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एमपी बोर्ड 12वीं द्वितीय परीक्षा का रिजल्ट घोषित, रोल नंबर से तुरंत देखें अपना परिणाम

भोपाल  MPBSE MP Board Second Exam Result 2026: एमपी बोर्ड 12वीं सेकेंड एग्जाम का रिजल्ट जारी कर दिया है। परिणाम आधिकारिक वेबसाइट mpbse.mponline.gov.in और mpresults.nic.in पर देख सकते हैं। छात्र रोल नंबर और एप्लीकेशन नंबर दर्ज कर अंक देख सकते हैं। मंडल ने विद्यार्थियों से केवल आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करने और अप्रमाणित लिंक से बचने की अपील की है। कक्षा 12वीं द्वितीय बोर्ड परीक्षा 7 से 26 मई 2026 के बीच आयोजित हुई थी। छात्र वेबसाइट से मार्कशीट की प्रति डाउनलोड कर सकेंगे, जबकि ऑरिजनल मार्कशीट स्कूल से मिलेगी। पिछले साल सेकेंड चांस 12वीं परीक्षा में कुल 57.60 प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए थे। आपको बता दें कि एमपी बोर्ड 12वीं मुख्य परीक्षा में 1 लाख 99 हजार छात्र फेल हो गए थे। अब इनमें ज्यादातर विद्यार्थियों ने सेकेंड चांस एग्जाम दिया होगा। MPBSE MP Board Second Exam Result 2026: ऐसे चेक कर सकते है एमपी बोर्ड के नतीजे – सबसे पहले एमपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट mpbse.nic.in पर जाएं। – HSC/SSC रिजल्ट के लिए ‘MPBSE सप्लीमेंट्री परीक्षा परिणाम या सेकेंड एग्जाम रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें। – एमपी बोर्ड रिजल्ट 2026 लॉगिन पेज स्क्रीन पर दिखाई देगा। – उस पेज पर अपना रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें। – सभी विवरण दर्ज करने के बाद परिणाम देखें बटन पर क्लिक करें। – एमपी बोर्ड रिजल्ट 2026 आपको स्क्रीन पर दिखाई देगा। सेकेंड चांस एग्जाम में कौन कौन बैठा इस बार से सप्लीमेंट्री परीक्षा को खत्म कर दिया गया है। सेकेंड चांस एग्जाम में फेल और पास दोनों तरह के विद्यार्थी शामिल हुए। नियम के मुताबिक छात्र अब सिर्फ फेल विषयों के लिए ही नहीं, बल्कि बेहतर अंक लाने के लिए भी किसी विषय में दोबारा परीक्षा दे सकते हैं। मेन एग्जाम में अनुत्तीर्ण, अनुपस्थित तथा अंक सुधार के इच्छुक विद्यार्थी शामिल हुए। दोनों अवसरों में से बेहतर परिणाम को अंतिम रूप से मान्य किया जाएगा। कैसा रहा था मुख्य परीक्षा का रिजल्ट बता दें कि साल 2026 में एमपी बोर्ड 10वीं 12वीं की मुख्य परीक्षा का परिणाम 15 अप्रैल को जारी किया गया था। एमपी बोर्ड 10वीं रिजल्ट 73.42 फीसदी रहा। एमपी बोर्ड 12वीं रिजल्ट 76.01 फीसदी रहा। एमपी बोर्ड 10वीं में पन्ना की प्रतिभा सिंह ने 500 में से 499 अंक लाकर टॉप किया। वहीं एमपी बोर्ड 12वीं में भोपाल की खुशी राय और चांदनी विश्वकर्मा ने मेरिट में पहला स्थान हासिल किया है। दोनों ने 500 में से 494 अंक हासिल किए हैं। जिलों में झाबुआ पहले और अनूपपुर दूसरे स्थान पर रहा। 10वीं में शासकीय स्कूलों का रिजल्ट 76.80 फीसदी रहा और प्राइवेट स्कूलों का रिजल्ट 68.64 फीसदी रहा सरकारी स्कूलों का रिजल्ट प्राइवेट से 8 फीसदी अच्छा रहा। कब हुई थी परीक्षा एमपीबीएसई कक्षा 12वीं दूसरी बोर्ड परीक्षा का आयोजन मध्य प्रदेश के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों में 7 मई से लेकर 25 मई, 2026 के बीच किया गया था। इसके साथ ही छात्र ऑफिशियल वेबसाइट से केवल मार्कशीट की प्रति डाउनलोड कर सकते हैं। ओरिजनल मार्कशीट स्कूल द्वारा ही प्रदान की जाएगी। छात्र कुछ दिनों बाद अपने स्कूल जाकर कक्षा 12वीं परीक्षा की मार्कशीट प्राप्त कर सकेंगे।

‘बारह साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के’ संदेश के साथ सक्ती में आयोजित हुई मैराथन

सक्ती. कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के निर्देशन में ‘बारह साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के’ थीम के तहत जिला प्रशासन तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग सक्ती द्वारा आज जिला मुख्यालय सक्ती में मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों में स्वास्थ्य, फिटनेस और जनभागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। मैराथन दौड़ का शुभारंभ सुबह 6:30 बजे सेजेस स्कूल सक्ती से हुआ। पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर एवं जिला पंचायत सीईओ वाशु जैन की उपस्थिति में बड़ी संख्या में अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियो और नगरवासियों ने उत्साहपूर्वक दौड़ में भाग लिया। निर्धारित मार्ग के अनुसार मैराथन सेजेस स्कूल से प्रारंभ होकर कचहरी चौक, गौरव पथ, बुधवारी बाजार, राजापारा चौक, शनि मंदिर चौक एवं मालखरौदा बस स्टैंड होते हुए पुनः सेजेस स्कूल पहुंची, जहां इसका समापन हुआ। कार्यक्रम के दौरान सेजेस स्कूल परिसर में पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर, जिला पंचायत सीईओ वाशु जैन सहित विभिन्न अधिकारियों ने क्रिकेट खेलकर खेल गतिविधियों को बढ़ावा दिया तथा युवाओं और नागरिकों को नियमित रूप से खेलों से जुड़ने का संदेश दिया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर बीरेंद्र लकड़ा, अपर कलेक्टर बालेश्वर राम, जिला खेल अधिकारी हरि पटेल सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि अधिकारी-कर्मचारी एवं नगरवासी उपस्थित रहे।

कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा पर सख्ती, फीस से लेकर फायर सेफ्टी तक बनेंगे नियम

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली के कोचिंग सेंटर्स को चलाने के लिए सरकार नए नियम-कानून बनाने जा रही है। नई नीति के ड्राफ्ट को तैयार करने के लिए सरकार ने नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है। राजधानी में चल रहे कोचिंग संस्थानों के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने शुरू भी कर दी है। दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार कोचिंग संस्थानों के मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और स्टूडेंट्स सुरक्षित हों, इसके लिए गाइडलाइंस तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि देशभर से बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स दिल्ली में कोचिंग के लिए आते है, इसलिए दिल्ली इस क्षेत्र में व्यापक नियम-कानून लागू करने वाला अग्रणी राज्य बनने जा रहा है। गुरुवार को शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने इसके लिए एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई गुरुवार को शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने इसके लिए एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई। इस बैठक में नगर निगम, दिल्ली फायर सर्विस, हायर एजुकेशन डायरेक्टोरेट, दिल्ली पुलिस, श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग और शहरी विकास विभाग सहित विभिन्न एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में फैसला लिया गया कि एक मल्टी-डिसिप्लिनरी कमिटी कोचिंग संस्थानों के लिए दिशानिर्देश तैयार करेगी। इनमें फीस स्ट्रक्चर, स्टूडेंट सेफ्टी और वेलफेयर, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परामर्श व्यवस्था, बिल्डिंग और बुनियादी ढांचे के सुरक्षा मानक, फायर सेफ्टी और इमरजेंसी के लिए तैयारियां, शिक्षकों और कर्मचारियों के वेलफेयर और काम की परिस्थितियों को सिस्टमैटिक करना शामिल है इसके अलावा कोचिंग कर्मचारियों और स्टूडेंट्स के लिए ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम, नियमित निरीक्षण और अनुपालन की निगरानी की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित ढांचा कोचिंग संस्थानों में सुरक्षित, पारदर्शी, जवाबदेह और स्टूडेंट फ्रेंडली एनवायरमेंट सुनिश्चित करेंगे। क्यों जरूरी है नियम ? 2024 में ओल्ड राजेद्र नगर में एक कोचिंग सेटर के बेसमेंट में पानी भरने से हुई तीन स्टूडेंट्स की मौत के बाद तमाम कोचिंग सेंटर्स में सुरक्षा के लिए आसपास ड्रेनेज सिस्टम, तारों के जंजाल, कोचिंग सेंटर्स की मनमानी की ओर भी ध्यान दिलाया गया था। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने जस्टिस (सेवानिवृत्त) आर.सी. गौबा की अध्यक्षता में हाई लेवल कमिटी कमियों की पहचान की और कड़े रेगुलेशंस और निगरानी का सुझाव दिया था। दिल्ली मे करीब 600 कोचिंग सेंटर्स है, जो रजिस्टर्ड है और कर्मशल तौर पर चलते है। बाकी कम संख्या वाले कोचिंग सेंटर्स की संख्या काफी ज्यादा है

छत्तीसगढ़ में निवेशकों का भरोसा बढ़ा, 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव; सरकार ने बिछाया रेड कारपेट

छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए बिछा रेड कारपेट, 9,580 करोड़ रुपये के मिले प्रस्ताव इन्वेस्टर कनेक्ट में हैदराबाद के निवेशकों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का न्योता आईटी, टेक्सटाइल, डेटा सेंटर, फार्मा के क्षेत्र में खुली 7,800 रोजगार की राह  रायपुर  छत्तीसगढ़ ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट’ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की सात प्रमुख कंपनियों ने 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए हैं, जिनसे 7,800 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने देश के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा विकसित भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में छत्तीसगढ़ तेजी से उभर रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए ‘रेड कारपेट’ बिछा हुआ है।  कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन सहित दक्षिण भारत के कई बड़े उद्योगपति, निवेशक और कारोबारी प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ-साथ जापान और दक्षिण कोरिया में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज निवेश के लिए देश के सबसे बेहतर राज्यों में से एक बनकर उभर रहा है। राज्य में उद्योगों के लिए आसान प्रक्रियाएं, सिंगल विंडो व्यवस्था, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध हैं। उन्होंने निवेशकों को छत्तीसगढ़ में उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हैदराबाद ने आईटी, फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ भी इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और दोनों राज्यों के उद्योगपति एवं उद्यमी मिलकर नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मध्य भारत में स्थित छत्तीसगढ़ देश का सबसे उपयुक्त लॉजिस्टिक हब बनने की क्षमता रखता है। छत्तीसगढ़ सात राज्यों से घिरा हुआ है और 60 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। रेलवे नेटवर्क, भारतमाला परियोजना, एयर कार्गो सुविधाओं तथा खनिज संसाधनों की उपलब्धता उद्योगों के लिए इसे अत्यंत अनुकूल बनाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे प्रदेश देश के प्रमुख पावर हब के रूप में उभर रहा है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सात प्रमुख कंपनियों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए ‘इन्विटेशन टू इन्वेस्ट’ (ऑफर लेटर) प्रदान किए। इनमें डेटा सेंटर, सीमेंट, सेमीकंडक्टर एवं जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल और डेयरी प्रसंस्करण क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं। सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव हाइपरनेक्स्ट डाटा सेंटर लिमिटेड की ओर से प्राप्त हुआ, जिसने छत्तीसगढ़ में भारत का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करने के लिए ₹4,200 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया। इस परियोजना से राज्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और छत्तीसगढ़ डेटा सेंटर क्षेत्र का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा। इस परियोजना से लगभग 250 रोजगार सृजित होंगे।  फीग्रेड एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने सीमेंट क्षेत्र में 2,912 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 4,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं निवाई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने ₹1,000 करोड़ के निवेश से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर असेंबली से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव दिया। इससे राज्य में आधुनिक तकनीकी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा एवं लगभग 200 रोजगार सृजित होंगे। सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र की एसजी मार्ट लिमिटेड ने 700 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 450 लोगों को रोजगार मिल सकता है।  सरवणा मिल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ₹528 करोड़ के निवेश से अत्याधुनिक टेक्सटाइल और परिधान निर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इस परियोजना से लगभग 2,500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की काबरा ड्रग्स ने 200 करोड़ रुपये तथा डेयरी क्षेत्र की दिनशॉज़ डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने 40 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन दोनों परियोजनाओं से क्रमशः लगभग 250 और 150 रोजगार सृजित होंगे। हैदराबाद दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने देश की कई अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। इनमें गूगल इंडिया, आईबीएम, पॉलीकैब इंडिया, पेज इंडस्ट्रीज और डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल रहीं। बैठकों में छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और राज्य सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा स्वामी नारायण गुरुकुल संगठन के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर  रायपुर के टाटीबंध में 650 बिस्तरों वाले चैरिटेबल अस्पताल की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा की। इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में आईटी, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, एयरोस्पेस एवं रक्षा, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के उद्योगों में निवेश के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। निवेशकों ने इन क्षेत्रों में विशेष रुचि दिखाई। कार्यक्रम में सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, इन्वेस्टमेंट कमिश्नर सुऋतु सेन, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार, उद्योग विभाग के संचालक प्रभात मलिक एवं अन्य अधिकारीगण शामिल थे।

CM भगवंत मान की कैबिनेट बैठक में कई अहम निर्णय, युवाओं के लिए नौकरियां और छात्रों को बड़ी राहत

चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब मंत्रिमंडल ने बुधवार को कई अहम फैसलों को मंजूरी दे दी है. इन फैसलों का उद्देश्य नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट) की दोबारा होने वाली परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत देना, नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना, जनता के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और प्रदेश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार को आसान बनाने) में और सुधार करना है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान लिए गए इन फैसलों में नीट परीक्षार्थियों और उनके साथ एक अटेंडेंट (सहायक) के लिए मुफ्त बस सफर, 1,013 लेक्चरारों और 156 जूनियर इंजीनियरों (जे.ई.) की भर्ती, पटियाला और जालंधर में गीले कचरे पर आधारित कंप्रेस्ड बायोगैस प्रोजेक्टों की स्थापना और पंजाब में निवेश व औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति, 2026’ में अहम संशोधन शामिल हैं।  इस बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया, “मंत्रिमंडल ने विद्यार्थी कल्याण, शिक्षा, रोजगार के अवसर पैदा करने, बुनियादी ढांचे के विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, प्रशासनिक सुधारों और औद्योगिक विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी है, जो जनता की भलाई और आर्थिक प्रगति के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हैं.” नीट (अंडर ग्रेजुएट) की दोबारा परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों को बड़ी राहत देते हुए कैबिनेट ने उम्मीदवारों और उनके साथ जाने वाले एक अटेंडेंट के लिए पंजाब और चंडीगढ़ में परीक्षा केंद्रों तक मुफ्त बस सफर को मंजूरी दी है. उल्लेखनीय है कि 3 मई, 2026 को हुई नीट की परीक्षा रद्द कर दी गई थी और अब यह परीक्षा 21 जून, 2026 के लिए पुनर्निर्धारित की गई है।  विद्यार्थियों और उनके अटेंडेंट की सुविधा के लिए पंजाब रोडवेज, पनबस और पी.आर.टी.सी. की बसें 20, 21 और 22 जून को पंजाब और चंडीगढ़ के परीक्षा केंद्रों तक आने-जाने के लिए मुफ्त सफर की सुविधा प्रदान करेंगी. विद्यार्थियों को इस सुविधा का लाभ लेने के लिए सिर्फ अपना एडमिट कार्ड दिखाना होगा और उनसे कोई किराया नहीं लिया जाएगा. मुफ्त सफर सुविधा का वित्तीय बोझ ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा उठाया जाएगा और वित्त विभाग द्वारा इसकी भरपाई की जाएगी. यह पहल विद्यार्थी कल्याण, शिक्षा को बढ़ावा देने और किफायती व सुलभ जनता परिवहन सेवाओं को सुनिश्चित करने के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।  लेक्चरार कैडर के 1,013 पद भरे जाएंगे; आयु सीमा में पांच साल की छूट को मंजूरी मंत्रिमंडल ने एजुकेशन रिक्रूटमेंट डायरेक्टोरेट के माध्यम से लेक्चरार कैडर (ग्रुप-बी) के बैकलॉग और नए सृजित पदों सहित 1,013 मंजूरशुदा रिक्त पदों को भरने की भी मंजूरी दे दी. कैबिनेट ने स्कूल शिक्षा विभाग में लेक्चरार कैडर के पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए ऊपरी आयु सीमा में पांच साल की एकमुश्त छूट भी दी है. इस कदम का उद्देश्य नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना और सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है।  लोक निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर के 156 पदों को मंजूरी एक और अहम फैसला लेते हुए, मंत्रिमंडल ने लोक निर्माण विभाग में 156 जूनियर इंजीनियरों की भर्ती को मंजूरी दे दी है, जिसमें जूनियर इंजीनियर (सिविल) के 127 पद और जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) के 29 पद शामिल हैं. इस भर्ती से विभाग का कामकाज और सुचारू बनेगा और प्रभावी योजना, निगरानी और कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी. ये सभी पद पंजाब अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड (पी.एस.एस.एस.बी.) द्वारा सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाएंगे।  पटियाला और जालंधर में गीले कचरे पर आधारित सी.बी.जी. प्रोजेक्ट को मंजूरी कचरे के स्थायी प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने नगर निगम पटियाला और नगर निगम जालंधर में 100 टी.पी.डी. की क्षमता वाले गीले कचरे पर आधारित कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्रोजेक्टों को मंजूरी दे दी है और ये प्रोजेक्ट नामांकन के आधार पर एच.पी.सी.एल. रीन्यूएबल एंड ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एच.पी.आर.जी.ई.) को सौंपे जाएंगे. प्रदेश भर की 166 शहरी स्थानीय इकाइयों में प्रतिदिन लगभग 4,000 टन म्यूनिसिपल ठोस कचरा पैदा होता है. इस प्रोजेक्ट के तहत गीले कचरे की वैज्ञानिक ढंग से प्रोसेसिंग की जाएगी जिससे कचरे के नीचे दबी जगहें साफ हो सकेंगी, शहरी सफाई और जनता के स्वास्थ्य में सुधार होगा, नवीकरणीय ऊर्जा और जैविक खाद पैदा होगी, मीथेन का उत्सर्जन घटेगा और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।  सीनियरिटी से संबंधित विवादों को सुलझाने के लिए पंजाब सिविल सेवाएं नियमों में संशोधन मंत्रिमंडल ने पंजाब सिविल सर्विसेज (जनरल एंड कॉमन कंडीशंस ऑफ सर्विस) रूल्स-1994 के नियम-8 में संशोधन को भी मंजूरी दे दी है. यह संशोधन उन स्थितियों का समाधान करता है जहां एक जैसी योग्यता प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों की जन्म तिथि भी एक जैसी होती है. ऐसे मामलों में अंतर-सीनियरिटी अब मेरिट के आधार पर निर्धारित की जाएगी, जिसमें संबंधित पद के लिए निर्धारित न्यूनतम शैक्षिक योग्यता में प्राप्त अंतिम ग्रेडिंग या प्रतिशतता शामिल होगी।  निवेश को बढ़ावा देने के लिए ‘औद्योगिक और व्यापार विकास नीति-2026’ में संशोधन पंजाब के औद्योगिक माहौल को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण फैसले में मंत्रिमंडल ने ‘औद्योगिक और व्यापार विकास नीति-2026’ और पंजाब उद्योग क्रांति पहल के तहत विभिन्न सेक्टोरल नीतियों में संशोधनों को मंजूरी दी है. इन संशोधनों में वित्तीय रियायतें सिर्फ मौजूदा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एम.एस.एम.ई.) की बजाय मौजूदा औद्योगिक इकाइयों पर लागू होने का प्रावधान किया गया है. ये औद्योगिक क्लस्टरों, अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं और पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों से संबंधित प्रावधानों को भी मजबूत करती हैं।  पहली 50 योग्य इकाइयों के लिए 10 लाख रुपये का एकमुश्त प्रोत्साहन में अब न्यूनतम गोल्ड लेवल जेड.ई.डी. सर्टिफिकेशन या उससे अधिक सर्टिफिकेशन प्राप्त करने वाले उद्योग शामिल होंगे, जबकि सेक्टोरल नीतियों में समग्र प्रोत्साहन सीमाओं से संबंधित प्रावधानों को संकेतात्मक और गैर-कानूनी माना जाएगा. इन सुधारों से निवेश को बढ़ावा मिलने, औद्योगिक विकास को मजबूती मिलने और पंजाब के देश में सबसे आकर्षक निवेश स्थान के रूप में उभरने की उम्मीद है। 

थोक अपशिष्ट उत्पादकों पर सख्ती, सीपीसीबी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन जरूरी

पटना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का केंद्रीय पोर्टल शुरू होने के बाद नगर निगम ने शहर के सभी थोक अपशिष्ट उत्पादकों की पहचान और उनका ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कराने के लिए अभियान शुरू किया है। इसी कड़ी में गुरुवार को नगर निगम मुख्यालय के सभागार में चिह्नित थोक अपशिष्ट उत्पादकों के लिए विशेष प्रशिक्षण-सह-हैंडहोल्डिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य संस्थानों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों, कानूनी प्रावधानों और आनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देना था, ताकि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम में शहर के प्रमुख संस्थानों और प्रतिष्ठानों ने भाग लिया। इनमें आइजीआइएमएस, रूबन अस्पताल, ताज होटल, एवीआर, विंडसर, चाणक्य होटल, पारस अस्पताल, सिटी सेंटर माल और कुर्जी फैमिली अस्पताल समेत करीब 35 बड़े संस्थान शामिल रहे। विशेषज्ञों ने सीपीसीबी के केंद्रीकृत पोर्टल पर पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया का लाइव डेमो दिया। साथ ही प्रतिभागियों के तकनीकी और प्रक्रियागत सवालों का समाधान भी किया गया। प्रशिक्षण सत्र का संचालन जर्मनी की सरकारी विकास सहयोग संस्था जीआइजेड के विशेषज्ञ और सीपीसीबी के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के परामर्शी बी सौरभ ने किया। ऐसे सभी प्रतिष्ठान, भवन या परिसर, जहां प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है, अथवा प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे अधिक जल का उपभोग किया जाता है, या जिनका कुल निर्मित क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर अथवा उससे अधिक है, उन्हें थोक अपशिष्ट उत्पादक की श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में बड़े आवासीय अपार्टमेंट, शॉपिंग माल, वाणिज्यिक परिसर, होटल, अस्पताल, मैरिज हाल, शैक्षणिक संस्थान तथा अन्य बड़े प्रतिष्ठान शामिल हैं। नए नियमों में कचरा प्रबंधन से संबंधित जवाबदेही सीधे तौर पर इन्हीं पर तय की गई है। ऐसे करें पंजीकरण निश्शुल्क पंजीकरण के लिए लिंक https://uatswm.cpcb.gov.in/register का उपयोग किया जा सकता है। ऑनलाइन पंजीकरण के उपरांत नगर निगम की टीम संबंधित स्थल का निरीक्षण कर पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई सूचनाओं एवं आंकड़ों का सत्यापन करेगी। पंजीकरण नहीं कराने पर होगी कार्रवाई ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली के तहत पंजीकरण नहीं कराने वाले थोक अपशिष्ट उत्पादकों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में जुर्माना लगाया जा सकता है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में स्थानीय निकायों द्वारा प्रति उल्लंघन 5,000 से 25,000 रुपये तक का जुर्माना निर्धारित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त लगातार नियमों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कचरा संग्रहण सेवा बंद करने, वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ करने तथा अन्य दंडात्मक कदम उठाने का भी प्रविधान है।

नशामुक्त समाज की दिशा में पहल, ग्रामीणों को अफीम खेती से दूर रहने की अपील

 खूंटी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशानुसार पुलिस अधीक्षक खूंटी ऋषभ गर्ग के नेतृत्व में खूंटी जिला अंतर्गत सभी थाना क्षेत्र में अवैध अफीम खेती के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाया गया. ग्रामीणों को नशा मुक्त समाज के निर्माण के उद्देश्य से थाना क्षेत्र अंतर्गत अवैध अफीम की खेती की रोकथाम और खत्म करने को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया. अफीम की खेती पर पुलिस का जागरूकता अभियान अभियान के दौरान थाना प्रभारी और पुलिस पदाधिकारियों द्वारा विभिन्न गांवों में जनसंपर्क स्थापित कर ग्रामीणों को अफीम की अवैध खेती से होने वाले कानूनी, सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणामों की विस्तृत जानकारी दी गई. ग्रामीणों को बताया गया कि अफीम की खेती करना एक गंभीर अपराध है और इसमें संलिप्त पाए जाने पर एनडीपीएस अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाती है. पूर्व आरोपियों ने अभियान में लिया हिस्सा विशेष रूप से ऐसे व्यक्तियों को भी जागरूकता अभियान में शामिल किया गया जो पूर्व में एनडीपीएस कांडों में आरोपपत्रित रह चुके हैं और वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं. उक्त व्यक्तियों ने भी अभियान में भाग लेते हुए ग्रामीणों से अवैध अफीम की खेती नहीं करने और कानून का पालन करने की अपील की. उनके द्वारा अपने अनुभव साझा करते हुए बताया गया कि अवैध मादक पदार्थों से संबंधित गतिविधियों में संलिप्तता व्यक्ति, परिवार और समाज के लिए हानिकारक है. अवैध अफीम खेती न करने की पुलिस की अपील पुलिस टीम द्वारा ग्रामीणों से अपील की गई कि वे अपने खेतों में किसी भी प्रकार की अवैध अफीम की खेती न करें और कहीं भी ऐसी खेती की सूचना मिलने पर इसकी जानकारी तत्काल स्थानीय थाना या पुलिस प्रशासन को दें. साथ ही किसानों को वैकल्पिक और लाभकारी फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया गया. अभियान के दौरान ग्रामीणों ने अवैध अफीम खेती के विरुद्ध पुलिस प्रशासन को पूर्ण सहयोग देने और नशामुक्त एवं अपराधमुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया.

आंधी-तूफान से थमा जनजीवन, फतेहाबाद में भारी तबाही, कई इलाकों में ब्लैकआउट

हिसार. हरियाणा में मौसम ने अचानक रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है। भीषण गर्मी और तपती लू के बीच प्रदेश के कई जिलों में 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आंधी और तेज वर्षा से फतेहाबाद सहित राज्य के कई हिस्सों में सैकड़ों पेड़, बिजली के खंभे और दुकानों के टीन शेड व होर्डिंग्स उखड़ गए, जिससे गुरुग्राम सहित कई इलाकों में ब्लैकआउट है। हांसी में करीब एक घंटे तक चली तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि भी हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग के अनुसार पंजाब के ऊपर चक्रवाती सिस्टम सक्रिय होने से यह स्थिति बनी है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार से 13 जून तक पूरे प्रदेश में भारी वर्षा, गरज-चमक और ओलावृष्टि का ‘आरेंज अलर्ट’ जारी किया है। वीरवार सुबह से ही मौसम के मिजाज बदले-बदले नजर आए। सरकार की ओर से मोबाइल पर इमरजेंसी अलर्ट जारी मौसम के इस रूप को देख हरियाणा सरकार व आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों के मोबाइल फोन पर ‘इमरजेंसी अलर्ट’ (चेतावनी संदेश) भेजा। इस संदेश में पंचकूला, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और पानीपत जिलों के निवासियों को घरों में रहने और तेज तूफान व ओलावृष्टि के प्रति सावधान रहने की सलाह दी है। प्रारंभिक सुस्ती के बाद मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। गति में तेजी आई है, लेकिन बारिश की स्थिति अच्छी नहीं है। जून में अभी तक देश में औसतन 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस स्थिति को अलनीनो से जोड़कर देखा जा रहा है, जो प्रशांत महासागर में तेजी से उभर रहा है। यूपी और बिहार में कई लोगों की मौत पश्चिम विक्षोभ से उत्तर भारत में वीरवार को अचानक मौसम ने करवट ली। उत्तर प्रदेश और बिहार में तेज आंधी-पानी और वज्रपात से 16 लोगों की मौत हो गई। जिनमें बिहार में 10 लोगों की जान गई, जबकि एक ही परिवार के चार लोगों समेत 10 झुलस गए। वहीं, कई जगह वर्षा से जलभराव हुआ।

आग की लपटों से दहला जालंधर, गोदाम में लगी भीषण आग, समय रहते पाया गया काबू

जालंधर. जालंधर के जेपी नगर क्षेत्र में मंगलवार देर रात उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एक गोदाम में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में आसमान में धुएं के घने गुबार दिखाई देने लगे। आग की लपटें और धुआं दूर-दूर तक नजर आने से आसपास के लोगों में दहशत फैल गई और कई परिवार एहतियात के तौर पर अपने घरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के समय तेज हवाएं चल रही थीं, जिसके कारण आग ने तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते गोदाम के भीतर रखा सामान आग की चपेट में आने लगा। स्थिति को गंभीर होता देख स्थानीय लोगों ने तुरंत दमकल विभाग और संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। दमकल कर्मियों ने बिना समय गंवाए आग बुझाने का अभियान शुरू कर दिया। आग की तीव्रता को देखते हुए विभाग ने अतिरिक्त संसाधनों का भी इस्तेमाल किया। एक घंटे बाद आग पर पाया गया काबू करीब एक घंटे की लगातार मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। समय रहते आग पर नियंत्रण मिलने से आसपास के मकानों और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचने से बचा लिया गया। दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही सबसे पहले सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी गई। किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए बिजली विभाग से संपर्क कर संबंधित क्षेत्र की बिजली सप्लाई तत्काल बंद करवाई गई। इससे करंट लगने या शार्ट सर्किट से आग और फैलने जैसी आशंकाओं को रोका जा सका। जांच के दौरान पता चला कि जिस भवन में आग लगी थी, वहां कोई परिवार नहीं रहता था। भवन का इस्तेमाल गोदाम के रूप में किया जा रहा था। राहत की बात यह रही कि आग लगने के समय अंदर कोई मौजूद नहीं था। इसी कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। शार्ट सर्किट माना जा रहा आग का कारण हालांकि आग से गोदाम के अंदर रखे सामान को नुकसान पहुंचने की आशंका है, लेकिन नुकसान का सही आकलन अभी नहीं किया जा सका है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शार्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि अधिकारी सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रहे हैं। फिलहाल आग पूरी तरह बुझा दी गई है और संबंधित विभाग घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटे हुए हैं। स्थानीय लोगों ने भी समय पर पहुंचकर राहत कार्य करने के लिए दमकल विभाग की सराहना की है।

हौसलों की उड़ान: संघर्षों से लड़कर बनीं ‘लखपति दीदी’ कांति साहू, अब चार सफल कारोबार की मालिक

हौसलों की उड़ान: संघर्षों को मात देकर 'लखपति दीदी' बनीं कांति साहू दोना-पत्तल से कारोबार शुरू कर चार व्यवसायों का कर रही हैं सफल संचालन गांव की महिलाओं के लिए पेश की मिसाल रायपुर, स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर श्लखपति दीदीश् बन रही हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। ऐसी कई महिलाओं ने प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं और छोटी पूंजी की मदद से  स्वरोजगार अपनाकर अपनी तकदीर बदली है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत चल रहा लखपति दीदी अभियान छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है। इसका सबसे सटीक और जीवंत उदाहरण बनी हैं बैकुण्ठपुर विकासखंड के ग्राम तलवापारा की रहने वाली श्रीमती कांति साहू। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच कांति ने न सिर्फ अपनी किस्मत बदली, बल्कि आज वे गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। समूह से जुड़ाव और 4 लाख की वित्तीय मदद          एक सामान्य कृषक परिवार से ताल्लुक रखने वाली कांति साहू हमेशा से खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं, लेकिन पूंजी के अभाव में उनका यह सपना दबा हुआ था। करीब तीन साल पहले वह गांव की महिलाओं के साथ मिलकर शारदा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह में आने के बाद उन्हें बचत और व्यावसायिक बारीकियों की समझ मिली। इसके बाद बिहान योजना के तहत बैंक लिंकेज, एसवीईपी योजना और मुद्रा ऋण के माध्यम से उन्हें करीब 4 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस पूंजी ने उनके सपनों को पंख दे दिए। एक नहीं, शुरू किए कई व्यवसाय          कांति दीदी ने जोखिम उठाते हुए किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय विविधता को चुना। उन्होंने एक साथ कई आजीविका गतिविधियों की शुरुआत की। दोना-पत्तल निर्माण इकाई, धान कृषि बीज केंद्र, मैचिंग सेंटर (कपड़ा व्यवसाय), सिलाई केंद्र, पति का मिला मजबूत साथ कांति साहू बताती हैं कि इस पूरे सफर में उनके पति महेन्द्र साहू हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे। शुरुआती चुनौतियों को मात देने में पति-पत्नी की साझा मेहनत और समर्पण का बड़ा योगदान रहा। सालाना आय 3 लाख के पार           आज कांति साहू के सभी व्यवसाय सफलतापूर्वक चल रहे हैं। वर्तमान में इन व्यवसायों से हर महीने 1 से 1.5 लाख रुपये तक का टर्नओवर (कारोबार) हो रहा है, जिसमें से वे 30 से 35 हजार रुपये का शुद्ध मासिक लाभ कमा रही हैं। इस तरह उनकी वार्षिक शुद्ध आय 3 लाख रुपये से अधिक हो गई है, जिससे उन्होंने आधिकारिक तौर पर श्लखपति दीदीश् की श्रेणी में अपनी जगह बना ली है। महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल           आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ ही कांति का सामाजिक आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वे न केवल अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर रही हैं, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखा रही हैं। कांति साहू की यह सफलता साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और अवसर मिले, तो वे समाज में महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल कायम कर सकती हैं।