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8वां वेतन आयोग: लागू होने की तारीख, एरियर भुगतान और कर्मचारियों की डिमांड

नई दिल्ली 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8वां सीपीसी) के शुरुआत के साथ ही केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स उम्मीद कर रहे हैं कि आयोग नवंबर 2025 में टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी होने के 18 महीने के भीतर अपनी रिकमंडेशन रिपोर्ट को पब्लिश करेगा। हालांकि, इस बात को लेकर संशय बना हुआ है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होंगी या इसके बाद। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की मांग है कि पे स्केल्स (वेतनमान), अलाउंसेज (भत्तों), पेंशन और दूसरे बेनेफिट्स में रिवीजन 1 जनवरी 2026 से होना चाहिए, ना कि किसी संभावित तारीख से। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस का कहना है कि पे रिवीजन पहले ही देय है। यह बात एक रिपोर्ट में कही गई है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए सरकार अगर कोई संभावित तारीख चुनती है तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को ठीक-ठाक एरियर्स का नुकसान हो सकता है। 7वें वेतन आयोग का समय 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो गया। क्या कहते हैं ट्रेंड? पिछली परिस्थितियों में सरकार ने हमेशा पिछले पे कमीशन (वेतन आयोग) के आखिरी दिन के बाद अगले दिन से एरियर दिए हैं। उदाहरण के लिए अगर हम 6वें वेतन आयोग की एरियर डेट की बात करें तो कमीशन ने अपनी रिपोर्ट मार्च 2008 में सबमिट की, लेकिन कर्मचारियों और पेंशनर्स को 1 जनवरी 2006 से एरियर मिला। पिछले पे कमीशंस की टाइमलाइन 7वां वेतन आयोग फरवरी 2014 में बना। कमीशन ने नवंबर 2015 में अपनी रिपोर्ट जमा की और यह जून 2016 में लागू हुआ, इसमें कुल करीब 2.5 साल लगे। सातवें वेतन आयोग में जनवरी 2016 से जून 2016 तक की अवधि का एरियर दिया गया। 6वां वेतन आयोग अक्टूबर 2006 में बना, आयोग ने अपनी रिपोर्ट मार्च 2008 में सबमिट की और यह अगस्त 2008 में लागू हुआ। इसमें 40 पर्सेंट एरियर का भुगतान 2008 में और 60% का पेमेंट साल 2009 में किया गया। 5वां वेतन आयोग अप्रैल 1994 में बना। पे कमीशन ने अपनी रिपोर्ट जनवरी 1997 में जमा की और यह अक्टूबर 1997 में लागू हुआ। इसमें करीब 3.5 साल लगे। पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कंट्रीब्यूटरी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को वापस लिया जाना चाहिए और नॉन-कंट्रीब्यूटरी ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल किया जाना चाहिए। AITUC ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8वें सीपीसी) से जोर दिया है कि पेंशनर्स के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है और पेंशन रिवीजन के जरिए अपनी सिफारिशों में पेंशनर्स को कवर करना चाहिए। साथ ही, पेंशन रेस्टरैशन के कम्प्यूटेशन को मौजूदा 15 साल से घटाकर 11 से 12 साल किया जाना चाहिए। AITUC ने यह भी रिकमंड किया है कि पेंशन में इजाफा हर 5 साल के बाद होना चाहिए। 8वां वेतन आयोग और फिटमेंट फैक्टर 8वें पे कमीशन (8वें वेतन आयोग) ने काम्पन्सेशन रिवीजन्स पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स, एंप्लॉयीज यूनियंस और कई दूसरे स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगा है। कई एंप्लॉयीज यूनियंस ने अपनी डिमांड रखी हैं, जिसमें फिटमेंट फैक्टर्स भी शामिल है। द फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस ने 3.0 से 3.25 की रेंज में फिटमेंट फैक्टर्स रिकमंड किया है।

चार दिन की बारिश का अलर्ट: प्री-मानसून ने बढ़ाई रफ्तार, IMD ने जारी की चेतावनी

नई दिल्ली प्री-मानसून ने जब से देश में दस्तक दी है, मौसम ही बदल गया है। मानसून 2025 सीज़न में पूरे देश में शानदार बारिश देखने को मिली और सीज़न के बाद भी कई राज्यों में बारिश का सिलसिला बना रहा। अब 2026 में प्री-मानसून ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है, जिससे कई राज्यों में फिर से बारिश का दौर शुरू हो गया है। अब देश में प्री-मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) ने कई राज्यों में 22, 23, 24 और 25 मार्च को भारी बारिश का अलर्ट (Heavy Rain Alert) जारी किया है। उत्तरपश्चिम भारत उत्तरपश्चिम भारत में प्री-मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 22, 23, 24 और 25 मार्च को राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कई जगह भारी बारिश होगी। इस दौरान कई जगह हल्की बारिश का भी अलर्ट है। साथ ही 40-70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने, बिजली गरजने और कुछ जगह ओलावृष्टि का भी अलर्ट है। पश्चिम भारत पश्चिम भारत में भी प्री-मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 22, 23, 24 और 25 मार्च के दौरान मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में जमकर बादल बरसेंगे। इस दौरान बिजली गरजने और तेज़ हवा चलने की भी संभावना है। पूर्वी और मध्य भारत पूर्वी और मध्य भारत में भी प्री-मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 22, 23, 24 और 25 मार्च को मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में तेज़ बारिश होगी और कई जगह रिमझिम बारिश भी होगी। इस दौरान कुछ जिलों में 50-80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने, धूल-भरी आंधी आने, बिजली गरजने और ओलावृष्टि का भी अलर्ट है। उत्तरीपूर्व भारत उत्तरीपूर्व भारत में भी प्री-मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में मौसम विभाग ने असम, मिज़ोरम, मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में 22, 23, 24 और 25 को जमकर बादल बरसने का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 30-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने और बिजली गरजने का भी अलर्ट है। दक्षिण भारत दक्षिण भारत में भी प्री-मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में मौसम विभाग ने कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश, माहे, पुडुचेरी, यनम और कराईकल में 22, 23, 24 और 25 मार्च को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई जगह 30-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने का भी अलर्ट है।

भारत ने होर्मुज के विकल्प में खोजा रास्ता, अब तेल का भंडार आ रहा है इस नई दिशा से

नई दिल्‍ली मिडिल ईस्‍ट में जंग से तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, क्‍योंकि खाड़ी देशो से एशिया और यूरोप के देशों में तेल-गैस की सप्‍लाई बाधित हुई है. इन्‍हीं जगहों पर खाड़ी देशों के तेल-गैस की खपत ज्‍यादा होती है. इस बीच, एक रिपोर्ट का दावा है कि भारत कुछ अन्‍य जगहों से भी तेल-गैस का आयात कर रहा है, जो यह संकेत देता है कि अब वह सिर्फ स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज या खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने टेंडर के जरिए अंगोला से 20 लाख बैरल तेल खरीदा है, क्योंकि महंगे मिडिल ईस्‍ट तेल की उपलब्धता कम होने के कारण भारतीय रिफाइनर वेस्‍ट अफ्रीकी और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के तेल की ओर रुख कर रहे हैं।  भारत पहले मिडिल ईस्‍ट पर तेल गैस आयात के लिए 45 फीसदी निर्भर था, लेकिन अब वह नए-नए रास्‍तों की तलाश में है. अमेर‍िका और ईरान के बीच जंग से भारत की एनर्जी सप्‍लाई प्रभावित हुई है. स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्‍ता बंद होने के कारण भारत में LPG की सप्‍लाई सबसे ज्‍यादा बाधित हुई है।  मिडिल ईस्‍ट का तेल दुनिया का सबसे महंगा तेल  ओमान और दुबई के बेंचमार्क में थोड़ी नरमी आई, लेकिन सप्ताह की शुरुआत में इनमें तेजी आई क्योंकि मिडिल ईस्‍ट देशों का कच्चा तेल दुनिया का सबसे महंगा तेल बन गया था. इस सप्ताह की शुरुआत में ब्रेंट फ्यूचर कीमतें 2008 में 147.50 डॉलर के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गईं।  एशिया जाने वाले लाखों बैरल मिडिल ईस्‍ट कच्‍चे तेल की कीमत तय करने के लिए इस्‍तेमाल किए जाने वाले बेंचमार्क में अचानक हुई वृद्धि ने एशियाई रिफाइनरों के लिए लागत बढ़ा दी है, जिससे वे विकल्प तलाशने या उत्पादन कम करने के लिए मजबूर हो गए हैं।  कहां कितना तेल खरीद रहा भारत?  रॉयटर्स के अनुसार, एचपीसीएल ने एक्सॉन से क्लोव और कैबिंडा के दस लाख बैरल खरीदे हैं, जिनकी कीमत ब्रेंट क्रूड ऑयल की तुलना में लगभग 15 डॉलर अधिक है और जिनकी डिलीवरी मई 1-10 के बीच होनी है. इस रिफाइनरी ने राजस्थान के रेगिस्तानी राज्य में स्थित अपनी 180,000 बैरल प्रति दिन की क्षमता वाली बाड़मेर रिफाइनरी के लिए तेल खरीदा है।  इस सप्ताह की शुरुआत में, HPCL ने व्यापारी टोट्सा से फोरकाडोस और अगबामी के एक-एक मिलियन बैरल खरीदे. इसके अलावा, इंडियन ऑयल कॉर्प देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइन कंपनी भी पश्चिम अफ्रीका से कच्चा तेल खरीदने की कोशिश कर रही थी। 

वैश्विक मंच पर ईरान पर वार: नेतन्याहू बोले– दुनिया की सुरक्षा को बड़ा खतरा, दिखाए प्रमाण

ईरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को दुनियाभर के नेताओं से अपील की कि वे ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के युद्ध प्रयासों में शामिल हों। उन्होंने इजरायली क्षेत्र पर हाल ही में हुए हमलों का हवाला देते हुए कहा कि ये हमले एक बढ़ते वैश्विक खतरे का सबूत हैं। इजरायल के अराद में ईरान द्वारा किए गए एक मिसाइल हमले की जगह पर बोलते हुए, नेतन्याहू ने कहा कि पिछले 48 घंटों के घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि ईरान न केवल इजरायल के लिए, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है। इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान ने यरुशलम में नागरिक इलाकों और प्रमुख धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया है, जिनमें वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद शामिल हैं। नेतन्याहू ने कहा, "अगर आपको इस बात का सबूत चाहिए कि ईरान पूरी दुनिया के लिए खतरा है, तो पिछले 48 घंटों ने वह सबूत दे दिया है। पिछले 48 घंटों में, ईरान ने एक नागरिक इलाके को निशाना बनाया। वे ऐसा सामूहिक हत्या के हथियार के तौर पर कर रहे हैं। खुशकिस्मती से, कोई मारा नहीं गया, लेकिन ऐसा किस्मत की वजह से हुआ, न कि उनके इरादे की वजह से। उनका इरादा नागरिकों की हत्या करना है।" उन्होंने आगे कहा, "दूसरी बात, उन्होंने यरुशलम पर हमला किया, जो तीन एकेश्वरवादी धर्मों के पवित्र स्थलों- वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ़ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद के ठीक बगल में स्थित है। और एक चमत्कार की बदौलत, एक बार फिर, उनमें से किसी को भी चोट नहीं आई, लेकिन वे तीन प्रमुख एकेश्वरवादी धर्मों के पवित्र स्थलों को निशाना बना रहे थे।'' उन्होंने आगे दावा किया कि ईरान ने लंबी दूरी तक मार करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है, जिसमें काफी दूर तक मिसाइलें दागना और समुद्री व ऊर्जा गलियारों सहित रणनीतिक मार्गों को निशाना बनाना शामिल है। उन्होंने आगे कहा, ''आपको और क्या सबूत चाहिए कि इस शासन को, जो पूरी दुनिया के लिए खतरा है, रोकना ही होगा। इजरायल और अमेरिका पूरी दुनिया के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। और अब समय आ गया है कि बाकी देशों के नेता भी इसमें शामिल हों। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि मैं देख सकता हूं कि उनमें से कुछ लोग उस दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर रहे हैं, लेकिन अभी और ज्यादा करने की जरूरत है।'' नेतान्याहू ने ईरान के खिलाफ व्यापक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपीलों का भी स्वागत किया, और इसे न केवल इजरायल और अमेरिका के लिए, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी जरूरी बताया।  

भारत के पक्ष में बदला खेल: चीन की जगह भारत आया रूसी तेल, 6 और जहाज आने को तैयार

नई दिल्ली   वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है। रूस का कच्चा तेल लेकर चीन जा रहा टैंकर Aqua Titan अब भारत पहुंच गया है। यह टैंकर शनिवार शाम न्यू मंगलुरु पोर्ट पर पहुंचा। यह सात टैंकरों की उस खेप का पहला जहाज है, जिन्हें मूल रूप से चीन भेजा जा रहा था, लेकिन अब उन्हें भारत की ओर मोड़ दिया गया है। यह फैसला तब हुआ जब अमेरिका ने भारत को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह टैंकर जनवरी के अंत में बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से रवाना हुआ था और चीन के रिझाओ बंदरगाह की ओर जा रहा था। लेकिन मार्च के मध्य में इसने अचानक अपना रास्ता बदल लिया। दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे तनाव और बंद होने की आशंका के कारण भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। भारत के लगभग 40-50% कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से होता है, इसलिए यहां की स्थिति बेहद अहम है।एक और टैंकर Zouzou N 25 मार्च तक गुजरात के सिक्का पोर्ट पहुंच सकता है। यह भी पहले चीन की ओर जा रहा था, लेकिन रास्ता बदल दिया गया। शिप-ट्रैकिंग कंपनी Vortexa के अनुसार, भारत ने हाल के दिनों में रूसी तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई है, जिससे इन टैंकरों का रुख बदला गया। इन सात टैंकरों के भारत पहुंचने से देश में कच्चे तेल की कमी को कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, अमेरिका से एलपीजी लेकर आने वाला जहाज Pyxis Pioneer भी मंगलुरु पोर्ट पहुंच चुका है, जिससे रसोई गैस संकट में राहत मिलने की उम्मीद है। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए तेजी से रणनीति बदल रहा है।

Middle East में बढ़ा तनाव: सऊदी अरब ने ईरान के 5 अधिकारियों को देश से निकाला

सऊदी अरब सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सऊदी सरकार ने ईरान पर “खुलेआम हवाई हमलों” का आरोप लगाते हुए कड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में ईरान की कार्रवाई को “स्पष्ट आक्रामकता” बताया। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले न केवल सऊदी अरब बल्कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के अन्य देशों और कई अरब-इस्लामिक राष्ट्रों को भी निशाना बना रहे हैं। सऊदी अरब का कहना है कि ईरान ने उसकी संप्रभुता, नागरिकों, आर्थिक हितों और राजनयिक परिसरों को निशाना बनाया, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। इस बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने ईरानी दूतावास के सैन्य अटैची, सहायक सैन्य अटैची और तीन अन्य अधिकारियों को निष्कासित करते हुए 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है। सऊदी सरकार ने यह भी कहा कि ईरान की गतिविधियां बीजिंग समझौता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के खिलाफ हैं। रियाद ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए साफ कहा कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।इस घटनाक्रम से मिडिल ईस्ट में पहले से जारी संकट और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।

अमेरिका-इजराइल आक्रामक, ईरान रक्षात्मक– पूर्व राजनयिक का बड़ा बयान

ईरान मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पूर्व भारतीय राजनयिक के.पी. फैबियन ने बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत अमेरिका और इजराइल ने की, जबकि ईरान केवल जवाबी कार्रवाई कर रहा है। फैबियन के अनुसार, ईरान बेहद रणनीतिक तरीके से कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का रुख संतुलित है वह अन्य देशों के जहाजों के लिए रास्ता खुला रखना चाहता है, लेकिन अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाए हुए है। उन्होंने हाल ही में जापान के प्रधानमंत्री सनाए  ताकाइची की अमेरिका यात्रा और डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात का भी जिक्र किया। फैबियन के मुताबिक, इन कूटनीतिक वार्ताओं के बीच ईरान ने दो जापानी नागरिकों को रिहा करने जैसे कदम उठाए, जो उसकी रणनीति का हिस्सा है। परमाणु हमलों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार किसी भी बड़े रेडिएशन रिसाव के संकेत नहीं मिले हैं, जिससे तत्काल परमाणु खतरे की पुष्टि नहीं होती।   इतिहास का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्वेज नहर संकट का जिक्र किया और कहा कि पहले भी इस क्षेत्र में बड़ी शक्तियों के टकराव ने हालात बिगाड़े हैं। ऊर्जा संकट पर चिंता जताते हुए फैबियन ने कहा कि कतर की गैस उत्पादन क्षमता लगभग 17% घट गई है, जिससे भारत सहित कई देशों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि कतर को हर साल करीब 20 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। फैबियन ने यह भी कहा कि ईरान ने पहले परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए कई शर्तें मान ली थीं, लेकिन बेंजामिन नेतन्याहू के प्रभाव में अमेरिका ने इसे आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने इस पूरे संघर्ष को “खतरनाक वैश्विक स्थिति” बताते हुए कहा कि त्योहार जैसे ईद के दौरान हमले होना बेहद दुखद है और यह दिखाता है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं।

तेल मार्ग पर बड़ा खतरा: होर्मुज में जहाज पर प्रोजेक्टाइल अटैक से दुनिया में हड़कंप

होर्मुज होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक बड़ा समुद्री सुरक्षा खतरा सामने आया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE ) के तट के करीब एक वाणिज्यिक जहाज के पास “अज्ञात प्रोजेक्टाइल” से विस्फोट हुआ, जिससे वैश्विक चिंता बढ़ गई है।ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार, यह घटना शारजाह से लगभग 15 नॉटिकल मील उत्तर में हुई। जहाज के कप्तान ने बताया कि विस्फोट जहाज के बेहद करीब हुआ, जिससे स्थिति बेहद खतरनाक बन गई।हालांकि राहत की बात यह है कि जहाज के सभी चालक दल सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है और आसपास के सभी जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इस हमले के पीछे किसका हाथ है, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव के चलते ईरान पर संदेह जताया जा रहा है। हाल के दिनों में ईरान पर अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने के आरोप लगे हैं।होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20% वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। इस घटना के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलमार्ग सुरक्षित नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के प्रमुख बुनियादी ढांचे पर हमला कर सकता है। वहीं G7 देशों के विदेश मंत्रियों ने भी बयान जारी कर क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए हस्तक्षेप करने की तैयारी जताई है। इस घटना ने साफ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है।  

ईद की रात खून से लाल हुआ ईरान: चौथे सप्ताह में जंग ने मचाई भारी तबाही

ईरान पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान में मरने वालों की संख्या 1,500 से अधिक हो गई है। यह जानकारी सरकारी मीडिया ने स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से दी है।अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी से शुरू किए गए हमलों के बाद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। राजधानी तेहरान में रमजान खत्म होने के दौरान भीषण हवाई हमले हुए, जिससे लोगों में डर और अफरा-तफरी फैल गई। युद्ध के चौथे सप्ताह में भी संघर्ष जारी है और अब इसका दायरा और बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। यह हमला करीब 4,000 किलोमीटर दूर से किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान के पास लंबी दूरी की ताकतवर मिसाइलें मौजूद हैं। इसके साथ ही ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकाने नतांज परमाणु संवर्धन केंद्र पर फिर से हमला किया गया है, जिससे परमाणु सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है। इस युद्ध का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे वैश्विक आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन हमलों में ईरान को कुल कितना नुकसान हुआ है और देश की कमान किसके हाथ में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई को इस भूमिका के लिए नामित किया गया है, लेकिन वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: पीएम मोदी ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक, ऊर्जा मुद्दों पर फोकस

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम को उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें उन्होंने मिडिल ईस्ट में बदलती स्थिति के मद्देनजर पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की समीक्षा की और बरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों से चर्चा की। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश में तेल, गैस, खाद समेत सभी जरूरी चीजों की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है और सरकार इस दिशा में सक्रिय कदम उठा रही है। उपभोक्ताओं और उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए वैश्विक घटनाक्रमों की निरंतर निगरानी करना सरकार का मुख्य केंद्र बिंदु है। दुनिया भर में ऊर्जा संकट 12 मार्च को पीएम मोदी ने कहा था कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। यह राष्ट्रीय चरित्र की एक कठिन परीक्षा है और इससे निपटने के लिए शांति, धैर्य और जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर काम कर रही है। उन्होंने कहा, "आपूर्ति श्रंखलाओं में आई बाधाओं को हम कैसे दूर कर सकते हैं, यह पता लगाने के लिए भी लगातार प्रयास जारी हैं।" खाड़ी देशों के नेताओं से पीएम मोदी कर रहे बात 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री ने कई वैश्विक नेताओं से बात की है। संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजरायल और ईरान के नेताओं के साथ फोन पर बातचीत की है। होर्मुज से बहुत कम जहाजों को गुजरने की अनुमति ईरान ने इजरायल और कई खाड़ी पड़ोसी देशों पर हमला करके जवाबी कार्रवाई की है। ईरान होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रित करता है, जो एक प्रमुख शिपिंग मार्ग है और जिसके जरिए दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा का परिवहन होता है। संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने बहुत कम जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है।