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जैक इंटरमीडिएट परीक्षा में पलामू का सुधार, कॉमर्स में सबसे बेहतर रिजल्ट

 पलामू झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा-2026 का परिणाम बुधवार को जारी कर दिया गया। इस बार पलामू जिले के छात्र-छात्राओं ने विज्ञान, कला और वाणिज्य तीनों संकायों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्ज कराया है। जिले में विज्ञान संकाय का रिजल्ट 90.16 प्रतिशत, कला संकाय का 94.54 प्रतिशत और वाणिज्य संकाय का 95.99 प्रतिशत रहा। सर्वाधिक सफलता कॉमर्स संकाय में मिली है। राज्य स्तरीय रैंकिंग में भी पलामू ने सुधार किया है। आर्ट्स में पिछले वर्ष जहां पलामू का स्थान 24वां था, वहीं इस वर्ष 18वां स्थान प्राप्त हुआ है। कॉमर्स में जिला 13वें से 10वें स्थान पर पहुंच गया है। हालांकि साइंस में पलामू एक पायदान नीचे खिसककर तीसरे से चौथे स्थान पर आ गया है। जैक इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के परिणाम ने यह साबित किया है कि जिले की शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है। तीनों संकायों में विद्यार्थियों के प्रदर्शन ने पलामू की शैक्षणिक स्थिति को मजबूती दी है। साइंस में 4.37 प्रतिशत बढ़ा रिजल्ट इस वर्ष विज्ञान संकाय में जिले के 17,926 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें 16,163 विद्यार्थी सफल घोषित किए गए। कुल 13,476 परीक्षार्थी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए, जिनमें 7,569 छात्र और 5,907 छात्राएं शामिल हैं। वहीं 2,683 विद्यार्थियों ने द्वितीय श्रेणी प्राप्त की, जिनमें 1,654 छात्र और 1,029 छात्राएं हैं। चार छात्राएं तृतीय श्रेणी से पास हुई हैं। विज्ञान संकाय में 1,756 विद्यार्थी असफल घोषित किए गए। पिछले वर्ष जिले का साइंस रिजल्ट 85.79 प्रतिशत था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 90.16 प्रतिशत पहुंच गया। यानी पिछले साल की तुलना में 4.37 प्रतिशत अधिक विद्यार्थी सफल हुए हैं।बाक्स : आर्ट्स में 5.98 प्रतिशत अधिक सफलता आर्ट्स संकाय में इस वर्ष 10,646 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें 10,065 विद्यार्थी सफल रहे। जिले का रिजल्ट 94.54 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष के 88.56 प्रतिशत से 5.98 प्रतिशत अधिक है। आर्ट्स में 4,141 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की, जिनमें 1,341 छात्र और 2,800 छात्राएं शामिल हैं। वहीं 5,589 विद्यार्थी द्वितीय श्रेणी से पास हुए, जिनमें 2,118 छात्र और 3,471 छात्राएं हैं। तृतीय श्रेणी में 335 विद्यार्थी सफल हुए, जिनमें 187 छात्र और 148 छात्राएं शामिल हैं। 571 विद्यार्थी असफल घोषित किए गए। कॉमर्स में सबसे बेहतर प्रदर्शन कॉमर्स संकाय में इस वर्ष 549 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें 527 विद्यार्थी सफल हुए, जबकि 22 परीक्षार्थी असफल रहे। जिले का रिजल्ट 95.99 प्रतिशत रहा, जो तीनों संकायों में सबसे बेहतर है। कॉमर्स में 411 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी हासिल की। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कॉमर्स में 3.32 प्रतिशत अधिक विद्यार्थी सफल हुए हैं। राज्य स्तरीय रैंकिंग में भी पलामू ने सुधार करते हुए 13वें स्थान से 10वें स्थान पर जगह बनाई है।

पटना से मुजफ्फरपुर तक बनेंगे आधुनिक टाउनशिप, अलग-अलग थीम पर होगा विकास

पटना बिहार में शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए 11 सेटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रत्येक सेटेलाइट टाउनशिप का विकास एक खास थीम पर किया जाना है। थीम का चयन स्थानीय विशेषता और जरूरत के अनुसार किया जाएगा। नगर विकास विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। विभाग ने 11 सेटेलाइट टाउनशिप क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है। मास्टर प्लान बनने तक यह रोक जारी रहेगी। सड़क, पार्क, स्कूल, मैदान या अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए जमीन चिह्नित करने के बाद रोक हटा दी जाएगी। टाउनशिप को कोर और विशेष क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। कोर क्षेत्र का विकास सबसे पहले किया जाना है। इसी क्षेत्र के मास्टर प्लान में थीम का चयन किया जाएगा। हालांकि, किस टाउनशिप को किस थीम पर विकसित किया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय होना बाकी है। बावजूद नगर विकास विभाग के विशेषज्ञों ने इसकी रूपरेखा बना ली है। उदाहरण के लिए राजधानी पटना के पास बन रही पाटलिपुत्र टाउनशिप को एजुकेशन-स्पोर्ट्स सिटी और लॉजिस्टिक हब के रूप में पहचान दी जाएगी। इसी तरह गयाजी के पास बन रही मगध टाउनशिप को बोधगया और गयाजी के सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटकीय महत्व की पहचान दी जाएगी। मुजफ्फरपुर के पास बन रही तिरहुत टाउनशिप को औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा सोनपुर के पास विकसित हो रहे हरिहरनाथपुरम को एयरोसिटी की तर्ज पर विकसित किया जाना है। थीम की जरूरत के हिसाब से यहां बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। जरूरत की बुनियादी सुविधाएं विकसित होंगी इसी तरह अन्य सेटेलाइट टाउनशिप के थीम की योजना बनाई जा रही है। बिहार शहरी आयोजना स्कीम नियमावली 2026 के अनुसार टाउनशिप की योजना थीम के आधार पर बनेगी। इसमें सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक सुविधाओं के लिए प्लॉट, अवसंरचना, उद्यान, खुले क्षेत्र, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आवास आदि की भी सुविधा होगी। सेटेलाइट टाउनशिप की स्थानीय खासियत ● पाटलिपुत्र (पटना) : लॉजिस्टिक्स हब, एजुकेशनल-स्पोर्ट्स सिटी। ● हरिहरनाथपुरम (सोनपुर): पौराणिक महत्व, एरोसिटी। ● मगध (गया): पर्यटन और धार्मिक – सांस्कृतिक महत्व। ● मिथिला (दरभंगा): मेडिकल हब, सांस्कृतिक विरासत। ● तिरहुत (मुजफ्फरपुर): औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र। ● सीतापुरम (सीतामढ़ी): धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन। ● कोसी(सहरसा): व्यावसायिक केंद्र। ● पूर्णिया (पूर्णिया): मेडिकल हब, आर्थिक गतिविधियों का केंद्र। ● अंग (मुंगेर): विरासत और वाणिज्यिक केंद्र। ● विक्रमशिला (भागलपुर): शिक्षा और सांस्कृतिक केंद्र। ● सारण (छपरा): आवासीय और औद्योगिक केंद्र।

18-40 उम्र के लोग बन सकते हैं सिविल डिफेंस रक्षक, सेना के साथ करेंगे काम

 चंडीगढ़ ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के अवसर पर चंडीगढ़ प्रशासन ने सिविल डिफेंस वाॅलंटियर्स (सीडीवी) के दूसरे बैच के नामांकन अभियान की घोषणा की है। प्रशासन का कहना है कि यह पहल शहर में आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम है। प्रशासन के अनुसार वर्ष 2025 में सिविल डिफेंस वाॅलंटियर्स का पहला बैच गठित किया गया था, जिसमें 419 स्वयंसेवकों को शामिल किया गया। इन वालंटियर्स को महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (एमजीएसआइपीए) में सात दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के दौरान प्रेक्टिकल सेशन, फिजिकल फिटनेस टेस्ट, लिखित परीक्षा और माक ड्रिल करवाई गई थीं। इस प्रशिक्षण में फायर विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड के विशेषज्ञों ने भाग लिया। वालंटियर्स को आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार, रेस्क्यू आपरेशन, निकासी प्रक्रिया, ट्रैफिक प्रबंधन, संकट के समय संचार व्यवस्था और बेसिक फायर फाइटिंग का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी वालंटियर्स को सिविल डिफेंस की यूनिफार्म और बेरेट भी प्रदान की गई। प्रशासन ने बताया कि सिविल डिफेंस की संरचना में चीफ वार्डन, डिप्टी चीफ वार्डन, डिविजनल वार्डन, डिप्टी डिविजनल वार्डन, पोस्ट वार्डन और सेक्टर वार्डन जैसे पद शामिल हैं। प्रशासन ने नामांकन के लिए सेक्टर-38 स्थित महिला भवन में विशेष कैंप आयोजित करने का फैसला लिया है। इच्छुक नागरिक 8 मई को दोपहर 12 बजे से वहां जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि वह अधिक से अधिक संख्या में इस मुहिम का हिस्सा बनें। भर्ती के लिए जरूरी शर्तें -आवेदक का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। -18 से 40 वर्ष के बीच के युवा आवेदन कर सकते हैं। -शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह फिट होना जरूरी है। -आवेदक का कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए। इन पदों पर भी होंगे नामांकन सिविल डिफेंस के तहत न केवल वॉलंटियर्स, बल्कि विभिन्न संगठनात्मक पदों के लिए भी आवेदन मांगे गए हैं, जिनमें चीफ वार्डन और डिप्टी चीफ डिविजनल वार्डन, डिप्टी डिविजनल वार्डन,पोस्ट वार्डन और सेक्टर वार्डन शामिल हैं। पहले बैच में 419 हुए तैयार वर्ष 2025 में प्रशासन ने पहले बैच का गठन किया था, जिसमें 419 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया गया। इन्हें एमजीएसआईपीए (MGSIPA) में 7 दिनों की ट्रेनिंग दी गई थी। इस ट्रेनिंग में आर्मी की वेस्टर्न कमांड, एनडीआरएफ, फायर और स्वास्थ्य विभाग के वॉलंटियर्स को आपदा से लड़ने के गुर सिखाए थे। सेक्टर-38 महिला भवन में होगा कार्यक्रम दूसरे बैच के लिए नामांकन अभियान 8 मई को दोपहर 12 बजे से महिला भवन, सेक्टर-38 सी, चंडीगढ़ में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान आपदा प्रबंधन और सिविल डिफेंस की उपलब्धियों पर आधारित काफी टेबल बुक भी जारी की जाएगी और नए वाॅलंटियर्स का औपचारिक नामांकन किया जाएगा। यह योग्यता प्रशासन के अनुसार आवेदन करने वाले व्यक्ति का भारतीय नागरिक होना, आयु 18 वर्ष से अधिक होना, शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होना जरूरी है। साथ ही आवेदकों को निर्धारित प्रशिक्षण लेने के लिए तैयार रहना होगा। प्रशासन ने शहरवासियों से इस पहल में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि इससे सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और आपदा के समय एक सक्षम एवं जागरूक समाज तैयार किया जा सकेगा।

अबूझमाड़ में डिजिटल सूर्योदय: ताहकाडोंड में पहली बार गूंजी मोबाइल की घंटी

अबूझमाड़ में डिजिटल सूर्योदय: ताहकाडोंड में पहली बार गूंजी मोबाइल की घंटी ​रायपुर      छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का वह हिस्सा, जिसे कभी 'अबूझ' (अनजान) कहा जाता था, अब डिजिटल संकेतों से जुड़कर अपनी नई पहचान लिख रहा है। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत सुदूर वनांचल ग्राम ताहकाडोंड में मोबाइल टावर की स्थापना ने सदियों के संचार सन्नाटे को तोड़ दिया है। अब यहाँ के ग्रामीण अपनों से बात करने के लिए पहाड़ियों की ऊंचाइयों पर नहीं चढ़ते, बल्कि घर बैठे दुनिया से जुड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में संचार क्रांति का यह अध्याय वास्तव में सराहनीय है। 'नो सिग्नल' से सीधे 'कनेक्टिविटी' तक का यह सफर केवल तकनीक का नहीं, बल्कि विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का है। ​पहाड़ियों की चढ़ाई से मिली मुक्ति      ​ग्राम पंचायत मेटानार के आश्रित ग्राम ताहकाडोंड और उसके आसपास के क्षेत्र लंबे समय से 'नो नेटवर्क ज़ोन' में थे। ग्रामीणों के लिए एक फोन कॉल करना किसी चुनौती से कम नहीं था; उन्हें सिग्नल खोजने के लिए ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता था या कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक आना पड़ता था। टावर की स्थापना के साथ ही अब ताहकाडोंड, कदेर और ब्रेहबेड़ा जैसे गांवों के लगभग 400 ग्रामीण सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं। ​विकास की नई जीवनरेखा: आपातकालीन और प्रशासनिक सेवाएँ      ​कनेक्टिविटी का यह विस्तार केवल बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन रक्षक भी सिद्ध हो रहा है। ​अब आपात स्थिति में ग्रामीण तुरंत 108 एंबुलेंस को कॉल कर सकते हैं। त्वरित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध होने और समय पर इलाज मिलने से मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी और गंभीर बीमारियों के प्रबंधन में मदद मिलेगी। ​इंटरनेट के माध्यम से ग्रामीण अब ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन घर बैठे कर पा रहे हैं। यह डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम का संकेत है। ​पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस के साथ शासन की योजनाओं की जानकारी अब सीधे हितग्राहियों तक पहुँच रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है और कार्यों में तेजी आई है। ​     ​बदलती सामाजिक-आर्थिक तस्वीर       अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल टावर की स्थापना शासन की सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल संचार सुविधा है, बल्कि विकास का एक सशक्त माध्यम है।     ​ताहकाडोंड के ग्रामीणों ने इस पहल पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे एक नए युग की शुरुआत बताया है। मोबाइल नेटवर्क आने से न केवल शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों के बाजार और युवाओं के लिए सूचना के नए द्वार भी खुलेंगे। शासन का यह प्रयास सिद्ध करता है कि भौगोलिक बाधाएं अब विकास के आड़े नहीं आएंगी।

यमुना एक्सप्रेसवे के पास पुलिस मुठभेड़ में 50-50 हजार के इनामी अपराधी मारे गए

 मथुरा उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में पुलिस ने कारोबारी के घर डकैती डालने वाले बावरिया गिरोह के दो इनामी बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया। दोनों अपराधियों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वे 23 अप्रैल को एक कारोबारी के घर परिवार को बंधक बनाकर की गई सनसनीखेज डकैती में शामिल थे। गुरुवार सुबह यमुना एक्सप्रेसवे के पास हुई इस मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार दोनों बदमाश कई राज्यों में वांछित थे और उन पर डकैती, हत्या के प्रयास, चोरी और छिनैती जैसे कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे। कारोबारी परिवार को बंधक बनाकर की थी लूट जानकारी के अनुसार, 23 अप्रैल की रात बावरिया गिरोह के बदमाश कारोबारी अजय अग्रवाल के घर छत के रास्ते घुसे थे। बदमाशों ने अजय अग्रवाल, उनके पिता, पत्नी और छह साल की बच्ची को रस्सियों से बांध दिया था। इसके बाद गन प्वाइंट पर लॉकर की चाबी लेकर करीब ढाई घंटे तक घर में खुलकर लूटपाट की गई। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी। वारदात के बाद पुलिस ने डकैतों की तलाश तेज कर दी थी। 17 टीमों को लगाया गया था तलाश में डकैती की वारदात के बाद एसएसपी श्लोक कुमार ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 17 अलग-अलग टीमों का गठन किया था। पुलिस लगातार गिरोह की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। गुरुवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि डकैती में शामिल दो बदमाश यमुना एक्सप्रेसवे के पास मौजूद हैं। सूचना मिलते ही पुलिस और स्वाट टीम ने इलाके की घेराबंदी कर दी। भागने की कोशिश में बाइक गिरी सुबह करीब 7 बजे दो संदिग्ध बाइक पर आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया, लेकिन दोनों ने यूटर्न लेकर भागने की कोशिश की। इसी दौरान उनकी बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई। पुलिस के मुताबिक पकड़े जाने के डर से दोनों बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें दोनों बदमाश घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। एनकाउंटर में दो पुलिसकर्मी भी घायल इस मुठभेड़ में स्वाट टीम प्रभारी अजय वर्मा और हेड कांस्टेबल दुर्ग विजय भी घायल हुए हैं। दोनों को गोली लगी है और उनका इलाज चल रहा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों की हालत खतरे से बाहर है। कई राज्यों में दर्ज थे गंभीर मुकदमे मारे गए बदमाशों की पहचान धर्मवीर उर्फ लंबू (35) और राजेंद्र उर्फ पप्पू (55) के रूप में हुई है। दोनों राजस्थान के अलवर जिले के रहने वाले थे और बाबरिया गिरोह से जुड़े बताए जा रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने बताया कि बदमाश धर्मवीर पर मथुरा के अलावा हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में डकैती, हत्या के प्रयास, चोरी और छिनैती समेत 16 मुकदमे दर्ज थे। वहीं राजेंद्र उर्फ पप्पू पर मथुरा, मेरठ, फिरोजाबाद, हरियाणा और दिल्ली में डकैती समेत 11 मुकदमे दर्ज थे। साथ ही पप्पू और धर्मवीर पर 50-50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिले के दूरदराज कोरवा इलाकों में 113 हैंडपंप और बोरवेल खुदाई के लिए तैयार

मुख्यमंत्री के निर्देश के तहत जिले के सुदूर व पहाड़ी कोरवा बसाहटों  में 113 हैंडपंप व बोरवेल की होगी खुदाई कलेक्टर ने सम्बंधित विभाग से कहा एक माह के भीतर पूर्ण करें कार्य,   ग्रामीणों को  पेयजल से मिलेगी राहत जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम अम्बिकापुर  जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब इन क्षेत्रों में कुल 113 हैंडपंप एवं बोरवेल की खुदाई की जाएगी, जिससे ग्रामीणों को पारंपरिक स्रोतों से पानी लाने की मजबूरी से राहत मिलेगी। विगत दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले में पेयजल समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं होना पड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि शासन की योजनाओं खासकर बुनियादी जरूरतों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना यह सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में सरगुजा कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास अध्यक्ष अजीत वसंत ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को एक माह के भीतर सभी 113 हैंडपंप एवं बोरवेल कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने बताया कि स्थलीय सर्वे  पहले ही कर लिया गया है जिले के लुण्ड्रा में 34, बतौली में 06, लखनपुर में 22, अम्बिकापुर में 11, सीतापुर में 16, मैनपाट में 20 तथा उदयपुर में 04 इस तरह इन विकासखण्डों  में डीएमएफ मद से 113 हैंडपंप एवं बोरवेल खनन की जाएगी। 24 अप्रैल को आयोजित जिला खनिज संस्थान न्यास की शासी परिषद की बैठक में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल,  लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, सहित अन्य सदस्यों की सहमति से यह कार्य की स्वीकृति दी गई है।   कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायत सीईओ को निर्देशित किया है कि  हैंडपंप खनन, बोरवेल खनन कर  दीर्घकालिक समाधान के लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित  करने के निर्देश दिए हैं तथा सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से एक माह में पूर्ण किए जाएं, ताकि सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में स्थायी पेयजल सुविधा सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री साय के इस संवेदनशील पहल से जिले के दूरस्थ व वनांचल क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही पेयजल की समस्या से सैकड़ो गांवों के हजारों निवासियों को निश्चित ही राहत मिलेगी।

किसानों और पशुपालकों के लिए योगी सरकार की पहल: हरे चारे के बीज और नेपियर घास रूट स्लिप का वितरण

योगी सरकार ने नेपियर घास रूट स्लिप समेत हरे चारे के बीजों का किसानों-पशुपालकों को किया वितरण प्रदेश सरकार का पशुओं को साल भर हरा चारा उपलब्ध कराने का लक्ष्य: मुकेश मेश्राम हरे चारे की अच्छी पैदावार के लिए पशुपालकों-किसानों को दी जाएगी ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश में हरा चारा बढ़ाने की तैयारी में जुटा पशुपालन विभाग लखनऊ  उत्तर प्रदेश में किसानों, पशुपालकों और चारागाहों में हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पशुधन विभाग तेजी से प्रयास कर रहा है। इसके लिए नेपियर घास रूट स्लिप, बरसीम और ज्वार चारा बीज किसानों और पशुपालकों को वितरित किया जा रहा है। पशुधन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य विभाग अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि प्रदेश की योगी सरकार का लक्ष्य है कि पशुओं के लिए साल भर पोषक और सस्ता हरा चारा उपलब्ध कराया जाए, जिससे किसानों की लागत कम हो और दूध उत्पादन में वृद्धि हो। अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि इस साल हजारों हेक्टेयर में हरा चारा उगाने के लिए प्रदेश के 75 जिलों में काम शुरू हो चुका है। इसी क्रम में करोड़ों रुपये विभाग खर्च कर रहा है। सबसे ज्यादा फोकस प्रदेश में नेपियर घास की पैदावार बढ़ाने पर किया जा रहा, जिसकी कटाई साल भर में 6 बार तक की जा सकती है। साथ ही हरा चारा उगाने के लिए हर जिले में दो मास्टर ट्रेनर भी तैयार किए जा रहे हैं, जो कि जिलों में किसानों और पशुपालकों को हरा चारा उगाने की ट्रेनिंग भी देंगे। हरे चारे के लिए विभाग ने वितरित किए बीज प्रक्षेत्र एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील कुमार राय ने बताया कि अतिरिक्त चारा विकास कार्यक्रम के तहत किसानों, पशुपालकों को बरसीम और ज्वार चारा बीज का वितरण किया गया है, जिससे 4,156 हेक्टेयर में हरे चारे की पैदावार होगी। इस पर 2 करोड़ रुपये विभाग ने खर्च किए हैं। वहीं नेपियर घास की पैदावार इस साल 230 हेक्टेयर में कराने का लक्ष्य है, जिसके तहत 60 लाख नेपियर रूट स्लिप का वितरण 75 जिलों में किया जा चुका है। इस पर विभाग ने 64 लाख रुपये खर्च किए हैं। वहीं किसानों को प्रोत्साहन के लिए 4 हजार रुपये भी दिए गए। गो आश्रय स्थल से संबंद्ध एवं अन्य गोचर चारागाह की भूमि पर हरा चारा उत्पादन की योजना के तहत 2,815 हेक्टेयर में हरा चारा उगाने के लिए ज्वार, मक्का व बाजरा के बीज वितरित किए गए हैं। इस पर विभाग ने 6.5 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। किसानों को दिलाई जा रही ट्रेनिंग अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि हमारा लक्ष्य सिर्फ बीज वितरण तक ही सीमित नहीं है। इनकी पैदावार अच्छी हो, उस पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इस क्रम में हर जिले से दो अधिकारियों (एक कृषि विभाग से, दूसरा पशुपालन विभाग से) को भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान झांसी में ट्रेनिंग दिलाई जा रही है। यही मास्टर ट्रेनर के रूप में विकास खंडों पर पशुपालकों को सही तरीके से चारा उगाने की ट्रेनिंग देंगे। इसके अलावा हर जिले से 15-15 किसानों और पशुपालकों को चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए तकीनीकी संस्थाओं एवं विभागीय प्रक्षेत्रों में एक्सपोजर विजिट कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि पशुपालकों से लेकर, प्रदेशभर की गोशालाओं में हरे चारे की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। इसका परिणाम इसी वर्ष से दिखने भी शुरू हो जाएंगे।

CM का संदेश: पंजाब में हो रही घटनाओं से सतर्क रहें, फिरकू पार्टियों से दूरी बनाएं

जालंधर  जालंधर सेंट्रल से शुकराना यात्रा शुरू करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा बेअदबी मामले में अगर कोई मानसिक रोगी होता है तो उसके परिजनों पर मामला दर्ज किया जाएगा, उन्होंने कहा ऐसा नहीं है कि घर से किसी रोगी को सीखा कर बेअदबी के लिए बाहर भेज दो और खुद इसे दूर हो ऐसे मामलों में परिजनों पर मामला दर्ज होगा बेअदबी कानून बनने के बाद बुधवार को श्री आनंदपुर साहिब से शुकराना यात्रा शुरू कर भगवंत मान रात को जालंधर पहुंचे। वीरवार की सुबह आठ बजे वे जालंधर सेंट्रल हलके के वरिंदर सिंह घुम्मण पार्क में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे, जिसके बाद वे आदमपुर में नुक्कड़ सभा में हिस्सा लेंगे। उसके बाद वे अपनी शुकराना यात्रा के अगले पड़ाव के तहत अमृतसर के रास्ते बठिंडा जिले के तलवंडी साबो स्थित तख्त श्री दमदमा साहिब के लिए रवाना होंगे। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को खालसा पंथ की जन्मस्थली श्री आनंदपुर साहिब से राज्यव्यापी शुकराना यात्रा की शुरुआत की थी। मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और आनंदपुर साहिब लोकसभा क्षेत्र से सांसद मलविंदर सिंह कंग भी मौजूद रहे। यात्रा शुरू करने से पहले मुख्यमंत्री ने तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेककर आशीर्वाद लिया था। यह यात्रा पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए “जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कानून संशोधन 2026” के लागू होने के बाद निकाली जा रही है। सरकार का कहना है कि इस नए कानून का उद्देश्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की बेअदबी रोकना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इसी को लेकर सरकार ने इसे श्रद्धा और धन्यवाद से जुड़ी “शुकराना यात्रा” का नाम दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब मानसिक रोगी होने का बहाना नहीं चलेगा और ऐसे मामलों में दोषियों के संरक्षकों पर भी कार्रवाई होगी। उन्होंने नशे के खिलाफ कड़े रुख और पंजाब की अटूट भाईचारक सांझ पर जोर देते हुए विरोधियों द्वारा नफरत फैलाने की कोशिशों की निंदा की और वादा किया कि वे एक परिवार के मुखिया की तरह पंजाब के निवासी के हितों की रक्षा करेंगे। सीएम ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी पूरी मानवता के भले की बात करते हैं। वो एक समुदाय के नहीं बल्कि दुनिया के गुरु हैं। उनकी बेअदबी हो और बंदे जो बच कर निकल जाएं यह दिलों को बहुत ठेस पहुंचाता था। मैं अक्सर कहता हूं कि पंजाब की धरती बहुत उपजाऊ है। यहां हर किस्म का बीज उग पड़ता है, लेकिन नफरत का बीज यहां कभी नहीं उगता। पंजाब में बलास्ट बीजेपी की एंट्री के संकेत इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि फिरकू पार्टियों से बचना चाहिए। बीजेपी और अकाली दल वाले लड़ाते हैं लोगों को आपस में। ये धर्म के नाम पर लड़ा कर वोटें लेते हैं। ये जो कल-परसों जालंधर-अमृतसर में छोटे-मोटे ब्लास्ट हुए हैं, ये बीजेपी की एंट्री के संकेत हैं। कहते हैं कि आ गए हम। बंगाल जीतने के बाद कहते हैं कि बंगाल सरकार हमारी है, अब पंजाब की बारी है। ये जहां जाते हैं वहां लड़ाइयां कराते हैं। ये हिंदू-सिख को लड़ाना चाहते हैं पर हम नहीं लड़ते। नितिन कोहली बोले-बेअदबी कानून से व्यवस्था सुधरेगी सीएम मान की शुकराना यात्रा में उमड़े जनसैलाब और उनके द्वारा बनाए गए बेअदबी कानून पर प्रतिक्रिया देते हुए सेंट्रल हलके से आप इंचार्ज नितिन कोहली ने कहा कि इसमें सभी धर्मों और वर्गों के लोग शामिल हुए हैं। आप सरकार ने बेअदबी के खिलाफ जो सख्त कानून बनाया है, उससे समाज में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधरेगी। यह सरकार का सबसे बेहतरीन प्रयास है, जिससे आने वाले समय में सभी समुदाय मिल-जुलकर रहेंगे और पंजाब की खुशहाली व भाईचारा हमेशा कायम रहेगा। कैबिनेट मंत्री भगत बोले- लोगों की मांग पूरी की इस मौक मंत्री मोहिंदर भगत ने कहा कि मान सरकार ने बेअदबी के खिलाफ कानून बनाकर जनता की पुरानी मांग को पूरा किया है। आज जालंधर से शुरू होकर अमृतसर जाने वाली इस यात्रा में भारी जनसैलाब उमड़ा है, जो मुख्यमंत्री और नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल का धन्यवाद करने पहुंचा है। लोगों का मानना है कि इस ऐतिहासिक कानून के बनने से उनकी भावनाओं का सम्मान हुआ है। सरकार ने लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब की गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लोग बेअदबी की घटनाओं पर सख्त कानून की मांग कर रहे थे और अब सरकार ने लोगों की भावनाओं के अनुसार कदम उठाया है।

प्रयागराज में रक्षा त्रिवेणी संगम की थीम पर नॉर्थ टेक सिम्पोजियम-2026 के समापन समारोह में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

‘नेशन फर्स्ट’ हर नागरिक के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांत, क्योंकि राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं: मुख्यमंत्री प्रयागराज में "रक्षा त्रिवेणी संगम" की थीम पर नॉर्थ टेक सिम्पोजियम-2026 के समापन समारोह में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम ने कहा, युद्ध अब साइबर व स्पेस तक विस्तारित, डेटा, सिग्नल्स व नेटवर्क बने नए हथियार, टेक्नोलॉजी की बढ़ी भूमिका यूपी डिफेंस कॉरिडोर में किया जा रहा तोप के गोलों, स्वदेशी ड्रोन, बुलेटप्रूफ जैकेट और उन्नत संचार प्रणालियों का निर्माण प्रयागराज  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब लड़ाई सीमाओं से बढ़कर साइबर, स्पेस, डेटा नेटवर्क और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम तक फैल चुकी है। पारंपरिक युद्ध कौशल के साथ-साथ अब तकनीकी दक्षता, रणनीतिक सोच और मानसिक दृढ़ता भी अनिवार्य हो गई है। आज के युद्ध में कीबोर्ड, सेटेलाइट और डेटा उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने पारंपरिक हथियार। दुश्मन के संचार नेटवर्क को बाधित करना तथा अपने सिस्टम को सुरक्षित रखना नई युद्ध रणनीति का आधार बन रहा है। ऐसे परिदृश्य में वही राष्ट्र आगे रहेगा, जो साहस और तकनीक के बीच संतुलन स्थापित कर सके। “नेशन फर्स्ट” केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर भारतीय सैनिक के जीवन का संकल्प है। यह हर नागरिक के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए, क्योंकि राष्ट्र सर्वोपरि है और उससे बढ़कर कुछ भी नहीं। सीएम योगी बुधवार को प्रयागराज में "रक्षा त्रिवेणी संगम" की थीम पर नॉर्थ टेक सिम्पोजियम (एनटीएस) 2026 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। आधुनिक युद्ध में कीबोर्ड भी एक प्रभावी हथियार मुख्यमंत्री ने कहा कि सियाचिन की जमाने वाली ठंड हो, रेगिस्तान की तपती रेत, घने जंगलों का अंधकार या समुद्र व आकाश की अनंत चुनौतियां, हमारे सैनिक हर परिस्थिति में तत्पर रहते हैं। उनकी सतर्क निगाहों के कारण ही पूरा देश सुरक्षित और निश्चिंत रह पाता है। आधुनिक युद्ध अब केवल जल, थल और नभ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के युग में प्रवेश कर चुका है। युद्ध में साइबर, स्पेस और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम जैसे क्षेत्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं। कीबोर्ड भी एक प्रभावी हथियार बन चुका है। दुश्मन के पावर ग्रिड, राडार, जीपीएस, बैंकिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम को बाधित करना या अपने नेटवर्क को सुरक्षित व अभेद्य बनाना, नई सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। सेटेलाइट्स के माध्यम से निगरानी, खुफिया जानकारी और नेविगेशन अब युद्ध की ‘आंख’ और ‘दिमाग’ बन चुके हैं। अब लड़ाई सिग्नल्स और डेटा के माध्यम से भी लड़ी जा रही है। डिफेंस सेक्टर में यूपी ने की उल्लेखनीय प्रगति मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर युद्ध जैसी स्थितियों ने यह स्पष्ट किया है कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता कितनी आवश्यक है। कुछ वर्ष पहले भारत का रक्षा निर्यात लगभग 600 करोड़ रुपये ही था, लेकिन निरंतर प्रयासों से आज हमारी सामर्थ्य 38 हजार से 50 हजार करोड़ रुपये तक के रक्षा उत्पाद निर्यात करने की है। भारत अब मित्र देशों को रक्षा उत्पाद उपलब्ध करा रहा है। उत्तर प्रदेश ने भी इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह प्रमुख नोड्स लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट पर तेजी से कार्य हो रहा है। इन नोड्स में 35,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतर रहे हैं। सरकार ने डिफेंस एवं एयरोस्पेस पॉलिसी के तहत बड़े लैंड बैंक का निर्माण किया है और निवेशकों को आकर्षक प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अलीगढ़ छोटे हथियारों और रक्षा उपकरणों के निर्माण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जबकि कानपुर गोला-बारूद, मिसाइल, डिफेंस टेक्सटाइल और प्रोटेक्टिव गियर के उत्पादन का महत्वपूर्ण हब बन रहा है। लखनऊ और झांसी नोड्स में ब्रह्मोस मिसाइल और हैवी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे देश की सैन्य क्षमता और मजबूत हो रही है। चित्रकूट और आगरा नोड्स में एयरोस्पेस और प्रिसिजन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विकास जारी है, ताकि स्पेस डोमेन सहित रक्षा के सभी आयामों में देश की क्षमता को सुदृढ़ किया जा सके। यूपी डिफेंस कॉरिडोर सैनिकों की क्षमता और सुरक्षा में मददगार मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी डिफेंस कॉरिडोर के तहत तोप के गोले, स्वदेशी ड्रोन, बुलेटप्रूफ जैकेट और उन्नत संचार प्रणालियों का निर्माण किया जा रहा है। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उत्तर प्रदेश में उपलब्ध हैं। प्रदेश के पास 56 प्रतिशत युवा एवं स्किल्ड वर्कफोर्स और 96 लाख एमएसएमई इकाइयों का मजबूत आधार है, जो विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। सभी 6 स्ट्रेटेजिक नोड्स पर पर्याप्त लैंड बैंक भी उपलब्ध है। राज्य सरकार स्किल, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के माध्यम से मार्केट-रेडी और इंडस्ट्री-रेडी वर्कफोर्स तैयार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में आईआईटी कानपुर के साथ ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया गया है, जबकि स्टेट फॉरेंसिक संस्थान के माध्यम से भी विभिन्न क्षेत्रों में नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं। सभी स्ट्रेटेजिक नोड्स में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है।  ज्ञान जहां से भी आए, उसे स्वीकारना हमारी परंपरा मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सिम्पोजियम के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में प्रधानमंत्री के विजन को साकार होते देखना गर्व का विषय है। यह सिम्पोजियम ज्ञान, अनुभव और नवाचार के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान जहां से भी आए, उसे स्वीकार करना हमारी परंपरा रही है और यह सिम्पोजियम उसी भावना को आगे बढ़ा रहा है।  हाईटेक क्षेत्रों में स्थापित हुए स्टार्टअप सीएम योगी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में 21,000 से अधिक स्टार्टअप्स स्थापित हुए हैं, जो एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग जैसे हाईटेक क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। सेफ्टी, टेक्नोलॉजी और ट्रस्ट के समन्वय से प्रदेश ने बीमारू छवि को पीछे छोड़ते हुए देश के ग्रोथ इंजन के रूप में पहचान बनाई है। अपराध और अव्यवस्था के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति हमारा संकल्प रहा है। माफिया से कानून के राज और उपद्रव से उत्सव तक की यात्रा तय करते हुए यूपी इस मुकाम तक पहुंचा है। हमारी उदारता को कोई कमजोरी न समझे मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने सदैव “वसुधैव कुटुम्बकम्” के सिद्धांत को आत्मसात किया … Read more

योगी आदित्यनाथ ने किया बाबा विश्वनाथ व काल भैरव के मंदिर में दर्शन

बाबा विश्वनाथ व काल भैरव के दरबार में माथा टेका मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरक्षपीठाधीश्वर ने लोकमंगल और प्रदेश की खुशहाली की कामना की  मंदिर में श्रद्धालुओं का किया अभिवादन, नन्हे-मुन्नों को भी दुलारा वाराणसी  मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ बुधवार सुबह काशी पहुंचे। उन्होंने यहां बाबा विश्वनाथ धाम व काशी कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में माथा टेक कर पूजन-अर्चन किया। उन्होंने लोकमंगल और प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की।  बाबा काल भैरव मंदिर में मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया। साथ ही आसपास के घरों में नन्हे-मुन्नों को दुलारा। काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ के दरबार में दर्शन करने आए भक्तों ने मुख्यमंत्री को देखकर ‘हर-हर महादेव’ का जयकारा लगाया। मुख्यमंत्री ने भी श्रद्धालुओं का अभिवादन किया।  इस दौरान प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर, रविंद्र जायसवाल, डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु', विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. अवधेश सिंह, विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे। मांगलिक कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी में मांगलिक कार्यक्रम में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री बुधवार सुबह बड़ा लालपुर स्थित चांदमारी निवासी राजीव कृष्ण के आवास पर पहुंचे। उन्होंने यहां मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होकर परिवारजनों को शुभकामनाएं दीं।