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महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं ने खरीदी तीन करोड़ की लड्डू, 12 दिन में 573 क्विंटल बेसन लड्डू की बिक्री

उज्जैन उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं में लड्डू प्रसादी को लेकर खास रुझान देखने को मिल रहा है। पौष्टिकता से भरपूर होने के बावजूद रागी अन्न प्रसाद का लड्डू श्रद्धालुओं को अपेक्षाकृत कम पसंद आ रहा है, जबकि बेसन का लड्डू उनकी पहली पसंद बनता जा रहा है। मांग और बिक्री के आंकड़े इस बदलते रुझान को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।   रविवार को हुई बेसन लड्डू की रिकॉर्ड बिक्री रविवार को मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान मंदिर समिति के 10 काउंटरों से कुल 58.528 क्विंटल बेसन का लड्डू बिके, जिससे 28 लाख 3 हजार 50 रुपये की आय हुई। वहीं रागी लड्डू की बिक्री मात्र 6.11 क्विंटल रही, जिससे 2 लाख 84 हजार 100 रुपये प्राप्त हुए। आंकड़ों के अनुसार, रागी की तुलना में बेसन लड्डू की मांग लगभग दस गुना अधिक रही।   100 रुपये वाला पैकेट सबसे ज्यादा लोकप्रिय लड्डू प्रसादी की खरीद में श्रद्धालुओं ने अलग-अलग पैकेटों को प्राथमिकता दी। सबसे अधिक मांग 100 रुपये वाले पैकेट की रही, जिसमें बेसन के 18,540 और रागी के 1,215 पैकेट बिके। 50 रुपये वाले पैकेट में बेसन के 9,113 और रागी के 1,540 पैकेट की बिक्री हुई। वहीं 200 रुपये वाले आधा किलो के पैकेट में बेसन के 2,467 और रागी के 428 पैकेट श्रद्धालुओं ने खरीदे। एक दिन में 30 लाख से अधिक का विक्रय मंदिर समिति ने अकेले रविवार को रागी और बेसन दोनों प्रकार के लड्डू प्रसादी से कुल 30 लाख 87 हजार रुपये से अधिक का विक्रय किया। समिति का कहना है कि लड्डू प्रसादी श्रद्धालुओं को ‘नो लॉस, नो प्रॉफिट’ के आधार पर उपलब्ध कराई जाती है, ताकि आस्था के साथ गुणवत्ता भी बनी रहे।   12 दिनों में 643 क्विंटल लड्डू की बिक्री शीतकालीन अवकाश के दौरान 25 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 तक के 12 दिनों में मंदिर समिति ने कुल 643.409 क्विंटल लड्डू प्रसादी का विक्रय किया। इस अवधि में 573.118 क्विंटल बेसन लड्डू से 2 करोड़ 73 लाख 93 हजार 600 रुपये और 70.291 क्विंटल रागी लड्डू से 32 लाख 50 हजार 800 रुपये की बिक्री दर्ज की गई।   गुणवत्ता और भविष्य की उम्मीद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि लड्डू निर्माण में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाता है। प्रतिदिन खाद्य प्रशासन के निरीक्षक नमूने लेकर जांच करते हैं और शुद्ध सामग्री का ही उपयोग होता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में श्री अन्नप्रसाद यानी रागी लड्डू की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी।  

सीएम मोहन यादव का देवोस दौरा, स्विट्जरलैंड जाने से पहले किया जाएगा अंतिम मंथन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्विट्जरलैंड के दावोस जाने की तैयारी कर रहे हैं। स्विट्जरलैंड का उनका ये दौरा महज एक विदेश यात्रा नहीं, बल्कि इसके माध्यम से मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने का अहम कदम होगा। वर्ल्ड इकोननॉमिक फोरम के वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने से पहले सीएम मोहन यादव ने मंत्रालय में वरिष्ठ अफसरों के साथ एक रणनीतिक बैठक आयोजित की। बैठक में तय हुआ एमपी खुद को कैसे करेगा पेश बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन समेत उद्योग, निवेश, ऊर्जा, पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़े विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक में तय किया गया कि दावोस के मंच पर मध्यप्रदेश को खुद को किन प्रमुख बिंदुओं और संभावनाओं पर पेश करना चाहिए। खासतौर पर राज्य की औद्योगिक नीतियों, निवेश के अनुकूल माहौल और हाल के सालों में हुए सुधारों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने पर जोर दिया। प्राथमिक एजेंडे में क्या जानकारी के मुताबिक सीएम ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा है कि दावोस में सिर्फ योजनाओं का ब्योरा नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की 'ग्राउंड रियलिटी' और निवेश की वास्तविक संभावनाएं सामने रखी जाएं। राज्य में लॉजिस्टिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग और पर्यटन सेक्टर में मौजूद अवसरों को प्राथमिक एजेंडे में शामिल किया जा रहा है। जाने से पहले एक और उच्चस्तरीय बैठक होगी बैठक में यह भी तय किया गया कि मुख्यमंत्री के दौरे से पहले एक और उच्चस्तरीय बैठक की जाएगी, जिसमें दावोस में होने वाली संभावित द्विपक्षीय बैठकों और निवेश प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाएगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अगले सप्ताह स्विट्जरलैंड के दावोस रवाना होंगे। ऐसे में यह दौरा मध्यप्रदेश के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय मंच नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास माना जा रहा है।

भोजशाला पर तनाव, 23 जनवरी को बसंत पंचमी और जुमा एक साथ, धार में हाई अलर्ट और 8000 सुरक्षा बल

 धार धार की प्रसिद्ध भोजशाला में 23 जनवरी को पूजा और नमाज के समय के टकराव को लेकर प्रशासन अलर्ट हो गया है. 11वीं सदी के इस स्मारक पर अधिकार को लेकर चल रहे विवाद के बीच इंदौर रेंज के आईजी (IG) अनुराग ने  सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. सांप्रदायिक तनाव से बचने के लिए जिला प्रशासन ने लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की. मुसलमान 11वीं सदी के इस स्मारक को मस्जिद मानते हैं, जबकि हिंदू इसे देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर बताते हैं. भोज उत्सव समिति ने 23 जनवरी को पूरे दिन पूजा करने के लिए संबंधित अधिकारियों से अनुमति मांगी है, जबकि मुस्लिम समुदाय ने एक ज्ञापन सौंपकर शुक्रवार होने के कारण दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी है. पिछले 23 सालों से चली आ रही एक व्यवस्था के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI इस ढांचे की रक्षा करता है. एएसआई ने हिंदुओं को हर  भोजशाला में पूजा करने का अधिकार दिया है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति है. पत्रकारों से बात करते हुए भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने कहा, "सरस्वती पूजा के अवसर पर बसंत पंचमी (23 जनवरी) को बिना किसी रुकावट के पूजा का आयोजन करना हमारा लक्ष्य है. पूजा सूर्योदय से लगातार होगी. अगर ऐसा नहीं होता है, तो हम विरोध प्रदर्शन करेंगे." उन्होंने जोर देकर कहा, "हम किसी भी हालत में भोजशाला परिसर खाली नहीं करेंगे. हमने इसे पहले भी खाली नहीं किया था और अब भी खाली नहीं करेंगे." इस बीच, मुस्लिम समुदाय ने भोजशाला चौकी पर ASI के महानिदेशक को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें 23 जनवरी को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक बिना किसी रुकावट के शुक्रवार की नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी गई. उधर, इंदौर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) अनुराग ने धार का दौरा किया और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा के लिए पुलिस कंट्रोल रूम में अधिकारियों के साथ बैठक की. बाद में उन्होंने विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद का दौरा किया और परिसर का निरीक्षण किया. पत्रकारों से बात करते हुए, IPS अधिकारी ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार में खासकर भोजशाला के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया जाएगा. उन्होंने कहा, "23 जनवरी को बसंत पंचमी और शुक्रवार दोनों हैं. इसलिए, लोगों को यह त्योहार सद्भाव और शांति के साथ मनाना चाहिए. बसंत पंचमी के लिए लगभग 8000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे. इन कर्मियों में CRPF और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान शामिल होंगे." पुलिस अधिकारी ने कहा कि इस दौरान पेट्रोलिंग की जाएगी और शहर की निगरानी CCTV कैमरों से की जाएगी. पुलिस अफसर अनुराग ने कहा कि संवेदनशील इलाकों और सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी और शांति भंग करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. बता दें कि 2016 में भी बसंत पंचमी (12 फरवरी) शुक्रवार को पड़ी थी और भोजशाला में पूजा और नमाज के समय को लेकर विवाद हुआ था. उस साल शहर में विरोध प्रदर्शन और झड़पें हुई थीं. हिंदू समुदाय भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुसलमान इसे कमाल मौला मस्जिद कहते हैं. जुलाई 2024 में ASI ने विवादित भोजशाला-कमाल-मौला मस्जिद परिसर की अपनी वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में जमा की थी.

जैसलमेर में हेलीबोर्न सर्वे से सामने आई खुशखबरी, 64 स्थानों पर मिलेंगे भूजल के भंडार

जैसलमेर  भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के प्रयासों से 2021-22 में राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में किए गए हेलीबोर्न जियोफिजिकल सर्वे (Heliborne Geophysical Survey) के नतीजे अब सामने आ रहे हैं. इस सर्वे से जैसलमेर जिले में 64 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां भूजल उपलब्ध हो सकता है. इनमें से कई जगहें ऐसी हैं जहां पहले के पारंपरिक तरीकों से पानी नहीं मिल पाया था. यह खोज पश्चिमी राजस्थान के सूखे इलाकों में पानी की समस्या का स्थाई समाधान दे सकती है. सर्वे का विवरण हेलीबोर्न सर्वे हेलिकॉप्टर से किया जाता है. इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और जियोफिजिकल तकनीकों का इस्तेमाल कर जमीन के नीचे 500 मीटर तक की जानकारी ली जाती है. यह तरीका तेज, सटीक और बड़े क्षेत्र को कवर करने में सक्षम है. सर्वे से भूजल के स्रोत, उनकी गहराई, मीठे और खारे पानी के क्षेत्र, प्राचीन नदी मार्ग (पेलियोचैनल) और कृत्रिम रिचार्ज के लिए उपयुक्त जगहों की जानकारी मिलती है. यह सर्वे केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB), जल शक्ति मंत्रालय और CSIR-नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NGRI), हैदराबाद ने किया. राजस्थान में कुल 66,810 वर्ग किमी क्षेत्र कवर किया गया, जिसमें जैसलमेर, जोधपुर और सीकर जैसे प्राथमिकता वाले जिले शामिल हैं. जैसलमेर जिले में करीब 15,000 वर्ग किमी क्षेत्र में सर्वे किया गया. पोकरण क्षेत्र में बड़ी सफलता वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया के अनुसार, पोखरण तहसील का ज्यादातर हिस्सा भूजल की दृष्टि से कमजोर माना जाता है. लेकिन हेलीबोर्न सर्वे से फलसूंड से छायन, धुडसर से राजगढ़ तक के इलाकों में भूजल भंडार मिलने की संभावना जगी है. कुल 64 स्थानों पर भूजल की उपलब्धता बताई गई है. इनमें से अधिकांश गांव ऐसे हैं जहां पेयजल की किल्लत आम है. पहले जांच में पानी नहीं मिला था. फलसूंड इलाका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां भूजल मिलना एक बड़ी उपलब्धि होगी. हालांकि पोकरण और भनियाणा में नहर का पानी उपलब्ध है, लेकिन इन स्थानों पर नलकूप बनाकर आपात स्थिति में लोगों को पानी मिल सकेगा. सर्वे के फायदे     भूजल के नए स्रोत ढूंढने में मदद.     कृत्रिम रिचार्ज (जमीन में पानी भरने) के लिए सही जगहों की पहचान.     जल संकट वाले क्षेत्रों में स्थायी समाधान.     सांकड़ा ब्लॉक जैसे शुष्क इलाकों में उच्च-रिजॉल्यूशन एक्विफर मैपिंग से जल संकट से राहत मिलेगी. यह सर्वे राष्ट्रीय एक्विफर मैपिंग प्रोग्राम (NAQUIM) का हिस्सा है, जो राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में 3.88 लाख वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करेगा. इससे जल संरक्षण और सतत विकास में बड़ी मदद मिलेगी.  डॉ. इणखिया ने कहा कि यह रिपोर्ट जैसलमेर जिला कलेक्टर और राज्य भूजल बोर्ड को भेजी गई है. अब इन स्थानों पर आगे जांच और नलकूप निर्माण से लाखों लोगों को फायदा होगा.

राजनीतिक मेलजोल: जदयू के दही-चूड़ा भोज में पहुंचे नीतीश कुमार, भाजपा दफ्तर में भी दिखी हलचल

पटना बिहार में मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज को लेकर सियासत जमकर हो रही है। इस बीच, बुधवार को जहां एक ओर जदयू के भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए, वहीं भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी किसान मोर्चा द्वारा आयोजित चूड़ा-दही भोज में बिहार सरकार के कई मंत्री और कार्यकर्ता पहुंचे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मकर संक्रांति के अवसर पर पटना में पूर्व मंत्री एवं जदयू विधायक रत्नेश सादा के आवास पर जदयू द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम में शामिल हुए। रत्नेश सादा ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, विधायक श्याम रजक, विधायक शीला कुमारी, विधायक संतोष कुमार निराला, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, राष्ट्रीय महासचिव मनीष कुमार वर्मा सहित बड़ी संख्या में पार्टी के पदाधिकारीगण, कार्यकर्तागण एवं गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। इधर, भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी 'कार्यकर्ता मिलन सह दही-चूड़ा भोज' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, मंत्री मंगल पांडेय सहित बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता उपस्थित हैं। बता दें कि बिहार में कुछ लोग बुधवार को मकर संक्रांति मना रहे हैं जबकि कुछ लोग कल यानी गुरुवार को मनाएंगे। सियासी गलियारे में हालांकि चूड़ा-दही पार्टी पर सबकी नजरें हैं। इस बार मकर संक्रांति के अवसर पर चर्चा के केंद्र में राजद के अध्यक्ष लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के चूड़ा-दही भोज पर सबकी नजरें हैं। उन्होंने बुधवार को अपने आवास पर चूड़ा-दही महाभोज का आयोजन किया है। खास बात यह है कि उन्होंने इस भोज में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी नेताओं को आमंत्रित किया है।

प्रयागराज में मातम: तालाब में नहाते समय चार बच्चों की डूबकर जान गई

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बुधवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिससे पूरे इलाके में कोहराम मच गया। पुरामुफ्ती थाना क्षेत्र के कुसुआ गांव में स्थित एक तालाब में डूबने से चार किशोरों की मौत हो गई। हादसे की खबर फैलते ही गांव में कोहराम मच गया और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। पुरामुफ्ती थाने के अधीक्षक मनोज कुमार ने बताया कि गांव से एक किलोमीटर की दूरी पर तालाब पर नहाने आए थे। इस दौरान वे चारों डूब गए। सभी के शव निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं। इनमें तीन नाबालिग बच्चे और एक युवक शामिल थे। पूरे मामले की जांच की जा रही है। गांव के लोगों ने आशंका जताई है कि खेलते-खेलते वे तालाब के गहरे हिस्से में चले गए और एक के बाद एक डूबते चले गए। तालाब के किनारे बच्चों के कपड़े और चप्पल मिलने से इस बात को बल मिला है कि वे वहीं आसपास मौजूद थे। काफी देर तक जब बच्चे घर नहीं लौटे तो परिजनों ने तलाश शुरू की, जिसके बाद तालाब में उतराकर खोजबीन की गई और चारों के शव बरामद हुए। उधर, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही पुरामुफ्ती थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला तालाब में डूबने का प्रतीत हो रहा है, हालांकि सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस ग्रामीणों से पूछताछ कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

माघ मेला अग्निकांड: पूजा के समय आश्रम में आग, आधा दर्जन टेंट राख, दमकलकर्मी घायल

प्रयागराज प्रयागराज में चल रहे आस्था के महापर्व माघ मेला क्षेत्र में बुधवार शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सेक्टर-4 स्थित तुलसी मार्ग पर 'बड़े ब्रह्म छोटे ब्रह्म आश्रम' में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया और आश्रम के करीब आधा दर्जन टेंट जलकर राख हो गए। पूजा के दौरान हुआ हादसा आश्रम के संचालक कमलेश्वर नाथ पांडेय ने बताया कि घटना के समय आश्रम में दर्जन भर से अधिक श्रद्धालु और कल्पवासी मौजूद थे, जो सांध्यकालीन पूजा में मग्न थे। इसी बीच टेंट के पिछले हिस्से से चिंगारी भड़की और आग तेजी से फैल गई। श्रद्धालुओं ने अपनी ओर से बालू और पानी फेंककर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन लपटें बेकाबू थीं। इस अग्निकांड में टेंट में रखी गृहस्थी के सामान के साथ ₹20,000 की नकदी भी जल गई।   दमकल कर्मियों की बहादुरी आश्रम के पास ही स्थित कल्पवासी फायर स्टेशन के कर्मियों ने जैसे ही धुआं देखा, वे तुरंत हरकत में आ गए। आकाश कुमार और उनके सहयोगी फायरमैनों ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। करीब दर्जन भर फायर टेंडर और एंबुलेंस को भी तैनात किया गया। आग बुझाने के दौरान तीन फायर कर्मी – मिलन सिंह, अमरजीत और अमृत यादव के हाथ झुलस गए, जिन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। दमकल विभाग की तत्परता से आग को अन्य शिविरों तक फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती, मकर संक्रांति पर खुले 81 आयुष्मान आरोग्य मंदिर

नई दिल्ली मकर संक्रांति के अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राष्ट्रीय राजधानी के लोगों को बड़ी सौगात दी है। बुधवार को उन्होंने दिल्ली भर में 81 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नए केंद्रों के शुरू होने से दिल्ली के नागरिकों को उनके घर के पास ही बेहतर, सुलभ और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। उद्घाटन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इससे पहले दिल्ली में 238 आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहले से ही काम कर रहे थे। अब 81 नए केंद्र जुड़ने के बाद राजधानी में कुल 319 आयुष्मान आरोग्य मंदिर हो जाएंगे। उन्होंने कहा, "आज मकर संक्रांति के दिन 81 नए आरोग्य मंदिर शुरू किए गए हैं। इसके साथ ही दिल्ली के लोगों को अधिक आरामदायक और आसानी से उपलब्ध होने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।" मुख्यमंत्री ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की तरह काम करते हैं और दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ये केंद्र बड़े अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को कम करेंगे और आम लोगों की रोजमर्रा की स्वास्थ्य जरूरतों को समय पर पूरा करने में मदद करेंगे। अब नागरिकों को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए दूर बड़े अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा। रेखा गुप्ता ने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य पूरे शहर में कुल 1,100 आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित करने का है और इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। आने वाले महीनों में और भी केंद्र शुरू किए जाएंगे। इस मौके पर भाजपा विधायक सतीश उपाध्याय ने कहा कि जिस तरह से आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का निर्माण किया जा रहा है, वह सराहनीय है। उन्होंने बताया कि भीम नगर और मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र में यह आठवां आरोग्य मंदिर है और यहां दो और आरोग्य मंदिर बनाए जाने हैं। एक दिन पहले दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने भी इस योजना को लेकर अहम जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के विस्तार से दिल्ली में सुलभ और निवारक स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 81 नए केंद्र जुड़ने के बाद दिल्ली में कुल आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की संख्या बढ़कर 319 हो जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह पहल राजधानी के दीर्घकालिक प्राथमिक स्वास्थ्य रोडमैप के तहत की जा रही है, जिसके तहत 1,100 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार 'सभी के लिए स्वास्थ्य' के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप काम कर रही है। पंकज कुमार सिंह ने बताया कि हर आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मुफ्त डॉक्टर परामर्श, जरूरी दवाइयां और जांच की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कैंसर की स्क्रीनिंग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण, बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग, लाइफस्टाइल काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, योग और पोषण से जुड़ी सलाह भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि ये मोहल्ला स्तर के स्वास्थ्य केंद्र महिलाओं, बुजुर्गों और गरीब परिवारों के लिए बेहद लाभकारी होंगे, क्योंकि इससे उन्हें लंबी दूरी तय करने और अस्पतालों की लंबी कतारों से राहत मिलेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत-वय वंदना योजना के तहत दिल्ली में 13 जनवरी 2026 तक कुल 6,91,530 हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनमें 2,65,895 वय वंदना कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा, दिल्ली में अब 189 सूचीबद्ध अस्पताल हैं, जिनमें निजी, दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के अस्पताल शामिल हैं, जहां जरूरतमंद परिवारों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है।

सिंचाई परियोजनाओं में देरी नहीं चलेगी, समय-सीमा का सख्ती से पालन हो: मंत्री सिलावट

विभागीय कार्यों की समीक्षा की भोपाल जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है की प्रदेश में विभिन्न निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं का कार्य समय से पूरा किया जाए। वरिष्ठ अधिकारी परियोजनाओं के कार्य का निरंतर निरीक्षण करें और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। मंत्री श्री सिलावट ने मंत्रालय स्थित अपने प्रतिकक्ष में बुधवार को विभाग के अंतर्गत धसान केन कछार सागर में निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता श्री विनोद कुमार देवड़ा, मुख्य अभियंता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्य से संबंधित निर्माण ऐजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। मंत्री श्री सिलावट ने निर्देश दिए कि वरिष्ठ अधिकारी स्वीकृत परियोजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें और प्रति 15 दिन में कार्य की समीक्षा करें। बैठक में बताया गया कि परियोजनाओं के पूर्ण होने पर सागर, पन्ना, दमोह एवं छतरपुर जिले की लगभग 81 हजार हैक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मंत्री श्री सिलावट द्वारा कछार के अंतर्गत आपचंद, मंझगाय, सतधारू, पवई, रूंज एवं काठन सिंचाई परियोजनाओं से सिंचाई सम्बन्धी व्यवस्थाओं के निर्देश दिये गये।

योगी सरकार की नीतियों का बड़ा असर, भू-आबद्ध राज्यों में मिला प्रथम स्थान

निर्यात नीति, ओडीओपी, ट्रेड शो और अवसंरचना सुधारों ने बदली तस्वीर योगी सरकार के प्रयासों से बढ़ी निर्यात तत्परता लखनऊ,  उत्तर प्रदेश आज न केवल तेजी से उभरता निर्यातक राज्य बन रहा है, बल्कि निर्यात को रोजगार, निवेश, क्षेत्रीय संतुलन और समावेशी विकास से जोड़ते हुए नए राष्ट्रीय मॉडल के रूप में भी उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। इसका ताजा उदाहरण नीति आयोग द्वारा जारी निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 (Export Preparedness Index—EPI 2024) की रैंकिंग है। बुधवार को जारी इस रैंकिंग में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए ओवरऑल चौथा स्थान तथा भू-आबद्ध (LANDLOCKED) राज्यों में प्रथम स्थान हासिल किया है। वर्ष 2022 की रैंकिंग में उत्तर प्रदेश ओवरऑल सातवें स्थान पर और भू-आबद्ध राज्यों में दूसरे स्थान पर था। केवल दो वर्षों में यह बड़ी छलांग राज्य के निर्यात क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों और योगी आदित्यनाथ सरकार की निर्यात-प्रोत्साहन नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है। योगी सरकार की नीतियों ने दी निर्यात को नई रफ्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में निर्यात अवसंरचना को सुदृढ़ करने, लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, विविध उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और कारोबारी माहौल को सुगम बनाने पर विशेष बल दिया गया। उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति, एक जिला–एक उत्पाद (ODOP) योजना, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, लॉजिस्टिक्स सुधार, रोड-कनेक्टिविटी और ड्राई पोर्ट जैसी पहल निर्यात तत्परता को गति देने में महत्वपूर्ण साबित हुई हैं। सरकार द्वारा माल भाड़ा व्यय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेलों/प्रदर्शनियों में भागीदारी, गुणवत्ता प्रमाणीकरण, ई-कॉमर्स ऑनबोर्डिंग शुल्क, कुरियर एवं एयर-फ्रेट व्यय तथा निर्यात क्रेडिट गारंटी पर प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाओं ने निर्यातकों का लागत बोझ कम किया है और उन्हें वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाया है। इंटरनेशनल ट्रेड शो ने खोले वैश्विक बाजारों के दरवाजे पिछले तीन वर्षों से आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो ने राज्य के निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म का कार्य किया है। इसके माध्यम से यूपी के एमएसएमई और पारंपरिक कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बायर्स से सीधा संपर्क मिला, जिससे नए बाजारों में प्रवेश और निर्यात ऑर्डरों में वृद्धि दर्ज की गई। इससे प्रदेश के हथकरघा, हस्तशिल्प, खाद्य-प्रसंस्करण, चमड़ा, फार्मा और एग्री-बेस्ड उत्पादों को नई पहचान मिली है। चार स्तंभों और 70 संकेतकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन नीति आयोग ने EPI-2024 रैंकिंग तैयार करते समय चार प्रमुख स्तंभ—निर्यात अवसंरचना, बिजनेस इकोसिस्टम, नीति एवं सुशासन और निर्यात प्रदर्शन के साथ 13 उप-स्तंभों के 70 संकेतकों के आधार पर राज्यों का मूल्यांकन किया। इन विभिन्न मानकों पर उत्तर प्रदेश ने व्यापक सुधार दर्ज कराए हैं। निर्यात पोर्टफोलियो का विस्तार, नए बाजारों तक पहुंच, लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम का विकास और उद्योग-अनुकूल नीतियों ने यूपी की स्थिति को मजबूत किया है। भू-आबद्ध राज्य होते हुए भी विशेष उपलब्धि रैंकिंग में पहले तीन स्थान पर महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात जैसे तटीय राज्य रहे हैं, जबकि समुद्री तट न होने के बावजूद उत्तर प्रदेश का चौथे स्थान तक पहुंचना एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। समुद्री तट न होने के कारण उत्तर प्रदेश के निर्यातकों को बंदरगाहों तक माल पहुंचाने में अधिक समय और लागत वहन करनी पड़ती है। इसके बावजूद राज्य का ओवरऑल चौथे स्थान तक पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधार, नीति समर्थन और सक्रिय हैंड-होल्डिंग ने निर्यातकों को वास्तविक लाभ पहुंचाया है।