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पेसा के सफल क्रियान्वयन और उपलब्धियों का हो व्यापक जनजागरण, बोले राज्यपाल पटेल

पेसा के सफल क्रियान्वयन और उपलब्धियों का हो व्यापक जनजागरण : राज्यपाल  पटेल लोक भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में पेसा, अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल ने जनजातीय समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन को विकास के नए आयाम दिए हैं। जनजातीय समुदाय और ग्राम सभाओं में पेसा नियम की जन जागरूकता आवश्यक है। संबंधित विभाग पेसा नियम के सफल क्रियान्वयन और उपलब्धियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। ग्राम सभा और समितियों की विशेष सफलताओं को जन-जन तक पहुंचाने नवाचार करें। राज्यपाल श्री पटेल ने यह बात पंचायत एवं ग्रामीण विकास और जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा बैठक में कहीं। उन्होंने पेसा ग्राम सभाओं और पेसा समितियों द्वारा किए गए विशेष कार्यों की जानकारी ली और सराहना की। लोक भवन में शुक्रवार को आयोजित समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल भी मौजूद रहे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि पेसा नियमों के तहत गठित शांति एवं विवाद निवारण समितियों द्वारा स्थानीय स्तर पर विवाद निवारण की सफलता अत्यंत उत्साहवर्धक है। यह सामाजिक सौहार्द्र एवं भाईचारे की भावना को मजबूत कर रही है। जनजातीय समुदाय को अनावश्यक मुकदमों एवं आर्थिक बोझ से मुक्ति दिलाने का सराहनीय कार्य कर रही है। इन महत्वपूर्ण उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाया जाना चाहिए। संबंधित विभाग इन सफलताओं की बुकलेट बनाएं और वितरित करें। बैठक में पेसा ग्राम सभाओं के वित्तीय पक्ष, वन ग्रामों को राजस्व में परिवर्तन, ग्राम सभाओं के नजरी नक्शा, लंबित प्रस्ताव, पट्टों की स्थिति, तेंदुपत्ता संग्रहण भुगतान आदि विभिन्न बिन्दुओं की विस्तार से समीक्षा की।   राज्यपाल  पटेल को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  पटेल ने पेसा नियमों के प्रभावी प्रचार-प्रसार, आगामी लक्ष्यों, उपलब्धियों, कठिनाईयों और उनके व्यावहारिक समाधान के विभागीय प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पेसा मोबेलाइजर्स के मानदेय के भुगतान संबंधी आगामी नवाचार प्रयासों को बताया। राज्यपाल श्री पटेल को बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने निर्धारित बिन्दुओं पर विस्तार से जानकारी दी। समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव श्री गुलशन बामरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आयुक्त सह-संचालक  छोटे सिंह, जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त सह-संचालक डॉ. सतेन्द्र सिंह, राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव और दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

भोजशाला : बसंत पंचमी से पहले चला बुलडोजर, हिंदू संगठनों ने कहा- पूजा का अवसर पूरे दिन मिलना चाहिए

धार   नगर गौरव दिवस और बसंत पंचमी उत्सव (Basant Panchami) को लेकर धार शहर में तैयारियां तेज हो गई है। आयोजन के मद्देनजर हिंदू संगठनों के साथ ही पुलिस और प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे है। 17 जनवरी को शहर में हिंदू संगठनों द्वारा वाहन रैली निकाली जाएगी, जबकि 23 से 26 जनवरी तक नगर गौरव दिवस के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके चलते शहर की गलियों और मुख्य सड़को पर भगवा पताकाएं, स्वागत द्वार और सजावट की गई है, जिससे पूरा शहर आयोजन से पहले दुल्हन की तरह सजा हुआ नजर आ रहा है। भोजशाला (Bhojshala) और मोतीबाग चौक क्षेत्र में प्रस्तावित धार्मिक कार्यक्रमों को देखते हुए प्रशासन ने सप्ताहिक हाट और अस्थायी दुकानो को खाली करा दिया है। नगर पालिका की टीम ने दोपहर में जेसीबी से एक दुकान तोड़ी (Bulldozer Action), साथ ही गुमटियों को हटाकर पूरा क्षेत्र साफ कर दिया। सुरक्षा की दृष्टि से भोजशाला परिसर को 300 मीटर परिधि को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहेगा। आदर्श रोड से हटाई गई फुटपाथ की दुकानें घोड़ा चौपा‌टी से त्रिमूर्ति चौराहे के बीच आदर्श रोड पर लंबे समय से फुटपाथ पर लग रही सब्जी व फल की दुकानों को प्रशासन ने सख्ती से हटाया। यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए एक दिन पहले ही मुनादी कर चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद नहीं मानने वाले दुकानदारों को गुरुवार को हटाया गया। इसके बाद आदर्श रोड की सडक चौड़ी और सुगम नजर आई। घोड़ा चौपाटी स्थित उत्कृष्ट विद्यालय के सामने हमेशा लगने वाले ठेलों के हटने से वाहन चालकों ने राहत की सांस ली। किला मैदान के पास दी गई थी अस्थायी जगह फुटपाथ से हटाए गए सब्जी विक्रेताओं को किला मैदान के पास अस्थायी रूप से बैठने की जगह बताई गई थी। नगर पालिका द्वारा पहले भी यहां दुकानों को शिफ्ट करने का प्रयास किया गया था, लेकिन विरोध के चलते सफलता नहीं मिल पाई। गुरुवार को भी सड़क से हटाने के बाद दुकानदारों को नई जगह दुकान लगाने की कहा गया, किंतु शिफ्टिंग स्थल पर कोई दुकानदार नहीं पहुंचा। फिक्स प्वाइंट पर पुलिस तैनात शुक्रवार को वसंत पंचमी तिथि होने के चलते भोजशाला से जुड़े आयोजन को लेकर करीब 10 साल बाद इतनी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए माइक्रो मैनेजमेंट किया जा रहा है। संवेदनशील स्थानों पर फिक्स प्वाइंट पर पुलिस जवानों की तैनाती की गई है. वहीं गली-मोहल्लों में पड़े ईंट-पत्थर भी हटवाए जा रहे हैं, ताकि किसी तरह की अपिय स्थिति न बने। बसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की मांग केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन भोजशाला में शुक्रवार 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर एक दिन के लिए सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा की अनुमति देने की मांग को लेकर धार में गतिविधियां तेज हो गई है। गुरुवार को जिला मुख्यालय धार में अग्रवाल समाज, रामीमाली समाज नौगांव, लोधा समाज और सकल वैश्य समाज द्वारा अलग-अलग ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए। ज्ञापन प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय एवं पुरातत्व महानिदेशक के नाम संबोधित है। इनमें 2003 के आदेश का हवाला देते हुए वसंत पंचमी पर निर्विघ्न पूजा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। बसंत पंचमी को लेकर जन जागरण अभियान भी तेज किया जा रहा है। 17 जनवरी से धार में अखंड पूजा के संकल्प के तहत जन जागरण रैलियां निकाली जाएंगी। इसमें युवा वाहन रैली, बाल मनुहार रैली के साथ ही महिलाओं द्वारा भी यात्राएं निकाली जाएंगी। देशभक्ति गीतों से गूंजा आयोजन स्थल मकर संक्रांति के अवसर पर बसंत पंचमी उत्सव समिति कार्यालय में मातृशक्तियों का हल्दी-कुमकुम कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिलाओं ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम को भोजशाला मुक्ति आंदोलन के संयोजक गोपाल शर्मा तथा राजेश शुक्ला ने संबोधित किया। शहर के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी ज्ञापन सौंपने का दौर शुरू हो गया है, दिग्ठान में सकल हिंदू समाज द्वारा पुलिस चौकी पर आवेदन देकर 23 जनवरी वसंत पंचमी को अखंड पूजा की अनुमति देने की मांग की गई। सीएम के नाम ज्ञापन, कोतवाली थाने पर भी आवेदन भोजशाला मोतीबाग चौक पर अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद व राष्ट्रीय बजरंग दल ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तहसीलदार आशीष राठौर को सौंपा। इसमें बसंत पंचमी पर निर्विघ्न पूजन-हवन सुनिश्चित करने की मांग की गई। इस दौरान जिलाध्यक्ष अशोक मुनिया, मालवा प्रांत संगठन मंत्री संजय यादव सहित कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इधर भारतीय किसान संघ भी समर्थन में मैदान में उतर आया है। गुरुवार को भाकिसं पदाधिकारियों ने कोतवाली थाने पहुंचकर थाना प्रभारी दीपकसिंह को भोजशाला वसंत पंचमी को लेकर आवेदन सौंपा।

झारखंड के रिम्स में 8.5 लाख से अधिक ओपीडी और 63 हजार की हुई सर्जरी

रांची. राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर आम लोगों का भरोसा लगातार मजबूत होता जा रहा है। अस्पताल की ताजा वार्षिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में रिम्स की ओपीडी में 8 लाख 58 हजार से अधिक मरीजों ने इलाज कराया, जबकि 78 हजार से ज्यादा मरीजों को इंडोर यानी आइपीडी सेवाएं दी गई। ये आंकड़े न सिर्फ रिम्स की बढ़ती क्षमता को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि राज्य के लोग अब जटिल बीमारियों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करने लगे हैं। हजारों सर्जरी, जटिल इलाज में भी इजाफा रिपोर्ट के अनुसार, वर्षभर में रिम्स में कुल 63,926 सर्जरी की गईं। इनमें 20,995 मेजर आपरेशन शामिल हैं, जबकि 42,931 माइनर सर्जरी की गई। मेजर सर्जरी की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि अब हार्ट, ब्रेन, कैंसर, ट्रामा और अन्य जटिल बीमारियों का इलाज रिम्स में बड़े स्तर पर संभव हो रहा है। इससे मरीजों को बाहर के निजी अस्पतालों या दूसरे राज्यों में रेफर होने की मजबूरी भी कम हुई है। जांच सुविधाओं पर भी बढ़ा भरोसा रिम्स में डायग्नोस्टिक सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक एक साल में कुल 1,40,779 रेडियोलाजी जांच की गई। इनमें 90,758 एक्स-रे, 23,868 अल्ट्रासाउंड और 26,153 सीटी स्कैन शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच उपलब्ध से गंभीर बीमारियों का शुरुआती स्तर पर ही निदान संभव हो पा रहा है, जिससे इलाज की सफलता दर बढ़ी है। लैब सेवाओं पर भारी दबाव पैथोलाजी और सेंट्रल लैब सेवाओं में भी रिकार्ड संख्या में जांच की गई। सेंट्रल लैब में कुल 8,92,531 जांच दर्ज की गई। इनमें हेमेटोलाजी विभाग में 1.75 लाख से अधिक जांच, क्लिनिकल पैथोलाजी में 25,625 जांच, माइक्रोबायोलाजी में 2.72 लाख से अधिक और वायरलाजी व एसपी मालिक्यूलर जांच की संख्या 1.82 लाख रही। यह आंकड़े बताते हैं कि रिम्स राज्य का सबसे बड़ा डायग्नोस्टिक हब बनता जा रहा है। हृदय रोगियों को मिली बड़ी राहत कार्डियोलाजी विभाग में भी मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार एक साल में 35,735 ईसीजी, 17,580 ईको, 1,248 टीएमटी और 302 होल्टर टेस्ट किए गए। इससे बीपी, हार्ट अटैक और अन्य हृदय रोगों की समय पर पहचान और इलाज संभव हो सका। मातृ-शिशु सेवाओं में भी अहम योगदान रिम्स ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्षभर में अस्पताल में 5,214 प्रसव कराए गए, जिनमें 2,773 बालक और 2,441 बालिकाओं का जन्म हुआ। वहीं, 10,165 मौतें दर्ज की गई, जो यह दर्शाती हैं कि रिम्स एक तृतीयक रेफरल सेंटर होने के कारण राज्यभर से गंभीर और जटिल मरीजों का दबाव झेलता है। टीकाकरण में भी सक्रिय भूमिका रिम्स में वर्षभर में कुल 33,505 टीकाकरण किए गए। इसमें बीसीजी, डीपीटी, पेंटावैक, ओपीवी, रोटा वायरस, पीसीवी, हेपेटाइटिस-बी सहित अन्य आवश्यक टीके शामिल हैं। इससे बच्चों और आम लोगों को कई संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा मिली। रिम्स निदेशक डा. राजकुमार के अनुसार ये आंकड़े बताते हैं कि रिम्स अब केवल रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए जीवनरेखा बन चुका है। सीमित संसाधनों और बढ़ते मरीज दबाव के बावजूद रिम्स द्वारा दी जा रही सेवाएं यह संकेत देती हैं कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर आम लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

शत्रुजीत कपूर बने ITBP डायरेक्टर और राकेश अग्रवाल NIA चीफ

चंडीगढ. हरियाणा के रहने वाले दो सीनियर आईपीएस अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं। राज्य के पुलिस महानिदेशक रह चुके शत्रुजीत कपूर जहां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के महानिदेशक का दायित्व संभालेंगे। वहीं, हिमाचल प्रदेश के आईपीएस राकेश अग्रवाल को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के महानिदेशक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। शत्रुजीत कपूर मूल रूप से हरियाणा के जींद जिले के रहने वाले हैं, जबकि राकेश अग्रवाल हरियाणा के हिसार के रहने वाले हैं। शत्रुजीत कपूर को अफसरशाही में भ्रष्टाचार खत्म करने, बिजली विभाग को घाटे से उबारने और परिवहन विभाग में ई-टिकटिंग की सुविधा आरंभ करने के लिए जाना जाएगा। दूसरी बार मिली जिम्मेदारी एनआईए चीफ की जिम्मेदारी हरियाणा के मूल निवासी किसी आईपीएस को दूसरी बार मिली है। राकेश अग्रवाल से पहले असम-मेघालय काडर के 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी वाईसी (योगेश चंद्र) मोदी एनआइए के चीफ रह चुके हैं। वाईसी मोदी मूल रूप से फतेहाबाद जिले के टोहाना के रहने वाले हैं। बाद में उनका परिवार जींद आ गया था। उनकी 10वीं तक पढ़ाई जींद और स्नातक की पढ़ाई सोनीपत में हुई। कानून की पढ़ाई उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से की। उनके भाई आईपीएस अधिकारी यशपाल सिंघल हरियाणा के पुलिस महानिदेशक और राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त रह चुके हैं, जबकि बेटी आस्था मोदी हरियाणा काडर की 2013 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं, जो फिलहाल केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी शत्रुजीत कपूर राज्य में दो साल से अधिक समय तक पुलिस महानिदेशक रहे हैं। उन्होंने विजिलेंस प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं देकर कई भ्रष्ट आईपीएस व आइएएस अधिकारियों को बेनकाब किया, जो बाद में कोर्ट भी गए, लेकिन उन्हें वहां से कोई राहत नहीं मिली। पूरन कुमार सुसाइड केस में आया शत्रुजीत कपूरा का नाम पुलिस महानिदेशक पद पर रहते हुए शत्रुजीत कपूर का नाम आईपीएस वाई पूरन कुमार सुसाइड केस में आया तो सरकार ने उन्हें दो माह की छुट्टी पर जाने के लिए राजी कर लिया था। कपूर के छुट्टी से लौटने के बाद उन्हें हरियाणा पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन का चेयरमैन नियुक्त किया गया। इसी पद पर रहते हुए कपूर को आइटीबीपी के महानिदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी साल 31 अक्टूबर को उनकी रिटायरमेंट है। शत्रुजीत कपूर ने दी ये सेवाएं आईपीएस रहते आइएएस काडर के पदों पर दी सेवाएं आइटीबीपी प्रमुख के तौर पर शत्रुजीत कपूर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ जारी तनाव के बीच तैनात हिमवीरों का नेतृत्व करेंगे। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास और सीमा की चौकसी को और अधिक सुदृढ़ करना उनके कार्यकाल की मुख्य प्राथमिकताएं होंगी। उनकी गिनती केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल के भरोसेमंद अधिकारियों में होती रही है। मनोहर लाल ने ही मुख्यमंत्री रहते हुए शत्रुजीत कपूर के रूप में किसी आईपीएस अधिकारी को आइएएस अधिकारी के नेतृत्व वाली बिजली कंपनियों व के चेयरमैन और परिवहन विभाग के प्रधान सचिव पदों की अहम जिम्मेदारी सौंपी थी। बिजली व परिवहन सुधारों के लिए जाने जाएंगे कपूर हरियाणा की बिजली कंपनियों के चेयरमैन के रूप में सेवाएं दे चुके शत्रुजीत कपूर की छवि एक ‘रिजल्ट-ओरिएंटेड’ (तुरंत परिणाम देने वाले) अधिकारी की है। उन्होंने जब बिजली कंपनियों के चेयरमैन के रूप में काम संभाला था, उस समय राज्य के सिर्फ 105 गांवों में 24 घंटे बिजली दी जाती थी, लेकिन शत्रुजीत कपूर ने इसे 5300 गांवों तक पहुंचाने का बड़ा काम किया। आज अभी तक छह हजार गांवों में 24 घंटे बिजली पहुंच रही है। राकेश हरियाणा के दूसरे अफसर, जो एनआइए चीफ बने 1994 बैच के हिमाचल प्रदेश काडर के आईपीएस अधिकारी हिसार निवासी राकेश अग्रवाल हरियाणा के ऐसे दूसरे अधिकारी हैं, जो एनआइए चीफ बने हैं। सदानंद दाते के महाराष्ट्र का डीजीपी बनने के बाद से यह पद खाली चल रहा था। राकेश अग्रवाल एनआइए के महानिदेशक के रूप में कार्यभार संभालने के दिन से 31 अगस्त 2028 तक अपनी रिटायरमेंट या अगले आदेश तक इस पद पर बने रहेंगे। वाईसी मोदी रहे एनआईए चीफ नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के समय वाईसी मोदी थे एनआइए चीफ नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के समय वाईसी मोदी एनआइए चीफ थे। इसके बाद कुछ समय के लिए कुलदीप सिंह कार्यवाहक रहे, फिर बाद में पंजाब के डीजीपी रह चुके दिनकर गुप्ता एनआइए चीफ बने थे। इनके बाद सदानंद दाते को कमान मिली थी। उनकी अगुवाई में पहलगाम हमले की जांच हुई थी।

खुद के नाम जमाबंदी नहीं होने से ई-केवाईसी में आगे लेकिन रजिस्ट्री में पीछे

लखीसराय. सरकार द्वारा किसानों को फसल ऋण, फसल बीमा, मुआवजा एवं आपदा राहत जैसी योजनाओं का लाभ सरलता से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से फार्मर रजिस्ट्री व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत प्रथम चरण में उन्हीं किसानों की फार्मर रजिस्ट्री की जा रही है, जिनके नाम से भूमि की जमाबंदी कायम है और जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभुक हैं। जिले में फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत पांच दिसंबर 2025 को रामगढ़ चौक प्रखंड से की गई थी। यह अभियान 31 दिसंबर 2025 तक प्रस्तावित था, लेकिन भूमि संबंधी लंबित मामलों के निष्पादन में राजस्व कर्मचारियों के व्यस्त रहने के कारण 10 दिसंबर से 31 दिसंबर तक फार्मर रजिस्ट्री का कार्य बाधित रहा। इसके बाद छह जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2026 तक फार्मर रजिस्ट्री को लेकर विशेष अभियान चलाया गया। इस अवधि में जिले के प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के कुल 49,123 सक्रिय लाभुक किसानों में से 40,656 किसानों का ई-केवाईसी पूरा किया जा सका, जबकि मात्र 9,190 किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री हो पाई। फार्मर रजिस्ट्री की धीमी प्रगति को देखते हुए सरकार ने पुनः 18 जनवरी 2026 से 21 जनवरी 2026 तक गहन अभियान चलाने का निर्णय लिया है। प्रखंडवार स्थिति (6 से 11 जनवरी 2026 तक) – बड़हिया प्रखंड में 3,950 लाभुकों में 4,122 का ई-केवाईसी तथा 1,021 की फार्मर रजिस्ट्री हुई। चानन प्रखंड में 8,532 लाभुकों में 6,336 का ई-केवाईसी और 1,456 की रजिस्ट्री की गई। हलसी प्रखंड में 7,350 लाभुकों में 5,675 का ई-केवाईसी और 2,060 की रजिस्ट्री हुई। लखीसराय प्रखंड में 5,576 लाभुकों में 4,625 का ई-केवाईसी और 812 की रजिस्ट्री हुई। पिपरिया प्रखंड में 2,678 लाभुकों में 2,236 का ई-केवाईसी और 514 की रजिस्ट्री की गई। रामगढ़ चौक प्रखंड में 4,331 लाभुकों में 3,783 का ई-केवाईसी और 950 की रजिस्ट्री हुई। वहीं सूर्यगढ़ा प्रखंड में सर्वाधिक 16,706 लाभुकों में 13,879 का ई-केवाईसी और 2,377 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री की गई। फार्मर रजिस्ट्री धीमी होने का कारण प्रथम चरण में केवल उन्हीं किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हो रही है, जिनके नाम से भूमि की जमाबंदी दर्ज है। जिले के अधिकांश प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभुक किसानों की भूमि उनके पिता या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम से दर्ज है। स्वयं के नाम से जमाबंदी रखने वाले किसानों की संख्या कम होने के कारण फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया कृषि समन्वयक द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी किसानों का आधार सत्यापन के माध्यम से ई-केवाईसी किया जाता है। इसके बाद राजस्व कर्मचारी भूमि विवरण के आधार पर फार्मर आईडी का निर्माण कर फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करते हैं। फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य – प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर भविष्य में किसान सम्मान निधि के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है। सरकार ने इसे लेकर 18 जनवरी से 21 जनवरी 2026 तक गहन अभियान चलाने का निर्णय लिया है। – कुंदन कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी, लखीसराय

यूपी में झूठी FIR पर कार्रवाई, गवाह भी होंगे दायित्व में, HC ने DGP को दिए कड़े निर्देश

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने झूठी एफआईआर दर्ज कराने की बढ़ती प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि झूठी एफआईआर दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता ही नहीं, बल्कि उनके गवाहों के खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने आदेश दिया है कि यदि किसी मामले की विवेचना के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि कोई अपराध बनता ही नहीं है और अंतिम/क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाती है, तो विवेचना अधिकारी को शिकायतकर्ता एवं गवाहों के विरुद्ध लिखित शिकायत भी प्रस्तुत करनी होगी। यह शिकायत बीएनएस की धारा 212 और 217 (पूर्व में आईपीसी की धारा 177 व 182) के अंतर्गत होगी, ताकि बीएनएस की धारा 215(1)(ए) (सीआरपीसी की धारा 195(1)(ए)) के तहत संज्ञान लिया जा सके। पुलिस महानिदेशक को दिए निर्देश कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि इस कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी की गई तो विवेचना अधिकारी, थाना प्रभारी, सर्किल अधिकारी ही नहीं, बल्कि संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई और अदालत की अवमानना की कार्यवाही हो सकती है। इस संबंध में हाई कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि वे अधीनस्थ अधिकारियों के लिए आवश्यक आदेश जारी करें। कोर्ट ने कहा कि यदि विवेचना अधिकारी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करता है, तो केवल रिपोर्ट दाखिल करना पर्याप्त नहीं होगा। उसे पुलिस रेगुलेशन के अनुसार झूठी सूचना देने के लिए विधिवत शिकायत दर्ज कराना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर संबंधित पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के आचरण के विरुद्ध हाई कोर्ट में उचित कार्रवाई के लिए संपर्क किया जा सकता है। अधीनस्थ अदालतों को निर्देश दिया एकलपीठ ने सभी न्यायिक मजिस्ट्रेटों और अधीनस्थ अदालतों को निर्देश दिया है कि अभियुक्त के पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट आने की स्थिति में वे पूरी केस डायरी का अवलोकन करें। साथ ही, जांच अधिकारी को सूचक (वादी) और एफआईआर में नामित गवाहों के विरुद्ध लिखित शिकायत प्रस्तुत करने का निर्देश दें, जैसा कि सीआरपीसी की धारा 195(1)(ए) (तदनुरूप बीएनएसएस की धारा 215(1)(ए)) में प्रावधानित है। कोर्ट ने यह भी कहा कि संज्ञान लेने से पूर्व न्यायिक मजिस्ट्रेट पूरे अभिलेखों का परीक्षण करें। यदि प्रथमदृष्टया अपराध बनता प्रतीत न हो, तो शिकायतकर्ता से विरोध याचिका (प्रोटेस्ट पिटीशन) आमंत्रित कर उसे सुनें। इसके पश्चात यदि अपराध बनता है, तभी सीआरपीसी की धारा 190(1)(ए) या 190(1)(बी) के तहत संज्ञान लिया जाए। शिकायत भी अनिवार्य रूप से दाखिल करें इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक यह सुनिश्चित करें कि सभी विवेचना अधिकारी, थाना प्रभारी, सर्किल अधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक एवं लोक अभियोजक अंतिम/क्लोजर रिपोर्ट के साथ आवश्यक शिकायत भी अनिवार्य रूप से दाखिल करें। इस आदेश के अनुपालन के लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय की गई है। यह है मामला मामले के अनुसार, अलीगढ़ निवासी उम्मे फारवा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने पूर्व पति महमूद आलम खान द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर को चुनौती दी थी। याची ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को सही ठहराते हुए मजिस्ट्रेट द्वारा प्रोटेस्ट याचिका स्वीकार कर केस कायम करने की कार्रवाई को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया था। याची और विपक्षी पहले कोरिया के सियोल में रहते थे। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर विवाद के बाद दोनों का तलाक हो गया। इसके पश्चात पूर्व पति ने अलीगढ़ के क्वार्सी थाने में एफआईआर दर्ज करा दी। पुलिस ने विवेचना के बाद अंतिम रिपोर्ट दाखिल की, लेकिन प्रोटेस्ट याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामला कायम रखते हुए याची को समन जारी कर दिया। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट की सफाई को आंशिक रूप से संतोषजनक माना और स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियों का उनके भविष्य के कैरियर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, हाई कोर्ट ने अलीगढ़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया है कि मामले में नए सिरे से, विधि के अनुसार अभियुक्त को सुनकर निर्णय लिया जाए।

झारखंड के 119 स्कूलों को मिलेगा मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार

गिरिडीह. मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए गिरिडीह जिला के आठ और पूरे राज्य के 119 विद्यालयों का चयन पांच अलग-अलग कैटेगरी में हुआ है। आठ जनवरी को संपन्न राज्य स्तरीय समिति (JEPC) की बैठक में विद्यालयों का चयन किया गया। गिरिडीह जिला के चयनित विद्यालयों में प्राइमरी ग्रामीण कैटेगरी में प्राथमिक विद्यालय भंडारीडीह व उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय घोंसे ऊपर टोला, एलीमेंट्री ग्रामीण कैटेगरी में उत्क्रमित मध्य विद्यालय गोरियांचू, एलीमेंट्री शहरी में पीएम श्री शारदा कन्या मध्य विद्यालय पचंबा, उच्च विद्यालय ग्रामीण में उत्क्रमित उच्च विद्यालय दोंदलो व प्लस टू एसएस उच्च विद्यालय कुम्हरलालो, शहरी में उत्क्रमित प्लस टू सर जेसी बोस बालिका विद्यालय गिरिडीह तथा आवासीय कैटेगरी में पीएम श्री झारखंड आवासीय विद्यालय सरिया शामिल हैं। स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह ने सभी उपायुक्त और उप विकास आयुक्त को पत्र जारी कर चयनित विद्यालयों की सूची प्रेषित की है। साथ ही आवश्यक दिशानिर्देश दिया है। चयनित विद्यालयों की प्रगति की समीक्षा साप्ताहिक करने का निर्देश दिया गया है। कहा गया है कि ये चयनित विद्यालय न केवल स्वच्छ रहे बल्कि आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सक्षम ग्रीन स्कूल्स के रूप में पूरे देश के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें।

ठंड और पाले से बचाने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय और विभाग ने किसानों को जारी की एडवाइजरी

गुरदासपुर. पंजाब भर में पिछले कई दिनों से जारी कड़ाके की सर्दी के कारण दिन और रात के तापमान में सामान्य से काफी गिरावट दर्ज की जा रही है। कई क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सैल्सियस से भी नीचे गिर गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा आने वाले दिनों में घनी धुंध और जमीनी पाले (कोहरा) की भविष्यवाणी की गई है। इसके मद्देनजर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पी.ए.यू.) लुधियाना और कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए फसलों की सुरक्षा संबंधी एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई है। पी.ए.यू. के कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान ठंड और पाले के दौरान खेतों की फसलों, बागों, सब्जियों और पशुओं की विशेष देखभाल करने की आवश्यकता है। खासतौर पर सब्जियां और नए लगाए गए बाग ठंड और पाले से अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसी स्थिति में फसलों को हल्की सिंचाई देकर मिट्टी में नमी और तापमान को बरकरार रखा जा सकता है। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर से मल्च या सरकंडों का उपयोग करके सब्जी के पौधों और फलदार पौधों को पाले से बचाया जा सकता है। इस संबंध में जिला गुरदासपुर के मुख्य कृषि अधिकारी डा. रणधीर सिंह ठाकुर ने बताया कि गुरदासपुर क्षेत्र में इस समय दिन का तापमान लगभग 12 डिग्री सैल्सियस दर्ज किया जा रहा है, जबकि रात का तापमान घटकर 4 डिग्री सैल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मौसम की स्थिति में गेहूं, गन्ना और सरसों जैसी मुख्य फसलों की हालत अभी तक संतोषजनक है, लेकिन लगातार ठंड और पाला बने रहने के कारण फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। डा. ठाकुर ने किसानों को सलाह दी कि गेहूं की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें, ताकि पाले के प्रभाव से बचाव हो सके। सरसों की फसल में कीटों और बीमारियों की निगरानी जारी रखें और जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही कीटनाशकों का प्रयोग करें। गन्ने की फसल में भी नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है, ताकि ठंड के कारण होने वाले नुकसान से बचा जा सके। पी.ए.यू. और कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने  किसानों से अपील की है कि वे लगातार अपने खेतों का सर्वेक्षण करते रहें और मौसमी बदलावों से अवगत रहें। पशुपालकों को भी सलाह दी गई है कि वे पशुओं को ठंड से बचाने के लिए अंदर रखें और उनकी खुराक पोषण भरपूर रखी जाए, ताकि पशुओं के स्वास्थ्य पर ठंड का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

योगी सरकार का बड़ा फैसला: 6 नए नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर को मिली मंजूरी, उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को नया आयाम देते हुए योगी सरकार ने राज्य में छह नए नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इन कॉरिडोर के निर्माण से उत्तर से दक्षिण तक जिलों का सीधा जुड़ाव होगा और दो दर्जन से अधिक जिलों के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी। प्रदेश सरकार की ओर से इन कॉरिडोर को लेकर बनाई गई कार्ययोजना को लोक निर्माण विभाग (PWD) ने स्वीकृति दे दी है। जल्द ही कैबिनेट से लागत (एस्टिमेट) को मंजूरी दिलाकर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। पहली बार नॉर्थ-साउथ कनेक्टिविटी पर फोकस अब तक प्रदेश में बने अधिकांश एक्सप्रेसवे और हाईवे पूर्व-पश्चिम दिशा में हैं। यह पहली बार है जब उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी को लेकर योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बीते दो वर्षों से इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे थे। सीएम योगी इस संबंध में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भी मांग कर चुके हैं। हाल ही में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष भी नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का मुद्दा उठाया था। ये हैं प्रदेश के 6 नए नॉर्थ-साउथ कॉरिडोरः श्रावस्ती-प्रयागराज कॉरिडोर (262 किमी)     मार्ग: इकौना (श्रावस्ती)-अयोध्या-सुल्तानपुर-प्रयागराज     चार पैकेज में निर्माण     कई हिस्सों में सिक्स लेन ग्रीनफील्ड हाईवे     शामली-गोरखपुर हाईवे, पूर्वांचल और विंध्य एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी कुशीनगर-वाराणसी कॉरिडोर (220 किमी)     मार्ग: कुशीनगर-देवरिया-दोहरीघाट-गाजीपुर-वाराणसी     अनुमानित लागत: ₹342 करोड़     कुछ खंड पहले से फोर लेन, शेष का निर्माण PWD करेगा नेपाल सीमा से प्रयागराज कॉरिडोर (295 किमी)     मार्ग: पिपरी (भारत-नेपाल सीमा)-सिद्धार्थनगर-जौनपुर-प्रयागराज     PWD और NHAI/MoRTH द्वारा संयुक्त निर्माण     कुल लागत 1,380 करोड़ रुपये से अधिक लखीमपुर–बांदा कॉरिडोर (502 किमी)     मार्ग: लखीमपुर-सीतापुर-लखनऊ-उन्नाव-फतेहपुर-बांदा     कई हिस्से पहले से फोर लेन     PWD और NHAI दोनों एजेंसियां करेंगी निर्माण बरेली–ललितपुर कॉरिडोर (547 किमी)     मार्ग: बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर     गंगा, यमुना और प्रस्तावित शामली–गोरखपुर एक्सप्रेसवे से कनेक्ट     अधिकांश हिस्से पहले से फोर लेन पीलीभीत–उरई–हरपालपुर कॉरिडोर (514 किमी)     मार्ग: पीलीभीत टाइगर रिजर्व-शाहजहांपुर-फर्रुखाबाद-उरई-हरपालपुर     गंगा, आगरा–लखनऊ और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से लिंक     कुल लागत करीब ₹1,188 करोड़ दो साल में पूरे होंगे सभी प्रोजेक्ट लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाए जाने वाले हिस्सों की कार्ययोजना स्वीकृत हो चुकी है। NHAI और MoRTH को भी उनके हिस्सों की जानकारी भेज दी गई है। लोक निर्माण के प्रमुख सचिव अजय चौहान ने बताया कि कैबिनेट से स्वीकृति मिलते ही काम शुरू होगा और दो साल के भीतर सभी छह कॉरिडोर पूरे कर लिए जाएंगे।  

रायपुर में भारत-न्यूजीलैंड टी-20 मैच के टिकट लेने उमड़ी स्टूडेंट और फैंस की भीड़

रायपुर. छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर में 23 जनवरी को होने वाले भारत और न्यूजीलैंड के टी-20 मुकाबले को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। मैच की टिकट के लिए इंडोर स्टेडियम में सुबह से ही बड़ी संख्या में दर्शक और छात्र कतार में खड़े रहे। क्रिकेट मैच की ऑनलाइन टिकटों की बिक्री पहले ही शुरू हो चुकी है। स्टूडेंट टिकट की बिक्री आज सुबह 10 बजे से शुरू की गई, जिसमें टिकट की कीमत 800 रुपये रखी गई है। आयोजकों ने बताया कि प्रत्येक छात्र को केवल एक ही टिकट दी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक छात्रों को मैच देखने का अवसर मिल सके। विशेष काउंटर और सुविधा रायपुर के इंडोर स्टेडियम में टिकट बिक्री के लिए विशेष काउंटर बनाए गए हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले दर्शकों के लिए फिजिकल टिकट प्राप्त करने के लिए अलग काउंटर की भी व्यवस्था की गई है। पहले चरण में बिकी 12 हजार टिकट गुरुवार शाम पहले चरण की टिकट बिक्री में करीब 12 हजार टिकट महज आधे घंटे में बिक गई। इससे मैच को लेकर दर्शकों के उत्साह का अंदाजा लगाया जा सकता है। क्रिकेट फैंस का यह उत्साह 23 जनवरी के मुकाबले को और रोमांचक बनाएगा और स्टेडियम में उमड़ने वाली भीड़ इस बात का संकेत है कि यह मैच दर्शकों के लिए यादगार रहेगा। वेंडर नहीं, चलता-फिरता मेन्यू कार्ड!: इस बार स्टेडियम और उसके आसपास वेंडर एक जैसी टी-शर्ट पहने नजर आएंगे, जिस पर बेची जाने वाली खाद्य सामग्री के दाम लिखे होंगे. इसका मकसद यह है कि दर्शकों को पहले से ही खाने-पीने की चीजों की सही कीमत पता रहे और कोई भी वेंडर तय रेट से ज्यादा वसूली न कर सके. यह व्यवस्था पिछली बार हुए मैच के दौरान स्टेडियम में खाद्य सामग्री के मनमाने दाम वसूले जाने की शिकायतों के बाद की गई है. आज शाम से शुरू होगी बिक्री:छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (CSCS) ने 23 जनवरी को रायपुर में होने वाले इंडिया बनाम न्यूज़ीलैंड T20 इंटरनेशनल मैच के लिए टिकट की पूरी जानकारी साझा कर दी है. CSCS के डायरेक्टर विजय शाह और बलदेव सिंह भाटिया ने मैच को लेकर जरूरी जानकारियां दीं. विजय शाह ने बताया कि स्टूडेंट्स के लिए खास टिकट का इंतजाम किया गया है. स्टूडेंट टिकट, जिनकी कीमत ₹800 रखी गई है, सिर्फ इनडोर स्टेडियम में ही मिलेंगे और हर स्टूडेंट को सिर्फ एक ही टिकट दिया जाएगा. छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन ने यह भी घोषणा की है कि इस भारत बनाम न्यूज़ीलैंड T20 मैच के लिए टिकटों की बिक्री आज (15 जनवरी) शाम से शुरू होगी, जिसका क्रिकेट प्रेमी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. पिछली बार की तरह इस बार भी ticketgenie वेबसाइट पर टिकट मिलेंगी. स्टैंड टिकट की कीमतें     2000     2500     3000     3,500 प्रीमियम कैटेगरी में     सिल्वर टिकट ₹7,500     गोल्ड टिकट ₹10,000     प्लैटिनम टिकट ₹12,500     कॉर्पोरेट बॉक्स टिकट ₹25,000 पिछली बार हुए मैच में खाद्य सामग्री को लेकर मनमानी वसूली की कई शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद इस बार संघ ने यह अनोखा और सख्त फैसला लिया है. अब दर्शकों को समोसा लेने से पहले “भैया कितना?” पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि रेट सीधे वेंडर की टी-शर्ट पर लिखा होगा.     समोसा (100 ग्राम) – ₹50     सैंडविच (एक पीस) – ₹60     बर्गर – ₹80     आइसक्रीम – MRP अनुसार     वेफर्स – MRP अनुसार     पफ – ₹50     पिज़्ज़ा – ₹250     पॉपकॉर्न (कोन) – ₹60     पॉपकॉर्न (टब) – ₹100     स्टीम मोमो (शाकाहारी) – ₹150     स्टीम मोमो (चिकन) – ₹200     फ्राइड मोमो (शाकाहारी) – ₹200     फ्राइड मोमो (चिकन) – ₹250 बिना टिकट नो एंट्री:संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रहेगी. स्टेडियम में सिर्फ टिकट और पासधारी लोगों को ही प्रवेश मिलेगा. बिना टिकट या पास के किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी. दरअसल पिछले मैच के दौरान कुछ लोगों को दीवार फांदते देखा गया था. क्रिकेट का जश्न या रेट-लिस्ट का त्योहार?:रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में इस मैच को लेकर जबरदस्त उत्साह है. भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच होने वाले इस रोमांचक मुकाबले के साथ-साथ इस बार दर्शकों की नजरें मैदान से ज्यादा शायद वेंडरों की टी-शर्ट और रेट-लिस्ट पर टिकी रहेंगी. कुल मिलाकर, रायपुर का यह मैच अब सिर्फ भारत बनाम न्यूज़ीलैंड नहीं, बल्कि दर्शक बनाम महंगाई, समोसा बनाम पॉपकॉर्न और वेंडर बनाम रेट-लिस्ट टी-शर्ट सिस्टम का मुकाबला भी बन गया है.