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इंदौर को मिलेगी IT सेक्टर की बड़ी सौगात, CM डॉ. यादव करेंगे इंफोसिस के नए डेवलपमेंट ब्लॉक का उद्घाटन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को इंदौर में इंफोसिस के नए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट ब्लॉक का करेंगे शुभारंभ प्रदेश में उन्नत तकनीकी क्षमताओं और टैलेंट इको सिस्टम को मिलेगा बढ़ावा इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 16 सितंबर को इंदौर के सुपर कॉरिडोर स्थित इंफोसिस परिसर में नए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट ब्लॉक-2 (SDB-2) का शुभारंभ करेंगे। यह ब्लॉक 3 लाख 30 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल में विकसित किया गया है जो प्रदेश में उन्नत तकनीकी क्षमताओं तथा रोजगारपरक टैलेंट इको सिस्टम को और सशक्त करेगा। इंफोसिस मध्यप्रदेश के बढ़ते टैलेंट पूल का लाभ लेने के साथ प्रदेश के शैक्षणिक एवं तकनीकी इको सिस्टम के साथ अपना जुड़ाव भी मजबूत करेगी। इसके अंतर्गत स्किलिंग कार्यक्रमों एवं संस्थागत साझेदारियों के माध्यम से आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के साथ सहभागिता को विस्तार दिया जाएगा। इंफोसिस इंदौर में वर्तमान में 3 हजार 300 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, जो बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा, हेल्थकेयर, रिटेल, फार्मा एवं लाइफ साइंसेज तथा मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। विस्तारित केंद्र से क्लाउड, एप्लीकेशन डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग तथा साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कंपनी की क्षमताओं का विस्तार होगा। इससे प्रदेश में उन्नत तकनीकी सेवाओं और कौशल विकास के अवसरों को गति मिलेगी। इंफोसिस इंदौर में नया भवन पर्यावरण अनुकूल एवं ऊर्जा दक्ष बनाया गया है और ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। इसमें कम ऊर्जा वाली कूलिंग, स्मार्ट बिल्डिंग ऑटोमेशन, वर्षा जल संचयन और अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण जैसी सुविधाओं के साथ प्रशिक्षण एवं वेलनेस सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।  

बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे से बदलेगी दक्षिण बिहार की तस्वीर, उद्योग और रोजगार को मिलेगा बूस्ट

पटना   बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को लेकर बड़ा प्रोजेक्ट सामने आया है. राज्य सरकार ने 336 किलोमीटर लंबे बक्सर-भागलपुर सिक्स लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को मंजूरी दी है. यह प्रोजेक्ट दक्षिण बिहार के 13 जिलों को नई कनेक्टिविटी देगा. साथ ही उद्योग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे.बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे बक्सर से शुरू होकर भागलपुर तक जाएगा. इसके रास्ते में दक्षिण बिहार के 13 जिले आएंगे.इनमें बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर शामिल हैं.एक्सप्रेस-वे बनने के बाद बक्सर से भागलपुर का सफर काफी कम समय में पूरा हो सकेगा. अभी जहां इस यात्रा में करीब 10 से 12 घंटे लगते हैं, वहीं इसके घटकर 4 से 5 घंटे होने की उम्मीद है. पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा रूट इस प्रोजेक्ट की अहमियत सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं होगी. बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा. इससे दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश से बिहार होते हुए बंगाल की तरफ जाने वाला कनेक्शन आसान होगा. इससे माल ढुलाई और लंबी दूरी के परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. सिर्फ सड़क नहीं, बनेगा 'यूटिलिटी कॉरिडोर' इस एक्सप्रेस-वे की खासियत इसकी कनेक्टिविटी के साथ-साथ इसका यूटिलिटी कॉरिडोर के रूप में विकसित होना है. प्रोजेक्ट के तहत एक्सप्रेस-वे के समानांतर GAIL की नेचुरल गैस पाइपलाइन और पावर ग्रिड की हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों का नेटवर्क विकसित होने की योजना है. किसी भी बड़े उद्योग के लिए परिवहन, बिजली और ऊर्जा की अहम भूमिका होती है. ऐसे में इस कॉरिडोर से उद्योगों को इन सुविधाओं तक आसान पहुंच मिल सकेगी. उद्योगों को क्या होगा फायदा? गैस और बिजली ग्रिड के नजदीक होने से निवेशकों को अलग से भारी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जरूरत कम होगी. इससे उद्योग स्थापित करने की लागत घट सकती है. बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी BIADA भी इस नेटवर्क का फायदा उठाने की तैयारी में है. एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर बड़े लैंड बैंक विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है. एग्रो प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा यूटिलिटी नेटवर्क की आसान उपलब्धता से एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा सकेंगे.यहां एग्रो-प्रोसेसिंग, फूड पार्क और मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों के लिए विशेष क्षेत्र विकसित करने की संभावना है. इससे दक्षिण बिहार में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं.लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग को भी फायदा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से कनेक्टिविटी मिलने के बाद यह पूरा रूट बड़े लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का हिस्सा बन सकता है. एक्सप्रेस-वे के आसपास वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन से जुड़े प्रोजेक्ट विकसित होने की संभावना है. इससे बिहार के कारोबारियों के लिए दूसरे राज्यों तक सामान पहुंचाना आसान होगा. दक्षिण बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के मौके सड़क के साथ औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं. मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसे सेक्टर में स्थानीय स्तर पर नौकरियां बढ़ने की उम्मीद है. इससे दक्षिण बिहार के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के विकल्प मिल सकते हैं. 3700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत 336 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे की अनुमानित लागत करीब 3,700 करोड़ रुपये बताई गई है. इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर विकसित किया जाएगा. यह पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे होगा. यानी निर्धारित स्थानों से ही वाहनों को प्रवेश और निकास की सुविधा मिलेगी. एक्सप्रेस-वे पर देना होगा टोल बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे को DBFOT-Toll मॉडल पर विकसित किया जाएगा. ऐसे में इसके चालू होने के बाद एक्सप्रेस-वे का इस्तेमाल करने वाले वाहनों से टोल शुल्क लिया जाएगा. कुल मिलाकर यह प्रोजेक्ट दक्षिण बिहार में सड़क कनेक्टिविटी के साथ उद्योग, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा के नेटवर्क को एक साथ जोड़ने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है. 

अगले 48 घंटों में हल्की बारिश के आसार, 19 सितंबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून की होगी विदाई

लखनऊ उत्तर प्रदेश में इस सीजन मानसून की झमाझम बारिश के बाद अब इसकी विदाई की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। लखनऊ के अमौसी स्थित यूपी-उत्तराखंड के मौसम मुख्यालय के अनुसार 19 सितंबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क हो जाने की संभावना है। इससे पहले पश्चिमी यूपी में 17 सितंबर को एक बार फिर झमाझमा बारिशकी हो सकती है। अब पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक वापसी शुरू होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। 48 घंटे आंशिक तेजी के बाद थमेगी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश में कोई बहुत बड़ा सक्रिय मौसम तंत्र मौजूद नहीं है। हालांकि अरब सागर से आ रही नमी के असर से आगामी 48 घंटों के दौरान राज्य में बारिश की गतिविधियों में हल्की आंशिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके बाद मानसूनी बारिश में उत्तरोत्तर कमी आएगी और 19 सितंबर से पश्चिमी यूपी का मौसम शुष्क होने लगेगा। मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र पिछले 72 घंटों में मध्य भारत से गुजरते हुए वर्तमान में दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उससे सटे गुजरात के ऊपर केंद्रित है। मानसून की ट्रफलाइन अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसकी हुई है लेकिन इसका पूर्वी छोर सामान्य स्थिति के निकट है। कोई बड़ा सिस्टम न होने के बावजूद केवल नमी के प्रभाव से सीमित और छिटपुट बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं। सामान्य से तीन फीसदी का अंतर रहा इस बार मौसम विभाग के अनुसार इस सीजन के दौरान यूपी में अब तक 666 मिलीमीटर वर्षा हुई है। यह सामान्य (685.7 मिमी) से केवल 3 प्रतिशत कम है। वेस्ट यूपी में छह फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। वेस्ट यूपी में इस सीजन मानसून ने खूब भिगोया है। यहां सामान्य 628 मिमी की तुलना में 663.9 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। यानी सामान्य से 6 फीसदी अधिक वर्षा हुई। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 667.5 मिलीमीटर वर्षा हुई जो सामान्य (726.9 मिमी) के मुकाबले 8 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। विदाई से पहले वेस्ट यूपी को भिगो सकता है मानसून मेरठ सहित वेस्ट यूपी में विदाई से पहले मानसून एक बार फिर से भिगो सकता है। 17 सितंबर तक पूरे क्षेत्र में अच्छी बारिश के आसार बन रहे हैं। आज देर रात से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसे पहले भी वेस्ट यूपी में कुछ हिस्सों में बौछारें और हल्की बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं। 19 सितंबर के बाद राजस्थान से मानसून वापसी की प्रक्रिया भी शुरू होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने सोमवार को इसकी घोषणा कर दी। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार केा मेरठ में दिन-रात का तापमान क्रमश: 34.1 एवं 24.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। रविवार के सापेक्ष दिन में 0.9 और रात में 0.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई। बावजूद इसके दिन-रात के तापमान सामान्य से 0.2 एवं 1.1 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड हुए। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक सामान्य के आसपास ही तापमान बने रहने के आसार हैं। सोमवार को मेरठ का एक्यूआई 61 दर्ज हुआ जो संतोषजनक श्रेणी में है।

एदलहातू, डोरंडा और करमटोली समेत विभिन्न इलाकों से अवैध कब्जा हटाकर शुरू हुआ सीमांकन

 रांची वर्षों से अतिक्रमण की चपेट में रही नगर निगम की जमीन अब शहर के विकास में उपयोगी साबित होगी। रांची नगर निगम ने पिछले एक वर्ष के दौरान कई महत्वपूर्ण निगम संपत्तियों और भूमियों को अतिक्रमणमुक्त कराने के बाद उनके सीमांकन, अभिलेखीकरण और संरक्षण की कार्रवाई शुरू की है। निगम के अनुसार, अब तक जिन प्रमुख भूखंडों का क्षेत्रफल स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराया गया है, उनका कुल रकबा करीब 27 एकड़ है। हालांकि, कुछ अन्य स्थानों पर की गई कार्रवाई का क्षेत्रफल अलग से नहीं बताया गया है, इसलिए वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है। इन इलाकों में मुक्त कराई गई भूमि निगम के अनुसार, एदलहातू में लगभग 4.8 एकड़, कुसुम बिहार में 78.65 डिसमिल, करमटोली तालाब में 51 डिसमिल, ग्वाला टोली, डोरंडा में लगभग 1.20 एकड़ और उर्दू स्कूल, थड़पखना में 31.5 डिसमिल भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया गया है। सीमांकन के बाद इन स्थलों पर बाउंड्री निर्माण की कार्रवाई चल रही है। इसके अलावा बड़ा घाघरा में लगभग 2.80 एकड़, डोरंडा मानिटोला में पांच एकड़, पिंजरा पोखर-गौशाला चौक में 11 डिसमिल, डोरंडा बाजार में लगभग एक एकड़ और बूटी मोड़ चौक में करीब 0.44 एकड़ भूमि को भी अतिक्रमणमुक्त कर संरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। इन सभी भूखंडों का कुल रकबा लगभग 26.96 एकड़, यानी करीब 27 एकड़ है। तुपुदाना में एनआइएफटी के समीप, कांटाटोली बस स्टैंड, बड़गाई और बाधगाड़ी समेत अन्य क्षेत्रों में भी सरकारी एवं निगम से संबंधित भूमियों को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई की गई है। निगम की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा नगर निगम की ओर से मोरहाबादी इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, मोरहाबादी रजिस्ट्री कार्यालय, नागा बाबा खटाल एमआरएफ सेंटर, ट्रेकर स्टैंड एमआरएफ सेंटर और बकरी बाजार स्टोर की परिसंपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए बाउंड्री निर्माण कराया जा रहा है। धुर्वा, जगन्नाथपुर और खादगढ़ा आश्रय गृहों की परिसंपत्तियों के संरक्षण की दिशा में भी काम जारी है। मोरहाबादी, बूटी मोड़ और डोरंडा में प्रस्तावित वेंडिंग जोन नगर निगम के अनुसार, अतिक्रमणमुक्त भूमि का उद्देश्य केवल उसे खाली रखना नहीं है। मोरहाबादी इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, मोरहाबादी रजिस्ट्री कार्यालय, बूटी मोड़ और डोरंडा बाजार क्षेत्र में व्यवस्थित वेंडिंग जोन विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे फुटपाथ और सड़क किनारे लगने वाली दुकानों को व्यवस्थित स्थान मिल सकेगा। दैनिक मजदूरों के लिए डोरंडा बाजार और लोआडीह में लेबर चौक विकसित किया गया है। निगम की अन्य भूमियों पर लाइब्रेरी, आश्रय गृह, सार्वजनिक सुविधाएं तथा स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी आधारभूत संरचनाएं विकसित करने की भी योजना है।

CGPSC पेपर लीक केस में ED का बड़ा दावा, चेतन के खाते में मिले 66.64 लाख; 170 लेन-देन की जांच

रायपुर  छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) पेपर लीक मामले में पूर्व CM भूपेश बघेल के तत्कालीन OSD चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया गया था। ED ने चेतन बोरघारिया से पूछताछ की है। ED के अनुसार चेतन के बैंक खाते में 170 ट्रांजेक्शन के जरिए 66.64 लाख कैश जमा हुए। चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कई वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं। ED के मुताबिक, CGPSC परीक्षा 2021 में कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। प्रिलिम्स एग्जाम से पहले रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र बांटा गया। इसके बाद बरनवापारा अभयारण्य के एक रिसॉर्ट में ठहराकर मुख्य परीक्षा के लीक प्रश्नपत्र के आधार पर कथित तौर पर कोचिंग दी गई। 3 करोड़ से ज्यादा की अवैध रकम लेने का आरोप ED की जांच के मुताबिक, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 के अलग-अलग अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपए से ज्यादा की कथित अवैध रकम जुटाई। आरोप है कि अभ्यर्थियों को पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और उनका चयन कराने का भरोसा दिया गया था। इसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में अपने कथित संपर्क और प्रभाव का इस्तेमाल करने की बात कही गई। जांच में यह भी सामने आया कि ऐसे आश्वासनों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया के नाम और उनके आधिकारिक पद का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में बातचीत सामने आई ED के मुताबिक, जब्त डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच में चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुई बातचीत सामने आई। इनमें वित्तीय लेन-देन और रकम वापस करने या भुगतान की मांग से संबंधित बातचीत भी शामिल थी। जांच में M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited से जुड़े कई वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं। ED को संदेह है कि इस कंपनी का इस्तेमाल रकम को अलग-अलग स्तर पर घुमाने और फंड की लेयरिंग के लिए किया गया। 11 सितंबर को हुई थी गिरफ्तारी ED ने कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग लेन-देन और PMLA के तहत दर्ज बयानों से चेतन बोरघरिया की अपराध से अर्जित रकम से जुड़े कामों में कथित संलिप्तता सामने आई है। इनमें रकम हासिल करना, अपने कब्जे में रखना, छिपाना और उसका इस्तेमाल करना शामिल है। इसके आधार पर चेतन बोरघरिया को PMLA की धारा 19 के तहत 11 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। ED के अनुसार, चेतन बोरघरिया वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज में अतिरिक्त कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। जानिए क्या है CGPSC घोटाला यह मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया। इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं। वसूली गई रकम कहां से आई, जांच जारी इस घोटाले में सीबीआई ने तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक, चार चयनित अभ्यर्थियों और एक निजी व्यक्ति को पहले ही गिरफ्तार किया था। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले की जांच में जुटी है। एजेंसी ने कथित कैश सिंडिकेट की पड़ताल के लिए करीब 30 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। इनमें विवादित अभ्यर्थियों के साथ एनजीओ, एक बड़ी कंपनी और रिसार्ट संचालकों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों से वसूली गई रकम कहां से आई और किन लोगों तक पहुंचाई गई।

राजग शासित राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू करने के ऐलान पर संजय झा बोले- गृह मंत्री से मुलाकात के बाद तय होगा पार्टी का रुख

पटना  विजय चौधरी ने यूसीसी पर जदयू का पक्ष रखा है। भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता लागू किए जाने को लेकर हाल ही में देश के गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि यूसीसी को बीजेपी शासित राज्यों में लागू किया जाएगा। लेकिन इसके बाद बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक श्याम रजक ने कह दिया था कि राज्य में यूसीसी को किसी भी कीमत पर लागू नहीं किया जाएगा। जदयू की तरफ से अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने यूसीसी को लेकर पार्टी का पक्ष रखा है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा है उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल के प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। उसके प्रावधानों को देखने के बाद उसपर पार्टी विमर्श करेगी। अगर कोई विवाद का मामला होगा, तब पार्टी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करेगी। उपमुख्यमंत्री मंगलवार को जदयू प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में ये बातें कही। बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सोमवार को कहा था कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही शाह से मुलाकात करेंगे और फिर उनकी पार्टी अपना रुख तय करेगी। अमित शाह ने रविवार को कहा था कि भाजपा के नेतृत्व वाले राजग की 21 राज्यों की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू करेंगी। संजय झा ने इस विषय पर 'पीटीआई-भाषा' से कहा था कि वह जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे और उसके बाद पार्टी यूसीसी के मुद्दे पर अपना रुख तय करेगी। इस बीच, बिहार में सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख घटक जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि पार्टी ने संसद में यूसीसी से जुड़े विधेयक का समर्थन किया था, लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा था कि पार्टी के सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं। श्याम रजक ने कहा था कि इस मुद्दे पर हमारे नेता ने बहुत पहले ही पार्टी का रुख स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा था कि हमारी पार्टी संसद में यूसीसी विधेयक का समर्थन कर रही है, लेकिन बिहार में इसे लागू किए जाने के पक्ष में नहीं है। वैसे, जद(यू) अब तक सैद्धांतिक रूप से यूसीसी के खिलाफ रही है। पार्टी के सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार ने बिहार का मुख्यमंत्री रहते हुए जनवरी, 2017 में विधि आयोग को पत्र लिख कर कहा था कि विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच आम सहमति के अभाव और स्पष्ट रूपरेखा न होने के कारण समान नागरिक संहिता को जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाना चाहिए। JDU का नाम 'जनता दल नीतीश' करने पर क्या बोले जनता दल (यूनाइटेड) का नामकरण नीतीश कुमार के नाम पर किये जाने पर कहा कि जदयू राष्ट्रीय परिषद इस पर निर्णय लेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में आई बाढ़ से हुई क्षति का आकलन करने केंद्रीय टीम आ रही है। हमलोग आशान्वित हैं कि केंद्र सरकार मदद करेगी। इधर यूसीसी की चर्चा के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर केंद्रीय पंचायती राज मंत्री लालन सिंह आदि नेता उनसे मिलने पहुंचे थे।

छत्तीसगढ़ में अगले दो दिन सामान्य बारिश के आसार, रायपुर का पारा 33 डिग्री तक जाने की संभावना

रायपुर  छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर फिलहाल बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक इसके पीछे एक साथ तीन मौसमी सिस्टम सक्रिय हैं। मानसून ट्रफ, कम दबाव के क्षेत्र से जुड़ी ट्रफ और बंगाल की खाड़ी के पास बना चक्रवाती घेरा प्रदेश में नमी पहुंचा रहे हैं। इन्हीं मौसमी परिस्थितियों के प्रभाव से अगले दो दिनों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। पिछले 24 घंटे में कई जगह बारिश पिछले 24 घंटे के दौरान छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। इस दौरान माना में सबसे अधिक 33.2°C अधिकतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। वहीं, प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान पेंड्रा रोड में 20°C दर्ज हुआ। रायपुर में बादल और बारिश के आसार राजधानी रायपुर में 15 सितंबर को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार शहर में एक-दो बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।रायपुर में आज अधिकतम तापमान करीब 33°C और न्यूनतम तापमान करीब 25°C रहने का अनुमान है। 82 दिन पहले छत्तीसगढ़ पहुंचा था मानसून छत्तीसगढ़ में मानसून को आए 82 दिन हो चुके हैं। 23 जून को दंतेवाड़ा के रास्ते प्रदेश में प्रवेश करने के बाद से अब तक अच्छी बारिश दर्ज की गई है। 12 सितंबर तक प्रदेश में 1001 मिमी बारिश हो चुकी है। यह इस अवधि के औसत 1041.1 मिमी से करीब 4% कम है। 46 जलाशयों में 91% से ज्यादा औसत जलभराव लगातार हो रही बारिश का असर प्रदेश के जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। 46 प्रमुख और मध्यम जलाशयों में औसत जलभराव 91.10% तक पहुंच गया है। 7 जलाशय पूरी तरह भर चुके हैं। 18 जलाशयों में 90% से ज्यादा पानी है। कई जलाशयों का जलस्तर बढ़ने के कारण पानी की निकासी करनी पड़ी है। धमतरी के रविशंकर सागर समेत कई जलाशयों के गेट खोले गए हैं। इससे साफ है कि प्रदेश में मानसून के दौरान हुई बारिश ने जलाशयों की स्थिति मजबूत की है। अगले दो दिन मौसम का हाल अगले दो दिनों में छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है। गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए विशेषकर खुले क्षेत्रों और खेतों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। 46 जलाशयों में 90 फीसदी से ज्यादा पानी मानसून को प्रदेश में पहुंचे 82 दिन हो चुके हैं। 23 जून को दंतेवाड़ा के रास्ते दाखिल हुए मानसून से अब तक अच्छी बारिश हुई। 12 सितंबर तक प्रदेश में 1001 मिमी पानी बरस चुका है। यह इस अवधि के औसत 1041.1 मिमी से केवल 4% कम है। लगातार बारिश से बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। प्रदेश के 46 प्रमुख और मध्यम जलाशयों में औसत जलभराव 91.10% पहुंच गया है। इनमें सात जलाशय पूरी तरह भर चुके हैं, जबकि 18 अन्य में 90% से ज्यादा पानी है। धमतरी के रविशंकर सागर समेत कई जलाशयों के गेट खोलने पड़े हैं।  

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में ई-बसों का बढ़ा क्रेज, 7.18 लाख से ज्यादा लोगों ने किया सफर

योगी सरकार की ग्रीन मोबिलिटी को मिली रफ्तार, नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो की 100 ई-बसों का शानदार प्रदर्शन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित ई-बसों में अब तक 7.18 लाख से अधिक लोगों ने की यात्रा तीनों प्राधिकरणों में 2.24 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ, लगातार सेवाओं का हो रहा विस्तार जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से ग्रीन मोबिलिटी तक, योगी सरकार के विजन को मिली जमीनी स्तर पर सफलता 24 घंटे लाइव निगरानी की तैयारी, नोएडा में बनेगा तीनों प्राधिकरणों की ई-बसों के लिए कमांड सेंटर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग्रीन मोबिलिटी और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन के विजन का असर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के संचालन प्रतिफल (राजस्व) में लगातार दिखाई दे रहा है। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में डिपो की 100 ई-बसों ने कुल 2.96 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.99 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान की और 61.75 लाख से अधिक का राजस्व अर्जित किया। इस अवधि में प्रति बस प्रतिदिन परिचालन, यात्री संख्या और आय के आधार पर अगस्त की तुलना में बेहतर औसत दैनिक प्रदर्शन दर्ज किया गया। नियमित संचालन प्रारंभ होने के बाद 20 जून से 13 सितंबर 2026 तक तीनों प्राधिकरणों की ई-बसों ने कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन किया। इस दौरान 7.18 लाख से ज्यादा यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ उठाया, जिससे कुल 2.24 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया। जून से सितंबर तक बढ़ता गया ई-बसों का कारोबार नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के अधिकारियों के मुताबिक 20 से 30 जून के 11 दिनों में 100 ई-बसों ने 1.47 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 28,053 यात्रियों को सेवा दी और 9.07 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया। जुलाई में परिचालन बढ़कर 4.79 लाख किलोमीटर, यात्री संख्या 1.50 लाख और राजस्व 47.93 लाख तक पहुंच गया। अगस्त में बसों ने 5.89 लाख किलोमीटर की दूरी तय की और 3.40 लाख यात्रियों को सेवा दी। इस महीने 1.05 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में ही 2.96 लाख किलोमीटर परिचालन, 1.99 लाख यात्रियों और 61.75 लाख का राजस्व प्राप्त किया। अगस्त के 190.21 किलोमीटर प्रति बस प्रतिदिन के मुकाबले सितंबर में यह बढ़कर 227.78 किलोमीटर हो गया। इसी प्रकार यात्री प्रति बस प्रतिदिन की संख्या 109.79 से बढ़कर 153.68 और आय प्रति बस प्रतिदिन 3,414.86 से बढ़कर 4,750.20 रुपये हो गई। आय प्रति किलोमीटर भी 17.95 से बढ़कर 20.85 रुपये हो गई है। चारों अवधियों को मिलाकर 20 जून से 13 सितंबर तक कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन हुआ, जबकि 7.18 लाख यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ लिया। इस दौरान कुल 2.24 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर में बनाया बेहतर दैनिक प्रदर्शन नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 1.50 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.04 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा दी। इस दौरान 31.45 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 231.17 किलोमीटर, यात्री संख्या 160.14 और आय 4,839.17 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर भी 20.93 पहुंच गई। अगस्त की तुलना में दैनिक परिचालन और यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। ग्रेटर नोएडा में यात्री संख्या और आय ने पकड़ी तेज रफ्तार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 77,110 किलोमीटर की दूरी तय की और 53,194 यात्रियों को सफर कराया। इससे 16.17 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 237.26 किलोमीटर और यात्री संख्या 163.67 रही। आय प्रति किलोमीटर 20.98 रुपये व आय प्रति बस प्रतिदिन 4,978.15 रुपये दर्ज की गई। तीनों प्राधिकरणों में ग्रेटर नोएडा प्रति बस प्रतिदिन परिचालित किलोमीटर, यात्री संख्या, आय प्रति किलोमीटर व आय प्रति बस प्रतिदिन के आधार पर शीर्ष पर रहा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी बढ़ा ई-बसों का उपयोग यमुना प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 68,749 किलोमीटर का परिचालन किया और 42,497 यात्रियों को सेवा दी। इस अवधि में 14.11 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 211.54 किलोमीटर, यात्री संख्या 130.76 और आय प्रति बस प्रतिदिन 4,344.32 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर 20.54 रुपये दर्ज हुई, जिससे इस क्षेत्र में भी ई-बस सेवा के मजबूत होते उपयोग का परिणाम दिख रहा है। सीएम योगी के विजन से मिली ग्रीन मोबिलिटी को मजबूती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जून 2026 में नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का उद्घाटन और ई-बसों को हरी झंडी दिखाते हुए एनसीआर में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया था। उनका विजन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र को ग्रीन मोबिलिटी से जोड़ते हुए जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत करना है। बॉक्स नोएडा में बनेगा कमांड सेंटर, होगी लाइव निगरानी यूपीएसआरटीसी मुख्यालय लखनऊ के मुताबिक नोएडा में तीनों प्राधिकरणों से जुड़ी इलेक्ट्रिक बसों के लिए कमांड सेंटर बनाने की तैयारी भी चल रही है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। प्रस्तावित 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम से ई-बसों की लाइव निगरानी की जाएगी। इससे बसों के संचालन, रूट और सेवाओं पर लगातार नजर रखने के साथ यात्रियों को बेहतर और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

अभियंताओं की प्रतिभा, तकनीक और नवाचार से बन रहा है विकसित मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गौरवशाली-प्राचीन स्थापत्य आज भी नये प्रयोग की प्रेरणा देती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव अभियंताओं की प्रतिभा, तकनीक और नवाचार से बन रहा है विकसित मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव अभियंता दिवस पर उत्कृष्ट अभियंताओं, अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों का हुआ सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर विश्वेश्वरैया के चित्र पर अर्पित की पुष्पांजलि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियंता दिवस समारोह को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश की गौरवशाली प्राचीन स्थापत्य विरासत आज भी तकनीक के साथ नये प्रयोग की प्रेरणा देती है। अभियंता अपनी प्रतिभा, तकनीकी ज्ञान और नवाचार से विकास की संभावनाओं को धरातल पर साकार करते हैं। किसी नए मार्ग का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा नहीं देता, बल्कि वह उस पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास का नया द्वार खोलता है। अभियंताओं द्वारा तैयार की जाने वाली प्रत्येक परियोजना और डिजाइन में प्रदेश के भविष्य की आर्थिक संरचना की परिकल्पना निहित होती है। सर विश्वेश्वरैया ने अपनी दूरदृष्टि, तकनीकी दक्षता और राष्ट्र सेवा के भाव से जल प्रबंधन, सिंचाई, औद्योगिक विकास तथा संस्थागत निर्माण के क्षेत्र में ऐसे कार्य किए, जिनका लाभ देश को आज भी मिल रहा है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक व्यक्ति का विजन और संकल्प पूरे देश के विकास को नई दिशा दे सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महान सिविल इंजीनियर भारत रत्न से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर प्रदेश के सभी अभियंताओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अभियंता दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर राज्य स्तरीय समारोह का शुभारंभ किया। समारोह वंदे मातरम् के सामूहिक गान के साथ आरंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर विश्वेश्वरैया के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग सर्कुलर्स के संकलन का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अभियंताओं, अधिकारियों, संयुक्त दलों और निर्माण एजेंसियों को 5 श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग और सीएसआईआर-एम्प्री भोपाल के बीच टिकाऊ अधोसंरचना निर्माण के लिए एमओयू का आदान-प्रदान भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग के गत 10 वर्ष के सर्कुलर्स के संकलन के कम्पेडियम का विमोचन भी किया। भारत की स्थापत्य परंपरा प्राचीन काल से ही रही है समृद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियंता उपलब्ध संसाधनों, ज्ञान और अपनी योग्यता का समन्वय कर उनकी क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं। प्रकृति के पंचतत्वों और आधुनिक तकनीक के संतुलित उपयोग से वे समाज के लिए ऐसी स्थायी संरचनाओं का निर्माण करते हैं, जो पीढ़ियों तक उपयोगी रहती हैं। भारत की स्थापत्य परंपरा प्राचीन काल से ही समृद्ध रही है। एलोरा का कैलाश मंदिर, मंदसौर का धर्मराजेश्वर मंदिर, प्राचीन जल संरचनाएं तथा जीवंत प्रतीत होने वाली शिल्पकृतियां तत्कालीन अभियंताओं और शिल्पकारों की असाधारण तकनीकी दक्षता का परिचय देती हैं। मध्यप्रदेश की प्राचीन स्थापत्य विरासत ने देश के लोकतांत्रिक भवनों की वास्तुकला को भी प्रेरणा दी है। यह गौरवशाली विरासत आज के अभियंताओं को आधुनिक तकनीक के साथ नए प्रयोग करने की प्रेरणा देती है। महापुरुषों के नाम पर पुरस्कार विभाग की अभिनव पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियंताओं को 5 श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान करने की अभिनव पहल के लिए लोक निर्माण विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया पुरस्कार, विश्वकर्मा पुरस्कार, विक्रमादित्य पुरस्कार, रानी दुर्गावती पर्यावरण हितैषी पुरस्कार और राजा भोज पुरस्कार के माध्यम से विभाग ने भारत की ऐतिहासिक विभूतियों के योगदान को आधुनिक निर्माण व्यवस्था से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी नवाचार, सुशासन, पर्यावरण संरक्षण और जनहित के प्रति अभियंताओं की प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करेंगे। वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त अभियंताओं का सम्मान विभाग की गौरवशाली परंपरा और उनके दीर्घकालीन योगदान के प्रति आदर का प्रतीक है। नवाचार करने वाले अभियंताओं के साथ है सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीमेंटरहित कंक्रीट सहित पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री और आधुनिक तकनीकों पर किए जा रहे प्रयोगों की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग नई तकनीक, अनुसंधान और नवाचारों को अपनाकर देश के अग्रणी विभागों में अपनी पहचान बना रहा है। विभाग की उपलब्धियां पूरी टीम की मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। मुख्यमंत्री ने अभियंताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वे निर्भय होकर जनहित में नवाचार करें, राज्य सरकार हर सकारात्मक पहल में उनके साथ खड़ी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का आत्मविश्वास और वैश्विक प्रतिष्ठा निरंतर बढ़ रही है। विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में अभियंताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अनुसंधान अनुशासन और परफेक्शन’ बने लोक निर्माण की कार्य-संस्कृति – मंत्री सिंह लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के विकास को नई गति, दिशा और पहचान प्रदान की है। अभियंता केवल शासकीय कर्मचारी नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की विकास यात्रा के निर्माता हैं। लोक निर्माण विभाग के प्रत्येक कार्य का अंतिम उद्देश्य ‘लोक निर्माण से लोक कल्याण’ होना चाहिए। “निर्माण हमारी जिम्मेदारी है, लोक कल्याण हमारा लक्ष्य है, गुणवत्ता हमारी पहचान है, नवाचार हमारी शक्ति है, तकनीक हमारा भविष्य है और विकसित मध्यप्रदेश हमारा संकल्प है।” उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग में वार्षिक पुरस्कारों की शुरुआत सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई थी। भास्कराचार्य संस्थान सहित विभिन्न विशेषज्ञ संस्थाओं के सहयोग से विभाग ने अनेक डिजिटल समाधान विकसित किए हैं। विभाग के नवाचारों को अन्य राज्यों ने भी अपनाया मध्यप्रदेश में प्रारंभ किए गए कई नवाचारों को अन्य राज्यों ने भी अपनाया है। केवल नौ माह में विभाग के 85 प्रतिशत से अधिक अभियंताओं को देश के चार प्रमुख इंजीनियरिंग प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा घोषित इंजीनियरिंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। यह संस्थान मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग रिसर्च, नवाचार और प्रशिक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। सीएसआईआर, एम्प्री के साथ लोक निर्माण विभाग के एमओयू से हमें सीमेंट के बिना कांक्रीट की सड़क बनाने की तकनीक मिलेगी। मध्यप्रदेश में बनने वाले सरकारी भवन अब ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी पर बनेंगे। लोक निर्माण विभाग ने … Read more

31 हजार से अधिक PRD जवानों को परिवार सहित 5 लाख तक का इलाज, रसोइयों-आंगनवाड़ी कर्मियों को भी लाभ

जो प्रदेश की सेवा में जुटे, योगी सरकार ने उनके परिवारों को दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच 31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने समाज के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले पीआरडी स्वयंसेवकों, विद्यालयों की रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के कल्याण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन सेवा वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ उनके और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया है। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ने से रोकने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि सरकार ने कर्मचारी के साथ उसके आश्रित परिवार को भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में रखा है। 31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज प्रदेश की सुरक्षा, यातायात, आपदा और प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करने वाले 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार का लाभ मिलेगा। इससे पीआरडी स्वयंसेवकों के परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़ी रकम जुटाने की चिंता से राहत मिलेगी। रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों के लिए भी सरकार ने आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को एक साथ जोड़ा है। उनके मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की वृद्धि के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय लिया गया है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह सुविधा बीमारी के समय बड़ा आर्थिक सहारा साबित हो सकती है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ बाल विकास, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए भी सरकार ने मानदेय बढ़ाया है। कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये किया गया है। साथ ही दोनों के परिवारों को पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया गया है। मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर इन फैसलों में योगी सरकार की नीति का एक स्पष्ट पक्ष दिखाई देता है, सेवा करने वाले व्यक्ति के साथ उसके परिवार की भी चिंता। बीमारी में इलाज के लिए बड़ी रकम की व्यवस्था करना निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा सीधे परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ती है। पीआरडी जवानों से लेकर रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों तक, सरकार ने मानदेय बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा जोड़कर इन सेवा वर्गों के लिए आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का दोहरा कवच तैयार किया है।