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पंजाब की सियासत में बड़ा उलटफेर, मनप्रीत अयाली अमृतपाल सिंह की पार्टी का थामेंगे दामन

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत दाखा से शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बागी विधायक मनप्रीत सिंह अयाली (Manpreet Singh Ayali) आज मंगलवार को वारिस पंजाब दे (Waris Punjab De) में औपचारिक रूप से शामिल होने जा रहे हैं। यह कार्यक्रम चंडीगढ़ में आयोजित होगा, जिसकी अध्यक्षता तरसेम सिंह करेंगे। अयाली ने इस कदम की पुष्टि करते हुए कहा कि वह आज मंगलवार को वारिस पंजाब दे का दामन थामेंगे। पिछले कई महीनों से उनका संगठन के साथ निकट संबंध रहा है। जिला परिषद और पंचायत चुनावों में उनके समर्थित उम्मीदवारों ने भी चुनाव प्रचार के दौरान अमृतपाल सिंह की तस्वीरों का इस्तेमाल किया था। चूंकि वारिस पंजाब दे फिलहाल एक पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है, इसलिए अयाली पर दल-बदल कानून के तहत तत्काल अयोग्यता का खतरा नहीं माना जा रहा। हालांकि, शिरोमणि अकाली दल उनके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर सकता है। 'कई नेता मेरे फैसले का इंतजार कर रहे थे' मनप्रीत अयाली ने दावा किया कि कई राजनीतिक नेता और समर्थक उनके इस फैसले का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में वारिस पंजाब दे में कई बड़े चेहरे शामिल हो सकते हैं। अयाली ने कहा, "वारिस पंजाब दे की जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ बनने जा रही है और आने वाले दिनों में लोग इसका असर देखेंगे। अगले पांच से छह महीनों में कई चर्चित नेता संगठन से जुड़ सकते हैं।" AAP विधायक को लेकर भी दिए संकेत आम आदमी पार्टी के विधायक कुंवर विजय प्रताप के वारिस पंजाब दे नेताओं के साथ देखे जाने संबंधी खबरों पर अयाली ने कहा कि अभी इंतजार करना चाहिए। उन्होंने संकेत दिए कि उनके संगठन से जुड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पंजाब की राजनीति में बढ़ सकती है WPD की पकड़ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनप्रीत अयाली जैसे प्रभावशाली नेता का संगठन से जुड़ना वारिस पंजाब दे के लिए बड़ा राजनीतिक लाभ साबित हो सकता है। आगामी चुनावों से पहले संगठन अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।

मनरेगा की जगह लागू होगी वीबी जीरामजी योजना, 125 दिन रोजगार का प्रावधान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी भत्ता को समय-समय पर मुद्दा बनाया जाता रहा है। अब इसका एक मसौदा तैयार किया गया है। इस मसौदे को प्रस्ताव के रूप में मंजूरी के लिए योगी कैबिनेट में जल्द ही लाया जाएगा। यूपी की योगी सरकार केंद्र द्वारा जारी विकसित भारत-जी राम जी (वीबी जीरामजी) योजना को यूपी में लागू कराने जा रही है। इस योजना की खास बात यह होगी कि फसलों की कटाई-बुवाई के लिए मजदूरों को अपने खेत में काम करने के दौरान खाली रहने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। ग्राम्य विकास विभाग ने इसका मसौदा तैयार कर लिया है और जल्द ही कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराने की तैयारी है। राज्य सरकार को इसे जुलाई से पूरी तरह से लागू करना है। केंद्र सरकार ने मनरेगा के स्थान पर वीबी जीरामजी योजना की शुरुआत की है। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून को राज्यों में अपने यहां लागू करना है। ग्राम्य विकास विभाग ने इसके आधार पर इसका प्रारूप तैयार किया है। इसमें मनरेगा के सभी मजदूरों को शामिल करते हुए योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। इसके साथ ही अन्य नए मजदूरों को भी जोड़ने का काम किया जाएगा। 105 दिन गारंटी वाला रोजगार बुवाई और कटाई के व्यस्त सीजन में खेती में काम करने वाले मजदूरों के लिए कुल 60 दिन का नो वर्क का समय होगा। शेष 305 दिनों में भी मजदूरों को 125 दिन की गारंटी वाला रोजगार दिया जाएगा। दैनिक मजदूरी हर सप्ताह या किसी भी स्थिति में कम करने की तिथि के 15 दिन के अंदर दे दिया जाएगा। वीबी जीरामजी में रोजगार की गारंटी प्रति ग्रामीण परिवार 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। यूपी में भी अब ग्रामीण मजदूरों को इतने दिन का ही रोजगार दिया जाएगा। वीबी जीरामजी योजना में मजदूरों को पूरी तरह से ऑनलाइन डिजिटल भुगतान किया जाएगा। इन कार्यों को दी जाएगी प्राथमिकता इसके साथ ही गड़बड़ी रोकने के लिए इसका सत्यापन भी कराया जाएगा। योजना में मजदूरों से फीडबैक लेकर गड़बड़ियों को रोका जाएगा और खामियों को दूर किया जाएगा। इस योजना में पानी से जुड़े कामों, कृषि और भूजल स्तर में सुधार के कामों को प्राथमिकता दी जाएगी। सड़क और कनेक्टिविटी जैसे कामों में इन्हें लगाया जाएगा। मनरेगा में पंजीकृत मजदूर यूपी में फिलहाल मनरेगा में 2.43 करोड़ मजदूर पंजीकृत हैं। इसमें 1.82 करोड़ जॉब कार्ड जारी किए गए हैं। इसमें सक्रिय मजदूरों की संख्या 1.21 करोड़ है। सक्रिय जॉब कार्ड की संख्या 86.15 लाख है।

देवगांव में बनेगा अत्याधुनिक टेक सेंटर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे शिलान्यास

 खिजरसराय जिले के खिजरसराय प्रखंड अंतर्गत देवगांव स्थित फल्गु नदी के किनारे लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी सेंटर की आधारशिला 15 जून को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा रखी जाएगी. इसको लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री के संभावित आगमन को देखते हुए हेलीपैड निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक तैयारियों के लिए संबंधित अधिकारियों की सक्रियता बढ़ गई है. स्थल पर लगातार अधिकारियों का निरीक्षण एवं समीक्षा जारी है. जीतन राम माझी ने किया स्थल निरीक्षण इसी क्रम में सोमवार को केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी स्थल का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने नीमचक बथानी के एसडीओ एवं अन्य अधिकारियों के साथ परियोजना की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने एमएसएमई विभाग के विकास आयुक्त (डीसी) से भी फोन पर बातचीत कर परियोजना की प्रगति की जानकारी ली. गौरतलब है कि एमएसएमई विभाग द्वारा लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से इस टेक्नोलॉजी सेंटर का निर्माण कराया जाएगा. परियोजना के लिए बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है, जबकि भूमि पूजन के बाद मुख्य निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है. साधु नगर में पेयजल संकट की शिकायत निरीक्षण के दौरान समीपवर्ती साधु नगर की महिलाओं ने केंद्रीय मंत्री से पेयजल समस्या को लेकर शिकायत की. महिलाओं ने बताया कि क्षेत्र में नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

हर्षवर्धन कपूर का बड़ा खुलासा: एक्टिंग नहीं छोड़ी, नई फिल्म पर कर रहे हैं काम

मशहूर एक्टर अनिल कपूर के बेटे हर्षवर्धन कपूर अक्सर लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं. वे आखिरी बार फिल्म ‘थार’ में नजर आए थे. इसके बाद लंबे समय तक उनकी कोई नई फिल्म सामने नहीं आई, जिसे देखकर सोशल मीडिया पर यह अफवाह उड़ने लगी कि उन्होंने एक्टिंग छोड़ दी है. अब हर्षवर्धन ने खुद सामने आकर इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया है और अपने फैंस को एक बहुत बड़ी खुशखबरी दी है. क्या एक्टिंग छोड़ रहे हैं हर्षवर्धन? खुद दिया जवाब हर्षवर्धन कपूर ने इन अफवाहों का जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा. उन्होंने साफ किया, “मैंने एक्टिंग से बिल्कुल भी दूरी नहीं बनाई है, जब से ‘थार’ फिल्म रिलीज हुई थी, मैं उसी दिन से एक नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा हू. ‘थार’ को बनने में 5 साल का समय लगा था. इसी तरह विक्रम को ‘भावेश जोशी’ फिल्म बनाने में कई साल लग गए थे.     हर्षवर्धन ने अपनी अपकमिंग प्रोजेक्ट के बारे में बताया अपने आने वाले काम के बारे में बात करते हुए हर्षवर्धन ने बताया कि वे पिछले 2-3 सालों से अपनी अगली फिल्म पर लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा ठीक वैसे ही, मुझे भी इस नई फिल्म को पूरा करने में अब जाकर 2-3 साल लगे हैं, जिसकी शूटिंग आने वाली 30 जून को खत्म होने जा रही है. मैं खुद इस फिल्म को प्रोड्यूस भी कर रहा हूं. मुझे लगता है कि लोगों को हर साल कलाकारों की कई फिल्में देखने की आदत हो गई है. लेकिन अगर आप ‘भावेश जोशी’, ‘थार’, ‘एके वर्सेस एके’ और ‘रे’ जैसी अलग तरह की फिल्में देखना चाहते हैं, तो यह साल में एक या दो बार मुमकिन नहीं है, यही असल सच्चाई है. खैर, आप सभी का धन्यवाद, और मेरी यह नई फिल्म अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्म है, 100 प्रतिशत यह बेहद अनोखी और बिल्कुल अलग है.” कैसा रहा है हर्षवर्धन का फिल्मी सफर? हर्षवर्धन कपूर ने सीधे एक्टिंग से नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे से अपने करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने रणबीर कपूर की फिल्म ‘बॉम्बे वेलवेट’ में एक असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम सीखा था. इसके बाद साल 2016 में उन्होंने ‘मिर्ज्या’ फिल्म से बतौर हीरो बॉलीवुड में कदम रखा. इसके दो साल बाद वे ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ में नजर आए. इसके बाद उन्होंने नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘एके वर्सेस एके’ और फिर ‘थार’ में अपने एक्टिंग का जलवा दिखाया, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था.

फायर विभाग की कमी दूर करेंगे अग्निवीर? दिल्ली सरकार कर रही विचार

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार राजधानी में अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने के लिए पूर्व अग्निवीरों को दिल्ली फायर सर्विस में परिचालन के पदों पर नियुक्त करने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव सोमवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में सामने आया। इस बैठक की अध्यक्षता उपराज्यपाल टीएस संधू ने की। इस बैठक में हाल ही में दक्षिण दिल्ली में लगी भीषण आग में 22 लोगों की मौत के बाद फायर सर्विस की तैयारियों और संसाधनों की समीक्षा की गई। सोमवार को हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गृह मंत्री आशीष सूद, पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा समेत पुलिस और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। उपराज्यपाल ने फायर विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए पूर्व अग्निवीरों की सेवाएं लेने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया। उपराज्यपाल ने दिया प्रस्ताव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर तरनजीत संधू ने कहा, 'अग्निशमन विभाग के कार्यबल को मजबूत करने के लिए मौजूदा रिक्तियों को भरने की खातिर पूर्व अग्निवीरों की नियुक्ति पर विचार करने का सुझाव दिया।' अधिकारियों ने बताया कि बैठक में अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने, नागरिकों की निगरानी बढ़ाने और रिक्त पदों को भरने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। पूर्व अग्निवीर बनेंगे फायर फाइटर! एक अधिकारी ने बताया, सरकार अब पूर्व अग्निवीरों को फायर फाइटर के रूप में नियुक्त करने की प्रक्रिया, आवश्यक प्रशिक्षण और सेवा शर्तों का खाका तैयार करेगी। अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की चार वर्ष के लिए सशस्त्र बलों में भर्ती की जाती है। 1,030 पद हैं खाली दिल्ली फायर सर्विस लंबे समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। विभाग में स्वीकृत 3,633 पदों में से 1,030 पद खाली हैं, जबकि 412 पद संविदा कर्मियों के माध्यम से भरे गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण फायर ऑपरेटर श्रेणी में 2,367 स्वीकृत पदों में से 552 पद रिक्त हैं। विभाग में वर्तमान में 312 संविदा फायर ऑपरेटर कार्यरत हैं। नियमित भर्ती प्रक्रिया आखिरी बार वर्ष 2011-12 में हुई थी। फायर स्टेशनों की संख्या बढ़ाने पर भी चर्चा बैठक में राजधानी में फायर स्टेशनों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। वर्तमान में दिल्ली में 71 फायर स्टेशन हैं, जिनमें 67 नियमित और 4 डे-टाइम स्टेशन शामिल हैं। वर्ष 2011 में गृह मंत्रालय द्वारा कराए गए एक अध्ययन में दिल्ली के लिए 99 फायर स्टेशनों की आवश्यकता बताई गई थी। गृह मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली फायर सर्विस अधिनियम, 2007 की धारा 32 को सख्ती से लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत राजधानी की सभी बहुमंजिला इमारतों में अग्नि सुरक्षा और अग्नि रोकथाम उपायों को अनिवार्य बनाने की बात कही गई। वर्तमान नियमों के अनुसार 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए फायर सेफ्टी एनओसी आवश्यक है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से अधिक इमारतें अग्नि सुरक्षा के दायरे में आएंगी और लोगों की सुरक्षा बेहतर होगी।  

ओंकारेश्वर के विकास को मिलेगी नई रफ्तार, हेलीपैड और अस्पताल निर्माण को मंजूरी

भोपाल  प्रदेश में सिंहस्थ 2028 के लिए बनाई गई मंत्रिमंडलीय समिति ने ओंकारेश्वर में बड़वाह, ओंकारेश्वर और खेड़ी घाट क्षेत्र को मिलाकर नया विकास प्राधिकरण गठित करने को मंजूरी दे दी है। इससे खंडवा और खरगोन जिले के विकास कार्यों में तेजी आएगी। इसके साथ ही समिति ने ओंकारेश्वर में हेलीपैड और अस्पताल बनाने को भी स्वीकृति दी है। यह निर्माण कार्य किसी भी तरह की आपदा के दौरान सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह निर्णय आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सिंहस्थ 2028 के लिए गठित मंत्रिमंडलीय समिति की छठवीं बैठक में लिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में सिंहस्थ के लिए 17 नए कार्यों को स्वीकृति दी गई। इनमें उज्जैन सहित ओंकारेश्वर के कार्य भी शामिल हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओंकारेश्वर में बड़ा अस्पताल बनाने और हेलीपैड बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह निर्माण आपदा के स्थिति में विशेष रूप से सहायक होंगे। विकास प्राधिकरण को मंजूरी मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़वाह, ओंकारेश्वर, खेड़ी घाट क्षेत्र के आसपास होने वाले निर्माण कार्यों के लिए अलग से प्राधिकरण गठित किया जाए। इससे खंडवा- खरगोन जिलों में होने वाले कार्यों का बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा और विकास गतिविधियां समय से पूर्ण करने में मदद मिलेगी। वैकल्पिक मार्ग विकसित करने के भी निर्देश मुख्यमंत्री डॉ यादव ने ओंकारेश्वर के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में शिप्रा नदी के साथ विकसित हो रहे घाटों का निर्माण चरणबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। घाटों तक आने-जाने के मार्गों और पार्किंग व्यवस्था का निर्माण भी साथ-साथ किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि शिप्रा नदी पर बन रहे घाटों के पास मौजूद आश्रमों तथा गुरुकुलों को घाटों के प्रबंधन से जोड़ा जाए। इससे आश्रम और गुरुकुलों को मदद मिलेगी और सिंहस्थ के बाद भी घाटों का लंबे समय तक उपयोग हो सकेगा।

मजदूरों के लिए खुशखबरी! पूरे पंजाब में 10 लाख श्रमिकों का निशुल्क पंजीकरण करेगी सरकार

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने  पूरे पंजाब में 10 लाख निर्माण मजदूरों के मुफ्त पंजीकरण और पुराने पंजीकरण को नवीनीकृत करने के लिए बड़ी मुहिम का ऐलान किया. इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांवों और शहरी क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाकर कल्याण योजनाओं का लाभ सीधे मजदूरों तक पहुंचाया जाए. पंजाब बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार हर निर्माण मजदूर को सामाजिक सुरक्षा लाभ, कल्याण सहायता और कौशल विकास के अवसर प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है।  इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड का गठन निर्माण मजदूरों के पंजीकरण, वित्तीय सहायता और कल्याण योजनाओं के माध्यम से उनकी भलाई, सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए किया गया है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आवश्यक धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद लंबे प्रोसेसिंग समय के कारण मजदूरों के लिए कल्याण योजनाएं आवश्यक सफलता हासिल नहीं कर सकीं।  कल्याण योजनाओं का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “इस समय बी.ओ.सी.डब्ल्यू. वेलफेयर बोर्ड के पास 2.21 लाख मजदूर पंजीकृत हैं, जो पंजाब भर में चल रही बड़े पैमाने की निर्माण गतिविधियों और शहरीकरण को देखते हुए काफी कम है. पंजीकरण में सुधार के लिए राज्य भर में और पंजीकरण शिविर लगाए जाएंगे।  मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि पंजाब सरकार इस विशेष मुहिम के दौरान मजदूरों पर पंजीकरण शुल्क का बोझ खत्म करेगी ताकि अधिक से अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सके. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह देखा गया है कि मजदूर अक्सर पंजीकरण कराने में हिचकते हैं क्योंकि उन्हें पंजीकरण शुल्क के रूप में 145 रुपये जमा कराने होते हैं. पंजीकरण कराने और नवीनीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए इस विशाल पंजीकरण मुहिम के दौरान आवेदकों को यह शुल्क जमा कराने की आवश्यकता नहीं होगी. इस मुहिम के दौरान लगभग 10 लाख मजदूरों को पंजीकृत किया जाएगा और पंजाब सरकार इसके लगभग 15 करोड़ रुपये के वित्तीय खर्च को खुद सहन करेगी।  उन्होंने आगे कहा कि पंजाब सरकार पंजीकरण के बाद भी मजदूरों की मदद करना जारी रखेगी. उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार उन सभी मजदूरों का पंजीकरण शुल्क का खर्च उठाएगी, जो एक साल के अंदर किसी भी लाभ का फायदा नहीं उठाते. श्रम विभाग को गांवों में शाम के समय विशेष शिविर लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं क्योंकि मजदूर उस समय काम से लौटते हैं और इससे अधिक से अधिक पंजीकरण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अधिकारियों को लेबर चौकों पर मजदूरों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में सुधार करने के निर्देश भी दिए. उन्होंने कहा, “लेबर चौकों पर शेड बनाए जाने चाहिए और पीने के पानी की सुविधा मुहैया कराई जानी चाहिए ताकि मजदूरों को काम की प्रतीक्षा करते समय किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।  मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने आवेदनों के निपटान में होने वाली देरी को कम करके कल्याण योजनाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए पहले ही महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “वित्तीय वर्ष 2022-23 में मजदूरों के लिए कल्याण योजनाओं का प्रोसेसिंग समय 203 दिन था. पंजाब सरकार ने अब इसे घटाकर 73 दिन कर दिया है. लंबा प्रोसेसिंग समय मजदूरों के लिए कल्याण योजनाओं का लाभ लेने में बड़ी बाधा थी, इसलिए यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है।  कौशल विकास के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बोर्ड को 50,000 पंजीकृत निर्माण मजदूरों का विवरण ‘पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन’ के साथ साझा करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा, “बोर्ड को कौशल प्रशिक्षण के लिए 50,000 पंजीकृत निर्माण मजदूरों का डेटा पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन को उपलब्ध कराना चाहिए. यह प्रशिक्षण केवल निर्माण स्थलों, पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन के प्रशिक्षण केंद्रों और बी.ओ.सी.डब्ल्यू. वेलफेयर बोर्ड द्वारा लगाए गए शिविरों में ही दी जानी चाहिए।  उन्होंने कहा कि मजदूरों को ऐसे विशेष क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, जो उनके कौशल और कमाई की क्षमता को बढ़ा सकें. उन्होंने कहा, “राजगीरी (मेसनरी), बार बेंडिंग एंड फिक्सिंग, शटरिंग कारपेंटरी, स्कैफोल्डिंग (पैड़ बांधना), क्वालिटी एशोरेंस, कंस्ट्रक्शन पेंटिंग, कंस्ट्रक्शन इलेक्ट्रिकल वर्क्स, सर्वेक्षण, सड़कों और रनवे का निर्माण, आंतरिक और बाहरी फिनिशिंग, फैब्रिकेशन, ड्राफ्टिंग, शटरिंग कारपेंटरी और अन्य संबंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए कि महिला मजदूरों को पंजाब सरकार की प्रमुख कल्याण योजनाओं का लाभ मिले. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “बोर्ड को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महिला मजदूरों को ‘मांवा-धीयां सत्कार योजना’ के तहत वित्तीय सहायता भी मिले.” बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।   

अमित बजाज के ठिकानों पर ED का छापा, दस्तावेजों की गहन पड़ताल जारी

जालंधर  पंजाब के जालंधर में ठेकेदार अमित बजाज के न्यू जवाहर नगर स्थित आवास पर आज सुबह करीब 8:30 बजे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की है। अमित बजाज इनकम टैक्स, जीएसटी (GST) और वैट (VAT) के जाने-माने वकील हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बजाज शहर के कई बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के टैक्स संबंधी मामले देखते हैं। सूत्रों के अनुसार, इन पूंजीपतियों द्वारा किए गए निवेश (Investment) और टैक्स में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका है, जिसे लेकर ईडी यह जांच कर रही है। फिलहाल, ईडी की टीमें एडवोकेट के घर पर मौजूद हैं और रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। इस छापेमारी के बाद से ही शहर के कारोबारी और कानूनी जगत में हड़कंप मच गया है। टैक्स में गड़बड़ी की जांच जारी अमित बजाज नगर निगम के ठेकेदार भी है। वह शहर के कई मशहूर उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के टैक्स संबंधी मामले देखते हैं और उन पर पूंजीपतियों की इन्वेस्टमेंट और टैक्स में गड़बड़ी की जांच चल रही है। ईडी ने उनके घर न्यू जवाहर नगर और पास ही स्थित ऑफिस पर आज सुबह 8:30 बजे रेडी शुरू की है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक्शन जारी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (Hampton Sky Realty Ltd.) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR में 6 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जारी जांच के क्रम में लुधियाना और जालंधर (पंजाब), बरेली (उत्तर प्रदेश) तथा दिल्ली-नोएडा क्षेत्र में एक साथ छापामारी की। जांच एजेंसी के अनुसार, जिन परिसरों पर तलाशी ली जा रही है उनमें मामले से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के आवासीय एवं व्यावसायिक कार्यालय शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों की जांच के तहत की जा रही है। तलाशी के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। फिलहाल ED की कार्रवाई जारी है और एजेंसी द्वारा बरामद सामग्री का विश्लेषण किया जा रहा है। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है।  

घर-घर कूड़ा उठान व्यवस्था होगी मजबूत, हाई पावर कमेटी लगाएगी टेंडर पर मुहर

गुरुग्राम साइबर सिटी में घर-घर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था को स्थायी और बेहतर बनाने पर मंगलवार को फैसला होगा। नगर निगम गुरुग्राम द्वारा जारी 606 करोड़ रुपये के डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन टेंडर को चंडीगढ़ में होने वाली हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी की बैठक में मंजूरी मिलने की संभावना है। वहीं, मंजूरी मिलने के बाद अगले पांच वर्षों के लिए प्राइवेट एजेंसियों को काम सौंप दिया जाएगा, जिससे शहर में कूड़ा उठान व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जैसे ही बैठक में टेंडर पर मुहर लगेगी। एजेंसियां तीन महीने में काम शुरू कर देगी। नगर निगम क्षेत्र में 14 जून 2024 के बाद से कोई स्थायी एजेंसी कार्यरत नहीं है। पिछले करीब दो वर्षों से कूड़ा कलेक्शन का कार्य अस्थायी व्यवस्था के तहत विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से कराया जा रहा है। स्थायी एजेंसी नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में समय पर कूड़ा उठान और निगरानी से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं। चार जोन को दो क्लस्टर में बांटा नई व्यवस्था के तहत नगर निगम ने शहर के चारों जोनों को दो अलग-अलग क्लस्टर में विभाजित किया है। जोन-1 और जोन-2 को एक क्लस्टर तथा जोन-3 और जोन-4 को दूसरे क्लस्टर में शामिल किया गया है। पहले क्लस्टर के लिए चार निजी एजेंसियों ने आवेदन किया है, जबकि दूसरे क्लस्टर के लिए दो एजेंसियों ने भागीदारी की है। 606 करोड़ रुपये का है टेंडर नगर निगम ने दोनों क्लस्टरों के लिए कुल 606 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। इसमें जोन-एक और जोन-दो के क्लस्टर के लिए 295 करोड़ रुपये तथा जोन-तीन और जोन-चार के क्लस्टर के लिए 311 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। टेंडर आवंटन के बाद संबंधित एजेंसियां अगले पांच वर्षों तक कूड़ा कलेक्शन का कार्य करेंगी। गीले और सूखे कचरे के अलग संग्रह पर रहेगा जोर नई डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था में स्रोत स्तर पर ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करने पर विशेष फोकस रहेगा। निगम प्रशासन का मानना है कि इससे कचरा प्रबंधन व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा मिलेगा। हाई पावर कमेटी देगी अंतिम मंजूरी, तीन महीने में शुरू होगा काम नगर निगम के चीफ इंजीनियर विजय ढाका ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी में टेंडर सौंपने पर निर्णय होगा। कमेटी की मंजूरी के बाद चयनित एजेंसियों को कार्य आवंटित कर दिया जाएगा और नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। तीन महीने के अंदर एजेंसियां काम शुरू करेंगी।  

निवेश बढ़ाने की तैयारी में JIADA, 99 साल की लीज समेत कई सुझाव मिले

 रांची झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (JIADA) राज्य में निवेश को बढ़ावा देने और नियमों को सरल बनाने के लिए नया ‘जियाडा रेगुलेशन 2026’ लाने की तैयारी में है. इस नए रेगुलेशन का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सोमवार को रांची के होटल रेडिसन ब्लू में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में जियाडा के एमडी वरुण रंजन ने विभिन्न उद्योग संगठनों के उद्यमियों से सीधा संवाद किया और उनसे पूछा कि वे कैसा रेगुलेशन चाहते हैं? एमडी ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य निवेश को आसान बनाना और उद्यमियों की समस्याओं को दूर करना है. 99 साल के लिए लीज की मांग कार्यक्रम में शामिल FJCCI, JASSIA और AIADA के प्रतिनिधियों ने जियाडा के सामने अपनी कई महत्वपूर्ण मांगें और सुझाव रखें. जिसमें उद्यमियों ने कहा कि पहले औद्योगिक क्षेत्रों में 99 साल की लीज पर जमीन मिलती थी, जिसे घटाकर 30 साल कर दिया गया है. बिहार समेत कई राज्यों ने इसे दोबारा 99 साल कर दिया है, झारखंड में भी यही व्यवस्था लागू होनी चाहिए. साथ ही साथ निवेशकों ने ऐसे ‘प्लग एंड प्ले’ परिसरों की मांग की जहां विकसित भूमि, तैयार शेड, बिजली, पानी, सड़क और अपशिष्ट प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) जैसी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हों, ताकि उद्योग तुरंत शुरू हो सकें. ओनरशिप ट्रांसफर (स्वामित्व हस्तांतरण) को आसान बनाने के लिए ज्वाइंट वेंचर के प्रावधान शामिल करने का भी सुझाव दिया गया. इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में कर्मचारियों के लिए 10 फीसदी आवासीय सुविधा की मांग की गई. इस पर जियाडा की ओर से बताया गया कि इंडस्ट्रियल एरिया में वर्किंग वुमेंस हॉस्टल का निर्माण कराया जा रहा है. आदिवासी उद्यमियों की अनदेखी का लगा आरोप एक तरफ जहां जियाडा नए नियमों पर मंथन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ‘ट्राईबल इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ (TICC&I – टिक्की) झारखंड चैप्टर ने इस बैठक को लेकर सरकार और अधिकारियों के खिलाफ गहरी नराजगी व्यक्त की है. टिक्की ने सरकार पर आदिवासी उद्यमियों की घोर उपेक्षा करने का आरोप लगाया है. टिक्की के प्रदेश अध्यक्ष बैद्यनाथ मांडी ने कहा कि 12 जुलाई 2019 को जियाडा के आठवीं निदेशक मंडल की बैठक में एसटी-एससी (ST-SC) उद्यमियों को औद्योगिक क्षेत्रों में 50% की छूट पर जमीन उपलब्ध कराने का फैसला सर्वसम्मति से पास हुआ था, लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी इसे धरातल पर लागू नहीं किया गया. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि झारखंड को बने 25 वर्ष हो गए, लेकिन आदिवासियों के लिए कोई स्पष्ट उद्योग-व्यापार नीति नहीं बनी. इस महत्वपूर्ण बैठक में भी टिक्की जैसे बड़े स्टेकहोल्डर को आमंत्रित नहीं किया गया. इस बात का समर्थ करने वालों में बसंत तिर्की, राज मार्शल मार्डी, गोमिया सुंडी सहित कई अन्य सदस्य मौजूद थे.