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1 जनवरी 2026 से बदल रहा छुट्टियों का पूरा कैलेंडर, एमपी में सिंगल फादर के लिए बड़ी राहत

भोपाल  प्रदेश सरकार ने 48 साल पुराने सिविल सेवा अवकाश नियम में संशोधन कर दिया है। अब सरोगेट या कमीशनिंग मां (सरोगेसी के माध्यम से पैदा हुई संतान की मां) को मातृत्व और एकल (अकेले) पुरुष शासकीय सेवक को संतान पालन अवकाश मिलेगा। दत्तक संतान ग्रहण के लिए 15 दिन का पितृत्व अवकाश की पात्रता रहेगी। शिक्षकों को प्रतिवर्ष 10 अर्जित अवकाश मिलेंगे तो सेवानिवृत्ति के बाद अवकाश नकदीकरण में जो अर्जित अवकाश बच जाते हैं, उनका भी नकदीकरण किया जाएगा। यह प्रविधान एक जनवरी 2026 से लागू होंगे। नए नियमों के मुताबिक अब बीमारी और मातृत्व अवकाश लेना ज्यादा सुविधाजनक होगा, वहीं इनके दुरुपयोग पर भी लगाम लगेगी। अधिकारी छुट्टी देने में मनमानी न कर सकें, इसके लिए रोस्टर बनाना अनिवार्य होगा। सिविल सेवा अवकाश नियम में संशोधन वित्त विभाग ने अवकाश नियम 2025 अधिसूचित कर दिए हैं। अर्जित अवकाश सेवाकाल में 300 दिन से अधिक नहीं होंगे। प्रदेश में मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम 1977 लागू था। इसमें वर्तमान स्थितियों को देखते हुए परिवर्तन किए गए हैं। इससे प्रदेश के साढ़े सात लाख नियमित कर्मचारी लाभान्वित होंगे। संतान पालन अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) प्रथम 365 दिन पूर्ण वेतन के साथ मिलेगी। जबकि, दूसरी बार में 80 प्रतिशत वेतन का भुगतान होगा। 18 वर्ष तक के बच्चे के लिए अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा। सरोगेट और सिंगल पिता को अवकाश अभी तक दो साल का अवकाश लेने तक वेतन कटौती का प्रविधान नहीं था लेकिन संशोधित नियम में रखा गया है। एक वर्ष में तीन बार से अधिक अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। एकल महिला को एक कैलेंडर वर्ष (एक जनवरी से 31 दिसंबर) में छह बार अवकाश की पात्रता रहेगी। दत्तक संतान ग्रहण अवकाश की पात्रता उस दत्तकग्राही मां को नहीं होगी, जिसकी दत्तक लेते समय एक से अधिक जीवित संतान हो। शिक्षकों के लिए अर्जित अवकाश नकदीकरण पितृत्व अवकाश पत्नी के प्रसव होने की संभावित तिथि के 15 दिन पूर्व या प्रसव की तारीख से छह माह तक की अवधि में 15 दिनों का स्वीकृत किया जा सकेगा। इस अवधि का वेतन मिलेगा। सरोगेसी के द्वारा जन्मे संतान के कमीशनिंग (वह पुरुष जो सरगोसी के माध्यम से संतान का पिता होता है) पिता को भी छह महीने के भीतर 15 दिनों का पितृत्व अवकाश की पात्रता रहेगी। असाधारण अवकाश पर रहने किसी भी प्रकार के अवकाश वेतन की पात्रता नहीं रहेगी। इसके तहत चिकित्सकों को पीजी योग्यता प्राप्त करने के लिए 36 माह का अध्ययन अवकाश मिलेगा। इससे सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं आएगा। इन पर लागू नहीं होंगे नियम आकस्मिक, दैनिक दर या अंशकालीन नियोजन में नियुक्त कर्मचारी- आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारी- कार्यभारित स्थापना में नियुक्त कर्मचारी- संविदा पर नियुक्त कर्मचारी जानिए नए नियमों के 10 बड़े बदलाव 1. साल की शुरुआत में ही खाते में आ जाएगी EL (अर्निंग लीव) यह सबसे बड़ा और सुविधाजनक बदलाव है। अभी तक अर्जित अवकाश (EL) साल भर की नौकरी पूरी होने के बाद कर्मचारी के खाते में दर्ज होता था। अब ऐसा नहीं होगा। 1 जनवरी को 15 EL: साल की शुरुआत में ही 15 दिन की EL खाते में क्रेडिट हो जाएगी। 1 जुलाई को 15 EL: साल के मध्य में फिर 15 दिन की EL जुड़ जाएगी। नए कर्मचारियों को भी फायदा: नई जॉइनिंग करने वाले कर्मचारी को भी जॉइनिंग के साथ ही आनुपातिक रूप से EL मिल जाएगी। यह सुविधा काम शुरू करने से पहले ही कर्मचारियों को अवकाश की सुरक्षा देगी। 2. शिक्षकों और प्रोफेसरों को भी मिलेगी 10 दिन की EL अध्यापन कार्य में लगे सरकारी कर्मचारी, जिन्हें ग्रीष्मकालीन अवकाश मिलता है, उन्हें अभी तक अर्जित अवकाश की पात्रता नहीं थी। इससे उन्हें साल के बीच में जरूरी काम आने पर परेशानी होती थी। अब मिलेगा 10 दिन का अर्जित अवकाश: नए नियमों के तहत अब इन कर्मचारियों को भी साल में 10 दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा। 5 दिन की EL जनवरी में और 5 दिन की जुलाई में उनके खाते में जुड़ जाएगी। 4. ड्यूटी पर घायल होने पर 2 साल का विशेष अवकाश प्रदेश में कर्मचारियों और अधिकारियों पर ड्यूटी के दौरान बढ़ते हमलों और दुर्घटनाओं को देखते हुए यह विशेष प्रावधान किया गया है। स्पेशल मेडिकल लीव: यदि कोई कर्मचारी कर्तव्य पालन करते हुए हमले या दुर्घटना में घायल होता है, तो उसे मेडिकल ऑफिसर की अनुशंसा पर 2 साल तक का विशेष अवकाश मिल सकेगा। वेतन: इस अवकाश के पहले 180 दिनों में पूरा वेतन मिलेगा। शेष अवधि में आधा वेतन मिलेगा। कर्मचारी चाहे तो इस अवधि में अपनी EL समायोजित कराकर पूरा वेतन ले सकता है। यह छुट्टियां कर्मचारी के अवकाश खाते से नहीं काटी जाएंगी। 5. CL के साथ जुड़ जाएगी मेडिकल लीव अभी तक आकस्मिक अवकाश (CL) के तुरंत बाद मेडिकल लीव लेने पर तकनीकी समस्या होती थी। यदि कोई कर्मचारी बीमार होने पर 1-2 दिन की CL ले लेता है और बाद में उसे मेडिकल लीव की जरूरत पड़ती है, तो उसकी CL बर्बाद हो जाती थी। अब मिलेगी राहत: नए नियमों के तहत, कर्मचारी जॉइनिंग के 15 दिन के अंदर अपनी शुरुआती CL को मेडिकल लीव में बदलवा सकेगा। इससे उसकी CL बच जाएगी और पूरी छुट्टी मेडिकल लीव में गिनी जाएगी। 7. प्रोबेशनर्स के लिए भी स्पष्ट हुए छुट्टी के नियम अभी तक प्रोबेशन पीरियड में रहने वाले कर्मचारियों के लिए अवकाश के नियम स्पष्ट नहीं थे। अब मिलेगी पात्रता: नए नियमों में स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रोबेशनर्स को भी नियमानुसार अवकाश की पात्रता होगी। प्रशिक्षु कर्मचारियों को मेडिकल सर्टिफिकेट पर अधिकतम 1 महीने का अवकाश मिल सकेगा। 8. चाइल्ड केयर लीव: दूसरे साल 80% वेतन चाइल्ड केयर लीव के तहत 730 दिनों के अवकाश की पात्रता पहले की तरह ही रहेगी, लेकिन वेतन के नियम में बदलाव किया गया है। पहले 365 दिन: पूरा वेतन मिलेगा। अगले 365 दिन: वेतन का 80 प्रतिशत भुगतान होगा। 10. अवकाश अधिकार नहीं, लेकिन मनमानी भी नहीं नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि अवकाश अधिकार नहीं है और इसे लोकहित में निरस्त किया जा सकता है। हालांकि, इसका उद्देश्य कर्मचारियों के अवकाश के अधिकार को कम करना नहीं है। अधिकारी छुट्टी देने में मनमानी न … Read more

1000 युवाओं को रोजगार मिलेगा, वंदे भारत मेंटनेंस हब के तहत 13 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट

 भोपाल  नए साल में शहर के युवाओं को वंदे भारत मेंटेनेंस हब प्रोजेक्ट से रोजगार मिलने का रास्ता साफ हो गया है। भोपाल रेल मंडल के प्रोजेक्ट में कई पदों पर जल्द ही वैकेंसी निकाली जाएंगी। करीब 113 करोड़ के प्रोजेक्ट का निर्माण वंदे भारत के दिल्ली से आने वाले रैंक की सफाई व खराबियों को दूर करने के लिए किया जा रहा है। अभी ये काम दिल्ली में होता है और रानी कमलापति वॉशिंग पिट में गाड़ी की क्लीनिंग का काम किया जाता है। एक साथ होगा मेंटनेंस मेंटनेंस हब में काम करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों का दल तैनात रहेगा जो कम समय में ट्रेन को दोबारा वापसी की यात्रा के लिए तैयार कर देगा। सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि इस हब के बनने के बाद तीन वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का एक साथ मेंटेनेंस किया जा सकेगा। वर्तमान में वंदे भारत के कोच का फुल मेंटेनेंस चेन्नई भेजा जाता है और इटारसी में केवल छोटा-मोटा काम होता होता है। समय और संसाधनों की बचत मेंटनेंस हब भोपाल में होने से ट्रेन की बड़ी खराबी पर भी काम हो सकेगा। नवंबर 2024 में वंदे भारत के कोच की स्प्रिंग टूटने से ट्रेन को मरम्मत में 17 घंटे लगे थे। 3 चरणों में होगा काम यह प्रोजेक्ट 113 करोड़ में पूरा होगा। पहला चरण 2026 में पूरा करने की तैयारी है। प्रोजेक्ट के तीन चरणों में 3 से 4 साल लग सकता है। हब बनने के बाद देश की सबसे तेज और आधुनिक वंदे भारत ट्रेनों का नियमित मेंटेनेंस स्थानीय स्तर पर किया जा सकेगा।

ग्वालियर में औद्योगिक महाकुंभ: अमित शाह करेंगे 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन

ग्वालियर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के मौके पर 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की औद्योगिक परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. यह प्रोजेक्ट लॉन्च इवेंट वाजपेयी के जन्मस्थान ग्वालियर में होगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती को 'सुशासन दिवस' के रूप में मनाया जाता है. राज्य सरकार औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए वाजपेयी की जयंती पर ग्वालियर में 'अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट' का आयोजन कर रही है. सीएम यादव ने इंदौर में पत्रकारों से कहा कि केंद्रीय मंत्री शाह इस समिट में शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस में शाह राज्य के अलग-अलग हिस्सों में स्थित 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा औद्योगिक परियोजनाओं का एक साथ शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे.  इस आयोजन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शामिल होंगे। समिट में देश के अनेक प्रमुख औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि और बिजनेस लीडर भी सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के नागरिकों को नए निवेश के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। इसी क्रम में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट एक अभिनव प्रयास है, जिसके माध्यम से उच्च रोजगार सृजन करने वाले उद्यमियों का सम्मान, औद्योगिक परियोजनाओं का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया जाएगा। यह आयोजन ग्वालियर के मेला ग्राउंड में दोपहर 11.30 बजे से होगा।  CM यादव ने कहा, "यह ऐतिहासिक कॉन्फ्रेंस वाजपेयी को समर्पित होगी. वह एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन लोकतंत्र को समर्पित कर दिया. चाहे वह सरकार में रहे हों या विपक्ष में, उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी." स्व. प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर “निवेश से रोजगार-अटल संकल्प” विषय पर 45 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में भव्य प्रदर्शनी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी में अटल जी के जीवन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को दर्शाया जाएगा, साथ ही प्रदेश की औद्योगिक परियोजनाओं, सफल स्टार्टअप्स, ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों की जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी। इस अवसर पर प्रोत्साहन राशि वितरण, भूमि आवंटन, ग्वालियर व्यापार मेले का उद्घाटन तथा ई-जीरो एफआईआर प्रणाली का शुभारंभ भी किया जाएगा। समिट में गोदरेज इंडस्ट्रीज, ग्रीनको, वर्धमान समूह, जेके टायर, जुपिटर वैगन्स, मैकेन फूड, डाबर इंडिया, बीपीसीएल सहित अनेक प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। 

मंत्री सारंग ने पांढुर्णा के बोरगांव स्थित सेवा सहकारी समिति का किया औचक निरीक्षण

भोपाल सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को जिला पांढुर्णा प्रवास के दौरान बोरगांव स्थित सेवा सहकारी समिति का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने समिति के प्रशासकीय कार्यों का विस्तार से अवलोकन किया तथा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण में लेखाकार द्वारा किए जा रहे संतोषजनक कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया। वहीं समिति के प्रबंधक को सीपीपीपी (को-ऑपरेटिव पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के माध्यम से नए व्यवसायिक अवसर सृजित करने के निर्देश दिए। मंत्री सारंग ने कहा कि बोरगांव क्षेत्र में व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं। सहकारिता विभाग के नवाचार सीपीपीपी के तहत औद्योगिक कंपनियों के साथ साझेदारी के अवसर तलाशे जाएं, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकें। उन्होंने कहा कि सीपीपीपी सहकारिता को सशक्त करने और पैक्स को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम है। मंत्री सारंग ने सहकारिता विभाग के नवाचार सीपीपीपी के माध्यम से औद्योगिक कंपनियों के साथ साझेदारी के अवसर खोजने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीपीपीपी एक ऐसा आयाम है, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी और साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। मंत्री श्री सारंग के इस दौरे से सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक संदेश गया है। निरीक्षण के बाद मंत्री सारंग ने सुरुचि मसाला के प्रबंधक के साथ बैठक कर किसानों की आय बढ़ाने एवं पैक्स को नए व्यवसायिक अवसरों से जोड़ने को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि किसानों से कच्चा माल क्रय कर उसे सुरुचि मसाला जैसी कंपनियों को उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही अन्य कॉर्पोरेट संस्थाओं का चयन कर पैक्स को नए व्यवसायों से जोड़ने की दिशा में कार्य करने पर बल दिया गया। मंत्री सारंग ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है और इस दिशा में ठोस व व्यावहारिक प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।  

ब्रजेश पाठक बोले: सपा शासन में अस्पतालों का ढांचा बेहद कमजोर, हालत थी तबेला जैसी

लखनऊ यूपी के उपमुख्‍यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सोमवार को विधानसभा में आरोप लगाया कि 2017 से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार ने अस्पतालों को तबेला बनाकर रख दिया था। पाठक ने कहा, प्रदेश में निजी चिकित्सकों का परामर्श शुल्क एवं विभिन्न चिकित्सकीय जांचों आदि का रेट निर्धारित कर एक समान करने और उनमें मनचाही वृद्धि रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा कोई नीति नहीं लाई गयी थी। प्रदेश में 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के नेतृत्‍व की सरकार थी। राज्य सरकार में स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा विभाग संभाल रहे उपमुख्‍यमंत्री पाठक विधानसभा के प्रश्नकाल में सपा सदस्य समरपाल सिंह और अखिलेश के प्रश्नों का उत्‍तर दे रहे थे। सपा सदस्य समरपाल सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था बदहाल हो गई है और सरकारी चिकित्सक अपने घरों पर मरीजों का इलाज कर उनसे पैसे ऐंठते हैं। उन्‍होंने अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव बताया। आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर क्षेत्र से सपा विधायक अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मरीजों को अस्पतालों में सुविधा नहीं मिलती और निजी अस्पतालों में भारी शुल्क लिया जाता है। अखिलेश ने अपने पूरक प्रश्न में पूछा कि क्या सरकार निजी अस्पतालों के एक समान शुल्क के लिए कोई नियम बनाएगी। ब्रजेश पाठक ने अखिलेश का जवाब देते हुए कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा जांच, उपचार और दवाएं मुफ्त दी जाती हैं। उन्‍होंने प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र और जिला अस्पतालों से लेकर उच्‍च स्‍तरीय सुविधा वाले सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली सुविधाओं का ब्‍यौरा दिया। पाठक ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित विभिन्न चिकित्सालय में जन सामान्य को निशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत आयुष्मान कार्ड धारकों को सरकारी एवं निजी चिकित्सालय में निर्धारित पैकेज के अनुसार पांच लाख रुपये की सीमा तक निशुल्क चिकित्सा दी जाती है तथा 70 वर्ष से अधिक आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान वय वंदन योजना के अंतर्गत चिकित्सकीय लाभ प्रदान किया जाता है।

हर्षोल्‍लास एवं धूम-धाम के साथ मनाया जाएगा गणतंत्र दिवस

अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक श्री चंचल शेखर ने बैठक लेकर सौंपी जिम्‍मेदारियाँ भोपाल हर साल की तरह इस साल भी हर्षोल्‍लास एवं धूम-धाम के साथ गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। प्रदेश का मुख्‍य समारोह 26 जनवरी को जहाँगीराबाद स्थित लाल परेड मैदान में आयोजित होगा। बीटिंग द रिट्रीट समारोह का आयोजन 29 जनवरी को किया जाएगा। इन दोनों आयोजनों की तैयारी के सिलसिले में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एस.ए.एफ श्री चंचल शेखर ने सोमवार को संबंधित अधिकारियों की बैठक ली। नवीन पुलिस मुख्यालय केभूतल स्थित सभाकक्ष में आयोजित बैठक में श्री शेखर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी तैयारियों को गणतंत्र दिवस की गरिमा को ध्‍यान में रखकर अंतिम रूप दें। उन्‍होंने गणतंत्र दिवस परेड के लिए विभिन्‍नईकाईयों से बल बुलाना, परेड मैदान की साफ सफाई, सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, दर्शकों और आमंत्रित अतिथियों की बैठक व्यवस्था सहित झांकी एवं चिकित्सा व्यवस्था आदि के लिए विभिन्न अधिकारियों को जिम्मेदारियाँ सौंपी। बीटिंग द रिट्रीट में बजने वाली धुनों का चयन, आतिशबाजी एवं विद्युत व्यवस्था के संबंध में भी उन्‍होंने आवश्‍यक निर्देश दिए और अधिकारियों को जवाबदेही भी सौंपी। बैठक में तय किया गया कि गणतंत्र दिवस समारोह के लिए परेड रिहर्सल 4 जनवरी से शुरू होगी। फुल ड्रेस फायनलरिहर्सल 24 जनवरी को की जाएगी। बैठक मेंपुलिस महानिरीक्षक एसएएफ श्री इरशाद वली, उप पुलिस महानिरीक्षक विसबलमध्‍य क्षेत्र श्री ओमप्रकाश त्रिपाठी, सेनानी 7 वीं वाहिनी श्री हितेश चौधरीसहित पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के पुलिस अधिकारी तथा लोक निर्माण विभाग, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, नगर निगम, महिला बाल विकास के अधिकारी मौजूद थे। ’’बीटिंग द रिट्रीट’’ का आयोजन 29 जनवरी को होगा ’’बीटिंग दरिट्रीट’’ सैन्य व अर्द्ध सैन्य बलों की प्राचीन परम्परा है। युद्ध के बाद जब सैन्य टुकड़ियाँ वापस अपने कैम्पों में आती थीं तो तनाव कम करने के लिए बैण्ड वादन इत्‍यादि मनोरंजक एवं सांस्‍कृतिक कार्यक्रम रखे जाते थे। भारत में इस कार्यक्रम के साथ ही गणतंत्रदिवस के कार्यक्रमों का औपचारिक समापन होता है। मध्यप्रदेश में गणतंत्र दिवस समारोह का समापन 29 जनवरी को भोपाल के मोतीलाल नेहरु स्टेडियम में ’’बीटिंग द रिट्रीट’’ समारोह आयोजन के साथ होगा।  

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत

केवल गीत नहीं, राष्ट्र की चेतना व साहस का मंत्र है वंदे मातरम् : योगी आदित्यनाथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोलेः स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा का उद्घोष है वंदे मातरम् केवल काव्य नहीं बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है वंदे मातरम्ः मुख्यमंत्री योगी लखनऊ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस चर्चा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, क्रांतिकारियों के साहस और राष्ट्र के आत्मसम्मान का मंत्र है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संभवतः उत्तर प्रदेश पहली विधानसभा है, जहां इस ऐतिहासिक विषय पर विस्तार से चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, यह चर्चा किसी गीत की वर्षगांठ भर नहीं है, बल्कि भारत माता के प्रति राष्ट्रीय कर्तव्यों की पुनर्स्थापना का अवसर है। वंदे मातरम् का सम्मान केवल एक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह हमारे संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय दायित्वों का बोध कराता है। यह राष्ट्र की आत्मा, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह केवल काव्य नहीं था, बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है। ब्रिटिश शासन में भी बना स्वतंत्रता की चेतना का स्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब वंदे मातरम् अपनी रजत जयंती मना रहा था, तब देश ब्रिटिश हुकूमत के अधीन था। 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद अंग्रेजी शासन दमन और अत्याचार की पराकाष्ठा पर था। काले कानूनों के माध्यम से जनता की आवाज को दबाया जा रहा था, यातनाएं दी जा रही थीं, लेकिन वंदे मातरम् ने देश की सुप्त चेतना को जीवित रखा। जब देश इसकी रजत और स्वर्ण जयंती मना रहा था, तब भी ब्रिटिश शासन कायम था। उस समय स्वतंत्रता की चेतना को आगे बढ़ाने का मंच कांग्रेस के अधिवेशन रहे, जहां वर्ष 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे स्वर दिया। यह पूरे देश के लिए एक मंत्र बन गया। विधानसभा में वंदे मातरम पर बोले माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति की, जिन्ना जबतक कांग्रेस में थे, वंदेमातरम कोई निर्णायक विवाद नही था। कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इसे मुस्लिम लीग का औजार बनाया और गीत को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया। गीत वही रहा, लेकिन एजेंडा बदल गया : मुख्यमंत्री  15 अक्टूबर 1937 को इसी लखनऊ से मो अली जिन्ना ने वंदेमातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया और उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित नेहरू थे। 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू जी ने सुभाष चंद्र बोस जी को पत्र लिखा और कहा इसकी पृष्टभूमि मुस्लिमों को असहज कर रही है : मुख्यमंत्री देश की आत्मा जगाने वाला गीत है वंदे मातरम् मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब वंदे मातरम् की शताब्दी आई, तब वही कांग्रेस सत्ता में थी, जिसने कभी देश की आत्मा जगाने वाले इस गीत को अपने मंच पर स्थान दिया था, मगर उसने देश पर आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटने का कार्य किया। यह इतिहास का एक ऐसा कालखंड था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, आज जब वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तब भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रगीत के अमर रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जो सपना था, उसे नया भारत साकार करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इसी कारण यह चर्चा सदन में अत्यंत सामयिक है। 1857 से राष्ट्र चेतना के प्रवाह का माध्यम बना वंदे मातरम् मुख्यमंत्री ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर का उल्लेख करते हुए कहा कि बैरकपुर में मंगल पांडेय, गोरखपुर में शहीद बंधु सिंह, मेरठ में धन सिंह कोतवाल और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में देशभर में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष हुआ। स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद उपजी हताशा के दौर में वंदे मातरम् ने देश की सोई हुई आत्मा को जगाने का काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय डिप्टी कलेक्टर के रूप में ब्रिटिश शासन में कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आम जनमानस की भावनाओं को वंदे मातरम् के माध्यम से स्वर दिया।  औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का माध्यम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, वंदे मातरम औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बना।  उन्होंने कहा कि भारत माता केवल भूभाग नहीं थी, बल्कि हर भारतीय की भावना थी। स्वाधीनता राजनीति नहीं, बल्कि साधना थी। 'सुजलाम, सुफलाम् मलयज-शीतलाम् शस्यश्यामलाम् मातरम्' की पंक्तियों ने भारतीय मानस में चेतना का संचार किया और भारत की प्रकृति, समृद्धि, सौंदर्य और शक्ति को एक साथ मूर्त रूप दिया।

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत

केवल गीत नहीं, राष्ट्र की चेतना व साहस का मंत्र है वंदे मातरम् : योगी आदित्यनाथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोलेः स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा का उद्घोष है वंदे मातरम् केवल काव्य नहीं बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है वंदे मातरम्ः मुख्यमंत्री योगी लखनऊ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस चर्चा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, क्रांतिकारियों के साहस और राष्ट्र के आत्मसम्मान का मंत्र है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संभवतः उत्तर प्रदेश पहली विधानसभा है, जहां इस ऐतिहासिक विषय पर विस्तार से चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, यह चर्चा किसी गीत की वर्षगांठ भर नहीं है, बल्कि भारत माता के प्रति राष्ट्रीय कर्तव्यों की पुनर्स्थापना का अवसर है। वंदे मातरम् का सम्मान केवल एक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह हमारे संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय दायित्वों का बोध कराता है। यह राष्ट्र की आत्मा, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह केवल काव्य नहीं था, बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है। ब्रिटिश शासन में भी बना स्वतंत्रता की चेतना का स्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब वंदे मातरम् अपनी रजत जयंती मना रहा था, तब देश ब्रिटिश हुकूमत के अधीन था। 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद अंग्रेजी शासन दमन और अत्याचार की पराकाष्ठा पर था। काले कानूनों के माध्यम से जनता की आवाज को दबाया जा रहा था, यातनाएं दी जा रही थीं, लेकिन वंदे मातरम् ने देश की सुप्त चेतना को जीवित रखा। जब देश इसकी रजत और स्वर्ण जयंती मना रहा था, तब भी ब्रिटिश शासन कायम था। उस समय स्वतंत्रता की चेतना को आगे बढ़ाने का मंच कांग्रेस के अधिवेशन रहे, जहां वर्ष 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे स्वर दिया। यह पूरे देश के लिए एक मंत्र बन गया। विधानसभा में वंदे मातरम पर बोले माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति की, जिन्ना जबतक कांग्रेस में थे, वंदेमातरम कोई निर्णायक विवाद नही था। कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इसे मुस्लिम लीग का औजार बनाया और गीत को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया। गीत वही रहा, लेकिन एजेंडा बदल गया : मुख्यमंत्री  15 अक्टूबर 1937 को इसी लखनऊ से मो अली जिन्ना ने वंदेमातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया और उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित नेहरू थे। 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू जी ने सुभाष चंद्र बोस जी को पत्र लिखा और कहा इसकी पृष्टभूमि मुस्लिमों को असहज कर रही है : मुख्यमंत्री देश की आत्मा जगाने वाला गीत है वंदे मातरम् मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब वंदे मातरम् की शताब्दी आई, तब वही कांग्रेस सत्ता में थी, जिसने कभी देश की आत्मा जगाने वाले इस गीत को अपने मंच पर स्थान दिया था, मगर उसने देश पर आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटने का कार्य किया। यह इतिहास का एक ऐसा कालखंड था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, आज जब वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तब भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रगीत के अमर रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जो सपना था, उसे नया भारत साकार करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इसी कारण यह चर्चा सदन में अत्यंत सामयिक है। 1857 से राष्ट्र चेतना के प्रवाह का माध्यम बना वंदे मातरम् मुख्यमंत्री ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर का उल्लेख करते हुए कहा कि बैरकपुर में मंगल पांडेय, गोरखपुर में शहीद बंधु सिंह, मेरठ में धन सिंह कोतवाल और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में देशभर में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष हुआ। स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद उपजी हताशा के दौर में वंदे मातरम् ने देश की सोई हुई आत्मा को जगाने का काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय डिप्टी कलेक्टर के रूप में ब्रिटिश शासन में कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आम जनमानस की भावनाओं को वंदे मातरम् के माध्यम से स्वर दिया।  औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का माध्यम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, वंदे मातरम औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बना।  उन्होंने कहा कि भारत माता केवल भूभाग नहीं थी, बल्कि हर भारतीय की भावना थी। स्वाधीनता राजनीति नहीं, बल्कि साधना थी। 'सुजलाम, सुफलाम् मलयज-शीतलाम् शस्यश्यामलाम् मातरम्' की पंक्तियों ने भारतीय मानस में चेतना का संचार किया और भारत की प्रकृति, समृद्धि, सौंदर्य और शक्ति को एक साथ मूर्त रूप दिया।

ठंड, घना कोहरा और जहरीली हवा ने बढ़ाई दिल्लीवासियों की परेशानी, येलो अलर्ट लागू

नई दिल्ली दिल्ली और आसपास के सटे इलाकों में कड़ाके की सर्दी बढ़ गई है। न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, वहीं घने कोहरे ने आम लोगों की आवाजाही और जीवन को मुश्किल बना दिया है। दिल्ली–NCR क्षेत्र के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, ठंडी हवाओं की गति बढ़ने के बावजूद वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुँच चुकी है, जिससे स्वास्थ्य और यातायात दोनों पर असर पड़ रहा है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता अब भी बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है और प्रदूषण में कमी का नाम नहीं लिया जा रहा है। दिन-ब-दिन हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। हालांकि, सरकार ने वायु प्रदूषण को कम करने के लिए अहम कदम उठाए हैं। राजधानी में GRAP-4 की पाबंदियां लागू की गई हैं, लेकिन इनका असर फिलहाल सीमित नजर आ रहा है और हवा जहरीली बनी हुई है। आज भी दिल्ली के अधिकांश इलाके रेड जोन में हैं। दिल्ली-NCR में बढ़ती ठंड और हवाओं की रफ्तार बीते दो दिनों से दिल्ली–एनसीआर में ठंड लगातार बढ़ रही है और सुबह से शाम तक धूप नदारद है। पूरे क्षेत्र में घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे दृश्यता कम हो गई है और ठिठुरन का एहसास बढ़ गया है। ठंडी हवाएं पहले 8 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थीं, लेकिन आज से इनकी गति बढ़कर लगभग 25 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। इन तेज हवाओं के कारण तापमान में और गिरावट महसूस की जा रही है, जिससे आम नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानियां बढ़ गई हैं। ठंड का कोल्ड अलर्ट भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, फिलहाल शीतलहर की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मौसम की गंभीरता को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। सुबह और शाम के समय घना कोहरा कई इलाकों में बना रहता है। ठंडी हवाओं के कारण शरीर में ठिठुरन बढ़ेगी, और बुजुर्गों व बच्चों के लिए जोखिम अधिक रहेगा। IMD ने लोगों से सलाह दी है कि वे सावधानी बरतें, सुबह जल्दी बाहर निकलने से बचें और हाईवे पर अनावश्यक यात्रा न करें, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना कम से कम हो। कुछ शहरों का तापमान, AQI और आगे का मौसम दिल्ली में अधिकतम तापमान 20 और न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 334 रहा। नोएडा में तापमान 22 से 11 डिग्री सेल्सियस के बीच और AQI 328 दर्ज किया गया। गाजियाबाद में हालात सबसे गंभीर रहे, जहां AQI 444 से 484 तक पहुंच गया और तापमान 21 से 11 डिग्री सेल्सियस रहा। गुड़गांव में AQI 323 और ग्रेटर नोएडा में 432 रिकॉर्ड किया गया। IMD के अनुसार, 27 दिसंबर तक पूरे सप्ताह ठंड का असर बना रहेगा, और अधिकतम तापमान 19 तथा न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। इस दौरान घना कोहरा और ठंडी हवाएं लगातार बनी रहेंगी। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर आगे भी येलो या अन्य अलर्ट जारी किए जा सकते हैं। दिल्ली पर प्रदूषण की घनी चादर छा जाने से राजधानी की रफ्तार धीमी हो गई है। धुंध और स्मॉग के कारण दृश्यता काफी कम हो गई है, जिसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सुबह और शाम के समय हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। दूर से दिखाई देने वाली इमारतें और स्मारक अब मुश्किल से दिखाई दे रहे हैं। राजधानी में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का चौथा चरण लागू कर दिया गया है। इसके तहत BS-6 मानक से नीचे की गाड़ियों के दिल्ली में प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही, निर्माण कार्यों पर रोक, औद्योगिक गतिविधियों पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सके। दिल्ली में सर्दी लगातार बढ़ रही है और राजधानी में दो दिन से येलो अलर्ट जारी है। मौसम विभाग ने सोमवार के लिए भी कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है। आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

68 करोड़ यूजर्स खतरे में! ईमेल और पासवर्ड लीक पर MP स्टेट साइबर सेल की सख्त चेतावनी

भोपाल मध्य प्रदेश स्टेट साइबर सेल ने एक गंभीर साइबर अलर्ट जारी किया है। सेल के मुताबिक, देशभर में करीब 68 करोड़ इंटरनेट यूजर्स के ई-मेल आईडी और पासवर्ड के लीक हो चुके है। ऐसे में यूजर्स को अपने ऑनलाइन अकाउंट्स को सुरक्षित रखने के लिए तुरंत पासवर्ड बदलने की सलाह दी गई है। साइबर सेल ने चेताया है कि अगर किसी का ई-मेल अकाउंट हैक हो जाता है, तो हैकर को उससे जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स, बैंकिंग ऐप्स और डिजिटल वॉलेट तक भी पहुंच मिल सकती है। इससे वित्तीय नुकसान और पहचान की चोरी का खतरा बढ़ जाता है। टू-फैक्टर वेरिफिकेशन जरूरी एडवाइजरी में सभी यूजर्स से अपनी ई-मेल आईडी पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू करने को कहा गया है। 2FA एक्टिव होने पर, पासवर्ड के अलावा मोबाइल पर आने वाले ओटीपी के बिना अकाउंट एक्सेस नहीं किया जा सकता, जिससे सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जुड़ जाती है। फर्जी परमिशन से रहें सावधान साइबर सेल ने यह भी आगाह किया है कि अगर मोबाइल स्क्रीन पर ई-मेल लॉगिन की परमिशन मांगने वाला कोई नोटिफिकेशन आए, तो “Yes, it’s me” जैसे विकल्प पर बिना जांचे क्लिक न करें। गलती से क्लिक करने पर अकाउंट की पूरी जानकारी हैकर के हाथ लग सकती है। यदि ऐसा हो जाए, तो तुरंत पासवर्ड बदलें। हर प्लेटफॉर्म के लिए अलग पासवर्ड स्टेट साइबर पुलिस के अनुसार, सभी वेबसाइट्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के लिए अलग-अलग और मजबूत पासवर्ड रखना बेहद जरूरी है। एक ही पासवर्ड कई जगह इस्तेमाल करने से जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। साइबर सेल ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें, संदिग्ध लिंक या मैसेज से दूर रहें और समय-समय पर अपनी सुरक्षा सेटिंग्स की जांच करते रहें।