samacharsecretary.com

UCC को लेकर MP में सक्रियता: जनसुनवाई जिलों में, दिल्ली में समिति की बैठक और आदिवासी प्रावधानों का मंथन

भोपाल  मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य सरकार द्वारा गठित समिति के गठन के बाद अब उसके कामकाज की रूपरेखा तैयार की जा रही है। समिति की अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई और अन्य सदस्यों की सेवा शर्तों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके साथ ही मंगलवार को दिल्ली में समिति की पहली बैठक आयोजित होने की संभावना है। सरकार प्रदेशभर में लोगों की राय जानने के लिए जिला स्तर और भोपाल में जनसुनवाई आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही एक विशेष वेबसाइट भी बनाई जा रही है, जहां नागरिक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। समिति का कार्यालय दिल्ली में स्थापित किए जाने की तैयारी है।   आदिवासी समुदाय को दायरे से बाहर रखने पर मंथन जानकारी के अनुसार, प्रदेश के आदिवासी समुदायों को यूसीसी के कुछ प्रावधानों से अलग रखने पर भी विचार किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में बड़ी आदिवासी आबादी निवास करती है और उनके पारंपरिक रीति-रिवाज व सामाजिक कानून लंबे समय से प्रचलित हैं। ऐसे में सरकार उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर आदिवासी परंपराओं को संरक्षित रखने के विकल्प पर मंथन कर रही है, ताकि किसी प्रकार का सामाजिक विवाद न उत्पन्न हो। यूसीसी के मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी विशेष प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। समिति को ऐसे संबंधों के पंजीयन, अधिकारों और जिम्मेदारियों पर सुझाव देने को कहा गया है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर उत्तराखंड और गुजरात की तुलना में अधिक सख्त रुख अपना सकती है।  

छत्तीसगढ़ के लाल अजय गुप्ता: तेंदूपत्ता से लेकर IFS तक का सफर

रायपुर छत्तीसगढ़ के वनांचलों से अक्सर संघर्ष की खबरें आती हैं, लेकिन इस बार रायगढ़ से एक ऐसी कहानी निकली है जो उम्मीदों को नई उड़ान दे रही है। संबलपुरी गांव के अजय गुप्ता, जिनका बचपन जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ बीनते हुए बीता, अब देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक भारतीय वन सेवा के अधिकारी बनने जा रहे हैं। अजय ने IFS परीक्षा में ऑल इंडिया 91वीं रैंक हासिल की है। UPSC में भी गाड़े झंडे अजय की कामयाबी केवल IFS तक सीमित नहीं है। उन्होंने इस साल सिविल सेवा परीक्षा यानी UPSC में भी 452वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले अजय ने अपनी स्कूली शिक्षा में भी मेधावी होने का प्रमाण दिया था; उन्होंने 10वीं में 92.66% और 12वीं में 91.40% अंक प्राप्त किए थे। NIT रायपुर ने दिया बड़ा विजन अपनी सफलता का श्रेय अजय एनआईटी रायपुर को देते हैं। अजय का कहना है कि कॉलेज जाने से पहले उनके सपने सिर्फ गांव तक सीमित थे, लेकिन एनआईटी के माहौल ने उन्हें बड़े लक्ष्य तय करने की प्रेरणा दी। आर्थिक तंगी के बावजूद स्कॉलरशिप और सरकारी योजनाओं के सहारे उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। छुट्टियों के दौरान वे घर लौटकर परिवार के साथ आज भी आजीविका के कामों में हाथ बंटाते थे। बस्तर के अनुभव ने दिखाया रास्ता अजय ने बताया कि बस्तर में ग्रामीण विकास के कार्यों से जुड़ने और वनों के साथ उनके पुराने जुड़ाव ने ही उन्हें वन सेवा चुनने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अजय की सफलता को वनवासी परिवारों के संघर्ष की जीत बताया है, वहीं वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे दूरस्थ क्षेत्रों की आकांक्षाओं का प्रतीक कहा है। आर्थिक संघर्ष के बीच शिक्षा को बनाया हथियार अजय ने इस साल सिविल सेवा परीक्षा भी 452वीं रैंक के साथ पास की है। NIT ने अजय को बड़े लक्ष्य रखने की नई सोच दी। आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने अपनी पढ़ाई में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, 10वीं कक्षा में 92.66% और 12वीं कक्षा में 91.40% अंक हासिल किए। अजय के इस बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उन्हें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रायपुर में दाखिला मिला, जहां स्कॉलरशिप ने तीन साल तक उनकी पढ़ाई में आर्थिक मदद की। अजय ने पहले उनके सपने सिर्फ उनके गांव तक ही सीमित थे, लेकिन NIT ने उनकी सोच का दायरा बढ़ा दिया। NIT ने बदली सोच उन्होंने कहा कि NIT में दाखिला लेने के बाद ही मुझे यह एहसास हुआ कि मैं और भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता हूं। उन्होंने आगे बताया कि जंगल से उनका जुड़ाव और बस्तर में ग्रामीण विकास के लिए किए गए कामों ने ही उन्हें सिविल सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय करने में मदद की। पढ़ाई के साथ-साथ अपने परिवार की मदद करने के बीच तालमेल बिठाते हुए, वह छुट्टियों के दौरान घर लौटकर रोज़ी-रोटी से जुड़े कामों में हाथ बंटाते थे। राज्य सरकार की छात्रवृत्तियों और वनोपज से जुड़ी सहायता योजनाओं ने उन्हें अपनी परीक्षाओं पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने में मदद की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अजय की यह सफलता जंगल में रहने वाले परिवारों के मजबूत हौसले को दर्शाती है, जबकि वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों की ऊंची आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। सरकारी योजनाओं ने पंखों को दी मजबूती अजय की इस लंबी उड़ान में छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं ने कैशलेस सपोर्ट और आर्थिक संबल प्रदान किया। लघु वनोपज संघ की छात्रवृत्ति ने स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई के दौरान इस छात्रवृत्ति ने आर्थिक बोझ को कम किया। राज्य शासन की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से उन्हें निरंतर वित्तीय सहायता मिली, जिससे वे अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके। अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के वनाश्रित परिवारों के अटूट विश्वास की जीत: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायगढ़ जिले के अजय गुप्ता को भारतीय वन सेवा में चयनित होने पर बधाई देते हुए कहा कि अजय ने न केवल अपने माता-पिता का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि एक ऐसा युवा जिसने स्वयं जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहित किया, आज उन्हीं वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने जा रहा है। हमारी सरकार की लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान की है। अजय की उपलब्धि यह दर्शाती है कि सही अवसर मिलने पर हमारे ग्रामीण अंचल के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपना स्थान सुनिश्चित कर सकते हैं। वन मंत्री ने जताया गौरव, हजारों परिवारों के सपनों का प्रतीक वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अजय गुप्ता को फोन कर बधाई दी और उनकी उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। मंत्री जी ने कहा कि अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के उन हजारों वनाश्रित परिवारों की जीत है जो जंगलों के बीच रहकर बड़े सपने देखते हैं। यह साबित करता है कि हमारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि ऐसे ही सशक्त भविष्य का निर्माण करना है। युवाओं के लिए नया आदर्श अजय गुप्ता आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं जो सीमित संसाधनों में IFS जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि मेहनत सच्ची हो और शासन का साथ मिले, तो वनांचल का कोई भी युवा देश के शीर्ष पद तक पहुँच सकता है।    

BJP में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए छत्तीसगढ़ से पांच नामों पर नजर, 12 मई को होगी बैठक

रायपुर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन इस महीने के आखिरी सप्ताह तक होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ से पांच नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया जा सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश 12 मई को प्रदेश दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के शीर्ष नेताओं से बैठक कर इस विषय पर चर्चा कर सकते हैं। कई नेताओं के नाम चर्चा में जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय कार्यकारिणी के पदेन सदस्य रहेंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अन्य पांच सदस्यों के नाम तय करेंगे। कोंडागांव विधायक और पूर्व मंत्री लता उसेंडी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। वहीं खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, बस्तर सांसद महेश कश्यप, रेणुका सिंह और भावना बोहरा के नाम भी संभावित सूची में बताए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा को भी कार्यकारिणी में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। 12 और 13 मई को अहम बैठकें छत्तीसगढ़ भाजपा की महत्वपूर्ण बैठकें 12 और 13 मई को रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित होंगी। 12 मई को शाम छह बजे कोर कमेटी की बैठक होगी, जबकि शाम 7:30 बजे प्रदेश पदाधिकारियों की चर्चा आयोजित की जाएगी। 13 मई को सुबह 10 बजे प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होगी। भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कंडेय ने बताया कि बैठकों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन मिलेगा।

1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को मिलेगी 36वीं किश्त, CM यादव करेंगे अंतरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 13 मई को नरसिंहपुर से 1835 करोड़ की राशि का अंतरण 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को मिलेगी 36वीं किश्त नरसिंहपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 मई को मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सम्मान के लिये नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी करेंगे। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रूपये की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की जाएगी। लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान का आधार बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है, पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भूमिका मजबूत हुई है। योजना की शुरुआत से अब तक सशक्तिकरण की यात्रा निरंतर जारी वर्ष 2023 जून में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना में अप्रैल 2026 तक 35 मासिक किस्तों का सफलतापूर्वक अंतरण किया जा चुका है। मई 2026 में जारी की जा रही राशि योजना की 36वीं किश्त जारी होगी। जून 2023 से अप्रैल 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55,926.51 करोड़ रूपये की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है। राशि में क्रमिक वृद्धि: 1,000 से बढ़कर 1,500 रूपये प्रतिमाह योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रूपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रूपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रूपये प्रतिमाह कर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कम राशि प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त सहायता देकर कुल देय राशि सुनिश्चित की जा रही है। महिला कल्याण के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रूपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रूपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रूपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रूपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया व्यापक परिवर्तन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे उनमें वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्रामीण और शहरी महिलाओं के लिए समान रूप से उपयोगी योजना का लाभ ग्रामीण, आदिवासी, शहरी, कल्याणी, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाओं सहित व्यापक वर्ग को मिल रहा है। पात्र महिलाओं के सक्रिय और आधार-लिंक्ड बैंक खातों में राशि सीधे जमा होने से प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्वरित बनी है। राज्य सरकार ने विभिन्न विशेष अवसरों और त्योहारों पर अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर महिलाओं के जीवन में उत्साह और खुशियों का संचार किया है। इससे योजना केवल नियमित सहायता तक सीमित न रहकर भावनात्मक संबल का भी माध्यम बनी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में भोपाल में होगा इंडो-फ्रेंच निवेश सम्मेलन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर भोपाल में होगा इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव भोपाल में जुटेंगे फ्रांस की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि मध्यप्रदेश में निवेश संभावनाओं को लेकर फ्रांसीसी उद्योग जगत के साथ होगा मंथन एग्री, ईवी, टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी और स्किल सेक्टर्स पर रहेगा फोकस कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में होगा 12 मई को कॉन्क्लेव मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे वैश्विक निवेशकों से संवाद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने उद्योग, अधोसंरचना, नीति सुधार, लॉजिस्टिक्स, स्किल डेवलपमेंट और निवेश सुविधा के क्षेत्र में जिस तेज गति से कार्य किया है, उसने दुनिया की बड़ी कंपनियों का ध्यान राज्य की ओर आकर्षित किया है। फ्रांस की प्रतिष्ठित कंपनियों और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की भोपाल में मौजूदगी इसी बढ़ते विश्वास का संकेत मानी जा रही है। भोपाल में 12 मई को होने जा रहे इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव ऐसे समय में हो रहा है, जब मध्यप्रदेश वैश्विक निवेश मानचित्र पर लगातार मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। कुशाभाऊ अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में यह आयोजन केवल एक निवेश बैठक नहीं, बल्कि उस बदलती औद्योगिक सोच और वैश्विक संवाद का विस्तार है। इसमें मध्यप्रदेश अब निवेश प्राप्त करने वाले राज्य की भूमिका से आगे बढ़कर अंतर्राष्ट्रीय औद्योगिक साझेदारियों का सक्रिय केंद्र बन रहा है। इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में फ्रांस के राजदूत, फ्रांसीसी उद्योग जगत के प्रतिनिधि, वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी, मध्यप्रदेश शासन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और प्रदेश के उद्योग प्रतिनिधि शामिल होंगे। कॉन्क्लेव से मध्यप्रदेश और फ्रांस के बीच दीर्घकालिक औद्योगिक, तकनीकी और संस्थागत साझेदारी होगी। इससे राज्य सरकार फ्रांसीसी कंपनियों को मध्यप्रदेश के औद्योगिक वातावरण, निवेश संभावनाओं, नीति समर्थन और तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक इको-सिस्टम से अवगत कराएगी। कार्यक्रम में एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल एवं ईवी, कंज्यूमर गुड्स एवं रिटेल, डिफेंस एवं एविएशन, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, फार्मा एवं मेडिकल डिवाइसेस, रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्सटाइल, पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा। इन सेक्टर्स में मध्यप्रदेश को उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। राज्य सरकार का प्रयास केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश को तकनीक, नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास और सतत औद्योगिक विकास आधारित साझेदारी के मॉडल के रूप में स्थापित करना है। कॉन्क्लेव में पारंपरिक निवेश चर्चा के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, लोकल मैन्युफैक्चरिंग, स्किलिंग, रिसर्च कोलैबोरेशन और संस्थागत भागीदारी पर भी विशेष ध्यान रहेगा। फ्रांस की कई प्रतिष्ठित कंपनियां पहले से मध्यप्रदेश में संभावनाएं तलाश रही हैं। 'सनोफी' द्वारा एम्स भोपाल के साथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की दिशा में चर्चा की जा रही है। 'डसॉल्ट सिस्टम्स' राज्य में वर्चुअल ट्विन टेक्नोलॉजी के माध्यम से शहरी विकास, तकनीकी शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्किल डेवलपमेंट और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं दिख रही है। 'डेकाथलॉन' राज्य में सोर्सिंग, रिटेल विस्तार, सप्लाई चेन और स्पोर्ट्स आधारित स्किलिंग मॉडल विकसित करने में रुचि दिखा रही है। सिस्ट्रा द्वारा सड़क, मेट्रो, रेलवे, जल प्रबंधन, अर्बन प्लानिंग, डेटा सेंटर और केबल कार सिस्टम जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। वहीं सूफलेट माल्ट द्वारा माल्टिंग बार्ली आधारित कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, किसान क्षमता विकास और सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर प्रस्ताव साझा किया गया है। 'डुनासिस' द्वारा भारत में मैन्युफैक्चरिंग लोकलाइजेशन पर केंद्रित निवेश प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है। कॉन्क्लेव में सनोफी, डसॉल्ट सिस्टम्स, सूफलेट माल्ट, सिस्ट्रा, ईडीएफ, एंजी, मोनिन, रॉयल कैनिन, लैक्टालिस, वर्टो मोबिलिटी, टेक्नीक सोलैर, जियोडिस इंडिया और अन्य प्रतिष्ठित फ्रांसीसी कंपनियों की भागीदारी प्रस्तावित है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए फ्रांस के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना भी है। इंडो-फ्रेंच कॉन्क्लेव के जरिए जीआईएस 2027 में फ्रांस की प्रभावी भागीदारी और फ्रांसीसी निवेश को लेकर सकारात्मक माहौल तैयार करना है। कॉन्क्लेव से मध्यप्रदेश को कई स्तरों पर लाभ मिलने की संभावना है। इससे निवेश प्रस्तावों की नई संभावनाएं तैयार होंगी, फ्रांसीसी कंपनियों और मध्यप्रदेश आधारित उद्योगों के बीच साझेदारी को गति मिलेगी, तकनीकी सहयोग और स्किल डेवलपमेंट के नए अवसर बनेंगे तथा राज्य में भविष्य के लिए सेक्टर आधारित औद्योगिक सहयोग का मजबूत आधार तैयार होगा। प्रदेश के लगभग 60 से 80 उद्योग प्रतिनिधियों की भागीदारी भी कार्यक्रम में प्रस्तावित है। इनके और फ्रांसीसी कंपनियों के बीच बी-2-बी और बी-2-जी बैठकें आयोजित होंगी, जिनमें संभावित निवेश, संयुक्त उपक्रम, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा होगी। इसकी शुरुआत 11 मई को फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल के मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय भ्रमण से हुई, जहां प्रतिनिधियों को प्रदेश की जनजातीय कला, संस्कृति और विरासत से परिचित कराया गया। दूसरे दिन 12 मई को फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल यूनेस्को विश्व धरोहर भीमबेठका रॉक शेल्टर्स का भ्रमण करेगा। यह भ्रमण मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर बनेगा। कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में 12 मई को आयोजित होने वाले मुख्य सत्र में मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश प्रोत्साहन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और निवेश सुविधा सिस्टम पर विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी। “अनलॉकिंग मध्यप्रदेश: पॉलिसी, पार्टनरशिप्स एंड पाथवेज फॉर सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट” विषय पर विशेष पैनल चर्चा भी आयोजित होगी, जिसमें फ्रांस की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम के मुख्य सत्र को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल के समक्ष मध्यप्रदेश की औद्योगिक दृष्टि, निवेश संभावनाओं, अधोसंरचना विकास और भविष्य की विकास रणनीति को प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विभिन्न फ्रांसीसी कंपनियों द्वारा एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट प्रस्तुत किए जाएंगे तथा महत्वपूर्ण एमओयू का आदान-प्रदान भी होगा। कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और फ्रांसीसी कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच विशेष वन-टू-वन बैठकें भी प्रस्तावित हैं। इन बैठकों में संभावित निवेश, तकनीकी सहयोग और दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। यह कॉन्क्लेव इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश अब केवल निवेश आमंत्रित करने वाला राज्य नहीं, बल्कि वैश्विक औद्योगिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और भविष्य आधारित विकास मॉडल का उभरता हुआ केंद्र बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार ऐसे नए अंतर्राष्ट्रीय संवाद स्थापित कर रहा है, जो राज्य को भारत के सबसे सक्रिय और विश्वसनीय निवेश गंतव्यों में मजबूत पहचान दिला रहे हैं।  

वीडी और मुख्यमंत्री के सामने चुनौतियां, एमपी में राजनीतिक नियुक्तियों पर ब्रेक

भोपाल मध्यप्रदेश भाजपा के भीतर इन दिनों निगम-मंडलों, बोर्डों और विकास प्राधिकरणों के खाली पदों को भरने को लेकर भारी कशमकश देखी जा रही है। राजनीतिक नियुक्तियों की प्रतीक्षा लंबी होती जा रही है, क्योंकि पार्टी के अंदर प्रभावशाली पदों पर काबिज होने के लिए अलग-अलग गुटों में खींचतान चरम पर है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 31 से अधिक महत्वपूर्ण संस्थानों में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्ति का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है, जिससे संगठन और सरकार के बीच सामंजस्य बैठाना चुनौती बन गया है। भोपाल विकास प्राधिकरण पर वर्चस्व की लड़ाई राजधानी (MP) के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक, भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) के अध्यक्ष पद को लेकर सबसे ज्यादा खींचतान मची हुई है। हालांकि पहले चेतन सिंह का नाम लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन मंत्रियों और विधायकों की निजी महत्वाकांक्षाओं ने इस प्रक्रिया को उलझा दिया है। हर गुट चाहता है कि इस प्रभावशाली पद पर उनका अपना व्यक्ति बैठे ताकि शहर के बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों पर उनका नियंत्रण बना रहे। इंदौर की नियुक्ति में दिल्ली का हस्तक्षेप इंदौर विकास प्राधिकरण के मामले में पेच और भी पेचीदा हो गया है। बताया जा रहा है कि हरिनारायण यादव का नाम चयन के बेहद करीब था, लेकिन ऐन वक्त पर इंदौर के ही एक रसूखदार नेता ने दिल्ली दरबार में अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए इस पर रोक लगवा दी। इस ‘वीटो’ के बाद अब नए समीकरण तलाशे जा रहे हैं, जिससे कार्यकर्ताओं और दावेदारों में बेचैनी बढ़ गई है। 50 दिग्गज नेताओं की सक्रिय लॉबिंग पार्टी के भीतर लगभग 50 से ज्यादा कद्दावर नेता ऐसे हैं जो अब तक सत्ता की मुख्यधारा में कोई पद हासिल नहीं कर पाए हैं। ये सभी नेता अब बचे हुए निगमों और आयोगों में अपनी जगह सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। नेताओं का यह दबाव ही है कि सरकार और संगठन चाहकर भी अंतिम सूची पर मुहर नहीं लगा पा रहे हैं। इन प्रमुख संस्थानों में खाली पड़ी हैं कुर्सियां प्रदेश (MP) के कई बड़े और प्रभावकारी संस्थानों में नेतृत्व का अभाव है। इनमें नीति एवं योजना आयोग, खनिज विकास निगम, पर्यटन बोर्ड, कृषि विपणन बोर्ड, और पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग जैसे महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं। इसके साथ ही गौपालन एवं पशु संवर्धन बोर्ड, मदरसा बोर्ड, और विभिन्न क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों (जैसे महाकौशल और बुंदेलखंड) में भी नियुक्तियां न होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। राजस्व पर बढ़ता अतिरिक्त वित्तीय भार इन राजनीतिक नियुक्तियों का एक पहलू सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ भी है। एक अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही आलीशान कार्यालय, सरकारी वाहन, ड्राइवर और स्टाफ का लंबा-चौड़ा अमला जुड़ जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि एक राजनीतिक नियुक्ति से सरकारी खजाने पर हर महीने औसतन 3 से 5 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है, जो अंततः जनता के टैक्स के पैसे से ही वहन किया जाता है। पुराने चेहरों की वापसी ? हाल की कुछ नियुक्तियों ने पार्टी के भीतर असंतोष की आग को और हवा दी है। विनोद गोटिया, सत्येंद्र भूषण सिंह और महेंद्र सिंह यादव जैसे नेताओं को दोबारा अहम जिम्मेदारियां मिलने से नए और ऊर्जावान कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। फिलहाल मध्यप्रदेश भाजपा में नियुक्तियों का पूरा मामला सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने की कोशिशों में उलझा हुआ है।

योगी सरकार का जोर: जल जीवन मिशन को मिला बढ़ा हुआ बजट, लक्ष्य जल्द पूरा होगा

योगी सरकार में जल जीवन मिशन को मिल रहा भरपूर बजट, जल्द पूरा होगा लक्ष्य केंद्र और प्रदेश सरकार के लगभग 28 हजार करोड़ रुपये से पूरे होंगे अधूरे काम जल जीवन मिशन 2.0 के विस्तार से ग्रामीण जनता को राहत देगी योगी सरकार लखनऊ उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन (हर घर नल योजना) न केवल एक सरकारी योजना है, बल्कि यह ग्रामीण जीवनशैली में एक बड़े बदलाव का प्रतीक बन गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस मिशन को युद्धस्तर पर लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में केंद्र से उत्तर प्रदेश के लिए 13,425 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित हो चुका है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार भी ग्रामीण जलापूर्ति विभाग को करीब 15 हजार करोड़ रुपये वर्ष 2026-27 में योजनाओं को पूरा करने के लिए देगी। इस 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति को सुनिश्चित करने में कोई बाधा नहीं आएगी।  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में 2.62 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाए। इस लक्ष्य को अब जल जीवन मिशन 2.0 के जरिए हासिल किया जाएगा। दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बीच जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो चुका है। इसमें जल जीवन मिशन की डेड लाइन जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है। साथ ही जारी वित्तीय वर्ष के लिए उत्तर प्रदेश को 13,425 करोड़ रुपये भी आवंटित किए गए हैं। एसडब्ल्यूएसएम, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभास कुमार ने बताया कि मिशन के नए स्वरूप और बजट के साथ नई जिम्मेदारियों को भी जोड़ा गया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत प्रदेश में जल गुणवत्ता परीक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विंध्य और बुंदेलखंड समेत प्रदेश के कई इलाकों में पानी में रासायनिक तत्वों की जांच कर उन्हें पीने योग्य बनाना सबसे जरूरी है। इसके लिए पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जा रही है। जनभागीदारी भी इसका दूसरा सबसे अहम बिंदु है। प्रदेश में जलापूर्ति के लिए जितने भी पंप हाउस, पानी की टंकी समेत अन्य निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद ग्राम एवं पेयजल स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी) को सौंपा जाएगा। 10 वर्षों तक जल निगम, (वीडब्ल्यूएससी), निर्माण एजेंसियां व ठेकेदार मिलकर इनके सुचारु संचालन को सुनिश्चित करेंगे। पानी के स्रोत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि एक बार निर्माण हो जाने के बाद कोई भी बोरवेल, पंप या पानी का स्रोत सूखे नहीं। इससे सभी ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हो पाएगी। प्रभास कुमार ने बताया कि वर्ष 2027 में सभी कार्यों की प्रगति की समीक्षा केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी, ताकि लक्ष्य पूरा किया जा सके। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सभी नई प्राथमिकताओं को प्रदेश में लागू कराया जाएगा। तेजी से पूरा किया जा रहा लक्ष्य विभाग के मुताबिक जल जीवन मिशन के तहत अभी तक 2.43 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। वहीं वर्ष 2026-27 में 2.62 करोड़ कनेक्शन का लक्ष्य पूरा करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा दांव, मंत्रिमंडल में 60% ओबीसी व एससी समाज शामिल

 लखनऊ  सत्ता की हैट-ट्रिक लगाने के लिए भाजपा ने योगी मंत्रिमंडल के बहुप्रतीक्षित विस्तार के जरिए जातीय से लेकर क्षेत्रीय समीकरणों के संतुलन का रणक्षेत्र सजा लिया है। 19वीं विधानसभा के लिए लगभग आठ माह बाद होने वाले चुनाव को लेकर सपा जिस पीडीए के अस्त्र को धार दे रही है, भाजपा ने विस्तार में पिछड़े और दलित समाज के प्रतिनिधियों को कहीं ज्यादा प्रतिनिधित्व देकर उसको कुंद करने का बड़ा दांव चला है। सपा चुनाव के लिए जाट, गुर्जर, पाल, वाल्मीकि, पासी आदि जातियों में पैठ बढ़ाने में जुटी है। भाजपा ने सपा की इसी रणनीति को ध्वस्त करने का ताना-बाना मंत्रिमंडल के सहारे बुना है। ओबीसी समाज से तीन और मंत्री बनाने के साथ दो को प्रोन्नत किया गया है। दलित समाज से भी दो और मंत्री बनाए गए हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब 60 प्रतिशत मंत्री ओबीसी और एससी समाज से पूरब से पश्चिम तक को साधा गया है। रविवार के विस्तार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित 60 मंत्रियों के मंत्रिमंडल में 60 प्रतिशत ओबीसी व दलित समाज का ही प्रतिनिधित्व हो गया है। क्षत्रिय व वैश्व समाज की भागीदारी यथावत रखते हुए पार्टी ने सवर्ण समाज से एक मात्र मनोज पाण्डेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर यूजीसी सहित अन्य मुद्दों को लेकर समाज में उपजी नाराजगी दूर करने का भी प्रयास किया गया है। चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार के कई मायने चुनाव से आठ माह पहले किया गया विस्तार कई मायनों में अहम है। बनाए गए मंत्रियों को भले ही अन्य की तरह लंबा कार्यकाल नहीं मिलेगा लेकिन इस बहाने सत्ताधारी भाजपा, विरोधियों के साथ ही कार्यकर्ताओं को भी बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। चूंकि प्रदेश की राजनीति आज भी जातीय संतुलन पर ही टिकी है, इसलिए दूसरे विस्तार में खासतौर से जातीय गणित का ही ध्यान रखा गया है। चुनाव में ओबीसी जातियों की निर्णायक भूमिका होने के नाते विस्तार में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) में आने वाले लोध (कैलाश राजपूत), पाल (अजीत सिंह), विश्वकर्मा (हंसराज), गुर्जर (सोमेन्द्र तोमर) व जाट (भूपेन्द्र चौधरी) बिरादरी का मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व बढ़ाया गया है। इससे पहले भाजपा पिछड़े में कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को पार्टी की कमान सौंप चुकी है। पिछड़े समाज को बनाया वोट बैंक सूबे की सत्ता हासिल करने के लिए समाजवादी पार्टी से लेकर बहुजन समाज पार्टी की नजर पहले से ही राज्य के लगभग 44 प्रतिशत आबादी वाले पिछड़े समाज के वोट बैंक पर है। दोनों पार्टियों ने पिछड़े समाज से आने वाले नेताओं को ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंप रखी है। अनुसूचित जाति से पहली बार वाल्मीकि (सुरेन्द्र दलेर) के साथ ही पासी(कृष्णा पासवान) बिरादरी को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया गया है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस संग सपा, पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फार्मूले के जरिए भाजपा को बड़ा झटका दे चुकी है। विस्तार के बाद अधिकतम 60 मंत्रियों वाले योगी मंत्रिमंडल में पिछड़े समाज से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित सर्वाधिक 25 मंत्री हो गए हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के 11, सवर्ण समाज से भी 22 (ब्राह्मण समाज के आठ, राजपूत के छह, वैश्य के चार, दो भूमिहार, एक-एक खत्री व कायस्थ समाज से) मंत्री अब हो गए हैं। विस्तार के जरिए भाजपा ने जिस तरह से सवर्णों के साथ ही गैर यादव ओबीसी बिरादरी को साधने की कोशिश की है, उसको देखते हुए माना जा रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव में भी सपा-बसपा के सामने इसमें सेंधमारी करने की ही बड़ी चुनौती होगी। विदित हो कि लोकसभा चुनाव से पहले योगी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए पिछड़े, दलित, अगड़े के साथ ही पूरब से पश्चिम को साधते हुए चार कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे। यथावत ही रही सहयोगी दलों की हिस्सेदारी योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भले ही काफी समय से एनडीए के सहयोगी दल बयानबाजी के साथ दिल्ली तक की दौड़ लगा रहे थे लेकिन दूसरे विस्तार में किसी को भी मौका नहीं मिला। इसके बाद भी सहयोगी दलों के नेता पूरी तरह से शांत हैं। माना जा रहा है कि बिहार के बाद बंगाल, असम एवं पुडुचेरी विधान सभा चुनाव में भी मिली बड़ी जीत के बाद सहयोगी दल, भाजपा पर अब दबाव बनाने से बच रहे हैं। सहयोगी दलों को लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह का माहौल भाजपा के पक्ष में बना हुआ है उसका असर उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी रहने वाला है। ऐसे में किसी तरह का दबाव बनाने से सत्ताधारी भाजपा में उनकी स्थिति बिगड़ सकती है। सपा सहित विरोधियों के साथ खड़े होने से फिलहाल फायदा मिलने का आसार नहीं है। 2017 में अपना दल और सुभासपा से हुआ था अलायंस गौरतलब है कि भाजपा वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में अपना दल ( सोनेलाल) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी(सुभासपा) के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरी थी। सरकार बनने पर सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी दी गई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में निषाद पार्टी का भी भाजपा से गठजोड़ हुआ लेकिन मंत्री पद से बर्खास्त कर दिए जाने पर सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा से किनारा कर लिया। वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव में अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी तो भाजपा के साथ रहीं लेकिन सुभासपा ने सपा के साथ चुनाव लड़ा था। छह विधायक भी जीते लेकिन सपा से अनबन के बाद राजभर ने फिर भाजपा से हाथ मिला लिया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के पूर्व रालोद भी सपा से नाता तोड़कर भाजपा के साथ आ गई। भाजपा के साथ खड़े दलों का एक-एक विधायक वर्तमान में योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री है।  

योगी सरकार उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार पर फोकस

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विश्वविद्यालयों के कायाकल्प के बाद, अब राज्य सरकार ने प्रदेश के डिग्री कॉलेजों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतारने का लक्ष्य तय किया है। जिस तरह यूपी के सात विश्वविद्यालयों ने नैक (NAAC) की 'A++' रैंकिंग हासिल कर देशभर में मिसाल पेश की है, ठीक उसी तर्ज पर अब डिग्री कॉलेजों को भी उत्कृष्ट श्रेणी में लाने के लिए 'मिशन मोड' में काम शुरू हो गया है। विश्वविद्यालयों से डिग्री कॉलेजों तक: रैंकिंग का नया रोडमैप उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने स्पष्ट किया है कि सरकार का विजन अब केवल बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं है।  विशेष कार्यशालाएं: प्रदेशभर के डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें उन्हें नैक रैंकिंग की बारीकियों, डेटा संकलन और गुणवत्ता सुधार के मंत्र दिए जा रहे हैं। रिसर्च और डिजिटल कल्चर: कॉलेजों को केवल 'डिग्री बांटने' वाला केंद्र न मानकर, उन्हें शोध (Research) और डिजिटल शिक्षा का हब बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बी-ग्रेड का दौर खत्म, ए++ की लगी झड़ी योगी सरकार के सत्ता में आने से पहले प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अक्सर रैंकिंग के मामले में पिछड़ जाती थी। ऐतिहासिक सुधार: पहले जहां विश्वविद्यालय बी या बी-प्लस ग्रेड तक ही पहुंच पाते थे, आज कुलाधिपति (राज्यपाल) और सरकार के साझा प्रयासों से राज्य के सात विश्वविद्यालय ए++ रैंकिंग प्राप्त कर चुके हैं। ग्लोबल बेंचमार्क: उत्तर प्रदेश के दो विश्वविद्यालय अब 'क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग' में शामिल हैं, जबकि छह संस्थानों ने 'क्यूएस एशिया रैंकिंग' में अपनी जगह पक्की की है। तीन विश्वविद्यालय यूजीसी की 'ग्रेड-1' श्रेणी का गौरव हासिल कर चुके हैं। छात्र सुविधाएं और रोजगार: नई शिक्षा नीति का आधार उच्च शिक्षा में यह गुणात्मक सुधार केवल कागजी नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ छात्रों को मिल रहा है।  इंफ्रास्ट्रक्चर: कॉलेजों में स्मार्ट क्लासरूम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और बेहतर छात्र सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।  नई शिक्षा नीति (NEP): पाठ्यक्रमों को रोजगारपरक बनाकर छात्रों की संख्या बढ़ाने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।  प्रतिस्पर्धा: कॉलेजों के बीच बेहतर रैंकिंग हासिल करने की होड़ से अंततः शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।  

ईरान-अमेरिका तनाव का असर भारत में, पटना में घरेलू और व्यावसायिक गैस महंगी

पटना पटना में पीएनजी, सीएनजी और उद्योगों के उपयोग में आने वाली गैस की सभी श्रेणियों में इजाफा किया गया है। ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण प्राकृतिक गैस के आयात में आ रही कमी के कारण गैस मूल्यों में इजाफा किया गया है। घरेलू पाइप्ड प्राकृतिक गैस (डी-पीएनजी) की कीमतों में 50 पैसे प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर की बढ़ोतरी की गई है। इसके पहले इसकी कीमत 49.44 रुपये एससीएम थी। घरेलू गैस की कीमतों में इजाफा होने से पटना में डी-पीएनजी का उपयोग करने वाले 32 हजार उपभोक्ता सीधे प्रभावित होंगे। CNG के दाम में 1 रुपये की बढ़ोतरी व्यावसायिक कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमतों में एक रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। पटना में सीएनजी की बढ़ी हुई कीमत 89.90 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। पहले सीएनजी के दाम 88.90 रुपये प्रति किलोग्राम थे। इससे 40 हजार से ज्यादा वाहनों पर सीधा असर पड़ेगा। इन वाहनों में 15 से 20 हजार ऑटो और सामान ढोने वाले वाहन हैं। अप्रैल 2026 के बाद व्यावसायिक और औद्योगिक पाइप्ड नेचुरल गैस (सी-पीएनजी और आई-पीएनजी) की कीमतों में भी इजाफा किया गया है। सी-पीएनजी की कीमत प्रति एससीएस 5.38 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अब 93.27 रुपये प्रति एससीएम मिलेगी। इससे शहर के होटलों, रेस्टोरेंटों, बैंक्वेट हॉल आदि के परिचालन लागत में इजाफा होना तय है। औद्योगिक पाइप्ड नेचुरल गैस की कीमत में भी पांच रुपये प्रति एससीएम बढ़ी है। यह गैस अब उद्योगों को 85.95 और 86.25 रुपये प्रति एससीएम मिलेगी। पीएम मोदी ने देशवासियों से की सहयोग की अपील बता दें कि अमेरिका-ईरान के बीच पिछले कई दिनों से जारी जंग से कई देश लगातार प्रभावित हो रहे हैं। इस बीच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के मद्देनजर देश के लोगों से सहयोग करने की अपील की है। पीएम ने उन्होंने देश के नागरिकों से विदेशी मुद्रा भंडार के संरक्षण में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि मौजूदा समय का जो संकट है उसे देखते हुए हमें विदेशी मुद्रा बचाने पर बहुत जोर देना होगा। उन्होंने कहा, “हमें तय करना होगा कि जब यह संकट का काल है और हमारी देशभक्ति हमें ललकार रही है तो कम से कम एक साल के लिए विदेशों में जाने की बातों को टालना चाहिए। भारत में बहुत सारी जगह हैं वहां हम जा सकते हैं। भारत में बहुत कुछ किया जा सकता है।” पीएम मोदी ने देश के लोगों से अगले एक साल तक सोना ना खरीदने की अपील भी की है। इस दौरान उन्होंने लोगों से पेट्रोल-डीजल तथा रसोई गैस बचाने तथा सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की भी अपील की। तनाव कम होने के नहीं दिख रहे आसार इधर ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव कम होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने संबंधी उसके (ईरान) प्रस्ताव को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार देते हुए खारिज कर दिया है। डोनल्ड ट्रंप को रविवार को ईरान का प्रस्ताव प्राप्त हुआ और उम्मीद जताई जा रही थी कि इससे 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को समाप्त करने में सफलता मिलेगी। इस युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम, समुद्री मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है जिससे कई देश ईंधन की कमी का सामना कर रहे हैं। ट्रंप ने रविवार को 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया, 'मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित 'प्रतिनिधियों' का जवाब पढ़ा। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया – यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।' ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस से कहा, ‘मुझे उनका पत्र पसंद नहीं आया। यह ठीक नहीं है। मुझे उनकी प्रतिक्रिया पसंद नहीं आई।’