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अनुराधा देवी के नेतृत्व में रसूलपुर पंचायत ने रचा विकास का मॉडल

रोहतास बिहार के रोहतास जिले की रसूलपुर ग्राम पंचायत ने महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण प्रशासन और सतत विकास के क्षेत्र में एक बेहतरीन मिसाल कायम की है। इस 9 हजार 876 की आबादी वाली पंचायत में लगभग 45 प्रतिशत महिलाएं हैं। मुखिया अनुराधा देवी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में इस पंचायत ने स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, सुरक्षा और सामाजिक समावेश की कई अभूतपूर्व पहलें सफलतापूर्वक लागू की गई हैं। यहां वर्तमान में 16 आंगनवाड़ी केंद्र, 9 विद्यालय, 1 स्वास्थ्य केंद्र और एक पंचायत भवन संचालित हो रहे हैं। मुखिया अनुराधा देवी का स्पष्ट उद्देश्य है- महिला-केंद्रित शासन सुनिश्चित करना, स्वास्थ्य व पोषण में सुधार, बालिका शिक्षा को बढ़ावा, आजीविका के नए अवसर और एक सुरक्षित और सशक्त ग्राम पंचायत का निर्माण। मुखिया की कोशिशों ने पंचायत में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है। यहां 216 गर्भवती महिलाओं का सफल पंजीकरण किया गया। सौ प्रतिशत प्रसवोत्तर जांच सुनिश्चित की गई और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया गया। परिणामस्वरूप मातृ मृत्यु दर मात्र 1 और शिशु मृत्यु दर केवल 2 रही। यहां नियमित पोषण दिवस का आयोजन, स्तनपान और सही पोषण संबंधी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। शिक्षा और बालिका सशक्तिकरण अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्र-छात्राओं को शिक्षा में बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुखिया अनुराधा देवी बताती हैं कि प्रति वर्ष दसवीं और बारहवीं में अच्छे अंक लाने वाले बच्चों को पुरस्कृत किया जाता है। परिणामस्वरूप शिक्षा के प्रति लोगों का रवैया बदला है, लड़कियां इसमें खासकर अच्छा कर रही हैं। आर्थिक आजादी की ओर कदम इस पंचायत में 172 स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सक्रिय हैं, जिनमें से 162 बैंक ऋण से जुड़ चुके हैं। महिलाओं को सिलाई, हस्तशिल्प और कंप्यूटर जैसे कौशल के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। जीविका के माध्यम से एससी-एसटी की महिलाएं स्कूल ड्रेस सिलाई कर अच्छी आय कमा रही हैं। अब सैकड़ों महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो चुकी हैं और शासन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं। ग्राम स्तर पर समस्याओं का समाधान महिलाओं की सुरक्षा के लिए शक्ति सलाह केंद्र की स्थापना की गई है। दहेज, बाल विवाह और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों से संबंधित मामलों को मुखिया अनुराधा देवी अपने स्तर पर या ग्राम कचहरी में सुलझाती हैं। उनका प्रयास रहता है कि मामले थाने तक न पहुंचें। मजबूत जागरूकता अभियान के कारण लिंग आधारित हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है। पंचायत ने 2 हजार 572 शौचालयों का निर्माण करवाया है। सभी घरों तक सड़क बनाई गई है। सौ एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं और आरओ आधारित पेयजल सुविधा भी उपलब्ध है। इसके साथ ही विधवा पेंशन के 143, वृद्धावस्था पेंशन के 149 और विकलांगता पेंशन के 67 लाभार्थियों को नियमित लाभ मिल रहा है। पात्र सभी लाभार्थियों को सौ प्रतिशत कवरेज देने का लक्ष्य रखा गया है। चुनौतियों से निपटने के लिए निकाले रास्ते मुखिया बताती हैं कि शुरुआत में महिलाओं की भागीदारी कम थी और सामाजिक रूढ़िवादी मानसिकता बाधा बन रही थी। नियमित जागरूकता अभियान, महिला सभाएं, क्षमता निर्माण प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से समन्वय के माध्यम से इन चुनौतियों पर काबू पाया। आज महिलाओं की निर्णय लेने में सक्रिय भागीदारी बढ़ी है और अब वे विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक स्वतंत्रता हासिल कर चुकी हैं। सूर्यकांत पाठक

ओपन जेलों की स्थिति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को रिपोर्ट देने का निर्देश

 रांची झारखंड हाईकोर्ट ने सूबे की ओपन जेलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है. सोमवार को कोर्ट ने जनहित याचिका में तब्दील स्वत: संज्ञान पर सुनवाई की. इस मामले को न्यायपालिका ने जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए व्यापक निगरानी का निर्देश दिया है. इसके लिए अदालत ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया है कि गृह सचिव की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति का गठन किया जाए. पीठ ने दिए सख्त निर्देश चीफ जस्टिस एमएस सौनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए. कोर्ट ने कहा कि ओपन जेलों की स्थिति सुधारने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए. इस समिति की अध्यक्षता गृह सचिव करेंगे और इसमें कारा महानिदेशक तथा संबंधित जेल अधीक्षक को भी शामिल किया जा सकता है. स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक गठित समिति की प्रगति रिपोर्ट पेश की जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की अगली सुनवाई 11 जून 2026 को होगी. कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ओपन जेलों में सुधार के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन जरूरी इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी शामिल हैं. सर्वोच्च अदालत ने देशभर की ओपन जेलों की मॉनिटरिंग के लिए गृह विभाग को कमेटी बनाने और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने का निर्देश दिया है. इसमें चिकित्सा सुविधा, जिम, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को सुधारने पर विशेष जोर दिया गया है. कैदियों के पुनर्वास पर फोकस ओपन जेलों का उद्देश्य कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करना है. ऐसे में वहां की सुविधाओं का बेहतर होना बेहद जरूरी है. हाईकोर्ट ने इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए इस मामले को गंभीरता से लिया है. पहले स्वत: संज्ञान, अब जनहित याचिका गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था. अब इसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया गया है, जिससे इस मुद्दे पर नियमित सुनवाई और निगरानी सुनिश्चित हो सके. सुधार की दिशा में अहम कदम हाईकोर्ट का यह कदम राज्य की जेल व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यदि कोर्ट के निर्देशों का सही तरीके से पालन होता है, तो ओपन जेलों में रहने वाले कैदियों को बेहतर जीवन स्तर और पुनर्वास के अवसर मिल सकेंगे.

नवागत एसपी प्राची सिंह के सामने अपराध नियंत्रण बड़ी चुनौती

अंबेडकरनगर आईपीएस प्राची सिंह ने 28वें पुलिस अधीक्षक के रूप में रविवार की सुबह कमान संभाल ली। इसके बाद कपड़ा व्यवसायियों से हुई लूट की घटना के बारे में मातहतों से जानकारी ली। यहां से सीधे घटनास्थल पहुंच गईं। वहां सभी बिंदुओं पर संबंधित पुलिस कर्मियों से पूछताछ की। साथ ही शीघ्र राजफाश के निर्देश दिए। वहीं, निवर्तमान पुलिस अधीक्षक अभिजित आर. शंकर के देवरिया स्थानांतरित होने पर विदाई दी गई। लखनऊ में 32वीं वाहिनी पीएसी में सेनानायक पद पर तैनात रहीं प्राची सिंह की शनिवार को यहां पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती मिली। यहां तैनात रहे अभिजित आर. शंकर को देवरिया के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। रविवार की सुबह प्राची सिंह ने पुलिस कार्यालय पहुंचकर कार्यभार ग्रहण किया। वह जिले की तीसरी महिला पुलिस अधीक्षक हैं। इसके पहले 2011 में वीना भूकेश व 2018 में शालिनी की तैनाती की गई थी। कार्यभार संभालने के बाद नवागत एसपी जहांगीरगंज के बिड़हर घाट पहुंचीं। पुलिस चौकी के निकट हुई लूट की घटना के बारे में क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह व निरीक्षक संतोष सिंह से जानकारी ली। एसपी ने कहा कि लूट में शामिल बदमाश किसी भी सूरत में बचने नहीं चाहिए। उन्हें गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई करें। वहीं, पुलिस लाइंस में आयोजित समारोह में निवर्तमान पुलिस अधीक्षक को विदाई दी गई। मातहतों ने उनके कार्यों की प्रशंसा व सुखद भविष्य की कामना की। एएसपी हरेंद्र कुमार, श्यामदेव, क्षेत्राधिकारी अकबरपुर नितीश तिवारी, टांडा के शुभम कुमार, भीटी के लक्ष्मीकांत आदि ने प्रतीक चिह्न व पुष्पगुच्छ भेंट किया। नई एसपी के सामने ये चुनौतियां नवागत एसपी के सामने दो कपड़ा व्यवसायियों से 18.40 लाख की लूट का राजफाश, लगातार हो रहीं चोरी की घटनाओं पर नियंत्रण बड़ी चुनौती है। आलापुर और राजेसुल्तानपुर में दो दिनों में सात घरों में चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। इसके अलावा अकबरपुर कोतवाली में पखवारे भर पूर्व अलग-अलग गांवों में चोरी की घटना को अंजाम चोर दे चुके हैं। इसी के साथ जिला मुख्यालय समेत टांडा, जलालपुर समेत अन्य प्रमुख कस्बों में जाम की समस्या से निपटना, साइबर थाना समेत जिले के अन्य थानों में दर्ज साइबर ठगी और महिला अपराधों से संबंधित घटनाओं का राजफाश चुनौती होगी।

6 लाख 82 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिली 4.40 करोड़ रुपये की छूट

भोपाल. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के जिलों के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को 'टाइम ऑफ डे' (ToD) टैरिफ व्यवस्था के तहत सोलर ऑवर (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) में बिजली की खपत पर 20 प्रतिशत की विशेष छूट प्रदान की गई है। इस 'टाइम ऑफ डे' (ToD) टैरिफ व्यवस्था के तहत कंपनी कार्यक्षेत्र में कुल 6 लाख 82 हजार 249 उपभोक्ताओं को बिजली बिल में 4 करोड़ 40 लाख 44 हजार रुपये की छूट का सीधा लाभ मिला है, जिसमें से भोपाल जिले में 3 लाख 60 हजार 423 उपभोक्ताओं के बिलों में 2 करोड़ 41 लाख 85 हजार रुपये की छूट प्रदान कर उन्हें लाभान्वित किया गया है। प्रबंध संचालक मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ऋषि गर्ग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे आधुनिक तकनीक को अपनाएं और अपने परिसरों में स्मार्ट मीटर लगवाने के लिये आगे आएं। स्मार्ट मीटर न केवल ऊर्जा संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि यह उपभोक्ताओं को अपनी खपत के प्रति जागरूक कर आर्थिक लाभ दिला रहा है। 'टाइम ऑफ डे' टैरिफ जैसी सुविधाओं का लाभ उठाकर उपभोक्ता दिन के समय बिजली उपयोग कर अपने बिलों में भारी बचत कर सकते हैं। स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को सोलर ऑवर (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड/अनुबंध मांग वाले उपभोक्ताओं को 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। स्मार्ट मीटर के संबंध में उपभोक्ता किसी भी जानकारी अथवा समस्या के निराकरण के लिये कॉल सेन्टर 1912 अथवा नोडल अधिकारी कैलाश कुमार चौधरी, प्रबंधक (स्मार्ट मीटरिंग सेल) से ई-मेल आईडी Smartmeteringcellbhopal@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

17572 किसानों से 7 लाख 75 हजार 240 क्विंटल गेहूँ की खरीदी : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल.  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक 17 हज़ार 572 किसानों से 7 लाख 75 हजार 240 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 6 करोड़ 97 लाख रुपए का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। गेहूँ का उपार्जन इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 9 अप्रैल से शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि शेष संभागों में 15 अप्रैल से गेहूँ का उपार्जन शुरू किया जायेगा। अभी तक 2 लाख 9 हजार 369 किसानों द्वारा 93 लाख 21 हजार 682 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। गेहूँ खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूं की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिये गेहूं बिक्री की सभी सुविधाएं खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि जिन जिलों में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, वहाँ गेहूं विक्रय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन केन्द्रों में छायादार स्थान में बैठने और पेय जल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र में बारदाने ,तौल कांटे सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छनना आदि की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूं में से 1लाख 5 हजार 260 क्विंटल गेहूं का परिवहन किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्व की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।

जमीन घोटाले में फंसे आईएएस विनय चौबे को बेल, शराब केस बना रुकावट

रांची  झारखंड के प्रशासनिक गलियारे से बड़ी खबर है। जमीन घोटाला मामले में आरोपी आईएएस विनय कुमार चौबे को देश की सर्वोच्च अदालत से जमानत मिल गई है। हालांकि कोर्ट का यह आदेश उनके लिए आधी राहत जैसा है, क्योंकि बेल मिलने के बावजूद वे फिलहाल सलाखों के पीछे ही रहेंगे। विनय चौबे के खिलाफ केवल एक ही मामला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने हजारीबाग जमीन मामले में उन्हें बेल दी है, लेकिन वे एक अन्य बड़े घोटाले (शराब नीति से जुड़े मामले) में भी आरोपी हैं। तकनीकी तौर पर जब तक किसी व्यक्ति को उन सभी मामलों में जमानत नहीं मिल जाती जिनमें वह न्यायिक हिरासत में है, तब तक उसकी रिहाई मुमकिन नहीं होती। इसी कारण उन्हें अभी बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार जेल) में ही वक्त बिताना होगा। कोर्ट की सख्त शर्तें: पासपोर्ट और गवाहों पर नजर सुप्रीम कोर्ट ने विनय चौबे को जमानत देते हुए कुछ कड़ी शर्तें लागू की हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि:     वे बिना पूर्व अनुमति के देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकते।     मामले से जुड़े किसी भी गवाह से संपर्क करने या उन्हें डराने-धमकाने पर उनकी जमानत रद्द की जा सकती है।     जांच एजेंसी जब भी बुलाएगी, उन्हें सहयोग करना होगा। flashback: पद का दुरुपयोग और जमीन की हेराफेरी विनय कुमार चौबे पर लगे आरोपों की जड़ें उनके हजारीबाग में उपायुक्त (DC) रहने के कार्यकाल से जुड़ी हैं। यह मामला झारखंड के उस बड़े लैंड स्कैम का हिस्सा है जिसने पूरे राज्य की राजनीति को गरमा रखा है। 1. हजारीबाग जमीन घोटाला आरोप है कि हजारीबाग में डीसी पद पर तैनात रहते हुए विनय चौबे ने भू-माफियाओं के साथ साठगांठ की। उन पर प्रतिबंधित श्रेणी की सरकारी जमीनों (गैर-मजरूआ) के अवैध हस्तांतरण, म्यूटेशन और बिक्री में नियमों की अनदेखी करने का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के जरिए कीमती जमीनों को निजी हाथों में सौंपने का खेल उनके कार्यकाल में बड़े पैमाने पर हुआ। 2. शराब घोटाले का साया जमीन के अलावा विनय चौबे झारखंड के बहुचर्चित 'शराब घोटाले' में भी मुख्य अभियुक्तों में से एक हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने उत्पाद विभाग के सचिव रहते हुए छत्तीसगढ़ की तर्ज पर झारखंड में शराब की नई नीति लागू कराई, जिससे सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान हुआ और चुनिंदा सिंडिकेट को फायदा पहुँचाया गया। इसी मामले की वजह से उनकी रिहाई अटकी हुई है। 3. रसूख से जेल तक का सफर झारखंड कैडर के 1999 बैच के आईएएस अधिकारी विनय चौबे सत्ता के बेहद करीब माने जाते थे। वे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों और प्रवर्तन निदेशालय (ED) व एसीबी की कार्रवाई ने उनकी चमक कम कर दी और आखिरकार उन्हें जेल जाना पड़ा।  

संवाद, सहयोग और सहभागिता से हो नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन : प्रधानमंत्री मोदी

भोपाल.  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत 21वीं सदी का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लेने जा रहा है, जो देश की नारी शक्ति को समर्पित है। लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़े, इसके लिए 16 अप्रैल, 2026 से संसद का विशेष सत्र शुरू हो रहा है। वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सभी दलों ने सर्वसम्मति से पास कराया था। लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं को आरक्षण देने की बात दशकों से हो रही है। सभी दलों ने इस विचार को अपने-अपने ढंग से आगे बढ़ाया है। अधिनियम को लागू करने के लिए सरकार के प्रयास जारी हैं। इसे लागू करने का कार्य संवाद, सहयोग और सहभागिता से हो। इस बार भी सभी का सहयोग मिलेगा और संसद की गरिमा नई ऊंचाइयों को छुएगी। महिलाओं के लिये विधानसभा और लोकसभा में अधिक से अधिक प्रतिनिधित्व का मार्ग प्रशस्त होने जा रहा हैं। देश में एक सकारात्मक माहौल बना है। देश की सभी महिलाओं को एक नए युग की बधाई। प्रधानमंत्री मोदी 13 अप्रैल को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्तर के 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की प्रख्यात हस्तियों और उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाओं ने भाग लिया। इसमें सरकार, शिक्षा जगत, विज्ञान, खेल, उद्यमिता, मीडिया, सामाजिक कार्य और संस्कृति जैसे विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिनिधि शामिल थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रि-परिषद के सदस्यों के साथ कार्यक्रम में मंत्रालय से वर्चुअली शामिल हुए। संसद ने सितंबर 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित किया जो विधायी निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। अब देश भर में महिला आरक्षण के कार्यान्वयन को ध्यान में रखते हुए 16 अप्रैल को संसद का तीन दिवसीय सत्र आहूत किया गया है। महिलाओं को और अधिक अवसर प्रदान करेगा नारी शक्ति वंदन अधिनियम प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान में राष्ट्रपति से लेकर केन्द्रीय वित्त मंत्री तक महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पंचायती राज संस्थाएं भी देश में महिला नेतृत्व का प्रभावी उदाहरण हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को और अधिक अवसर प्रदान करेगा। केन्द्र सरकार द्वारा महिलाओं के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। सशक्त भारत के निर्माण में देश की बेटियों की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाना आवश्यक है। भारत विमेन लेड डेवलपमेंट के पथ पर निरंतर अग्रसर है। सरकार महिला सुरक्षा के प्रति भी विशेष रूप से संवेदनशील और सतर्क है। देश की नारी शक्ति ने अपने परिश्रम, साहस और आत्मविश्वास ने नई ऊँचाइयों को छुआ है। अब हमें मिलकर इस शक्ति को नई ऊर्जा देनी है और उनके लिए अवसरों का विस्तार करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने सभागार में उपस्थित महिलाओं से नारी शक्ति वंदन अधिनियम में होने वाली चर्चाओं का गांव-गांव तक विस्तार करने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले के व्यापक प्रचार से देश की हर महिला तक अधिनियम की जानकारियां पहुंचाना है, जिससे वे यह समझ सकें कि गांव की पंचायत से लेकर संसद तक होने वाले निर्णयों में महिलाएं अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकती हैं। महाविद्यालयों में नारी शक्ति वंदन से संबंधित कार्यक्रम होंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के नई दिल्ली से प्रसारित संबोधन के बाद मंत्रालय भोपाल में उपस्थित मंत्रीगण को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप नारी शक्ति वंदन अधिनियम की जानकारी और भावना का विस्तार जन-जन तक करने के लिए प्रदेश में व्यापक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। राज्य सरकार 10 से 25 अप्रैल तक नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा मना रही है। पूरे प्रदेश में वृहद् स्तर पर नारी शक्ति वंदन सम्मेलन होंगे, इसके साथ ही विभिन्न स्थानों पर नारी शक्ति पदयात्रा भी निकल जाएगी। प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में इस दौरान नारी शक्ति वंदन से संबंधित कार्यक्रम विभिन्न स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। अधिनियम की जानकारी का प्रसार आवश्यक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम और महिला सशक्तिकरण के लिये जन-जन तक जानकारी के विस्तार के लिए सभी दलों, संगठनों और समाज के सभी वर्गों से सहयोग का आहवान किया गया है। इसके लिए मुख्यमंत्री स्तर से सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखा गया है। यह पत्र सांसदगण, विधायकगण, नगरीय निकाय और पंचायत राज संस्थाओं के सभी प्रतिनिधियों को भेजा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा अन्य संगठनों को भी पत्र प्रेषित कर महिला नेतृत्व और महिलाओं के प्रतिनिधित्व को विस्तार देने वाले इस अधिनियम की जानकारी का प्रसार करने का आग्रह किया है। आधी आबादी को भी महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने और देश का नेतृत्व करने के समान अवसर मिलें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों को प्रेषित पत्र में लिखा है कि "16 अप्रैल 2026 से देश की संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पूर्ण क्रियान्वयन को लेकर ऐतिहासिक चर्चा होने जा रही है। यह केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक अवसर है जब हमारे लोकतंत्र को और अधिक समावेशी और सशक्त बनाने का एक महायज्ञ किया जा रहा है।" उन्होंने लिखा है, "मेरा स्पष्ट मानना है कि समाज की प्रगति तभी संभव है, जब देश और समाज की आधी आबादी को भी महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने और देश का नेतृत्व करने के समान अवसर मिलें। देश के प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में देश की नारी शक्ति का महत्वपूर्ण योगदान है। आज भारत की बेटियां सेना से लेकर स्टार्ट-अप्स और खेल मैदान से अंतरिक्ष तक सफलता का परचम लहरा रही हैं।" मध्यप्रदेश हमेशा से महिला सशक्तिकरण के मामले में देश के लिए रहा है मॉडल राज्य "मध्यप्रदेश हमेशा से महिला सशक्तिकरण के मामले में देश के लिए एक मॉडल राज्य साबित होता रहा है। हमारी सरकार ने महिलाओं को प्रदेश के विकास का 'भागीदार' माना है। लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजना जैसी योजनाओं ने करोड़ों बहनों और बेटियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। मध्यप्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में है , जिसने पुलिस भर्ती से लेकर शिक्षक भर्ती तक अपनी बेटियों को विशेष अवसर प्रदान किए हैं जिससे वे प्रदेश की शासन … Read more

जल गंगा संवर्धन अभियान में सभी विभागों को डैशबोर्ड में जानकारी दर्ज करने का आदेश, बोलीं अपर मुख्य सचिव रस्तोगी

जल गंगा संवर्धन अभियान के सहभागी सभी विभाग डैशबोर्ड में अनिवार्य रूप से दर्ज करें जानकारी : अपर मुख्य सचिव श्रीमती रस्तोगी गंगा संवर्धन अभियान के सहभागी विभागों के नोडल अधिकारियों के साथ की बैठक कार्यों के प्रगति की समीक्षा कर दिए आवश्यक दिशा-निर्देश भोपाल  अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने जल गंगा संवर्धन अभियान के सहभागी विभागों के नोडल अधिकारियों के साथ बैठक की। विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। सभी विभागों के नोडल अधिकारियों को रैकिंग के लिए बनाए गए डैशबोर्ड में अनिवार्य रूप से समय पर जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए। जिससे अभियान की प्रगति का प्रभावी मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने तथा पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से प्रदेश में 19 मार्च से “जल गंगा संवर्धन अभियान” संचालित किया जा रहा है। अभियान से जुड़े 18 विभागों द्वारा जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन को लेकर विभिन्न प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं, इससे प्रदेश में जल संसाधनों के संरक्षण को नई दिशा मिल रही है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रस्तोगी ने 19 मार्च से अब तक किए गए कार्यों की विभाग वार प्रगति की समीक्षा कर सभी विभागों को अभियान का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।  आयुक्त, म.प्र. राज्य रोजगार गारंटी परिषद श्री अवि प्रसाद ने बैठक में सहभागी विभागों के नोडल अधिकारियों से विभागवार प्रगति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि सभी विभाग मॉनिटरिंग एवं रिपोर्टिंग के लिए बनाए गए डैश बोर्ड में अनिवार्य रूप से जानकारी दर्ज करें। डैश बोर्ड के माध्यम से अभियान की प्रगति की विभागवार रैंकिंग भी की जाएगी। बैठक में सहभागी विभागों द्वारा अभियान अंतर्गत संचालित की जा रही गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन एवं आवास, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, उद्यानिकी, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, राजस्व, संस्कृति और जन अभियान परिषद सहित अन्‍य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।  

दुर्लभ बीमारी से जंग जीतकर बच्चा बचा, डॉक्टरों ने रचा चमत्कार

जयपुर जयपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो चिकित्सा विज्ञान की ताकत के साथ-साथ उम्मीद और इंसानियत की मिसाल भी बन गई है। जहां एक तरफ दुर्लभ बीमारी ने एक परिवार के दो मासूमों की जिंदगी छीन ली, वहीं तीसरे बच्चे को महज 56 रुपए के इलाज ने नया जीवन दे दिया। यह चमत्कार हुआ जयपुर के जेके लोन अस्पताल में, जहां डॉक्टरों की सूझबूझ और समय पर सही पहचान ने मौत को मात दे दी। जब हर सांस बन गई थी जंग 10 मार्च का दिन… एक पिता अपनी गोद में नन्हीं सी जिंदगी लेकर अस्पताल की दहलीज पर पहुंचा। बच्चे की हालत बेहद नाजुक थी। जन्म के कुछ ही दिनों बाद संक्रमण ने उसे जकड़ लिया था। परिवार पहले भी यही दर्द झेल चुका था—दो बच्चों को इसी रहस्यमयी बीमारी ने 40 और 55 दिनों में छीन लिया था। इस बार डर और उम्मीद दोनों साथ थे। प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद आखिरकार परिवार जेके लोन हॉस्पिटल पहुंचा। यहां से शुरू हुई एक ऐसी जंग, जिसमें हर मिनट कीमती था। जब शरीर ने खून बनाना छोड़ दिया डॉक्टरों ने जांच की तो चौंकाने वाला सच सामने आया। बच्चे का ‘एब्सोल्यूट न्यूट्रोफिल काउंट’ (ANC) महज 82 था। मेडिकल साइंस के अनुसार, अगर यह 500 से नीचे चला जाए तो संक्रमण से बचना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इतना ही नहीं, बच्चे का बोनमैरो भी काम करना बंद कर चुका था। यानी शरीर खून नहीं बना पा रहा था और इम्यून सिस्टम लगभग फेल हो चुका था। स्थिति ऐसी थी कि हर पल मौत का खतरा मंडरा रहा था। दुर्लभ बीमारी का खुलासा मेडिकल जेनेटिक्स विभाग के डॉक्टरों ने जब गहराई से जांच की, तो पता चला कि बच्चा ‘ट्रांसकोबालामिन-2 डिफिशिएंसी’ नाम की बेहद दुर्लभ जेनेटिक बीमारी से जूझ रहा है। यह बीमारी इतनी रेयर है कि दुनिया भर में इसके सिर्फ 60 केस ही अब तक सामने आए हैं। इस बीमारी में शरीर विटामिन B12 को कोशिकाओं तक नहीं पहुंचा पाता, जिससे खून बनना बंद हो जाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। समय पर इलाज न मिले तो यह सीधे मौत की ओर ले जाती है। 14 रुपए का इंजेक्शन बना जिंदगी का सहारा अब कहानी में आता है सबसे बड़ा मोड़। डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए हाइड्रॉक्सीकॉबालामिन इंजेक्शन का प्रोटोकॉल शुरू किया। एक इंजेक्शन की कीमत—सिर्फ 14 रुपए! हफ्ते में एक बार लगने वाले इस इंजेक्शन के चार डोज दिए गए। कुल खर्च—महज 56 रुपए। लेकिन असर? चमत्कार से कम नहीं। कुछ ही दिनों में बच्चे का ANC लेवल 82 से बढ़कर 6000 के पार पहुंच गया। बोनमैरो ने फिर से काम करना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे मासूम मौत के मुंह से बाहर निकल आया। परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बच्चे के पिता की आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार दर्द के नहीं, राहत के। उन्होंने कहा, “हमारे लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। पहले दो बच्चों को हमने यूं ही खो दिया, हमें समझ ही नहीं आया कि बीमारी क्या है। इस बार डॉक्टरों ने हमारे बच्चे को नई जिंदगी दे दी।” डॉक्टरों की टीम बनी फरिश्ता डॉक्टरों का कहना है कि सही समय पर जेनेटिक पहचान और तुरंत शुरू किया गया इलाज ही बच्चे की जिंदगी बचा सका। अगर थोड़ी भी देरी होती, तो परिणाम पहले जैसा ही हो सकता था। उम्मीद का संदेश यह कहानी सिर्फ एक बच्चे की नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद है, जो दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे हैं। यह बताती है कि सही समय पर सही जांच और इलाज हो, तो लाखों का खर्च नहीं, बल्कि 56 रुपए भी जिंदगी बचा सकते हैं। जयपुर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया—जब डॉक्टर ठान लें, तो किस्मत भी हार मान जाती है।

बिहार में नई सरकार की उलटी गिनती: शपथ ग्रहण की तैयारी पूरी, CM नाम का इंतजार

पटना.  बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सीएम के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की अंतिम रूपरेखा सामने आ गई है। मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार (कल) दोपहर 2 बजे से जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायक दल की बैठक सीएम आवास पर बुलाई है। भाजपा ने 3 बजे विधायकों की बैठक बुलाई है, जहां केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान विधायक दल के नेता यानी राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करेंगे। जेडीयू और भाजपा की बैठकों के बाद शाम 4 बजे विधानमंडल के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें भाजपा विधायक दल के नेता को गठबंधन का नेता चुना जाएगा। नीतीश की जगह पर आगे राजपाट चलाने के लिए यही नेता सरकार बनाने का दावा पेश करने राजभवन जाएगा या जाएगी। बिहार में भाजपा के नेतृत्व में बन रही पहली एनडीए सरकार 15 अप्रैल को शपथ लेगी। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास पर आज एनडीए के नेताओं की बैठकों का दौर चल रहा है। जेडीयू के नेता संजय झा और ललन सिंह ने उनसे करीब 40 मिनट मुलाकात की। फिर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी पहुंचे थे। इस समय सरकार गठन की गतिविधियों का केंद्र नीतीश का सीएम आवास और सम्राट चौधरी का डिप्टी सीएम आवास बना हुआ है। भाजपा विधायक दल के नेता को सीएम बनना है, जिसके लिए पर्यवेक्षक बनाए गए शिवराज सिंह चौहान कल सुबह पटना पहुंचेंगे। पांच महीने पहले विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा विधायक दल के नेता का चुनाव कराने के लिए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को पर्यवेक्षक बनाया गया था। अभी भाजपा विधायक दल के नेता सम्राट चौधरी और उप-नेता विजय सिन्हा हैं। दोनों नेता नीतीश कैबिनेट में डिप्टी सीएम हैं, जिसकी आखिरी बैठक 14 अप्रैल को होगी। कैबिनेट बैठक के बाद गठबंधन के विधायक दल के नेता नीतीश त्यागपत्र देने राजभवन जाएंगे और अगली सरकार के गठन को औपचारिक रास्ता देंगे। राजभवन से इस्तीफा देकर लौटने के बाद दोपहर 2 बजे नीतीश कुमार जदयू के विधायक दल की बैठक करेंगे, जिसका मौजूदा नेता रहने के कारण वो सीएम हैं। भाजपा के पास तो विकल्प है कि वो विधायक दल के नेता सम्राट चौधरी या उप-नेता विजय कुमार सिन्हा को ना भी बदले, लेकिन जदयू के विधायकों को सांसद बन चुके नीतीश की जगह पर कोई नया नेता चुनना ही होगा, जो विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य हो।