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यूपी विधानसभा में गरजे सीएम योगी, सपा-कांग्रेस को महिला मुद्दों पर घेरा

लखनऊ यूपी विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा को महिलाओं को लेकर हुई घटनाओं के बारे में आईना दिखाया। मायावती के साथ गेस्ट हाउस कांड को याद दिलाकर योगी सपा पर जमकर बरसे। योगी ने कहा कि उस समय गेस्ट हाउस कांड में दलित महिला मुख्यमंत्री मायावती की हत्या करने की कोशिश की गई। योगी ने कहा कि सपा माफियाओं के सामने नतमस्तक है। योगी ने कहा कि सपा विधायक पूजा पाल इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि जब राजू पाल की हत्या हुई थी, तब सपा माफियाओं के सामने झुक गई थी. सीएम ने आरोप लगाया कि सपा की सहानुभूति न तो पिछड़ों, दलितों और न ही पूजा पाल जैसे लोगों के प्रति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शाहबानों प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस का जिस तरह यूपी में पतन हुआ है वह न हुआ होता अगर कांग्रेस मुस्लिम महिला को न्याय देने के लिए मौलानाओं के आगे घुटने टेक कर नाक न रगड़ती। उन्होंने कहा सपा का भी ऐसा ही हश्र होने वाला है, इसमें ज्यादा देर नहीं लगेगी। विपक्ष ने महिला कल्याण से जुड़े सभी फैसलों में हमेशा विरोध किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को महिला सशक्तिकरण के लिए बुलाए गए विशेष सत्र के दौरान निंदा प्रस्ताव रखने से पहले बोल रहे थे। योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी हो या फिर कांग्रेस इन्होंने महिला कल्याण से जुड़े सभी फैसलों में हमेशा कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि नारी के उन्नयन, उत्थान और उन्हें संपन्न बनाने के लिए समय-समय पर आए मुद्दों का इंडी गठबंधन ने हमेशा विरोध किया है। जब वर्ष 2014 में महिलाओं के लिए जनधन योजना आई तो सपा-कांग्रेस ने विरोध किया। फिर जब नारियों की गरिमा कायम रखने के लिए खुले में शौच के विरोध में शौचालय बनाने की योजना आई तो सपा-कांग्रेस ने विरोध किया। सपा सरकार में विधवा पेंशव व वृद्धा पेंशन में 300 रुपये देते थे। लाभकारी योजनाएं गिनाएं और सपा-कांग्रेस को आड़े हाथों लिया उन्होंने इंडी गठबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दिल्ली से लेकर लखनऊ आने तक सपा के सदस्य बहुत उतावले दिखाई दे रहे हैं। रंग बदलने में तो गिरगिट भी सपा के सामने संकोच कर जाए। रंग बदलने में ये इतने आगे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में नारी वंदन अधिनियम पास न होने के बाद सपा-कांग्रेस के सदस्य कैसे हंस रहे थे और मेजें थपथपा रहे थे। उनका यह आचरण सभी ने देखा है। मुख्यमंत्री ने एक-एक कर सभी लाभकारी योजनाएं गिनाएं और सपा-कांग्रेस को जमकर आड़े हाथों लिया। मुख्यमंत्री बोले, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया तो सपा-कांग्रेस ने विरोध किया। सपा सरकार में ढाई वर्ष में मात्र 40 लाख शौचालय बने थे। वर्ष 2017 के बाद हमने डेढ़ वर्ष में दो करोड़ से अधिक शौचालय बनवाए। पूरे देश में 12 करोड़ शौचालय बनाए गए। संसद में विरोध क्यों किया गया मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय की ओर इशारा करते हुए कहा कि आप तो सोशलिस्ट हैं। शौचालय नारी गरिमा के प्रतीक थे, मोहल्लों की स्वच्छता के प्रतीक थे लेकिन आपने विरोध किया। हमने दो करोड़ से अधिक शौचालय बनाए और पूर्वांचल से इंस्फेलाइटिस रोग को काबू किया। कहा कि आज मैं कह सकता हूं कि एक भी मौत इंस्फेलाइटिस से नहीं हो रही जबकि पहले हजारों बच्चों की मौत होती थी। उन्होंने कहा कि जब गांव में महिलाओं शौच के लिए जाती थीं तो सपा के शोहदे उन पर छींटाकशी करते थे। आखिर सपा चाहती है कि कानून लागू किया जाए तो फिर संसद में विरोध क्यों किया गया। सपा ने नहीं दिया एक भी प्रधानमंत्री आवास मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के ढाई वर्ष के शासन में एक भी पीएम आवास नहीं बन सका था। एनडीए सरकार ने देश भर में 4 करोड़ मकान बनाए हैं। सिर्फ यूपी में 65 लाख पीएम आवास बनाए गए हैं। यही नहीं भूमि का मालिकाना हक देने के लिए पीएम घरौनी योजना लागू की गई। अब भूमि का मालिकाना हक महिलाओं को दिया जा रहा है। यूपी में एक करोड़ घरौनी दी गई है। इसी तरह सपा ने सामूहिक विवाह योजना का विरोध किया। यूपी में 6 लाख बेटियों की शादी कराई गई है। सपा ने इसका भी विरोध किया था। सपा ने कन्या सुमंगला योजना का भी विरोध सपा-कांग्रेस ने किया। हम 26 लाख से अधिक महिलाओं को 25 हजार रुपये दे रहे हैं।

रेलवे ट्रैक पर ड्रोन से होगी निगरानी, CCTV कैमरे लगवाने का फैसला: रवनीत बिट्टू

पटियाला/चंडीगढ़ रेलवे लाइनों पर ड्रोन से नजर रखी जाएगी। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने शंभू के निकट हाल ही में हुए विस्फोट स्थल का बीते दिन दौरा किया और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) के साथ सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। मीडिया को संबोधित करते हुए मंत्री ने पंजाब में रेलवे को निशाना बनाकर हो रही बार-बार की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की और सुरक्षा व निगरानी को मजबूत करने के लिए सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया। रवनीत सिंह ने घोषणा की कि रेलवे ईडीएफसी पर 24 घंटे गश्त को और सघन करेगा तथा निगरानी व्यवस्था का व्यापक विस्तार किया जाएगा। वर्तमान में अंबाला मंडल के पंजाब क्षेत्र में 173 सीसीटीवी कैमरे पहले ही लगाए जा चुके हैं और अतिरिक्त कैमरों की स्थापना जारी है। कॉरिडोर के एकांत एवं संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां ड्रोन निगरानी सहित उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ट्रैक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे के की-मैन द्वारा निरंतर जमीनी गश्त की जाएगी। मंत्री ने बताया कि यह घटना पिछले 3 महीनों में लगभग 35 किलोमीटर के दायरे में दूसरी घटना है। पहली घटना 23 जनवरी को हुई थी, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से लगभग 800–900 मीटर की दूरी पर थी, जबकि ताजा विस्फोट स्थल इसी राजमार्ग से लगभग 300 मीटर दूर स्थित है। प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि असामाजिक तत्व राजमार्ग से आसान पहुंच का उपयोग कर रेलवे ट्रैक को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि बाहरी तत्वों की संलिप्तता के संकेत मिल रहे हैं, जो रेलवे जैसी महत्वपूर्ण अवसंरचना को निशाना बनाकर क्षेत्र को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं न केवल सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों को बाधित करने का भी प्रयास हैं। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जो साहनेवाल को पश्चिम बंगाल से जोड़ता है, एक महत्वपूर्ण आर्थिक धुरी है, जहां प्रतिदिन लगभग 30 ट्रेनें औद्योगिक और कृषि उत्पादों का परिवहन करती हैं। इस नेटवर्क में किसी भी प्रकार का व्यवधान राज्य और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है। मंत्री ने लोको पायलट की सतर्कता की सराहना की, जिन्होंने झटका महसूस होते ही तुरंत ट्रेन को रोक दिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। तत्पश्चात सुरक्षा एवं आपातकालीन दलों को तुरंत मौके पर भेजा गया। सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मंत्री ने कहा कि रेलवे संपत्तियों की सुरक्षा, यात्रियों और मालगाड़ियों की सुरक्षित आवाजाही तथा आर्थिक गतिविधियों को निर्बाध बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

डॉ. मोहन यादव का किसानों के बीच अचानक दौरा, चाय पर चर्चा में CM ने पूछा भुगतान और तौल व्यवस्था

महेश्वर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक दिन पहले ही कहा था कि वे कभी भी और कहीं भी उपार्जन केंद्रों का अचानक निरीक्षण कर सकते हैं। कुछ ही घंटों बाद मोहन यादव खरगोन में थे। उन्होंने गुरुवार को सुबह अचानक कतरगांव में बनाए गए उपार्जन केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान किसानों से भी चर्चा की और उनके साथ चाय भी पी। किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (MP CM Mohan Yadav) ने कल यानी 29 अप्रैल को जो कहा था, वैसा ही 30 अप्रैल को किया। उन्होंने कहा था कि वे किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक दौरा कर सकते हैं। और, हुआ भी यही। डॉ. यादव एक दिन पहले ही 29 अप्रैल को महेश्वर पहुंच गए थे जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया था। गुरुवार को सुबह मोहन यादव कतरगांव के उपार्जन केंद्र का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद किसानों के साथ सीएम का सीधा संवाद भी हुआ। सीएम ने किसानों के साथ चाय भी पी। गेहूं उपार्जन की व्यवस्था के बीच अपने साथ सीएम को पाकर किसानों के चेहरे पर मुस्कान थी। मोहन यादव ने उपार्जन केंद्र की व्यवस्था करने वाले कर्मचारियों को दिशा-निर्देश भी दिए। महेश्वर विधानसभा के दौरे पर आए सीएम ने रात्रि विश्राम के बाद सुबह हेलीपैड के लिए प्रस्थान किया था। हालांकि, उन्होंने अचानक अपना काफिला बड़वाह मार्ग की ओर मोड़ दिया। सीधे कतरगांव खरीदी केंद्र पहुंच गए। मुख्यमंत्री को अपने बीच देखकर वहां मौजूद किसान और कर्मचारी हैरान रह गए। बता दें कि मुख्यमंत्री ने बुधवार को महेश्वर प्रवास के दौरान संकेत दिए थे कि व्यवस्थाओं को परखने के लिए किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का निरीक्षण कर सकते हैं। उपार्जन केंद्र पर क्या है खास 0-किसानों के लिए उपार्जन केंद्रों पर छाया, बैठक और कई अन्य सुविधाओं की व्यवस्था। 0-अब किसान किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय कर सकते हैं। 0-उपार्जन केन्द्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है। 0-सरकार जिलों में और भी तौल कांटे बढ़ा रही है। 0-सरकार ने चमकविहीन गेहूं की सीमा भी 50 प्रतिशत कर दी है। 0-सूकड़े दाने की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक की गई है। 0-क्षतिग्रत दानों की सीमा बढ़ाकर 6 प्रतिशत तक की गई है। 0-बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, कूपन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं मिलेंगी। सीएम ने किसानों से की सीधी बात सीएम ने किसी औपचारिक प्रोटोकॉल का पालन किए बिना किसानों से बातचीत की। उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें भुगतान समय पर मिल रहा है? तौल में गड़बड़ी तो नहीं हो रही। सीएम ने मौजूद कलेक्टर भव्या मित्तल और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को धूप में खड़े न रहना पड़े। उन्होंने ठंडे पानी और बैठने की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। निरीक्षण के दौरान महेश्वर विधायक राजकुमार मेव भी उनके साथ थे, जिनसे सीएम ने क्षेत्र की कृषि समस्याओं पर फीडबैक लिया। सीएम ने तौल और भुगतान में पारदर्शिता के निर्देश सीएम ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि गेहूं की स्लॉट बुकिंग से लेकर तौल और भुगतान तक की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार ने तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी है। आवश्यकता पड़ने पर इसे और बढ़ाया जाएगा। सीएम ने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार 2625 रुपए प्रति क्विंटल (बोनस सहित) की दर से उनके गेहूं का पाई-पाई भुगतान करेगी। निरीक्षण के बाद सीएम ने कहा कि आने वाले दिनों में वे प्रदेश के किसी भी जिले में अचानक उतरकर केंद्रों की स्थिति का जायजा ले सकते हैं, इसलिए प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहना चाहिए। युद्ध के बावजूद बड़ा लक्ष्य सरकार ने इस साल युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए 9.83 लाख किसानों द्वारा 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। एमपी में अब तक 5 लाख 8 हजार 657 किसानों से 22 लाख 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था।

बिहार सरकार का निर्णय: पटना चिड़ियाघर अब ‘पटना जू’, बदला गया संस्थानों का नाम

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने पटना चिड़ियाखाना और डेयरी तकनीकी संस्थान से संजय गांधी के नाम को हटाने का फैसला लिया है। सीएम सम्राट की अध्यक्षता में बुधवार की शाम बिहार कैबिनेट की बैठक ने इमरजेंसी लगाने के सूत्रधार कांग्रेस के दिवंगत नेता संजय गांधी का नाम राज्य के दो प्रमुख संस्थानों से डिलीट कर दिया है। पटना के मशहूर संजय गांधी जैविक उद्यान को अब पटना जू के नाम से जाना जाएगा। आम लोग पहले भी इसे पटना का चिड़ियाखाना या पटना जू ही कहते थे, लेकिन कागज पर नाम संजय गांधी से ही शुरू होता था। वन और पर्यावरण विभाग के अंतर्गत जू को संचालित करने वाली समिति का नाम संजय गांधी जैविक उद्यान प्रबंधन एवं विकास समिति से पटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी कर दिया गया है। इसी तरह राज्य के डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभाग के तहत चल रहे संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी का नाम बदलकर बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, पटना करने का भी फैसला कैबिनेट ने लिया है। बिहार पुश चिकित्सा विश्वविद्यालय के तहत चल रहे इस संस्थान में डेयरी टेक्नोलॉजी, डेयरी इंजीनियरिंग, डेयरी केमिस्ट्री, डेयरी माइक्रोबायलॉजी, डेयरी बिजनेस मैनेजमेंट और डेयरी एक्सटेंशन एजुकेशन विभागों में अलग-अलग कोर्स के जरिए छात्र-छात्राओं को पेशेवर शिक्षा दी जाती है। 1973 में चालू हुआ था संजय गांधी जैविक उद्यान संजय गांधी जैविक उद्यान 1973 में आम लोगों के लिए खुला था। 1969 में तत्कालीन राज्यपाल नित्यानंद कानूनगो ने राजभवन की 34 एकड़ जमीन वनस्पति उद्यान के लिए दी थी। 1972 में इसमें सरकार ने लगभग 120 एकड़ जमीन और जोड़कर इसे जैविक उद्यान और बोटैनिकल पार्क का रूप दे दिया। पटना जू में इस समय 110 प्रजातियों के लगभग 800 जीव-जंतु हैं, जिसमें बाघ, शेर, राइनो वगैरह शामिल हैं। वनस्पति उद्यान में लगभग 300 तरह के पेड़-पौधे हैं। बड़े चिड़ियाघर में पटना जू का देश में चौथा स्थान है। 1980 में स्थापित हुआ था संजय गांधी गव्य प्रावैधिकी संस्थान कांग्रेस शासनकाल के दौरान ही संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी की स्थापना 1980 में हुई थी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से मान्यता प्राप्त इस डेयरी संस्थान का पहला बैच पूसा के राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय में 1982 में आया। 1986 में संस्थान को पटना लाया गया और 1999 में यह अपने मौजूदा कैंपस में गया। बीच में कुछ समय संस्थान को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर से भी जोड़ दिया गया था। 2016 में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद संस्थान को इससे जोड़ दिया गया।

बेसिक से उच्च शिक्षा तक बड़ी राहत: कैशलेस मेडिकल सुविधा के लिए नया पोर्टल तैयार

लखनऊ लाखों शिक्षकों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिलाने की कवायद शुरू हो गई है। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए साचीज के सहयोग से पोर्टल बनकर लगभग तैयार हो गया है। जल्द ही इसे लाइव किया जाएगा। प्रदेश में बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा दिए जाने का निर्णय कैबिनेट ने जनवरी में लिया था। इसके बाद इसकी आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। इस क्रम में विभाग की ओर से साचीज को शिक्षकों का डाटा उपलब्ध कराते हुए पोर्टल तैयार किया जा रहा है। इसमें शिक्षकों की जानकारी तो मानव संपदा पोर्टल से अपडेट हो जाएगी। किंतु उनको अपने आश्रितों की जानकारी खुद भरनी होगी। जल्द ही इस पोर्टल को लाइव कर दिया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि शिक्षकों को जल्द से जल्द इसका लाभ दिलाया जा सके। वहीं उच्च शिक्षण संस्थानों के 1.35 लाख शिक्षकों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशालय की संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. शशि कपूर ने सभी रजिस्ट्रार व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को बताया है कि साचीज के द्वारा अपनी वेबसाइट पर उच्च शिक्षा का टैब दिया जाएगा। इसमें संबंधित लाभार्थी द्वारा अपना विवरण फीड किया जाएगा। विवरण फीड करने के बाद संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव को विवरण दिखाई देगा, जिसे वह अनुमोदन करेंगे। उसके बाद संबंधित विवरण अगली कार्यवाही के लिए स्टेट नोडल अधिकारी के पास जाएगा। उन्होंने सभी संबंधितों को इससे जुड़ी कार्यवाही अपने स्तर से पूरी करने का निर्देश दिया है। साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा का कहना है कि सभी शिक्षकों का डाटा मिल रहा है। इसके साथ ही पोर्टल का ट्रायल भी चल रहा है। हमारा प्रयास है कि इसको मई में शुरू कर दें। ताकि शिक्षकों व उनके आश्रितों को समय से इसका लाभ मिल सके।  

जामगुड़ा में 3 हैंडपंप, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को मिल रहा पानी

जामगुड़ा में 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को मिल रहा पानी स्कूल के नलकूप की जल आवक क्षमता का परीक्षण कर गर्मियों के लिए वैकल्पिक रनिंग वाटर की व्यवस्था की जाएगी, सहायक अभियंता को व्यवस्था के निर्देश कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना से जामगुड़ा में होती है जल की आपूर्ति, ग्रीष्म ऋतु के कारण अभी नहीं भर पा रही टंकी रायपुर बस्तर जिले के पिपलावंड ग्राम पंचायत के जामगुड़ा बसाहट में अभी 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को पानी मिल रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने ग्रीष्म काल में रनिंग वाटर की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए स्कूल परिसर के नलकूप की जल आवक क्षमता का परीक्षण कर 2 हॉर्स-पॉवर का पंप लगाकर स्कूल के साथ ही जामगुड़ा बसाहट में कनेक्शन के निर्देश सहायक अभियंता को दिए हैं।   जल जीवन मिशन के अंतर्गत कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना से जामगुड़ा में पाइपलाइन से जल की आपूर्ति होती है। पहले से संचालित समूह जलप्रदाय योजना में रेट्रोफिटिंग के माध्यम से पिपलावंड में जल आपूर्ति की व्यवस्था बनाई गई है। रेट्रोफिटिंग योजना के तहत यहां 70 लाख 29 हजार रुपए की लागत से 3530 मीटर पाइपलाइन बिछाकर और दो सोलर जलापूर्ति सिस्टम स्थापित कर 237 एफ.एच.टी.सी. (Functional Household Tap Connection) प्रदान किए गए हैं, जिनके काम पूर्ण किए जा चुके हैं। पिपलावण्ड कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना का अंतिम छोर का गांव है, जिसके कारण ग्रीष्म काल में दो महीने टंकी नहीं भरने के कारण पेयजल व्यवस्था बाधित रहती है। अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने जामगुड़ा जाकर व्यवस्थाएं देखीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जगदलपुर परिक्षेत्र के अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने आज पिपलावंड एवं जामगुड़ा का दौरा कर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्थाएं देखीं तथा मैदानी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पेयजल के लिए एक हजार की आबादी वाले पिपलावंड में अभी 14 कार्यरत हैंडपंप, दो पॉवर पंप और दो सोलर पंप हैं। वहीं 300 जनसंख्या वाले गांव के जामगुड़ा बसाहट में 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को पानी मिल रहा है। सरपंच और दुलाय कश्यप से मिलकर जलापूर्ति की जानकारी ली अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने गांव पहुंचकर सरपंच श्री केशवराम बघेल और दुलाय कश्यप से मिलकर पेयजल व्यवस्था की जानकारी ली। दुलाय कश्यप ने बताया कि अमूमन रोड के पार बसे रिश्तेदार द्वारा लूज पाइप से पानी उनके घर तक पहुंचाया जाता है। वह कभी-कभी रोड पार कर पानी लाने जाती है। उन्होंने बताया कि समाज कल्याण विभाग से उसे बैटरीचलित ट्राइसिकल मिली है। इसका उपयोग कर वह पेयजल एवं निस्तारी के लिए अपने रिश्तेदार के निजी नलकूप या 200 मीटर दूर स्कूल के पॉवर पम्प से पानी लाती थी। उनका ट्राइसिकल पिछले दो माह से खराब है। समाज कल्याण विभाग और सरपंच को उन्होंने यह बात बताई है, परंतु सुधार नहीं हो पाने के कारण परेशानी हो रही है।

पथ निर्माण विभाग के टेंडर नियमों में बदलाव, बिहार के संवेदकों को मिलेगा फायदा

पटना बिहार में पथ निर्माण विभाग की सड़क निर्माण योजना में 25 लाख से 50 करोड़ रुपये तक के काम के टेंडर में बिहार के ठेकेदारों को प्राथमिकता देने का राज्य सरकार ने नीतिगत फैसला कर लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार की शाम बिहार कैबिनेट की बैठक में सरकार ने 25 लाख से ऊपर और 50 करोड़ तक के सिविल कार्य के लिए राज्य स्तरीय संवेदकों को तरजीह देगी। इस फैसले को अमल में लाने के लिए मंत्रिमंडल ने बिहार लोक निर्माण संहिता में जरूरी बदलाव करने को मंजूरी दी है। सरकार के फैसले से स्थानीय ठेकेदारों को मिलने वाले काम की संख्या में बढ़ोतरी होगी। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और नेता भी बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर पर ठेकेदारी का काम करते हैं। पूर्व सीएम नीतीश कुमार की सरकार के दौरान बिहार सरकार ने 2026-27 का बजट पेश किया था। उस बजट में पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 18716 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। बजट मांगों पर चर्चा के दौरान विधानसभा में तत्काली पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा था कि सरकार 'विकसित बिहार' के विजन को गति देने के लिए निरंतर समर्पित है। जायसवाल ने सदन में कहा था कि ​राज्य में सुगम कनेक्टिविटी के लिए जेपी गंगा पथ के विस्तार सहित 16,465 करोड़ से अधिक की नई योजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई है। बेहतरीन सड़कें और आधुनिक सेतु सशक्त बिहार की पहचान बनेंगे। दिलीप जायसवाल ने बताया था कि राज्य में सड़कों के निर्माण के लिए बजटीय प्रावधान की ज्यादा जरूरत नहीं है। सड़क निर्माण के लिए एडीबी, विश्व बैंक, नाबार्ड सहित विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से राशि ली जाती है। एनएच का निर्माण केंद्र सरकार करती है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा का जिक्र करते हुए जायसवाल ने कहा था कि इस दौरान 23,974.97 करोड़ रुपये की लागत वाली 137 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। उसमें 111 योजनाओं का काम ठेकेदारों को आवंटित किया जा चुका है और सभी योजनाओं में कार्य प्रगति पर है। पिछले एक साल में 14,757 करोड़ रुपये की 129 अन्य परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई, जो क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में प्रक्रियाधीन है। सम्राट चौधरी कैबिनेट की आज की बैठक के महत्वपूर्ण फैसले आगे पढ़ें।

अमृतसर में 6 किलो हेरोइन सहित तस्कर गिरफ्तार, दुबई से चल रहा नेटवर्क, मास्टरमाइंड अंतरप्रीत का था हाथ

चंडीगढ़  पंजाब में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गुरुवार को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। अमृतसर की काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने अमृतसर-जालंधर हाईवे पर अड्डा मानावाला के पास कार्रवाई करते हुए एक ड्रग तस्कर को गिरफ्तार किया और उसके कब्जे से 6 किलोग्राम हेरोइन बरामद की। डीजीपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपी दुबई में बैठे एक हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहा था। इस हैंडलर की पहचान सुल्तानविंड निवासी अंतरप्रीत सिंह के रूप में हुई है, जो पहले से ही नशीले पदार्थों की तस्करी के कई मामलों में वांछित है। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय है और पंजाब में नशे की सप्लाई करने में संलिप्त रहा है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और सप्लाई चैन की जानकारी जुटाई जा रही है। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगे की जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है। बरामद नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। यूएई में बैठे हैंडलर के निर्देश पर कर रहा था काम प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपी दुबई (यूएई) में बैठे एक हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहा था। इस हैंडलर की पहचान अमृतसर के सुल्तानविंड इलाके के निवासी अंतरप्रीत सिंह के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अंतरप्रीत सिंह पहले भी नशा तस्करी के कई मामलों में शामिल रहा है और उसके खिलाफ कई केस दर्ज हैं। पुलिस ने नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू की पुलिस ने आरोपी के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए पुलिस प्रतिबद्ध पुलिस का कहना है कि नशा तस्करों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस दिशा में आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इससे पहले पंजाब पुलिस ने 23 अप्रैल को सीमा पार से नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी करने वाले तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था, जिनके पास से 915 ग्राम 'आइस' (मेथैम्फेटामाइन), पांच पिस्तौल और कारतूस बरामद किए गए थे। पुलिस के मुताबिक गिरोह में संलिप्त लोग पाकिस्तान में बैठे लोगों के संपर्क में थे और उन्हें अपने यहां से हथियार व नशीले पदार्थों की आपूर्ति किया करते थे। इसके बाद पुलिस ने इस गिरोह को चिह्नित कर इसमें संलिप्त आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई से पहले इस मामले को लेकर गेट हकीमा पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। अब आगे इस गिरोह को कैसे पूरी तरह से खत्म किया जाए। इस दिशा में जल्द से जल्द कदम उठाए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह को पूरी तरह से खत्म करने के लिए पूरी रूपरेखा तैयार की जा चुकी है, जिसके तहत मौजूदा समय में काम किया जा रहा है। इस गिरोह में संलिप्त किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।

ट्रेन से तेज सफर! गंगा एक्सप्रेसवे बदलेगा यूपी का ट्रैवल टाइम, 14 घंटे का रास्ता होगा 6 घंटे में पूरा

लखनऊ यूपी परिवहन निगम की कोई भी बस अभी प्रयागराज से सीधे मेरठ नहीं जाती है। वहां जाने के दो माध्यम हैं, ट्रेन या फिर निजी साधन। प्रयागराज से जो दो एक्सप्रेस ट्रेन मेरठ जाती है, उसमें से एक जितना समय लेती है उससे आधे से भी कम तो दूसरी से लगभग ढाई घंटे कम समय में ही निजी साधन से गंगा एक्सप्रेस वे के जरिए मेरठ पहुंचा जा सकेगा। दावा किया जा रहा है कि गंगा एक्सप्रेस वे से मेरठ तक की दूरी छह घंटे में तय हो सकेगी। प्रयागराज संगम रेलवे स्टेशन से नौचंदी एक्सप्रेस रोजाना शाम 5.50 बजे चलकर 653 किमी की दूरी तय करते हुए अगले दिन सुबह 8.30 बजे मेरठ पहुंचती है। यह ट्रेन लखनऊ, हरदोई, बरेली, मुरादाबाद, अमरोहा व हापुड़ से होकर मेरठ जाती है। कुल 14 घंटे लगते हैं पर गंगा एक्सप्रेस वे पर निजी साधन से सफर करने में इससे लगभग आठ घंटा कम लगेगा। इसी तरह सूबेदारगंज स्टेशन से चलने वाली संगम एक्सप्रेस फतेहपुर, कानपुर, इटावा, टुंडला, हाथरस, बुलंदशहर व हापुड़ होते हुए मेरठ तक करीब 8.30 घंटे में पहुंचती है।यह ट्रेन सूबेदारगंज से शाम 5.50 बजे चलती है और अगले दिन 637 किमी की दूरी तय करके सुबह 8.30 बजे पहुंचती है। इस ट्रेन से जितना वक्त लगता है, उससे ढाई घंटा कम गंगा एक्सप्रेस वे से लगेगा। अपने निजी वाहन से मेरठ जाने वालों को अभी तक कानपुर के रास्ते होकर जाना पड़ता था। एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण हो जाने से 594 किमी का सफर छह घंटे में पूरा हो जाएगा। प्रयागराज की सोरांव तहसील के जूड़ापुर दांदू गांव के पास एक्सप्रेस-वे का दूसरा टोल प्लाजा बनाया गया है। प्रतापगढ़ से 143 किमी दूरी कम, बचेंगे छह घंटे अभी तक प्रतापगढ़ से मेरठ जाने के लिए न तो कोई सीधी ट्रेन है और न ही यूपी परिवहन निगम की कोई बस ही वहां के लिए चलती है। काशी और पद्मावत दो ट्रेन हैं, जो प्रतापगढ़ होते हुए हापुड़ तक जाती हैं। हापुड़ तक जाने में ही दोनों ट्रेन दस घंटे से अधिक का समय लेती हैं। सीधे मेरठ जाने वालों के पास एक मात्र विकल्प निजी साधन है। निजी साधन से मेरठ जाने में अभी 11 से 12 घंटे लगते हैं। प्रतापगढ़ से मेरठ तक की कुल दूरी 738 किमी है, गंगा एक्सप्रेस वे से यह दूरी कम होकर 595 रह जाएगी। 143 किमी कम होने और एक्सप्रेस वे के सुगम यातायात की वजह से यह दूरी आधे समय यानी छह घंटे में ही तय की जा सकेगी। इससे उन कारोबारियों को खास तौर से सहूलियत होगी, जिनका कारोबार के सिलसिले में अक्सर मेरठ तक जाना होता है।

छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक

सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की बन रही नई पहचान छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक रायपुर हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर होता है। छत्तीसगढ़ में यह दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उनका योगदान पहले से अधिक प्रभावी होता जा रहा है।           राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं लंबे समय से कृषि कार्य, वनोपज संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ने और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में सक्रिय रही हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति निर्माण कार्य, घरेलू सेवाओं और लघु व्यवसायों में तेजी से बढ़ी है। यह बदलाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक पहचान और आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती दे रहा है। इसके बावजूद यह भी सच है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिला श्रमिकों को लंबे समय तक उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। वेतन असमानता, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभों की कमी और पारंपरिक सोच जैसी बाधाएं उनके सामने बनी रहीं।           मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। नई श्रमिक नीतियों के जरिए असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को लागू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। महिला शक्ति केंद्रों को केवल सहायता केंद्र नहीं, बल्कि परामर्श, कानूनी सहयोग और रोजगार मार्गदर्शन के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटर के जरिए हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और पुनर्वास की सुविधा मिल रही है।          राज्य में संचालित विभिन्न योजनाएं महिला श्रमिकों के जीवन में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति के बाद 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे आर्थिक दबाव कम होता है। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है।            महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों को, जिनका कम से कम तीन वर्षों का पंजीयन है, एक लाख रुपये तक की सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।           इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आय के साधन मिलने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है। राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम महिला श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहे हैं। घरेलू कामगारों, ठेका श्रमिकों और हमाल परिवारों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि सक्षम योजना के जरिए विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है।          आज छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिक केवल श्रमशक्ति नहीं रहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। उनकी भूमिका अब सहायक तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने तक पहुंच रही है। योजनाओं की बढ़ती पहुंच और जागरूकता के कारण उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे समाज में उनका सम्मान भी लगातार बढ़ रहा है।            छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों के लिए किए जा रहे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि संवेदनशील नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए सकारात्मक बदलाव संभव है। सुरक्षा, सम्मान और रोजगार के अवसरों के साथ महिला श्रमिक आज राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है। डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर उप संचालक (जनसंपर्क)