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Ram Mandir Trust: भर्ती में गड़बड़ी मिली तो नहीं मिलेगी राहत, सिफारिश वाले कर्मचारियों पर ट्रस्ट सख्त

 अयोध्या अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच जारी है जो हर दिन नए मोड़ ले रही है. इस सब के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है. सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट ने उन कर्मचारियों की नियुक्तियों की समीक्षा शुरू कर दी है, जिन्हें निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के बजाय सिफारिश के आधार पर नियुक्त किया गया था. जांच में यदि किसी नियुक्ति में नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।  नियुक्तियों की प्रक्रिया जांच के दायरे में बताया जा रहा है कि यह फैसला हाल ही में सामने आए कथित दान चोरी प्रकरण के बाद लिया गया है. इस मामले के बाद ट्रस्ट अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई स्तरों पर समीक्षा कर रहा है. इसी क्रम में नियुक्तियों की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में लाई गई है।  सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में सभी नियुक्तियां केवल तय नियमों और निर्धारित चयन प्रक्रिया के अनुसार ही हों. इसके लिए पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और यह देखा जा रहा है कि किन कर्मचारियों की भर्ती नियमानुसार हुई तथा किन मामलों में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।  सिफारिश से भर्ती कर्मचारियों की जांच जानकारी के मुताबिक, ट्रस्ट उन सभी नियुक्तियों का ब्योरा जुटा रहा है, जिन पर सिफारिश या अन्य माध्यमों से भर्ती किए जाने के आरोप लगे थे. यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों को सेवा से हटाने सहित अन्य प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।  ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का मानना है कि राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय महत्व के धार्मिक स्थल के संचालन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. इसी उद्देश्य से प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह नियमबद्ध बनाने पर जोर दिया जा रहा है।  हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है. लेकिन माना जा रहा है कि समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. प्रशासनिक स्तर पर उठाए जा रहे इन कदमों को मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने और व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। 

हरियाणा में राशन व्यवस्था होगी मजबूत, अतिरिक्त अनाज योजना के लिए 5 राज्यों से सीखेगी सरकार

चंडीगढ़. हरियाणा की नायब सरकार गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों लोगों को मिलने वाले राशन की मात्रा बढ़ाने पर विचार कर सकती है। इसके लिए हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की टीम उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली तथा हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों का दौरा करेगी। यह टीम इन राज्यों में जाकर यह पता करेगी कि वहां गरीबों को राशन वितरण करने की व्यवस्था का संचालन कैसे होता है तथा बीपीएल व अंत्योदय श्रेणी में आने वाले लोगों को क्या-क्या तथा कितनी मात्रा में खाद्य वस्तुएं वितरित की जाती हैं। रिपोर्ट आने के बाद अगर इन राज्यों में गरीब लोगों को कुछ अतिरिक्त खाद्य पदार्थ मिल रहे हैं तो वैसी ही व्यवस्था हरियाणा सरकार भी अपनी वितरण सामग्री में जोड़ सकती है। हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने अधिकारियों को अध्ययन कर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने तीन दिन पहले ही सभी जिलों के खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों के साथ हुई आनलाइन बैठक में यह निर्देश जारी किए हैं। सरकार क्यों उठा रही है ये कदम? प्रदेश सरकार केंद्र सरकार की एक राष्ट्र- एक राशन कार्ड प्रणाली को बल देने के लिए यह कदम उठा रही है। प्रदेश में बीपीएल तथा अंत्योदय श्रेणी के करीब 40 लाख कार्ड बने हुए हैं। सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली के तहत हर माह करीब 1.57 करोड़ लाभर्थियों को राशन दिया जा रहा है। इनमें 2.86 लाख अंत्योदय परिवार तथा 37.14 लाख बीपीएल परिवार शामिल हैं। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अंत्योदय परिवार को 35 किलो और बीपीएल परिवारों को प्रति सदस्य पांच किलो गेहूं निश्शुल्क दिया जाता है। सरसों का तेल तथा चीनी भी रियायती दर पर दिए जाते हैं। खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने बताया कुछ राज्यों में चना तथा दाल देने की बात सामने आई है। इसके चलते ही उन्होंने दूसरे राज्यों की वितरण प्रणाली का अध्ययन करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

सुखना झील मानसून के लिए तैयार, गाद हटाने का काम पूरा, पर्यटकों को मिलेगा बेहतर अनुभव

चंडीगढ़. सुखना झील की जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने यूटी इंजीनियरिंग विभाग ने रेगुलेटरी एंड पर चल रहे डी-सिल्टिंग (गाद हटाने) अभियान के तहत करीब 34 हजार घनमीटर मिट्टी की खुदाई का लक्ष्य पूरा कर लिया है। हालांकि मानसून आने तक यह कार्य जारी रहेगा। मुख्य अभियंता सीबी ओझा ने बताया कि डी-सिल्टिंग परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। आईआईटी रुड़की, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की तकनीकी सिफारिशों के आधार पर एक माह पहले झील के सूखे हिस्से में गाद हटाने का कार्य शुरू किया गया था। उन्होंने बताया कि रेगुलेटरी एंड पर लगभग 351 मीटर स्तर तक खुदाई की जा रही है। निकाली गई मिट्टी का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग झील के किनारों (तटबंधों) और पैदल मार्गों को मजबूत एवं ऊंचा करने में किया जा रहा है। कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए हुआ ये काम कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए चार चेन-माउंटेड एक्सकेवेटर, जेसीबी मशीनें और टिप्परों का बेड़ा लगाया गया है। विभाग का मानना है कि डी-सिल्टिंग और तटबंधों को मजबूत करने से झील की जलधारण क्षमता बढ़ेगी, पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और पर्यटकों के लिए भी सुविधाएं बेहतर होंगी। सुखना झील में अंतिम बार डी-सिल्टिंग का कार्य चार वर्ष से अधिक समय पहले किया गया था। गर्मियों में सबसे पहले रेगुलेटरी एंड का हिस्सा सूखता है, जिससे इस क्षेत्र में गाद हटाने का कार्य संभव हो पाता है। गौरतलब है कि गाद जमने से झील की जल भंडारण क्षमता लगातार प्रभावित हो रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए यूटी प्रशासन ने पिछले वर्ष डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से सुखना झील के समग्र विकास के लिए पांच वर्षीय एकीकृत प्रबंधन योजना (इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान) तैयार की थी। इस योजना में जल स्तर बनाए रखने, जलीय जीवों के संरक्षण, झील की स्वच्छता, पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विस्तार तथा सौर ऊर्जा चालित नौकाओं की संख्या बढ़ाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। करीब 565 एकड़ क्षेत्र में फैली सुखना वेटलैंड का कैचमेंट एरिया लगभग 10,395 एकड़ है। वर्ष 1988 में केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय वेटलैंड घोषित किया था। इसके कैचमेंट क्षेत्र में सुखना वन्यजीव अभयारण्य भी स्थित है। यदि चाहें तो इसे और संक्षिप्त कर फ्रंट पेज या सिटी पेज की अखबारी शैली में भी तैयार किया जा सकता है।

शॉर्टेज का बहाना, 71 करोड़ की धान में फर्जीवाड़ा! छत्तीसगढ़ में सामने आया बड़ा घोटाला

राजनांदगांव. जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अधीन आने वाले चार जिलों में धान सूखत के नाम पर 71 करोड़ की कमी बताए जाने के बाद भी अभी तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पायी है जबकि जांच में प्रारंभिक रूप से यह प्रमाणित हो गया है कि शार्टेज के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया है। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अंतर्गत राजनांदगांव से लेकर मोहला मानपुर, खैरागढ़ और कवर्धा जिले आते हैं। इन जिलों में धान खरीदी के बाद धान शार्टेज के नाम पर एक बड़ा खुलासा हुआ है। बताया गया है कि सभी चारों जिलों को मिलाकर 71 करोड़ का धान शार्टेज बताया गया है। जब शार्टेज का मामला सामने आया, तब प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और जांच कराई गई तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आयी है। खबर है कि जिन गाड़ियों का डीओ काटा गया उन गाड़ियों की धर्मकांटा में तौल होने पर सभी गाड़ी में 8 से 10 किलो धान अधिक पाया गया है। ऐसी स्थिति में धान का शार्टेज होना समझ से परे है, अगर शासन स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई तो करोड़ों रूपये का नुकसान हो सकता है। राशि जमा कराई जा रही – भरत जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के उपाध्यक्ष भरत वर्मा ने बताया कि सोसायटियों में शार्टेज के मामले को गंभीरता से लिया गया है। अब सोसायटियों से शार्टेज की राशि जमा कराई जा रही है।

भगवंत मान की श्री अकाल तख्त साहिब में पेशी क्यों? जानिए क्या है अकाल तख्त और इसके प्रमुख अधिकार

चंडीगढ़  पंजाब के सीएम भगवंत मान श्री अकाल तख्त साहिब के सामने आज अपना पक्ष रखेंगे. वह पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष के साथ जाएंगे. मान एक वीडियो को लेकर विवाद पर हैं. उन पर गुरु द्रोही औ पंथ विरोधी होने के आरोप हैं. इसके अलावा पंजाब सरकार के ईशनिंदा से जुड़े एक अधिनियम को भी पंथ की सलाह के बिना पारित किए जाने से नाराजगी है।  अकाल तख्त के सामने भगवंत मान इससे पहले भी पेश हो चुके हैं, जब उन्होंने वीडियो को फर्जी बताया था. उन्होंने दावा किया था कि वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से बनाया गया है. हालांकि मामले की सुनवाई के बाद अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने 15 जून को एक आदेश जारी करते हुए मान को गुरुद्रोही और खालसा पंथ का विरोधी घोषित किया था. ऐसा दावा किया गया है कि फोरेंसिक जांच में वीडियो सही पाया गया है. इसीलिए पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों विधायकों को अकाल तख्त के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है।  श्री अकाल तख्त साहिब क्या है? श्री अकाल तख्त साहिब सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था है.सरल शब्दों में कहें तो यह सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक और नैतिक अदालत है. यह अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में है और सिखों के पांच तख्तों में सबसे प्रमुख मानी जाती है. इसका अर्थ है अकाल का सिंहासन, जिसका उद्देश्य सिर्फ आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है, यह समाज, न्याय और समुदाय से जुड़े मामलों में भी फैसला सुनाता है।  सिख नेट के मुताबिक जब गुरु हरगोबिंद के पिता और पांचवें सिख गुरु अर्जन देव को मुगल सम्राट जहांगीर ने शहीद करवाया तो उसके जवाब में गुरु हरगोबिंद ने इसकी स्थापना की थी. जब उन्होंने अकाल तख्त के मंच का अनावरण किया था तो उन्होंने दो तलवारें धारण की थीं. इनमें एक आध्यात्मिक शक्ति पीरी का संकेत देती थी ओर दूसरी सांसारिक शक्ति मीरी का. यह पीरी और मीरी दर्शन ही अकाल तख्त की आत्मा है. जो ये विचार देता है कि धर्म और न्याय अलग नहीं हैं. यानी एक हाथ में आस्था और दूसरे में अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति।  क्या करता है अकाल तख्त?     अकाल तख्त हुक्मनामा यानी धार्मिक आदेश जारी करता है. यह हुक्मनामा दुनिया भर के सिखों पर लागू होता है।      अकाल तख्त सिख हितों के लिए गलत बात करने वाला या हानिकारक कदम उठाने वाले को धार्मिक दंड दे सकती है।      तख्त किसी भी व्यक्ति की सेवा या उसके बलिदानों की सराहना भी कर सकता है जो सिख हितों के लिए काम करते हैं।      यह सिख समुदाय से जुड़े विवादों और महत्वपूर्ण मामलों पर मार्गदर्शन भी देता है।  जत्थेदार होता है अकाल तख्त का मुखिया अकाल तख्त का प्रमुख जत्थेदार ही उसका मुखिया होता है. जत्थेदार को ही दुनिया भर के सिखों का सर्वोच्च प्रवक्ता और प्रमुख माना जाता है. यह एक धार्मिक नेता की तरह होते हैं जिनसे अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त रहें. वर्तमान में कुलदीप सिंह गरगज कार्यवाहक जत्थेदार हैं.इनकी नियुक्त शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से 2025 में की गई थी. हालांकि तकनीकी तौर पर अकाल तख्त एक स्वतंत्र धार्मिक संस्था है।  अकाल तख्त के सामने बुलाए जाने का अर्थ क्या? श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार अगर किसी को पेश होने का आदेश देते हैं तो यह एक तरह का धार्मिक समन है. जो आरेापी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका देता है. जो भी व्यक्ति इसकी अनदेखी करता है वह सिख समुदाय की नजर में अपनी विश्वसनीयता खो देता है. आरोपी अगर पेश होता है तो उसका पक्ष सुनकर अकाल तख्त फैसला करता है कि उसे क्लीनचिट देनी है या फिर प्रायश्चित का आदेश देना है. इसे तनखाह कहा जाता है. यह धार्मिक दंड है. आम तौर पर तनखाह में सेवा कार्य, सार्वजनिक माफी की सजा दी जाती है।  सुखबीर सिंह बादल को मिला था धार्मिक दंड श्री अकाल तख्त साहिब ने 2024 में पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को तनखैया घोषित किया था. उन्हें तनखाह यानी धार्मिक सजा सुनाई गई थी. उन पर आरोप था कि 2007 से 2027 तक पंजाब की शिरोमणि अकाली दल सरकार में कुछ ऐसे फेसले हुए जिनसे पंथक हितों को नुकसान पहुंचा है. इसमें बेअदबी का माला भी शामिल था. सुखबीर सिंह बादल ने अपनी गलतियों के लिए बिना शर्त माफी मांगी थी. इसके बाद उने तनखाह सुनाई गई थी. उन्हें स्वर्ण मंदिर के बाद सेवादार की वर्दी पहनकर सेवा करनी पड़ी थी।  अकाल तख्त सबसे ऊपर क्यों? सिखों के पांच तख्त हैं. तख्त का अर्थ सिंहासन या सत्ता का आसन होता है. यह सिख धर्म का आध्यात्मिक और सांसारिक केंद्र है. पहला केंद्र श्री अकाल तख्त साहिब है, जो अमृतसर में है. दूसरा तख्त श्री केशगढ़ साहिब है जो आनंदपुर साहिब में है. तीसरा तख्त श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और चौथा तख्त श्री पटना साहिब तथा पांचवां तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ में है. अकाल तख्त सर्वोच्च इसलिए है, क्योंकि ये पहला तख्त है।   

ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापना में तेजी लाएं, निजी क्षेत्र के निवेश को दें प्रोत्साहन : मुख्यमंत्री

फायर एनओसी की वैधता समाप्त होने से पहले ही जारी करें नोटिस, जनसुरक्षा से कोई समझौता नहीं : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 85% भूमि अधिग्रहीत, बोले मुख्यमंत्री सभी प्रस्तावित नए एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करें  ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापना में तेजी लाएं, निजी क्षेत्र के निवेश को दें प्रोत्साहन : मुख्यमंत्री लाइन लॉस पर फीडरवार तय होगी जवाबदेही, बिजली चोरी के विरुद्ध चलाएं विशेष अभियान: मुख्यमंत्री मॉडल बिल्डिंग बायलॉज के संबंध में प्राप्त आपत्तियों का परीक्षण कर 15 दिनों में पूरी प्रक्रिया पूर्ण की जाए: मुख्यमंत्री जनहित की प्रत्येक परियोजना समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरी हो : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की बैठक में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक अवसंरचना, ग्रामीण आजीविका, ऊर्जा, स्वास्थ्य, डेटा सेंटर, ईवी चार्जिंग सहित विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अग्नि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों, जिला स्तरीय महिला एवं पुरुष चिकित्सालयों तथा होटलों में फायर एनओसी की स्थिति का तत्काल सत्यापन कराया जाए। जिन संस्थानों की फायर एनओसी की वैधता समाप्त होने वाली है अथवा जिनके पास अब तक वैध फायर एनओसी उपलब्ध नहीं है, उन्हें तत्काल नोटिस जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जनपद में संबंधित विभागों के साथ बैठक कर फायर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराएं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की बैठक में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक अवसंरचना, ग्रामीण आजीविका, ऊर्जा, कृषि, डेटा सेंटर, ईवी चार्जिंग सहित प्रदेश की विभिन्न जनहितकारी परियोजनाओं की अद्यतन प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक परियोजना निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। बैठक में गत सीएम-समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक 1339.04 हेक्टेयर भूमि में से 1135.57 हेक्टेयर अर्थात 84.80 प्रतिशत भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 643.60 हेक्टेयर के सापेक्ष 315.73 हेक्टेयर अर्थात 49.05 प्रतिशत, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 1539.19 हेक्टेयर के सापेक्ष 654.77 हेक्टेयर तथा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 895.34 हेक्टेयर के सापेक्ष 266.82 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए निर्माण कार्यों हेतु निविदा प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नए एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास की नई धुरी बनेंगे, इसलिए इनके किनारे औद्योगिक क्षेत्रों के विकास हेतु भी पर्याप्त भूमि की उपलब्धता समय रहते सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल, झांसी एवं जेवर लिंक एक्सप्रेसवे सहित अन्य परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश संबंधित जिलाधिकारियों को दिए। बैठक में मेरठ-हरिद्वार, विंध्य, विंध्य-पूर्वांचल तथा नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे की प्रगति एवं भूमि अधिग्रहण की स्थिति की भी समीक्षा की गई। बैठक में ग्रेटर नोएडा स्थित मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब एवं मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब की प्रगति की समीक्षा की गई। बताया गया कि मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब के लिए अधिकांश भूमि उपलब्ध हो चुकी है तथा शेष भूमि अधिग्रहण एवं विकासकर्ता चयन की प्रक्रिया प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने परियोजना के शेष कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए प्रस्तावित मॉडल बिल्डिंग बायलॉज की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्राप्त आपत्तियों का परीक्षण कर आगामी 15 दिनों में पूरी प्रक्रिया पूर्ण की जाए तथा संशोधित प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत राज्य, जनपद एवं विकास खंड स्तर पर रिक्त पदों पर चयन एवं तैनाती की प्रगति की भी समीक्षा की गई तथा भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में निजी निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं तथा निजी क्षेत्र निवेश के लिए इच्छुक है। आवश्यक अनुमतियों एवं प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार सुनिश्चित किया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत चयनित स्थलों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। बैठक में डेटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए डेटा सेंटर परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। लखनऊ नगर निगम क्षेत्र में सीवर लाइन एवं मेनहोल से गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइनों को हटाने एवं पृथक्करण की कार्यवाही की भी समीक्षा की गई तथा इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।  ऊर्जा विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने मंडलायुक्त मेरठ, आगरा एवं सहारनपुर को लाइन लॉस के संबंध में फीडरवार जवाबदेही निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां भी बिजली चोरी की शिकायतें हैं, वहां विशेष अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई की जाए। ईमानदार उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए।

CM योगी आज पीलीभीत और मुरादाबाद दौरे पर, करोड़ों की विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

सीएम योगी सोमवार को पीलीभीत- मुरादाबाद दौरे पर, विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात पीलीभीत में 569 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण/शिलान्यास एवं पट्टा विवरण मुरादाबाद मंडल में चल रहे विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था की करेंगे समीक्षा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार 29 जून को पीलीभीत और मुरादाबाद के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री पहले पीलीभीत पहुंचेंगे, जहां बीसलपुर में पीलीभीत के बरखेड़ा एवं बीसलपुर विधानसभा क्षेत्रों के 569 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास एवं पट्टा विवरण करेंगे। यहां वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे। पीलीभीत के बाद मुख्यमंत्री मुरादाबाद पहुंचेंगे, जहां वह सर्किट हाउस में आयोजित मुरादाबाद मंडल में लोक निर्माण विभाग के पुराने कार्यों की समीक्षा और नए कार्यों की कार्ययोजना के संबंध में बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री मुरादाबाद के विकास कार्यों और कानून व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा भी करेंगे। इसके बाद मुरादाबाद सदर, मुरादाबाद देहात व कुन्दरकी विधानसभा क्षेत्रों तथा नगर निगम मुरादाबाद एवं मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के विकास कार्यों का लोकार्पण/ शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे। यहां दानवीर भामाशाह जयंती एवं व्यापारी कल्याण दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन होगा। साथ ही मुख्यमंत्री गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण करेंगे। मुख्यमंत्री मुरादाबाद के सर्किट हाउस में ही रात्रि विश्राम करेंगे।

पंजाब में बेअदबी कानून को लेकर बड़ा दिन, अकाल तख्त के समक्ष आज अपना पक्ष रखेगी सरकार

अमृतसर. आम आदमी पार्टी ने फैसला किया है कि सोमवार को पार्टी के सभी मंत्री व विधायक श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होंगे। रविवार को पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान की उपस्थिति में पार्टी विधायकों व मंत्रियों की हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ने पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए बेअदबी कानून के प्रावधानों में संशोधन नहीं करने पर विधानसभा के सभी सिख विधायकों व पूरी कैबिनेट को 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होने के लिए कहा था। रविवार को बैठक के बाद अरविंद केजरीवाल के साथ पत्रकारों से वार्ता करते हुए भगवंत मान कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब से जारी प्रत्येक आदेश का अक्षरशः पालन किया जाएगा। पार्टी के सभी मंत्री, विधायक तथा विधानसभा के स्पीकर, जिन्हें श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा तलब किया गया है, सोमवार को विनम्र सिख के रूप में सरकार की स्थिति स्पष्ट करेंगे तथा अपना पक्ष रखेंगे। वीडियो से संबंधित विवरण भी श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपेंगे इसके अलावा उनकी नकल करने वाले व्यक्ति के फर्जी वीडियो से संबंधित समस्त विवरण भी श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपेंगे। मान ने कहा कि उन्हें पेश होने के लिए कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा 70 वर्ष पुराने "नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब अधिनियम, 1956" को निरस्त करने के निर्णय पर मुख्यमंत्री ने कहा, "महाराष्ट्र सरकार को सिख कौम के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। महाराष्ट्र की भाजपा सरकार को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए जिनसे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हों। राजनीति और धर्म दोनों अलग-अलग विषय हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में आपस में नहीं मिलाया जाना चाहिए। 15 जून को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने दिया था करार उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के कथित वीडियो को लेकर 15 जून को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने गुरु व पंथ दोखी (गुरु व पंथ के दोषी) करार दिया था। इसी कारण मान को पेश होने के लिए नहीं कहा गया है। मान ने कहा कि एसजीपीसी ने अब गुरुद्वारों के बाहर मेरे सामाजिक बहिष्कार के पोस्टर लगाने का आदेश दिया है। उन्होंने सवाल किया कि शिरोमणि अकाली दल अथवा सुखबीर बादल के खिलाफ ऐसे पोस्टर कभी क्यों नहीं लगाए गए, जबकि उन्होंने स्वयं बेअदबी की घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार की थी? मान ने कहा कि संगत समझदार है और जनता सर्वोच्च है। आरोप लगाया कि भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल मुझे धार्मिक रूप से बदनाम कर राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं।

BTech में दाखिले का मौका! छत्तीसगढ़ में कल से शुरू होगी ऑनलाइन काउंसिलिंग

दुर्ग. इस वर्ष प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए तकनीकी शिक्षा संचालनालय (डीटीई) द्वारा बीटेक प्रवेश के लिए ऑनलाईन काउंसिलिंग प्रक्रिया 30 जून से प्रारंभ हो रही है। यह समय उन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जिन्होंने पीईटी परीक्षा दी है और अब अपने भविष्य के लिए कॉलेज एवं ब्रांच का चयन करेंगे। डीटीई ने बीटेक काउंसिलिंग का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है, जिसके अनुसार प्रथम चरण की काउंसिलिंग 30 जून से प्रारंभ हो रही है। इस वर्ष व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा 14 मई को प्रवेश परीक्षा पीईटी आयोजित की गयी। इस परीक्षा में दुर्ग शहर के केंद्रों में 2362 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से 1951 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 411 विद्यार्थी अनुपस्थित रहे। दुर्ग शहर में लगभग 7 इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित हैं। जिससे विद्यार्थियों के पास अनेक विकल्प उपलब्ध है। ऐसे में केवल प्रवेश लेना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि सही कॉलेज और सही ब्रांच का चयन करना अधिक महत्वपूर्ण है।

कबीर जयंती महोत्सव में शामिल होंगे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, असंग देव कबीर आश्रम में करेंगे संबोधन

रायपुर. मुख्यमंत्री आज सोमवार को रायपुर और जांजगीर-चांपा जिले के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वे असंग देव कबीर आश्रम, सोनपैरी में आयोजित कबीर जयंती महोत्सव में शामिल होंगे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से चांपा पहुंचकर विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह 11:00 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन, रायपुर से कार द्वारा प्रस्थान करेंगे और असंग देव कबीर आश्रम, सोनपैरी पहुंचेंगे। यहां दोपहर तक आयोजित कबीर जयंती महोत्सव में शामिल होंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री सोनपैरी से रवाना होकर 12:55 बजे पुलिस ग्राउंड हेलीपेड, रायपुर पहुंचेंगे और दोपहर 1:00 बजे हेलीकॉप्टर से चांपा के लिए प्रस्थान करेंगे। दोपहर 1:45 बजे भालेराय मैदान हेलीपेड, चांपा पहुंचने के बाद वे 1:55 बजे देवांगन धर्मशाला, थाना पारा पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री का दोपहर 2 बजे से 2.30 बजे तक का समय आरक्षित रखा गया है। इसके बाद वे 2:30 बजे देवांगन धर्मशाला से रवाना होकर 2:35 बजे हेलीपेड पहुंचेंगे और 2:40 बजे हेलीकॉप्टर से रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 3:25 बजे पुलिस ग्राउंड हेलीपेड, रायपुर पहुंचेंगे और वहां से 3:30 बजे मुख्यमंत्री निवास के लिए रवाना होंगे। दोपहर 3:35 बजे मुख्यमंत्री निवास पहुंचने के बाद उनका समय आरक्षित रहेगा।