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करोड़ों किसानों को राहत: इस तारीख को खाते में आ सकती है 22वीं किस्त

 नई दिल्ली देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए खुशखबरी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) की 21वीं किस्त सफलतापूर्वक जारी होने के बाद, अब सभी की नजरें 22वीं किस्त पर टिकी हैं। हालांकि सरकार ने अभी तक आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया है, लेकिन वित्तीय कैलेंडर और पिछले साल के रुझानों को देखें तो फरवरी का आखिरी सप्ताह किसानों के बैंक खातों में खुशियां लेकर आ सकता है। पीएम किसान योजना के तहत किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। 21वीं किस्त 19 नवंबर को जारी की गई थी। पिछले साल 19वीं किस्त 24 फरवरी को जारी हुई थी। इसी आधार पर कयास लगाए जा रहे हैं कि 24 फरवरी 2026 के आसपास सरकार 22वीं किस्त के 2,000 रुपये जारी कर सकती है। सावधान! इन 3 वजहों से रुक सकता है आपका पैसा भले ही किस्त जारी हो जाए, लेकिन नियमों में सख्ती के कारण कुछ किसानों को इस लाभ से वंचित रहना पड़ सकता है। यदि आपने निम्नलिखित कार्य पूरे नहीं किए हैं, तो आपकी राशि अटक सकती है: ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य: जिन किसानों ने अभी तक अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उनके खाते में पैसे नहीं भेजे जाएंगे। इसे पीएम किसान पोर्टल या नजदीकी सीएससी (CSC) सेंटर से तुरंत पूरा करें।

कंधमाल (ओडिशा) में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़, दो माओवादी मारे गए, एक की पहचान रश्मि के रूप में हुई

बरहामपुर  ओडिशा में गंजम-कंधमाल बॉर्डर के पास जंगल में  सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो माओवादी मारे गए. एसपी हरीशा बीसी ने बताया कि यह एनकाउंटर कंधमाल जिले के राइकिया पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में कराडा जंगल इलाके में हुआ. मरने वालों की पहचान एरिया कमेटी मेंबर जगेश और सीपीआई (माओवादी) की पार्टी मेंबर रश्मि के तौर पर हुई है. दोनों पर कुल 27.50 लाख रुपये का इनाम था. पुलिस ने बताया कि मरने वाले सीपीआई (माओवादी) के कालाहांडी कंधमाल बौध नयागढ़ (KKBN) डिवीजन से था और जिले में एक्टिव था और उस पर कई हिंसक घटनाओं में शामिल होने का आरोप है. सुरक्षाकर्मियों ने मौके से कई हथियार और सामान जब्त किए हैं. यह एनकाउंटर तब शुरू हुआ जब सिक्योरिटी फोर्स ने 31 मार्च तक माओवादियों को जड़ से खत्म करने के लिए पूरे राज्य में चलाए जा रहे अभियान के तहत इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन तेज कर दिया. सूत्रों ने बताया कि माओवादी कंधमाल जिले के कुछ हिस्सों में छिपे हुए थे. इससे पुलिस ने सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया. पिछले हफ़्ते, राइकिया पुलिस की इंद्रगढ़ पंचायत में माओवादियों से झड़प हुई, जिसके बाद भारी फायरिंग हुई और चरमपंथियों को पीछे हटना पड़ा. सुरक्षा बलों ने अब पूरे जिले में सर्च ऑपरेशन बढ़ा दिया है और उन जंगली इलाकों पर फोकस किया है जहां माओवादियों के फिर से इकट्ठा होने का शक है. अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि चल रही कार्रवाई का मकसद माओवादी नेटवर्क को खत्म करना और इलाके में शांति बहाल करना है. ओडिशा के गंजम-कंधमाल सीमा के जंगल में रविवार को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में दो नक्सलियों को मार गिराया। इसमें एक महिला नक्सली है। मुठभेड़ कंधमाल जिले के राइकीया थाना क्षेत्र के कराडा जंगल में हुई।ढकंधमाल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरीश बीसी ने बताया कि मारे गए नक्सलियों की पहचान जगेश (एरिया कमेटी सदस्य) और रश्मि (भाकपा-माओवादी की सदस्य) के रूप में हुई है। दोनों पर कुल 27.50 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, दोनों केकेबीएन (कालाहांडी-कंधमाल-बौध-नयागढ़) डिवीजन से जुड़े थे और जिले में कई हिंसक घटनाओं में शामिल रहे थे। सुरक्षाबलों ने मौके से कई हथियार और अन्य सामान बरामद किए हैं। एसपी ने बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर पिछले दो दिनों से इलाके में नक्सल विरोधी अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दो नक्सली मारे गए।  खुफिया सूचना पर चला सर्च ऑपरेशन अधिकारियों ने बताया कि इलाके में माओवादी गतिविधियों की पुख्ता सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने पिछले दो दिनों से संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। रविवार सुबह कराडा वन क्षेत्र में करीब नौ से दस माओवादियों का एक दल दिखाई दिया। आरोप है कि समूह के दो से तीन सदस्यों ने सुरक्षा बलों पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभाला। कुछ देर चली मुठभेड़ के बाद दो माओवादी मारे गए, जबकि अन्य घने जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए। हथियार और आपत्तिजनक सामग्री बरामद मुठभेड़ स्थल से सुरक्षा बलों ने हथियार, गोला-बारूद और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है। इलाके में अभी भी व्यापक सर्च ऑपरेशन जारी है, ताकि फरार माओवादियों का पता लगाया जा सके। कंधमाल एसपी हरीश बीसी ने बताया कि इस कार्रवाई में किसी भी सुरक्षाकर्मी के घायल होने की सूचना नहीं है। पुलिस का कहना है कि केकेबीएन डिवीजन के सक्रिय सदस्यों के मारे जाने से क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। गंजाम और कंधमाल की सीमा पर लंबे समय से माओवादी गतिविधियां चिंता का विषय रही हैं। सुरक्षा बलों की इस सफलता को क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दिल्ली कोर्ट का बयान, AI समिट में यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रोटेस्ट से भारत की अंतरराष्ट्रीय इमेज को खतरा

नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के कार्यकर्ताओं का शर्टलेस प्रोटेस्ट असहमति जताने का सही तरीका नहीं था। कोर्ट ने कहा कि यह ‘सार्वजनिक व्यवस्था पर एक सीधा हमला’ था, जिसने भारत की डिप्लोमैटिक इमेज को भी नुकसान पहुंचाया। कोर्ट ने चारों आरोपियों को पुलिस कस्टडी में भेजा ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रवि की कोर्ट ने  यह टिप्पणी करते हुए शर्टलेस विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए यूथ कांग्रेस के चार कार्यकर्ताओं को 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों में बिहार से युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हरि, बिहार से युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव कुंदन यादव, उत्तर प्रदेश से युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार और तेलंगाना से नरसिंह यादव शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में बाहरी साजिश के संबंधों का संकेत दिल्ली पुलिस की हिरासत में पूछताछ की अर्जी को मंजूर करने के कारण बताते हुए मजिस्ट्रेट ने कहा कि आरोपी बिहार, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के दूर-दराज के इलाकों से हैं, जिससे उनके फरार होने की आशंका बहुत अधिक है। कोर्ट ने कहा कि ''प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों से बाहरी साजिश के संबंधों का संकेत मिलने से यह स्थिति और भी गंभीर'' हो जाती है। मजिस्ट्रेट रवि द्वारा पारित आदेश के एक अंश में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शन ने न केवल आयोजन की शुचिता को खतरे में डाला, बल्कि देश की डिप्लोमैटिक इमेज को भी नुकसान पहुंचाया। क्या हैं आरोप अदालत के आदेश में कहा गया, ''आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने वैश्विक प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एआई समिट 2026 के दौरान भारत मंडपम के हाई सिक्योरिटी वाले परिसर में घुसने की सुनियोजित साजिश रची।'' इसमें कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर 'भड़काऊ नारों वाली टी-शर्ट पहन रखी थी, जिन पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के दौरान प्रधानमंत्री झुक गए (पीएम कॉम्प्रोमाइज्ड) जैसे आपत्तिजनक नारे लिखे थे। आदेश में कहा गया कि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी का निर्वहन करने में बाधा डाली और पुलिसकर्मियों पर शारीरिक हमले किए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं, जैसा कि रिकॉर्ड में मौजूद 'मेडिको-लीगल' मामलों (एमएलसी) से प्रमाणित होता है। ऐसा आचरण सार्वजनिक व्यवस्था पर स्पष्ट हमले के समान मजिस्ट्रेट ने कहा, ''ऐसा आचरण वैध तरीके से असहमति जताने के दायरे से स्पष्ट रूप से परे है और सार्वजनिक व्यवस्था पर स्पष्ट हमले के समान है। यह न केवल आयोजन की गरिमा को खतरे में डालता है, बल्कि विदेशी हितधारकों के समक्ष देश की कूटनीतिक छवि को भी प्रभावित करता है…।'' मजिस्ट्रेट ने कहा कि जांच से पता चलता है कि आरोपियों के कई सहयोगी संभवत: फरार हैं, जो डिजिटल सबूतों, वित्तीय सुरागों आदि से छेड़छाड़ कर सकते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कथित अपराधों के लिए गहन जांच जरूरी है, क्योंकि वे एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर सार्वजनिक व्यवस्था और देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 121 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना) और धारा 61 (2) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत तीन साल से अधिक की सजा का प्रावधान रखते हैं। अदालत ने कहा कि चारों आरोपियों को 25 फरवरी तक पांच दिन की पुलिस हिरासत में रखे जाने की अनुमति दी जाती है।

बांगलादेशी सेना में हुआ बड़ा बदलाव, भारत में रुके अफसर को वापस बुलाया पद संभालने के लिए

ढाका  बांग्लादेश सेना के शीर्ष स्तर परबड़ा फेरबदल हुआ, जिसमें एक नए चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) की नियुक्ति भी शामिल है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट से यह जानकारी प्राप्त हुई। इस फेरबदल से प्रमुख रणनीतिक कमानों के साथ-साथ देश की प्रमुख सैन्य खुफिया एजेंसी भी प्रभावित हुई है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, सेना मुख्यालय द्वारा जारी किए गए ये बदलाव प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई सरकार के 17 फरवरी को सत्ता संभालने के कुछ दिनों बाद हुए हैं। 'प्रोथोम आलो' ने रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल एम मैनुर रहमान को सीजीएस के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि वह पहले सेना प्रशिक्षण और सिद्धांत कमान (ARTDOC) के प्रमुख या जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के रूप में कार्यरत थे। भारत में बांग्लादेश उच्चायोग के रक्षा सलाहकार, ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल के उच्च पद और दर्जे के साथ एक पैदल सेना डिवीजन के जीओसी के रूप में कार्यभार संभालने के लिए वापस बुलाया गया है। बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) ने 12 फरवरी को हुए महत्वपूर्ण चुनावों में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। 60 वर्षीय रहमान ने 17 फरवरी को शपथ ली, जिससे मुहम्मद यूनुस के 18 महीने के अंतरिम शासन का अंत हुआ। बांग्लादेशी विदेश मंत्री से मिले भारतीय उच्चायुक्त ढाका में नियुक्त उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने  कहा कि बांग्लादेश की नई सरकार के साथ संवाद को आगे बढ़ाने के लिए भारत उत्सुक है। उन्होंने नई दिल्ली की ओर से ढाका के साथ फिर से सक्रिय रूप से बातचीत की इच्छा व्यक्त की। तारिक रहमान के 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ दिनों बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात के बाद उच्चायुक्त वर्मा पत्रकारों से बात कर रहे थे। वर्मा ने मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, 'विदेश मंत्री के साथ आज की बैठक में मैंने अपना रुख दोहराया कि हम बांग्लादेश में नयी सरकार के साथ संवाद के लिए उत्सुक हैं।' बैठक में विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद भी शामिल थीं। उच्चायुक्त के अनुसार, उन्होंने बताया कि 'हम परस्पर हित और पारस्परिक लाभ के आधार पर सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्योन्मुखी सोच के साथ मिलकर काम करते हुए हर क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं।' यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत के साथ संबंधों में गिरावट आई थी और 1971 के बाद यह अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे।

होली के दौरान हमले की साजिश, भीड़भाड़ वाली जगहों की रेकी; लश्कर आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ बड़ी जांच

नई दिल्ली दिल्ली में पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा के संदिग्ध मॉड्यूल की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश के तहत बांग्लादेशी मूल के युवकों का नेटवर्क तैयार किया गया। इस नेटवर्क का संचालन बांग्लादेश में बैठा लश्कर का एक कमांडर कर रहा था, जिसने वहीं बैठक कर हमलों की पूरी रूपरेखा बनाई। जांच में सामने आया है कि मॉड्यूल के निशाने पर देश के बड़े मेट्रो शहर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई थे। सूत्रों के मुताबिक कुछ स्थानों की रेकी भी कर ली गई थी और होली के मौके पर हमले की तैयारी थी। खुफिया इनपुट के बाद स्पेशल सेल ने कार्रवाई तेज की और मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया। हाफिज सईद और लखवी से सीधा संपर्क जांच से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि बांग्लादेशी हैंडलर शब्बीर अहमद लोन सीधे लश्कर प्रमुख हाफिज सईद और आतंकी सरगना जैकी उर रहमान लखवी के संपर्क में था।पुलिस का कहना है कि आईएसआई भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के जरिए लोकल मॉड्यूल खड़ा कर रही थी। इसके लिए फंडिंग भी की जा रही थी, ताकि बड़े शहरों में समन्वित हमले किए जा सकें। शब्बीर इस नेटवर्क में आईएसआई और बांग्लादेशी मूल के आतंकी सैदुल इस्लाम के बीच कड़ी का काम कर रहा था। सैदुल संदिग्धों को निर्देश देता था और उन्हें टारगेट तय करने में मदद करता था। 2007 में पकड़ा गया, 2018 में फिर सक्रिय स्पेशल सेल के अनुसार शब्बीर अहमद लोन 2007 में आत्मघाती हमले की साजिश में एके-47 और हैंड ग्रेनेड के साथ पकड़ा गया था। सजा पूरी करने के बाद 2018 में जेल से बाहर आया और दोबारा लश्कर से जुड़ गया। उसने अपना बेस बांग्लादेश में बनाया, जबकि कनेक्शन पाकिस्तान से बनाए रखे। अधिकारियों का कहना है कि जेल से रिहाई के बाद उसने पुराने नेटवर्क को फिर सक्रिय किया और सोशल मीडिया के जरिए युवकों को जोड़ना शुरू किया। जांच एजेंसियों को उसके डिजिटल ट्रेल से कई अहम सुराग मिले हैं। सोशल मीडिया से जोड़ा गया मॉड्यूल पुलिस के मुताबिक पकड़े गए संदिग्धों को पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क में लाया गया। इसके बाद उन्हें बांग्लादेश बुलाकर बैठक की गई। कोलकाता से पकड़े गए उमर फारूक को संवेदनशील स्थानों की रेकी का जिम्मा दिया गया था। संदिग्धों को किराए पर अपार्टमेंट लेने और सुरक्षित ठिकाने बनाने के निर्देश भी दिए गए। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में हथियार जुटाने की कोशिशों से जुड़े वीडियो और चैट सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है। ऑपरेशन जारी, कई राज्यों में छापे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का ऑपरेशन अभी जारी है। कुछ संदिग्धों के फरार होने की आशंका में कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है। सभी आरोपियों को दिल्ली लाकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि समय रहते साजिश नाकाम कर दी गई, लेकिन नेटवर्क के बाकी सिरों तक पहुंचना अभी बाकी है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और देश के बड़े शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मॉड्यूल लंबी योजना का हिस्सा था। अगर समय पर कार्रवाई नहीं होती तो होली के मौके पर बड़ा नुकसान हो सकता था। विवादित पोस्टर से खुला मॉड्यूल का राज स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े आठ संदिग्धों में से चार दिल्ली में ‘फ्री कश्मीर’ जैसे विवादित पोस्टर लगाकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल लौट गए थे। जांच यहीं से आगे बढ़ी और नेटवर्क का सिरा हाथ लगा। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टरबाजी महज ट्रायल रन थी, असली मकसद बड़े हमले की तैयारी था। खुफिया एजेंसियों ने पहले अलर्ट जारी किया था कि आईएसआई समर्थित लश्कर लोकल मॉड्यूल तैयार कर रहा है। एक अन्य इनपुट में लाल किले के आसपास हमले की आशंका जताई गई थी। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है।

‘एल मेंचो’ ड्रग माफिया मिलिट्री ऑपरेशन में मारा गया, मेक्सिको में हिंसा के बीच भारत ने दी यात्रा एडवाइजरी

 जलिस्को मैक्सिकन डिफेंस मिनिस्ट्री ने ऐलान किया है कि दुनिया के सबसे वॉन्टेड ड्रग तस्करों में से एक और 'एल मेंचो' के नाम से कुख्यात नेमेसियो रुबन ओसेगुएरा सर्वेंटेस एक सैन्य अभियान में मारा गया है. ओसेगुएरा की मौत के बाद पूरे मैक्सिको में जगह-जगह से हिंसा की खबरें आ रही हैं. यह ऑपरेशन पश्चिमी राज्य जलिस्को में मैक्सिकन सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया था. मंत्रालय के मुताबिक, 59 वर्षीय भगोड़े ड्रग लॉर्ड की मौत मिलिट्री ऑपरेशन के बाद एयर ट्रांसफर (हवाई मार्ग से ले जाने) के दौरान लगी गंभीर चोटों के कारण हुई. एल मेंचो का संगठन 'जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल' (CJNG) पिछले एक दशक में मेक्सिको का सबसे पावरफुल आपराधिक समूह बन चुका था और अमेरिका में नशीले पदार्थों की तस्करी का प्रमुख स्रोत था.  हालांकि, राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि करने से परहेज किया है. उन्होंने कहा कि इस मामले पर पूरी जानकारी सुरक्षा कैबिनेट द्वारा दी जाएगी. पूरे मेक्सिको में अफ़रा-तफ़री… अधिकारियों ने बताया कि ओसेगुएरा की मौत की ख़बरों से CJNG के मज़बूत गढ़ वाले कई राज्यों में हिंसा फैल गई, जहां बंदूकधारियों ने मिलकर बदले की कार्रवाई में कई गाड़ियां जला दीं और मुख्य सड़कों को ब्लॉक कर दिया. लोकल मीडिया और अधिकारियों ने बताया कि जलिस्को, गुआनाजुआतो, नायरिट, मिचोआकन और तमाउलिपास में बसों, ट्रकों और कारों में आग लगा दी गई, जबकि ग्वाडलहारा में लोग बदले की कार्रवाई के डर से सड़कों और ट्रांसपोर्ट हब से भाग गए. पब्लिक के लिए सलाह जारी… गवर्नर पाब्लो लेमस नवारो ने कहा कि स्टेट में अभी भी 'कोड रेड' सिक्योरिटी अलर्ट है और उन्होंने लोगों से घर के अंदर रहने की अपील की. ​​इलाके के कुछ हिस्सों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद कर दिया गया और चल रही झड़पों की वजह से स्टेट हाईवे पर यात्रा करने से मना कर दिया गया. लेमस ने कहा, "हम कोड रेड में हैं. हम यह सलाह दोहराते हैं कि अपने घरों से बाहर न निकलें. कई फ़ेडरल जगहों पर झड़पें हो रही हैं." लोकल मीडिया ने बताया कि ओसेगुएरा ग्वाडलहारा से करीब 80 मील दक्षिण-पश्चिम में एक पहाड़ी शहर, तपालपा में या उसके पास एक फ़ेडरल ऑपरेशन के दौरान मारा गया. रीजनल मीडिया में चल रहे वीडियो में इलाके में भारी गोलीबारी और सुरक्षा तैनात दिखाई दे रही थी. CJNG की जड़ें लंबे वक्त से ग्रामीण जलिस्को में हैं, जहां ओसेगुएरा (पूर्व पुलिस अफ़सर) एक कार्टेल नेटवर्क को लीड करने के लिए उभरा, जो इलाके पर कब्ज़ा करने और तस्करी के रास्तों को कंट्रोल करने के लिए मिलिट्री-स्टाइल फ़ोर्स और बेरहमी से डराने-धमकाने पर निर्भर था. मेक्सिको में US एम्बेसी ने CJNG कार्टेल के लीडर के मारे जाने के बाद बदले की कार्रवाई से जुड़ा सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. यूएस एंबेसी ने कहा, 'चल रहे सिक्योरिटी ऑपरेशन और उससे जुड़ी सड़कों पर रुकावटों और क्रिमिनल एक्टिविटी की वजह से US नागरिकों को अगली सूचना तक सुरक्षित जगह पर रहना चाहिए.' भारत ने जारी की एडवाइजरी भारत ने भी मेक्सिको के हालात को देखते हुए अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी की है.

पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन, 71 वर्ष की उम्र में चले गए, ममता बनर्जी के साथ शुरू किया था TMC

कोलकाता पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और कभी तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के बाद नंबर दो नेता माने जाने वाले मुकुल रॉय का सोमवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. 71 वर्षीय रॉय को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां तड़के करीब 1.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने उनके निधन की पुष्टि की है. उन्होंने कहा, 'कल रात कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई. वह पिछले 600 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. यह मेरे और मेरे परिवार के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है.'  मुकुल रॉय का जन्म उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा में 14 मई 1954 को हुआ था. वह राजनीति में आने से पहले वे ट्रेड यूनियन की गतिविधियों से जुड़े रहे. उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से साइंस में बैचलर डिग्री प्राप्त की थी और साल 2006 में मदुरै के कामराज विश्वविद्यालय से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए की डिग्री ली थी. जनवरी 1998 में अस्तित्व में आई तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे मुकुल रॉय, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी भी रहे. यूथ कांग्रेस से शुरू की राजनीतिक पारी ममता बनर्जी की तरह ही मुकुल रॉय ने भी बंगाल में यूथ कांग्रेस से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद उन्होंने पार्टी में ममता बनर्जी के साथ मिलकर काम किया और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया. इसके बाद रॉय दिल्ली में पार्टी का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे. वह 2006 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2009 से 2012 तक राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता के रूप में उन्होंने जिम्मेदारी निभाई. TMC को मजबूत करने में अहम भूमिका यूपीए‑II सरकार में मुकुल रॉय ने पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया. इसके बाद मार्च 2012 में उन्होंने पार्टी के सहयोगी दिनेश त्रिवेदी की जगह रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली. वह बंगाल व दिल्ली दोनों जगह पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार रहे. 2011 के बाद, जब तृणमूल कांग्रेस ने 34 वर्षों के वाम शासन का अंत किया और ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं, तब पार्टी को मजबूत करने में मुकुल रॉय की अहम भूमिका रही. मुकुल रॉय 2015 तक तृणमूल कांग्रेस  के महासचिव रहे. उनके कार्यकाल में सीपीआई(एम) और कांग्रेस से कई बड़े नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा. मुकुल रॉय थोड़े समय के लिए BJP में रहे मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस से दूरी बनाते हुए नवंबर 2017 में औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया. उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करते हुए राज्य में भाजपा का आधार मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई और 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने राज्य में 18 सीटें जीतीं. रॉय ने तृणमूल कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं को भाजपा में शामिल कराने में मदद की और 2021 के विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर उत्तर से भाजपा विधायक चुने गए. कलकत्ता हाई कोर्ट ने रद्द की थी विधायकी हालांकि जल्द ही भाजपा से भी उनकी दूरी बढ़ने लगी और अंततः जून 2021 में वह वापस तृणमूल कांग्रेस में लौट आए. लेकिन तृणमूल में वापसी के बाद वह पार्टी में न तो पहले जैसी राजनीतिक हैसियत में दिखे और न ही राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे. मुकुल रॉय डिमेंशिया समेत कई अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे. 13 नवंबर 2025 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2021 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर निर्वाचित होने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के मामले में दलबदल कानून के तहत उनको विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया था.

नेपाल: पोखरा-काठमांडू बस दुर्घटना, त्रिशूली नदी में गिरी, 17 की जान गई

काठमांडू नेपाल की राजधानी काठमांडू में एक बड़ा हादसा हो गया, जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई. पोखरा से काठमांडू आ रही एक यात्री बस त्रिशूली नदी में गिर गई. इस हादसे में मरने वालों की सूची में 6 महिलाएं और 11 पुरुषों की शामिल हैं. इस हादसे में कुल 27 लोगों को अस्पतालों में भेजा गया है. दुर्घटना में विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं. मृतकों और घायलों में एक न्यूजीलैंड का नागरिक भी बताया गया है. बस रात करीब 1 बजे पृथ्वी राजमार्ग के अंतर्गत पोखरा से काठमांडू की ओर आ रही थी. बस धादिंग के बेनिघाट रोरांग में त्रिशूली नदी किनारे जा गिरी. बस सड़क से लगभग 300 मीटर नीचे गिरकर क्षतिग्रस्त अवस्था में मिली. टॉर्च की रोशनी में घायलों का बचाव नाव की मदद से यात्रियों को करीब एक किलोमीटर नीचे तक लाया गया, वहां से उन्हें सड़क तक ऊपर चढ़ाकर एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया. रात का समय, दुर्गम स्थान और राहत सामग्री की कमी के कारण बचाव कार्य में मुश्किल हुई. प्रमुख जिला अधिकारी सुवेदी फोन पर बताया, टॉर्च की रोशनी में घायलों का बचाव किया गया. हमें राहत सामग्री की कमी महसूस हुई. 27 लोगों को पहुंचाया गया अस्पताल सुवेदी ने बताया कि घटनास्थल से 8 महिलाएं, 18 पुरुष और एक बालिका सहित कुल 27 लोगों को बचाकर विभिन्न अस्पतालों में भेजा गया है. उन्होंने हादसे में 6 महिलाओं और 11 पुरुषों की मौत होने की जानकारी दी. दुर्घटनास्थल पर सेना, सशस्त्र प्रहरी बल और नेपाल पुलिस की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान चलाया. सशस्त्र प्रहरी बल के विपद प्रबंधन बेस आदमघाट से डीएसपी सुनील गिरी के नेतृत्व में एक टीम तथा विपद प्रबंधन प्रशिक्षण शिक्षालय कुरिनटार से गोताखोरों की टीम भी राहत और बचाव कार्य में तैनात है.

कटरा में बढ़ी सुरक्षा: मां वैष्णो देवी भवन पर मंडराया आतंकी साया, सेना तैनात

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए आतंकी घटनाक्रमों के बाद अब जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि आतंकी मां वैष्णो देवी के पावन भवन और आधार शिविर कटरा को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। इस गंभीर सूचना के बाद माता के दरबार और पूरे कटरा शहर को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। आतंकी अलर्ट के बाद कटरा से लेकर भवन तक सुरक्षा व्यवस्था को मल्टी-लेयर कर दिया गया है। आधार शिविर कटरा और यात्रा मार्ग पर भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए यात्रा मार्ग पर विशेष QRT टीमों को तैनात किया गया है जो आधुनिक हथियारों से लैस हैं।जमीन के साथ-साथ आसमान से भी निगरानी रखी जा रही है। चप्पे-चप्पे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं के लिए कड़े नियम सुरक्षा को देखते हुए यात्रियों के लिए भी जांच प्रक्रिया को और अधिक सख्त कर दिया गया है। RFID कार्ड और वेरिफिकेशन: बिना वैध  RFID कार्ड के किसी भी यात्री को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। सघन चेकिंग: कटरा के प्रवेश द्वारों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर हर वाहन और यात्री की सघन तलाशी ली जा रही है। पहचान पत्र अनिवार्य: प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे हर समय अपना मूल पहचान पत्र साथ रखें और सुरक्षाकर्मियों के साथ सहयोग करें। यात्रा पर कोई रोक नहीं, पर सतर्कता जरूरी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि माता वैष्णो देवी की यात्रा सुचारू रूप से चल रही है और इसे रोका नहीं गया है। हालांकि, श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी लावारिस वस्तु को न छुएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति के दिखने पर तुरंत पुलिस या श्राइन बोर्ड के कर्मचारियों को सूचित करें।  

यात्रियों को राहत! ट्रेन छूटने से ठीक पहले तक बदलें बोर्डिंग स्टेशन, रेलवे ने बदले नियम

नई दिल्ली भारतीय रेलवे यात्रियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। अब ट्रेन छूटने के चंद मिनटों पहले तक आप अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। रेलवे बोर्ड द्वारा तैयार किए गए इस नए प्रस्ताव से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो अंतिम समय में किसी कारणवश अपना स्टेशन बदलना चाहते हैं। अब दूसरे चार्ट तक बदलें अपना बोर्डिंग स्टेशन भारतीय रेलवे अपने सिस्टम को और अधिक 'पैसेंजर फ्रेंडली' बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है। रेलवे बोर्ड के एक नए प्रस्ताव के अनुसार, यात्री अब ट्रेन का दूसरा आरक्षण चार्ट (Second Reservation Chart) तैयार होने तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रेन प्रस्थान करने के लगभग 30 मिनट पहले तक यात्रियों के पास अपना स्टेशन बदलने का विकल्प मौजूद रहेगा।   क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? वर्तमान नियमों के तहत, बोर्डिंग पॉइंट में बदलाव केवल पहला चार्ट बनने तक ही किया जा सकता है। लंबी दूरी की ट्रेनों के मामले में, पहला चार्ट ट्रेन छूटने से 8 से 20 घंटे पहले ही बन जाता है। ऐसे में यदि किसी यात्री को अंतिम समय में शहर के किसी दूसरे स्टेशन से ट्रेन पकड़नी हो, तो उसके पास कानूनी रूप से कोई विकल्प नहीं बचता था। नए नियम से यात्रियों की यह 'लास्ट मिनट' की चिंता दूर हो जाएगी। तकनीकी जांच और क्रियान्वयन रेलवे बोर्ड के निदेशक (पैसेंजर मार्केटिंग-द्वितीय) संजय मनोचा ने 19 फरवरी को क्रिस (CRIS) को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव की तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) पर रिपोर्ट मांगी है।     सॉफ्टवेयर अपडेट: बोर्ड यह समझना चाहता है कि इस बदलाव से रेलवे के रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर पर क्या प्रभाव पड़ेगा।     चरणबद्ध शुरुआत: रिपोर्ट सकारात्मक आने पर इस सुविधा को पहले कुछ चुनिंदा ट्रेनों में 'पायलट प्रोजेक्ट' के तौर पर शुरू किया जाएगा, जिसके बाद इसे सभी ट्रेनों के लिए लागू कर दिया जाएगा। क्या हुआ मुख्य बदलाव     पुराना नियम : केवल प्रथम चार्ट (आठ-20 घंटे पहले) तक बदलाव संभव।     नया प्रस्ताव : द्वितीय चार्ट (ट्रेन प्रस्थान से 30 मिनट पहले) तक बदलाव की सुविधा।     उद्देश्य : यात्रियों को अंतिम समय में स्टेशन बदलने का विकल्प देना। यात्रियों को क्या मिलेगा?     अचानक योजना बदलने पर भी सीट सुरक्षित रहेगी।     बिना बोर्डिंग पॉइंट बदले दूसरे स्टेशन से चढ़ने पर होने वाले जुर्माने का डर खत्म होगा।     यात्री IRCTC ऐप या वेबसाइट के जरिए आसानी से यह बदलाव कर पाएंगे।