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जनपदों में होगी ‘जिला औषधि नियंत्रण अधिकारी’ की तैनाती, नया पद सृजित करने के लिए मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

 औषधि नियंत्रण संवर्ग का होगा पुनर्गठन, उपायुक्त (औषधि) के पद भी बढ़ेंगे मुख्यमंत्री का निर्देश, औषधि नियंत्रक के पद के लिए योग्यता और निश्चित कार्यकाल तय हो दोगुनी होगी औषधि निरीक्षकों की संख्या, नए पद होंगे सृजित, साक्षात्कार नहीं, अब लिखित परीक्षा से होगी औषधि निरीक्षकों की भर्ती लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में औषधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से औषधि नियंत्रण तंत्र को सुदृढ़ और प्रभावी बनाने पर बल दिया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जिलास्तर पर कार्य व्यवस्था को और मज़बूत करने के लिए अब ‘जिला औषधि नियंत्रण अधिकारी’ का पद सृजित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि औषधि निरीक्षकों की संख्या को वर्तमान के सापेक्ष दोगुना किया जाए। इन पदों पर चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए अब साक्षात्कार के स्थान पर लिखित परीक्षा के माध्यम से भर्ती कराई जाएगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में औषधि नियंत्रण संवर्ग के पुनर्गठन एवं नए पदों के सृजन से संबंधित प्रस्तावों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जनपदों में औषधि निरीक्षकों की समुचित तैनाती सुनिश्चित की जाए तथा जिला स्तर पर प्रभावी पर्यवेक्षण और समयबद्ध जांच व्यवस्था लागू की जाए। बैठक में बताया गया कि विभाग में वर्तमान में 109 औषधि निरीक्षक कार्यरत हैं, जो भारत सरकार के मानकों की दृष्टि से अपर्याप्त हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में औषधि निरीक्षण व्यवस्था को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना जनस्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। बैठक में औषधि नियंत्रण संवर्ग के उच्च पदों के पुनर्गठन पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उप आयुक्त (औषधि) पदों की संख्या में वृद्धि तथा संयुक्त आयुक्त (औषधि) के पद पर पदोन्नति हेतु अर्हकारी सेवा में संशोधन के प्रस्ताव को अपनी सहमति दी। मुख्यमंत्री ने विभाग में औषधि नियंत्रक पद के लिए स्पष्ट योग्यताएं एवं मानक तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस पद के लिए एक निश्चित कार्यकाल निर्धारित किया जाए, ताकि तंत्र के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

बिहार की राजनीति में हलचल: उपमुख्यमंत्री पद पर दलित-मुस्लिम गठजोड़, पप्पू यादव ने दी प्रतिक्रिया

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की हलचल के बीच निर्दलीय सांसद पप्पू यादव  ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार में INDIA गठबंधन की सरकार बनेगी तो हमारे नेता राहुल गांधी दलित और मुस्लिम समुदाय से एक-एक उपमुख्यमंत्री अवश्य बनाएंगे। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। दरअसल, पप्पू यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर दावा किया कि अगर बिहार में INDIA गठबंधन की सरकार बनेगी तो हमारे नेता राहुल गांधी जी दलित औरमुस्लिम समुदाय से एक-एक उपमुख्यमंत्री अवश्य बनाएंगे! उन्होंने आगे लिखा कि वह सभी समाज को समुचित प्रतिनिधि देने के  पक्षधर रहे हैं। उनके पिता राजीव गांधी जी, तारिक अनवर साहब को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे तो इंदिरा जी ने भोला पासवान शास्त्री जी और गफ़ूर साहब को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया था!

योगी सरकार के सुशासन मॉडल में डिजिटल प्रशिक्षण बना रहा परिवर्तन का आधार

सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को मिल रहा नया आयाम मिशन कर्मयोगी से दक्ष हो रहे समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के सतत प्रयासों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी पहल ‘मिशन कर्मयोगी’ को आगे बढ़ाते हुए योगी सरकार ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। योगी सरकार के ‘डिजिटल दक्षता एवं पारदर्शी प्रशासन’ के विजन को साकार करने में समाज कल्याण विभाग अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल के माध्यम से अपनी कार्यकुशलता बढ़ाने में जुटे हैं। इसका सीधा लाभ जनता को पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी सेवाओं के रूप में मिल रहा है। 3,900 कर्मचारी जुड़े, पूरे किए 21,150 कोर्स समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक कुल 3,900 अधिकारी, नियमित/संविदाकर्मी एवं शिक्षक पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। इन कर्मचारियों ने अब तक 21,150 ऑनलाइन कोर्स पूरे किए, जिनमें लगभग 15,893 घंटे का प्रशिक्षण शामिल है। इनमें से 2,759 कर्मचारियों ने कम से कम एक कोर्स, जबकि 2,289 कर्मचारियों ने तीन या उससे अधिक कोर्स पूरे किए हैं। वहीं, 1,611 कर्मचारियों ने तीन से कम और 1,141 कर्मचारियों ने अभी प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है। योगी सरकार का यह अभियान हर सरकारी कर्मचारी को “कुशल, पारदर्शी और जवाबदेह” बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है नई तकनीक और पारदर्शी शासन पर है विशेष जोर दे रही योगी सरकार मिशन कर्मयोगी के प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में न केवल प्रशासनिक सुधार बल्कि तकनीकी उन्नयन पर भी विशेष जोर दिया गया है। इनमें ‘योगा ब्रेक एट वर्कप्लेस’ जैसे विषय तनावमुक्त कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देते हैं, जबकि POSH Act 2013 से कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को सशक्त किया जा रहा है। ‘Procurement Process on GeM’, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’, ‘Basics of Artificial Intelligence’ और ‘Right to Information Act’ जैसे कोर्स सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और जनता के प्रति जवाबदेही की भावना को सुदृढ़ कर रहे हैं। योगी सरकार डिजिटल शासन नीति को दे रही है नई दिशा मिशन कर्मयोगी के तहत डिजिटल प्रशिक्षण, योगी सरकार के उस दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसमें शासन को पेपरलेस, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के इस अभियान से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में न केवल पारदर्शिता आई है बल्कि कर्मचारियों में कार्य के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी बढ़ी है। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मिशन कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साझा सोच का परिणाम है, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। समाज कल्याण विभाग इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे अधिकारी और कर्मचारी डिजिटल रूप से दक्ष बन रहे हैं, जिससे जनता को योजनाओं का लाभ तेजी और पारदर्शिता के साथ मिल सके। दक्षता से ही सेवा की गुणवत्ता बढ़ेगी और यही योगी सरकार के सुशासन का आधार है।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र के खिलाफ भ्रष्टाचार मामला, कोर्ट में पेश हुई चार्जशीट

गुड़गांव सीएलयू के नाम पर 30 से 50 करोड़ रुपए मांगने के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं वर्तमान कांग्रेस के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप तय हो गए हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो ने नारनौल में एएसजे हर्षाली चौधरी की अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। एसीबी ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 7 के तहत राव नरेंद्र सिंह को आरोपी बनाया है।    एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं वर्तमान में हरियाणा प्रदेश के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह द्वारा धर्मेंद्र कुहाड़ से पलवल में 30 एकड़ जमीन की सीएलयू यानी चेंज ऑफ लैंड यूज कराने की ऐवज में 30 से 50 करोड़ रुपए की मांग की थी। इसकी शिकायत धर्मेंद्र कुहाड़ द्वारा स्टिंग ऑपरेशन करके ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली थी। धर्मेंद्र ने स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो/ऑडियो रिकॉर्डिंग को इनेलो के विधायक रामपाल माजरा को दे दिया। पूर्व विधायक रामपाल माजरा द्वारा एक शिकायत लोकायुक्त को साल 2014 में दी थी। लोकायुक्त द्वारा शिकायत को जांच के लिए भारतीय पुलिस सेवा के विक्रम राजा को सौंपा था।   शिकायत की जांच की अंतिम रिपोर्ट 27 अप्रैल 2015 को लोकायुक्त हरियाणा को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट पर लोकायुक्त द्वारा ेस दर्ज करने के लिए 16 दिसंबर को चीफ सेक्रेटरी को सिफारिश की गई थी। चीफ सेक्रेटरी ने एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक को केस दर्ज करने की सिफारिश की थी। इस पर 29 जनवरी 2016 को प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 7 के तहत केस दर्ज कर लिया। मामले की जांच पूरी करने के बाद अब एंटी करप्शन ब्यूरो ने मामले में चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है।   

फ्री सफर पर ब्रेक! डीजल न मिलने से पंजाब रोडवेज की बसें थमीं, लोग फंसे रास्ते में

पठानकोट पंजाब सरकार की ओर से महिलाओं के लिए शुरू की गई मुफ्त बस यात्रा योजना अब संकट में घिरती नजर आ रही है। इस योजना के तहत पंजाब रोडवेज पर 1200 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया हो चुका है। साथ ही, बसों को चलाने के लिए डीजल तक उपलब्ध नहीं है। पठानकोट रोडवेज डिपो में डीजल खत्म होने के कारण शुक्रवार को चक्का जाम हो गया, जिससे चंडीगढ़, अमृतसर, जालंधर और गुरदासपुर जैसे विभिन्न रूटों पर बस सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। इससे यात्रियों, खासकर महिलाओं और छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पठानकोट बस अड्डे पर यात्रियों की भीड़ जमा हो गई।रोडवेजड बसों के न चलने से कई लोगों को निजी बसों का सहारा लेना पड़ा। छात्राओं और महिलाओं को किराया देकर यात्रा करनी पड़ी, जिससे सरकार की मुफ्त यात्रा योजना पर सवाल उठने लगे। पंजाब रोडवेज पनबस कांट्रेक्ट वर्कर यूनियन के प्रधान जोगिंद्र पाल सिंह लवली ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले सरकार ने बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन अब रोडवेज डिपो को डीजल के लिए बजट तक नहीं मिल रहा। पठानकोट डिपो में डीजल की कमी के कारण बसें खड़ी हैं और कुछ रूटों पर जो बसें चलीं, वे कल के बचे हुए डीजल से चलाई गईं। इन बसों में भी ओवरलोडिंग की समस्या देखी गई। जोगिंद्र पाल ने बताया कि सरकार मुफ्त बस सेवा का दावा तो कर रही है, लेकिन इसके लिए जरूरी बजट जारी करने में नाकाम रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए किलोमीटर स्कीम को बरकरार रख रही है, जिसका टेंडर 31 अक्टूबर को फिर से खोला जाएगा। यूनियन ने इस टेंडर का विरोध करने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यह स्कीम रोडवेज के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। यात्रियों ने भी सरकार से नाराजगी जताई। उनका कहना है कि मुफ्त यात्रा का वादा तो किया गया, लेकिन बसें ही नहीं चल रही हैं। हमें मजबूरी में किराया देकर निजी बसों में जाना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में “जीरो पावर्टी अभियान” को एक मिशन के रूप में संचालित करने का लिया है संकल्प

लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में “जीरो पावर्टी अभियान” को एक मिशन के रूप में संचालित करने का संकल्प लिया है। उनके विजन का लक्ष्य स्पष्ट है—राज्य के हर गरीब परिवार को सरकारी योजनाओं का सम्पूर्ण लाभ दिलाना, ताकि कोई भी परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे। इसके तहत पहले चरण में जहां सात प्रमुख योजनाओं (राशन कार्ड, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना) के माध्यम से चिन्हित परिवारों को आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया था, वहीं अब दूसरा चरण और अधिक व्यापक होने जा रहा है। अभियान के दूसरे चरण में अब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, जलजीवन मिशन, विद्युत कनेक्शन, शिक्षा तथा मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य प्रत्येक गरीब परिवार को ऊर्जा, स्वच्छता, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना है। हर गरीब को सम्मानजनक जीवन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि “जीरो पावर्टी” केवल योजना न रहे, बल्कि एक सामाजिक संकल्प बन जाए। उनका स्पष्ट संदेश है कि यह अभियान न सिर्फ लाभ पहुंचाने का प्रयास है, बल्कि “गरीबी के चक्र को स्थायी रूप से तोड़ने” का एक मॉडल है, जो उत्तर प्रदेश को गरीबीमुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम साबित होगा। यह अभियान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस “योगी मॉडल ऑफ डेवलपमेंट” की मिसाल है, जिसमें विकास केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि हर गरीब परिवार के जीवन में दिखता है। जहां प्रधानमंत्री मोदी का “सबका साथ, सबका विकास” नारा है, वहीं मुख्यमंत्री योगी का विजन उसे धरातल पर “जीरो पावर्टी” के रूप में साकार कर रहा है। योजनाओं का मिलेगा लाभ तो जीवन होगा खुशहाल दूसरे चरण में अटल आवासीय योजना भी अभियान का अहम हिस्सा है। इसके तहत निराश्रित बच्चों को सुरक्षित आवासीय शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। वहीं मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत कमजोर वर्ग की बालिकाओं को उनके विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता दी जाएगी। इसी तरह, मुख्यमंत्री का निर्देश है कि सभी अनाथ बच्चों को बाल सेवा योजना में नामांकित किया जाए, जिससे उन्हें योजना का लाभ मिल सके। परिवार के सभी बच्चों का स्कूल में नामांकन सुनिश्चित हो और यदि नामांकन न हुआ हो तो तत्काल कराया जाए। साथ ही, सभी पात्र परिवारों को उज्ज्वला कनेक्शन दिए जाने पर भी जोर है, ताकि घरेलू महिलाएं सेफ कुकिंग फ्यूल का उपयोग सुनिश्चित कर सकें। वहीं, एसबीएम ग्रामीण के तहत सभी हाउसहोल्ड में सैनिटरी टॉयलेट्स की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। जलजीवन मिशन के अंतर्गत सभी घरों में स्वच्छ पेयजल और इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन योजना के अंतर्गत समस्त पात्रों को रेगुलर इलेक्ट्रिसिटी प्रदान करने का लक्ष्य है। गरीबी की पहचान और समग्र सुधार जीरो पावर्टी के तहत चिन्हीकरण में उन परिवारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिनके पास कृषि भूमि नहीं है, पक्का मकान नहीं है, या जिनके सदस्य वृद्ध, निराश्रित, अनाथ अथवा दिव्यांग हैं। साथ ही शिक्षा और रोजगार के अवसरों से वंचित युवाओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है। यह मॉडल “डेमोग्रॉफी, असेट ओनरशिप और एजूकेशन एंड एंप्लॉयबिलिटी” के तीन स्तंभों पर आधारित है, जो गरीबी के मूल कारणों को दूर करने की दिशा में ठोस कदम है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर के सभी अधिकारी इस अभियान को अपनी जिम्मेदारी समझें और 100% कवरेज सुनिश्चित करें।

सफाई का जायजा लेने बुड्ढा नाला पहुंचे राज्यपाल, अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

लुधियाना  पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया शुक्रवार को लुधियाना में ताजपुर रोड स्थित बुड्ढा नाला पहुंचे। उन्होंने राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा बुड्ढा नाले की सफाई के लिए चलाए जा रहे अभियान का जायजा लिया। बता दें कि बुड्ढा नाले का प्रदूषण सतलुज नदी के जरिए मालवा से लेकर राजस्थान तक कहर बरपा रहा है। गुलाब चंद कटारिया खुद राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए वे लगातार इस अभियान की समीक्षा कर रहे हैं। वे इस मुद्दे पर चंडीगढ़ में अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं और कई बार घटनास्थल का दौरा भी कर चुके हैं। आज के दौरे के दौरान राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने बुड्ढा नाले की सफाई के काम का जायजा लिया। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक भी की। इस मौके पर उनके साथ राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल भी मौजूद थे। 

छठ पूजा की तैयारी जोरों पर, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुद संभाली कमान

नई दिल्ली  दिल्ली में आस्था के महापर्व छठ की तैयारी पूरे जोश और श्रद्धा के साथ जारी है। इसी क्रम में शुक्रवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कई छठ घाटों का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि सरकार छठ की तैयारियों के लिए कोई कमी नहीं छोड़ रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और विधायक संदीप सहरावत ने शुक्रवार को पहले भव्य पोचनपुर छठ घाट का उद्घाटन किया और श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, "पूरी दिल्ली में लगभग 1,500 स्थानों पर छठ घाट बनाए गए हैं और सभी तैयारियां जोरों पर हैं। इसके अलावा, यमुना नदी के किनारे कई किलोमीटर तक 17 अलग-अलग स्थानों पर विशेष घाट बनाए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को छठ पूजा करने के लिए उचित सुविधाएं मिल सकें।" भाजपा विधायक संदीप सहरावत ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "हमारी मुख्यमंत्री ने पोचनपुर छठ घाट का उद्घाटन किया और स्वयं सभी तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने सभी तैयारियों की समीक्षा की। मैं मुख्यमंत्री को उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।" इसके बाद, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लक्ष्मी नगर विधानसभा क्षेत्र में कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया, जिसमें छठ घाट, 153 गलियां, सीवर व पानी की लाइनें और गणेश नगर कॉम्प्लेक्स में एक पुलिया शामिल है। उन्होंने धोबी समुदाय के लोगों को इलेक्ट्रिक आयरन बांटे और भाजपा की ओर से यमुना घाटों पर किए गए इंतजामों के बारे में बताया, जिससे पूर्वांचल के लोग बिना किसी परेशानी के छठ पूजा कर सकें। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "यह घाट न सिर्फ पूर्वांचली भाई-बहनों की आस्था का प्रतीक है, बल्कि दिल्ली के सांस्कृतिक गौरव और सहभागिता की पहचान भी बनेगा।" मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लिखा, "भाजपा सरकार के नेतृत्व में जिस समर्पण और संवेदनशीलता से छठ महापर्व की तैयारियां की जा रही हैं, वह अभूतपूर्व है। इस बार यमुना किनारे जब हमारी बहनें सूर्य देव को अर्घ्य देंगी, तो वे स्वच्छ और निर्मल जल में खड़ी होकर अपनी प्रार्थनाएं अर्पित करेंगी। यह नया घाट दिल्ली में आस्था और विकास के संगम का प्रतीक है।"

सावधान! रांची के 26 घाट घोषित किए गए Dangerous, नगर निगम ने दी चेतावनी

इस बार छठ पूजा की शुरुआत शनिवार, 25 अक्टूबर 2025 को होगी और समापन मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025 को प्रातः कालीन अर्घ्य के साथ होगा। झारखंड में छठ पूजा की बड़ी ही धूम होती है। वहीं, छठ पूजा से पहले रांची के 26 घाट खतरनाक घोषित कर दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक रांची में इस बार मानसून के दौरान रिकॉर्ड तोड़ बारिश होने के कारण शहर के कई तालाबों में जलस्तर काफी बढ़ गया है। नगर निगम द्वारा कराए गए सर्वे में 74 घाटों में से 26 को हाई रिस्क जोन घोषित किया गया है। कहा जा रहा है कि इन घाटों में सीढ़ियों से उतरते ही 7 से 8 फीट तक पानी है, जो व्रतधारियों और श्रद्धालुओं के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। नगर निगम ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर एनडीआरएफ जवानों की तैनाती की मांग की है। वहीं, नगर निगम ने अपील की है कि श्रद्धालु चिह्नित सुरक्षित घाटों पर ही पूजा करें और बच्चों या बुजुर्गों को पानी के गहरे हिस्से में न ले जाएं। बैरिकेडिंग पार करना सख्त वर्जित है। कांके डैम, हातमा तालाब, तिरिल बस्ती कोकर तालाब, जोड़ा तालाब बरियातू, भाभा नगर तालाब, कोकर टुनकी टोला तालाब, रिम्स, जेल तालाब, चडरी तालाब, करमटोली तालाब, हटनिया तालाब, नक्षत्र वन, बड़ा तालाब, अरगोड़ा तालाब, मधुकम तालाब, कटहल गोंदा तालाब, सरोवर नगर डैम साइड, भट्टा गढ़ा, हेहल तालाब, जगन्नाथपुर तालाब, धुर्वा डैम, धुर्वा छोटा डैम, बटन तालाब, स्वर्णरेखा घाघरा घाट, नामकुम तेतरी टोली, कैलाश नगर, नामकुम सिपाही पुल, जोजार नामकुम, हुंडरू तालाब।

हरियाणा में बढ़ेगी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की रफ्तार, सरकार ने E-CMS इंसेंटिव पर लिया बड़ा फैसला

चंडीगढ़ हरियाणा केन्द्र सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के तहत निवेश आकर्षित कर प्रदेश को ’इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग’ के एक प्रमुख हब के रूप में विकसित करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। इस दिशा में राज्य जल्द ही अपनी ईसीएमएस पॉलिसी के तहत नई प्रोत्साहन योजनाएं शुरू करेगा, जिनमें निवेशकों को वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने आज यहां एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास को गति देने राज्य में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने की रणनीतियों की समीक्षा की गई। नई मसौदा ‘ईसीएमएस पॉलिसी’ के तहत पूंजीगत एवं परिचालन खर्च की प्रतिपूर्ति, ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर व्यय, प्रौद्योगिकी अधिग्रहण, क्षमता निर्माण, अनुसंधान एवं नवाचार सुविधाओं के विकास हेतु समर्थन जैसे अनेक प्रोत्साहन प्रस्तावित हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य बड़े निवेश आकर्षित करना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में राज्य की भागीदारी को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि देश में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन वर्ष 2015 से अब तक 17 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से बढ़ा है, जबकि डिजाइन और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम अभी विकास के शुरुआती चरण में है। वर्तमान में हरियाणा देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगभग 2.9 प्रतिशत (0.8 बिलियन यूएसडी) का योगदान दे रहा है और इस क्षेत्र में लगभग 1.3 मिलियन रोजगार का सहयोग करता है। रस्तोगी ने कहा कि लक्षित नीतिगत सहयोग, रणनीतिक निवेशक सहभागिता और आईएमटी सोहना में प्रस्तावित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर जैसे सक्षम बुनियादी ढांचे के निर्माण से राज्य के योगदान को बढ़ाने की अपार सम्भावनाएं हैं। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि केन्द्र सरकार की ’ईसीएमएस योजना’ के अंतर्गत कई तरह के लाभ दिए जाते हैं। इनमें 1 से 25 प्रतिशत तक टर्नओवर-लिंक्ड और पूंजी निवेश आधारित लाभ शामिल हैं। आंध्र प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे प्रगतिशील राज्यों की तर्ज पर हरियाणा ’अतिरिक्त टॉप-अप इंसेंटिव देने की संभावनाएं तलाश रहा है, ताकि ईसीएमएस-अनुमोदित निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत हो सके। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को इस संबंध में विस्तृत योजना तैयार करने और तत्परता से निवेशकों से संपर्क साधने के निर्देश दिए। इसके तहत 10 नवंबर तक उन 11 आवेदकों के साथ द्विपक्षीय बैठकें की जाएंगी, जिन्होंने प्रदेश में ईसीएमएस-अनुमोदित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करने में रुचि दिखाई है। इसके अतिरिक्त, 50 अन्य कंपनियों से भी संपर्क किया जाएगा, जिन्होंने अभी तक अपनी परियोजना का स्थान निर्धारित नहीं किया है। बेहतर समन्वय और निवेशक सुविधा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार प्रत्येक संभावित निवेशक के लिए समर्पित रिलेशनशिप मैनेजर नियुक्त करेगी। ये अधिकारी भूमि की पहचान, नियामक स्वीकृतियांे, विभागीय समन्वय और इंसेंटिव प्रक्रिया से जुड़ी सहायता प्रदान करेंगे। मुख्य सचिव ने कहा कि हरियाणा का दृष्टिकोण सुविधाजनक एवं प्रतिस्पर्धात्मक, दोनों तरह का होगा ताकि राज्य में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की स्थापना के लिए अनुकूल इकोसिस्टम विकसित हो सके। बैठक में नागरिक संसाधन सूचना विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जी. अनुपमा तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।