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लखनऊ में बड़ा फैसला, स्कूल जाने वाली और ड्रॉपआउट किशोरियों को भी मुफ्त सैनिटरी नैपकिन

 लखनऊ  सरकारी विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को निश्शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रदेश में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं को एकीकृत कर राज्य स्तरीय नीति बनायी जाएगी, जिसमें स्कूल छोड़ चुकी और स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियों तक भी निश्शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में शुक्रवार को राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया। विद्यालयों में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन तथा किशोरावस्था संबंधी जागरूकता गतिविधियों को नियमित रूप से चलाया जाएगा। किशोरियों को माहवारी शुरू होने से पहले जरूरी जानकारी देने के साथ मिथकों, भ्रांतियों और सामाजिक झिझक को दूर करने के लिए डिजिटल, सामाजिक व अन्य संचार माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा। माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को एकीकृत कर राज्य नीति विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य सेवाओं को समग्र और संस्थागत स्वरूप देना तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है। स्कूल से बाहर रहने वाली और वंचित समूहों की किशोरियों तक सेवाएं पहुंचाने पर विशेष जोर रहेगा। अपर मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से जिम्मेदारियां पूरी करने और विद्यालयों में किशोरियों के लिए स्वच्छ व सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  

PU सीनेट चुनाव में मतदान जारी, 7 राज्यों के 271 बूथों पर डाले जा रहे वोट

चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव के तहत रविवार को ग्रेजुएट कांस्टीट्यूएंसी के साथ डिग्री कॉलेज प्रिंसिपल और टीचर्स कांस्टीट्यूएंसी के लिए मतदान शुरू हो गया। ग्रेजुएट कांस्टीट्यूएंसी की 15 सीटों के लिए 51 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। मतदान सात राज्यों में बनाए गए 271 पोलिंग बूथ पर हो रहा है। मतदान शाम पांच बजे तक जारी रहेगा। चंडीगढ़ में भी विभिन्न स्थानों पर मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान शुरू होने के शुरुआती समय में कई पोलिंग बूथ के बाहर सन्नाटा देखने को मिला। पोलिंग बूथ के बाहर लगाए गए प्रत्याशियों के स्टालों पर भी अभी तक बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और मतदाता नहीं पहुंचे थे। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ मतदान में तेजी आने की उम्मीद है। ग्रेजुएट कांस्टीट्यूएंसी के चुनाव में 51 प्रत्याशी 15 सीटों के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं डिग्री कॉलेज प्रिंसिपल और टीचर्स कांस्टीट्यूएंसी के मतदाता भी अपने प्रतिनिधियों के चयन के लिए मतदान कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से प्रत्याशियों की ओर से जोर-शोर से प्रचार अभियान चलाया जा रहा था। अब मतदान शुरू होने के बाद प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की नजर अधिक से अधिक मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक पहुंचाने पर है। शाम पांच बजे मतदान समाप्त होने के बाद मतपेटियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुरक्षित किया जाएगा।

झारखंड सरकार ने 25 लाख और एनआईए ने 5 लाख का इनाम बृजेश गंझू पर किया था घोषित

लखनऊ/वाराणसी उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बीच यूपी एटीएस ने वाराणसी में बड़ी कार्रवाई अंजाम दी है। यहां एटीएस ने झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) के कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता को मुठभेड़ में ढेर कर दिया। बृजेश पर झारखंड सरकार और एनआईए ने 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था। भोर में घेराबंदी, गिरफ्तारी के प्रयास पर फायरिंग 20 सितंबर की भोर में बृजेश गंझू अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल से टेंगरा मोड़ से रामनगर होते हुए मुगलसराय की ओर जा रहा था। सूचना मिलने पर यूपी एसटीएस की टीम ने उसे वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र स्थित लंका मैदान के पास रोकने की कोशिश की। गिरफ्तारी से बचने के लिए बृजेश मोटरसाइकिल से कूद गया और पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में यूपी एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण को भी गोली लगी, हालांकि बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से उनकी जान बच गई। वहीं क्रॉस फायरिंग में गोली लगने से बृजेश गंझू गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 30 लाख रुपये का था इनाम बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता, झारखंड के चतरा जिले के लवलंग थाना क्षेत्र के लूटू का रहने वाला था। बृजेश प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी का कमांडर था, जिसकी तलाश लंबे समय से की जा रही थी। इस पर झारखंड सरकार ने 25 लाख रुपये और एनआईए ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

शिक्षा को लेकर जीतू पटवारी का CM मोहन यादव पर हमला, बोले- ‘800 दिन बचे हैं, काम कीजिए’

इंदौर. मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक हालात को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर जमकर निशाना साधा। पटवारी ने सीएम से सस्ती शिक्षा सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि उनके पास अब सिर्फ 800 दिन बचे हैं, इसलिए वे जनता से जुड़े असली मुद्दों पर काम करें। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि पूरे प्रदेश में छात्रों और अभिभावकों के साथ मिलकर 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 800 दिन बचे हैं, भाजपा नेता ही धक्का मारने में लगे हैं पटवारी ने मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि यादव जी, आपसे विनम्र प्रार्थना है कि सस्ती एजुकेशन आपकी जवाबदारी है। आपके पास केवल 800 दिन बचे हैं और इस बीच भाजपा वाले ही आपको धक्का मारने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को बिना समय बर्बाद किए शिक्षा पर काम करना चाहिए, क्योंकि कुर्सी के ये दिन कब निकल जाएंगे, पता भी नहीं चलेगा। हर जिले में बिना राजनीतिक बैनर के होगा 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश के हर जिले में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम कांग्रेस के बैनर तले नहीं होगा। इसमें अभिभावकों और छात्रों का सीधा सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार अब डरे और छात्रों से जुड़े असली मुद्दों पर काम करना शुरू करें। किसी का अपमान करना उद्देश्य नहीं, मिमिक्री सिर्फ मनोरंजन के लिए हालिया आयोजनों में मिमिक्री को लेकर उठे विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति का अपमान करना या ठेस पहुंचाना नहीं है। उन्होंने कहा कि मंच पर कोई मिमिक्री आर्टिस्ट आता है, तो वह केवल दर्शकों के मनोरंजन के लिए होता है, इसे किसी अन्य रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

अतिथि शिक्षकों के मानदेय का इंतजार खत्म, छत्तीसगढ़ में 18.42 करोड़ रुपये जारी

रायपुर. प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने राशि जारी कर दी है। लोक शिक्षण संचालनालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 25 जिलों में कार्यरत 1,535 अतिथि शिक्षकों के छह माह के मानदेय के लिए 18 करोड़ 42 लाख रुपये का आवंटन किया है। विभागीय आदेश 18 सितंबर को जारी किया गया है। हर शिक्षक को 20 हजार महीना आदेश के मुताबिक अतिथि शिक्षकों को 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। छह महीने के हिसाब से प्रत्येक शिक्षक के लिए 1.20 लाख रुपये की राशि निर्धारित है। जिलों में कार्यरत शिक्षकों की संख्या के आधार पर संबंधित जिला स्तर पर भुगतान के लिए बजट उपलब्ध कराया गया है। बस्तर संभाग के सात जिलों को भी मिला बजट आवंटन में बस्तर संभाग के सभी सात जिलों को शामिल किया गया है। कोंडागांव में 141 अतिथि शिक्षकों के लिए एक करोड़ 69 लाख 20 हजार, बस्तर में 133 शिक्षकों के लिए एक करोड़ 59 लाख 60 हजार और कांकेर में 126 शिक्षकों के लिए एक करोड़ 51 लाख 20 हजार रुपये जारी किए गए हैं। इसी तरह दंतेवाड़ा के 31 शिक्षकों के लिए 37 लाख 20 हजार, सुकमा के 48 के लिए 57 लाख 60 हजार, बीजापुर के 48 के लिए 57 लाख 60 हजार और नारायणपुर के 36 अतिथि शिक्षकों के लिए 43 लाख 20 हजार रुपये का प्रविधान किया गया है। बलरामपुर में सबसे ज्यादा अतिथि शिक्षक जिलावार आंकड़ों में बलरामपुर में 220 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं, जो सूची में सर्वाधिक हैं। इनके छह माह के मानदेय के लिए दो करोड़ 64 लाख रुपये जारी किए गए हैं। इसके बाद सूरजपुर में 130 शिक्षकों के लिए एक करोड़ 56 लाख और सरगुजा में 71 शिक्षकों के लिए 85 लाख 20 हजार रुपये का आवंटन किया गया है। शेष जिलों में भी शिक्षकों की संख्या के अनुसार बजट भेजा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह राशि केवल मानदेय भुगतान के लिए ही उपयोग की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

लोक भवन में लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के 912 चयनित अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री योगी ने सौंपे नियुक्ति पत्र

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो कर नहीं पाए, वे हमेशा बोलेंगे। जिन्होंने अपनी अकर्मण्यता और अक्षमता से उत्तर प्रदेश को बीमारू बनाया, उनके निकम्मेपन और निठल्लेपन को यूपी और देश देख चुका है। ऐसे लोगों को आज यूपी पुलिस या प्रदेश की व्यवस्था पर बोलने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विपक्ष गिनता जाए, सरकार नियुक्तियां देती जाएगी। शनिवार को 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए, रविवार को 912 को दिए जा रहे हैं और अब 22 सितंबर को फिर नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। अगले छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी देने के साथ प्रदेश में हर सप्ताह एक बड़ा भर्ती इवेंट होगा।   मुख्यमंत्री योगी रविवार को लोक भवन में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पुलिस उपनिरीक्षक गोपनीय, पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लिपिक और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लेखा के पदों पर चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री योगी ने सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को यूपी पुलिस का हिस्सा बनने पर बधाई दी।   पारदर्शी चयन शासन के प्रति विश्वास का प्रतीक मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब किसी योग्य अभ्यर्थी का चयन शुचितापूर्ण और पारदर्शी परीक्षा के माध्यम से होता है तो यह केवल उसके परिवार के लिए उपलब्धि नहीं होती, बल्कि शासन के प्रति आम आदमी के विश्वास का भी प्रतीक बनता है। 2017 से पहले भर्ती प्रक्रिया की विसंगतियों के कारण नौजवानों में निराशा और हताशा थी। भाई-भतीजावाद ने पूरे सिस्टम को इस तरह जकड़ रखा था कि पारदर्शिता और शुचिता की कल्पना नहीं की जा सकती थी।   उन्होंने कहा कि भर्ती का विज्ञापन आते ही युवाओं के मन में यह भाव आता था कि बिना सिफारिश और लेनदेन के चयन नहीं हो पाएगा। परीक्षा और चयन प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल खड़े होते थे और पेपर लीक के मामले सामने आते थे। मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि यूपी पुलिस में ऐसी भर्तियां भी हुईं, जिनमें परीक्षा कोई देता था और नियुक्ति पत्र किसी दूसरे को मिलता था। जो अभ्यर्थी आवेदन तक नहीं करते थे, उन्हें नियुक्ति पत्र बांट दिए जाते थे और योग्य अभ्यर्थियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता था।   नियुक्ति से तैनाती तक सिफारिश की जरूरत नहीं मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए गए। पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और शिक्षा से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं में बदलाव किया गया। समूह ग और घ की भर्ती से साक्षात्कार समाप्त किया गया, ताकि योग्य अभ्यर्थी को किसी स्तर पर भेदभाव का सामना न करना पड़े।   उन्होंने कहा कि अब विज्ञापन से लेकर परीक्षा, नियुक्ति पत्र, प्रशिक्षण और जिलों में तैनाती तक किसी अभ्यर्थी को सिफारिश कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। किसी के साथ भेदभाव भी नहीं होगा। हर व्यक्ति को उसकी योग्यता, क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर अवसर मिलेगा।   साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को मिली नियुक्ति मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 के बाद भर्ती प्रक्रिया में किए गए बदलावों का परिणाम है कि साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को उत्तर प्रदेश शासन में सेवा का अवसर मिला है। भर्ती की कई प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं।   उन्होंने कहा कि यूपी बीमारू राज्य की स्थिति से उभरा है और आज देश के उन राज्यों में है, जो खुद को रेवेन्यू सरप्लस कह सकते हैं। नौ-साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हुई है। अब यूपी के नौजवानों और नागरिकों के सामने पहचान का संकट नहीं है। नए निवेश आ रहे हैं और नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।   दंगा और कर्फ्यू वाले यूपी की बदली पहचान मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के लोगों को प्रदेश से बाहर अपनी पहचान छिपानी पड़ती थी। यूपी में अवसर नहीं थे। हर दूसरे दिन दंगे होते थे और महीनों कर्फ्यू रहता था। बरेली, अलीगढ़, मेरठ और मुजफ्फरनगर समेत अलग-अलग हिस्सों में दंगों की स्थिति रहती थी।   उन्होंने कहा कि उस समय माफिया सामान्य नागरिक और व्यापारी ही नहीं, बल्कि प्रशासन, पुलिस और न्यायपालिका से जुड़े लोगों के लिए भी चुनौती बने हुए थे। माफिया का काफिला निकलता था तो दूसरे लोगों के वाहन रोक दिए जाते थे। आज कोई माफिया असलहा लहराते हुए खुली जीप में उपद्रव करने का दुस्साहस नहीं कर सकता।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उपद्रवग्रस्त प्रदेश को उत्सवपूर्ण प्रदेश के रूप में बदला गया है। उत्तर प्रदेश की छवि कर्फ्यू मुक्त और माफिया मुक्त प्रदेश के रूप में बनी है। कुंभ और महाकुंभ से लेकर पर्व-त्योहार, वीवीआईपी दौरे और स्थानीय आयोजन सकुशल संपन्न हो रहे हैं। इस बदलाव में यूपी पुलिस की बड़ी भूमिका है।   अब देश में होती है यूपी पुलिस के मॉडल की चर्चा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले मध्य और पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई जिलों और कस्बों में जिन परिवारों के पास क्षमता थी, वे अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रदेश से बाहर रिश्तेदारों या हॉस्टल में रखते थे। जिनके पास साधन नहीं थे, वे बेटियों को घर बैठाने को मजबूर थे।   उन्होंने कहा कि आज कोई राह चलती बेटी को छेड़ने का दुस्साहस नहीं कर सकता। ऐसा करने वाले को मालूम है कि उसका अंजाम क्या होगा। यूपी के प्रति बदले नजरिए में यूपी पुलिस का बड़ा योगदान है। आज देश में यूपी पुलिस के मॉडल की चर्चा होती है और लोग पूछते हैं कि यूपी में दंगे और उपद्रव क्यों नहीं हो रहे हैं।   पेपर लीक करने वालों के लिए बनाया कठोर कानून मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में यूपी पुलिस के आधे से ज्यादा पद खाली थे। प्रदेश में चार लाख पुलिस बल की आवश्यकता थी, लेकिन दो लाख से भी कम पुलिसकर्मी थे। भर्तियां न्यायालयों में अटकी हुई थीं। सरकार ने भर्ती व्यवस्था में सुधार कर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया।   उन्होंने कहा कि पेपर लीक कराने या भर्ती से जुड़े अवैध धंधे … Read more

सुभासपा प्रमुख बोले- कभी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक तो कभी पंडित-दलित-अहीर बताते हैं पीडीए का मतलब

लखनऊ सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने रविवार को समाजवादी पार्टी के पीडीए नारे को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पीडीए को पूरी तरह ढकोसला बताते हुए कहा कि अखिलेश इसका मतलब अपनी सुविधा के अनुसार बदलते रहते हैं। कभी पीडीए को पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक बताते हैं तो कभी पी से पंडित, डी से दलित और ए से अहीर कहते हैं। कभी ए से अल्पसंख्यक, आधी आबादी तो कभी अगड़ा बता देते हैं।   राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव दलितों से नफरत करते हैं और दलित महापुरुषों की प्रतिमा देखकर उनकी चिढ़ और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि 2012 से 2017 की सपा सरकार के दौरान बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाएं सबसे ज्यादा तोड़ी गईं। जौनपुर, मऊ, सीतापुर और आजमगढ़ समेत कई जिलों में ऐसी घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि आंकड़े उठाकर देख लिए जाएं तो अखिलेश सरकार के दौरान दलितों पर अत्याचार कई गुना बढ़ा था।   आगरा में दलित ग्राम प्रधान की हत्या का किया जिक्र ओम प्रकाश राजभर ने आगरा की एक घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार में एक दलित ग्राम प्रधान को सपाइयों ने पीट-पीटकर मार डाला था। ग्राम प्रधान का कसूर केवल इतना था कि उन्होंने सपा को वोट नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के समय बाबा साहब की प्रतिमाएं तोड़ने से लेकर दलितों पर अत्याचार तक के मामले लगातार सामने आए।   राजभर ने कहा कि आज भी यूपी में दलितों पर अत्याचार के मामले में यादव और मुस्लिम यानी सपा के वोटर ही सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और उनके सैफई के कुनबे की बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर क्या सोच है, यह किसी से छिपी नहीं है।   गेस्ट हाउस कांड को लेकर सपा को घेरा राजभर ने दो जून 1995 के गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय सपाई गुंडे मायावती की हत्या करना चाहते थे। संयोग से वहां भाजपा के नेता पहुंच गए। भाजपा के लोग नहीं होते तो शायद मायावती की हत्या कर दी जाती। किसी तरह उनकी जान बची थी।   उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव आज दलित सम्मान की बात कर रहे हैं, लेकिन उनके शासनकाल में दलित बेटियों के साथ जितना जुर्म हुआ, उसे कौन नहीं जानता। अब वक्त बदल चुका है। योगी सरकार में दलित महापुरुषों को सम्मान मिल रहा है और दलित नायकों को नई पहचान दी जा रही है।  नीला गमछा अखिलेश के गले की फांस: राजभर अखिलेश यादव के नीले गमछे पर तंज कसते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि वह बाबा साहब डॉ. आंबेडकर को आगे करके वोट लेने की सोच रहे हैं, लेकिन यही नीला गमछा उनके गले की फांस है। सिर पर लाल टोपी और गले में नीला गमछा दो जून 1995 की घटना की याद दिलाता है कि गेस्ट हाउस कांड में सपा ने मायावती के साथ क्या किया था।   राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव ने प्रमोशन में आरक्षण खत्म किया। दलित महापुरुषों और बाबा साहब के नाम पर बने पार्कों और जिलों को खत्म करने का काम किया। दलितों के उत्थान और विकास के लिए महापुरुषों के नाम से बनी योजनाओं को भी खत्म किया गया।   महापुरुषों से जुड़े पार्कों के लिए 500 करोड़ ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि योगी सरकार में सभी महापुरुषों का सम्मान सुरक्षित है। दलित महापुरुषों को सम्मान देने के साथ दलित नायकों को नई पहचान मिल रही है। महापुरुषों के नाम पर बने पार्कों में पुरानी हो चुकी प्रतिमाओं को बदलने, बाउंड्री कराने और सौंदर्यीकरण के अन्य कार्यों के लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपये दिए हैं और सभी जगह काम शुरू हो गया है।   उन्होंने कहा कि महापुरुषों को लेकर आज की सरकार जिस सोच के साथ काम कर रही है, ऐसी सोच सत्ता में रहते हुए अखिलेश यादव के मन में पैदा हुई होती तो शायद कुछ कदम आगे बढ़े होते। राजभर ने कहा कि अखिलेश जिस सोच को लेकर चल रहे हैं, उस पर 2027 में एक बार फिर पानी फिर जाएगा।

नवचयनित अभ्यर्थी बोले- न सिफारिश की जरूरत पड़ी, न करना पड़ा कोई लेनदेन

लखनऊ  किसी के माता-पिता ने खाकी पहनने का सपना देखा था तो कोई वर्षों से खुद इस दिन का इंतजार कर रहा था। रविवार को नियुक्ति पत्र हाथ में आया तो नवचयनित अभ्यर्थियों की खुशी छलक पड़ी। अभ्यर्थियों ने कहा कि भर्ती में न सिफारिश की जरूरत पड़ी और न किसी तरह का लेनदेन करना पड़ा। मेहनत और काबिलियत के बूते उन्हें यूपी पुलिस का हिस्सा बनने का मौका मिला।   सहायक उपनिरीक्षक के पद पर चयनित लखनऊ की दर्शना बाजपेई ने कहा कि उन्हें अपनी पढ़ाई पर पूरा भरोसा था। भर्ती प्रक्रिया में कहीं भी लेनदेन या किसी की सहायता लेने की जरूरत नहीं पड़ी। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रही। अब वह पूरी ऊर्जा और ईमानदारी के साथ अपने दायित्व का निर्वहन करेंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में भर्ती व्यवस्था पर प्रसन्नता जताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।   खाकी पहनने का सपना हुआ साकार लखनऊ के संजीव वर्मा ने कहा कि खाकी पहनना उनका सपना था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में यह सपना पूरा हुआ। बिना भेदभाव और रिश्वत के काबिलियत के आधार पर उनका चयन हुआ है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी भर्ती से प्रदेश के युवाओं को अपनी योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी पाने का अवसर मिलेगा और भ्रष्टाचार व रिश्वत से मुक्त होकर काम करने का प्रोत्साहन मिलेगा।   माता-पिता ने देखा था सपना उपनिरीक्षक गोपनीय के पद पर चयनित लखनऊ की रुचि यादव ने कहा कि उनके माता-पिता ने यह सपना देखा था, जिसे पूरा होने का सौभाग्य मिला है। यहां तक पहुंचाने में माता-पिता, भाई-बहन, शिक्षकों और मित्रों का सहयोग रहा। उन्होंने निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री योगी और पुलिस भर्ती बोर्ड के अधिकारियों का धन्यवाद किया।   मेहनत को सही माहौल मिले तो पूरे होते हैं सपने सहायक उपनिरीक्षक लिपिक के पद पर चयनित लखनऊ की स्वाति भट्ट ने कहा कि नियुक्ति पत्र हाथ में लेकर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। जब मेहनत को निष्पक्ष और सही वातावरण मिलता है, तभी सपने पूरे होते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने और अपने परिवार की ओर से धन्यवाद और शुभकामनाएं दीं।   इन अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने सौंपे नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री योगी ने कार्यक्रम में अमेठी के अमित सिंह, बाराबंकी की रिया मौर्या, कानपुर शहर की नीलम निषाद, लखनऊ की दर्शना बाजपेई, वाराणसी के विशाल कुमार गौड़, कानपुर देहात के आलोक कुमार पाल, झांसी के अनुराग खटीक, मैनपुरी के मोहम्मद आमिर, जालौन के सिद्धार्थ सक्सेना, झांसी के आदर्श कुमार जैन, लखीमपुर खीरी के रजत गुप्ता, उन्नाव की अंजू भारती, रायबरेली के अभिषेक सिंह चौहान, महराजगंज के सागर चौरसिया, मेरठ के मनीष यादव, प्रतापगढ़ के विकास कुमार पटेल, बांदा के धीरेन्द्र सिंह और लखनऊ के संजीव वर्मा, सिद्धार्थ श्रीवास्तव व हिमांशु शुक्ला को नियुक्ति पत्र सौंपे।

राजस्थान के 40 हजार परिवारों को मिलेगा PNG कनेक्शन, सरकार ने तय की 30 सितंबर की डेडलाइन

जयपुर  राजस्थान में सीएनजी सुविधा के विस्तार को लेकर सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक प्रदेश में 60 नए सीएनजी स्टेशन शुरू किए जाएंगे। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्य की सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) संस्थाओं के साथ बैठक में इस लक्ष्य को तय समय में पूरा करने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक गैस के नेटवर्क का विस्तार कर अधिक से अधिक परिवारों के साथ औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थानों को भी पाइप्ड नेचुरल गैस से जोड़ा जाना है। मुख्य सचिव ने कहा कि सीजीडी संस्थाएं उन क्षेत्रों में प्राथमिकता से डोमेस्टिक पाइप्ड नेचुरल गैस (डीपीएनजी) कनेक्शन उपलब्ध कराएं, जहां इसके लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित हो चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य 30 सितम्बर तक 40 हजार नए परिवारों को डीपीएनजी सुविधा से जोड़ना है। उन्होंने एलपीजी से डीपीएनजी में शिफ्टिंग के लिए सीजीडी संस्थाओं और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। राजस्थान में सीएनजी नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने की तैयारी है। मुख्य सचिव ने चालू वित्तीय वर्ष में 60 नए सीएनजी स्टेशन शुरू करने का लक्ष्य दिसंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सीजीडी संस्थाओं को समयबद्ध कार्ययोजना बनानी होगी। सरकार का उद्देश्य सीएनजी की उपलब्धता बढ़ाकर प्रदेश में प्राकृतिक गैस आधारित परिवहन सुविधाओं का विस्तार करना है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 23 नए सीएनजी स्टेशन शुरू किए जा चुके हैं। 40 हजार परिवारों को डीपीएनजी से जोड़ने का लक्ष्य सरकार के विशेष फोकस के चलते 30 सितम्बर तक 40 हजार नए परिवारों को डीपीएनजी सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार तीन माह में ही 30 हजार से अधिक नए परिवार डीपीएनजी सेवाओं से जुड़ चुके हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि आधारभूत सुविधायुक्त क्षेत्रों में कनेक्शन देने को प्राथमिकता दी जाए। जिला स्तर पर जिला रसद अधिकारियों को सीजीडी संस्थाओं के साथ समन्वय करने के निर्देश भी दिए गए हैं। औद्योगिक और व्यावसायिक कनेक्शन भी बढ़ेंगे प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सरकार का फोकस केवल घरेलू कनेक्शनों तक सीमित नहीं है। औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थानों को भी पीएनजी नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। राजस्थान स्टेट गैस के प्रबंध निदेशक विनय पाटनी के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 99 नए औद्योगिक और 314 व्यावसायिक पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इससे उद्योगों और कारोबारियों को पाइप्ड गैस सुविधा का लाभ मिलेगा। 13 सीजीडी संस्थाएं 17 क्षेत्रों में कर रहीं काम राज्य में 13 सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाएं 17 जियोग्राफिकल क्षेत्रों में गैस नेटवर्क विकसित कर रही हैं। इन क्षेत्रों में डीपीएनजी, औद्योगिक एवं व्यावसायिक पीएनजी के साथ सीएनजी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मुख्य सचिव ने राजकीय आवासों को भी डीपीएनजी से जोड़ने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक परिवारों को प्राकृतिक गैस से जोड़ने के साथ हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है। घरेलू, औद्योगिक और व्यावसायिक गैस नेटवर्क को गति देने पर जोर विशिष्ट सचिव माइंस नम्रता वृष्णि ने बताया कि विभागीय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग और सीजीडी संस्थाओं को आवश्यक सहयोग दिए जाने से डीपीएनजी कनेक्शनों में तेजी आई है। निदेशक पेट्रोलियम अवधेश सिंह ने भी बैठक में प्रगति की जानकारी दी। सरकार अब सीएनजी स्टेशनों के विस्तार के साथ घरेलू, औद्योगिक और व्यावसायिक गैस नेटवर्क को गति देने पर जोर दे रही है।

अमृतसर बैंक लूट की बड़ी साजिश नाकाम, गार्ड की सूझबूझ से बची 15 लाख की रकम

अमृतसर. दस सितंबर की दोपहर जंडियाली गुरु में यूनियन बैंक में हथियारों के बल लूट करने पहुंचे तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपितों के कब्जे से तेजधार हथियार बरामद किए गए हैं। घटना वाले दिन बैंक के गार्ड की होशियारी और दिलेरी के कारण लूट नहीं हो पाई थी। गार्ड के कारण ही लुटेरे वहां से फरार हुए थे। सीसीटीवी कैमरा ट्रेल के आधार पर की गई जांच के बाद पुलिस ने सभी तीन आरोपितों को रविवार की सुबह गिरफ्तार कर लिया है। पता चला है कि इस गिरोह के तीन और भी सदस्य अभी तक फरार चल रहे है। बता दें 11 सितंबर की दोपहर उक्त आरोपितों ने हथियारों के बल पर यूनियन बैंक जंडियाला गुरु शाखा में लूट की वारदात को अंजाम देने का प्रयास किया था। पता चला है कि लुटेरों को पूरी जानकारी थी कि 10 सिंतबर की सुबह बैंक में पंद्रह लाख रुपये से ज्यादा का कैश पहुंच चुका है।