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कोटा का अनोखा रिकॉर्ड: देश का पहला शहर जहां ट्रैफिक लाइट नहीं, फिर भी व्यवस्थित ट्रैफिक

कोटा  अगर क‍िसी शहर में रेड स‍िग्‍नल न हो और एकदम ट्रैफ‍िक फ्री हो तो सोच‍िए आपको कैसा महसूस होगा? जी हां, इसकी कल्‍पना द‍िल्‍ली- एनसीआर वालों से बेहतर कौन कर सकता है. द‍िल्‍ली-एनसीआर में पीक टाइम के दौरान सड़क के ट्रैफ‍िक और भीड़भाड़ के बीच आपको एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में काफी समय लग जाता है. लेक‍िन इन सबके बीच देश का एक शहर ऐसा भी है, जो एकदम से ट्रैफ‍िक फ्री है. इतना ही नहीं, इस शहर की सड़कों पर आप फर्राटे से भागे चले जाते हैं. कारण सड़कों पर काफी कम ट्रैफ‍िक होना है. शहर में हर द‍िन आते हैं लाखों स्‍टूडेंट हम ज‍िस शहर की बात कर रहे हैं, वो है राजस्थान का कोचिंग हब बन चुका कोटा. जी हां, कोटा देश का पहला ऐसा शहर बन गया है जहां एक भी ट्रैफिक लाइट नहीं है. इस शहर में हर द‍िन लाखों लोग और हजारों स्टूडेंट्स आते-जाते हैं, फ‍िर भी इस शहर की सड़कों पर जाम नहीं लगता. कोटा अर्बन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (UIT) की तरफ से इस चमत्कार को कर द‍िखाया गया है. अर्बन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (UIT) ने पूरे शहर में आपस में जुड़े हुए र‍िंग रोड्स का जाल बिछा दिया. अब आप कोटा में हर व्यस्त चौराहे को बाइपास कर सकते हो. यहां गाड़ी कभी रुकती नहीं. 24 से ज्यादा फ्लाईओवर और अंडरपास शहर में इस समय 24 से ज्यादा फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए हैं. इनके जर‍िये आप मुख्य जंक्शन पर भी बिना ब्रेक लगाए सीधे न‍िकल सकते हैं. इस सबके कारण शहर में यात्रा का समय घटकर आधा रह गया है. इस बदलाव के बाद शहर में हादसों की संख्‍या में भी अबड़ी ग‍िरावट आई है. इतना ही नहीं शहर के अंदर पेट्रोल-डीजल की खपत में भी कमी आई है और प्रदूषण भी घट गया है. कोटा में यह सब पॉस‍िबल हुआ है सोची-समझी प्लानिंग और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से. यहां पुराने स‍िग्‍नल सिस्टम को पूरी तरह खत्म किया जाने की तैयारी है. कोटा शहर पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है. जाम से परेशान दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों के ल‍िए यह शहर नया मॉडल बन गया है. स्मार्ट अर्बन डिजाइन और सही निवेश से ट्रैफिक की समस्या हमेशा के लिए खत्म की जा सकती है. लाखों लोग, हजारों कोचिंग स्टूडेंट्स, फिर भी कहीं रुकने की जरूरत नहीं, बस गाड़ी चलती रहती है. कोटा ने इस सब बदलाव के साथ कर द‍िखाया क‍ि देश में 'नॉन-स्टॉप सिटी' बनाना मुमकिन है. इसके बाद इस तरह का बदलाव लाने की बारी दूसरे शहरों की है.  

एमपी जेलों में 46 हजार कैदियों के बीच एनआरआई भी पड़ सकते हैं परेशान, एसआईआर ने बढ़ाई टेंशन

भोपाल  मध्य प्रदेश समेत देश के 12 राज्यों में मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानि एसआईआर शुरू हो गया है. इसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं की वोटर लिस्ट का मिलान कर रहे हैं. लेकिन मिलान साल 2003 की मतदाता सूची से किया जा रहा है. ऐसे में कई लोगों को अगले चुनाव में मताधिकार से वंचित रहना पड़ सकता है. इस समस्या को लेकर अब तक सरकार ने कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किया है. ऐसे समझें एसआईआर की प्रक्रिया एसआईआर का मतलब है मतदाता सूची का विशेष गहन निरीक्षण यानि मतदाता सूची को अपडेट कर वास्तविक मतदाताओं की पहचान करना. इसके लिए बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना पत्र वितरित कर रहे हैं. मतदाताओं द्वारा इस फार्म को भरकर बीएलओ को वापस लौटाना अनिवार्य है. अन्यथा मतदाता सूची से नाम काटा जा सकता है. एसआईआर में यहां उलझ रहा पेंच दरअसल प्रत्येक मतदाता को जो फार्म दिया गया है, उसमें जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर भरना है. इसके साथ ही पुरानी वोटर लिस्ट का एपीआईसी नंबर भी दर्ज करना होगा. फार्म के साथ एक पासपोर्ट साइज फोटो भी लगानी है. खास बात यह है कि वर्तमान वोटर लिस्ट को वर्ष 2003 की लिस्ट से मिलाया जा रहा है. लेकिन कई लोग ऐसे हैं, जो साल 2003 में किसी और स्थान पर थे, लेकिन अब कहीं और निवास कर रहे हैं, ऐसे में उन लोगों के लिए एसआईआर प्रक्रिया चुनौती बन सकती है. सरकारी और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को टेंशन कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी ने बताया कि सेंट्रल गवर्नमेंट और राज्य के लाखों ऐसे कर्मचारी हैं, जो साल 2003 में किसी और जिले में पदस्थ थे. उन्होंने उस समय कहीं और वोट डाला था. लेकिन आप ट्रांसफर के बाद किसी और जिले में पदस्थ हो गए हैं या फिर ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारी जो सेवाकाल में किसी और शहर में थे और रिटायरमेंट के बाद किसी और शहर में बस गए हैं. ऐसे लोगों को साल 2003 की मतदाता सूची से वोटर लिस्ट का मिलान कराना बड़ी कठिनाई प्रक्रिया होगी. 46 हजार कैदियों का सत्यापन अधर में जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया में व्यक्ति की प्रत्यक्ष मौजूदगी जरूरी नहीं होती है. वह व्यक्ति कहीं भी रहे, लेकिन उसके परिजन या प्रतिनिधि साल 2003 की मतदाता सूची के साथ वर्तमान सूची का मिलान कर फार्म भरकर बीएलओ को दे सकते हैं. लेकिन मध्य प्रदेश की जेलों में बंद करीब 46 हजार कैदियों लिए यह काम काफी कठिन है. यही कठिनाई एनआरआई या प्रवासियों के साथ है. क्योंकि इन लोगों के परिजन या रिश्तेदार यदि दूसरे राज्यों में रहते हैं, तो उन्हें फार्म भरने और जमा करने में काफी संघर्ष करना पड़ सकता है. ऑनलाइन फार्म भर सकते हैं एनआरआई जो लोग लंबे समय से विदेश में रह रहे है, उनके परिजनों को गणना प्रपत्र में उनकी जानकारी देना होगी. 2003 की वोटर लिस्ट में अगर उनका या उनके माता-पिता का नाम है तो वह यह फार्म भर सकते है. यदि उन्होंने दूसरे देश की नागरिकता ले ली है तो वे वोटिंग लिस्ट से बाहर कर दिए जाएंगे. हालांकि यदि फिजिकल फार्म नहीं भर सकते, तो ऐसी परिस्थिति में एनआरआई ऑनलाइन फार्म भी भर सकते है. अधिकारी भी नहीं दे रहे जबाव इस मामले में जब गोविंदपुरा एसडीएम रवीश श्रीवास्तव से बात की गई, तो उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही. वहीं डिप्टी डीईओ भी इसका जबाव नहीं दे सके. वहीं इस मामले में जेल डीजी वरुण कपूर का कहना है कि इलेक्शन कमीशन से अभी जेलों में बंद कैदियों के एसआईआर को लेकर कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. इस संबंध वही जानकारी दे पाएंगे. 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा: सिंहस्थ का विश्वस्तरीय आयोजन के लिए तैयारियां चल रही हैं

सिंहस्थ के विश्वस्तरीय आयोजन के लिए तैयारियां जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के लिए किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार होंगी गतिविधियां भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह सौभाग्य का विषय है कि इस बार उज्जैन में भव्य, दिव्य और विश्व स्तरीय सिंहस्थ: 2028 मेले का आयोजन किया जाएगा। राज्य सरकार इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पर गंभीरता के साथ कार्य कर रही है। अब उज्जैन सिर्फ हमारा धार्मिक शहर ही नहीं, बल्कि यह धार्मिक पर्यटन और ज्ञान-विज्ञान के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उज्जैन में इस बार अद्भुत सिंहस्थ का आयोजन होने वाला है। इसके लिए राज्य सरकार जिला प्रशासन, साधु-संतों के साथ-साथ किसानों से भी सुझाव ले रही है। हर वर्ग की परेशानियों को दूर करते हुए सबको साथ लेकर बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के संबंध में किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार गतिविधियां संचालित की जाएंगी। केन्द्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकार के उचित नियोजन के परिणामस्वरूप सिंहस्थ के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। सिंहस्थ का आयोजन विश्वस्तरीय है और इसके लिए विश्वस्तरीय प्रबंधन किए जा रहे हैं। भविष्य में किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की विषम परिस्थिति निर्मित न हो, इसके लिए सभी तरह के प्रबंध राज्य सरकार कर रही है। सिंहस्थ : 2028 की व्यवस्थाएं अब तक के सभी मेलों से बेहतर होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए यह विचार व्यक्त किए।  

रायपुर : किसानों ने सराहा पारदर्शी और संवेदनशील धान खरीदी नीति

रायपुर : किसान की जुबानी :सरकार की पारदर्शी, संवेदनशील और स्पष्ट धान खरीदी नीति से किसानों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव प्रति एकड़ 21 क्विंटल और प्रति क्विंटल 3100 रुपए की दर से धान खरीदी किसानों में उत्साह का माहौल धान खरीदी केंद्रों की व्यवस्थाओं की किसानों ने की सराहना रायपुर प्रदेश में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों की आर्थिक तरक्की, उन्नति और सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार बनते ही किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्रति एकड़ 21 क्विंटल एवं प्रति क्विंटल 31 सौ रुपये की दर से धान खरीदी करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था। इस किसान हितैषी नीति का लाभ गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी रायगढ़ जिले के किसानों को व्यापक रूप से प्राप्त हो रहा है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत जिले में 15 नवंबर से धान खरीदी का कार्य सुचारू रूप से प्रारंभ हो चुका है। ग्राम कोड़तराई के किसानों में धान खरीदी को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। इसी क्रम में ग्राम के किसान श्याम दयाल पटेल ने बताया कि सरकार की पारदर्शी, संवेदनशील और स्पष्ट धान खरीदी नीति ने उनके परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। तीन भाई मिलकर साझा खाते में 40 एकड़ भूमि पर धान की खेती करते हैं। इस वर्ष उनके परिवार का पहला टोकन जारी हुआ, जिसके अंतर्गत 44 क्विंटल धान की बिक्री की गई। किसान श्याम दयाल पटेल ने कहा कि 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा और 31 सौ रुपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य ने उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। बढ़ी हुई आय से वे परिवार की आवश्यक जरूरतों की पूर्ति, बच्चों की उच्च शिक्षा, कृषि उपकरणों की खरीद, घर-परिवार की दैनिक आवश्यकताओं एवं भविष्य की योजनाओं को सुदृढ़ करने में सक्षम हो रहे हैं। इसे उन्होंने अपने आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सरकार का अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया। धान खरीदी केंद्रों की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी खरीदी के लिए उत्कृष्ट तैयारी की गई है। उपार्जन केंद्रों पर छाया, बैठने की सुविधा, पीने के पानी की उपलब्धता, सटीक तौल व्यवस्था तथा पर्याप्त बारदाना जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। सहज, पारदर्शी और किसान-केंद्रित व्यवस्थाओं से ग्राम कोड़तराई सहित पूरे जिले के किसानों में प्रसन्नता और संतोष का माहौल है। किसानों ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय को धन्यवाद देते हुए हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

28478 उपभोक्ताओं ने समाधान योजना में लिया लाभ, 19 करोड़ 31 लाख रुपए का सरचार्ज माफ

भोपाल  3 नवंबर से शुरू हुई मध्य प्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में अब तक 28 हजार 478 बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 35 करोड़ 47 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 19 करोड़ 31 लाख का सरचार्ज माफ किया गया है।लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी भोपाल के लिये portal.mpcz.in पर जाकर पंजीयन कराना होगा। इसमें प्रथम चरण में एकमुश्त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ होगा जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कम होता जाएगा। एकमुश्त भुगतान पर ज्यादा लाभ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल ने बताया कि समाधान योजना 2025- 26 के लागू होने से ऐसे अनेक उपभोक्ता हैं जो बकाया बिल जमा कर रहे हैं और एकमुश्त बकाया जमा राशि जमा करने पर अधिकतम छूट का लाभ ले रहे हैं। कंपनी ने बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रथम चरण में ही एकमुश्त भुगतान कर इस योजना में शामिल होकर सरचार्ज में अधिकतम छूट का लाभ उठाएं।कि यह योजना उन बकायादार उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है जो सरचार्ज के कारण मूलधन राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें समाधान योजना के प्रथम चरण में सरचार्ज में 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक छूट के साथ एकमुश्त अथवा किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिल रहा है। समाधान योजना के बारें में     समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है।     इस योजना में उपभोक्ता को प्रथम चरण में एकमुश्त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ होगा जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कम होता जाएगा। यह योजना दो चरणों में प्रारंभ होकर प्रथम चरण की शुरुआत 3 नवंबर से 31 दिसंबर 2025 तक रहेगी जिसमें 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक सरचार्ज माफ किया जाएगा।     इसी तरह द्वितीय और अंतिम चरण में जो कि एक जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी, इसमें 50 से 90 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। प्रथम चरण में एकमुश्त राशि जमा कराने पर अधिकतम लाभ होगा।     समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल के लिये portal.mpcz.in पर पंजीयन कराना होगा। कंपनी के उपाय ऐप पर भी पंजीयन की सुविधा शीघ्र ही मिलने लगेगी। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है।     घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं। RDSS योजना: अब तक 4 लाख 69 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर स्‍थापित     केन्द्र सरकार की रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) योजना के अंतर्गत मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने का काम त्वरित गति से चल रहा है। जहां स्‍मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, वहां पर समय पर बिलिंग तथा रीडिंग हो रही है तथा दिन के टैरिफ में 20% की छूट भी मिलनी शुरू हो गई है।     कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में अब तक 04 लाख, 69 हजार 069 स्मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं। इनमें सर्वाधिक भोपाल शहर वृत्‍त में 02 लाख, 64 हजार 415 स्‍मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं।     नए टैरिफ आर्डर के अनुसार स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को अब खपत के आधार पर दिन के टैरिफ में 20% की छूट भी दी जा रही है। अक्‍टूबर माह का बिल जो कि नवंबर माह में जारी हुआ है, उसमें दिन के टैरिफ में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपयोग की गई विद्युत के दौरान बनी यूनिट पर छूट अलग कॉलम में अंकित की गई है।

MP पुलिस: राज्य सेवा के अफसरों को जल्द मिल सकता है आईपीएस अवार्ड

भोपाल  राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को आइपीएस अवार्ड देने की प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में घिर गई है। दो माह पहले 12 सितंबर को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की हुई बैठक को निरस्त कर दिया गया है। अब 21 नवंबर को दोबारा यह बैठक आयोजित की जाएगी। यह पहला अवसर है जब राज्य पुलिस सेवा से आइपीएस अवार्ड के लिए हुई डीपीसी को निरस्त किया गया है। बता दें, 1997-98 बैच के 15 अफसरों के नामों पर विचार कर पैनल तैयार किया गया था। इनमें से पांच अधिकारियों को आइपीएस अवार्ड मिलना था। लेकिन डेढ़ माह तक आदेश की प्रतीक्षा के बाद अचानक डीपीसी को निरस्त कर दिए जाने से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं। इन 15 अफसरों के नाम पर होगा विचार आगामी बैठक 21 नवंबर को होगी। इसमें 15 अफसरों के नामों पर विचार होना है। इनमें सीताराम ससत्या, अमृत मीणा, विक्रांत मुराब, सुरेंद्र कुमार जैन, आशीष खरे, राजेश रघुवंशी, निमिषा पांडेय, राजेश कुमार मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा पाठक सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सव्यसाची सर्राफ और समर शर्मा शामिल हैं। अब निगाहें दोबारा होने वाली डीपीसी में होने वाले निर्णय पर टिकी हुई है। दो नामों पर पेच सूत्रों के अनुसार, पैनल में शामिल दो अधिकारियों के मामलों पर पेच फंसा हुआ है। वरिष्ठता क्रम में पहले नंबर पर आने वाले सीताराम ससत्या के खिलाफ एक विभागीय जांच लंबित है, तो दूसरे नंबर की वरीयता वाले अमृत मीणा का जाति प्रमाण पत्र विवाद अदालत में विचाराधीन है। इन दोनों मामलों के चलते पैनल की विश्वसनीयता व पारदर्शिता को लेकर शंकाएं हैं। अब चर्चा है, पहली डीपीसी को निरस्त किया गया, तो अब दोबारा बैठक में मानक क्या होंगे।

रायपुर में विशेष पिछड़ी जनजातियों को अब शुद्ध पेयजल की सुविधा

रायपुर : विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को मिल रहा है शुद्ध पेयजल जल का लाभ 28 हजार से अधिक विशेष पिछड़ी जनजाति के घरों में नल कनेक्शन रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने दूरस्थ अंचलों के लोगों तक भी जल जीवन मिशन योजना के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश संबंधित विभागों को हैं। जशपुर जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति के 28 हजार से अधिक घरों में नल कनेक्शन के कार्यों को पूर्ण कर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है l  94 ग्रामों के विशेष पिछड़ी जनजाति बसाहटों के 28 हजार से अधिक घरों में नल कनेक्शन का कार्य को पूर्ण           जशपुर जिले में विशेष पिछड़ी जनजातियों में बिरहोर एवं पहाड़ी कोरवा निवास करती है। जिले के 94 ग्रामों में विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के लोग निवासरत् है। सम्पूर्ण जिले में नल जल प्रदाय के साथ-साथ इन 94 ग्रामों के विशेष पिछड़ी जनजाति के बसाहटों के कुल 36183 घरेलू नल कनेक्शन स्वीकृति किया गया है। इनमें से 28 हजार से अधिक नल कनेक्शन के कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है।             मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के दिशा-निर्देश में विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को केन्द्र और राज्य शासन की सभी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत दिलाने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है।

जगदीप धनखड़ भोपाल में 21 नवंबर को होंगे मौजूद, इस्तीफा देने के बाद पहला सार्वजनिक कार्यक्रम

भोपाल  पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 21 नवंबर को भोपाल में एक आरएसएस नेता की पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के आयोजकों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।जुलाई में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद धनखड़ का यह पहला सार्वजनिक भाषण होने की संभावना है। इससे पहले उन्हें उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में देखा गया था। मनमोहन वैद्य की किताब के विमोचन में होंगे शामिल भोपाल के रवीन्द्र भवन में 21 नवंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य की किताब "हम और यह विश्व" का विमोचन होगा। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ संबोधन देंगे। कार्यक्रम में वृंदावन के श्री आनंदम धाम आश्रम के पीठाधीश्वर रीतेश्वर जी महाराज और वरिष्ठ पत्रकार विष्णु त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्य वक्ता रहेंगे जगदीप धनखड़ सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने पीटीआई को बताया कि धनखड़ 21 नवंबर को रवींद्र भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य की पुस्तक "हम और यह विश्व" के विमोचन समारोह में मुख्य वक्ता होंगे। उन्होंने बताया कि वृंदावन-मथुरा स्थित आनंदम के मुख्य पुजारी रितेश्वर जी महाराज भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और 12 सितंबर को राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के अलावा, सार्वजनिक रूप से कहीं भी नज़र नहीं आए। कांग्रेस धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठा रही है। विपक्षी दल ने पिछले महीने कहा था कि धनखड़ अपने सभी पूर्ववर्तियों की तरह एक विदाई समारोह के हकदार थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस्तीफा देने के बाद उप राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में आए थे नजर 21 जुलाई को उप राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने के बाद जगदीप धनखड़ नजर नहीं आए। 12 सितंबर को नवनिर्वाचित उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में वह शामिल हुए थे। लेकिन, पद छोड़ने के बाद जगदीप धनखड़ किसी ऐसे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। जिसमें उन्होंने मंच से कोई भाषण या मीडिया में कोई बयान दिया हो। इस्तीफे के ठीक 4 महीने बाद होगा सार्वजनिक कार्यक्रम उप राष्ट्रपति पद छोड़ने के ठीक चार महीने बाद जगदीप धनखड़ का यह पहला कार्यक्रम होगा। जिसमें वे संबोधन देंगे। 21 जुलाई को उन्होंने इस्तीफा दिया था और 21 नवंबर को ठीक चार महीने बाद वे सार्वजनिक कार्यक्रम में मंच पर नजर आएंगे। जगदीप धनखड़ ने 21 सितंबर को उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों को इस्तीफे की वजह बताया था। वे 74 साल के हैं। धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था। राष्ट्रपति को पत्र में उन्होंने लिखा- स्वास्थ्य की प्राथमिकता और डॉक्टरी सलाह का पालन करते हुए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं। पत्र में उन्होंने राष्ट्रपति को उनके सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल को भी सहयोग के लिए आभार जताया।  

संकट में स्कूल भवन: 12 हजार स्कूलों में से 322 बिना भवन, 5600 जर्जर भवन में चल रहे पढ़ाई

भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति का अंदाज इसी से बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में 12000 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक ही शिक्षक पदस्थ है, इन स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की कमी साफ नजर आती है. जबकि कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का आभाव भी साफ नजर आता है. कही बिजली नहीं है तो कही के भवन ठीक नहीं हैं. शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफ्रोमेशन की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है. जिसमें यह बताया गया है कि मध्य प्रदेश अभी भी नेशनल पॉलिसी यानि एनईपी के लक्ष्यों प्राप्त करने से फिलहाल बहुत दूर नजर आता है.  प्रदेश के 1,22,20 स्कूलों में से 322 के पास भवन नहीं है, जबकि 5,600 स्कूल जर्जर भवन में संचालित हो रहे हैं। इसी तरह करीब चार हजार से अधिक स्कूलों में बालिका व बालिकाओं के लिए शौचालय नहीं है तो करीब डेढ़ हजार से अधिक स्कूलों में प्रयोगशाला नहीं है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यूडाइस यानी स्कूल शिक्षा पर एकीकृत जिला सूचना रिपोर्ट सत्र 2024-25 में यह बात सामने आई है। करीब 200 करोड़ रुपये स्वीकृत इसे देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के आठ हजार हाई व हायर सेकंडरी स्कूलों में से करीब 200 ऐसे स्कूलों को चिह्नित किया है, जिनमें अतिरिक्त कक्ष, शौचालय व प्रयोगशाला, बाउंड्रीवाल नहीं हैं। इन स्कूलों के लिए विभाग ने करीब 200 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।   इसमें से 66 प्रतिशत राशि वित्त विभाग की ओर से जारी कर दी गई है। प्रत्येक स्कूलों को करीब 22 से 30 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। विभाग ने स्कूलों को जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कर फोटो भेजने के लिए कहा है, ताकि इन स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके। 4,072 स्कूलों में बालिका शौचालय नहीं जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के 4,072 स्कूलों में बालिका शौचालय और 4,926 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय नहीं है। वहीं 564 में पेयजल सुविधा नहीं है तो 39,500 में बाउंड्रीवाल और करीब छह हजार में खेल मैदान नहीं है। नया भवन एक ही इकाई में होना चाहिए जिन स्कूलों की भवन संरचनाएं अत्यंत जर्जर व जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। उन सभी भवनों को ध्वस्त कर उसी स्थान पर नए भवन का निर्माण कराने के निर्देश दिए गए हैं। नवीन भवन का निर्माण इस प्रकार कराया जाएगा, ताकि वर्तमान भवन के साथ समाहित हो। पूरा भवन एक ही इकाई के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। एक शिक्षक वाले स्कूल  मध्य प्रदेश के 12 हजार सिंगल शिक्षकों वाले स्कूलों में 9620 स्कूल प्राइमरी हैं, यानि यहां पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी केवल एक ही शिक्षक की है, जबकि अपर प्राइमरी की स्कूलों की स्थिति 2590 है, वहीं छात्र शिक्षक अनुपात की बात की जाए तो 26 प्रतिशत प्राईमरी और 45.8 प्रतिशत अपर प्राइमरी स्कूल हैं. वहीं 23087 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं जहां 30 छात्र भी नहीं हैं. वहीं 451 बस्तियों में प्राइमरी स्कूल भी नहीं हैं. जिससे मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति का फिलहाल पता लगाया जा सकता है. यह आंकड़े यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफ्रोमेशन की रिपोर्ट के अनुसार ही सामने आए हैं.  वहीं इस मामले में स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि राज्य के सभी स्कूलों में व्यवस्थाएं ठीक करने की पूरी कोशिश की जा रही है. शौचालय, पेयजल और मरम्मत के कामों में तेजी लाई जा रही है. जबकि स्कूलों की व्यवस्थाओं को बेहतर भी किया जा रहा है. लेकिन यह रिपोर्ट एमपी में चर्चा में जरूर बनी हुई है. प्रदेश के आंकड़े     1,22,20 प्रदेश में स्कूलों की संख्या     10,800 बिजली आपूर्ति नहीं     14,916 लाइब्रेरी नहीं है     2,301 डिजिटल लाइब्रेरी नहीं     1,19,412 खेल का मैदान नहीं     6,213 पीने का पानी उपलब्ध नहीं     564 पीने के पानी की सुविधा नहीं     1,365 बालिकाओं के लिए शौचालय नहीं

लापरवाही बर्दाश्त नहीं: पुलिस से जुड़े मामलों में कठोर कदम उठाने के निर्देश

गोरखपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दो टूक हिदायत दी है कि पुलिस से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। पीड़ितों की मदद में विलंब और लापरवाही कतई नहीं होनी चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में किसी तरह की लापरवाही हुई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी तय है। किसी पीड़ित की समस्या के समाधान में अगर कहीं भी कोई दिक्कत आ रही है, तो उसका पता लगाकर निराकरण कराया जाए और किसी स्तर पर जानबूझकर कर प्रकरण को लंबित रखा गया है तो संबंधित की जवाबदेही तय की जाए। सीएम योगी ने यह निर्देश मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन के दौरान लोगों की समस्याएं सुनने के दौरान दिए। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 300 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सीएम योगी ने सभी को आश्वस्त किया कि किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। हर समस्या का वह प्रभावी निस्तारण कराएंगे। इसे लेकर उन्होंने प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों को मौके पर ही दो टूक समझाया कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करें। कुछ प्रकरणों पर उन्होंने अफसरों को निर्देशित किया कि यह भी पता लगाएं कि यदि किसी को प्रशासन का सहयोग नहीं मिला है, तो ऐसा क्यों और किन कारणों से हुआ। हर पीड़ित की त्वरित मदद की जाए। उन्होंने जमीन कब्जाने की शिकायतों पर विधि सम्मत कठोर कदम उठाने का निर्देश दिया। हर बार की तरह इस बार भी जनता दर्शन में कुछ लोग इलाज में आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। इस पर सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि जल्द से जल्द अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया पूर्ण कराकर शासन को उपलब्ध करा दें। इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त मदद की जाएगी। जनता दर्शन में परिजनों के साथ आए बच्चों को प्यार-दुलारकर सीएम योगी ने उन्हें चॉकलेट दिया। गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से गुड़-रोटी खिलाया।