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तेंदूपत्ता संग्राहक के बेटे अजय गुप्ता बने भारतीय वन सेवा के अधिकारी

रायपुर छत्तीसगढ़ के जंगलों से निकली एक प्रतिभा ने आज देश की सर्वाेच्च सेवाओं में अपनी जगह बनाकर प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। रायगढ जिले के सम्बलपुरी ग्राम के एक साधारण तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार के सुपुत्र अजय गुप्ता ने अपने अटूट संकल्प से भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होकर यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की नहीं, बल्कि कड़े संघर्ष और सही मार्गदर्शन की मोहताज होती है।           रायगढ़ के संबलपुरी गांव में तेंदूपत्ता और महुआ बीनने वाला अजय गुप्ता अब IFS अधिकारी बन गया है। कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करते हुए अजय ने पूरे देश में 91वीं रैंक हासिल की। अब वही जंगल, जो कभी परिवार की रोजी-रोटी था, उसकी जिम्मेदारी बनने जा रहा है। अजय गुप्ता ने 12वीं कक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया और इसके बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में प्रवेश मिला। एनआईटी में पढ़ाई के दौरान भी उन्हें तीन वर्षों तक छात्रवृत्ति मिलती रही। अजय कहते हैं कि पहले सपने बहुत बड़े नहीं थे। लगता था कि हमारी दुनिया बस गांव तक सीमित है, लेकिन एनआईटी में एडमिशन लेने के बाद नजरिया बदल गया। पहली बार लगा कि मैं भी कुछ बड़ा कर सकता हूं। अजय कहते हैं कि जंगल उनके बचपन से ही जिंदगी का हिस्सा रहा है। जंगल ने उन्हें सिर्फ रोजगार नहीं दिया, बल्कि जीवन की दिशा भी दी। वह कहते हैं बचपन से मेरा जुड़ाव जंगल से रहा है। जंगल ने मुझे बहुत कुछ दिया है, बस्तर में काम करने के दौरान भी जंगल से रिश्ता और मजबूत हुआ। संघर्ष की जमीन से सफलता के आसमान तक          अजय का बचपन जंगलों के बीच वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी करते हुए बीता। संघर्ष के दिनों को याद करते हुए अजय बताते हैं। माता-पिता अधिक शिक्षित नहीं थे, लेकिन उन्होंने बच्चों की शिक्षा को ही अपना लक्ष्य माना। छुट्टियों के दौरान अजय स्वयं जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता और महुआ इकट्ठा करने में माता-पिता की मदद करते थे। अभावों के बीच भी उन्होंने 10वीं में 92.66 प्रतिशत और 12वीं में 91.40 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी योग्यता का परिचय दिया था। सरकारी योजनाओं ने पंखों को दी मजबूती अजय की इस लंबी उड़ान में छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं ने 'कैशलेस सपोर्ट' और आर्थिक संबल प्रदान किया। लघु वनोपज संघ की छात्रवृत्ति ने स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई के दौरान इस छात्रवृत्ति ने आर्थिक बोझ को कम किया। राज्य शासन की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से उन्हें निरंतर वित्तीय सहायता मिली, जिससे वे अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके। अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के वनाश्रित परिवारों के अटूट विश्वास की जीत है – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय              मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने रायगढ़ जिले के अजय गुप्ता को भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होने पर बधाई देते हुए कहा कि अजय ने न केवल अपने माता-पिता का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।            मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि एक ऐसा युवा जिसने स्वयं जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहित किया, आज उन्हीं वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने जा रहा है। हमारी सरकार की 'लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति' और 'पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति' जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान की है। अजय की उपलब्धि यह दर्शाती है कि सही अवसर मिलने पर हमारे ग्रामीण अंचल के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपना स्थान सुनिश्चित कर सकते हैं। वन मंत्री ने जताया गौरव, हजारों परिवारों के सपनों का प्रतीक         वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने अजय गुप्ता को फोन कर बधाई दी और उनकी उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। मंत्री जी ने कहा कि अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के उन हजारों वनाश्रित परिवारों की जीत है जो जंगलों के बीच रहकर बड़े सपने देखते हैं। यह साबित करता है कि हमारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि ऐसे ही सशक्त भविष्य का निर्माण करना है। युवाओं के लिए नया आदर्श          अजय गुप्ता आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं जो सीमित संसाधनों में IFS जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि मेहनत सच्ची हो और शासन का साथ मिले, तो वनांचल का कोई भी युवा देश के शीर्ष पद तक पहुँच सकता है।

व्यापार में निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने वाला आरोपी गिरफ्तार

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में वित्तीय अपराधों एवं आमजन से धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कटनी जिले की एनकेजे थाना पुलिस को व्यापार में निवेश के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। कार्रवाही के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 36 लाख 30 हजार रुपये नगद एवं घटना में प्रयुक्त एक लग्जरी वाहन सहित 76 लाख रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार फरियादी से आरोपी द्वारा स्वयं को रेलवे का कॉन्ट्रेक्टर बताते हुए रेलवे से संबंधित कार्य में निवेश कराने का झांसा दिया गया। आरोपी ने योजनाबद्ध तरीके से विश्वास में लेकर रेलवे ठेका दिलाने एवं उसमें लाभ दिलाने का प्रलोभन दिया तथा छलपूर्वक 36 लाख 30 हजार रुपये की राशि प्राप्त कर ली। बाद में फरियादी को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास होने पर थाना एनकेजे में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस द्वारा तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। तकनीकी साक्ष्यों, साइबर इनपुट एवं सतत निगरानी के आधार पर पुलिस टीम द्वारा आरोपी की लोकेशन ट्रेस की गई। इसके पश्चात जिला पन्ना क्षेत्र में घेराबंदी कर आरोपी को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने धोखाधड़ी की घटना को अंजाम देना स्वीकार किया। पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई प्रदेश में वित्तीय अपराधों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है।

सुमन हेल्प डेस्क 24×7 सेवाओं के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा का बनी आधार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की समय पर उपलब्धता एवं तकनीक आधारित स्वास्थ्य मॉनिटरिंग से प्रदेश सरकार महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए प्रभावी पहल कर रही है। सुमन हेल्प डेस्क एवं इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर प्रदेश में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मध्यप्रदेश सरकार सुरक्षित मातृत्व एवं स्वस्थ नवजात शिशु की सुरक्षा के संकल्प को तकनीक, संवेदनशीलता और सतत सेवा के माध्यम से साकार कर रही है। सुमन हेल्प डेस्क स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने, शिकायतों के त्वरित समाधान, समयबद्ध रेफरल एवं सतत निगरानी के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त आधार प्रदान कर रही है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में संचालित सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) हेल्प डेस्क व्यवस्था प्रदेश में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं एवं उनके परिवारों के लिए भरोसेमंद सहायक प्रणाली बनकर उभरी है। राज्य में प्रारंभिक रूप से 57 स्वास्थ्य संस्थाओं से शुरू हुई यह व्यवस्था अब विस्तारित होकर 55 जिला चिकित्सालयों, 10 शासकीय मेडिकल कॉलेजों तथा एम्स भोपाल तक पहुँच चुकी है। राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया मध्यप्रदेश मॉडल मध्यप्रदेश के सुमन आइसीसीसी एवं जिला हेल्प डेस्क मॉडल को भारत सरकार द्वारा आयोजित 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन (नेशनल समिट ऑन इनोवेशंस एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज) में नवाचार एवं सर्वोत्तम कार्य-पद्धति के रूप में सराहा गया है। जिलों में स्थित सभी 66 हेल्प डेस्क भी अब 24×7 होंगी संचालित राज्य स्तर पर स्थित आईसीसीसी पूर्व से ही 24 घंटे सातों दिवस कार्यरत था, जबकि जिला स्तरीय हेल्प डेस्क कार्यालयीन समय में संचालित होते थे। इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए मई 2026 से प्रदेश के सभी 66 जिला स्तरीय SUMAN हेल्प डेस्क को भी 24×7 संचालित किया जा रहा है। सुमन हेल्प डेस्क प्रत्येक जिले में सक्रिय प्रदेश के प्रत्येक जिले में सुमन हेल्प डेस्क स्थापित की गई है, जहाँ 2 टेली-कॉलर एवं एक सुपरवाइज़र नियुक्त हैं। हेल्प डेस्क का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को सभी निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएँ समय पर, निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण रूप से उपलब्धता सुनिश्चित करना है। लाभार्थी को स्वास्थ्य सेवाओं में देरी या असुविधा पर हेल्प डेस्क द्वारा संबंधित स्वास्थ्यकर्मी — एएनएम, सीएचओ अथवा अन्य मैदानी अमले से समन्वय स्थापित कर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाता है। शिकायतों का समयबद्ध निवारण इस प्रणाली की प्रमुख विशेषता है। आइसीसीसी से जुड़ी हाई-टेक निगरानी व्यवस्था सुमन हेल्प डेस्क व्यवस्था राज्य स्तरीय सुमन इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसी) से जुड़ी हुई है। कंट्रोल सेंटर से सेवाओं की सतत निगरानी, रिपोर्टिंग एवं समन्वय किया जा रहा है। यह कमांड सेंटर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और तकनीक-आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 104 टोल फ्री सेवा से मिल रहा व्यापक परामर्श 104 टोल फ्री नंबर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं एवं परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, शिकायत निवारण, शासकीय योजनाओं की जानकारी तथा आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) सेवाओं की जानकारी, सोनोग्राफी एवं आवश्यक जांच के लिए परामर्श, आईएफए एवं कैल्शियम अनुपूरण संबंधी मार्गदर्शन, बर्थ वेटिंग होम में भर्ती के लिए प्रेरित करना, उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) की सतत निगरानी, नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य ट्रैकिंग आदि सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। लाखों माताओं और नवजातों की नियमित मॉनिटरिंग सुमन हेल्प डेस्क से लाखों गर्भवती महिलाओं, उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली माताओं एवं नवजात शिशुओं की नियमित निगरानी की जा रही है। हेल्प डेस्क द्वारा समय-समय पर जागरूकता संदेश, स्वास्थ्य परामर्श एवं आवश्यक जानकारी भी साझा की जाती है, जिससे सुरक्षित प्रसव एवं नवजात देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।  

भोपाल में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय हॉकी श्रृंखला में करेंगे देश का प्रतिनिधित्व

भोपाल  भारत और आस्ट्रेलिया के बीच भोपाल में आयोजित होने वाली अंडर-18 हॉकी सीरीज के लिए भारतीय पुरुष एवं महिला टीमों की घोषणा कर दी गई है। इस प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय श्रृंखला के लिए मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी, भोपाल के कुल 10 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन हुआ है। खिलाड़ियों के चयन से प्रदेश में खुशी और गर्व का माहौल है। भारतीय अंडर-18 पुरुष टीम में अकादमी के गोलकीपर आयुष रजक, डिफेंडर अंश बहुत्रा और करण गौतम, मिडफील्डर अवि माणिकपुरी तथा फॉरवर्ड खिलाड़ी सिद्धार्थ बेन और गाज़ी खान को स्थान मिला है। वहीं भारतीय अंडर-18 महिला टीम में अकादमी की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों स्नेहा दावड़े, गोलकीपर महक परिहार, नम्मी गीता और नौशीन नाज़ का चयन हुआ है। इन खिलाड़ियों के चयन से अकादमी में खुशी और उत्साह का माहौल है। भोपाल में होगा भारत-ऑस्ट्रेलिया मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अंडर-18 हॉकी सीरीज का आयोजन भोपाल में किया जाएगा। यह सीरीज 15 मई से 20 मई 2026 तक खेली जाएगी, जिसमें देश और विदेश के युवा खिलाड़ी अपना कौशल दिखाएंगे। घरेलू मैदान पर खेलने का अवसर मिलने से मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का उत्साह और भी बढ़ गया है। राष्ट्रीय चयन में दिखा एमपी अकादमी का दम मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी लंबे समय से देश को प्रतिभाशाली खिलाड़ी देने का कार्य कर रही है। आधुनिक प्रशिक्षण, फिटनेस प्रबंधन और अनुभवी कोचिंग के कारण अकादमी के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय टीम में जगह बना रहे हैं। एक साथ 10 खिलाड़ियों का भारतीय टीम में चयन अकादमी की मजबूत खेल संरचना और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण का प्रमाण है। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  सारंग ने दी शुभकामनाएं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने चयनित खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि खिलाड़ियों की मेहनत, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और राज्य सरकार द्वारा विकसित खेल सुविधाओं का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगे। हॉकी में उभरती ताकत बन रहा मध्यप्रदेश लगातार राष्ट्रीय टीमों में खिलाड़ियों के चयन और उत्कृष्ट प्रदर्शन से यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश अब हॉकी के क्षेत्र में तेजी से उभरती ताकत बन रहा है। प्रदेश की खेल अकादमियों में तैयार हो रहे खिलाड़ी देश के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आ रहे हैं।  

भारत की बढ़ी परमाणु ताकत: MIRV क्षमता वाली अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण

नई दिल्ली भारत ने अपनी रक्षा क्षमता में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल) प्रणाली से लैस उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। परीक्षण 8 मई 2026 को ओडिशा के डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप (व्हीलर द्वीप) से किया गया। इस मिसाइल ने सभी निर्धारित मापदंडों को पूरा किया और हिंद महासागर क्षेत्र में विस्तृत भौगोलिक दायरे में अलग-अलग लक्ष्यों को सटीक रूप से निशाना बनाने की अपनी क्षमता साबित की। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की क्षमता रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित इस उन्नत अग्नि मिसाइल का परीक्षण स्ट्रैटजिक फोर्सेज कमांड (SFC) के सहयोग से किया गया। मिसाइल कई पेलोड्स (वारहेड्स) से लैस थी, जिन्हें स्वतंत्र रूप से विभिन्न दिशाओं और दूरी पर स्थित लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया गया। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की यह क्षमता भारत को विश्व के चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) की पंक्ति में खड़ा करती है। राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और सेना को दी बधाई रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, भारतीय सेना और संबंधित उद्योग जगत को बधाई देते हुए कहा कि इस सफल परीक्षण से बढ़ते खतरों के प्रति देश की रक्षा तैयारियों में अभूतपूर्व क्षमता जुड़ गई है। यह ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’ को और मजबूत बनाएगा। उन्होंने वैज्ञानिकों की मेहनत की सराहना की और कहा कि यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करती है। MIRV तकनीक का महत्व MIRV प्रणाली एक मिसाइल को एक साथ कई स्वतंत्र वारहेड्स ले जाने और उन्हें अलग-अलग लक्ष्यों पर मार्गदर्शन करने की क्षमता देती है। इससे दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देना आसान हो जाता है। अग्नि सीरीज की यह उन्नत संस्करण 5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक हमला कर सकती है, जो चीन के अधिकांश हिस्सों और पाकिस्तान के पूरे क्षेत्र को कवर करती है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे अग्नि-5 Mk2 या उन्नत वेरिएंट बताया जा रहा है, जिसमें हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) जैसी अतिरिक्त क्षमताएं भी शामिल हो सकती हैं। चीन-पाक की उड़ी नींद! यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब भारत की रणनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। चीन की आक्रामक नीतियां और पाकिस्तान की सैन्य आधुनिकीकरण की कोशिशें देखते हुए यह सफलता सामरिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित होगी। विश्लेषकों का मानना है कि MIRV-सक्षम अग्नि मिसाइल से भारत की न्यूक्लियर ट्रायड और मजबूत होगी तथा क्षेत्रीय स्थिरता में नया संदेश जाएगा। DRDO के वैज्ञानिकों ने टेलीमेट्री, रडार और शिप-बेस्ड स्टेशनों से प्राप्त डेटा के आधार पर पुष्टि की कि मिशन के सभी उद्देश्य पूरे हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्रालय ने भी इस उपलब्धि पर DRDO की तारीफ की। यह सफल परीक्षण ‘मिशन दिव्यास्त्र’ (2024) के बाद MIRV तकनीक को और परिपक्व बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे भारतीय सेना की मारक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी और देश की सुरक्षा ढाल और मजबूत बनेगी।

जल जीवन मिशन बना जनभागीदारी और सामाजिक परिवर्तन की मिसाल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके के मार्गदर्शन में जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव-गांव तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के प्रयासों को गति मिली है। इसी क्रम में लागू मड़िया ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत सागर जिले के राहतगढ़ विकासखंड के 131 ग्राम, जैसीनगर के 145 ग्राम, सागर ब्लॉक के 26 ग्राम तथा रायसेन जिले के बेगमगंज ब्लॉक के 15 ग्रामों सहित कुल 317 ग्रामों को शुद्ध पेयजल सुविधा से जोड़ा गया है। घर-घर नल कनेक्शन से संवरा ग्रामीणों का जीवन ग्राम खजुरिया में लगभग 147 परिवार निवास करते हैं, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से कृषि, मजदूरी और पशुपालन पर आधारित है। योजना लागू होने से पहले गांव में केवल दो नल और एक कुआं था, जो गर्मियों में सूख जाता था। पानी के लिए ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बच्चियों को एक से डेढ़ किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता था। पानी की समस्या का सीधा असर बच्चियों की पढ़ाई और महिलाओं के दैनिक जीवन पर पड़ता था। अब घर-घर नल कनेक्शन मिलने से ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिली है और गांव में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य की स्थिति में भी सुधार दिखाई दे रहा है। दिव्यांग नीरज साहू को मिला आत्मसम्मान इस योजना ने गांव के कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद भी जगाई है। ग्राम खजुरिया के निवासी नीरज साहू, जो एक हाथ से दिव्यांग हैं, आज गांव की जल आपूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। रोजगार के अवसर नहीं मिलने के बीच उन्होंने ग्राम पंचायत के समक्ष बॉलमेन के रूप में कार्य करने की इच्छा व्यक्त की। ग्राम सभा की सहमति से उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई। आज वे गांव में जल सप्लाई व्यवस्था संभालते हुए सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका चला रहे हैं। उनके लिए यह योजना केवल पेयजल सुविधा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मान का माध्यम बन गई है। जनभागीदारी बनी योजना की सबसे बड़ी ताकत योजना में सामुदायिक सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। सहयोगी संस्था आई.एस.ए. मध्य सेवा एसोसिएशन, भोपाल द्वारा जनसभाओं, ग्रामसभाओं, नुक्कड़ नाटकों और स्कूल रैलियों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया गया। गांवों में ग्राम जल एवं स्वच्छता तदर्थ समितियों का गठन कर स्थानीय समुदाय को जल प्रबंधन से जोड़ा गया। इससे ग्रामीणों में योजना के प्रति स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। महिलाओं की भागीदारी से मजबूत हुआ ग्रामीण मॉडल ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्गों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे गांवों में सहभागी विकास और सामाजिक समावेशन का प्रभावी मॉडल विकसित हो रहा है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने योजना के संचालन और रखरखाव को अधिक प्रभावी बनाया है। हर घर नल से जल पहुंचने से सुधरा जीवन स्तर आज खजुरिया गांव में टोंटी से शुद्ध पेयजल की उपलब्धता केवल सुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में आए व्यापक बदलाव का प्रतीक बन चुकी है। स्वच्छ पेयजल मिलने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आई है, महिलाओं के श्रम और समय की बचत हुई है तथा बच्चों को बेहतर वातावरण मिल रहा है। जल जीवन मिशन ने यह सिद्ध किया है कि जब योजनाएं संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण और जनसहभागिता के साथ लागू होती हैं, तब उनका प्रभाव सीधे लोगों के जीवन में दिखाई देता है। जल है तो कल है” का साकार होता संदेश सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहा यह परिवर्तन प्रदेश में विकसित हो रहे उत्तरदायी और सहभागी ग्रामीण मॉडल की तस्वीर प्रस्तुत करता है। मड़िया ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना अब अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन रही है। खजुरिया में 'जल है तो कल है' का संदेश अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि बदलती जिंदगी का वास्तविक अनुभव बन चुका है।  

‘झारभूमि लाइवस्टॉक’ के गठन से ग्रामीण आजीविका और पशुपालन को मिलेगी नई ताकत

 पिपरवार सीसीएल के पिपरवार सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और कृषि आधारित आजीविका को संगठित स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 300 किसानों और महिला पशुपालकों की नई उत्पादक कंपनी “झारभूमि लाइवस्टॉक फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड” का विधिवत गठन कर लिया गया है। कंपनी का पंजीकरण शुक्रवार को पूरा होने के साथ ही क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों में उत्साह का माहौल है। कंपनी गठन से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम किसानों, दुग्ध उत्पादकों तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है, ताकि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, चारा प्रबंधन और कृषि उत्पादों के विपणन को संगठित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। बताया गया कि कंपनी के गठन से किसानों को बाजार तक सीधी पहुंच, उचित मूल्य, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ एकीकृत रूप से मिल सकेगा। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और स्वरोजगार को मजबूती देने पर भी कंपनी का फोकस रहेगा। कंपनी के गठन के साथ ही उसका निगमित प्रमाण पत्र, स्थायी खाता संख्या और कर कटौती खाता संख्या भी जारी कर दी गई है। संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने सभी सदस्य किसानों और महिला पशुपालकों को नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और पशुपालन आधारित रोजगार को मजबूती प्राप्त होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की सामूहिक भागीदारी से बनी इस कंपनी को आत्मनिर्भर कृषि और पशुपालन मॉडल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

शहजाद भट्टी नेटवर्क का भंडाफोड़, टारगेट किलिंग और पीओके ट्रेनिंग का लालच

लखनऊ यूपी से पकड़े गए आईएसआई और पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के लिए काम करने वाले कृष्णा मिश्रा और दानियाल अशरफ को आईएसआईएस कैंप में ट्रेनिंग कराने और पीओके में कमांडर बनाने का लालच दिया गया था। इन्हें पुलिसकर्मियों और सेना के जवानों की टारगेट किलिंग के बाद वीडियो बनाकर शहजाद भट्टी को भेजनी थी, जिसके बाद इन्हें दुबई बुलाने का वादा किया गया था, साथ ही बड़ी रकम भी देनी थी। इसलिए ही दोनों ने भिवंडी थाना और यूपी के कुछ थानों की रेकी की थी। गजरौला में एक दरोगा की हत्या की कोशिश भी की थी, लेकिन ऐन मौके पर गोली नहीं चली। इससे पूर्व शहजाद भट्टी के माड्यूल से जुड़े 25 से ज्यादा लोगों को एसटीएफ वेसटयूपी से गिरफ्तार कर चुकी है। यूपी एटीएस और खुफिया एजेंसियों समेत स्पेशल सेल ने 5 मई को बाराबंकी के संदिग्ध आतंकी दानियाल अशरफ और कुशीनगर के कृष्णा मिश्रा को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों को शहजाद भट्टी ने हीं स्लीपर मॉड्यूल की तरह अपने नेटवर्क में शामिल किया था और देश में पुलिस और सेना के जवानों की टारगेट किलिंग का काम दिया था। दोनों को लालच दिया था कि जैसे ही काम पूरा होगा, इन्हें तुरंत दुबई भेजा जाएगा। वहां से आईएसआईएस के ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षित कराने के बाद पीओके यानी पाक अधिकृत कश्मीर में कमांडर बनाया जाएगा। बेशुमार पैसा देने का भी वादा किया गया था। इन आतंकी ट्रेनिंग कैंप की वीडियो भी कृष्णा और दानियाल को दिखाई गई थी। मॉड्यूल से जुड़े 25 लोग वेस्ट यूपी से हो चुके गिरफ्तार इसी नेटवर्क से जुड़े अजीम राणा को हापुड़ और मेरठ से आजाद अली को पकड़ा गया था। वहीं, कुछ दिन पहले ही एटीएस ने साकिब, अरबाब, लोकेश पंडित और विकास को एटीएस ने दबोचा था। इसके अलावा 23 अप्रैल को ही तुषार उर्फ हिजबुल्लाह और समीर की धरपकड़ हुई थी। इस नेटवर्क को खंगालने के दौरान एटीएस को कृष्णा मिश्रा और दानियाल अशरफ की सूचना मिली थी। इस माड्यूल से जुड़ा बिजनौर का संदिग्ध आतंकी आकिब दुबई में है उसका लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है। एटीएस अफसरों की मानें तो कृष्णा मिश्रा और दानियाल ने गजरौला में एक दरोगा को टारगेट किया था। फ्लाईओवर के नीचे दरोगा की हत्या का प्रयास किया गया था। शुक्र रहा कि इस दौरान गोली नहीं चल। चल पाई। आरोपियों की गोली हथियार में फंस गई थी, इसलिए टारगेट मिस हो गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को 1189 करोड़ रूपये के विकास कार्यों का करेंगे भूमि-पूजन एवं लोकार्पण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को गुना जिले को विकास की बड़ी सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिले में औद्योगिक विकास, अधोसंरचनात्मक सुदृढ़ीकरण एवं रोजगार सृजन को नई गति देने के उद्देश्य से विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 1059 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने वाली अंबुजा सीमेंट फैक्ट्री का शिलान्यास करेंगे। साथ ही लगभग 130 करोड़ रुपये की लागत के 144 विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण करेंगे। इन विकास कार्यों से जिले में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा तथा आमजन को बेहतर सेवाओं का लाभ मिलेगा। जिले में मिलेगें रोजगार के अवसर अंबुजा कांक्रीट नार्थ प्रा.लि. (अडानी ग्रुप) द्वारा मावन में 32 हैक्टेयर भूमि पर स्थापित की जाने वाली यह सीमेंट प्रोजेक्ट जिले के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। परियोजना की उत्पादन क्षमता 2×2 मिलियन टन प्रतिवर्ष होगी। यह यूनिट गुना शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूरी पर स्थापित की जा रही है। सीमेंट प्रोजेक्ट के प्रारंभ होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। लगभग 500 लोगों को प्रत्यक्ष एवं 1000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। साथ ही शासन को प्रतिवर्ष लगभग 160 करोड़ रुपये के जीएसटी राजस्व की प्राप्ति होने की संभावना है। क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा प्रस्तावित परियोजना से न केवल औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि परिवहन, व्यापार, सेवा एवं अन्य सहायक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे गुना जिले की आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी तथा क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में केंद्रीय संचार मंत्री एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया, मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री एवं गुना जिले के प्रभारी मंत्री  गोविन्‍द सिंह राजपूत सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहेंगे।  

महिला सुरक्षा पर बड़ा कदम, अब कैब-बाइक टैक्सी ड्राइवरों का होगा ऑनलाइन पंजीकरण और वेरिफिकेशन

 लखनऊ  प्रदेशभर में एप से चलने वाले वाहनों की जल्द ही निगरानी शुरू होगी। ओला, उबर, रैपिडो, बाइक टैक्सी व डिलीवरी वाहनों को भी ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। इससे वाहन चलाने वाले ड्राइवरों का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन व फिटनेस टेस्ट आदि कराया जाएगा। यात्रियों खासकर महिलाओं की सुरक्षा में यह कदम अहम साबित होगा। परिवहन विभाग को मिले सुझाव व आपत्तियों का जवाब परिवहन विभाग ने शासन को भेज दिया है। अब इस माह के अंत या अगले महीने नई नियमावली लागू होगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 93 में एक जुलाई 2025 को संशोधन किया था। केंद्र सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश ने अपनाया है। पहले ओला-उबर आदि पर कोई नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण कराना पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 10 मार्च को ही कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक व वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली 2026 पर मुहर लगाई थी। पांच अप्रैल तक नई नीति के संबंध में सुझाव व आपत्तियां मांगी गई थी। परिवहन विभाग को करीब डेढ़ दर्जन से अधिक आपत्तियां व सुझाव मिले थे। सुझाव मिला था कि एप आधारित वाहनों के लिए जगह-जगह हाल्ट बनाए जाएं, ताकि वहां पर ड्राइवरों के विश्राम करने की व्यवस्था हो। ड्राइवरों पर उम्र की शर्त न हो बल्कि वे जब तक फिट रहे वाहन चला सकें। राज्य परिवहन प्राधिकरण के सचिव सगीर अंसारी ने बताया कि परिवहन विभाग ने पॉलिसी से संबंधित ब्योरा शासन को भेज दिया है। शासन ही इस पर अंतिम निर्णय लेकर नई नियमावली लागू करेगा। वाहनों का पंजीकरण कराने की ऑनलाइन आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी, वहीं 50 से 100 या इससे अधिक वाहन चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। नवीनीकरण हर पांच साल में होता रहेगा, इसकी फीस पांच हजार रुपये होगी। इसके लिए परिवहन विभाग एप भी बनाएगा। अब 12 साल पुराने वाहनों का पंजीकरण हो सकेगा, पहले वाहन की आयु आठ वर्ष रखने पर मंथन हुआ था लेकिन, वाहन स्वामियों ने यह कहकर विरोध किया था कि सात वर्ष तक वे बैंक का ऋण ही चुकाते रहते हैं। महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी वाहनों में पैनिक बटन लगे होंगे और वीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस से उन्हें जोड़ा जाएगा। वाहन बुक कराते ही ड्राइवर की पूरी जानकारी मोबाइल पर दिखेगी। यात्रियों व ड्राइवरों का होगा बीमा ओला-उबर या अन्य वाहनों के ड्राइवरों व यात्रियों का पांच-पांच लाख लाख रुपये का बीमा होगा। ड्राइवर का पांच लाख रुपये का हेल्थ व टर्म बीमा 10 लाख रुपये का होगा। शिकायतों की सुनवाई के लिए 24 घंटे ग्रीवांस सेल सक्रिय रहेगी। हर वाहन की रेटिंग होगी, यह रेटिंग यात्रियों के हाथ में रहेगी। उसी के आधार पर ड्राइवरों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।