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रेलवे में 5600 नए पर्यवेक्षक पदों पर जल्द भर्ती की मांग, बोनस समेत कई मुद्दे उठे

 धनबाद रेल कर्मचारियों के दुर्गापूजा बोनस का भुगतान पुराने सीलिंग हटा कर नये सीलिंग के आधार पर करने की मांग रेलवे बोर्ड चेयरमैन तक पहुंच गई है। आल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन-एआइआरएफ और रेलवे बोर्ड चेयरमैन समेत बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई स्थाई वार्ता तंत्र की बैठक में फेडरेशन ने नये सीलिंग के साथ बोनस की मांग की है। पर्यवेक्षकों के नये 5600 पद सृजित किये गये हैं। बैठक में सृजित पदों पर शीघ्र बहाली की भी सिफारिश की है। फेडरेशन के जोनल सचिव ओपी शर्मा और ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन धनबाद मंडल के मीडिया प्रभारी एनके खवास ने बैठक की जानकारी दी दोनों ने बताया कि एआइआरएफ के राष्ट्रीय महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा की मौजूदगी में हुई बैठक में रेलवे को सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित कर देने वाले पूर्व मध्य रेलवे में खाली पदों को जल्द भरने, सुरक्षा कैटेगरी के रिक्त पदों पर जल्द बहाली, ट्रैकमैन के पेट्रोलिंग बीट को 12 किमी करने सहित वेतन आयोग से संबंधित मुद्दों को उठाया गया। लंबित यात्रा भत्ता का मुद्दा बैठक में गूंजाजिसमें बताया गया कि यात्रा भत्ता बंद होने से रेलकर्मियों मे काफी रोष है। कई विभागों में रेलवे बोर्ड से 2022 में जारी आदेश को अब तक लागू नहीं किया जा सका है। बढ़े हुए और नये कार्यों के लिए नये पद सृजित करने, ओवरटाइम भत्ता, सीटीए आदि के लिए क्षेत्रीय रेलों को पर्याप्त धनराशि आवंटित करने, लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट को किलोमीटर भत्ते के बकाये राशि का भुगतान करने की मांगों पर बैठक में वकालत की गई। सीबीटी परीक्षा की उत्तर-पत्रक तत्काल प्रकाशित करने, रेलवे क्वार्टर की मरम्मत एवं रखरखाव के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित करने, जर्जर रेलवे क्वार्टर में रहने वालों को नये क्वार्टर आवंटित करने, क्षेत्रीय रेल एवं मंडलों की आवश्यकता के अनुसार रिक्त पद भरे जाने, कैडर पुनर्गठन समिति की रिपोर्ट शीघ्र प्रकाशित करने जैसी मांगों से अवगत कराया गया। कर्मचारियों की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रेलवे से अनुबंधित रेफरल अस्पतालों को भुगतान न होने के कारण कर्मचारियों को कैशलेश उपचार में आ रही समस्याओं का समाधान तथा हर स्वास्थ्य केंद्र पर अनुबंधित प्राइवेट अस्पतालों की सूची लगाने का भी सुझाव दिया गया।

मराठी सिनेमा की बड़ी उपलब्धि, ‘गोंधल’ ऑस्कर 2026 में करेगी भारत का प्रतिनिधित्व

पटना ऑस्कर 2026 में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के तौर पर मराठी फिल्म ‘गोंधल’ का चयन किया गया है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) की चयन समिति ने फिल्म को अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना है। इसकी जानकारी फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया और इम्पा के अध्यक्ष अभय सिन्हा ने दी। मराठी सिनेमा के लिए बड़ा पल ‘गोंधल’ के चयन के बाद मराठी फिल्म उद्योग में उत्साह का माहौल है। अभय सिन्हा ने फिल्म की पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए इसे मराठी सिनेमा के साथ-साथ भारतीय फिल्म उद्योग के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘गोंधल’ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा की प्रतिभा और रचनात्मकता को मजबूती से प्रस्तुत करेगी। फिल्म के ऑस्कर सफर को लेकर अब दर्शकों की नजर आगे की प्रक्रिया पर है। 14 सदस्यीय समिति ने किया चयन ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुनने के लिए फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने 14 सदस्यीय चयन समिति गठित की थी। प्रसिद्ध फिल्मकार पी. शेषाद्री इस समिति के अध्यक्ष थे। समिति में फिल्म उद्योग के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े निर्देशक, अभिनेता, निर्माता, सिनेमैटोग्राफर, संपादक और अन्य अनुभवी सदस्य शामिल थे। इसी समिति ने ऑस्कर के लिए भेजी गई फिल्मों में से ‘गोंधल’ का चयन किया। 33 फिल्मों में से चुनी गई ‘गोंधल’ इस वर्ष ऑस्कर की आधिकारिक प्रविष्टि के लिए फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया को कुल 33 फिल्मों की प्रविष्टियां मिली थीं। इनमें 14 हिंदी फिल्मों के अलावा अलग-अलग भारतीय भाषाओं की फिल्में भी शामिल थीं। करीब दो घंटे की अवधि वाली मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को इन्हीं प्रविष्टियों में से चयनित किया गया। हालांकि घोषणा के दौरान फिल्म की कहानी से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई। गांव की पृष्ठभूमि में बुनी संगीतमय कहानी FFI के उपाध्यक्ष निशांत उज्ज्वल ने बताया कि ‘गोंधल’ महाराष्ट्र के एक सुंदर गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित आकर्षक संगीतमय कहानी है। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी और उसकी प्रस्तुति प्रभावशाली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चयन समिति द्वारा भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि के रूप में चुनी गई ‘गोंधल’ देश के लिए ऑस्कर का गौरव लेकर आएगी। ऑस्कर चयन में बिहार का भी कनेक्शन ‘गोंधल’ के ऑस्कर चयन से जुड़े इस महत्वपूर्ण मौके पर बिहार के दो लोगों की भी अहम भूमिका है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अभय सिन्हा हैं, जबकि पटना के निशांत उज्ज्वल संस्था के उपाध्यक्ष हैं। निशांत उज्ज्वल ने फिल्म के चयन पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ‘गोंधल’ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के लिए गौरव हासिल करेगी। FFI की टीम में ये पदाधिकारी भी शामिल फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की टीम में धर्मेंद्र मेहरा सचिव, रवि कोटरकर सदस्य, संग्राम शिर्के कोषाध्यक्ष, टी. पी. अग्रवाल संरक्षक और हिराचंद उपाध्यक्ष के पद पर हैं। ऑस्कर चयन समिति की अध्यक्षता पी. शेषाद्री ने की। समिति के सामने आई 33 फिल्मों में से ‘गोंधल’ का चयन अब मराठी सिनेमा के लिए एक अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। अब आगे क्या होगा? भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुने जाने के बाद ‘गोंधल’ का अगला पड़ाव ऑस्कर की आगे की प्रक्रिया होगी। फिल्म के चयन ने भारतीय दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। मराठी सिनेमा की यह फिल्म अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा की कहानी और रचनात्मकता को सामने रखने की कोशिश करेगी। नजर इस बात पर रहेगी कि ऑस्कर की आगे की प्रक्रिया में ‘गोंधल’ कितना आगे जाती है।  

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा पर्यटन इकाइयॉं लीज़ पर देने की तैयारी, निवेशकों के लिए खुलेगा नया अवसर

रायपुर  छत्तीसगढ़ में पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देने और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की विभिन्न पर्यटन इकाइयों को लीज़ पर दिए जाने की प्रक्रिया को निवेशकों के लिए सरल एवं सुगम बनाने के उद्देश्य से ‘एक्सप्लोर, इनवेस्ट, ट्रांसफार्म’ थीम पर प्री-एनआईटी (नोटिस इनवाइटिंग टेंडर) कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कॉन्फ्रेंस में निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स को पर्यटन बोर्ड की विभिन्न प्रॉपर्टीज, लीज़ एवं टेंडर प्रक्रिया, उपलब्ध सरकारी प्रोत्साहनों, पीपीपी मॉडल तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। साथ ही पर्यटन क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाकर पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को नई गति देने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। पर्यटन बोर्ड की प्रॉपर्टीज में निवेश के अवसरों की दी जानकारी कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे के प्रस्तुतीकरण से हुई। उन्होंने उपस्थित निवेशकों एवं स्टेकहोल्डर्स को बोर्ड के विभिन्न होटल, मोटल, रिसॉर्ट एवं पर्यटन इकाइयों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रॉपर्टीज की लोकेशन, उपलब्ध सुविधाओं, प्रमुख विशेषताओं तथा पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में उनके विकास की संभावनाओं से अवगत कराया। श्री चौबे ने बताया कि छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की कई प्रॉपर्टीज प्रमुख पर्यटन स्थलों और आकर्षक लोकेशन पर स्थित हैं। निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं निवेश के माध्यम से इन इकाइयों में पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं का विकास किया जा सकता है। उन्होंने लीज़ एवं टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स की जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों का समाधान भी किया। उन्होंने कहा कि बोर्ड का प्रयास है कि निवेशकों को लीज़ प्रक्रिया से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां स्पष्ट, पारदर्शी और सुगम तरीके से उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अधिक से अधिक योग्य निवेशक इसमें भाग ले सकें और पर्यटन इकाइयों का बेहतर संचालन एवं विकास सुनिश्चित हो सके। पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को मिल रही नई दिशा पर्यटन एवं संस्कृति सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने निवेशकों एवं स्टेकहोल्डर्स को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार एवं राज्य नेतृत्व के मार्गदर्शन में पर्यटन उद्योग को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद छत्तीसगढ़ स्पष्ट रणनीति के साथ पर्यटन विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य में पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय   संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और विविध पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़कर पर्यटन गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य में सुरक्षा एवं परिस्थितियों में सुधार के साथ पर्यटन गतिविधियों में भी बढ़ोतरी हुई है और निवेशकों की रुचि पर्यटन क्षेत्र में बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य में पर्यटन क्षेत्र को निवेश के लिए अनुकूल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट्स और अन्य प्रॉपर्टीज की आकर्षक लोकेशन निजी क्षेत्र के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती हैं। पर्यटन को अनुभव और रोजगार से जोड़ने पर जोर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विविधताओं से समृद्ध राज्य है। यहां के पर्यटन स्थल केवल भ्रमण के केंद्र नहीं हैं, बल्कि राज्य की संस्कृति, परंपराओं,   प्राकृतिक विरासत और स्थानीय जीवन को जानने-समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के होटल एवं रिसॉर्ट अपनी आकर्षक लोकेशन के कारण पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। बोर्ड का प्रयास है कि इन प्रॉपर्टीज का विकास इस तरह किया जाए कि वे पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ छत्तीसगढ़ के पर्यटन अनुभव को भी और समृद्ध बनाएं। श्री शर्मा ने कहा कि पर्यटन के विकास के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़ते हैं। राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। सिंगल विंडो से निवेश प्रक्रिया होगी आसान कॉन्फ्रेंस में निवेशकों के लिए प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने पर विशेष जोर दिया गया। निवेशकों को विभिन्न विभागों और प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम हो, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से निवेश प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने की दिशा में जानकारी साझा की गई। इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न प्रक्रियाओं एवं आवश्यक अनुमतियों को सरल बनाना तथा पर्यटन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना है। इससे निवेशकों को आवश्यक जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने और परियोजनाओं की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है। सब्सिडी और सरकारी प्रोत्साहनों की जानकारी कार्यक्रम में सीएसआईडीसी के उप संचालक श्री अमेय त्रिपाठी ने छत्तीसगढ़ में पर्यटन एवं संबंधित क्षेत्रों में निवेश के लिए उपलब्ध सब्सिडी, प्रोत्साहन एवं अन्य सरकारी सुविधाओं की जानकारी दी। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पात्र परियोजनाओं, निवेश सुविधाओं तथा विभिन्न प्रकार की सहायता और प्रोत्साहन योजनाओं से संबंधित जानकारी साझा की गई। पीपीपी मॉडल से पर्यटन विकास को नई गति देने पर चर्चा अर्नेस्ट एंड यंग के पार्टनर एवं पीपीपी एक्सपर्ट श्री अंकुर गर्ग ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने पीपीपी मॉडल की संरचना, सरकारी एवं निजी क्षेत्र की भूमिका, निवेश, परियोजना संचालन और राजस्व मॉडल सहित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने पर्यटन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं निवेश का उपयोग करते हुए सुविधाओं के विकास और संचालन को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। कॉन्फ्रेंस में पीपीपी मॉडल को पर्यटन क्षेत्र में निवेश और अधोसंरचना विकास के एक संभावित माध्यम के रूप में समझाया गया। डिजिटल पहचान सत्यापन से पर्यटन सेवाओं को सुगम बनाने पर जोर कार्यक्रम में यूआईडीएआई दिल्ली के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने आधार आधारित डिजिटल एवं ऑफलाइन वेरिफिकेशन व्यवस्था की उपयोगिता के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल पहचान सत्यापन की व्यवस्था पर्यटन क्षेत्र के साथ-साथ पुलिस एवं अन्य सरकारी विभागों के लिए भी उपयोगी हो सकती है। उन्होंने सिक्योर क्यूआर कोड के माध्यम से दस्तावेजों की प्रामाणिकता जांचने की प्रक्रिया की जानकारी दी। इससे अधिकृत संस्थाओं को पहचान एवं दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया … Read more

ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना, 289 करोड़ बकाया चुकाने पर मिलेगा फायदा

पटना  ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने बड़ी राहत दी है। वर्ष 2024-25 तक की बकाया राशि के एकमुश्त समाधान के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की गई है। इसके तहत बकाया राशि जमा करने वाले ईंट-भट्ठा संचालकों को ब्याज में 85 करोड़ रुपये तक की छूट दी जाएगी। योजना की अवधि 21 सितंबर से 20 दिसंबर 2026 तक रहेगी। खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने शुक्रवार को अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। पेंडिंग था 316.66 करोड़ का राजस्व मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पुराने बकाये का समाधान कर राजस्व वसूली को आसान बनाना है। विभाग के अनुसार, ईंट-भट्ठों से कुल 316.66 करोड़ रुपये की राशि राजस्व संग्रह के लिए लंबित थी। इसमें से 27.28 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। अभी 289.38 करोड़ रुपये की राशि जमा होनी बाकी है। निर्धारित समय सीमा में एकमुश्त समाधान राशि जमा करने पर बकाया में शामिल ब्याज की राशि माफ कर दी जाएगी। विभाग के अनुसार, जिन ईंट-भट्ठों के खिलाफ 31 अगस्त 2026 तक बकाया स्वामित्व राशि नहीं जमा करने के कारण नीलाम पत्र वाद दर्ज हो चुका है, वे भी योजना के दायरे में आएंगे। एकमुश्त राशि जमा करने के साथ जिला खनिज फाउंडेशन, आयकर और अन्य करों का भुगतान करना जरूरी होगा। इसके बाद संबंधित खनन पदाधिकारी नीलाम पत्र पदाधिकारी को रिपोर्ट देंगे। इसके आधार पर नीलाम पत्र वाद का निस्तारण किया जा सकेगा। योजना के लिए सभी खनिज विकास पदाधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया गया है

योगी सरकार शनिवार को 818 अभ्यर्थियों को देगी नौकरी की सौगात, मुख्यमंत्री देंगे नियुक्ति पत्र

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगार और सरकारी सेवाओं से जोड़ने की दिशा में शनिवार को एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शानिवार को लोकभवन सभागार में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों में चयनित 21 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे जबकि शेष 797 अभ्यर्थियों को विभाग द्वारा नियुक्ति पत्र दिया जाएगा, कुल 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। 19 सितंबर को आयोजित होने वाले नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग, उत्तर प्रदेश उद्योग निदेशालय, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं एवं आयुष विभाग से जुड़े विभागों के अभ्यर्थी शामिल होंगे।  व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के 48 नव चयनित अभ्यर्थियों को दिया जाएगा नियुक्ति पत्र नियुक्ति पत्र पाने वाले अभ्यर्थियों में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के तहत विभिन्न ट्रेडों के अनुदेशक भी शामिल हैं। इस श्रेणी में कुल 48 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इनमें मैकेनिक (ट्रैक्टर), पेंटर (सामान्य), सर्वेयर, मैकेनिकल मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, लेदर गुड्स मेकर, वायरमैन और प्लंबर जैसे पद शामिल हैं। प्लंबर के पद पर चयनित अभ्यर्थियों की संख्या 31 है, जबकि मैकेनिक (ट्रैक्टर) के छह, वायरमैन के चार और पेंटर (सामान्य) के चार अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। इसके अलावा सर्वेयर, मैकेनिकल मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, लेदर गुड्स मेकर के एक-एक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। इन नियुक्तियों से विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। वहीं अलग-अलग ट्रेडों में अनुदेशकों की नियुक्ति से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को संबंधित क्षेत्रों में बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा।  स्वास्थ्य विभाग में 357 एक्सरे-टेक्नीशियन को मिलेगा नियुक्ति पत्र कार्यक्रम में उद्योग विभाग के भी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश उद्योग निदेशालय, कानपुर के तहत सहायक सांख्यिकीय अधिकारी के नौ पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। इन सहायक सांख्यिकीय अधिकारियों की नियुक्ति से विभागीय स्तर पर आंकड़ों के संकलन, विश्लेषण और विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों से संबंधित सांख्यिकीय कार्यों को गति मिलेगी। इसके साथ ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के 357 एक्सरे-टेक्नीशियन के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। इसके अलावा आयुष विभाग में होम्योपैथिक फार्मासिस्ट के 361, होम्योपैथिक प्रोफेसर के चार, आयुर्वेद प्रोफेसर के पांच, आयुर्वेद रीडर के 22, यूनानी प्रोफेसर के एक, यूनानी रीडर के एक और यूनानी लेक्चरर के 10 पदों पर चयनित कुल 404 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। एक नजर में नियुक्तियां –  व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के विभिन्न ट्रेडों में अनुदेशक : 48 – उद्योग विभाग में सहायक सांख्यिकीय अधिकारी : 9 – चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में एक्सरे-टेक्नीशियन : 357 – होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी समेत विभिन्न पद : 404

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह संपन्न, राज्यपाल पटेल ने युवाओं को दिया संदेश

ज्ञान, प्रतिभा और संकल्प से युवा विकसित भारत के निर्माण में दें योगदान : राज्यपाल पटेल बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह सम्पन्न भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि युवाओं को अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग व्यक्तिगत सफलता के साथ समाज, पर्यावरण और राष्ट्र के हित में करना चाहिए। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और जनसेवा की भावना महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से सफलता के साथ विनम्रता बनाए रखने तथा माता-पिता, शिक्षकों और समाज के योगदान का सदैव स्मरण रखने का आह्वान किया। राज्यपाल पटेल ने यह बात बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। दीक्षांत कार्यक्रम का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार को किया गया। राज्यपाल पटेल ने महान स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद् बरकतउल्लाह जी के देश प्रेम तथा अपनी माटी की सेवा के जज्बे का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत, अनुशासन और लगन का उत्सव है, जो उनके जीवन में नई जिम्मेदारियों और अवसरों के द्वार खोलता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की यात्रा अलग होती है। उपलब्धियों पर गर्व करने के साथ माता-पिता के त्याग और शिक्षकों के सहयोग के लिए सदैव आभारी रहना चाहिए। वे जहाँ भी जाएँ, अपने विश्वविद्यालय और परिवार की गरिमा बढ़ाने का प्रयास करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षा व्यवस्था का केवल सूचना और ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं रही, बल्कि सत्य की खोज, चरित्र निर्माण और लोक कल्याण का मार्ग रही है। गुरु-शिष्य परंपरा में समानता, अनुशासन और चरित्र निर्माण को महत्व दिया गया। श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा का गुरु सांदीपनि के आश्रम में समान शिक्षा प्राप्त करने का प्रसंग इसका प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को वर्तमान चुनौतियों के समाधान और भविष्य के नवाचार का माध्यम बनाना होगा। राज्यपाल पटेल ने दीक्षांत समारोह की थीम ‘हरित ऊर्जा से विकसित भारत बनाने की पहल’ की सराहना की, कहा कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी आवश्यक है। प्रकृति के निरंतर दोहन से जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियां सामने आई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का उल्लेख किया। विद्यार्थियों से शुद्ध प्राणवायु के लिए पौधरोपण और जल संरक्षण को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कच्छ के रण में शिक्षक दंपत्ति द्वारा बच्चों की सहभागिता से पौधरोपण के द्वारा विद्यालय की बाउंड्री वॉल बनाने के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि काम छोटा हो सकता है, लेकिन सोच बड़ी और संकल्प मजबूत हो तो उसका प्रभाव दूरगामी होता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और जल संरक्षण के क्षेत्र में नवाचार के साथ आदर्श जीवनशैली के उदाहरण प्रस्तुत करने की अपेक्षा की है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक ‘जन सेवा संकल्प’ अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से विद्यार्थियों की सहभागिता से सेवा शिविर आयोजित करने तथा सिकल सेल, थैलेसीमिया और कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए रक्तदान जैसी समाजोपयोगी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि रक्तदान जीवनदान के समान है और युवाओं की सेवा भावना से ही विकसित भारत की आधारशिला बनेगी। प्रदेश में उच्च शिक्षा में बेटियों का हुआ अधिक नामांकन उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत कार्यक्रमों के नियमित आयोजन व्यवस्था के लिए आभार ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में बेटियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में इस वर्ष उच्च शिक्षा में बेटियों का नामांकन लड़कों की तुलना में अधिक हुआ है। उन्होंने कहा कि बेटियों की बढ़ती भागीदारी केवल शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव नहीं, बल्कि बदलते भारत की सशक्त तस्वीर है। गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में नीति के प्रावधानों के अनुरूप व्यापक स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के कुलपति प्रो. के. रंगराजन ने विश्वविद्यालय को नमन करते हुए बताया कि वह इसके पूर्व छात्र है। दीक्षांत समारोह में शामिल होकर गर्व का अनुभव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक होने के लिए विदेश जाने की आवश्यकता नहीं है। भारत में अपार अवसर उपलब्ध हो गए है। उन्होंने बताया कि दुनिया के सभी विकसित देशों के साथ भारत मुक्त व्यापार के समझौते के प्रयास तेजी से कर रहा है।   अपर मुख्य सचिव कुलगुरू बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय अनुपम राजन ने बताया कि दीक्षांत समारोह में 85 शोधार्थियों को पी.एच. डी. उपाधि और 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कार्यक्रम में विद्यार्थियों को दीक्षांत शपथ दिलाई।  

करघे की खनक और शहद की मिठास लेकर दुनिया के बाजार में उतरेगा बागपत

बागपत  खेकड़ा की पीढ़ियों पुरानी हथकरघा बुनाई और बागपत के शहद की मिठास अब वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनाने को तैयार है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक होने वाले चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में जिले के 20 से अधिक नवीन निर्यातक, ओडीओपी उत्पादक, एमएसएमई, महिला एवं युवा उद्यमी अपनी कारोबारी ताकत दिखाएंगे। खास आकर्षण जून 2023 में जीआई टैग प्राप्त बागपत होम फर्निशिंग उत्पाद रहेंगे। खेकड़ा स्थित मास्टर वीवर्स के माध्यम से इस पारंपरिक उत्पाद की पहचान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचेगी। इसके साथ ही अम्ब्रोसिया नेचुरल्स शहद और होम प्रोडक्ट भी प्रदर्शित करेगा। जीआई टैग वाली बुनाई बनेगी बागपत की पहचान बागपत होम फर्निशिंग को जून 2023 में जीआई टैग मिला था। यह पहचान खेकड़ा क्षेत्र में पीढ़ियों से हथकरघा बुनाई कर रहे कारीगरों के कौशल को मिली है। जीआई टैग के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग निदेशालय और ’’मास्टर वीवर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, आदर्श नगर, खेकड़ा’’ ने संयुक्त रूप से आवेदन किया था। मास्टर वीवर्स को-ऑपरेटिव सोसाइटी में सूती धागे से बेडशीट, पर्दे, मेजपोश और रनिंग फैब्रिक तैयार किए जाते हैं। ये संस्थान बुनकर फ्रेम लूम से मजबूत और आकर्षक बुनाई के लिए अपनी पहचान बनाए हुए है। पांच नवीन निर्यातक, ओडीओपी में पांच स्टॉल यूपीआईटीएस के हॉल 14 में बागपत के चार नवीन निर्यातकों को पांच स्टॉल मिले हैं। इनमें वीवर्स प्वाइंट व शाहिद टेक्स इंडिया, बड़ागांव, वाया होम्स, खेकड़ा के दो और विनय एक्सपोर्ट, बागपत शामिल हैं। ओडीओपी श्रेणी के हॉल नौ में शमशाद टेक्सटाइल, बड़ागांव को दो स्टॉल तथा द राइजिंग सन के नितिन जैन, बंसल टेक्सटाइल्स के राजकुमार बंसल और त्रिसव टेक्सटाइल के रविस कुमार को एक-एक स्टॉल मिला है। एमएसएमई, महिला एवं युवा उद्यमियों की श्रेणी में सिधांनम इंटरनेशनल, खेकड़ा के मनोज जैन को दो स्टॉल तथा नसरीन टेक्सटाइल्स की नसरीन, चारवेदा ऑर्गेनिक्स, प्रिंस हैंडलूम के राजकुमार जैन, बागपत ब्लूम प्रोड्यूसर कंपनी के कपिल आर्या और अंबेडकर महिला केंद्र के जगदीप कुमार को एक-एक स्टॉल मिला है। उपायुक्त उद्योग राजेंद्र सिंह का कहना है कि यूपीआईटीएस से जिले के उद्यमियों को वैश्विक पहचान मिलेगी। जिले के उद्यमियों में इस आयोजन को लेकर उत्साह बना हुआ है। इसके अतिरिक्त जिले के खेती उत्पाद भी यहां दिखाई देंगे। अम्ब्रोसिया नेचुरल्स शहद तो बागपत ब्लूम मिलेट्स के जरिए जिले की आयुर्वेदिक पहचान कराएगा।  ओडीओसी पैवेलियन में घुलेगी घेवर और बालूशाही की मिठास इंटरनेशनल ट्रेड शो में पहली बार योगी सरकार की एक जिला एक व्यंजन के तहत पहली बार ओडीओसी पैवेलियन का निर्माण किया गया है। इस पैवेलियन में भी जिले के व्यंजनों की सुगंध अपना अहसास कराएगी। अमीनगर सराय से विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाला घेवर और बागपत की बालूशाही यहां विदेशियों के मुंह में मिठास घोलेंगे। इस ट्रेड शो में सिंगापुर, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, जापान, रूस, थाईलैंड और ऑस्ट्रिया देशों की मौजूदगी रहेगी।  बॉक्स – वैश्विक मंच पर बागपत यूपीआईटीएस 25 से 29 सितंबर स्थान         –       इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा नवीन निर्यातक      –  पांच स्टॉल ओडीओपी   –       पांच स्टॉल जीआई उत्पाद     –      बागपत होम फर्निशिंग -प्रमुख आकर्षण    –   खेकड़ा की हथकरघा बुनाई और अम्ब्रोसिया नेचुरल्स का शहद

बड़ी चौपड़ के कॉम्पलेक्स में लगी भीषण आग, दिवाली का लाखों का सामान जलकर हुआ राख

जयपुर जयपुर में दिवाली से ठीक पहले लगी भीषण आग ने कई कारोबारियों की महीनों की मेहनत और त्योहार के सीजन से जुड़ी उम्मीदों को एक झटके में राख कर दिया। जिस सामान को व्यापारियों ने अच्छे कारोबार की उम्मीद में लाखों रुपए खर्च कर जुटाया था, वही माल गुरुवार सुबह उनकी आंखों के सामने आग की लपटों में जलता रहा। कोई व्यापारी अपने हाथों से आंसू पोंछता रहा तो किसी परिवार के लिए नुकसान का सदमा इतना भारी पड़ा कि तबीयत बिगड़ गई। बड़ी चौपड़ स्थित मणिहारों का कटला-सेठी कॉम्पलेक्स में सुबह करीब 7 बजे दूसरी मंजिल पर चूड़ियों के गोदाम में आग लगी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग शॉर्ट सर्किट से लगी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और करीब 25 दुकानें इसकी चपेट में आ गईं। कपड़े, प्लास्टिक का सामान, कॉस्मेटिक आइटम, चूड़ियां और दिवाली सीजन से जुड़ा सामान आग में जल गया। करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन धुआं शाम तक उठता रहा। दिवाली के लिए भरा था माल, आंखों के सामने राख हो गया व्यापारी कमल अग्रवाल के लिए यह आग सिर्फ दुकानों में लगी आग नहीं थी, बल्कि दिवाली की उन उम्मीदों पर भी भारी पड़ी थी, जिनके भरोसे उन्होंने पहले से लाखों रुपए का सामान जुटा रखा था। कमल की कॉम्पलेक्स में तीन दुकानें खुद की हैं, जबकि दो दुकानें किराये पर हैं। दिवाली सीजन को देखते हुए पांचों दुकानों में बड़ी मात्रा में सामान स्टॉक किया गया था। इनमें बंदरवाल, दिवाली सजावट का सामान, धागों की गट्टियां और टेलरिंग से जुड़े सीजनल आइटम शामिल थे। आग की चपेट में उनकी तीन दुकानें आ गईं। बड़ी मात्रा में माल जलकर राख हो गया। आग की खबर मिलते ही कमल अपनी पत्नी और बेटे प्रणव अग्रवाल के साथ मौके पर पहुंचे। दुकानें जलती देखकर कमल भावुक हो गए। कुछ देर तक वह एक कोने में बैठे रहे और लगातार आंसू पोंछते नजर आए। जिस माल को उन्होंने सीजन में बिक्री के लिए सजाकर रखा था, वह उनकी आंखों के सामने धुएं में बदल रहा था। नुकसान देखकर पत्नी की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल ले जाना पड़ा कॉम्पलेक्स के सेक्रेटरी राम कटारिया के मुताबिक दिवाली को देखते हुए कमल ने काफी मात्रा में सामान भरकर रखा था। आग से हुए नुकसान को देखकर कमल की पत्नी भी रोने लगीं। परिवार और रिश्तेदार उन्हें संभालते रहे, लेकिन कुछ देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और बीपी लो हो गया। उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। कमल की हालत भी खराब होने पर परिजनों ने उन्हें घर भेज दिया। बेटे प्रणव ने बताया कि परिवार सीजनल कारोबार करता है। दिवाली पर अच्छे व्यापार की उम्मीद थी, इसलिए पहले से बड़ी मात्रा में सामान खरीदा गया था। आग वाले हिस्से में जाने की अनुमति नहीं होने के कारण परिवार अपने माल की स्थिति भी ठीक से नहीं देख सका। व्यापारी बेबस थे, पुलिसकर्मी रास्ता बनाकर अंदर पहुंचे एक तरफ व्यापारी अपने कारोबार को अपनी आंखों के सामने खत्म होते देखने को मजबूर थे, वहीं दूसरी तरफ पुलिस, दमकल, सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ की टीमें आग से जूझ रही थीं। तीन मंजिला कॉम्पलेक्स के बरामदों में लोहे की जालियां लगी थीं। रास्ता संकरा था और सामान भी भरा हुआ था। ऐसे में आग वाले हिस्से तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था। माणक चौक थाने में तैनात नरेंद्र सिंह शेखावत और विक्रम सिंह ने रास्ता बनाने के लिए दीवार और लोहे की जाली तोड़ी। इसके बाद सीढ़ियों के जरिए दूसरी मंजिल तक पहुंचकर दमकलकर्मियों के लिए रास्ता बनाया गया। धुआं आंखों में चुभता रहा, दम घुटता रहा, फिर भी नहीं रुकी टीम दूसरी मंजिल पर जमा सामान आग बुझाने की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ था। घने धुएं के बीच दमकलकर्मी, सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ जवान लगातार ऑपरेशन में जुटे रहे। कई जगह शटर और दूसरे अवरोध तोड़कर अंदर पहुंचना पड़ा। धुआं इतना घना था कि जवानों की आंखों में तेज जलन होने लगी। कुछ को सांस लेने में भी परेशानी हुई। तबीयत प्रभावित होने पर कुछ दमकलकर्मियों को थोड़ी देर के लिए बाहर बैठाया गया, लेकिन इसके बाद वे फिर ऑपरेशन में जुट गए। करीब सात घंटे से ज्यादा चले अभियान में टीम आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास करती रही। नीचे के दुकानदारों को भी सताने लगा अपना माल जलने का डर दूसरी मंजिल से उठती लपटों और धुएं ने नीचे की दुकानों में बैठे व्यापारियों की चिंता भी बढ़ा दी। ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल के दुकानदार अपने स्टाफ के साथ सामान बाहर निकालने में जुट गए। बड़े-बड़े कार्टून दुकानों और गोदामों से बाहर लाए जाने लगे। डर था कि अगर आग नीचे तक पहुंची तो दिवाली के लिए जमा किया गया उनका माल भी राख हो जाएगा। एक तरफ दमकल की गाड़ियां आग बुझा रही थीं, दूसरी तरफ व्यापारी अपनी दुकानों से बचा हुआ सामान बाहर निकाल रहे थे। आग बुझी, लेकिन कारोबारियों का संकट अभी बाकी अग्निकांड के बाद व्यापारियों में कॉम्पलेक्स प्रबंधन को लेकर आक्रोश है। व्यापारियों ने प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आग ने सिर्फ सामान नहीं जलाया, बल्कि दिवाली के पूरे सीजन की तैयारियों को भी झटका दिया है।

बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जेल विभाग की संवेदनशील पहल

बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जेल विभाग की संवेदनशील पहल केंद्रीय जेल भोपाल में विशेषज्ञ ने बंदियों से संवाद कर किया मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं काउंसलिंग सत्र भोपाल  महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं डॉ. वरुण कपूर के मार्गदर्शन में प्रदेश की जेलों में निरुद्ध बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं परामर्श की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जेल विभाग एवं राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर, गुजरात के मध्य हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (MOU) के अंतर्गत 15 सितंबर 2026 को केंद्रीय जेल भोपाल में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर से आए फोरेंसिक साइकोलॉजिस्ट ओम तिवारी ने बंदियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, मानसिक तनाव तथा उससे जुड़ी विभिन्न समस्याओं के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बंदियों से संवाद कर उनकी मानसिक एवं व्यक्तिगत समस्याओं को समझने का प्रयास किया तथा आवश्यकता के अनुसार काउंसलिंग भी की। शिविर के दौरान बंदियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ के समक्ष अपनी जिज्ञासाएं एवं समस्याएं साझा कीं। विशेषज्ञ द्वारा उनकी बातों को समझते हुए आवश्यक मार्गदर्शन एवं परामर्श प्रदान किया गया। जेल विभाग द्वारा बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहारिक सुधार एवं पुनर्वास को सुधारात्मक सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए ऐसे कार्यक्रमों को उपयोगी पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के साथ हुए MOU के माध्यम से विशेषज्ञता एवं परामर्श सेवाओं का लाभ जेलों में निरुद्ध बंदियों तक पहुंचाने की दिशा में यह प्रयास महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर केंद्रीय जेल भोपाल के अधीक्षक मानेंद्र परिहार सहित जेल विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।  

लाडो लक्ष्मी योजना का बढ़ा दायरा, 13.50 लाख नई महिलाओं को मिलेगा ₹2,100 मासिक लाभ

 चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा बढ़ा दिया है। अब 1.80 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवारों की पात्र महिलाओं को भी हर महीने 2100 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। इससे योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर करीब 23.50 लाख हो जाएगी। अभी तक एक लाख रुपये तक सालाना आय वाले परिवारों की करीब 10 लाख महिलाओं को योजना का लाभ मिल रहा था। आय सीमा बढ़ाकर 1.80 लाख रुपये वार्षिक करने के बाद इस आय वर्ग में कुल 17 लाख 13 हजार 447 महिलाएं पात्र दायरे में आती हैं। इनमें करीब साढ़े तीन लाख महिलाएं ऐसी हैं, जो पहले से किसी अन्य योजना का लाभ ले रही हैं। ऐसे में करीब 13.50 लाख नई महिलाओं को 2100 रुपये मासिक सहायता मिलने का रास्ता साफ हुआ है। हर महिला को सालाना 25 हजार 200 रुपये मिलेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महेंद्रगढ़ में योजना का दायरा बढ़ाते हुए आवेदन के लिए पोर्टल की शुरुआत की है। इस पर पात्र महिलाएं आवेदन कर सकती हैं। सरकार 25 सितंबर को पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर नए लाभार्थियों को योजना का लाभ देना शुरू कर सकती है। तब तक आवेदन और पात्रता सत्यापन की प्रक्रिया जारी रहेगी। बजट में 6500 करोड़, लगातार बढ़ा सरकार का वित्तीय प्रविधान लाडो लक्ष्मी योजना के लिए हरियाणा सरकार ने अपने 2026-27 के बजट में 6500 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। योजना शुरू करते समय पहले बजट में 5000 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया था। यानी एक साल में बजटीय प्रविधान में 1500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। राज्य के 2026-27 बजट में सामाजिक कल्याण एवं पोषण क्षेत्र के लिए कुल 20,110 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जिसमें लाडो लक्ष्मी योजना अकेले 6500 करोड़ रुपये की है। अभी तक दस किस्तों में दिए जा चुके दो हजार करोड़ परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के स्टेट कार्डिनेटर डा. सतीश खोला के अनुसार 10 अगस्त 2026 तक लाडो लक्ष्मी योजना की 10 किस्तों में करीब 9.98 लाख महिलाओं को 2,042.31 करोड़ रुपये दिए जा चुके थे। उसी समय सरकार ने आय सीमा 1.80 लाख रुपये करने और चालू वित्त वर्ष में 6500 करोड़ रुपये के प्रविधान की जानकारी दी थी, जिसे अब मुख्यमंत्री ने धरातल पर लागू कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो कहते हैं, उसे हर हाल में पूरा करते हैं। दूसरे राज्यों में महिलाओं को कितनी आर्थिक मदद राज्य – योजना – सहायता हरियाणा – दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना – 2,100 रुपये मासिक पंजाब – मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना – 1,000 रुपये मासिक और एससी महिलाओं के लिए 1,500 रुपये हिमाचल प्रदेश – इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि – 1,500 रुपये मासिक कर्नाटक – गृह लक्ष्मी योजना – 2,000 रुपये मासिक हिमाचल प्रदेश – मुख्यमंत्री शगुन योजना – 31,000 विवाह सहायता हरियाणा – मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना – श्रेणी के अनुसार 31,000 से 71,000 रुपये मासिक तक हरियाणा में एक लाख 80 हजार रुपये वार्षिक तक आय वाले परिवारों की महिलाएं     1 अंबाला 62612     2 भिवानी 66014     3 चरखी-दादरी 24159     4 फरीदाबाद 222562     5 फतेहाबाद 46379     6 गुरुग्राम 92017     7 हांसी 27809     8 हिसार 67177     9 झज्जर 67513     10 जींद 73152     11 कैथल 66518     12 करनाल 105717     13 कुरुक्षेत्र 47982     14 महेंद्रगढ़ 46709     15 नूंह 69760     16 पलवल 101652     17 पंचकूला 37472     18 पानीपत 109424     19 रेवाड़ी 52685     20 रोहतक 60254     21 सिरसा 69397     22 सोनीपत 118878     23 यमुनानगर 77605