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एक हजार झुग्गियां जलकर खाक: सिलेंडर धमाकों से फैली आग

लखनऊ लखनऊ के विकास नगर में बुधवार की शाम लगी आग आठ घंटे की मशक्कत के बाद देर रात बुझा तो ली गई लेकिन कई अपनों की तलाश अब भी जारी है। इस बीच पुलिस ने आग बुझाने के बाद दो बच्चों की लाश बरामद की है। दोनों बच्चों की उम्र दो साल के आसपास बताई जा रही है। लगभग एक हजार झुग्गी झोपड़ियों में लगी आग से सबकुछ खाक हो गया है। सौ के करीब एलपीजी सिलेंडर और बाइकों की टंकियां फटने से आग भड़कती रही। इससे करीब दस किलोमीटर के इलाके में धुएं का गुबार देखा गया। विकास नगर में मुंशीपुलिया से आगे सीतापुर बाईपास किनारे सैकड़ों झुग्गी झोपड़ियां लंबे समय से आबाद थीं। बस्ती के विशाल गौतम का दावा है कि शाम करीब चार बजे देशी शराब ठेके के बगल में बनी कैंटीन से आग की लपटें एकाएक उठीं और विकराल होने लगीं। उनके साथ ही पड़ोसी धर्मेंद्र, बबलू, विमलेश, राम स्वरूप, मंत्री, मो. आसिफ कुरैशी, रहमान, सुनीता और करन की झोपड़ियां जलने लगीं। लोगों ने पानी फेंककर काबू पाने का प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली। इस बीच, झोपड़ियों में रखे गैस सिलेंडर ताबड़तोड़ धमाकों के साथ फटने लगे और पूरी बस्ती धू-धूकर जलने लगी। करीब डेढ़ घंटे बाद दमकल और पुलिस पहुंची। राहत व बचाव के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ भी पहुंच गए। मौके पर कोई कह रहा था कि मेरा बच्चा गायब है तो कोई बेटी को खोज रहा था। किसी को पिता तो कोई भाई को तलाश रहा था। पुलिस और सिविल डिफेंस के लोग उन्हें रोक रहे थे लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं था। सिविल डिफेंस ने मानव शृंखला बनाकर लोगों को रोका। इस बीच, दम घोंटू धुएं से आसपास के लोग बेचैनी महसूस करने लगे। सभी अपने घरों को सुरक्षित करने की कोशिश में थे। बस्ती के लोग नम आंखों से अपने आशियाने राख होते देख रहे थे। देर रात तक कोहराम जैसी स्थिति बनी रही। फायर ब्रिगेड ने चारों तरफ से पानी डाल कर किसी तरह देर रात आग पर काबू पाया जा सका। इसके बाद शुरू हुई तलाशी में दो बच्चों की लाश मिली है। डीसीपी पूर्वी दीक्षा शर्मा ने बताया आग पर काबू पा लिया गया था। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ अब भी राहत कार्य में लगी है। इस पूरी घटना में दो बच्चों की मौत हुई है। फोटो के जरिए उनके पैरेंट्स की पहचान कराई जा रही है। कुछ लोगों को रात में रैन बसेरे में रखा गया तो काफी लोग सड़क किनारे ही खुले में रातभर रहे। सुबह होते ही लोग अपने बचे सामानों को बंटोरने और अपनों को खोजने में जुटे रहे। हालांकि भीषण आग में सबकुछ राख होने से खाने के भी लाले पड़ने की आशंका हो गई है।

संभल में सरकारी जमीन पर बने इमामबाड़ा और ईदगाह पर चला बुलडोजर, जमींदोज किया गया

 संभल उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है. सदर कोतवाली क्षेत्र के बिछौली गांव में सरकारी जमीन पर बने इमामबाड़ा और ईदगाह को ध्वस्त करने के लिए प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची. इस दौरान बुलडोजर से अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया गया।  यह कार्रवाई एसडीएम निधि पटेल के नेतृत्व में की गई, जिसमें नायब तहसीलदार दीपक जुरैल और राजस्व विभाग के कई कर्मचारी शामिल रहे. मौके पर किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. सदर कोतवाली पुलिस के साथ-साथ आरआरएफ और पीएसी के जवान भी तैनात रहे, जिससे पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया।  प्रशासन के अनुसार, गाटा संख्या 1240 की 168 वर्गमीटर जमीन, जो राजस्व रिकॉर्ड में खाद के गड्ढों के रूप में दर्ज है, उस पर इमामबाड़ा बनाकर अवैध कब्जा किया गया था. वहीं गाटा संख्या 1242 की 87 वर्गमीटर भूमि, जो पशुचर के लिए आरक्षित है, उस पर ईदगाह का निर्माण कर लिया गया था।  इस मामले की शुरुआत जनवरी महीने में हुई थी, जब लेखपालों की टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि की पैमाइश की थी. 14 जनवरी को जांच रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार को सौंपी गई, जिसमें स्पष्ट रूप से अवैध कब्जे की पुष्टि हुई. इसके बाद 18 जनवरी को धारा 67 के तहत कब्जा हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।  कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 31 जनवरी को तहसीलदार कोर्ट ने अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया. उसी आदेश के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।  अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जो भी व्यक्ति या संस्था नियमों का उल्लंघन करेगी, उसके खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी. कार्रवाई के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किया गया।   

बिहार में डिजिटल जनगणना की तैयारी, नागरिक खुद भर सकेंगे परिवार का डेटा

पटना  बिहार में 'जनगणना से जन-कल्याण' के संकल्प की बारी आ गई है। जनगणना 2027 को इस बार पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल ढांचे पर उतारा गया है। इस प्रक्रिया का सबसे अनूठा पहलू 'स्व-भागीदारी' है। सरकार ने नागरिकों को ये अवसर दिया है कि वे 17 अप्रैल से 1 मई के बीच स्वयं अपने परिवार का विवरण पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। ये केवल एक डेटा नहीं बल्कि राज्य के भविष्य निर्माण में प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। तकनीक के इस संगम से समय की बचत होगी और गलतियों की संभावना कम रह जाएगी आपका डेटा ही आपकी पहचान जनगणना अधिनियम 1948 के तहत प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखने की गारंटी दी गई है। सभी डिजिटल टूल्स में लेटेस्ट एन्क्रिप्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित रहे। 2 मई से शुरू होने वाले जमीनी सर्वे से पहले नागरिकों से अपील की गई है कि वे मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए इस सरल और सुरक्षित स्व-गणना प्रक्रिया का हिस्सा बनें। इस डिजिटल 'यज्ञ' में आपकी भागीदारी ही पारदर्शी और समृद्ध बिहार की नींव रखेगी, जिससे भविष्य की जनकल्याणकारी योजनाओं को सही दिशा मिल सकेगी। 17 अप्रैल से 1 मई तक स्व-गणना बिहार में स्व-गणना (Self Enumeration) की अवधि 17 अप्रैल से 1 मई 2026 तक निर्धारित है। इस अवधि में राज्य के नागरिक https://se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर स्वयं अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में परिवार के मुखिया का नाम और किसी भी एक सदस्य के मोबाइल नंबर से पंजीकरण कर सकते हैं। स्व-गणना करने के बाद एक Self Enumeration ID प्राप्त होगी, जिसे सुरक्षित रखना होगा। प्रगणक (जनगणना करने वाले) के घर आने पर उन्हें उपलब्ध कराना होगा। स्व-गणना की सुविधा सुरक्षित, सरल और समय की बचत करने वाली प्रक्रिया है। इससे नागरिकों को घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलेगी। जनगणना कार्य को समयबद्ध और सुगम तरीके से संपन्न करने में सहायता मिलेगी। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत एकत्र किया गया ये डेटा पूरी तरह से गोपनीय है। सभी डिजिटल टूल्स में डेटा एन्क्रिप्टेड (डिजिटल जानकारी गुप्त कोड में बदल जाती है, फिर केवल अधिकृत व्यक्ति ही उसे पढ़ पाता है) है, जो नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करता है। जनगणना से जन-कल्याण के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए स्व-गणना की सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। 2-31 मई 2026 तक घर-घर सर्वे जनगणना कार्य निदेशालय की डायरेक्टर रंजीता और जनगणना कार्य सह नागरिक निबंधन के डिप्टी डायरेक्टर संजीव कुमार ने भारत की जनगणना- 2027 से संबंधित जानकारियां साझा की। जनगणना कार्य निदेशालय, बिहार के सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि 'जनगणना से जन-कल्याण' के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए स्व-गणना की सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण 'मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना' का काम बिहार में 2-31 मई 2026 तक होने जा रहा है। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न की जाएगी। जिसमें नागरिकों के लिए स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। जनगणना में स्व-गणना क्या है और इससे क्या फायदा है? नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए अपना और अपने परिवार का डिटेल भरते हैं। इसमें प्रगणक (enumerator) के घर आने का इंतजार नहीं करना पड़ता और त्रुटियां कम होती हैं। स्व-गणना से समय की बचत होती है। डेटा कलेक्शन को आधुनिक बनाता है। समय की बचत होती है। स्व-गणना कैसे और कहां करें, बिहार में कब तक होगा? भारत सरकार के आधिकारिक जनगणना पोर्टल https://se.census.gov.in या मोबाइल ऐप पर लॉगिन करके।  आधार या मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण कर अपनी और परिवार की जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं।  जनगणना के प्रथम चरण (मकान सूचीकरण) के दौरान निश्चित समय के लिए उपलब्ध है, बिहार में 17 अप्रैल से 1 मई तक। भारत की जनगणना-2027 में अपना नाम कैसे जोड़ें?  जनगणना के आधिकारिक वेब पोर्टल https://se.census.gov.in पर मोबाइल नंबर और आधार से पंजीकृत करें।  स्व-गणना लॉगिन करने के बाद निर्धारित प्रपत्र में अपने और अपने परिवार के सदस्यों का विवरण सावधानीपूर्वक ऑनलाइन भरें। डेटा जमा करने के बाद प्राप्त संदर्भ संख्या (Reference Number) को सुरक्षित रखें, फिर प्रगणक को दिखाकर वेरिफाई कराएं। जनगणना में क्या-क्या पूछा जाता है और क्यों पूछा जाता है? परिवार के सदस्यों का नाम, आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, भाषा, शिक्षा, जाति, व्यवसाय और घर में उपलब्ध सुविधाएं। ये डेटा भविष्य की सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के बेहतर नियोजन के लिए आधार बनता है। जनगणना से जुड़े डेटा से निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन और विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण और नीति निर्धारण सुनिश्चित होता है। जनगणना 2027 के दौरान कौन-कौन से सवाल पूछे जाएंगे? भारत की जनगणना 2027 के तहत 17 अप्रैल से 1 मई तक चलने वाली स्व-गणना की प्रक्रिया में अधिकतम जनता की सहभागिता सुनिश्चित करने में पूरी सरकारी टीम लगी हुई है। पहली बार आम लोगों को इस माध्यम से खुद जनगणना में हिस्सा लेने का अवसर प्रदान किया गया है। डिजिटल मोड में होने वाली इस जनगणना के प्रथम चरण में 2 मई से 31 मई के बीच मकान सूचीकरण और आवास गणना किया जाना है। इस दौरान 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। इससे पहले 17 अप्रैल से इसी काम को आम लोग कहीं से भी पोर्टल https://se.census.gov.in के माध्यम से कर पाएंगे। इस दौरान 33 प्रश्न पूछे जाएंगे।     भवन संख्या (नगरपालिका या जनगणना संख्या)     घर/मकान संख्या     मकान के फर्श में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री     मकान की दीवारों में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री     मकान की छत में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री     मकान का उपयोग (आवासीय, व्यावसायिक, आदि)     मकान की स्थिति (अच्छी, रहने योग्य, जीर्ण-शीर्ण)     परिवार संख्या (Household Number)     परिवार के सदस्यों की कुल संख्या     परिवार के मुखिया का नाम     परिवार के मुखिया का लिंग     परिवार के मुखिया की सामाजिक स्थिति (SC/ST/OBC/Other)     मकान के स्वामित्व की स्थिति (स्वयं का या किराए का)     घर में रहने वाले … Read more

मथुरा नाव हादसा: पंकज मल्होत्रा का शव बरामद, मृतकों की संख्या 16, जलालाबाद में दुख का माहौल

जलालाबाद  मथुरा नाव हादसे में लापता चल रहे पंकज मल्होत्रा का शव बरामद कर लिया गया है। उनका शव हादसे वाली जगह से करीब ढाई किलोमीटर आगे देवराहा बाबा घाट और पानीगांव पुल के नीचे यमुना नदी में मिला।   प्रशासन और गोताखोरों की टीम पिछले सात दिनों से लगातार यमुना में सर्च ऑपरेशन चला रही थी। आज सुबह तलाशी अभियान के दौरान पंकज मल्होत्रा का शव पानी में उतराता हुआ दिखाई दिया जिसके बाद उसे बाहर निकालकर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। जलालाबाद के अग्रवाल कॉलोनी, गली नंबर एक के रहने वाले पंकज मल्होत्रा अपने मौसा-मौसी के साथ मथुरा गए थे। हादसे में उनके मौसा-मौसी की भी मौत हो चुकी है। पंकज का परिवार हादसे के बाद से मथुरा में अपने बेटे की तलाश में जुटे हुए थे। 10 अप्रैल को यमुना नदी में श्रद्धालुओं से भरी नाव अचानक असंतुलित होकर पलट गई थी। हादसे के बाद कई लोग नदी में डूब गए थे। तब से प्रशासन, पुलिस और गोताखोरों की टीम लगातार लापता लोगों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रही थी। सातवें दिन अंतिम लापता व्यक्ति का शव मिलने के बाद सर्च अभियान समाप्त कर दिया गया है।

भारत-नेपाल सीमा पर बड़ा फैसला, नेपाली नंबर गाड़ियों को ईंधन नहीं मिलेगा

 सीतामढ़ी नेपाल में ईंधन की बढ़ती कीमतों, आपूर्ति संकट और फ्यूल लॉकडाउन के बीच भारत ने भी कड़ा कदम उठाया है। सीमावर्ती इलाकों के पेट्रोल पंपों पर नेपाली नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल देने पर रोक लगा दी है। तेल कंपनियों ने प्रशासन के आदेश के बाद यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। भारत और नेपाल के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी अंतर लंबे समय से तस्करी को बढ़ावा दे रहा था। नेपाल के तराई क्षेत्र जैसे वीरगंज, विराटनगर, जनकपुर, नेपालगंज, अमलेखगंज, भालवाड़ी, धनगढ़ी आदि जगहो पर नेपाली 216.50 रुपया (भारतीय 135.35 भारतीय रुपया) पेट्रोल की कीमत है। जो की नेपाल से सटे भारतीय सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल दाम से 28.79 रुपया अधिक है। वही डीजल की कीमत 204.50 (127.82 भारतीय रुपया) है। जो 31.82 रुपया अधिक है। इसी कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध रूप से ईंधन खरीदकर नेपाल में बेचने का कारोबार तेजी से बढ़ रहा था। नेपाल सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दामों में अंतर ने कालाबाजारी और तस्करी के नेटवर्क को मजबूत कर दिया था, जिससे स्थानीय उपभोक्ताओं को भी परेशानी हो रही थी। नए आदेश के बाद सीतामढ़ी के सोनबरसा, सुरसंड, भिट्ठामोड़ और बैरगनिया समेत अन्य सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल पंपों पर नेपाली वाहनों को तेल देना वर्जित कर दिया गया है। भारत नेपाल सीमा स्थित बैरगनिया सीमा से सटे नंदवारा स्थित पेट्रोल पंप पर नेपाली को तेल न देने का पोस्टर भी लगा दिया गया हैं। बिहार इनके इन सात सीमवर्ती जिले में 400 अधिक पंप सीतामढ़ी जिले कुल 48 पेट्रोल पंप है। जिनमें नेपाल सीमा से सटे सोनबरसा, सुरसंड, परिहार, बैरगनिया, चोरौत और मेजरगंज के 5 से 10 किमी के दायरे में करीब 15 से ज्यादा पेट्रोल पंप है। वही नेपाल से सटे भारतीय सीमा के सात जिलों सीतामढ़ी, बेतिया, मोतिहारी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज मे लगभग 400 से अधिक पेट्रोल पंप है। इसमें बॉर्डर से 10 किलो मीटर के समीप 120 से ज्यादा पेट्रोल पंप है। नेपाली नंबर के वाहनों को ईंधन देने पर रोक सीतामढ़ी के जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि कंपनी के अधिकारियों एवं पेट्रोल पंप संचालकों से लगातार यह शिकायत प्राप्त हो रही थी कि नेपाली वाहनों द्वारा पेट्रोल, डीजल की कालाबाजारी एवं तस्करी की जा रही है। इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए तथा इसे रोकने के उद्देश्य से नेपाली नंबर के वाहनों को ईंधन देने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि, आवश्यक परिस्थितियों में केवल गंतव्य स्थान तक पहुंचने हेतु सीमित मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जायेगा। स्थानीय उपभोक्ताओं ने मिली राहत सीतामढ़ी पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित कुमार ने कहा कि नेपाली वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण स्थानीय उपभोक्ताओं, खासकर किसानों को डीजल के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा था। कई बार स्टॉक खत्म होने की स्थिति भी बन रही थी। नए नियम लागू होने के बाद अब स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है और आपूर्ति व्यवस्था बेहतर हुई है। आपात स्थिति में दे सकते हैं ईंधन प्रशासन ने सख्ती के बीच मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा है। निर्देशों के अनुसार, आपात स्थिति में नेपाली नागरिकों को 50 से 100 रुपये तक का सीमित ईंधन दिया जा सकता है। लेकिन, टैंक फुल या व्यावसायिक उपयोग के लिए ईंधन देने पर पूरी तरह रोक रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था केवल जरूरतमंदों की मदद के लिए है, न कि किसी भी प्रकार के व्यापारिक उपयोग के लिए। नेपाल में फ्यूल लॉकडाउन क्यों लगा? नेपाल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति बाधित होने के कारण ईंधन संकट गहरा गया है। हालात ऐसे हैं कि सरकार को सप्ताह में दो दिन का फ्यूल लॉकडाउन लागू करना पड़ा है। पिछले 75 वर्षों से भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल के लिए मदद करता रहा है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और उसे कई जरूरी सामान कम कीमत पर देता है, जिसमें पेट्रोल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स सबसे अहम हैं। भारतीय तेल कंपनियों के जरिए भारत नेपाल की लगभग 100% तेल जरूरतें पूरी करता है।  

साइबर फ्रॉड: पटना में बैंक अधिकारी को निवेश के नाम पर लगाया 97.06 लाख का चूना

पटना राजधानी पटना में एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से साइबर अपराधियों ने 97.06 लाख की ठगी की है। अब उन्होंने इसकी शिकायत साइबर थाना में की है। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी अमरेंद्र कुमार सिन्हा हैं, जो खुद बैंकिंग प्रणाली के विशेषज्ञ थे। वह अगस्त 2024 में पूर्णिया जिला में होम लोन ब्रांच में मुख्य प्रबंधक के पद से रिटायर हुए थे। वर्तमान में पटना के पुनाईचक इलाके में रहते हैं। फेसबुक विज्ञापन से हुई शुरुआत अमरेंद्र कुमार सिन्हा की ठगी की कहानी एक सोशल मीडिया विज्ञापन से शुरू हुई। फेसबुक पर उन्होंने वेपलोग नामक एक विज्ञापन पर क्लिक  किया था, जिसके बाद अमरेंद्र कुमार सिन्हा एक युवती के संपर्क में आए। उस युवती ने खुद का परिचय साक्षी अग्रवाल के रूप में दी थी। साक्षी ने खुद को मुंबई स्थित वीवी कंस्ट्रक्शन का सीईओ बताया। उसने अपने कार्यालय का पता खोजा सोसाइटी, वैशाली नगर, जोगेश्वरी, वेस्ट मुंबई बताया था। साक्षी ने बातचीत के दौरान अमरेन्द्र कुमार सिन्हा का भरोसा जीत लिया। फिर दोनों के बीच व्हाट्सएप चैट और वीडियो कॉल के जरिए नियमित बातचीत होने लगी, जिससे अमरेंद्र का उस पर भरोसा  लगातार गहरा होता चला गया। कमीशन और ऑडिट के नाम पर वसूली साक्षी ने अमरेंद्र को पॉलीअस फाइनेंस पिक नामक एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर 45 लाख रुपए निवेश करने के लिए कहा, लेकिन अमरेंद्र कुमार सिन्हा से मात्र 43 हजार रुपये निवेश किए। ज्यादा ठगी करने के लिए विशवास जीतना जरुरी था, इसलिए अमरेन्द्र  कुमार सिन्हा का विश्वास जीतने के लिए उन्हें 1,978 रुपए की निकासी करने दी। जब उनके पोर्टफोलियो की एसेट्स वैल्यू 3.50 लाख रुपए दिखने लगी, तो जालसाजों का असली खेल शुरू हुआ। अमरेंद्र कुमार सिन्हा अब 1 लाख रुपए की निकासी करने की कोशिश की तो साक्षी ने अमरेन्द्र सिन्हा से 45 लाख रुपए एक्सचेंज एंड कमीशन के तौर पर जमा करवा लिए। फिर ऑडिट के नाम पर 5.33 लाख रुपए जमा करने को कहा तो अमरेन्द्र कुमार सिन्हा ने 5.33 लाख रुपए जमा कर दिए। मां के नाम पर भी की ठगी साक्षी ने अमरेंद्र कुमार सिहा को व्यक्तिगत रूप से भी ठगा। उसने अपनी माँ की बीमारी का बहाना बनाया और कहा कि डॉक्टर को डॉलर में भुगतान करना है। अमरेंद्र ने उसकी मदद के लिए 1 लाख रुपये को डॉलर में कन्वर्ट करवाकर भेज दिए। करोड़ों का निवेश और हाथ में शून्य जैसे-जैसे निवेश की राशि बढ़ती गई, उसे निकालने की शर्तें भी कठिन होती गईं। कंपनी ने कहा कि कुल एसेट्स निकालने के लिए 95 लाख रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट देने होंगे। साक्षी ने नाटक किया कि उसने खुद इसकी व्यवस्था कर दी है, लेकिन 5 लाख रुपये कम पड़ रहे हैं। अमरेंद्र ने भरोसा करके वह 5 लाख भी दे दिए। इसके बाद स्टाफ की सैलरी के नाम पर 1.20 लाख रुपए भी लिए गए। जब अक्टूबर 2025 में उनका खाता फ्रीज कर दिया गया, तो साक्षी ने दिल्ली जाने और खाता खुलवाने के नाम पर 30 हजार रुपए और ऐंठ लिए। इस तरह धीरे-धीरे रिटायर्ड बैंक अधिकारी ने अपनी जीवन भर की कमाई के 97.06 लाख रुपये गंवा दिए। सभी जानकारी निकले फर्जी मामला दर्ज होने पर पुलिस ने मामले की जांच की तो पता चला कि साक्षी के द्वारा दे गई साड़ी जानकारियां झूठी थी। उसने खुद के बारे में जो कुछ बताया या फिर उसने अपने कार्यालय के बारे में जो कुछ भी बताया था, सब कुछ फर्जी था। पटना के साइबर थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और अब मामले की जांच की जा रही है।  

गाजियाबाद के इंदिरापुरम में लगी भीषण आग, लखनऊ जैसी स्थिति, आसमान में काले धुएं का गुबार

 गाजियाबाद लखनऊ के बाद अब गाजियाबाद के इंदिरापुरम में भीषण आग की घटना सामने आई है. यहां के कनावनी इलाके में स्थित झुग्गियों में आज अचानक आग लग गई, जिसने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया. आग इतनी तेजी से फैली कि कई झुग्गियां इसकी चपेट में आ गई हैं. आसमान पूरी तरह से काले धुएं के गुबार से भर गया है और तेजी से उठती लपटों को देख पूरे इलाके में अफरा-तफरी मची हुई है. अपनी जान बचाने के लिए लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग रहे हैं।  जैसे ही आग लगने की सूचना मिली, स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर विभाग को इसकी जानकारी दी. मौके पर दमकल की कई गाड़ियां पहुंच चुकी हैं और आग पर काबू पाने का काम जारी है. दमकल कर्मी लगातार मशक्कत कर रहे हैं ताकि आग को और ज्यादा फैलने से रोका जा सके. फिलहाल मौके पर फायर ब्रिगेड की टीमें तैनात हैं और लपटों को बुझाने की कोशिश की जा रही है। 

CBSE 10वीं रिजल्ट 2026: भागलपुर में शानदार प्रदर्शन, 32 स्कूलों का रिजल्ट जारी, 98% अंक लाकर टॉपर बना छात्र

भागलपुर. CBSE 10th Result 2026 BHAGALPUR : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम इस वर्ष पूरी तरह डिजिटल माध्यम से जारी किया गया, जिससे छात्रों को परिणाम देखने और अंकपत्र डाउनलोड करने में काफी सहूलियत मिली। विद्यार्थी उमंग एप और डिजिलॉकर जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने परिणाम आसानी से देख सके। इस बार भी भागलपुर जिले के छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। परिणाम जारी होने के बाद छात्र-छात्राओं में उत्साह देखने को मिला। डिजिटल व्यवस्था के कारण इस बार विद्यार्थियों को लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ा और वे तुरंत अपना रिजल्ट देख सके। स्कूलों में भी परिणाम को लेकर हलचल और खुशी का माहौल रहा। जिले के 5200 परीक्षार्थियों ने दी परीक्षा इस वर्ष भागलपुर जिले के लगभग 5200 विद्यार्थियों ने 32 विद्यालयों से परीक्षा में भाग लिया था। परिणाम घोषित होने के बाद कई स्कूलों में जश्न का माहौल देखने को मिला। विद्यार्थियों ने एक-दूसरे को बधाई देकर अपनी सफलता साझा की। डीएवी बरारी का शानदार प्रदर्शन, यश राज बने जिला टॉपर जिले में सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन डीएवी पब्लिक स्कूल, बरारी के यश राज ने किया, जिन्होंने 98.80 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिला टॉप किया। उनके इस प्रदर्शन ने विद्यालय और जिले दोनों का नाम रोशन किया है। विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। चार विद्यार्थियों ने हासिल किए 97 प्रतिशत अंक जिले में चार विद्यार्थियों ने 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इनमें डीएवी पब्लिक स्कूल, बरारी के देंवाश, चौहान पब्लिक स्कूल की स्वाति मिश्रा, बाल भारती विद्यालय, नवगछिया के मयंक माधव तथा न्यू होराइजन स्कूल की प्रिया कुमारी शामिल हैं। इन सभी ने मेहनत और अनुशासन से यह उपलब्धि हासिल की। 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले मेधावी विद्यार्थी भागलपुर जिले के कई विद्यार्थियों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिनमें राधा कुमारी (96.9%, चौहान पब्लिक स्कूल), सुतिक्षण वत्स झा (96.80%, हैप्पी वैली स्कूल), रिया चौधरी (96.7%, चौहान पब्लिक स्कूल), अंशु कुमार (96.6%, डीएवी पब्लिक स्कूल), सोनाक्षी कुमारी (96.2%, जवाहर नवोदय विद्यालय नगरपारा), मन्नू जी (96%, आनंदराम ढांनढानियां सरस्वती विद्या मंदिर), रचना शर्मा (95.8%, चौहान पब्लिक स्कूल), हर्षित राज (95.8%, एसकेपी विद्या विहार), आकृति राज (95.8%, डिवाइन हैप्पी स्कूल), देविका (95.2%, नवयुग विद्यालय) और मानव विशाल (95%, डीएवी पब्लिक स्कूल) शामिल हैं। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने बढ़ाया मान चौहान पब्लिक स्कूल, एसकेपी विद्या विहार, डिवाइन हैप्पी स्कूल, हैप्पी वैली स्कूल, डीएवी पब्लिक स्कूल, जवाहर नवोदय विद्यालय नगरपारा, आनंदराम ढांढनियां सरस्वती विद्या मंदिर और नवयुग विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। सभी विद्यालयों के छात्रों ने जिले का गौरव बढ़ाया। सीबीएसई अधिकारियों ने दी जानकारी और अवसर की घोषणा सीबीएसई के सिटी कोऑर्डिनेटर सुमंत कुमार ने बताया कि इस वर्ष जिले में कुल 5200 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों को एक विषय में सफलता नहीं मिली है, उन्हें सुधार का अवसर दिया जाएगा। वे मई में दूसरी परीक्षा और आवश्यकता पड़ने पर जुलाई में कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। आनंद राज का बेहतर प्रदर्शन DLS इंटर पब्लिक स्कूल, बाराहट (इशीपुर, भागलपुर) के छात्र आनंद राज ने सभी विषयों में संतुलित और प्रभावशाली अंक प्राप्त कर सफलता हासिल की है। आनंद राज ने अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य में 92 अंक (72 थ्योरी + 20 इंटरनल), हिंदी कोर्स-A में 94 अंक (74+20), गणित स्टैंडर्ड में 80 अंक (61+19), विज्ञान में 92 अंक (72+20) तथा सामाजिक विज्ञान में 98 अंक (78+20) प्राप्त किए हैं। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) में भी उन्होंने 96 अंक (46+50) हासिल कर अच्छा प्रदर्शन किया।

NSA केस में अमृतपाल सिंह की याचिका खारिज: हाई कोर्ट ने नहीं दी राहत

चंडीगढ़. एनएसए के तहत तीसरे निरोधक आदेश को चुनौती देने वाली अमृतपाल सिंह की याचिका हाई कोर्ट ने खारिज की। खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह द्वारा दायर याचिका, जिसमें अमृतसर के जिला मजिस्ट्रेट की ओर से पारित तीसरे निरोधक आदेश को चुनौती दी गई थी। यह मामला अमृतपाल सिंह द्वारा दायर उस याचिका के चलते हाईकोर्ट के समक्ष लंबित था , जिसमें उसने एनएसए के तहत जारी अपनी तीसरी लगातार हिरासत को चुनौती दी थी। अमृतपाल अप्रैल 2023 से असम की डिब्रूगढ़ जेल में निवारक हिरासत में बंद है। उसके विरुद्ध पहला हिरासत आदेश 18 मार्च 2023 को पारित हुआ था। याचिका में उसने 17 अप्रैल 2025 को जारी तीसरे नए हिरासत आदेश को चुनौती दी है, जिसे राज्य सरकार ने 25 अप्रैल 2025 को मंज़ूरी दी और बाद में 24 जून 2025 को इसकी पुष्टि की थी। इसके अलावा हाई कोर्ट आज पंजाब सरकार की उस याचिका पर भी सुनवाई करेगा जिसके तहत अमृतपाल सिंह को असम जेल में रखने की मांग की गई है। पंजाब सरकार का कहना है कि अमृतपाल सिंह की गतिविधियों को लेकर पहले भी राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो चुकी है, ऐसे में उसे पंजाब लाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी कारण उसे असम में ही सुरक्षित स्थान पर रखकर जांच और सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

बिहार के नए CM सम्राट चौधरी को साय का संदेश: जनकल्याण और सुशासन की जताई उम्मीद

रायपुर. रायपुर. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को फोन कर नई जिम्मेदारी संभालने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। दोनों नेताओं के बीच दूरभाष पर हुई इस बातचीत में मुख्यमंत्री साय ने चौधरी के उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि चौधरी के अनुभव, नेतृत्व क्षमता और जनसेवा के प्रति समर्पण से राज्य में तेजी से प्रगति सुनिश्चित होगी। सीएम साय ने अपने संदेश में विश्वास जताया कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार विकास और सुशासन के नए आयाम स्थापित करेगा। सीएम साय ने कहा कि, सम्राट चौधरी का राजनीतिक अनुभव और जनसेवा के प्रति समर्पण राज्य के विकास को नई दिशा और गति देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि, बिहार सरकार जनता के कल्याण और विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए तेजी से आगे बढ़ेगी। अपने संदेश में मुख्यमंत्री साय ने यह भी उल्लेख किया कि, यह नेतृत्व ‘विकसित भारत @ 2047’ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि, केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से विकास की गति और तेज होगी। गौरतलब है कि सम्राट चौधरी ने बीते बुधवार ही बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की है। उनके नेतृत्व में राज्य की राजनीति में नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है।