samacharsecretary.com

ममता vs ED सुनवाई में हाई वोल्टेज ड्रामा: कपिल सिब्बल की दलील पर मीलॉर्ड का सख्त रुख

नई दिल्ली कोलकाता में पिछले दिनों पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापे मामले में आज (गुरुवार, 15 जनवरी को) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। यह केस ED बनाम ममता बनर्जी का मामला बन गया है। इस बीच, ईडी ने एक नई याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल पुलिस के तीन बड़े अधिकारियों, जिनमें डीजीपी राजीव कुमार भी शामिल हैं, को निलंबित किए जाने की मांग की है। ED का आरोप है कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की कथित तौर पर चोरी में मदद की। अर्जी में यह भी उल्लेख किया गया है कि डीजीपी राजीव कुमार पूर्व में कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठे थे।   ईडी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू और ईडी के स्पेशल वकील जोहेब हुसैन पेश हुए तो पश्चिम बंगाल और ममता बनर्जी की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। सुनवाई के दौरान SG मेहता ने आरोप लगाया कि I-PAC के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच में बाधा डाली और फाइलें/डिवाइस ले गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में कल कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा हुआ। उन्होंने राज्य में भीड़तंत्र हावी होने का भी आरोप लगाया और कहा कि राज्य में लोकतंत्र नहीं बचा है। भीड़तंत्र लोकतंत्र पर हावी SG मेहता ने शीर्ष अदालत से कहा कि हमने हाई कोर्ट में संपर्क किया था लेकिन वहां अव्यवस्था उत्पन्न हो गई। उन्होंने कहा, "अब देखिए क्या होता है जब भीड़तंत्र लोकतंत्र पर हावी हो जाता है। देखिए HC जज ऑर्डर में क्या कहते हैं। इसमें कहा गया है कि बड़ी संख्या में वकील इकट्ठा हुए और हंगामा किया। उन्होंने टॉप कोर्ट से कहा कि हाई कोर्ट में माहौल सुनवाई के लिए ठीक नहीं है। इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि वह नोटिस जारी कर मामले की समीक्षा करना चाहती है। यह बहुत गंभीर मामला है शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि ईडी की छापेमारी संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट में हुए हंगामे से वह अत्यंत व्यथित है। इसी बीच, ASG राजू ने कहा, "मैं वहां था। मैं बता सकता हूं कि वहां क्या हुआ था?" इसी बीच, TMC चीफ ममता बनर्जी का पक्ष रख रहे कपिल सिब्बल ने कहा, "मैं भी वहीं था।" इस पर जस्टिस मिश्रा ने झिड़की देते हुए कहा, "यहां हंगामा मत कीजिए।" इसके बाद पीठ ने मौखिक टिप्पणी की, ‘‘यह बहुत गंभीर मामला है; हम नोटिस जारी करेंगे। हमें इसकी समीक्षा करनी होगी।’’ ASG राजू का माइक बार-बार बंद किया गया SG तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट में कल की सुनवाई के दौरान ASG राजू का माइक बार-बार बंद किया गया। उन्होंने कहा कि वह इससे ज्यादा नहीं कहना चाहते। उनका इशारा हाई कोर्ट में सुनवाई नहीं कराने का था। उन्होंने कहा कि वो इस अदालत में मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए आए हैं। इसी बीच, कपिल सिब्बल ने कहा, "मुझे भी अपनी बात रखने दीजिए। वे जानते हैं। मैं तृणमूल कांग्रेस के चेयरमैन की तरफ से पेश हो रहा हूं।" इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा, “हमें सुनने दीजिए। जिस तरह से हाई कोर्ट में हुआ है, उससे हम बहुत परेशान हैं….” आप मेरे मुंह में अपने शब्द नहीं डाल सकते सिब्बल ने आगे कहा, "सुनवाई कल हुई थी। इस कोर्ट को यह मानना ​​होगा कि HC न्याय नहीं दे सकता है।" इस पर शीर्ष अदालत सिब्बल पर भड़क उठा। SC जज ने कहा, "आप मेरे मुंह में अपने शब्द नहीं डाल सकते। हम तय करेंगे कि क्या मानना ​​है और क्या नहीं।" इस पर सिब्बल ने फिर कहा, "HC को केस सुनना होता है, फैसला देना होता है और फिर हम अपील में जाते हैं लेकिन इन लोगों (ED) ने अब समानांतर कार्यवाही शुरू कर दी है।" सिब्बल ने आरोप लगाया कि वहां चुनावों में गड़बड़ी करने की कोशिश हो रही है… चुनाव डेटा चुराने की कोशिश हुई है। उन्होंने यह भी कहा, "CM सिर्फ पार्टी से संबंधित दस्तावेज और निजी लैपटॉप लेकर गई थीं। सारा चुनावी डेटा गोपनीय होता है, अगर यह किसी के हाथ लग जाए, हम चुनाव कैसे लड़ेंगे?”

एंजेल चकमा मर्डर केस में बड़ी कार्रवाई, नेपाल से प्रत्यर्पण की तैयारी शुरू

देहरादून 24 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मुख्य आरोपी के नेपाल फरार होने की सूचना के बाद देहरादून पुलिस ने प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की। देहरादून एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि लोकल इंटेलिजेंस यूनिट ने एंजेल चकमा हत्याकांड के मुख्य आरोपी यज्ञराज अवस्थी को नेपाल से भारत लाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों को रिपोर्ट भेज दी है। उधर, मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने परिजनों को न्याय दिलाने का वादा किया।   जानकारी के अनुसार, त्रिपुरा निवासी एमबीए छात्र एंजेल चकमा की 9 दिसंबर को देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र में चाकू और अन्य धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई थी। गंभीर रूप से घायल एंजेल ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस मामले को लेकर बुधवार को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने मृतक छात्र के परिजनों से उनके आवास पर मुलाकात की और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। त्रिपुरा सीएम साहा बोले- न्याय दिलाकर रहेंगे मुख्यमंत्री माणिक साहा ने ANI से बातचीत में कहा कि वह इस मामले को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने कहा, “मैंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से कई बार बात की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अब तक 6 में से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह बेहद दुखद घटना है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे।” एंजेल का छोटा भाई मानसिक तनाव में मृतक के पिता तरुण देबबर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि न्याय जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली दौरे के दौरान वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से इस मामले पर फिर बात करेंगे। मेरा छोटा बेटा इस समय मानसिक रूप से बहुत परेशान है और ज्यादा बोलता भी नहीं। मुख्यमंत्री ने उसके लिए रोजगार की संभावनाओं पर भी मदद का आश्वासन दिया है।” एंजेल को न्याय की मांग तेज हुई इस बीच ऑल इंडिया चकमा स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष दृश्यमुनि चकमा ने कहा कि संगठन ने निष्पक्ष और पारदर्शी सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए मामले की सुनवाई दिल्ली में कराए जाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने जांच के दौरान हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड में चल रही जांच को लेकर हमें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। इसलिए हमने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि CBI जांच के साथ मुकदमे की सुनवाई दिल्ली में कराई जाए, ताकि निष्पक्ष फैसला हो सके। इसके साथ ही हमने मृतक के पिता को बीएसएफ, अगरतला में नौकरी और उनके बेटे माइकल को उसकी योग्यता के अनुसार राज्य सरकार में अवसर देने की भी मांग की है।” बताया जा रहा है कि एंजेल चकमा पर 9 दिसंबर की रात कुछ बदमाशों ने चाकू और अन्य हथियारों से हमला किया था। पुलिस इस जघन्य हत्याकांड से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

ईरान सरकार बदली, भारत के हितों पर असर; पाकिस्तान और चीन को मिला फायदा

तेहरान ईरान में अयातुल्लाह अली खामेनेई का शासन पहली बार अंदर और बाहर से इतने दबाव में है। एक तरफ देश में प्रदर्शन चल रहे हैं तो वहीं अमेरिका की ओर से लगातार सैन्य हस्तक्षेप की धमकियां दी जा रही हैं। बीते करीब 4 दशकों से देश से बाहर रह रहे विपक्षी नेता रजा पहलवी भी ऐक्टिव हो गए हैं और उनका कहना है कि वह जल्दी ही ईरान लौट सकते हैं। ऐसे हालात में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें काफी ज्यादा हैं। इस बीच जानकारों का कहना है कि यदि ईरान में सरकार बदलती है तो इससे भारत को ही झटका लगेगा। वहीं चीन और पाकिस्तान जैसे मुल्कों को इसका कुछ फायदा हो सकता है।     पहली वजह यह है कि जब पाकिस्तान जमीनी रास्ते के जरिए पश्चिम एशिया पहुंचने की भारत की कोशिशों के आड़े आता है तो उसमें ईरान एक मददगार के रूप में दिखता है। सालों से ईरान और भारत इस मामले में रणनीतिक साझेदार रहे हैं। चाबहार बंदरगाह इसकी एक बानगी है, जिसे चीन और पाकिस्तान के बनाए ग्वादर पोर्ट के मुकाबले में देखा जाता है। इसके अलावा सुन्नी मुसलमान देश पाकिस्तान जब उम्मा के नाम पर इस्लामिक एकता की बात करता है तो उसमें ईरान एक काउंटर-बैलेंस बनाता है। भारत के लिए यह फायदे की स्थिति रही है, लेकिन जब ईरान में अमेरिकी पिट्ठू सरकार होगी तो भारत के लिए स्थिति बदल जाएगी।  

India-EU डील पर ट्रंप को एक्सपर्ट की तगड़ी प्रतिक्रिया, कहा- ‘अमेरिका ही हारा’

वाशिंगटन एक ओर जहां डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ (Donald Trump Tariff) की धौंस जमाकर अपनी शर्तों पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal) को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश में लगे हैं, तो भारत सरकार अपनी रणनीति पर आगे बढ़ते हुए बिना किसी की शर्तों के आगे झुके एक के बाद एक कई देशों से ट्रेड डील कर रहा है. हाल ही में ओमान और न्यूजीलैंड के बाद अब यूरोपीय यूनियन के साथ भी भारत का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU FTA) फाइनल होने के करीब है.  यूरोपीय मीडिया की रिपोर्ट्स की मानें, तो 27 जनवरी को इस पर अंतिम मुहर भी लग सकती है. इस बड़ी डील को लेकर एक्सपर्ट डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए नजर आ गए है. 'द ग्रेट रिसेट' के लेखक और स्ट्रेटिजिक एनालिस्ट नवरूप सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) के जरिए एक पोस्ट करते हुए लिखा है कि, 'ये खबर साबित करती है कि अमेरिकी ही अंतिम रूप से हारा है.' 27 जनवरी का बड़ा समझौता! European Union 27 जनवरी को भारत के साथ अपने अब तक के सबसे बड़े व्यापार समझौते को औपचारिक रूप दे सकता है. यूरोपियन मीडिया यूरेक्टिव की एक रिपोर्ट को देखें, तो इस डील पर साइन करने के लिए EU के टॉप ऑफिशियल नई दिल्ली भेजे जाएंगे. रिपोर्ट में खास बात ये है कि India-EU FTA में एग्रीकल्चर सेक्टर को दूर रखा गया है. बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अटकने में एक अहम मुद्दा कृषि और डेयरी प्रोडक्ट भी हैं. इसमें बताया गया कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को यूरोपीय संसद के सदस्यों को बंद कमरे में बताया कि समझौते पर इस महीने हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसमें कृषि शामिल नहीं है. इसे लेकर यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के साथ समझौते पर साइन के लिए भारत यात्रा पर आएंगे.  एक्सपर्ट बोले- 'ये ट्रंप के लिए संदेश' ट्रेड डील को लेकर आई इस बड़ी खबर के बाद 'द ग्रेट रिसेट' (The Great Reset) के लेखक नवरूप सिंह ने इस समझौते के अंतिम पड़ाव पर पहुंचने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर निशाना साधा है. उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि, 'कृषि क्षेत्र में बिना किसी समझौते के फाइनल होने जा रही इस डील से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह संदेश जाता है कि भारत कृषि या डेयरी जैसे अपने मूल हितों पर कभी समझौता नहीं करेगा.' नवरूप सिंह ने X पोस्ट में लिखा,'यह होने जा रही डील संदेश है कि भारत अपने मूल हितों के साथ समझौता नहीं करेगा, फिर चाहे न्यूजीलैंड हुआ करार हो या फिर फ्रांस के साथ राफेल डील और जर्मनी के साथ पनडुब्बी सौदा, जो भारतीय सामान के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक को खोलने का प्रयास है.' 'भारत कर रहा टैरिफ का मुकाबला' नवरूप सिंह ने कहा कि भारत के ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और ओमान के साथ हुए हालिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में 99% भारतीय सामानों के आयात पर जीरो टैरिफ (Zero Tariff) हो जाता है. उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक पेशेवर की तरह खेल रहा है और ट्रंप के हाई टैरिफ का मुकाबला कर रहा है. भारत हर मुक्त व्यापार समझौते और डीफेंस डील (India Defence Deal) के साथ एक तरह से अमेरिका की ताकत और दबाव को कम करता नजर  आ रहा है और अंततः इसमें अमेरिका ही हार रहा है!

ट्रंप का बयान: पुतिन शांति समझौते के लिए तैयार, जेलेंस्की में नहीं दिख रहा उत्साह

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। ट्रंप का सीधा आरोप है कि शांति समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा रूस नहीं, बल्कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की हैं। ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर दिया बयान ओवल ऑफिस में दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन डील करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन जेलेंस्की शांति प्रक्रिया में वैसी उत्सुकता नहीं दिखा रहे। जब उनसे पूछा गया कि अब तक यह संघर्ष क्यों नहीं सुलझ सका, तो ट्रंप ने इसका जिम्मेदार उन्होंने जेलेंस्की को ठहराया। ट्रंप के इस रुख से कीव और यूरोपीय सहयोगियों के बीच चिंता बढ़ गई है, क्योंकि पारंपरिक रूप से माना जाता रहा है कि रूस ही युद्ध खत्म करने का इच्छुक नहीं है। वर्तमान में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जैरेड कुशर के नेतृत्व में शांति वार्ता चल रही है। अमेरिका की ओर से यूक्रेन पर दबाव डाला जा रहा है कि वह युद्ध विराम के बदले पूर्वी डोनबास क्षेत्र पर अपना दावा छोड़ दे। बातचीत का मुख्य फोकस इस बात पर है कि युद्ध के बाद यूक्रेन को ऐसी सुरक्षा गारंटी दी जाए जिससे रूस दोबारा हमला न कर सके। कई देशों को खटक रहा ट्रंप का बयान ट्रंप का पुतिन पर बढ़ता भरोसा और जेलेंस्की की आलोचना यूरोपीय देशों को खटक रही है। कई यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि पुतिन वास्तव में किसी समझौते के मूड में नहीं हैं, बल्कि वे केवल वक्त हासिल करना चाहते हैं। ट्रंप के इस रुख ने कीव के सामने बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है, क्योंकि युद्ध के लिए अमेरिकी सहायता बहुत हद तक ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर निर्भर है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, ED अफसरों पर दर्ज FIR पर ममता सरकार को झटका

नई दिल्ली  बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सियासी पारा हाई है. पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक पर छापेमारी के बाद ये केस सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है, जिसपर आज शीर्ष न्यायालय में सुनवाई हुई. इस सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने ईडी के अधिकारी पर दर्ज की गई एफआईआर पर रोक लगाने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारी नजर में यह गम्भीर मामला है. कोर्ट ने कहा कि ये केंद्रीय जांच एजेंसी के काम मे स्टेट एजेंसी के काम मे दखल का गम्भीर मामला है. लोकतंत्र में व्यवस्था जा हर अंग अपना काम कर सके, हमारे लिए इस मसले पर सुनवाई ज़रूरी है ताकि क़ानून का उल्लंघन करने वाले न बचे. SC ने ममता बनर्जी और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया.  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, ये केस कैसे सुनवाई योग्य हैं ? इस पर ED की तरफ से SG मेहता ने कहा, यह केस बहुत ही चौंकाने वाली स्थिति दिखाता है.⁠CM ममता बनर्जी उस जगह पर घुस गईं, जहां PMLA केस में रेड हो रही थी. CM ने ‘कानून हाथ में लेने का एक पैटर्न बना लिया है'. बंगाल पुलिस का गलत इस्तेमाल किया है. ED को जानकारी मिली थी कि एक ऑफिस में आपत्तिजनक सामान पड़ा है. CM बिना इजाज़त के घुसीं और फाइलें, डिजिटल डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड ले गईं. इसमें ED अधिकारी का फोन भी शामिल था. डायरेक्टर, पुलिस कमिश्नर उनके साथ थे. अधिकारी राजनीतिक नेताओं के साथ धरने पर बैठे थे.⁠CBI के जॉइंट डायरेक्टर के घर का घेराव किया गया और पत्थर फेंके गए. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल कर पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजीपी को हटाए जाने की मांग की है.प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई अर्जी दाखिल कर पश्चिम बंगाल पुलिस के शीर्ष अधिकारियों, जिनमें डीजीपी राजीव कुमार भी शामिल हैं, को निलंबित किए जाने की मांग की है. अर्जी में आरोप लगाया गया है कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की कथित तौर पर चोरी में मदद की. SG तुषार मेहता की बड़ी दलीलें…     ED के अधिकारियों ने पुलिस को बताया था कि PMLA की धारा 17 के तहत IPAC की जांच करनी है     पुलिस अधिकारियों और CM ममता बनर्जी ने जबरन सारी फाइलें ले लीं.     ⁠यह चोरी है, ⁠उन्होंने एक ED अधिकारी का फोन भी ले लिया.⁠इससे सेंट्रल फोर्स का मनोबल गिरेगा     ⁠दूसरे राज्यों को लगेगा कि वे भी ऐसा कर  सकते हैं और फिर धरने पर बैठ सकते हैं.     ⁠जो अधिकारी वहां मौजूद थे, उन्हें सस्पेंड किया जाना चाहिए बंगाल के डीजीपी को हटाने की मांग ईडी ने अपनी नई अर्जी में केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT), भारत सरकार को निर्देश देने की मांग की है कि संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया जाए. अर्जी में यह भी उल्लेख किया गया है कि डीजीपी राजीव कुमार पूर्व में कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठे थे. डीजीपी राजीव कुमार और पुलिस कमिश्नर पर आरोप प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के साथ डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार को पक्षकार बनाया है. उन पर FIR दर्ज करने की मांग की है. प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि Indian Political Action Committee के खिलाफ कोलकाता में छापेमारी के दौरान बंगाल की पुलिस प्रशासन की मशीनरी पर जांच में रुकावट का आरोप लगाया है. साथ ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ और उन्हें खत्म करने का आरोप लगाया है. ED अफसरों को डराने धमकाने और उनके पास अहम फाइलों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड छीने गए. सुप्रीम कोर्ट में दलीलें सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने कहा है कि निष्पक्ष जांच के एजेंसी के अधिकार में बाधा डालने का काम किया गया. इस घटना की CBI जांच कराने की मांग रखी गई है. कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान 'CM और उनके समर्थकों के प्रभाव' का इस्तेमाल कर कोर्ट में हंगामा किया गया.इससे जज को सुनवाई तक टालनी पड़ी. जांच एजेंसी ने कहा कि CM, DGP और कोलकाता पुलिस कमिश्नर पर बीएनसी की 17 गंभीर  धाराओं के तहत आरोप लगाए जा सकते हैं. IPAC के पास पार्टी का बहुत सारा डेटा था- कपिल सिब्बल वहीं, ममता सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि IPAC के पास पार्टी का बहुत सारा डेटा था। जब ED वहां गई, तो उसे पता था कि संवेदनशील पार्टी की जानकारी वहां मौजूद होगी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को पहले इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए और अपना फैसला देना चाहिए, जिसके बाद पार्टियां अपीलीय फोरम में जा सकती हैं। उन्होंने दलील दी कि अब समानांतर कार्यवाही शुरू कर दी गई है, जबकि हाई कोर्ट के पास आर्टिकल 226 के तहत अधिकार क्षेत्र है, और यही सही क्रम है जिसका पालन किया जाना चाहिए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में राज्य और DGP की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अभिषेक सिंघवी ने याचिका की स्वीकार्यता पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अगर नोटिस जारी किया जाता है, तो यह साफ किया जाना चाहिए कि यह स्वीकार्यता पर उनकी आपत्ति के अधीन होगा। सिंघवी ने तर्क दिया कि ED की ओर से सीधे सुप्रीम कोर्ट में जाना केवल असाधारण स्थितियों में ही स्वीकार्य है, जहां कोई प्रभावी उपाय उपलब्ध न हो। 'चुनावी काम में ईडी को दखल देने का अधिकार नहीं…' सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की बात सुनने के बाद कहा कि यह याचिका ED और दूसरी केंद्रीय एजेंसियों की जांच और राज्य अधिकारियों द्वारा कथित दखल के बारे में एक गंभीर मुद्दा उठाती है. कोर्ट ने ज़ोर दिया कि कानून का राज बनाए रखने और हर एजेंसी को आज़ादी से काम करने देने के लिए, इस मामले की जांच होनी चाहिए, जिससे यह पक्का हो सके कि किसी भी राज्य की सुरक्षा की आड़ में अपराधियों को बचाया न जाए. बेंच ने कहा कि इसमें … Read more

दिल्ली से उड़ान भरते वक्त विमान के APU में लगी आग, 190 यात्रियों के साथ दूसरा हादसा टला

नई दिल्ली दिल्ली में 24 घंटे के भीतर एयर इंडिया के दो विमानों में सवार यात्री बाल-बाल बच गए। एक विमान के एपीयू में आग लगने के बाद उसे आनन-फानन में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर वापस उतारा गया तो दूसरे के इंजन ने एक कंटेनर को खींच लिया। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। सिंगापुर जा रहा एयर इंडिया का एक विमान तकनीकी खराबी के कारण बुधवार देर रात राष्ट्रीय राजधानी लौट आया। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि विमान में करीब 190 लोग सवार थे। सूत्रों के अनुसार, ड्रीमलाइनर विमान में एपीयू (ऑक्सिलियरी पावर यूनिट) में आग की चेतावनी मिली, जिसके बाद विमान करीब एक घंटे तक हवा में रहने के बाद दिल्ली लौट आया। यात्रियों को वैकल्पिक विमान से सिंगापुर भेजा गया। इस संबंध में संपर्क करने पर एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने बताया कि 14 जनवरी को दिल्ली से सिंगापुर जा रही उड़ान एआई 2380 के परिचालन दल ने संभावित तकनीकी समस्या के चलते उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एहतियातन दिल्ली लौटने का फैसला किया। रात करीब एक बजे IGI पर दोबारा उतरा प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, 'विमान दिल्ली में सुरक्षित उतरा। दिल्ली में हमारी टीमों ने यात्रियों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान की और उन्हें वैकल्पिक विमान से सिंगापुर के लिए रवाना किया गया।' प्रवक्ता ने इस अप्रत्याशित स्थिति के कारण यात्रियों को हुई असुविधा को लेकर खेद भी जताया। उड़ानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘फ्लाइटरडार24 डॉट कॉम’ पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बोइंग 787-9 विमान से संचालित यह उड़ान करीब एक घंटे तक हवा में रही और बुधवार देर रात करीब एक बजे दिल्ली में वापस उतरी। विमान के इंजन में घुसा कंटेनर एक अन्य घटना में एयर इंडिया के एक विमान ने एयरपोर्ट पर एक कंटेनर को अपनी ओर खींच लिया। इससे इंजन क्षतिग्रस्त हो गया। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया के A350 विमान के इंजन में गुरुवार को कंटेनर घुस गया। इससे इंजन क्षतिग्रस्त हो गया। विमान में सवार एक यात्री ने घटना को अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया। घटना पर एयर इंडिया का बयान सामने नहीं आया है।

चार अंतरिक्षयात्री, जिसमें एक बीमार एस्ट्रोनॉट भी शामिल, ड्रैगन कैप्सूल से धरती पर लौटे

कैलिफोर्निया अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA और स्पेसएक्स के क्रू-11 मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आए हैं. स्पेसएक्स का ड्रैगन अंतरिक्ष यान कैलिफोर्निया के सैन डिएगो तट के पास प्रशांत महासागर में भारतीय समयानुसार लगभग दोपहर 2:11 बजे स्प्लैशडाउन हुआ. यह मिशन मूल योजना से पहले पूरा हुआ क्योंकि एक क्रू सदस्य को मेडिकल समस्या हुई थी.     NASA के एस्ट्रोनॉट जेना कार्डमैन (मिशन कमांडर) और माइक फिंके (पायलट).     JAXA (जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी) के एस्ट्रोनॉट किमिया युई.     रोस्कोस्मोस (रूस) के कोस्मोनॉट ओलेग प्लेटोनोव. ये चारों अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर कुल 167 दिन बिताकर लौटे हैं. मिशन अगस्त 2025 में शुरू हुआ था. यह जेना कार्डमैन और ओलेग प्लेटोनोव का पहला स्पेस फ्लाइट था, जबकि माइक फिंके और किमिया युई अनुभवी एस्ट्रोनॉट हैं. क्यों हुआ मिशन जल्दी खत्म? NASA ने 8 जनवरी 2026 को बताया कि एक क्रू सदस्य को मेडिकल समस्या हुई है. इस वजह से स्पेसवॉक रद्द कर दिया गया. मिशन को एक महीने पहले खत्म करने का फैसला लिया गया. NASA ने कहा कि क्रू सदस्य की हालत स्थिर है. पृथ्वी पर बेहतर इलाज के लिए वापसी जरूरी थी. मेडिकल प्राइवेसी की वजह से समस्या या किस सदस्य को हुई, इसकी डिटेल नहीं बताई गई. रिटर्न प्रोसेस कैसे हुआ?   14 जनवरी को शाम को ड्रैगन यान ISS से अलग हुआ. रात में डी-ऑर्बिट बर्न (धीमा होने की प्रक्रिया) पूरी हुई. पैराशूट की मदद से यान समुद्र में उतरा. रिकवरी शिप और तेज नावों की टीम ने यान को सुरक्षित किया और मुख्य डेक पर लाया. एस्ट्रोनॉट्स यान से बाहर निकले. NASA ने कहा कि चारों क्रू सदस्यों को स्थानीय अस्पताल में चेकअप के लिए ले जाया जाएगा. वहां रात भर रहने के बाद वे ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर लौटेंगे, जहां परिवार से मिलेंगे और पोस्ट-फ्लाइट रिहैबिलिटेशन (शरीर को सामान्य करने की प्रक्रिया) होगी. यह स्पेसएक्स के कॉमर्शियल क्रू प्रोग्राम का हिस्सा था, जो NASA के लिए ISS पर क्रू भेजता है. स्प्लैशडाउन कैलिफोर्निया तट पर हुआ क्योंकि 2025 से स्पेसएक्स ने रिकवरी ऑपरेशन फ्लोरिडा से कैलिफोर्निया शिफ्ट कर दिया है. यह मेडिकल वजह से ISS से क्रू की पहली कंट्रोल्ड मेडिकल इवैक्यूएशन थी. NASA ने कहा कि सभी तैयारियां पहले से थीं और क्रू सुरक्षित है.

ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच ट्रंप ने दी धमकी, 8 राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग

तेहरान      ईरान में पिछले 18 दिन से जारी विरोध-प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुके हैं जिनमें अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इन मौतों के बीच अमेरिका लगातार धमकी दे रहा है कि अगर ईरान के खामेनेई शासन ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अपनी सख्ती नहीं रोकी तो वो सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हाल ही में ट्रंप ने अगवा करवा लिया था और ऐसे में ईरान को लेकर उनकी धमकियों को हल्के में नहीं लिया जा रहा है. इस बीच ट्रंप प्रशासन ने ईरान से कहा है कि वो राजनीतिक कैदियों को भी जल्द से जल्द रिहा करे. ट्रंप प्रशासन के फारसी भाषा के एक्स अकाउंट से एक ट्वीट में ईरान से राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की मांग की गई है. ट्वीट में लिखा गया, 'हम प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा पर चिंता जता रहे तो ये न समझा जाए कि हमने उन राजनीतिक कैदियों को भुला दिया है, जिन्हें इन विरोध प्रदर्शनों से पहले ही जेल में डाल दिया गया था.' ट्वीट में ईरान की जेल में बंद आठ राजनीतिक कैदियों के नाम लिखे गए हैं जिनमें शामिल हैं- नरगिस मोहम्मदी, सपीदेह गोलियान, जवाद अली-कोर्दी, पूरान नाजेमी, रजा खंदान, मजीद तवक्कोली, शरीफेह मोहम्मदी, हुसैन रोनागी.  ट्रंप प्रशासन की तरफ से ट्वीट में आगे लिखा गया, 'इन लोगों को लगातार हिरासत में रखा गया है जो गंभीर चिंता का विषय है. हम मांग करते हैं कि इस्लामिक रिपब्लिक का शासन इन सभी कैदियों को तुरंत रिहा करे.' कौन हैं वो 8 राजनीतिक कैदी जिन्हें जेल से छोड़ने की मांग कर रहा अमेरिका? नरगिस मोहम्मदी 2023 में शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली नरगिस मोहम्मदी ईरान की महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं. 53 साल की नरगिस मोहम्मदी एक लेखिका हैं और डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर (डीएचआरसी) की उप निदेशक भी हैं. महिला अधिकारों के अलावा वो अन्य मानवाधिकार मुद्दों पर भी काम करती हैं जिनमें मृत्युदंड के खिलाफ कैंपेन चलाना और भ्रष्टाचार के विरोध की मुहिम शामिल है. 2023 में 'ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी लड़ाई और सभी के लिए मानवाधिकार व स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के संघर्ष' के लिए उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया. नरगिस मोहम्मदी पर ईरान का खामेनेई शासन हमलावर रहा है और वो कई बार जेल जा चुकी है. जब उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया गया था तब भी वो जेल में ही थीं. मेडिकल ग्राउंड पर उन्हें जेल से बाहर रखा गया था लेकिन फिर पिछले साल दिसंबर में एक स्मृति सभा से दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों ने उन्हें हिरासत में ले लिया और फिलहाल वो राजधानी तेहरान की एविन जेल में बंद हैं. सपीदेह गोलियान ईरान की महिला अधिकार कार्यकर्ता गोलियान खामेनेई शासन के निशाने पर रही हैं और कई बार जेल जा चुकी हैं. गोलियान एक लेखिका और फ्रीलांस जर्नलिस्ट भी हैं जो कि महिला अधिकारों और महिला श्रम के क्षेत्र में काम करती हैं. हड़ताल कर रहे श्रमिकों के समर्थन के लिए गोलियान को पहली बार 2018 में गिरफ्तार किया गया था और 11 जून 2025 को रिहा कर दिया गया. हालांकि, मोहम्मदी के साथ इन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि ये भी स्मृति सभा का हिस्सा थीं. जवाद अली कोर्दी- अली-कोर्दी ईरान के मानवाधिकार वकील, यूनिवर्सिटी लेक्चरर और सिटी काउंसिल के पूर्व सदस्य हैं. 1 मार्च 2025 को इन्हें मशहद स्थित उनके ऑफिस से गिरफ्तार किया गया और ईरान के खिलाफ प्रोपेगेंडा के आरोप में हिरासत में लिया गया. उन्हें 11 अगस्त 2025 को रिहा किया गया, लेकिन अधिकारियों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और कंट्रोल में रखा गया. उनके भाई और सहकर्मी खोसरो अली-कोर्दी की दिसंबर में मौत हो गई थी जिसके लिए आयोजित श्रद्धांजलि सभा में ही नरगिस मोहम्मदी और गोलियान को गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की. 10 दिसंबर को जवाद अली-कोर्दी को मशहद की क्रांतिकारी अदालत ने तलब किया और 12 दिसंबर 2025 को उन्हें उनके ऑफिस से सुरक्षा बलों ने हिंसक तरीके से गिरफ्तार कर लिया. उनके खिलाफ 'राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ सभा करने और साजिश रचने' तथा 'राज्य के खिलाफ प्रोपेगेंडा' के आरोप लगाए गए हैं. रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें एकांत कारावास में रखा गया है. पूरान नाजेमी नाजेमी ईरान के करमान प्रांत से हैं और महिला और नागरिक अधिकारों के लिए काम करती हैं. इन्हें भी नोबेल पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी के साथ गिरफ्तार किया गया था.  रजा खंदान खंदान ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और ग्राफिक डिजाइनर हैं. इन्होंने हिजाब आंदोलन के दौरान प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था और मौत की सजा के खिलाफ भी आवाज उठाते रहे हैं. इन्हें 2018 और 2021 के बीच कई बार जेल भेजा जा चुका है. 14 दिसंबर 2024 को ईरानी अधिकारियों ने उन्हें उनके घर से गिरफ्तार किया और अभी वो जेल में ही हैं मजीद तवक्कोली  तवक्कोली ईरान के स्टूडेंट लीडर और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं जो लंबे समय से जेल में हैं. छात्रों के समर्थन में सरकार की आलोचना के लिए 2009 में पहली बार वो जेल गए थे. ईरानी शासन की आलोचना को लेकर फिलहाल वो 9 साल की कैद में हैं. शरीफेह मोहम्मदी मोहम्मदी ईरान की सामाजिक कार्यकर्ता हैं जिन्हें देशद्रोह के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है. 22 वर्षीय ईरानी छात्रा महसा अमीनी की मौत के बाद ईरान में सितंबर 2022 से देशव्यापी आंदोलन शुरू हुए थे. हुसैन रोनागी रोनागी ईरान के ब्लॉगर, इंटरनेट की आजादी के हिमायती और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. इन्हें भी कई बार जेल भेजा जा चुका है. ईरानी शासन की आलोचना के लिए पहली बार 13 दिसंबर 2009 को इन्हें जेल भेजा गया था. 15 साल की सजा हुई लेकिन 2019 में रिहा कर दिए गए. फिर फरवरी 2022 में गिरफ्तार हुए और जल्द ही छोड़ दिए गए. हिजाब आंदोलन के दौरान फिर से गिरफ्तार हुए और खराब सेहत के बावजूद अब भी जेल में कैद हैं.

SC में ED की बड़ी डिमांड: ‘कोलकाता कमिश्नर और बंगाल DGP को हटाया जाए’

कलकत्ता / नई दिल्ली I-PAC रेड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई अर्जी दाखिल करते हुए पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. ईडी ने अपनी याचिका में इन अधिकारियों को तुरंत निलंबित करने, उनके खिलाफ FIR दर्ज करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की मांग की है.  जांच एजेंसी का आरोप है कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की कथित चोरी में मदद की. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से गृह मंत्रालय (MHA) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को निर्देश देने का अनुरोध किया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए.  अर्जी में विशेष रूप से डीजीपी राजीव कुमार के पिछले आचरण का जिक्र करते हुए कहा गया है कि वे कोलकाता पुलिस कमिश्नर रहते हुए मुख्यमंत्री के साथ धरने पर बैठे थे, जो एक टॉप पुलिस अधिकारी के लिए सही नहीं है. डीजीपी और पुलिस कमिश्नर पर गंभीर आरोप प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी अर्जी में पश्चिम बंगाल पुलिस के टॉप अधिकारियों पर तीखा हमला बोला है. एजेंसी के मुताबिक, डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर ने न केवल जांच की प्रक्रिया को प्रभावित किया, बल्कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने में भी कथित तौर पर भूमिका निभाई. ईडी ने तर्क दिया है कि इन अधिकारियों की मौजूदगी में निष्पक्ष जांच संभव नहीं है, इसलिए इनका निलंबन और विभागीय जांच जरूरी है.