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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नवीन विधानसभा भवन लोकार्पण के लिए किया आमंत्रित लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता नवीन विधानसभा भवन के उद्घाटन के लिए पीएम मोदी को भेजा निमंत्रण, अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया ऐलान 1 नवंबर राज्योत्सव के दिन प्रस्तावित है नई विधानसभा का लोकार्पण, नया रायपुर में नवनिर्मित ब्रह्मकुमारी शांति शिखर के नए भवन के लोकार्पण पर भी प्रधानमंत्री ने दी स्वीकृति रायपुर /नई दिल्ली  आज छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान संसद भवन में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से आत्मीय मुलाकात की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को 1 नवम्बर 2025 को प्रदेश के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवा रायपुर (अटल नगर) स्थित नवनिर्मित विधानसभा भवन में प्रवेश करने की जानकारी दी। डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री श्री मोदी जी को इस ऐतिहासिक अवसर पर नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण उनके कर-कमलों से करने हेतु सादर आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि यह गौरवशाली क्षण प्रदेश की जनता और सभी विधानसभा सदस्यों के लिए स्मरणीय होगा। साथ ही, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी सौजन्य भेंट की और उन्हें नवीन विधानसभा भवन के लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करने हेतु आमंत्रित किया। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधानसभा अध्यक्ष का आमंत्रण स्वीकार किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी से चर्चा करते हुए कहा कि नवा रायपुर में ब्रह्माकुमारी बहनों का नया भवन बन कर तैयार है, जिसके लोकार्पण समारोह में ब्रह्मकुमारी बहनें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आमंत्रित करना चाहती है। डॉ. रमन सिंह के इस आग्रह को प्रधानमंत्री ने सहर्ष स्वीकार कर ब्रह्मकुमारी संस्थान के नवीन भवन लोकार्पण के लिए भी अपनी स्वीकृति प्रदान की है। आपको बता दे कि, छत्तीसगढ़ प्रदेश अपने गठन के 25 वर्ष पूर्ण कर रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर नवा रायपुर स्थित नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण न केवल प्रदेश की लोकतांत्रिक परंपराओं को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा, बल्कि यह क्षण छत्तीसगढ़ की प्रगति और सशक्त लोकतंत्र की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

केंद्रीय मंत्री नड्डा और CM डॉ. यादव ने माँ नर्मदा की महाआरती में की सहभागिता

केंद्रीय मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव माँ नर्मदा की महाआरती में हुए शामिल केंद्रीय मंत्री नड्डा और CM डॉ. यादव ने माँ नर्मदा की महाआरती में की सहभागिता माँ नर्मदा की महाआरती में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव माँ नर्मदा का किया अभिषेक और दीपदान जबलपुर  केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पुण्य-सलिला माँ नर्मदा के पवित्र तट ग्वारीघाट में सोमवार की शाम माँ नर्मदा की महाआरती में शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री नड्डा की धर्मपत्नी श्रीमती मल्लिका बैनर्जी भी महाआरती में शामिल हुईं। केंद्रीय मंत्री नड्डा एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वस्ति-वाचन, हर-हर नर्मदे, माँ नर्मदा के जयकारों और नर्मदाष्टकम् के श्लोकों की गूँज के बीच पूरे विधि-विधान से पुरोहितों की मौजूदगी में माँ नर्मदा की पूजा-अर्चना कर देश तथा प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। नड्डा और डॉ. यादव ने माँ नर्मदा का दुग्धाभिषेक कर दीपदान भी किया।  लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, राज्यसभा सदस्य श्रीमती सुमित्रा वाल्मिकी, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक एवं अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी माँ नर्मदा की महाआरती में शामिल हुये। महाआरती में विधायक सर्व अशोक रोहाणी, सुशील कुमार तिवारी इंदु, डॉ. अभिलाष पांडे एवं नीरज सिंह, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, हितानन्द शर्मा, आशीष अग्रवाल, संदीप जैन, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष विनोद गोंटिया, पूर्व निःशक्तजन आयुक्त दीपांकर बैनर्जी, धर्माचार्य और संत समाज मौजूद रहे। नर्मदा महाआरती के समापन पर 14 वर्षीय तेजस्विनी दुबे ने माँ नर्मदा को साफ एवं स्वच्छ रखने का सभी को संकल्प दिलाया।  

मध्यप्रदेश में ताप्ती रिजर्व: वन्यजीव संरक्षण को मिली नई पहचान, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

भोपाल  मध्यप्रदेश के पहले कंजर्वेशन रिजर्व 'ताप्ती' को सरकार ने हरी झंडी दे दी है. यह कंजर्वेशन रिजर्व 250 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें रिजर्व और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल होगा. यह कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच वन्यजीव कॉरिडोर का हिस्सा है. राज्य सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है और इसकी सीमाएं भी घोषित कर दी हैं. इसी के साथ एक बार फिर मध्य प्रदेश के वन्य जीवों का घर लगातार बड़ा हो रहा है. यह होगी कंजर्वेशन रिजर्व की सीमाएं मध्यप्रदेश के पहले कंजर्वेशन रिजर्व ताप्ती की सीमाएं भी निर्धारित कर दी गई हैं. यह कंजर्वेशन रिजर्व दक्षिण और पश्चिम वन मंडल बैतूल की 3 तहसील बैतूल, भीमपुर और भैंसदेही में बना है. इसमें ताप्ती, चिचोली और तावड़ी वन क्षेत्र को शामिल किया गया है. इस रिजर्व क्षेत्र में टाइगर, तेंदुआ, जंगली कुत्ते, बायसन जैसे कई वन्य जीव मौजूद हैं. जानें नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी और कंजर्वेशन रिजर्व में अंतर      ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 250 वर्ग किलोमीटर होगा.     इसमें 224.844 वर्ग किलोमीटर रिजर्व फॉरेस्ट और 25.156 वर्ग किलोमीटर संरक्षित वन क्षेत्र शामिल है.     यह पहला कंजर्वेशन रिजर्व बन गया है, जो दो टाइगर रिजर्व सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व को जोड़ता है.     रिजर्व में टाइगर, लैपर्ड जैसे वन्य जीवों के अलावा ब्लैक बक, चीतल और जंगली उल्लू भी देखे जा सकते हैं. यह होगा रिजर्व से फायदा एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ए. कृष्णामूर्ति कहते हैं, '' कंजर्वेशन रिजर्व टाइगर रिजर्व और सेंक्चुरी की तरह एक संरक्षित वन क्षेत्र है. इससे बाघ सहित दूसरे वन्य प्राणियों को संरक्षण मिलेगा. यह रिजर्व दो टाइगर रिजर्व के बीच कॉरिडोर का काम करेगा. इससे स्थानीय लोगों को नुकसान के स्थान पर फायदा होगा. इस रिजर्व के बनने से इस क्षेत्र में ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा. स्थानीय लोगों के वनोपज संग्रह के अधिकार खत्म नहीं होंगे. वहीं, आदिवासी पहले के तरह तेंदुपत्ता, चिरौंजी, सूखी लकड़ी, गोंद आदि एकट्ठा कर सकेंगे.'' क्या होता है अलग-अलग रिजर्व में अंतर? आमतौर पर सवाल उठता है कि आखिर नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी और कंजर्वेशन रिजर्व में क्या अंतर होता है? तो बता दें नेशनल पार्क में मानवीय गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध होता है. इस क्षेत्र में लकड़ी काटने, वनोपज इकट्ठा करने जैसी कोई भी गतिविधि नहीं की जा सकती. जबकि वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में कुछ सीमित मानवीय गतिविधियां जैसे जानवरों को चराने या स्थानीय उपयोग नियंत्रित तरीके से किए जा सकते हैं. जबकि कंजर्वेशन रिजर्व का क्षेत्र बफर जोन जैसा होता हैं. यहां स्थानीय समुदाय की सहभागिता की मदद से वन्य जीवों ओर वन्य क्षेत्र का संरक्षण किया जाता है. इस क्षेत्र में रहने वालों की आजीविका को भी महत्व दिया जाता है. 

त्योहारों की भीड़: 3 दिन में ट्रेनें फुल, रेलवे का बड़ा ऐलान,12 हजार स्पेशल ट्रेनें चलाने की तैयारी में

चंडीगढ़  चंडीगढ़ से त्योहारों पर घर जाने वाले यात्रियों के लिए ट्रेन टिकटों की भारी मारामारी शुरू हो गई है। 21 अगस्त को जब 20 अक्टूबर (दीपावली) की बुकिंग खुली, तो सिर्फ तीन दिनों में ही उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली लगभग सभी ट्रेनें फुल हो गईं। हालात ये हैं कि कई ट्रेनों में अब वेटिंग टिकट भी नहीं मिल रही। ऐसे में यात्रियों के पास अब केवल तत्काल टिकट या फिर रेलवे की ओर से चलाई जाने वाली स्पेशल ट्रेनें ही विकल्प बची हैं।रेलवे का कहना है कि दीपावली (20 अक्टूबर) और छठ पूजा (26 अक्टूबर) के मौके पर पूरे देश में 12 हजार से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी।उम्मीद है कि चंडीगढ़ से भी 2-3 स्पेशल ट्रेनें उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए मिलेंगी। हालांकि, अंबाला मंडल की तरफ से अभी तक इसका आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। तत्काल टिकट ही आखिरी सहारा त्योहार सीजन में यात्रियों को तत्काल टिकट पाने के लिए सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। अक्सर लोगों को रिजर्वेशन सेंटर पर पूरी रात कतारों में गुजारनी पड़ती है, इसके बावजूद टिकट हाथ नहीं लगती। कई बार लोग तत्काल टिकट पाने के लिए दो-तीन दिन तक रेलवे स्टेशन पर डेरा डालते हैं।अभी हालात यह हैं कि सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों में सीटें मिलना लगभग नामुमकिन है और यात्री केवल तत्काल या फिर स्पेशल ट्रेनों का ही इंतजार कर रहे हैं। नई ट्रेनों और परियोजनाओं की भी घोषणा की गई इसके तहत यात्री यदि 13 से 26 अक्टूबर के बीच आगे की यात्रा करेंगे और 17 नवंबर से एक दिसंबर के बीच वापसी करेंगे तो रिटर्न टिकट पर 20 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। त्योहारों के दौरान बिहार लौटने वाले प्रवासी यात्रियों के लिए यह योजना काफी उपयोगी होगी। बिहार को ध्यान में रखते हुए कई नई ट्रेनों और परियोजनाओं की भी घोषणा की गई। गयाजी से दिल्ली, सहरसा से अमृतसर, छपरा से दिल्ली और मुजफ्फरपुर से हैदराबाद के बीच चार नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई जाएंगी। धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए बुद्ध सर्किट ट्रेन शुरू होगी इसके अलावा, भगवान बुद्ध से जुड़े धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए बुद्ध सर्किट ट्रेन शुरू होगी, जो वैशाली, हाजीपुर, सोनपुर, पटना, राजगीर, नालंदा, गया और कोडरमा तक जाएगी।सीमांचल क्षेत्र को राजधानी से जोड़ने के लिए पूर्णिया से पटना के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत होगी। साथ ही बक्सर-लखीसराय रेलखंड पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जाएगी ताकि ट्रेनों का संचालन सुगम हो। पटना के चारों ओर रिंग रेलवे बनाया जाएगा, जबकि सुल्तानगंज को देवघर से जोड़ने के लिए नई रेल लाइन का निर्माण होगा। लौकहा में नया वॉशिंग पिट बनेगा और बिहार में कई नए रोड ओवरब्रिज और अंडरपास तैयार किए जाएंगे।रेल मंत्री ने यह भी बताया कि पटना से अयोध्या के लिए भी नई ट्रेन शुरू की जाएगी, जिससे धार्मिक यात्रियों को सुविधा मिलेगी। रेल मंत्री के साथ मौजूद बिहार के सभी नेताओं ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री के प्रति आभार जताया। उनका कहना था कि इन परियोजनाओं से न केवल बिहारवासियों की यात्रा आसान होगी बल्कि व्यापार, पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। रेलवे का दावा है कि इस बार त्योहारों के मौसम में यात्रियों को बिना भीड़ और परेशानी के सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा का अनुभव होगा।  

MP में विधायकों की तनख्वाह बढ़ सकती है 45% तक, विधानसभा में गूंजा प्रस्ताव

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक बार फिर विधायकों की सैलरी बढ़ने के मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अगर मध्य प्रदेश में विधायकों की सैलरी 45 फीसदी बढ़ती है तो उन्हें मिलने वाली सैलरी 1 लाख से ज्यादा हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो राजस्थान से ज्यादा मध्य प्रदेश के विधायकों की सैलरी हो जाएगी. जानकारी के मुताबिक सैलरी बढ़ाने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को भेजा गया है. इतना ही नहीं पूर्व विधायकों के पेंशन में भी इजाफा करने की मांग की गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से भी यह प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार को भेजा गया है. अब 3 सदस्यीय समिति इस मुद्दे पर फैसला करेगी. इस समिति के अध्यक्ष एमपी के वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा हैं. इस समिति में बीजेपी और कांग्रेस के एक-एक सीनियर विधायक भी शामिल होंगे. माना जा रहा है कि उनका चयन जल्द ही सरकार की तरफ से किया जाएगा. लंबे समय से चल रही मांग काफी लंबे वक्त से मध्य प्रदेश के विधायकों की तरफ से वेतन, भत्ते और विधायक निधि में बढ़ोतरी की मांग की जा रही थी. इसके लिए एक समिति भी बनी हुई है. इसकी अध्यक्षता रीवा की गुढ़ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक नागेंद्र सिंह कर रहे हैं. समिति ने सभी पक्षों पर चर्चा कर वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की सिफारिश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी थी.  

एमपी में वंदे भारत एक्सप्रेस की बढ़ती लोकप्रियता, भोपाल रेल मंडल ने लिया अहम निर्णय

भोपाल एमपी में चल रहीं वंदेभारत एक्सप्रेस में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश की पहली वंदेभारत भोपाल निजामुद्दीन और बाद में चलनेवाली इंदौर नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस तथा रानी कमलापति रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की ऑक्यूपेंसी बेहतर होती जा रही है। रेलवे बोर्ड द्वारा वंदे भारत के संबंध में जोन और मंडलों से बुलाई गई रिपोर्ट के अनुसार भोपाल निजामुद्दीन वंदेभारत एक्सप्रेस में तो सीटों की जबर्दस्त कमी पड़ रही है। इसकी ऑक्यूपेंसी और पैसेंजर डिमांड को देखते हुए भोपाल रेल मंडल ने बड़ा फैसला लिया है। मंडल ने भोपाल निजामुद्दीन वंदेभारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए अब रेलवे बोर्ड की मंजूरी मांगी गई है। एमपी की राजधानी भोपाल को देश की राजधानी दिल्ली से जोड़नेवाली रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। ट्रेन नंबर 20171 रानी कमलापति-निजामुद्दीन की ऑक्यूपेंसी जहां 94 प्रतिशत है वहीं ट्रेन नंबर 20172 निजामुद्दीन-रानी कमलापति वंदेभारत 112 प्रतिशत की ऑक्यूपेंसी से चल रही है। ट्रेन में तेजी से बढ़ती यात्रियों की संख्या को देखते हुए रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाए जा रहे हैं। इससे रेल यात्रियों को खासी राहत मिल सकेगी। भोपाल रेल मंडल ने रेलवे बोर्ड को वंदे भारत ट्रेन में 4 कोच बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। मंडल अधिकारियों के अनुसार बोर्ड से इसकी जल्द मंजूरी मिल सकती है। रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस अभी 16 कोच की ट्रेन है। इसमें 2 एग्जीक्यूटिव क्लास कोच और 14 एसी चेयर कार कोच हैं। इस प्रकार कुल 1128 सीटें हैं। 4 कोच बढ़ाने पर रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत में 432 सीटें बढ़ जाएंगी। 20 कोच से रोज 1560 यात्री कर सकेंगे सफर भोपाल रेल मंडल के अधिकारी बताते हैं कि रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस को 20 कोच की करने से इसमें रोज 1560 यात्री सफर कर सकेंगे। नया प्रस्ताव मंजूर होने पर ट्रेन में 2 एसी चेयर कार और 2 एग्जीक्यूटिव क्लास कोच बढ़ जाएंगे। इस प्रकार रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में कुल 4 एग्जीक्यूटिव क्लास और 16 चेयर कार कोच हो जाएंगे। भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया बताते हैं कि रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस को 20 कोच की करने का फैसला लिया गया है। रेलवे बोर्ड से जल्द ही इसकी मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

मध्यप्रदेश में रोजगार का तोहफ़ा, सीएम यादव देंगे 1060 कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव विद्युत कंपनियों के 1060 कर्मचारियों को देंगे नियुक्ति-पत्र मध्यप्रदेश में रोजगार का तोहफ़ा, सीएम यादव देंगे 1060 कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर विद्युत कंपनियों में नई नियुक्तियाँ: सीएम डॉ. यादव बांटेंगे 1060 नियुक्ति-पत्र ऊर्जा मंत्री ने 26 अगस्त के नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 26 अगस्त को दोपहर 12 बजे रवीन्द्र भवन भोपाल में विद्युत कंपनियों के नवनियुक्त 1060 कार्मिकों को नियुक्त-पत्र वितरित करेंगे। कार्यक्रम में बिजली कंपनियों के लिए नवीन संगठनात्मक संरचना के तहत 51 हजार 711 नये स्थाई पदों की स्वीकृति के लिये मुख्यमंत्री का अभिनंदन भी किया जायेगा। ऊर्जा विभाग की विभिन्न बिजली कंपनियों में रिक्त पदों की परीक्षा के बाद कर्मचारियों का चयन किया गया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सोमवार को मंत्रालय में 26 अगस्त के कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। ऊर्जा मंत्री तोमर ने अधिकारियों को सभी तैयारियां समय-सीमा में पूरी करने के निर्देश दिये। उन्होंने कार्यक्रम स्थल का भी निरीक्षण किया। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई ने कार्यक्रम आयोजन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि संकल्प-पत्र के आधार पर विभिन्न पदों पर एमपी ऑनलाइन के माध्यम से भर्ती की गई है। चयनित पदों में बिजली इंजीनिय़र, सिविल इंजीनियर, लेखाधिकारी, सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधक, सहायक विधि अधिकारी, लाइन अटैंड़ेंट, सिक्य़ोरिटी ऑफिसर, पॉवर प्लांट  फार्मासिस्ट, केमिस्ट, एएनएम, ट्रेसर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्निशियन, रेडियोग्राफर, ईसीजी टैक्निशियन, पब्लिसिटी ऑफिसर, मेडिकल ऑफिसर आदि पद शामिल हैं। भोपाल में होने वाले इस राज्य स्तरीय समारोह में नियुक्ति पत्र पाने वाले युवाओं के परिजनों को भी आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर प्रदेश की विभिन्न बिजली कंपनियों की उपलब्धियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। साथ ही विद्युत कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी कर्मचारी हितों और उपभोक्ता सेवाओं को लेकर चर्चा भी की जाएगी। बैठक में एम.डी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी अविनाश लवानिया और एम.डी. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षितिज सिंघल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

2005-06 के बाद फिर कहर! WHO ने चेताया, दुनियाभर में फैल रहा चिकनगुनिया

भोपाल   करीब 20 साल बाद एक बार फिर चिकनगुनिया का खतरा बढ़ता दिख रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस पर अलर्ट जारी किया है. चिकनगुनिया एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन यह अब तक 119 देशों में पाई जा चुकी है, जिससे करीब 5.6 अरब लोग जोखिम में हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि 20 साल पहले वाले वायरस में जो म्यूटेशन देखे गए थे, वही फिर से सामने आए हैं. भारत जैसे देशों में, जहां मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां पहले से मौजूद हैं, वहां इसका खतरा और बढ़ जाता है. राजधानी की बात करें तो बीते साल अगस्त के अंत तक चिकनगुनिया के 40 मरीज मिले थे। इस साल अब तक 58 मरीजों में इसकी पुष्टि हो चुकी है। खास बात यह है कि चिकनगुनिया जैसे लक्षण वाले मामले भी तेजी से बढ़े हैं। सभी को बुखार, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों में अकड़न जैसी शिकायत है, लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आती। हमीदिया, जेपी और एम्स में एक अगस्त से अब तक 7 हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे हैं। इसमें से 700 से ज्यादा मरीजों की जांच भी हो चुकी है। डॉक्टर बताते हैं कि इस बार मरीजों की सबसे बड़ी शिकायत जोड़ों में दर्द की है। मरीज बताते हैं कि लगता है जैसे हड्डियां आपस में टकरा रही हों। टेस्ट रिपोर्ट 10 दिन तक पॉजिटिव नहीं आ रही, जिससे पहचान में देरी हो रही है। मरीजों के लिए यह सिर्फ बुखार नहीं, बल्कि हफ्तों तक चलने वाला जोड़ों का कहर है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों के लिए यह और खतरनाक है। चिकनगुनिया के लक्षण जीएमसी के एमडी मेडिसिन डॉ. अनिल शेजवार बताते हैं कि इस बीमारी का वायरस शरीर में आने के 4 से 7 दिनों में लक्षण दिखने लगते हैं। तेज बुखार, जोड़ों में तीव्र दर्द, मांसपेशियों में अकड़न और नसों में खिंचाव, सिरदर्द, थकान, ठंड लगना, मतली, उल्टी, पूरे शरीर पर लाल चकत्ते, आंखों में सूजन और दर्द, डेंगू जैसे लक्षण होने की वजह से कई बार मरीज सही समय पर पहचान नहीं कर पाते। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन गंभीर मरीजों (अस्पताल में भर्ती) के लिए: आईवी हाइड्रेशन (ड्रिप) का प्रयोग करें। कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और इम्युनोग्लोबिन थेरेपी से बचें। प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन सिर्फ तब करें जब ब्लीडिंग हो। येलो फीवर से लिवर फेलियर होने पर आईवी एन-एसिटाइलसिस्टीन का उपयोग। मोनोक्लोनल इम्युनोग्लोबिन और सोफोसबुविर जैसी दवाएं सिर्फ रिसर्च में। सामान्य या हल्के लक्षण वाले मरीजों के लिए: डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ओआरएस और तरल पदार्थ दें। दर्द और बुखार के लिए केवल पैरासिटामोल का इस्तेमाल। स्टेरॉइड से बचें। बचाव ही सबसे बड़ा इलाज जेपी अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट, कॉइल और स्प्रे का उपयोग करें। दरवाजों-खिड़कियों पर नेट लगाएं। भारत में कितना खतरा? पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ समीर भाटी बताते हैं कि भारत में मॉनसून के मौसम में मच्छरों से होने वाली बीमारियां आम हैं और यही चिकनगुनिया के फैलने की सबसे बड़ी वजह बनती है. हालांकि यहां चिकनगुनिया का ज्यादा रिस्क नहीं होता है, लेकिन इस बात सतर्क रहने की जरूरत है. डॉ भाटी कहते हैं कि चिकनगुनिया कीबीमारी एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों के काटने से फैलती है, जो दिन में ज्यादा एक्टिव रहते हैं. जब संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उसके खून में एंटर कर जाता है और शरीर में तेजी से फैलता है. इसका असर शरीर की जोड़ों, मांसपेशियों और नसों पर सबसे ज्यादा पड़ता है, जिससे मरीज को तेज दर्द और कमजोरी का सामना करना पड़ता है. चिकनगुनिया के लक्षण क्या हैं? चिकनगुनिया के लक्षण अचानक और तेजी से सामने आते हैं. इसका इनक्यूबेशन पीरियड 2 से 7 दिन होता है यानी वायरस के संक्रमण के कुछ दिनों बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं. सबसे विशेष लक्षणों में तेज बुखार, तीव्र जोड़ दर्द और मांसपेशियों में ऐंठन शामिल हैं. यह जोड़ दर्द कई बार इतना गंभीर होता है कि मरीज को हिलने-डुलने में कठिनाई होती है और यह हफ्तों से लेकर महीनों तक रह सकता है. इसके अलावा मरीज को सिरदर्द, थकान, ठंड लगना, मतली, उल्टी और पूरे शरीर पर लाल चकत्ते हो सकते हैं. आंखों में दर्द और सूजन भी सामान्य लक्षण हैं. कई मामलों में लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे मरीज को सही पहचान करने में देर हो सकती है. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य पर असर डालता है. डेंगू, चिकनगुनिया और जीका ऐसी ही तीन खतरनाक बीमारियां हैं जिनका अभी तक कोई स्थायी इलाज या वैक्सीन नहीं है।  यही वजह है कि डॉक्टर सभी लोगों को बचाव के उपायों का पालन करते रहने की सलाह देते रहते हैं। इन बीमारियों की सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि शुरुआती लक्षण साधारण बुखार जैसे होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये जानलेवा रूप ले सकते हैं। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मच्छरों से होने वाली तमाम बीमारियां हर साल लोगों के परेशान करती हैं। डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से घटने लगता है जो गंभीर स्थितियों में जानलेवा भी हो सकता है। चिकनगुनिया महीनों तक जोड़ों में दर्द देता रहता है वहीं जीका वायरस गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए आजीवन खतरा बन सकता है। यानी ये सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि गंभीर चिंता का कारण भी हैं। डेंगू का खतरा डेंगू एक वायरल बीमारी है जो एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से फैलती है। दुनियाभर में हर साल लगभग 40 करोड़ लोग डेंगू का शिकार होते हैं। भारत में मानसून के दिनों में और बरसात के बाद यह सबसे ज्यादा फैलता है। डेंगू के कारण रोगियों को तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे और मांसपेशियों-जोड़ों में दर्द के साथ त्वचा पर लाल चकत्ते हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में यह हेमरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम का भी कारण बन सकता है। इसमें प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटने लगती है जो शरीर में अंदरूनी रक्तस्राव का कारण बन सकती है।  डेंगू का कोई विशेष इलाज मौजूद नहीं है। इसके उपचार में केवल … Read more

महिला आयोग का चेयरपर्सन पद खाली, मध्यप्रदेश में 26 हजार मामले पेंडिंग

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग में करीब 26 हजार मामले पेंडिंग होने के बावजूद आयोग के अध्यक्ष का पद करीब 6 साल से खाली पड़ा है. राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि इस पद से संबंधित मामला अदालत में लंबित है और उन्होंने आश्वासन दिया कि वह जल्द ही इस पद को भरने के लिए कदम उठाएंगी.  मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर  सरकार ने हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में कहा कि 1 जनवरी, 2024 से इस वर्ष 20 जून के बीच राज्य में बलात्कार के 10 हजार 840 मामले दर्ज किए गए, जबकि 21 हजार 175 महिलाएं एक महीने से अधिक समय तक लापता रहीं.  आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में हर दिन बलात्कार के लगभग 20 और महिलाओं के लापता होने के 38 मामले दर्ज किए जा रहे हैं. मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग सात सदस्यीय पैनल है, जिसमें छह सदस्य सरकार से बाहर के होते हैं और एक सरकार द्वारा नियुक्त होता है. इसके अध्यक्ष का पद जनवरी 2019 से रिक्त है.सागर की वर्तमान लोकसभा सदस्य लता वानखेड़े 1 जनवरी 2016 से 2019 तक इसकी अध्यक्ष थीं.  इसके बाद यह पद लगभग एक साल तक रिक्त रहा और 16 मार्च 2020 को कमलनाथ के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने कांग्रेस नेता शोभा ओझा को पैनल का अध्यक्ष नियुक्त किया. हालांकि, चार दिन बाद, 20 मार्च 2020 को कमलनाथ सरकार गिर गई. बाद में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली BJP सरकार ने आयोग के अध्यक्ष के रूप में ओझा की नियुक्ति रद्द कर दी. इसके बाद शोभा ने इस फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया. हाई कोर्ट ने 22 मई 2020 को अपने आदेश में पद के मामले में यथास्थिति बनाए रखने को कहा. ओझा ने बाद में जून 2022 में तत्कालीन भाजपा सरकार पर उन्हें काम नहीं करने देने और बाधाएं पैदा करने का आरोप लगाते हुए पद से इस्तीफा दे दिया. न्यूज एजेंसी से बात करते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा, "राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का पद निश्चित रूप से लंबे समय से खाली है और मैं इसे जल्द से जल्द भरने के लिए आवश्यक कदम उठाऊंगी."  उन्होंने यह भी कहा कि पद से संबंधित मामला अदालत में लंबित है, जो इस कदम में एक बाधा है. भूरिया ने स्वीकार किया कि पद खाली रहने के कारण कई शिकायतें लंबित हैं और फैसलों में देरी हो रही है. ओझा ने राज्य की भाजपा सरकार पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया, "इतने लंबे समय से खाली पड़ा यह महत्वपूर्ण पद दर्शाता है कि यह सरकार महिलाओं के प्रति कितनी असंवेदनशील है." उन्होंने दावा किया, "महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में मध्य प्रदेश शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है. आज भी महिलाएं मेरे पास शिकायत लेकर आती हैं और मैं व्यक्तिगत रूप से उनकी हर संभव मदद करती हूं."

और सिंधिया होंगे मौजूद रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव ग्वालियर में, 29 अगस्त से दो दिन तक आयोजन

ग्वालियर   मध्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि और ग्वालियर–चंबल एवं सागर संभाग में पर्यटन निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में ग्वालियर में 29 एवं 30 अगस्त को रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले इस रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्याेतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, तथा पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी की विशेष उपस्थिति होंगी। राज्यमंत्री लोधी ने बताया कि मध्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के साथ–साथ पर्यटन व्यवसायियों, टूर ऑपरेटर्स और होटल इंडस्ट्री के बीच सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित की जा रहा है। ग्वालियर के पर्यटन श्रेत्र में निवेश को नया आयाम मिलेगा। 'टाइमलेस ग्वालियर: इकोज ऑफ कल्चर, स्पिरिट ऑफ लेगेसी' थीम पर आधारित ये कॉन्क्लेव पर्यटन निवेश, सांस्कृतिक धरोहर, अनुभवात्मक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।   प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति एवं प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि कॉन्क्लेव में होटल, रिसोर्ट, वेलनेस और ईको-टूरिज्म क्षेत्र के निवेशकों को लेटर ऑफ अवॉर्ड (एलओए) प्रदान किए जाएंगे, एमओयू एवं अनुबंध होंगे। इन परियोजनाओं से स्थानीय समुदाय को पर्यटन आधारित रोजगार प्राप्त होगा और क्षेत्रीय पर्यटन को स्थायित्व के साथ बल मिलेगा। क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण घाेषणाएं होंगी। विशेष पर्यटन प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश के विविध पर्यटन स्थलों, पर्यटन इकाइयों, हॉस्पिटैलिटी ब्रांड्स, होम स्टे, रिसॉर्ट्स, हैंडलूम/हैंडीक्रॉफ्ट, साहसिक गतिविधियों और सांस्कृतिक धरोहरों को समर्पित स्टॉल लगाए जाएंगे।  प्रमुख सचिव शुक्ला ने बताया कि रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में दो महत्वपूर्ण सत्र होंगे। “टूरिज्म इज अ कल्चरल ब्रिज– ब्रांडिंग ग्वालियर एंड हार्टलैंड ऑफ एमपी” विषय पर पैनल डिस्कशन होगा। इसमें ग्वालियर की सांस्कृतिक धरोहर, शास्त्रीय संगीत और स्थापत्य कला को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार होगा। दूसरा पैनल डिस्कशन 'ग्वालियर एंड चंबल राइजिंग– इनबाउंड अपील थ्रू हेरिटेज, लग्जरी एंड एक्सपीरियंस' विषय पर केंद्रित होगा, इसमें विरासत, लग्जरी स्टे, डेस्टिनेशन वेडिंग और अनुभवात्मक पर्यटन जैसे नए आयामों पर संवाद होगा।