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रांची का फैशन डिजाइनर जाएगा राष्ट्रपति भवन

रांची. झारखंड के लिए यह गर्व का विषय है कि राज्य के प्रख्यात टेक्सटाइल डिजाइनर एवं उद्यमी आशीष सत्यव्रत साहु को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित ‘एट होम’ कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। यह निमंत्रण भारत के राष्ट्रपति की ओर से भेजा गया है। रांची निवासी आशीष सत्यव्रत साहु जोहारग्राम फैशन ब्रांड के संस्थापक हैं। यह ब्रांड झारखंड की आदिवासी टेक्सटाइल और हस्तशिल्प परंपरा को समकालीन डिजाइन के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का कार्य करता है। इसके साथ ही वे खादीवाला ब्रांड के भी संस्थापक हैं, जो खादी आधारित डिजाइन और नवाचार के जरिए स्वदेशी वस्त्र परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। स्थानीय कारीगरों को आजीविका के नए अवसर पिछले कई वर्षों से आशीष सत्यव्रत साहु टेक्सटाइल और क्राफ्ट क्षेत्र में डिजाइन नवाचार, परंपरागत कारीगरी के संरक्षण और कारीगरों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्यरत हैं। उनके प्रयासों से झारखंड के अनेक स्थानीय कारीगरों को आजीविका के नए अवसर मिले हैं और उनकी पारंपरिक कला को नई पहचान प्राप्त हुई है। आशीष सत्यव्रत साहु के योगदान की सराहना देश के प्रधानमंत्री तथा राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा भी विभिन्न अवसरों पर की जा चुकी है। उनके डिजाइन देश के कई प्रतिष्ठित फैशन और हैंडलूम मंचों पर प्रदर्शित हो चुके हैं, जिससे झारखंड की समृद्ध आदिवासी वस्त्र परंपरा को व्यापक पहचान मिली है। राष्ट्रपति भवन के ‘एट होम’ कार्यक्रम में आमंत्रण उनके रचनात्मक योगदान, सामाजिक प्रतिबद्धता और स्वदेशी वस्त्र संस्कृति के प्रति समर्पित प्रयासों की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल आशीष सत्यव्रत साहु के लिए, बल्कि पूरे झारखंड राज्य के लिए गर्व की बात है।

झारखंड के शहरी परिवहन में सहयोग करेगा स्वीडन

रांची. विश्व आर्थिक मंच दावोस के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने टाटा स्टील के शीर्ष नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक के दौरान टाटा स्टील ने झारखंड में न्यू एज ग्रीन स्टील टेक्नोलॉजी के तहत कुल 11,000 करोड़ रुपये के निवेश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसे लेकर आशय पत्र एवं सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस निवेश के अंतर्गत हिरसाना ईजी एंड मेल्ट टेक्नोलॉजी में 7,000 करोड़ रुपये, काम्बी मिल परियोजना में 1,500 करोड़ रुपये तथा टिनप्लेट विस्तार परियोजना में 2,600 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। ये सभी परियोजनाएं पर्यावरण अनुकूल ग्रीन स्टील तकनीक पर आधारित होंगी, जिनमें नीदरलैंड और जर्मनी की उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार टिकाऊ औद्योगिक विकास, स्वच्छ तकनीक और स्थानीय रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। टाटा स्टील के साथ यह साझेदारी राज्य की औद्योगिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के साथ-साथ झारखंड को हरित औद्योगिक परिवर्तन का अग्रणी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह निवेश न केवल राज्य के खनिज आधारित औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती देगा, बल्कि ग्रीन एनर्जी और जलवायु-अनुकूल विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी गति प्रदान करेगा। हिताची कम्पनी ने विद्युत, उच्च स्तरीय ग्रिडिंग एवं उन्नत अवसंरचना के लिए निवेश पर अपना प्रस्ताव दिया है। मुख्यमंत्री को व्हाइट बैच से किया गया सम्मानित  विश्व आर्थिक मंच की तरफ से मुख्यमंत्री को व्हाइट बैज प्रदान किया गया तथा मुख्यमंत्री की ओर से सहयोग का औपचारिक पत्र सौंपा गया। यह सहयोग फोरम के उत्कृष्टता केंद्रों के अनुरूप तीन प्रमुख विषयों क्रिटिकल मिनरल्स एवं नई ऊर्जा, तथा जलवायु और जैव विविधता संरक्षण पर आधारित है। राज्य सरकार का विजन 2050 व्यापक रूप से फोरम की समावेशी समाज की अवधारणा के साथ पूर्णतः मेल खाती है। इस सहभागिता के माध्यम से सीख, ज्ञान-विनिमय और क्रियान्वयन आधारित सहयोग की दिशा में एक सार्थक और दीर्घकालिक साझेदारी की कोशिश की जाएगी। वहीं, पिछले वर्ष झारंड सरकार के स्वीडन के आधिकारिक यात्रा का प्रतिफल भी सामने आया है। स्वीडन ने अर्बन ट्रांसपोर्ट में निवेश को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाया है। इसको लेकर स्वीडन और भारत के बीच अप्रैल में संभावित सहयोग और निवेश के लिए राउंड टेबल मीटिंग आयोजित किया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री की स्वीडन की उन कंपनियों से भी मुलाकात हुई, जिनसे स्वीडन की यात्रा के दौरान पिछले वर्ष बातचीत हुई थी। वर्ल्ड वुमन लीडर्स फोरम के प्रतिनिधियों से मुलाकात बैठक में महिला राजनीतिक नेतृत्व को सशक्त बनाने, विशेषकर हाशिये पर रहने वाले वर्गों से आने वाली महिलाओं के लिए झारखंड सरकार के साथ एक सहयोगात्मक ढांचा स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की गई। साथ ही भारत चैप्टर की स्थापना तथा सभी राजनीतिक दलों की महिला प्रतिनिधियों के लिए एक साझा और गैर-दलीय मंच के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया, जिसमें संवाद, क्षमता निर्माण और सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन एवं आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टीवी नरेंद्रन, स्वीडन इंडिया बिज़नेस काउंसिल की चीफ इंडिया रिप्रेजेंटेटिव सेसिलिया ओल्डने, वुमन पालिटिकल लीडर्स फोरम की अध्यक्ष सिलवाना कोच-मेहरिन, विश्व आर्थिक मंच से विराज मेहता, हिताची इंडिया के क्षेत्रीय प्रमुख भारत कौशल एवं टेक महिंद्रा के आइएमईए डिवीजन के प्रमुख एवं अध्यक्ष साहिल धवन शामिल हुए।

अब बिना नली के जांच: 2040 में पिल एंडोस्कोपी से हार्ट व फैटी लिवर मरीजों को राहत

इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल द्वारा राष्ट्रीय स्तर की इंदौर जीआई कान्क्लेव का आयोजन किया गया। तीन दिवसीय आयोजन में देशभर के लिवर और एंडोस्कोपी विशेषज्ञों ने गैस्ट्रोएंट्रोलाजी में हो रहे आधुनिक शोध और इलाज की नई तकनीकों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने चर्चा की कि वर्ष 2040 तक आज की जटिल एंडोस्कोपी जांच एक साधारण पिल (कैप्सूल) से संभव हो जाएगी। यह कैप्सूल न सिर्फ पाचन तंत्र की जांच करेगा, बल्कि फैटी लिवर, हार्ट की बीमारी और लकवे जैसी गंभीर समस्याओं की पहचान और इलाज में भी मददगार होगा। इसके अलावा शराब के बढ़ते सेवन और उससे जुड़ी लिवर बीमारियों पर विशेष चिंता जताई गई।   विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर इलाज नहीं होने पर मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है। कान्क्लेव में पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित वरिष्ठ लिवर विशेषज्ञ शिव सरिन की पुस्तक ओन योर बाडी का विमोचन किया गया। साथ ही पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित एंडोस्कोपी विशेषज्ञ डी नागेश्वर रेड्डी का सम्मान किया गया। इंदौर के वरिष्ठ चिकित्सक सुनील जैन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। कांफ्रेंस के आर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी अमित अग्रवाल ने बताया कि कांफ्रेंस के पहले दिन सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) पर आधारित 16 जटिल केस किए गए। इनमें गालब्लैडर कैंसर, पैंक्रियाज कैंसर, पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट में प्लास्टिक और मेटैलिक स्टेंट डालना, गैस्ट्रिक वैरिक्स में ग्लू और काइल से इलाज जैसे मामले शामिल रहे। लंबे समय से खून की उल्टी से पीड़ित मरीजों का ईयूएस के माध्यम से सफल उपचार भी किया गया। लाइव डेमो के जरिए ईयूएस एनाटामी को समझाया गया और बायोप्सी व स्टेंट डालने की प्रक्रिया बताई गई। इसके अलावा कांफ्रेंस में एल्कोहालिक लिवर डिजीज, मेटाबालिक एल्कोहालिक लिवर डिजीज (मेट-एएलडी), फैटी लिवर और एसाइटिस यानी पेट में पानी भरने की समस्या पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि अधिकांश लिवर रोग शराब, फैटी लिवर और गलत खानपान से होते हैं। इस दौरान नई दिल्ली के आदर्श चौधरी, अमित महदेव, मुंबई के अनिल अरोरा, हैदराबाद के प्रमोद गर्ग आदि को सम्मानित किया गया।

रांची के स्कूल में बच्चों ने बनाए 10000 सीड बॉल

रांची. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल करने के लिए उत्क्रमित मध्य विद्यालय महावीर नगर ऊपर टोला के प्रधानाचार्य रंथु साहु के नेतृत्व में शून्य से सशक्तीकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों को हरित विद्यालय की राह दिखाई जा रही है। बच्चों को सीड बॉल बनाने के गुर सिखाए जा रहे हैं ताकि उन्हें सामाजिक सरोकार से जोड़ा जा सके। यह आइडिया स्कूल के प्राचार्य का था तो बच्चों ने भी जमकर पसीना बहाया और सीड बाल बनाकर अपने आसपास के क्षेत्रों में उसे फेंककर हरियाली बढ़ाने का प्रयास किया। इस बार अच्छी वर्षा होने के कारण अपेक्षित सफलता भी मिली। प्राचार्य ने उत्साहित होकर कहा कि जिन जिन जगहों पर सीड बाल बच्चों के द्वारा फेंके गए थे वहां नई पौध निकल आई है। 10 हजार सीड बॉल किए तैयार प्राचार्य ने बताया कि बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से सीड बाल तैयार किए जाने का लक्ष्य रखा गया था। बीज विद्यालय के पोषक क्षेत्र से विभिन्न प्रकार के बीज जैसे कटहल, आम, जामुन, महुआ, बढ़हर, करंज, इमली, कुसुम, डोरी, खजूर, केंद, शरीफा के अलावे विभिन्न प्रकार के बीज बच्चों के द्वारा विद्यालय में इकट्ठा किया गया। दस हजार सीड बाल बनाने के लिए विद्यालय के चार हाउस, इको क्लब, बाल संसद अन्य बच्चे एवं शिक्षक के सहयोग से तैयार किया गया। बताया कि सीड बाल वहां फेका गया जहां जमीन खाली थी और जहां झाड़ियों का झुंड था ताकि नई पौध निकालने पर उसका कोई नुकसान न हो। स्कूल प्रबंधन ने खलारी सीसीएल कर्मी को दिए तीन हजार सीड बॉल स्कूल प्रबंधन ने खलारी सीसीएल कर्मी को भी लगभग तीन हजार सीड बाल दिए। जहां कोयला निकालकर मिट्टी भरी गई, जहां खाली जमीन पड़ी थी, वहां सीड बाल लगाने के लिए दिए ताकि पर्यावरण को हरा भरा बनाया जा सके। इस कार्य में अपेक्षित सफलता मिली है और क्षेत्र के लोग इस कार्य की सराहना भी कर रहे हैं।

हिंदू धर्म से था लगाव, बालाघाट में जगद्गुरु शंकराचार्य के सान्निध्य में मोहसिन ने अपनाया सनातन

बालाघाट जात-पात में बंटे सकल सनातनी हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए हिंदू एकता परिचय देने के लिए बालाघाट जिला मुख्यालय के इतवारी कृषि उपज मंडी के प्रागंण में मंगलवार को विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन अनंत श्री धर्म सम्राट श्रीमद जगत स्वामी श्री प्रज्ञानानंद सरस्वती महाराज के मुख्य आतिथ्या में किया गया। आयोजित इस हिंदू सम्मेलन में जगत गुरु शंकराचार्य की मौजूदगी में बालाघाट के मोहसिन ने सनातन धर्म से प्रेरित होकर हिंदू धर्म को अपनाया है, उनके इस घर वापस पर जगत गुरु ने कहा कि भारत में रहने वाले सभी जन सनातनी है, बस उनकी घर वापसी का इंतजार सभी को है। चार साल से इंतजार कर रहा था मोहसिन     सनातन धर्म अपनाने को लेकर पूर्व में वार्ड क्रमांक 19 आजाद चौक व वर्तमान में वार्ड क्रमांक 13 गर्रा निवासी ने बताया कि वे बचपन से ही हिंदू धर्म व विचार के प्रति आकर्षित रहे हैं।     हिंदू धर्म सभी को एक साथ मिलकर रहने का संदेश दिया जाता है, यहां गाय को माता मानकर पूजा जाता है।     इस कारण से वे सदैव से ही हिंदू धर्म के प्रति लालायित रहे है। उन्होंने बताया कि विगत चार वर्षाें से सनातन धर्म अपनाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन उचित मंच नहीं मिल पा रहा था।     जब पता चला कि हिंदू सम्मेलन हो रहा है, और जगत गुरु भी यहां मौजूद तो इससे बेहतर मौका उन्हें दूसरा ओर नहीं मिलना था।     बता दें कि मोहसिन शेख के घर पर उनकी मां और मौसी है उन्होंने वर्तमान में अकेले ही सनातन धर्म को अपनाया है। हिंदू सम्मेलन बनेगा घर वापसी का माध्यम हिंदू सम्मेलन के दौरान विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष यज्ञेश लालु चावड़ा ने कहा कि ये बड़े ही हर्ष का विषय है कि एक मुस्लिम भाई ने आज घर वापसी की है, और सनातन धर्म को अपनाया है, जो भी मुस्लिम भाई या अन्य जो भटक गए है और दूसरा धर्म अपना लिए है उनके लिए भी हिंदू सम्मेलन वापसी का माध्यम है, जो भी भाई घर वापस आना चाहते है वे बिना किसी झिझक के घर वापसी कर सकते है, आगामी समय में भी ऐसे हिंदू सम्मेलन पूरे देशभर में आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान जिला संयोजक शुभम श्रीवास सहित अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

साहित्य उत्सव से छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पहचान

आलेख – छगन लोन्हारे उप संचालक (जनसंपर्क विभाग) रायपुर, बसंत पंचमी 23 जनवरी से नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देश भर के 100 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल होने जा रहे हैं। इस तीन दिवसीय उत्सव से छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर पूरा प्रदेश रजत महोत्सव मना रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह उत्सव न केवल छत्तीसगढ़ को बल्कि पूरे देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ को साहित्यिक जगत में एक नई पहचान प्रदान करेगा तथा जनसमुदाय को साहित्य, लेखन और पठन-पाठन की ओर प्रेरित करेगा। साहित्य महोत्सव के दौरान साहित्य विमर्श खुले संवाद, समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श होगा। साहित्य महोत्सव को लेकर आम-लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। आज जब सोशल मीडिया के कोलाहल मंे ज्ञान की धारा अक्सर सूचनाओं के शोर में दब जाती है। ऐसे समय में साहित्य उत्सव एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। जहां विचार-विमर्श के बीच संवाद की संस्कृति जीवित रहती है। सृजन वही जन्म लेता है, जहां मन खुला हो और कथा वही आकार लेती हैं जहां मनुष्य अपने सत्य से संवाद करने का साहस रखता है। साहित्य महोत्सव के लोगो (डिजाइन) में अंकित ‘‘आदि से अनादि’’ तक वाक्य साहित्य के उस अटूट यात्रा को दर्शाता है, जिसमें आदिकालीन रचनाओं से लेकर निरंतर विकसित हो रहे आधुनिक साहित्य तक सभी रूप समाहित हैं। साहित्य कालातीत है, वह समय, समाज भाषा और पीढ़ियों को जोड़कर चलने वाली निरंतर धारा हैै। तीन दिनों तक पुरखौती मुक्तांगन में साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और कला-प्रदर्शनियों का जीवंत केंद्र बनेगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सांस्कृतिक गर्व का विषय है क्योंकि इसमें राज्य की हजारों साल पुरानी साहित्यिक जड़े, जनजातीय परंपराएं, सामाजिक समरसता और आधुनिक रचनात्मक दृष्टि सभी का सुंदर सार्थक और कलात्मक संगम दिखाई देगा। छत्तीसगढ़ की साहित्यिक यात्रा आदि से अनादि तक अविचल, जीवंत और समृद्ध रही है, और आगे भी इसी धारा में निरंतर विकास की नई कहानियां लिखती रहेंगी। साहित्य उत्सव में कुल 11 सत्र शामिल होंगे, इनमें 5 समानांतर सत्र, 4 सामूहिक सत्र और 3 संवाद सत्र आयोजित किये जाएंगे जिनमें साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों के बीच सीधा संवाद और विचार-विमर्श होगा। रायपुर साहित्य उत्सव साहित्य, विचार और संस्कृति के संगम का उत्सव है, इसमें युवाओं, शिक्षकों, लेखकों और आम पाठकों की सहभागिता रहेगी। नई पीढ़ी को साहित्य विचार और संस्कृति से जोड़ना इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य है। उत्सव के दौरान पुस्तक मेला का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 40 स्टॉल लगाएं जाएंगे जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकें प्रदर्शित की जाएगी एवं विक्रय के लिए उपलब्ध रहेगी। रायपुर साहित्य उत्सव में विशेष रूप से चाणक्य नाटक का मंचन किया जाएगा जो भारतीय बौद्धिक परंपरा और नाट्य कला का प्रभावशाली उदाहरण होगा। इसके साथ ही लोकनृत्य, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शको को राज्य की जीवंत लोक संस्कृति से रू-ब-रू कराया जाएगा। विख्यात कवियों की उपस्थिति में कवि सम्मेलन आयोजित होगी, जहाँ उनकी सशक्त रचनाएँ श्रोताओं को साहित्यिक रसास्वादन कराएँगी। साथ ही पत्रकारों, विचारकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ खुले संवाद सत्र आयोजित किए जाएँगे, जिनमें समकालीन सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर सार्थक चर्चा होगी। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना, विचार परंपरा और सांस्कृतिक आत्मा को राष्ट्रीय संवाद से जोड़ने की एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 न केवल लेखकों और पाठकों के बीच सेतु बनेगा, बल्कि नई पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और विचार के प्रति संवेदनशील बनाने का भी माध्यम बनेगा। साहित्यिक विमर्श, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध यह तीन दिवसीय उत्सव नवा रायपुर को देश के प्रमुख साहित्यिक केंद्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और यादगार अध्याय सिद्ध होगा। छत्तीसगढ़ की साहित्यिक आत्मा और लोक स्मृति में बसे भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की एक रचना – हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था, मैं व्यक्ति को नहीं, हताशा को जानता था, हम दोनों साथ चले, साथ चलने को जानते थें यही वह साहित्य है जो मनुष्य को धैर्य देता और साथ चलने की सभ्यता सिखाता है।

युवराज मौत मामले में पहली गिरफ्तारी, नोएडा पुलिस ने बिल्डर को दबोचा

नोएडा दिल्ली एनसीआर के नोएडा सेक्टर-150 में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में पहली गिरफ्तारी हो गई है। ये गिरफ्तारी MZ विशटाउन के बिल्डर और मालिक की हुई है। उसका नाम अभय कुमार है। उसे नॉलेज पार्क पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस में दर्ज FIR में दो बिल्डर एमजेड विश्टाउन और लोटस ग्रीन को नामजद किया गया है।   योगी बोले- 5 दिन में रिपोर्ट सौंपिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना की जांच रिपोर्ट 5 दिन के अंदर तलब की है। इस मामले को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री ने एक 3 सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया है। उत्तर प्रदेश शासन ने सोमवार को नोएडा विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया था। अभी तक नोएडा विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पद पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। SIT जांच पर क्या बोले अधिकारी मेरठ जोन के एडीजी और एसआईटी हेड भानू भास्कर ने बताया- नोएडा प्राधिकरण टीम, नोएडा जिला अधिकारी, नोएडा पुलिस कमिश्नर समेत सभी लोग वहां मौजूद हैं। हमारी एसआईटी टीम ने जांच शुरू कर दी है। शासन के निर्देशों पर हम पांच दिनों के अंदर इसकी रिपोर्ट दे देंगे। सभी लोगों से बातचीत की जाएगी। सभी से बात करने के बाद देखेंगे कि आखिर किन कारणों से ये एक्सीडेंट हुआ है। गड्डों की पहचान, सुरक्षा के उपाय के आदेश सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जीएनआईडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CO) एन जी रवि कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सड़कों पर या उसके आसपास के सभी गड्ढों की पहचान करें। उन्हें तुरंत भरें तथा एक्सीडेंट की आशंका वाली जगहों को बिना किसी देरी के चिह्नित करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि साइन बोर्ड, रिफ्लेक्टर और ब्रेकरों सहित जरूरी सुरक्षा उपाय तीन दिनों के भीतर सभी सड़कों पर लागू किए जाएं। युवराज की हादसे में ऐसे हुई थी मौत मृतक इंजीनियर युवराज मेहता की कार 16 जनवरी को निर्माणाधीन स्थल के पास पानी से भरे गड्ढे में गिर गयी थी। उस निर्माणाधीन स्थल पर कोई अवरोधक भी नहीं था। यह गड्ढा एक मॉल के भूमिगत तल के निर्माण के लिए खोदा गया था। इस घटना में लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं।  

झारखंड निकाय चुनाव 2026 में 15 लाख तक तय की खर्च लिमिट

रांची. झारखंड में 2026 के निकाय चुनावों का बिगुल बज चुका है। अगर आप पार्षद, मेयर या चेयरपर्सन बनने का सपना देख रहे हैं, तो नियमों की ये बैरियर पार करनी होंगी। राज्य चुनाव आयोग ने हाल ही में खर्च सीमा को 15 लाख रुपये तय किया हैऔर आरक्षित सीटों पर जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य है। यह रिपोर्ट झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 और नवीनतम अधिसूचनाओं पर आधारित है, जिसमें पात्रता से लेकर चुनाव व्यय तक सब कुछ शामिल है। दो बच्चों की नीति और कर क्लीयरेंस जैसे नियम अब और सख्त हैं। 1. पात्रता मानदंड झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 579 के अनुसार, उम्मीदवार का नाम नगरपालिका मतदाता सूची में होना चाहिए। आरक्षित सीटों के लिए अतिरिक्त शर्तें लागू हैं: न्यूनतमआयु: 21 वर्ष। इससे कम आयु पर अयोग्यता (धारा 18(b))।     नागरिकता: भारतीय नागरिक होना जरूरी (धारा 18(a))।     आरक्षित सीटें: SC, ST, BC या महिला आरक्षण वाली सीटों पर उम्मीदवार उसी कैटेगरी का होना चाहिए। राज्य चुनाव आयोग रोटेशन आधार पर आरक्षण तय करता है (धारा 16 और 27)।     मतदाता होना: उम्मीदवार को उस क्षेत्र की विधानसभा मतदाता सूची में नाम होना चाहिए (धारा 555)।     शैक्षणिक योग्यता: कोई अनिवार्य योग्यता नहीं, लेकिन शपथ पत्र में शिक्षा विवरण देना पड़ता है (धारा 543)। एक उम्मीदवार वार्ड सदस्य और मेयर/चेयरपर्सन दोनों पदों पर लड़ सकता है। 2. अयोग्यता के आधार धारा 18 में अयोग्यता के कई आधार हैं। इनमें से कोई भी लागू होने पर चुनाव लड़ना या पद संभालना असंभव।     दो बच्चों की नीति: दो से ज्यादा जीवित बच्चे होने पर अयोग्य (धारा 18(n))। अपवाद: अधिनियम शुरू होने (9 फरवरी, 2012) के एक साल के अंदर दो से ज्यादा बच्चे होने पर छूट, लेकिन 9 फरवरी, 2013 के बाद तीसरा बच्चा होने पर पूरी तरह अयोग्य।     कर बकाया: पिछले साल का नगरपालिका कर बकाया होने पर अयोग्य (धारा 18(l))। कर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जरूरी।     आपराधिक रिकॉर्ड: 6 महीने से ज्यादा सजा (राजनीतिक अपराध छोड़कर), या फरार होना (धारा 18(h))।     सरकारी सेवा: सरकारी या लोकल अथॉरिटी की जॉब में होना (धारा 18(c))।     अन्य: दिवालिया, मानसिक अक्षमता, भ्रष्टाचार (6 साल तक अयोग्य), या 3 लगातार मीटिंग्स से गैरहाजिर (धारा 18(o))।     दोहरी सदस्यता: विधायक, सांसद या पंचायत सदस्य होने पर 15 दिनों में एक पद छोड़ना (धारा 18)। अयोग्यता पर राज्य चुनाव आयोग फैसला करता है। 3. नामांकन प्रक्रिया नामांकन आयोग द्वारा घोषित तिथियों पर (धारा 539)। मुख्य बिंदु-     शपथ पत्र: नामांकन के साथ जरूरी (धारा 543)। इसमें आपराधिक रिकॉर्ड, संपत्ति, देनदारियां, शिक्षा शामिल।     झूठा शपथ पत्र: 1 साल कैद या जुर्माना (धारा 544)।     जमा राशि: आयोग द्वारा तय, सामान्य कैटेगरी के लिए अलग।     प्रक्रिया: रिटर्निंग ऑफिसर (उप जिलाधिकारी स्तर) के पास जमा। सहायक रिटर्निंग ऑफिसर मदद करते हैं (धारा 541)।     आरक्षण पालन: केवल योग्य उम्मीदवार आरक्षित सीटों पर।     दोहरी नामांकन: Allowed, लेकिन जीतने पर एक पद चुनना। नामांकन जांच के बाद, गलती पर रद्दीकरण। इस समाचार में उपयोग किए गए क्रिएटिव ग्राफिक्स को NoteBookLM आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस प्रोग्राम की सहायता से बनाया गया है। 4. आरक्षण व्यवस्था धारा 16 और 27 के मुताबिक-     SC/ST/BC/महिलाओं के लिए 50% तक आरक्षण।     आरक्षित कैटेगरी में महिलाओं के लिए सब-आरक्षण।     आयोग द्वारा हर 10 साल में रिव्यू और रोटेशन।     मेयर/चेयरपर्सन के लिए भी जनसंख्या आधारित आरक्षण। 5. जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता आरक्षित सीटों (SC/ST/BC) पर लड़ने के लिए वैध जाति प्रमाण पत्र नामांकन के साथ जमा करना अनिवार्य है। प्रमाण पत्र जिला मजिस्ट्रेट, अनुमंडल पदाधिकारी या अधिकृत अथॉरिटी द्वारा जारी किया जाता है। वैधता आमतौर पर लाइफटाइम होती है, लेकिन चुनाव के लिए हालिया वेरिफिकेशन जरूरी। BC-I/BC-II के लिए नॉन-क्रीमी लेयर डिक्लेरेशन भी लगता है। फॉर्मेट राज्य सरकार के सर्कुलर के अनुसार, जैसे SC/ST के लिए स्पेसिफिक फॉर्मेट में संशोधन। गलत प्रमाण पत्र पर नामांकन रद्द और कानूनी कार्रवाई। राज्य चुनाव आयोग ने हालिया सर्कुलरों में सख्ती बढ़ाई है। 6. चुनाव प्रक्रिया और मतदान     पर्यवेक्षण: राज्य चुनाव आयोग (धारा 538)। जिला चुनाव अधिकारी (उपायुक्त) कोऑर्डिनेट करता है।     मतदान: डायरेक्ट इलेक्शन (धारा 553)। अमिट स्याही और आईडी जरूरी (धारा 554)।     मतदान दिवस: छुट्टी (धारा 575); शराब बैन 48 घंटे पहले (धारा 576)।     पर्यवेक्षक: आयोग द्वारा अपॉइंट (धारा 556)।     अपराध: रिश्वत, धमकी, बूथ कैप्चरिंग पर सजा (धारा 558-574)। बूथ कैप्चरिंग पर 1-3 साल कैद। 7. चुनाव व्यय और लेखा     सीमा: राज्य चुनाव आयोग द्वारा तय। 2026 चुनावों के लिए उम्मीदवारों पर 15 लाख रुपये की अधिकतम खर्च सीमा लागू। निकाय के आधार पर अलग-अलग, जैसे मेयर के लिए ज्यादा, वार्ड के लिए कम। उल्लंघन पर अयोग्यता (धारा 577)।     लेखा: नामांकन से रिजल्ट तक हिसाब रखना जरूरी। फेल होने पर 3 साल अयोग्य (धारा 578)।     मॉनिटरिंग: आयोग द्वारा सख्त निगरानी, बैंक ट्रांजेक्शन चेक। 8. शपथ और पद ग्रहण     पार्षदों के लिए: संविधान निष्ठा शपथ (धारा 19)। 3 महीने में लेनी, वरना पद रिक्त।     मेयर/चेयरपर्सन के लिए: गोपनीयता शपथ (धारा 29)। 9. रिकॉल और पद की अवधि     अवधि: 5 साल (धारा 20)।     रिकॉल: वार्ड वोटर्स की बहुमत पिटीशन पर, 2/3 पार्षदों की अप्रूवल से (धारा 21)। पहले साल में नहीं। 10. चुनाव याचिका     फाइलिंग: रिजल्ट के 45 दिनों में कोर्ट में (धारा 580)।      आधार: अयोग्य उम्मीदवार, भ्रष्टाचार, गलत नामांकन।     भ्रष्टाचार: रिश्वत, झूठे स्टेटमेंट, फ्री ट्रांसपोर्ट आदि (धारा 586)। दोषी पर 5 साल अयोग्य। यह रिपोर्ट चुनाव आयोग के आधिकारिक स्रोतों और नवीनतम अपडेट्स पर बनी है। चुनाव तिथियां जल्द घोषित हो सकती हैं। उम्मीदवार आयोग की वेबसाइट चेक करें और अपडेट रहें।

पहल रंग लाई: बुरहानपुर के 25 सरकारी स्कूलों में लगे RO प्लांट

बुरहानपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्र के 25 बड़े सरकारी स्कूलों में अब विद्यार्थियों और शिक्षकों को आरओ का शुद्ध पेयजल मिलेगा। जिससे वे दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से बच सकेंगे। चयनित स्कूलों में आरओ यूनिटों की स्थापना की जा चुकी है। मंगलवार को सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र पाटिल ने इनका शुभारंभ भी करा दिया। मशीन का शुद्ध पानी पीकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने स्कूलों को ये मशीनें उपलब्ध कराई हैं।   उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में अन्य स्कूलों में भी आरओ मशीनें लगवाई जाएंगी। इससे उन स्कूलों के विद्यार्थियों को भी शुद्ध पानी उपलब्ध हो सकेगा। बता दें कि जिले के कई सरकारी स्कूलों की पानी की टंकियों की सालों तक सफाई नहीं होती। साथ ही पानी की गुणवत्ता भी नहीं परखी जाती है। इन स्कूलों में लगाई आरओ यूनिट पहले चरण में जिन सरकारी स्कूलों में आरओ यूनिटें लगाई गई हैं, उनमें हायर सेकंडरी स्कूल लोनी, माध्यमिक विद्यालय बोहरडा, माध्यमिक विद्यालय हतनूर, हायर सेकंडरी स्कूल बिरोदा, कन्या माध्यमिक शाला बहादरपुर, हायर सेकंडरी स्कूल बोदरली, हायर सेकंडरी स्कूल जसौंदी, हायर सेकंडरी स्कूल बंभाडा, एकीकृत शाला बोरसल, सुभाष उत्कृष्ट स्कूल बुरहानपुर, कन्या शाला चौक बाजार, सावित्री बाई फूले कन्या शाला, कन्या उर्दू स्कूल हरीरपुरा, पुरुषार्थी हायर सेकंडरी स्कूल, माध्यमिक शाला लालबाग, माध्य स्कूल फोपनार, हायर सेकंडरी स्कूल इच्छापुर, हायर सेकंडरी स्कूल दापोरा, दर्यापुर, निम्बोला, कन्या हाईस्कूल धूलकोट, हायर सेकंडरी स्कूल जैनाबाद, हाईस्कुल अम्बा, सुक्ता नेपानगर और हायर सेकंडरी स्कूल खातला शामिल हैं। मेंटेनेंस के लिए करना होगा सचेत सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जन प्रतिनिधियों और सरकार के प्रयास तभी फलीभूत होते हैं, जब सुविधाओं का सुचारू संचालन होता है। सांसद द्वारा उपलब्ध कराई गईं आरओ मशीनों के मामले में स्कूल प्राचार्यों को सचेत करने की जरूरत होगी। अन्यथा मेंटेनेंस के अभाव में ये मशीनें अन्य स्कूलों की तरह चंद महीने बाद य तो बंद हो जाएंगे अथवा पानी को साफ करना बंद कर देंगी। जिससे लाखों रुपये बर्बाद हो जाएंगे।

उद्यानिकी खेती से बदली किसान की आर्थिक तस्वीर, धान की तुलना में स्ट्रॉबेरी की खेती में डबल मुनाफा

तकनीकी मार्गदर्शन, शासन की सब्सिडी से घटा खर्च, बढ़ी आमदनी रायपुर, जिले में शासन की उद्यानिकी प्रोत्साहन योजनाओं से किसान अब परंपरागत खेती की सीमाओं को तोड़कर नई संभावनाओं की ओर आगे बढ़ रहे हैं। अब किसान केवल धान पर निर्भर न रहकर अधिक लाभ देने वाली  फसलों को अपना रहे हैं। किसान लाल बहादुर सिंह बताया कि ढाई एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती करने में लगभग 2 लाख रुपये की लागत आई है। इससे उन्हें करीब 9 लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान है।          सरगुजा जिले के भगवानपुरखुर्द निवासी किसान श्री लाल बहादुर सिंह ने भी इसी सोच के साथ खेती में नवाचार अपनाया और आज वे एक सशक्त, आत्मनिर्भर एवं उन्नत किसान के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। धान से उद्यानिकी की ओर किया सफल बदलाव        कृषक श्री लाल बहादुर सिंह ने बताया कि वर्षों से धान की खेती करने के बाद भी अपेक्षाकृत सीमित लाभ ही मिल पाता था। लागत बढ़ने और मौसम पर निर्भरता के कारण मुनाफा कम हो जाता था। इसी बीच उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसल की जानकारी दी और इसके फायदे समझाए। इससे उन्हें अपनी खेती में बदलाव करने की प्रेरणा मिली। छोटे क्षेत्र से शुरुआत, बड़े रकबे तक विस्तार       उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत उन्होंने मात्र 50 डिसमिल क्षेत्र से की थी। लाभ मिलने पर अगले वर्ष एक एकड़ में खेती की और फिर तीसरे व चौथे वर्ष इसे बढ़ाकर ढाई एकड़ तक कर दिया। वर्तमान में वे ढाई एकड़ क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की सफल खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। स्ट्रॉबेरी की खेती में लागत कम अधिक मुनाफा        कृषक श्री सिंह ने बताया कि ढाई एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती करने में लगभग 2 लाख रुपये की लागत आई है। इससे उन्हें करीब 9 लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान है। लागत निकालने के बाद लगभग 7 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि यही ढाई एकड़ यदि धान की खेती में लगाया जाता, तो लगभग 90 क्विंटल उत्पादन होता, जिससे शासकीय उपार्जन केन्द्र में बेचने पर करीब 3 लाख रुपये की आमदनी होती। धान की खेती में लगभग 1 लाख रुपये की लागत आने के बाद शुद्ध लाभ मात्र 2 लाख रुपये के आसपास ही रहता। उद्यानिकी में सब्सिडी से घटा खर्च, बढ़ा लाभ            किसान श्री लाल बहादुर सिंह ने बताया कि उद्यानिकी विभाग की इस योजना के अंतर्गत पौध, खाद और बीज की राशि डीबीटी के माध्यम से वापस कर दी जाती है। उन्हें लगभग 80 से 85 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्राप्त होगी। विभाग द्वारा समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाता है, जिससे खेती और अधिक सफल हो रही है। अधिकारियों का मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी         श्री लाल बहादुर सिंह ने बताया कि वे पौधे स्वयं मंगवाते हैं और उद्यानिकी विभाग द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार खेती करते हैं। विभागीय अधिकारियों द्वारा खेत का निरीक्षण कर आवश्यक सलाह दी जाती है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होता है और बाजार में अच्छी कीमत मिल जाती है। अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने लाल बहादुर सिंह         श्री सिंह ने कहा कि शासन की उद्यानिकी योजना से अन्य किसान भी लाभ ले सकते हैं। धान जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं। आज वे स्वयं उद्यानिकी खेती से सशक्त और आत्मनिर्भर बने हैं तथा अन्य किसानों को भी इस दिशा में प्रेरित कर रहे हैं। उद्यानिकी प्रोत्साहन के लिए शासन का जताया आभार          किसान श्री लाल बहादुर सिंह ने उद्यानिकी खेती को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं से प्रदेश का किसान आज सशक्त, आत्मनिर्भर और उन्नत कृषक बन रहा है।