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चुनाव में डर का माहौल नहीं बनने देंगे, जिम्मेदारों पर सख्त एक्शन होगा: ज्ञानेश कुमार

कोलकाता मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर कोलकाता में आगामी पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए तैयारियों की विस्तृत और व्यापक समीक्षा की। इसके बाद मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस कर एसआईआर सहित चुनाव से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, "भारत निर्वाचन आयोग पश्चिम बंगाल के सभी मतदाताओं को आश्वासन दिलाता है कि आगामी चुनाव हिंसा और भय से मुक्त वातावरण में संपन्न होंगे। सभी मतदाता निश्चित रूप से मतदान करने के लिए बाहर आएं।" ज्ञानेश कुमार ने कहा, "मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वोटर लिस्ट लोकतंत्र की आधारशिला है। कोई भी पात्र मतदाता छूटना नहीं चाहिए, लेकिन किसी भी अपात्र व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। हाल ही में 28 फरवरी को पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई, जिसमें कुल 7 करोड़ 8 लाख नाम हैं।" मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया, "गणना प्रपत्र प्राप्त होने के बाद यह पाया गया कि जब पिछली बार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया गया था तो लगभग 4-5 फीसदी मतदाताओं का मिलान 2002 की मतदाता सूचियों से नहीं हो पाया था। इन्हें 'अमान्य मामले' के रूप में वर्गीकृत किया गया। इसके अतिरिक्त लगभग 7-8 फीसदी मतदाताओं ने अपना मिलान स्वयं किया था, लेकिन या तो गलत तरीके से या संदिग्ध त्रुटियों के साथ, जो जानबूझकर या अनजाने में हो सकती हैं।" ज्ञानेश कुमार ने कहा, "चुनाव कर्मचारियों की सख्ती के संबंध में चुनाव आयोग मीडिया के माध्यम से प्रत्येक मतदाता, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को आश्वस्त करना चाहता है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सभी स्तरों पर प्रत्येक अधिकारी चुनाव आयोग के कानूनों, नियमों और निर्देशों के अनुसार कार्य करेगा। यदि कोई लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।" मुख्य चुनाव ने कहा "विचाराधीन नामों के संबंध माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार और पश्चिम बंगाल के मुख्य न्यायाधीश की देखरेख में चल रही है। न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति पहले ही हो चुकी है और वे अनुच्छेद 326 के अनुसार मतदाताओं की पात्रता पर निर्णय ले रहे हैं। जहां तक ​​मतदाता सूची का संबंध है, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और विशेष गहन पुनरीक्षण के आदेशों के अनुसार अंतिम सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की गई थी।" मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, "पिछले दो दिनों में हमने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर की सभी राजनीतिक पार्टियों, मुख्य सचिव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार, सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिदेशक और सभी एसपी ने चुनाव आयोग को आश्वासन दिया है कि पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से, हिंसा और धमकी से मुक्त होकर संपन्न किए जाएंगे।"

ईरान का बड़ा बयान: होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई रोकने की धमकी, IRGC ने दी चेतावनी

तेहरान ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के जनरल ने कहा है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, ईरानी सेना होर्मुज स्ट्रेट से अमेरिका और इजरायल के सहयोगी देशों को एक लीटर तेल भी निर्यात नहीं करने देगी। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल अली मोहम्मद नैनी ने कहा, “ईरानी सेना… अगली सूचना तक इस इलाके से दुश्मन देश और उसके सहयोगियों को एक लीटर तेल भी निर्यात नहीं करने देगी। तेल और गैस की कीमतों को कम करने और कंट्रोल करने की उनकी कोशिश सफल नहीं होगी।" जनरल ने कहा कि दुनिया में तेल की कीमतों पर कंट्रोल अब ईरान के हाथ में है और अमेरिका को इंतजार करना पड़ेगा कि ईरान आगे क्या कदम उठाता है। अधिकारी के मुताबिक एनर्जी मार्केट पहले से ही अस्थिर हो चुका है और ईरान तब तक लड़ाई जारी रखेगा जब तक अमेरिका की ओर से हार का ऐलान नहीं हो जाता। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का बहुत अहम समुद्री रास्ता है। हर साल दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। जनरल के मुताबिक, “अमेरिका का दावा है कि कमर्शियल और मिलिट्री जहाज इस इलाके में मौजूद हैं और होर्मुज स्ट्रेट से आसानी से गुजर रहे हैं, जबकि अमेरिकी नौसेना के जहाज, विमान और सभी फाइटर जेट ईरान की ताकतवर मिसाइलों और ड्रोन से सुरक्षित रहने के लिए 1,000 किलोमीटर से ज्यादा पीछे हट गए हैं।” ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने ये भी दावा किया है कि उसने इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भी निशाने पर लिया है। आईआरजीसी के जनसंपर्क कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इरबिल में हरिर एयर बेस पर अमेरिकी सेना के मुख्यालय को लक्ष्य बनाकर मिसाइलें दागी गईं। इस सैन्य ठिकाने पर कुल पांच मिसाइलें दागी गईं। हालांकि इस हमले से हुए नुकसान या हताहतों के बारे में अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

स्पीकर Om Birla के खिलाफ लोकसभा में प्रस्ताव, सदन में 10 घंटे होगी बहस

नई दिल्ली लोकसभा में मंगलवार को उस समय जोरदार बहस छिड़ गई जब कांग्रेस ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के पेश होते ही सदन में प्रक्रिया और नियमों को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली और आखिरकार सदन ने इस प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दे दी। इस मुद्दे पर 10 घंटे की बहस तय की गई। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से यह प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान 'पक्षपातपूर्ण रवैया' अपनाया है। विपक्ष का कहना है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जिसे लेकर असंतोष बढ़ा। प्रस्ताव पेश होने के बाद सदन में एक नया विवाद खड़ा हो गया। सवाल यह उठा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन है, तब सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा। उस समय सदन की कार्यवाही जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में चल रही थी। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी और तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। ओवैसी ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव चर्चा में हो, तो स्पीकर या उनके द्वारा नामित व्यक्ति को कार्यवाही नहीं चलानी चाहिए। ओवैसी ने यह भी कहा कि अभी तक लोकसभा में उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) की नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में जो सदस्य चेयर पर बैठे हैं, उन्हें स्पीकर की स्वीकृति से ही नामित किया गया है। इसलिए उनके द्वारा इस प्रस्ताव पर चर्चा कराना उचित नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि बहस शुरू होने से पहले सदन को इस बात पर सहमति बनानी चाहिए कि कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा। इस पर भाजपा की ओर से जवाब भी सामने आया। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर के समान अधिकारों का प्रयोग करते हुए कार्यवाही चला सकता है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की बात का समर्थन किया और कहा कि नियम स्पष्ट रूप से चेयर को यह अधिकार देते हैं। वहीं, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तक डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति नहीं की गई है, जो एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि बहस आगे बढ़ाने से पहले सदन को इस बात पर सहमति बनानी चाहिए कि कार्यवाही कौन संचालित करेगा। इस दौरान भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जो सदस्य चेयर पर बैठा है, उसे सदन की कार्यवाही संचालित करने का पूरा अधिकार है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए चेयर को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि स्पीकर ओम बिरला ने खुद इस बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता न करने का फैसला लिया है। जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर ने नोटिस में मौजूद शुरुआती तकनीकी गलतियों को ठीक करने में उदारता दिखाई और आवश्यक सुधारों की सूचना खुद जारी की। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सदन में पेश किया। अंत में यह तय हुआ कि लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 10 घंटे तक चर्चा होगी।

देश में LPG किल्लत पर एक्शन मोड में सरकार, PM मोदी ने बुलाई अहम बैठक

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ही पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद थे। ईरान में इजरायल और अमेरिका के हमलों के चलते हालात बिगड़ गए हैं। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई को बाधित किया है और इससे भारत समेत कई एशियाई देशों में गैस और तेल की किल्लत हो गई है। देश में LPG सिलेंडरों की किल्लत चल रही है और सरकार ने उसके प्रबंधन को लेकर एस्मा लागू कर दिया है। इससे सरकार ने यह तय करने की कोशिश की है कि घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त एलपीजी मिलती रहे। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस मसले पर एक हाईलेवल मीटिंग की है। इस बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ही पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद थे। ईरान में इजरायल और अमेरिका के हमलों के चलते हालात बिगड़ गए हैं। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई को बाधित किया है और इससे भारत समेत कई एशियाई देशों में गैस और तेल की किल्लत हो गई है। फिलहाल केंद्र सरकार का फोकस इस बात पर है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की सप्लाई कम ना होने पाए। इसकी एवज में औद्योगिक यूनिट्स को सप्लाई कम कर दी गई है। इसके अलावा कॉमर्शियल सिलेंडर भी कम दिए जा रहे हैं। होटल इंडस्ट्री ने इस पर आपत्ति भी जताई है कि क्योंकि उनका कॉमर्शियल सिलेंडरों से ही होता है। ऐसी स्थिति में होटल इंडस्ट्री के कामकाज के ही ठप होने का खतरा है। अगले कुछ दिन देश में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई के लिहाज से अहम हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही भारत को आने वाले ज्यादातर तेल और गैस सप्लाई होता है। ऐसी स्थिति में संकट गहरा गया है। भारत अपनी जरूरत का कुल 62 फीसदी एलपीजी आयात करता है। यही नहीं तेल के मामले में यह निर्भरता 85 फीसदी के करीब है। ऐसी स्थिति में ज्यादा दिनों तक यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहा तो फिर संकट बढ़ेगा। देश में अब बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए लोगों की निर्भरता एलपीजी पर बढ़ गई है। दो दशक पुरानी स्थिति नहीं है। ऐसे में गैस की किल्लत देश में बड़े गुस्से का कारण भी बन सकती है। यही वजह है कि सरकार ने इसे प्राथमिकता से लिया है और एस्मा लागू करके एलपीजी की सप्लाई का वर्गीकरण कर दिया है। गैस की जरूरत का 85 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है भारत अपनी गैस की जरूरत का करीब 85 फीसदी हिस्सा फिलहाल सऊदी अरब से खरीद रहा है। इसका आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही होता है। अभी यह बंद है। ऐसे में संकट गहरा है और सरकार फिलहाल सप्लाई के दूसरे रास्ते तलाश रही है। भारत में हर साल करीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। बता दें कि देश में कुल एलपीजी की खपत में 87 फीसदी हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं का ही है। इसके बाद 13 फीसदी हिस्सा उद्योग, होटल और रेस्तरां आदि में इस्तेमाल होता है।  

US-South Korea सैन्य अभ्यास पर उत्तर कोरिया की चेतावनी, किम जोंग-उन की बहन ने कहा—परिणाम होंगे खतरनाक

 उत्तर कोरिया कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। उत्तर कोरिया के सनकी किंग किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा को चुनौती देने वाला कोई भी कदम “भयानक परिणाम” ला सकता है। यह बयान उस समय आया जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने सोमवार से 11 दिन तक चलने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास Freedom Shield की शुरुआत की है।  इस अभ्यास में हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं और इसका उद्देश्य बदलते युद्ध परिदृश्यों के बीच दोनों देशों की संयुक्त सैन्य क्षमता का परीक्षण करना है।किम यो जोंग ने बिना सीधे ईरान का नाम लिए कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं और वैश्विक सुरक्षा ढांचा तेजी से कमजोर हो रहा है, अमेरिका और दक्षिण कोरिया का यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया बाहरी खतरों के खिलाफ अपनी सैन्य शक्ति और युद्ध निरोधक क्षमता को लगातार मजबूत करता रहेगा। किम यो जोंग ने उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि देश अपने दुश्मनों को बार-बार अपनी “घातक युद्ध निरोधक क्षमता” का एहसास कराता रहेगा। प्योंगयांग लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को संभावित हमले की तैयारी बताता रहा है और अक्सर इन्हें अपने हथियार परीक्षणों को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल करता है। हालांकि अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि यह अभ्यास पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य केवल संभावित खतरों के खिलाफ संयुक्त तैयारी को मजबूत करना है। aइसी अभ्यास के साथ Warrior Shield नामक फील्ड-ट्रेनिंग कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की भी आलोचना की थी और इसे “फर्जी शांति के बहाने किया गया अवैध आक्रामक कृत्य” बताया था। विश्लेषकों के अनुसार उत्तर कोरिया और ईरान उन कुछ देशों में शामिल हैं जिन्होंने यूक्रेन पर रूसी हमले का समर्थन किया है और दोनों पर रूस को सैन्य उपकरण देने के आरोप भी लगते रहे हैं।

दुबई एयरपोर्ट पर खतरे की घंटी: ईरान के हमले के बीच सायरन से दहशत

दुबई पश्चिम एशिया में तनाव एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसकी लपटें अब दुबई तक पहुंच गई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दुबई के आसमान में मिसाइलें और एयरपोर्ट से धुआं उठता देखा गया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने न केवल खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और पर्यटन के प्रमुख केंद्र दुबई में भी डर का माहौल पैदा कर दिया है। दुबई एयरपोर्ट पर हमले का असर ईरान की जवाबी कार्रवाई के दौरान दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) को निशाना बनाया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट के कॉनकोर्स एरिया में मिसाइल या ड्रोन के गिरने से मामूली क्षति हुई है। घटना के तुरंत बाद वहां धुआं उठते देखा गया, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, दुबई मीडिया ऑफिस ने स्पष्ट किया है कि स्थिति को तुरंत काबू में कर लिया गया। इस हमले में चार लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।  बुर्ज अल अरब के पास दुर्घटना दुबई के आसमान में सक्रिय डिफेंस सिस्टम ने एक संदिग्ध ड्रोन को समय रहते इंटरसेप्ट कर लिया। हालांकि, नष्ट किए गए ड्रोन का जलता हुआ मलबा विश्व प्रसिद्ध 'बुर्ज अल अरब' होटल की बाहरी दीवार पर जा गिरा। इससे होटल के एक हिस्से में हल्की आग लग गई, जिसे दमकल विभाग ने तुरंत बुझा दिया। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में मलबे का गिरना सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा गया है। सुरक्षा एजेंसियां और हाई अलर्ट इस हमले के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह हाई अलर्ट पर हैं। पूरे शहर और संवेदनशील ठिकानों के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। एयरपोर्ट संचालन को जल्द से जल्द सामान्य करने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका ज्यादा असर न पड़े। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। फिलहाल, सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।

क्रिकेट ट्रॉफी मंदिर पहुंची तो भड़की राजनीति, TMC सांसद का विवादित बयान; कांग्रेस भी हमलावर

नई दिल्ली भारत की टी20 विश्व कप जीत पर जश्न के बाद अब विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा है कि ट्रॉफी को मंदिर ले जाना हमारी परंपरा नहीं है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद ने भी ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर नाराजगी जाहिर की थी और कहा था कि भारतीय टीम पर शर्म आती है। रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को बड़े अंतर से हराया था। कांग्रेस सांसद अनवर ने कहा, 'कीर्ति आजाद का कहना बिल्कुल सही है। मैं उनकी बातों से पूर्ण रूप से सहमत हूं। यह हमारे यहां परंपरा नहीं रही कि हम ट्रॉफी को लेकर मंदिर और मस्जिद और कहीं दूसरी जगह जाएं। तो यह एक गलत परंपरा की शुरुआत है।' कीर्ति आजाद का बयान टीएमसी सांसद आजाद ने लिखा था, 'टीम इंडिया पर शर्म आती है! जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के खिलाड़ी शामिल थे। हम उस ट्रॉफी को अपनी जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि, अपने भारत और हिंदुस्तान लेकर आए थे। फिर अब भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को किसी एक खास जगह पर ही क्यों घुमाया जा रहा है? इसे मस्जिद क्यों नहीं ले जाया गया? चर्च क्यों नहीं ले जाया गया? गुरुद्वारे क्यों नहीं ले जाया गया?' उन्होंने लिखा, 'यह टीम पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती है, यह सूर्य कुमार यादव या जय शाह के परिवार की निजी टीम नहीं है! सिराज इसे कभी किसी मस्जिद नहीं ले गए। संजू (सैमसन) इसे कभी किसी चर्च नहीं ले गए, जबकि संजू की अहम भूमिका थी और वह 'मैन ऑफ द टूर्नामेंट' रहे थे। यह ट्रॉफी हर धर्म के 140 करोड़ भारतीयों की है, यह किसी एक धर्म की जीत का जश्न नहीं है!' भारत की जीत भारत ने रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर यह ट्रॉफी अपने नाम की थी। वह टी20 विश्व कप में खिताब का सफल बचाव करने वाली पहली टीम है। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने तीसरी बार यह टूर्नामेंट जीता। यह कारनामा करने वाली वह पहली टीम बन गई है। इससे पहले टीम ने महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में 2007 में और रोहित शर्मा की कप्तानी में 2024 में जीत दर्ज की थी। अब BCCI यानी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने भारतीय टीम के लिए 131 करोड रुपए के पुरस्कार की घोषणा की। यह राशि 2024 में रोहित शर्मा की अगुवाई वाली चैंपियन टीम को दिए गए 125 करोड़ रुपये से छह करोड़ रुपये अधिक है।

देश में गैस संकट: LPG की कमी के बीच सरकार ने लगाया एस्मा, प्राथमिकता सूची जारी

 नई दिल्ली देश में एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई में कमी आ गई है। ईरान में चल रही जंग के चलते ऐसी स्थिति पैदा हुई है। इससे निपटने के लिए मंगलवार को सरकार ने एस्मा लागू कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि घरेलू गैस सिलेंडरों की कमी ना रहे। इसके अलावा रिफाइनरीज को केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ा दें। इसके अलावा कॉर्मशियल सिलेंडरों की बजाय घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई में इजाफा किया जाए। सरकार ने अपने आदेश में बताया है कि किन सेक्टरों को 100 फीसदी सप्लाई जारी रहेगी और उसमें किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। आदेश के अनुसार सरकार ने कुछ सेक्टरों को प्राथमिकता में रखने को कहा है। इन्हें 100 फीसदी सप्लाई जारी रहेगी और किसी भी तरह की कटौती नहीं की जाएगी। इन सेक्टरों में पीएनजी, सीएनजी, एलपीजी और अन्य पाइपलाइन सेवाएं शामिल हैं। आदेश में कहा गया है कि फर्टिलाइजर प्लांट्स को उनको होती रही सप्लाई का 70 फीसदी हिस्सा दिया जाए। इसके अलावा चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक संस्थानों को भी उनके कोटे की 80 फीसदी तक सप्लाई जारी रखने का आदेश दिया गया है। गैस डिस्ट्रिब्यूशन करने वाली कंपनियों से कहा गया है कि वे कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल जरूरतों के लिए 80 फीसदी तक गैस सप्लाई जारी रखें। इसके अलावा आदेश दिया गया है कि रिफाइनिंग कंपनियां उत्पादन में तेजी लाएं। इसके अलावा एलपीजी की सप्लाई घरेलू सिलेंडरों के इस्तेमाल के लिए पहले की तरह जारी रखने को कहा गया है। सरकार का कहना है कि इस आदेश को सख्ती से लागू किया जाए। उत्पादन से लेकर ट्रांसपोर्ट तक में किसी तरह की कमी नहीं आनी चाहिए। घरेलू गैस सिलेंडरों की बुकिंग पर रहेगा 25 दिन वाला नियम यही नहीं गैस सिलेंडरों की बुकिंग के लिए सरकार ने 25 दिन की तय सीमा भी लागू कर दी है। इसके तहत यदि आपने एक सिलेंडर ले लिया है तो अगले की बुकिंग 25 दिन के बाद ही कर पाएंगे। कुछ अरसे से ऐसी सीमा खत्म हो गई थी, लेकिन इसे लागू कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि कुछ लोग जमाखोरी ना करने लगें। यदि लोगों को ऐसा करने दिया गया तो कालाबाजारी बढ़ सकती है। इसके अलावा अफवाह फैलने के चलते लोग परेशान हो सकते हैं। गौरतलब है कि ईरान में जारी जंग के चलते सप्लाई की कमी देखी जा रही है। हालांकि अमेरिका का कहना है कि अब ईरान में जंग आखिरी चरण में है। ऐसी स्थिति में माना जा रहा है कि जल्दी ही सप्लाई चेन पहले वाली स्थिति में आ सकती है।  

CBSE 12वीं मैथ्स पेपर में गड़बड़ी? QR कोड स्कैन करने पर निकला इंग्लिश गाना, छात्र हैरान

नई दिल्ली सीबीएसई बोर्ड परीक्षा का प्रश्न पत्र एक बार फिर विवादों में आ गया है। लेकिन इस बार मामला कठिनता के स्तर का नहीं, बल्कि कुछ अलग है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार को 12वीं कक्षा की गणित विषय की परीक्षा आयोजित की थी। पेपर के फौरन बाद छात्रों ने दावा किया कि उनकी गणित की परीक्षा के प्रश्न पत्र के पहले पेज पर छपे क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करने पर यह इंग्लिश गाना खुल रहा था। छात्रों ने कहा कि क्यूआर कोर्ड स्कैन करने पर ब्रिटिश गायक रिक एस्टली (Rick Astley) के 1987 के प्रसिद्ध गीत “Never Gonna Give You Up” के यूट्यूब वीडियो पर ले जा रहा है। आमतौर पर ये क्यूआर कोड ऑथेंटिकेशन और सिक्योरिटी वेरिफिकेशन के लिए होते हैं इसलिए आधिकारिक दस्तावेज पर ऐसी त्रुटि ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आपको बता दें कि इस बार सीबीएसई 10वीं का गणित का पेपर अपनी अत्यधिक कठिनता के स्तर को लेकर विवादों में आया था। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह गड़बड़ी सभी प्रश्नपत्रों में थी या नहीं, लेकिन इस घटना के वीडियो और स्क्रीनशॉट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। एक के बाद एक छात्रों ने अपने अनुभव साझा करना शुरू कर दिया है, कुछ ने तो अधिकारियों से सुरक्षा में संभावित चूक को लेकर सवाल भी पूछे। सीबीएसई पेपर में इस कथित चूक को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मीम्स की बाढ़ आ गई है। सीबीएसई पर तंज कसते हुए एक यूजर ने लिखा, "सीबीएसई ने सच में क्लास 12 के मैथ के पेपर में सिर्फ हमें 'रिकरोल' करने के लिए क्यूआर कोड डाल दिया… मैं वहां बैठकर इंटीग्रल्स हल करने की कोशिश कर रहा हूं, और बोर्ड 'Never Gonna Give You Up' बजा रहा है। 2026 में सच में एग्जामिनर्स ने हमें ट्रोल कर दिया। कुछ लोगों ने तो अधिकारियों से यह वेरिफाई करने के लिए सवाल पूछना भी शुरू कर दिया है कि क्या यह खबर सच है। "@cbseindia29, कई वायरल वीडियो और रिपोर्ट दावा कर रही हैं कि आपने 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स को उनके मैथ्स के पेपर में "rickrolled" किया है। क्या आप कन्फर्म कर सकते हैं कि क्या सच में ऐसा हुआ है? इतने सारे वीडियो फेक नहीं हो सकते, क्या आप समझा सकते हैं?'यूजर अपने ट्वीट में शिक्षा मंत्रालय, सीबीएसई, और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को टैग कर रहे हैं। अभी तक CBSE ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया है। पेपर सेट्स पर QR कोड क्यों लगाए जाते हैं? पेपर सेट्स पर QR कोड लगाना एक ऑथेंटिकेशन और लीक प्रूफ उपाय है। चूंकि हर QR कोड पेपर सेट के लिए यूनिक होता है, जो यह वेरिफाई करने में मदद करता है कि पेपर ऑफिशियल है या नहीं, इसलिए कई स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को संभावित लीक का डर सता रहा है, क्योंकि कोड स्टूडेंट्स को ऑफिशियल निर्देशों या संबंधित जानकारी के बजाय एक म्यूजिक वीडियो पर रीडायरेक्ट कर रहा है। इसके अलावा क्यूआर ट्रैकिंग, रिकॉर्ड रखने और जालसाजी को रोकने में मदद करता है। स्टूडेंट्स लगातार अधिकारियों को टैग कर रहे हैं और जांच की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना ​​है कि पेपर के साथ छेड़छाड़ की गई थी और इस पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

वैक्सीन साइड इफेक्ट्स पर पीड़ितों को मिले मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया निर्देश

नई दिल्ली मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि कोविड 19 वैक्सीन के बाद हुए कथित दुष्प्रभावों के चलते मृतकों के परिवार को मुआवजा दिया जाए। Covid 19 वैक्सीन के दुष्परिणामों के कारण कथित मौतों के मामले में याचिका सुनवाई हुई। याचिका के जरिए मृतकों के लिए मुआवजे की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने टीकाकरण के बाद दुष्प्रभावों की जांच के लिए एक्सपर्ट पैनल के गठन से इनकार कर दिया है। साथ ही शीर्ष न्यायालय ने सरकार को मुआवजा नीति बनाने और टीकाकरण के दुष्प्रभावों से जुड़े आंकड़े समय-समय पर सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि कोविड 19 वैक्सीन के बाद हुए कथित दुष्प्रभावों के चलते मृतकों के परिवार को मुआवजा दिया जाए। अब अदालत ने इन याचिकाओं का निपटारा किया और कहा है कि टीकाकरण के बाद होने वाले दुष्प्रभावों की निगरानी के लिए मौजूद व्यवस्था जारी रहेगी। कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था को देखते हुए टीकाकरण के बाद दुष्प्रभावों की जांच के लिए कोर्ट की तरफ से अलग समिति बनाने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति कानून का सहारा नहीं ले सकता है। कोर्ट ने कहा कि मुआवजा नीति बनाने का मतलब यह नहीं माना जाएगा कि भारत सरकार या किसी अन्य अथॉरिटी ने अपनी गलती या कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है। सरकार को दिए निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि कोविड 19 वैक्सीन लगवाने के बाद गंभीर दुष्परिणामों के लिए मुआवजा नीति बनाई जाए। साथ ही कहा कि दुष्परिणामों के मामलों को देखने के लिए मौजूदा व्यवस्था ही जारी रहेगी। साथ ही समय समय पर इससे जुड़ा जरूरी डेटा सार्वजनिक किया जा सकता है। याचिका दरअसल, यह याचिका कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के चलते जान गंवाने वाली दो लड़कियों के पैरेंट्स की तरफ से दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि मौतों के मामलों की स्वतंत्र जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए। साथ ही ऑटोप्सी और जांच की रिपोर्ट्स को जारी किया जाए। याचिका में कहा गया था कि बच्चियों के माता-पिता को आर्थिक मुआवजा दिया जाए।