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घटनास्थल पर मिला चौंकाने वाला सबूत, लोजपा नेता की भाभी की हत्या से इलाके में दहशत

पटना बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर में एक हाई-प्रोफाइल हत्या ने इलाके में सनसनी मचा दी है। नगर थाना क्षेत्र के चौहट्टा इलाके में देर रात महिला की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतका गुड़िया लोक जनशक्ति पार्टी (आर) की राष्ट्रीय सचिव मोनिका शर्मा की भाभी बताई जा रही हैं। यह घटना पुलिस और स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है। घर के भीतर हुई थी घटना बताया जा रहा है कि घटना घर के भीतर हुई थी। परिजनों के अनुसार, गुड़िया के सिर में गोली लगी और उसे तुरंत सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही लोजपा (आर) के कई कार्यकर्ता और नेता अस्पताल पहुंच गए, जिससे मामला राजनीतिक तूल पकड़ गया। मृतका का पति अर्जुन पासवान जो हाजीपुर व्यवहार न्यायालय में एडीजे-4 का निजी चालक है, ने बताया कि वह पत्नी के चिल्लाने की आवाज सुनकर बाहर गए और उसे चापाकल के पास गिरा पाया। गिलास पर मिले खून के निशान इधर घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। एफएसएल (FSL) की टीम ने भी घटनास्थल पर जांच की, जिसमें घर के अंदर रखे एक गिलास पर खून के निशान पाए गए। पुलिस ने महिला के पति अर्जुन और अन्य पर संदेह जताया है। पुलिस को शक है कि हत्या घर के अंदर हुई और बाद में शव को चापाकल के पास फेंककर हत्या को भ्रामक रूप देने का प्रयास किया गया। मृतका के पिता ने भी ससुराल वालों पर सवाल उठाए हैं। पुलिस का बयान इस मामले में सदर एसडीपीओ सुबोध कुमार ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। साथ ही दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है। 

छात्रों को राहत: स्कूल स्टूडेंट्स की स्कॉलरशिप बढ़ी, अब दोगुना लाभ मिलेगा

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई  कैबिनेट की अहम बैठक हुई। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों से जुड़ा रहा। राज्य सरकार ने SC-ST प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना की राशि दोगुनी करने का फैसला लिया है। कक्षा 1 से 10 तक की छात्रवृत्ति में बड़ी बढ़ोतरी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा किए गए संशोधन के तहत कक्षा 1 से 10 तक पढ़ने वाले SC-ST विद्यार्थियों को मिलने वाली वार्षिक छात्रवृत्ति में उल्लेखनीय इजाफा किया गया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार: कक्षा 1 से 4 तक: ₹1200 वार्षिक कक्षा 5 से 6 तक: ₹2400 वार्षिक कक्षा 7 से 10 तक: ₹3600 वार्षिक कक्षा 1 से 10 तक के छात्रावासी विद्यार्थी: ₹6000 वार्षिक सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2011 से लागू छात्रवृत्ति दरें वर्तमान समय की महंगाई और शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गई थीं, इसी को ध्यान में रखते हुए यह संशोधन किया गया है। ₹519.64 करोड़ सालाना खर्च, 27 लाख छात्रों को सीधा फायदा इस संशोधित योजना पर राज्य सरकार हर वर्ष ₹519.64 करोड़ खर्च करेगी। इससे बिहार के करीब 27 लाख SC-ST छात्र-छात्राओं को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। छात्रवृत्ति का लाभ सरकारी, स्थायी मान्यता प्राप्त और स्थापना स्वीकृत विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से वंचित वर्गों के छात्रों को शिक्षा से जोड़े रखने और ड्रॉपआउट दर में कमी लाने में मदद मिलेगी। पिछड़ा-अत्यंत पिछड़ा वर्ग छात्रावास अनुदान भी हुआ दोगुना कैबिनेट बैठक में पिछड़ा और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को भी बड़ी राहत दी गई। “मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग छात्रावास अनुदान योजना” के तहत मिलने वाली राशि को ₹1000 प्रति माह से बढ़ाकर ₹2000 प्रति माह प्रति छात्र कर दिया गया है। 8150 छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ इस फैसले से विभाग के अधीन संचालित छात्रावासों में रहने वाले लगभग 8150 छात्र-छात्राएं लाभान्वित होंगे। अनुदान राशि में वृद्धि के कारण इस योजना पर अनुमानित वार्षिक व्यय ₹19.56 करोड़ होगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि बढ़ी हुई अनुदान राशि 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी।  

लाल आतंक से रूके विकास को अब मिल रही है गति

रायपुर. नारायणपुर जिले को मिली 351 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बस्तर के नारायणपुर जिले के दो दिवसीय प्रवास पर जिला मुख्यालय पहुंचे, जहां पर उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होकर जिलावासियों को अनेक सौगातें दीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हाई स्कूल मैदान में आयोजित बस्तर पण्डुम के जिला स्तरीय कार्यक्रम में 351 करोड़ 49 लाख 45 हजार रूपए के 357 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री   साय ने इस अवसर पर विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में लाल आतंक समाप्ति की ओर है, जिससे विकास को गति मिल रही है। माओवाद के कारण यह क्षेत्र लम्बे समय से विकास से अछूता रहा, अब यहां नवाचार हो रहे है।     नारायणपुर के हाई स्कूल मैदान में आयोजित आज अपराह्न में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री   साय ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री   नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री   अमित शाह के दृढ़ संकल्प से प्रदेश सरकार ने माओवाद मुक्त करने के लगातार प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि नियद नेल्लानार योजना से चलते बस्तर के 400 से अधिक गांवों में विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों के विकास की पहुंच सुनिश्चित हुई है। आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की दिशा में उन्हें कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आजीविका प्राप्त करते हुए आत्मनिर्भर बन सकें। साथ ही बस्तर को विकास के सभी आयामों से जोड़ने यहां पर्यटन विकास, खेती-बाड़ी, पशुपालन जैसे कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प मुख्यमंत्री ने दोहराया।   साय ने यह भी कहा कि आदिवासी संस्कृति और पारम्परिक विरासतों को सहेजने व संजोकर रखने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार बस्तर पण्डुम का आयोजन कर रही है। उन्होंने उपस्थित जनों से जनजातीय सभ्यता और धरोहरों की जड़ों से जुड़कर रहने का आह्वान किया।  मुख्यमंत्री ने की 332 करोड़ के छह निर्माण कार्यों की घोषणा इस दौरान मुख्यमंत्री ने 06 निर्माण कार्यों की घोषणा की, जिनकी अनुमानित लागत 332 करोड़ रूपए है। इसमें 125 किलोमीटर लम्बे मार्ग नारायणपुर के ओरछा-आदेर-लंका-बेदरे -कुटरूमैमेड जिसकी लागत राशि-250 करोड़ रूपए है। यह नारायणपुर जिले को बीजापुर जिले से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसमें जिले के अंदरूनी क्षेत्र के ईदवाया, एडजुम, आदेर, कुड़मेल, ढोढरीबेड़ा, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा, लंका जैसे ग्राम जुड़ते हैं। इसी तरह राजनांदगांव-बैलाडिला मार्ग में सतह मजबूतीकरण कार्य की घोषणा की, इसकी लंबाई 28 कि.मी जो लगभग 34 करोड़ से तैयार होगी। यह नारायणपुर जिले को दंतेवाड़ा जिले में जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इसी तरह नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा मार्ग पर 28 किमी के सतह मजबूतीकरण कार्य, लंबाई 28 कि.मी. की घोषणा (राशि-34 करोड़ 12 लाख) – यह मार्ग जिले को महाराष्ट्र बार्डर तक जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसमें जिले के ब्रेहबेड़ा, कुरूषनार, बासिंग, सोनपुर ग्राम जुड़ते हैं। इसके अलावा ब्रेहबेड़ा (नारायणपुर)-कंदाड़ी-कीहीकाड़-मुरनार-बेचा मार्ग पर घुड़साल नाला पर उच्चस्तरीय सेतुमय पहुंच मार्ग निर्माण कार्य, जिसकी लंबाई 80 मीटर तथा लागत राशि-12 करोड ़ 42 लाख है। साथ ही नारायणपुर जिला अंतर्गत अबुझमाड़ के अंदरूनी क्षेत्रों में प्रारंभ किये गए 10 वैकल्पिक प्राथमिक शाला ‘घमण्डी, वाला, जटवर, नेलनार, रोहताड़, हितावाड़ा, मोडनार, तोके, कोडटामरका एवं कोडोली‘ के स्कूल सेटअप एवं भवन, तथा तोके में आश्रम शाला भवन की स्वीकृति की घोषणा की, जो 01 करोड़ 06 लाख रूपए से तैयार होगा। इसी तरह जिले के एज्युकेशन हब, गरांजी मे खेल मैदान की घोषणा की घोषणा की जिसका निर्माण 50 लाख रूपए की लागत से होगा।      कार्यक्रम में वन मंत्री  केदार कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री   नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री   अमित शाह जी के सशक्त और निर्णायक नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक देश से सशस्त्र माओवाद के आतंक का पूर्णतः अंत हो जाएगा। नारायणपुर जिला भी शीघ्र ही नक्सल मुक्त होकर शांति, विकास और समृद्धि के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री   साय के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से हर गांव, हर टोले को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। राजस्व मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री   टंकराम वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री   साय ने जिले को 351 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी है। उनके नेतृत्व में राज्य सफलता की नित नई उंचाइयों को छू रहा है और हर क्षेत्र में लगातार विकास हो रहा है। इसके पहले, बस्तर सांसद  महेश कश्यप ने संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। बस्तर की संस्कृति और विरासत की पूरे विश्व में अलग पहचान है। आज की नई पीढ़ी हमारी सस्कृति और परंपरा को सहेजकर रखने की जरूरत है। उन्होंने मुख्यमंत्री   साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम के 12 विधाओं में जनजातीय संस्कृति के प्रदर्शन के माध्यम से सरकार द्वारा इन परंपराओं को सहेजने और संरक्षित करने का कार्य किया जा रहा है। बस्तर ओलंपिक के माध्यम से युवाओं को प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जा रहा है। ऐसे आयोजनों से आदिवासी संस्कृति व परंपरा आगे बढ़ेगी और बस्तर विकास और शांति के पथ पर सतत् आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पित माओवादी नव दम्पति को दिया आशीर्वाद मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर पण्डुम के जिला स्तरीय कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने आदिवासी व्यंजन, वेशभूषा, आभूषण तथा प्राचीन धरोहरों का अवलोकन कर संरक्षित करने की बात कही। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत माओवाद छोड़कर मुख्यधारा में लौटे 04 जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान कर नवदाम्पत्य जीवन में प्रवेश की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री से आशीर्वाद प्राप्त करने वाले जोड़ों में ग्राम पोदावाड़ा की कमला गोटा तथा ग्राम ऐनमेटा के सुकलाल जुर्री, ग्राम कुर्सींग की सुशीला कोवाची और ग्राम तुषवाल के सन्नी सलाम, ग्राम पूसालामा की रीता कोवाची और इसी ग्राम के मासो मण्डावी तथा ग्राम डूंगा की कोसी मण्डावी एवं इसी ग्राम के अर्जुन सिंह शामिल थे। मुख्यमंत्री ने सभी विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान कर समाज की मुख्य धारा में शामिल होने की बधाई दी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष  रूपसाय सलाम सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पंचायती राज और नगरीय संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे।

स्वामित्व योजना से गांव-गांव मजबूत हुए कानूनी अधिकार

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को लेकर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए प्रदेश में अब तक एक करोड़ से अधिक घरौनियों का वितरण किया जा चुका है। यह पहल न केवल ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति पर कानूनी अधिकार प्रदान कर रही है, बल्कि दशकों से चले आ रहे भूमि विवादों के समाधान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो रही है। ग्रामीण स्वामित्व को मिली कानूनी मजबूती स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी भूमि में रहने वाले परिवारों को उनकी संपत्ति का विधिक प्रमाण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से अब तक 72,961 ग्रामों में प्रपत्र-10 (डिजिटाइज्ड) जारी किए जा चुके हैं, जो सर्वे योग्य ग्रामों का लगभग 80.59 प्रतिशत है। इससे ग्रामीणों को पहली बार अपने मकान और भूमि पर स्पष्ट कानूनी स्वामित्व प्राप्त हुआ है। यह दस्तावेज अब बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और अन्य वित्तीय सुविधाओं के लिए भी मान्य आधार बन गया है। घरौनी बनी आर्थिक सुरक्षा की कुंजी राजस्व विभाग द्वारा सहमति के आधार पर अब तक 1,14,43,688 घरौनियां तैयार की जा चुकी हैं, जिनमें से 1,01,31,232 घरौनियों का वितरण ग्रामीण परिवारों को किया जा चुका है। घरौनी केवल स्वामित्व का प्रमाण नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। इसके जरिए ग्रामीण परिवार अब औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ रहे हैं, स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों के लिए ऋण ले पा रहे हैं तथा सामाजिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भूमि विवादों में कमी, प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ स्वामित्व योजना के प्रभाव से गांवों में भूमि और मकान से जुड़े विवादों में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। स्पष्ट रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेजों के कारण फर्जी दावों और अवैध कब्जों पर प्रभावी रोक लगी है। इससे न केवल ग्रामीण स्तर पर शांति और विश्वास बढ़ा है, बल्कि न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम होने की उम्मीद है। योगी सरकार की यह पहल सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। निरंतर जारी है वितरण प्रक्रिया सरकार द्वारा घरौनियों के वितरण की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। 18 जनवरी 2025 के बाद 13,12,456 नई घरौनियां तैयार की जा चुकी हैं, जिनका वितरण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। आने वाले समय में लाखों और ग्रामीण परिवारों को संपत्ति स्वामित्व का लाभ मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र परिवार इस योजना से वंचित न रहे। ड्रोन तकनीक से सर्वे की संभावनाएं स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1,10,344 अधिसूचित ग्रामों में से 90,530 ग्राम ऐसे हैं, जहां ड्रोन सर्वे कराया जाना तकनीकी रूप से संभव है। इन ग्रामों में आधुनिक तकनीक के माध्यम से सर्वे कर सटीक और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। योगी सरकार की डिजिटल गवर्नेंस नीति के अनुरूप यह तकनीक भविष्य में ग्रामीण भूमि प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी। कुल मिलाकर, स्वामित्व योजना के माध्यम से योगी सरकार ने ग्रामीण समाज को संपत्ति अधिकार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान का मजबूत आधार प्रदान किया है, जो उत्तर प्रदेश को देश में भूमि सुधार और ग्रामीण सशक्तिकरण का अग्रणी राज्य बना रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न के अनुरूप युवाओं को हुनरमंद ही नहीं, जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को केवल कौशल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उन्हें जागरूक, आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी नागरिक बनाने की दिशा में लगातार नए नवाचार कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) ने एक अभिनव निर्णय लेते हुए प्रदेश के सभी अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण केंद्रों पर दैनिक समाचार-पत्र पठन को अनिवार्य कर दिया है। प्रदेश के 75 जिलों में संचालित 800 से अधिक कौशल प्रशिक्षण केंद्रों पर वर्तमान में एक लाख से अधिक प्रशिक्षणार्थी विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। अब ये युवा कौशल विकास के साथ-साथ देश-दुनिया की घटनाओं, समसामयिक विषयों और सामान्य ज्ञान से भी नियमित रूप से जुड़ेंगे। योगी सरकार की सोच, हुनर के साथ जागरूकता प्रदेश के  व्यावसायिक शिक्षा,  कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश का युवा केवल तकनीकी रूप से दक्ष ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और वैश्विक परिदृश्य की समझ रखने वाला भी बने। इस निर्णय का उद्देश्य प्रशिक्षार्थियों की एम्प्लॉयबिलिटी (रोजगार-क्षमता) बढ़ाने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, संवाद कौशल और विश्लेषणात्मक सोच का विकास करना है। कक्षा की शुरुआत अब खबरों के साथ नए निर्देशों के अनुसार स्टेट स्किल डेवलपमेंट फंड, दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना और प्रोजेक्ट प्रवीण सहित सभी योजनाओं के अंतर्गत संचालित बैचों में कक्षा की शुरुआत समाचार-पत्र पठन से होगी। इसके लिए प्रशिक्षण प्रदाताओं (टीपी) और प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन एजेंसियों (पीआईए) को अपने-अपने केंद्रों पर प्रतिदिन कम से कम एक हिंदी और एक अंग्रेजी अखबार अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा। सॉफ्ट स्किल्स को मिलेगी मजबूती मिशन का मानना है कि अखबार पढ़ने से प्रशिक्षार्थियों का सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स मजबूत होगा, जो सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों में चयन के लिए आवश्यक है। संपादकीय और लेखों के अध्ययन से भाषा शैली, शब्दावली और विचार अभिव्यक्ति में सुधार होगा। समाचारों के विश्लेषण से युवाओं में समालोचनात्मक चिंतन विकसित होगा, जिससे वे निर्णय लेने में अधिक सक्षम बनेंगे। वहीं, पहेलियों, सांस्कृतिक लेखों और प्रेरक कथाओं से छात्रों में एकाग्रता, धैर्य और संवेदनशीलता जैसे मानवीय गुण भी विकसित होंगे। सख्त निगरानी, तत्काल प्रभाव से लागू आदेश यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसकी निगरानी के लिए जिला समन्वयक, एमआईएस मैनेजर, डीपीएम और बीपीएम को निर्देशित किया गया है कि वे अपने मासिक निरीक्षण के दौरान इस गतिविधि की विशेष समीक्षा करें और रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख करें। उल्लेखनीय है कि इस पहल के लिए कोई अतिरिक्त बजट नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसे प्रशिक्षण प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा माना गया है। युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में कदम मिशन निदेशक पुलकित खरे के अनुसार, योगी सरकार के मार्गदर्शन में कौशल विकास को केवल रोजगार तक सीमित नहीं रखा गया है। दैनिक समाचार-पत्र पठन को पाठ्यक्रम में शामिल कर युवाओं में समालोचनात्मक सोच, वैश्विक जागरूकता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे डिजिटल युग के जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

मुख्यमंत्री, म.प्र. संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के राज्य स्तरीय सम्मेलन में हुए शामिल

संविदाकर्मियों के श्रम और विश्वास के आधार पर ही जनकल्याणकारी योजनाएं उतार रही हैं धरातल पर संविदाकर्मी राज्य सरकार का कार्यबल ही नहीं, हमारा आत्मबल भी हैं   भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संविदाकर्मियों के श्रम और विश्वास पर ही राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सफल हो रही है। संविदाकर्मियों की भूमिका हनुमान जी के समान है। आपके श्रम और साझेदारी ने ही शासन-प्रशासन की व्यवस्था बनाई रखी है। संविदाकर्मी अनुबंध से अवश्य आते हैं, किन्तु व्यवस्थाओं के प्रबंधन में विराट भूमिका निभाते हैं। स्वास्थ्य सेवाएं हों या शिक्षा, पंचायत, नगरीय निकाय या तकनीकी सेवाएं मैदानी स्तर पर सर्वे, मॉनीटरिंग और क्रियान्वयन में संविदा भाई-बहन हर जगह व्यवस्था के भरोसेमंद स्तंभ बनकर खड़े हैं। संविदाकर्मियों ने जिस निष्ठा से काम किया है, उसने यह सिद्ध कर दिया कि सेवा पद से बड़ी है। संविदाकर्मी राज्य सरकार का कार्यबल ही नहीं, हमारा आत्मबल भी हैं। भारतीय मजदूर संघ के 'देश के हित में करेंगे काम' के वाक्य को हमारे साथी चरितार्थ कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को टीटी नगर दशहरा मैदान में भारतीय मजदूर संघ द्वारा आयोजित मध्यप्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के 'संविदा कर्मचारी-अधिकारी सम्मेलन' को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा भारत माता और श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यक्रम स्थल आगमन पर पुष्प वर्षा कर और बड़ी माला पहनाकर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हमारी सरकार संविदा कर्मियों के अधिकारों के लिए सदैव सकारात्मक भाव के साथ खड़ी है। राज्य सरकार द्वारा संविदा कर्मियों के सेवा सुधार, पारिश्रमिक सुधार, कार्य परिस्थिति और भविष्य के सुधारों पर पहले भी सकारात्मक निर्णय लिए गए हैं, भविष्य में भी उनका पूरा ध्यान रखा जाएगा। हमारी सरकार संविदा कर्मियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सभी मुद्दों का समाधान निकालेगी। संविदा कर्मचारियों के लिए जो भी निर्णय हो सकते हैं, उससे अधिक करने का प्रयास करेंगे। नियम, न्याय और वित्तीय संतुलन के दायरे में रहते हुए संविदाकर्मियों की कठिनाइयों का हल निकाला जाएगा। मध्यप्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच, वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग के साथ समन्वय करते हुए सभी कठिनाइयों का समाधान इस प्रकार किया जाएगा, जिससे संविदाकर्मियों का सम्मान और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हों। संविदाकर्मियों की उचित मांगों पर राज्य सरकार संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ उनका सहयोग करेगी। संविदाकर्मियों की मांगों पर रखा जायेगा पूरा ध्यान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव     10 वर्ष से अधिक अनुभवी संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन की अभी तक 50 प्रतिशत पदों के लिए प्रक्रिया जारी है, इस दिशा में आगे और काम किया जाएगा।     सामान्य प्रशासन विभाग संविदा नीति-2023 के अंतर्गत सभी कंडिकाओं का केंद्र और राज्य पोषित परियोजनाओं में अक्षरश: क्रियान्वयन किया जाएगा। राज्य शासन के निगम मंडल इसे लागू करेंगे।     संविदा नीति-2023 के अंतर्गत सभी विभागों में संविदा कर्मियों के लिए एनपीएस, ग्रेज्युटी, स्वास्थ्य बीमा लाभ, अनुकंपा नियुक्ति के लिए केंद्र पोषित-राज्य पोषित समस्त योजनाओं-परियोजनाओं में एक साथ क्रियान्वयन तथा संविदा कर्मियों के लिए प्रावधान सीसीए रूल 1965, 1966 को पूर्णत: लागू करने के संबंध में नीतिगत निर्णय कराया जाएगा।     विभिन्न विभागों, योजना, परियोजना में पदस्थ संविदा कर्मचारियों की विसंगतिपूर्ण समकक्षता के निर्धारण के लिए अभ्यावेदनों का निराकरण, संविदा के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा समय-सीमा में किया जाएगा।     कृषि विभाग की आत्मा योजना, जिला ई-गवर्नेंस सोसायटी, जिला विकलांग पुनर्वास केन्द्रों में संविदा नीति-2023 के तहत समकक्षता का निर्धारण किया जाएगा। सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का श्री कुलदीप सिंह गुर्जर, श्री दिनेश सिंह तोमर, श्री गोविंद श्रीवास्तव, श्री दुर्गेश तिवारी तथा संयुक्त संघर्ष मंच के प्रतिनिधियों ने स्वागत किया। श्री दिनेश तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश संविदा संयुक्त संघर्ष मंच में प्रदेश के 34 विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कर्मचारी हित में निरंतर कार्य कर रही है। भारतीय मजदूर संघ ने प्रदेश के संविदा कर्मचारियों की मांगों को समझा है। प्रदेश महामंत्री श्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने भी संबोधित किया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में प्रदेशभर से पधारे संविदा अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।  

मौसम बदलेगा मिज़ाज: 3 और 4 फरवरी को बारिश, कोहरे के साथ ठंड बढ़ेगी

रांची झारखंड में मौसम एक बार फिर बदलने वाला है। पिछले कुछ दिनों से बढ़े तापमान के कारण लोगों को गर्मी महसूस हो रही थी और गर्म कपड़े कम हो गए थे। लेकिन अब मौसम विभाग ने बारिश और ठंड बढ़ने का अनुमान जताया है। अगले तीन दिनों में तापमान फिर 2 से 3 डिग्री बढ़ने की संभावना झारखंड में आने वाले दिनों में मौसम करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 3 और 4 फरवरी को राज्य के कई जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। बारिश के बाद तापमान में गिरावट आएगी, जिससे ठंड का असर फिर बढ़ जाएगा। अगले दो दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट हो सकती है। इसके बाद अगले तीन दिनों में तापमान फिर 2 से 3 डिग्री बढ़ने की संभावना है। पिछले कुछ दिनों से तापमान बढ़ने के कारण लोगों को गर्मी लगने लगी थी। बीते 24 घंटों में राज्य के 10 जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। इसी वजह से लोग बिना गर्म कपड़ों के बाहर निकलने लगे थे, लेकिन अब मौसम बदलने से ठंड फिर लौट सकती है। सुबह हल्का कोहरा और दिन में बादल छाए रह सकते हैं मौसम विभाग के अनुसार 3 फरवरी को पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार और आसपास के इलाकों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। राज्य के बाकी हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा। इस दौरान सुबह हल्का कोहरा छा सकता है और दिन में आंशिक बादल रहेंगे। वहीं 4 फरवरी को पश्चिमी झारखंड के अलावा सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है। बाकी इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा। सुबह हल्का कोहरा और दिन में बादल छाए रह सकते हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में मौसम शुष्क रहा और कुछ जगहों पर हल्का कोहरा देखा गया। इस दौरान सबसे अधिक अधिकतम तापमान 30.8 डिग्री सेल्सियस चाईबासा में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 10.8 डिग्री सेल्सियस रांची के कांके में रिकॉर्ड किया गया।  

लगातार सातवें वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में प्रदेश को मिला प्रतिष्ठित पुरस्कार

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उन्नति की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश को गणतंत्र दिवस परेड में एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में प्रदेश की झांकी को पॉपुलर च्वॉइस केटेगरी में द्वितीय पुरस्कार मिला। लोगों द्वारा सराही गई इस झांकी में बुंदेलखण्ड की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास यात्रा को केन्द्रित किया गया था। उत्तर प्रदेश ने लगातार सातवें वर्ष पुरस्कार प्राप्त कर अपनी विशिष्ट सृजनात्मक पहचान कायम रखी।  कुल 30 झांकियों में प्राप्त किया दूसरा स्थान नई दिल्ली के राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अपर निदेशक अरविंद कुमार मिश्र को केन्द्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किया। इस परेड में 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 13 मंत्रालयों व विभागों की कुल 30 झांकियां शामिल थीं, जिनमें लोकप्रियता के आधार पर उत्तर प्रदेश को दूसरा स्थान मिला। बुंदेलखण्ड की विरासत और आधुनिक विकास को किया गया प्रदर्शित समृद्वि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत थीम पर आधारित इस झांकी में उत्तर प्रदेश ने बुंदेलखण्ड की संस्कृति के साथ-साथ आधुनिक उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा की झलक भी दिखाई थी। झांकी में बुंदेलखण्ड की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को प्रमुखता से दर्शाया गया। कालिंजर दुर्ग की शैल कला और एकमुख लिंग, क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को प्रस्तुत करते दिखाई दिए। झांकी में बुंदेलखंड की मृद्भांड कला, मनका शिल्प, पारंपरिक हस्तशिल्प, एक जनपद एक उत्पाद, ब्रह्मोस मिसाइल, एक्सप्रेस नेटवर्क और आधुनिक अवसंरचना की झलक भी शामिल थी, जिसने विकास और परंपरा का संतुलित चित्र प्रस्तुत किया। सात वर्षों से जारी सम्मान की परंपरा उत्तर प्रदेश को आकर्षक झांकी के लिए लगातार सातवें वर्ष सम्मानित किया गया है। गणतंत्र दिवस परेड में उत्तर प्रदेश की झांकियों ने वर्ष 2020 में द्वितीय तथा वर्ष 2021 और 2022 में प्रथम पुरस्कार जीता। वहीं, वर्ष 2023 में झांकी को ज्यूरी श्रेणी में तृतीय और पॉपुलर च्वॉइस श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार मिला था। इसी प्रकार, झांकी को वर्ष 2024 में पॉपुलर च्वॉइस श्रेणी में द्वितीय स्थान, वर्ष 2025 में ज्यूरी श्रेणी में प्रथम तथा पॉपुलर च्वॉइस श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार मिला। वर्ष 2026 में भी पॉपुलर च्वॉइस श्रेणी में प्रदेश की झांकी दूसरे स्थान पर रही, जिससे राष्ट्रीय मंच पर उत्तर प्रदेश की सृजनात्मक पहचान और मजबूत हुई।

ललितपुर-सिंगरौली रेलवे लाइन विन्ध्य की विकास रेखा है: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

रेलवे परियोजना का कार्य 2028 तक पूर्ण करने के दिए निर्देश भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के नवीन सर्किट हाउस सभागार में आयोजित बैठक में ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ललितपुर-सिंगरौली रेलवे लाइन विन्ध्य की विकास रेखा है। सीधी-सिंगरौली हाईवे और रेलवे परियोजना का कार्य पूरा होने से नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का विकास होगा। सिंगरौली तक रेलवे लाइन के जुड़ जाने से विन्ध्य पूर्वोत्तर राज्यों से सीधे कनेक्ट हो जाएगा। लंबी दूरी की ट्रेनें चलने से आवागमन में सुविधा के साथ व्यापार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। निर्धारित लक्ष्य अनुसार 2028 तक सीधी से सिंगरौली और पन्ना से खजुराहो तक रेलवे लाइन का निर्माण कार्य हरहाल में पूरा कराएं। अप्रैल 2026 तक रीवा से सीधी स्टेशन तक का निर्माण कार्य पूरा कराएं जिससे रेवांचल एक्सप्रेस ट्रेन का सीधी तक विस्तार किया जा सके। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि रेलवे परियोजना के पूरा होने से विन्ध्य और बुंदेलखण्ड के आर्थिक विकास में तेजी आएगी। रेलवे तथा प्रशासन के अधिकारी परियोजना के निर्माण कार्यों से जुड़ी बाधाएं समन्वय से दूर करें। रेलवे के अधिकारी सीधी और सिंगरौली कलेक्ट्रेट में प्रत्येक सोमवार को आयोजित होने वाली टीएल बैठक में उपस्थित होकर भू-अर्जन संबंधी प्रकरणों का निराकरण कराएं। कलेक्टर हर सप्ताह परियोजना के कार्यों की समीक्षा करें। भू-अर्जन के कार्यों में देरी न करें। किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए भू-अर्जन करें। बताया गया कि सीधी से गजरही तक का भू-अर्जन पूरा हो गया है। गजरही से गोपद नदी तथा सिंगरौली तक भू-अर्जन की कार्यवाही तेजी से पूरी करें। इनके लिए टेण्डर जारी हो गए हैं। भू-अर्जन पूरा होते ही निर्माण एजेंसी कार्य शुरू कर दे। रेलवे के अधिकारी इस बात का ध्यान रखें कि भू-अर्जन के बाद पूरक प्रस्ताव की आवश्यकता न रहे। पश्चिम मध्य रेलवे की महाप्रबंधक शोभना बंदोपाध्याय ने कहा कि 31 मार्च तक सीधी रेलवे लाइन का कार्य पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे प्रशासनिक अधिकारियों के समन्वय से तेजी से कार्य कर रहा है। गोपद नदी से सिंगरौली तक भू-अर्जन की कार्यवाही जारी है। सिंगरौली तक रेलवे लाइन बनाने का कार्य दिसम्बर 2028 तक पूरा हो जाएगा। सतना से पन्ना जिले में सकरिया तक मार्च माह तक रेलवे लाइन बिछ जाएगी। पन्ना से अजयगढ़ तथा अजयगढ़ से खजुराहो तक लाइन बिछाने में लगभग 18 महीने का समय लग जाएगा। इस क्षेत्र में अभी वन विभाग से कार्य करने की अनुमति नहीं मिली है। महाप्रबंधक ने बताया कि पश्चिम मध्य रेलवे जोन को वर्ष 2024-25 में उत्कृष्ट कार्यों के लिए गोविंदवल्लभ पंत शील्ड प्रदान की गई है। बैठक में निर्माण कार्यों की प्रगति की सेक्शनवार जानकारी दी गई। बैठक में सांसद रीवा  जनार्दन मिश्र, कमिश्नर  बीएस जामोद, कलेक्टर रीवा मती प्रतिभा पाल, कलेक्टर सीधी  स्वरोचिष सोमवंशी, कलेक्टर सिंगरौली  गौरव बैनल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पश्चिम मध्य रेलवे  एमएस हाशमी, रेलवे के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, संबंधित क्षेत्र के एसडीएम और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर: UPPSC ने जारी किया 2026-27 का परीक्षा कैलेंडर

लखनऊ.  uppsc exam calendar 2026-27 Out: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने आखिरकार 2026–27 सत्र का डिटेल्ड एग्जाम कैलेंडर जारी कर दिया है। फरवरी से दिसंबर 2026 तक चलने वाली इस परीक्षा श्रृंखला में PCS, RO/ARO, शिक्षक, मेडिकल, तकनीकी और प्रोफेशनल सेवाओं से जुड़ी लगभग सभी प्रमुख भर्तियों की तारीखें शामिल हैं। इससे अभ्यर्थियों को अपनी रणनीति, टाइम टेबल और रिवीजन प्लान तय करने में बड़ी मदद मिलने वाली है। UPPSC Exam Calendar 2026: परीक्षा चक्र की शुरुआत फरवरी से आयोग के मुताबिक, 2026 का परीक्षा चक्र 2 फरवरी 2026 (सोमवार) से शुरू होगा और साल के आखिर तक यानी दिसंबर 2026 तक चलेगा। पूरी परीक्षा सूची UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर उपलब्ध है। सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा संयुक्त राज्य / अपर अधीनस्थ सेवा परीक्षा (PCS) की बात करें तो इसकी मुख्य परीक्षा यानी मेन्स 29 मार्च 2026 से चार दिनों तक चलेगी। वहीं प्रारंभिक परीक्षा यानी प्री 6 दिसंबर 2026 को तय की गई। PCS अभ्यर्थियों के लिए यह कैलेंडर खास मायने रखता है क्योंकि अब उनके पास पूरे साल की स्पष्ट योजना मौजूद है। RO/ARO और APO जैसी परीक्षाओं का शेड्यूल अन्य प्रमुख प्रशासनिक परीक्षाओं में समीक्षा अधिकारी / सहायक समीक्षा अधिकारी (RO/ARO) मेन्स परीक्षा 2 और 3 फरवरी 2026 को होगी। वहीं सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) की प्रारंभिक परीक्षा 22 मार्च 2026 और मुख्य परीक्षा 17 जून 2026 को निर्धारित की गई है। इसके अलावा सहायक आयुक्त की मेन्स परीक्षा 28 जून 2026 से तीन दिनों तक चलेगी। शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए 2026 रहेगा निर्णायक शिक्षा क्षेत्र में नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए भी यह साल काफी अहम रहने वाला है। कैलेंडर के अनुसार स्टाफ नर्स (प्रारंभिक) परीक्षा 17 मार्च 2026 को होगी। सहायक अध्यापक (TGT) प्रीलिम्स 5 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी, जबकि विभिन्न विषयों की TGT मेन्स परीक्षाएं मई और अगस्त 2026 में होंगी। पॉलीटेक्निक और प्रोफेसर भर्तियों की टाइमलाइन UPPSC कैलेंडर में पॉलीटेक्निक लेक्चरर और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसी शिक्षण सेवाओं की परीक्षाएं भी शामिल हैं। ये परीक्षाएं अगस्त से अक्टूबर 2026 के बीच अलग-अलग चरणों में आयोजित की जाएंगी, जिससे उच्च शिक्षा क्षेत्र के अभ्यर्थियों को भी तैयारी का पूरा समय मिल सके। तकनीकी और मेडिकल सेवाओं की परीक्षाएं तकनीकी और मेडिकल क्षेत्र की भर्तियों का शेड्यूल भी आयोग ने जारी कर दिया है। इसमें वन सेवा परीक्षा 14 से 16 जुलाई 2026, पशु चिकित्सा अधिकारी परीक्षा 3 अक्टूबर 2026, फूड सेफ्टी ऑफिसर 25 अक्टूबर 2026, ड्रग इंस्पेक्टर 26 अक्टूबर 2026 और मेडिकल ऑफिसर परीक्षा 18 दिसंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। टेक्निकल एजुकेशन (Teaching/Training) सर्विस परीक्षा 2023 का अहम अपडेट UPPSC ने टेक्निकल एजुकेशन (Teaching/Training) सर्विस परीक्षा 2023 को लेकर भी जरूरी सूचना दी है। यह भर्ती 46 पदों के लिए है, जिनकी लिखित परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2025 को हो चुकी है। अब परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को 30 जनवरी 2026 से पारंपरिक आवेदन फॉर्म ऑनलाइन भरना होगा। आवेदन भेजने की अंतिम तिथि और नियम आवेदन की अंतिम तिथि 20 फरवरी 2026, शाम 5 बजे तय की गई है। अभ्यर्थियों को भरे हुए फॉर्म की प्रिंट कॉपी और सभी जरूरी दस्तावेज स्वयं सत्यापित कर रजिस्टर्ड पोस्ट से या आयोग के काउंटर नंबर 3 पर जमा करना होगा। दस्तावेजों में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है।