samacharsecretary.com

US में दवाइयां, डायमंड्स और मसाले पर 0% टैरिफ, पीयूष गोयल ने बताया ट्रेड डील का महत्व

 नई दिल्‍ली भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्‍यापार समझौता का फ्रेमवर्क जारी होने के बाद वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री ने शनिवार को विस्‍तार से उन चीजों के बारे में जानकारी दी है, जिनपर 0  टैरिफ अमेरिका ने लगाया है. उन्‍होंने कहा कि भारत ने अमेरिका को किसी भी एग्री और डेयरी प्रोडक्‍ट्स पर छूट नहीं दी है.  उन्‍होने कहा कि अमेरिका बहुत सी चीजों पर भारत के लिए '0 ' ड्यूटी लगा रहा है, जिसमें जेम्‍स एंड ज्‍वैलरी, एग्रीकल्‍चर चीजें,  दवाइंया और अन्‍य वस्‍तुएं शामिल हैं.  0  फीसदी टैरिफ वाली वस्‍तुएं     जेम्‍स एंड डायमंड, फार्मा , स्‍मार्टफोन्‍स, स्‍पाइसेज, चाय कॉफी, कोकोनट, कोकोनोट ऑयल, वेजिटेबल ऑयल, केस्‍यू नट्स, मसाले, कई फल और सब्जियां     केला, आम, चीनी , पाइनएप्‍पल, मसरूम,  वेजिटेबल के रूट्स, कोका और कोका से बने वस्‍तु,  प्रोसेस फ्यूटस जैसे अमरूद का जेम्‍स      एयरक्रॉफॅ्ट के पार्ट्स, मशीनरी पार्ट,  फार्मा की वस्‍तुएं, जेम्‍स एंड डायमंड्स,   कॉइंस प्‍लैटिनम , इसेशियल ऑयल, एल्‍युमिनियम  पार्ट , जिंक ऑक्‍साइड, मिनिरल्‍स और नेचुरल चीजें, नेचुरल रबड आदि कृषि और डेयरी पर छूट नहीं  उद्योग मंत्री ने कहा कि हमने अमेरिका को डेयरी के किसी भी प्रोडक्‍ट्स पर छूट नहीं दी है. साथ ही एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर में भी छूट नहीं दी गई हैं, जो हमारे किसानों के हितों को प्रभावित करतीं. उन्‍होंने कहा कि मीट , चीनी, पॉल्‍ट्री, डेयरी, सोयाबीन , मक्‍का, चावल, गेंहूं , चीनी, ज्‍वार, बाजरा, रागी,  अमरनाथ , फल, ग्रीन टी, कोका,  चना , एनीमल सीड्स प्रोडक्‍ट्स, नॉन-एल्‍कोहलिक चीजें,  इथेनॉल, तंबाकू इन सभी वस्‍तुओं पर किसी प्रकार की रियायत नहीं दी गई है.  30 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट खुला पीयूष गोयल ने कहा कि 30 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट कम टैरिफ पर खुल गया है. किसानों और डेयरी को संरक्षित किया गया है. यह फ्रेमवर्क कल देर रात फाइनाइज हुआ. आज देश के कोने-कोने में इसका स्‍वागत हुआ है.  यह ज्‍वाइंट स्‍टेटमेंट हैं हर भारतीय को अवसर देता है. अब अमेरिका 50 प्रतिशत से घटाकर 18  फीसदी टैरिफ कर रहा है. यह पड़ोसी देशों से कम टैरिफ है. यह भारत के लिए आने वाले दिनों में ज्‍यादा लाभ पहुंचाएगा. उहोंने कहा कि हमारे कम्‍पटीटर देश जैसे चीन पर 35, वियतनाम पर 20 फीसदी और इंडोनेशिया पर 19 फीसदी टैरिफ है.   आज का दिन काफी खास पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के दौरान कहा कि आज 2047 तक विकसित भारत बनने की भारत की यात्रा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है. भविष्य को ध्यान में रखते हुए, और दोनों देशों के संबंधों, राजनयिक संबंधों और उनके नेताओं के बीच दोस्ती को देखते हुए, फरवरी 2025 में द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू हुई. इसका मकसद भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सालाना 500 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हासिल करना था. उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आज का दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. पूरे देश में खुशी की लहर है.  देश के हर सेक्टर में भविष्य को लेकर बहुत उत्साह है. ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में नए अवसर खुलेंगे और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, लगभग तीस ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला संयुक्त राज्य अमेरिका, अब हमारे निर्यातकों के लिए सबसे पसंदीदा राष्ट्र का दर्जा देगा. 

ईरान की शर्तों पर होगी अमेरिका से बातचीत, खामनेई तय करेंगे फैसले का समय और स्थान

मस्कट: मिडिल ईस्ट में जंग और बातचीत एक बार फिर आमने-सामने खड़ी नजर आ रही है. अमेरिका और ईरान के बीच महीनों की तल्खी, धमकियों और सैन्य तनाव के बाद आखिरकार ओमान में बातचीत हुई. यह वही दौर है, जब बीते साल अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे और पूरा इलाका युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया था. खाड़ी देश ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हुई. दोनों देश आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी संदेशवाहक की भूमिका में रहे. यही मॉडल पहले भी ईरान-अमेरिका बातचीत में अपनाया जाता रहा है. हालांकि इस बातचीत के ठीक बाद अमेरिका ने नए प्रतिबंध ठोंक दिए. बातचीत को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके बाद दोनों पक्ष आगे और बातचीत करने पर सहमत हुए हैं. इसे फिलहाल एक ‘सकारात्मक लेकिन सतर्क शुरुआत’ माना जा रहा है. कौन-कौन था बातचीत में शामिल? ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए, जबकि अमेरिका की तरफ से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर मौजूद रहे. ओमान की सरकारी तस्वीरों में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर की मौजूदगी भी दिखी, जिसने इस बातचीत के सैन्य महत्व को और बढ़ा दिया. बातचीत से पहले धमकी दी गईं बातचीत से ठीक पहले माहौल बेहद गर्म था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुली चेतावनी दे चुके थे कि अगर ईरान ने परमाणु समझौते पर दस्तखत नहीं किए या प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है. वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की ओर से भी सख्त तेवर दिखाए गए थे. अराघची ने बातचीत से पहले साफ कहा कि ईरान ‘खुली आंखों से कूटनीति’ में उतरा है और उसे पिछले साल की घटनाएं अच्छे से याद हैं. अपनी शर्तों पर बातचीत कर रहा ईरान ईरान ने ओमान के जरिए अमेरिका को एक शुरुआती प्रस्ताव सौंपा, जिसे मौजूदा हालात संभालने की कोशिश बताया गया. अमेरिका की प्रतिक्रिया इस प्रस्ताव पर अगली बातचीत में ईरान को दी जानी है. ईरान ने साफ कर दिया कि वह सिर्फ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बात करना चाहता है. बैलिस्टिक मिसाइल, क्षेत्रीय संगठन और घरेलू विरोध जैसे मुद्दे उसके लिए बातचीत के एजेंडे में नहीं हैं. इसके उलट अमेरिका चाहता है कि मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और मानवाधिकार जैसे मुद्दे भी शामिल हों. हालांकि ईरान किसी भी कीमत पर झुक नहीं रहा है. अमेरिका ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध दिलचस्प बात यह रही कि बातचीत खत्म होते ही अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए. ईरानी तेल ढोने वाले 14 जहाजों और कई कंपनियों को निशाना बनाया गया. अमेरिका का आरोप है कि ईरान तेल से कमाए पैसे का इस्तेमाल दुनिया भर में अस्थिरता फैलाने और अपने ही नागरिकों पर दमन के लिए करता है. वहीं व्हाइट हाउस ने जानकारी दी कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी शासन के खिलाफ एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं, जिसमें उन देशों पर टैरिफ लगाने की बात कही गई है जो ईरान से सामान या सेवाएं खरीदना जारी रखते हैं.

भागवत का बयान: ‘हिंदू शब्द विदेशी मूल का, रामायण में भारत में नहीं है उल्लेख’

 मुंबई  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे हो गए हैं. इसके उपलक्ष्य में आज मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया है. इस आयोजन का नाम ‘मुंबई व्याख्यानमाला’ है. उन्होंने इस संबोधन में साफ किया कि संघ कोई पॉलिटिकल पार्टी नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लोग पॉलिटिक्स में हैं. उन्होंने संघ की परिभाषा, संघ के कार्य, हिंदू शब्द की उत्पति और सभी धर्मों के भाव के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि क्या भारतीय होना, केवल नागरिक होना नहीं है, यह एक स्वभाव का होना है. ये जोड़ने वाला स्वभाव है, जिसे हमें अनुशासनबद्ध हो कर बड़ा करना होगा.     मोहन भागवत ने कहा कि संघ ने पहले से तय किया कि सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है. जिसको आप RSS कहते हो, आप कैसे कहते हो पता नहीं. बहुत से लोग कहते हैं कि नरेंद्र भाई प्रधानमंत्री हैं. वे RSS के प्रधानमंत्री हैं. तो बता दें कि उनकी एक पॉलिटिकल पार्टी है, बीजेपी है, जो अलग है. उसमें बहुत स्वयंसेवक है, प्रभावी भी है.     संघ किसी दूसरी संस्था की प्रतिस्पर्धा में नहीं निकला है, न ही किसी रिएक्शन या विरोध में निकला है. हमारा काम बिना किसी के विरोध किए है. संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए. संघ को पावर नहीं चाहिए. जितने भी भले काम देश में हो रहे हैं, वे ठीक से हो जाएं. उन्हें करने के लिए संघ है. बहुत कठिन परिस्थितियों में भी डॉ. हेडगेवार ने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा- एक, अपनी पढ़ाई में हमेशा फ़र्स्ट क्लास आना; दूसरा, देश के लिए जो कुछ चल रहा था उसमें सक्रिय भाग लेना. ये उनके जीवन के स्थायी कार्य थे. संघ का काम अनोखा है, पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं है. अब तो यह प्रत्यक्ष अनुभव हो रहा है.     भागवत ने बताया– संघ में भारतीय रागदरबारी के आधार पर घोष की धुनें बजती है. व्यक्तिगत गीत होते हैं, सांगिक गीत होते हैं. लेकिन संघ कोई अखिल भारतीय संगीत शाला नहीं है. संघ के स्वयंसेवक राजनीति में भी है. लेकिन संघ पॉलिटिकल पार्टी नहीं है. कई बातें ऊपर से देखेंगे तो गलतफहमी होगी. और इसलिए संघ को जानना है तो संघ का अनुभव लेना है. संघ को अंदर से देखना है. चीनी कैसे, इस पर व्याख्यानमाला हो सकती है. प्रश्नोत्तर भी हो सकते हैं. लेकिन, एक चम्मच चीनी खा लेंगे तो इस सब की आवश्यकता ही नहीं है. परंतु ऐसा कुछ खाना है तो कम से कम वो ठीक है. उसकी परीक्षा करने में कोई खतरा नहीं है. इतना तो पता होना चाहिए. इसलिए फिर एक बार 100 साल के बाद हम आपको बता रहे हैं.     ये संघ क्या है? क्योंकि, संघ का जो काम है, वो संघ के लिए नहीं है, वो पूरे देश के लिए है. भारतवर्ष के लिए। संघ क्या है जानना है तो पहले संघ क्या नहीं है ये जानना चाहिए. संघ किसी दूसरे संगठन की कंपटीशन में निकला नहीं और नहीं है. संघ किसी एक विशिष्ट परिस्थिति की रिएक्शन में प्रतिक्रिया में नहीं चला है. संघ किसी के विरोध में नहीं चला है. हमारा काम सर्वेषाम अविरोधेन बिना किसी का विरोध किए करने का काम है, चलने वाला काम है. संघ को पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए. संघ को पॉवर नहीं चाहिए.     मोहन भागवत ने कहा कि संघ का काम एक अनोखा काम हैं. पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं हैं. संघ को देखने के लिए देश विदेश से लोग आते हैं. देश के गतिविधियों के केंद्र में संघ का नाम आता हैं, इसलिए वो देखने आते हैं. कोई भी इसे देखने के बाद एक प्रश्न पूछता हैं. हमारे जवान पीढ़ी में ऐसा कुछ करने की इच्छा हैं , ये पद्यति आप हमको सीखा सकते है क्या. संघ को ऊपर से और दूर से देखेंगे तो भी गलतफहमी होती हैं. संघ के स्वयंसेवकक रूट मार्च करते हैं, लेकिन संघ पैरामिलिटरी आर्गेनाइजेशन नहीं हैं. संघ के स्वयंसेवक राजनीती में भी हैं, लेकिन संघ राजनितिक पार्टी नहीं हैं. इसलिए संघ को जानना है, तो संघ को अंदर से आ कर देखना होगा. संघ का काम पूरे देश के लिए हैं. संघ किसी दूसरे संगठन के कंपटीशन में निकला नहीं हैं. संघ किसी के विरोध में नहीं चला हैं. संघ को पॉपुलरीटी, पावर नहीं चाहिए.     मोहन भागवत ने भाषण में कहा, ‘RSS न तो कोई पैरामिलिट्री संगठन है और न ही कोई पॉलिटिकल पार्टी. संघ से जुड़े लोग भले ही पॉलिटिक्स में एक्टिव हों, लेकिन संगठन खुद पॉलिटिकल नहीं है. यह कोई रिएक्शनरी संगठन भी नहीं है. संघ किसी के खिलाफ नहीं है. संघ को पब्लिसिटी, पावर या पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए.’     संघ के कार्यक्रम को आप यहां देख सकते हैं- इस कार्यक्रम में साधु-संत के साथ-साथ कई गणमान्य जुटे हुए हैं. आयोजन की शुरुआत वंदे मातरम के गायन के साथ हुई. क्यों अहम है आज का भाषण? दिल्ली में दिए गए उनके हालिया भाषणों की तर्ज पर, उम्मीद जताई जा रही है कि डॉ. भागवत आज कई ज्वलंत मुद्दों पर बात करेंगे. इसमें हाल ही में हुई बड़ी ट्रेड डील्स (Trade Deals), वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत, आगामी चुनाव और देश के वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक माहौल पर उनकी टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण होगी. क्या भागवत आज के भाषण में कोई बड़ा राजनीतिक संदेश देते हैं? हम उनके भाषण का पूरा प्रसारण नहीं, बल्कि मुख्य अंश (Highlights) और ब्रेकिंग हेडलाइंस अपने दर्शकों के लिए लेकर आएंगे. मुंबई के सियासी और कारोबारी गलियारों में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त चर्चा है.

सुशासन और सुरक्षा का यूपी मॉडल देश के लिए मिसाल’: पुष्कर सिंह धामी

सुशासन व सुरक्षा का यूपी मॉडल देश के लिए उदाहरण: पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने खुलकर प्रशंसा की यूपी के सीएम की, कहा- योगी आदित्यनाथ साधना से तपे संन्यासी, उनका जीवन युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा गांव की मिट्टी में पले-बढ़े योगी आदित्यनाथ ने साधारण से असाधारण बनने की यात्रा तय की यमकेश्वर/पौड़ी गढ़वाल  पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर स्थित इंटर कॉलेज के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खुले मन से सराहना करते हुए उन्हें सनातन संस्कृति का रक्षक, सुशासन का प्रतीक और प्रेरणास्रोत बताया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के लिए यह सौभाग्य का विषय है कि योगी आदित्यनाथ का सान्निध्य प्रदेश को बार-बार प्राप्त हो रहा है। वह इसी क्षेत्र की मिट्टी से निकले हैं और उनका इस पूरे अंचल से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। यही कारण है कि वह उत्तराखंड को कभी भूलते नहीं और समय-समय पर यहां के शिक्षा संस्थानों, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूती देने के लिए सहयोग करते रहे हैं। साधारण राजनेता नहीं, साधना से तपे संन्यासी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि साधना से तपे संन्यासी हैं। उनके जीवन में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। समाज में योगी आदित्यनाथ के प्रति जो सम्मान है, वह उनके व्यक्तित्व, आचरण और कार्यशैली का परिणाम है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिस प्रकार सुशासन स्थापित हुआ है, वह आज पूरे देश के लिए एक मॉडल बन चुका है। कभी गुंडाराज व माफिया संस्कृति के लिए बदनाम रहा उत्तर प्रदेश आज सुरक्षा, कानून व्यवस्था और विकास के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। गांव की मिट्टी से निकलकर शिखर तक पहुंचने की प्रेरक यात्रा मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह अत्यंत गर्व का विषय है कि योगी आदित्यनाथ ने इसी क्षेत्र में सामान्य परिस्थितियों में शिक्षा ग्रहण की। गांव की मिट्टी में पले-बढ़े योगी जी ने अपने अनुशासन, परिश्रम और दृढ़ संकल्प से असाधारण ऊंचाइयों को छुआ। आज वह देश में सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहे हैं। वह राज्य जिसे कभी बीमारू राज्य के रूप में देखा जाता था, लेकिन योगी जी ने अपनी नीतियों और विजन से उसे आज देश में अग्रिम राज्यों की पंक्ति में पहुंचा दिया है। योगी आदित्यनाथ का जीवन विद्यार्थियों के लिए जीवंत उदाहरण है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, यदि राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण का भाव हो, तो हर चुनौती अवसर में बदल जाती है। उत्तराखंड से योगी का भावनात्मक रिश्ता मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ जहां भी रहे, उन्होंने अपनी जन्मभूमि और देवभूमि उत्तराखंड से नाता कभी नहीं तोड़ा। भारतीय परंपरा में कहा गया है कि “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” और योगी जी इस भाव को अपने जीवन में आत्मसात करते हैं। पिछले वर्षों में योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में कई विद्यालयों का लोकार्पण हुआ, जहां आधुनिक शिक्षा सुविधाएं, कंप्यूटर लैब और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए गए। योगी आदित्यनाथ का जीवन यह सिखाता है कि सादा जीवन, उच्च विचार और कठोर परिश्रम से कोई भी व्यक्ति राष्ट्र सेवा के सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकता है।

कुआलालंपुर में पीएम मोदी बोले- भारत-मलेशिया के रिश्ते मजबूत, ऐसा स्वागत भारत हमेशा याद रखेगा

नई दिल्ली/ कुआलालंपुर   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मलेशिया के दो दिनों के दौरे पर हैं. वह शनिवार को कुआलालंपुर में भारतीय समुदाय को संबोधित कर रहे है. इस दौरान उन्होंने कहा कि मलेशिया में भारत के लिए प्यार और सम्मान है. ऐसा स्वागत भारत याद रखेगा. पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि मैं पिछले साल आसियान समिट में हिस्सा लेने के लिए मलेशिया नहीं आ पाया था. लेकिन मैंने मेरे दोस्त से वादा किया था कि मैं जल्द ही मलेशिया आऊंगा और जैसा वादा किया था मैं यहां हूं. ये 2026 की मेरी पहले विदेश यात्रा है. उन्होंने कहा कि भारत के प्रति मलेशिया का प्यार दिखा है. ऐसा स्वागत भारत याद रखेगा. मलेशिया में भारतीय संगीत और सिनेमा लोकप्रिय है. मलेशिया के 500 स्कूलों में भारतीय भाषाओं की पढ़ाई हो रही है. दोनों देशों के रिश्तों में मजबूती आई है..  पीएम मोदी ने कहा कि आज हम प्रगति में एक दूसरे के साथ हैं. भारत और मलेशिया की साझा विरासत है. मलेशिया में विवेकानंद को काफी लोग मानते हैं. मैंने मन की बात में भी मलेशिया का जिक्र किया था. हम एक दूसरे के साझेदार देश हैं. भारत की सफलता मलेशिया की सफलता है.  यूपीआई मलेशिया में भी जल्द लॉन्च होगा. एक दशक में बड़े सुधार हुए हैं.  भारत और मलेशिया के रिश्तों को नई ऊंचाई देने की तैयारी हो चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दो दिन के दौरे पर मलेशिया रवाना हो चुके हैं. इस यात्रा से पहले पीएम मोदी ने साफ संकेत दिए कि भारत अब मलेशिया के साथ रक्षा, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और नवाचार जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना चाहता है. रवाना होने से पहले जारी बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और मलेशिया के बीच ऐतिहासिक संबंध रहे हैं और बीते कुछ वर्षों में इन रिश्तों में लगातार मजबूती आई है. उन्होंने कहा कि वह मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ विस्तृत बातचीत को लेकर उत्साहित हैं. पीएम मोदी के मुताबिक, दोनों देश अपनी समग्र रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर फोकस करेंगे. इसमें रक्षा और सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को नई दिशा देने पर चर्चा होगी. साथ ही दोनों देश नए क्षेत्रों में सहयोग के रास्ते भी तलाशेंगे. मलेशिया रवाना होने का वीडियो आया सामने पीएम नरेंद्र मोदी का मलेशिया से रवाना होने का वीडियो सामने आया है. इसमें वह हमेशा की तरह एक सफेद कुर्ते में हैं और उनके दाहिने कंधे पर शॉल रखा है. रवाने होने के दौरान उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की. मलेशिया में भव्य स्वागत की तैयारी प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को लेकर मलेशिया में भारतीय समुदाय में जबरदस्त उत्साह है. कुआलालंपुर में उनके स्वागत के लिए एक भव्य सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है जिसका नाम है ‘वेलकम मोदी जी’. इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि यहां 750 से ज्यादा कलाकार एक साथ मंच पर उतरेंगे और सामूहिक नृत्य प्रस्तुति देंगे. आयोजकों का दावा है कि यह आयोजन मलेशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो सकता है. रिकॉर्ड के लिए आवेदन पहले ही किया जा चुका है और रिकॉर्ड्स टीम मौके पर मौजूद रहेगी. 2047 तक बनेगा विकसित भारत : PM Modi पीएम मोदी ने विकसित भारत का सपना एक बार फिर से दोहराते हुए कहा कि ‘भारत के लोग 2047 तक विकसित भारत बनाकर रहेंगे’. उन्होंने कहा इस जर्नी में भारतीय प्रवासी अहम पार्टनर हैं. 'भारत का UPI जल्द आएगा मलेशिया': PM Modi प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया के लोगों से एक बड़ा वादा किया. उन्होंने कहा भारत का UPI जल्द मलेशिया में आएगा. पीएम मोदी ने भारत की बेहतरीन डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को दुनिया के सामने रखा. 'हम टॉप 3 के दरवाजों को खटखटा रहे हैं': PM Modi पीएम मोदी ने मलेशिया के लोगों को भारत आने का न्योता दिया और इसके साथ ही अपने दोस्तों को साथ लाने के लिए भी कहा. उन्होंने भारत की सफलताएं गिनाते हुए कहा कि अब हम ‘टॉप 3 के दरवाजों को खटखटा रहे हैं’. 'MGR के गाने सुनते हैं मलेशिया के प्रधानमंत्री' : पीएम मोदी पीएम मोदी ने अपने भाषण में बताया कि मलेशिया के प्रधानमंत्री बहुत अच्छे सिंगर हैं और भारतीय म्यूजिक के बहुत बड़े फैन हैं. मलेशिया पीएम तमिल अभिनेता, फिल्म निर्माता एमजीआर के गाने सुनते हैं. 'ये 2026 में मेरा पहला विदेश दौरा है': पीएम मोदी पीएम मोदी ने अपने भाषण में बताया कि कि कैसे प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने प्रोटोकॉल की सीमाओं को तोड़कर एयरपोर्ट पर स्वयं प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया और उन्हें अपनी ही कार में साथ बिठाया. भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘उन्होंने अपनी कार ही नहीं, बल्कि अपनी सीट भी साझा की’. पीएम ने कहा कि ‘मैंने वादा किया था और मैं आ गया. ये 2026 में मेरा पहला विदेश दौरा है’.

मुंबई में बीजेपी ने पहली बार जीता मेयर पद, रितु तावड़े होंगी मेयर, शिंदे की शिवसेना को डिप्टी मेयर का पद

मुंबई  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शनिवार को मुंबई मेयर चुनाव के लिए कॉर्पोरेटर रितु तावड़े को नॉमिनेट किया, जबकि उसकी सहयोगी शिवसेना ने संजय घाडी को डिप्टी मेयर पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया. बीजेपी नेता अमित सतम ने तावड़े के नाम की घोषणा की, जबकि शिवसेना नेता राहुल शेवाले ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) मुख्यालय में घड़ी की उम्मीदवारी की घोषणा की. तावड़े वार्ड 132 से कॉर्पोरेटर हैं, जबकि घड़ी 15 जनवरी को हुए नगर निगम चुनाव में वार्ड 5 से चुने गए थे. शिवसेना सचिव संजय मोरे ने एक बयान में कहा है कि घड़ी 15 महीने तक डिप्टी मेयर के तौर पर काम करेंगे. वह शिवसेना (UBT) के उन सीनियर पूर्व कॉर्पोरेटर में से एक थे, जिन्होंने पाला बदलकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना जॉइन कर ली थी. मुंबई में डिप्टी मेयर का कार्यकाल बांटकर, शिवसेना अपने चार कॉर्पोरेटरों को मौका देना चाहती है. 227 सदस्यों वाली बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनावों में बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना ने 29 सीटें जीती. सत्ताधारी गठबंधन, जिसके पास कुल 118 कॉर्पोरेटर हैं, 114 के आधे के आंकड़े को पार कर चुका है और मेयर का पद हासिल करने की अच्छी स्थिति में है. शिवसेना (UBT), जिसने 1997 से 25 सालों तक नगर निकाय पर राज किया, उसने 65 सीटें जीती, जबकि उसके सहयोगी, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार), ने क्रमशः छह और एक सीट जीती. अन्य पार्टियों में, कांग्रेस ने 24 सीटें, एआईएमआईएम ने आठ, एनसीपी (अजित पवार गुट) ने तीन और समाजवादी पार्टी ने दो सीटें जीती. नौ साल के अंतराल के बाद हुए महत्वपूर्ण चुनाव में दो निर्दलीय उम्मीदवार भी जीते. पिछले कार्यकाल के खत्म होने के बाद 7 मार्च 2022 से बीएमसी कमिश्नर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर काम कर रहे हैं. बीएमसी देश की सबसे अमीर सिविक बॉडी है, जिसका 2025-26 का बजट 74,450 करोड़ रुपये है, जो कुछ छोटे राज्यों के बजट से भी ज्यादा है.

अमेरिका ने PoK को भारत का हिस्सा स्वीकार किया, शहबाज और मुनीर ने दिखाई यह महत्वपूर्ण नक्शा

वाशिंगटन  अमेरिका से पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाली खबर आई है. अमेरिका और भारत ने ट्रेड डील का फ्रेमवर्क जारी किया है. मगर इससे पाकिस्तान की टेंशन बढ़ गई है. अब सवाल है कि आखिर अमेरिका ने ऐसा क्या किया कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की नींद उड़ जाएगी. दरअसल, अमेरिका ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके को भारत का हिस्सा माना है. वैसे भी पाक अधिकृत कश्मीर यानी पीओके भारत का हिस्सा है. भारत शुरू से यह मानता है कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है, जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा जमा रखा है. अब भारत की इस बात पर अमेरिका ने भी मुहर लगा दी है. अमेरिका ने जो नक्शा जारी किया है, वह साफ-साफ बता रहा है कि पाकिस्तान का कब्जा अवैध है और पीओके भारत का ही हिस्सा है. जी हां, अमेरिका ने एक ऐसा नक्शा जारी किया है जिसने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है. अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय यानी यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव ने भारत-अमेरिका के नए अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट की जानकारी देते हुए जो नक्शा इस्तेमाल किया है, उसे देखकर शहबाज और मुनीर की छाती फट जाएगी. अमेरिका की ओर से जारी नक्शे में पूरा कश्मीर को भारत का हिस्सा दिखाया गया है. इस नक्शे के मुताबिक, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भी भारत में शामिल है. इस नक्शे में न कोई लाइन ऑफ कंट्रोल है और नकोई विवादित क्षेत्र. साफ-साफ सब कुछ भारत का दिखाया गया है. क्या हुआ नक्शे में दरअसल, यूएसटीआर यानी यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव (USTR) ने भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर अंतरिम फ्रेमवर्क से जुड़ा एक पोस्ट किया. इस पोस्ट में अमेरिकी उत्पादों (ट्री नट्स, ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन, रेड सोरघम, फल आदि) के लिए भारत में नए बाजार खुलने की बात थी. अमेरिका ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘ट्री नट्स और सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन से लेकर लाल ज्वार और ताज़े और प्रोसेस्ड फलों तक, अमेरिका-भारत एग्रीमेंट अमेरिकी प्रोडक्ट्स के लिए नए मार्केट एक्सेस देगा.’ मगर इस पोस्ट के साथ जारी नक्शे ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. अमेरिका ने यही नक्शा जारी किया है, जिसमें पीओके को भारत का हिस्सा माना गया है. अमेरिका का बड़ा संकेत अमेरिका की ओर से जारी यह नक्शा सिर्फ एक तस्वीर नहीं है.यह अमेरिका की सोच का बड़ा संकेत है. भारत हमेशा कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा इलाका भारत का अभिन्न अंग है. इसमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी हैं. अब अमेरिका के आधिकारिक अकाउंट से ऐसा नक्शा आने का मतलब है कि वाशिंगटन भारत की इस बात को मान रहा है. इसका यह भी संकेत है कि अमेरिका अब पीओके के मसले पर न्यूट्रल नहीं है. यह बात हाल ही में हुई भारत-अमेरिका ट्रेड डील के साथ आई है. दोनों देशों ने टैरिफ कम करने और ट्रेड डील पर फ्रेमवर्क जारी किया है. पाक को झटका अमेरिका का यह कदम पाकिस्तान के लिए यह बड़ा झटका है. पाकिस्तान दशकों से पीओके पर अवैध कब्जा जमा रखा है. भारत ने यह प्रण कर रखा है कि पीओके को वापस लेकर रहेगा. इस दिशा में भारत के लिए यह अच्छी खबर है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर को इस नक्शे को आंख खोलकर देखना चाहिए. उनका सबसे पुराना दोस्त अमेरिका अब भारत के साथ खड़ा दिख रहा है. जिनके घर जाकर मुनीर बिरयानी खाते हैं, उन्होंने कैसे भारत का लोहा माना है.

बांग्लादेश में निपाह वायरस की आहट, कच्चा खजूर रस पीने से महिला की मौत, WHO ने अलर्ट जारी किया

 ढाका विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शुक्रवार को बांग्लादेश में निपाह वायरस (Nipah virus) से एक महिला की मौत की पुष्टि की है। यह घटना जनवरी के अंत में उत्तरी बांग्लादेश में हुई, जिसने एक बार फिर इस घातक वायरस के खतरे को चर्चा में ला दिया है। मृतक महिला की उम्र 40 से 50 वर्ष के बीच थी। महिला में 21 जनवरी को बुखार और सिरदर्द जैसे शुरुआती लक्षण दिखे। इसके बाद उनकी स्थिति बिगड़ती गई, जिसमें अत्यधिक लार निकलना, मानसिक भ्रम और दौरे पड़ना शामिल था। लक्षणों के उभरने के एक सप्ताह बाद महिला की मृत्यु हो गई। मौत के अगले दिन जांच में उनके निपाह वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। संक्रमण का कारण जांच में पाया गया कि महिला का कोई हालिया यात्रा इतिहास नहीं था। हालांकि, उन्होंने कच्चा खजूर का रस पिया था। विशेषज्ञों के अनुसार, निपाह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों द्वारा दूषित किए गए फलों या तरल पदार्थों के जरिए इंसानों में फैलता है। एहतियाती कदम और वर्तमान स्थिति संपर्क ट्रेसिंग: महिला के संपर्क में आए सभी 35 लोगों की पहचान कर उन्हें निगरानी में रखा गया था। राहत की बात यह है कि उन सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। क्षेत्रीय प्रभाव: भारत के पश्चिम बंगाल में भी निपाह के दो मामले सामने आने के बाद, एशिया के कई देशों जैसे मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया और पाकिस्तान ने हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग बढ़ा दी है। WHO की राय: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में इस वायरस के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने का जोखिम कम है। इसलिए, अभी किसी भी प्रकार के यात्रा या व्यापार प्रतिबंध की सिफारिश नहीं की गई है। यह संक्रमण काफी घातक है, जिसमें मृत्यु दर 75% तक हो सकती है। यह मुख्य रूप से संक्रमित चमगादड़ों के संपर्क में आए फलों/खाद्य पदार्थों से फैलता है। यह वायरस इंसानों के बीच बहुत आसानी से नहीं फैलता। वर्तमान में इसके लिए कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है। बांग्लादेश में पिछले साल (2025) भी निपाह वायरस के चार पुष्ट मामले सामने आए थे, जिनमें सभी मरीजों की जान चली गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे पेड़ों से गिरे फल न खाएं और खजूर के रस को अच्छी तरह उबालकर ही पिएं।

शनिवार को ओला, उबर और रैपिडो की हड़ताल, यूनियन ने नितिन गडकरी को लिखा पत्र, हस्तक्षेप की अपील

नई दिल्ली ओला, उबर या रैपिडो जैसे कैब, बाइक और ऑटो सर्विस देने वाले एप्स पर काम करने वाले चालकों के यूनियन ने 7 फरवरी 2026 को देश के प्रमुख शहरों में हड़ताल का एलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन को 'ऑल इंडिया ब्रेकडाउन' नाम दिया गया है, जिसके चलते यात्रियों को कार और ऑटो बुक करने में खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है। TGPWU ने किया हड़ताल का नेतृत्व तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने राष्ट्रीय मजदूर संगठनों के साथ मिलकर इस हड़ताल का नेतृत्व किया है। यूनियन का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियां ड्राइवरों का अंतहीन शोषण कर रही हैं। यूनियन का कहना है कि सरकार द्वारा कोई न्यूनतम किराया (Minimum Fare) तय न होने के कारण कंपनियां अपनी मर्जी से रेट तय करती हैं। साथ ही कंपनियों की मनमानी के कारण ड्राइवरों की आय अनिश्चित हो गई है, जिससे वे गरीबी के जाल में फंस रहे हैं। इसके अलावा रेगुलेशन की कमी के कारण वर्किंग आवर्स और सुरक्षा मानकों को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है। यूनियन ने नितिन गडकरी को लिखा पत्र यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि लंबे समय से लंबित इन समस्याओं के कारण लाखों ट्रांसपोर्ट वर्कर्स का भविष्य दांव पर लगा है। ड्राइवरों की मांग है कि सरकार एक पारदर्शी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करे ताकि एग्रीगेटर कंपनियों के एकाधिकार को खत्म किया जा सके।  

भारत का बड़ा कदम: कृषि और डेयरी सेक्टर पर सुरक्षा कवच, अमेरिका के लिए नहीं मिली कोई राहत

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर अंतरिम समझौते की रूपरेखा पर सहमति बन गई है। इससे भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों के लिए 30000 अरब डॉलर का बाजार खुलेगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार इसकी जानकारी दी। इस फ्रेमवर्क के तहत भारत ने अपने संवेदनशील कृषि क्षेत्रों जैसे गेहूं, चावल, मक्का, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, चीज, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। भारत ने अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कुछ कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म या कम करने का वादा किया है, लेकिन मुख्य रूप से केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में। कृषि क्षेत्र में क्या खुला है? भारत ने अमेरिकी उत्पादों जैसे ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs) और रेड सोरघम (पशु चारे के लिए), ट्री नट्स (जैसे बादाम, अखरोट आदि), ताजा और प्रोसेस्ड फ्रूट्स, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स आदि पर टैरिफ कम या खत्म करने पर सहमति जताई है। ये मुख्य रूप से पशु आहार, नट्स और फलों से जुड़े हैं, जो भारत के मुख्य खाद्यान्न उत्पादन को सीधे प्रभावित नहीं करते। कृषि क्षेत्र में क्या बंद/संरक्षित है? भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में कोई समझौता नहीं हुआ है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि किसानों और ग्रामीण आजीविका की रक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की गई है। गेहूं, चावल, दूध और डेयरी उत्पादों जैसे मुख्य आइटम्स को डील से लगभग पूरी तरह बाहर रखा गया है। यह भारत की लंबे समय से चली आ रही नीति है कि कृषि क्षेत्र को बड़े पैमाने पर विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाया जाए, खासकर क्योंकि अमेरिकी उत्पाद सब्सिडी वाले होते हैं और भारतीय किसानों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। भारत और अमेरिका के बीच हुए इस हालिया व्यापार समझौते में एक महत्वपूर्ण पहलू 'भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र का संरक्षण' बनकर उभरा है। 1. अनाज और आटा भारतीय अनाज बाजार को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं: प्रमुख अनाज: गेहूं, चावल, मक्का, जौ, ज्वार और रागी। मोटा अनाज (Millets): बाजरा, कोदो, कांगनी, ओट्स, श्यामक और अमरंथ। अन्य: कोपरा, मैदा, विभिन्न प्रकार के आटे (गेहूं, मक्का, चावल, बाजरा आदि) और छिलका रहित अनाज। 2. डेयरी उत्पाद भारतीय डेयरी क्षेत्र, जो करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का आधार है, उसे पूर्ण संरक्षण दिया गया है: तरल और पाउडर उत्पाद: दूध (तरल, पाउडर, कंडेंस्ड), क्रीम और बटर मिल्क। वसा और अन्य: घी, मक्खन, बटर ऑयल, योगहर्ट और पनीर। चीज की किस्में: मोज़ेरेला, ब्लू वेंड, ग्रेडेड/पाउडर्ड चीज और व्हे प्रोडक्ट्स। 3. मसाले और औषधीय जड़ी-बूटियां भारतीय मसालों की वैश्विक साख को देखते हुए, इस श्रेणी में व्यापक सुरक्षा दी गई है: रोजाना के मसाले: काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, धनिया, जीरा, हल्दी, अदरक और हींग। अन्य बीज और पाउडर: सूखी हरी मिर्च, अजवाइन, मेथी, सरसों, राई, भूसी, चक्रमर्द, कैसिया और अन्य सभी पाउडर मसाले। 4. सब्जियां और फल ताजी और फ्रोजन दोनों प्रकार की सब्जियों और फलों को इस समझौते में संरक्षित श्रेणी में रखा गया है: सब्जियां: आलू, प्याज, मटर, फलियां, मशरूम, तोरी, कुंदरू, भिंडी, कद्दू, लहसुन, खीरा, शिमला मिर्च, काबुली चना और शकरकंद। फल (सामान्य): केला, आम, स्ट्रॉबेरी, संरक्षित चेरी, इमली और सिंघाड़ा गिरी। ड्राई फ्रूट्स: सूखा आलू बुखारा, सूखा सेब और अन्य सूखे फल। साइट्रस फल: संतरा, मैंडरिन, चकोतरा, नींबू, अंगूर और अन्य साइट्रस फल। इस समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से $500 बिलियन (लगभग 500 अरब डॉलर) मूल्य का सामान खरीदेगा। इसमें शामिल हैं:     ऊर्जा और संसाधन: तेल, गैस और कोकिंग कोल।     विमानन: विमान और उनके पुर्जे।     तकनीक: डेटा सेंटर के पुर्जे और AI अनुप्रयोगों के लिए उपयोग होने वाले GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट)। भारतीय निर्यातकों को क्या मिलेगा? हालांकि अमेरिका अधिकांश भारतीय सामानों (जैसे कपड़ा, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक और रसायन) पर 18% टैरिफ जारी रखेगा, लेकिन कुछ क्षेत्रों में विशेष राहत दी गई है: विमानन और ऑटो पार्ट्स: भारतीय विमान पुर्जों को वही राहत मिलेगी जो अमेरिका के अन्य सहयोगी देशों को मिलती है। ऑटो पार्ट्स के लिए एक विशेष कोटा तय किया जाएगा जिस पर कम शुल्क लगेगा। फार्मास्युटिकल्स: जेनेरिक दवाओं और उनके कच्चे माल के लिए बातचीत के जरिए अनुकूल परिणाम निकाले जाएंगे। टैरिफ (शुल्क) में भारी कटौती अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि भारतीय सामानों पर लगने वाले 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया जाएगा। इस 50% टैरिफ में से 25% हिस्सा ट्रंप प्रशासन ने दंड स्वरूप लगाया था क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा था। भारत द्वारा रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका व वेनेजुएला से तेल खरीदने की सहमति के बाद, ट्रंप ने शुक्रवार को उस 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। दोनों देशों का लक्ष्य मार्च 2026 तक एक औपचारिक और पूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करना है। इसके बाद भारत द्वारा अमेरिकी सामानों पर दी जाने वाली टैरिफ कटौती प्रभावी हो जाएगी। बरसों के विवादों (जैसे डिजिटल ट्रेड और कृषि) के बाद, अब चीन के साथ प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा सुरक्षा ने इन वार्ताओं को नई गति दे दी है।