री पाटिल इस बैठक में वर्चुअली शामिल हुए और बैठक को संबोधित किया। इस दौरान बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर जिले के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में अभियान के अंतर्गत संचालित कार्यों और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जल संकट 21वीं सदी की केवल गंभीर पर्यावरणीय ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और विकासात्मक चुनौती भी बन चुका है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को स्थायी और प्रभावी बनाने के लिए जनभागीदारी अनिवार्य है।उन्होंने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें पानी के उपयोग को प्रसाद के समान मानते हुए जल के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में द्वितीय स्थान प्राप्त किया तथा विभिन्न जिलों को भी अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार मिले। पहले चरण में सामुदायिक भागीदारी के मॉडल पर कार्य करते हुए बड़े पैमाने पर बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का निर्माण किया गया। साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में इनमें से 5 ब्लॉकों में भू-जल निकासी में कमी और भू-जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है, जो जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणामों का संकेत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभियान के दूसरे चरण “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” के अंतर्गत तकनीक आधारित और अधिक परिणाममूलक रणनीति अपनाई जा रही है। राज्य सरकार ने 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने इसे जल सुरक्षा की दिशा में प्रदेश का ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर एक विशेष पहल के तहत 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख से अधिक किसानों को अपने खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस कार्य में जिला प्रशासन के साथ-साथ औद्योगिक समूहों का सहयोग भी लिया जा रहा है। इन डबरियों से भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ किसानों को सिंचाई एवं मछली पालन जैसी अतिरिक्त सुविधाएँ मिलेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे चरण में सभी जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायतों के वॉटर बजट तथा जल सुरक्षा योजनाओं के निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही गांवों के युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि अभियान को गति मिल सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों पर विशेष फोकस रखते हुए सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40 प्रतिशत तथा क्रिटिकल ब्लॉकों में 65 प्रतिशत जल संरक्षण कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने, जल संरचनाओं की रक्षा करने और जल के प्रति जिम्मेदार सोच अपनाने का आह्वान भी किया। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे कार्यों और नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गत वर्ष जल संरक्षण के प्रयासों में छत्तीसगढ़ देशभर में दूसरे स्थान पर रहा, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2024 को सूरत से ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ की शुरुआत की थी और ‘कर्मभूमि से मातृभूमि के लिए जल संचयन में सहयोग’ का आह्वान किया था। इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है। केंद्रीय मंत्री पाटिल ने प्रदेश के समस्त कलेक्टरों से मनरेगा के तहत जल संचय कार्यों के लिए प्राप्त राशि का पूर्ण और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने राजनांदगांव प्रवास के दौरान एक महिला सरपंच द्वारा स्वयं के प्रयासों से जल संचयन के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों की प्रशंसा की। इसके साथ ही उन्होंने जल संचय में व्यापक जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो तथा जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव कांताराव और छत्तीसगढ़ के समस्त कलेक्टर वर्चुअली उपस्थित थे।

हरियाणा में पशुओं की गैस एनेस्थीसिया और अल्ट्रासाउंड मशीन आएंगी

हिसार. हरियाणा के पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में पशुओं के पॉलिक्लिनिक एवं अस्पतालों के लिए आधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी ताकि पशुपालकों के पशुधन का सस्ते में ईलाज हो सके। उन्होंने बताया कि आज हाई पावर्ड परचेज कमेटी में गैस एनेस्थीसिया मशीन , अल्ट्रासाउंड मशीन, ब्लड टेस्ट उपकरण तथा “बायो सेफ्टी लैब्स लेवल – 2” स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। राणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में कमेटी के सदस्य हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा भी उपस्थित थे। इनके अलावा , पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया , महानिदेशक डॉ प्रेम सिंह , संयुक्त निदेशक डॉ सुखदेव राठी , आपूर्ति एवं निपटान विभाग के महानिदेशकपंकज , वित्त विभाग के विशेष सचिव डॉ जय इंद्र सिंह समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे। पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राणा ने बताया कि हाई पावर्ड परचेज कमेटी में प्रदेश में पशुओं के लाज के लिए स्थापित पॉलीक्लिनिकों हेतु गैस एनेस्थीसिया मशीन खरीदने की मंजूरी दी गई है। इससे डॉक्टरों को पशुओं की सर्जरी करने में सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि पशुओं के इलाज (सर्जरी) में गैस एनेस्थीसिया मशीन इंजेक्टेबल की तुलना में अधिक सुरक्षित है, जो सटीक खुराक, तेज़ रिकवरी और बेहतर नियंत्रण प्रदान करती है। यह ऑक्सीजन के साथ मिलकर काम करती है, जिससे पशुओं के हृदय और अन्य अंगों पर दबाव कम पड़ता है। यह प्रणाली दर्द प्रबंधन और छोटे-बड़े जानवरों के लिए अत्यंत विश्वसनीय है। उन्होंने आगे बताया कि हिसार , रायपुररानी तथा सोनीपत में “बायो सेफ्टी लैब्स लेवल – 2” स्थापित की जाएंगी। पशुओं में मध्यम जोखिम वाली बीमारियों की जांच के लिए उक्त लैब का उपयोग किया जाता है। यह लैब मानव/पशु स्वास्थ्य के लिए मध्यम-जोखिम वाले संक्रामक एजेंटों के परीक्षण के लिए होती है, इसमें विशेष पीपीई , बायोसेफ्टी कैबिनेट (BSC), और कीटाणुशोधन (Autoclave) की सुविधा होती है, जो श्वसन या त्वचा के संपर्क से संक्रमण रोकती है। उन्होंने बताया कि “बायो सेफ्टी लैब्स लेवल – 2” में पशुओं से इंसानों में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की जांच की जाती है ताकि इंसान बीमार पशुओं के सम्पर्क में आकर संक्रमित न हों और वे सुरक्षित रह सकें। राणा ने यह भी बताया कि पशुओं के ईलाज के लिए अल्ट्रासाउंड मशीने भी खरीदी जाएंगी। पशु चिकित्सा में प्रयुक्त होने वाली ये अल्ट्रासाउंड मशीन जानवरों के आंतरिक अंगों, ऊतकों और गर्भावस्था का गैर-आक्रामक (non-invasive) और विकिरण-मुक्त निदान करने के लिए एक अच्छी तकनीक है। यह तकनीक पालतू जानवरों (कुत्ते, बिल्ली) से लेकर पशुधन (गाय, भैंस, भेड़) में ट्यूमर, पेट की बीमारियों और प्रजनन संबंधी समस्याओं का सही पता लगाने में सहायक है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार डॉक्टर को बीमार पशु के खून की जांच करवाने की जरुरत पड़ती है। अभी तक यह टेस्ट सुविधा लुवास यूनिवर्सिटी हिसार में ही उपलब्ध थी। आज की मीटिंग में पशुओं के खून टेस्ट के लिए उपकरण खरीदने की भी स्वीकृति दे दी गई है। अब सरकारी अस्पतालों में आने वाले बीमार पशुओं के ब्लड टेस्ट फ्री में किये जाएंगे और पशुओं का जल्द ईलाज करने में आसानी होगी। पशु पालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि किसी भी पशुपालक या किसान का आर्थिक आधार पशु होते हैं जिनसे वे अपना परिवार चलाने के अलावा अतिरिक्त आमदनी कमाने का जरिया भी मानते हैं। राज्य सरकार अपने प्रदेश के पशु पालकों को समृद्ध बनाने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रही है।

श्रमिकों के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी देने श्रमिक जन संवाद सम्मेलन का आयोजन

श्रमिकों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए नवीन लेबर कोड एक ऐतिहासिक निर्णय : योगेश दत्त मिश्रा 1242 श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं में तहत एक करोड़ से अधिक धनराशि वितरित रायपुर, राज्य शासन द्वारा श्रमिकों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं के विषय में जागरूक करने के उद्देश्य से जिला मुख्यालय बलौदाबाजार  स्थित जिला ऑडिटोरियम में  गुरुवार को श्रमिक जन संवाद सम्मेलन का आयोजन किया गया।कार्यकम में श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को 1 करोड़ 4 लाख से अधिक की राशि  डीबीटी के माध्यम से श्रमिक एवं उनके परिवार के खाते में आतंरित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा  ने कहा कि राज्य शासन द्वारा श्रमिकों और उनके परिवार को खुशहाल बनाने के लिए 31 से अधिक कार्यक्रम और योजनाएँ संचालित हैं,जिनकी जानकारी सभी श्रमिक भाइयों और बहनों को होना ज़रूरी है तभी वे इन योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। श्रमिक जन संवाद सम्मेलन का यही उद्देश्य है। उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ज़्यादा से ज़्यादा श्रमिक भाई बहनों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने ऐसे कार्यकम सार्थक भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्रम कल्याण मंडलके अध्यक्ष  श्री योगेश दत्त मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा श्रमिकों के हितों के लिए क्रांतिकारी कदम उठाते हुए चार नए लेबर कोड लागू करने का निर्णय लिया गया है जो निश्चित रूप से श्रमिकों और उनके परिवारों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सबल करने की दिशा में बड़ा कदम है।उन्होंने कहा देश की आबादी का 45 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र के मजदूर हैं जिनके आर्थिक और सामाजिक विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है इसी लिहाज से यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।उन्होंने देश में लागू चार नए लेबर कोड (श्रम संहिताओं)मजदूरी संहिता, 2019, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों या ओएसएच संहिता 2020 और औद्योगिक संबंध संहिता 2020 के लाभ के बारे में विस्तार से बताया। नए श्रम कानूनों के मुताबिक देश भर में राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन  तय किया जाएगा।एक बार घोषित होने के बाद राज्य इससे कम वेतन तय नहीं कर सकते।मजदूरों और उनके परिवारों की सुरक्षा और इलाज की व्यवस्था ,भविष्य निधि ,आदि के बारे में बताया। उन्होंने कार्यक्रम में आए जन प्रतिनिधियों और श्रमिकों से अपील करते हुए कहा कि आप सभी अपना नैतिक दायित्व समझते हुए ज़्यादा से ज़्यादा श्रमिकों को विभागीय योजनाओं का लाभ लेने हेतु प्रेरित और जागरूक करें तभी हम विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की संकल्पना को साकार कर सकेंगे। नगर पालिका अध्यक्ष श्री अशोक जैन  ने कहा विकास और निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य शासन लगातार प्रयासरत है । कार्यक्रम में विभिन योजनाओं में हितग्राहियों से बातचीत कर उनका अनुभव भी जाना कंचन वर्मा ने बताया कि उन्हें नोनी सुरक्षा का लाभ मिला है,जिसके कारण वो अपने कॉलेज की पढ़ाई कर पा रही हैं। सियान सहायता योजना के हितग्राही भगवान दत्त ने बताया कि 60 वर्ष  की आयु  पूरी करने पर उन्हें 20 हज़ार रुपये मिले जिससे उनको काफ़ी मदद मिली।इसी तरह दीप्ति विश्वकर्मा ने बताया उन्हें नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना का लाभ मिला है। सभी हितग्राहियों ने छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यकम में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल अंतर्गत मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत जिले की 113 महिलाओं को 20-20 हज़ार की राशि प्रदान की गई इस प्रकार योजना के तहत कुल 22.60 लाख रुपये प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के तहत 918 बच्चों को 19.43 लाख, मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना के तहत 97 बुजुर्ग श्रमिकों को 19.40 लाख,मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना के तहत 89 बालिकाओं को 17.80 लाख, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत 14 लाख, छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मण्डल अंतर्गत असंगठित कर्मकार मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत 11 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की । श्रमिक जन संवाद सम्मेलन में कुल 1242 श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं में तहत एक करोड़ चार लाख तेइस हजार की धनराशि वितरित की गई। जिले में एक लाख से अधिक श्रमिक पंजीकृत 4 लाख अधिक हैं,अब तक श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत 90 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदाय की जा चुकी है। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल , जनपद पंचायत अध्यक्ष सुलोचना यादव भारत स्काउट गाइड के राज्य उपाध्यक्ष विजय केशरवानी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि,श्रम विभाग के अधिकारी -कर्मचारी और श्रमिकगण उपस्थित थे।

कृषि मंडी अधिकारी पर यौन शोषण का मामला, शिकायत के बाद भेजा गया जेल

कोरबा महिला से यौन उत्पीड़न के एक मामले में कटघोरा में पदस्थ रहे पूर्व कृषि मंडी अधिकारी राहुल साहू को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस टीम ने रायगढ़ जिले के घरघोड़ा से आरोपी को गिरफ्तार कर कटघोरा लाया, जहां उसे न्यायालय में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला ने शिकायत में बताया कि राहुल साहू कटघोरा कृषि मंडी में अधिकारी के पद पर कार्यरत था। इसी दौरान उसने महिला से दोस्ती की और शादी का प्रलोभन देकर करीब एक साल तक शारीरिक संबंध बनाया। महिला का आरोप है कि दोनों की इसी माह शादी होने वाली थी, लेकिन इसी बीच राहुल साहू ने शादी से साफ इंकार कर दिया। महिला की शिकायत पर कटघोरा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया। वहीं कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे रायगढ़ जिले के घरघोड़ा से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

विधायकों में तीखी भिड़ंत, विजय सिन्हा ने की विवादित टिप्पणी

पटना बिहार विश्वविद्यालयों में और उच्च शिक्षण संस्थाओं में यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन को लागू करने का प्रस्ताव विपक्ष की ओर से माले विधायक संदीप सौरभ ने पेश किया। इस दौरान में उन्होंने 'ब्राह्मणवाद'  शब्द का जिक्र कर दिया। इस पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक हंगामा करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने 'ब्राह्मणवाद' शब्द को फौरन सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। इसके बावजूद पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच आपस में भिड़ंत हो गई। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। विपक्ष की ओर से राजद विधायक आलोक मेहता ने भी पटलवार किया। सदन में क्या-क्या हुआ आइए जानते हैं? पहले जानिए माले विधायक ने क्या कहा?  माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि बिहार समेत विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न का मामला सामने आता है। उन्होंने रोहित वेमुला केस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी की ओर दी गई रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षक संस्थाओं में जाति आधारित उत्पीड़न के मामलों में 2019 से 2024 में 118 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इसके अलोक 2026 में इक्विटी गाइडलाइन की घोषणा की गई। लेकिन, इसे मजबूति से लागू करने की जगह ब्राह्मणवादी मानसिकता से प्रायोजित आंदोलन के बाद इसके स्थगित कर दिया गया। विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण स्थानों में जातीय उत्पीड़न को बिहार सरकार कानून लाकर लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह मांग करती है कि अध्यादेश लाकर इसे कानून का रूप देने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करे। साथ ही यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन को लागू करने का प्रस्ताव पारित करने की मांग करते हैं। डिप्टी सीएम ने कहा- यह लोग गद्दारी करते हैं माले विधायक संदीप सौरभ के बयान का भाजपा विधायक विरोध करने लगे। देखते ही देखते पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच नोंकझों होने लगी। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सदन की कार्यवाही से ब्राह्मण शब्द को हटाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत में सदन में जाति सूचक शब्द का प्रयोग नहीं करें। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि सदस्यों से अपील है कि अगर उन्हें संविधान में विश्वास है तो इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करें। हर समाज का सम्मान होता है। वह संविधान और संवैधानिक संस्था के निर्णय पर प्रश्न कैसे उठा सकते हैं। उनकी मानसिकता साफ झलकती है। हर समाज का मैं सम्मान करता हूं। इस तरह की मानसिकता गलत है। आज देश को कमजोर करने में, समाज में जहर घोलकर वो राष्ट्र के हितैषी नहीं हो सकते हैं। मैं भी टेक्निकल कॉलेज में पढ़ता था। किस तरह से मुजफ्फपुर में रैगिंग करवाई जाती थी। उस समय सत्ता किसकी थी। मैं भूमिहार ब्राह्मण समाज से आता हूं। हॉस्टल से बाहर निकलने पर विवश किया गया। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जातिगत भेदभाव से यह लोग बाबा साहेब के सपनों को तार-तार करना चाहते हैं। यह लोग राष्ट्र के हितैषी नहीं है। यह लोग समाज के साथ गद्दारी करते हैं। विजय सिन्हा की इस बात पर विपक्ष के विधायकों ने जमकर हंगामा किया। राजद और भाजपा विधायक ने क्या कहा? राजद विधायक आलोक मेहता ने कहा कि जातिवादी लोगों की मानसिकता साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि विधायक संदीप सौरभ ने किसी जाति का नाम नहीं लिया। उन्होंने ब्राह्मणवाद का नाम लिया। ब्राह्मणवाद कोई जाति नहीं है। जहां तक जाति की बात है कि पिछड़ा और दलित की बात कही जा रही है। उन्होंने विजय सिन्हा पर तंज कसते हुए कहा कि वह इस तरह की शब्दों का प्रयोग कर बता रहे है कि वह किस तरह की मानसिकता के हैं। जो लोग गलत किए हैं, उन्हें मिर्ची लग रही है। इसके बाद भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि विपक्ष के लोग ब्राह्मणवाद को समझते नहीं हैं। लेकिन, इन्हें ब्राह्मणों से काफी तकलीफ है। उन्होंने जिस ब्राह्मण का पैर तीनों लोकों के स्वामी भगवान कृष्ण अपने आंसुओं से करते हैं। जिस ब्राह्मण के बिना न शादी होती है और न श्राद्ध होती है। जिस ब्राह्मण ने भिक्षा मांगकर कासी हिन्दू विश्वविद्यालय बना दिया। आज इन्हें ब्राह्मण से परेशानी हो रही है।

मां की ममता का अनोखा नज़ारा: जंगल से सामने आई हाथियों की बेहद खूबसूरत तस्वीर

रायगढ़ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के जंगल से हाथियों के दल का एक शानदार तस्वीर आई है. 11 हाथियों के दल बीच दो नन्हें शावक सुरक्षित घेरे में विचरण करते नजर आ रहे हैं, मामला धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल रेंज का है. रायगढ़ जिले के जंगल से हाथियों के दल का ड्रोन कैमरे का एक शानदार तस्वीर सामने आई है. 11 हाथियों के दल में दो नन्हे शावक हैं जो अपनी मां के साथ जंगलों में घूमते नजर आ रहे हैं. हाथियों का यह दल छाल रेंज के कुडेकेला परिसर के गूडाघाट डेम किनारे विचरण कर रहा था. वीडियो में देखा जा सकता है कि मादा हाथी अपने शावक को सुरक्षित घेरे में रखते हुए जंगल में आगे बढ़ते नजर आ रही है. बताया जा रहा है कि दोनों हाथी शावक की उम्र करीब 6 महीने के आसपास है. वन विभाग एवं हाथी मित्र दल की टीम ने कुडेकेला, बांसाझार के अलावा आस-पास गांव के ग्रामीणों को सावधानी बरतने के साथ-साथ किसी भी काम के सिलसिले जंगल तरफ नही जाने की अपील की है. बताया जा रहा है कि हाथियों का यह दल अब घरघोड़ा रेंज में चला गया है. दल में शावक होने की स्थिति पर इस दल पर विशेष रूप से निगरानी की जा रही है.

विवाहिता की गैंगरेप के बाद हत्या के दोषियों को मिली फांसी की सजा

दौसा. दौसा जिले के लालसोट में गैंगरेप के बाद महिला की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश न्यायालय ने शुक्रवार को दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। मामला करीब चार साल पुराना है। जब विवाहिता ससुराल से पीहर जा रही थी, तभी आरोपियों ने अपहरण के बाद विवाहिता से सामूहिक दुष्कर्म किया और हत्या के बाद शव को कुएं में फेंक दिया था। इससे पहले कोर्ट ने गुरुवार को दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए फैसला सुर​क्षित रखा था। एडीजे ऋतु चौधरी ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। न्यायालय में राज्य पक्ष से नियुक्त विशिष्ट लोक अभियोजक महावीर सिंह ने घटना को जघन्य बताते हुए कड़ी सजा की दलील रखी। बचाव पक्ष ने आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने का हवाला देते हुए नरमी की अपील की। जज ने फैसला सुनाते हुए पढ़ी ये कविता जज ने फैसला सुनाते हुए कविता पढ़ते हुए कहा कि गूंजती है आज भी फिजा में हजारों सिसकियां, घुट-घुट कर तड़पती हैं इस समाज में बेटियां। किस्सा बलात्कार का आज फिर अखबार में छपेगा, एक बेटी के खून से आज फिर अखबार सनेगा, क्या था कसूर मेरा, क्या बेटी होना ही कसूर था मेरा। कैसे जिए इस समाज में नारी जहां दरिंदे बसते हों, भेड़ियों ने जहां इंसान के चेहरे पहने हों, आखिर कब तक नारी की इज्जत यूं तार-तार होगी, आखिर कब इस समाज की गलियां बेटियों के लिए सुरक्षित होगी। सिर झुकाएं पुलिस के साथ पहुंचे अदालत में अपने ससुराल से पीहर जा रही महिला के साथ एक जघन्य अपराध करने वाले दोनों आरोपियों को गुरुवार को न्यायालय में कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया था। इस दौरान दोनो आरोपी सिर झुकाए न्यायालय में पहुंचे और सिर झुकाएं ही खड़े रहे, कुछ देर बाद जब उन्हे दोषी करार दिया तो पुलिस उन्हे वहा से ले गई थी। नाबालिग व सीसीटीवी से खुला मामला घटना 23 अप्रैल 2022 की है। महिला जिले के एक गांव में बस से उत्तरने के बाद लापता हो गई थी। 24 अप्रेल को गुमशुदगी दर्ज हुई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और एक नाबालिग छात्र की जानकारी के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। 25 अप्रैल को आरोपी कालूराम की गिरफ्तारी के बाद उसी रात कुएं से शव बरामद किया गया, जबकि दूसरे आरोपी संजू मीना को 26 अप्रैल को पकड़ा गया। विशेष अनुसंधान दल गठित कर जुलाई 2022 में चार्जशीट पेश की गई। 45 गवाहों के बयान और 145 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। दोनों आरोपी रामगढ़ पचवारा थाना क्षेत्र के सिसोदिया गांव के एक ही परिवार के चाचा ताऊ के लड़के हैं। यूं चला घटनाक्रम 23 अप्रेल 2022 को सुबह मृतक अपने ससुराल से हुई रवाना 23 अप्रेल 2022 को दोपहर 1 बजे सोनड़ मोड़ पर बस से उतरी 24 अप्रेल 2022 को हुआ गुमशुदगी का मामला दर्ज 25 अप्रेल 2022 को एक आरोपी कालूराम मीना गिरफ्तार 25 अप्रेल 2022 की आधी रात्रि को मृतका का शव कुएं से बरामद 26 अप्रेल 2022 को संजू मीना की गिरफ्तारी 4 मई 2022 को हुआ एसआईटी का गठन जुलाई 2022 में न्यायालय में हुई चार्जशीट पेश 19 फरवरी 2026 को दोनों आरोपियों को किया न्यायालय ने दोषी करार 20 फरवरी 2026 को दोनों दोषियों को फांसी की सजा

झारखंड विधानसभा में ₹6450 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश

रांची. झारखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो चुका है. आज (शुक्रवार, 20 फरवरी) सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 6450 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया. आज की कार्यवाही में प्रश्नकाल के दौरान जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने प्रवासियों के पंजीकरण को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने सदन में सरकार से पूछा कि क्या ये बात सही है कि राज्य में 16 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर हैं, लेकिन सिर्फ 1 लाख 91 हजार ही पंजीकृत है. प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण और सुविधाओं के लिए झारखंड प्रवासी श्रमिक आयोग का गठन करने का विचार कर रही है. प्रवासी मजदूर के निधन पर 5 लाख मिले. जयराम महतो के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री संजय यादव ने बताया कि 2 लाख 29 हजार प्रवासी मजदूर रजिस्टर्ड हैं. प्रचार प्रसार के माध्यम से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी है. इस मामले पर सरकार और विभाग काफी गंभीर है. किसी को भी अगर विदेशों में परेशानी हुई है तो सरकार आगे आई है. प्रवासी नियंत्रण कक्ष रांची में है. कोई लापरवाही नहीं होती, इसीलिए आयोग की कोई जरूरत नहीं है. प्रवासी मजदूरों के निधन पर राशि बढ़ाने पर विचार हो सकता है. वहीं चन्द्रदेव महतो ने पूछा कि क्या प्रवासी नियंत्र कक्ष बनाया गया गया है. सरकार ने अलग से डायरेक्टरेट बनाने का आश्वासन दिया था. अभी काम करने वाले एनजीओ है, पावर सीमित है. इस पर मंत्री ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के लिए जो जरूरी होगा, वो किया जाएगा. बाबूलाल मरांडी ने पूछा कि बाहर राज्यों में भाषा की भी दिक्कत होती है. सरकार से आग्रह है कि उन शहरों में कोई मैकेनिज्म तैयार करें तो मजदूरों की कठिनाई दूर हो सकती है. मृत को 50 हजार मिलता है, लेकिन उनके घर उजड़ जाते हैं. आवास सुनिश्चित हो, सरकारी राशन मिले और शिक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित हो. हम सब का यह दायित्व बनता है. वहीं अरूप चैटर्जी ने कहा कि काम के बाद भी कई बार मजदूरों को हाजरी नहीं दी जाती. एक अधिकारी अगर उन राज्यों में बैठे तो उन्हें मदद मिलेगी और निदेशालय जल्द से जल्द बने. मानसिक तौर पर प्रताड़ित मजदूर जब आत्महत्या करता है तो उस मजदूर के बॉडी लाने की भी व्यवस्था की जानी चाहिए? इस पर मंत्री संजय यादव ने बताया कि मामला गंभीर हैं. सीएम से बात करके राज्य हित में फैसला लिया जाएगा. विधायक निर्मल महतो ने पूछा कि 10 हजार सहिया धरने पर बैठी हैं. पूरे राज्य में 2007 से 42000 सहिया, सहिया साथी 2500 और 688 टीटी सहिया स्वास्थ्य विभाग में कार कर रहे हैं. कोरोनाकाल में कई सहियाओं की जान गई है. इस सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य में लगभग राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में 64 हजार सहिया हैं. सहिए के प्रति सरकार संवेदनशील है. कोरोनाकाल में सहियाओं ने बढ़-चढ़ कर भाग दिया. कोरोनाकाल में 1 महिला रेनी देवी की मौत हुई है. सरकार ने हर संभव मदद की है. विधायक ने कहा कि प्रतिमाह मानदेय बढ़ाया जाना चाहिए. एम्बुलेंस की व्यवस्था बढ़े. धरना पर सरकार बात करे. मंत्री ने कहा कि इंसेंटिव के तहत रखा जाता है. विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि मैया सम्मान में ढाई हजार रुपये स्वास्थ्य सहिया का वेतन बढ़ाया जाए. मंत्री ने कहा कि हर माह इंटेंसिव के तहत काम होता है. जो भी कार्यक्रम चलाए जाते है. उसमें इंटेंसिव मिलता है. प्रति माह 10 से 1 हजार आमदनी होती है. 8 मार्च को एक साल का एकमुश्त राशि महिला दिवस पर सहियाओं को दी जाएगी. 

गरीबों को बड़ी राहत: दिल्ली में खुलीं 24 अटल कैंटीन, 5 रुपये में मिलेगी थाली

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में सस्ती और सम्मानजनक भोजन उपलब्ध कराने वाली योजना को बड़ा विस्तार मिला है। 24 नई अटल कैंटीनों की शुरुआत के साथ शहर में इनकी कुल संख्या बढ़कर 70 हो गई है। कृष्णा नगर की नर्सरी बस्ती से डिजिटल माध्यम से आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में विनय कुमार सक्सेना और रेखा गुप्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद दोनों नेताओं ने आम नागरिकों के साथ बैठकर भोजन किया और योजना की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि नई अटल कैंटीनों के शुरू होने से राजधानी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में कम कीमत पर भोजन की सुविधा और मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि यह पहल विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उनके अनुसार, सस्ती दरों पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने से दिहाड़ी मजदूरों, जरूरतमंदों और निम्न आय वर्ग के लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिल रहा है। उपराज्यपाल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि शहर के अधिक से अधिक इलाकों तक इस योजना का विस्तार किया जाए, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति भूखा न रहे और सम्मान के साथ भोजन प्राप्त कर सके।     दिल्ली को चलाने वाले, दिल्ली को बनाने वाले हर मेहनतकश, हर जरूरतमंद के लिए अटल कैंटीन एक भरोसा है कि यह शहर उसका भी है, और यह व्यवस्था उसके साथ खड़ी है। सम्मानजनक और पौष्टिक भोजन पर जोर रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार की नई कैंटीन पहल मेहनतकश और कम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि मात्र पांच रुपये में पौष्टिक और संतुलित भोजन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और स्वाद के मानकों का सख्ती से पालन किया जाए ताकि जरूरतमंदों को सम्मानपूर्वक भोजन मिल सके। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि योजना पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है और इसका उद्देश्य दिहाड़ी मजदूरों सहित उन लोगों को राहत देना है जो रोज कमाकर जीवन यापन करते हैं। इन कैंटीनों का संचालन दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड द्वारा किया जा रहा है। उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, शहरी विकास मंत्री आशीष सूद और कृष्णा नगर के विधायक डॉ. अनिल गोयल सहित कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। कैंटीनों का मुख्य उद्देश्य दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, रेहड़ी-पटरी संचालकों, सफाई कर्मचारियों और अन्य कम आय वर्ग के लोगों को स्वच्छ, सस्ता और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि महंगाई के दौर में उन्हें राहत मिल सके। अटल जयंती से शुरू हुई योजना उपराज्यपाल ने जानकारी दी कि इस जनकल्याणकारी योजना की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर की गई थी। उन्होंने बताया कि तब से इस पहल को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक इसका लाभ पहुंच सके। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक थाली पर 25 रुपये की सब्सिडी दे रही है, जिससे गरीब और मेहनतकश लोगों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके। यह योजना खासतौर पर दिहाड़ी मजदूरों और कम आय वर्ग के लोगों के लिए राहत का काम कर रही है। 100 कैंटीन का लक्ष्य, समावेशी विकास पर फोकस मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य राजधानी में 100 अटल कैंटीन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल सस्ता भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को सुरक्षा तथा सम्मान का एहसास दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री का कहना था कि कैंटीनों के विस्तार के साथ अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिलेगा, खासकर दिहाड़ी मजदूरों और कम आय वर्ग के परिवारों को। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार के सतत प्रयासों से राजधानी में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए, इस लक्ष्य की ओर लगातार काम किया जा रहा है।

डिजिटल सुविधा केंद्र में 86 वर्षीय भक्तिन राय को अंगूठे के निशान पर मिल रही सुविधाएं

  रायपुर, उम्र 86 साल, चेहरे पर झुर्रियां, लेकिन आँखों में आत्मनिर्भरता की चमक।  कबीरधाम जिले के ग्राम राजानवागांव की भक्तिन राय के लिए डिजिटल तकनीक अब केवल शब्द नहीं, बल्कि उनके बुढ़ापे की लाठी बन गई है। 30 साल पहले पति को खोने के बाद जिस पेंशन के लिए उन्हें बैंक के चक्कर काटने पड़ते थे, आज वही पैसा उनके गांव के डिजिटल सुविधा केंद्र  में एक अंगूठे के निशान पर मिल जाता है। आज एक छोटा सा केंद्र भक्तिन राय जैसे हजारों ग्रामीणों के लिए  डिजिटल वरदान साबित हो रहा है। भक्तिन राय के पति का देहांत लगभग 30 साल पहले हो गया था। लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने के बाद अब उन्हें निराश्रित विधवा पेंशन और महतारी वंदन योजना की राशि हर महीने नियमित रूप से मिल रही है। पहले उन्हें पैसे निकालने के लिए बैंक जाना पड़ता था, जिससे समय और मेहनत दोनों लगते थे। अब गांव के डिजिटल सुविधा केंद्र से ही उन्हें तुरंत पैसा मिल जाता है और यह भी पता चल जाता है कि उनके खाते में कितनी राशि आई है। उनके बेटा और बहू मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बहू को भी महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है, जिससे घर के खर्च में सहारा मिलता है। इलाज और दवाइयों के लिए मिलने वाली पेंशन की राशि भक्तिन राय के लिए बहुत बड़ा सहारा बन गई है। भक्तिन राय का घर भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बना है, जिससे उन्हें सुरक्षित रहने की सुविधा मिली है। वे बताती हैं कि अब गांव में ही सभी काम आसानी से हो जाते हैं, जिससे उन्हें कहीं दूर नहीं जाना पड़ता। राजानवागांव के डिजिटल सुविधा केंद्र के माध्यम से अब तक लगभग 18 लाख रुपए से अधिक का ट्रांजैक्शन किया जा चुका है। यहां ग्रामीणों को कई तरह की वित्तीय और सरकारी सेवाएं मिल रही हैं। केंद्र में नगद आहरण, फंड ट्रांसफर, जीवन, सामान्य और कृषि बीमा, पेंशन, पैन कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं का पंजीयन, बिजली बिल भुगतान, ट्रेन और हवाई यात्रा की टिकट बुकिंग तथा ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाओं के माध्यम से प्रमाण पत्र भी बनाए जा रहे हैं। गांव के लोग यहां से दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन, महतारी वंदन योजना की राशि निकालने, दूसरे के खाते में पैसा जमा करने, आवास योजना की राशि की जानकारी लेने और अन्य जरूरी काम आसानी से कर पा रहे हैं। डिजिटल सुविधा केंद्र ने खासकर बुजुर्ग, महिलाओं और जरूरतमंद लोगों के लिए बड़ी राहत दी है। भक्तिन राय जैसे लोगों के लिए यह केंद्र अब केवल एक सेवा केंद्र नहीं, बल्कि जीवन को आसान बनाने वाला एक मजबूत सहारा बन गया है।