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निगम-मंडलों में नियुक्तियों की तैयारी तेज, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण होंगे अहम

भोपाल   मध्यप्रदेश में ओबीसी आयोग के अध्यक्ष पद पर रामकृष्ण कुसमारिया की नियुक्ति के बाद अब निगम-मंडल, बोर्ड, आयोग और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच संभावित नामों को लेकर विस्तृत चर्चा हो चुकी है। इन नामों की सूची तैयार कर अनुमोदन के लिए केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी गई है। अनुमति मिलते ही नियुक्तियों के आदेश जारी किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नामों को अंतिम रूप दिया है। इसमें पूर्व मंत्री, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद तथा विभिन्न जातीय समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रभावशाली चेहरों को शामिल किया गया है। फिलहाल राज्य में निगम-मंडल, बोर्ड और आयोगों के लगभग तीन दर्जन से अधिक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने के लिए यह कवायद की जा रही है। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर फोकस  सरकार की मंशा है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से सभी वर्गों और क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिले, जिससे आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में पार्टी को राजनीतिक लाभ मिल सके। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकसभा चुनाव से पहले 45 निगम-मंडलों और बोर्डों में की गई पूर्ववर्ती नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। तब से अब तक इन संस्थाओं में कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है। 

इंदिरा सागर-ओंकारेश्वर डैम के गेट खुलने की तैयारी, निचले इलाकों के लोग रहें सतर्क

 खंडवा  नर्मदा घाटी के उपरी क्षेत्रों में हो रही वर्षा और बरगी तथा तवा बांध के गेट खुलने से जिले के इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के गेट रविवार सुबह खोले जाएगें। इस मानसून सीजन में बांधों के गेट पहली बार खुलेंगे। शनिवार को बांध के जलाशय का जलस्तर 258.41 मीटर और ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर 194.72 मीटर है। आगामी 12 से 24 घंटे में जलस्तर की स्थिति को देखते हुए बांधों के गेट खोले जाने की संभावना को देखते हुए एनएचडीसी बांध प्रबंधन के नर्मदा के किनारे और निचले क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया है। दोनों बांधों के पावर हाउस से सभी टरबाइन चलाकर बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इससे भी नर्मदा नदी में 1800 से 2000 क्यूमेक्स पानी का प्रवाह होने से जलस्तर बढ़ गया है। भारी बारिश से बढ़ रहा जल स्तर इंदिरा सागर बांध के ऊपरी नर्मदा कछार में भारी वर्षा के बाद नर्मदा नदी में जल का अत्याधिक प्रवाह हो रहा है। शनिवार को प्रातः 11 बजे की स्थिति में तवा बांध से 3173 क्यूमेक्स और बरगी बांध द्वारा 1338 क्यूमेक्स जल राशि छोड़ी जा रही है तथा दोपहर एक बजे बाद इसे 3177 क्यूमेक्स कर दिया गया है। इसके फलस्वरूप इंदिरा सागर जलाशय में कुल आंकलित जल आवक लगभग 7500 क्यूमेक्स संभावित है। इंदिरा सागर परियोजना प्रमुख अजीत कुमार ने बताया कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए और अपस्ट्रीम मे अतिवृष्टि की स्थिति में अगले 24 से 48 घंटे में इंदिरा सागर पावर स्टेशन के बांध के रेडियल गेटों का संचालन कर अतिरिक्त जल राशि को छोड़े जाने की संभावना है। बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ के प्रभारी ने बताया कि इंदिरा सागर बांध के गेट 27 जुलाई को सुबह चार बजे तथा ओंकारेश्वर सागर बांध के गेट सुबह छह बजे खोले जाने की संभावना है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सूचना जारी की गई है बांध के डाउनस्ट्रीम में जन सामान्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचना जारी की है। इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के गेटों की संख्या का निर्धारण कर पावर स्टेशन बांध के रेडियल गेटों से होने वाले जल प्रवाह की मात्रा के संबंध में सूचना जारी की जाएगी। ओंकारेश्वर बांध परियोजना प्रमुख धीरेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि इंदिरा सागर बांध से पानी की आवक को देखते हुए बांध के गेट कितने और किस ऊंचाई तक खोले जाएगी इसकी संख्या तय की जाएगी।

इलाज और रिसर्च को मिलेगा नया आयाम: AIIMS भोपाल में शुरू हुई 3D गैलरी की तैयारी

 भोपाल  भारत के मेडिकल इनोवेशन में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए एम्स भोपाल देश की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बनाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम न केवल मरीजों के इलाज को बेहतर बनाएगा, बल्कि मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के लिए पढ़ाई और सर्जरी प्लानिंग को भी अत्याधुनिक बना देगा। एम्स भोपाल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। संस्थान ने साल 2024 में एक हाईटेक 'कम्प्यूटेशनल थ्रीडी मॉडलिंग एंड प्रिंटिंग लैब' की स्थापना की थी, जो अब देशभर में चर्चित हो चुकी है। इस लैब की सबसे बड़ी खासियत है – पालीजेट डिजिटल एनाटॉमी प्रिंटर, हाई-पावर कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेयर, जिनकी मदद से डॉक्टर मरीज के शरीर का हूबहू थ्रीडी मॉडल तैयार कर सकते हैं। इस थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल सर्जरी से पहले केस की गहराई से समझ, ऑपरेशन की प्लानिंग, मेडिकल स्टूडेंट्स को रियल-लाइफ प्रैक्टिस और मरीजों को उनकी बीमारी को विजुअली समझाने के लिए किया जा रहा है। अब एम्स भोपाल भारत की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बना रहा है, जिसमें विभिन्न जटिल बीमारियों के मॉडल रखे जाएंगे। यह गैलरी डॉक्टरों, छात्रों और आम नागरिकों को शरीर की संरचना और बीमारियों की समझ विकसित करने में मदद करेगी। लैब से अब तक देश-विदेश के विशेषज्ञों का एक अंतरराष्ट्रीय सिम्पोजियम भी हो चुका है, जिसमें मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझा काम करने पर सहमति बनी थी। अब एम्स इस लैब के जरिए दो नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कर रहा है, जिनमें से एक मैनिट भोपाल के साथ संयुक्त रूप से डिजाइन और मेडिकल मॉडलिंग पर आधारित होगा। भविष्य में पीएचडी की सुविधा भी मेडिकल और इंजीनियरिंग छात्रों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। लैब की प्रमुख खूबियां     डॉक्टर ऑपरेशन से पहले मरीज के अंगों का थ्रीडी मॉडल देखकर सर्जरी की योजना बना सकते हैं।     मेडिकल स्टूडेंट्स को रियलिस्टिक अनुभव के साथ पढ़ाई करने का मौका।     मरीजों को अपनी बीमारी विजुअल मॉडल की मदद से आसानी से समझाई जा सकती है।     डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच इंटरेक्टिव सहयोग की शुरुआत। भविष्य की योजनाएं     बायोमैकेनिक्स: शरीर की हलचलों का डिजिटल विश्लेषण।     वर्चुअल एनाटॉमी और सर्जरी सिमुलेशन को आसान बनाना।     फिनाइट एलिमेंट एनालिसिस जैसे रिसर्च टूल्स पर गहराई से काम। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. डॉ. अजय सिंह का कहना है कि यह लैब इलाज, शिक्षा और शोध तीनों में नई दिशा दे रही है। भारत की पहली थ्रीडी मॉडल गैलरी बनना एक ऐतिहासिक कदम है जो भविष्य की मेडिकल ट्रेनिंग को पूरी तरह बदल देगा।  

इलाज और रिसर्च को मिलेगा नया आयाम: AIIMS भोपाल में शुरू हुई 3D गैलरी की तैयारी

 भोपाल  भारत के मेडिकल इनोवेशन में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए एम्स भोपाल देश की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बनाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम न केवल मरीजों के इलाज को बेहतर बनाएगा, बल्कि मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के लिए पढ़ाई और सर्जरी प्लानिंग को भी अत्याधुनिक बना देगा। एम्स भोपाल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। संस्थान ने साल 2024 में एक हाईटेक 'कम्प्यूटेशनल थ्रीडी मॉडलिंग एंड प्रिंटिंग लैब' की स्थापना की थी, जो अब देशभर में चर्चित हो चुकी है। इस लैब की सबसे बड़ी खासियत है – पालीजेट डिजिटल एनाटॉमी प्रिंटर, हाई-पावर कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेयर, जिनकी मदद से डॉक्टर मरीज के शरीर का हूबहू थ्रीडी मॉडल तैयार कर सकते हैं। इस थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल सर्जरी से पहले केस की गहराई से समझ, ऑपरेशन की प्लानिंग, मेडिकल स्टूडेंट्स को रियल-लाइफ प्रैक्टिस और मरीजों को उनकी बीमारी को विजुअली समझाने के लिए किया जा रहा है। अब एम्स भोपाल भारत की पहली रोगी-विशिष्ट थ्रीडी मॉडल गैलरी बना रहा है, जिसमें विभिन्न जटिल बीमारियों के मॉडल रखे जाएंगे। यह गैलरी डॉक्टरों, छात्रों और आम नागरिकों को शरीर की संरचना और बीमारियों की समझ विकसित करने में मदद करेगी। लैब से अब तक देश-विदेश के विशेषज्ञों का एक अंतरराष्ट्रीय सिम्पोजियम भी हो चुका है, जिसमें मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझा काम करने पर सहमति बनी थी। अब एम्स इस लैब के जरिए दो नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कर रहा है, जिनमें से एक मैनिट भोपाल के साथ संयुक्त रूप से डिजाइन और मेडिकल मॉडलिंग पर आधारित होगा। भविष्य में पीएचडी की सुविधा भी मेडिकल और इंजीनियरिंग छात्रों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। लैब की प्रमुख खूबियां     डॉक्टर ऑपरेशन से पहले मरीज के अंगों का थ्रीडी मॉडल देखकर सर्जरी की योजना बना सकते हैं।     मेडिकल स्टूडेंट्स को रियलिस्टिक अनुभव के साथ पढ़ाई करने का मौका।     मरीजों को अपनी बीमारी विजुअल मॉडल की मदद से आसानी से समझाई जा सकती है।     डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच इंटरेक्टिव सहयोग की शुरुआत। भविष्य की योजनाएं     बायोमैकेनिक्स: शरीर की हलचलों का डिजिटल विश्लेषण।     वर्चुअल एनाटॉमी और सर्जरी सिमुलेशन को आसान बनाना।     फिनाइट एलिमेंट एनालिसिस जैसे रिसर्च टूल्स पर गहराई से काम। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. डॉ. अजय सिंह का कहना है कि यह लैब इलाज, शिक्षा और शोध तीनों में नई दिशा दे रही है। भारत की पहली थ्रीडी मॉडल गैलरी बनना एक ऐतिहासिक कदम है जो भविष्य की मेडिकल ट्रेनिंग को पूरी तरह बदल देगा।  

OBC मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा मायावती ने, बोलीं- भरोसे के लायक नहीं रही पार्टी

लखनऊ  बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस ओबीसी समाज की विश्वासपात्र पार्टी नहीं है। कांग्रेस के दिल में कुछ है जुबान पर कुछ है। उन्होंने कहा कि एनडीए का भी ओबीसी के प्रति यही हाल है। मायावती के बयान को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान के संदर्भ में देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि सत्ता में रहते हुए जाति जनगणना न करवाना कांग्रेस की गलती थी। आगे उन्होंने ये भी कहा था कि जो काम ओबीसी के लिए अब तक नहीं कर पाया उसे दोगुनी स्पीड से करूंगा। मायावती ने बयान दिया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा यह स्वीकार करना कि देश के विशाल आबादी वाले अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) समाज के लोगों की राजनीतिक व आर्थिक आशा, आकांक्षा व आरक्षण सहित उन्हें उनका संवैधानिक हक़ दिलाने के मामलों में कांग्रेस पार्टी खरी व विश्वासपात्र नहीं रही है कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह दिल में कुछ व जुबान पर कुछ और जैसी स्वार्थ की राजनीति ज्यादा लगती है।  वास्तव में उनका यह बयान उसी तरह से जगजाहिर है जैसाकि देश के करोड़ों शोषित, वंचित व उपेक्षित एससी/एसटी समाज के प्रति कांग्रेस पार्टी का ऐसा ही दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण रवैया लगातार रहा है और जिस कारण ही इन वर्गों के लोगों को फिर अन्ततः अपने आत्मसम्मान व स्वाभिमान तथा अपने पैरों पर खड़े होने की ललक के कारण अलग से अपनी पार्टी बहुजन समाज पार्टी बनानी पड़ी है। कुल मिलाकर इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी यूपी सहित देश के प्रमुख राज्यों की सत्ता से लगातार बाहर है और अब सत्ता गंवाने के बाद इन्हें इन वर्गों की याद आने लगी है जिसे इनकी नीयत व नीति में हमेशा खोट रहने की वजह से घड़ियाली आंसू नहीं तो और क्या कहा जाएगा, जबकि वर्तमान हालात में बीजेपी के एनडीए का भी इन वर्गों के प्रति दोहरे चरित्र वाला यही चाल-ढाल लगता है। उन्होंने आगे कहा कि वैसे भी एससी/एसटी वर्गों को आरक्षण का सही से लाभ व संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को भारतरत्न की उपाधि से सम्मानित नहीं करने तथा देश की आजादी के बाद लगभग 40 वर्षों तक ओबीसी वर्गों को आरक्षण की सुविधा नहीं देने तथा सरकारी नौकरियों में इनके पदों को नहीं भरकर उनका भारी बैकलॉग रखने आदि के जातिवादी रवैयों को भला कौन भुला सकता है, जो कि इनका यह अनुचित जातिवादी रवैया अभी भी जारी है। इतना ही नहीं बल्कि इन सभी जातिवादी पार्टियों ने आपस में मिलकर एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण को किसी ना किसी बहाने से एक प्रकार से निष्क्रिय एवं निष्प्रभावी ही बना दिया है। इस प्रकार दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़ों के बहुजन समाज को सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक तौर पर गुलाम व लाचार बनाए रखने के मामलों में सभी जातिवादी पार्टियां हमेशा से एक ही थैली के चट्टे-बट्टे रहे हैं। जबकि अम्बेडकरवादी पार्टी बीएसपी सदा ही इन वर्गों की सच्ची हितैषी रही है और यूपी में चार बार बसपा के नेतृत्व में रही सरकार में सर्वसमाज के गरीबों, मजलूमों के साथ-साथ बहुजन समाज के सभी लोगों के जानमाल व मजहब की सुरक्षा व सम्मान तथा इनके हित एवं कल्याण की भी पूरी गारंटी रही है। अर्थात् देश के बहुजनों का हित केवल बीएसपी की आयरन गारंटी में ही निहित है। अतः खासकर दलित, आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी समाज) के लोग खासकर कांग्रेस, सपा आदि इन विरोधी पार्टियों के किसी भी बहकावे में नहीं आयें यही उनकी सुख, शान्ति व समृद्धि हेतु बेहतर है। 

सम्मान की जीत: कोर्ट के फैसले से रेलवे ने बदला शब्द, अब ‘बौद्धिक दिव्यांग’ लिखा जाएगा टिकट पर

उज्जैन  भारतीय रेलवे ने फैसला किया है कि अब वह मानसिक रूप से दिव्यांगों के लिए जारी करने वाले रियायती पास पर 'मानसिक विकृत' शब्द की जगह 'बौद्धिक दिव्यांग' शब्द का इस्तेमाल करेगा। रेलवे ने 1 जून 2025 से इस फैसले को अमल में लाना शुरू कर दिया है। रेलवे रियायत प्रमाण पत्र में 'मानसिक रूप से विकलांग' शब्द को 'बौद्धिक विकलांगता' में बदलकर अपनी बेटी की गरिमा बचाने के लिए एक पिता को साढ़े पांच साल तक संघर्ष करना पड़ा. जानकारी के मुताबिक डॉ पंकज मारू की बेटी बौद्धिक रूप से विकलांग थी. ईटीवी भारत से बात करते हुए 65 प्रतिशत बौद्धिक रूप से विकलांग बेटी के पिता डॉ पंकज मारू ने कहा, "हमें तीन सितंबर 2019 को मेरी बेटी का रेलवे रियायत प्रमाण पत्र मिला, जिसमें 'मानसिक रूप से विकलांग' शब्द हमारे लिए बेहद आपत्तिजनक था, जिसके बाद मैंने रेलवे रियायत कार्ड में इस शब्द को बदलने के लिए पश्चिमी क्षेत्र, रेलवे बोर्ड और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन रेलवे उसी शब्द को जारी रखने पर अड़ा रहा." अधिकारियों को शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ डॉ. पंकज मारु बताते हैं कि साल 2019 में उन्होंने अपनी बेटी सोनू के लिए रेलवे से रियायती पास बनवाया था। इसमें विकलांगता की प्रकृति वाले कॉलम में लिखा था मानसिक विकृति। अपनी बेटी के लिए ये शब्द मुझे अपमानजनक लगा। मेरी बेटी 65 फीसदी मानसिक दिव्यांग है, न कि विकृत। मैंने रियायती पास में इस शब्द को बदलवाने के लिए पश्चिम रेलवे, रेलवे बोर्ड और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। कई बार रेलवे के चेयरमैन और डीआरएम को पत्र लिखे। अधिकारियों की तरफ से मुझे कोई जवाब नहीं मिला। उनकी सफलता से ऐसे एक करोड़ से अधिक दिव्यांगजनों के लिए सम्मानपूर्वक जीवन जीने की आशा जगी है, क्योंकि दिव्यांगजनों के लिए मुख्य आयुक्त न्यायालय (CCPD) ने रेलवे बोर्ड को निर्देश जारी किए हैं. डॉ. मारु ने मामले की खुद पैरवी की याचिका दायर होने के तीन दिन बाद यानी 15 जुलाई 2024 को कोर्ट ने रेलवे को एक नोटिस जारी किया और पूछा कि क्या इस शब्द को बदला जा सकता है। 4 सितंबर 2024 को रेलवे ने इस नोटिस का जवाब देते हुए लिखा कि इस शब्द को नहीं बदला जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने मारु से पूछा कि वे अब क्या करना चाहते हैं? तो मारु ने 25 सितंबर को दोबारा सुनवाई के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई। जब इस मामले की सुनवाई हुई तो डॉ. मारु ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) की धारा 92(क) [Section 92(a)] में यह प्रावधान किया गया है, CCPD का आदेश CCPD आदेश में कहा गया है कि रेलवे बोर्ड ने 14 जुलाई 2025 को ईमेल के माध्यम से कोर्ट को सूचित किया कि 9 मई 2025 को एक निर्देश पहले ही जारी किया जा चुका है. रेलवे ने इसकी एक कॉपी अटैच की है, जिसमें कहा गया है कि रेल मंत्रालय ने मानसिक रूप से मंद व्यक्ति जो बिना किसी अनुरक्षक के यात्रा नहीं कर सकते शब्द को बौद्धिक रूप से अक्षम व्यक्ति जो बिना किसी अनुरक्षक के यात्रा नहीं कर सकते से बदलने का निर्णय लिया है, ताकि अधिक सम्मानजनक और उपयुक्त भाषा अपनाई जा सके. यह नियम 1 जून, 2025 से लागू किया गया है. दिव्यांगजनों को सम्मान दिलाने में मदद करें निर्देश परिवार एनसीपीओ के राष्ट्रीय अध्यक्षडॉ पंकज मारू ने कहा, "ये निर्देश न केवल हमें, बल्कि देश भर के सभी दिव्यांगजनों को सम्मान दिलाने में मदद करेंगे. UNCRPD/दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 (जिसे आगे अधिनियम कहा जाएगा) दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने और उन्हें सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है. इसके बावजूद, रेलवे 'मानसिक रूप से विकृत' शब्द का प्रयोग कर रहा है, यह शब्द दिव्यांगजनों के सम्मान और गरिमा को नहीं दर्शाता." इस संबंध में सर्कुलर जारी इस साल 9 मई को रेलवे बोर्ड ने इस शब्द को बदलने का निर्णय लिया, जिसके बाद उसने "मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति जो बिना किसी अनुरक्षक के यात्रा नहीं कर सकते" शब्द के स्थान पर "बौद्धिक रूप से विकलांग व्यक्ति जो बिना किसी अनुरक्षक के यात्रा नहीं कर सकते" शब्द रखने के संबंध में एक सर्कुलर जारी किया. सर्कुलर के अनुसार 1 जून, 2025 से पहले पुराने प्रोफार्मा में जारी किया गया प्रमाण पत्र वैधता अवधि समाप्त होने तक वैध रहेगा, और रेलवे दिव्यांगजन पहचान पत्र, ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन पत्रों में भी आवश्यक परिवर्तन सुनिश्चित किए जाएंगे. इसमें आगे कहा गया है, "असुविधा से बचने के लिए क्षेत्रीय रेलवे संशोधित प्रोफार्मा प्रिंटिड कर सभी स्थानों/स्टेशनों पर उपलब्ध करा सकते हैंॉ। सभी संबंधितों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे."

शिवराज सिंह चौहान बोले- पीएम मोदी का विरोध करते-करते देश का विरोध करने लगी कांग्रेस

भोपाल, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते-करते देश का ही विरोध करने लगी है। केंद्रीय मंत्री का यह बयान कांग्रेस के कारगिल और ऑपरेशन सिंदूर पर उठाए सवालों के जवाब में आया। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, “आज का दिन खास है। अपनी सेना के शौर्य को प्रणाम, उनकी वीरता को प्रणाम। उन सैनिकों को प्रणाम जिन्होंने अपना बलिदान दिया था।” कांग्रेस की ओर से कारगिल और फिर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर आए बयानों पर कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस तो कारगिल विजय पर सवाल उठाती है। वर्ष 2004 से 2009 तक यूपीए की सरकार रही, तब कारगिल विजय दिवस मनाया ही नहीं गया था। कांग्रेस के एक सांसद ने तो यहां तक कहा था कि हम क्यों मनाएं, क्योंकि यह युद्ध तो एनडीए की सरकार में लड़ा गया। सवाल उठता है कि जब कोई देश युद्ध करता है तो क्या वह किसी सरकार के लिए करता है? क्या इस तरह के सवाल खड़े करना देशभक्ति है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने न केवल कारगिल युद्ध पर, बल्कि ऑपरेशन सिंदूर पर भी सवाल उठाए, जो गलत है। कांग्रेस देश का नुकसान करने में लगी है और उसकी सोच राष्ट्र विरोधी हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करते-करते कांग्रेस देश का विरोध करने लगी है। इसके नेता पाकिस्तान जैसी बातें करते हैं, जिन्हें पाकिस्तान दुनिया में उदाहरण के तौर पर पेश करता है। लेकिन हम अपनी सेना के शौर्य को सलाम करते हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से हाल ही में पिछड़े वर्ग को लेकर दिए गए बयान पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी बहुत देर बाद समझ पाते हैं। पहले उन्होंने आपातकाल के लिए माफी मांगी, फिर सिख दंगों के लिए माफी मांगी, और अब ओबीसी समाज से माफी मांग ली। कांग्रेस को बताना चाहिए कि उन्होंने ओबीसी के लिए किया क्या है। कांग्रेस यह बताए कि मंडल आयोग की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में किसने डाला था। इतना ही नहीं, ओबीसी के कल्याण के हर कदम को पहले कुचलने का प्रयास किया कांग्रेस ने और बाद में यह माफी मांग लेते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इससे पहले राहुल गांधी ने राफेल के मामले में माफी मांगी थी और अब जो कर रहे हैं उसके लिए 10 साल बाद माफी मांगेंगे। माफी मांगना उनके भाग्य में लिखा हुआ है।  

भारत-यूके व्यापार समझौता: छत्तीसगढ़ को वैश्विक बाजार में मिलेगी नई उड़ान — सीएम साय

  रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच मुक्त व्यापार समझौते को भारत की विकास यात्रा का नया अध्याय बताया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के प्रति आभार जताया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह समझौता न केवल भारत के आर्थिक क्षितिज को विस्तार देगा, बल्कि विशेष रूप से ऐसे राज्य जो कृषि, शिल्प, लघु और कुटीर उद्योगों पर आधारित हैं – जैसे छत्तीसगढ़ – उन्हें वैश्विक व्यापार का हिस्सा बनने का ऐतिहासिक अवसर प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत-यूके एफटीए से भारत के 99% निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन में शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे किसानों, एमएसएमई, हस्तशिल्पियों, बुनकरों और पारंपरिक उत्पादों को सीधे लाभ मिलेगा। इस समझौते से अनुमानित $23 अरब डॉलर के नए व्यापार अवसर खुलेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह ऐतिहासिक कदम छत्तीसगढ़ जैसे कृषि और श्रम प्रधान राज्यों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता छत्तीसगढ़ के लिए कृषि को बल, उद्योग को संबल और युवाओं को नए रोजगार के अवसर देगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय उत्पादकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण, और निर्यात सहायता केंद्रों की स्थापना पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को कोटिशः धन्यवाद देते हुए कहा कि यह उनके दूरदर्शी नेतृत्व, आर्थिक सुधारों और ‘वोकल फॉर लोकल’ को ग्लोबल स्तर पर पहुंचाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

682 घरेलू उपभोक्ताओं ने उठाया ऑनलाइन भार वृद्धि सुविधा का लाभ

विद्युत उपभोक्ता ऑनलाइन कराएं स्वैच्छिक भार वृद्धि बिजली उपभोक्ताओं को घर बैठे अपने बिजली कनेक्शन में भार वृद्धि की सुविधा उपलब्ध कराई गयी 682 घरेलू उपभोक्ताओं ने उठाया ऑनलाइन भार वृद्धि सुविधा का लाभ भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को घर बैठे अपने बिजली कनेक्शन में भार (लोड) वृद्धि की सुविधा उपलब्ध कराई गयी है। अब उपभोक्ता अपने बिजली कनेक्शन के पूर्व स्वीकृत भार में अपनी वर्तमान आवश्यकता के अनुसार ऑनलाइन आवेदन की सुविधा का लाभ उठाकर भार (लोड) वृद्धि करा सकेंगे। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं को त्वरित रूप से पारदर्शी और सुविधाजनक सेवाएं प्रदान करने की दिशा में कंपनी द्वारा पहल करते हुए 10 किलोवाट भार तक के घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए त्वरित स्वचालित भार वृद्धि की एक नई सुविधा 15 जुलाई से उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई है। सुविधा के शुरू होने से अब तक 682 उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन आवेदन कर अपने बिजली कनेक्शन की भार वृद्धि कराई है। कंपनी ने बताया है कि ऑनलाइन भार वृद्धि की सुविधा के लिए उपभोक्ताओं को किसी फेज परिवर्तन या मीटर प्रतिस्थापन की आवश्यकता नहीं होगी। इस पहल के तहत पात्र उपभोक्ता द्वारा अपने स्वीकृत भार (निर्दिष्ट सीमा के भीतर) में वृद्धि का अनुरोध करने पर उनके उनुरोध को अब बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या जोन-स्तरीय अनुमोदन के बिना कंपनी द्वारा त्वरित और निर्बाध रूप से स्वीकृत कर भार (लोड) वृद्धि की जा रही है। इस हेतु लगने वाले शुल्क का भुगतान कंपनी द्वारा आगामी देयक में शामिल किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को अलग से भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस प्रक्रिया से बिलिंग सिस्टम में स्वचालित रूप से त्वरित भार वृद्धि सुनिश्चित हो रही है, जिससे कंपनी के मानव संसाधन के साथ ही उपभोक्ताओं के समय और श्रम की भी बचत हो रही है। कंपनी के महाप्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) अभिषेक मार्तंड ने बताया है कि ऐसे उपभोक्ता जिनके कनेक्शन में भार (लोड) वृद्धि के उपरांत फेस परिवर्तन अथवा मीटर बदलने की आवश्यकता होगी, उनके लिए ये सुविधा लागू नहीं है। गौरतलब है कि विद्युत उपभोक्ता कंपनी द्वारा स्वीकृत विद्युत भार से अधिक भार का उपयोग करते हैं जिससे कम्पनी की विद्युत अधोसंरचना अतिभारित हो जाती है जो कि अनावश्यक रूप से विद्युत व्यवधानों का कारण बनती है। अतः सभी उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि वे स्वेच्छा से अपने विद्युत भार की वृद्धि करा लें जिससे कम्पनी द्वारा भार अनुरूप उपयुक्त विद्युत अधोसंरचना का विकास कर बेहतर एवं निर्बाध विद्युत प्रदाय सुनिश्चित किया जा सके। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने सभी सम्मानीय विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने परिसर के वास्तविक विद्युत भार के अनुरूप अपने कनेक्शन की भार वृद्धि कंपनी के पोर्टल https://saralsanyojan.mpcz.in:8888/apply/other/services पर ऑनलाइन आवेदन कर स्वीकृत कराना सुनिश्चित करा लें। इसके लिए उन्हें तुरंत कोई शुल्क देने की आवश्यकता नहीं है।  

रक्षाबंधन स्पेशल ट्रेन की घोषणा, MP के इन स्टेशनों से मिलेगी सुविधा

भोपाल   रक्षाबंधन के दौरान भोपाल व इंदौर से आने वाली सभी ट्रेनों में रिजर्वेशन फुल हो चुका है। ऐसे में रेलवे  ने अभी एक स्पेशल ट्रेन का ऐलान कर सतना-रीवा के यात्रियों को थोड़ी राहत दी है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर यात्रियों की सुविधा के लिए रीवा-रानी कमलापति-रीवा एक-एक ट्रिप सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। इस स्पेशल ट्रेन में एसी क्लास, स्लीपर क्लास और जनरल क्लास के कोच रहेंगे। ट्रेन दोनों दिशाओं में सतना, मैहर, कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, बीना, विदिशा हाल्ट लेकर गन्तव्य को जाएगी। शनिवार से यात्री ट्रेन में रिजर्वेशन करा सकते हैं। यह होगा आने-जाने का समय गाड़ी संख्या 02190 रीवा-रानी कमलापति सुपरफास्ट शुक्रवार 08 अगस्त को रीवा स्टेशन से 12.30 बजे प्रस्थान कर, 1.20 सतना, 1.50 मैहर, 2.50 कटनी मुड़वारा, 4.10 दमोह, 5.15 सागर, 6.45 बीना, 7.50 विदिशा और रात 9.15 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी। इसी तरह गाड़ी संख्या 02159 रानी कमलापति-रीवा सुपरफास्ट शुकवार 3 अगस्त को ही रानी कमलापति स्टेशन से रात 10.15 बजे चलकर, 11.08 बजे विदिशा, 00.20 बीना, 1.30 सागर, 2.40 दमोह, 04.10 कटनी मुड़वारा, 5.35 मैहर, 6.15 सतना और सुबह 7.20 बजे रीवा स्टेशन पहुंचेगी।