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मनरेगा साइट पर गिरी बिजली, कांकेर में 2 मजदूरों की दर्दनाक मौत, 5 की हालत बिगड़ी

भानुप्रतापपुर/कांकेर. कांकेर जिले के अंतागढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कलगांव में आकाशीय बिजली गिरने से मनरेगा में काम कर रहे दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं 5 मजदूर घायल हो गए. घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं. जानकारी के अनुसार, गांव में मनरेगा योजना के तहत चल रहे तालाब निर्माण कार्य में लगभग 50 मजदूर लगे हुए थे. इस दौरान अचानक मौसम में बदलाव हुआ और बारिश होने लगी. मजूदरों ने पानी से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े थे. इस दौरान आकाशीय बिजली गिरने से पेड़ के नीचे खड़े उपसरपंच धनराज पटेल के साथ एक अन्य मजदूर की मौके पर मौत हो गई. वहीं हादसे में पांच मजदूर घायल हो गए, जिनमें 3 महिला और 2 पुरुष शामिल हैं. घायल मजदूरों को उपचार के लिए अंतागढ़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है. सुबह-सुबह हुई इस घटना ने पूरे जिले के झकझोर दिया है. घटना के संबंध में कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर ने बताया कि मौके पर भेजे गए अधिकारी स्थिति का जायजा ले रहे हैं. घायल के उचित इलाज की व्यवस्था की है. हमने एंबुलेंस को रवाना कर दिया है. इसके साथ डॉक्टर्स को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं कि घायलों का बेहतर उपचार किया जाए.

बरेली में स्वच्छता नियम होंगे सख्त, खुले में कूड़ा फेंकने पर कटेगा बिजली-पानी कनेक्शन

लखनऊ पूरे देश में स्वच्छता को अभियान बनाया गया है और लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। केंद्र की मोदी और यूपी की योगी सरकारें कूड़ा निस्तारण और साफ-सफाई का अभियान भी चला रही हैं। शहर-शहर को सफाई की रैंकिंग से जोड़ा गया है। इसके बाद भी मुहिम रंग नहीं लाने पर अब सख्ती होने जा रही है। बरेली शहर में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण को सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम प्रशासन ने सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के तहत अब खुले में कूड़ा फेंकने, सार्वजनिक स्थानों पर मलबा डालने या गीले-सूखे कचरे का अलग-अलग निस्तारण नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ अब बिजली और पानी का कनेक्शन तक काटा जाएगा। सूखा-गीला कूड़ा एक साथ होने पर चालान नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि शासन के निर्देशों के तहत प्रत्येक घर और संस्थान को गीला, सूखा, सैनिटरी तथा विशेष श्रेणी के कचरे (ई-वेस्ट) को अलग-अलग रखना अनिवार्य होगा। जांच के दौरान कचरा मिश्रित मिलने पर चालान की कार्रवाई की जाएगी। वहीं होटल, अस्पताल, मॉल और बड़ी आवासीय सोसायटियों को अपने परिसर में ही कचरे का निस्तारण करना होगा। शहर को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया आसान होगी और लैंडफिल पर भार कम पड़ेगा। अधिकारियों ने नागरिकों से नियमों का पालन करने और स्वच्छता अभियान में सहयोग देने की अपील की है। कूड़ा निस्तारण मशीनों का इंस्टॉलेशन शुरू वहीं, शहर में कूड़ा निस्तारण की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सथरापुर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। नगर निगम ने प्लांट के संचालन के लिए तैयारियां और तेज कर दी हैं। मशीनों का इंस्टॉलेशन शुरू हो चुका है और तकनीकी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्लांट के शुरू होते ही प्रतिदिन करीब 500 मीट्रिक टन कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा सकेगा। सीएम योगी दे सकते हैं सौगात नगर निगम अधिकारियों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के संभावित दौरे के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सौगात शहरवासियों को मिल सकती है। पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी का कहना है कि प्लांट संचालन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए इंदौर और गुजरात के शहरों में संचालित कचरा प्रबंधन मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं। वहां की प्रोसेसिंग प्रणाली, तकनीकी व्यवस्था और संचालन प्रक्रिया से जुड़ी रिपोर्टें भी मंगाई जा रही हैं, ताकि बरेली में आधुनिक और प्रभावी व्यवस्था लागू की जा सके स्वच्छ शहर की दिशा में बड़ा कदम प्लांट संचालित होने पर शहर में कूड़े के ढेर और डंपिंग की समस्या में काफी कमी आएगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को भी बढ़ावा मिलेगा।नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि प्लांट शुरू होने के बाद शहर में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण से प्रदूषण कम होगा और स्वच्छ शहर की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

अरुण साव के निर्देश पर ठेकेदार को नोटिस, निरीक्षण में धीमी प्रगति मिलने पर जताई नाराजगी

उप मुख्यमंत्री अरुण साव के निर्देश पर ठेकेदार को नोटिस जारी, निरीक्षण के दौरान काम की धीमी प्रगति पर जताई थी नाराजगी साव ने 6 जून को किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन पर बन रहे ओवरब्रिज की देखी थी प्रगति, लेट-लतीफी पर ठेकेदार और अधिकारियों को लगाई थी फटकार रायपुर.  उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण की धीमी प्रगति पर ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। उप मुख्यमंत्री साव ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान 6 जून को राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर-जगदलपुर मार्ग में किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन के ऊपर बन रहे फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण किया था। उन्होंने निरीक्षण के दौरान काम के पिछड़ने एवं लेट-लतीफी पर ठेकेदार और अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने अनुबंध के अनुसार कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर गहरी नाराजगी जताते हुए ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। बस्तर जिले में केशलूर के पास 69 करोड़ 36 लाख रुपए की लागत से इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता ने निर्माण एजेंसी मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को जारी नोटिस में कहा है कि साइट उपलब्ध होने के बावजूद मैन-पॉवर, मटेरियल और मशीनरी की खराब व्यवस्था के कारण अलग-अलग चरणों में निर्माण के समयबद्ध लक्ष्यों को हासिल नहीं किया जा सका है। कार्यस्थल पर काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे है और तय किए गए माइलस्टोन्स (महत्वपूर्ण पड़ावों) के अनुरूप नहीं है। विभाग द्वारा प्रगति की लगातार समीक्षा कर कार्यों में तेजी लाने के लिए बार-बार निर्देशित और नोटिस जारी करने के बावजूद काम की गति असंतोषजनक है। विभाग ने ठेकेदार को जारी नोटिस में कहा है कि उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री द्वारा विगत 6 जून को साइट के निरीक्षण के दौरान काम की बेहद धीमी प्रगति पर गंभीर चिंता जताई गई थी। उन्होंने अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार ठेकेदार के विरूद्ध तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य अभियंता ने ठेकेदार को नोटिस जारी कर तुरंत पर्याप्त मैन-पॉवर, मशीनरी, सामग्री और अन्य जरूरी संसाधन जुटाकर काम में तेजी लाने तथा प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए तय लक्ष्यों को हासिल करने सभी जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। काम की प्रगति में उल्लेखनीय सुधार नहीं पाए जाने पर विभाग द्वारा अनुबंध के प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

रोजगार मांगने नहीं, रोजगार देने की ओर बढ़ रहे पंजाब के युवा; सरकार दे रही पूरा सहयोग : भगवंत मान

चंडीगढ़  वर्तमान समय में पंजाब नवीन विचारों, विशिष्ट सोच और उद्यमी युवाओं द्वारा लीक से हटकर पहलकदमियां करने के कारण विकास की नई कहानी रच रहा है, जिसकी वजह से राज्य देश भर में सबसे पसंदीदा स्टार्टअप स्थल के रूप में उभर रहा है जहां युवा अपने विचारों को व्यवसाय और रोजगार के अवसरों में बदल रहे हैं। इस सोच की पैरवी करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज 31 स्टार्टअप्स और उनके संस्थापकों को 1.07 करोड़ रुपए की सीड ग्रांट वितरित की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सफल उद्यमियों की अगली पीढ़ी न सिर्फ पंजाब से आए बल्कि पंजाब में अपनी कंपनियां भी स्थापित करे, जिससे राज्य के अंदर ही नौकरियों और कमाई के अवसर पैदा हों। स्टार्टअप को पंजाब के भविष्य के आर्थिक विकास का मुख्य स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है कि किसी भी शानदार उद्यम को वित्तीय सहायता की कमी के कारण छोड़ा न जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पंजाब स्टार्टअप और इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ के तहत सीड ग्रांट को 3 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया गया है, जिसमें 7 स्टार्टअप्स को 5-5 लाख रुपये और 24 स्टार्टअप्स को 3-3 लाख रुपए की ग्रांट मिल रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये उद्यम रोजगार के हजारों अवसर पैदा करेंगे और युवाओं में नौकरियों की तलाश में विदेश जाने के रुझान को कम करने में मदद करेंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि मुफ्त बिजली, किसानों को दिन में बिजली सप्लाई और कई अन्य सुधारों जैसी पहलकदमियों से यह पता चलता है कि कैसे नए विचार लोगों को सीधा लाभ पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि उद्यमिता और नवाचार में मिल रहे भरपूर समर्थन के साथ पंजाब, भारत का स्टार्टअप हब बनने के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ रहा है। स्टार्टअप्स को सीड ग्रांट वितरित करने संबंधी समारोह के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज पंजाब के उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, खासकर हमारे युवा उद्यमियों के लिए जो नए विचारों के साथ अपना कारोबारी सफर शुरू कर रहे हैं। 31 स्टार्टअप्स को 1.07 करोड़ रुपए की सीड ग्रांट दी जा रही है। 7 स्टार्टअप्स को 5-5 लाख रुपए की ग्रांट मिल रही है, जबकि 24 स्टार्टअप्स को 3-3 लाख रुपए की ग्रांट मिल रही है। ये युवा उद्यमी अपने विचारों के माध्यम से सपनों को साकार कर रहे हैं और वे इस सहयोग के हकदार हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आम आदमी पार्टी (आप) खुद एक ऐसे विचार से पैदा हुई थी जब देश में परिवारवाद की राजनीति का दबदबा था और आम आदमी को अनदेखा कर दिया गया था। कई पहलुओं से ‘आप’ एक स्टार्टअप भी थी जिसने झाड़ू के अपने प्रतीक के साथ राजनीतिक व्यवस्था को साफ किया। 2022 के विधानसभा चुनाव में पंजाब के लोगों ने 7 पूर्व मुख्यमंत्रियों और उनके परिवारों को बाहर का रास्ता दिखाया और ईमानदार सरकार को मौका दिया। उस फैसले ने पंजाब को बदल दिया है और इसे देश का एक अग्रणी राज्य बना दिया है। पंजाबियों की उद्यमी भावना को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाबी अपनी मेहनत, जज्बे और उद्यम के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। उसी भावना से प्रेरित होकर हमारे युवा नए उद्यम शुरू कर रहे हैं और नए अवसर पैदा कर रहे हैं। वे सिर्फ कारोबार नहीं चला रहे, वे पंजाब के भविष्य को नया रूप दे रहे हैं। पंजाबी मूल के सफल उद्यमियों के उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और दुनिया भर में बहुत सी सफल कंपनियां पंजाबियों द्वारा स्थापित या सह-स्थापित की गई हैं। जोमैटो, ओला और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां इसकी उदाहरण हैं कि कैसे पंजाबियों ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। पंजाब हमेशा उद्यमियों की धरती रहा है। पंजाबी जहां भी जाते हैं, वे कारोबार स्थापित करते हैं, रोजगार पैदा करते हैं और अपनी अलग छाप छोड़ते हैं। हमारा लक्ष्य है कि सफल संस्थापकों की अगली पीढ़ी न सिर्फ पंजाब से आए बल्कि पंजाब में अपनी कंपनियां भी स्थापित करे। इनोवेशन इको-सिस्टम (नवीनतम प्रणाली) की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सीड मनी ( स्टार्टअप के लिए सहायता राशि) प्रदान करने का उद्देश्य स्टार्टअप्स पर आने वाले शुरुआती बोझ को कम करना और उन्हें अपने विचारों को हकीकत में बदलने तथा आगे बढ़ने का भरोसा देना है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को नवाचार के केंद्र बनना चाहिए जहां विचार क्लासरूम से परे उत्पाद, सेवाएं, कंपनियां और समाधान की नींव बनते हैं। अपने विदेशी दौरों को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दक्षिण कोरिया के पैंगयो टेक्नो वैली और नीदरलैंड्स के वर्ल्ड हॉर्टी सेंटर में उन्होंने देखा कि कैसे एक योजनाबद्ध इनोवेशन इको-सिस्टम पूरे क्षेत्र को बदल सकता है। इस मॉडल से पता लगता है कि जब इको-सिस्टम को सही ढंग से डिज़ाइन किया जाता है तो विचार विश्व स्तरीय कंपनियों की नींव बन सकते हैं। इसी तरह नीदरलैंड्स में वर्ल्ड हॉर्टी सेंटर के अपने दौरे के दौरान मैंने देखा कि कैसे इनोवेशन नई तकनीकों की टेस्टिंग, लागूकरण और व्यावसायीकरण के माध्यम से खेतीबाड़ी और बागबानी को बदल सकती है। पंजाब की कृषि क्षमता के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में भविष्य का विकास उच्च-मूल्य वाली खेतीबाड़ी, एग्री-टेक, फूड प्रोसेसिंग, सुरक्षित खेती, कोल्ड चेन और एग्री-लॉजिस्टिक्स के माध्यम से होना चाहिए। हमारे किसान हमेशा प्रगतिशील रहे हैं और पंजाब सरकार उन्हें आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और नए कारोबारी मॉडलों तक पहुंच प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये स्टार्टअप्स रोजगार के अवसर पैदा करके और युवाओं में भरोसा बहाल करके पंजाब में सार्थक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हर उद्यमी पंजाब का ब्रांड एंबेसडर बने। आप जहां भी जाएं, पंजाब का नाम रोशन करें और दुनिया को बताएं कि पंजाब नवाचार के लिए तैयार है, पंजाब स्टार्टअप के लिए तैयार है और पंजाब भविष्य के लिए तैयार है। पंजाब सरकार की ओर से पूर्ण समर्थन का भरोसा देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह … Read more

मौसम का रौद्र रूप, कई जिलों में पेड़-बिजली खंभे गिरे, ब्लैकआउट जैसे हालात

हिसार  हरियाणा में मौसम ने अचानक रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है। भीषण गर्मी और तपती लू के बीच प्रदेश के कई जिलों में 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आंधी और तेज वर्षा से फतेहाबाद सहित राज्य के कई हिस्सों में सैकड़ों पेड़, बिजली के खंभे और दुकानों के टीन शेड व होर्डिंग्स उखड़ गए, जिससे गुरुग्राम सहित कई इलाकों में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई है। हांसी में करीब एक घंटे तक चली तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि भी हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग के अनुसार पंजाब के ऊपर चक्रवाती सिस्टम सक्रिय होने से यह स्थिति बनी है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार से 13 जून तक पूरे प्रदेश में भारी वर्षा, गरज-चमक और ओलावृष्टि का ‘आरेंज अलर्ट’ जारी किया है। वीरवार सुबह से ही मौसम के मिजाज बदले-बदले नजर आए। सरकार की ओर से मोबाइल पर इमरजेंसी अलर्ट जारी मौसम के इस रूप को देख हरियाणा सरकार व आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों के मोबाइल फोन पर ‘इमरजेंसी अलर्ट’ (चेतावनी संदेश) भेजा। इस संदेश में पंचकूला, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और पानीपत जिलों के निवासियों को घरों में रहने और तेज तूफान व ओलावृष्टि के प्रति सावधान रहने की सलाह दी है। प्रारंभिक सुस्ती के बाद मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। गति में तेजी आई है, लेकिन बारिश की स्थिति अच्छी नहीं है। जून में अभी तक देश में औसतन 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस स्थिति को अलनीनो से जोड़कर देखा जा रहा है, जो प्रशांत महासागर में तेजी से उभर रहा है। यूपी और बिहार में कई लोगों की मौत पश्चिम विक्षोभ से उत्तर भारत में वीरवार को अचानक मौसम ने करवट ली। उत्तर प्रदेश और बिहार में तेज आंधी-पानी और वज्रपात से 16 लोगों की मौत हो गई। जिनमें बिहार में 10 लोगों की जान गई, जबकि एक ही परिवार के चार लोगों समेत 10 झुलस गए। वहीं, कई जगह वर्षा से जलभराव हुआ।  

फीस से लेकर शिक्षकों तक का ब्योरा ऑनलाइन करना होगा, पटना में स्कूलों पर सख्ती

 पटना जिले के निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग के वेबसाइट पर सभी आवश्यक जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसके लिए अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित की गई है। जिला शिक्षा कार्यालय को शिकायत मिली है कि कई स्कूल नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। स्कूलों की वेबसाइट से अभिभावकों को पूरी जानकारी नहीं मिल पाती है। जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से सभी स्कूलों को वेबसाइट पर शिक्षकों की संख्या, उनकी योग्यता, शैक्षणिक संरचना, बुनियादी सुविधा और अन्य आवश्यक जानकारियों को अनिवार्य रूप से अपडेट करने को कहा गया है। यदि कोई स्कूल 30 जून तक अपनी वेबसाइट पर अनिवार्य जानकारी अपलोड नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा सकती है। स्कूलों को फीस स्ट्रक्चर और बसों की संख्या का देना होगा विवरण निजी स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की कुल संख्या और प्रति कक्षा विद्यार्थी के अनुसार शिक्षकों की संख्या का विवरणी वेबसाइट पर अपलोड करना है। इसके साथ ही निर्धारित शिक्षण शुल्क के बारे में भी जानकारी देनी होगी। निजी स्कूलों द्वारा परिवहन का विवरण भी वेबसाइट पर देना होगा। जिसमें स्कूलों में चल रहे वैन या मिनी बस व बड़ी बसों की कुल संख्या साझा करनी है। इसके अलावा निजी स्कूलों बोर्ड से मिली मान्यता और इसकी लेटेस्ट अपडेट भी वेबसाइट पर साझा करना होगा। एक जुलाई से 31 जुलाई तक चलेगा जांच अभियान जिले में संचालित निजी स्कूलों की जांच के लिए जुलाई माह से सघन अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से एक से 31 जुलाई तक विशेष जांच अभियान चलाई जाएगी। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बिहार राज्य के बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली लागू है। अधिकृत अधिकारियों को नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ स्कूली बच्चों की आधार और अपार डिटेल को भी बारीकी से जांच करने को कहा गया है। जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेज दिया गया है।

ग्रेनेड केस में पुलिस को सफलता, दो आरोपी दबोचे गए; पिस्टल और नशीला पदार्थ भी मिला

अमृतसर  ग्रेनेड बरामदगी मामले की जांच के दौरान अमृतसर देहात पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने पहले गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों के दो अन्य साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के कब्जे से छह पिस्तौल और करीब तीन किलो हेरोइन बरामद की गई है। बरामदगी के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बरामद की गई पिस्तौलें पंजाब में सक्रिय गैंगस्टरों तक पहुंचाई जानी थीं। पुलिस को आशंका है कि आरोपियों का संबंध हथियार और नशा तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क से हो सकता है। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। दो साथियों से मिला था ग्रेनेड गौरतलब है कि कुछ समय पहले पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार किया था। उस गिरफ्तारी के बाद से ही जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई थीं। ताजा गिरफ्तारी को उसी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस का मानना है कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। ग्रेनेड के इस्तेमाल की जांच जारी हालांकि अब तक जांच एजेंसियां यह स्पष्ट नहीं कर पाई हैं कि बरामद किए गए ग्रेनेडों का इस्तेमाल कहां किया जाना था। यह भी रहस्य बना हुआ है कि किन पुलिस इमारतों या अन्य संवेदनशील ठिकानों को संभावित निशाना बनाने की योजना तैयार की गई थी। इस संबंध में सुरक्षा एजेंसियां अलग-अलग पहलुओं पर जांच कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और उनके मोबाइल फोन, संपर्कों तथा आर्थिक लेनदेन की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हथियार और नशे की खेप कहां से लाई गई तथा इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।  

CM नायब सैनी और अमित शाह की मुलाकात, हरियाणा से जुड़े अहम मामलों पर हुई विस्तृत बातचीत

चंडीगढ़. नई दिल्ली में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में हिस्सा लेने के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। करीब आधे घंटे की मुलाकात के दौरान पंजाब में अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव की तैयारी तथा हरियाणा में संगठन के बदलाव को लेकर चर्चा हुई। बताया जाता है कि केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई हरियाणा के सीएम की बातचीत के दौरान पंजाब ही केंद्र में रहा। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने गृहमंत्री को पंजाब के अब तक किए गए दौरों के बारे में फीड बैक दिया। साथ ही राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ हो रही मुलाकातों पर भी बातचीत की। पंजाब के किसानों व आम लोगों को आ रही परेशानियों से नायब सैनी ने केंद्रीय गृह मंत्री को अवगत कराया। नायब सैनी ने कहा कि पंजाब के लोग केंद्र की योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, क्योंकि कई योजनाएं पंजाब लागू नहीं करता है, जबकि वे हरियाणा की भाजपा सरकार की योजनाओं से बहुत अधिक प्रभावित हैं। नायब सिंह सैनी ने केंद्रीय गृह मंत्री को पंजाब की चुनावी रणनीति पर भी अपनी रिपोर्ट पेश की। यह भी बताया कि संगठन के बड़े नेता भी पंजाब का दौरा करना आरंभ करेंगे। मुख्यमंत्री पंजाब को लेकर लगातार सक्रिय हैं। वे माह में तीन से चार बार वहां पार्टी की ओर से होने वाली जनसभाओं के साथ-साथ धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं। शुक्रवार को वह एक बार फिर से पंजाब के राजपुरा जा रहे हैं। इससे पहले इसी सप्ताह उन्हों ने धुरी में जनसभा की थी। मुख्यमंत्री ने हरियाणा सरकार के साल 2047 के विजन प्रारूप पर भी विस्तार से चर्चा की। अमित शाह को बताया गया कि सिलसिलेवार चुनावी वादों को पूरा किया जा रहा है। हरियाणा सरकार द्वारा बनाए जा चुके बोर्ड एवं निगमों के चेयरमैनों की पूरी रिपोर्ट देने के साथ ही भविष्य में बनाए जाने वाले चेयरमैनों के नामों की भी मंजूरी ली गई है।

रजबाहा टूटने से गुरदासपुर में बाढ़ जैसे हालात, खेत डूबे, दर्जनों गांवों में पानी का संकट

गुरदासपुर. अप्परबारी दोआब नहर से निकलने वाला रानिया रजबाहा गुरदासपुर के कलानौर के विर्क गांव के निकट टूट जाने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। रजबाहा टूटने के कारण आसपास के सैकड़ों एकड़ कृषि क्षेत्र में पानी फैल गया, जबकि माइनर नंबर एक, दो और तीन के अंतर्गत आने वाले दर्जनों गांवों में नहरी पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो गई है। घटना के बाद किसानों में चिंता का माहौल है और वे जल्द मरम्मत कार्य शुरू किए जाने की मांग कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार गुरुवार रात को विर्क और अठवाल गांवों के बीच रजबाहा अचानक टूट गया। बताया जा रहा है कि टूटने वाले स्थान पर करीब 25 फुट चौड़ी दरार बन गई, जिससे तेज बहाव के साथ पानी आसपास के खेतों में फैलने लगा। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में पानी कृषि भूमि में जमा हो गया और कई खेत जलमग्न हो गए। सिंचाई व्यवस्था हुई प्रभावित स्थानीय किसानों ने बताया कि रजबाहा टूटने से सिंचाई व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है। माइनर नंबर एक, दो और तीन के अधीन आने वाले अनेक गांवों तक नहरी पानी की आपूर्ति बंद हो गई है। इससे धान समेत अन्य फसलों की सिंचाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द मरम्मत नहीं हुई तो खेती कार्य प्रभावित हो सकता है। घटना की सूचना मिलने के बाद किसानों ने नहर विभाग को जानकारी दी। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि नहर तंत्र में आई इस खराबी को जल्द दूर किया जाना चाहिए ताकि खेतों में फैले पानी को नियंत्रित किया जा सके और प्रभावित गांवों को फिर से पानी उपलब्ध कराया जा सके। विभाग हल निकालने में जुटी इस संबंध में नहर विभाग के उपमंडल अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि उन्हें रजबाहा टूटने की सूचना मिल चुकी है। विभागीय टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के बाद टूटे हुए हिस्से को भरने और मरम्मत का कार्य तत्काल शुरू किया जाएगा। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कर नहरी पानी की आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जाएगा। वहीं किसान उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन शीघ्र कार्रवाई कर नुकसान को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाएगा। फिलहाल विभागीय टीम मौके पर पहुंचने की तैयारी में जुटी हुई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

100 किमी/घंटा की हवाओं ने मचाई तबाही, बरेली में बिजली-पानी सप्लाई ठप

बरेली भीषण गर्मी के बीच यूपी में आंधी-पानी ने कहर बरपाया हुआ है। 100 की स्पीड से चल रही हवाओं ने तबाही मचाई है। अकेले यूपी के बरेली में आंधी से 419 खंभे टूट गए और 23 ट्रांसफार्मर खराब हो गए हैं। बिगड़े मौसम ने जिले की बिजली व्यवस्था को पूरी तरह बेपटरी कर दिया। शहर से लेकर गांव तक बिजली की लाइनें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। हालात ऐसे रहे कि बिजली निगम के अधिकारी और कर्मचारी 24 घंटे बीत जाने के बाद भी आपूर्ति पूरी तरह बहाल नहीं कर सके। बिजली संकट का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पेयजल संकट, कारोबार, उद्योग और लोगों की दिनचर्या पर भी गहरा असर पड़ा। आंधी से ग्रामीण क्षेत्रों में 325 बिजली पोल और शहरी क्षेत्रों में 94 पोल क्षतिग्रस्त हो गए। ग्रामीण क्षेत्र के 18 और शहर के पांच ट्रांसफार्मर भी खराब हो गए। पेड़ गिरने से कई जगह हाईटेंशन लाइनें टूट गईं, जिससे पूरे जिले की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। बुधवार देर रात गुल हुई बिजली के कारण गुरुवार सुबह तक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश हिस्से अंधेरे में डूबे रहे। सुबह 10 बजे के बाद एक-एक कर बिजलीघरों की आपूर्ति बहाल की गई, लेकिन देर रात तक कई मोहल्लों और गांवों में बिजली नहीं पहुंच सकी। बिजली न होने से इनवर्टर जवाब दे गए और मोबाइल फोन बंद होने लगे। गर्मी और उमस के बीच लोगों को रातभर जागकर समय बिताना पड़ा। पेयजल संकट भी गहरा गया, क्योंकि नगर निगम और जलकल विभाग के ट्यूबवेल बिजली न होने के कारण बंद रहे। 154 पेड़ गिरे, यातायात भी प्रभावित आंधी ने शहर की रफ्तार थाम दी। आंधी के चलते शहर के विभिन्न इलाकों में करीब 154 पेड़ और बड़ी-बड़ी शाखाएं गिर गईं, जिससे कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हो गया। बिजली लाइनों पर पेड़ गिरने से कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति भी बाधित रही। हालात सामान्य करने के लिए नगर निगम का पूरा अमला रात से ही सड़कों पर उतर आया और गुरुवार शाम तक राहत एवं बचाव कार्य जारी रहा। राहत में जुटा प्रशासनिक अमला आपात स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम ने बड़े स्तर पर संसाधन लगाए। नगर निगम की ओर से 150 कर्मचारियों, 8 बुलडोजर, 10 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 40 छोटे मालवाहक वाहनों और 6 इंजीनियरों की टीम को शहर के चारों जोन में तैनात किया गया। टीमों ने रातभर अभियान चलाकर सड़कों पर गिरे पेड़ों, शाखाओं और मलबे को हटाने का कार्य किया। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार प्राथमिकता उन मार्गों को दी गई, जहां यातायात पूरी तरह बाधित हो गया था। कई इलाकों में पेड़ गिरने से वाहन फंस गए। बिजली निगम और नगर निगम ने साथ मिलकर संभाली कमान आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, मुख्य अभियंता और अधिशासी अभियंता लगातार शहर का निरीक्षण करते रहे। अधिकारियों ने विभिन्न प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत कार्यों की निगरानी की और कर्मचारियों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए। नगर निगम और बिजली विभाग की संयुक्त टीमों ने भी कई स्थानों पर पहुंचकर बिजली लाइनों पर गिरे पेड़ों को हटाया, ताकि विद्युत आपूर्ति जल्द बहाल की जा सके। हालांकि कई इलाकों में घंटों तक बिजली बाधित रही। आपदा प्रबंधन की खुली पोल मानसून से पहले आई आंधी ने शहर की आपदा प्रबंधन तैयारियों की पोल खोल दी। कई स्थानों पर पुराने और जर्जर पेड़ गिरने से लोगों में दहशत का माहौल रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कमजोर पेड़ों की छंटाई और सर्वे किया जाता तो कई घटनाओं को रोका जा सकता था। अब नगर निगम ऐसे पेड़ों की सूची तैयार करने में जुट गया है, जो भविष्य में खतरा बन सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि संभावित खतरनाक पेड़ों की पहचान कर उनकी छंटाई और हटाने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि मानसून के दौरान किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। नगर आय़ुक्त संजीव कुमार मौर्य के अनुसार आंधी के तुरंत बाद सभी जोन में टीमें सक्रिय कर दी गई थीं। प्राथमिकता सड़कें खुलवाने और जनसुविधाएं बहाल करने की रही। अधिकांश मार्गों को साफ करा दिया गया है और शेष स्थानों पर भी कार्य जारी है।