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जम्मू-कश्मीर: पुंछ पुलिस का आतंक पर प्रहार, पाक स्थित हैंडलर की संपत्ति जब्त

जम्मू जम्मू-कश्मीर की पुंछ पुलिस ने सीमा पार से सक्रिय आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ निर्णायक कानूनी कार्रवाई की है। पुलिस ने न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी सरगना की अचल संपत्ति जब्त कर ली है। पुलिस जानकारी के अनुसार यह कुर्की मंडी पुलिस स्टेशन में ई एंड आईएमसीओ अधिनियम की धारा 2/3 के तहत दर्ज एफआईआर के संबंध में की गई है। जब्त की गई संपत्ति में खसरा संख्या 491 के अंतर्गत आने वाली 10 कनाल 14 मरला भूमि शामिल है। यह भूमि पुंछ की तहसील मंडी में स्थित है। जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 22.05 लाख रुपए है। पुलिस के अनुसार जब्त की गई संपत्ति पुंछ के मंडी निवासी अब्दुल अजीज की है, जो वर्तमान में पाकिस्तान स्थित आतंकी सरगना के रूप में सक्रिय है। आरोपी पहले पाकिस्तान/पीओके भाग गया था और तब से देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए हानिकारक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। कानूनी प्रक्रिया से लगातार बचने के कारण न्यायालय ने आरोपी को भगोड़ा घोषित कर दिया। पुंछ पुलिस द्वारा उसकी गिरफ्तारी के लिए किए गए निरंतर प्रयासों के बावजूद, वह कानून की गिरफ्त से बाहर रहा। इसके कारण न्यायालय को उसकी अचल संपत्ति को कुर्क करने का आदेश देना पड़ा। इन निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए पुंछ पुलिस ने राजस्व विभाग के साथ घनिष्ठ समन्वय से सभी कानूनी प्रक्रियाओं, सत्यापन और दस्तावेजीकरण का पालन करते हुए कुर्की को क्रियान्वित किया। पुलिस के बयान में बताया गया कि यह कार्रवाई आतंकी नेटवर्क के वित्तीय और रसद संबंधी सहायता ढांचों को ध्वस्त करने और आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों को उनके संसाधनों से वंचित करने की व्यापक और सतत रणनीति का हिस्सा है। जिला पुलिस पुंछ पाकिस्तान स्थित आतंकी संचालकों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल सभी तत्वों के खिलाफ दृढ़तापूर्वक और कानूनी रूप से कार्रवाई करने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराती है और जनता को आश्वस्त करती है कि शांति, जन सुरक्षा और राष्ट्र की संप्रभुता के हित में ऐसे उपाय जारी रहेंगे।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी बोले— ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने स्थापित किया नया सुरक्षा न्यू नॉर्मल

जयपुर भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कहना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने एक न्यू नॉर्मल स्थापित किया है। इस ऑपरेशन ने भारतीय सेना की तेज प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और सटीक कार्रवाई की क्षमता को दर्शाया। यह एक परिपक्व, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बल की तस्वीर प्रस्तुत करता है, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है। सेना प्रमुख ने सेना दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में यह बातें कहीं। उन्होंने कहा, ''पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना की सोच में एक स्पष्ट बदलाव आया है। हम केवल वर्तमान चुनौतियों पर ही नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रहे हैं। इसी दिशा में नई संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार लैस और ट्रेन किया जा रहा है। इस परिवर्तन प्रक्रिया के अंतर्गत भैरव बटालियन, अशनि प्लाटून, शक्तिबान रेजीमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयां खड़ी की गई हैं। ये संरचनाएं भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक चुस्त, तत्पर एवं मिशन-केंद्रित सेना के निर्माण को दर्शाती हैं।'' सेना प्रमुख ने कहा, "हमारे इस परिवर्तन की आधारशिला आत्मनिर्भरता है। इसकी झलक आपको परेड के दौरान 'मेड इन इंडिया' उपकरणों द्वारा देखने को मिली होगी। भारतीय सेना को भविष्य में भी ऐसे हथियार प्रणालियों और उपकरण चाहिए, जो भारत में ही डिजाइन और डेवलप किए गए हों। स्वदेशी अब केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। हम द्वि-उपयोगी संसाधनों पर भी विशेष जोर दे रहे हैं, ऐसे संसाधन जो सेना और सिविलियन दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोगी हों। जो इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेना के लिए विकसित हो, वह देश के समग्र विकास में भी योगदान दे।" सेना प्रमुख ने कहा कि वह सेना दिवस पर भारतीय सेना के सभी सैनिकों, हमारे सिविलियन कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। इस पावन अवसर पर उन वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं जिन्होंने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने राजस्थान सरकार और जयपुर के नागरिकों का दिल से धन्यवाद किया। सेना प्रमुख के मुताबिक, जयपुर में सेना दिवस का आयोजन सेना को नागरिकों के और करीब लाने का प्रयास है। सेनाध्यक्ष का कहना है कि भारतीय सेना एक फ्यूचर-रेडी फोर्स के रूप में आगे बढ़ रही है, जहां बेहतरीन प्रशिक्षित सैनिक, आधुनिक सिस्टम और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की क्षमता मौजूद है। टेक्नोलॉजी का उपयोग जवानों को रिप्लेस करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें और सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है। अब तक की प्रगति को आगे बढ़ाते हुए, अगले दो वर्षों को नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता के वर्ष घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को एक डेटा-आधारित, नेटवर्क-सक्षम और सभी हितधारकों के साथ पूर्णत: एकीकृत बल में रूपांतरित करना है। जयपुर में हुई सेना दिवस की परेड में परंपरा और ट्रांसफॉर्मेशन का सुंदर संगम देखने को मिला। नेपाल आर्मी बैंड ने हमारे पुराने और मजबूत संबंधों को दर्शाया, जबकि नई इकाइयों की भागीदारी ने सेना की बढ़ती ताकत को प्रदर्शित किया।

थाईलैंड में भीषण रेल दुर्घटना, मृतकों की संख्या 32 हुई, भारत ने व्यक्त की संवेदना

नई दिल्ली भारत ने थाईलैंड में बुधवार को हुए ट्रेन हादसे में लोगों की मौत पर अपनी हजारी संवेदना व्यक्त की। ट्रेन कोच पर क्रेन गिरने से करीब 32 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 70 लोग घायल हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "14 जनवरी, 2026 को थाईलैंड के नाखोन रत्चासिमा में हुए ट्रेन एक्सीडेंट से हम बहुत दुखी हैं। इस दुख की घड़ी में थाईलैंड के लोगों और सरकार के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं। हम प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति व्यक्त करते हैं और सभी घायलों के जल्दी ठीक होने की कामना करते हैं।" स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, नाखोन रत्चासिमा प्रांत में पैसेंजर ट्रेन पर क्रेन गिरने से कई कोच पटरी से उतर गए। यह घटना सुबह करीब 9:05 बजे सिखियो जिले में हुई। जिस जगह पर यह घटना घटी, वह थाई राजधानी से करीब 230 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। जब यह हादसा हुआ, तब ट्रेन उबोन रत्वथानी प्रांत जा रही थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार क्रेन का इस्तेमाल मौजूदा रेल लाइन के पैरेलल चल रहे एक हाई-स्पीड रेलवे प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन साइट पर किया जा रहा था। जब ट्रेन उस इलाके से गुजर रही थी, तो क्रेन का बैलेंस बिगड़ गया और वह गिरकर एक चलती हुई ट्रेन की बोगी से टकरा गई। क्रेन के टकराने के बाद ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए। इसके अलावा ट्रेन के कुछ हिस्सों में आग लग गई। इससे मौके पर और अफरा-तफरी मच गई। सोशल मीडिया पर हादसे के कई वीडियो सामने आए हैं। रेस्क्यू टीम के लोग पटरी से उतरे डिब्बों के अंदर फंसे यात्रियों तक पहुंचने के लिए मुड़े हुए मेटल को काट रहे थे। बचाव और राहत काम करने के लिए फायरफाइटर्स, मेडिकल टीमों और डिजास्टर रिस्पॉन्स यूनिट्स सहित इमरजेंसी रेस्पॉन्डर्स को मौके पर भेजा गया। थाई सरकार के पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे के तुरंत बाद कई बचाव टीमों को तैनात किया गया था। हादसे के समय कई यात्री डिब्बों के अंदर फंसे हुए थे।

अमेरिका का सख्त संदेश: हमास ने हथियार नहीं डाले तो होंगे गंभीर परिणाम, बंधकों को लेकर बढ़ा दबाव

वॉशिंगटन अमेरिका ने गाजा संघर्ष को जड़ से खत्म करने के लिए पीस प्लान का दूसरा चरण लॉन्च कर दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति को इस बात पर अब भी यह संदेह है कि पीस प्लान के तहत हमास हथियार डालने के लिए तैयार भी होगा या नहीं। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर हमास आखिरी मरे हुए बंधक के अवशेष वापस नहीं करता है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। दो सीनियर प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शांति योजना के दूसरे चरण में एक ट्रांजिशनल टेक्नोक्रेटिक फिलिस्तीनी संस्था, नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (एनसीएजी) का गठन किया जाएगा। इसका मकसद सीजफायर के प्रबंधन से आगे बढ़ते हुए गाजा में विसैन्यीकरण, टेक्नोक्रेटिक शासन और पुनर्निर्माण की दिशा में बदलाव की प्रक्रिया शुरू करना है। ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि वॉशिंगटन को उम्मीद है कि हमास समझौते के तहत अपनी बाकी जिम्मेदारियों को पूरा करेगा। इसमें आखिरी मरे हुए होस्टेज की वापसी भी शामिल है। उन्होंने चेतावनी भी दी है कि ऐसा न करने पर गंभीर नतीजे होंगे। सीनियर अधिकारियों ने इस बात पर संदेह भी जताया है कि हमास पूरी तरह से हथियार छोड़ेगा या नहीं। समूह ने मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में सालों लगाए हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गाजा के भविष्य के लिए टेरर क्षमता को हटाना जरूरी है। अगर एक और लड़ाई की संभावना बनी रहती है तो पुनर्निर्माण आगे नहीं बढ़ सकता। अधिकारियों ने बताया कि एनसीएजी को क्षेत्रीय मीडिएटर्स और फिलिस्तीनी समूह के साथ कंसल्टेशन के जरिए सावधानी से चुना गया था और इसका मकसद एक नॉन-पॉलिटिकल, सर्विस-ओरिएंटेड एडमिनिस्ट्रेशन के तौर पर काम करना है। इसके तहत गाजा को फिर से बनाने और वहां रहने वालों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाने पर फोकस किया करेगा। उन्होंने कहा कि सालों में पहली बार गाजा पर हमास या फिलिस्तीनी अथॉरिटी का राज नहीं होगा। अधिकारियों ने कहा कि दूसरे फेज में जाने का फैसला तब लिया गया, जब होस्टेज के अनसुलझे मामलों पर काम जारी था। सभी जिंदा बंधक वापस आ गए हैं और 28 मरे हुए होस्टेज में से 27 के अवशेष भी मिल गए हैं। अधिकारी ने आगे कहा कि सीजफायर जारी रखते हुए आखिरी अवशेष को ढूंढने की कोशिशें जारी हैं। अधिकारियों ने कहा कि टेरर इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करना और भारी हथियार हटाना मुख्य लक्ष्य हैं। गाजा को युद्ध के चक्र में वापस जाने से रोकने के लिए ये कदम जरूरी हैं। इसका मकसद ऐसे हालात बनाना है जहां रिकंस्ट्रक्शन की कोशिशें लंबे समय तक चल सकें और रोजमर्रा की जिंदगी बेहतर हो सके। अधिकारियों ने पहले चरण के दौरान हुई बड़ी मानवीय उपलब्धियों की ओर इशारा किया और कहा कि सीजफायर के बाद मदद के 53,000 से ज्यादा ट्रक गाजा में दाखिल हुए। 20 लाख से ज्यादा पैलेट सामान पहुंचाया गया। हजारों बच्चों तक वैक्सीनेशन ड्राइव पहुंची और मलबे के बड़े हिस्से साफ किए गए। विटकॉफ ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में क्षेत्रीय बिचौलियों की भूमिका पर भी जोर दिया और कहा कि अमेरिका मिस्र, तुर्किए और कतर का उनके जरूरी बिचौलिए प्रयासों के लिए बहुत आभारी है, जिनकी वजह से अब तक डेवलपमेंट मुमकिन हुई है। जैसे-जैसे प्लान आगे बढ़ेगा, ये देश अहम भूमिका निभाते रहेंगे।

धामी सरकार का बड़ा कदम: यूसीसी में बदलाव, उपनल कर्मियों पर भी आया बड़ा निर्णय

देहरादून मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अध्यक्षता में आज बृहस्पतिवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के 19 प्रस्ताव रखे गए। इसमें यूसीसी में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। वहीं, उत्तराखंड पर्यटन की नियमावली को भी मंजूरी मिल गई है। वहीं, उपनल कर्मचारियों के लिए भी समान वेतन को लेकर बड़ा निर्णय हुआ है। ये हुए फैसले     पेराई सत्र 2025-26 के लिए 270 करोड़ की शासकीय प्रतिभूति यानी स्टेट गारंटी को मंजूरी। अब चीनी मिलें ऋण ले सकेंगी।     चीनी मिलों के गन्ने के मूल्य को मंजूरी। 405 रुपये अगेती के मिलेंगे।     निर्वाचन विभाग में सेवा नियमावली को मंजूरी।     उत्तराखंड संस्कृत अकादमी का नाम उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम होगा।     यूकॉस्ट के तहत अल्मोड़ा व चंपावत के साइंस सेंटर के लिए 6-6 पद स्वीकृत किए गए।     2024-25 की ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट सदन में रखी जाएगी।     वन निगम की रिपोर्ट सदन में रखने पर मुहर।     बागवानी मिशन के तहत एंटी हेलनेट पर भारत सरकार की 50% के साथ अब राज्य से 25% अतिरिक्त मिलेंगे।     दून विवि में हिन्दू अध्ययन केंद्र के तहत 6 पदों (4 अकादमी,2 अन्य) को स्वीकृति मिली।     उपनल कर्मचारियों के लिए: पूर्व में चरणों में समान कार्य समान वेतन के 12 वर्ष के बजाय 10 वर्ष पूरे करने वालों को समान कार्य समान वेतन 7000 से 8000 कर्मचारियों को मिलेगा। 2018 से पूर्व के बाकी को भी अलग से मिलेगा लाभ। भविष्य में उपनल के माध्यम से भूतपूर्व सैनिकों के लिए पुनर्वास कार्य ही किए जाएंगे।     सतेंद्र कुमार बनाम सीबीआई के तहत एनडीपीएस, पॉक्सो, के तहत विशेष न्यायालय बनेंगे। 16 न्यायालय बनेंगे, जिसमें 144 पद स्वीकृत हैं। देहरादून हरिद्वार नैनीताल और उधमसिंह नगर में 7 एडीजी, 9 एसीजेएम स्तर के न्यायालय होंगे।     उत्तराखंड की विधानसभा के शीतकालीन सत्र के लिए सीएम को निर्णय के लिए अधिकृत किया गया।     खनन विभाग: नंधौर व अन्य नदियों में खनन का आदेश संशोधित किया गया है।     विभिन्न खेल प्रतियोगिता के लिए विधायक स्तर की चैंपियन ट्रॉफी और एक लाख, सांसद स्तर पर चैंपियनशिप ट्राफी और 2 लाख, राज्य स्तर पर 5 लाख और ट्रॉफी मिलेगी।     ब्रिडकुल रोपवे, टनल व कैविटी पार्किंग, ऑटोमेटेड या मेकैनिकल पार्किंग भी बनाएगा।     बीएनएस की धारा 330 में दो पक्षों के सहमत होने पर विशेषज्ञ की जरूरत नहीं है। उसका एक फॉरमेट बनाने के लिए नियमावली को मंजूरी।     यूसीसी में संशोधन को मंजूरी। अध्यादेश आएगा। जनवरी 2025 से पूर्व शादी वालों को छह माह के बजाय एक साल में कराना होगा विवाह पंजीकरण। रजिस्ट्रार जनरल अब अपर सचिव लेवल के अधिकारी होंगे। समय से काम न करने पर फाइन के बजाय पेनाल्टी किया गया।     उत्तराखंड पर्यटन की नियमावली को मंजूरी, होम स्टे योजना का लाभ स्थानीय को ही मिलेगा। अब इसके लिए स्थायी निवास जरूरी होगा। ब्रेड एन्ड ब्रेकफास्ट ही करा सकेंगे बाहरी राज्यों के लोग। होम स्टे जैसा कोई लाभ नहीं मिलेगा।      केदारनाथ धाम में एक पायलट प्रोजेक्ट बनेगा। इसमें गोबर व चीड़ की पत्तियों से बायो मास पैलेट बनेंगे। पर्यटन विभाग करेगा।  

US में भारतीयों के खिलाफ नफरत क्यों बढ़ी? ट्रंप दौर की नीतियों ने कैसे बनाया टारगेट

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत वीजा नियमों में किए गए बदलाव भारतीयों के लिए कई परेशानियां खड़ी कर रहे हैं। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक कुशल कामगारों के लिए मिलने वाले H-1B वीजा नियमों में बदलाव के बाद भारतीय प्रोफेशनल्स और भारतीय मूल के कारोबारियों के खिलाफ अमेरिका में नफरत भरा माहौल बना है और भारतीयों के प्रति भेदभाव भी बढ़ता दिख रहा है।   बता दें कि ट्रंप सरकार ने नए नियमों के तहत H-1B वीजा के लिए आवेदन शुल्क बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दिया गया है। इसके साथ ही वेतन के आधार पर चयन की व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें ज्यादा सैलरी वाली नौकरियों को प्राथमिकता मिलेगी। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव अमेरिकी कामगारों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। वहीं फरवरी से नियम और सख्त होने वाले हैं। अमेरिकी अधिकारी सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले लेवल-4 H-1B आवेदकों को प्राथमिकता देंगे। इससे कई कुशल विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए वीजा पाना और मुश्किल हो जाएगा। बड़ी कंपनियां निशाने पर रिपोर्ट में बताया है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा किए गए इन बदलावों के बाद हालात और बदतर हुए हैं। कई बड़ी अमेरिकी कंपनियां, जैसे फेडएक्स, वॉलमार्ट और वेरिजोन को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर निशाना बनाया गया है। सोशल मीडिया पर इन कंपनियों पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वे गैरकानूनी तरीके से भारतीयों को नौकरियां ‘बेच’ रही हैं। नौकरी चोर’ और ‘वीजा स्कैमर’ का टैग एडवोकेसी ग्रुप ‘स्टॉप एएपीआई हेट’ और काउंटर टेररिज्म फर्म ‘मूनशॉट’ के मुताबिक पिछले साल नवंबर में दक्षिण एशियाई समुदायों के खिलाफ हिंसा की धमकियों में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसी दौरान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर गालियों और अपशब्दों के इस्तेमाल में भी 69 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ। बीते दिसंबर में भी एक भारतीय कंपनी को जमकर निशाना बनाया गया। दरअसल सोशल मीडिया पर फेडएक्स के एक क्षतिग्रस्त ट्रक का वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद भारतीय मूल के सीईओ राज सुब्रमणियम को निशाना बनाया गया। ऑनलाइन पोस्ट में ‘अमेरिकी कंपनियों पर भारतीय कब्जा रोकने’ जैसी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। हालांकि फेडएक्स ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। मामले पर बात करते हुए सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राकिब नाइक ने बताया कि इनमें से कई हमले संगठित कैंपेन का हिस्सा प्रतीत हैं। उनके मुताबिक, सरकारी स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से लोन लेने वाले भारतीय-अमेरिकी कारोबारियों को खास तौर पर निशाना बनाया गया है। नाइक ने चेतावनी दी कि भेदभाव बढ़ रहा है और भारतीयों को ‘नौकरी चोर’ और ‘वीजा स्कैमर’ तक कहा जा रहा है। ऐसे माहौल में कम्पनियां समावेशी वातावरण बनाने की नीति को होल्ड पर डाल चुकी हैं।  

आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान, साख बचाने के लिए सरकारी उपक्रम बेचने की मजबूरी

नई दिल्ली पाकिस्तान की सरकारी कंपनियों को राजनीतिक दखल, खराब शासन और अव्यवस्था की वजह से भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। एक पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हालात ऐसे हैं कि सरकारी कंपनियां बहुत कम कीमतों पर प्रोडक्ट्स और सर्विस बेचने के लिए मजबूर हैं। पाकिस्तान के एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार शासन में सुधार करने के बजाय, एक के बाद एक आने वाली सरकारें मुश्किल फैसले टालती रहती हैं। सरकारी कंपनियों को खराब परफॉर्मेंस, राजनीतिक हस्तक्षेप और कमजोर उत्तरदायित्व के बावजूद नियमित तौर पर बनाए रखा जाता है। जब वे भारी नुकसान और बहुत ज्यादा कर्ज जमा कर लेती हैं, तभी अचानक निजीकरण को हल मान लिया जाता है। यह पैटर्न सभी क्षेत्रों में एक जैसा दिखता है। व्यवसायिक मैनेजमेंट की जगह धीरे-धीरे राजनीतिक नियुक्ति ले लेती है, और कमर्शियल अनुशासन खत्म हो जाता है। सालों की अनदेखी और पब्लिक फंड डालने के बाद ऐसी कंपनियों को बेचने से नुकसान सामाजिक हो जाता है और फायदे प्राइवेट हो जाते हैं। पाकिस्तान में निजीकरण शायद ही कभी कोई जानबूझकर या अच्छी तरह से प्लान किया गया इकोनॉमिक रिफॉर्म रहा हो। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) इस नाकामी को साफ तौर पर दिखाता है। कभी एक जानी-मानी क्षेत्रीय एयरलाइन, पीआईए को ज्यादा स्टाफ, राजनीतिक हस्तक्षेप और बिजनेस लॉजिक की कमी ने कमजोर कर दिया। एक के बाद एक सरकारों ने एयरलाइन को एक कमर्शियल एंटिटी के बजाय सिर्फ पैसे कमाने का जरिया माना। इसे चालू रखने के लिए अरबों रुपए खर्च किए गए, जबकि सर्विस की क्वालिटी खराब होती गई और प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई। पीआईए का निजीकरण किया जाना कोई रणनीतिक योजना नहीं थी। यह लंबे समय से चली आ रही गवर्नेंस की नाकामी को मानना ​​था। प्राइवेटाइजेशन के सपोर्टर अक्सर टेलीकॉम कंपनी पीटीसीएल को इस बात का सबूत बताते हैं कि प्राइवेट ओनरशिप से परफॉर्मेंस बेहतर होती है। असल में, प्राइवेटाइजेशन के बाद पीटीसीएल ने ऑपरेशनल और तकनीकी सुधार किए। नेटवर्क मॉडर्नाइजेशन और सर्विस का विस्तार हुआ। फिर भी यह उदाहरण पाकिस्तान के प्राइवेटाइजेशन के तरीकों में गहरी कमियों को भी सामने लाता है। सालों बाद भी, हजारों पुराने सरकारी कर्मचारी और पेंशनर पेंशन, सर्विस रेगुलराइजेशन, और प्राइवेटाइजेशन के बाद के अधिकारों को लेकर चल रहे केस में फंसे हुए हैं। ये अनसुलझे झगड़े बताते हैं कि कैसे इंसानी और कानूनी खर्चों को दूसरी चिंता माना गया। आर्टिकल में कहा गया है कि वे एक ऐसे प्रोसेस का खुलासा करते हैं जो इंस्टीट्यूशनल जिम्मेदारी को सुरक्षित रखने के बजाय लेनदेन को पूरा करने पर फोकस करता है। प्राइवेटाइजेशन से कंज्यूमर्स को अपने आप कम कीमतों का फायदा मिलता है, यह सोच गुमराह करने वाली है। पाकिस्तान का अपना अनुभव इस सोच को गलत साबित करता है। के-इलेक्ट्रिक इसका एक साफ उदाहरण है। प्राइवेटाइजेशन के बावजूद, बिजली के टैरिफ कम नहीं हुए हैं, बल्कि रिकॉर्ड लेवल तक बढ़ गए हैं।

ट्रंप पर हमले की तस्वीर वायरल, ईरान ने दी सख्त चेतावनी — कहा ‘इस बार बचना मुश्किल’

तेहरान ईरान के ताजा हालात चिंताजनक हैं। अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की आशंका के बीच अब ईरान ने भी अपनी भौहें सिकोड़ ली हैं। ईरान ने एक तस्वीर के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दे दी है। इस बीच तनावपूर्ण हालात में ब्रिटेन ने तेहरान में अपने दूतावास को कुछ समय के लिए बंद कर दिया है। इसके साथ ही ब्रिटेन ने अपने सभी डिप्लोमैटिक स्टाफ को वापस बुला लिया है। ब्रिटेन के फॉरेन ऑफिस ने कहा, “हमने तेहरान में ब्रिटिश दूतावास को कुछ समय के लिए बंद कर दिया है। यह अब रिमोटली ऑपरेट होगा।” ईरान ने 2024 में पेन्सिलवेनिया में ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले की एक तस्वीर दिखाई, जिसमें उन्हें एक कैंपेन रैली में मारने की कोशिश करते हुए दिखाया गया था। साथ ही चेतावनी दी गई, "इस बार निशाना चूकेगा नहीं।" फारसी से ट्रांसलेट किए गए इस मैसेज की तस्वीरें कई मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए तेजी से ऑनलाइन फैलीं और ईरान के सरकारी टेलीविजन पर भी दिखाई गईं। यह ब्रॉडकास्ट ट्रंप की बार-बार दी गई चेतावनियों के बाद आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने लिखा, "अगर ईरान शांति से विरोध करने वालों को मारता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा। हम आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।" ईरानी मीडिया ने जिस तस्वीर का इस्तेमाल किया, वह जुलाई 2024 में पेन्सिलवेनिया के बटलर में एक कैंपेन रैली के दौरान ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले की थी। उस समय थॉमस क्रुक्स नाम के एक बंदूकधारी ने स्टेज पर गोलियां चलाई थीं, जो ट्रंप के कान को छूते हुए निकल गई थी। इस घटना ने अमेरिका को चौंका दिया था। हाल के दिनों में ईरान और यूरोपीय देशों के बीच डिप्लोमैटिक रिश्ते और खराब हो गए हैं। अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद ईरान ने फिलहाल अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है। बढ़ते तनाव के बावजूद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक इंटरव्यू में कहा है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है और पिछले दो दशकों से उसने यही रुख बनाए रखा है। कूटनीति युद्ध से कहीं बेहतर है। अराघची ने वाशिंगटन से सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत से समाधान निकालने का आग्रह किया है।

अमेरिका के दबाव के सामने साथ आए शिया और सुन्नी देश, सऊदी अरब ने ईरान को दिया बड़ा संकेत

तेहरान अमेरिका की ओर से ईरान को लगातार हमले की धमकियां दी जा रही हैं। इस बीच इस्लामिक जगत में शिया और सुन्नी मुसलमान देशों के बीच के मतभेद खत्म होते दिख रहे हैं। अमेरिकी हमले की स्थिति में सऊदी अरब ने ईरान को भरोसा दिया है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा। सऊदी अरब ने ईरान को बताया है कि वह अपनी जमीन का उसके खिलाफ हमलों में इस्तेमाल नहीं होने देगा। यही नहीं वह अपने एयरस्पेस से भी ऐसे किसी लड़ाकू विमान को गुजरने नहीं देगा, जिसका मकसद ईरान पर हमला करना हो। सऊदी अरब की ओर से ईरान को मिला यह भरोसा अहम माना जा रहा है।   वॉशिंगटन से कई बार ईरान को धमकी मिल चुकी है, जिसमें उसने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरती गई तो वह सैन्य हस्तक्षेप करेगा। सऊदी अरब को अमेरिका के करीबी दोस्तों में शुमार किया जाता है। इसके अलावा शिया और सु्न्नी विवाद के कारण भी ईरान और सऊदी अरब के बीच एक दूरी रही है। ऐसे में सऊदी अरब की तरफ से ईरान को भरोसा दिया जाना बड़ा संकेत है। खासतौर पर तब जबकि पाकिस्तान समेत किसी भी इस्लामिक देश ने ईरान के साथ एकता की बात नहीं की है। पाकिस्तान अकसर इस्लामिक एकता का राग अलापता रहा है, लेकिन अमेरिकी की ओर से ईरान को मिल रही धमकियों के बाद भी वह चुप है। अमेरिका के मिडल ईस्ट में कई ठिकाने, सऊदी अरब में भी सऊदी विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने एएफपी को बताया, 'हमारी ओर से ईरान को स्पष्ट कर दिया गया है कि सऊदी अरब उसके खिलाफ किसी भी अलायंस का हिस्सा नहीं बनेगा। इसके अलावा हम ईरान पर हमले के लिए अपनी जमीन और एयरस्पेस का भी इस्तेमाल नहीं होने देंगे।' अमेरिका के मिडल ईस्ट में कई ठिकाने हैं। इनमें से कुछ सऊदी अरब में भी हैं। माना जाता रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग में सऊदी अऱब किसी का पक्ष नहीं लेगा। उसका अब भी ऐसा ही स्टैंड है, लेकिन ईरान को उसने जो भरोसा दिया है, वह अहम है। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इस कदर है कि तेहरान ने एयरस्पेस बंद कर दिया है।  

PM मोदी बोले- डिजिटल पेमेंट से स्वास्थ्य तक, भारत ने दुनिया में बनाई सशक्त पहचान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने भारत की लोकतांत्रिक यात्रा, आर्थिक उपलब्धियों, सामाजिक समावेशन और वैश्विक योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं है, बल्कि हमारे मूल्यों, सोच और कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज कई क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। भारत का यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली बन चुका है। इसके साथ ही भारत विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है और यहां तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम मौजूद है। वैश्विक विमानन बाजार में भारत तीसरे स्थान पर है, जबकि दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क और तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क भी भारत के पास है। इसके अलावा भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक और तीसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में लोकतंत्र इसलिए परिणाम देता है, क्योंकि देश के हर नागरिक की प्राथमिकता सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा, "हम बिना किसी भेदभाव के सार्वजनिक कल्याण की भावना से हर व्यक्ति के लिए काम कर रहे हैं।" इसी सोच का परिणाम है कि पिछले कुछ वर्षों में देश में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने इसे 'डेमोक्रेसी डिलीवर्स,' यानी लोकतंत्र के परिणाम देने का जीवंत उदाहरण बताया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में लोगों की आकांक्षाओं और सपनों को ठोस कार्यों में बदला गया है। प्रक्रियाओं से लेकर तकनीक तक हर क्षेत्र में लोकतंत्रीकरण किया गया ताकि आम नागरिक के रास्ते में कोई बाधा न आए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक भावना हमारी नसों में दौड़ती है, हमारे विचारों में बसती है और हमारे मूल्यों में रची-बसी है। कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले पूरी दुनिया इस संकट से जूझ रही थी और भारत भी इससे अछूता नहीं था, लेकिन इन चुनौतियों के बीच भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराईं। लोगों का स्वास्थ्य, कल्याण और भलाई भारत के मूल्यों में निहित है, और ये मूल्य हमें हमारे लोकतंत्र से मिले हैं। प्रधानमंत्री ने भारत के लोकतंत्र के विशाल स्वरूप पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 2024 में हुए आम चुनाव मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास था। करीब 98 करोड़ नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकृत थे, जो कुछ महाद्वीपों की कुल आबादी से भी अधिक है। इन चुनावों में 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से ज्यादा राजनीतिक दलों ने भाग लिया। खास बात यह रही कि महिला मतदाताओं की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर रही। महिलाओं की भूमिका पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारतीय महिलाएं केवल भागीदारी नहीं कर रहीं, बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश की राष्ट्रपति एक महिला हैं और जिस दिल्ली शहर में यह सम्मेलन हो रहा है, वहां की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। ग्रामीण और स्थानीय निकायों में करीब 15 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, जो लगभग 50 प्रतिशत जमीनी स्तर के नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आंकड़ा वैश्विक स्तर पर बेजोड़ है। भारत की विविधता का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश में सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं और 900 से अधिक टीवी चैनल विभिन्न भाषाओं में प्रसारित होते हैं। हजारों अखबार और पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं। उन्होंने कहा कि इतनी व्यापक विविधता को बहुत कम समाज इतनी सफलतापूर्वक संभाल पाते हैं। भारत इस विविधता का उत्सव मनाता है, क्योंकि हमारे लोकतंत्र की नींव मजबूत है। प्रधानमंत्री ने भारत के लोकतंत्र की तुलना एक विशाल वृक्ष से करते हुए कहा कि यह गहरी जड़ों से समर्थित है। उन्होंने विश्वास जताया कि यही मजबूत लोकतांत्रिक आधार भारत को भविष्य में भी प्रगति, समावेशन और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाता रहेगा।