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तेहरान से फिर शुरू हुईं कमर्शियल फ्लाइट्स, ईरान ने इन देशों के लिए उड़ानें बहाल की

 तेहरान  मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। ईरान की राजधानी तेहरान से एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं की बहाली हो गई है। ईरान के सबसे बड़े हवाई अड्डे, इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IKA) ने शनिवार सुबह से अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों को फिर से शुरू कर दिया है। बता दें कि युद्ध जैसी स्थितियों के कारण लंबे समय से बंद पड़े आसमान में अब नागरिक विमानों की आवाजाही शुरू हो गई है, जिसे वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इन शहरों के लिए रवाना हुई पहली उड़ानें हवाई अड्डा अधिकारियों के अनुसार, उड़ानों की बहाली के बाद तेहरान से पहली आउटबाउंड (बाहर जाने वाली) फ्लाइट्स मस्कट (ओमान), इस्तांबुल (तुर्की) और सऊदी अरब के मदीना शहर के लिए रवाना हुईं। इन उड़ानों के शुरू होने से न केवल फंसे हुए यात्रियों को राहत मिली है, बल्कि कूटनीतिक गलियारों में भी इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। भारतीय दूतावास ने दी यात्रा ना करने की सलाह दो दिन पहले ही भारत ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है। यह परामर्श हाल की उन खबरों के मद्देनजर जारी किया गया है, जिनमें दोनों देशों के बीच कुछ उड़ानों के परिचालन की बात कही गई है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने अपने नवीनतम परामर्श में कहा, "क्षेत्रीय तनाव के कारण हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और परिचालन संबंधी अनिश्चितताएं ईरान से आने-जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को प्रभावित कर रही हैं।' दूतावास ने स्पष्ट किया, "भारत और ईरान के बीच कुछ उड़ानों के शुरू होने की खबरों के मद्देनजर, पिछले परामर्शों को जारी रखते हुए, भारतीय नागरिकों को दृढ़ता से सलाह दी जाती है कि वे हवाई या सड़क मार्ग से ईरान की यात्रा न करें। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हवाई सेवाएं बंद कर दी गई थीं। पाकिस्तान की मध्यस्थता से आठ अप्रैल से लागू हुआ अस्थायी संघर्ष विराम 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, हालांकि दीर्घकालिक शांति के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। अमेरिका ईरान वार्ता पर क्या है अपडेट इस्लामाबाद में प्रस्तावित अमेरिका और ईरान का वार्ता पर अभी शंका बनी हुई है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत 'लॉकडाउन' एक सप्ताह से जारी है। ईरान के विदेश मंत्री अराघची अपनी टीम के साथ पहुंच चुके हैं। हालांकि अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल अभी नहीं पहुंचा है। इससे पहले ईरान ने अमेरिका से सीधी बात करने से भी इनकार कर दिया था। पिछली बार भी इस्लामाबाद में ही शांति वार्ता हुई थी जिसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला था। अमेरिका का कहना है ईरान उसकी मांगों के हिसाब से वार्ता का प्रस्ताव तैयार रखे। मशहद एयरपोर्ट भी हुआ एक्टिव तेहरान से पहले, ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद के हवाई अड्डे को भी इस हफ्ते की शुरुआत में खोल दिया गया था। उत्तर-पूर्वी ईरान में स्थित यह शहर धार्मिक और व्यापारिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों में भी हवाई यातायात परिचालन को बहाल किया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि ईरान अब अपनी नागरिक सेवाओं को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है। दुनिया ने ली राहत की सांस युद्ध के माहौल में किसी देश के मुख्य हवाई अड्डे का खुलना शांति की दिशा में एक बड़ा संकेत होता है। जब तक हवाई क्षेत्र बंद रहता है, तब तक बड़े सैन्य टकराव की आशंका बनी रहती है। तेहरान एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानों का शुरू होना यह संकेत देता है कि सुरक्षा व्यवस्था अब पहले से बेहतर है और नागरिक उड्डयन के लिए खतरा कम हुआ है।  

LPG सिलेंडर वितरण में बदलाव, ग्राहकों को मिलेगा नया तरीका, जानें पूरी जानकारी

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। एलपीजी (रसोई गैस) की सप्लाई पर दबाव बढ़ने के बीच भारत ने अब स्पॉट मार्केट से LPG खरीदना शुरू कर दिया है, ताकि घरों और कारोबार में गैस की कमी न हो। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) दुनिया का बड़ा ऊर्जा सप्लायर है। लेकिन, हाल के संघर्ष के कारण वहां से सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, अब तुरंत जरूरत पूरी करने के लिए स्पॉट खरीदारी कर रहा है। सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब अमेरिका जैसे देशों से अतिरिक्त LPG कार्गो खरीद रही हैं, जो जून-जुलाई तक भारत पहुंचने की उम्मीद है। भारत में रोजाना करीब 80,000 टन LPG की जरूरत होती है। अच्छी बात यह है कि देश ने अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाई है। पहले घरेलू उत्पादन कम था, जो अब बढ़कर करीब 46,000 टन प्रति दिन हो गया है, यानि अब भी एक बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। पहले भारत की लगभग 90% LPG सप्लाई खाड़ी देशों (UAE, कतर, सऊदी अरब आदि) से आती थी। लेकिन, अब सरकार ने रणनीति बदलते हुए आयात के स्रोत बढ़ा दिए हैं। अब इस लिस्ट में अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों को जोड़ा गया है। पहले 10 देशों से आयात होता था, अब इसे बढ़ाकर 15 देशों तक कर दिया गया है। सरकार के मुताबिक करीब 8 लाख टन LPG का आयात पहले ही सुनिश्चित किया जा चुका है। हाल ही में 10 जहाज भारत पहुंचे, जिनमें से 9 में कुकिंग गैस थी। यह दिखाता है कि सरकार सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए लगातार सक्रिय है। आसान भाषा में समझें तो लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पहले से तय कीमत और सप्लाई पर होती है। इस स्पॉट खरीदारी में तुरंत जरूरत के हिसाब से बाजार से खरीद की जाती है। अभी भारत स्पॉट खरीद इसलिए कर रहा है, क्योंकि अचानक सप्लाई में कमी आई है। फिलहाल सरकार का फोकस साफ है कि घरेलू गैस सप्लाई बाधित न हो। इसलिए सिलेंडर की उपलब्धता बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि, अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें ज्यादा समय तक ऊंची रहती हैं, तो भविष्य में कीमतों पर असर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया के संकट के कारण भारत ने LPG सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए ये नई रणनीति अपनाई है। इसका मकसद साफ है कि देश में गैस की कमी न हो और हर घर तक सिलेंडर समय पर पहुंचे। बिना DAC नहीं मिलेगा LPG अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर प्राप्त करने के लिए Delivery Authentication Code यानी DAC बताना अनिवार्य होगा। यह कदम गैस की कालाबाजारी और फर्जी डिलीवरी की शिकायतों को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से सही उपभोक्ता तक ही सिलेंडर की पहुंच सुनिश्चित होगी। क्या है DAC और क्यों हुआ अनिवार्य DAC यानी Delivery Authentication Code एक प्रकार का OTP होता है, जो उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। जब डिलीवरी कर्मी सिलेंडर लेकर घर पहुंचता है, तो उपभोक्ता को यह कोड बताना होता है। बिना DAC बताए डिलीवरी को वैध नहीं माना जाएगा। यह प्रणाली पारदर्शिता बढ़ाने और गलत वितरण को रोकने के लिए लागू की गई है। कैसे काम करता है यह नया सिस्टम जब कोई उपभोक्ता LPG सिलेंडर बुक करता है, तो डिलीवरी से पहले उसके मोबाइल नंबर पर 4 से 6 अंकों का DAC स्वतः भेज दिया जाता है। उपभोक्ता को इस कोड को सुरक्षित रखना होता है और केवल अधिकृत डिलीवरी कर्मी को ही बताना होता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सिलेंडर सही व्यक्ति को ही सौंपा गया है। अलग से आवेदन की जरूरत नहीं इस नई व्यवस्था के लिए उपभोक्ताओं को किसी प्रकार का अतिरिक्त आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। DAC सिस्टम पूरी तरह स्वचालित है और सिलेंडर बुकिंग के साथ ही सक्रिय हो जाता है। इससे उपभोक्ताओं को किसी अतिरिक्त प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा और सुरक्षा भी सुनिश्चित रहेगी। अंतरराष्ट्रीय हालात का भी असर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। इन वैश्विक परिस्थितियों के बीच सरकार घरेलू स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू और पारदर्शी बनाए रखने के लिए ऐसे कदम उठा रही है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी को रोका जा सके। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सावधानिया उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेट रखें और DAC को किसी अनधिकृत व्यक्ति के साथ साझा न करें। डिलीवरी के समय ही इस कोड को बताएं और सुनिश्चित करें कि सिलेंडर सही तरीके से प्राप्त हुआ है। इससे न केवल उनकी सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि पूरी व्यवस्था भी अधिक विश्वसनीय बनेगी। पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम DAC प्रणाली LPG वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे न केवल उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि गैस वितरण प्रणाली में सुधार भी देखने को मिलेगा।

रूस का यूक्रेन पर एक रात में भारी हमला, 600+ ड्रोन और मिसाइल, जमीन-समुद्र-हवा से अटैक

कीव  रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने 24-25 अप्रैल की रात देश के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाते हुए बड़ा हवाई हमला किया. इस हमले में रूस ने 47 मिसाइलों और 619 ड्रोन का इस्तेमाल किया।  यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक, रात 6 बजे से शुरू हुए इस हमले में कुल 666 हवाई हमले किए गए. इनमें 12 बैलिस्टिक मिसाइलें (Iskander-M और S-400), 29 Kh-101 क्रूज मिसाइलें, 5 कैलिबर मिसाइलें और 619 अलग-अलग तरह के ड्रोन शामिल थे. इन ड्रोन में बड़ी संख्या ईरान के 'शाहेद' जैसे कामिकाजे ड्रोन की थी, जो खास तौर पर टारगेट पर सीधे टकराकर विस्फोट करते हैं।  यूक्रेन ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने इस बड़े हमले का काफी हद तक मुकाबला किया. वायुसेना के मुताबिक, कुल 610 टारगेट्स को या तो मार गिराया गया. इसमें 30 मिसाइलें और 580 ड्रोन शामिल हैं. खास बात यह है कि 26 Kh-101 और 4 कैलिबर मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान को टाला जा सका।  13 मिसाइलों ने यूक्रेन को किया हिट यूक्रेन पूरी तरह से इस हमले को रोकने में सफल नहीं रहा. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, 13 मिसाइलें और 36 ड्रोन अपने टारगेट तक पहुंचने में कामयाब रहे, जिससे देश के 23 अलग-अलग स्थानों पर हमले हुए. इसके अलावा, गिराए गए ड्रोन के मलबे भी 9 जगहों पर गिरे, जिससे स्थानीय स्तर पर नुकसान हुआ. अभी भी चार मिसाइलों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।  जमीन, समुद्र और हवा तीनों से ईरान पर हमले! रूस ने यह हमला जमीन, समुद्र और हवा, तीनों माध्यमों से किया. मिसाइलें रूस के अलग-अलग इलाकों जैसे मिलेरोवो, कुर्स्क और ब्रायंस्क से दागी गईं, जबकि कुछ लॉन्चिंग कैस्पियन सागर और क्रीमिया क्षेत्र से भी हुई. यह साफ संकेत है कि रूस अब यूक्रेन के खिलाफ मल्टी-डायमेंशनल अटैक स्ट्रैटेजी अपना रहा है। 

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग ने दिया महत्वपूर्ण अपडेट, पूरा प्लान किया साझा

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग ने एक बड़ा अपडेट दिया है। दरअसल, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने अपनी वेबसाइट पर एक नोटिफिकेशन जारी कर आगे की बैठकों के बारे में बताया है। वेतन आयोग के मुताबिक 28 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक दिल्ली में होने वाली बैठकों में भाग लेने और आयोग से बातचीत करने के लिए बड़ी संख्या में अनुरोध प्राप्त हुए हैं। हालांकि, सीमित समय और व्यस्त कार्यक्रम के कारण सभी अनुरोधों को स्वीकार कर पाना संभव नहीं है। हालांकि, वेतन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिल्ली में होने वाली बैठकों के दौरान अधिकतम संख्या में यूनियनों, कर्मचारी संगठनों और विभिन्न एसोसिएशनों से संवाद करने का प्रयास किया जाएगा लेकिन हर संगठन को समय देना कठिन हो सकता है। वेतन आयोग का कहना है कि आने वाले महीनों में दिल्ली के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी बैठकें आयोजित की जाएगी। इन बैठकों के बारे में वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी दी जाएगी। आयोग ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर से बाहर के इच्छुक हितधारक अपने राज्य या नजदीकी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में आयोग से मुलाकात के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों के संगठनों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें दिल्ली आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। पिछले साल वेतन आयोग का गठन बता दें कि केंद्र सरकार ने पिछले साल वेतन आयोग के गठन का ऐलान किया था। जनवरी महीने में ऐलान के बाद नवंबर में वेतन आयोग के चेयरमैन और अन्य सदस्यों का गठन हुआ। वहीं, इसी साल फरवरी में वेतन आयोग ने आधिकारिक वेबसाइट को लॉन्च किया है। वेतन आयोग इस वेबसाइट पर हर जरूरी अपडेट साझा करेगा। 18 महीने का इंतजार वेतन आयोग के गठन के बाद 18 महीनों में सिफारिशों की रिपोर्ट सरकार को सौंपना है। यह सरकार को तय करना है कि वह वेतन आयोग की सिफारिशें अक्षरश: मान लेगी या संशोधन करेगी। बहरहाल, वेतन आयोग पर विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से अपनी मांगें और सुझाव रखने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और विभिन्न कर्मचारी संघों में उत्सुकता बनी हुई है। वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों में संशोधन, पेंशन सुधार और सेवा शर्तों में बदलाव जैसे मुद्दों को लेकर कई संगठन आयोग के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन आयोग अब सक्रिय हो गया है। इसी कड़ी में बैठकों का दौर शुरू हुआ है। आगामी महीनों में होने वाली बैठकों के आधार पर वेतन और पेंशन से जुड़े बड़े फैसलों की दिशा तय हो सकती है।

UK Board Result 2026 घोषित,10वीं-12वीं के टॉपर्स की सूची जारी

देहरादून उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (UBSE) ने वर्ष 2026 के 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं.  राज्य के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने शनिवार को परिणाम जारी किए. छात्र ऑफिशियल वेबसाइट  ubse.uk.gov.in और uaresults.nic.in पर जाकर रिजल्ट चेक कर सकते हैं. इस साल 10वीं का कुल पास प्रतिशत 92.10% रहा जबकि 12वीं का पास प्रतिशत 85.11% दर्ज किया गया है. उत्तराखंड बोर्ड 10वीं और 12वीं का बोर्ड रिजल्ट जारी कर दिया गया है. इस साल 10वीं में 92.10% और 12वीं में 85.11% छात्र पास हुए. रिजल्ट जारी करने के साथ ही बोर्ड ने टॉपर्स की लिस्ट भी जारी कर दी है.  छात्र आधिकारिक वेबसाइट ubse.uk.gov.in और uaresults.nic.in पर रिजल्ट चेक कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें अपना रोल नंबर भरना होगा जिसके बाद वे अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड भी कर पाएंगे.   हाईस्कूल (10वीं) में रामनगर स्थित एमपी इंटर कॉलेज के छात्र अक्षत गोयल ने 500 में से 491 अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है. वहीं, इंटरमीडिएट (12वीं) में बागेश्वर की गीतिका पंत और ऊधमसिंह नगर की सुशीला मेहंदीरत्ता ने संयुक्त रूप से टॉप किया है. दोनों छात्राओं ने 490-490 अंक प्राप्त किए हैं. कुल कितने छात्र हुए पास? उत्तराखंड बोर्ड 12वीं का कुल पास प्रतिशत 85.11 प्रतिशत रहा. इस साल लड़कियों का प्रदर्शन बेहतर रहा जिनका पास प्रतिशत 88.09% रहा, जबकि लड़कों का 81.93% रहा. ऐसे चेक करें रिजल्ट     उत्तराखंड बोर्ड 10वीं और 12वीं का  रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट ubse.uk.gov.in पर देख सकते हैं-     सबसे पहले बोर्ड आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.     इसके बाद होमपेज पर बोर्ड एग्जाम सेक्शन में जाकर रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें.     इसके बाद 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिंक को चुनें.     अपना रोल नंबर और कैप्चा कोड डालें और गेट रिजल्ट पर क्लिक कर दें. स्क्रीन पर रिजल्ट शो होने लगेगा.  

तेजस MK-1A फाइटर जेट की तात्कालिक जरूरत, HAL के नए सीएमडी के साथ वायुसेना करेगी बैठक

बेंगलुरु भारतीय वायुसेना (IAF) को नए लड़ाकू विमानों की बहुत जरूरत है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा बनाए जा रहे लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1ए (Tejas Mk1A) की डिलीवरी पहले से दो साल से ज्यादा देरी से चल रही है।  अब मई 2026 में IAF और HAL के बीच एक अहम समीक्षा बैठक होने वाली है. इस बैठक में विमान की तैयारियों और इंडक्शन टाइमलाइन पर चर्चा होगी. यह बैठक नई दिल्ली के एयर हेडक्वार्टर्स में मई मध्य में हो सकती है।  नए HAL चेयरमैन रवि कोटा की भूमिका HAL के नए चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) रवि कोटा 1 मई 2026 को पद संभालेंगे. वे वर्तमान CMD डॉ. डीके सुनील की जगह लेंगे, जो 30 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं. रवि कोटा को डिफेंस सर्कल में LCA मैन के नाम से जाना जाता है क्योंकि उन्होंने तेजस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।  वे वर्तमान में HAL के डायरेक्टर (ऑपरेशंस) हैं. IAF चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह रिव्यू मीटिंग को लीड करेंगे. बैठक में HAL की टीम रवि कोटा के नेतृत्व में शामिल होगी. IAF चीफ पहले भी तेजस Mk1A की देरी पर सार्वजनिक रूप से चिंता जता चुके हैं।  IAF की सख्त शर्तें: गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं IAF को नए विमानों की सख्त जरूरत है, लेकिन वह तब तक तेजस Mk1A स्वीकार नहीं करेगी जब तक वह सभी जरूरी ऑपरेशनल रिक्वायरमेंट्स पूरी नहीं कर लेता. HAL ने दावा किया है कि पांच तेजस Mk1A विमान तैयार हैं. वह IAF से उनकी स्वीकृति के लिए चर्चा कर रहा है।  भारतीय वायुसेना पहले इन पहले पांच विमानों की पूरी जांच करेगी. उसके बाद ही बड़े पैमाने पर इंडक्शन का फैसला होगा. IAF कुछ छोटी-मोटी या सेकेंडरी सुविधाओं पर छूट दे सकती है, लेकिन मुख्य लड़ाकू क्षमताओं पर कोई समझौता नहीं होगा।  तीन अहम क्षमताएं जिन पर IAF नहीं करेगी समझौता IAF ने तीन महत्वपूर्ण क्षमताओं को पूरी तरह जरूरी बताया है…     मिसाइल फायरिंग क्षमता: हवा से हवा और हवा से जमीन मिसाइलों (एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड) की फायरिंग ट्रायल पूरी होनी चाहिए और सर्टिफिकेशन होना चाहिए।      रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) इंटीग्रेशन: विमान के रडार को EW सूट के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट और वैलिडेट किया जाना चाहिए. यह दुश्मन के क्षेत्र में विमान की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।      वेपन्स डिलीवरी और फायर कंट्रोल सिस्टम: पूरे वेपन्स डिलीवरी सिस्टम और फायर-कंट्रोल आर्किटेक्चर की एंड-टू-एंड वैलिडेशन होनी चाहिए।  ये तीनों चीजें तेजस Mk1A की वारफाइटिंग स्पाइन यानी लड़ाई की रीढ़ हैं. इन्हें किसी भी हाल में कमजोर नहीं किया जा सकता. मिसाइल फायरिंग ट्रायल्स पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि रडार-EW इंटीग्रेशन और वेपन्स वैलिडेशन का काम अंतिम चरण में है।  दो साल की देरी, कारण क्या? तेजस Mk1A कार्यक्रम में लगभग दो साल की देरी हो चुकी है. HAL का कहना है कि मुख्य वजह GE इंजन की सप्लाई में समस्या है. इसके अलावा इजरायली EL/M-2052 AESA रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के इंटीग्रेशन में भी देरी हुई।    IAF का कहना है कि जब तक विमान पूरी तरह ऑपरेशनल रूप से तैयार नहीं होगा, तब तक स्वीकृति नहीं दी जाएगी. HAL के पास मजबूत ऑर्डर बुक है, जिसमें 83 तेजस Mk1A शामिल हैं. भविष्य में और ऑर्डर आने की उम्मीद है. मई की बैठक में IAF पहले पांच विमानों की पूरी जांच करेगी।  अगर सब कुछ ठीक रहा तो स्वीकृति ट्रायल्स शुरू होंगे, जो कुछ हफ्तों तक चल सकते हैं. उसके बाद ही विमानों को फ्रंटलाइन स्क्वाड्रनों में शामिल किया जाएगा. इस बीच, HAL इंजन सप्लाई बढ़ाने और उत्पादन तेज करने पर काम कर रहा है। 

EPFO में बड़ा बदलाव, मई से UPI से PF का पैसा निकालने की सुविधा, लिमिट भी तय

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों खाताधारकों के लिए बड़ी राहत देने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई 2026 के आखिर तक UPI के जरिए तुरंत PF निकालने की सुविधा शुरू हो सकती है। यह बदलाव EPFO के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म CITES 2.0 के तहत किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया तेज और आसान होगी। बता दें ईपीएफओ में अभी 7.98 करोड़ मेंबर हैं। वहीं, 82 लाख से अधिक पेंशनर्स हैं। इनमें से 7.74 करोड़ सदस्यों की केवाईसी अपडेट हो चुकी है। ईपीएफओ पोर्टल पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक एक साल में 6.42 करोड़ क्लेम सेटल हो चुके हैं। अब नहीं करना होगा लंबा इंतजार अभी PF निकालने के लिए कर्मचारियों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है और कई बार क्लेम रिजेक्ट भी हो जाते हैं, लेकिन नए सिस्टम के लागू होने के बाद यूजर सीधे अपने UAN से लॉगिन कर सकेंगे, OTP वेरिफाई करेंगे और यूपीआई के जरिए पैसा तुरंत अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर पाएंगे। इससे कागजी प्रक्रिया और देरी दोनों खत्म हो जाएंगी। जल्द ही EPF स्कीम 2026, EPS 2026 और EDLI Scheme 2026 जैसे नए सुधार लागू किए जा सकते हैं, जिससे PF, पेंशन और बीमा से जुड़े नियम और मजबूत होंगे।   कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों खाताधारकों के लिए बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब PF निकालने का प्रोसेस पहले से कहीं आसान और तेज होने वाला है। मई 2026 के अंत तक UPI के जरिए तुरंत PF निकालने की सर्विस शुरू हो सकती है। यह बदलाव EPFO के नए डिजिटल सिस्टम CITES 2.0 के तहत किया जा रहा है। UPI से तुरंत मिलेगा पैसा अभी तक PF निकालने में कई दिन लग जाते हैं, लेकिन नए सिस्टम के आने के बाद यह प्रोसेस काफी तेज हो जाएगी। EPFO सदस्य अपने UAN से लॉगिन करके, OTP वेरिफिकेशन पूरा कर, सीधे UPI के जरिए पैसा अपने बैंक खाते में तुरंत ट्रांसफर कर सकेंगे। इससे लंबी प्रोसेस और कागजी झंझट से राहत मिलेगी। क्या है CITES 2.0 सिस्टम? CITES 2.0 EPFO का नया डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका मकसद पूरे प्रोसेस को आसान, तेज और ट्रांसपेरेंट बनाना है। पुराने सिस्टम की जगह अब एक यूनिफाइड प्लेटफॉर्म आएगा, जिससे क्लेम प्रोसेसिंग में देरी कम होगी और यूजर्स को बेहतर सुविधा मिलेगी। कैसे काम करेगा नया सिस्टम? नई सुविधा शुरू होने के बाद यूजर EPFO पोर्टल या ऐप पर लॉगिन करेंगे। वहां उन्हें अपनी कुल बैलेंस और निकाल सकने वाली अमाउंट देख सकेंगे। इसके बाद वह जितना अमाउंट निकालना चाहते हैं, उसे डालेंगे और अपनी UPI ID डालेंगे। वेरिफिकेशन के बाद पैसा सीधे अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगा। 75% तक ही निकाल पाएंगे PF EPFO ने नए नियम में एक जरूरी बदलाव भी किया है। अब कर्मचारी अपना पूरा PF अमाउंट एक साथ नहीं निकाल पाएंगे। कुल बैलेंस का अधिकतम 75% ही निकाला जा सकेगा, जबकि कम से कम 25% रकम खाते में रखना जरूरी होगा। इसका मकसद यह तय करना है कि कर्मचारियों के पास रिटायरमेंट के लिए कुछ सेविंग जरूर रहे। नए नियम क्यों हैं जरूरी? सरकार चाहती है कि कर्मचारी अपनी पूरी जमा अमाउंट जल्दी खर्च न कर दें और भविष्य के लिए कुछ पैसा बचाकर रखें। इसलिए यह लिमिट तय की गई है। साथ ही UPI सुविधा से जरूरत के समय तुरंत पैसा मिल सकेगा। नई स्कीम भी होगी लागू इसके साथ ही EPFO नए कानूनों के तहत EPF Scheme 2026, EPS 2026 और EDLI Scheme 2026 भी लाने की तैयारी में है। इनका मकसद PF, पेंशन और बीमा से जुड़े नियमों को और मजबूत बनाना है। कैसे काम करेगा नया सिस्टम? नई सुविधा शुरू होने के बाद प्रक्रिया बेहद आसान होगी। यूजर EPFO पोर्टल या ऐप पर लॉगिन करेंगे, वहां उन्हें अपना कुल बैलेंस दिखेगा। इसके बाद वे जितनी राशि निकालना चाहते हैं, वह दर्ज करेंगे और अपनी UPI ID डालेंगे। वेरिफिकेशन पूरा होते ही पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगा। सरकार का इस बदलाव का मकसद क्या है? सरकार इस कदम के जरिए दो बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहती है। पहला, इमरजेंसी में कर्मचारियों को तुरंत पैसा मिल सके। दूसरा, पूरी जमा राशि एक साथ निकालने से बचाकर रिटायरमेंट सुरक्षा को मजबूत किया जाए।सरकार EPFO सिस्टम को और आधुनिक बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। EPFO के लेटेस्ट अपडेट्स, जो आपके लिए बेहद जरूरी UAN में नाम, जन्मतिथि, लिंग, माता-पिता का नाम, वैवाहिक स्थिति कैसे सुधारें? अगर आपके UAN खाते में कोई जानकारी गलत है, तो उसे सुधारना बहुत जरूरी है। नीचे तरीका बताया गया है… नाम, लिंग, डेट ऑफ बर्थ सही करना: अपने ईपीएफओ पोर्टल (https://www.epfindia.gov.in) पर जाएं, ‘Manage’ में जाकर ‘Modify Basic Details’ का विकल्प चुनें। फिर नए डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। आपके एम्प्लॉयर को इसे मंजूरी देनी होगी। माता-पिता का नाम, रिश्ता और वैवाहिक स्थिति बदलना: यह भी ऊपर दिए गए तरीके से ही करें। शादी या तलाक के बाद यह जानकारी अपडेट करना जरूरी है। भ्रष्टाचार की शिकायत कैसे करें अगर आपको EPFO के किसी कर्मचारी पर भ्रष्टाचार या अनियमितता का शक है, तो आप Vigilance Division में शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए EPFO ने अलग से गाइडलाइन जारी किए हैं। वेबसाइट पर जाकर विजिलेंस सेक्शन में शिकायत दर्ज करें। प्रयास योजना (Prayas Yojna) क्या है? EPFO की प्रयास योजना कर्मचारियों को जागरूक करने और उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करने के लिए चलाई जाती है। इस योजना के तहत विशेष शिविर और ऑनलाइन सुविधाएं दी जाती हैं।

पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें, गर्मी आते ही UNSC में सिंधु के पानी के लिए मदद की गुहार

इस्लामाबाद गर्मी बढ़ते ही पाकिस्तान की बेचैनी भी बढ़ती दिख रही है. भारत से आने वाले नदियों के पानी को लेकर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गुहार लगानी पड़ रही है. दरअसल, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से अपील की है कि वह भारत से सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को पूरी तरह बहाल करने के लिए कहे. पाकिस्तान का कहना है कि भारत की ओर से इस संधि को ‘स्थगित’ करना क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और मानवीय स्थिति के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।  सिंधु के पानी के लिए गिड़गिड़ाया पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने इस मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाया. उन्होंने पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार का पत्र UNSC के अध्यक्ष जमाल फारेस अलरोवाई को सौंपा. इस पत्र में पाकिस्तान ने अपील की कि सुरक्षा परिषद भारत पर दबाव बनाए ताकि सिंधु जल संधि के तहत सभी प्रावधान जैसे डेटा साझा करना और सहयोग दोबारा शुरू किए जाएं।  भारत ने संधि क्यों की थी सस्पेंड? असल में, भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को ‘स्थगित’ करने का फैसला लिया था. उस हमले में 26 लोगों की जान गई थी. भारत ने इस संधि को सस्पेंड करके संदेश दिया था कि ‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते’. यानी भारत की ओर से यह सख्त संदेश था कि जब तक आतंकवाद जारी रहेगा, तब तक सामान्य समझौते भी प्रभावित होंगे. हालांकि सिंधु पाकिस्तान की लाइफलाइन में से एक है और भारत की ओर से पानी रोकना उसे प्यासा मार सकता है।  पाकिस्तान के लिए क्यों जरूरी है सिंधु का पानी? सिंधु जल संधि पाकिस्तान के लिए सिर्फ एक समझौता नहीं, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी नदियों का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को मिलता है. देश की खेती और सिंचाई इन्हीं पर टिकी है. बिजली उत्पादन और पीने का पानी भी इसी पर निर्भर है. ऐसे में जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, पानी की मांग और संकट दोनों बढ़ जाते हैं. यही पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता बन गई है. इस समझौते के तहत जितना पानी पाकिस्तान को मिलना चाहिए उससे ज्यादा मिलता था. लेकिन पहलगाम हमले के बाद भारत ने सख्ती दिखाई है और इसे रोकने लगा है। 

बंगाल में बंपर मतदान, 10% की बढ़ोतरी: 3 करोड़ से ज्यादा वोटर्स ने डाले वोट, किसे मिलेगा फायदा?

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 152 सीटों पर 1478 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. पहले फेज में मतदाओं का उत्साह देखने के लायक था और वोटिंग के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. आजादी के बाद पहली बार है कि बंगाल में 90 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है. इसे लेकर सियासी दल अपने नफे-नुकसान का आकलन कर रहे हैं।  बंगाल में पहले फेज की 152 सीटों पर 92.88 फीसदी मतदान रहा. अगर यही पैटर्न दूसरे चरण की 142 सीटों पर रहा, तो यह पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा वोटिंग टर्नआउट होगा. हालांकि, 2021 में बंगाल विधानसभा चुनाव 8 चरणों में हुए थे।  2021 के विधानसभा चुनाव में इन 152 सीटों पर 83.2 फीसदी मतदान रहा था जबकि 2026 के विधानसभा चुनाव 92.88 फीसदी वोटिंग हुई. इस लिहाज से 10 फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है. ऐसे में वोटिंग पैटर्न कहता है कि पिछले चुनाव से बढ़ी वोटिंग ने राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी है. ऐसे में सवाल है कि 10 फीसदी ज्यादा वोटिंग बीजेपी या फिर ममता बनर्जी किसे खाते में जाएगी?  पहले चरण की सीटों पर वोटिंग के टूटे रिकॉर्ड पश्चिम बंगाल के 16 जिलों की 152 सीटों पर गुरुवार को वोटिंग हुई, जिसमें 92.88 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. बंगाल में पुरुष की तुलना में महिला मतदाताओं की भागीदारी ज़्यादा रही. महिला मतदान प्रतिशत 92.69 फीसदी रहा जबकि पुरुष मतदाताओं का मतदान 90.92 प्रतिशत था. तीसरे लिंग के मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 56.79 प्रतिशत रहा।  आजादी के बाद बंगाल में पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने वोट डाले हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बंगाल के पहले चरण और तमिलनाडु में वोटिंग संपन्न होने के बाद बयान जारी कर मताधिकार का प्रयोग करने वाले वोटरों और उनके जज्बे को सलाम किया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद ये वोटिंग का सबसे ऊंचा ग्राफ है।  बंगाल में इतनी ज्यादा संख्या में मतदान कभी भी नहीं हुआ है. साल 2006 से लेकर अभी तक जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, उसमें  80 फीसदी से ज्यादा ही वोटिंग रही है. हालांकि, इस बार वोटिंग पैटर्न 90 फीसदी की सीमा को भी पार कर गया है, जिसके पीछे मुख्य वजह एसआईआर प्रक्रिया को मानी जा रही है. बंगाल में हुई एसआईआर प्रकिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के वोट काटे गए हैं, जिसके लिए लोग इस बार मतदान न करके जोखिम नहीं लेना चाहते. यही वजह है कि इस बार बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से निकलकर मतदान करने पहुंचे थे।  किसके पक्ष में जाएगा बढ़ा 10 फीसदी वोट पश्चिम बंगाल में गुरुवार को 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग हुई, जिनमें 12 जिलों में मतदान प्रतिशत 90 प्रतिशत या उससे ज्यादा रहा. इनमें भी सबसे ज्यादा वोटिंग दक्षिण दिनाजपुर में हुई, जहां 94.4 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले. दक्षिण दिनाजपुर में हर 100 में से लगभग 95 वोटर्स मतदान केंद्रों पर अपना वोट डालने आए. दक्षिण दिनाजपुर में कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जहां मुसलमानों की आबादी लगभग 25 प्रतिशत है और हिंदुओं की आबादी 73.5 प्रतिशत है. इस तरह हिंदू बहुल इलाके की सीटों पर जबरदस्त मतदान दिखा। दक्षिण दिनाजपुर के बाद कूचबिहार जिले में 94 प्रतिशत मतदान हुआ है, बीरभूम में 93.2 प्रतिशत, जलपाईगुड़ी में 92.7 प्रतिशत और मुर्शिदाबाद ज़िले में भी लगभग 93 प्रतिशत मतदान हुआ है. मुर्शिदाबाद में पश्चिम बंगाल की 22 विधानसभा सीटें आती हैं. इस जिले में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं. यहां मुसलमानों की आबादी 65 प्रतिशत से ज्यादा है जबकि हिन्दुओं की आबादी सिर्फ 33 प्रतिशत है. हालांकि, पश्चिम बंगाल के पहले चरण में जो वोटिंग बढ़ी है, वो किसी एक इलाके में नहीं बल्कि हिंदू और मुस्लिम दोनों ही बेल्ट में देखने को मिल रही है।  पहले चरण में यह वही इलाका है, जहां पर मुस्लिम वोटर बड़ी संख्या में हैं और घुसपैठ का मुद्दा भी काफी हावी रहा.इसके अलावा वोटिंग में बढोत्तरी में एसआईआर (SIR) को भी अहम वजह माना जा रहा है.अब तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टीएमसी इस जिले में सबसे मजबूत थी, लेकिन अब हुमायूं कबीर चुनौती बन गए हैं. वहीं, बीजेपी ने इस इलाके में घुसपैठ का मुद्दा उठाया था, जिसके चलते भी ध्रुवीकरण हुआ है  बीजेपी और टीएमसी किसे मिलेगा सियासी लाभ विधानसभा चुनाव 2021 में बीजेपी ने पहले चरण की 152 में से 59 सीटें जीती थीं, जबकि दूसरे चरण की 142 सीटों में वह केवल 18 पर सिमट गई थी.ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस 2021 में उसने पहले चरण की 152 में से 92 सीटें जीती थीं, जबकि दूसरे चरण में 142 में से 123 सीटों पर कब्जा जमाया था।  2011 से 2024 तक के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें, तो पहले चरण की इन 152 सीटों पर बीजेपी का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है. 2011 में बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. 2016 में यह आंकड़ा सिर्फ 3 तक पहुंचा. लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर बीजेपी ने 86 पर बढ़त बनाई. 2021 विधानसभा चुनाव में 59 सीटें जीतीं. इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में 64 सीटों पर आगे रही।  पीएम मोदी और अमित शाह की अगुवाई में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत इस चरण में झोंक दी है. हालांकि, TMC के लिए भी यह इलाका किसी दुर्ग से कम नहीं है. 2011 में उसने 68 सीटें जीतीं, 2016 में 86 सीटों पर कब्जा किया था जबकि 2021 में 92 सीटों पर पहुंच गई थी. 2019 लोकसभा चुनाव में 57 सीटों पर टीएमसी को बढ़त बनाई. TMC ने 2021 में 92 सीटें जीतकर बड़ा संदेश दिया और 2024 लोकसभा चुनाव में 76 सीटों पर आगे रही. TMC के लिए यह चरण परंपरागत तौर पर मजबूत रहा है, हालांकि 2019 में उसे झटका भी लगा था।  पहले चरण की सीटों में मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिले अहम हैं, जहां 50 से 66 फीसदी तक मुस्लिम हैं. इन तीन जिलों की 43 सीटों में से पिछली बार TMC ने 35 सीटें जीती थीं, जबकि BJP को 8 सीटें मिली थीं. इस बार बीजेपी को हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण पर भरोसा है और ममता बनर्जी की … Read more

PM मोदी का 10 का नोट झालमुड़ी वाले के हाथ में, एक लाख में खरीदने की होड़ मची

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का प्रचार अपने चरम पर है, लेकिन रैलियों और बयानों के बीच एक अनोखी घटना ने सबका ध्यान खींचा है। मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सड़क किनारे खाई गई 10 रुपये की 'झालमुड़ी' और उसके बदले दिए गए 10 रुपये के नोट से जुड़ा है, जो अब एक 'अनमोल धरोहर' बन गया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झाड़ग्राम में एक चुनावी रैली को संबोधित करने पहुंचे थे। रैली के बाद लौटते समय पीएम का काफिला सड़क किनारे एक झालमुड़ी बेचने वाले दुकानदार के पास रुका। प्रधानमंत्री ने वहां रुककर बड़े चाव से 10 रुपये की झालमुड़ी खाई और दुकानदार को भुगतान के रूप में 10 रुपये का एक नोट दिया। दुकानदार की चमकी किस्मत झालमुड़ी विक्रेता के लिए यह पल किसी सपने जैसा था। जैसे ही यह खबर फैली कि प्रधानमंत्री ने इस दुकान पर झालमुड़ी खाई है, वहां लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लेकिन असली कहानी तब शुरू हुई जब लोगों को पता चला कि प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया वह 10 रुपये का नोट अभी भी दुकानदार के पास है। 1 लाख रुपये तक पहुंची बोली देखते ही देखते उस 10 रुपये के नोट को खरीदने के लिए लोगों में होड़ मच गई। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ उत्साही प्रशंसकों और संग्रहकर्ताओं ने उस नोट के लिए ऊंची बोलियां लगानी शुरू कर दीं। हैरानी की बात यह है कि सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, इस मामूली नोट की कीमत 1 लाख रुपये तक की बोली तक पहुंच गई है। लोग इसे सौभाग्य का प्रतीक और ऐतिहासिक दस्तावेज मान रहे हैं। दुकानदार का फैसला नोट के लिए भारी-भरकम रकम मिलने के बावजूद दुकानदार फिलहाल इसे बेचने के मूड में नहीं दिख रहा है। उसका कहना है कि प्रधानमंत्री का उसकी दुकान पर आना और अपने हाथों से नोट देना उसके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। वह इस नोट को फ्रेम करवाकर अपनी दुकान में यादगार के तौर पर रखना चाहता है। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। जहां भाजपा समर्थक इसे प्रधानमंत्री की सादगी और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विपक्षी खेमे में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। दिमाग नहीं खाते भाई’- पीएम का मजेदार जवाब जब दुकानदार ने पैसे लेने में संकोच किया, तो प्रधानमंत्री ने उसे डांटने के अंदाज में प्यार से कहा, ‘नहीं भाई, ऐसा नहीं होता.’ दुकानदार के बार-बार मना करने पर मोदी ने अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में कहा, ‘दिमाग नहीं खाते भाई, पैसे लो.’ उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग और सुरक्षाकर्मी अपनी हंसी नहीं रोक पाए. पीएम ने साफ किया कि वह बिना पैसे दिए कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे. अंत में मासूम दुकानदार को प्रधानमंत्री से वह 10 रुपये लेने ही पड़े।  जनता के बीच बनी चर्चा यह दृश्य देखकर झाड़ग्राम की जनता हैरान रह गई. एक तरफ जहां बंगाल में करोड़ों के घोटालों की खबरें चर्चा में रहती हैं, वहीं देश के प्रधानमंत्री का एक-एक रुपये का हिसाब रखना और दुकानदार के स्वाभिमान का सम्मान करना लोगों को काफी पसंद आ रहा है. भाजपा समर्थकों का कहना है कि यह मोदी की ‘गारंटी’ और उनकी ‘सादगी’ का प्रमाण है।  कुल मिलाकर, झाड़ग्राम की यह छोटी सी दुकान अब इलाके में मशहूर हो गई है. प्रधानमंत्री के ‘झालमुड़ी ब्रेक’ ने न केवल स्थानीय जायके को प्रमोट किया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि सत्ता के शिखर पर बैठने के बाद भी वे अपनी जड़ों और सामान्य शिष्टाचार को नहीं भूले हैं. सोशल मीडिया पर अब लोग पीएम की जेब से निकले उन नोटों और उनकी ‘दिमाग नहीं खाने’ वाली बात पर जमकर कमेंट्स कर रहे हैं।