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ईरान में जंग से बढ़ी तेल-गैस की किल्लत, भारत पर कितना असर? सरकार का प्लान क्या है

नई दिल्ली ईरान में जारी जंग के चलते पैदा हुए हालातों के बारे में पीएम नरेंद्र मोदी आज देश को जानकारी देंगे। वह लोकसभा में दोपहर 2 बजे बोलने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि इस स्पीच में वह बताएंगे कि ईरान में जंग के बीच देश में गैस और तेल की सप्लाई की क्या स्थिति है। यदि किसी प्रकार का संकट है तो फिर सरकार उससे निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है। इन सभी सवालों के जवाब पीएम नरेंद्र मोदी इस भाषण में दे सकते हैं। पीएमओ में रविवार को जो बैठक हुई थी, उसमें प्रधानमंत्री ने पूरी प्रजेंटेशन देखी थी। इसमें उन्होंने जाना था कि दुनिया में पैदा हुए हालातों के बीच भारत ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और देश में तेल और गैस सप्लाई की क्या स्थिति है। इस दौरान सभी संबंधित मंत्रालयों से उन्होंने जरूरी अपडेट लिए थे। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में ऐग्रिकल्चर, फर्टिलाइजर, फूड सिक्योरिटी, पेट्रोलियम, पावर, एक्सपोर्ट, शिपिंग, फाइनेंस, सप्लाई समेत तमाम विभागों से बात की गई। उनकी ओर से उठाए कदमों के बारे में पीएम मोदी ने जानकारी हासिल की। खरीफ सीजन में फर्टिलाइजर की कमी ना हो, PM मोदी के निर्देश बैठक की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि इस दौरान यह चर्चा हुई कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर हो सकता है। फिर भारत खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई। बीते कुछ दिनों में देश में फर्टिलाइजर्स की कमी पर भी काफी खबरें आई थीं। ऐसे में बैठक में इसकी उपलब्धता को लेकर भी चर्चा हुई थी। कुछ महीनों बाद खरीफ का सीजन होगा और सरकार नहीं चाहती कि उस दौरान किसी भी तरह से फर्टिलाइजर्स की कमी रहे। एक पक्ष इस दौरान बिजली आपूर्ति का भी आया। इसे लेकर आदेश दिया गया है कि देश के सभी पावर प्लांट्स में कोयले की पर्याप्त सप्लाई होती रहे ताकि बिजली उत्पादन में गिरावट न आए। संकट के बीच बिजली पर जोर, मीटिंग में हुई चर्चा एलपीजी की कमी के बीच बड़ी संख्या में लोग इंडक्शन की ओर शिफ्ट हुए हैं। ऐसी स्थिति में बिजली की सप्लाई लगातार जारी रहना भी जरूरी है। पीएम मोदी की बुलाई बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कैसे पेट्रोकेमिकल्स, फार्मा और केमिकल्स की कमी ना होने दी जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस जंग से पूरी दुनिया ही प्रभावित हो रही है, लेकिन हमें कुछ ऐसे कदम उठाने होंगे कि देश के हितों की रक्षा की जा सके। इस बैठक में उन्होंने सरकार के सभी विभागों से समन्वय के साथ काम करने की अपील की।  

असम में एम्बुलेंस-ट्रक टक्कर में 6 लोगों की जान गई, दो गंभीर रूप से घायल

तेजपुर असम के सोनितपुर जिले में बीती एक एम्बुलेंस और ट्रक की टक्कर हो गई, जिसमें एम्बुलेंस में सवार छह लोगों की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए. सोनितपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार एम्बुलेंस में एक मरीज और उसके परिवार के सदस्य सवार थे. एम्बुलेंस तेजपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की ओर जा रही थी, तभी ढेकियाजुली पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 15 पर यह टक्कर हो गई. इस हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और गंभीर रूप से घायल दो लोगों को तेजपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और आपातकालीन सेवा दल तुरंत दुर्घटनास्थल पर पहुंचे, बचाव अभियान शुरू किया और राजमार्ग को साफ किया. बताया जाता है कि नेशनल हाईवे 15 पर ढेकियाजुली पुलिस स्टेशन के अंतर्गत यह भयानक सड़क हादसा हुआ. इस घटना से पूरे इलाके में शोक की गहरी लहर है. रिपोर्टों के अनुसार यह दुखद घटना तब हुई जब तेजपुर से गुवाहाटी की ओर जा रहे एक ट्रक की, विपरीत दिशा से आ रहे एक वाहन से आमने-सामने टक्कर हो गई. टक्कर इतनी जोरदार थी कि छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है. यह त्रासदी राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर सड़क सुरक्षा को लेकर जारी चिंताओं को उजागर करती है. यह एक व्यस्त हाईवे है जहां अक्सर भारी ट्रैफिक और तेज गति से वाहनों की आवाजाही देखने को मिलती है.

न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर एयर कनाडा का विमान फायर ट्रक से टकराया, चार लोग घायल

न्यूयॉर्क न्यूयॉर्क के ला गार्डिया एयरपोर्ट पर सोमवार को एक बड़ा विमान हादसा हो गया. खराब मौसम के बीच गेट की तरफ जा रहा एयर कनाडा का एक जेट रनवे पर खड़े फायर ट्रक से टकरा गया।  फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा और स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे का शिकार हुआ विमान 'एयर कनाडा एक्सप्रेस CRJ-900' है, जो मॉन्ट्रियल से न्यूयॉर्क पहुंचा था. टक्कर इतनी जोरदार थी कि इसमें चार दमकलकर्मी घायल हो गए हैं. उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।  हादसे के समय विमान में लगभग 100 यात्री सवार थे. आपातकालीन बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया. सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में यात्री विमान के अगले हिस्से और 'नोज' को भारी नुकसान पहुंचता दिख रहा है।  पूरा एयरपोर्ट हुआ बंद ला गार्डिया काफी बिजी और भीड़भाड़ वाला एयरपोर्ट है. प्लेन क्रैश होने की वजह से फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने ला गार्डिया एयरपोर्ट पर सभी उड़ानों के लिए 'ग्राउंड स्टॉप' जारी कर दिया है. शुरुआत में 05:30 GMT तक उड़ानों पर रोक लगाई गई थी, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसे 18:00 GMT तक बंद रखा जा सकता है. एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां रनवे से मलबा हटाने और जांच करने में जुटी हैं।  शुरुआती रिपोर्ट की मानें तो हादसे की वजह खराब मौसम और विजिबिलिटी की कमी बताई जा रही है. फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि दमकल की गाड़ी रनवे पर क्यों मौजूद थी. रेगुलेटर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सिक्योरिटी स्टैंडर्ड की भी समीक्षा की जाएगी। 

India-China कनेक्टिविटी में सुधार: बीजिंग और दिल्ली डायरेक्ट फ्लाइट दोबारा शुरू करेगा एअर चाइना

बीजिंग एअर चाइना फिर से बीजिंग और दिल्ली के बीच सीधी उड़ानें शुरू करेगा। यह जानकारी शनिवार को भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में यू जिंग ने लिखा, बीजिंग और दिल्ली के बीच एअर चाइना की सीधी उड़ानें फिर से शुरू होना केवल यात्रा तक सीमित नहीं है। यह व्यापार, पर्यटन और भरोसे को बढ़ावा देने वाला कदम है और संघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और ब्रिक्स के सदस्य देशों के लोगों के बीच आपसी सहयोग के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। पिछले साल करीब पांच साल के अंतराल के बाद भारत और चीन ने फिर से हवाई सेवाएं शुरू कीं, जिससे दोनों देशों के संबंधों में सुधार का संकेत मिला। एक फरवरी को एअर इंडिया ने शंघाई और दिल्ली के बीच सीधी उड़ान की घोषणा की। इस तरह दोनों शहरों के बीच छह साल बाद फिर से उड़ान सेवा शुरू हुई। इसके अलावा, चीनी एयरलाइन चाइना ईस्टर्न ने भी पिछले साल नवंबर में शंघाई से दिल्ली के लिए उड़ानें शुरू कीं। गलवां घाटी में खूनी झड़प के बाद संबंधों में तनाव साल 2020 में गलवां घाटी में हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे। इस झड़प में 20 भारतीय सैनिकों का बलिदान हुआ। जबकि चीन ने चार सैनिकों की ही मौत की पुष्टि की थी। अगस्त 2023 में जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने तनाव कम करने के लिए प्रयास तेज करने पर सहमति जताई। छह साल में पीएम मोदी ने की थी चीन की यात्रा अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने छह साल में पहली बार चीन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने शी जिनपिंग से बातचीत की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों पर कड़े टैरिफ लगाए थे। इसके बाद उसी महीने चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि बीजिंग, अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ का विरोध करता है और भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

8वां वेतन आयोग: लागू होने की तारीख, एरियर भुगतान और कर्मचारियों की डिमांड

नई दिल्ली 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8वां सीपीसी) के शुरुआत के साथ ही केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स उम्मीद कर रहे हैं कि आयोग नवंबर 2025 में टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी होने के 18 महीने के भीतर अपनी रिकमंडेशन रिपोर्ट को पब्लिश करेगा। हालांकि, इस बात को लेकर संशय बना हुआ है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होंगी या इसके बाद। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की मांग है कि पे स्केल्स (वेतनमान), अलाउंसेज (भत्तों), पेंशन और दूसरे बेनेफिट्स में रिवीजन 1 जनवरी 2026 से होना चाहिए, ना कि किसी संभावित तारीख से। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस का कहना है कि पे रिवीजन पहले ही देय है। यह बात एक रिपोर्ट में कही गई है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए सरकार अगर कोई संभावित तारीख चुनती है तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को ठीक-ठाक एरियर्स का नुकसान हो सकता है। 7वें वेतन आयोग का समय 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो गया। क्या कहते हैं ट्रेंड? पिछली परिस्थितियों में सरकार ने हमेशा पिछले पे कमीशन (वेतन आयोग) के आखिरी दिन के बाद अगले दिन से एरियर दिए हैं। उदाहरण के लिए अगर हम 6वें वेतन आयोग की एरियर डेट की बात करें तो कमीशन ने अपनी रिपोर्ट मार्च 2008 में सबमिट की, लेकिन कर्मचारियों और पेंशनर्स को 1 जनवरी 2006 से एरियर मिला। पिछले पे कमीशंस की टाइमलाइन 7वां वेतन आयोग फरवरी 2014 में बना। कमीशन ने नवंबर 2015 में अपनी रिपोर्ट जमा की और यह जून 2016 में लागू हुआ, इसमें कुल करीब 2.5 साल लगे। सातवें वेतन आयोग में जनवरी 2016 से जून 2016 तक की अवधि का एरियर दिया गया। 6वां वेतन आयोग अक्टूबर 2006 में बना, आयोग ने अपनी रिपोर्ट मार्च 2008 में सबमिट की और यह अगस्त 2008 में लागू हुआ। इसमें 40 पर्सेंट एरियर का भुगतान 2008 में और 60% का पेमेंट साल 2009 में किया गया। 5वां वेतन आयोग अप्रैल 1994 में बना। पे कमीशन ने अपनी रिपोर्ट जनवरी 1997 में जमा की और यह अक्टूबर 1997 में लागू हुआ। इसमें करीब 3.5 साल लगे। पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कंट्रीब्यूटरी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को वापस लिया जाना चाहिए और नॉन-कंट्रीब्यूटरी ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल किया जाना चाहिए। AITUC ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8वें सीपीसी) से जोर दिया है कि पेंशनर्स के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है और पेंशन रिवीजन के जरिए अपनी सिफारिशों में पेंशनर्स को कवर करना चाहिए। साथ ही, पेंशन रेस्टरैशन के कम्प्यूटेशन को मौजूदा 15 साल से घटाकर 11 से 12 साल किया जाना चाहिए। AITUC ने यह भी रिकमंड किया है कि पेंशन में इजाफा हर 5 साल के बाद होना चाहिए। 8वां वेतन आयोग और फिटमेंट फैक्टर 8वें पे कमीशन (8वें वेतन आयोग) ने काम्पन्सेशन रिवीजन्स पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स, एंप्लॉयीज यूनियंस और कई दूसरे स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगा है। कई एंप्लॉयीज यूनियंस ने अपनी डिमांड रखी हैं, जिसमें फिटमेंट फैक्टर्स भी शामिल है। द फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस ने 3.0 से 3.25 की रेंज में फिटमेंट फैक्टर्स रिकमंड किया है।

चार दिन की बारिश का अलर्ट: प्री-मानसून ने बढ़ाई रफ्तार, IMD ने जारी की चेतावनी

नई दिल्ली प्री-मानसून ने जब से देश में दस्तक दी है, मौसम ही बदल गया है। मानसून 2025 सीज़न में पूरे देश में शानदार बारिश देखने को मिली और सीज़न के बाद भी कई राज्यों में बारिश का सिलसिला बना रहा। अब 2026 में प्री-मानसून ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है, जिससे कई राज्यों में फिर से बारिश का दौर शुरू हो गया है। अब देश में प्री-मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) ने कई राज्यों में 22, 23, 24 और 25 मार्च को भारी बारिश का अलर्ट (Heavy Rain Alert) जारी किया है। उत्तरपश्चिम भारत उत्तरपश्चिम भारत में प्री-मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 22, 23, 24 और 25 मार्च को राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कई जगह भारी बारिश होगी। इस दौरान कई जगह हल्की बारिश का भी अलर्ट है। साथ ही 40-70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने, बिजली गरजने और कुछ जगह ओलावृष्टि का भी अलर्ट है। पश्चिम भारत पश्चिम भारत में भी प्री-मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 22, 23, 24 और 25 मार्च के दौरान मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में जमकर बादल बरसेंगे। इस दौरान बिजली गरजने और तेज़ हवा चलने की भी संभावना है। पूर्वी और मध्य भारत पूर्वी और मध्य भारत में भी प्री-मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 22, 23, 24 और 25 मार्च को मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में तेज़ बारिश होगी और कई जगह रिमझिम बारिश भी होगी। इस दौरान कुछ जिलों में 50-80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने, धूल-भरी आंधी आने, बिजली गरजने और ओलावृष्टि का भी अलर्ट है। उत्तरीपूर्व भारत उत्तरीपूर्व भारत में भी प्री-मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में मौसम विभाग ने असम, मिज़ोरम, मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में 22, 23, 24 और 25 को जमकर बादल बरसने का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 30-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने और बिजली गरजने का भी अलर्ट है। दक्षिण भारत दक्षिण भारत में भी प्री-मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में मौसम विभाग ने कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश, माहे, पुडुचेरी, यनम और कराईकल में 22, 23, 24 और 25 मार्च को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई जगह 30-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने का भी अलर्ट है।

भारत ने होर्मुज के विकल्प में खोजा रास्ता, अब तेल का भंडार आ रहा है इस नई दिशा से

नई दिल्‍ली मिडिल ईस्‍ट में जंग से तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, क्‍योंकि खाड़ी देशो से एशिया और यूरोप के देशों में तेल-गैस की सप्‍लाई बाधित हुई है. इन्‍हीं जगहों पर खाड़ी देशों के तेल-गैस की खपत ज्‍यादा होती है. इस बीच, एक रिपोर्ट का दावा है कि भारत कुछ अन्‍य जगहों से भी तेल-गैस का आयात कर रहा है, जो यह संकेत देता है कि अब वह सिर्फ स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज या खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने टेंडर के जरिए अंगोला से 20 लाख बैरल तेल खरीदा है, क्योंकि महंगे मिडिल ईस्‍ट तेल की उपलब्धता कम होने के कारण भारतीय रिफाइनर वेस्‍ट अफ्रीकी और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के तेल की ओर रुख कर रहे हैं।  भारत पहले मिडिल ईस्‍ट पर तेल गैस आयात के लिए 45 फीसदी निर्भर था, लेकिन अब वह नए-नए रास्‍तों की तलाश में है. अमेर‍िका और ईरान के बीच जंग से भारत की एनर्जी सप्‍लाई प्रभावित हुई है. स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्‍ता बंद होने के कारण भारत में LPG की सप्‍लाई सबसे ज्‍यादा बाधित हुई है।  मिडिल ईस्‍ट का तेल दुनिया का सबसे महंगा तेल  ओमान और दुबई के बेंचमार्क में थोड़ी नरमी आई, लेकिन सप्ताह की शुरुआत में इनमें तेजी आई क्योंकि मिडिल ईस्‍ट देशों का कच्चा तेल दुनिया का सबसे महंगा तेल बन गया था. इस सप्ताह की शुरुआत में ब्रेंट फ्यूचर कीमतें 2008 में 147.50 डॉलर के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गईं।  एशिया जाने वाले लाखों बैरल मिडिल ईस्‍ट कच्‍चे तेल की कीमत तय करने के लिए इस्‍तेमाल किए जाने वाले बेंचमार्क में अचानक हुई वृद्धि ने एशियाई रिफाइनरों के लिए लागत बढ़ा दी है, जिससे वे विकल्प तलाशने या उत्पादन कम करने के लिए मजबूर हो गए हैं।  कहां कितना तेल खरीद रहा भारत?  रॉयटर्स के अनुसार, एचपीसीएल ने एक्सॉन से क्लोव और कैबिंडा के दस लाख बैरल खरीदे हैं, जिनकी कीमत ब्रेंट क्रूड ऑयल की तुलना में लगभग 15 डॉलर अधिक है और जिनकी डिलीवरी मई 1-10 के बीच होनी है. इस रिफाइनरी ने राजस्थान के रेगिस्तानी राज्य में स्थित अपनी 180,000 बैरल प्रति दिन की क्षमता वाली बाड़मेर रिफाइनरी के लिए तेल खरीदा है।  इस सप्ताह की शुरुआत में, HPCL ने व्यापारी टोट्सा से फोरकाडोस और अगबामी के एक-एक मिलियन बैरल खरीदे. इसके अलावा, इंडियन ऑयल कॉर्प देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइन कंपनी भी पश्चिम अफ्रीका से कच्चा तेल खरीदने की कोशिश कर रही थी। 

वैश्विक मंच पर ईरान पर वार: नेतन्याहू बोले– दुनिया की सुरक्षा को बड़ा खतरा, दिखाए प्रमाण

ईरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को दुनियाभर के नेताओं से अपील की कि वे ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के युद्ध प्रयासों में शामिल हों। उन्होंने इजरायली क्षेत्र पर हाल ही में हुए हमलों का हवाला देते हुए कहा कि ये हमले एक बढ़ते वैश्विक खतरे का सबूत हैं। इजरायल के अराद में ईरान द्वारा किए गए एक मिसाइल हमले की जगह पर बोलते हुए, नेतन्याहू ने कहा कि पिछले 48 घंटों के घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि ईरान न केवल इजरायल के लिए, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है। इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान ने यरुशलम में नागरिक इलाकों और प्रमुख धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया है, जिनमें वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद शामिल हैं। नेतन्याहू ने कहा, "अगर आपको इस बात का सबूत चाहिए कि ईरान पूरी दुनिया के लिए खतरा है, तो पिछले 48 घंटों ने वह सबूत दे दिया है। पिछले 48 घंटों में, ईरान ने एक नागरिक इलाके को निशाना बनाया। वे ऐसा सामूहिक हत्या के हथियार के तौर पर कर रहे हैं। खुशकिस्मती से, कोई मारा नहीं गया, लेकिन ऐसा किस्मत की वजह से हुआ, न कि उनके इरादे की वजह से। उनका इरादा नागरिकों की हत्या करना है।" उन्होंने आगे कहा, "दूसरी बात, उन्होंने यरुशलम पर हमला किया, जो तीन एकेश्वरवादी धर्मों के पवित्र स्थलों- वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ़ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद के ठीक बगल में स्थित है। और एक चमत्कार की बदौलत, एक बार फिर, उनमें से किसी को भी चोट नहीं आई, लेकिन वे तीन प्रमुख एकेश्वरवादी धर्मों के पवित्र स्थलों को निशाना बना रहे थे।'' उन्होंने आगे दावा किया कि ईरान ने लंबी दूरी तक मार करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है, जिसमें काफी दूर तक मिसाइलें दागना और समुद्री व ऊर्जा गलियारों सहित रणनीतिक मार्गों को निशाना बनाना शामिल है। उन्होंने आगे कहा, ''आपको और क्या सबूत चाहिए कि इस शासन को, जो पूरी दुनिया के लिए खतरा है, रोकना ही होगा। इजरायल और अमेरिका पूरी दुनिया के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। और अब समय आ गया है कि बाकी देशों के नेता भी इसमें शामिल हों। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि मैं देख सकता हूं कि उनमें से कुछ लोग उस दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर रहे हैं, लेकिन अभी और ज्यादा करने की जरूरत है।'' नेतान्याहू ने ईरान के खिलाफ व्यापक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपीलों का भी स्वागत किया, और इसे न केवल इजरायल और अमेरिका के लिए, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी जरूरी बताया।  

भारत के पक्ष में बदला खेल: चीन की जगह भारत आया रूसी तेल, 6 और जहाज आने को तैयार

नई दिल्ली   वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है। रूस का कच्चा तेल लेकर चीन जा रहा टैंकर Aqua Titan अब भारत पहुंच गया है। यह टैंकर शनिवार शाम न्यू मंगलुरु पोर्ट पर पहुंचा। यह सात टैंकरों की उस खेप का पहला जहाज है, जिन्हें मूल रूप से चीन भेजा जा रहा था, लेकिन अब उन्हें भारत की ओर मोड़ दिया गया है। यह फैसला तब हुआ जब अमेरिका ने भारत को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह टैंकर जनवरी के अंत में बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से रवाना हुआ था और चीन के रिझाओ बंदरगाह की ओर जा रहा था। लेकिन मार्च के मध्य में इसने अचानक अपना रास्ता बदल लिया। दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे तनाव और बंद होने की आशंका के कारण भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। भारत के लगभग 40-50% कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से होता है, इसलिए यहां की स्थिति बेहद अहम है।एक और टैंकर Zouzou N 25 मार्च तक गुजरात के सिक्का पोर्ट पहुंच सकता है। यह भी पहले चीन की ओर जा रहा था, लेकिन रास्ता बदल दिया गया। शिप-ट्रैकिंग कंपनी Vortexa के अनुसार, भारत ने हाल के दिनों में रूसी तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई है, जिससे इन टैंकरों का रुख बदला गया। इन सात टैंकरों के भारत पहुंचने से देश में कच्चे तेल की कमी को कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, अमेरिका से एलपीजी लेकर आने वाला जहाज Pyxis Pioneer भी मंगलुरु पोर्ट पहुंच चुका है, जिससे रसोई गैस संकट में राहत मिलने की उम्मीद है। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए तेजी से रणनीति बदल रहा है।

Middle East में बढ़ा तनाव: सऊदी अरब ने ईरान के 5 अधिकारियों को देश से निकाला

सऊदी अरब सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सऊदी सरकार ने ईरान पर “खुलेआम हवाई हमलों” का आरोप लगाते हुए कड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में ईरान की कार्रवाई को “स्पष्ट आक्रामकता” बताया। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले न केवल सऊदी अरब बल्कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के अन्य देशों और कई अरब-इस्लामिक राष्ट्रों को भी निशाना बना रहे हैं। सऊदी अरब का कहना है कि ईरान ने उसकी संप्रभुता, नागरिकों, आर्थिक हितों और राजनयिक परिसरों को निशाना बनाया, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। इस बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने ईरानी दूतावास के सैन्य अटैची, सहायक सैन्य अटैची और तीन अन्य अधिकारियों को निष्कासित करते हुए 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है। सऊदी सरकार ने यह भी कहा कि ईरान की गतिविधियां बीजिंग समझौता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के खिलाफ हैं। रियाद ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए साफ कहा कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।इस घटनाक्रम से मिडिल ईस्ट में पहले से जारी संकट और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।