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बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, 15 मई से लगेंगे विशेष सहायता कैंप

लखनऊ  ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि स्मार्ट मीटर एवं बिजली बिलों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए 15 मई से 30 जून तक अधिशासी अभियंता एवं उपखंड अधिकारी कार्यालयों पर विशेष कैंप एवं सहायता केंद्र लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1912 हेल्पलाइन पर भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। इस संबंध में पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। पूर्वांचल के उपभोक्ता 8010968292, मध्यांचल के 7669003409, पश्चिमांचल के 7859804803, दक्षिणांचल के 8010957826 तथा केस्को कानपुर के 8287835233 मोबाइल नंबर पर अपना बिजली कनेक्शन नंबर वाट्सअप कर बिल हासिल कर सकते हैं। अब नया बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर के पोस्टपेड मोड में ही मिलेगा। प्रदेशभर में अब तक 83 लाख से अधिक प्रीपेड मोड में किए जा चुके स्मार्ट मीटर को फिर से पोस्टपेड मोड में करने के साथ ही उपभोक्ताओं को पहले की तरह जून से बिल देने के संबंध में पावर कारपोरेशन के एमडी ने सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिए हैं। मई में उपभोग की गई बिजली का बिल उपभोक्ताओं को 10 जून तक एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से भेजा जाएगा। उपभोक्ताओं को अगले 15 दिन में बिल जमा करने की सुविधा मिलेगी। 15 दिन में बिल न जमा करने पर अगले सात दिन में कनेक्शन काट दिया जाएगा। 30 अप्रैल तक के बकाए बिल का घरेलू उपभोक्ता 10 किस्तों में जबकि अन्य श्रेणियों के उपभोक्ता तीन किस्तों में विलंब अधिभार सहित जमा कर सकेंगे। तकनीकी दिक्कतों के चलते स्मार्ट प्रीपेड मीटर से उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने चार मई को प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की थी। चार दिन बाद गुरुवार को कारपोरेशन के एमडी नितीश कुमार ने पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल डिस्काम व केस्को के प्रबंध निदेशकों को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए। सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड में परिवर्तित करने संबंधी निर्णय के बारे में बताते हुए निर्देश दिए गए हैं कि अब सभी नए कनेक्शन स्मार्ट मीटर के माध्यम से पोस्टपेड मोड में ही दिए जाएंगे। मई में बिजली खपत संबंधी बिल पोस्टपेड पद्धति में उपभोक्ताओं को 10 जून तक एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएं। स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि स्मार्ट मीटर की आटोमैटिक रीडिंग न उपलब्ध होने पर मैनुअल रीडिंग कर अनिवार्य रूप से 10 तक बिल उपलब्ध कराया जाए। उपभोक्ताओं के मोबाइल फोन नंबर रजिस्टर्ड न हो या गलत हो तो उसे डिस्काम के संबंधित वाट्सएप नंबर पर कनेक्शन संख्या के माध्यम से अपडेट कराने के बारे में बताया जाए। 1912 के माध्यम से भी बिल हासिल किया जा सकेगा

बिहार में विकास पर जोर, मंत्रियों को नीतीश कुमार ने दिए सख्त निर्देश

 पटना बिहार सीएम की पद छोड़ने से पहले नीतीश कुमार ने कहा था कि वे राज्यसभा जा रहे हैं पर बिहार नहीं छोड़ेंगे। राज्य का विकास और जनता की सुख सुविधाओं का ख्याल रखेंगे। इसका असर दिख रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि सरकार की सभी योजनाओं का असर सीधे जनता तक दिखना चाहिए। सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रियों ने नीतीश कुमार ने निर्देश दिया है कि सरकार की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए अपने विभाग के कार्यों का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन मंत्री अनिवार्य रूप से करें। नीतीश कुमार से रविवार को मिलने गये मंत्रियों को उन्होंने सरकार के आगे के कार्यकलापों को लेकर कई दिशा-निर्देश दिये। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि सभी मंत्री अपने विभाग की योजनाओं को समय पर पूरा करायें। नियमित रूप से योजनाओं की निगरानी करें और जिलों में वह धरातल पर पूरी तरह से उतरे, इसे भी सुनिश्चित करायें। खासकर जदयू के नवनियुक्त मंत्री अपने-अपने विभागों में पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने उनके आवास सात सर्कुलर रोड में रविवार को गये थे। इसके साथ ही पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी वहां पहुंचे थे। हालांकि, कई मंत्री शनिवार को भी अपने नेता नीतीश कुमार से मिले थे। रविवार को मिलने वालों में मंत्री अशोक चौधरी, लेशी सिंह और शीला कुमारी आदि शामिल रहीं। इस दौरान केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ललन सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा भी मौजूद रहे। नीतीश कुमार न बीस सालों के मुख्यमंत्रित्व काल में बिहार की नई दिशा दी। विकास की नई इबारत लिखी। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत हर क्षेत्र में उनके सीएम रहते काफी काम हुआ। सात निश्चय योजना के तहत रोजगार, नागरिक सुविधाएं और पार्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। सम्राट चौधरी भी कहते हैं के नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में काम करेगी। उनके द्वारा शुरू की गई योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। नीतीश कुमार ने भी जदयू नेताओं के साथ मीटिंग में बिहार में एक नई यात्रा का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि राज्यसभा का कार्यों के बाद वे बिहार को ही समय देंगे। रविवार को मंत्रियों ने अपने नेता नीतीश कुमार से मुलाकात की। नीतीश कुमार के बेटे और बिहार से स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार भी कहते हैं कि पिता के कार्यों को जन जन तक पहुंचाएंगे। निशांत बिहार की सद्भाव यात्रा की शुरुआत बाल्मीकिनगर से कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा सरकार के अभिभावक नीतीश कुमार हैं। उनके मार्गदर्शन का पालन किया जाएगा।

सरकार के तर्कों पर अदालत ने जताई कड़ी नाराजगी

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनाव टालने के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. राज्य सरकार ने बीते दिनों हाईकोर्ट में दलील देते हुए समय मांगा था. हालांकि, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच दलीलों से सहमत नहीं दिखी. बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को फटकार भी लगाई. हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार का रवैया ठीक नहीं है और उसे पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है. फिर दी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट की दलील सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन को लेकर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसले आने से देरी हुई. जबकि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न आने के कारण आरक्षण तय नहीं हो पाया. बेंच ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा, "आदेश निकायों को लेकर था तो पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए? ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह हमारे सामने नहीं है." कोर्ट ने सरकार के तर्क किए खारिज कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि राजस्थान का बड़ा हिस्सा रेगिस्तानी है. जून में हीटवेव चलती है और जुलाई में बरसात शुरू हो जाती है. ऐसे में चुनाव कराना मुश्किल होगा. लेकिन बेंच ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया. सुनवाई के बाद अदालत ने जजमेंट रिजर्व रख लिया है. 18 मई को अवमानना याचिका दायर हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला देते हुए 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे. वहीं, परिसीमन पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक की डेडलाइन दी गई थी. अब सरकार और चुनाव आयोग ने समय मांगा है. जबकि इस मुद्दे पर अवमानना याचिका भी दायर है, जिस पर 18 मई को सुनवाई होगी.

2022 नियम उल्लंघन के कारण 3500 अभ्यर्थी 2027 नगर निकाय चुनाव में नहीं लड़ सकेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव लड़ने के नियमों का पालन नहीं करने पर 2022 का चुनाव लड़ चुके 3500 अभ्यर्थियों को आगामी 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग की ओर से ये कार्रवाई लगातार सुनवाई के बाद की गई है। ये वे प्रत्याशी हैं, जो चुनाव खर्च का सही ब्यौरा पेश नहीं कर पाए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने अक्टूबर-नवंबर 2026 में प्रस्तावित उपचुनाव के साथ साल 2027 में होने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां भी शुरु कर गी हैं। 2022 के चुनाव में जिन अभ्यर्थियों ने निर्धारित 30 दिन की अवधि में निर्वाचन व्यय का ब्योरा नहीं दिया था, उन्हें सुनवाई का अंतिम अवसर दिया जा रहा है। इसके लिए उन्हें आयोग के भोपाल स्थित कार्यालय आने की जरूरत भी नहीं है। NIC ने की ऑनलाइन सुनवाई व्यवस्था आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने संबंधित अभ्यर्थी के जिला मुख्यालय स्थित राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) से जुड़कर पक्ष रखने की व्यवस्था की है। हर गुरुवार सुनवाई के लिए डेढ़ घंटे निर्धारित किए हैं। अब तक करीब 3,500 अभ्यर्थियों के मामलों का निराकरण कर उन्हें अयोग्य घोषित किया गया है। इसमें कुछ लोगों को 2 साल तो कुछ को 5 साल के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है। यानी इस हिसाब से ये सभी 2027 के जून-जुलाई में होने वाले निकाय चुनाव तक अयोग्यता अवधि पूरी नहीं कर पाएंगे। इसलिए ये चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। खर्च का हिसाब न देने वाले अयोग्य घोषित यही नहीं, जिन नेताओं को 5 साल के लिए अयोग्य घोषित किया गया है, वो 2031 तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। नियम के मुताबिक, चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों में हर प्रत्याशी को अपने चुनावी खर्च का पाई-पाई का ब्यौरा देना जरूरी होता है। लेकिन, आयोग की जांच में सामने आया कि, इन 3500 अभ्यर्थियों ने या तो खर्च का हिसाब दिया और ना ही ऐसी जानकारी दी, जिसे पूरा और संतोषजनक माना जाए। आयोग ने इन सभी को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया, लेकिन साक्ष्य पेश न कर पाने के चलते उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। भोपाल के 82 अभ्यर्थी प्रदेशभर की बात करें तो यहां 3500 के आसपास अभ्यार्थी अयोग्य घोषित किए गए हैं। जबकि, इनमें भोपाल के 82 और बैरसिया के 3 अभ्यर्थियों सहित जिला स्तर पर बड़ी सूची तैयार की गई है। बता दें कि, भोपाल में 100 डिफॉल्टरों की लिस्ट बनाई गई थी, इनमें से सिर्फ 12 ने ही स्पष्ट जानकारी आयोग को उपलब्ध कराई है, इसी के चलते अब यही अभ्यार्थी आगे चुनाव लड़ सकेंगे, बाकी 82 को दो और पांच साल तक के लिए बाहर किया गया है। अयोग्यता की अवधि 2 से 5 साल इस कार्रवाई का सबसे बड़ा झटका उन नेताओं को लगा है, जो आगामी उपचुनावों या अगले स्थानीय चुनावों में फिर से दावेदारी की तैयारी कर रहे थे। अयोग्य घोषित होने के बाद अब ये अभ्यर्थी अयोग्यता की अवधि (2 से 5 वर्ष तक) पूरी होने तक किसी भी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल नहीं कर सकेंगे। भोपाल में 82 अभ्यार्थियों पर एक्शन भोपाल के अलग अलग वार्डों में हुई इस कार्रवाई ने क्षेत्र के समीकरण तक बदल दिए हैं। 2 और 5 साल के लिए प्रतिबंधित होने वाले प्रमुख नामों में जिन्हें शामिल किया गया है, वो कुछ इस प्रकार हैं…। -वार्ड-1 से इमाम खां एडवोकेट, बेनी प्रसाद मीना को अयोग्य घोषित किया गया है। -वार्ड-2 से शेलेंद्र सोनू तोमर जैसे अभ्यर्थियों को 2 साल के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। -वार्ड 12 से समीर खान और वसीम खान को अयोग्य घोषित किया गया है। -वार्ड 19 से ओसाफ अली, आदिल खां और महेंद्र सिंह को अयोग्य घोषित किया गया है। -अन्य दिग्गज: बसंती बाई, हरीश कुशवाह, इमाम हुसैन, रु म्याना रशीद, नंदा परिहार और अंजली यूनानी को भी अयोग्य घोषित किया है। पारदर्शिता से समझौता नहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बताते हुए कहा कि, चुनाव में धनबल के उपयोग पर लगाम लगाना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराने से आगे चुनाव लड़ने वाले ये सुनिश्चित करेंगे कि, अभ्यर्थी चुनाव लड़ने के 30 दिन के भीतर चुनाव खर्च का ब्यौरा देना है।

बरेली दूसरे और पीलीभीत तीसरे स्थान पर रहे

 लखनऊ  योगी सरकार द्वारा पिछले नौ वर्षों से प्रदेश में सुशासन और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर धरातल पर साफ देखा जा सकता है। सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में एक बार फिर रामपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। रामपुर ने यह उपलब्धि जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण, बेहतर फीडबैक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधारात्मक पहल से हासिल किया है जबकि बरेली ने दूसरा और पीलीभीत ने तीसरा स्थान हासिल किया है। रामपुर ने 10 में से 9.42 अंक प्राप्त कर बाजी मारी मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जिलों का मूल्यांकन कई मानकों के आधार पर किया जाता है। इसमें जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई, फीडबैक की गुणवत्ता और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे पहलू शामिल होते हैं। रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खासतौर पर जनशिकायतों के समाधान में जिले ने बेहतर कार्य करते हुए शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया। शिकायतों के निस्तारण के बाद प्राप्त सकारात्मक फीडबैक ने भी जिले की रैंकिंग को मजबूत किया। डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में रामपुर को 10 में से 9.42 अंक प्राप्त हुए। इसके साथ ही रामपुर ने पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। वहीं, बरेली ने 9.41 अंक के साथ दूसरा और पीलीभीत ने 9.36 अंक के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। टॉप टेन जिलों में इटावा, हमीरपुर, महराजगंज ने स्थान प्राप्त किया सीएम डैशबोर्ड की अप्रैल माह की रैंकिंग में कई जिलों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए शीर्ष 10 में स्थान बनाया है। इसमें इटावा ने 9.35 अंक हासिल कर चौथा, हमीरपुर ने 9.33 अंक हासिल कर पांचवा स्थान प्राप्त किया। इसी तरह महराजगंज ने 9.31 अंक हासिल कर छठवां, शाहजहांपुर ने 9.30 अंक हासिल कर सांतवां, सीतापुर ने 9.29 अंक हासिल कर आठवां, हरदोई ने 9.27 अंक हासिल कर नौवां और औरैया ने 9.26 अंक हासिल कर दसवां स्थान प्राप्त किया है। इन सभी जिलों ने जनशिकायतों के समाधान, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि प्रदेश के जिलों के बीच बेहतर कार्य करने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड योगी सरकार का एक महत्वपूर्ण मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की नियमित समीक्षा की जाती है। इस डैशबोर्ड को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से विकसित किया गया है। इसके माध्यम से योगी सरकार को जिलों के प्रदर्शन की वास्तविक समय में जानकारी मिलती है। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होती है। जिन जिलों का प्रदर्शन कमजोर होता है, वहां प्रशासन को सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।

कोयला चोरी और ओवररिपोर्टिंग पर लगेगी लगाम, डिजिटल सिस्टम से बढ़ी पारदर्शिता

 धनबाद कोयला स्टाक की मैन्युअल जांच में लगातार सामने आ रही ओवररिपोर्टिंग, गलत आकलन और कोयले की हेराफेरी की शिकायतों के बाद कोल इंडिया लिमिटेड ने नई हाईटेक व्यवस्था लागू कर दी है। संशोधित 'न्यू येलो बुक' के तहत पहली बार थ्रीडी टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनर और आधुनिक डिजिटल तकनीक से कोयला स्टाक की जांच पूरी कर ली गई है। अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई में विभिन्न परियोजनाओं में यह जांच कर रिपोर्ट भी कोल इंडिया मुख्यालय को सौंप दी गई है। नई तकनीक लागू होने से स्टाक की ओवररिपोर्टिंग, कोयला चोरी और हेराफेरी पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हुआ है। इसके साथ ही उत्पादन, डिस्पैच और उपलब्ध स्टाक के आंकड़ों में पारदर्शिता बढ़ी है तथा भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने में मदद मिली है। अप्रैल 2026 से संशोधित नियम लागू होने के बाद अब खदानों में स्टाक की माप पूरी तरह वैज्ञानिक और डिजिटल प्रणाली से की जा रही है। हेरफेर की बनी रहती थी आशंका अब तक अधिकांश खदानों में कोयला स्टाक की माप पारंपरिक सर्वे और मानवीय अनुमान के आधार पर की जाती थी। इस प्रक्रिया में त्रुटि और हेरफेर की आशंका बनी रहती थी। कई परियोजनाओं में वास्तविक स्टाक से अधिक कोयला दिखाने, रिकॉर्ड में अंतर और चोरी की शिकायतें लगातार सामने आती रही थीं। सूत्रों के अनुसार कई बार स्टाक के आंकड़ों में बड़ा अंतर मिलने के बावजूद सटीक सत्यापन संभव नहीं हो पाता था। नई येलो बुक लागू होने के बाद पहली बार कोयला स्टाक की जांच थ्रीडी लेजर स्कैनर से की गई। जांच के दौरान पूरे कोयला स्टाक की त्रिआयामी डिजिटल स्कैनिंग कर वास्तविक आयतन और घनत्व का सटीक आकलन किया गया। इसके बाद विशेष साफ्टवेयर के माध्यम से सीधे स्टाक और वाल्यूम की गणना की गई। अप्रैल के अंतिम सप्ताह और मई में विभिन्न परियोजनाओं में यह प्रक्रिया पूरी की गई। अधिकारियों के अनुसार नई तकनीक से प्राप्त आंकड़े पारंपरिक पद्धति की तुलना में अधिक सटीक और पारदर्शी पाए गए हैं। इसके बाद अब इसे सभी परियोजनाओं और ओपनकास्ट खदानों में लागू कर दिया गया है।  

नगर निगम चुनाव के बीच विवाद: 1 घंटा 50 मिनट कैमरा बंद, प्रत्याशियों का प्रदर्शन

 पंचकूला  पंचकूला नगर निगम चुनाव के बीच आज सुबह यानी सोमवार (11 मई, 2026) उस समय हड़कंप मच गया, जब सेक्टर-14 स्थित स्टेट गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज में बनाए गए स्ट्रांग रूम का सीसीटीवी कैमरा करीब 1 घंटा 50 मिनट तक बंद रहने की सूचना सामने आई। इस घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने मौके पर पहुंचकर जमकर हंगामा किया और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि नगर निगम चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम मशीनें इसी स्ट्रांग रूम में रखी गई हैं। कैमरा बंद होने की जानकारी मिलते ही कांग्रेस मेयर प्रत्याशी सुधा भारद्वाज सहित कई दलों के और निर्दलीय वार्ड प्रत्याशी मौके पर पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ सख्त नाराजगी जताई। प्रत्याशियों ने आरोप लगाया कि करीब दो घंटे तक कैमरा बंद रहना बेहद गंभीर मामला है और इससे ईवीएम सुरक्षा को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। प्रत्याशियों ने जिला प्रशासन, इलेक्शन ऑब्जर्वर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। मौके पर मौजूद नेताओं और प्रत्याशियों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और कैमरा बंद होने के कारणों को सार्वजनिक किया जाए। घटना की सूचना मिलते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालात का जायजा लेने के लिए पंचकूला के विधायक चौ चंद्रमोहन भी मौके पर पहुंचे। वहीं, मामला बढ़ता देख इलेक्शन ऑब्जर्वर और प्रशासनिक अधिकारी भी स्ट्रांग रूम स्थल पर पहुंचे और प्रत्याशियों को समझाने का प्रयास किया। फिलहाल प्रशासन की ओर से कैमरा बंद होने के कारणों को लेकर आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है, जबकि प्रत्याशी लगातार ईवीएम सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

अपराध मुक्त बिहार का लक्ष्य, सीएम ने पुलिस को खुली छूट देने की बात कही

पटना बिहार में अब अपराधियों की खैर नहीं है। पुलिस लगातार अपराधियों पर नकेल कस रही है तो वहीं अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी लॉ एंड ऑर्डर को लेकर साफ-साफ कर दिया है कि पुलिस को चुनौती देने वालों को 48 घंटे के अंदर जवाब दिया जाएगा। सीएम सम्राट चौधरी ने अपराध मुक्त बिहार का जिक्र करते हुए कहा है कि अब कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा। यहां बता दें कि मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद सम्राट चौधरी लगातार अपराधियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते आ रहे हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री ने पटना में मंदिरी नाला पर बने सड़क का उद्घाटन किया और फिर अपने संबोधन में अपराधियों को कड़े लहजे में चेताया।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि हमने पुलिस के हाथ खोल दिए हैं। पुलिस को कोई चुनौती देता है तो उसे 48 घंटे में जवाब मिलेगा। कोई अपराधी बच नहीं सकता है। उद्योग को लाना है तो बिहार में सुशासन को और बेहतर ढंग से स्थापित करना है। हमें अपराध मुक्त बिहार बनाना है, इसके लिए हम कुछ भी करेंगे। इससे समझौता नहीं करेंगे। सीएम ने कहा कि कौन अपराधी किस जाति का है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। एनकाउंटर में ढेर हो रहे अपराधी बता दें कि एक तरफ जहां विपक्ष बिहार में अपराध के मुद्दे पर रह-रह कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ एनडीए सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि बिहार में अपराधियों पर जोरदार प्रहार जारी है। सम्राट सरकार के पहले 18 दिन में ही मगध से अंग और सारण तक पुलिस ने पांच एनकाउंटर किए थे। इसमें तीन हाफ एनकाउंटर शामिल थे तो वहीं दो मुठभेड़ में पुलिस ने अपराधियों को मार गिराया था कुछ ही दिनों पहले गया में एक कार्यक्रम में मौजूद सीएम सम्राट चौधरी ने कहा था कि बिहार में अपराधियों का पिंडदान किया जाएगा। सीएम ने कहा था, ‘बिहार में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाए जााएंगे। गया जी तो पिंडदान के लिए प्रसिद्ध है। पिंडदान भी होगा। कुछ लोगों का पिंडदान शुरू हो गय है। बिहार में सुशासन स्थापित करने के लिए ऐसे कई अपराधियों का पिंडदान हमारी सरकार करती रहेगी।’ मंदिरी नाले पर सड़क निर्माण से कई फायदे बहरहाल बता दें कि करीब 115 करोड़ रुपये की लागत से पटना के मंदिरी नाले पर बनी सड़क का उद्घाटन होने के बाद लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। मंदिरी नाले के निर्माण एवं विकास कार्य क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इस परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में जलनिकासी व्यवस्था अधिक सुचारू और व्यवस्थित होगी। नाले के ऊपर सड़क निर्माण से नेहरू पथ से जेपी गंगा पथ, अशोक राजपथ, डबल डेकर, पीएमसीएच तक जाने के लिए स्थानीय नागरिकों को एक नया मार्ग मिलेगा। इस पथ के निर्माण से प्रमुख रूप से वार्ड संख्या 25, 26 और 27 समेत उतरी बिहार जाने वाले लाखों की आबादी को सुगम सड़क संपर्कता मिलेगी। साथ ही पटना के बेली रोड पर होने वाले ट्रैफिक दबाव में भी कमी आएगी। राज्य सरकार ने इस सड़क का नाम दिवंगत विधायक नवीन किशोर सिन्हा के नाम पर रखने का निर्णय लिया है। इस सड़क से उत्तर बिहार से भी कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी।

वीडियो कॉल सुविधा से परिवार से मिली महिला कैदी, रायपुर जेल में भावुक पल

रायपुर मातृ दिवस (Mother's Day 2026) के अवसर पर रायपुर महिला केंद्रीय जेल में बंद महिला बंदियों को बड़ी सौगात मिली। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की घोषणा के अनुरूप रविवार को प्रिजन इनमेट वीडियो कॉलिंग सिस्टम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस सुविधा के शुरू होने से अब महिला बंदी जेल परिसर से ही अपने स्वजन और अधिवक्ताओं से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर सकेंगी। पहले चरण में रायपुर महिला केंद्रीय जेल के साथ कवर्धा, जशपुर समेत सात जेलों में यह सुविधा शुरू की गई है। यह व्यवस्था जेल विभाग और BSNL के बीच हुए एमओयू के तहत लागू की गई है। परिवार को देखकर छलक उठीं आंखें वीडियो कॉलिंग सिस्टम के उद्घाटन के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले। कई महिला बंदियों की आंखें नम हो गईं, जब उन्होंने वर्षों बाद अपने परिवार के सदस्यों को स्क्रीन पर देखा और उनसे बातचीत की। जेल अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने में मदद मिलेगी और वे भावनात्मक रूप से अपने परिवार से जुड़े रह सकेंगे। कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनने की पहल कार्यक्रम के दौरान निश्चय योजना के अंतर्गत व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 38 महिला बंदियों को कौशल प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल रिहाई के बाद बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी। मदर्स डे के मौके पर जेल प्रशासन ने अपनी माताओं के साथ जेल में रह रहे 14 बच्चों को विशेष उपहार भी भेंट किए। बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ निश्चय कार्यक्रम के तहत जेल में बंद युवाओं को अपराध की दुनिया से दूर कर रोजगार के योग्य बनाने के लिए कंप्यूटर प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है। रविवार को केंद्रीय और महिला जेल रायपुर में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 67 बंदियों, जिनमें 38 महिलाएं और 29 पुरुष शामिल हैं, को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय जेल में कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का भी उद्घाटन किया गया। यहां बंदियों को आधुनिक डिजिटल शिक्षा प्रदान की जाएगी। बंदियों के लिए लोन मेला भी लगेगा बंदियों के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए 13 मई को इंडियन ओवरसीज बैंक की ओर से जेल परिसर में लोन मेला आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य रिहा होने वाले बंदियों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में डीजी जेल हिमांशु गुप्ता, जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री, बीएसएनएल के विजय छबलानी, महिला जेल प्रभारी गरिमा पांडेय सहित जेल विभाग का स्टाफ उपस्थित रहा।  

छत्तीसगढ़ में परंपरा और विवाद: शव दफनाने के लिए जमीन न मिलने से लोगों में गुस्सा

जगदलपुर  बस्तर के गांवों में कभी सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति की पहचान माने जाने वाले सामुदायिक आयोजन अब विवादों की वजह बनने लगे हैं। भानपुरी पंचायत के करंदोला गांव में एक ईसाई मत में मतांतरित महिला के शव को दफनाने को लेकर उपजा विवाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। यह मामला केवल जमीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बस्तर में बढ़ती वैचारिक दूरी और सामाजिक बदलाव को फिर उजागर कर दिया। ग्रामीणों ने ग्राम परंपरा का दिया हवाला गांव के लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि गांव की जमीन पर ईसाई रीति से शव दफनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ग्रामीणों का तर्क था कि गांव की परंपरागत व्यवस्था, रीति-रिवाज और ग्राम सभा की सहमति सर्वोपरि है। उनका कहना था कि सामुदायिक सहमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा। विवाद उस समय और बढ़ गया, जब ग्रामीणों को जानकारी मिली कि वन विभाग की फेंसिंग युक्त भूमि पर शव दफनाने की तैयारी की जा रही है। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने देखा कि तार फेंसिंग हटाकर गड्ढा भी खोद दिया गया था। इसके बाद गांव में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। प्रशासन और पुलिस ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ता गया। हालात को देखते हुए प्रशासन ने अंततः शव को अंतिम संस्कार के लिए जगदलपुर स्थित करकापाल कब्रिस्तान भेज दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि मतांतरण के बाद गांव की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और स्थानीय नियमों को लगातार चुनौती दी जा रही है। उनका कहना था कि इससे गांवों की सांस्कृतिक पहचान कमजोर हो रही है और सामाजिक विभाजन बढ़ रहा है। संगठनों ने उठाए पेसा कानून के मुद्दे घटना के बाद बजरंग दल विभाग संयोजक सिकंदर कश्यप ने कहा कि बस्तर पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून और ग्राम परंपराओं को विशेष महत्व प्राप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मिशनरी संगठन गांवों की सामाजिक संरचना को प्रभावित कर रहे हैं। वहीं विहिप जिला सह मंत्री घनश्याम नाग ने कहा कि हर समाज को स्थानीय परंपराओं और ग्राम व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में स्पष्ट नीति तैयार करने की मांग की, ताकि भविष्य में सामाजिक तनाव की स्थिति न बने। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे विवाद बस्तर संभाग में पिछले कुछ वर्षों में मतांतरण और धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों में सामाजिक बहिष्कार, सामुदायिक आयोजनों में मतभेद और अंतिम संस्कार को लेकर तनाव की घटनाएं लगातार चर्चा में रही हैं। पिछले वर्ष नारायणपुर के एड़का गांव में शव दफनाने को लेकर हुए विवाद के दौरान तत्कालीन एसपी सदानंद घायल हो गए थे। इस मामले में कई ग्रामीणों की गिरफ्तारी भी हुई थी। पेसा कानून और ग्राम सभा पर फिर चर्चा करंदोला विवाद के बाद एक बार फिर पेसा कानून और ग्राम सभा की शक्तियां चर्चा में आ गई हैं। पांचवीं अनुसूची क्षेत्र होने के कारण बस्तर में ग्राम सभा और पारंपरिक व्यवस्था को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की भूमि, सामाजिक परंपराओं और सामुदायिक फैसलों में ग्राम सभा की सहमति सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। यही वजह रही कि करंदोला गांव में लोग अपने पारंपरिक नियमों का हवाला देते हुए विरोध पर अड़े रहे।