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स्वच्छता और इनोवेशन में आगे इंदौर: पुराने कपड़े धागे में, पशु शवों का सुरक्षित प्रबंधन

इंदौर  स्वच्छता और नवाचार में देश को दिशा दिखाने वाला इंदौर अब शहरी प्रबंधन के नए अध्याय लिखने की ओर बढ़ रहा है। नगर निगम ने कचरे को संसाधन में बदलने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक साथ कई बड़े कदम उठाए हैं। शहर में जहां अब पुराने कपड़ों से धागा तैयार कर पुनर्चक्रण को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं मृत पशुओं को दफनाने की परंपरा को समाप्त कर उन्हें अत्याधुनिक संयंत्र में सम्मानजनक अग्निदाह की व्यवस्था की जा रही है। ट्रेंचिंग ग्राउंड परिसर में आधुनिक फायर स्टेशन भी इसके साथ ही नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रेंचिंग ग्राउंड परिसर में एक आधुनिक फायर स्टेशन भी विकसित किया जाएगा। ये सभी परियोजनाएं पीपीपी मोड पर स्थापित की जा रही हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड पर इन नवाचारी परियोजनाओं का भूमिपूजन कर इंदौर को टिकाऊ, सुरक्षित और भविष्य के शहर के रूप में आगे बढ़ाने का संदेश दिया। इस अवसर पर महापौर ने कहा कि इंदौर का ट्रेंचिंग ग्राउंड न केवल देश, बल्कि दुनिया में सबसे अधिक सर्च और अध्ययन किया जाने वाला स्थल बन चुका है। हमारे नवाचार ही हमारी असली ताकत हैं। इंदौर वेस्ट टू वेल्थ की दिशा में आगे बढ़ रहा है अनुपयोगी कपड़ों से धागा बनाने, मृत पशुओं और मीट अपशिष्ट का पर्यावरण अनुकूल निपटान करने जैसे कार्य इंदौर को स्वच्छता के अगले स्तर पर ले जाएंगे। भूमिपूजन कार्यक्रम में महापौर परिषद सदस्य अश्विनी शुक्ल, अभिषेक शर्मा बबलू, नंदकिशोर पहाड़िया, मनीष शर्मा मामा, नगर निगम के अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान 16 दिसंबर विजय दिवस के अवसर पर महापौर ने उपस्थित सेवानिवृत्त सैनिकों का सम्मान भी किया। कचरे से संसाधन रोजाना 25 टन पुराने कपड़ों से बनेगा धागा नगर निगम ने शहर के सभी जोन क्षेत्र में थ्री-आर सेंटर स्थापित किए हैं। इन पर रोजाना बड़ी मात्रा में नागरिक पुराने कपड़े देते हैं। इसके अलावा नेकी की दीवार पर भी बड़ी मात्रा में अनुपयोगी कपड़े एकत्र होते हैं। इन पुराने कपड़ों से धागा बनाने के लिए ट्रेंचिंग ग्राउंड पर पीपीपी मोड पर पुराने कपड़ों से धागा बनाने का संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। पशु शवदाह स्थापित किया जा रहा दुर्गंध और प्रदूषण से भी मिलेगी राहत नगरीय सीमा में रोजाना करीब 50 पशुओं की मृत्यु होती है। इन पशुओं के शव को फिलहाल ट्रेंचिंग ग्राउंड लाकर दफनाया जाता है। इसके अलावा शहरभर से एकत्र होने वाले मीट अपशिष्ट को भी ट्रेंचिंग ग्राउंड लाया जाता है। यहां जमीन में गड्ढा कर अपशिष्ट को गाढ़ा जाता है। इससे उठने वाली बदबू से वायु प्रदूषण होता है। भूजल भी दूषित होता है। इससे बचने के लिए अब पीपीपी मोड पर पशुओं के शव के लिए शवदाह स्थापित किया जा रहा है। आग पर काबू अब मिनटों में देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड में नया फायर स्टेशन शहर के पूर्वी क्षेत्र में अग्निशमन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड परिसर में नया फायर स्टेशन विकसित करने जा रहा है। पालदा और नेमावर रोड क्षेत्र में पिछले दो दशक में बड़ी संख्या में रहवासी कॉलोनियां विकसित हुई हैं। हजारों की संख्या में लोग इन क्षेत्रों में रह रहे हैं। आग लगने की स्थिति में दमकलों को कई किमी दूर स्थित फायर स्टेशन से बुलाना पड़ता है। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर फायर स्टेशन विकसित होने से दमकलें कुछ ही मिनट में मौके पर पहुंच सकेंगी।  

सदन में नारेबाजी और पोस्टरबाजी: ‘सत्यमेव जयते’ लेकर गर्भगृह में घुसे कांग्रेस विधायक, सस्पेंड

रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन कांग्रेस के सभी विधायक ‘सत्यमेव जयते’ की तख्ती लेकर सदन में पहुंचे थे. विधायक नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ईडी की कार्रवाई का विरोध कर रहे थे. सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी बहस हुई. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जाँच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया. अजय चंद्राकर ने आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताई. विपक्ष ने जाँच एजेंसियों के दुरूपयोग पर स्थगन लाया था. आसंदी ने विपक्ष के स्थगन को अग्राह्य किया. इसके साथ ही सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार नारेबाजी शुरू हो गई. नारेबाजी करते हुए विपक्षी सदस्य गर्भगृह में पहुंचे. विपक्षी सदस्य सत्यमेव जयते के साथ जाँच एजेंसियों का दुरूपयोग करना बंद करो, भारत माता की जय, महात्मा गांधी की जय का नारा लगाते हुए गर्भगृह में पहुँचे. गर्भगृह में पहुंचने पर विपक्षी सदस्य निलंबित किए गए.

सदन की गरिमा पर सवाल: आसंदी ने विपक्षी सदस्यों के आचरण की निंदा की

रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र के चौथे दिन प्रश्नकाल की कार्यवाही बाधित होने पर स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने नाराजगी जताई. उन्होंने विपक्षी सदस्यों के अनुचित व्यवहार की निंदा की. स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कांग्रेस विधायकों के सीने पर पोस्टर लगाकर आने पर सत्तापक्ष के विधायकों की आपत्ति के बीच कहा कि लोक हित से जुड़े विषयों पर कार्यवाही को बाधित करना निंदनीय है. विपक्षी सदस्य सदन की कार्यवाही के जानकार हैं, बावजूद उन्होंने जो किया वह अमर्यादित है, मैं आगे उनके विवेक पर छोड़ता हूं.

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विधानसभा की गौरवशाली यात्रा पर दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विधानसभा की गौरवशाली यात्रा के दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी का किया शुभारंभ विधानसभा के विशेष सत्र के अवसर पर विधानसभा के इतिहास और प्रदेश के विकास पर आधारित है प्रदर्शनी भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बुधवार को विधानसभा के विशेष सत्र के अवसर पर “मध्यप्रदेश विधानसभा के 1956 से 2025 तक के इतिहास के पल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का "अभ्युदय मध्यप्रदेश- विकास और सेवा के दो वर्ष” विषय पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार एवं अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने “मध्यप्रदेश विधानसभा के 1956 से 2025 तक के इतिहास के पल” प्रदर्शनी का फीता खोल कर शुभारंभ किया। उन्होंने विधानसभा के सेंट्रल हॉल में आयोजित चित्र प्रदर्शनी के एलबम का भी लोकार्पण किया और प्रदर्शनी के चित्रों का अवलोकन किया। उन्होंने ऐतिहासिक, दुर्लभ चित्र संकलन और प्रस्तुतिकरण की सराहना की। राज्यपाल पटेल ने इस अवसर पर जनसंपर्क विभाग द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का "अभ्युदय मध्यप्रदेश- विकास और सेवा के दो वर्ष” विषय पर आयोजित चित्र प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल के विधानसभा आगमन पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर मंत्रीगण, विधायक और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रथम सत्र के 70 वर्षों के उपलक्ष्य में विशेष सत्र का आयोजन किया गया है। मध्यप्रदेश विधानसभा के सात दशकों की गौरवशाली यात्रा के दुर्लभ चित्रों की आकर्षक प्रदर्शनी विधानसभा के सेंट्रल हॉल में लगाई गई है। प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश विधानसभा के 1956 से 2025 तक के इतिहास के 135 दुर्लभ चित्रों का संयोजन किया गया है। इसी तरह जनसंपर्क विभाग द्वारा विधानसभा प्रांगण में 90 पेनलों की आकर्षक विकास प्रदर्शनी लगाई गई है।  

मजदूरों को राहत, वर्क फ्रॉम होम पर नया निर्णय और वाहनों के लिए कड़ा फैसला — रेखा गुप्ता सरकार

नई दिल्ली दिल्‍ली में एयर पॉल्‍यूशन से हालात काफी गंभीर हो चुके हैं. अब मुख्‍यमंत्री रेखा गुप्‍ता की सरकार ने इसको लेकर बड़ा ऐलान किया है. मजदूरों से लेकर वाहन चालकों और नौकरीपेशा लोगों के लिए घोषणाएं की गई हैं. दिल्‍ली की रेखा गुप्‍ता सरकार अब एयर पॉल्‍यूशन से निपटने के लिए युद्धस्‍तर पर काम करने में जुट गई है. वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्‍ली सरकार की ओर से कई महत्‍वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. दिल्‍ली सरकार ने प्रभावित होने वाले मजदूरों को ₹10000 का मुआवजा देने का ऐलान किया है. साथ ही नौकरीपेशा लोगों के लिए भी महत्‍वपूर्ण घोषणा की गई है. सरकार ने 50 फीसद स्‍टाफ के साथ ही ऑफिस चलाने का निर्देश दिया है. 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से ही काम करने (Work From Home – वर्क फ्रॉम होम) का निर्देश दिया गया है. वाहनों को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है. दिल्‍ली सरकार के श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने वायु प्रदूषण से निपटने को लेकर बुधवार 17 दिसंबर 2025 को बड़ा ऐलान किया है. उन्‍होंने कहा कि इस गंभीर समस्‍या से निजात पाने के लिए कुछ कड़े निर्णय लिए गए हैं. कपिल मिश्रा ने कहा, ‘GRAP-3 के चलते कंस्ट्रक्शन वर्कर्स का काम बंद था, जिससे उनकी माली हालत पर फर्क पड़ा. सभी रजिस्‍टर्ड मजदूरों के बैंक खाते में दस हजार रुपये DBT के माध्‍यम से ट्रांसफर किए जाएंगे. ये अभी सोलह दिन का है.’ कपिल मिश्रा ने आगे बताया कि GRAP-4 का भी इन मजदूरों को पैसा दिया जाएगा. दिल्‍ली में वर्क फ्रॉम होम देश की राजधानी दिल्‍ली की सरकार ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ा फैसला किया है. कपिल मिश्रा ने कहा, ‘⁠दूसरा निर्णय ऑफिस जानेवालों के लिए है. सभी प्रतिष्ठान (सरकारी और प्राइवेट) केवल 50 परसेंट अटेंडेंस के साथ ही चलेंगे. स्‍वास्‍थ्‍य, बिजली, पानी, डिजास्‍टर मैनेजमेंट और पर्यावरण विभाग पर यह 50 फीसद का फॉर्मूला लागू नहीं होगा.’ कपिल मिश्रा ने वर्किंग आवर्स को फ्लेक्सिबल करने की भी अपील की है. बता दें कि दिल्‍ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए सर्दियों के मौसम में वर्क फ्रॉम होम के फॉर्मूले का अक्‍सर इस्‍तेमाल किया जाता है. इसके अलावा कार पूलिंग का यूज करने की सलाह भी दी गई है. नहीं मानी बात तो जुर्माना मंत्री कपिल मिश्रा ने साफ कर दिया कि निर्देशों की अवहेलना होने की स्थिति में जुर्माना लगाया जाएगा. दिल्‍ली में एयर पॉल्‍यूशन पर कपिल मिश्रा ने कहा कि हमसे एक गलती तो हुई है. हमने 30 साल का पॉल्‍यूशन को 5 महीने में खत्‍म नहीं कर पाए. उन्‍होंने कहा कि आप सरकार ने कुछ नहीं किया. ये जो भी आप देख रहे हैं ये सब 12 साल के हैं. प्रदूषण हमें विरासत में मिला है. बता दें कि सर्दियों के मौसम में हर साल एयर पॉल्‍यूशन की हालत गंभीर हो जाती है. एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स बेहद ही गंभीर कैटेगरी में पहुंच जाता है, जिसके चलते खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है.

मोहन सरकार का बड़ा फैसला: उज्जैन की लैंड पूलिंग योजना अब नहीं चलेगी

उज्जैन    किसानों और स्थानीय स्तर पर भारी विरोध के बाद आखिरकार सरकार ने उज्जैन के सिंहस्थ क्षेत्र की लैंड पूलिंग योजना को मंगलवार देर रात निरस्त कर दिया। अब सिंहस्थ क्षेत्र में ठीक उसी तरह से व्यवस्था होगी, जैसे अब तक होती आई है।लैंड पूलिंग योजना में सरकार ने सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी निर्माण के लिए किसानों की भूमि लैंड पूलिंग के तहत लेने का प्रावधान किया था। इसमें किसानों को भूमि का एक हिस्सा विकसित करके दिया जाता और शेष का मुआवजा मिलता लेकिन इसके लिए वे तैयार नहीं थे। शासन ने आदेश को राजपत्र (गजट) में प्रकाशित भी कर दिया है। यह निर्णय भारतीय किसान संघ के 26 दिसंबर से उज्जैन में ‘घेरा डालो–डेरा डालो’ आंदोलन की चेतावनी के बाद लिया गया है। किसान संघ ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक लैंड पूलिंग नीति को पूरी तरह निरस्त करने का लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। आंदोलन की घोषणा के बाद सरकार और किसान संगठनों के बीच टकराव की स्थिति लगातार गहराती जा रही थी। दरअसल, सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास योजनाओं के अंतर्गत किसानों की भूमि को लैंड पूलिंग के माध्यम से विकसित करने का प्रस्ताव था। इस नीति के तहत जमीनों के अधिग्रहण और पुनर्विकास को लेकर किसानों में भारी असंतोष था। किसान संगठनों का आरोप था कि यह नीति उनकी सहमति के बिना लागू की जा रही है और इससे उनकी जमीनों पर स्थायी असर पड़ेगा। 19 नवंबर का आदेश सिर्फ संशोधन था भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने कहा था कि 19 नवंबर को जारी आदेश केवल संशोधन था, निरस्तीकरण नहीं। इसके बाद प्रदेश के 18 जिलों के किसान प्रतिनिधियों की बैठक में सर्वसम्मति से आंदोलन का निर्णय लिया गया। किसानों ने एलान किया था कि 26 दिसंबर से विक्रमादित्य प्रशासनिक भवन का घेराव कर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। अब शासन द्वारा लैंड पूलिंग योजना को पूरी तरह निरस्त किए जाने को किसान आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है।   उज्जैन लैंड पूलिंग पॉलिसी यह थी उज्जैन लैंड पूलिंग पॉलिसी दरअसल सिंहस्थ कुंभ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) द्वारा प्रस्तावित एक शहरी विकास योजना थी। इसके तहत शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी मात्रा में किसानों की निजी जमीन को एक साथ पूल (एकत्र) कर सुनियोजित तरीके से विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। यानी सरकार जमीनों को अधिग्रहित कर सड़क, सीवर, ड्रेनेज, बिजली, पानी जैसी आधारभूत सुविधाओं का विकास, सिंहस्थ के लिए स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना, उज्जैन के विस्तार को मास्टर प्लान के तहत विकसित करना था।  योजना में किसानों को क्या दिया जाना था? किसानों से जमीन लेकर उसे विकसित करने के बाद विकसित भूमि का एक हिस्सा (कम लेकिन अधिक मूल्य वाला) किसान को लौटाने का प्रावधान रखा गया था। शेष भूमि पर शासन/प्राधिकरण द्वारा शहरी विकास में उपयोग की थी।  किसान संगठन क्यों नाराज हुए? भारतीय किसान संघ समेत अन्य किसान संगठनों को जमीन पर स्थायी नियंत्रण खत्म होने का डर था। किसानों का कहना था कि एक बार जमीन लैंड पूलिंग में चली गई तो उस पर उनका  अधिकार कमजोर हो जाएगा। कितनी जमीन लौटेगी, कब लौटेगी और किस कीमत पर इस पर स्पष्ट और कानूनी भरोसा नहीं था। किसानों का तर्क था कि यह अधिग्रहण जैसा ही है, लेकिन बिना सीधा मुआवजा दिए। इसमें आरोप लगे कि कई जगह किसानों की स्पष्ट सहमति के बिना योजना लागू करने की तैयारी थी। किसान संगठनों का कहना था कि सिंहस्थ अस्थायी आयोजन है, लेकिन इसके नाम पर जमीन की स्थायी योजना बनाई जा रही थी।   भाजपा विधायक ने भी किया योजना का विरोध  उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने लैंड पूलिंग योजना को लेकर अपनी ही सरकार के फैसले पर असहमति जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा है कि यह योजना किसानों के हित में नहीं है और इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। विधायक जैन ने लिखा कि 17 नवंबर को भोपाल में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई बैठक में योजना वापस लेने का निर्णय लिया गया था, जिसके बाद किसान संघ ने उत्सव रैली भी निकाली थी। इसके बावजूद यदि योजना लागू मानी जा रही है और किसान 26 दिसंबर से आंदोलन करने को मजबूर हैं, तो वे स्वयं भी किसानों के समर्थन में आंदोलन में शामिल होंगे। विधायक के इस रुख से लैंड पूलिंग योजना को लेकर भाजपा के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा था मामला किसान संघ और स्थानीय संगठन सिंहस्थ के नाम पर लैंड पूलिंग के माध्यम से किसानों की जमीन लेने का विरोध कर रहे थे। बात पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अधिकारियों के साथ पहुंचे और बैठकों के कई दौर चले। सरकार की ओर से सिहंस्थ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का हवाला देकर व्यवस्था बनाने की बात रखी गई तो अन्य कुंभ का उदाहरण देकर लैंड पूलिंग के बिना व्यवस्था बनाए जाने की बात उठी। उधर, किसान पूरी तरह से लैंड पूलिंग योजना को निरस्त करने पर अड़े थे। सरकार ने पहले प्रयास किया था कि किसानों की सहमति से लैंड पूलिंग की जाए, लेकिन भारतीय किसान संघ का कहना था कि किसानों की भूमि स्थायी निर्माण के लिए लेने से उनकी आजीविका का साधन समाप्त हो जाएगा। यह होता उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में लगभग 2,800 हेक्टेयर भूमि है। इसमें साढ़े आठ सौ हेक्टेयर शासकीय और शेष निजी भूमि है। सरकार बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए यहां जन सुविधा की दृष्टि से स्थायी निर्माण करना चाहती थी। इसके लिए किसानों की भूमि लैंड पूलिंग के तहत लेना प्रस्तावित था। इसमें जिसकी भूमि ली जाती, उसे एक निश्चित क्षेत्र में स्थायी निर्माण करके सरकार देती और बाजार मूल्य से शेष भूमि का भुगतान भी किया जाता। भाजपा विधायक की भी असहमति उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने भी योजना से असहमति जताई थी। उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि किसान हित में लैंड पूलिंग योजना निरस्त होनी चाहिए। … Read more

छत्तीसगढ़ का अब तक का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट: ₹35,000 करोड़ से विकास और भविष्य की मजबूत नींव — ओपी चौधरी

रायपुर : छत्तीसगढ़ में अब तक का सबसे बड़ा ₹35,000 करोड़ का अनुपूरक बजट: विकास, अनुशासन और भविष्य की मजबूत नींव – वित्त मंत्री ओ पी चौधरी रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ₹35,000 करोड़ का अनुपूरक बजट प्रस्तुत कर विकास, वित्तीय अनुशासन और दूरदर्शी शासन की स्पष्ट प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह अनुपूरक बजट केवल संसाधनों की व्यवस्था नहीं, बल्कि निरंतर आर्थिक प्रगति और संतुलित विकास की मजबूत दिशा है। वित्त मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार द्वारा विभिन्न बोर्डों और निगमों पर छोड़े गए ₹45,000 करोड़ से अधिक के लंबित ऋण ने इन संस्थानों को लगभग निष्क्रिय स्थिति में पहुँचा दिया था। इस अनुपूरक बजट के माध्यम से सरकार ने मार्कफेड और नान (NAAN) जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को संबल प्रदान करने का गंभीर प्रयास किया है, जो राज्य में धान खरीदी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की रीढ़ हैं। इन संस्थाओं को सुदृढ़ किए बिना किसानों का कल्याण और नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने औद्योगिक विकास को भी समान प्राथमिकता दी है। राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने तथा विभिन्न औद्योगिक विकास एवं प्रोत्साहन योजनाओं को निरंतरता प्रदान करने के लिए अनुपूरक बजट में ₹360 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे निवेश, रोजगार और उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र और संतुलित विकास के लिए केवल राजस्व व्यय पर्याप्त नहीं होता, बल्कि दूरदर्शी पूंजीगत व्यय ही भविष्य की समृद्ध अर्थव्यवस्था और मजबूत अधोसंरचना का आधार बनता है। सड़क, पुल, सिंचाई, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में किया गया निवेश आने वाले दशकों तक विकास के स्थायी स्रोत तैयार करता है। इसी सोच के साथ सरकार ने पूंजीगत व्यय को अपनी विकास रणनीति का केंद्र बनाया है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद बीते 25 वर्षों में पूंजीगत व्यय में लगभग 55 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज हुई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में जहाँ पूंजीगत व्यय ₹13,320 करोड़ था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर ₹15,419 करोड़ और 2024-25 में ₹20,055 करोड़ तक पहुँचा। मुख्य बजट 2025-26 में पूंजीगत व्यय के लिए ₹26,341 करोड़ का प्रावधान किया गया है, साथ ही अनुपूरक बजट में अतिरिक्त ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि बजट के कुल आकार के अनुपात में भी पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहाँ पूर्व सरकार के समय यह लगभग 3.5 प्रतिशत था, वहीं वर्ष 2025-26 में इसके 4.1 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार दीर्घकालिक विकास और मजबूत अधोसंरचना निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। अपने वक्तव्य के समापन में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह सरकार वादों पर नहीं, बल्कि परिणामों पर विश्वास करती है। पूंजीगत व्यय के माध्यम से संकल्पों को कागज से जमीन तक उतारने का कार्य किया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य छत्तीसगढ़ को आर्थिक रूप से सशक्त, अधोसंरचना के दृष्टिकोण से मजबूत और देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करना है। अनुपूरक बजट में सड़क एवं भवन निर्माण क्षेत्र को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। अधोसंरचना से जुड़े निर्माण कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के उद्देश्य से अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण सड़क कार्यक्रम (आरआरपी फेज-2) हेतु ₹175 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं राज्य में प्रमुख सड़कों के उन्नयन एवं विस्तार के लिए छत्तीसगढ़ राज्य सड़क क्षेत्र परियोजना (एडीबी लोन-3) के अंतर्गत ₹150 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही चिरमिरी-नागपुर हॉल्ट रेल लाइन परियोजना के लिए ₹86 करोड़ की राशि का प्रावधान कर क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है। अनुपूरक बजट में कृषि विकास एवं किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यापक वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक एवं लाभकारी बनाने के उद्देश्य से कृषि उन्नति योजना के लिए अनुपूरक बजट में ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही किसानों को 5 एचपी तक के पंपों के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने हेतु ₹1,700 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है, जिससे सिंचाई लागत में कमी आएगी और कृषि उत्पादन को स्थायी बल मिलेगा। किसानों को बिना ब्याज के ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अनुपूरक में ₹187 करोड़ का प्रावधान कर उन्हें वित्तीय संबल प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त, फसल जोखिम से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत ₹122 करोड़ का प्रावधान किया गया है, वहीं कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन एवं सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना हेतु ₹35 करोड़ का प्रावधान किया गया है। कृषि नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के भवन निर्माण के लिए ₹4 करोड़ का प्रावधान कर राज्य में कृषि आधारित नवाचार एवं तकनीकी विकास को नई गति देने का प्रयास किया गया है। अनुपूरक बजट में खाद्य सुरक्षा एवं पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया है। पिछली सरकार द्वारा छोड़े गए लंबित भुगतानों के निपटान हेतु अनुपूरक बजट में कुल ₹19,224 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा तंत्र को स्थायित्व प्रदान किया जा सके। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के तहत ₹6,800 करोड़ का प्रावधान किया गया है, ताकि पात्र हितग्राहियों को नियमित, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके। इसके साथ ही राज्य में धान खरीदी की महत्वपूर्ण व्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से मार्कफेड को धान खरीदी में हुई हानि के निपटान हेतु ₹12,424 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान से न केवल किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा, बल्कि राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा ढांचे को भी दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी, जिससे आम नागरिकों के पोषण एवं खाद्य अधिकारों की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। अनुपूरक बजट में सड़क सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने … Read more

लोकतंत्र का प्रत्यक्ष अनुभव: बस्तर संभाग के सरपंचों का नए विधानसभा भवन का भ्रमण, उपमुख्यमंत्री से मुलाकात

रायपुर : बस्तर संभाग के सरपंचों ने नए विधानसभा भवन में देखी लोकतांत्रिक प्रक्रिया उपमुख्यमंत्री ने की सरपंचों से मुलाकात  रायपुर, बस्तर संभाग से आए विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचगणों ने  नवनिर्मित छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन का भ्रमण कर विधानसभा की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नजदीक से देखा। इस अवसर पर सरपंचों ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात भी की। बस्तर के जन जन में लोकतंत्र में विश्वास जगाने के लिए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल पर बस्तर संभाग के विभिन्न ग्रामों का प्रतिनिधित्व करने वाले सरपंचों को नवीन विधानसभा भवन का भ्रमण कराया गया।       इस दौरान सरपंचों को सदन की कार्यवाही, प्रश्नकाल, चर्चा एवं निर्णय प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। ग्राम स्तर पर लोकतंत्र को सशक्त बनाने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए यह अनुभव अत्यंत प्रेरणादायी रहा। उपमुख्यमंत्री ने उनसे उनके अनुभवों पर विस्तृत चर्चा की जिसमें सरपंचों ने कहा कि विधानसभा की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से देखने से उन्हें जनसेवा और शासन व्यवस्था की बेहतर समझ मिली है। जिस प्रकार हर समस्या और विषय पर दोनों पक्षों से सकारात्मक तरीके से चर्चा की जाती है वो सराहनीय है। इससे लगता है कि हमारी हर समस्या के लिए हमारे प्रतिनिधि बातें एवं मुद्दों को सामने रखते हैं।         उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सरपंचों से संवाद करते हुए कहा कि ग्राम पंचायतें लोकतंत्र की आधारशिला हैं और ग्रामीण विकास की योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में सरपंचों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बस्तर संभाग के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं और पंचायत सशक्तिकरण को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।       सरपंचों ने इस अवसर के लिए राज्य सरकार एवं उपमुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के अनुभव उन्हें अपने-अपने गांवों में बेहतर नेतृत्व और जवाबदेही के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगे।

दुग्ध किसानों को राहत: 17 दिसंबर से संपर्क अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ

17 दिसंबर से दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी जाएंगे पशुपालक किसानों के घर-घर पशु पोषण, नस्ल सुधार और पशुओं के स्वास्थ्य से संबंधित देंगे जानकारी भोपाल  प्रदेश में पशुपालकों, किसानों की आय बढ़ाने व दुग्ध उत्पादन वृद्धि के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया जा रहा है, जिसके द्वितीय चरण का शुभारंभ 17 दिसंबर, 2025 से होने जा रहा है। अभियान अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, पशुपालकों और किसानों के घर जाएंगे, जहां पशुपालकों को पशुओं में नस्ल सुधार, पशु पोषण तथा पशु स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी देंगे। अभियान में मंत्रीगण, विधायक व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी सहभागिता रहेगी। गांवों में पहुंचेगा विभागीय अमला द्वितीय चरण में प्रदेश के सभी गांवों में दुधारू पशु रखने वाले पशुपालकों से सीधे संपर्क कर संवाद किया जाएगा। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक विकासखंड से एक पशु चिकित्सक को मास्टर ट्रेनर के रूप में राज्य स्तर पर प्रशिक्षित किया गया है। प्रथम चरण में 3 लाख 76 हजार पशुपालकों के घर विभागीय अधिकारी पहुंचे थे और उन्हें अभियान से संबंधित सूचनाओं व सुविधाओं लाभान्वित किया था। दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान का प्रथम चरण 3 से 9 अक्टूबर के मध्य संचालित हुआ, जिसमें 3.76 लाख पशुपालकों के यहां 8752 प्रशिक्षित विभागीय अमला घर पहुंचा था। अभियान की निगरानी के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। कलेक्टर नियमित रूप से अभियान की समीक्षा करेंगे। साथ ही राज्य स्तर पर जानकारी साक्षा की जाएगी। अभियान के द्वितीय चरण के लिए राज्य पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान भोपाल में 18 से 24 नवंबर के मध्य लगभग 428 पशु चिकित्सक (प्रत्येक जिले के प्रत्येक विकासखण्ड के पशु चिकित्सक, जिला नोडल अधिकारी, राज्य नोडल अधिकारी) का प्रशिक्षण मल्टीमॉडल तथा तीनों पहलू पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य एवं नस्ल सुधार में गतिविधि बेस कराया गया और इन प्रशिक्षित मास्टर नोडल द्वारा इसी प्रकार प्रशिक्षण अपने जिलें एवं विकासखण्ड में सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी, मैत्री एवं गोसेवक को दिया गया। दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के द्वितीय चरण में 5 से 9 गौवंश एवं भैंसवंश रखने वाले 7.87 लाख पशुपालकों के यहां प्रशिक्षित विभागीय अमले द्वारा घर जाकर भेंट की जाएगी। साथ ही उन्हें नस्ल सुधार, पशु पोषण एवं पशु स्वास्थ्य पर जागरूक किया जाएगा।  

‘नीतीश माफी मांग लें वरना…’ हिजाब मुद्दे पर पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी का बड़ा बयान

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक मुस्लिम महिला के चेहरे से हिजाब खींचने के विवाद में अब एक पाकिस्तानी डॉन भी कूद पड़ा है। पाकिस्तान के कुख्यात डॉन शहजाद भट्टी ने अपना एक वीडियो जारी कर धमकी दी है कि सीएम नीतीश माफी मांग लें वरना फिर ये मत कहना है कि चेतावनी नहीं दी गई थी। सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि हिजाब को लेकर सीएम नीतीश के साथ यह विवाद जुड़ा कैसे। दरअसल सोमवार को बिहार की राजधानी पटना में नवनियुक्त एक आयुष चिकित्सक उस समय असहज हो गई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नियुक्ति पत्र प्रदान करने के दौरान उनके चेहरे से हिजाब हटा दिया। इस घटना का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ है। यह घटना मुख्यमंत्री सचिवालय ‘संवाद’ में सोमवार को आयोजित उस कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां एक हजार से अधिक आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा रहे थे। नियुक्ति पत्र देने के दौरान जब नुसरत परवीन की बारी आई, जो चेहरे पर हिजाब डाले हुई थीं, तो 75 वर्षीय मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा, “यह क्या है?” इसके बाद मुख्यमंत्री उनके चेहरे से हिजाब हटा दिया। घबराई हुई नवनियुक्त चिकित्सक को इसके बाद वहां मौजूद एक अधिकारी ने तुरंत एक ओर कर दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री के बगल में खड़े उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उन्हें रोकने के प्रयास में उनकी आस्तीन खींचते हुए नजर आए। क्या बोला पाकिस्तान डॉन शहजाद भट्टी पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी ने अपना एक वीडियो जारी कर कहा है कि सभी लोगों ने देेखा होगा कि बिहार में क्या हुआ। एक बड़े पद पर बैठा व्यक्ति एक मुस्लिम महिला के साथ व्यवहार करता है। फिर बाद में मुझपर आरोप लगाए जाते हैं कि शहजाद भट्टी ने यह कर दिया, वह कर दिया। उस व्यक्ति के पास अभी भी समय है कि वह उस बच्ची और उस महिला से माफी मांगे। अगर आज माफी नहीं मांगी गई तो जिम्मेदार संस्थानों को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। बाद में यह मत कहना है कि चेतावनी नहीं दी गई थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शहजाद भट्टी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला है। शहाजद भट्टी के बारे में बताया जाता है कि वो भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियां फैलाने में भी शामिल रहा है। सोशल मीडिया पर वो खुद को इस्लाम और पाकिस्तान का सिपाही भी बनाता है।