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मौत के मुंह से बची बच्ची: दूसरी मंजिल से गिरते ही 17 साल के लड़के ने थामा, वीडियो वायरल

इस्तांबुल इस्तांबुल के फातिह जिला में एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 2 साल की बच्ची की जान बाल-बाल बच गई। जानकारी के अनुसार, छोटी बच्ची दोहा मुहम्मद अपने घर की दूसरी मंजिल की खिड़की के पास खेल रही थी। उसी दौरान वह संतुलन खोकर नीचे गिरने लगी। लेकिन ठीक उसी समय पास में मौजूद 17 वर्षीय युवक  ने स्थिति को भांप लिया। वह तुरंत खिड़की के नीचे आकर खड़ा हो गया और जैसे ही बच्ची गिरी, उसने उसे हवा में ही पकड़ लिया। हालांकि घटना काफी पुरानी है लेकिन इसका वीडियो वर्तमान में फिर से तेजी से वायरल हो रहा है।   पास लगे एक सिक्योरिटी कैमरे के वीडियो में दिखता है कि एक छोटी बच्ची नीचे गिर रही है और लड़का ज़बात उसे हवा में ही लपक लेता है। इसके बाद, जब वह बच्ची को अपनी बाहों में थामे होता है, तो आस-पास खड़े लोग उसे घेर लेते हैं। फ़्यूज़ी ज़बात ने बताया कि "मैं सड़क के ऊपरी हिस्से से नीचे की ओर जा रहा था। मैंने देखा कि एक आदमी ऊपर की ओर देख रहा है; इस बात ने मेरा ध्यान खींचा," चश्मदीद इज़्ज़त बायर ने DHA को बताया। "और मैंने देखा कि वह छोटी बच्ची बस गिरने ही वाली थी। और इस 'शेर' जैसे इंसान ने उस बच्ची को हवा में ही लपक लिया और उसे उसके परिवार से मिला दिया।" इस साहसिक कदम के कारण बच्ची को एक भी चोट नहीं आई और वह पूरी तरह सुरक्षित बच गई। यह पूरी घटना पास लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि उस समय बच्ची की मां रसोई में खाना बना रही थीं और बच्ची खेलते-खेलते खिड़की तक पहुंच गई थी।बच्ची के परिवार ने युवक को “हीरो” बताते हुए उसका धन्यवाद किया और आभार स्वरूप 200 तुर्की लीरा का इनाम भी दिया। वहीं, युवक ने बेहद सादगी से कहा कि उसने सिर्फ इंसानियत के नाते और “अल्लाह के लिए” यह काम किया। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सही समय पर उठाया गया एक छोटा कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।

मिडिल ईस्ट संकट गहराया: नेतन्याहू बोले—ईरान के खिलाफ एकजुट हों सभी देश

नई दिल्ली इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को दुनिया के नेताओं से अपील की कि वे ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के युद्ध प्रयासों में शामिल हों। बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायल की धरती पर हाल ही में हुए हमलों का हवाला देते हुए ईरान को एक बढ़ता हुआ वैश्विक खतरा बताया। नेतन्याहू की वर्ल्ड लीडर्स से अपील ईरान ने इजरायल के अराद में मिसाइल अटैक किया था। इस हमले की जगह से ही नेतन्याहू ने 48 घंटों में ईरान के किए गए हमलों के बारे में दुनिया को बताया। इजरायली पीएम ने कहा, 'ईरान ने यरुशलम में आम नागरिकों वाले इलाकों और अहम धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया है, जिनमें वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद शामिल हैं।' नेतन्याहू ने कहा कि ईरान न केवल इजरायल के लिए, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी खतरा बन गया है। इजरायल में हुए हमले नेतन्याहू ने कहा, 'अगर आपको इस बात का सबूत चाहिए कि ईरान पूरी दुनिया को खतरे में डाल रहा है, तो पिछले 48 घंटों की घटनाओं ने यह सबूत दे दिया है। पिछले 48 घंटों में, ईरान ने एक आम नागरिक वाले इलाके को निशाना बनाया।' नेतन्याहू ने आगे कहा, 'वे इसे बड़े पैमाने पर लोगों को मारने वाले हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। खुशकिस्मती से, कोई मारा नहीं गया, लेकिन यह सिर्फ किस्मत की वजह से हुआ, न कि उनके इरादे की वजह से। उनका इरादा तो आम नागरिकों की हत्या करना ही है।' इजरायली पीएम ने कहा, 'दूसरी बात, उन्होंने यरुशलम में तीन एकेश्वरवादी धर्मों के पवित्र स्थलों—वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद के ठीक बगल में हमला किया। नेतन्याहू ने बताया, 'एक चमत्कार की बदौलत, फिर से, उनमें से किसी को कोई चोट नहीं आई, लेकिन वे तीन प्रमुख एकेश्वरवादी धर्मों के पवित्र स्थलों को ही निशाना बना रहे थे।' इजरायल-अमेरिका कर रहे दुनिया के लिए काम इजरायली पीएम ने कहा, 'वे हर किसी को अपने निशाने पर ले रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और ऊर्जा मार्गों को रोक रहे हैं और पूरी दुनिया को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहे हैं।' नेतन्याहू ने कहा, 'आपको और क्या सबूत चाहिए कि इस शासन को, जो पूरी दुनिया के लिए खतरा है, रोकना ही होगा? इजरायल और अमेरिका पूरी दुनिया के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और अब समय आ गया है कि बाकी देशों के नेता भी इसमें शामिल हों।' इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कहा, 'मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि मैं देख सकता हूं कि उनमें से कुछ लोग उस दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर रहे हैं, लेकिन अभी और ज्यादा के आने की जरूरत है।' नेतान्याहू ने ईरान के खिलाफ व्यापक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की अपीलों का भी स्वागत किया और इसे न केवल इजरायल और अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी जरूरी बताया।

‘फिट रहो या हटो’ नियम लागू: वजन बढ़ा तो उड़ान भी रुकेगी, तनख्वाह पर भी पड़ेगी मार

नई दिल्ली एयर इंडिया ने अपने केबिन क्रू (फ्लाइट अटेंडेंट्स) के लिए फिटनेस के नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। अब केवल अनुभव ही नहीं बल्कि शरीर का वजन और फिटनेस भी यह तय करेगी कि कौन आसमान में उड़ान भरेगा और कौन जमीन पर रहेगा। टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने अपने केबिन क्रू के लिए 'कैबिन क्रू हेल्थ एंड फिटनेस कंप्लायंस पॉलिसी' लागू करने का फैसला किया है। 1 मई से प्रभावी होने वाले इन नए नियमों के तहत अब स्टाफ का BMI (बॉडी मास इंडेक्स) उनकी नौकरी और सैलरी तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगा। एयर इंडिया ने फिटनेस को मापने के लिए क्रू मेंबर्स को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है:     नॉर्मल (18 से 24.9): इसे पूरी तरह फिट माना गया है। ऐसे क्रू मेंबर्स बिना किसी रोक-टोक के उड़ान भर सकेंगे।     अंडरवेट (18 से कम): इस श्रेणी के स्टाफ को 'अनफिट' माना जाएगा और उन्हें ड्यूटी से हटाकर मेडिकल चेकअप के लिए भेजा जाएगा।     ओवरवेट (25 से 29.9): इन्हें भी एक्टिव फ्लाइंग से हटा दिया जाएगा। मेडिकल क्लियरेंस मिलने के बाद ही इन्हें दोबारा काम पर लौटने की अनुमति मिलेगी।     मोटापा (30 या उससे ज्यादा): इस कैटेगरी को 'ओबीस' (Obese) माना गया है। ऐसे कर्मचारियों को किसी भी हाल में उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। नियमों की अनदेखी पड़ी महंगी: सैलरी और नौकरी पर खतरा नए नियमों के अनुसार अगर कोई क्रू मेंबर फिटनेस मानकों को पूरा नहीं करता है तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है:     ग्राउंडिंग और नो-पे: अनफिट पाए जाने पर कर्मचारी को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया जाएगा और जब तक वह फिट घोषित नहीं होता, उसे बिना वेतन (Leave without pay) के छुट्टी पर रहना होगा।     कड़ी निगरानी: अब फ्लाइट से पहले और फ्लाइट के बाद भी क्रू मेंबर्स का रैंडम BMI चेक किया जाएगा।     वार्निंग लेटर: अनफिट पाए जाने पर सुधार के लिए 30 दिन का समय मिलेगा। अगर 30 दिन में वजन कम नहीं हुआ तो औपचारिक 'कॉशन लेटर' दिया जाएगा। अगले 30 दिन तक सुधार न होने पर 'फाइनल वार्निंग' और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल टेस्ट अनिवार्य जिन क्रू मेंबर्स का BMI 30 या उससे ज्यादा है उन्हें 7 दिनों के भीतर ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल जैसे जरूरी टेस्ट करवाने होंगे। कंपनी यह देखना चाहती है कि वजन बढ़ने के पीछे कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है। क्यों जरूरी है यह कदम? एयरलाइन का मानना है कि केबिन क्रू का फिट होना न केवल विमान की सुरक्षा के लिए जरूरी है बल्कि यात्रियों की सेवा और आपातकालीन स्थितियों (Emergency) से निपटने के लिए भी अनिवार्य है।

जजों की वफादारी पर सवाल! सुप्रीम कोर्ट के जज ने कही चौंकाने वाली बात

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां ने रविवार को अहम टिप्प्णी की है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है कि कुछ जज राजा से भी ज्यादा वफादार वाले सिंड्रोम से पीड़ित हैं। यहां तक कि सही मामलों तक में जमानत नहीं देते। इसकी वजह से लोगों को काफी समय तक जेल में रहना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत में, असहमति और बहस के लिए ज्यादा जगह होनी चाहिए। असहमति को अपराध नहीं बनाया जा सकता। अलग-अलग विचारों के प्रति ज्यादा सहनशीलता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ''विकसित भारत में, ऐसा नहीं हो सकता कि माता-पिता यह कहें कि उनके बच्चे दलितों द्वारा बनाया गया खाना नहीं खाएंगे। विकसित भारत में, ऐसा नहीं हो सकता कि दलित पुरुषों को गलियारों में बिठाया जाए और लोग उन पर पेशाब करें। हर व्यक्ति के सम्मान की रक्षा जरूर होनी चाहिए।'' लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस भुइयां ने कहा कि अब छोटी-छोटी बातों-जैसे प्रदर्शन, सोशल मीडिया मीम्स या पोस्ट पर ही एफआईआर हो जा जाती है। यह मामले बाद में सुप्रीम कोर्ट तक आते हैं और फिर इसमें एसआईटी बनाने की बात कही जाती है। इन सबसे कोर्ट का समय काफी बर्बाद हो जाता है। जस्टिस भुइयां सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन नेशनल कॉन्फ्रेंस 2026 में अपनी बात कह रहे थे। इसमें विकसित भारत में न्यायपालिका की भूमिका विषय रखा गया था। उन्होंने कोर्ट में बड़ी संख्या में मामलों के पेंडिंग रहने के पीछे बेतुकी अपील और बेबुनियाद एफआईआर को भी वजह बताया। जस्टिस भुइयां ने कहा, ''यह देखा है कि हाल के समय में आपराधिक केसों और एफआईआर बहुत लापरवाही से की जा रही हैं। छोटी-मोटी बातों जैसे सार्वजनिक जगह पर हुए प्रदर्शन, आंदोलन चाहे वह छात्र ही क्यों न कर रहे हों और यहां तक कि कभी कभी तो मीम्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स डालने के लिए भी एफआईआर दर्ज कर ली जाती हैं। फिर पुलिस जांच चलती रहती है। बाद में जब ये केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं तो जांच के लिए एसआईटी का गठन करना पड़ता है, जहां पर न्यायपालिका का काफी समय बर्बाद हो जाता है।'' UAPA को बताया कठोर कानून जस्टिस भुइयां ने अपने भाषण में यूएपीए पर भी बात की और उसे एक कठोर कानून बताया। उन्होंने लोकसभा में दिए गए गृह मंत्रालय के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि 2019 में इसके तहत 1984 अरेस्ट किए गए, लेकिन सिर्फ 34 को ही दोषी ठहराया जा सका। दोषसिद्धि दर 1.74 फीसदी थी। इसके बाद, 2020 में 1321 लोगों को अरेस्ट किया गया, जिसमें सिर्फ 80 को ही दोषी ठहराया जा सका। दोषसिद्धि की दर यहां भी तीन फीसदी ही रही। इसी तरह उन्होंने कई आगे के साल के भी आंकड़े रखे, जिसमें दोषसिद्धि दर काफी कम थी। जस्टिस भुइयां ने कहा कि इन आंकड़ों से मालूम चलता है कि दर लगातार चार फीसदी से भी कम रही है। इससे क्या पता चलता है। इससे कोर्ट पर काफी बोझ पड़ता है। पता चलता है कि गिरफ्तारियां बिना ठोस सबूत के जल्दबाजी में की गई थीं। इससे लंबित मामले और बढ़ते हैं।

ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच कांग्रेस सांसद बोले—‘प्यार और जंग में सब जायज’, केंद्र से की ये मांग

नई दिल्ली   ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर पूरी दुनिया में असमंजस की स्थिति है। झारखंड से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा हालात ऐसे लगते हैं मानो “प्यार और जंग में सब जायज” वाली स्थिति हो, लेकिन हकीकत यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध के भी नियम और मानक होते हैं, जिनका पालन जरूरी है। उन्होंने एएनआई से बातचीत में मोदी सरकार से एक अपील भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा संघर्ष में अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी की जा रही है और ऐसे ठिकानों पर हमले हो रहे हैं, जिनका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। खास तौर पर ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमलों से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हस्तक्षेप की मांग कांग्रेस सांसद ने कहा कि यूएनओ समेत सभी बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकसित देशों को इस स्थिति में आगे आकर पहल करनी चाहिए, ताकि तनाव को कम किया जा सके और हालात नियंत्रण में आएं। सुखदेव ने स्पष्ट कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता। उन्होंने भारत की भूमिका को “शांति के दूत” के रूप में बताते हुए कहा कि ऐसे समय में भारत को शांति स्थापित करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। सरकार से अपील उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी संकट गहरा है और सरकार भी यह स्वीकार कर चुकी है। यह मांग की कि मौजूदा संसद सत्र के दौरान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति सामने रखनी चाहिए। संसद में इस पर चर्चा होनी चाहिए ताकि देश में किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे। खाड़ी देशों पर जो भी दुष्प्रभाव पड़ेगा, उसका सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ेगा। भारत को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि वह आज कहां खड़ा है। क्या वह ईरान के साथ है या इजरायल के साथ? आमजन इससे ज्यादा प्रभावित होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा संकट से महंगाई बढ़ेगी। राहुल गांधी कई बार इस मुद्दे को उठा चुके हैं। सरकार कहती है कि पैनिक स्थिति नहीं है। अगर नहीं है तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए क्या आपने इस संकट के समाधान का कोई रास्ता निकाला है? गैस के लिए लोग अभी भी लगातार लाइन में खड़े हैं। अगर नॉर्मल स्थिति आ गई है तो बुकिंग के बाद भी लोगों को लाइन पर क्यों खड़ा होना पड़ रहा है। लेकिन बीच में जो हालात हुए थे, वैसी स्थिति न हो। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि हमारी तैयारी कितनी पूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को आर्थिक और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

सोने की आड़ में करोड़ों की ठगी! रान्या राव की हैरान कर देने वाली कहानी

नई दिल्ली बेंगलुरु एयरपोर्ट पर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) द्वारा गिरफ्तार की गई कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच अधिकारियों के अनुसार, बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी के इस काले कारोबार में उतरने से पहले रान्या और उनके साथियों को एक युगांडा के एजेंट ने 2 करोड़ रुपये का चूना लगाया था। इसी ठगी के बाद अभिनेत्री ने घाटे की भरपाई के लिए तस्करी का रास्ता चुना। पिछले महीने दाखिल की गई चार्जशीट में DRI ने बताया कि मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच रान्या राव और उनके सहयोगियों ने भारत में 127.28 किलोग्राम सोना तस्करी के जरिए पहुंचाया, जिसकी कीमत लगभग 102.55 करोड़ रुपये है। रान्या को मार्च 2025 में दुबई से लौटते समय 14 किलो सोने के साथ गिरफ्तार किया गया था, जिसे उन्होंने अपने शरीर में छिपाकर रखा था। युगांडा और केन्या के एजेंटों ने की ठगी अधिकारियों के मुताबिक, रान्या और उनके सहयोगी तरुण कोंडुरु राजू ने शुरुआत में अफ्रीका (युगांडा, केन्या और तंजानिया) से सीधे सोना खरीदने की कोशिश की थी। उन्होंने इसके लिए दुबई में 'वीरा डायमंड्स ट्रेडिंग LLC' नाम की एक कंपनी भी खोली। पहला धोखा: युगांडा के एक एजेंट बेन के साथ 5 किलो सोने का सौदा हुआ। राजू ने युगांडा के कंपाला जाकर एजेंट से मुलाकात की। वहां सोने की खेप छुड़ाने के नाम पर उनसे 1.7 करोड़ रुपये और ऐंठ लिए गए। कुल मिलाकर उन्हें 2 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हुआ। दूसरा प्रयास: युगांडा में ठगे जाने के बाद उन्होंने केन्या में कोशिश की, लेकिन वहां भी उनके साथ इसी तरह की धोखाधड़ी हुई। केन्याई अधिकारियों से मदद न मिलने पर उन्होंने अफ्रीका से सीधा व्यापार बंद कर दिया। अफ्रीका में बार-बार ठगे जाने के बाद, इस गुट ने दुबई के स्थानीय बाजार देइरा गोल्ड सूक से सोना खरीदना शुरू किया। यहां वे अफ्रीकी डीलरों से नकद में सोना खरीदते थे और फिर उसे अवैध तरीके से भारत भेजते थे। जांच में पाया गया कि यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें विदेश से सोना खरीदना, भारत में अवैध आयात करना और फिर हवाला के जरिए पैसों की हेराफेरी करना शामिल था। ईडी की रडार पर व्हाट्सएप चैट प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इनके व्हाट्सऐप चैट बरामद किए हैं, जो पैसों के लेनदेन के सबूत के रूप में देखे जा रहे हैं। हालांकि, एक अधिकारी ने बताया कि अफ्रीका में हुई ठगी को पूरी तरह साबित करने के लिए अभी पर्याप्त भौतिक साक्ष्य नहीं मिले हैं। जांच के दौरान अब तक 34 करोड़ की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है।  

राजनीति में बड़ा फेरबदल: केसी त्यागी ने थामा RLD का दामन, जयंत चौधरी के साथ नई पारी

लखनऊ/नई दिल्‍ली. पूर्व जदयू नेता केसी त्‍यागी ने अब राष्‍ट्रीय लोकदल का दामन थाम लिया है। नई दिल्‍ली में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में उन्‍होंने पार्टी की सदस्‍यता ग्रहण की। इस मौके पर रालोद अध्‍यक्ष जयंत चौधरी भी मौजूद रहे। इस मौके पर केसी त्‍यागी ने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने बहुत कम उम्र में उनको हापुड़ से लड़ने के लिए टिकट दिया था। केसी त्‍यागी ने कहा कि अब वह सांसद और विधायक बनने के लिए नहीं बल्कि जयंत चौधरी को चौधरी चरण सिंह की तरह देखने के लिए रालोद आए हैं। 52 साल पहले जब चौधरी चरण सिंह राष्‍ट्रीय लोकदल का निर्माण कर रहे थे तब वह उस मंच पर मौजूद थे। आपको बता दें कि पिछले दिनों केसी त्‍यागी ने जदयू छोड़ दिया था। रालोद से शुरू किया था राजनीतिक जीवन – मैंने अपना राजनीतिक जीवन ही रालोद से शुरू किया था। यह उसी का स्‍वरूप है। कुछ नया नहीं है। चौधरी चरण सिंह के बचे हुए सपने को पूरा करने में हम मदद करेंगे। जदयू और रालोद में कोई फर्क नहीं है। एक दिन ऐसा भी था जब नीतीश कुमार और चौधरी अजित सिंह मिलकर नई पार्टी बनाने वाले थे। केसी त्‍यागी जयंत ने किया था त्‍यागी की पुस्‍तक का विमोचन गौरतलब है कि पिछले हफ्ते केसी त्‍यागी की एक पुस्‍तक का विमोचन समारोह हुआ था। उसमें जयंत चौधरी को मुख्‍य अतिथि बनाया गया था। उसी समय से अटकलें लग रही थीं कि केसी त्‍यागी जल्‍द राष्‍ट्रीय लोकदल में शामिल हो सकते हैं। जदयू में निभाई बड़े पदों की जिम्‍मेदारियां आपको बता दें कि केसी त्‍यागी 2003 से जदयू से जुड़े हुए थे। उस समय समता पार्टी और जनता दल के मिलकर जदयू बनने के बाद वह पार्टी में लगातार सक्रिय रहे। उन्‍होंने मुख्‍य महासचिव, राजीतिक सलाहकार औश्र प्रवक्‍ता जैसे पदों की जिम्‍मेदारी निभाई। त्‍यागी का कहना था कि नीतीश कुमार के साथ उनका 5 साल पुराना नाता है। उन्‍होंने इस्‍तीफा नहीं दिया है। बस अपनी सदस्‍यता का रिन्‍यूअल नहीं कराया है। नीतीश संग रिश्‍ते में दरार आने के चर्चा केसी त्‍यागी ने कहा था कि लगभग आधी सदी तक उनके साथी रहे नीतीश कुमार के प्रति उनका व्‍यक्तिगत सम्‍मान अब भी पहले जैसा है। केसी त्‍यागी को नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में शामिल माना था जाता था। हालांकि चर्चा है कि पिछले कुछ महीने से दोनों के रिश्‍तों में दरार आई है। वैभव पांडे

संवाद से सुलझेगा संकट? मणिपुर में सरकार और कुकी समुदाय आमने-सामने

इम्फाल. मई 2023 में भड़की हिंसा के बाद यह पहला मौका है जब मणिपुर सरकार के मुखिया और कुकी-जो समुदाय के शीर्ष नेतृत्व के बीच आमने-सामने बैठकर बातचीत हुई है। लगभग पौने दो घंटे तक चली इस बातचीत ने अशांति की जमी हुई बर्फ को पिघलाने का काम किया है।   शांति की ओर पहला कदम रविवार को कुकी समुदाय की ओर से जारी बयान में इस बात की पुष्टि हुई है। काउंसिल ने इसे औपचारिक संवाद की शुरुआत बताया है। हालांकि, बैठक में किसी ठोस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए। फिर भी मणिपुर की राजनीति को करीब से समझने वाले लोगों का मानना है कि दोनों पक्षों का एक मेज पर बैठना ही अपने आप में एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। कुकी समुदाय की शर्तें बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के साथ बैठक के दौरान कुकी-जो प्रतिनिधिमंडल ने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने कुछ प्रमुख मांगें रखीं। कुकी समुदाय के नेताओं ने मुख्यमंत्री से कहा कि संघर्ष के दौरान जान-माल गंवाने वाले पीड़ितों को न्याय मिलना किसी भी शांति प्रक्रिया की पहली अनिवार्य शर्त है। इसके अलावा कुकी नेताओं ने कहा कि हाल के दिनों में  कुकी और तांगखुल समुदायों के बीच बढ़े तनाव को तत्काल कम करने की आवश्यकता है। जब तक कोई अंतिम राजनीतिक समाधान नहीं निकल जाता, तब तक दोनों समुदायों के बीच बने 'बफर ज़ोन' की यथास्थिति बरकरार रखी जाए। उग्रवादी समूहों के साथ जारी सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस वार्ता को जल्द तार्किक अंजाम तक पहुंचाया जाए ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने क्या कहा? सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने प्रतिनिधि मंडल की बातों को बेहद धैर्यपूर्वक सुना। उन्होंने अपनी सरकार की ओर से शांति बहाली के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। सीएम ने इस बात की सराहना की कि चुनौतीपूर्ण समय के बावजूद कुकी-जो काउंसिल संवाद के लिए आगे आई। बताते चलें कि मई 2023 से अब तक मणिपुर में 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं, हजारों की संख्या में लोग आज भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। उम्मीद है कि गुवाहाटी में हुई इस बैठक का नतीजा सिर्फ शांति ही हो।

जहरीले दूध से बढ़ता मौत का आंकड़ा: आंध्र में 16 की जान गई, 3 अब भी गंभीर

राजा महेंद्रवरम. राजामहेंद्रवरम में मिलावटी दूध पीने के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है. कई पीड़ितों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है. इस घटना से पूरे आंध्र प्रदेश में चिंता फैल गई है. यह मामला पिछले महीने की 16 तारीख को सामने आया था. इस घटना के बाद अब भी शहर के लोग गहरे सदमे में हैं. अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार को दो और लोगों की मौत हो गई. डॉक्टर अभी भी उन लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं जिन्होंने वह जहरीला दूध पिया था. वर्तमान में, एक पांच महीने के शिशु और दो साल के बच्चे सहित पांच मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है. बताया जा रहा है कि सभी मरीज वेंटिलेटर पर हैं. उनका डायलिसिस किया जा रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि जहरीले रसायन ने शरीर के जरूरी अंगों को पहले ही काफी नुकसान पहुंचा दिया था, जिससे इलाज करना बेहद मुश्किल हो गया. मरने वालों में दो बच्चे, मनोहर (6 साल) और जयकृत राज (3 साल) भी शामिल हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि दूध में 'इथाइलीन ग्लाइकॉल' नाम का एक बेहद जहरीला रसायन मिला था. आरोप है कि यह दूध कोरुकोंडा मंडल के नरसापुरम के रहने वाले गणेश्वर राव नाम के विक्रेता ने सप्लाई किया था. इस घटना का पता तब चला जब एक ही परिवार के चार सदस्यों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने इसकी जांच शुरू की. मेडिकल जांच में मरीजों के सीरम क्रिएटिनिन का स्तर 8 से 11 के बीच पाया गया, जो किडनी के गंभीर नुकसान को दर्शाता है. मरीजों का इलाज मशहूर किडनी विशेषज्ञ डॉ. रविराज की देखरेख में किया गया, वहीं हैदराबाद के विशेषज्ञों ने भी अस्पताल आकर स्थिति का जायजा लिया और जरूरी सलाह दी. अधिकारियों ने बताया कि आसपास के इलाकों के लगभग 65 दूध विक्रेता राजमहेंद्रवरम शहर में दूध की सप्लाई करते हैं, और इस मिलावट कांड ने पूरे कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है. अधिकारी अब ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत निगरानी प्रणाली और सख्त खाद्य सुरक्षा जांच की जरूरत पर जोर दे रहे हैं. विशेषज्ञों ने भी जनता के बीच जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है ताकि उपभोक्ताओं को मिलावटी दूध की पहचान करने और संदिग्ध उत्पादों की सूचना देने के लिए शिक्षित किया जा सके. उनका कहना है कि भविष्य में इस तरह की त्रासदियों से बचने के लिए दूध की सप्लाई चेन का नियमित निरीक्षण और खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है. इस घटना ने स्थानीय निवासियों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, जो इतने मासूम लोगों की जान लेने वाली इस मिलावट के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

मौत के एक महीने बाद आया मैसेज! जबलपुर में डॉक्टर के फोन से ‘श्राप’ की चेतावनी

जबलपुर. राइट टाउन निवासी डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की करोड़ों की संपत्ति हड़पने के प्रयासों के विवाद के बीच नया घटनाक्रम सामने आया है। डॉ. हेमलता की मृत्यु के बाद उनके मोबाइल फोन से शुक्रवार को सुबह 10:30 बजे आईएमए की स्थानीय शाखा की अध्यक्ष को अनर्गल संदेश भेजा गया है। मामले में अध्यक्ष डॉ. ऋचा शर्मा ने साइबर पुलिस में शिकायत की गई है। संदेश को गंभीर बताते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। साइबर पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। मालूम हो कि स्व: डॉ. हेमलता के अस्वस्थ्य रहने के दौरान जब उनकी संपत्ति को हड़पने के प्रयास हुए थे, तो आईएमए ने हस्तक्षेप किया था। जिसके बाद उनकी संपत्ति के संदिग्ध दान पत्र सहित अन्य प्रक्रिया की प्रशासनिक स्तर पर जांच हुई थी। मामला पुलिस तक पहुंचा था। इसलिए आईएमए अध्यक्ष के फोन पर पहुंचे संदेश को गंभीर माना जा रहा है। मैसेज में आखिर क्या स्व. डॉ. हेमलता श्रीवास्तव के मोबाइल से जो संदेश भेजा गया है वह अंग्रेजी में है- जिसमें कहा है कि 'क्षमा करें, मोबाइल कानूनी तौर पर मेरे पास है। डॉ. हेमलता के परिवार की ओर से उन सभी को श्राप है, जिनका हश्र उनके जैसा हुआ। अपहरण, भूख से तड़पना, फिर पीएम और अंत में मुर्दाघर, मानवता को धिक्कार है।' आईएमए अध्यक्ष ने प्रशासन और पुलिस को दिया था संदेश आईएमए अध्यक्ष की ओर से प्रशासन और पुलिस को जानकारी दी गई थी कि डॉ. हेमलता श्रीवास्तव लंबे समय से अस्वस्थ हैं। उनके पति एवं पुत्र का देहांत हो चुका है। वह शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं। इस मौके का फायदा उठाते हुए कुछ लोग राइट टाउन की उनकी करोड़ों रुपये की संपत्ति को हड़पना चाहते हैं। शिकायत पर प्रशासन ने जांच की तो पता चला कि डॉ. श्रीवास्तव की संपत्ति में से 5512.5 वर्गफीट जमीन डॉ. सुमित जैन और 5512.5 वर्गफीट जमीन उनकी पत्नी डॉ. प्राची जैन ने धोखे से दानपत्र के जरिए हड़प ली है। हड़पी गई जमीन पर डॉक्टर दंपती ने चारदीवारी भी खड़ी कर दी थी। बाद में प्रशासनिक जांच के बाद डॉक्टर दंपती के पक्ष में जारी दानपत्र निरस्त कर दिया गया। डॉ. दंपती के विरुद्ध मदन महल थाना में एफआईआर दर्ज की गई। संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है। कौन चला रहा डॉक्टर का मोबाइल संपत्ति विवाद के बीच डॉ. हेमलता की 15 फवरी को मेडिकल अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। उनका अंतिम संस्कार भी प्रशासन की निगरानी में हुआ था। उनसे संबंधित सामग्रियों को जब्त कर लिया गया था। उनकी राइट टाउन स्थित विवादित संपत्ति को नगर निगम ने अपने कब्जे में लिया है। आईएमए अध्यक्ष को पहुंचे संदेश के बाद सवाल उठ रहे हैं कि उनका मोबाइल फोन किसके पास है। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि उनका मोबाइल अभी कौन चला रहा है। अनर्गल संदेश भेजने की उसकी मंशा के बारे में जानने के प्रयास किए जा रहे हैं।