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गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक में फिरौती ना देने पर मेडिकल स्टोर मालिक की हत्या

गुरदासपुर. पंजाब में गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक के ऐतिहासिक जौड़िया बाजार में बुधवार सुबह फिरौती के नाम  पर अज्ञात युवकों ने एक मेडिकल स्टोर मालिक को गोलियां से भून दिया। घटना सुबह करीब आठ बजे की है। बेदी मेडिकल स्टोर के मालिक रणदीप सिंह बेदी की अज्ञात युवकों ने गोली मारकर हत्या कर दी। घटना उस समय हुई जब रणदीप सिंह बेदी रोजाना की तरह अपना मेडिकल स्टोर खोलकर सफाई कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दो युवक मौके पर पहुंचे और बिना किसी कहासुनी के रणदीप सिंह बेदी पर फायरिंग कर दी। गोली उनकी आंख के पास लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोगों ने तुरंत उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही रणदीप सिंह बेदी से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। कुछ समय पहले हटाई गई थी सुरक्षा फिरौती की मांग के बाद उन पर पहले भी हमला हुआ था, जिसमें उन्हें जांघ में गोली लगी थी। उस घटना के बाद पुलिस की ओर से उन्हें सुरक्षा मुहैया करवाई गई थी। हालांकि बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में सुरक्षा कर्मियों को हटा लिया गया था, जिसका फायदा बदमाशों ने उठाया। घटना की सूचना मिलते ही डेरा बाबा नानक पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है और हमलावरों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। इलाके की नाकेबंदी कर संदिग्धों की तलाश की जा रही है। इलाके में पहले भी हो चुकी फायरिंग की घटना स्थानीय व्यापारियों और निवासियों में इस घटना को लेकर भारी रोष और डर का माहौल है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी डेरा बाबा नानक क्षेत्र में एक दुकानदार को गोली मारने की घटना सामने आ चुकी है। लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं से बाजारों में कारोबार करने वाले लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

अवैध हुक्का और गोगो पेपर नेटवर्क का भंडाफोड़

रायपुर. पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के कड़े निर्देशानुसार एवं पुलिस उपायुक्त (नॉर्थ जोन) मयंक गुर्जर (IPS) के मार्गदर्शन में पुलिस द्वारा युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन, विशेषकर गांजा (Marijuana) के सेवन को रोकने के लिए एक बड़ा प्रहार किया गया है। पुलिस ने उन दुकानों और ठेलों को चिन्हित किया जो युवाओं को नशे के लिए घातक सामग्री उपलब्ध करा रहे थे। रोलिंग पेपर (Gogo Paper) के जरिए नशे पर प्रहार जांच में यह तथ्य सामने आया है कि शहर के कई पान ठेले और गुमटियां युवाओं को गांजा पीने हेतु विशेष रूप से उपयोग किए जाने वाले 'गोगो/रोलिंग पेपर' और चिलम बेच रहे थे। पुलिस ने इस नेटवर्क को तोड़ते हुए करीब 2 लाख रुपये मूल्य के भारी मात्रा में रोलिंग पेपर जप्त किए हैं। इनका उपयोग गांजे की सिगरेट (Joints) बनाने में किया जाता है, जो युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। COTPA एक्ट एवं नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त आकाश मरकाम एवं सहा. पुलिस आयुक्त (उरला) सुश्री पूर्णिमा लामा के नेतृत्व में नॉर्थ जोन की टीमों ने *COTPA*एक्ट (Cigarette and Other Tobacco Products Act)के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की। शैक्षणिक संस्थानों के आसपास और सार्वजनिक क्षेत्रों में अवैध सामग्री बेचने वाले 09 संस्थानों को सील कर बंद कराया गया है। सप्लाई चेन (Backward Linkage) का खुलासा ​नेटवर्क ट्रैकिंग: जप्त रोलिंग पेपर और हुक्का फ्लेवर की खेप कहाँ से आ रही थी, इसके मुख्य स्रोत (Source) का पता लगा लिया गया है। पूछताछ में उन थोक विक्रेताओं और सप्लायरों के नाम सामने आए हैं जो शहर के भीतर इन सामग्रियों की अवैध खेप पहुँचा रहे थे। इन मुख्य कड़ियों के विरुद्ध जल्द ही छापेमारी की जाएगी।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा 15 दिनों में फिर से होगी, बदलाव से प्रभावित कई अभ्यर्थी

इंदौर जबलपुर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एमपीपीएससी (MPPSC) के तहत मेडिकल ऑफिसर्स की भर्ती से जुड़े मामले में फैसला सुनाया है. इंदौर हाईकोर्ट ने मामले में पूरी प्रक्रिया को फिर से आयोजित करने के निर्देश मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग को दिए हैं. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद कई मेडिकल ऑफिसर्स को बड़ी राहत मिली है. अचानक जोड़ दिया गया एडिशनल रजिस्ट्रेशन का नियम एमपीपीएससी द्वारा साल 2024-2025 में मेडिकल ऑफिसर भर्ती को लेकर वैकेंसी निकाली गई थी. जहां कई लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए थे. जिन लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए थे, उनके इंटरव्यू किए गए. इसी बीच ऐन वक्त पर रजिस्ट्रेशन में एडिशनल रजिस्ट्रेशन का नियम जोड़ दिया गया. जिसके चलते कई एमबीबीएस डॉक्टर भर्ती प्रक्रिया में से बिना दस्तावेज जांच बाहर हो गए. इस मामलों को लेकर जो डॉक्टर प्रक्रिया को पूरी होने के बाद अचानक से बाहर हुए, उन्होंने इंदौर हाई कोर्ट में एडवोकेट तुषार सोडानी के माध्यम से एक याचिका लगाई. अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका याचिका में एमपीपीएससी द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर मेडिकल ऑफिसर की भर्ती प्रक्रिया के दौरान इंटरव्यू के दिन ही अचानक एडिशनल रजिस्ट्रेशन का नया नियम जोड़ देने की जानकारी कोर्ट को दी गई. साथ ही जिन अभ्यर्थियों के पास यह रजिस्ट्रेशन नहीं था, उन्हें फोन कर इंटरव्यू से बाहर कर दिया गया. अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ एक प्रतिनिधि भी भेजा, लेकिन एमपीपीएससी ने कोई जवाब नहीं दिया. इसके बाद अभ्यार्थियों ने हाईकोर्ट की शरण ली. 15 दिनों में फिर से परीक्षा आयोजित कराने का आदेश इंदौर हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि एडिशनल रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नियमों में नहीं है. असल आवश्यकता केवल पीजी मार्कशीट और पीजी रिजल्ट की थी. जिसे अभ्यार्थी पहले ही प्रस्तुत कर चुके थे. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 'रूल ऑफ द गेम बीच में बदले नहीं जा सकते.' अब हाई कोर्ट की इंदौर बेच ने एमपीपीएससी को निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर सभी प्रतिनिधित्व पर निर्णय लें और नई प्रक्रिया में पात्रता सुनिश्चित करें. साथ ही भर्ती के लिए आवेदन करने वाले सभी अभ्यार्थियों को मौका दें और रिपोर्ट कोर्ट में सबमिट करें. 

सिंहस्थ की तैयारी: उज्जैन में 100 एकड़ में फूलों का विशाल क्लस्टर, 30 जनवरी को भोपाल में फ्लॉवर एग्जीबिशन

उज्जैन  सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने उज्जैन में 100 एकड़ जमीन पर फूलों का विशेष उत्पादन क्लस्टर विकसित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर यह क्लस्टर धार्मिक नगरी उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में फूलों की बढ़ेगी खेती।  महाकालेश्वर सहित आसपास से आती है फूलों की डिमांड उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने बताया कि उज्जैन, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर साल भर फूलों की बड़ी मांग रहती है। इसी को देखते हुए सरकार ने उज्जैन के आसपास व्यावसायिक पुष्प उत्पादन क्लस्टर विकसित करने की कार्य योजना बनाई है। सिंहस्थ 2028 को अवसर के रूप में देख रहा है विभाग मंत्री कुशवाह ने कहा कि सिंहस्थ मेले के दौरान करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना के लिए फूलों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में बाहर से फूल मंगाने की बजाय स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित फूलों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे। किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस क्लस्टर के माध्यम से उज्जैन और आसपास के किसानों को गुलाब, गेंदा, जरबेरा, रजनीगंधा, सेवंती, ग्लेडियोलस जैसे अधिक मांग वाले फूलों की वैज्ञानिक और व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि पुष्प उत्पादन को केवल पारंपरिक खेती न मानते हुए कृषि-उद्यम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। प्रशिक्षण से लेकर बाजार तक मिलेगा सहयोग     उन्नत किस्मों के पौधों की उपलब्धता     आधुनिक खेती तकनीकों का प्रशिक्षण     कोल्ड स्टोरेज और भंडारण सुविधाएं     मंडी और बाजार से सीधा जुड़ाव     पुष्प प्रसंस्करण इकाइयों से कनेक्शन प्रदेश को पुष्प उत्पादन में अग्रणी बनाने की योजना मंत्री कुशवाह ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले से ही पुष्प उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उज्जैन में 100 एकड़ का यह क्लस्टर राज्य को पुष्प उत्पादन के क्षेत्र में नंबर-वन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

अधिकारियों की फेरबदल की बंपर लिस्ट जारी, राज्य प्रशासन में बड़ा बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार ने पुलिस विभाग में कार्यरत एक दर्जन वरिष्ठ अधिकारियों को इधर से उधर करते हुए नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। यह सभी अधिकारी राज्य पुलिस सेवा के उप पुलिस अधीक्षक (DSP) संवर्ग से हैं। प्रदेश के गृह विभाग द्वारा मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किए गए। जारी आदेश के मुताबिक 12 उप पुलिस अधीक्षकों को उनके वर्तमान पदों से हटाकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं उप सेनानी के पदों पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों एवं इकाइयों में तैनात किया गया है। यह तबादले तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं। गृह विभाग के अपर सचिव आशीर्ष भार्गव द्वारा 27 जनवरी को जारी आदेश में सभी अधिकारियों को नवीन पदस्थापना स्थल पर शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह फेरबदल पुलिस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। 

रेवाड़ी में होंडा कंपनी के GM ने बिल्डिंग से छलांग लगाकर दी जान

रेवाड़ी. होंडा कंपनी के एक 47 वर्षीय जनरल मैनेजर ने हरियाणा के रेवाड़ी जिले के धारूहेड़ा स्थित सोसाइटी की पांचवीं मंजिल से कूदकर खुदकुशी कर ली। पुलिस का कहना है कि आत्महत्या के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। जानकारी के अनुसार, मूल रूप से भिवानी के रहने वाले अमित सांगवान खुशखेड़ा राजस्थान स्थित होंडा कंपनी में जनरल मैनेजर (क्वालिटी) के पद पर कार्यरत थे। वे सोसाइटी में अपने माता-पिता के साथ रहते थे। उनकी पत्नी भिवानी के एक कॉलेज में लेक्चरर है। बताया जा रहा है कि शनिवार की रात 12 बजे अमित ने सोसाइटी की पांचवीं मंजिल से नीचे छलांग लगा दी। नीचे गिरते ही उनकी मौके पर मौत हो गई। जमीन पर खून फैल गया और सोसाइटी के लोगों को जब इस घटना का पता चला तो मौके पर लोग जमा हो गए। पुलिस मोबाइल के कॉल डिटेल खंगालने में जुटी उन्होंने तुरंत मामले की सूचना धारूहेड़ा थाना पुलिस को दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल पहुंचाया। पुलिस फिलहाल मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस इसके लिए उनके मोबाइल के भी कॉल डिटेल खंगालने में जुटी हुई है। सभी के लिए रहस्य बना हुआ है कि अमित ने खुदकुशी किस वजह की, या यह कोई हादसा है। पुलिस हर ऐंगल से इस मामले की जांच कर रही है। अमित की दो जुड़वां बेटियां हैं। परिजनों और सहकर्मियों को जब इसके बारे में पता चला तो माहौल गमगीन हो गया। आर्थिक रूप से सक्षम है अमित का परिवार आसपास के लोगों का कहना है कि अमित का परिवार आर्थिक रूप से सक्षम है। पिता शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल पद से और मां लेक्चरर पद से रिटायर्ड हैं। रिटायरमेंट के बाद से माता-पिता उनके साथ ही रह रहे थे। जांचकर्ता अधिकारी का कहना है कि रविवार को शव का पोस्टमॉर्टम करा दिया गया है। रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।

पंजाब-हरियाणा में बारिश और ओलावृष्टि से बढ़ी ठंड

चंडीगढ़. कश्मीर में हुई ताजा बर्फबारी के कारण बीते कुछ दिनों में दूसरी बार घाटी का देश के अन्य हिस्सों से संपर्क टूट गया। अधिकारियों के अनुसार श्रीनगर हवाई अड्डे से सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं और श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद कर दिया गया है। उत्तर भारत को प्रभावित कर रहे पश्चिमी विक्षोभ के कारण राजधानी दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में ठंड का असर और बढ़ गया है। सुबह से ही पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होती रही, जो रुक-रुक कर दिनभर जारी रही। पंजाब के कई जिलों में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई, जिससे ठंड में और इजाफा हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से पंजाब और आसपास के राज्यों में बारिश होने के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी तथा पंजाब के कई जिलों में तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि के कारण मैदानी इलाकों के तापमान में करीब 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार 30 जनवरी तक शीतलहर और घने कोहरे का असर बना रहेगा, जिसको देखते हुए पंजाब में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। कई जिलों में तेज हवाओं, गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों के अनुसार तापमान में करीब 4 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। लुधियाना में न्यूनतम तापमान 7.7 डिग्री सेल्सियस, एसबीएस नगर में 9.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं बठिंडा में अधिकतम तापमान 18.3 डिग्री सेल्सियस रहा। राज्य के विभिन्न जिलों में हुई बारिश के आंकड़ों के अनुसार पटियाला में सबसे अधिक 29 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है।

हाईकोर्ट ने कांस्टेबल भर्ती में नियुक्ति पत्र देने पर लगाई रोक

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। वर्ष 2023 में लगभग 6,000 कांस्टेबल पदों पर हुई भर्ती से जुड़े मामले में हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक आगे किसी भी प्रकार के नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। यह मामला वर्ष 2023 में जारी कांस्टेबल भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान शारीरिक दक्षता परीक्षा (फिजिकल टेस्ट) में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे। फिजिकल टेस्ट के दौरान डेटा रिकार्डिंग का कार्य शासन द्वारा आउटसोर्स पर टाइम्स टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को सौंपा गया था। आरोप है कि उक्त कंपनी ने निष्पक्ष तरीके से कार्य नहीं किया और कई अभ्यर्थियों को पैसों के लेनदेन के माध्यम से अनुचित लाभ दिया गया। इससे आहत होकर जिला सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ एवं मुंगेली के निवासी मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद, गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्वनी कुमार यादव एवं ईशान सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीक़ी के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई 27 जनवरी को न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू के समक्ष हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने दलील दी कि शासन द्वारा की गई जांच रिपोर्ट में स्वयं अधीक्षक पुलिस, जिला बिलासपुर ने स्वीकार किया है कि फिजिकल टेस्ट के दौरान कई गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं और गलत डेटा दर्ज किए गए हैं। यहां तक कि टाइम्स टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फिजिकल टेस्ट से संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दिए गए। न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू ने राज्य शासन को अगली सुनवाई तक कांस्टेबल पदों पर कोई भी नया नियुक्ति आदेश जारी न करने के निर्देश दिए। साथ ही उत्तरवादीगण को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस फैसले को राज्य की कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ग्वालियर, भोपाल समेत कई शहरों में घना कोहरा, एमपी में मौसम ने बदला रुख; बारिश और ओले से फसलें प्रभावित

भोप्ला  मध्य प्रदेश में मौसम ने अचानक रौद्र रूप ले लिया है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के असर से प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश के साथ ओले गिरे, जिससे जनजीवन और खेती दोनों प्रभावित हुए हैं। ठंड के बीच बारिश-ओलों के इस दौर ने तापमान और गिरा दिया है। मंगलवार को 20 से ज्यादा जिलों में बारिश दर्ज की गई, जबकि गुना, उज्जैन, आगर-मालवा और शाजापुर में ओलावृष्टि हुई। ग्वालियर, सागर समेत 14 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने बुधवार को भी हालात ऐसे ही बने रहने की चेतावनी दी है। ग्वालियर, सागर समेत 14 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सागर और दमोह शामिल हैं। वहीं, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, कटनी, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली में बादल छाए रहने के आसार हैं। बारिश के साथ कोहरे की चादर उत्तरी मध्य प्रदेश में जहां बारिश का अलर्ट है, वहीं सुबह के समय घना कोहरा भी परेशानी बढ़ा रहा है। ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के कई जिलों में मध्यम कोहरा छाया रहा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रायसेन और सीहोर में भी दृश्यता प्रभावित हुई। ग्वालियर-शिवपुरी में स्कूल बंद लगातार बारिश और बढ़ती ठंड को देखते हुए ग्वालियर प्रशासन ने एहतियातन बुधवार को कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। शिवपुरी समेत आसपास के इलाकों में भी ठंड का असर तेज रहा। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, इंदौर, खंडवा, हरदा, विदिशा, नर्मदापुरम, खंडवा, बड़वानी, रतलाम, श्योपुर, उज्जैन, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, रीवा, सतना, टीकमगढ़, छतरपुर, शाजापुर, मंदसौर, आगर-मालवा, देवास, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, खरगोन, सीहोर, सागर, मऊगंज, धार आदि जिलों में 24 घंटे के अंदर बारिश का दौर चला। ग्वालियर में सबसे ज्यादा ढाई इंच, गुना, शिवपुरी-सागर में 1 इंच, दतिया में पौन इंच और राजगढ़ में आधा इंच पानी गिर गया। उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, देवास, मुरैना, सीहोर, सागर, रायसेन व अन्य जिलों में ओले भी गिरे। बारिश, आंधी-ओले के मौसम के बीच बुधवार सुबह घना कोहरा भी छाया रहा। ग्वालियर में सबसे कम विजिबिलिटी दर्ज की गई। यानी, यहां 50 मीटर के बाद कुछ नहीं दिखा। खजुराहो, भोपाल, दतिया, नर्मदापुरम, नौगांव, रीवा, सतना, राजगढ़, सागर, गुना, रायसेन, श्योपुर, बालाघाट, उमरिया, सिवनी, मंडला, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर में कोहरा दर्ज किया गया। हालांकि, रात के तापमान में बढ़ोतरी हुई है। बारिश के बाद एमपी में बढ़ी ठंड मध्य प्रदेश में मंगलवार को हुई बारिश के बाद एक बार फिर ठंड की वापसी हो गई है। तेज हवाओं के कारण कंपकंपी बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, देवास, खंडवा, शाजापुर, शिवपुरी, मऊगंज, सागर, उज्जैन समेत कई जिलों में बारिश हुई। जिसके बाद आज ठंड भी बढ़ गई है। ग्वालियर में बारिश के बाद आज कक्षा-8 तक के स्कूलों की छुट्टी भी घोषित कर दी गई है। मध्य प्रदेश का सबसे ठंडा जिला मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को एमपी में सबसे कम न्यूनतम तापमान शिवपुरी में रहा। यहां पर न्यूनतम पारा 7 डिग्री सेल्सियस डिग्री दर्ज किया गया। इसके बाद खुजराहों में 7.4 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम पारा रिकॉर्ड हुआ। वहीं सबसे कम अधिकतम तापमान मुरैना में 18.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस दौरान 3 जिलों में 30 डिग्री या उससे ऊपर अधिकतम पारा रहा। जिनमें मंडला, खंडवा और खरगौन शामिल हैं। ओलावृष्टि से खेती को झटका मंगलवार को प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में आंधी और बारिश का असर देखा गया। आगर-मालवा, शाजापुर और गुना में गिरे ओलों से किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। रतलाम, शाजापुर और आगर में तेज हवा के चलते खेतों में खड़ी फसलें गिर गईं। कई जगह सड़कों पर पानी बह निकला। रात के समय निवाड़ी, दतिया, श्योपुर, उज्जैन, खरगोन और धार में आकाशीय बिजली चमकती रही। 

खूबचंद की मौत के बाद प्रदर्शन जारी, इंदौर में दूषित पानी से संकट, ICU में तीन मरीज और वेंटिलेटर पर एक

इंदौर  भागीरथपुरा के खूबचंद पिता गन्नूदास की दूषित पानी से मंगलवार को मौत हो गई थी। बुधवार को उनके परिजनों ने अंत्येष्टी से पहले सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया। खूबचंद की मौत के साथ ही भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों की संख्या 29 हो चुकी है।  यह कहा जाता है कि द्यजल ही जीवन हैद्ग, लेकिन देश के सबसे साफ शहर माने जाने वाले इंदौर की एक बस्ती में पानी ही मौत की वजह बन गया है। दूषित पानी के कारण भागीरथपुरा में 30 दिन में 29 मौतें हो चुकी हैं। अभी भी तीन लोग जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इस कांड को एक माह पूरा हो रहा है, लेकिन अभी भी पूरी बस्ती में साफ पानी नहीं मिल पाया है और न ही अफसर यह बता पाए कि दूषित पानी के कारण आखिर इतनी मौतें कैसे हो गईं? यह कांड सामने आने के बाद कई सरकारी जांचें हुईं और आयोग का गठन भी हो चुका है। मामला कोर्ट में है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार के खिलाफ कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं हुआ है। 29 दिसंबर को भागीरथपुरा बस्ती के 20 मरीज दो अलग-अलग निजी अस्पतालों में भर्ती हुए थे। उन्हें देखने क्षेत्रीय विधायक कैलाश विजयवर्गीय पहुंचे थे, जिसके बाद दूषित पानी से फैल रही बीमारी का खुलासा हुआ। 30 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती एक व्यक्ति की पहली मौत हुई थी। इन मौतों के पीछे नगर निगम की भारी लापरवाही उजागर हुई है। बस्ती की पाइपलाइनें 30 साल से ज्यादा पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। भागीरथपुरा से जुड़ा नगर निगम का जोन शिकायतों के मामले में शहर में दूसरे स्थान पर है। पिछले दो माह में यहाँ सबसे ज्यादा गंदे पानी की शिकायतें मिली थीं, लेकिन अफसरों ने उन पर ध्यान नहीं दिया। शौचालय के नीचे से गुजरती रही पाइपलाइन हैरानी की बात यह है कि सालभर से लाइन बदलने के प्रस्ताव तैयार थे, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। गंदे पानी की शिकायतों को अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया। जिस नर्मदा लाइन से घरों में पानी जाता है, उसके ऊपर पुलिस चौकी का शौचालय बना दिया गया और मल-मूत्र का पानी नर्मदा लाइन में समाता रहा। जब मौतें होने लगीं, तब अफसरों ने शौचालय तोड़कर लीकेज खोजा। पूरी लाइन में 30 से ज्यादा लीकेज मिले, जिन्हें एक माह बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सका है। कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम की पेश रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सुरक्षित पानी की आपूर्ति, इलाज और जांच संबंधी निर्देशों का पूरा पालन नहीं हुआ है। मौतों के आंकड़ों को लेकर भी गंभीर असहमति सामने आई। जहां सरकारी रिपोर्ट में 16 मौतों को जलजनित बीमारी से जोड़ा गया है, वहीं याचिकाकर्ताओं ने मृतकों की संख्या लगभग 30 बताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग बनाया है। आयोग जल प्रदूषण के कारणों, वास्तविक मौतों की संख्या, बीमारियों की प्रकृति, चिकित्सा व्यवस्था की पर्याप्तता, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ितों को मुआवजे पर रिपोर्ट देगा। कोर्ट ने दैनिक जल गुणवत्ता जांच और नियमित स्वास्थ्य शिविर जारी रखने के निर्देश देते हुए चार सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को होगी। आयोग को व्यापक अधिकार आयोग को सिविल कोर्ट के समान अधिकार दिए गए हैं। वह अधिकारियों व गवाहों को तलब कर सकेगा, दस्तावेज मंगा सकेगा, जल गुणवत्ता परीक्षण करा सकेगा और स्थल निरीक्षण कर सकेगा। राज्य सरकार आयोग को आवश्यक स्टाफ, कार्यालय और संसाधन उपलब्ध कराएगी। रिपोर्ट में मौतों के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि भागीरथपुरा के 30 प्रतिशत हिस्से में वाटर सप्लाई शुरू कर दी गई है। यह हिस्सा साढ़े 9 किमी का है। हालांकि, जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की पीठ ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में यूज किए गए वर्बल अटॉप्सी शब्द पर भी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने पूछा है कि यह शब्द मेडिकल का है या आपके द्वारा ईजाद किया है। अदालत ने यह भी पाया कि रिपोर्ट में मौतों के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं और उसमें पर्याप्त तर्क एवं सहायक सामग्री का अभाव है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट की विश्वसनीयता सिद्ध करने के लिए अधिक उपयुक्त, ठोस और प्रामाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करें। इसके अलावा अंतरिम राहत के स्वरूप पर भी चिंता व्यक्त की। सवाल उठाया है कि समिति अपने सुझावों का प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन किस प्रकार सुनिश्चित करेगी। क्षेत्र में लगातार हो रही मौतें और उनके कारणों की अनिश्चितता अत्यंत चिंताजनक है। रिपोर्ट को बताया ‘आई-वॉश’ सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को अस्पष्ट बताते हुए उसे मात्र एक 'आई-वॉश' करार दिया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने नगर निगम को निर्देशित किया कि वरिष्ठ अधिवक्ता के सुझाए गए परीक्षणों पर गंभीरता से विचार किया जाए। कोर्ट की सभी चिंताओं का स्पष्ट एवं ठोस उत्तर प्रस्तुत करें। इसके अलावा, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने न्यायालय परिसर में स्वच्छता और जल की स्थिति का भी संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सिर्फ 8 पैरामीटर्स पर पानी की कैसी टेस्टिंग निगम की ओर से तर्क दिया कि पानी की टेस्टिंग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि सिर्फ 8 मानकों पर पानी की टेस्टिंग की गई जबकि 2018 में मप्र प्रदूषण मंडल ने भागीरथपुरा समेत इंदौर के पानी की 34 मानकों पर टेस्टिंग की थी। इस पानी को फिकल कंटामिनेटेड पाया था। ऐसे में जब भागीरथपुरा में 28 मौतें हो चुकी हैं तो निगम सिर्फ 8 मानकों पर टेस्टिंग कैसे कर रही है। निगम ने यह भी नहीं बताया कि टेस्टिंग का तरीका क्या था। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से विश्वस्तरीय तीन पैरामीटर्स पर पानी की टेस्टिंग के तीन तरीके बताए गए। मदद रेडक्रॉस से, शासन की ओर से कुछ भी नहीं याचिकाकर्ता की ओर से बताया कि मुआवजे को लेकर भी झूठी जानकारी दी जा रही है। अभी मृतकों को जो 2-2 लाख रुपए की राशि दी गई है वह रेड क्रॉस सोसायटी की ओर … Read more