samacharsecretary.com

धमतरी के शशिकांत की जिंदगी बदलेगी, 10 साल पुराने हादसे के बाद CM साय AIIMS में कराएंगे इलाज

 धमतरी  करीब 10 साल पहले हुए सड़क हादसे ने धमतरी जिले के देवपुर निवासी शशिकांत भरत की जिंदगी बदल दी। 11 नवंबर 2016 को ग्राम दुगली के पास धमतरी से लौटते समय शाम करीब पांच से छह बजे के बीच हुए हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। हालत इतनी गंभीर थी कि वे करीब 50 दिनों तक कोमा में रहे। हादसे के बाद सर्वाइकल संबंधी समस्या के कारण उनके हाथ-पैरों की कार्यक्षमता प्रभावित हो गई। आज भी वे स्वयं चलने-फिरने, उठने-बैठने और दैनिक कार्य करने में सक्षम नहीं हैं। उनकी देखभाल मुख्य रूप से उनकी मां करती हैं। सोशल मीडिया वीडियो देख CM विष्णुदेव साय ने बढ़ाया मदद का हाथ शशिकांत की जिंदगी में अब उपचार की नई उम्मीद जगी है। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को उनकी परेशानी की जानकारी मिली। मुख्यमंत्री ने तत्काल शशिकांत से फोन पर बातचीत कर स्वास्थ्य की स्थिति जानी और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।  

मुख्यमंत्री ने कहा- अभियान से आम नागरिक को मिले प्रत्यक्ष लाभ

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ जनकल्याण और जनभागीदारी का व्यापक अभियान बने। अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से अधिक से अधिक नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री  साय ने आज सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों को लेकर आयोजित कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि अभियान के प्रत्येक कार्यक्रम के केंद्र में आम नागरिक और उसकी जरूरतें होनी चाहिए। पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ने, युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के करीब पहुंचाने और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री  साय ने सभी जिला कलेक्टरों से अभियान की तैयारियों की नियमित समीक्षा करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्यक्रमों को सुनियोजित ढंग से संपन्न कराने को कहा। उन्होंने कार्यक्रमों की पूर्व सूचना आम नागरिकों तक पहुंचाने और अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सेवा सेतु शिविरों में पात्र हितग्राहियों को मौके पर मिलेगा योजनाओं का लाभ मुख्यमंत्री  साय ने ‘सेवा सेतु’ अभियान को जनकल्याण की दृष्टि से प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया। अभियान के अंतर्गत चयनित गांवों में स्वास्थ्य शिविर के साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को चिन्हित कर योजनाओं से जोड़ा जाएगा और उनकी समस्याओं का यथासंभव मौके पर निराकरण किया जाएगा। शिविर स्थलों पर आवेदन प्राप्त करने के लिए काउंटर स्थापित किए जाएंगे। प्राप्त आवेदनों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी। जिन समस्याओं का तत्काल निराकरण संभव नहीं होगा, उनकी साप्ताहिक समीक्षा कर समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिविर आयोजित होने से पहले ही संबंधित क्षेत्र के संभावित पात्र हितग्राहियों की पहचान की जाए, ताकि शिविर के दौरान उन्हें योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाया जा सके। उन्होंने कहा कि शिविरों की जानकारी पहले से गांवों और नागरिकों तक पहुंचाई जाए, जिससे अधिक से अधिक लोग इनमें शामिल हो सकें। रोजगार मेलों से युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर मुख्यमंत्री  साय ने कौशल विकास विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले रोजगार मेलों को भी सेवा संकल्प अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रोजगार मेलों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि युवाओं से आवेदन प्राप्त कर रोजगार के अवसरों से जोड़ने की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी की जाए और चयनित युवाओं को शिविरों में नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएं। आंगनबाड़ियों में पोषण और सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, ‘मेरी पौष्टिक थाली’, चित्रकला प्रतियोगिता, न्योता भोज तथा फल एवं मिठाई वितरण जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। मुख्यमंत्री  साय ने पोषण चौपालों में अधिक से अधिक माता-पिता की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। महतारी वंदन योजना का लाभ लेकर अपने जीवन में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाओं को भी सम्मानित किया जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए खिलौने उपलब्ध कराने में सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में भी नागरिकों को आंगनबाड़ियों में बच्चों के उपयोग के लिए खिलौने भेंट करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान के दौरान प्रदेश के शासकीय, निजी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों, शाला प्रबंधन समितियों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने शाला प्रबंधन समितियों को इन कार्यक्रमों से सक्रिय रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को नुक्कड़ नाटकों जैसी रचनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा। विशेष उपलब्धि प्राप्त दिव्यांग बच्चों को अपने हुनर और प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए मंच उपलब्ध कराया जाएगा। रक्तदान, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ेगी जनभागीदारी ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के अंतर्गत रक्तदान, वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त अभियान, स्वच्छता तथा जनसरोकार से जुड़ी 25 से अधिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। नदी घाटों की स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। कार्यक्रमों के बाद भी स्वच्छता व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए स्थानीय स्तर पर समितियां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। ‘स्वच्छता ही सेवा’ के अंतर्गत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाली स्वच्छता गतिविधियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत होगा वृक्षारोपण मुख्यमंत्री  साय ने अभियान के दौरान किए जाने वाले वृक्षारोपण को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरचनाओं, सार्वजनिक स्थलों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर व्यापक वृक्षारोपण किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 अक्टूबर को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का समापन कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है। इस वर्ष प्रदेश में 2.5 करोड़ पौधे लगाने के निर्धारित लक्ष्य को भी पूरा किया जाएगा। विकास के प्रतीक स्थलों को भी जनभागीदारी से जोड़ें मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान की वास्तविक सार्थकता तभी होगी, जब इसकी गतिविधियों का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचे। स्वास्थ्य शिविर में जरूरतमंद को उपचार मिले, पात्र परिवार योजनाओं से जुड़े, युवाओं को रोजगार मिले, बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले और स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण में समाज की सक्रिय भागीदारी बढ़े। उन्होंने सभी जिलों के कलेक्टरों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान को पूरी संवेदनशीलता और सुनियोजित कार्ययोजना के साथ संचालित करें तथा यह सुनिश्चित करें कि जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियों का अधिकतम लाभ प्रदेशवासियों तक पहुंचे। इस अवसर पर मुख्य सचिव  विकास शील, अपर मुख्य सचिव  मनोज पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव मती ऋचा शर्मा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

योगी सरकार का जल प्रबंधन मॉडल बदलेगा बुंदेलखंड की कृषि व्यवस्था, खेतों तक पहुंचेगी इजराइली तकनीक

लखनऊ  बुंदेलखंड में जल संकट की चुनौती से निपटने के लिए योगी सरकार का इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट अब केवल जलाशय और सिंचाई ढांचा तैयार करने तक सीमित नहीं है। झांसी के गंगावली में चल रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट के जरिए अब यह परखा जा रहा है कि उपलब्ध पानी का वैज्ञानिक प्रबंधन कर कम पानी में अधिक और बेहतर कृषि उत्पादन कैसे हासिल किया जा सकता है। परियोजना के अगले चरण में ड्रिप, स्प्रिंकलर, ऑटोमेटेड इरिगेशन, सोलर पंपिंग, वाटर बजटिंग और संरक्षित खेती जैसी तकनीकों को स्थानीय परिस्थितियों में परखा जाएगा। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि सबसे खास बात यह है कि परियोजना में ‘जितना पानी उपलब्ध, उसी के अनुरूप खेती’ की अवधारणा को बढ़ावा देने की तैयारी है। पांड वाटर बजटिंग के जरिए तालाब में उपलब्ध उपयोगी पानी का आकलन किया जाएगा और उसी आधार पर फसल क्षेत्र व गर्मी की फसलों के लिए पानी की सीमा तय करने का प्रस्ताव है। इससे जरूरत से ज्यादा पानी निकालने के बजाय उपलब्ध जल का अधिकतम उत्पादक उपयोग किया जा सकेगा। पानी के हिसाब से तय होगी खेती की योजना बुंदेलखंड जैसे जल-संवेदनशील क्षेत्र में वाटर बजटिंग को परियोजना की महत्वपूर्ण कड़ी बनाया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किसानों को तालाब के पानी का हिसाब-किताब और संतुलन तैयार करने की जानकारी दी जाएगी। उपलब्ध उपयोगी पानी के आधार पर फसल क्षेत्र निर्धारित करने और गर्मी की फसलों के लिए वाटर सीलिंग तय करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि खेती की योजना उपलब्ध जल संसाधनों को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी। अनियंत्रित सिंचाई और जरूरत से अधिक पानी निकालने के बजाय जल-बजट आधारित सिंचाई को बढ़ावा मिलेगा। इससे सीमित जल का बेहतर उपयोग करते हुए कृषि उत्पादकता बढ़ाने की संभावना बनेगी। भूजल की स्थिति पर भी रखी जाएगी वैज्ञानिक नजर डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि परियोजना के शुरुआती चरण में भूजल स्तर में सुधार को लेकर अभी कोई मात्रात्मक निष्कर्ष स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। हालांकि, भविष्य में वास्तविक प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए बोरवेल और ऑब्जर्वेशन वेल की व्यवस्था की गई है। इनके माध्यम से जल स्रोत और जल उपयोग की निगरानी की जाएगी। परियोजना में प्री-प्रोजेक्ट और पोस्ट-प्रोजेक्ट भूजल आंकड़ों की तुलना कर यह आकलन करने की तैयारी है कि जल दक्षता बढ़ाने वाली व्यवस्थाओं से भूजल पर दबाव कितना कम होता है। यानी परियोजना का मूल्यांकन केवल दावों के आधार पर नहीं, बल्कि आंकड़ों के आधार पर करने की व्यवस्था तैयार की जा रही है। इजराइली तकनीक का बुंदेलखंड की जमीन पर परीक्षण इंडिया-इजराइल सहयोग के तहत माइक्रो इरिगेशन, ड्रिप, स्प्रिंकलर, ऑटोमेटेड इरिगेशन, एससीएडीए, सोलर पंपिंग, रिजर्वायर आधारित जल प्रबंधन, वाटर बजटिंग और संरक्षित खेती जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य केवल विदेशी तकनीक को स्थापित करना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि बुंदेलखंड की स्थानीय परिस्थितियों में कौन सी तकनीक सबसे ज्यादा प्रभावी साबित होती है। इसके लिए पानी की मात्रा, सिंचाई दक्षता, फसल की पैदावार, खेती की लागत और जल उत्पादकता जैसे मानकों को मापने की व्यवस्था प्रस्तावित है। जलाशय से खेत तक पहुंचेगी आधुनिक सिंचाई व्यवस्था परियोजना के अगले चरण में जलाशय से खेत तक पाइपलाइन बिछाने, ड्रिपलाइन और स्प्रिंकलर लगाने, ग्रीनहाउस/टनल व सिंचाई स्वचालन प्रणाली को क्रियाशील करने की योजना है। इसके साथ किसानों को खाद एवं उर्वरक के उचित इस्तेमाल, जल बजट तैयार करने, फसल की योजना बनाने और कृषि यंत्रों के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे किसानों को केवल सिंचाई का नया साधन नहीं मिलेगा, बल्कि पानी, फसल और कृषि लागत को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने की तकनीकी जानकारी भी मिलेगी। प्रदर्शन खेत से किसानों के अपने खेत तक पहुंचेगा मॉडल परियोजना की एक महत्वपूर्ण कड़ी सफल तकनीकों को किसानों के अपने खेतों तक पहुंचाना है। गंगावली के डेमोस्ट्रेशन फार्म यानी प्रदर्शन खेत में जिन तकनीकों और व्यवस्थाओं के बेहतर परिणाम सामने आएंगे, उन्हें किसानों के खेतों में अपनाने और दोहराने का अवसर दिया जाएगा। इससे मिनी पायलट प्रोजेक्ट केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सफल मॉडल को व्यापक स्तर पर किसानों तक ले जाने का आधार तैयार होगा। हर फसल और हर बूंद का रखा जाएगा रिकॉर्ड परियोजना में निगरानी को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखा गया है। प्रदर्शन खेतों पर फसल उत्पादन, पानी के इस्तेमाल, पानी के समान वितरण, कृषि सामग्री की मात्रा, लागत, सकल लाभ और किसानों द्वारा नई तकनीकों को अपनाने जैसे महत्वपूर्ण मानकों का नियमित रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था प्रस्तावित है। खेत से जुड़े अभिलेख डिजिटल रूप में दर्ज किए जाएंगे। मौसम के अनुसार किसानों के परिणामों का सूचना-पटल तैयार करने की भी व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे परियोजना के प्रभाव का चरणबद्ध और वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सकेगा। कृषि और भूजल विभागों की भी रहेगी तकनीकी भागीदारी भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियंता व वैयक्तिक सहायक निदेशक अनुपम ने कहा कि परियोजना के परिणामों के सत्यापन के लिए कृषि, उद्यान और भूजल विभागों को तकनीकी सहयोग से जोड़ने का प्रावधान किया गया है। इससे अलग-अलग विभागों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर परियोजना के परिणामों को जांचने और आगे की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

सिर्फ सड़क-मकान नहीं, पर्यावरण पर भी फोकस; पाटलिपुत्र टाउनशिप में सुरक्षित रहेंगे तालाब और हरित क्षेत्र

पटना पाटलिपुत्र सेटेलाइट टाउनशिप में सिर्फ सड़क, मकान और व्यावसायिक क्षेत्र ही विकसित नहीं होंगे, बल्कि पर्यावरण और जल संरक्षण को भी शहरी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा। प्रस्तावित योजना में नदियों, तालाबों, नहरों, पार्कों, जंगलों और खुले क्षेत्रों को आपस में जोड़कर हरित और जल नेटवर्क तैयार करने की योजना है। संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखने पर जोर इस पूरी कवायद का मकसद टाउनशिप को बाढ़, जलजमाव और बढ़ती गर्मी जैसी समस्याओं से बचादा है। नगर विकास विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रस्तावित सेटेलाइट टाउनशिप की योजना में प्राकृतिक जल स्रोतों और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। हरित गलियारों और पार्कों को आपस में जोड़कर हरित क्षेत्र विकसित करने पर भी फोकस किया गया है। इससे पेड़-पौधों और दूसरे जीव-जंतुओं के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा। बारिश के पानी का होगा बेहतर इस्तेमाल टाउनशिप में बारिश के पानी की निकासी के साथ उसके संरक्षण की भी व्यवस्था की जाएगी। बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने की व्यवस्था से भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे आने वाले समय में पानी की जरूरत पूरी करने में भी सहूलियत होगी। भारी बारिश के दौरान जलजमाव और बाढ़ का खतरा कम करना भी योजना का प्रमुख उद्देश्य है। साथ ही बढ़ती गर्मी से राहत के लिए अधिक हरित क्षेत्र विकसित कर शहर के तापमान को नियंत्रित करने और हवा की गुणवत्ता सुधार पर भी सरकार का जोर है। प्रमुख बातें जिन पर सरकार का जोर     जलजमाव और बाढ़ का खतरा कम करना।     भूजल रिचार्ज कर पानी की उपलब्धता बनाए रखना।     अधिक पेड़-पौधों से गर्मी का असर को कम करना।     पार्क और खुले क्षेत्र मनोरंजन के साधनों का विकास।     टाउनशिप में रहने वालों को मिले स्वच्छ हवा, बेहतर पर्यावरण।     प्राकृतिक जल स्रोतों और जैव विविधता के संरक्षण पर जोर।  

शराब कांड में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 3 आरोपियों के 5 ठिकाने ध्वस्त; मौतों का आंकड़ा 30 पहुंचा

 सागर  जहरीली शराब कांड के आरोपियों पर प्रशासन की कार्यवाही भी तेज हो गई है। गुरुवार को इस कांड के तीन आरोपितों के बंडा कस्बे में स्थित पांच मकान-गोदामों को बुल्डोजर चलाकर ढहा दिया गया। इसके साथ काली कमाई से खड़े किए गए उनके अवैध साम्राज्य का रसूख भी मिट्टी में मिल गया। तीन ठिकाने ढहाए बंडा एसडीएम कार्यालय में गुरुवार दोपहर एक बजे कार्यवाही करने वाली पूरी टीम को एकत्र किया गया। वहां अधिकारियों ने उन्हें ब्रीफ किया उसके बाद तीन अलग-अलग टुकड़ियां एक-एक बुल्डोजर लेकर तीन टीमें आरोपितों मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर, चंद्रभान उर्फ चंदू सिंह राजपूत और आशीष साहू के चिन्हित ठिकानों पर पहुंची। 10 मिनट के भीतर भवनों में तोड़फोड़ शुरू हो गई। कार्रवाई के दौरान मनीष लोधी के घर से एक महिला कुछ दस्तावेज लेकर अधिकारियों के पास पहुंची, जिसे बिना सुने हटा दिया गया। करणी सेना के संभागीय अध्यक्ष और ततरवारा गांव के सरपंच चंद्रभान उर्फ चंदू सिंह राजपूत की करीब 2500 वर्गफीट में बनी आलीशान कोठी को पांच-छह घंटों में तोड़ दिया गया। कोठी का अधिकांश हिस्से का निर्माण एक साल पूर्व ही किया गया था। भवन इतना बड़ा था कि परिसर में करीब दस गाड़ियों की पार्किंग आसानी से हो सकती थी। एक आरोपी आशीष साहू के कॉलेज रोड स्थित करीब 20 साल पुराना मकान दो घंटे के भीतर ही पूरी तरह ढहा दिया गया। इसके आगे का हिस्सा कच्चा था। आशीष को मनीष लोधी का सहयोगी बताया जा रहा है। उसका मुख्य काम अलग-अलग गांवों में शराब की तस्करी करना था। आशीष के खिलाफ छह-सात मामले दर्ज हैं। रवि लखेरा ने खड़ा किया नेटवर्क पुलिस के अनुसार आबकारी ठेकेदार मनीष लोधी ने अंतरराज्यीय नकली शराब माफिया रवि लखेरा के साथ मिलकर नकली शराब का नेटवर्क खड़ा किया। उसने ततरवारा सरपंच चंदू राजपूत के साथ अवैध शराब की फैक्र्ट्री बनाई। चंदू तो पकडा गया, लेकिन मनीष और रवि फरार हैं। पुलिस ने इन तीनों पर 20 -20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। आरोपित बनाए गए 30 लोगों में से 14 पकड़े जा चुके हैं। मनीष के गोदाम में भट्ठी, कड़ाही और मशीनें वार्ड-11 स्थित मनीष लोधी उर्फ यशवंत के गोदाम में भट्ठी, कड़ाही और मशीनें मिलीं। खाद्य पदार्थों के रैपर भी मिले। अंदर पांच बाइकें खड़ी थीं और जिसमें से तीन पर नंबर प्लेट तक नहीं थी। आशंका जताई गई कि इन्हीं वाहनों का इस्तेमाल अवैध शराब की सप्लाई और तस्करी में किया जाता था। इसको देखने से साफ हुआ कि पुलिस इस गोदाम को देखने तक नहीं पहुंची थी। प्रशासन की बुल्डोजर कार्रवाई में पूरा गोदाम इन मशीनों के साथ जमींदोज हो गया। इस अनदेखी पर सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि अगर इन मशीनों का संबंध अवैध शराब बनाने से हो तो उसके सबूत भी हमेशा के लिए इस मामले में बंडा नगर पालिका की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। 10-10, 20-20 वर्षों से अवैध निर्माण था, लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोपी मनीष लोधी का गोदाम तो सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाया गया था, लेकिन उसे भी खाली कराने की कोई कोशिश नहीं हुई। सीएमओ आरसी अहिरवार का कहना था कि ये निर्माण उनके कार्यकाल के पहले हुए हैं, इसलिए अभी स्पष्ट नहीं बता सकता कि उन पर कोई कार्रवाई की गई थी या नहीं? हाल में हुई जांच में यह बगैर परमिशन अवैध निर्माण पाए गए, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई। जहरीली शराब से एक और मौत जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुंदेलखंड मेडिकल कालेज में गुरुवार को पिपरिया किल्लाई निवासी राम सिंह (30) की भी मौत हो गई। इसके साथ ही जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या 30 पहुंच गई है।     जहरीली शराब के आरोपित के पांच अवैध निर्माण को चिन्हित किया गया था। प्रशासन द्वारा सभी पर कार्रवाई की गई है। उन्हें 24 घंटे पहले ही नोटिस जारी कर दिए गए थे। आरोपितों के अन्य निर्माणों की जांच की जा रही है। उन पर भी कार्रवाई की जाएगी – संजय जैन, एसडीएम बंडा  

त्योहारों पर रेलवे का बड़ा फैसला, 5 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का बढ़ाया संचालन

 जयपुर रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए कई कार्यों को अंजाम दिया है। अतिरिक्त यात्री भार को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए तीन जोड़ी ट्रेनों में अस्थायी रूप से डिब्बों की बढ़ोतरी की है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार जयपुर-उदयपुर सिटी-जयपुर ट्रेन में जयपुर से 10 से 30 सितंबर तक और उदयपुर सिटी से 11 सितंबर से 1 अक्टूबर तक एक द्वितीय साधारण श्रेणी डिब्बे की अस्थायी बढ़ोतरी की जा रही है। इसी प्रकार, उदयपुर सिटी-असारवा-उदयपुर सिटी ट्रेन में भी उदयपुर सिटी से 10 से 30 सितंबर तक और असारवा से 11 सितंबर से 1 अक्टूबर तक एक द्वितीय साधारण श्रेणी डिब्बा, अजमेर-बांद्रा टर्मिनस-अजमेर ट्रेन में अजमेर से 12 से 26 सितंबर तक और असारवा से 13 से 27 सितंबर तक दो द्वितीय शयनयान श्रेणी डिब्बों की अस्थायी बढ़ोतरी की जाएगी। रेलवे ने बढ़ाई संचालन अवधि, अक्टूबर-नवंबर तक चलेगी स्पेशल ट्रेनें आगामी त्योहारों पर अतिरिक्त यात्री भार को देखते हुए रेलवे ने पांच जोड़ी साप्ताहिक स्पेशल ट्रेनों की संचालन अवधि बढ़ाई है। इन ट्रेनों का संचालन अक्टूबर और नवंबर तक अलग-अलग अवधि में बढ़ाया गया है। हिसार-वलसाड-हिसार साप्ताहिक स्पेशल का हिसार से संचालन 14 अक्टूबर से 25 नवंबर तक और वलसाड से 15 अक्टूबर से 26 नवंबर तक, भगत की कोठी-बान्द्रा टर्मिनस-भगत की कोठी साप्ताहिक स्पेशल का भगत की कोठी से संचालन 3 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक और बान्द्रा टर्मिनस से 4 अक्टूबर से 1 नवंबर तक, बीकानेर-साईनगर शिर्डी-बीकानेर साप्ताहिक स्पेशल का बीकानेर से संचालन 3 अक्टूबर से 28 नवंबर तक और साईनगर शिर्डी से 4 अक्टूबर से 29 नवंबर तक, अजमेर-सोलापुर-अजमेर साप्ताहिक स्पेशल का अजमेर से संचालन 7 अक्टूबर से 25 नवंबर तक और सोलापुर से 8 अक्टूबर से 26 नवंबर तक और मदार-पटना-मदार साप्ताहिक स्पेशल का मदार से संचालन 1 अक्टूबर से 26 नवंबर तक और पटना से 2 अक्टूबर से 27 नवंबर तक बढ़ाया गया है। पुरी स्टेशन पर दो ट्रेनों का समय में बदला पूर्व तटीय रेलवे की ओर से पुरी स्टेशन पर दो ट्रेनों के संचालन समय में आंशिक बदलाव किया जा रहा है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार जोधपुर-पुरी सुपरफास्ट एक्सप्रेस 14 सितंबर से पुरी स्टेशन पर सुबह 10 बजे के स्थान पर 10.45 बजे पहुंचेगी। अजमेर-पुरी सुपरफास्ट एक्सप्रेस 17 सितंबर से पुरी स्टेशन पर दोपहर 2.40 बजे के स्थान पर 3.05 बजे पहुंचेगी।

काम नहीं करने वाले ठेकेदारों पर लोक निर्माण विभाग की बड़ी कार्रवाई, 6 ठेकेदार ब्लैकलिस्टेड

रायपुर  लोक निर्माण विभाग ने सड़कों और पुलों के निर्माण कार्यों में अत्यंत धीमी प्रगति और कार्य पूर्ण करने में रूचि नहीं लेने वाले 6 ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की है। विभाग द्वारा अनुबंध के अनुसार कार्य नहीं होने पर बार-बार नोटिस जारी करने, अनुबंध अवधि बढ़ाने, ठेकेदारों द्वारा स्वयं शपथ पत्र देने के बावजूद काम नहीं करने तथा कार्य पूर्ण करने में रूचि नहीं लेने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट कर उनके पंजीयन के नवीनीकरण पर रोक लगा दी है। दो ठेकेदारों के पंजीयन भी निरस्त किए गए हैं।  राज्य शासन ने बस्तर की महत्वाकांक्षी सड़कों के निर्माण की धीमी गति और विलंब को देखते हुए व्यापक समीक्षा के बाद वहां निर्माणाधीन कार्यों को पूरा करने में रूचि नहीं दिखाने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की है। ये ठेकेदार बार-बार नोटिस जारी करने तथा स्वयं शपथ पत्र देने के बावजूद काम नहीं कर रहे थे। इनके द्वारा निर्माणाधीन सड़कों और पुलों को पूर्ण करने में रूचि नहीं ली जा रही थे। राज्य शासन ने इन कार्रवाईयों को लेकर बिलासपुर उच्च न्यायालय में कैविएट भी दायर की है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा सड़कों और पुलों के निर्माण में कोताही, लापरवाही और अनुबंधों के उल्लंघन पर ठेकेदार  के. मोहन रेड्डी, मेसर्स शांति विजय कन्सट्रक्शन, मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा., मेसर्स राघवा कन्सट्रक्शन, मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेसर्स पंकज हालदार के पंजीयन अ-नवीनीकरण (Non-Renewal) के आदेश जारी किए गए हैं। विभाग ने सार्वजनिक आवागमन और जनसुविधा के कार्यों में हीला-हवाला को गंभीरता से लेते हुए ठेकेदार  के. मोहन रेड्डी और मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा. के पंजीयन को भी निरस्त कर दिया है।  लोक निर्माण विभाग ने सुकमा जिले में चिंतलनार-मरियागुड़म मार्ग और कोंटा-गोलापल्ली मार्ग का काम कर रहे मेसर्स राघवा कंस्ट्रक्शन के पंजीयन को आगामी 5 वर्षों तक अ-नवीनीकरण की कार्रवाई की है। नारायणपुर जिले में नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा का निर्माण कर रहे मेसर्स शांति विजय कन्सट्रक्शन के पंजीयन के नवीनीकरण पर भी आगामी 5 वर्षों तक रोक लगाई गई है। विभाग द्वारा चिंतलनार-मरियागुड़म मार्ग का काम कर रहे मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा. के पंजीयन को निरस्त करते हुए आदेश दिनांक से आगामी 5 वर्षों तक अनवीनीकरण के आदेश जारी किए गए हैं।    लोक निर्माण विभाग ने सुकमा जिले में भेज्जी-चिंतागुफा मार्ग और चिंतलनार-मरियागुड़म सड़क का निर्माण कर रहे ठेकेदार  के. मोहन रेड्डी के पंजीयन को निरस्त करते हुए आदेश दिनांक से आगामी 5 वर्षों तक अनवीनीकरण के आदेश जारी किए हैं। विभाग ने कोंटा-गोलापल्ली मार्ग का काम कर रहे मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर के पंजीयन को आगामी 2 वर्षों तक अ-नवीनीकरण की कार्रवाई की है। वहीं नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा मार्ग पर पुल-पुलिया का निर्माण कर रहे मेसर्स पंकज हालदार के पंजीयन को भी आगामी 5 वर्षों तक नवीनीकरण पर रोक लगाई गई है।  

यूपी के 26 जिले बाढ़ से प्रभावित, 21,333 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान को और तेज कर दिया है। प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य आवश्यक सहायता पहुंचाई जा रही है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक प्रशासन की सक्रियता और लगातार निगरानी के बीच अब तक 21,333 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। वहीं अब तक पशुहानि और जनहानि शून्य दर्ज की गई है। वर्तमान में 26 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत एवं बचाव अभियान के तहत बुधवार को ही 7,903 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अब तक कुल 21,333 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत दी गई है। जलभराव और दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए 2,304 नाव एवं मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा चुका है। 8.58 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए व्यापक अभियान जारी है। अब तक 8.58 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। बुधवार को भी 83,545 लंच पैकेट प्रभावित लोगों तक पहुंचाए गए। इसके साथ ही अब तक 1.38 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट वितरित किए गए हैं। राहत शरणालयों में 7,581 लोग ले रहे आश्रय प्रभावित लोगों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में अब तक 1,343 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं। इनमें 7,581 लोग रह रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियों की रोकथाम और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,139 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक 7.09 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट व 2.88 लाख से ज्यादा ओआरएस पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों को संक्रमण और जलजनित बीमारियों से बचाने में मदद मिल रही है। प्रभावित जिले अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कौशांबी, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, रामपुर, सीतापुर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

प्रदेश के छह गांवों में आकार ले रही ‘एस्ट्रो विलेज’ परियोजना

भोपाल  मध्यप्रदेश में पर्यटन के नए आयाम विकसित करने के साथ खगोलीय पर्यटन (एस्ट्रो-टूरिज्म) को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा जनजातीय पर्यटन परियोजना के अंतर्गत ‘एस्ट्रो विलेज डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ का क्रियान्वयन मई 2026 से प्रारंभ किया गया है। परियोजना का उद्देश्य राज्य के प्राकृतिक रूप से अंधकारमय (डार्क स्काई) क्षेत्रों को पर्यटन के नए आकर्षण के रूप में विकसित करना और पर्यटकों को तारों, ग्रहों तथा आकाशगंगा के अवलोकन का अनूठा अनुभव उपलब्ध कराना है। छह जिलों के चयनित गांवों में शुरू हुआ विकास कार्य परियोजना के प्रथम चरण में प्रदेश के छह जिलों धार, छिंदवाड़ा, बैतूल, नर्मदापुरम, दमोह और उमरिया से एक-एक गांव का चयन किया गया है। इन गांवों को खगोलीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का कार्य शुरू हो चुका है। धार जिले के ज्ञानपुरा, छिंदवाड़ा के धुसावानी, बैतूल के बांचा, नर्मदापुरम के ढ़ाबा, दमोह के रिछकुड़ी और उमरिया जिले के रंछा गांव में एस्ट्रो-टूरिज्म से जुड़ी सुविधाओं और अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। पर्यटक जल्द ले सकेंगे एस्ट्रो विलेज पर्यटन का आनंद मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि मध्यप्रदेश में एस्ट्रो विलेज पर्यटन, विज्ञान और प्रकृति के अनूठे संगम के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रकाश प्रदूषण से दूर इन क्षेत्रों में पर्यटक स्वच्छ रात्रिकालीन आकाश में तारों, ग्रहों और आकाशगंगा का अवलोकन कर सकेंगे।उन्होंने कहा कि यह पहल एस्ट्रो-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय समुदायों के लिए पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय लोगों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उन्हें परियोजना से आर्थिक रूप से जोड़ा जाएगा। आधुनिक उपकरणों और सुविधाओं से विकसित होंगे एस्ट्रो विलेज चयनित गांवों में पर्यटकों को तारों, ग्रहों और अन्य खगोलीय पिंडों के सुरक्षित, स्पष्ट और उत्कृष्ट अवलोकन के लिए आधुनिक अधोसंरचना विकसित की जा रही है। इसके अंतर्गत आधुनिक टेलिस्कोप, दूरबीन और एस्ट्रो-फोटोग्राफी कैमरे उपलब्ध कराए जाएंगे।पर्यटकों के लिए स्टार गेजिंग प्लेटफॉर्म और ऑब्जर्वेशन एरिया विकसित किए जाएंगे। साथ ही खगोलीय घटनाओं और अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारी को सरल एवं रोचक तरीके से समझाने के लिए इंटरप्रिटेशन सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इन सुविधाओं से पर्यटकों को रात्रिकालीन आकाश के अवलोकन के साथ खगोलीय घटनाओं को समझने का भी अवसर मिलेगा। स्थानीय युवा बनेंगे ‘एस्ट्रो गाइड’ एस्ट्रो विलेज परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके लिए चयनित गांवों के स्थानीय युवाओं को 90 दिवसीय सघन प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद इन्हें कुशल ‘एस्ट्रो गाइड’ के रूप में तैयार किया जाएगा।एस्ट्रो गाइड पर्यटकों को रात्रिकालीन आकाश, तारामंडलों और विभिन्न खगोलीय घटनाओं की जानकारी देने के साथ स्टार गेजिंग जैसी गतिविधियों में मार्गदर्शन करेंगे। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा पर्यटन से होने वाली आर्थिक गतिविधियों में स्थानीय निवासियों की भागीदारी बढ़ेगी। भारत के प्रमुख एस्ट्रो-टूरिज्म गंतव्य के रूप में उभरेगा मध्यप्रदेश एस्ट्रो विलेज परियोजना प्रदेश में स्टार गेजिंग और खगोलीय पर्यटन जैसी विशिष्ट (निश) पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्राकृतिक रूप से अंधकारमय क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़कर मध्यप्रदेश में पर्यटन का एक नया क्षेत्र विकसित किया जा रहा है।यह परियोजना देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को रात्रिकालीन आकाश के अवलोकन का अनूठा अनुभव उपलब्ध कराने के साथ मध्यप्रदेश को भारत के प्रमुख और अग्रणी एस्ट्रो-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले से की गोपाल ऋषिकर भारती ने मुलाकात

बिलासपुर  रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया आठवाले के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास अठावले एवं केंद्रीय मंत्री का आगमन बिलासपुर में हुआ! कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया था! इस आयोजन के दौरान मूलनिवासी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल ऋषिकार भारती की उपस्थित रहे ।और उन्होंने पार्टी गतिविधियों पर चर्चा की तथा संगठित होकर पार्टी का विस्तार करने की बात की तथा कार्यकर्ताओं को मजबूत करने की दिशा पर वार्तालाप कर कार्यकर्ताओं को मजबूत बनाने हेतु पहल करने की चर्चा की