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क्या पुरुष ट्रैफिक पुलिसकर्मी महिलाओं से वाहन जांच नहीं कर सकते?

  नई दिल्ली हाल ही में सोशल मीडिया पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो बाइक पर महिला राइडर देखकर उसे छोड़ देता है. इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही थी कि क्या पुरुष पुलिसकर्मी किसी महिला राइडर को रोक सकते हैं या नहीं. इस सवाल पर कई तरह के कमेंट आ रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि शाम को पुलिसकर्मी नहीं पकड़ सकते हैं तो कई लोगों का कहना है कि शराब वाला टेस्ट पुरुष पुलिसकर्मी नहीं कर सकते हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर सच्चाई क्या है… क्या कहते हैं नियम? नियमों के अनुसार, भारतीय ट्रैफिक कानून पुरुष पुलिसकर्मियों को दस्तावेज़ जांच या उल्लंघन के लिए गाड़ी चला रही महिलाओं को रोकने की अनुमति देते हैं. सभी राज्यों में पुलिस के निर्देश पुरुष और महिलाओं के लिए एक ही है. ये बात सच है कि सूर्यास्त के बाद महिला अधिकारियों की तैनाती अनिवार्य है, लेकिन ये नियन केवल गिरफ्तारी या हिरासत के मामलों में ही लागू होते हैं.  ऐसे में सामान्य यातायात जांच के मामलों में ये लागू नहीं होते हैं. ऐसे में रात में भी पुरुष पुलिसकर्मी महिला चालकों से पूछताछ कर सकते हैं. सरल शब्दों में कहें तो, किसी वाहन को रोकना, कागजात की जांच करना या चालान जारी करना गिरफ्तारी नहीं माना जाता है.  इसके अलावा, एएसआई या उससे ऊपर के रैंक के ट्रैफिक ऑफिसर चालक के लिंग की परवाह किए बिना, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन के कागजात मांगने या चालान जारी करने के लिए अधिकृत हैं. रात के समय में कई राज्य सुरक्षा और जनता की सुविधा के लिए, जहां तक संभव हो, महिला अधिकारियों को तैनात करना पसंद करते हैं. लेकिन यह एक प्रथा है, कानून नहीं. पुरुष पुलिस अधिकारियों पर अभी भी रात के अंधेरे में महिला चालकों को रोकने पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है. साल 2015 में, नवी मुंबई पुलिस ने गोल्फ क्लब रोड पर लापरवाही से गाड़ी चलाने सहित यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाली महिला चालकों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया. महिला कांस्टेबलों की कम संख्या के कारण, पुरुष अधिकारियों ने जुर्माना लगाया. कानून पुरुषों और महिलाओं में कोई भेद नहीं करता.

मिडिल ईस्ट तनाव से घिरा, क्या युद्ध या संकट के समय इंश्योरेंस कंपनियों से मिलेगा क्लेम? जानें शर्तें

नई दिल्ली इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने दुनिया भर के लोगों को चिंता में डाल दिया है. खासकर भारतीय यात्रियों, विदेश में काम करने वालों और व्यापार करने वाली कंपनियों की मुश्किल बढ़ गई है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इंश्योरेंस कंपनियां क्या कवर देती हैं? क्या आपकी सामान्य यात्रा बीमा या स्वास्थ्य बीमा इस युद्ध जैसी स्थिति में नुकसान की भरपाई करेगी? या बिजनेस के लिए कोई अलग सुरक्षा है? इस समय कई भारतीय परिवार और व्यापारी इसी उलझन में हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट भारत का बड़ा व्यापारिक पार्टनर है और वहां लाखों भारतीय काम करते हैं. सामान्य तौर पर ज्यादातर यात्रा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में युद्ध, सिविल अनरेस्ट या आतंकवाद से होने वाले नुकसान को पूरी तरह बाहर रखा जाता है. यह पॉलिसी के एक्सक्लूजन क्लॉज में साफ लिखा होता है. अगर कोई इलाका बाद में अनसेफ घोषित हो जाए तो वहां जाने वाले लोगों को खुद सावधानी बरतनी पड़ती है. यानी अगर फ्लाइट कैंसल हो, होटल खर्च बढ़े या स्वास्थ्य समस्या युद्ध की वजह से आए तो बीमा कंपनी पैसे नहीं देगी. सिर्फ सामान्य स्वास्थ्य समस्या जैसे दिल का दौरा पड़ना, जो युद्ध से जुड़ा न हो, तो कुछ कंपनियां मदद कर सकती हैं. लेकिन युद्ध का सीधा असर हो तो कवर नहीं मिलता. एक्सक्लूजन क्लॉज में होता है वॉर या सिविल अनरेस्ट PlusCash के फाउंडर और CEO प्रणव कुमार के मुताबिक, जब किसी देश या क्षेत्र में युद्ध, दंगे या आतंकी घटनाएं होती हैं, तो ज्यादातर ट्रैवल और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां ऐसे हालात में होने वाले नुकसान को कवर नहीं करती हैं. इन पॉलिसियों में पहले से ही “वॉर या सिविल अनरेस्ट” को एक्सक्लूजन क्लॉज में रखा जाता है. इसलिए अगर कोई व्यक्ति ऐसे इलाकों में यात्रा की योजना बना रहा है, जिन्हें बाद में असुरक्षित घोषित कर दिया जाता है, तो उसे पहले अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तें ध्यान से पढ़ लेनी चाहिए और पूरी सावधानी बरतनी चाहिए. क्या महंगे प्लान में सब कवर होता है? भारत में भी इंश्योरेंस रेगुलेटर आईआरडीएआई के नियमों के तहत यही प्रैक्टिस है. अगर आप मिडिल ईस्ट घूमने या काम पर जा रहे हैं तो अपनी पॉलिसी अच्छे से पढ़ लें. कई बार लोग सोचते हैं कि महंगा प्लान ले लिया तो सब कवर हो जाएगा, लेकिन युद्ध जैसी बड़ी घटना में यह गलतफहमी महंगी पड़ सकती है. खासकर शिपिंग, ऑयल और एक्सपोर्ट बिजनेस करने वालों के लिए तो स्थिति और गंभीर है. होर्मुज स्ट्रेट जैसे इलाकों में शिपिंग रूट प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए सामान्य मरीन इंश्योरेंस भी पर्याप्त नहीं रहता. ऐसे में बिजनेस वाले लोगों को अलग तरह के स्पेशल बीमा प्रोडक्ट्स की जरूरत पड़ती है. जैसे पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस, वॉर रिस्क इंश्योरेंस और मरीन वॉर रिस्क कवर. ये प्रोडक्ट्स खासतौर पर बनाए गए हैं ताकि संपत्ति को नुकसान, बिजनेस रुकने या सरकार द्वारा संपत्ति छीनने जैसे खतरे से बचाया जा सके. लेकिन इनकी कीमत भी ज्यादा होती है और हर कोई आसानी से नहीं ले पाता. कंपनियों को मिलता है कवर? Vibhvangal Anukulakara Private Limited के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ मौर्य के अनुसार, जो कंपनियां राजनीतिक रूप से संवेदनशील इलाकों में काम करती हैं, उनके लिए खास तरह के इंश्योरेंस कवर बेहद जरूरी हो जाते हैं. इनमें पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस, वॉर रिस्क इंश्योरेंस और मरीन वॉर रिस्क कवर शामिल हैं. ये पॉलिसियां संपत्ति को नुकसान, बिजनेस रुकने (बिजनेस इंटरप्शन) और जबरन अधिग्रहण जैसे जोखिमों से सुरक्षा देने के लिए बनाई गई हैं. हालांकि, ऐसे कवर लेने की कीमत भी ज्यादा होती है. भारतीय कंपनियां जो मिडिल ईस्ट से तेल, गैस या दूसरे सामान का आयात-निर्यात करती हैं, उन्हें अब इन स्पेशल कवर की तलाश करनी पड़ रही है. कुछ इंटरनेशनल इंश्योरेंस ग्रुप्स ने पर्सियन गल्फ में वॉर रिस्क कवर रोक भी दिया है, जिससे शिपिंग कंपनियों की मुश्किल बढ़ गई है. कुछ कंपनियां टेररिज्म के लिए अलग ‘टेररिज्म राइडर’ या ऐड-ऑन कवर प्रदान करती हैं, लेकिन युद्ध के लिए बहुत कम ऑप्शन हैं. इस समय जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, भारतीय व्यापारियों को अपनी पॉलिसी अपडेट करानी चाहिए. घरेलू स्वास्थ्य बीमा या लाइफ इंश्योरेंस में भी युद्ध से जुड़े नुकसान बाहर रहते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, पॉलिसी खरीदते समय सिर्फ प्रीमियम नहीं, बल्कि एक्सक्लूजन क्लॉज को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है.

सैलरी अकाउंट बदला है? PF क्लेम से पहले EPFO में यह काम करना न भूलें

नई दिल्ली आपने अपना सैलरी अकाउंट बदल लिया है. हो सकता है आपके नए इंप्लॉयर ने ऐसा करने पर ज़ोर दिया हो. हो सकता है आप बेहतर सर्विस या कम शुल्क चाहते हों. या फिर कोई दूसरी मजबूरी हो. लेकिन एक बात जो अक्सर लोग भूल जाते हैं, वह यह है कि EPFO ​​अभी भी आपका प्रोविडेंट फंड का पैसा आपके UAN से जुड़े बैंक अकाउंट में भेजता है. अगर वह अकाउंट बंद है या इनैक्टिव है तो आपका क्लेम वापस आ सकता है. और आपको इसका पता तभी चलेगा जब आप पैसे निकालने की कोशिश करेंगे. कुछ भी करने से पहले यह चेक कर लें सबसे पहले, EPFO ​​मेंबर ई-सर्विस पोर्टल पर लॉग इन करें और देखें कि वर्तमान में आपका UAN किस बैंक अकाउंट से जुड़ा है. कई लोग सोचते हैं कि नौकरी बदलने पर यह अपने आप अपडेट हो जाता है. ऐसा नहीं है. यह भी चेक कर लें कि आपका आधार वेरिफाई है या नहीं. अगर आधार, पैन और बैंक डिटेल पूरी तरह से मैच नहीं करते हैं – यहां तक ​​कि छोटी सी स्पेलिंग मिस्टेक भी – तो अपडेट अस्वीकार हो सकते हैं. अगर कुछ भी मैच नहीं करता है तो पहले उसे ठीक करें. अन्यथा, सिस्टम आगे नहीं बढ़ेगा. बैंक अकाउंट कैसे बदलें लॉग इन करने के बाद, “मैनेज” सेक्शन में जाएं और “केवाईसी” पर क्लिक करें. आपको वहां अपना बैंक अकाउंट दिखाई देगा. अपना नया अकाउंट नंबर और IFSC कोड ध्यान से डालें. नंबरों को दोबारा जांच लें – ज्यादातर गलतियां यहीं होती हैं. यदि आवश्यक हो, तो कैंसल किए गए चेक की एक स्पष्ट छवि अपलोड करें. सबमिट करने के बाद, रिक्वेस्ट सीधे आगे नहीं बढ़ता. यह अनुमोदन के लिए आपके इंप्लॉयर के पास जाता है. यही वह बात है जिसे लोग नहीं समझते. यदि एचआर इसे अनुमोदित नहीं करता है, तो कुछ भी नहीं बदलेगा. इसलिए यदि मामला अटक जाता है, तो अनिश्चित काल तक प्रतीक्षा करने के बजाय सैलरी डिपार्टमेंट से संपर्क करें. यह क्यों जरूरी है यदि आप विड्रॉल क्लेम करते हैं और बैंक डिटेल गलत हैं, तो EPFO पेमेंट प्रोसेस्ड नहीं करेगा. क्लेम रिजेक्ट हो सकता है, और आपको फिर से शुरुआत करनी होगी. नौकरी छोड़ने के बाद या पीएफ एडवांस के लिए आवेदन करते समय पैसे निकालना तनावपूर्ण हो जाता है. जब कोई जल्दबाजी न हो, तो अकाउंट को अभी अपडेट करना कहीं अधिक आसान है. महत्वपूर्ण बात याद रखें आपके यूएएन के तहत एक समय में केवल एक ही बैंक अकाउंट सक्रिय हो सकता है. और नौकरी बदलने पर आपका यूएएन नहीं बदलता – यह आपके पूरे करियर में आपके साथ रहता है. इसलिए जब भी आपका सैलरी बैंक बदले, EPFO ​​को अपनी चेकलिस्ट में शामिल करें. यह पांच मिनट का काम है जो बाद में हफ्तों की परेशानी से बचाता है.

अंतरिक्ष में तबाही का संकेत? दानव तारे में हो सकता है विस्फोट, वैज्ञानिक सतर्क

ब्रह्मांड के सबसे बड़े ज्ञात तारों में से एक WOH G64 में वर्ष 2014 के बाद बड़ा परिवर्तन दर्ज किया गया है। नए शोध के अनुसार यह तारा अब अपने जीवन के अंतिम चरण में प्रवेश कर सकता है और भविष्य में महाविस्फोट (सुपरनोवा) की संभावना है। यह अध्ययन National Observatory of Athens के वैज्ञानिक गोंजालो मुन्योस-सांचेज के नेतृत्व में किया गया और प्रतिष्ठित जर्नल Nature Astronomy में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह तारा अपनी पारंपरिक लाल अतिविशाल अवस्था से निकलकर दुर्लभ पीली अतिविशाल अवस्था में पहुंच चुका है। आमतौर पर यह परिवर्तन तारे के जीवन के अंतिम चरण का संकेत माना जाता है। इस अवस्था के बाद तारा अक्सर महाविस्फोट के साथ समाप्त होता है।  कहां स्थित है यह तारा? WOH G64 की खोज 1970 के दशक में Large Magellanic Cloud में हुई थी, जो हमारी आकाशगंगा के पास स्थित एक बौनी आकाशगंगा है। यह तारा अत्यंत चमकीला और असाधारण रूप से विशाल है। इसका आकार सूर्य की त्रिज्या से लगभग 1,500 गुना अधिक आंका गया है। तुलना करें तो हमारा सूर्य लगभग 4.6 अरब वर्ष पुराना है, जबकि WOH G64 की आयु 50 लाख वर्ष से भी कम मानी जाती है यानी ब्रह्मांडीय पैमाने पर यह अभी “युवा” है। मिली चौंकाने वाली तस्वीर 2024 में अत्यंत शक्तिशाली दूरबीन इंटरफेरोमीटर की मदद से इसकी विस्तृत तस्वीर ली गई। इसमें तारे के चारों ओर धूल का घना आवरण दिखाई दिया, जिससे संकेत मिला कि यह तेजी से अपना द्रव्यमान खो रहा है। नए अध्ययन के मुताबिक 2014 में इसकी सतह का बड़ा हिस्सा बाहर निकल गया था। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह किसी सहचर तारे के साथ अंतःक्रिया के कारण हो सकता है। वर्णक्रमीय विश्लेषण से सहचर तारे की मौजूदगी के संकेत भी मिले हैं।  ‘सुपरविंड’ अवस्था की संभावना एक अन्य संभावना यह है कि यह तारा महाविस्फोट से पहले की ‘तीव्र पवन’ (सुपरविंड) अवस्था में प्रवेश कर चुका है, जिसमें आंतरिक कंपन के कारण बाहरी परतें तेज गति से अंतरिक्ष में फेंकी जाती हैं।इस प्रक्रिया में तारे की बाहरी परतें फैलती हैं, जबकि उसका केंद्र सिकुड़ता जाता है जो अंततः सुपरनोवा विस्फोट की ओर ले जा सकता है।   क्यों महत्वपूर्ण यह खोज ? आमतौर पर तारे करोड़ों या अरबों वर्षों तक स्थिर रहते हैं। किसी बाहरी आकाशगंगा में इतने स्पष्ट और तेज बदलाव का दर्ज होना अत्यंत दुर्लभ है। यदि आने वाले वर्षों में WOH G64 में महाविस्फोट होता है, तो यह खगोलीय दृष्टि से अद्भुत दृश्य होगा और वैज्ञानिकों को तारों के जीवन चक्र तथा सुपरनोवा प्रक्रिया को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी देगा।  

रेल यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव: अब ट्रेन टॉयलेट में नहीं होंगे चेन वाले मग

नई दिल्ली भारतीय रेलवे की ट्रेनों से हर दिन एक बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं। एसी क्लास से लेकर नॉन एसी कोच तक में लोग अपने-अपने हिसाब से जाते हैं। वहीं, अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं तो आपने कभी न कभी तो ट्रेन में बने टॉयलेट का भी इस्तेमाल किया होगा? यहां आपने टॉयलेट में चेन से बंधा स्टील का मग तो जरूर देखा होगा? क्योंकि ये काफी पुरानी व्यवस्था है। पर अब इस व्यवस्था को बदला जाएगा यानी अब ट्रेन में बने टॉयलेट में लगे चेन से बंधे मगों को हटाया जाएगा। इसको लेकर रेल मंत्रालय ने एक फैसला लिया है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में। अगली स्लाइड्स में आप इस नए निर्देश के बारे में जान सकते हैं… रेलवे द्वारा क्या फैसला लिया गया है?     रेल मंत्रालय की तरफ से सभी रेलवे जोन को निर्देश दिया गया है कि ट्रेन के टॉयलेट में जो चेन से बंधा स्टील मग है, उस हटाया जाए     साथ ही टॉयलेट के फर्श के पास जो पानी का नल है उसे भी हटाने के निर्देश मंत्रालय द्वारा दिए गए हैं स्टील मग की जगह अब क्या होगा?     अपने निर्देश में मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि इन मग को हटाकर जेट स्प्रे लगाए जाएंगे     मंत्रालय ने सभी जोनों से कहा है कि वे अपनी चुनी हुई 19 ट्रेनों के एसी कोच में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करें     साथ ही 3 महीने बाद अनुपालन रिपोर्ट और प्रदर्शन संबंधी फीडबैक मांगा गया है क्यों लिया गया ये फैसला?     अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन जब स्पीड में होती है तो मग से पानी भरते समय ये फर्श पर गिर जाता है जिससे टॉयलेट का फर्श गंदा हो जाता है     फिर टॉयलेट का फर्श पूरा गीला हो जाता है और बदबू आने लगती है आदि     टॉयलेट का फर्श साफ रह सके, इसलिए जेट स्प्रे लगाए जाएंगे किन-किन कोच में मिलेगी सुविधा?     फिलहाल जेट स्प्रे एसी कोच में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाए जाएंगे     सबकुछ ठीक रहने पर माना जा रहा है कि जेट स्प्रे फिर बाकी कोचों में भी लगाए जाएंगे  

मिडल ईस्ट युद्ध से तेल संकट की आशंका, फिर भी भारत पर नहीं पड़ रहा कोई असर

नई दिल्‍ली मिडिल ईस्‍ट में जंग छिड़ी हुई है. ईरान लगातार दुबई, सऊदी और अन्‍य देशों पर मिसाइलें दाग रहा है. वहीं अमेरिका-इजरायल ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं. कुछ अन्‍य देशों ने भी ईरान पर हमले की चेतावनी दी है. ऐसे में इस जंग के शांत होने के आसार फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ी चिंता कच्‍चे तेल को लेकर है, जिसके दाम में रिकॉर्ड तेजी आने की संभावना जताई जा रही है |  सोमवार को कच्‍चे तेल की कीमतों में 13 फीसदी तक की उछाल देखी गई और आगे 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. अगर ऐसा होता है तो दुनियाभर में महंगाई चरम पर आ सकती है, जो ग्‍लोबल इकोनॉमी के लिए भी खतरा है |  तेल की कीमतों में इतनी बड़ी तेजी आने की वजह ईरान के कंट्रोल में 'स्‍ट्रेट ऑफ होमुर्ज' गलियारा है, जहां से दुनियाभर के लिए 40 फीसदी तेल आयात होता है. इसी रास्‍ते 20 फीसदी अन्‍य गैस या एनर्जी का भी आयात किया जाता है. अकेले भारत 50 फीसदी कच्‍चे तेल का आयात करता है. इस एरिए के चोक होने की खबर है, जिसके बाद तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है |  भारत पर नहीं कच्‍चे तेल का संकट हालांकि भारत को इससे डरने की जरूरत नहीं, क्‍योंकि भारत के पास रिजर्व में बहुत ज्‍यादा कच्‍चा तेल पड़ा हुआ है, जिससे भारत की जरूरतें बिना रुकावट पूरी हो सकती हैं. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास फिलहाल अल्पकालिक व्यवधानों से निपटने के लिए पर्याप्त बफर भंडार मौजूद हैं |  45 दिनों का भंडार  रणनीतिक भंडार LPG और एलएनजी की मांग को लगभग 15 दिनों तक पूरा कर सकते हैं, जबकि कच्चे तेल के भंडार आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति में 45 दिनों तक चलने का अनुमान है. भारत के लिए यह  तैयारी ऐसे समय में की गई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं |  बढ़ते तनाव के बावजूद, अधिकारियों का कहना है कि जलडमरूमध्य में लंबे समय तक व्यवधान या बंद होने की स्थिति में भी भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए वैकल्पिक बाजारों से ऊर्जा प्राप्त करने की अपनी क्षमता को बरकरार रखेगा. हालांकि निकट भविष्य में भौतिक आपूर्ति में व्यवधान की संभावना कम ही दिखती है. अभी कच्‍चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट में 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है |  कितना खास है ये मार्ग?  गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक कच्‍चे तेल का लगभग  40% और एलएनजी शिपमेंट का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है. इसलिए, इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की दीर्घकालिक बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है |  यूरोपियन गैस की कीमतों में 22% की तेजी यूरोपियन नैचुरल गैस की कीमतों में लगभग 22% की तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण, खासकर ईरान पर हाल ही में US और इजराइली मिलिट्री हमलों और होर्मुज़ स्ट्रेट के ज़रिए सप्लाई में रुकावट के डर के बाद, एनर्जी कीमतों में उछाल आई है |  2022 के गैस मार्केट में उथल-पुथल के बाद यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है. डर है कि इस युद्ध से LNG (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) और दूसरे एनर्जी शिपमेंट का फ्लो रुक सकता है या झगड़े बढ़ने पर उनका रूट बदला जा सकता है | 

डरावनी चेतावनी: 2040 तक कैंसर से हालात होंगे और भयावह, हर 2 मिनट में एक पीड़ित

कैंसर के मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए सबसे गंभीर चुनौती बने हुए हैं। हर साल इस बीमारी के कारण लाखों लोगों की जान जा रही है। बुजुर्ग और युवा तो छोड़िए, बच्चे भी तेजी से इसका शिकार होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस गति से ये बीमारी बढ़ती जा रही है, ऐसे में अनुमान है कि आने वाले वर्षों में कैंसर के कारण हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। इस जानलेवा रोग के जोखिमों को देखते हुए सभी लोगों को इससे बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की जरूरत है। आने वाले दो दशकों में कैंसर और कितना खतरनाक रूप लेने वाला है? इससे संबंधित रिपोर्ट में जो बातें सामने आई हैं, वो निश्चित ही काफी डराने वाली हैं। ब्रिटेन की एक जानी-मानी चैरिटी ने चेतावनी दी है कि साल 2040 तक कैंसर के मामले रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। हालात इतने बिगड़ सकते हैं कि हर दो मिनट में एक व्यक्ति में इस बीमारी का निदान होने की आशंका है। वैसे तो ये रिपोर्ट केवल ब्रिटिश नागरिकों में कैंसर के बढ़ते जोखिमों को लेकर है, पर विशेषज्ञ इसे दुनियाभर के लिए बड़ी चेतावनी मान रहे हैं। बच्चे भी कैंसर की चपेट में आ रहे हैं जिसके कारण एक पूरी पीढ़ी पर कैंसर का गहरा साया देखा जा रहा है। अगले दो दशकों में और बिगड़ सकते हैं हालात 'वन कैंसर वॉइस' नाम के 60 कैंसर संस्थानों वाले ग्रुप ने ये चौंकाने वाला अनुमान जारी किया है, जिसमें अगले दो दशकों में अकेले ब्रिटेन में कैंसर के 63 लाख नए मामलों का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों ने शोध के दौरान पाया है कि ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और लंग्स कैंसर के मामले बहुत तेजी से बढ़ने वाले हैं। इसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका जताई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि कैंसर के बढ़ते खतरे के लिए वैसे तो कई कारण जिम्मेदार पाए गए हैं। हालांकि मोटापे की बढ़ती दर, खराब डाइट, कुछ प्रकार के कैंसर को रोकने वाली वैक्सीन लगवाने में कमी और लोगों में बढ़ती धूम्रपान की आदत इसके लिए मुख्यरूप से जिम्मेदार है। क्या कहती हैं विशेषज्ञ? कैंसर रिसर्च यूके की चीफ एग्जीक्यूटिव मिशेल मिशेल ने चेतावनी दी है कि हममें से लगभग दो में से एक को अपनी जिंदगी में कैंसर का खतरा हो सकता है। इस बीमारी का असर हर किसी पर पड़ेगा, चाहे उन्हें खुद इस बीमारी का पता चले या उनके किसी दोस्त-परिवार के सदस्य या प्रियजन को ये समस्या हो। उन्होंने आगे कहा कि अगर अभी से कैंसर की रोकथाम के लिए कदम नहीं उठाए गए तो इंग्लैंड में इस रोग के मामले दुनिया के कई देशों को पीछे छोड़ सकते हैं।       यूके में कैंसर और इसके कारण होने वाली समय से पहले मौत का सबसे बड़ा कारण तंबाकू है।     कैंसर का खतरा उम्र से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि समय के साथ बीमारी को ट्रिगर करने वाले सेल्स में डैमेज का जोखिम भी काफी बढ़ सकता है। कौन से कैंसर बढ़ा रहे खतरा? कैंसर को लेकर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि ब्रिटेन में जिन कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा बढ़ता जा रहा है उनमें प्रोस्टेट, ब्रेस्ट, लंग्स, बाउल और मेलेनोमा स्किन कैंसर शीर्ष पांच पर हैं। ये सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं दुनिया के अन्य देशों के लिए भी अलर्ट है। कैंसर रोग विशेषज्ञों ने बताया कि हमारी रोजाना की गड़बड़ आदतें भी कैंसर के खतरे को बढ़ाती जा रही हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से डियोड्रेंट और परफ्यूम के इस्तेमाल के कारण भी कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा जिन लोगों को इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज की दिक्कत होती है, ऐसे लोगों में आगे चलकर बाउल कैंसर का खतरा 600 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है। बाउल कैंसर को कोलन कैंसर या कोलोरेक्टल कैंसर के नाम से भी जाना जाता है।  

निखिल गुप्ता को पन्नू हत्याकांड में लंबी सजा का खतरा, 29 मई को सुप्रीम कोर्ट/अदालत निर्णय

वॉशिंगटन   न्यूयॉर्क में सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित तौर से हत्या की साजिश के मामले में निखिल गुप्ता को अमेरिकी संघीय कोर्ट में औपचारिक रूप से दोषी ठहराया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान 29 मई को निखिल की सजा तय की जाएगी। कोर्ट के जज ने सिख अलगाववादी की हत्या की साजिश में निखिल की गलती मान ली है। निखिल को इस मामले में ज्यादा से ज्यादा 40 साल की जेल हो सकती है। अमेरिकी जिला जज विक्टर मारेरो ने 17 फरवरी को मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के सामने गुप्ता की बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट देखने के बाद दोषी ठहराने का आदेश जारी किया। पिछले हफ्ते 54 साल के निखिल गुप्ता ने कोर्ट में अपनी गलती स्वीकार की थी। उन्होंने माना था कि अमेरिका में 2023 में पन्नू की हत्या करवाने के लिए हामी भरी थी। उन्होंने ये भी बताया कि इसके लिए किसी दूसरे व्यक्ति को 15,000 डॉलर कैश दिए थे। पूछताछ के दौरान, उन्होंने माना कि उन्हें पता था कि जिस पर हमला होना था, वह न्यूयॉर्क में था और जिसे पेमेंट दिया गया, वह मैनहट्टन में मौजूद था। निखिल ने भाड़े पर हत्या करने और मनी लॉन्ड्रिंग करने की साजिश का गुनाह कबूल किया। जिला कोर्ट के आदेश के अनुसार, गुप्ता की सजा आधिकारिक हो गई है और केस सीधे सजा सुनाने के फेज में चला गया है। फेडरल कानून के तहत, गुप्ता को भाड़े पर मर्डर करने की साजिश के लिए 10-10 साल तक की सजा हो सकती है और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के लिए 20 साल तक की सजा हो सकती है। यानी कानूनी तौर पर ज्यादा से ज्यादा 40 साल की सजा होगी। हालांकि, संघीय सजा सिर्फ कानूनी तौर पर ज्यादा से ज्यादा सजा के बजाय एडवाइजरी सेंटेंसिंग गाइडलाइंस से तय होती है। अर्जी से पहले दाखिल किए गए पिमेंटेल लेटर में गुप्ता की एडवाइजरी सजा की रेंज 235 से 293 महीने जेल आंकी गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने साफ किया कि गाइडलाइंस एडवाइजरी हैं और आखिरी सजा सिर्फ जज मारेरो जांच रिपोर्ट देखने के बाद तय करेंगे। अब इस मामले में निखिल को 29 मई को सुबह 10 बजे सजा सुनाई जाएगी। गुप्ता ने कोर्ट में पुष्टि की है कि वह भारत के नागरिक हैं और उन्हें मालूम है कि दोषी मानने पर उन्हें अमेरिका से निकाल दिया जाएगा। सरकार की सजा से जुड़ी जानकारी में कहा गया है कि ऐसे अपराधों के लिए दोषी पाए गए गैर-नागरिकों को देश से हटाना जरूरी है।

खाड़ी देशों में बढ़ी बमबारी, तेल के लिए बढ़ सकती है मारामारी; भारत ने रूस जैसी तैयारी की

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के साथ आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। सोमवार को वायदा कारोबार में कच्चे तेल की कीमत 504 रुपए उछलकर 6,596 रुपए प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। वहीं, फारस की खाड़ी के संकरे प्रवेश मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे जहाजों पर हमले से आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है। भारत के कच्चे तेल आयात का करीब 50 फीसदी और एपीजी का हिस्सा हर दिन होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। इसमें ज्यादातर इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत का कच्चा तेल होता है। क्षेत्र में तनाव ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। जानकार मानते हैं कि भारत रूस और दूसरे देशों से आयात बढ़ाकर कच्चे तेल की आपूर्ति को बरकरार रख सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव ज्यादा दिन बरकरार रहता है, तो इसका असर हमारी गैस आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार दूसरी संभावनाएं भी तलाश रही है। बढ़ सकती है रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति पेट्रोलियम मंत्रालय का केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लिया है। मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इसके साथ सरकार वैकल्पिक संभावनाओं को भी खंगाल रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए सुरक्षित मार्ग को तरजीह दे सकती है। ऐसे में रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है। अमेरिका से समझौते के बाद रूस से तेल आयात में मई 2022 के बाद भारत के तेल आयात में रूस का हिस्सा 20 फीसदी से कम हो गया है। इसके साथ भारत के पास करीब 74 दिन का कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है। ऐसे में सरकार के लिए शुरुआती तौर पर तो कोई चिंता नहीं है, पर तनाव लंबा होता है, तो रणनीतिक भंडार पर दबाव आ सकता है। इसलिए, सरकार एहतियाती तौर पर कुछ कदम उठा सकती है। ताकि, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति को बरकरार रखा जाए। गैस आपूर्ति बरकरार रखने पर जोर दरअसल, जनवरी 2026 से भारत से खाड़ी देशों और अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया था। इसका सीधा असर रूस से कच्चे तेल के आयात पर पड़ा। रूस से आयात कम हो गया। इसी तरह खाड़ी देशों से एलपीजी आयात भी बढ़ गया। फरवरी 2026 में 2.03 मिलियन टन एलपीजी आयात की, इसमें से 1.66 मिलियन टन गैस खाड़ी देशों से ली गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि गैस आपूर्ति को बरकरार रखने के लिए भी सुरक्षित मार्ग से गैस आपूर्ति की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ कीमत भी बड़ा मुद्दा है। ईरान ने कुवैत और सऊदी अरब की कई बड़ी कंपनियों पर हमला किया है। ऐसी खबर है कि सऊदी की अरामको पर हमला किया है। इससे रिफाइनरी का कामकाज प्रभावित हो सकता है। वहीं, ईरान प्रतिदिन लगभग 16 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा चीन को जाता है। ईरान का यह निर्यात बाधित होता है तो चीन को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीदता है भारत भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में कीमतों में उछाल से जहां आयात बिल बढ़ेगा, वहीं ईंधन महंगाई पर दबाव पड़ेगा। इस बीच, आठ पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह ओपेक प्लस ने अप्रैल में अपना उत्पादन 2.06 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है। पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत इस वक्त करीब 40 देशों से कच्चा तेल खरीदता है। वर्ष 2022 से पहले भारत सिर्फ 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था। क्या है होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण संकरा समुद्री मार्ग है। यह ईरान, ओमान और यूएई स्थित वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। खाड़ी देशों से तेल व गैस से जाने वाले ज्यादातर टैंकर इसी मार्ग से गुजरते हैं।

हालात को देखते हुए दुबई में भारतीय दूतावास अलर्ट, भारतीयों से कहा- बेवजह बाहर न निकलें

नई दिल्ली  दुबई में भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास ने वहां रहने वाले भारतीय लोगों को गैर जरूरी यात्रा करने से बचने की सलाह दी है। दुबई में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "अभी के इलाके के हालात को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात में सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे गैर-जरूरी यात्रा से बचें। पूरा ध्यान रखें, सतर्क रहें और यूएई अधिकारियों और एम्बेसी द्वारा जारी किए जाने वाले सुरक्षा गाइडलाइंस और एडवाइजरी का पालन करें।" "अबू धाबी में भारतीय एम्बेसी और दुबई में कॉन्सुलेट जनरल नॉर्मल तरीके से काम कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अपडेट जारी करेंगे। किसी भी इमरजेंसी सवाल के लिए, यूएई में भारतीय नागरिक टोल फ्री नंबर: 800-46342 और व्हाट्सएप +971543090571 पर संपर्क कर सकते हैं।" रियाद में अमेरिकी दूतावास पर दो ईरानी ड्रोन हमलों के बाद आग लग गई और सामान का नुकसान हुआ। अमेरिकी दूतावास ने इसके बाद एडवाइजरी जारी की। हमले के बाद अमेरिकी दूतावास ने एक्स के जरिए रियाद, जेद्दा और धाहरान के लिए शेल्टर-इन-प्लेस एडवाइजरी जारी की। इसने इस क्षेत्र में सैन्य ठिकानों की गैर-जरूरी यात्रा पर रोक लगाने की भी घोषणा की और सऊदी अरब में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों से तुरंत पनाह लेने की अपील की। बयान में कहा गया, "सऊदी अरब में अमेरिकी मिशन इलाके के हालात पर नजर रख रहा है। हम सभी यात्रियों से कहना चाहते हैं कि वे हमारे सबसे नए सुरक्षा अलर्ट देखें। किसी भी रुकावट के मामले में अपनी यात्रा की योजना को देखें और खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए सही फैसले लें।" इसमें आगे कहा गया, "हम सभी अमेरिकी नागरिकों को एक पर्सनल सेफ्टी प्लान बनाए रखने की सलाह देते हैं। विदेश में ट्रैवल करते या रहते समय अचानक कोई मुश्किल आ सकती है, और एक अच्छा प्लान आपको संभावित हालात के बारे में सोचने और पहले से सबसे अच्छा तरीका तय करने में मदद करता है।"