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जबलपुर में खराब रिजल्ट पर 33 शिक्षकों को नोटिस, तीन दिन का अल्टीमेटम दिया, जनशिक्षकों ने किया विरोध

 जबलपुर  कक्षा पांचवीं और आठवीं के हाल ही में घोषित परीक्षा परिणामों को लेकर जिले में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में 33 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें 14 जनशिक्षक और 19 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। नोटिस में क्या कहा गया जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों को पहले ही पाठ्यक्रम समय पर पूरा करने, छात्रों से नियमित अभ्यास कराने और बेहतर परीक्षा परिणाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कई स्कूलों के परिणाम जिले में सबसे कमजोर पाए गए। प्रशासन का मानना है कि इस लापरवाही के कारण जबलपुर जिला राज्य स्तर पर पिछड़े जिलों की श्रेणी में आ गया है, जो चिंता का विषय है। इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित शिक्षकों से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। लापरवाही पर सख्त रुख शिक्षा विभाग ने इसे केवल सामान्य चूक नहीं, बल्कि जिम्मेदारी में कमी माना है। अधिकारियों के अनुसार, छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। इसलिए कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों और उनसे जुड़े शिक्षकों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जनशिक्षकों का विरोध, निर्णय पर सवाल दूसरी ओर, इस कार्रवाई को लेकर जनशिक्षकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अभी घोषित परीक्षा परिणाम अंतिम नहीं हैं। वर्तमान में री-टोटलिंग और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है, जिससे कई छात्रों के अंक बढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि कई विद्यार्थी मात्र एक-एक अंक से असफल हुए हैं, ऐसे में पुनर्मूल्यांकन के बाद परिणाम में सुधार संभव है। इसके अलावा 15 जून के बाद आयोजित होने वाली द्वितीय परीक्षा को भी अंतिम परिणाम में शामिल किया जाना चाहिए, तभी वास्तविक स्थिति सामने आएगी। कार्रवाई पर उठे सवाल जनशिक्षकों ने यह भी सवाल उठाया है कि कार्रवाई केवल जनशिक्षकों और कुछ प्राथमिक शिक्षकों तक ही सीमित क्यों रखी गई है। उनका कहना है कि ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (BRC) और संकुल प्राचार्य स्तर के अधिकारियों को इस दायरे से बाहर रखा गया है, जबकि शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सामूहिक होती है। शिक्षकों का तर्क है कि यदि जवाबदेही तय करनी है तो सभी संबंधित स्तरों पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। अतिरिक्त कार्यों से प्रभावित हुई पढ़ाई शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले चार महीनों के दौरान उन्हें एसआइआर जैसे प्रशासनिक कार्यों में प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तक व्यस्त रखा गया। इससे नियमित कक्षा शिक्षण प्रभावित हुआ। उनका कहना है कि जब शिक्षक कक्षा में पर्याप्त समय नहीं दे पाएंगे, तो छात्रों के प्रदर्शन पर असर पड़ना स्वाभाविक है। फिलहाल शिक्षा विभाग पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है। शिक्षकों के जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि छात्रों के हित में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।

पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति, सद्भावना रथ को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिखाई हरी झण्डी

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा में ब्रहृाकुमारी संस्थान द्वारा संचालित किए जा रहे पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति एवं सद्भावना रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अभियान समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे की भावना को सशक्त करेगा तथा प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा। प्रेम, शांति और विश्व बंधुत्व का संदेश लेकर गांव-गांव तक भ्रमण करने वाले रथ से एकता, प्रेम, सद्भावना व नशामुक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजागृति रथ में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंगों के दिव्य स्वरूपों की पूजा-अर्चना की। रीवा के राजनिवास सर्किट हाउस में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ब्रहृाकुमारी संस्थान द्वारा चलाए जा रहे जन जागरण अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पावन और आध्यात्मिक कार्य प्रदेश में विश्व बंधुत्व की भावना जागृत करने में सहायक सिद्ध होगा। ब्रहृाकुमारी संस्थान की भोपाल जोन की डायरेक्टर बीके निर्मला के निर्देशन में जन जागरण अभियान अंतर्गत ज्योतिर्लिंग रथ रीवा जिले में महाशिवरात्रि 2027 तक भ्रमण करेगा। कार्यक्रम में जिला भाजपाध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता सहित ब्रम्हकुमारी संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

राज्यपाल पटेल बोले – सशस्त्र सेना झंडा निधि में योगदान, राष्ट्र भक्ति की सशक्त अभिव्यक्ति

भोपाल.  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि करूणा और दया मानव का मूल स्वभाव है। दान अंतर्रात्मा की आवाज है। यह आत्मीय भाव से की गयी सहयोग की पहल है। इस भावना को जरूरतमंदों की सेवा में लगाने में ही जीवन की सार्थकता है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र सेना झंडा कोष में उदार योगदान हमारे सैनिकों और उनके परिवारों का केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति की सशक्त अभिव्यक्ति है। झंडा निधि में सहयोग राष्ट्र सेवा में समर्पित वीरों के प्रति हमारे कर्तव्य पालन का अवसर है। राज्यपाल पटेल ने प्रदेशवासियों का आहवान किया कि सैनिक कल्याण के लिए अपनी क्षमता के अनुसार अधिक से अधिक दान दें। साथ ही अन्य लोगों को भी प्रेरित करें।   राज्यपाल पटेल मंगलवार को समामेलित विशेष निधि प्रबंध समिति की बैठक उपरांत लोकभवन में आयोजित सशस्त्र सेना झंडा निधि में विशेष योगदान देने वालों के अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लक्ष्य से अधिक राशि संग्रहण के लिए संभागायुक्त जबलपुर धनंजय सिंह भदौरिया, हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन, अलीराजपुर कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर, नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा और दानदाताओं को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव गृह के.सी. गुप्ता, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, सचिव गृह विभाग श्रीमती शिल्पा गुप्ता, जी.ओ.सी. मध्यप्रदेश मेजर जनरल संजय गौतम, ब्रिगेडियर शरद नायर और विकास बत्रा सहित सैनिक कल्याण बोर्ड मध्यप्रदेश के पदाधिकारी, प्रबंध समिति के सदस्य मौजूद थे। लक्ष्यों से अधिक राशि संकलन पर दी बधाई राज्यपाल पटेल ने अभिनंदन समारोह में निर्धारित लक्ष्यों से अधिक राशि एकत्र करने वाले जिलों की सराहना की। सैनिक कल्याण प्रयासों में सहभागी सभी उपक्रमों, संगठनों और व्यक्तिगत दानदाताओं का आभार भी जताया। राष्ट्रीय सम्मेलन में विगत वर्ष सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिये उत्कृष्ट योगदान के लिए मध्यप्रदेश को सम्मानित किए जाने की बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक दक्षता का परिचायक नहीं, बल्कि हमारे समाज की जागरूकता, संवेदनशीलता और देशभक्ति का प्रतीक है। इसके लिए सभी संभाग आयुक्तों, कलेक्टरों तथा प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी और आशा जताई कि यह प्रयास निरंतर आगे भी जारी रहेंगे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारी शांति और सुरक्षा के लिए परिवार से दूर रहकर राष्ट्र धर्म का पालन करने वाले वीर सैनिकों के त्याग और बलिदान के प्रति आभारी होना हमारा सर्वोच्च मानवीय धर्म है। राष्ट्र की सीमाओं पर जब कोई सैनिक अपने प्राणों की बाज़ी लगाता है, तब वह केवल देश की रक्षा नहीं करता, बल्कि हमारे सुरक्षित वर्तमान और भविष्य की नींव को अपने रक्त से मजबूत बनाता है। उनके त्याग और बलिदान का स्मरण करते हुए उनके लिए वास्तविक सहयोग के प्रयासों में सक्रिय सहभागी बनना होगा। हमारा कर्तव्य है कि देश के इन प्रहरी सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें और उसे निभाएँ। उन्होंने कहा कि सैनिकों की निस्वार्थ सेवा, त्याग और बलिदान का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि हमारे आचरण में भी झलकना चाहिए। राज्यपाल पटेल ने युद्ध में घायल सैनिकों, शहीदों के परिजन और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए संवेदनशीलता और समर्पण के साथ सामाजिक दायित्वों के पालन का संकल्प भी दिलाया। राज्यपाल पटेल का समारोह में पुष्प-गुच्छ भेंटकर स्वागत किया तथा स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। दानदाताओं ने अपने अनुभव साझा किए। स्वागत उद्बोधन और आभार ब्रिगेडियर अरूण नायर ने व्यक्त किए।  कार्यों की गुणवत्ता पर दें विशेष बल : राज्यपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अभिनंदन समारोह से पूर्व समामेलित विशेष निधि प्रबंध समिति की 25वीं वार्षिक बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने प्रदेश में सैनिक कल्याण प्रयासों के संबंध में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। निर्माणाधीन कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष बल देते हुए समय सीमा में निर्माण कार्य को पूरा करने पर विशेष बल दिया।  राज्यपाल पटेल के समक्ष बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के विभिन्न व्यय प्रस्तावों की चर्चा की गई। बैठक में विगत वर्ष का पालन प्रतिवेदन, ऑडिट रिपोर्ट, व्यय प्रस्ताव सहित विभिन्न विषयों की विस्तार से समीक्षा की गई। विगत पॉच वर्षों के आय के स्त्रोत, अनुदान, सावधि जमा की ब्याज राशि आदि विभिन्न बिन्दुओं की जानकारी दी गई।   25 दानदाताओं ने किया लगभग 60 लाख का दान समारोह में बताया गया कि लक्ष्य से अधिक राशि संग्रहित करने वाले संभाग में प्रथम जबलपुर संभाग, द्वितीय उज्जैन संभाग और तृतीय स्थान शहडोल संभाग को प्राप्त हुआ है। प्रदेश के 43 जिलों ने लक्ष्य से अधिक राशि संग्रहित की है। राज्यपाल पटेल ने इस अवसर पर वर्ष 2024-25 में स्वेच्छा से 1 लाख रूपए से अधिक की राशि का दान करने वाले दान-दाताओं का अभिनंदन किया। सम्मानित दान-दाताओं में अध्यक्ष, मध्यप्रदेश भूतपूर्व सैनिक कलयाण समिति, भोपाल द्वारा 15 लाख,  आदित्य पटेल एवं वीरेन्द्र विश्वकर्मा विनर्स इन्सटीट्यूट इंदौर द्वारा 12 लाख 44 हजार 818, वल्लभ भाई पटेल एवं नवनीत पटेल, पटेल मोटर्स, इंदौर द्वारा 3 लाख 2 हजार, मनीष मठवाल एवं रवीन्द्र सिंह रावत, मुख्य कार्यालय, भारतीय स्टेट बैंक, भोपाल द्वारा 2 लाख 26 हजार 400, सूबेदार अमरजीत सिंह (से.नि.), सागर कैंट द्वारा 2 लाख, नरेन्द अहिरवार एवं डॉ. विकास मिश्रा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, भोपाल द्वारा 1 लाख 92 हजार 355, कुन्दन कुमार, क्षेत्रीय प्रमुख, क्षेत्रीय कार्यालय, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया सागर द्वारा 1 लाख 55 हजार 905, डॉ. नरेन्द्र कुमार ओझा एवं डॉ. राजेश कुमार दीक्षित सेवानिवृत्त प्राध्यापक मंच इंदौर द्वारा 1 लाख 50 हजार, राम कुमार गुप्ता एवं 1 अन्य जिला पंजीयक भोपाल द्वारा 1 लाख 48 हजार 610, मनीश कुमार मंग्रेलिया प्रबंध निदेशक, लेजरकट टेक्नालॉजी प्र.लि. भोपाल द्वारा 1 लाख 21 हजार, चतुर सिंह यादव एवं श्रीमती सुनीता यादव निदेशक, वन आदर्श विद्या निकेतन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, इंदौर द्वारा 1 लाख 11 हजार, विभू सूरी, यूनिक एडवरटाइजिंग रीवा द्वारा 1 लाख 11 हजार, अनन्त कुमार सोनी एवं श्रीमती साधना सोनी प्रतिकुलाधिपति, ए.के.एस. विश्वविद्यालय सतना द्वारा 1 लाख 11 हजार,  राकेश अग्रवाल आर के डेवलेपर्स, उज्जैन द्वारा 1 लाख 11 हजार, वीरेन्द्र सिंह धाकड़ एवं ब्रिजेश कुमार सिंह आबकारी विभाग, भोपाल द्वारा 1 लाख 10 हजार, डॉ. राकेश अग्रवाल एवं डॉ. आलोक खन्ना इन्डियन मेडिकल एसोसिएशन म.प्र. सतना शाखा, सतना द्वारा 1 लाख 10 हजार, डॉ. सुमित अग्रवाल एवं डॉ. श्रीमती प्राप्ति गुप्ता अग्रवाल सार्थक अस्पताल, सतना द्वारा 1 लाख 5 हजार, सुनील … Read more

फर्जीवाड़े पर बड़ा एक्शन: स्टोन क्रशरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी, पोर्टल सील कर करोड़ों का घोटाला उजागर

यमुना नगर. जिले में खनन से जुड़े ई-रवाना तंत्र में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साल 2024-25 में सील किए स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट के पोर्टल बंद करने की सिफारिश की है। बोर्ड ने इस संबंध में पत्र लिखा है। इससे कार्रवाई में देरी और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अवैध खनन रोकने के लिए 37 स्टोन क्रेशर व 17 स्क्रीनिंग प्लांट सहित 54 इकाइयों को सील किया गया था। बोर्ड के आरोप है कि कई जगह सील के बावजूद संचालन जारी रहा। पोर्टल पर खनिज की खरीद-बिक्री भी दर्ज होती रही। जांच में रिकार्ड और वास्तविक गतिविधियों में बड़ा अंतर मिला। इससे करोड़ों रुपये के अवैध लाभ और निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खान एवं भू-विज्ञान विभाग के एक बड़े अधिकारी और बिजली निगम पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं। विशेष एजेंसी से इस मामले की गोपनीय जांच भी शुरू हो गई। जिसमें बड़ी कार्रवाई की संभावना है। एंट्री कप्शन सोसायटी और यमुना सेवा समिति ने भी प्रधानमंत्री के नाम भी पत्र भेजा वहीं हरियाणा एंट्री कप्शन सोसायटी और यमुना सेवा समिति ने भी प्रधानमंत्री के नाम भी पत्र भेजा है, जिसमें खनन विभाग के पोर्टल पर पांच साल के खरीद-बिक्री ब्योरे की जांच की मांग रखी। आरोप है कि कई विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से निर्धारित खनन सामग्री से कई गुना ज्यादा अवैध खनन रिकार्ड में किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पोर्टल बंद करने के लिए पत्र लिखना चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल उठ रहे हैं कि जब लंबे समय से गड़बड़ियां सामने आ रही थीं, तब पहले सख्त कदम क्यों नहीं उठाए गए। सूत्रों के अनुसार, कई इकाइयों के सील होने के बाद भी उनके पोर्टल सक्रिय रहे। इससे आशंका मजबूत होती है कि सिस्टम का दुरुपयोग हुआ। सीलिंग टीम में बोर्ड के अलावा बिजली निगम, खनन विभाग, खरीद व बिक्री विभाग, पुलिस विभाग सहित छह विभाग के अधिकारी व कर्मचारी होते हैं। इसकी रिपोर्ट इलाके के एसडीएम व जिला उपायुक्त के पास भी जाती थी। वहां से भी उचित निगरानी नहीं हुई। अप्रैल को व्यासपुर एसडीएम जसपाल गिल की जांच के बाद मामले से पर्दा उठा गत एक अप्रैल को व्यासपुर एसडीएम जसपाल गिल की जांच के बाद मामले से पर्दा उठा था। हिंदुस्तान स्टोन ओरा इकाई पर गंभीर अनियमितताएं मिलीं। 16 अक्टूबर 2025 को सील हटाए जाने के बाद भी नियमों का पालन नहीं किया गया। मौके पर करीब 1500 मीट्रिक टन तैयार खनिज मिला। इससे साफ है कि संचालन जारी था। रिकार्ड की जांच में बड़े अंतर सामने आए। अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक 1,28,753 मीट्रिक टन खनिज की बिक्री दिखाई गई। 83,253 मीट्रिक टन खरीद दर्ज की गई। बाजार में खनिज का भाव 250 से 300 रुपये प्रति टन है। जबकि रिकार्ड में इसे करीब 100 रुपये प्रति टन दिखाया गया। इस अंतर के आधार पर कई करोड़ के अवैध लाभ की आशंका है। यहां पर खनन सामग्री पंचकूला स्थित कृष्णा इंटरप्राइजेज से दिखाई गई। बिजली की सप्लाई भी जारी थी। व्यासपुर थाना प्रभारी का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। मामले से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। ॉपोर्टल एंट्री व वाहनों की आवाजाही का मिलान किया गया जांच में ई-रवाना डाटा, पोर्टल एंट्री व वाहनों की आवाजाही का मिलान किया गया। इसमें भारी अंतर मिला। कई ट्रकों की आवाजाही का रिकार्ड नहीं मिला, जबकि पोर्टल पर सप्लाई दर्ज थी। यहीं से पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं। बाहर की आपूर्ति दिखाकर स्थानीय स्तर पर लेन-देन करने के संकेत भी सामने आए हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कार्रवाई सीमित होती गई। यह भी बड़ा सवाल बन गया है। जिन इकाइयों पर सील लगी थी, उनके पोर्टल समय पर बंद नहीं किए गए। इससे निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। दूसरी ओर जिले में प्रदूषण को लेकर पहले भी बड़ा अभियान चलाया गया था। वर्ष 2024 से 2025 के दौरान 37 स्टोन क्रशर और 17 स्क्रीनिंग प्लांट सील किए गए थे। इन इकाइयों के खिलाफ बंद करने के आदेश जारी किए गए थे। मौके पर जाकर प्लांट बंद कर सील लगाए गए। ये स्टोन क्रशर शामिल डीप स्क्रीनिंग प्लांट एवं स्टोन क्रशर, चौधरी इंडस्ट्रीज, जय भोले स्टोन क्रशर, दहिया एंड कंपनी स्क्रीनिंग प्लांट व सतलुज स्टोन क्रशर, जय लक्ष्मी मिनरल स्टोन क्रशर महियुद्दीनपुर, पोला स्क्रीनिंग एंड स्टोन क्रशर, वैष्णवी स्टोन क्रशर नगली-32, इंजनिक्स इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड, सालासर स्टोन क्रशर रुलाखेड़ी, मोहित स्टोन क्रशर, जय गणपति स्टोन क्रशर, हजारा बिल्डर ग्रुप स्टोन क्रशर, हीरा स्टोन क्रशर, कश्मीर स्टोन क्रशर डोईवाला, पटियाला स्टोन क्रशर, प्रकाश स्टोन क्रशर बल्लेवाला, जय माता दी स्टोन क्रशर, गोयल स्टोन क्रशर डोईवाला, सरवारा स्टोन क्रशर, कमलेश स्टोन क्रशर, संधू स्टोन क्रशर, जय मां वैष्णो इंटरप्राइजेज स्टोन क्रशर, रेबुटल स्टोन क्रशर बेलगढ़, श्री बालाजी हनुमान ट्रेडर कांसली, शिव शक्ति घोड़ो पीपली, नीलकंठ स्टोन क्रशर एंड स्क्रीनिंग प्लांट, हरियाणा स्टोन क्रशर, सतगुरदेव स्टोन क्रशर, अम्बे इंटरप्राइजेस, अधिष्टा स्टोन क्रशर माजरी टापू, हिंदुस्तान स्टोन ओरा रानीपुर, खुशी स्टोन क्रशर, बीआर स्टोन क्रशर रामपुर गैंदा, जय श्रीराम स्टोन क्रशर नथनपुर, श्रीशिव साईं स्टोन क्रशर घीरोबानी, भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी स्टोन क्रशर भगवानपुर। ये स्क्रीनिंग प्लांट सूची में एएन ट्रांसपोर्टेशन स्क्रीनिंग प्लांट नगली-32, शिवम स्क्रीनिंग प्लांट लाकड़मय प्रतापनगर, अमीन स्क्रीनिंग प्लांट, ढांडा वाशिंग एंड स्क्रीनिंग प्लांट, कायतुरन हिंदुस्तान प्राइवेट लिमिटेड स्वाबरी, आरके एंटरप्राइजेज मांडेवाला, जय भोले स्क्रीनिंग प्लांट, डोगरा स्क्रीनिंग प्लांट महियुद्दीनपुर, शिव शक्ति मिनरल बेलगढ़, जीएस स्क्रीनिंग प्लांट यूनिट-2 भटूवाला, श्री राम स्क्रीनिंग प्लांट निजामपुर, यमुना स्क्रीनिंग प्लांट, गुरु नानक मिनरल स्क्रीनिंग प्लांट, गुरदयाल सिंह स्क्रीनिंग प्लांट बेलगढ़, हिंदुस्तान स्टोन ओरा स्क्रीनिंग प्लांट (रानीपुर) प्रमुख हैं। अन्य कई इकाइयों पर भी कार्रवाई की गई थी। इन इकाइयों पर कार्रवाई वायु अधिनियम 1981 और जल अधिनियम 1974 के तहत की गई। जिनके पास संचालन की अनुमति नहीं थी या जो निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषण फैला रहे थे, उन्हें पहले नोटिस दिया गया। इसके बाद भी सुधार न होने पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। सबसे अधिक कार्रवाई यमुना किनारे व खनन क्षेत्र में की गई। महियुद्दीनपुर, बेलगढ़, माजरी टापू, डोईवाला, नगली-32, रुलाखेड़ी, रानीपुर व प्रतापनगर में काफी संख्या में इकाइयों को … Read more

भोपाल में आपराधिक न्याय प्रणाली में AI के उपयोग पर राष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन

भोपाल.  भोपाल में आज पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) द्वारा एक विशेष सम्मलेन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी (CAPT) और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के सहयोग से "आपराधिक न्याय प्रणाली में एआई (AI) का उपयोग" विषय पर आधारित था।  आलोक रंजन (महानिदेशक, NCRB एवं BPR&D) के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में न्यायपालिका, पुलिस, फॉरेंसिक और जेल प्रशासन के 170 से अधिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि नई तकनीक की मदद से न्याय प्रणाली को कैसे बेहतर बनाया जाए। सम्मेलन का उद्घाटन संबोधन माननीय न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, निदेशक, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भारत, भोपाल द्वारा किया गया, साथ ही आलोक रंजन, आईपीएस, महानिदेशक, एनसीआरबी एवं बीपीआरएंडडी, नई दिल्ली, गृह मंत्रालय द्वारा विशेष संबोधन दिया गया। सम्मेलन में आपराधिक न्याय प्रणाली के पांच प्रमुख स्तंभों—न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक तथा सुधारात्मक प्रशासन—में एआई की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया तथा इसके संतुलित एवं जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया। प्रतिभागियों ने एल्गोरिदमिक पक्षपात, फॉल्स पॉजिटिव तथा स्वचालित प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता जैसी प्रमुख चुनौतियों पर भी विचार किया। भारत में विधिक एवं संस्थागत प्रतिक्रियाओं, जैसे उच्चतम न्यायालय की एआई पहलों तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा जेनरेटिव एआई के उपयोग को विनियमित करने हेतु जारी दिशा-निर्देशों पर भी चर्चा की गई। प्रत्येक सत्र के पश्चात प्रश्नोत्तर, संवाद, सर्वोत्तम अभ्यास एवं केस स्टडी पर विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन में एआई-जनित साक्ष्यों की स्वीकार्यता, डीपफेक से संबंधित चिंताओं तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की प्रामाणिकता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। साथ ही, गोपनीयता, निगरानी एवं मानवाधिकारों से संबंधित नैतिक पहलुओं को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। सम्मेलन का निष्कर्ष यह रहा कि एआई आपराधिक न्याय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण “फोर्स मल्टीप्लायर” है, परंतु इसके प्रभावी उपयोग हेतु क्षमता निर्माण, स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) तथा मानव निगरानी आवश्यक है, ताकि पारदर्शिता, जवाबदेही एवं विधिक वैधता सुनिश्चित की जा सके। आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रत्येक स्तंभ में एआई के उपयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई, जिससे इसके शीघ्र एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक ठोस रोडमैप तैयार किया जा सके।

पंजाब में BLO ड्यूटी पर कड़ा रुख, मुख्य चुनाव अधिकारी पंजाब ने दिए स्पष्ट निर्देश

चंडीगढ़. पंजाब में जनगणना की तैयारियां शुरू हो गई हैं। जनगणना को लेकर मुख्य चुनाव अधिकारी ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि बी.एस.ओ. (बूथ लेवल ऑफिसर) जनगणना ड्यूटी नहीं निभाएंगे। दरअसल राज्य में जनगणना के लिए कर्मचारियों/अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपनी शुरू कर दी गई हैं। प्रशासन ने BLO को भी जनगणना के लिए नियुक्त कर दिया था, पर जब मामला मुख्य चुनाव अधिकारी के पास पहुंचा तो उन्होंने साफ किया कि BLO जनगणना की ड्यूटी नहीं निभाएंगे। CEO पंजाब ने सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को जनगणना की ड्यूटी पर नियुक्त BLO को तुरंत हटाने के निर्देश दिए है। CEO का तर्क है कि पंजाब में एस.आई.आर. होने वाला है और BLO इसकी तैयारी में व्यस्त हैं। B.L.O. एक समय में दो काम नहीं संभाल सकते। CEO के निर्देशों के बाद जिला अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों को जनगणना के लिए B.L.O. को तैनात न करने का निर्देश दिया है। यह भी कहा गया है कि अगर किसी B.L.O. को जनगणना के लिए नियुक्त किया जाता है तो उसे हटा दिया जाएगा और किसी दूसरे अधिकारी उसकी जगह बदल दिया जाएगा। एस.आई.आर. से पहले वोटर लिस्ट में किसी भी गलती को ठीक करने के लिए मैपिंग की जा रही है। पंजाब में मैपिंग 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है पर एस.आई.आर. शुरू होने तक इसे 100 प्रतिशत पूरा किया जाना है। कई जिलों में मैपिंग का काम 70 प्रतिशत से भी कम है। चुनाव दफ्तर के अधिकारियों के अनुसार लुधियाना में 60 से 65 प्रतिशत मैपिंग हो गई है। नतीजतन BLO इस समय पूरे राज्य भर में मैपिंग प्रक्रिया में लगे हुए हैं, जिस कारण उनके लिए जनगणना के फर्ज को निभाना असंभव है।

युवाओं के लिए बड़ी पहल: जगदलपुर में अग्निवीर भर्ती हेतु निःशुल्क कोचिंग का ऐलान

जगदलपुर. भारतीय थल सेना में अपनी सेवाएं देने का सपना देख रहे जिले के युवाओं के लिए जिला प्रशासन ने सहायता का हाथ बढ़ाया है। जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र जगदलपुर से मिली जानकारी के अनुसार जून 2026 में प्रस्तावित अग्निवीर सेना भर्ती की ऑनलाइन परीक्षा को ध्यान में रखते हुए जिले के पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए निःशुल्क कोचिंग क्लास आयोजित की जा रही है। यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी 4 मई से शुरू होकर 4 जून तक संचालित किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को लिखित परीक्षा के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। इस वर्ष बस्तर जिले से कुल 620 अभ्यर्थियों ने थल सेना की वेबसाइट पर अपना सफल पंजीकरण कराया है। इन युवाओं को परीक्षा की बारीकियां समझाने और उनकी तैयारी को पुख्ता करने की दिशा में निःशुल्क कोचिंग प्रदान करने हेतु जिला प्रशासन द्वारा 30 अप्रैल तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक उम्मीदवार रोजगार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://erojgar.cg.gov.in/ पर जाकर या विभाग द्वारा जारी क्यूआर कोड को स्कैन करके अपना आवेदन ऑनलाइन माध्यम से जमा कर सकते हैं। इस निःशुल्क प्रशिक्षण का लाभ केवल वही युवा उठा पाएंगे जिनके पास रोजगार कार्यालय का वैध पंजीयन और अग्निवीर थल सेना भर्ती 2026 का आधिकारिक पंजीकरण क्रमांक उपलब्ध होगा। 

महिला आरक्षण बिल पर सियासत गरम: अरुण साव बोले- महिलाएं कांग्रेस को नहीं करेंगी माफ

रायपुर. नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लोकसभा में पारित नहीं हो पाने से पहले ही भाजपा नेताओं का गुस्से पर आज छत्तीसगढ़ पहुंची कांग्रेस सांसद रंजीता रंजन के बयान ने आग में घी डालने का काम किया. यह गुस्सा उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बयान में साफ नजर आया, जब उन्होंने बिल पारित होने को कांग्रेस की ऐतिहासिक गलती करार देते हुए कहा कि इसके लिए छत्तीसगढ़ की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में पत्रकारों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लोकसभा में पारित नहीं हो पाने पर कहा कि वास्तव में देश की आधी आबादी के साथ अन्याय और धोखा हुआ है. दशकों तक नारी शक्ति को उनके अधिकार से वंचित किया गया है. जब नगरीय निकायों एवं पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण मिला हुआ है, तो उन्हें विधानसभा और लोकसभा में आरक्षण क्यों नहीं मिलना चाहिए? उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने पिछले चार दशकों से महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित रखा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने प्रयत्न किया कि आधी आबादी को उनका अधिकार मिले, लेकिन कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने षड्यंत्र करके नारी शक्ति को फिर से उनके अधिकार से वंचित किया है. उनकी आवाज को और बुलंद करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है. उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि ये कितनी हास्यास्पद बात है कि छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ लोगों की उपेक्षा करके जिस रंजीता रंजन को राज्यसभा में भेजा गया, वही रंजीता रंजन जी आज छत्तीसगढ़ आ रही हैं. जिसने संसद में बिल के खिलाफ समर्थन कर छत्तीसगढ़ के माताएं और बहनों को अधिकार से वंचित किया. साव ने कहा कि वास्तव में कांग्रेस छत्तीसगढ़ के साथ और छत्तीसगढ़ की आधी आबादी के साथ धोखा हुआ है. भविष्य में कांग्रेस को यह बहुत भारी पड़ने वाली है. छत्तीसगढ़ की माताएं-बहनें कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेगी. उनके अधिकारों से वंचित करने वाली ही आज इस विषय में सवाल करने आ रही है, ये कितनी हास्यास्पद बात है. उन्हें तो पहले छत्तीसगढ़ की आधी आबादी के सवालों का जवाब देना होगा.

योगी सरकार की योजना से निराश्रित महिलाएं हो रही हैं सशक्त, 40 लाख से अधिक महिलाओं को मिल रही विधवा पेंशन

योगी सरकार की पहल से सशक्त हो रहीं निराश्रित महिलाएं, 40 लाख से अधिक को मिल रहा विधवा पेंशन का लाभ महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार सरकार का लक्ष्य: कोई भी पात्र महिला योजना से न रहे वंचित लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा के स्तर पर मजबूत बनाने के लिए लगातार योजनाएं लागू कर रही है। इसी क्रम में निराश्रित महिला (विधवा) पेंशन योजना अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत प्रदेश की 40.32 लाख से अधिक विधवा महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है।  चार किस्तों में विधवा महिलाओं को मिल रही सहायता प्रदेश की योगी सरकार इस योजना के जरिए उन महिलाओं तक सीधी मदद पहुंचा रही है, जिनके सामने पति के निधन के बाद आजीविका का संकट खड़ा हो जाता है। महिला कल्याण विभाग की इस योजना के तहत प्रदेश की कुल 40,32,629 महिलाओं को लाभ मिला है। यह पेंशन सालभर में चार किस्तों में जारी की जाती है, जिसमें हर तीन महीने की राशि एक साथ दी जाती है। इसमें अप्रैल-मई-जून, जुलाई-अगस्त-सितंबर, अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर और जनवरी-फरवरी-मार्च की किस्तें शामिल हैं। साल 2021 में विधवा पेंशन को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए सहायता राशि को 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया गया था। यह राशि सीधे लाभार्थियों के आधार लिंक बैंक खातों में PFMS के माध्यम से ट्रांसफर की जाती है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2016-17 से पहले जहां करीब 17.31 लाख महिलाएं इस योजना का लाभ ले रही थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 40.32 लाख से अधिक हो चुकी है। यह विस्तार दर्शाता है कि सरकार लगातार ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद महिलाओं को योजना से जोड़ रही है। कोई भी पात्र महिला योजना से वंचित ना रहे योजना के तहत सिर्फ वही महिलाएं पात्र हैं जो उत्तर प्रदेश की स्थायी निवासी हों। साथ ही जिनके पति का निधन हो चुका हो, जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो और परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपये से कम हो उन्हें ही लाभ मिल सकता है। इस संबंध में महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी पात्र महिला योजना से वंचित न रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और सम्मान के साथ जीवन जीने की दिशा में प्रेरित करती है।

देहदान कर मृत्यु के बाद भी सेवा का सबक सिखा गए चक्रवर्ती

भिलाई (वैशाली नगर).   सुबोध कुमार चक्रवर्ती की देहदान की इच्छा के अनुरूप कल उनके निधन केपश्चात् परिवार द्वारा मेडिकल कॉलेज को उनका शरीर सौंप दिया गया । चक्रवर्ती  ने तीन वर्ष पूर्व नवदृष्टि फाउंडेशन के माध्यम से देहदान का संकल्प लिया था । कल मध्य रात्रि सेक्टर 9 हॉस्पिटल में उनके निधन का समाचार मिलते ही उनकी पुत्री  शिल्पी घोष चौधरी ने गुजरात से नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्यों को फोन कर पिता के देहदान कर उनकी इच्छा पूर्ण की । परिवार के सदस्यों पुत्री शिल्पी घोष चौधरी, पत्नी श्रीमती कल्पिता चक्रवर्ती एवं भांजे रंजीत चक्रबोर्ती की सहमति से देहदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। नवदृष्टि फाउंडेशन के कुलवंत भाटिया एवं  प्रभु दयाल उजाला ने वैशाली नगर स्थित निवास पहुंचकर देहदान प्रक्रीया  में सहयोग किया। शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजलि वंजारी के निर्देशन में संदीप रिशबुड, दीपक रवानी एवं दयाराम की टीम द्वारा देहदान की प्रक्रिया पूर्ण की गई। स्वर्गीय चक्रवर्ती की पत्नी श्रीमती कल्पिता चक्रवर्ती ने बताया कि उनके पति ने जीवनकाल में सदैव समाज सेवा को महत्व दिया और देहदान का संकल्प भी उसी भावना से लिया था।  आज उनके परिवार ने अपने मुखिया की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए यह पुण्य कार्य संपन्न किया।उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने स्वयं भी अपने पति के साथ देहदान का संकल्प लिया है। पुत्री शिल्पी घोष चौधरी ने भावुक होकर कहा कि पिता के निधन से पूरा परिवार गहरे सदमे में है, किन्तु उनकी अंतिम इच्छा को पूरा कर उन्हें गर्व एवं आत्मसंतोष की अनुभूति हो रही है। नवदृष्टि फाउंडेशन के प्रभु दयाल उजाला ने चक्रवर्ती परिवार के इस साहसिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम समाज में देहदान एवं नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नवदृष्टि फाउंडेशन की ओर से अनिल बल्लेवार, कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया, प्रवीण तिवारी, मुकेश आढ़तिया, हरमन दुलई, रितेश जैन, राजेश पारख, जितेंद्र हासवानी, मंगल अग्रवाल, किरण भंडारी, उज्जवल पींचा, सत्येंद्र राजपूत, सुरेश जैन, पीयूष मालवीय, दीपक बंसल, विकास जायसवाल, मुकेश राठी, प्रभु दयाल उजाला, प्रमोद बाघ, सपन जैन, यतीन्द्र चावड़ा, जितेंद्र कारिया, बंसी अग्रवाल, अभिजीत पारख, मोहित अग्रवाल, चेतन जैन, दयाराम टांक, विनोद जैन एवं राकेश जैन सहित अन्य सदस्यों ने स्वर्गीय सुबोध कुमार चक्रवर्ती को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए चक्रवर्ती परिवार को इस पुनीत कार्य हेतु साधुवाद दिया।