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तीन जनपदों में जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर की व्यापक चर्चा

आजमगढ़, वाराणसी व बरेली में मतदाता पुनरीक्षण अभियान को लेकर मुख्यमंत्री योगी ने जनप्रतिनिधियों से किया सीधा संवाद तीन जनपदों में जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर की व्यापक चर्चा जागरूकता प्रसार तथा जनता के सहयोग व सुझावों को आत्मसात करने का किया आह्वान लखनऊ  मतदाता पुनरीक्षण अभियान के प्रति जनता को जागरूक करने और अधिक से अधिक भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आजमगढ़, वाराणसी व बरेली में जनप्रतिनिधियों तथा पार्टी पदाधिकारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने इन बैठकों में सहयोग, सुझाव तथा सतत संवाद की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी स्तरों पर सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जागरूकता और सहभागिता पर जोर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आह्वान किया कि जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर यह सुनिश्चित करें कि मतदाता पुनरीक्षण अभियान प्रक्रिया के दौरान पात्र नागरिकों का नाम सूची में शामिल हो सके। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अपात्र नामों का समय पर परीक्षण और आवश्यक सुधार लोकतंत्र की पारदर्शिता को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा जताई कि वे मतदाता सूची पुनरीक्षण के महत्व को जनता तक सहज भाषा में पहुंचाएं और प्रत्येक बूथ स्तर पर गहन संपर्क बनाए रखें। फीडबैक व सतत संवाद की आवश्यकता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यकर्ताओं से प्राप्त फीडबैक को बेहद मूल्यवान बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों का धरातल से जुड़ा अनुभव मतदाता पुनरीक्षण अभियान जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को सुचारु बनाने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निरंतर संवाद से बेहतर समन्वय स्थापित होता है, जिससे अभियान का प्रभाव और बढ़ता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीनों जनपदों में हुई बैठकों के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि जनता के बीच निरंतर उपस्थिति और सक्रियता ही लोकतांत्रिक मूल्यों की वास्तविक शक्ति है।

नेशनल लोक अदालत 13 दिसम्बर को

भोपाल नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 13 दिसम्बर-2025 को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत के संबंध में सभी नगर निगमों एवं नगर पालिकाओं को कर एवं प्रभार वसूली के लिए निर्देश दिये गये हैं। आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोंडवे ने सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि लोक अदालत में अधिकतम मामलों का निराकरण सुनिश्चित किया जाये। करदाताओं को बकाया कर, जल प्रभार एवं अन्य उपभोक्ता प्रभार जमा करने के लिये प्रोत्साहित किया जाये। विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम-1961 तथा म.प्र. नगर निगम अधिनियम-1956 के प्रावधानों के तहत देय करों एवं प्रभारों पर निर्धारित सीमा तक ब्याज एवं अर्थदंड (पेनाल्टी) में छूट प्रदान की जा सकेगी। नेशनल लोक अदालत के दौरान कर एवं प्रभार वसूली को सुगम बनाने के लिए ई-नगर पालिका पोर्टल के माध्यम से भुगतान की सुविधा उपलब्ध रहेगी। नागरिकों को नेशनल लोक अदालत के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिये गये हैं।  

हरियाणा में राशन वितरण में बड़ा बदलाव, HPC बैठक में नई व्यवस्था को हरी झंडी

चंडीगढ़  हरियाणा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की राशन वितरण प्रणाली नए साल से हाईटैक हो जाएगी। हाई पावर परचेज कमेटी (एच.पी.सी.सी.) ने नई प्वाइंट ऑफ सेल (पी.ओ.एस.) मशीनों की मंजूरी दे दी है। नई मशीनों में फेस रीडिंग और ई-तौल की सुविधा के नए सेगमेंट जोड़े गए हैं। हालांकि इस पूरे हाईटैक सिस्टम पर हर साल सरकार का 10 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। पहले राशन डिपो पर चलने वाली 2जी मशीनों का किराया महीने का 1250 रुपए था, जो अब प्रति मशीन के हिसाब से सरकार ने तय किया है। अब प्रति कार्ड धारक पर 3.25 रुपए किराया सरकार देगी। नई 5जी पी.ओ.एस. मशीनें फिंगरप्रिंट स्कैनर और आइरिस स्कैनर से लैस होंगी। इन मशीनों से राशन कार्ड धारकों का फिंगरप्रिंट, आंखों की पुतलियों और चेहरे की पहचान कर ई-के. वाई.सी. व राशन वितरण प्रक्रिया होगी। इस फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और लाभार्थियों को आसानी से उनका हक का राशन मिल सकेगा। इन मशीनों को सीधे इलैक्ट्रॉनिक वजन मापने से भी जोड़ा गया है। इससे जितना राशन कार्ड धारक को मिलेगा, उसका वजन खुद मशीन में दर्ज होगा, साथ ही उसकी रसीद तुरंत निकल आएगी। रसीद में दिए गए राशन का पूरा ब्यौरा छपा होगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी। राशन डिपो पर लगेंगे कैमरे, पंचकूला से शुरू हुआ पायलट प्रोजैक्ट खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने राशन डिपो को हाईटैक करने के लिए हर राशन डिपो पर सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाने का फैसला किया है। इसकी शुरूआत पंचकूला से की गई है, यहां 2 राशन डिपो पर अभी तक सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाए जा चुके हैं। यदि यहां ये प्रोजैक्ट सफल रहता है तो पूरे प्रदेश में विभाग इसे शुरू करेगा। हरियाणा में अभी 41 लाख कार्ड धारक हैं। हालांकि इनमें 26 से 27 लाख लोग ही राशन लेते हैं। 9500 राशन डिपो हैं। नई पी.ओ.एस. मशीनों से डिपो धारक और उपभोक्ताओं को होगा फायदा : नागर हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति राज्यमंत्री राजेश नागर ने कहा कि नई पी.ओ.एस. मशीनों से डिपो धारकों के साथ ही उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा। सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है और अगले महीने से सभी डिपो धारकों के पास मशीनें पहुंच जाएगी। विभाग में पारदर्शी सिस्टम लागू करना उनकी प्राथमिकता है, इसके लिए सभी राशन डिपो पर कैमरे भी लगाए जाएंगे।

जल संरक्षण पर बड़ा कार्यक्रम: आज मंत्री जोगाराम पटेल के मुख्य आतिथ्य में होगा ‘वाटरशेड महोत्सव’

जयपुर संभाग स्तरीय वाटरशेड महोत्सव का आयोजन आज महाराणा प्रताप सभागार दुर्गापुरा, जयुपर में आयोजित होगा। अतिरिक्त मुख्य अभियंता (पदेन परियोजना प्रबंधक), वाटरशेड सेल कम डेटा सेंटर, श्री दिनेश कुमार ने बताया कि संसदीय कार्य एवं विधि न्याय मंत्री श्री जोगाराम पटेल कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत जयपुर संभाग में संचालित 29 परियोजनाओं के लाभार्थियों को योजना की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने तथा अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ दिलाने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ परियोजना क्षेत्रों के कृषक भी सहभागिता करेंगे।

महाकाल मंदिर में 1 जनवरी से फूलों की भारी माला पर प्रतिबंध, नया आदेश जारी

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला पहनाने पर रोक लगाने की तैयारी कर ली गई है। मंदिर के उद्घोषणा कक्ष से भक्तों को नए नियम की जानकारी देने के लिए लगातार उद्घोषण की जा रही है। मंदिर समिति का भक्तों से अनुरोध है कि वे भगवान के लिए अजगर माला नहीं खरीदें। एक जनवरी से इस पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए वर्ष 2017 में लगी एक जनहित याचिका पर सुनाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिर्लिंग के क्षरण की जांच तथा उसे रोकने के उपाय करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की टीम गठित की थी। विशेषज्ञों ने वर्ष 2019 से जांच शुरू की तथा ज्योतिर्लिंग की सुरक्षित रखने के लिए अनेक सुझाव दिए। इसमें एक सुझाव भगवान महाकाल को फूलों की छोटी माला तथा समिति मात्रा में फूल अर्पण का था। लेकिन पिछले कुछ समय से विशेषज्ञों के सुझाव को दरकिनार करते हुए भगवान को फूलों की मोटी व बड़ी माला पहनाई जा रही थी। मंदिर के आसपास हारफूल की दुकानों पर भी 10 से 15 किलो वजनी मालाओं का विक्रय किया जा रहा था। 500 से 2100 रुपये तक बिकने वाली इन अजगर मालाओं को भक्त खरीद रहे थे। मंदिर के भीतर इन्हें भगवान को पहनाया भी जा रहा था। मामले में नईदुनिया ने 28 नवंबर को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था, इसके बाद मंदिर प्रशासन ने इस पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। प्रवेश द्वार पर पड़ताल के बाद मिलेगा प्रवेश नया नियम लागू होने के बाद मंदिर के विभिन्न द्वारों पर तैनात गार्ड भक्तों द्वारा भगवान को अर्पण करने के लिए लाई जा रही पूजन सामग्री की जांच करेंगे। बड़ी व भारी फूल माला को गेट पर ही अलग रखवा दिया जाएगा। किसी भी सूरत में बड़ी फूल माला मंदिर के भीतर जाने नहीं दी जाएगी। यह व्यवस्था एक जनवरी से सख्ती से लागू होगी। बड़ी व भारी फूल माला पर लगेगी रोक     सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला अर्पित करने पर रोक लगाई जा रही है। एक जनवरी से इस पर सख्ती से रोक रहेगी। – प्रथम कौशिक, प्रशासक, श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति  

इंदौर में पहली बार दिखा ऐसा एक्शन, नगर निगम ने ढोल बजाकर और पीले चावल देकर शुरू की बकाया वसूली मुहिम

इंदौर  इंदौर में इस बार राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर नगर निगम ने ऐसा तरीका अपनाया है, जिसे देखकर लोग हैरान भी हो रहे हैं और खुश भी। आमतौर पर कर बकायादारों को नोटिस भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार निगम की टीमें ढोल-ताशे बजाते हुए मोहल्लों और बाजारों में घूम रही हैं। कर्मचारियों ने दुकानदारों और करदाताओं को पीले चावल देकर 13 दिसंबर की लोक अदालत में आने का निमंत्रण दिया। राजवाड़ा और किशनपुरा जैसे व्यस्त बाजारों में बुधवार सुबह यह नजारा लोगों के लिए बिल्कुल अलग था। व्यापारियों ने भी नगर निगम की इस अनोखी पहल का स्वागत किया। 13 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने बताया कि 13 दिसंबर को वर्ष की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी। शहर के सभी 22 जोनल कार्यालय, रजिस्टार कार्यालय और निगम मुख्यालय में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में लोग अपना संपत्तिकर (Property Tax), जलकर (Water Tax) और बकाया अधिभार (Surcharge) कम राशि में निपटा सकेंगे। मकसद यह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग एक ही दिन में अपने बकाए चुका सकें। राजवाड़ा में दुकान-दुकान पहुंचा निगम का न्यौता जोन 3 की टीम, सहायक राजस्व अधिकारी अनिल निगम के निर्देशन में, बुधवार को राजवाड़ा और किशनपुरा के बाजारों में निकली। कर्मचारियों ने ढोल-ताशे बजाकर दुकान-दुकान व्यापारियों को बताया कि लोक अदालत में बकाया अधिभार पर बड़ी छूट मिल रही है। व्यापारी भी इस तरीके से काफी प्रभावित दिखे। उनका कहना था कि यह तरीका नोटिस या मैसेज की तुलना में ज्यादा असरदार है, क्योंकि लोग तुरंत ध्यान देते हैं और बात समझ भी जाते हैं। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग काउंटर लोक अदालत वाले दिन नगर निगम करदाताओं की सुविधा के लिए खास इंतजाम करेगा। सभी जोनल कार्यालयों में भुगतान के लिए विशेष काउंटर, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग डेस्क, पीने के पानी की सुविधा, बैठने की व्यवस्था रखी जाएगी। इसके अलावा बकाया राशि के बिल और अधिभार में दी जा रही छूट की जानकारी भी वहीं तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। जानिए कितनी मिलेगी छूट 1. संपत्ति कर पर छूट 50,000 तक पुरानी बकाया राशि होने पर, आपको ब्याज में पूरी 100% छूट मिलेगी। अगर बकाया राशि 50,000 से 1 लाख के बीच है, तो आपको ब्याज में आधी छूट मिलेगी और अगर बकाया राशि 1 लाख से ज़्यादा है, तो भी आपको ब्याज में 25% की छूट मिलेगी। 2. जलकर पर छूट पानी के बिल की 10,000 तक की बकाया राशि पर, आपको ब्याज में पूरी 100% छूट मिलेगी। अगर बकाया राशि 10,000 से 50,000 के बीच है, तो आपको ब्याज में 75% की बड़ी छूट मिलेगी और अगर बकाया राशि 50,000 से ज़्यादा है, तो भी आपको ब्याज में 50% की छूट मिलेगी। इस बात का ध्यान रखें यह छूट केवल 13 दिसंबर, लोक अदालत वाले दिन ही लागू होगी।

योगी सरकार ने 138 बेटियों का किया कन्यादान, मुस्लिम जोड़ों का हुआ निकाह, मौलवियों ने पढ़ा निकाह

लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार ने गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह का आर्थिक बोझ कम करने की दिशा में एक सराहनीय पहल की है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत  आगरा जिले के चार विकास खंडों-सैंया, खेरागढ़, जगनेर और शमशाबाद में कुल 138 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस योजना के अंतर्गत सरकार प्रति जोड़े एक लाख रुपये की सहायता राशि एवं सामग्री उपलब्ध करा रही है। मुस्लिम जोड़ों का निकाह मौलवियों द्वारा संपन्न कराया गया सामूहिक विवाह समारोह में सभी जोड़ों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ एक-दूसरे का हाथ थामा। सैंया में 43, खेरागढ़ में 27, जगनेर में 27 और शमशाबाद में 41 शादियां कराई गईं। सभी विकास खंडों में भव्य पंडाल सजाए गए थे। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हिंदू जोड़ों ने सात फेरे लिए। वहीं अल्पसंख्यक समुदाय (मुस्लिम) के जोड़ों का निकाह मौलवियों द्वारा संपन्न कराया गया। समारोह में हजारों लोग हुए शामिल समारोह में हजारों लोगों ने शामिल होकर माहौल को उत्सव जैसा बना दिया। जिला समाज कल्याण अधिकारी जी.आर. प्रजापति ने बताया कि प्रति जोड़ा 60 हजार रुपये कन्या के खाते में डीबीटी के रूप में 25 हजार रुपये की गृहस्थी सामग्री और 15 हजार रुपये आयोजन पर खर्च किए जा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने भी शिरकत की कार्यक्रम में विधायक भगवान सिंह कुशवाह, विधायक छोटेलाल वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी शिरकत की और नवविवाहितों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि यह योजना गरीब और मजदूर परिवारों को अपनी बेटियों की शादी में आर्थिक तनाव से मुक्त करती है। जिले में इस वर्ष कुल 951 जोड़ों की शादी कराने का लक्ष्य निर्धारित है। 10 से 13 दिसंबर के बीच विभिन्न विकास खंडों में 800 से अधिक जोड़ों के विवाह संपन्न कराने की तैयारी की गई है।

मध्य प्रदेश की नई पहचान: धर्म, पर्यटन और अध्यात्म के क्षेत्र में 12 लोक और श्री राम वनगमन पथ का निर्माण

भोपाल  धर्म- अध्यात्म, संस्कृति और पर्यटन के संगम से मध्य प्रदेश में विकास की त्रिवेणी बह रही है। प्रदेश इन क्षेत्रों में नई पहचान बना रहा है। प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उज्जैन में वर्ष 2024 में सात करोड़ पर्यटक आए, जबकि 2023 में यह संख्या पांच लाख थी। श्रीमहाकाल महालोक बनने के पहले उज्जैन में प्रतिवर्ष आने वाले पर्यटकों की संख्या 30 से 40 लाख के भीतर रहती थी। यानी महालोक बनने के बाद पर्यटकों की संख्या 20 गुना तक बढ़ गई है। इसमें विदेश पर्यटक भी शामिल हैं। इसी तरह से प्रदेश में 12 लोक और बन रहे हैं, जिससे देश-दुनिया में मप्र की नई पहचान बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा धार्मिक पर्यटन बढ़ाने के लिए प्रमुख स्थलों के विकास की है। धर्म, संस्कृति और पर्यटन का सबसे अच्छा गठजोड़ प्रदेश में बन रहे 1,450 किलोमीटर के राम वनगमन पथ में दिखेगा। अभी प्रदेश के 10 ऐसे जिलों के 40 स्थलों को चिह्नित किया गया है, जहां से भगवान श्रीराम वनवास के दौरान गुजरे थे। कुछ ऐसे जिलों को भी शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जो भगवान श्रीराम से जुड़े हैं। इन जिलों को सड़क मार्ग से एक सर्किट की तरह जोड़ा जाएगा। वहां सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम होंगे। इस तरह से कृष्ण पाथेय का निर्माण किया जा रहा है। इसका केंद्र उज्जैन का सांदीपनि आश्रम होगा। श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़े स्थलों की पहचान का काम चल रहा है। इससे राजस्थान के सीकर में स्थित खाटू श्माम को भी जोड़ा जाएगा। इस तरह कृष्ण पाथेय के रूप में एक बड़ा धार्मिक और पर्यटन सर्किट बनने जा रहा है। राजस्थान सरकार भी इसमें सहयोग कर रही हैं। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच इस विषय पर एक-दूसरे का सहयोग करने की सहमति बन चुकी है। कहां कौन सा लोक बन रहा ओरछा में रामराजा लोक, पांढुर्णा के जामसावली में हनुमान लोक, सीहोर में सलकनपुर में देवी लोक, सागर में संत रविदास लोक, जबलपुर में रानी दुर्गावती स्मारक और रानी अवंतीबाई स्मारक, अमरकंटक में मां नर्मदा महालोक, खरगोन में देवी अहिल्याबाई लोक, बड़वानी में नागलवाड़ी लोक और ओंकारेश्वर में एकात्म धाम बनाया जा रहा है। पीएमश्री पर्यटन वायु सेवा एवं पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ाने के लिए पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा नवंबर 2025 से प्रारंभ की गई है। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए हेलीकाप्टर की सुविधा निजी एजेंसी के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। चीता प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 मे अपने जन्म दिवस पर श्योपुर में नामीबिया से लाए गए आठ चीते छोड़े थे। इसके बाद मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य को भी चीतों का बसेरा बनाया गया है। अब नौरादेही में भी चीते बसाने की तैयारी है। पर्यटकों की सुविधा के लिए बफर में सफर का कांसेप्ट शुरू किया है। रातापानी और माधव नए टाइगर रिजर्व बनाए गए हैं।

यूनियन कार्बाइड के कचरे में घातक मरक्यूरी, हाईकोर्ट ने जताई गंभीर चिंता, याचिका दायर

जबलपुर   यूनियन कार्बाइड का जहरीला पीथमपुर में नष्ट किए जाने के बाद अब उसकी राख चिंता का विषय बनी हुई है. इस मामले में दायर एक अन्य याचिका की सुनवाई के दौरान बताया गया कि जहरीले कचरे से निकली 900 मीट्रिक टन राख में रेडियो एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंताजनक हैं. राख में मरक्यूरी है, जिसे नष्ट करने की तकनीक सिर्फ जपान व जर्मनी के पास है. ऐसे में इसकी घनी आबादी के पास लैंडफिलिंग करना भविष्य में खतरनाक साबित हो सकता है. यूनियन कार्बाइड की राख को लेकर याचिका साल 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा था. पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कचरे के विनष्टीकरण की रिपोर्ट पेश की गई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने राख को घनी आबादी के पास लैंडफिल किए जाने पर रोक लगा दी थी. इसी दौरान एक अन्य याचिका दायर की गई, जिसमें राख को भविष्य के लिए खतरनाक बताया गया. इसके बाद हाईकोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ किए जाने के आदेश जारी किए थे. राख को दूर ले जाने पर विचार करे सरकार हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने 8 अक्टूबर 2025 को जारी अपने आदेश में कहा था कि जहरीले कचरे की राख की लैंडफिलिंग के आदेश के बावजूद भी सरकार ने दूसरे स्थान के संबंध में जानकारी नहीं दी. सरकार द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किया गया है. राख अभी भी जहरीली है और अगर इसे ठीक से नहीं रोका गया तो भूकंप जैसी किसी प्राकृतिक आपदा के कारण उसे रोकने वाला स्ट्रक्चर गिरने पर एक और आपदा हो सकती है. ऐसे में राज्य सरकार को राख ऐसी जगहों पर ले जाने की संभावना पर विचार करना चाहिए जो इंसानी बस्तियों, पेड़-पौधों और पानी के सोर्स से बहुत दूर हों. कंटेनमेंट सिस्टम टूट भी जाए, तो भी इसके बुरे असर बहुत कम हों. यूनियन कार्बाइड की राख में मरक्युरी की मात्रा अधिक इंटरविनर याचिका में कहा गया है कि जहरीले कचरे में मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड रिपोर्ट में बताई गई तय लिमिट से मरक्यूरी की मात्रा अधिक है. वहीं, इस मामले में सरकार की ओर से अधिवक्ता ने एक एनिमेटेड वीडियो प्रेजेंटेशन के साथ यह दलील दी कि जहरीली राख को रोकने के लिए जो स्ट्रक्चर बनाया है, सबसे मॉडर्न सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है. हालांकि, हाईकोर्ट इस बात से संतुष्ट नहीं हुआ कि प्रस्तावित कंटेनमेंट स्ट्रक्चर किसी भी तरह की जियो-टेक्टोनिक एक्टिविटी या भूकंप से होने वाले नुकसान से पूरी तरह सुरक्षित है. युगलपीठ ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बारिश में नई सड़कें बह जाती हैं और पुल गिर जाते हैं, और इससे भी बुरा जब ओवरब्रिज 90 डिग्री मोड़ के साथ बनाए जाते हैं, जिससे यह राज्य पूरे देश में मजाक का पात्र बन जाता है. ऐसे राज्य की इंजीनियरिंग की काबिलियत पर पूरा भरोसा करना तबाही को न्योता देना हो सकता है. इस कोर्ट की चिंता को सरकार का मजाक उड़ाने जैसा नहीं समझना चाहिए, बल्कि कोर्ट जो सावधानी बरत रहा है, वह एक बार चोट खाने के बाद दूसरी बार बचने जैसा है. कोर्ट ने याद दिलाया भोपाल गैस कांड का वो दिन हाईकोर्ट में युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी जारी रखते हुए कहा कि भोपाल में फैक्ट्री तब तक सुरक्षित थी? जब तक कोई मुसीबत नहीं आई और लगभग बीस हजार लोगों की जान एक पल में चली गई. पांच लाख दूसरे लोगों को अपनी बाकी की जिंदगी सांस लेने और कई तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ा रहा है. इसलिए, जब जहरीली राख को रोकने की बात आती है, शायद आखिरी सांस तक, तो कोई भी सावधानी ज्यादा नहीं होती. इसलिए जहरीली राख की लैंडफिलिंग साइट को आबादी के पास रखना कोर्ट को मंजूर नहीं. लैंडफिलिंग के लिए अलग जगह चुनें : हाईकोर्ट युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि जहरीली कचरे की रखा की लैंडफिलिंग के लिए सबसे अच्छी टेक्निकल एक्सपर्टीज पाने ग्लोबल टेंडर निकालाजाए. कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में भी जानकारी प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं.इसके अलावा लैंडफिलिंग के लिए दूसरा स्थान चयन करने के भी निर्देश दिए हैं. राख में मरक्यूरी, ये इंसानों के लिए कितनी खतरनाक? WHO के मुताबिक, '' मरक्यूरी यानी पारा इंसानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक होता है. आमतौर पर हर व्यक्ति किसी न किसी स्तर पर मरक्यूरी के संपर्क में आता है, हालांकि इसकी मात्रा बहुत कम होती है. लेकिन मरक्यूरी की मात्रा अधिक हो और ये सांस या भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाए तो ये फेफड़े और दिमाग को डैमेज कर देती है. दूषित मछलियों और शेलफिश में भी मरक्यूरी की मात्रा अधिका होती है, जिससे किडनी भी खराब हो सकती हैं. यह प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी बेहद खतरनाक है, क्योंकि ये गर्भ में पल रहे बच्चे और जीवन के शुरुआती दिनों में बच्चे के विकास में बाधा डाल सकती है.''

मोहन सरकार के दो साल का रिपोर्ट कार्ड: मुख्यमंत्री आज देंगे जनता को सरकार की प्रगति का ब्योरा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर 12 दिसंबर को जनता के सामने कार्यकाल का लेखा जोखा पेश करेंगे। इस मौके पर वे भोपाल में पत्रकार वार्ता को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि पत्रकार वार्ता में वे सरकार की दो वर्षों की उपलब्धियों, प्रमुख परियोजनाओं और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से जानकारी साझा करेंगे। मुख्यमंत्री की पत्रकार वार्ता के अगले दिन, 13 दिसंबर को, प्रभारी मंत्रीगण अपने-अपने संभागीय और जिला मुख्यालयों में जिला विकास सलाहकार समितियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद मीडिया को संबोधित कर अपने क्षेत्रों में हुई उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी देंगे। 14 दिसंबर को बाकी जिलों में भी प्रभारी मंत्री जिला सलाहकार समितियों की बैठक कर पत्रकार वार्ता करेंगे। इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे जिला स्तर पर हुए कार्य, उपलब्धियां और आगामी कार्ययोजना की पूरी जानकारी साझा करें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही सभी विभागों की समीक्षा कर उनकी उपलब्धियों और आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने, सड़क और पुल निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, शिक्षा क्षेत्र में सुधार, कृषि और उद्योग में नवाचार तथा रोजगार सृजन जैसी प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है। यह आयोजन सरकार की पारदर्शिता और जनता के साथ संवाद को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम होगा।