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ग्रीन इंदौर मिशन: 50 करोड़ की लागत से गार्डनों का सौंदर्यीकरण शुरू

इंदौर  इंदौर विकास प्राधिकरण ने शहर को हरा-भरा बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण दो दर्जन नए गार्डनों को विकसित करने जा रहा है, जिस पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बीते साल भी हरियाली महोत्सव और एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियानों के तहत ग्रीन बेल्ट और गार्डनों में हजारों पौधे लगाए गए थे, जो अब बड़े होकर हरे-भरे पेड़ों में तब्दील हो चुके हैं। स्कीम 78 में सिटी फारेस्ट बनाया आईडीए ने योजना क्रमांक 78 में मियावाकी पद्धति से गार्डन विकसित किया है। यह इसकी एक सफल मिसाल है। प्राधिकरण केवल पौधारोपण ही नहीं करता, बल्कि रख-रखाव के लिए भी ठेका देता है, जिससे पौधों का जीवित रहना सुनिश्चित होता है। रिंग रोड की हरियाली और सिटी फॉरेस्ट योजना को भी मिलेगा विस्तार प्राधिकरण के सीईओ आरपी अहिरवार के अनुसार, प्राधिकरण ने वर्षों पहले रिंग रोड पर जो चौड़े ग्रीन बेल्ट विकसित किए थे, वह आज भी हरे-भरे हैं, हालांकि मेट्रो प्रोजेक्ट और फ्लाईओवर निर्माण के कारण कुछ स्थानों पर ग्रीन बेल्ट हटाने की भी नौबत आई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद योजना क्रमांक 97 पार्ट-4 में 42 एकड़ भूमि पर सिटी फॉरेस्ट के लिए जमीन मिली है, जिसके लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। हाल ही में प्राधिकरण ने कुमेर्डी में आईएसबीटी के सामने 2100 पौधे लगाए हैं। पिछले वर्ष लगाए गए करीब ढाई लाख पौधे अब 10 से 15 फीट तक ऊंचे हो चुके हैं, जो इस योजना की सफलता दर्शाते हैं। नई टीपीएस योजनाओं में शामिल होंगे बड़े गार्डन क्षेत्र प्राधिकरण के सीईओ आरपी अहिरवार के अनुसार, इस वर्ष भी मां की बगिया और एक पौधा मां के नाम जैसे अभियानों के तहत मानसून सीजन में हजारों पौधे लगाए जा रहे हैं। साथ ही, जो नई टीपीएस योजनाएं घोषित की गई हैं, उनमें बड़ी संख्या में गार्डनों के लिए जमीन आरक्षित की गई है। इन दो दर्जन नए गार्डनों में ही ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। मियावाकी पद्धति के अतिरिक्त अन्य पौधारोपण कार्यों के लिए भी टेंडर बुलाए जा चुके हैं और विभिन्न ठेकेदार फर्मों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। ठेकेदार फर्में करेंगी रखरखाव, प्राधिकरण करेगा सख्त मॉनिटरिंग पौधारोपण की सफलता का राज यह है कि प्राधिकरण पौधों के रख-रखाव की जिम्मेदारी भी ठेकेदारों को सौंपता है। पौधे सूखने की स्थिति में फर्म को नए पौधे लगाने होते हैं। इसके अलावा पौधारोपण से पहले गार्डनों और ग्रीन बेल्ट में बाउंड्री, फेंसिंग, बोरिंग और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। प्राधिकरण की टीम लगातार इसकी निगरानी करती है। हाल ही में पर्यावरण दिवस पर सिंदूर गार्डन में 1100 पौधे लगाए गए थे। अब बारिश के मौसम में प्राधिकरण पूरे शहर में बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने जा रहा है। 

सफाई में नंबर 1 इंदौर की नई पहल: ऑन डिमांड कचरा उठाने के लिए लॉन्च होगा मोबाइल ऐप

इंदौर सफाई के मामले में इंदौर एक बार फिर नंबर बन रहा है। वहीं अब इंदौर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के बाद एक और सुविधा मिलने जा रही है। इस सुविधा के तहत लोग अपने मोबाइल में एक एप्लीकेशन के जरिए कचरा गाड़ी बुलवाकर कचरा दे सकेंगे। यह सुविधा घर और संस्थानों सभी के लिए उपलब्ध रहेगी। दरअसल, इस खास ऐप के जरिए लोगों को साफ-सफाई का ऑप्शन दिया जाएगा। इंदौर में शुरू होने वाले इस खास ऐप को 5 अगस्त को लॉन्च किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक जो ऐप लॉन्च किया जाएगा, वह एंड्रॉयड और आईओएस दोनों ही एप्लीकेशन पर काम करेगा। इस ऐप का मकसद सफाई के मामले में इंदौर को और आगे ले जाना है। अब इंदौर में डोर टू डोर ही नहीं ऑन डिमांड भी कचरा किया जाएगा कलेक्ट, फूड डिलीवरी की तरह ही होगा काम कैसे काम करेगा यह ऐप? दरअसल, लॉन्च किया जाने वाला यह ऐप एकदम फूड डिलीवरी ऐप की तरह ही काम करेगा। जिस प्रकार से हम किसी फूड डिलीवरी ऐप पर जाकर फूड आइटम सेलेक्ट करते हैं और अपना एड्रेस डालकर ऑर्डर करते हैं, वैसे ही इस ऐप में भी सफाई के कुछ ऑप्शंस को सेलेक्ट करना होगा और अपने घर व संस्थान का एड्रेस देना होगा। इसके बाद गाड़ियां घर आएंगी और आपका कचरा कलेक्ट करेंगी। दरअसल, यह कचरा रोज़ाना के अलावा इकट्ठा होने वाला एक्स्ट्रा कचरा होगा। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि इसका चार्ज कितना होगा, लेकिन जल्द ही यह तय किया जा सकता है। यह चार्ज नगर निगम द्वारा लिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि 5 अगस्त को इस ऐप को लॉन्च किया जा सकता है। ये एप्लिकेशन एंड्राइड और आईओएस दोनों के लिए रहेगी। फूड डिलीवरी ऐप की तरह करेगी काम जिस प्रकार आप फूड डिलीवरी ऐप का इस्तेमाल करते हैं। वैसे ही ये ऐप भी काम करेगी। फूड डिलीवरी ऐप पर जिस प्रकार फूड को सिलेक्ट करते हैं उसके बाद ऑर्डर देते हैं। ऑर्डर होने के बाद फूड आपके घर या संस्थान तक पहुंचाया जाता है। उसी प्रकार इस ऐप के माध्यम से आप अपने घर या संस्थान से निकलने वाले कचरे (रोजाना के अलावा) कलेक्शन के लिए गाड़ियां बुला सकते हैं। बड़े संस्थान और बड़े इवेंट के लिए साफ-सफाई का भी ऑप्शन मिलेगा। हालांकि, इसके लिए नगर निगम द्वारा चार्ज लिया जाएगा, लेकिन कितना चार्ज लिया जाएगा ये फिलहाल तय नहीं हुआ हैं। ऐप को दिया ‘क्विक साफ' नाम स्वच्छ भारत मिशन द्वारा तैयार की गई इस ऐप को 'क्विक साफ' (Quick Saaf) नाम दिया है। इंदौर में लोगों के घरों में डोर-टू-डोर कचरा गाड़ी रोजाना आती हैं, जिसमें लोग गिला और सूखा कचरा अलग-अलग डालते हैं। 5 अगस्त को लॉन्च की जा सकती है ऐप 5 अगस्त को नगर निगम परिषद के कार्यकाल के तीन साल पूरे हो रहे हैं। महापौर भार्गव ने बताया कि 5 अगस्त को कार्यकाल पूरे हो रहे हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव से इस विषय में चर्चा की जाएगी। अगर अनुमति मिलती है तो इस ऐप को 5 अगस्त को ही लॉन्च कर दिया जाएगा। इस ऐप की फिलहाल दरें तय नहीं हुई है। दरें एमआईसी में अप्रूवल के लिए आई है। जल्द ही दरें भी अप्रूव हो जाएगी। मगर इस ऐप का इस्तेमाल से लोग अपने घरों और संस्थानों में निकलने वाले एक्स्ट्रा कचरे को देने के लिए गाड़ी बुक कर सकते हैं। बुकिंग पर गाड़ी आपके घर आएगी और घर या संस्थान से कचरा कलेक्ट कर ले जाएगी। बड़े इवेंट या बड़े संस्थानों में साफ-सफाई के लिए भी आप इस माध्यम से टीम को बुला सकते हैं। नवाचार और इनोवेशन से इंदौर नंबर वन महापौर पुष्यमित्र भार्गव से दैनिक भास्कर ने इसे लेकर खास चर्चा की। उन्होंने बताया कि इंदौर नगर निगम अपने नवाचार और इनोवेशन के कारण लगातार देश में नंबर वन हैं। गीले कचरे से बायो सीएनजी बन रही है, सूखे को रिसाइकिलिंग कर रहे हैं, हरे कचरे से प्लेट्स बनाने का काम इंदौर नगर निगम में शुरू हो गया है, लेकिन इस कचरा प्रबंधन को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने लिए अब इंदौर नगर निगम ऑन डिमांड कचरा कलेक्शन भी शुरू करने जा रहा है। क्विक साफ (Quick Saaf) नाम से ऐप हमारा बनकर तैयार हो गया है, जिसकी शुरुआत जल्द होने वाली है। फूड डिलीवरी ऐप पर जैसे खाने की डिलीवरी होती है। उसी तरह डोर-टू-डोर कचरा गाड़ी के अलावा जो कचरा है वह यदि कोई देना चाहता है तो ऐप के माध्यम से घर बुलाकर दे सकता है। वैसे ही किसी बडे़ आयोजन की साफ-सफाई करना है तो ऐप के माध्यम से रिक्वेस्ट भेज सकता है। टीम वहां जाकर साफ-सफाई भी कर देगी। कई नवाचार लाइन में हैं। रोड स्वीपिंग के हो, मिक्स्ड वेस्ट के या प्लास्टिक से फ्यूल बनाना हो। इन्हें हम तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। क्या है इस ऐप का नाम? बता दें कि इंदौर में डोर टू डोर कलेक्शन किया जाता है, यानी गाड़ियां लोगों के घर जाती हैं और वहां से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग इकट्ठा करती हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि जब महीने या हफ्ते में घर की सफाई की जाती है तो एक्स्ट्रा कचरा निकलता है। ऐसे में इस कचरे को डालना भी बड़ी समस्या बन सकता है। लेकिन इंदौर नगर निगम सफाई के मामले में बेहद ही सक्रिय है। अब एक्स्ट्रा कचरे के लिए लोग गाड़ी बुक कर सकेंगे। बुकिंग करने पर यह गाड़ी आपके घर आएगी और घर से यह कचरा कलेक्ट कर लेगी। यह बड़े इवेंट और संस्थाओं के लिए भी सफाई का अच्छा माध्यम बनेगी। बता दें कि इंदौर में शुरू होने वाले ऐप को क्विक साफ नाम से तैयार किया गया है।

भोपाल-इंदौर में नई व्यवस्था: बिना हेलमेट वालों को नहीं मिलेगा पेट्रोल, प्रशासन ने कसी कमर

भोपाल / इंदौर मध्य प्रदेश के दो शहर भोपाल और इंदौर में सड़क सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब आज 1 अगस्त 2025 से शहर के किसी भी पेट्रोल पंप पर बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं मिलेगा. यह सख्त निर्देश दोनों शहरों के कलेक्टर ने जारी किए हैं. प्रशासन का मानना है कि इस कदम से सड़क हादसों में कमी लाई जा सकेगी और लोगों में ट्रैफिक नियमों को लेकर जागरूकता बढ़ेगी. इस आदेश को लागू करने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया. बैठक में इंदौर की मौजूदा यातायात व्यवस्था और सड़क दुर्घटनाओं को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. इसके बाद जिला प्रशासन ने यह ठोस कदम उठाने का ऐलान किया. कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि यह आदेश दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है औरआज  1 अगस्त से इसे सख्ती से लागू किया जाएगा. आदेश से पहले 30 और 31 जुलाई को शहर भर में जनजागरूकता अभियान चलाया गया , ताकि लोगों को समय रहते जानकारी मिल सके और वे नियमों का पालन करें. नियम नहीं माना तो पेट्रोल पंप के खिलाफ होगी कार्रवाई प्रशासन ने पेट्रोल पंप संचालकों को भी निर्देशित किया है कि वे बिना हेलमेट आए किसी भी व्यक्ति को पेट्रोल न दें. अगर कोई पेट्रोल पंप इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस आदेश के लागू होने से शहर में हेलमेट पहनने की आदत को मजबूती मिलेगी और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा. मप्र मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा-129 मप्र मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा-129 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि प्रत्येक दो पहिया वाहन चालक और सवारी को आईएसआई मार्क हेलमेट(Helmet Petrol Rule 2025) पहनना जरूरी है। यह प्रतिबंध 01 अगस्त 2025 से लागू होकर 29 सितंबर 2025 तक प्रभावशील रहेगा। इसके उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति, संस्था या संचालक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। किस कानून के तहत आया आदेश?  यह नियम मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 129, आपदा प्रबंधन अधिनियम और नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2023 की धारा 163 के तहत लागू किया गया है। इसके तहत दोनों शहरों के पेट्रोल पंप संचालकों को आदेशित किया गया है कि वे बिना हेलमेट आए ग्राहक को ईंधन न दें। आदेश का उल्लंघन करने पर पंप संचालकों पर कानूनी कार्रवाई होगी, हालांकि उपभोक्ता पर क्या सज़ा होगी, इसका अभी स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। कहां, कैसे और किसको मिलेगी हेलमेट न पहनने की छूट? यदि किसी व्यक्ति के पास मेडिकल इमरजेंसी या आकस्मिक परिस्थिति है, तो उसे इस नियम से अस्थायी रूप से छूट दी जाएगी। लेकिन अन्य सभी मामलों में यह नियम सख्ती से लागू होगा। इमरजेंसी में मिले सकेगी छूट     प्रतिबंध मेडिकल संबंधी मामलों व आकस्मिक स्थिति में लागू नहीं होगा। यह प्रतिबंध अन्य किसी नियम/आदेश के प्रतिबंध के अतिरिक्त होंगे।     यह आदेश 1 अगस्त 25 से लागू होगा। 29 सितंबर 25 तक की अवधि में प्रभावशील रहेगा।     इसका उल्लंघन करने वाले व्यक्ति, संस्था और संचालक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता-23 की धारा 223 के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकेगी। बिना हेलमेट आने वालों पर क्या कार्रवाई? पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन बिना हेलमेट के पेट्रोल देने पर पंप संचालक पर तो कार्रवाई करेगी, लेकिन जो पेट्रोल ले रहा है, उस पर क्या कार्रवाई होगी? सड़क पर पुलिस बिना हेलमेट वाले वाहन चालकों को नहीं पकड़ पा रही है। इस पर भी सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए। सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और रिटायर्ड न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने मंगलवार को इंदौर में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक ली थी। इस दौरान उन्होंने कुछ जरूरी निर्देश दिए थे।     सरकारी कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाए।     अगले 6 महीनों में सुधार के लिए रणनीति तैयार की जाए ताकि सकारात्मक बदलाव और नतीजे देखने को मिलें। न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा था कि इंदौर में लोगों को हेलमेट पहनने की आदत डालनी चाहिए। सीट बेल्ट के इस्तेमाल को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए। शराब पीकर वाहन चलाने वालों और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। लोक परिवहन के साधन बढ़ाए जाएं ताकि सड़कों पर छोटे निजी वाहनों की भीड़ कम हो। पुलिस, सरकारी कर्मचारी और विद्यार्थी जब भी वाहन चलाएं, तो हेलमेट पहनना अनिवार्य हो। सरकारी दफ्तरों में बिना हेलमेट एंट्री नहीं  इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी कलेक्टर को पत्र लिखकर सरकारी कार्यालयों में हेलमेट अनिवार्य करने की सिफारिश की थी। अब बिना हेलमेट किसी सरकारी दफ्तर में प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशों पर अमल  सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष रिटायर्ड जज अभय मनोहर सप्रे ने इंदौर समीक्षा बैठक में हेलमेट अनिवार्यता, शराब पीकर वाहन चलाने पर सज़ा, और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रोत्साहन जैसे बिंदुओं पर सख्त अमल की मांग की थी। यही दिशा-निर्देश अब जमीन पर उतारे जा रहे हैं। कब से लागू होगा हेलमेट पहनने का आदेश? क्या मिलेगा दंड? यह आदेश 1 अगस्त से 29 सितंबर 2025 तक लागू रहेगा। नियम का उल्लंघन करने पर IPC की धारा 223 के तहत चालान या अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आदेश में स्पष्ट नहीं प्रशासन का निर्णय ठीक है, लेकिन आदेश में स्पष्ट नहीं है कि पेट्रोल पंप(Helmet Petrol Rule 2025) पर यदि कोई बिना हेलमेट के पेट्रोल भरवाता है तो इसमें पेट्रोल पंप संचालक को दोषी नहीं माना जाएगा। पंप संचालक को इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पंप संचालक पर इसकी अनिवार्यता नहीं होना चाहिए।-अजय सिंह, अध्यक्ष, मप्र पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन

विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा और अन्य बच्चों को भी मिलेगा लाभ

रायपुर : मुख्यमंत्री ने ग्राम पंड्रापाथ तहसील सन्ना को दी बड़ी सौगात मुख्यमंत्री ने तीरंदाजी अकादमी के लिए 20 करोड़ 53 लाख की दी स्वीकृति विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा और अन्य बच्चों को भी मिलेगा लाभ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ग्राम पंड्रापाथ, विकास खंड बगीचा, तहसील सन्ना में आरचेरी अकादमी बनाने के लिए 20 करोड़ 53 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति दी  है। एन टी पी सी ने अपने सी एस आर फंड से यह राशि उपलब्ध कराई है। मुख्यमंत्री ने कहा खिलाड़ियों की खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। ग्राम पंड्रापाथ के आरचेरी अकादमी लगभग 10.27 एकड़ में विकसित किया जाएगा, जिसमें तीरंदाजी केन्द्र में अभ्यास के लिए एक खेल मैदान, छोटा पुस्तकालय, मेडिकल की सुविधा, बच्चों का कौशल विकास प्रशिक्षण केन्द्र, छोटा नर्सरी और हर्बल चाय की खेती की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। तीरंदाजी अकादमी में दूरस्थ अंचलों के विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बच्चों और अन्य आदिवासी बच्चों को खेल अभ्यास कराया जाएगा ताकि बच्चे अपनी प्रतिभा राज्य से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दिखा सके। उल्लेखनीय है कि आरचेरी अकादमी बनाने के लिए गांव पंड्रापाथ, तहसील-सन्ना, उप-मंडल-बगीचा, जिला-जशपुर (छत्तीसगढ़) में लगभग 10.27 एकड़ (41565 वर्ग मीटर-लगभग) के आवश्यक क्षेत्रफल की राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि का चिन्हांकन किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय खिलाडियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं, इसी कड़ी में उनके आग्रह पर तीरंदाजी अकादमी की स्थापना करने हेतु एनटीपीसी ने  20.53 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान करने की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। स्वीकृत लागत अनुमान के अनुसार समयबद्ध तरीके से कार्य के निष्पादन हेतु उपयुक्त राज्य सरकारी एजेंसी नियुक्त करने आग्रह किया है। आरचेरी एक खेल और कला है जिसमें धनुष और बाण का उपयोग करके लक्ष्य पर निशाना लगाया जाता है। यह एक प्राचीन गतिविधि है । धनुष यह एक लचीली वस्तु होती है, जिससे बाण को छोड़ा जाता है। बाण नुकीला तीर जिसे लक्ष्य (निशाना) पर छोड़ा जाता है।  लक्ष्य जिस पर निशाना लगाया जाता है, आमतौर पर एक गोल आकृति होती है, जिसमें अलग-अलग रंग और स्कोर क्षेत्र होते हैं। निशाना लगाने की तकनीक इसमें एकाग्रता, संतुलन और शरीर की स्थिरता बहुत ज़रूरी होती है। भारत में आरचेरी का गहरा इतिहास है। आधुनिक खेलों में भारत के खिलाड़ी जैसे दीपिका कुमारी और अतनु दास ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है।

विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा और अन्य बच्चों को भी मिलेगा लाभ

रायपुर : मुख्यमंत्री ने ग्राम पंड्रापाथ तहसील सन्ना को दी बड़ी सौगात मुख्यमंत्री ने तीरंदाजी अकादमी के लिए 20 करोड़ 53 लाख की दी स्वीकृति विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा और अन्य बच्चों को भी मिलेगा लाभ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ग्राम पंड्रापाथ, विकास खंड बगीचा, तहसील सन्ना में आरचेरी अकादमी बनाने के लिए 20 करोड़ 53 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति दी  है। एन टी पी सी ने अपने सी एस आर फंड से यह राशि उपलब्ध कराई है। मुख्यमंत्री ने कहा खिलाड़ियों की खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। ग्राम पंड्रापाथ के आरचेरी अकादमी लगभग 10.27 एकड़ में विकसित किया जाएगा, जिसमें तीरंदाजी केन्द्र में अभ्यास के लिए एक खेल मैदान, छोटा पुस्तकालय, मेडिकल की सुविधा, बच्चों का कौशल विकास प्रशिक्षण केन्द्र, छोटा नर्सरी और हर्बल चाय की खेती की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। तीरंदाजी अकादमी में दूरस्थ अंचलों के विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बच्चों और अन्य आदिवासी बच्चों को खेल अभ्यास कराया जाएगा ताकि बच्चे अपनी प्रतिभा राज्य से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दिखा सके। उल्लेखनीय है कि आरचेरी अकादमी बनाने के लिए गांव पंड्रापाथ, तहसील-सन्ना, उप-मंडल-बगीचा, जिला-जशपुर (छत्तीसगढ़) में लगभग 10.27 एकड़ (41565 वर्ग मीटर-लगभग) के आवश्यक क्षेत्रफल की राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि का चिन्हांकन किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय खिलाडियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं, इसी कड़ी में उनके आग्रह पर तीरंदाजी अकादमी की स्थापना करने हेतु एनटीपीसी ने  20.53 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान करने की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। स्वीकृत लागत अनुमान के अनुसार समयबद्ध तरीके से कार्य के निष्पादन हेतु उपयुक्त राज्य सरकारी एजेंसी नियुक्त करने आग्रह किया है। आरचेरी एक खेल और कला है जिसमें धनुष और बाण का उपयोग करके लक्ष्य पर निशाना लगाया जाता है। यह एक प्राचीन गतिविधि है । धनुष यह एक लचीली वस्तु होती है, जिससे बाण को छोड़ा जाता है। बाण नुकीला तीर जिसे लक्ष्य (निशाना) पर छोड़ा जाता है।  लक्ष्य जिस पर निशाना लगाया जाता है, आमतौर पर एक गोल आकृति होती है, जिसमें अलग-अलग रंग और स्कोर क्षेत्र होते हैं। निशाना लगाने की तकनीक इसमें एकाग्रता, संतुलन और शरीर की स्थिरता बहुत ज़रूरी होती है। भारत में आरचेरी का गहरा इतिहास है। आधुनिक खेलों में भारत के खिलाड़ी जैसे दीपिका कुमारी और अतनु दास ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है।

महिलाओं की आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता और अधिकार सम्पन्नता के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बहन-बेटियों के लिए सम्मान का प्रतीक है “लाड़ली बहना योजना’’ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव लाड़ली बहना योजना की राशि में होगी चरणबद्ध वृद्धि परिवार परम्परा का आधार है मातृशक्ति महिलाओं की आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता और अधिकार सम्पन्नता के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध सतना को प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ जिला बनाने के लिए दिलाया संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मातृशक्ति उत्सव के अंतर्गत महिला सम्मेलन को किया संबोधित सतना जिले के सिंहपुर में मना मातृशक्ति उत्सव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार महिलाओं की आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता और सभी की अधिकार सम्पन्नता के लिए सामाजिक रचना के ताने-बाने में सभी स्तर पर आवश्यक योगदान दे रही है। इसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप किसान, युवा, गरीब कल्याण और महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम संचालित हैं। हमारी संस्कृति में देश के लिए मातृत्व भाव विद्यमान है, हम सब भारत माता पर सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए सदैव तत्पर हैं। आज का मातृशक्ति सम्मेलन- माताओं-बहनों के प्रति सनातन संस्कृति के अनुरूप अनन्य श्रद्धा-स्नेह-प्रेम और सम्मान का प्रकटीकरण है। भारत की कुटुम्ब या परिवार परम्परा हमारी संस्कृति को समृद्ध और सशक्त बनाती है। परिवार परम्परा का आधार मातृशक्ति ही है। बेटियां एक ही नहीं दो परिवारों का उद्धार करती हैं। बहन-बेटियों के प्रति इस सम्मान के परिणामस्वरूप ही प्रदेश में “लाड़ली बहना योजना’’ आरंभ की गई। सावन के महीने में लाड़ली बहनों के खाते में 1250 रूपए के साथ 250 रूपए अतिरिक्त रूप से आने वाले हैं। यह बहन-बेटियों प्रति हमारी सरकार का आदर और स्नेह है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सतना जिले के सिंहपुर में आयोजित मातृशक्ति उत्सव के अंतर्गत आयोजित महिला सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। प्रदेश की सभी बहनें हमारा मान हैं, अभिमान हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत बहनों को जारी की जाने वाली राशि में चरणबद्ध रूप से वृद्धि होगी और वर्ष 2028 तक बहनों को तीन हजार रूपए प्रतिमाह उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण और उनके कल्याण के लिए 1500 करोड़ रूपए से अधिक प्रतिमाह अंतरित किए जा रहे हैं। प्रदेश की सभी बहनें हमारा मान हैं, अभिमान हैं। इनके मान-सम्मान और कल्याण के लिए हम कोई कसर नहीं रखेंगे। दीपावली के बाद आने वाली भाईदूज तक राज्य सरकार सभी लाड़ली बहनों को 1250 रुपए से बढ़ाकर हर माह 1500 रूपए सहायता राशि देगी। बहन-बेटियों के सशक्तिकरण के‍लिए स्व-सहायता समूहों का संचालन, नौकरियों और स्थानीय व नगरीय निकायों और पंचायतों में आरक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा और विधानसभा में बहनों का 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। माताओं-बहनों के कल्याण के लिए ही सभी परिवारों को पक्के मकान, घर-घर गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दीदीयां लखपति बनकर प्रगति कर रही हैं, बेटियों के लिए शिक्षा की उचित व्यवस्था है, उन्हें साइकिलें उपलब्ध कराने के साथ-साथ परीक्षा में अच्छा परिणाम लाने पर प्रोत्साहन स्वरूप लेपटॉप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डॉक्टर-इंजीनियर बनने के लिए भी आवश्यक हरसंभव सहायता बेटियों को उपलब्ध है। उद्योगों में काम करने वाली बहनों के लिए भी राज्य सरकार विशेष सहायता प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की जिन्दगी बदलने के लिए उन्हें बिजली में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सोलर पम्प पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। अगले डेढ़ माह में बरगी नहर का कार्य पूर्ण हो रहा है, इससे रीवा-सतना क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। हमारी सरकार ने हर खेत तक पानी पहुंचाने का संकल्प लिया है और हम इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष 2002-03 तक केवल 7 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविध उपलब्ध थी। वर्तमान में हम 55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2028 तक 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में इस वर्ष 2600 रूपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया गया। अगले दो साल में संभवत: 2700 रूपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के माध्यम से शीघ्र ही गरीबों के लिए 4 करोड़ आवास स्वीकृत होने वाले हैं, वर्ष 2028 तक 80 करोड़ लोगों को नि:शुल्क राशन की व्यवस्था है, बच्चों की शिक्षा के लिए सांदिपनी विद्यालय जैसे स्कूल विद्यमान हैं, यह सब रामराज की संकल्पा को साकार करने के समान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार श्रीराम वन गमन पथ का निर्माण करा रही है। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण ने जहां-जहां लीलाएं की हैं, वे स्थल तीर्थ के रूप में विकसित किए जाएंगे। किसानों की आय में वृद्धि के‍लिए गौपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, इससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि से परिवार के सभी सदस्यों को पर्याप्त पोषण भी उपलब्ध हो सकेगा। अत: सरकार घर-घर गौपालन को प्रोत्साहित करने के लिए 'जिसके घर गाय वह गोपाल' के भाव से कार्य कर रही है। प्रदेश में देश का 9 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन होता है, इसे 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। यदि कोई गौ-पालक 25 गायों का पालन करता है तो उन्हें लागत के 40 लाख रूपए में से 10 लाख रूपए अनुदान के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे। गौशालाओं में भी प्रति गौमाता 20 रूपए के स्थान पर 40 रूपए की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। पांच हजार से अधिक गौमाताएं पालने पर 130 एकड़ जमीन और 40 रूपए प्रति गाय के मान से सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। गौमाताओं की उचित देखभाल के लिए नगर निगम, नगर परिषद और पंचायतों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा-सतना क्षेत्र में पर्याप्त औद्योगिक गतिविधियां संचालित हैं। इस क्षेत्र में पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए होमस्टे विकसित करने में राज्य सरकार सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सतना जिला भगवान श्रीराम से जुड़ता है अत: क्षेत्र के विकास के लिए कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित जनसमुदाय को अपने गांव-मोहल्ले का उन्नयन करते हुए सतना जिले को … Read more

महिलाओं की आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता और अधिकार सम्पन्नता के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बहन-बेटियों के लिए सम्मान का प्रतीक है “लाड़ली बहना योजना’’ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव लाड़ली बहना योजना की राशि में होगी चरणबद्ध वृद्धि परिवार परम्परा का आधार है मातृशक्ति महिलाओं की आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता और अधिकार सम्पन्नता के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध सतना को प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ जिला बनाने के लिए दिलाया संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मातृशक्ति उत्सव के अंतर्गत महिला सम्मेलन को किया संबोधित सतना जिले के सिंहपुर में मना मातृशक्ति उत्सव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार महिलाओं की आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता और सभी की अधिकार सम्पन्नता के लिए सामाजिक रचना के ताने-बाने में सभी स्तर पर आवश्यक योगदान दे रही है। इसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप किसान, युवा, गरीब कल्याण और महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम संचालित हैं। हमारी संस्कृति में देश के लिए मातृत्व भाव विद्यमान है, हम सब भारत माता पर सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए सदैव तत्पर हैं। आज का मातृशक्ति सम्मेलन- माताओं-बहनों के प्रति सनातन संस्कृति के अनुरूप अनन्य श्रद्धा-स्नेह-प्रेम और सम्मान का प्रकटीकरण है। भारत की कुटुम्ब या परिवार परम्परा हमारी संस्कृति को समृद्ध और सशक्त बनाती है। परिवार परम्परा का आधार मातृशक्ति ही है। बेटियां एक ही नहीं दो परिवारों का उद्धार करती हैं। बहन-बेटियों के प्रति इस सम्मान के परिणामस्वरूप ही प्रदेश में “लाड़ली बहना योजना’’ आरंभ की गई। सावन के महीने में लाड़ली बहनों के खाते में 1250 रूपए के साथ 250 रूपए अतिरिक्त रूप से आने वाले हैं। यह बहन-बेटियों प्रति हमारी सरकार का आदर और स्नेह है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सतना जिले के सिंहपुर में आयोजित मातृशक्ति उत्सव के अंतर्गत आयोजित महिला सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। प्रदेश की सभी बहनें हमारा मान हैं, अभिमान हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत बहनों को जारी की जाने वाली राशि में चरणबद्ध रूप से वृद्धि होगी और वर्ष 2028 तक बहनों को तीन हजार रूपए प्रतिमाह उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण और उनके कल्याण के लिए 1500 करोड़ रूपए से अधिक प्रतिमाह अंतरित किए जा रहे हैं। प्रदेश की सभी बहनें हमारा मान हैं, अभिमान हैं। इनके मान-सम्मान और कल्याण के लिए हम कोई कसर नहीं रखेंगे। दीपावली के बाद आने वाली भाईदूज तक राज्य सरकार सभी लाड़ली बहनों को 1250 रुपए से बढ़ाकर हर माह 1500 रूपए सहायता राशि देगी। बहन-बेटियों के सशक्तिकरण के‍लिए स्व-सहायता समूहों का संचालन, नौकरियों और स्थानीय व नगरीय निकायों और पंचायतों में आरक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा और विधानसभा में बहनों का 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। माताओं-बहनों के कल्याण के लिए ही सभी परिवारों को पक्के मकान, घर-घर गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दीदीयां लखपति बनकर प्रगति कर रही हैं, बेटियों के लिए शिक्षा की उचित व्यवस्था है, उन्हें साइकिलें उपलब्ध कराने के साथ-साथ परीक्षा में अच्छा परिणाम लाने पर प्रोत्साहन स्वरूप लेपटॉप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डॉक्टर-इंजीनियर बनने के लिए भी आवश्यक हरसंभव सहायता बेटियों को उपलब्ध है। उद्योगों में काम करने वाली बहनों के लिए भी राज्य सरकार विशेष सहायता प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की जिन्दगी बदलने के लिए उन्हें बिजली में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सोलर पम्प पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। अगले डेढ़ माह में बरगी नहर का कार्य पूर्ण हो रहा है, इससे रीवा-सतना क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। हमारी सरकार ने हर खेत तक पानी पहुंचाने का संकल्प लिया है और हम इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष 2002-03 तक केवल 7 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविध उपलब्ध थी। वर्तमान में हम 55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2028 तक 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में इस वर्ष 2600 रूपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया गया। अगले दो साल में संभवत: 2700 रूपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के माध्यम से शीघ्र ही गरीबों के लिए 4 करोड़ आवास स्वीकृत होने वाले हैं, वर्ष 2028 तक 80 करोड़ लोगों को नि:शुल्क राशन की व्यवस्था है, बच्चों की शिक्षा के लिए सांदिपनी विद्यालय जैसे स्कूल विद्यमान हैं, यह सब रामराज की संकल्पा को साकार करने के समान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार श्रीराम वन गमन पथ का निर्माण करा रही है। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण ने जहां-जहां लीलाएं की हैं, वे स्थल तीर्थ के रूप में विकसित किए जाएंगे। किसानों की आय में वृद्धि के‍लिए गौपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, इससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि से परिवार के सभी सदस्यों को पर्याप्त पोषण भी उपलब्ध हो सकेगा। अत: सरकार घर-घर गौपालन को प्रोत्साहित करने के लिए 'जिसके घर गाय वह गोपाल' के भाव से कार्य कर रही है। प्रदेश में देश का 9 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन होता है, इसे 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। यदि कोई गौ-पालक 25 गायों का पालन करता है तो उन्हें लागत के 40 लाख रूपए में से 10 लाख रूपए अनुदान के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे। गौशालाओं में भी प्रति गौमाता 20 रूपए के स्थान पर 40 रूपए की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। पांच हजार से अधिक गौमाताएं पालने पर 130 एकड़ जमीन और 40 रूपए प्रति गाय के मान से सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। गौमाताओं की उचित देखभाल के लिए नगर निगम, नगर परिषद और पंचायतों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा-सतना क्षेत्र में पर्याप्त औद्योगिक गतिविधियां संचालित हैं। इस क्षेत्र में पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए होमस्टे विकसित करने में राज्य सरकार सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सतना जिला भगवान श्रीराम से जुड़ता है अत: क्षेत्र के विकास के लिए कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित जनसमुदाय को अपने गांव-मोहल्ले का उन्नयन करते हुए सतना जिले को … Read more

मंत्री राजपूत बोले – सेवा के लिए हर समय तैयार हूं, जनता का साथ नहीं छोड़ूंगा

मुश्किल की घड़ी में हर वक्त मैं जनता के साथ, हर जरूरत में सेवा के लिए तत्पर हूं : मंत्री राजपूत संकट की हर घड़ी में जनता के साथ खड़ा रहूंगा: मंत्री राजपूत का संकल्प मंत्री राजपूत बोले – सेवा के लिए हर समय तैयार हूं, जनता का साथ नहीं छोड़ूंगा लोहगढ़िया समाज के 100 से अधिक परिवारों को बांटे तिरपाल भोपाल बारिश का मौसम जहां कई लोगों के लिए सुकून लेकर आता है, वहीं गरीब तबके और झोपड़ी व कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए यह तकलीफ का कारण भी बन जाता है। ऐसे ही समय में  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने  सागर जिले के बेरखेड़ी गांव के लोहगढ़िया मोहल्ले में तिरपाल वितरित किए, जिससे बारिश से उनके घरों की सुरक्षा हो सके और वे सुरक्षित रह सकें।  मंत्री राजपूत ने कहा कि सुरखी विधानसभा मेरा परिवार है और परिवार के हर नागरिक की सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी है। चाहे कितनी भी व्यस्तता हो, मैं हर वक्त आपके साथ खड़ा हूं। उन्होंने कहा कि लोहगढ़िया समाज ने भारतीय इतिहास में उल्लेखनीय योगदान दिया है और उनके त्याग और संघर्ष को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि क्षेत्र के विकास और जरूरतमंदों की मदद के लिए वे सदैव तत्पर हैं। मंत्री ने विकास का संकल्प दोहराया खाद्य मंत्री राजपूत ने सुरखी विधानसभा क्षेत्र के समग्र विकास का खाका भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण अंचलों में पक्की सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, नल-जल योजना के माध्यम से हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाया जा रहा है और बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नए ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं। मंत्री राजपूत ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि सुरखी विधानसभा को शहरी सुविधाओं से लैस एक मॉडल क्षेत्र बनाया जाए।  लोहगढ़िया समाज ने किया मंत्री राजपूत का सम्मान मंत्री राजपूत के इस सेवा कार्य से भाव विभोर होकर लोहगढ़िया समाज के लोगों ने उनका स्वागत किया और आभार व्यक्त किया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि संकट की इस घड़ी में मंत्री राजपूत द्वारा दी गई मदद उनके लिए संबल का कार्य करेगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।   

स्वास्थ्य सेवा की दिशा में पहल: उप मुख्यमंत्री ने दो नये केन्द्रों का शुभारंभ किया

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सिकल सेल परामर्श केन्द्र एवं पोषण मित्र केन्द्र का किया शुभारंभ उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सिकल सेल व पोषण मित्र केन्द्रों का किया उद्घाटन स्वास्थ्य सेवा की दिशा में पहल: उप मुख्यमंत्री ने दो नये केन्द्रों का शुभारंभ किया सिकल सेल एनीमिया के प्रबंधन के लिए एनएचएम, गांधी मेमोरियल अस्पताल रीवा और किरण सेवा संस्थान के मध्य एमओयू भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित मरीजों की पहचान कर उन्हें समुचित चिकित्सा सुविधा एवं पोषण आर्गेनिक किट उपलब्ध कराने में किरण सेवा संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल की उपस्थिति में किरण सेवा संस्थान, एनएचएम तथा गांधी मेमोरियल अस्पताल रीवा के मध्य एमओयू किया गया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने किरण सेवा संस्थान रीवा में सिकल सेल परामर्श एवं पोषण मित्र केन्द्र का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सिकल सेल को वर्ष 2030 तक प्रदेश से उन्मूलित किया जायेगा। रीवा जिले के साथ शहडोल जिले में भी किरण सेवा संस्थान ग्रामीण क्षेत्र तक सिकल सेल से पीड़ित मरीजों की पहचान कर उन्हें चिकित्सकीय परामर्श व आर्गेनिक पोषण किट प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि पीड़ित मानवता का सेवा में शासन के साथ स्वयंसेवी संस्थाएँ भी आगे आयें। सिकल सेल रक्त में विकृतियों से होने वाली बीमारी है। इसका प्रकोप जनजातीय क्षेत्रों में अधिक होता है। सभी के समन्वित प्रयासों से इसका उन्मूलन किया जा सकेगा। कार्यक्रम में डॉ. बीनू कुशवाहा ने बताया कि गांधी मेमोरियल अस्पताल में गर्भवती महिलाओं में सिकल सेल के परीक्षण की सुविधा उपलब्ध है। जेनेटिक लैब के प्रारंभ होने पर इसका संपूर्ण इलाज भी संभव हो जायेगा। कार्यक्रम में डॉ. अभय मिश्रा ने बताया कि किरण सेवा संस्थान द्वारा चिकित्सकों के माध्यम से नि:शुल्क परामर्श दिया जायेगा साथ ही उन्हें शत-प्रतिशत आर्गेनिक किट भी उपलब्ध कराई जायेगी। इस अवसर पर समाजसेवी अतुल जैन ने कहा कि इस केन्द्र के माध्यम से सिकल से पीड़ित मरीजों की पहचान कर इलाज मिलेगा।  

यूपी में पंचायत चुनाव टलने के संकेत, सरकार ने आयोग को लिखा पत्र

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में इस बार पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं होने की पूरी संभावना है, क्योंकि शासन स्तर पर चल रही कवायदों के बीच संकेत मिल रहे हैं कि नगरीय क्षेत्रों की सीमा विस्तार और नए निकायों के गठन के चलते पंचायत चुनाव को फिलहाल टालने की तैयारी चल रही है। दरअसल, नगर विकास विभाग द्वारा 97 नए नगरीय निकायों के गठन और 107 निकायों के सीमा विस्तार की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसको लेकर पंचायतीराज विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर यह स्पष्ट करने को कहा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बीच वार्डों का पुनर्गठन किया जाए या इस पर फिलहाल रोक लगाई जाए। 22 जुलाई को भेजे गए इस पत्र पर अभी तक आयोग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। वहीं, आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य फिलहाल नहीं रोका है। सभी जिलों में अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें जारी हैं। सूत्रों की मानें तो अंतिम निर्णय शासन स्तर पर उच्चस्तरीय बैठक के बाद ही लिया जाएगा, लेकिन यह बैठक अभी तक नहीं हुई है। इससे पंचायत चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस बीच प्रदेश में विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अगले साल दिसंबर में स्नातक और शिक्षक क्षेत्र की 11 सीटें रिक्त हो रही हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने एमएलसी चुनाव के लिए मतदान केंद्रों के चयन और मतदाता सूची पुनरीक्षण के निर्देश जारी कर दिए हैं। जहां एक ओर एमएलसी चुनाव की गतिविधियां तेज हो गई हैं, तो वहीं पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर फिलहाल धुंधली है। सीमा विस्तार और नए निकायों के गठन की प्रक्रिया के चलते पंचायत चुनाव आगे खिसकने के पूरे आसार बनते जा रहे हैं।