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अब 4 आरोपी FIR में दर्ज: ASI संदीप लाठर आत्महत्या मामले का नया खुलासा

रोहतक  आईपीएस वाई पूरन कुमार की आत्महत्या का मामला अभी सुलझा भी नहीं था कि उसके ठीक एक हफ्ते बाद रोहतक साइबर सेल में तैनात एएसआई संदीप लाठर ने भी खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी लेकिन मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट व लगभग 6:30 मिनट का एक वीडियो बनाया था, जिसमें उन्होंने विभाग में भ्रष्टाचार को उजागर किया था। साथ ही उस वक्त के एसपी नरेंद्र बिजरानिया को ईमानदार तो आईपीएस वाई पूरन कुमार को भ्रष्ट अधिकारी बताया था, जिससे दुखी होकर आत्महत्या कर ली थी तो वहीं, परिजनों की शिकायत पर वाई पूरन कुमार की पत्नी उनके भाई अमन रतन, गनमैन सुशील के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी लेकिन अब इस मामले में एक और नया मोड़ आ गया।  दरअसल FIR की कॉपी में तीन नहीं बल्कि 4 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है। जिन लोगों के खिलाफ FIR की गई है इसमें नया नाम आईजी ऑफिस में तैनात SIS सुनील कुमार का है। 4 नामजद और एक अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। FIR की कॉपी मीडिया के सामने आने से चारों तरफ हलचल मच गई है। दरसल पुलिस ने FIR की कॉपी पूरी तरह से मीडिया से दूर रखी। वह इसलिए कहीं लोगों के बीच में आपसी टकराव न हो जाए और यह मामला जातीय रंग न ले ले।   दूसरी ओर मृतक के भाई संजय चेयरमैन ने कहा है कि उसका भाई भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा है और वह पूरा ईमानदार व्यक्ति था। इस सारे मामले की सिटिंग जज से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वाई पूरन कुमार के परिवार को भी न्याय मिलना चाहिए। उनके साथ भी अन्याय न हो और मामले की जांच होगी, तभी दूध का दूध और पानी का पानी हो पाएगा।  इन चार लोगों के खिलाफ FIR गौरतलब है कि मृतक संजय संदीप लाठर की पत्नी संतोष की शिकायत पर सदर थाना में वाई पूरण कुमार की पत्नी अमनीत पी कौर, उनके भाई अमन रतन वाई पूरन कुमार के गनमैन सुशील कुमार और आईजी ऑफिस में तैनात SIS सुनील कुमार चारों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज हुई है तो वहीं, FIR में एक अन्य के खिलाफ भी शिकायत दी गई है। दूसरी ओर संजय चेयरमैन ने कहा कि इसमें और अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं जो जांच के बाद सामने आएंगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तनोट माता मंदिर में टेका माथा, मांगा देशवासियों की खुशहाली का आशीर्वाद

जैसलमेर  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैसलमेर के दौरे पर हैं। वह शुक्रवार को जैसलमेर स्थित तनोट माता मंदिर गए और माता के दर्शन किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जैसलमेर के तनोट माता मंदिर में दर्शन कर आत्मिक शांति और आशीर्वाद का अनुभव हुआ। इस मंदिर की ऊर्जा अत्यंत अद्भुत और अलौकिक है। राजनाथ सिंह ने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना की और देश की सुरक्षा एवं समृद्धि के लिए माता से आशीर्वाद मांगा। तनोट माता मंदिर का भारतीय सेना से गहरा ऐतिहासिक संबंध रहा है। 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों के दौरान यह मंदिर सैनिकों के लिए आस्था और प्रेरणा का प्रतीक बना रहा। रक्षा मंत्री की यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रही बल्कि उन्होंने इसे देश की सीमाओं पर तैनात जवानों की अदम्य भावना और राष्ट्रभक्ति को समर्पित बताया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 23 अक्टूबर की शाम को राजस्थान के जैसलमेर पहुंचे थे। यहां उन्होंने सेना के बड़ाखाना के दौरान सैनिकों के साथ बातचीत की। इस मौके पर राजनाथ सिंह ने कहा कि अब भारत के खिलाफ कोई भी दुस्साहस करने से पहले पाकिस्तान को दो बार सोचना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन 'सिंदूर' के तहत पाकिस्तान को कड़ी संदेश दिया है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है, केवल रुका हुआ है। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि किसी भी दुस्साहस की स्थिति में उसे और भी कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। हमारे पायलटों ने सिर्फ भारत की ताकत का एक नमूना दिखाया है; यदि अवसर मिला तो वे हमारी असली क्षमता प्रदर्शित करेंगे। राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर देते हुए कि देश के विरोधी कभी निष्क्रिय नहीं रहते हैं, सशस्त्र बलों से सदैव सतर्क एवं पूरी तरह तैयार रहने और उनकी गतिविधियों के विरुद्ध उचित व प्रभावी कदम उठाने का आह्वान किया। रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक भारत को एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के सरकार के दृष्टिकोण को साकार करने में सशस्त्र बलों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक केवल सीमाओं के रक्षक ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के अग्रदूत भी हैं। रक्षा मंत्री ने कहा, ''यह सदी भारत की है, भविष्य हमारा है। आत्मनिर्भरता की दिशा में जो प्रगति हमने की है, उससे पूर्ण विश्वास है कि हमारी सेना निस्संदेह विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में अपना स्थान रखती है।'' राजनाथ सिंह ने सीमावर्ती बुनियादी ढांचे के विकास के प्रति सरकार की वचनबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने के लिए सीमा क्षेत्रों में तीव्र गति से विकास गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

दीवाली से पहले पटाखा कारोबारियों का गुस्सा फूटा, पुलिस पर लगाया आरोप

जालंधर  शहर में पटाखा कारोबारियों और पुलिस के बीच जारी विवाद बरकरार रहा। दीवाली के बाद पुलिस द्वारा जारी किए गए नोटिसों के विरोध में पटाखा व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा के पूर्व विधायक के.डी. भंडारी को साथ लेकर डी.सी.पी. नरेश डोगरा से मुलाकात की और सभी 20 नोटिस उनके हवाले कर दिए। पटाखा व्यापारियों का नेतृत्व प्रधान विकास भंडारी, प्रधान रवि महाजन और प्रधान संजीव बाहरी ने किया। व्यापारियों ने साफ कहा कि वे कोई स्पष्टीकरण नहीं देंगे, बल्कि पुलिस को ही अपने नोटिस वापस लेने होंगे। इस दौरान भंडारी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब इस वर्ष दिवाली दो दिन अर्थात 20 और 21 अक्तूबर को मनाई गई, तो पुलिस ने सिर्फ 20 अक्तूबर तक का ही लाइसेंस क्यों जारी किया? उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के चलते 21 तारीख को भी दीवाली और बंदीछोड़ दिवस मनाया गया, ऐसे में व्यापारियों का दुकानें खोलना स्वाभाविक था। भंडारी ने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए, न कि त्यौहार के दिन मेहनतकश व्यापारियों को परेशान करने पर। उन्होंने साफ कहा कि पुलिस को यह नोटिस वापस लेने ही होंगे । गौरतलब है कि इस विवाद की गूंज डी.जी.पी. गौरव यादव तक भी पहुंची। पूर्व विधायक के.डी. भंडारी ने सीधे डी.जी.पी. से फोन पर बात कर जालंधर पुलिस की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई थी। सूत्रों के अनुसार डी.जी.पी. के हस्तक्षेप के बाद ही जालंधर पुलिस इस मामले में नरम पड़ी दिखी। इस मामले में जब डी.सी.पी. नरेश डोगरा से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया ।

मध्यप्रदेश में ग्रोथ हब’ पहल शुरू, इंदौर और भोपाल के लिए बनेगा समग्र आर्थिक मास्टर प्लान

भोपाल मुख्य सचिव  अनुराग जैन की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश की आर्थिक प्रगति को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को मंत्रालय में बैठक हुई। बैठक में ‘ग्रोथ हब (G-Hub)’ पहल का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह महत्वाकांक्षी पहल नीति आयोग और मध्य प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयास से इंदौर एवं भोपाल क्षेत्रों के लिए व्यापक और दीर्घकालिक आर्थिक विकास रणनीति तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस अवसर पर नीति आयोग के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रिंसिपल इकोनॉमिक एडवाइजर सु एना रॉय ने किया। मुख्य सचिव  जैन ने कहा कि सुविचारित आर्थिक योजना से न केवल इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी बल्कि अनियंत्रित शहरी विकास पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा। सु एना रॉय ने बताया कि इंदौर और भोपाल आर्थिक क्षेत्रों के लिए समग्र आर्थिक मास्टर प्लान अगले वित्त वर्ष के प्रारंभ तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है और नीति आयोग इस दिशा में राज्य सरकार को पूर्ण सहयोग देगा। ‘ग्रोथ हब’ पहल के प्रथम चरण में इंदौर आर्थिक क्षेत्र (इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, खरगोन, रतलाम, शाजापुर, खंडवा) और भोपाल आर्थिक क्षेत्र (भोपाल, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम्) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इन क्षेत्रों के लिए आर्थिक प्रोफाइल, प्राथमिक परियोजना सूची और क्रियान्वयन रोडमैप तैयार किया जाएगा। दूसरे चरण में जबलपुर, सतना-रीवा, सागर और ग्वालियर क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा। बैठक के दौरान नीति आयोग ने G-Hub पहल का संक्षिप्त प्रस्तुतिकरण किया। संबंधित जिलों ने अपनी आर्थिक प्रोफाइल, प्रमुख अवसर, बाधाएँ और 90-दिवसीय कार्ययोजना साझा की। बैठक में स्टियरिंग कमेटी व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा में त्वरित कार्यों पर सहमति बनी जिनमें कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स (CFC), प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना, एंटरप्राइज सपोर्ट सेंटर्स, लॉजिस्टिक्स-वेयरहाउसिंग, कौशल एवं अप्रेंटिसशिप, निवेश-प्रोत्साहन और एकीकृत मास्टर प्लानिंग जैसे बिंदु शामिल हैं। यह पहल ‘विकसित मध्यप्रदेश’ के दृष्टिकोण से पूर्णतः संरेखित है जो नागरिकों को सुखद जीवन, संपन्न रोजगार अवसर और सांस्कृतिक गौरव प्रदान करने की दिशा में कार्यरत है। G-Hub कार्यक्रम के माध्यम से परियोजना-आधारित क्रियान्वयन, नीति सरलीकरण, भूमि आपूर्ति, एकीकृत अवसंरचना और निवेश प्रोत्साहन के जरिये राज्य में उच्च वृद्धि, गुणवत्तापूर्ण आजीविका और बेहतर ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी  संजय कुमार शुक्ल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग  ऋषि गर्ग और विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। संबंधित जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।  

MP पुलिस बल में कमी, हर 873 नागरिकों पर एक जवान; 22 हजार भर्ती का रोडमैप तैयार

भोपाल  मध्य प्रदेश में औसतन 873 लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक पुलिसकर्मी पर है। मुख्यमंत्री ने तीन वर्ष के भीतर 22,500 पुलिस आरक्षकों की भर्ती की घोषणा की है। इसे सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन सच्चाई है कि प्रतिवर्ष दो से ढाई हजार पुलिस आरक्षक सेवानिवृत हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2024 में 60 हजार पुलिस आरक्षकों की भर्ती की। इस वर्ष भी वहां पुलिस आरक्षक और उप निरीक्षकों के लगभग 30 हजार पदों पर भर्ती होने वाली है। मध्य प्रदेश में पुलिस बल की कमी के चलते बड़ी चुनौती वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ में सुरक्षा को लेकर रहेगी। इसमें 60 हजार पुलिसकर्मियों की आवश्यकता होगी। थाने नहीं बढ़ाने से पुलिस बल भी नहीं बढ़ा प्रदेश में पुलिस आरक्षक से लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तक के एक लाख 25 हजार 489 पद हैं। इनमें अभी एक लाख 600 ही पदस्थ हैं। जब कोई थाना स्वीकृत होता है, तभी उसके लिए बल स्वीकृत किया जाता है। जरूरत के अनुसार थाने नहीं बढ़ने के कारण पुलिस बल भी नहीं बढ़ा। सरकार का ही मापदंड मान लें, तो पचास हजार की आबादी पर जिला पुलिस बल का एक थाना होना चाहिए, इस हिसाब से प्रदेश की अनुमानित आठ करोड़ 90 लाख की जनसंख्या के हिसाब से 1700 से अधिक थाने होने चाहिए, पर अभी 968 ही हैं। एक साथ भर्ती में यह हैं चुनौतियां     प्रदेश में आठ पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में 7850 पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण की सुविधा है। उन्हें नौ माह का प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे अधिक पदों पर भर्ती होने पर प्रशिक्षण के लिए प्रतीक्षा करनी होगी।     पुलिस आरक्षक के पदों पर आनलाइन परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्रों की कमी रहती है। इस कारण कर्मचारी चयन मंडल को परीक्षा कराने में दो से तीन माह लग जाते हैं। इसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा में दो से तीन माह लग जाते हैं। छह से सात हजार पद भरने में ही लगभग डेढ़ वर्ष लग जा रहे हैं।     तीसरा, बजट के अभाव के कारण भी सरकार एक साथ बड़ी भर्ती करने से बच रही है। खुफिया तंत्र को मजबूत करने की जरूरत     जिस तरह से अपराध बढे हैं, उस तरह से पुलिसबल की संख्या बढ़ाने के साथ उसे ताकतवर बनाना होगा। विशेष रूप से खुफिया तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है। सरकार आंकड़े कुछ भी दिखाए, पर स्थिति ठीक नहीं है। जैसे-जैसे बेरोजगारी बढ़ रही है, युवा अपराध की ओर जा रहे हैं। औसतन देखा जाए तो जितने पुलिसकर्मी रिटायर हो रहे हैं, सरकार उतने भी भर्ती नहीं कर पा रही है। – अरुण गुर्टू, पूर्व, डीजी, विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त  

बैंकिंग सेवाएं ठहरेंगी छठ के कारण, जानें कौन-कौन से दिन रहेंगे बंद

छठ पूजा एक प्रमुख भारतीय त्योहार है जिसे खासतौर पर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, नेपाल, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है। छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है और इसका समापन सूर्यदेव को सुबह अर्घ्य देने के साथ होता है। इस बार छठ पूजा की शुरुआत शनिवार, 25 अक्टूबर 2025 को होगी और समापन मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025 को प्रातः कालीन अर्घ्य के साथ होगा। वहीं, छठ पर्व के दौरान 4 दिन तक बैंक बंद रहने वाले हैं। छठ पूजा के मौके पर कब-कब बैंक बंद रहेंगे? कल यानी 25 अक्टूबर से छठ की शुरूआत हो रही है, लेकिन कल चौथा शनिवार है तो इस वजह से भी कल बैंक बंद रहेंगे। 26 अक्टूबर को रविवार है और छठ पर्व का दूसरा दिन है तो इस वजह से बैंक बंद रहेंगे। 27 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में छठ पूजा (शाम की अर्घ्य) के कारण बैंक बंद रहेंगे। 28 अक्टूबर को बिहार और झारखंड में छठ पूजा (सुबह की अर्घ्य) पर बैंक की छुट्टी रहेगी।

तेजस्वी का बीजेपी पर वार, नीतीश पर प्यार, बोले- बिहार को चलाने का हक सिर्फ बिहारी को

पटना आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर शुक्रवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर से चुनाव प्रचार का शंखनाद किया। सलखुआ उच्च विद्यालय मैदान में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम नीतीश कुमार और एनडीए गठबंधन पर जमकर निशाना साधा। हालांकि इस दौरान नीतीश कुमार पर तेजस्वी नरम दिखे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार बीस साल में भी बिहार से पलायन नहीं रोक पाए। हमारी सरकार आएगी तो नया बिहार बनाएंगे। मेरी उम्र भले ही कच्ची है, लेकिन जुबान पक्की है। मेरा सपना भ्रष्टाचार मुक्त बिहार बनाने का है। तेजस्वी ने कहा कि एनडीए ने अब तक मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। अमित शाह ने खुद कह दिया कि चुनाव के बाद सीएम तय करेंगे। तेजस्वी ने तंज कसते हए कहा कि एक बात तय है कि नीतीश जी अब मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। जबकि हमने तय कर लिया है। उन्होंने वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री बनाने की बात कही। तेजस्वी ने सीएम नीतीश कुमार के प्रति हमदर्दी भी जताई और कहा, हमारे चाचा नीतीश कुमार को भाजपा ने हाइजैक कर लिया है। उनके साथ नाइंसाफी की जा रही है। तेजस्वी ने कहा कि बिहार को बाहरी ताकतें नियंत्रित नहीं करेंगी। बिहार को बिहारी ही चलाएगा, कोई बाहरी नहीं। हम बिहारी डरने वाले नहीं हैं। इस दौरान वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आईपी गुप्ता, खगड़िया के पूर्व सांसद एवं राजद नेता चौधरी महबूब अली केसर, युसूफ सलाहउद्दीन, सरिता पासवान, गौतम कृष्ण मौजूद रहे।

हरियाणा के बेटे से सुप्रीम कोर्ट तक: Justice Surya Kant की प्रेरक यात्रा

हिसार  हरियाणा के हिसार से निकलकर देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी तक पहुंचने वाले जस्टिस सूर्यकांत की कहानी प्रेरणादायक है। साधारण परिवार से आने वाले इन न्यायाधीश ने मेहनत, ईमानदारी और न्याय के प्रति जुनून से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर तय किया है। वे 24 नवंबर 2025 को भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI ) बनेंगे और फरवरी 2027 तक इस पद पर रहेंगे। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हिसार जिले के पेट्वर गांव में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से पूरी की और 1981 में गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, हिसार से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। फिर उन्होंने 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून (एलएलबी) की पढ़ाई पूरी की। कानूनी करियर और सफलता  1984 में उन्होंने हिसार के जिला न्यायालय में वकालत शुरू की और 1985 में चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने सांविधानिक, सेवा और नागरिक मामलों में प्रभावशाली दलीलों द्वारा अपनी पहचान बनाई। सामाजिक न्याय के लिए योगदान जस्टिस सूर्यकांत की न्यायिक यात्रा सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रही। वे सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षण, भूमि अधिग्रहण, मुआवजे, पीड़ितों के अधिकार, आरक्षण और संवैधानिक संतुलन जैसे विषयों पर संवेदनशील और न्यायसंगत दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। उनके फैसलों ने सामाजिक न्याय और नागरिक अधिकारों को मजबूती दी। प्रमुख उपलब्धियां 7 जुलाई 2000: हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल नियुक्त। 2001: वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्राप्त। 9 जनवरी 2004: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बने। 5 अक्तूबर 2018: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त। आगामी मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति केंद्र सरकार ने जस्टिस सूर्यकांत को देश का 53वां मुख्य न्यायाधीश बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। मौजूदा मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त होंगे। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 24 नवंबर 2025 को जस्टिस सूर्यकांत मुख्य न्यायाधीश पद संभालेंगे। वे 9 फरवरी 2027 तक इस पद पर रहेंगे। नियुक्ति प्रक्रिया का नियम ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का सबसे वरिष्ठ और उपयुक्त न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। वर्तमान सीजेआई के सेवानिवृत्त होने से लगभग एक माह पहले विधि मंत्री उनकी सिफारिश मांगते हैं। वर्तमान में जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति से भारतीय न्यायपालिका को नई दिशा और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

शॉकिंग हमला! मनोरंजन कालिया के घर फेंका गया ग्रेनेड, जांच में सामने आई बड़ी साजिश

मोहाली/जालंधर  पंजाब के पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया के जालंधर स्थित घर पर हुए ग्रेनेड हमले की सुनवाई एन.आई.ए. की विशेष न्यायाधीश मनजोत कौर की अदालत में हुई। इस मामले में आरोपी सैदुल अमीन और हरियाणा के कुरुक्षेत्र निवासी अभिजोत जांगड़ा वी.सी. के जरिए अदालत में पेश हुए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 10 नवंबर तय की है। इस मामले में एन.आई.ए. ने पिछली सुनवाई में खालिस्तान समर्थकों समेत 4 लोगों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोप पत्र में गिरफ्तार दो आरोपियों सैदुल अमीन (उत्तर प्रदेश निवासी) और अभिजोत जांगड़ा (हरियाणा के कुरुक्षेत्र निवासी) के अलावा दो फरार आरोपियों के नाम शामिल हैं। फरार आरोपियों की पहचान हरियाणा के यमुनानगर निवासी कुलबीर सिंह सिद्धू और करनाल निवासी मनीष उर्फ काका राणा के रूप में हुई है।  पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता के घर पर 7 अप्रैल, 2025 की रात को हमला हुआ था। कुछ दिनों बाद, 12 अप्रैल को, जांच एन.आई.ए. को सौंप दी गई। एन.आई.ए. द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बी.के.आई.) के सदस्य सिद्धू ने अपने साथी मनीष के साथ मिलकर पंजाब के प्रमुख नेताओं को निशाना बनाने के लिए एक आतंकवादी गिरोह बनाया ताकि लोगों में भय का माहौल बनाया जा सके और फिरौती के माध्यम से बी.के.आई. के लिए धन इकट्ठा किया जा सके। एन.आई.ए. के अनुसार, मनीष ने अमीन की भर्ती की थी, जिसने पूर्व मंत्री के घर पर ग्रेनेड फेंका था। जांच एजेंसी ने कहा कि सिद्धू ने अमीन को ग्रेनेड दिया था, जबकि जांगड़ा ने धन मुहैया कराया था। हमले के बाद सिद्धू ने एक पोस्टर प्रसारित किया था, जिसमें उसने मनीष के साथ साजिश रचने की जिम्मेदारी ली थी। सिद्धू के खिलाफ 'रेड कॉर्नर' नोटिस जारी किया गया है और उसकी गिरफ्तारी पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

किसानों के हक का गबन: मंडियों में तराजू के खेल से हो रही भारी चोरी

चंडीगढ़  पंजाब के किसानों का आरोप है कि उनकी फसल को कम तौला जा रहा है. खासकर कुछ चावल मिलों की ओर से ऐसा किया जा रहा है. किसानों का आरोप है कि पंजाब के निजी और सरकारी अधिकृत धान केंद्रों पर आढ़तियों यानी कमीशन एजेंटों की तरफ से ऐसा किया जा रहा है. कई जिलों के किसानों का दावा है कि कुछ एजेंट, कुछ मंडी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर रहे हैं. इस वजह से वास्तविक उपज से कम वजन दिखाने के लिए तौल और तराजू में हेराफेरी की जा रही है. इससे उन्हें अपनी धान की उपज का सही पैसा नहीं मिल पा रहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जब कोई किसान अपनी फसल मंडी में लाता है, तो उसे पहले बिजली के पंखे के सामने सुखाया जाता है, फिर बोरियों में रखा जाता है और बाद में बोरियों की सिलाई से पहले तौला जाता है. फिर इसे मिलों में ले जाया जाता है. यहां पर इसे मिलों में रखा जाता है. पंजाब में सरकार की तरफ से खरीदा गया सारा धान पहले 5,000 से ज़्यादा चावल मिलों में संग्रहीत किया जाता है और मिलिंग के बाद, चावल भारतीय खाद्य निगम (FCI) को आपूर्ति किया जाता है. प्राइवेट मंडियों में मंगा रहे हैं फसल की उपज कई किसानों और मंडी सूत्रों के मुताबिक, कुछ कमीशन एजेंट अपने साथ जुड़े किसानों को सरकारी मंडियों के बजाय निजी मंडियों में अपनी उपज लाने के लिए कह रहे हैं. किसानों का आरोप है कि मंडियों में एजेंटों की तरफ से तराजू में पहले से ही छेड़छाड़ की जाती है और प्रति क्विंटल धान का असली वजन 2 से 3 किलोग्राम कम दिखाया जाता है. ऐसे में प्राइवेट प्रतिष्ठानों में तौल मशीनों पर अक्सर पर्याप्त सरकारी निगरानी नहीं होती. आरोप है कि ये एजेंट कम वजन दिखाकर बाकी पैसे हड़प लेते हैं. किसानों का आरोप है कि आर्थिक रूप से की जा रही इस हेराफेरी की वजह से किसानों को प्रति ट्रॉली धान पर हजारों रुपये का नुकसान हो सकता है. बेमौसम बारिश और कीटों से हुए नुकसान के कारण इस सीज़न में पहले से ही कम पैदावार से जूझ रहे किसानों ने कहा कि कम तौल एक और झटका है. कई किसानों ने बताया कि इस साल उनकी फसल सामान्य पैदावार की तुलना में प्रति एकड़ 5 से 10 क्विंटल कम है. मंडी बोर्ड के अधिकारी ने क्या कहा? वहीं मंडी बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जैसे-जैसे पंजाब में धान की खरीद आगे बढ़ रही है, किसानों को उम्मीद है कि ज्यादा सतर्कता, डिजिटल निगरानी और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से उस प्रणाली में विश्वास बहाल होगा जो लंबे समय से राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है.