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No-Cost EMI और एक्सचेंज ऑफर: क्या है असली कीमत, जानिए सब सच

नई दिल्ली इन दिनों शॉपिंग मॉल से लेकर Amazon Flipkart Jio Mart Myntra जैसे ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म तक हर जगह फेस्टिव सीजन की धूम मची हुई है। शॉपिंग प्लेटफॉर्म ग्राहकों को लुभाने के लिए बेहतरीन ऑफर दे रहे हैं। ग्राहकों को सबसे अधिक नो-कॉस्ट ईएमआई लुभा रहा होता है। इसमें ग्राहक महंगे प्रोडक्ट जैसे मोबाइल फोन, फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स आसानी से किस्तों में खरीद सकते हैं। देखने में यह डील बहुत फायदेमंद लगती है क्योंकि इसमें ऐसा माना जाता है कि EMI पर कोई ब्याज नहीं लगता है। लेकिन सच क्या है, इसे समझना बेहद जरूरी है। फेस्टिव सेल हो या नया फोन लॉन्च, एक लाइन हर जगह कॉमन है. No-Cost EMI, सिर्फ 1,999 रुपये प्रति माह. या कहीं 0 रुपये डाउन पेमेंट. लेकिन क्या ये आपके लिए फायदेमंद है? ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से लेकर मॉल तक यही ऑफर आज स्मार्टफोन खरीदने का सबसे बड़ा ट्रिगर बन चुका है. इंडस्ट्री इंसाइडर या स्टैट्स कहते हैं कि आज भारत में लगभग हर दूसरा प्रीमियम फोन EMI पर खरीदने का ट्रेंड बन गया है. आसान मासिक किश्तों ने फोन खरीदना आसान जरूर किया है, लेकिन इसके साथ एक नया पैटर्न भी आ गया है. ये है Upgrade Trap जिसे आप डार्क पैटर्न का ही एक हिस्सा मान सकते हैं. पहले यूजर्स स्मार्टफोन खरीद कर उसे 3-4 साल तक इस्तेमाल करते थे. अब वही फोन 6-12 महीनों में बदल दिया जाता है. इसके पीछे सिर्फ टेक्नॉलॉजी की तेज़ रफ्तार का हाथ नहीं है, बल्कि आसान EMI विकल्पों का बड़ा रोल है. फोन सिर्फ डिवाइस नहीं, सब्सक्रिप्शन जैसा बन रहा है अब मार्केट में फोन सिर्फ डिवाइस के तौर पर नहीं बेचा जा रहा है, बल्कि उसे लगातार बदलने वाले प्रोडक्ट की तरह पेश किया जा रहा है. ग्राहक पूरा पैसा नहीं देता, सिर्फ मासिक किश्त. एक साल बाद नया मॉडल आता है. पुराना फोन एक्सचेंज होता है. नई EMI शुरू. कई लोग तो 10 साल से स्मार्टफोन की EMI भर रहे हैं, क्योंकि हर दो साल में फोन EMI पर ले लिया और EMI पे कर रहे हैं. लेकिन 10 साल तक फोन की EMI भरना समझदारी है?  इसका सीधा असर यह है कि ग्राहक लगातार किश्तों में फंसा रहता है और कंपनियों को हर साल नया खरीदार मिल जाता है. No-Cost EMI : नाम सुनने में अच्छा, असलियत में महंगा EMI मॉडल के साथ No-Cost EMI भी बड़ी चालाकी से जुड़ा हुआ है. नाम से लगता है कि ब्याज कोई नहीं है. लेकिन अगर आप वही फोन अपफ्रंट खरीदते, तो आमतौर पर सीधा डिस्काउंट मिल सकता है. EMI चुनते ही वह छूट चली जाती है. इंडस्ट्री के रिटेल चैनल से जुड़े लोगों का कहना है कि कई बार एक ही फोन अपफ्रंट खरीदने पर 5% से 7% तक सस्ता पड़ता है, लेकिन EMI विकल्प चुनते ही वही फोन पहले जैसा ही महंगा दिखता है. ऊपर से प्रोसेसिंग फी, GST और लेट पेमेंट कंडीशन्स भी जुड़ जाते हैं, जो पहली नज़र में साफ नहीं दिखते. Exchange ऑफर भी EMI के साथ जुड़ा हुआ है Upgrade Trap का दूसरा हिस्सा है Exchange Offer. पुराना फोन दो, 15,000 रुपये का फायदा लो.. जैसा ऑफर ग्राहक को एक्स्ट्रा फायदा देने जैसा लगता है. लेकिन इंडस्ट्री में काम करने वाले कहते हैं कि पुराने फोन की बाजार कीमत अक्सर उतनी नहीं होती जितना दावा किया जाता है. बाकी राशि बोनस के नाम पर EMI प्लान से जुड़ जाती है. यही वजह है कि एक्स भी EMI मॉडल को अट्रैक्टिव बनाने का हिस्सा बन गया है. डेटा कह रहा है… हम तेजी से बदल रहे हैं संख्या भी यही कहानी बयां करती है. मार्केट एनालिसिस बताते हैं कि भारत में 2024 तक लगभग 48% स्मार्टफोन खरीदें EMI या क्रेडिट विकल्पों पर हुई हैं. यह आंकड़ा 2019 के मुकाबले करीब 22% अधिक है. यानी तेजी से लोग अपफ्रंट खरीद की बजाय किश्त पर सवारी कर रहे हैं. इस रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया है कि यूजर आज पुराने 30 महीनों की बजाय 6 से 12 महीनों के बीच फोन बदलते हैं. पहले फोन को लंबे समय तक रखना आम था, अब जल्दी-जल्दी अपग्रेड होना एक नया रिवाज बन चुका है. इसकी वजह सिर्फ लेटेस्ट फोन में दिए गए फीचर्स नहीं हैं, क्योंकि कई साल तक एक ही जैसे दिखने वाले फोन और एक जैसे ही फीचर्स आते रहते हैं. लेकिन यूजर्स को जब दिखता है कि पुराना फोन एक्स्चेंज करके EMI पर लेटेस्ट मॉडल को खरीदा जा सकता है, भले ही उसके लिए 2 साल तक EMI ही क्यों ना देना पड़े. इस चक्कर में यूजर कई बेसिक काम जो इंपॉर्टेंट होते हैं उसे स्किप करके फोन EMI पर खरीद लेता है.  असली कीमत… आपकी जेब पर फर्क आंकड़े यह भी बताते हैं कि अधिकांश No-Cost EMI योजनाओं में अपफ्रंट कीमत के मुकाबले ग्राहक 3% से 8% तक ज्यादा भुगतान कर रहे हैं, भले ही फॉर्मल इंट्रेस्ट चार्ज न किया गया हो. यह फर्क छोटा-सा लगता है, लेकिन जब इसे हजारों और लाखों लेन-देन में देखा जाता है, तो कस्टमर्स की जेब पर बड़ा असर होता है, खासकर मिड-रेंज सेगमेंट में, जहां यूजर हर रुपये की तुलना करते हैं. अगर किश्त चूक गई तो क्या? फाइनेंस सेक्टर के जानकार कहते हैं कि EMI अपने आप में गलत नहीं है. लेकिन जब कस्टमर टोटल कॉस्ट को समझे बिना सिर्फ मासिक किश्त देखकर फैसला करता है, तब समस्या शुरू होती है. अगर एक या दो किश्त चूक जाती हैं, तो लेट फी जुड़ जाती हैं और क्रेडिट स्कोर पर भी असर पड़ता है. इसका सीधा असर अगले लोन, क्रेडिट कार्ड तथा बैंकिंग ऑफर्स पर पड़ सकता है. हर महीने हिडन कॉस्ट लगते हैं और अगर EMI लेट हुई तो हर दिन के हिसाब से एक्स्ट्रा पैसे देने होते हैं.  हम क्यों इतना आसान क्रेडिट चुन रहे हैं भारत में मिडिल क्लास एस्पिरेशन, ऑनलाइन सेल कल्चर और आसान क्रेडिट ने मिलकर एक नया उपभोक्ता पैटर्न बना दिया है. स्मार्टफोन आज सिर्फ एक तकनीकी डिवाइस नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल प्रोडक्ट बन चुका है जिसे बार-बार अपडेट किया जाता है. लोग EMI को आसान विकल्प मानते हैं क्योंकि उन्हें मंथली बर्डेन कम लगता है. लेकिन कई बार वही आसान राह, … Read more

महाराष्ट्र में केसरिया तूफान: मुंबई-पुणे-नागपुर सब फतह, किसके नाम जाएगी ऐतिहासिक जीत?

मुंबई महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में भाजपा की प्रचंड लहर देखने को मिल रही है। देश के सबसे अमीर नगर निकाय बीएमसी में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जहां अब तक शिवसेना का दबदबा रहा करता था। 227 सीटों में से 158 के अब तक रुझान आए हैं और भाजपा अकेले ही 65 पर आगे। उसकी सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना 18 पर आगे है, जबकि उद्धव सेना 52 पर आगे है। यह रुझान यदि नतीजों में बदले तो भाजपा की यह विक्ट्री ऐसी होगी कि हिस्ट्री रच दी जाएगी। ऐसा पहली बार होगा, जब बीएमसी में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होगी। यहां की सत्ता में सबसे आगे रहने का उसका पुराना सपना रहा है, जो अब पूरा होता दिख रहा है।   इसी तरह नागपुर की बात करें को यहां भी भाजपा बेहद मजबूत होकर उभरी है। जिले के 151 वार्डों में से 94 पर अकेले भाजपा ही आगे है। अब तक 129 सीटों के ही रुझान सामने आए हैं। इसलिए माना जा रहा है कि कुल 151 सीटों के रुझान आने तक भाजपा अपने ही दम पर सेंचुरी लगा सकती है। वहीं भाजपा की सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अब तक 2 सीटों पर ही बढ़त मिली है। आरएसएस के मुख्यालय वाले इस शहर में भाजपा के मुकाबले कोई दूर-दूर तक नहीं है और दूसरे नंबर वाली कांग्रेस महज 31 सीटों पर ही आगे है। इस तरह बीएमसी में ठाकरे परिवार का वर्चस्व खत्म होता दिख रहा है तो वहीं पुणे, नागपुर समेत कई शहरों में भाजपा का जलवा रहेगा। ब्रांड फडणवीस होगा और मजबूत, गठबंधन में भी बढ़ेगी पावर ऐसा ही हाल पुणे का भी है। पुणे में भाजपा फिलहाल 47 सीटों पर आगे है। उसके अलावा अन्य सभी दल मिलकर भी 22 सीटों पर ही आगे हैं। इस तरह अजित पवार और शरद पवार मिलकर भी भाजपा के आगे पस्त हैं। भाजपा की यह विक्ट्री हिस्ट्री रचने वाली है। यह जीत सीएम देवेंद्र फडणवीस का कद पार्टी में बढ़ा देगी। इसके अलावा गठबंधन के अंदर भी वह और मजबूत हो जाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि अजित पवार अलग लड़कर पराजित हो रहे हैं। इसके अलावा एकनाथ शिंदे की शिवसेना की रफ्तार भी सुस्त है। साफ है कि देवेंद्र फडणवीस का कद इससे बढ़ेगा और उनका ब्रांड मजबूत होगा। ठाकरे ब्रदर्स हारते दिख रहे हैं अस्तित्व की लड़ाई, वर्चस्व पहले ही खत्म यह चुनाव ठाकरे ब्रदर्स के लिए अस्तित्व के लिए संघर्ष वाला था, जिस लड़ाई को वह हारते दिख रहे हैं। अब आने वाले चुनावों में उद्धव सेना के लिए और मुश्किल होगा। ठाकरे परिवार की पावर पूरे महाराष्ट्र में कभी नहीं रही। लेकिन कुछ इलाकों में वह हमेशा मजबूत थी और इनमें मुंबई तो उसका गढ़ था। अब यहां की हार उसे गहरा दर्द देने वाली है।

भारत ने चीन को निर्यात में 67% की बढ़ोतरी की, भेजी गईं ये महत्वपूर्ण चीजें

 नई दिल्‍ली टैरिफ दबाव और ग्‍लोबल टेंशन के बावजूद भारत एक्‍सपोर्ट सेक्‍टर में तरक्‍की कर रहा है. दिसंबर महीने के दौरान भारत ने शानदार उछाल दर्ज की है. वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने चीन को निर्यात करने के मामले में गजब की तेजी दिखाई है. सिर्फ दिसंबर महीने में भारत का चीन को निर्यात साल-दर-साल आधार पर 67.35% बढ़कर 2.04 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. इस महीने में भारत ने चीन को सबसे ज्‍यादा इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री और कृषि उत्पादों की खेप भेजी है. इसके अलावा, तेल आधारित खाद्य पदार्थों, समुद्री उत्पादों, दूरसंचार उपकरणों और मसालों के निर्यात में भी तेज ग्रोथ देखी गई है.  अप्रैल से दिसंबर तक भारत का चीन को एक्‍सपोर्ट वहीं अप्रैल से दिसंबर  2025 के दौरान भी चीन को मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में अच्‍छी उछाल रही है, जो पिछले साल इसी अवधि में 10.42 अरब डॉलर से बढ़कर 14.25 अरब डॉलर हो गया. इसी तरह,  दिसंबर महीने में भी साल दर साल के आधार पर ज्‍यादा तेजी आई है, लेकिन नंबर की तुलना में दिसंबर में थोड़ा एक्‍सपोर्ट कम हुआ है. वहीं अप्रैल से नवंबर तक के भारत का चीन को एक्‍सपोर्ट $12.22 बिलियन (करीब ₹1 लाख 85 करोड़) रहा.  साल 2025 में चीन को भारत का एक्‍सपोर्ट साल 2025 के दौरान भी भारत का चीन को एक्‍सपोर्ट में इजाफा हुआ है. चीनी सीमा शुल्क के सालाना आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत से चीन को कुल निर्यात लगभग $19.75 बिलियन रहा, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 9.7 फीसदी की उछाल है.  भारत ने क्‍या-क्‍या चीजें चीन को भेजा?   भारत ने सबसे ज्‍यादा चीन को पेट्रोलियम उत्पाद (Petroleum Products) भेजा है. इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे मोबाइल और फोन के पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, OLED फ्लैट-पैनल डिस्प्ले मॉड्यूल्स, एल्यूमिनियम और स अल्युमिनियम उत्पाद, सल्फर एवं रासायनिक कच्चा माल, कुछ एग्री प्रोडक्‍ट्स और फूड आइट्मस आदि शामिल है. समुद्री उत्पादों का निर्यात भी चीन तक बढ़ा है. इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में, प्रमुख वस्तुओं में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, फ्लैट पैनल डिस्प्ले मॉड्यूल और टेलीफोनी के लिए अन्य विद्युत उपकरण में मजबूत बढ़ोतरी हुई है.  चीन के साथ व्‍यापार घाटा भी बढ़ा  आंकड़ों के अनुसार दिसंबर महीने में चीने से आयात 20 फीसदी बढ़कर 11.7 अरब डॉलर हो गया है. चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से दिसंबर के दौरान, भारत का चीन को निर्यात 36.7% बढ़कर 14.24 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 13.46% बढ़कर 95.95 अरब डॉलर हो गया. इसके चलते नौ महीने की अवधि में चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 81.71 अरब डॉलर हो गया.   

भाजपा का अब BMC में मेयर, बहुमत लाकर BJP ने बजाई डंका, उद्धव की लग गई लंका

मुंबई  बीएमसी चुनाव रिजल्ट के रुझानों में अबकी बार भाजपा सरकार की झलक दिख गई है. बीएमसी में पहली बार भाजपा का कब्जा होता दिख रहा है. उद्धव की शिवसेना संग क्लोज फाइट के बाद भाजपा ने लंबी छलांग लगा दी है. बीएमसी चुनाव 2026 के रुझानों में भाजपा वाला महायुति 109 सीटों से आगे चल रहा है. वहीं ठाकरे ब्रदर्स 64 सीटों पर सिमटते दिख रहे हैं. रुझानों अगर ऐसे ही नतीजों में बदलते हैं  बीएमसी यानी बृहन्मुंबई नगर निगम   चुनाव के रिजल्ट में भाजपा बाला साहेब ठाकरे की विरासत को खत्म करती दिख रही है. ठाकरे दोनों भाई अपने किले को बचाने आए थे, मगर ऐसा लग नहीं रहा कि बीएमसी का ताज बच पाएगा. भाजपा और शिंदे वाली शिवसेना बीएमसी पर कब्जा जमाते दिख रहे हैं. बीएमसी चुनाव 2026 के लिए आज सुबह 10 बजे सो वोटों की गिनती जारी है. अभी केवल रुझान आएं हैं, दोपहर के बाद बीएमसी चुनाव के नतीजे साफ हो जाएंगे. बीएमसी चुनाव रिजल्ट के लिए मतगणना स्थल पर सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था है. बीएमसी चुनाव में सभी ‘एग्जिट पोल’ ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन की स्पष्ट जीत और शिवसेना (यूबीटी)-महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की हार का अनुमान जताया है. ‘माई एक्सिस इंडिया’ के ‘एग्जिट पोल’ के अनुसार, भाजपा-शिवसेना गठबंधन देश की वाणिज्यिक राजधानी में 131-151 सीट जीतकर 42 फीसदी मत प्रतिशत हासिल करने की स्थिति में है. वहीं, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के शिवसेना (उबाठा)-मनसे-राकांपा (एसपी) गठबंधन के 58-68 सीट जीतने और 32 फीसदी मत प्रतिशत हासिल करने की उम्मीद है.  अरुण गवली की बेटी चुनाव हारीं गैंगस्टर से राजनेता बने अरुण गवली की बेटी योगिता गवली 2026 के बीएमसी चुनाव हार गई हैं. सियासत में गवली परिवार की अगली पीढ़ी की यह चुनावी शुरुआत असफल रही है. योगिता गवली ने बायकुला-चिंचपोकली क्षेत्र के वार्ड नंबर 207 से अपने पिता अरुण गवली द्वारा स्थापित क्षेत्रीय पार्टी अखिल भारतीय सेना (ABS) के टिकट पर चुनाव लड़ा था.  बीजेपी को बहुमत मिला बीजेपी में पहली बार बीजेपी + को बहुमत मिल गया है. ताजा रुझानों में बीजेपी + 115 सीटों पर आगे चल रहा है. इससे पहले लगातार यह सवाल पूछा जा रहा था कि क्या राज और उद्धव के हाथ मिलाने से बीजेपी को नुकसान होगा लेकिन चुनावी रुझानों ने साफ कर दिया है कि अब उद्धव गुट की शिवसेना की विदाई अब तय है. अभी तक 201 सीटों के रुझान आ गए हैं जिसमें से बीजेपी + को 115 तथा उद्धव सेना गठबंधन को 68 सीटें मिलती दिख रही है. इसके अलावा 10 सीटों पर कांग्रेस है. RSS के गढ़ में भाजपा की लहर नागपुर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गढ के तौर पर देखा जाता है। इसी शहर से संघ की स्थापना हुई थी और यहीं पर उसका मुख्यालय भी बीते 100 सालों से है। इसलिए भाजपा भी यहां जीत की उम्मीद रखती रही है। शुक्रवार को आए निकाय चुनाव के नतीजों में में भाजपा की यह उम्मीद सिरे चढ़ती दिख रही है। अब तक आए रुझानों में कुल 151 वार्डों में से 94 पर अकेले भाजपा ही आगे है। अब तक 129 सीटों के ही रुझान सामने आए हैं। इसलिए माना जा रहा है कि कुल 151 सीटों के रुझान आने तक भाजपा अपने ही दम पर सेंचुरी लगा सकती है। वहीं भाजपा की सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अब तक 2 सीटों पर ही बढ़त मिली है। यह शहर इसलिए भी अहम है क्योंकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यहीं के हैं और नितिन गडकरी भी इसी शहर से सांसद हैं। अब तक के रुझानों में एनसीपी को महज 1 सीट पर बढ़त है। इसके अलावा कांग्रेस 31 सीटों पर लीड के साथ दूसरे नंबर पर है। लेकिन हालात ऐसे हैं कि भाजपा के मुकाबले कोई भी दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना को तो सिर्फ एक ही सीट पर बढ़त मिली है। भाजपा को बीएमसी में भी बड़ा फायदा होता दिख रहा है और दशकों के बाद ठाकरे परिवार का वर्चस्व मुंबई की सत्ता से खत्म हो जाएगा। पुणे और बीएमसी में भी भाजपा की लहर, उद्धव और पवार पस्त बीएमसी में भाजपा 65 सीटों पर आगे है, जबकि शिंदे की शिवसेना 18 पर आगे चल रही है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना 52 सीटों पर आगे चल रही है और कांग्रेस को महज 11 सीटों पर ही लीड है। अब बात पुणे की करें तो यहां भी नागपुर जैसे ही हालात हैं। भाजपा गठबंधन को अब तक 47 सीटों पर लीड मिली है, जबकि शरद पवार और अजित पवार की एनसीपी मिलकर भी 15 सीटों पर ही आगे हैं। कांग्रेस को तो 4 सीटों पर ही बढ़त मिल पाई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना सिर्फ एक सीट पर आगे चल रही है। बता दें कि पुणे में अपनी ताकत ज्यादा बताते हुए अजित पवार गठबंधन से अलग राह पर चले थे। अब जो रुझान हैं, वह पवार परिवार को झटका देने वाले हैं। बहुमत के करीब बीजेपी बीएमसी में भारतीय जनता पार्टी पहली बार बहुमत के करीब पहुंच गई है. अभी तक 227 में से 172 सीटों के रुझान आए हैं जिसमें से 108 पर बीजेपी गठबंधन आगे है जबकि उद्धव शिवसेना गठबंधन महज 56 सीटों पर ही आगे चल रहा है और 3 पर कांग्रेस आगे है. बहुमत का आंकड़ा 114 का है. मुंबई में बीजेपी गठबंधन की 'महा-बढ़त', जमाई 'सेंचुरी' बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के 227 वार्डों के लिए जारी मतगणना में अब तस्वीर साफ होने लगी है. ताजा रुझानों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला 'महायुति' गठबंधन की बढ़त 102 सीटों की हो गई है. वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की मनसे का गठबंधन (UBT+) फिलहाल 57 सीटों पर ही आगे चल रहा है. नवाब मलिक के भाई चुनाव हारे एनसीपी शरद पवार के उम्मीदवार और नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक वार्ड 165 से चुनाव हार गए हैं. यहां से कांग्रेस के अशरफ आज़मी जीत गए हैं. इसके अलावा मुंबई में 7 उम्मीदवार विजेता घोषित किए गए हैं जिसमें शिवसेना के 3 उम्मीदवार शामिल हैं.  बीएमसी चुनाव रिजल्ट 2026 के रुझानों में भाजपा शतक के करीब पहुंच चुकी है. बीएमसी चुनाव में महायुति … Read more

मचाडो ने व्हाइट हाउस में ट्रंप को सौंपा अपना नोबेल पुरस्कार, वेनेजुएला संकट पर हुई चर्चा

वाशिंगटन वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल प्राइज विजेता मारिया कोरीना मचाडो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात आखिरकार हो गई. वेनेजुएला में हुए एक्शन के बाद इस मीटिंग पर सबकी नजर थी. मीटिंग के बाद मचाडो ने बड़ा दावा किया. वह बोलीं कि उन्होंने मीटिंग के दौरान ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या उन्होंने वास्तव में इसे स्वीकार किया. मचाडो लंच मीटिंग के लिए गुरुवार को व्हाइट हाउस पहुंचीं थीं.  यह बैठक वेनेजुएला के राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही तीव्र बहस के बीच हुई, जो इस महीने की शुरुआत में अमेरिका के नेतृत्व में पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद हुई है. एक घंटे से अधिक चली चर्चा के बाद जब मचाडो व्हाइट हाउस से निकलीं, तो उनका जोरदार स्वागत समर्थकों ने किया. उन्होंने समर्थकों से कहा, 'हम राष्ट्रपति ट्रंप पर भरोसा कर सकते हैं,' जिसके बाद कुछ लोगों ने 'धन्यवाद, ट्रंप' के नारे लगाए और फिर वाशिंगटन में अन्य बैठकों के लिए रवाना हो गईं. यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रंप ने उनके द्वारा दिया गया पदक स्वीकार कर लिया है, मचाडो ने जवाब देने से इनकार कर दिया. यह कदम कई हफ्तों से चल रही अटकलों और ट्रंप को पुरस्कार देने की उनकी पिछली सार्वजनिक टिप्पणियों के बाद आया है. हालांकि, नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली संस्था पहले ही साफ कर चुकी है कि नियमों के अनुसार पुरस्कार को हस्तांतरित या साझा नहीं किया जा सकता है. ट्रंप ने मचाडो को दिया गिफ्ट वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो व्हाइट हाउस से एक गिफ्ट बैग लेकर बाहर निकलीं, जिस पर प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिखा था. बैग को मचाडो ने अपने पर्स के साथ हाथ में पकड़ा हुआ था. इस लाल रंग के बैग पर प्रेसिडेंट के सिग्नेचर हो रखे हैं. बैग में आखिर क्या है, ये अभी साफ नहीं है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने मचाडो को वेनेजुएला के कई लोगों की एक उल्लेखनीय और साहसी आवाज बताया, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया कि उनके नेतृत्व की संभावनाओं के बारे में ट्रंप का आकलन बदला नहीं है. ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि नेतृत्व करने के लिए उन्हें घरेलू समर्थन प्राप्त नहीं है. मचाडो को US से मिला-जुला सपोर्ट नोबेल पुरस्कार विजेता होने और लोकतंत्र की मुखर वकालत करने के बावजूद, मचाडो को अमेरिकी अधिकारियों से मिला-जुला समर्थन मिला है. ट्रंप ने तेल और अन्य मुद्दों पर सहयोग के लिए रोड्रिगेज की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की है, जबकि कुछ अमेरिकी सांसदों ने मचाडो पर भरोसा जताया है. गुरुवार की बैठक माचाडो की महीनों बाद वॉशिंगटन में पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी. सुरक्षा को खतरे के चलते उन्हें वेनेजुएला छोड़ना पड़ा था. मादुरो समर्थक सर्वोच्च न्यायालय ने माचाडो को वेनेजुएला के 2024 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से रोक दिया था. स्वतंत्र पर्यवेक्षकों का कहना है कि विपक्ष समर्थित एडमंडो गोंजालेज ने निर्णायक जीत हासिल की, हालांकि मादुरो ने जीत की घोषणा कर सत्ता पर अपना कब्जा बनाए रखा. डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी, जिन्होंने मचाडो से मुलाकात की, ने बताया कि मचाडो ने सांसदों को बताया कि वेनेजुएला में दमनकारी व्यवस्था मादुरो काल से बनी हुई है. उन्होंने अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को एक 'कुशल नेता' बताया, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन से और अधिक मजबूत होती जा रही हैं. ट्रंप ने पहले कहा था कि उनकी प्राथमिकता वेनेजुएला के तेल तक अमेरिकी पहुंच सुनिश्चित करना और देश की अर्थव्यवस्था को संभालना है. मादुरो के बाद सरकार संभाल रहीं रोड्रिगेज की उन्होंने बार-बार तारीफ की है.

बेंगलुरु के ‘बार कैपिटल’ में छाया नया ट्रेंड, दो बार्स ने दिल्ली-मुंबई को पीछे छोड़ा

बेंगलुरु  शाम ढलते ही जब शहर की बत्तियां जगमगाती हैं, तो अक्सर मन में दिल्ली की चकाचौंध या मुंबई की नाइटलाइफ़ का ख्याल आता है. लेकिन अगर आप अब भी यही सोच रहे हैं कि देश का सबसे बेहतरीन कॉकटेल या बार इन्हीं दो बड़े शहरों में मिलेगा, तो अब अपनी ट्रैवल लिस्ट अपडेट करने का समय आ गया है. भारत की बार संस्कृति ने एक ऐसी करवट ली है जिसने बरसों पुरानी परंपराओं को पीछे छोड़ दिया है. गोवा में सजे एक शानदार अवॉर्ड समारोह ने यह साफ कर दिया कि अब दिल्ली के रुतबे और मुंबई की रफ्तार को पछाड़कर बेंगलुरु ने बाजी मार ली है. तो चलिए जानते हैं, देश के उस नए 'बार कैपिटल' के बारे में जहां के दो बार्स ने दिल्ली-मुंबई को पछाड़ते हुए शीर्ष दो स्थानों पर कब्जा कर लिया है. बेंगलुरु का जलवा और दिल्ली-मुंबई की विदाई  '30 बेस्ट बार्स इंडिया' के ताजा नतीजों ने इस बार सबको हैरान कर दिया. यह इन पुरस्कारों के छह साल के इतिहास में पहली बार हुआ है जब टॉप-4 की लिस्ट से दिल्ली और मुंबई पूरी तरह गायब हैं. इस बार की पूरी महफिल बेंगलुरु के नाम रही, जहां के 'स्पिरिट फॉरवर्ड' (Spirit Forward) ने नंबर-1 और 'सोका' (Soka) ने नंबर-2 स्थान हासिल कर पूरे देश में अपनी धाक जमा दी. बेंगलुरु अब सिर्फ कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर का शहर नहीं रहा, बल्कि यह भारत का नया अड्डा बनकर उभरा है. टॉप-30 की लिस्ट में इस शहर के 6 बार शामिल हैं, जिनमें से 4 तो सीधे टॉप-10 में अपनी जगह बनाए हुए हैं. गोवा का स्टाइल और नए शहरों की एंट्री घूमने-फिरने वालों के लिए गोवा हमेशा से पहली पसंद रहा है और इस बार गोवा ने भी अपनी ताकत दिखाई है. 'आउट्रिगर' और 'बॉइलरमेकर' जैसे बार्स ने तीसरा और चौथा स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि गोवा सिर्फ समंदर किनारे मस्ती के लिए नहीं, बल्कि अपनी बेहतरीन ड्रिंक्स के लिए भी जाना जाता है. इस रेस में दिल्ली का 'लेयर' पांचवें स्थान पर रहकर किसी तरह टॉप-5 में अपनी जगह बचाने में कामयाब रहा. सबसे ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि अब इस रेस में कोलकाता जैसे शहर भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. दो साल पहले तक जहां बार कल्चर की इतनी चर्चा नहीं थी, आज वो शहर बड़े-बड़े केंद्रों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. आजकल के मुसाफिर सिर्फ एक गिलास जाम नहीं चाहते, उन्हें चाहिए एक अच्छा माहौल और नया अनुभव. यही वजह है कि अब बार्स में पुराने घिसे-पिटे मेनू की जगह देश की अपनी चीजों और स्थानीय मसालों का इस्तेमाल बढ़ गया है. छिपे हुए छोटे कॉकटेल बार से लेकर छतों पर बने शानदार रूफटॉप बार तक, हर जगह अब मेहमानों को कुछ नया देने की कोशिश की जा रही है. इस साल 1,200 से ज्यादा नामांकन यह बताते हैं कि भारतीय बार मालिक अब दुनिया भर के बार्स के साथ मुकाबला करने के लिए तैयार हैं. इस तरक्की की गूंज अब विदेशों में भी सुनाई दे रही है. पिछले साल एशिया के 50 सबसे अच्छे बारों में पांच भारतीय नाम शामिल थे. दिल्ली के 'लेयर' ने तो दुनिया के 100 बेहतरीन बारों में अपनी जगह बनाकर भारत का मान बढ़ाया है. तो अगली बार जब आप घूमने का प्लान बनाएं, तो इन शहरों की उन गलियों का भी रुख करें जहां कुछ नया और खास पक रहा है.  

मोदी सरकार ने शुरू किया AI चैलेंज, वित्तीय रिपोर्टिंग को AI द्वारा परखने का ऐलान

नई दिल्ली. भारत सरकार और National Financial Reporting Authority (NFRA) ने वित्तीय रिपोर्टिंग की गुणवत्ता और पारदर्शिता को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है, जिसका नाम IndiaAI Financial Reporting Compliance Challenge रखा गया है। यह चुनौती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-संचालित समाधानों के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार की गई है, ताकि वित्तीय दस्तावेजों की गुणवत्ता, डेटा सत्यापन और जोखिम संकेतकों के ऑटोमेटेड विश्लेषण में सुधार किया जा सके। विजेता टीम को मेलगा ₹1.5 करोड़ का पुरस्कार इस पहल के तहत सरकार ने कुल ₹1.5 करोड़ का पुरस्कार पूल रखा है; प्रारंभिक वर्चुअल परिष्करण चरण में 10 टीमों को ₹5 लाख तक का समर्थन मिलेगा, और विजेता टीम के लिए दो साल की NFRA के साथ अनुबंध का अवसर हो सकता है, जिसकी मूल्य लगभग ₹1 करोड़ तक हो सकती है। इस अनुबंध के माध्यम से जीतने वाली टीम राष्ट्रीय स्तर पर AI समाधान लागू करने का मौका पाएगी। चैलेंज में भाग लेने के लिए भारतीय कंपनियों और DPIIT (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स को आमंत्रित किया गया है। इन प्रतिभागियों से अपेक्षा है कि वे ऐसे एडवांस्ड AI इंजन विकसित करें जो बहु-फॉर्मेट दस्तावेजों से डेटा निकाल सके, उसे निर्धारित मानकों और नियामक ढांचे के खिलाफ स्वचालित रूप से मान्य कर सके तथा जोखिम विश्लेषण और अनुपालन सत्यापन जैसे कार्य कर सके। प्रशासनिक ढांचे को मिलेगी मजबूती आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस पहल का लक्ष्य न केवल वित्तीय रिपोर्टों की मानकीकरण प्रक्रिया को बेहतर बनाना है, बल्कि निवेशकों के भरोसे, सार्वजनिक विश्वास और कॉर्पोरेट प्रशासनिक ढांचे की मजबूती को भी बढ़ावा देना है। AI आधारित प्रणाली रिपोर्टों में टेक्स्ट, तालिकाएँ, हाइपरलिंक और एम्बेडेड डेटा को अलग-अलग पहचान सकती है, दस्तावेज़ को तार्किक भागों में विभाजित कर पूर्णता, अखंडता और अनुपालन का मूल्यांकन कर सकती है। प्रतियोगिता में चुने गए कुछ प्रतिभागी AIKosh प्लेटफॉर्म पर दिए गए सैंपल डाटा सेट का उपयोग कर समाधान को विकसित और परिष्कृत करेंगे। चुनौतियों के अगले चरण में करीब तीन टीमों को पांच दिन के ऑन-प्रिमाइज़ डेवेलपमेंट राउंड के लिए चयनित किया जाएगा, जहां वे अपने सिस्टम को और उन्नत कर सकेंगे। वित्तीय पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों के अनुसार, वित्तीय क्षेत्र में AI के इस तरह के प्रयोग से डेटा सत्यापन की गति, सटीकता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार संभव है, जिससे समय-समय पर वित्तीय अनियमितताओं की पहचान और जोखिम प्रबंधन में तेजी आएगी। इस तरह की पहल से भारत AI-आधारित नियामक तकनीकी ढांचे को मजबूत करते हुए वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इस चुनौती में आवेदन की अंतिम तिथि 22 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है, और इच्छुक भागीदार AIKosh पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण कर सकते हैं।

2026 विधानसभा चुनाव: इन 5 राज्यों की सत्ता में कौन है, जानें हर राज्य की मौजूदा सरकार

नईदिल्ली  भारतीय राजनीति के लिए 2026 का साल बेहद अहम रहने वाला है। अगले कुछ ही महीनों में देश के 5 राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ये चुनाव भले ही विधानसभा के लिए हो रहे हों, पर राष्ट्रीय राजनीति को भी बहुत मजबूती से प्रभावित करेंगे। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी अपनी सत्ता को कई नए राज्यों में स्थापित करने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ विपक्ष, खासकर कांग्रेस और क्षेत्रीय दल, देश की सबसे बड़ी पार्टी को कोई मौका नहीं देना चाहते हैं। ये विधानसभा चुनाव काफी हद तक ये भी बताने में कामयाब होंगे कि मोदी सरकार की नीतियां कितनी असरदार हैं और विपक्ष कितना एकजुट है। आइए, एक-एक करके इन राज्यों की मौजूदा सरकार, सियासी हालात और चुनावों की अहमियत पर नजर डालते हैं। 1: पश्चिम बंगाल में ममता के सामने बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की सरकार है, जिसने 2021 के विधानसभा चुनावों में 213 सीटें जीतीं और 48% वोट शेयर हासिल किया। ममता की लोकप्रियता और कल्याण योजनाएं उनकी ताकत हैं, लेकिन आर्थिक चुनौतियां और गवर्नेंस के विवाद उनकी सरकार पर भारी पड़ सकते हैं। बीजेपी 2021 में 77 सीटों तक पहुंची थी और अब बिहार में बड़ी जीत के बाद काफी आक्रामक है। कांग्रेस यहां कमजोर हो चुकी है और नेतृत्व के अभाव से जूझ रही है। अगर बीजेपी बंगाल में कुछ अच्छा कर जाती है तो यह उसकी राजनीति के लिए एक बहुत बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है। वहीं, TMC की हार उसे उन क्षेत्रीय पार्टियों की लिस्ट में डाल सकती है जो एक समय किसी राज्य में बहुत ताकतवर थीं लेकिन धीरे-धीरे कमजोर होती चली गईं। 2: असम में बीजेपी ने बनाई है मजबूत पकड़ असम में फिलहाल हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है। 2021 के चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने 75 सीटें जीतीं और अब लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की तैयारी कर रहा है। शर्मा ने पिछले कुछ सालों में बीजेपी के फायरब्रांड नेता के साथ-साथ एक ऐसे लीडर की छवि बनाई है जो विकास, सुरक्षा और पहचान की राजनीति पर जोर देता है। वहीं, विपक्ष में कांग्रेस गौरव गोगोई के नेतृत्व में अपनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। मुस्लिम वोटों के दम पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने वाली AIUDF जैसी पार्टियां भी आने वाले विधानसभा चुनावों में काफी कुछ तय करेंगी। ये चुनाव बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका है, तो वहीं अगर कांग्रेस यहां अच्छा करती है तो विपक्ष के लिए बड़ा बूस्ट होगा। 3: तमिलनाडु में नए चेहरों से होगी DMK की जंग तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी कि DMK सरकार है, जिसने 2021 में 234 में से 133 सीटें जीतीं थीं। इस सूबे में चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से 1.86 करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं और पार्टी करीब 2.5 करोड़ वोटों का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि बेरोजगारी जैसे मुद्दे पार्टी पर भारी पड़ सकते हैं और एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर तो है ही। वहीं, दूसरी तरफ AIADMK-बीजेपी गठबंधन भी अपना पूरा दम लगाए हुए है, जबकि विजय की TVK नई पार्टी के रूप में युवाओं को आकर्षित कर रही है। तमिलनाडु में जीत बीजेपी के लिए ऑर्गेनिक ग्रोथ का बड़ा मौका हो सकती है, जहां हिंदुत्व की सीमाएं हैं। वहीं, विपक्ष के लिए DMK की हार INDIA ब्लॉक को कमजोर करेगी। 4: केरल में फिर से जाग गई है कांग्रेस की उम्मीद केरला में पिनाराई विजयन की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी कि LDF की सरकार है, जिसने 2021 में 99 सीटें जीतीं। यह गठबंधन एक बार फिर सत्ता में वापसी चाहता है लेकिन पिछले कुछ महीने इसके लिए अच्छे नहीं रहे हैं। विजयन सरकार का सामाजिक कल्याण और विकास पर जोर है, लेकिन आर्थिक चुनौतियां और मुख्यमंत्री की ऑटोक्रेटिक स्टाइल एक बड़ा माइनस पॉइंट है। 2025 स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस-UDF ने अच्छा प्रदर्शन किया, जो LDF के लिए चिंता की बात है। वहीं, बीजेपी ने भी इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है और वह अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की कोशिश में है। कुल मिलाकर इन चुनावों में लेफ्ट, कांग्रेस और बीजेपी, तीनों का बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है। 5: NDA के लिए आसान नहीं होगी पुडुचेरी में वापसी पुडुचेरी में एन. रंगासामी के नेतृत्व में ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस यानी कि AINRC और बीजेपी का गठबंधन सत्ता में है। 2021 में 30 सीटों वाली विधानसभा में AINRC ने 10 और बीजेपी ने 6 सीटें जीती थीं, लेकिन फिलहाल गठबंधन में सब कुछ अच्छा होता नहीं दिख रहा। विपक्ष में DMK और कांग्रेस जैसी पार्टियां इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश की सत्ता पर अपना दावा मजबूती से पेश करती दिख रही हैं। लोकल गवर्नेंस और विकास के मुद्दे प्रमुख हैं, ऐसे में ये चुनाव बीजेपी के लिए दक्षिण में गठबंधन बचाने का टेस्ट है, जहां एंटी-इनकंबेंसी है। वहीं, अगर कांग्रेस और DMK की फिर से हार होती है तो उनके लिए पुडुचेरी में अपना संगठन बचाना मुश्किल हो सकता है। बीजेपी के लिए सुनहरा मौका हैं ये विधानसभा चुनाव कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इन 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए दक्षिण और पूर्व में विस्तार का सुनहरा मौका हैं, जहां वह हिंदुत्व और मोदी ब्रांड पर दांव लगा रही है। 2025 में दिल्ली और बिहार में जीत से उसका मनोबल ऊंचा है। विपक्ष के लिए ये बाउंस बैक का टेस्ट हैं, और लेफ्ट की हार से INDIA ब्लॉक कमजोर हो सकता है, जबकि कांग्रेस की जीत उसे नई ऊर्जा देगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि 2026 के नतीजे 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

चुनौतियाँ तो बहुत, लेकिन भारत में है ताकत: वर्ल्ड बैंक और अब इस एजेंसी की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली इंडियन इकोनॉमी लगातार दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं (India Fastest Growing Economy) में बना हुआ है. देश की ही नहीं, बल्कि तमाम ग्लोबल एजेंसियों ने भारत की तेज रफ्तार का लोहा माना है. एक ही दिन में मोदी सरकार के लिए विदेश से दो गुड न्यूज आईं. पहले वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने भारत की जीडीपी ग्रोथ (India GDP Growth) के अनुमान में तगड़ा इजाफा किया, तो उसे तुरंत बाद विदेश से एक और खुश करने वाली खबर डेलॉयट ने दी और कहा कि Indian Economy रुकने वाली नहीं है, तमाम चुनौतियों के बाद भी इसकी रफ्तार तेज रहेगी.  इस रफ्तार से दौड़ेगी भारत की इकोनॉमी Deloitte ने वित्त वर्ष 2026 में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ रेट 7.5% से 7.8% रहने का अनुमान जताया है. एजेंसी ने कहा है कि मजबूत घरेलू डिमांज और सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में मजबूती के चलते देश की रफ्तार तेज रहेगी.  डेलॉयट इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल ट्रेड टेंशन और ट्रंप टैरिफ की वजह से व्यापार में व्यवधान, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में नीतिगत बदलाव और अस्थिर कैश फ्लो समेत कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद FY26 की पहली छमाही में भारत नॉमिलन जीडीपी में 8% की ग्रोथ के साथ आर्थिक प्रदर्शन की दृष्टि से बेहतर बना हुआ है.  भारत पर भरोसा जताते हुए एजेंसी ने आगे कहा कि यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब भारत को रिकॉर्ड विदेशी निवेशकों की बिकवाली और करेंसी में गिरावट समेत तमाम महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन घरेलू सुधारों और त्योहारी डिमांड ने पॉजिटिव आउटलुक को बल दिया है.  भारत की दनादन डील से राहत रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने नई फ्री ट्रेड डील्स (Free Trade Deals) के जरिए अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाई है. देश ने ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ समझौते किए हैं, जबकि इजराइल संग बातचीत शुरू ट्रेड और इन्वेस्टमेंट संबंधों का विस्तार किया है. डेलॉयट ने कहा कि बाहरी जोखिम अभी भी हाई हैं, लेकिन 2025-26 में इनका पूरा प्रभाव नहीं दिखेगा, हालांकि FY2026-27 में वैश्विक अनिश्चितताओं से ग्रोथ रेट में थोड़ी कमी आ सकती है और ये 6.6-6.9% रह सकती है.  World Bank ने भी दी खुशखबरी  डेलॉयट से पहले वर्ल्ड बैंक ने भी भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाते हुए (World Bank Rise India's GDP Growth Forecast) 7.2% कर दिया, इससे पहले जून 2025 में जताया गया अनुमान 6.3% था, जिससे ये 0.9 फीसदी ज्यादा है. विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इंडियन इकोनॉमी की रफ्तार पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव बेहद सीमित रहेगा.  विश्व बैंक ने अमेरिकी टैरिफ में वृद्धि (US Tariff Hike) के बावजूद मजबूत घरेलू डिमांड का हवाला देते हुए FY2026 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाया है. रिपोर्ट में कहा गया कि घरेलू मांग में उम्मीद से अधिक मजबूती और उपभोग के बेहतर रुझानों के चलते भारत पर अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी का असर कम रहेगा. सरकार द्वारा की गई टैक्स कटौती (Govt Tax Cut) और ग्रामीण आय में वृद्धि से घरेलू खपत में मजबूती आई है, जिसके चलते भारत का आउटलुक बेहतर नजर आ रहा है.   

तेजस मार्क-2 की उड़ान जून में, क्या भारत को अब राफेल की आवश्यकता नहीं रहेगी?

नई दिल्ली पिछले दिनों डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी कामत ने एक बड़ी घोषणा की. कामत ने कहा कि देसी एडवांस फाइटर जेट तेजस मार्क-2 की पहली उड़ान इस साल जून-जुलाई में की जाएगी. यह स्वदेसी फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है. रिपोर्ट के मुताबिक इसी मार्च तक इस फाइटर जेट का प्रोटोटाइप तैयार हो जाएगा. इसके बाद उड़ान से पहले के तमाम ट्रायल किए जाएंगे. अगर सब कुछ निर्धारित योजना के मुताबिक चलता रहा तो 2029 से इस फाइटर जेट का मास प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा. 2030 तक एयरफोर्स को इसकी डिलिवरी शुरू कर दी जाएगी. यानी 2030 तक भारत के पास अपना 4.5 जेन फाइटर जेट होगा. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भारत देसी फाइटर जेट के इतना करीब है तो फिर वह फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद क्यों करना चाहता है? जबकि ये दोनों विमान 4.5 पीढ़ी के बताए जा रहे हैं. राफेल खरीद की योजना अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय में फ्रांस से 114 राफेल खरीदने के प्रस्ताव पर अंतिम चरम का विचार-विमर्श चल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक कुछ ही दिनों के भीतर रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक होने वाली है. इसी बैठक में इस मेगा डील पर चर्चा होगी. इस डील की संभावित लागत 3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है. भारतीय वायु सेना के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय की मुहर लगने के बाद यह मामला कैबिनेट के समक्ष जाएगा. फिर वहां से अंतिम मंजूरी मिलेगी. डील में क्या-क्या होने की संभावना संभावित डील के बारे में कहा जा रहा है कि 12 से 18 विमान सीधे फ्रांस के फ्लाइ-वे कंडीशन में आएंगे. बाकी के विमानों की निर्माण भारत में किया जाएगा. इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन और भारतीय कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम के बीच संयुक्त उपक्रम बनने की संभावना है. अगर यह डील हो जाती है तो भारत के पास कुल 176 राफेल लड़ाकू विमान हो जाएंगे. भारत पहले ही राफेल के दो स्क्वाड्रन खरीद चुका है. नौसेना ने भी 26 मरीन राफेल खरीदने का सौदा किया है. अगर यह डील अगले कुछ महीनों के दौरान हो जाती है तो इसकी भी डिलिवरी 2029 तक शुरू हो जाएगी.     तेजस मार्क-2 तैयार तो राफेल डील क्यों?     अब आते हैं इसी सवाल पर. भारतीय वायु सेना लड़ाकू विमानों की भारी कमी से जूझ रही है. उसके पास कम से कम 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए लेकिन अभी वह करीब 30 स्क्वाड्रन से काम चला रही है. एक स्क्वाड्रन में 18 विमान होते हैं. आने वाले समय में एयरफोर्स के कुछ और स्क्वाड्रन रिटायर होंगे. ऐसे में देश को भारी संख्या में लड़ाकू विमानों की जरूरत है. ऐसे में भारत को लड़ाकू विमान तो खरीदने ही होंगे. सब यह है कि उसे कौन से लड़ाकू विमान खरीदने चाहिए. दरअसल, देश को अलग-अलग मोर्चे और अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से तरह-तरह के लड़ाकू विमान चाहिए. तेजस मार्क-2 निश्चित तौर पर 4.5 पीढ़ी का फाइटर जेट है. राफेल भी 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. लेकिन दोनों की क्षमताओं में जमीन आसमान का अंतर है. तेजस मार्क-2 एक हल्का जेट है जबकि राफेल की गिनती दुनिया के सबसे एडवांस जेट में होती है. वह कई मायने में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को टक्कर देता है. राफेल Vs तेजस मार्क-2 राफेल और तेजस मार्क-2 दोनों 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. लेकिन इनकी क्षमता, भूमिका और तकनीक में काफी अंतर है. इन पांच प्वाइंट्स से आप पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगे कि भारत क्यों राफेल खरीद रहा है. आखिर क्यों तेजस मार्क-2, राफेल की जगह नहीं ले सकता.     क्लास और वेट: राफेल एक मीडियम श्रेणी का मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है. इसमें दो इंजन लगे हैं, जो इसे लंबी दूरी के मिशन और भारी हथियार ले जाने में समक्ष बनाते हैं. तेजस मार्क-2 एक मीडियम वेट फाइटर जेट है. लेकिन इसमें केवल एक इंजन है. यह तेजस मार्क-1ए से बड़ा है. इसको मिराज-2000 की जगह लेने के लिए डिजाइन किया गया है. यह राफेल से बहुत कम हथियार ले जा सकता है.     इंजन और ताकत: राफेल में दो स्नेकमा एम88 इंजन हैं. इनका कुल थ्रस्ट लगभग 150kN है. जबकि तेजस मार्क-2 में एक इंजन है और उसका थ्रस्ट 98kN है. राफेल में दो इंजन होने से उसकी सर्वाइवेलिटी भी तेजस मार्क-2 की तुलना में काफी अधिक है.     हथियार क्षमता: राफेल लगभग 9500 किलो का हथियार ले जा सकता है. इसमें बेहद एडवांस मिटिओर बीवीआर मिसाइल और स्कैल्प क्रूज मिसाइल है. यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. तेजस मार्क-2 में हथियार ले जाने की क्षमता 6500 किलो है. इसमें देसी अस्त्र मिसाइलें, ब्रह्मोस एनजी और तरह-तरह के स्मार्ट बम लगाए जाएंगे.     रडार और तकनीक: राफेल में दुश्मन की रडार से बचाने वाले RBE2 AESA रडार और स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट लगा है. जबकि तेजस मार्क-2 में उत्तम एईएसए रडार है. इसमें स्वदेसी वारफेयर सूट और आईआरएसटी सेंसर है.     कीमत: राफेल एक बहुत ही महंगा फाइटर जेट है. एक राफेल की अनुमानित कीमत 1600 से 2000 करोड़ रुपये के बीच है. जबकि तेजस मार्क-2 की कीमत 500 से 600 करोड़ रुपये है.