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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ विदेशी प्रतिनिधिमंडलों का संवाद, बी2बी बैठकों से बनेगा व्यापार और निवेश का नया रास्ता

यूपीआईटीएस-2026 में दिखेगा यूपी का वैश्विक व्यापारिक विस्तार, छह देशों की भागीदारी से मजबूत होगा अंतरराष्ट्रीय कारोबारी कनेक्ट वियतनाम, जापान, सिंगापुर, रूस, ऑस्ट्रिया और बेलारूस होंगे पार्टनर कंट्री, विदेशी कंपनियां प्रदर्शित करेंगी उत्पाद, तकनीक और निवेश के अवसर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ विदेशी प्रतिनिधिमंडलों का संवाद, बी2बी बैठकों से बनेगा व्यापार और निवेश का नया रास्ता ग्लोबल कंपनियों की मौजूदगी से यूपी के कारोबारियों को मिलेंगे नए अवसर, विदेशी निवेशकों और यूपी के उद्यमियों के बीच बनेगा सीधा कारोबारी संवाद पार्टनर कंट्रीज के पवेलियन में दिखेगी दुनिया की तकनीक और उत्पादों की विविधता, तकनीक, पर्यटन, फार्मा, मोबिलिटी और मैन्युफैक्चरिंग पर बनेगी कारोबारी साझेदारी लखनऊ/ग्रेटर नोएडा,   उत्तर प्रदेश अब केवल देश के बड़े बाजार के रूप में ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार, निवेश और विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा निवेश आकर्षित करने, निर्यात को बढ़ावा देने और प्रदेश के उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों की झलक उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस)-2026 में भी देखने को मिलेगी। 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में होने वाले यूपीआईटीएस-2026 में वियतनाम, जापान, सिंगापुर, रूस, ऑस्ट्रिया और बेलारूस को पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल किया गया है। छह देशों की भागीदारी वाला यह आयोजन यूपी के लिए ‘लोकल से ग्लोबल’ की अवधारणा को मजबूत करने का अवसर बनेगा। पार्टनर देशों के प्रतिनिधि अपने उत्पाद व तकनीक प्रदर्शित करने के साथ ही प्रदेश के उद्यमियों, निवेशकों और कारोबारियों से सीधे संवाद करेंगे। इससे व्यापारिक साझेदारी, तकनीकी सहयोग और नए कारोबारी अवसरों के लिए संभावनाएं बनेंगी। 36 विदेशी प्रदर्शक और करीब 100 खरीदारों की प्रस्तावित भागीदारी यूपीआईटीएस-2026 के पार्टनर कंट्री प्लान के अनुसार, वियतनाम के लिए 54 वर्गमीटर, जापान के लिए 54 वर्गमीटर, सिंगापुर और रूस के लिए 36-36 वर्गमीटर तथा ऑस्ट्रिया के लिए 54 वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र निर्धारित किया गया है। इन पांच देशों के लिए प्रस्तावित सूची में कुल 36 प्रदर्शक और 100 खरीदार शामिल हैं। बेलारूस को भी पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल किया गया है और उसके लिए मुख्यमंत्री के साथ संवाद तथा बी2बी गतिविधियां प्रस्तावित हैं। इस भागीदारी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां गतिविधियां केवल उत्पाद प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेंगी। बी2बी बैठकें, कंट्री सेशंस, राउंडटेबल और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ संवाद के जरिए कारोबारी संबंधों को आगे बढ़ाने की रूपरेखा तैयार की गई है। मुख्यमंत्री के साथ संवाद से सीधे जुड़ेगा वैश्विक उद्योग जगत यूपीआईटीएस-2026 के पार्टनर कंट्री कार्यक्रम में विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संवाद के विशेष सत्र प्रस्तावित हैं। 25 सितंबर को अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों के लिए संवाद सत्र आयोजित किए जाने हैं। वियतनाम, जापान, सिंगापुर, रूस, ऑस्ट्रिया और बेलारूस से आने वाले प्रतिनिधिमंडलों में राजदूत, हाई कमिश्नर, ट्रेड कमिश्नर, आर्थिक एवं वाणिज्यिक प्रतिनिधि तथा उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें भारत में जापान के राजदूत एच.ई. केइची ओनो, भारत में सिंगापुर के हाई कमिश्नर एच.ई. साइमन वोंग, रूस के ट्रेड कमिश्नर आंद्रे सोबोलेव और ऑस्ट्रिया के ट्रेड कमिश्नर एवं कमर्शियल काउंसलर हांस-जोर्ग होर्टनाग्ल समेत अन्य प्रतिनिधियों का उल्लेख किया गया है।  वियतनाम के पवेलियन में एविएशन से फार्मा और ईवी तक वियतनाम की भागीदारी में एविएशन, पर्यटन, कृषि, फार्मास्युटिकल एवं कॉस्मेटिक उत्पाद, खाद्य, टेक्सटाइल, गारमेंट, हस्तशिल्प और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे विविध क्षेत्र शामिल हैं। इसमें वियतनाम एयरलाइंस, पर्यटन क्षेत्र की कंपनियों, फार्मा एवं हेल्थ से जुड़े उद्यमों तथा अन्य कंपनियों की भागीदारी प्रस्तावित है। इससे उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को एविएशन, पर्यटन, फार्मा, कृषि आधारित उद्योग, टेक्सटाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय कारोबार के संभावित साझेदारों के साथ संवाद का अवसर मिलेगा। जापान की तकनीक और औद्योगिक विशेषज्ञता भी बनेगी आकर्षण जापान के पवेलियन में तकनीक और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े उत्पादों की व्यापक प्रस्तुति प्रस्तावित है। वाकॉम इंडिया, एयर एंड वॉटर इंडिया, आईटीओ एन, सुशी एंड मोर, कीटो इंडिया और टाइयो इंडिया जैसी कंपनियां सिग्नेचर डिवाइस, औद्योगिक गैस, जापानी चाय, जापानी खाद्य, लिफ्टिंग इक्विपमेंट और मशीनरी स्पेयर पार्ट्स जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगी। जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन यानी जेट्रो की ओर से निवेश और प्रमोशन नीतियों से संबंधित जानकारी भी साझा की जाएगी।  सिंगापुर, रूस और ऑस्ट्रिया से तकनीक, परिवहन और औद्योगिक समाधान सिंगापुर की कंपनियां वीडियो सर्विलांस सॉल्यूशन, सोल्डरिंग उपकरण और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े उत्पादों के साथ भाग लेंगी। रूस से पेट्रोकेमिकल्स, औद्योगिक गैस, प्रयोगशाला उपकरण, डायग्नोस्टिक किट, ऑक्सीजन सॉल्यूशन और भर्ती एवं स्टाफिंग सेवाओं से जुड़ी कंपनियां प्रस्तावित हैं। वहीं ऑस्ट्रिया की भागीदारी में फोर्कलिफ्ट और वर्कशॉप इक्विपमेंट, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन, डेकोरेटिव एवं लाइटिंग उत्पाद तथा मोबिलिटी और ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसे क्षेत्रों की कंपनियां शामिल होंगी। योगी सरकार की निवेश नीति को मिलेगा वैश्विक कारोबारी मंच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश रणनीति में निवेश आकर्षण के साथ निवेशकों को सुविधा, औद्योगिक बुनियादी ढांचे का विस्तार और वैश्विक कारोबारी नेटवर्क से प्रदेश को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। यूपीआईटीएस-2026 इसी व्यापक निवेश एवं व्यापारिक कनेक्ट को जमीन पर आगे बढ़ाने का मंच बनेगा। पार्टनर देशों की भागीदारी के जरिए उत्तर प्रदेश के सामने विदेशी बाजारों तक पहुंच बढ़ाने, नई कारोबारी साझेदारियां विकसित करने और तकनीकी सहयोग के अवसर तलाशने की संभावना बनेगी। बी2बी बैठकों से कारोबार की संभावनाओं को मिलेगा विस्तार यूपीआईटीएस में होने वाली बी2बी बैठकें प्रदेश के उद्यमियों और विदेशी कारोबारियों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने का माध्यम बनेंगी। इससे केवल उत्पादों के प्रदर्शन तक सीमित रहने के बजाय कारोबारी साझेदारी और संभावित निवेश प्रस्तावों पर चर्चा का अवसर मिलेगा। वियतनाम के लिए ‘इनोवेशन टेक्नोलॉजीज एंड टूरिज्म’ विषय पर कंट्री सेशन प्रस्तावित है। वहीं ऑस्ट्रिया की ओर से ‘लेवरेजिंग इंडियाज फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स फॉर ग्लोबल बिजनेस ग्रोथ’ विषय पर नॉलेज सेशन प्रस्तावित है। इस तरह यूपीआईटीएस-2026 में व्यापार, निवेश, तकनीक, पर्यटन और निर्यात को एक ही मंच पर जोड़ने की कोशिश साकार होती दिखाई देती है। ओडीओपी, एमएसएमई और स्थानीय उत्पादों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार का संपर्क उत्तर प्रदेश की बड़ी ताकत उसका व्यापक एमएसएमई नेटवर्क, पारंपरिक उद्योग और स्थानीय उत्पाद हैं। ऐसे में यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच का एक महत्वपूर्ण पक्ष प्रदेश के स्थानीय उद्यमियों … Read more

खुले में मछली विक्रय पर नगर पालिका की कार्रवाई, छह दुकानदारों पर 1,500 रुपये जुर्माना

खुले में मछली विक्रय पर नगर पालिका की कार्रवाई, छह दुकानदारों पर 1,500 रुपये जुर्माना शहडोल   ‘सेवा ही संकल्प अभियान-2026’ के तहत नगर पालिका परिषद शहडोल द्वारा नगर की स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्रवाई की जा रही है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रीमती आशा जितेंद्र भंडारी के निर्देशन में रविवार को खुले में मछली विक्रय करने वाले दुकानदारों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। नगर पालिका की टीम द्वारा भूसा तिराहा, सोहागपुर के पास खुले में मछली विक्रय करने वाली दुकानों को बंद कराया गया। वहीं न्यू बस स्टैंड के पास बिना ढके खुले में मछली विक्रय करने वाले छह दुकानदारों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए कुल 1,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। कार्रवाई के दौरान दुकानदारों को स्वच्छता बनाए रखने, मछली एवं अन्य खाद्य सामग्री को ढककर रखने तथा सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी नहीं फैलाने की समझाइश दी गई। नगर पालिका अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि स्वच्छता नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर आगे भी नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। कार्रवाई में स्वच्छता निरीक्षक श्री अनिल महोबिया, श्री भूपेश कोहरे, श्री दुर्गेश गुप्ता, श्री संतोष लखेरा, श्री अंकुश सेन एवं फायर टीम की सहभागिता रही। नगर पालिका परिषद शहडोल ने नागरिकों एवं दुकानदारों से अपील की है कि वे अपने घरों एवं दुकानों से निकलने वाला कचरा निर्धारित कचरा संग्रहण वाहन में ही डालें तथा सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न फैलाएं। स्वच्छ एवं सुंदर शहडोल के निर्माण में नागरिकों से सक्रिय सहभागिता की अपील की गई है।

महाभारत काल से जुड़ा पांडू पिंडारा, पितृ मोक्ष के लिए आज भी उमड़ते हैं श्रद्धालु

जींद पांडू पिंडारा(पिंडतारक तीर्थ) का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है, महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने भगवान श्री कृष्ण के कहने पर कौरवों और सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए यहां पिंडदान किया था। यहां सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा करते हुए 12 वर्ष बिताए थे और पूर्ण विधान से पिंडदान किया था। पांडवों द्वारा यहां पिंडदान (तर्पण) किए जाने के कारण इस जगह का नाम पांडू पिंडारा और यहां के मुख्य कुंड का नाम पिंडतारक तीर्थ पड़ गया। माना जाता है, महाभारत काल से पिंडदान और श्राद्ध कर्म की परंपरा शुरू हुई। आज भी रिश्तों में चाहे कितने ही मतभेद क्यों न रहे हों, लोग मृत्यु के बाद अपने पितृों को ईश्वर से भी ऊपर का स्थान देते हैं। उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और उनका श्राद्ध करते हैं। पांडवों ने किया था कौरवों का पिंडदान किंवदंती है, महाभारत युद्ध में जीत भले ही पांडवों की हुई, लेकिन उन्हें अपने ही परिवार के लोगों को खोने का गहरा दुख भी मिला। कौरव उनके शत्रु जरूर थे, लेकिन वे उनके भाई थे इसलिए धर्म का पालन करते हुए पांडवों ने सभी दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न किया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पिंडारा में मौजूद इस कुंड का संबंध पितृ कर्म और मोक्ष से जोड़ा जाता है। यहां श्रद्धा और विधि-विधान से पिंडदान करने पर पूर्वजों को शांति प्राप्त होती है। यही कारण है, सालभर, विशेष रूप से पितृ पक्ष के दौरान, बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपने पितरों का तर्पण करते हैं। ग्रंथों में भी पांडू पिंडारा तीर्थ का जिक्र कई हिंदू ग्रंथों जैसे महाभारत, वामन पुराण, पद्म पुरण में इस बात का विवरण मिलता है कि जींद जिले में मौजूद पांडू पिंडारा, जिसे पिंडतारक और सोम तीर्थ भी कहा गया है, वहां कौरवों द्वारा कौरवों का पिंडदान किया गया था। यहां कुंड में लोग सोमवती अमावस्या के दिन अपने पितृों का पिंडदान करने आते हैं। मान्यता है, इस स्थल पर पिंडदान करने से पितृों को मोक्ष प्राप्त होता है। सोमवती अमावस्या के दिन यहां बहुत बड़ा मेला भी लगता है।

राजस्थान में ₹35 लाख करोड़ के निवेश समझौते, ₹9 लाख करोड़ के प्रस्ताव धरातल पर

जयपुर सार्वजनिक निवेश का बेहतर प्रबंधन, परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन और निवेश से अधिकतम परिणाम सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता केंद्र (एसएआरटीटीएसी) द्वारा जयपुर में ‘पब्लिक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट–इंडियन स्टेट्स’ विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की सोमवार को शुरुआत हुई। उद्घाटन सत्र में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि देश में सार्वजनिक परियोजनाओं में बड़े स्तर पर निवेश हो रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि परियोजनाएं समय पर पूरी हों और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए निवेश का अधिकतम लाभ आमजन और अर्थव्यवस्था को मिले। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सार्वजनिक निवेश का असर केवल बड़े प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं रहा है। जल एवं परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं में लगातार निवेश से दूर-दराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और लोगों को बाजारों एवं सार्वजनिक सेवाओं से जोड़ने में मदद मिली है। मुख्य सचिव ने कहा कि राइजिंग राजस्थान के तहत लगभग 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं, जिनमें से करीब 9 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान देश के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों में तेजी से उभर रहा है। राइजिंग राजस्थान के तहत भी इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने भड़ला सौर पार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाएं बताती हैं कि सही दिशा में किया गया रणनीतिक निवेश आर्थिक विकास को गति देने के साथ ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मुख्य सचिव ने जीएसटी सुधारों को महत्वपूर्ण परिवर्तन बताते हुए कहा कि इससे विभिन्न प्रक्रियाओं और दस्तावेजीकरण को अधिक सुव्यवस्थित करने में मदद मिली है। उन्होंने राज्य के साइबर कोषागार के माध्यम से वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ने तथा एसएनए-स्पर्श के माध्यम से कोषागार आधारित भुगतान व्यवस्था में वास्तविक समय में भुगतान की दिशा में हुए बदलाव का भी उल्लेख किया। इस अवसर पर एसएआरटीटीएसी के निदेशक हेराल्ड फिंगर ने बताया कि एसएआरटीटीएसी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), दक्षिण एशिया के सदस्य देशों और विकास साझेदारों की सहयोगात्मक पहल है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों की संस्थागत एवं मानव संसाधन क्षमता को मजबूत करना है, ताकि वे बेहतर व्यापक आर्थिक एवं वित्तीय नीतियां तैयार कर उनका प्रभावी क्रियान्वयन कर सकें। उन्होंने बताया कि एसएआरटीटीएसी में भारत के साथ बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका सदस्य देश हैं। यह आईएमएफ का ऐसा क्षेत्रीय केंद्र है, जहां प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दोनों को एक साथ उपलब्ध कराया जाता है। इस अवसर पर एसएआरटीटीएसी के रेजिडेंट पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट एडवाइजर स्टीफन टर्नबुल, नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार अनुराग गोयल, विशेष शासन सचिव वित्त (बजट) श्रीमती शिवांगी स्वर्णकार तथा आईएमएफ के वित्तीय मामलों के विभाग के विशेषज्ञ रूई मोंटेइरो एवं मार्टिन डार्सी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।  

पंचायत चुनाव से पहले होगा नया परिसीमन, बिहार में जनप्रतिनिधियों से पूछा जाएगा GDP का हिसाब

पटना बिहार में अब पंचायत चुनाव परिसीमन के बाद ही होंगे। यह जानकारी खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक कार्यक्रम के दौरान दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि ग्राम पंचायतों के नये परिसीमन के बाद ही पंचायतों का चुनाव कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग परिसिमन का काम कर रहा है। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने एक और अहम बात कही है कि सरकार अब जनप्रतिनिधियों से पूछेगी कि 5 साल में जीडीपी कितना बढ़ा? मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जिला परिषद, प्रखंड प्रमुख और मुखिया से जिला, प्रखंड और ग्राम पंचायत के जीडीपी के बारे में पूछा जाएगा कि इनके कार्यकाल में पांच साल में कितनी बढ़ोतरी हुई। मुख्यमंत्री सोमवार को पटना के एक होटल में ग्राम संसद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने यह महत्वपूर्ण बातें कही। 20-40 सालों से सरकारी जमीन पर रहने वालों को मिलेगा पर्चा इस मौके पर मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गांवों में 20-40 सालों से जो गरीब सरकारी जमीन पर रह रहे हैं, उन्हें पूर्ण रूप से व्यवस्थित किया जाएगा। ऐसे गरीबों को सरकार पर्चा देगी। इसके लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को निर्देश दिया गया है। बिहार में 50 निजी विश्वविद्यालय स्थापित होंगे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि कम-से-कम 50 निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना बिहार में करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 के बाद बिहार को कोई व्यक्ति मजदूरी करने दूसरे राज्य में नहीं जाएगा। ऐसी व्यवस्था राज्य में स्थापित की जा रही है। पंचायती राज मंत्री ने चुनाव को लेकर दी थी जानकारी बता दें कि कुछ दिनों पहले बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने भी कहा था कि बिहार में त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान परिसीमन के बाद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग जल्द ही चुनाव की तारीखें घोषित कर सकता है। मंत्री दीपक प्रकाश ने यह भी कहा था कि त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन का काम आखिरी चरण में है। पंचायत में बनेगा मिनी सचिवालय मंत्री दीपक प्रकाश ने जानकारी दी थी कि बिहार की सभी पंचायतों में पंचायत सरकार भवन को मिनी सचिवालय के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर मिलने वाली विभिन्न सरकारी सेवाएं एक ही भवन में उपलब्ध कराना है। यहां जनप्रतिनिधियों के साथ संबंधित कर्मियों की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जाएगी।

उम्र को दी मात, 75 वर्षीय जयराम और 71 वर्षीय चंद्रो ने दी परीक्षा

हांसी. उम्र के जिस पड़ाव पर लोग पढ़ाई से दूरी बना लेते हैं, वहां बीड़ के 75 वर्षीय जयराम और 71 वर्षीय चंद्रो ने रविवार को परीक्षा केंद्र पहुंचकर नई मिसाल पेश की। उल्लास कार्यक्रम के पांचवें चरण की पढ़ने-लिखने और आसान गणना की परीक्षा में महिलाओं तथा बुजुर्गों ने उत्साह से भाग लिया। जिले में 425 निरक्षर लोगों की पहचान कर उनका पोर्टल पर पंजीकरण किया गया था। परीक्षार्थियों को घर के नजदीक सुविधा देने के लिए 277 स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया। हांसी शहर में तीन केंद्रों पर परीक्षा रखी गई थी। दैनिक जागरण की टीम दोपहर एक बजे गवर्नमेंट हाई स्कूल और लाल सड़क स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पहुंची तो दोनों पर ताला लगा मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि सुबह कुछ लोग परीक्षा देने आए थे, लेकिन बाद में स्कूल बंद कर दिया गया। नोडल अधिकारी राममेहर के अनुसार दोनों केंद्रों पर 15 लोगों को परीक्षा देनी थी। इनमें 11 ने परीक्षा दी, जबकि चार अनुपस्थित रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने बढ़-चढ़कर परीक्षा में भाग लिया। स्वयंसेवी शिक्षकों को पंजीकृत लोगों से संपर्क कर उन्हें केंद्र तक लाने और परीक्षा की प्रक्रिया समझाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

मानसा में बम धमकी से हड़कंप, कोर्ट और 4 स्कूल निशाने पर

मानसा. कोर्ट कांप्लेक्स के अलावा चार सरकारी स्कूलों को बंब उड़ाने की मिली धमकी के बाद पुलिस प्रशासन अर्ल्ट हो गया है और कोर्ट कांप्लेक्स के अलावा स्कूलों में पुलिस बल तैनात करते जांच शुरू कर दी गई है। अदालत में जाने वाले हर व्यक्ति की तलाशी ली जा रही है और पुरी जांच के बाद ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। पुलिस ने मिले धमकी भरे पत्र को कब्जे में लेने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। जिले के तीन गांवों खीवा, हीरो कलां और अतला के स्कूलों और मानसा शहर के गर्ल्स स्कूल के बाहर भी पुलिस तैनात कर दी गई है। इन सभी स्कूलों को खाली करवा दिया गया है। पुलिस द्वारा स्कूलों और कोर्ट परिसर में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। थाना सिटी-2 की इंचार्ज बेअंत कौर ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच और सर्च कर रही है। पुलिस द्वारा स्कूलों और कोर्ट परिसर में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आने वाले हर व्यक्ति की तलाशी ली जा रही है। 4 स्कूलों और कोर्ट को उड़ाने की धमकी एक वायरल पत्र में लिखा है कि 21 तारीख को खीवा, हीरो कलां और अतला के स्कूलों को बम से उड़ाया जाएगा। इसके साथ ही मानसा कोर्ट और गर्ल्स स्कूल को भी निशाना बनाने की धमकी दी गई है। पत्र में धमकी भरे शब्दों के साथ लिखा है कि यह काम करके दिखाया जाएगा। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।

भाई के कांग्रेस में शामिल होने पर बोले मंत्री खुशवंत साहेब, बताई अपनी राय

रायपुर. छत्तीसगढ़ की सियासत में उस वक्त बड़ा उलटफेर हुआ, जब कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े ढाल दास ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया. उनके कांग्रेस प्रवेश के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई. इस पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कांग्रेस पर परिवार और समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया है. मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि कांग्रेस की नीति हमेश से फूट डालो और राज करो की रही है. कांग्रेस आपस में लड़ाने का काम कर रही है. कांग्रेस एक परिवार, समाज और धर्म को एक-दूसरे से लड़ाने का काम कर रही है. लेकिन हम सभी दृढ़ संकल्पित हैं और राष्ट्र प्रथम, देश प्रथम की विचारधारा से जुड़े हुए हैं. हमारा लक्ष्य प्रदेश को विकसित बनाने का है. कांग्रेस में आपसी कलह पीसीसी चीफ बैज के कांग्रेस से सीएम उम्मीदवारों वाले बयान पर मंत्री खुशवंत साहेब ने निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है. कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. आपसी कलह साफ दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि जनता ने कांग्रेस को पहले ही अपनी पसंद से हटा दिया है. कांग्रेस कितना भी प्रयास कर ले, जनता का विश्वास खो चुकी है. कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर पर तंज कसते हुए खुशवंत साहेब ने कहा कि प्रशिक्षण शिविर से कुछ नहीं होने वाला. कांग्रेस ग्राउंड में कितना भी मेहनत कर ले, वहां पैसों का खेल और भ्रष्टाचार चलता है. 20 निष्कासित नेताओं की कांग्रेस में वापसी को लेकर खुशवंत साहेब ने कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जितने भी अपराध होते हैं, उनमें कांग्रेस का नाम सामने आता है. कांग्रेस पहले निष्कासन का पत्र जारी करती है और फिर उसे वापस ले लेती है.

व्यक्ति से बढ़कर दल और दल से बढ़कर देश, ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव के साथ कार्य करना है: सीएम योगी

नकारात्मक ताकतें जाति के नाम पर समाज और महापुरुषों को बांटेंगी, हमें विभाजन नहीं होने देना है: मुख्यमंत्री व्यक्ति से बढ़कर दल और दल से बढ़कर देश, ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव के साथ कार्य करना है: सीएम योगी अब यूपी की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ नहीं, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ है: सीएम जो 500 वर्षों में नहीं हो पाया, वह अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण के रूप में संभव हुआ शक्ति केंद्र प्रमुख हर बूथ की समीक्षा करें, पन्ना प्रमुखों का दायित्व तय करें और एक-एक परिवार की मैपिंग करें  कार्यकर्ताओं के परिश्रम और पसीने ने यूपी को फिर पहचान दी, विकास की नई बुलंदियों तक पहुंचाया मेरठ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नकारात्मक ताकतें फिर से समाज को बांटने का काम करेंगी। वे जाति के नाम पर समाज को बांटेंगी और महापुरुषों को भी जातीय आधार पर बांटने का पाप करेंगी, लेकिन हमें इस विभाजन को नहीं होने देना है। महापुरुष पूरे समाज के होते हैं, उन्हें किसी जाति के दायरे में सीमित कर उनके महत्व को कम नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की उपस्थिति में जनपद मेरठ में आयोजित भाजपा पश्चिम क्षेत्र के शक्ति केंद्र संयोजकों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सीएम योगी ने कहा कि भारत के इतिहास, क्रांति और अन्नदाताओं के सामर्थ्य की धरती मेरठ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का सभी की ओर से हृदय से स्वागत और अभिनंदन है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के दो दिवसीय प्रवास के क्रम में पश्चिम क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को उनका सानिध्य और मार्गदर्शन मिल रहा है। शक्ति केंद्र सम्मेलन के माध्यम से कार्यकर्ताओं की शक्ति को जागृत करने और उस जागरण को पार्टी के लिए उपयोगी बनाने के साथ राष्ट्र प्रथम के भाव से प्रधानमंत्री के संकल्पों के अनुरूप आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत में कार्यकर्ताओं की भूमिका के लिए आह्वान किया जा रहा है। ‘मुझे क्या’ कहना मंथरा बुद्धि का परिचय मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति से बढ़कर दल और दल से बढ़कर देश है। भारतीय जनता पार्टी का भाव है कि मेरा सब कुछ देश के लिए होगा। जो लोग कहते हैं ‘मुझे क्या-मुझे क्या’, यह मंथरा बुद्धि है। ‘को नृप होई हमें का हानि’ का भाव पहचान का संकट खड़ा करता है, पलायन करवाता है, विकास को बाधित करता है और अन्नदाता किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाली परिस्थितियां पैदा करता है। इसी भाव ने देश को नुकसान पहुंचाया और देश गुलाम हुआ तथा उसके सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ। मोदी जी के नेतृत्व में नए भारत का दर्शन मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सत्ता संभालने के बाद एक नए भारत का दर्शन हुआ। ऐसा भारत जो अपनी विरासत पर गर्व करता है और विकास के लिए गति के साथ आगे बढ़ रहा है। आज ऐसा भारत है जिसके सामने पहचान का संकट नहीं है। सीना तानकर चलता है और दुनिया की आंख में आंख डालकर बात करता है। कोई चुनौती देने का दुस्साहस करता है तो भारत मांद में घुसकर मारना भी जानता है। भारत की अर्थव्यवस्था बॉटम फाइव से टॉप फाइव में आ गई है। इसी देश में कभी सनातन और हिंदू परंपरा को कोसने तथा उसे गजनवी, गोरी, इब्राहिम लोदी, बाबर और औरंगजेब के समकक्ष ठहराने का प्रयास किया जाता था। अब नया भारत गुलामी की मानसिकता को समाप्त कर विरासत पर गौरव की अनुभूति कर रहा है। इसकी परिणति काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के रूप में सामने है। जो लोगों के लिए असंभव था, वह प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में संभव हुआ है। विरासत-सनातन को कोसने वालों ने रोकी थी कांवड़ यात्रा मुख्यमंत्री ने कहा कि मथुरा-वृंदावन सज-संवर रहा है। भागवत भूमि शुकतीर्थ के पुनरुद्धार की कार्ययोजना चल रही है और विदुर कुटी के लिए भी धनराशि आवंटित की गई है। विरासत-सनातन को कोसने वालों ने कांवड़ यात्रा पर रोक लगाई थी। लेकिन, भाजपा सरकार ने कहा कि कांवड़ यात्रा को कोई नहीं रोक सकता। यह धूमधाम से चलेगी। मैं स्वयं कांवड़ यात्रा में शामिल होता हूं और पुष्पवर्षा करता हूं। यह सनातन का प्रतीक है। अब कोई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रोक नहीं लगा सकता, मेरठ की क्रांति धरा को अपमानित नहीं कर सकता। कट्टा-बंदूक की राजनीति नहीं हो सकती मेरठ में मुख्यमंत्री ने कहा कि अब मेरठ में कट्टा-बंदूक की राजनीति नहीं हो सकती। युवाओं के सपनों को उड़ान देने के लिए भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यहां से एक घंटे की दूरी पर बनकर तैयार हो गया है। मेरठ की बेटी पारुल चौधरी भारत के लिए ओलंपिक में गोल्ड मेडल लेकर आती है। उत्तर प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मेजर ध्यानचंद के नाम पर मेरठ में बन रही है। दिल्ली-मेरठ के बीच 12 लेन का एक्सप्रेसवे और नमो भारत ट्रेन सफलतापूर्वक चल रही है। अब फिल्म सिटी बन रही है, मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहा है और सेमीकंडक्टर की यूनिट लग रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी बड़ा काम हुआ है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के 60 प्रतिशत कंपोनेंट और 55 प्रतिशत मोबाइल फोन उत्तर प्रदेश में बन रहे हैं। 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। परंपरागत उद्यम फिर से पुनर्जीवित किया गया, जिसमें 3 करोड़ 25 लाख नौजवान रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। दंगाइयों की कमर टूटने के कारण प्रदेश दंगा-कर्फ्यू मुक्त हुआ है तथा इसके कारण बड़े-बड़े रोजगार भी प्रदेश में आए हैं। अब उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट नहीं है। अब कोई यूपी वाला कहकर अपमानित नहीं करता। मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, शामली, सहारनपुर या बिजनौर की पहचान बताने पर सम्मान की निगाह से देखा जाता है। यदि बाहर जाकर कोई कहता है कि वह यूपी से आया है तो सामने वाला उसे गले लगाने के लिए तैयार होता है। आने वाली पीढ़ी नहीं कहेगी-आपने क्या किया मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले न बेटी सुरक्षित थी और न व्यापारी। हर ओर अराजकता थी, महीनों-महीनों कर्फ्यू रहता था, व्यापार तबाह होता था और नौजवान की नौकरी पर पहले … Read more

हर बच्चे के सपने को मिले पंख, सेवा संकल्प अभियान से विकसित भारत का संकल्प होगा साकार

रायपुर : विशेष लेख : सेवा संकल्प अभियान : 25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत हर बच्चों को अवसर, हर सपनों को उड़ान: विकसित भारत का संकल्प       रायपुर  किसी बच्चे की आंखों में देखें तो वहां केवल बचपन नहीं दिखाई देगा, बल्कि वहां आने वाले भारत की तस्वीर दिखाई देगी। किसी की आंखों में अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना है, कोई डॉक्टर बनकर गांव के लोगों की सेवा करना चाहता है, कोई वैज्ञानिक बनकर नई खोज करना चाहता है, तो कोई अपने गांव में ऐसा काम करना चाहता है जिससे उसके साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार का अवसर मिले और भविष्य सुनिश्चित हो सके। वहीं किसी बच्चे का सपना खेल के मैदान से जुड़ा है तो किसी का खेत, तकनीक, शिक्षा, कला या उद्यमिता से। भारत के करोड़ों बच्चों की आंखों में पल रहे यही अनगिनत सपने मिलकर वर्ष 2047 के विकसित भारत की नींव रख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा और राष्ट्रनिर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ की दूसरी पहल ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ इसी भविष्य को समझने और उसे आकार देने का संकल्प है। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के प्रति विश्वास का संदेश है, जो वर्ष 2047 में विकसित भारत की जिम्मेदारी संभालेगी। आज जो बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, वही कल भारत के वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षक, सैनिक, खिलाड़ी, उद्यमी, शोधकर्ता और नीति-निर्माता होंगे। विकसित भारत की यात्रा की शुरुआत इसलिए स्कूल की कक्षा से होती है। एक बच्चे के हाथ में किताब होती है, लेकिन उसी किताब के पन्नों में उसके भविष्य की पूरी दुनिया छिपी होती है। शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, कौशल, तकनीकी समझ और नवाचार की भावना विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयास आने वाले भारत की तस्वीर बदल रहे हैं। पीएम स्कूल इसी बदलती सोच का उदाहरण हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ प्रयोग, खेल, कला, तकनीक और अनुभव के माध्यम से सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन भारत के सपनों की असली ताकत तब सामने आएगी, जब विकास की रोशनी उन बच्चों तक भी पहुंचेगी, जिनके घर दूरस्थ गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और वनांचलों में हैं। छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। एकलव्य आवासीय विद्यालयों ने जनजातीय समाज के अनेक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर दिए हैं। जिन बच्चों के लिए कभी बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई करना दूर का सपना था, उनके लिए आवासीय विद्यालय शिक्षा और बेहतर भविष्य की नई राह बन रहे हैं। इन विद्यालयों की कक्षाओं में बैठा कोई बच्चा जब पहली बार बड़े लक्ष्य के बारे में सोचता है, तो उसके साथ केवल उसका अपना सपना नहीं होता। उसके पीछे माता-पिता की उम्मीदें होती हैं, परिवार की वर्षों पुरानी आकांक्षाएं होती हैं और पूरे समाज की बदलती तस्वीर होती है। एक बच्चे की सफलता उसके परिवार को यह विश्वास देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, प्रतिभा को अवसर मिले तो मंजिल हासिल की जा सकती है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रयास आवासीय विद्यालय भी विद्यार्थियों के सपनों को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। स्कूली शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों के सामने उच्च शिक्षा के नए रास्ते खुल रहे हैं। जेईई, नीट, क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन और तैयारी का वातावरण इन विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास देता है। यह बदलाव केवल शिक्षा व्यवस्था का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह उस सोच का विस्तार है जिसमें बच्चे की प्रतिभा को उसके गांव, परिवार या आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसकी क्षमता और मेहनत से पहचाना जाता है। वर्ष 2047 के भारत की तस्वीर केवल ऊंची इमारतों, आधुनिक शहरों और नई तकनीकों से नहीं बनेगी। उसकी असली पहचान उस बच्चे के आत्मविश्वास से होगी, जो कह सके कि मैं अपने सपने को पूरा कर सकता हूं। विकसित भारत का अर्थ तब और व्यापक होगा, जब देश का युवा रोजगार की तलाश करने के साथ रोजगार पैदा करने की क्षमता भी रखेगा। शिक्षा के साथ कौशल, नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी दक्षता युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने और दूसरों के लिए भी अवसर पैदा करने की शक्ति देगी। आज का विद्यार्थी कल का केवल नौकरी तलाशने वाला युवा नहीं, बल्कि नया विचार देने वाला शोधकर्ता, नई तकनीक बनाने वाला नवाचारी, अपना व्यवसाय खड़ा करने वाला उद्यमी और समाज की समस्याओं का समाधान खोजने वाला परिवर्तनकारी नागरिक बन सकता है। यही वह सोच है जो विकसित भारत के संकल्प को व्यापक अर्थ देती है। ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ इसलिए केवल बच्चों के भविष्य की बात नहीं करता, यह पूरे देश के भविष्य की बात करता है। आज किसी स्कूल की प्रयोगशाला में प्रयोग करता बच्चा, किसी एकलव्य विद्यालय में पढ़ता जनजातीय विद्यार्थी, प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता युवा और अपने गांव में भविष्य का कोई नया रास्ता तलाशता विद्यार्थी-ये सभी 2047 के भारत की बदलती तस्वीर के गवाह होंगे। इन बच्चों के सपनों को अवसर देना ही राष्ट्रनिर्माण की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। क्योंकि किसी देश की वास्तविक शक्ति उसके संसाधनों में नहीं, उसकी नई पीढ़ी की कल्पनाशक्ति और सामर्थ्य में होती है। जब करोड़ों बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी, उनके भीतर सवाल पूछने की हिम्मत होगी, प्रयोग करने की स्वतंत्रता होगी और आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे, तब भारत की विकास यात्रा और अधिक मजबूत होगी। वर्ष 2047 का विकसित भारत आज से ही बनना शुरू हो चुका है। उसकी नींव आज की कक्षाओं में रखी जा रही है, उसकी उम्मीदें बच्चों की आंखों में पल रही हैं और उसकी दिशा युवाओं के सपनों से तय होगी। इसलिए जरूरी है कि देश का कोई बच्चा अवसर के अभाव में अपने सपने को छोटा न करे। उसके सपनों की उड़ान जितनी ऊंची हो, भारत का आकाश उतना ही खुला हो। क्योंकि … Read more