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ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से युद्ध की आशंका, ट्रंप के पास 50 संभावित ठिकानों की जानकारी

तेहरान क्या अमेरिका और ईरान के बीच जंग होने वाली है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में फिलहाल हालात ऐसे ही बनते दिख रहे हैं। अमेरिका और ब्रिटेन की ओर से अपने नागरिकों को ईरान न जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा ईरान ने अपना एयरस्पेस कमर्शल फ्लाइट्स के लिए बंद कर दिया है। इससे साफ है कि दोनों तरफ से सतर्कता बरती जा रही है और तनाव को देखते हुए जंग की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो लगातार ईरान को जंग और सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं। वहीं ईरान का कहना है कि ऐसी किसी भी स्थिति में जो आग भड़केगी वह पूरे इलाके को चपेट में लेगी। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाले से एनसीबी न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ट्रंप लंबी जंग नहीं चाहते हैं। उन्होंने अपने सुरक्षा सलाहकारों से ईरान के खिलाफ ऐसे ऐक्शन पर विचार करने को कहा है, जिससे एक निर्णायक कदम उठाया जा सके। वह नहीं चाहते कि ईरान के खिलाफ महीनों लंबी जंग चले। ऐसे में संभावना है कि अचानक ही ईरान पर कोई बड़ा अटैक हो सकता है। अमेरिकी नहीं चाहता कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के जमीनी संघर्ष में शामिल हो। हालांकि अमेरिकी सलाहकार इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि किसी एक हमले से ईरान की कमर तोड़ी जा सकती है। उनकी चिंता यह है कि ईरान भी हमले का जवाब देगा और मिडल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंच सकता है। इराक, सीरिया समेत कई देशों में अमेरिका के ठिकाने हैं, जो ईरान के टारगेट में आ सकते हैं। इसके अलावा ईरान को जवाब देने के लिए इस इलाके में अमेरिका के पास बहुत ज्यादा एसेट्स भी नहीं हैं। इस बीच खबर है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से छोटे और टारगेट अटैक किए जा सकते हैं। इसके बाद यदि ईरान की प्रतिक्रिया आती है तो फिर जवाबी कार्रवाई की जाएगी। अमेरिका यह नहीं चाहता कि वह खुद बड़ा अटैक करे। ऐसी स्थिति में ईरान को थोड़ा उकसाने के बाद ही संघर्ष शुरू करने की तैयारी है। ट्रंप के पास मौजूद 50 टारगेट वाली ‘हिट लिस्ट’ में ईरान के कौन से ठिकाने शामिल हैं? डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी थिंक टैंक (UANI) ने राष्ट्रपति ट्रंप को 50 ठिकानों की एक गोपनीय लिस्ट सौंपी है. इस ‘हिट लिस्ट’ में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सबसे अहम हेडक्वार्टर शामिल हैं. तेहरान का ‘थारुल्लाह हेडक्वार्टर’ इस लिस्ट में सबसे ऊपर बताया जा रहा है. यह जगह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ होने वाली दमनकारी कार्रवाइयों का मुख्य केंद्र है.     लिस्ट में तेहरान के चार मुख्य उप-मुख्यालय भी शामिल हैं.     उत्तर और उत्तर-पश्चिम तेहरान के लिए ‘कुद्स सब-हेडक्वार्टर’ टारगेट पर है.     दक्षिण-पश्चिम तेहरान के लिए ‘फतह सब-हेडक्वार्टर’ को चुना गया है.     पूर्वोत्तर के लिए ‘नस्र’ और दक्षिण-पूर्व के लिए ‘गदर’ मुख्यालय लिस्ट में हैं.     इसके अलावा 23 क्षेत्रीय बासिज बेस भी अमेरिकी रडार पर आ चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी प्रदर्शनकारियों से कहा है कि ‘मदद रास्ते में है‘. ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि लोगों की हत्या करने वाले अपनी खैर मनाएं. सीनेटर टॉम कॉटन ने भी ईरानी शासन की तुलना गंभीर बीमारियों से की है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कूटनीतिक धैर्य अब पूरी तरह खत्म हो चुका है. भारत की एडवाइजरी- तुरंत ईरान से निकलें हमारे नागरिक इस बीच भारत ने भी अपने सभी नागरिकों को सलाह दी है कि वे तत्काल ईरान से निकल जाएं। करीब 10 हजार भारतीय नागरिक ईरान में हैं। इनकी सुरक्षा चिंताओं को लेकर भारत ने यह आदेश दिया है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास की ओर से यह एडवाइजरी जारी की गई है। फिलहाल दुनिया भर की नजरें इस हालात पर हैं। चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि इजरायल भी इस जंग में कूदने की बात कर रहा है। वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिकी हमले के जवाब में हम इजरायल को टारगेट करेंगे।

ईरान में युद्ध की संभावना, 10 हजार भारतीयों की जान पर बन आई, कश्मीरी छात्रों के माता-पिता का भावुक निवेदन

 नई दिल्ली ईरान में बीते दो हफ्तों से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने वहां की आंतरिक स्थिति को बेहद अस्थिर बना दिया है. हर दिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मृतकों की संख्या 2,000 से अधिक हो चुकी है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स इसे 3,000 से भी ज्यादा बता रही हैं. इस संकट का सीधा असर भारत पर भी पड़ा है. बुधवार को ईरान ने अचानक अपना एयरस्पेस बंद कर दिया, जिससे भारत, यूरोप समेत उत्तरी अमेरिका के बीच उड़ानें बाधित हो गईं.  एयर इंडिया और इंडिगो जैसी एयरलाइंस को रूट बदलने पड़े हैं, जिससे यात्रियों को देरी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. दोनों विमान कंपनियों ने एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि कि रूट में बदलाव करना पड़ा है और कई फ्लाइट्स को कैंसिल करना पड़ा है. कश्मीरी छात्रों समेत 10 हजार भारतीय संकट में ईरान में इस समय करीब 10,000 से 12,000 भारतीय मूल के लोग मौजूद हैं. इनमें बड़ी संख्या छात्रों की है, जिनमें लगभग दो से तीन हजार कश्मीरी छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं.  जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने इन छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है. बार-बार इंटरनेट बंद होने और हिंसक प्रदर्शनों के चलते इन छात्रों से संपर्क करना मुश्किल हो गया है, जिससे उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है. भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी है. हालांकि छात्रों और उनके संगठनों का कहना है कि अब तक किसी निकासी योजना की घोषणा नहीं की गई है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है. वहीं, पैरेंट्स सरकार से उनके बच्चों को निष्कासन में मदद की अपील कर रहे हैं. इस अशांति का असर व्यापार पर भी दिख रहा है. पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत-ईरान व्यापार में भारी गिरावट आ चुकी है. मौजूदा हालात में शिपिंग रूट्स और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका से भारत के व्यापार घाटे पर और दबाव पड़ सकता है. आंकड़ों के अनुसार, 2019 में ईरान और भारत के बीच $17.6 बिलियन का व्यापार हुआ करता था, जो कि 2024 में घटाकर महज़ $2.3 बिलियन रह गया है. ख़ास बात ये है कि भारत के कुल व्यापार का महज़ 0.2 फीसदी व्यापार ईरान के साथ होता है. हालांकि, शिपिंग रूट बाधित होने की वजह से व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है. चाबहार पोर्ट परियोजना खतरे में: भारत की सामरिक योजना पर बड़ा संकट भारत की सामरिक महत्व की चाबहार बंदरगाह परियोजना, जिसमें लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ है, अब गंभीर खतरे में दिखाई दे रही है. यह बंदरगाह भारत के लिए पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंचने का एक अहम गेटवे है. चाबहार बंदरगाह भारत की रणनीतिक कोशिशों में केंद्रीय स्थान रखता है, लेकिन वहां की वर्तमान अस्थिर राजनीतिक और आर्थिक स्थिति इस परियोजना को प्रभावित कर रही है. बासमती चावल निर्यात में भारी गिरावट एक प्रमुख चिंता का विषय भारत के बासमती चावल निर्यात में भारी गिरावट है. ईरान, जो भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा विदेशी बाजार रहा है, ने इस व्यापार में भी ठहराव देखा है. 2018-19 में भारत का ईरान को निर्यात लगभग 3.51 बिलियन डॉलर था, जो अब 2024-25 में घटकर केवल 1.24 बिलियन डॉलर रह गया है. इससे भारतीय किसानों और निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है. क्षेत्रीय संतुलन और स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी पर असर क्षेत्रीय राजनीतिक स्थिति की अनिश्चिता भारत की पश्चिम एशिया नीति के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. भारत ने हमेशा ईरान, सऊदी अरब और अमेरिका के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित हो सके.  चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान के चीनी-प्रायोजित ग्वादर बंदरगाह से मात्र 92 समुद्री मील की दूरी पर है और भारत की रणनीतिक उपस्थिति का प्रतीक है. अगर इस क्षेत्र में अशांति बनी रहती है, तो भारत की स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी कमजोर हो सकती है और चीन-पाकिस्तान के प्रभाव में वृद्धि हो सकती है. इसलिए, भारत के लिए यह जरूरी है कि वह चाबहार परियोजना को स्थिर बनाए रखने के लिए अपनी कूटनीतिक और आर्थिक रणनीतियों को और मज़बूत करे, ताकि क्षेत्रीय संतुलन और अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी को कायम रखा जा सके.

स्पेन की 20 साल की राजकुमारी लियोनोर बनेंगी पहली महारानी, 150 वर्षों में पहली बार होगा ऐसा

मैड्रिड स्पेन में एक इतिहास रचने की तैयारी हो रही है। दरअसल 150 वर्षों में पहली बार वहां एक महारानी का राज होगा। स्पेन के राजा किंग फेलिप छठे और रानी लेटीजिया की 20 साल की बेटी राजकुमारी लियोनोर स्पेन की पहली रानी बनेंगी। इससे पहले 1800 सदी में इसाबेला द्वितीय स्पेन की महारानी बनीं थीं।  स्पेन के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने की तैयारी चल रही है। 20 साल की प्रिंसेस लियोनोर स्पेन की अगली रानी बनने जा रही हैं। ऐसा 150 वर्षों के बाद हो रहा है, जब देश की बागडोर किसी महिला शासक के हाथों में होगी। उनसे पहले उन्नीसवीं सदी में क्वीन इसाबेला द्वितीय ने स्पेन पर शासन किया था। किंग फेलिपे VI और क्वीन लेतिसिया की बड़ी बेटी लियोनोर वर्तमान में सिंहासन की उत्तराधिकारी हैं और आगे जाकर स्पेन की संवैधानिक सम्राज्ञी और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर होंगी। उनकी ताजपोशी सिर्फ एक पारिवारिक उत्तराधिकार नहीं, बल्कि आधुनिक स्पेन में महिलाओं की नेतृत्व भूमिका का ऐतिहासिक प्रतीक मानी जा रही है। आपको बता दें कि स्पेनिश उत्तराधिकार युद्ध में हैब्सबर्ग्स पर जीत के बाद, 1700 के दशक की शुरुआत से स्पेनिश ताज बॉर्बन राजवंश के पास रहा है। जनरल फ्रेंको की तानाशाही खत्म होने के बाद, 1975 में किंग जुआन कार्लोस I के साथ राजशाही बहाल हुई, जिन्होंने स्पेन को लोकतंत्र में बदलने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने 2014 में गद्दी छोड़ दी और सिंहासन अपने बेटे फेलिप को सौंप दिया। अब, लियोनोर ताज संभालने की अगली कतार में हैं। फेलिप ने 2004 में पूर्व पत्रकार लेतिजिया से शादी की थी और वह 42 साल की उम्र में रानी बनीं। शाही जोड़े की दो बेटियां हैं, प्रिंसेस लियोनोर और इन्फेंटा सोफिया। प्रिंसेस लियोनोर का जन्म 2005 में हुआ था और वह सिंहासन की उत्तराधिकारी हैं। वहीं, इन्फेंटा सोफिया का जन्म 2007 में हुआ था। प्रिंसेस लियोनोर को रानी बनाने की तैयारी शुरू आपको बता दें कि स्पेनिश कानून के मुताबिक, सिंहासन के उत्तराधिकारी को अपनी भविष्य की भूमिका की तैयारी के लिए सेना, नौसेना और वायु सेना के साथ मिलिट्री ट्रेनिंग लेनी होती है। लियोनोर ने वेल्स के UWC अटलांटिक कॉलेज से इंटरनेशनल बैकलॉरिएट डिप्लोमा के साथ अपनी उच्च शिक्षा शुरू की। इसके बाद उन्होंने देश की भावी कमांडर-इन-चीफ के तौर पर अपनी मिलिट्री ट्रेनिंग शुरू कर दी है। वह स्पेनिश, कैटलन, अंग्रेजी, फ्रेंच, अरबी और मंदारिन सहित कई भाषाओं को जानती हैं।  2024 में, उन्होंने गैलिसिया में नेवल ट्रेनिंग शुरू की और ट्रेनिंग शिप जुआन सेबेस्टियन डी एलकानो पर 140 दिन के लिए 17 हजार मील की यात्रा पर निकलीं। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान उन्होंने क्रू मेंबर के तौर पर काम किया और अटलांटिक महासागर, दक्षिण अमेरिका के चारों तरफ और न्यूयॉर्क की यात्रा की। दिसंबर 2025 में उन्होंने पिलाटस PC-21 विमान में अपनी पहली सोलो फ्लाइट पूरी की थी और ऐसा करने वाली स्पेनिश शाही परिवार की पहली महिला सदस्य बनीं थीं। कौन हैं प्रिंसेस लियोनोर     20 साल की राजकुमारी प्रिंसेस लियोनोर, स्पेन के राजा किंग फेलिप छठे और रानी लेटीजिया की बड़ी बेटी हैं।      स्पेनिश राजशाही पर 1700 के दशक की शुरुआत से बॉर्बन राजवंश का कब्जा रहा है। बॉर्बन राजवंश ने उत्तराधिकारी की लड़ाई में हैब्सबर्ग्स को हराया था।        जनरल फ्रेंको की तानाशाही खत्म होने के बाद साल 1975 में किंग जुआन कार्लोस प्रथम के साथ स्पेन में फिर से राजशाही बहाल हुई। किंग जुआन कार्लोस प्रथम ने स्पेन में लोकतंत्र में बदलने में अहम भूमिका निभाई।     साल 2014 में किंग कार्लोस ने गद्दी छोड़ दी और सिंहासन अपने बेटे फेलिप को सौंप दिया। अब किंग फेलिप के बाद राजकुमारी लियोनोर स्पेन की सत्ता संभालेंगी।     राजकुमारी लियोनोर ने वेल्स के अटलांटिक कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की है। साथ ही वे स्पेन की सेना, नौसेना और वायुसेना में भी ट्रेनिंग पूरी कर चुकी हैं, जो स्पेन के राजघराने के सदस्यों को करनी अनिवार्य होती है।  राजकुमारी लियोनोर स्पेनिश और फ्रेंच समेत इंग्लिश, मंदारिन, अरबी आदि भाषाएं बोल सकती हैं। साथ ही वे एक प्रशिक्षित पायलट हैं।  

मनाली में देव आदेश के तहत 42 दिन तक सैलानियों की एंट्री और कई गतिविधियों पर पाबंदी

मनाली आज के समय में टीवी, मोबाइल फोन से लेकर कई आधूनिक चीजें हमारी जिदंगी का हिस्सा हैं. सोचिए अगर कोई आपसे कहे कि एक डेढ़ महीने तक इन चीजों का इस्तेमाल बेहद कम करना है तो आप कैसा महसूस करेंगे. हिमाचल प्रदेश के मनाली में कुछ ऐसा ही होने जा रहा है. मनाली के नौ गांवों में अगले 42 दिन के लिए कई पाबंदियां लगाई गई हैं. इन नौ गांवों में अगले 9 दिन तक ना लोग टीवी देखेंगे, ना ही मन्दिर में पूजा होगी और ना ही मोबाइल की घंटियां सुनाई देंगी. अहम बात है कि खेती बाड़ी के काम भी नहीं किए जाएंगे. दरअसल, मनाली की उझी घाटी में देव आदेशों के चलते पाबंदियां लगाई गई हैं. मनाली के गौशाल गंव के अलावा, अन्य आठ गांवों में हजारों सालों से चली आ रही देव परम्परा का आज भी पालन किया जाएगा. ऐसे में लोगों ने जहां टीवी बंद कर दिए हैं तो वहीं, मोबाइल को भी साइलेंट मोड पर डाल दिया है. मान्यता है कि मकर संक्राति के बाद घाटी के आराध्य देवी देवता अपनी तपस्या में लीन हो जाते हैं और देवी-देवताओं को तपस्या के दौरान शांत वातावरण मिले, इसके लिए टीवी, रेडियो और मोबाइल को बन्द कर दिया जाता है. मनु की नगरी के गौशाल, कोठी, सोलंग, पलचान, रूआड़, कुलंग, शनाग, बुरूआ और मझाच में ये देव आदेश लागू किए ए हैं. ग्रामीण राकेश ठाकुर ने बताया कि यह परम्परा सदियों से चली आ रही है और आज भी परम्परा बखूबी निभाई जा रही है. फिर चाहे और आज का युवा हो या फिर यंहा आने वाला पर्यटक. सभी इस परम्परा को निभाते हैं. कार्तिक स्वामी मंदिर के कपाट भी बंद मनाली के सिमसा में स्थित देवता कार्तिक स्वामी के मंदिर के कपाट भी बुधवार से बंद हो गए हैं. वहीं, सिमसा गाँव के साथ-साथ अन्य चार गाँव कन्याल, छियाल, मढ़ी और रांगड़ी में भी देव आदेश के चलते सभी तरह के शोर पर पांबदी लगाई गई है. देवता कार्तिक स्वामी मदिर के पुजारी मकर ध्वज शर्मा ने बताया कि एक महीने तक शोर शराबे पर रोक लगाई गई है और कोई व्यक्ति अब ऊंची आवाज में बात नहीं करेगा और खेतीबाड़ी भी बंद रहेगी. मदिरों की घंटियों को बांध दिया गया है. उन्होंने कहा की अब मंदिरों के कपाट फ़ागली उत्सव के साथ ही खुलेंगे. सिस्सू में भी सैलानियों की एंट्री बंद गौरतलब है कि मनाली की अटल टनल के आगे लाहौल स्पीति के सिस्सू गांव में भी कुछ इसी तरह के आदेश जारी किए गए हैं. यहां पर हालडा उत्सव के चलते गांवों में सैलानियों की एंट्री बंद कर दी गई है. गांव में कोई भी बाहरी शख्स एंट्र नहीं होगा. यहां पर हालडा उत्सव और देव आदेश लागू हुए हैं जो कि 28 फरवरी तक लागू रहेंगे.

भारतीय रेलवे में हलाल मीट पर विवाद, सिख संगठन की याचिका पर NHRC ने जारी किया नोटिस

  नई दिल्ली     भारतीय रेलवे की थाली में परोसे जाने वाले नॉनवेज भोजन को लेकर झटका बनाम हलाल विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है. सिख संगठनों की ओर से दायर याचिका पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने रेलवे बोर्ड, FSSAI और संस्कृति मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है. NHRC ने अपने नोटिस में कहा है कि अगर रेलवे में केवल हलाल मांस परोसा जा रहा है, तो यह उपभोक्ताओं के भोजन के विकल्प के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है. साथ ही, इसे सिख धर्म की आचार संहिता यानी सिख रहत मर्यादा के खिलाफ भी बताया गया है. NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मुद्दे पर कहा, "सिख रहत मर्यादा सिखों को हलाल मांस के सेवन से रोकती है. अगर सिख उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं दी जा रही कि उन्हें किस तरह का मांस परोसा जा रहा है, तो यह उनके अधिकारों का सीधा उल्लंघन है." आयोग ने संस्कृति मंत्रालय से यह भी कहा है कि वह सभी खाने-पीने की दुकानों और संस्थानों को निर्देश दे कि वे स्पष्ट रूप से यह दिखाएं कि परोसा जाने वाला मीट हलाल है या झटका. NHRC का मानना है कि पारदर्शिता न होना धार्मिक स्वतंत्रता और उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है. FSSAI को भेजे गए नोटिस में आयोग ने कहा है कि नॉनवेज फूड के सर्टिफिकेशन में इसका साफ तौर पर जिक्र होना चाहिए कि मीट झटका है या हलाल. इससे उपभोक्ता अपनी धार्मिक और व्यक्तिगत मान्यताओं के अनुसार निर्णय ले सकेंगे. प्रियंक कानूनगो ने रोजगार से जुड़े पहलू पर भी गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा, "दारुल उलूम देवबंद के अनुसार हलाल वही माना जाता है जिसमें पशु बलि केवल मुसलमान द्वारा दी गई हो. इससे हिंदू दलित समुदायों को रोजगार के अवसरों से वंचित किया जाता है, जो परंपरागत रूप से पशु बलि और मांस बिक्री से जुड़े रहे हैं." उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उन्हें किस तरह का नॉनवेज परोसा जा रहा है. अपने बयान में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए कहा, "यहां तक कि मुस्लिम देश की एविएशन कंपनी एतिहाद एयरलाइंस भी यात्रियों को हलाल और हिंदू झटका भोजन का विकल्प देती है." क्यों है विवाद? कानूनगो ने बताया कि हमने उन्हें एक नोटिस के माध्यम से पूछा है कि रेलवे में जो ठेकेदार भोजन बेचते हैं या सप्लायर मांस की सप्लाई करते हैं, वह हलाल पद्धति से है या झटका पद्धति से. यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि दारुल उलूम देवबंद के अनुसार हलाल पद्धति से जानवर का वध सिर्फ मुसलमान ही कर सकते हैं. उन्होंने कहा, सरकारी एजेंसी होने के नाते रेलवे जो खाना बेच रही है, उसमें मांस किस पद्धति से तैयार किया जा रहा है, यह स्पष्ट होना चाहिए. झटका पद्धति से मांस का वध हिंदू तथा अन्य दलित समुदाय करते हैं. सभी वर्गों के लोगों के जीविका के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रकार के मांस की बिक्री होनी चाहिए. ट्रेन के खाने पर लगेगा स्टिकर? प्रियंक कानूनगो ने आगे कहा कि रेलवे के साथ-साथ FSSAI को भी नोटिस जारी कर पूछा गया है कि ऐसी संभावनाओं पर विचार किया जाए, जहां भारत में बिकने वाली मांसाहारी सामग्री पर यह स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किया जाए कि यह सभी धर्मों के लोग खा सकते हैं या नहीं. किसी के लिए प्रतिबंध है तो उसे स्पष्ट रूप से बता दिया जाए. उन्होंने कहा कि भारत में एक अन्य अल्पसंख्यक समुदाय सिख समुदाय है. सिख धर्म मानने वालों के लिए पवित्र नियम पुस्तिका है, जिसमें आर्टिकल 24 में स्पष्ट लिखा है कि सिखों को इस्लामी हलाल पद्धति से तैयार किया गया मीट नहीं खाना चाहिए. यह उनके लिए प्रतिबंधित है. यदि एक विशेष पद्धति से तैयार मीट सिख समुदाय के लिए प्रतिबंधित है, तो अंजाने में उन्हें वही भोजन देना धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ है और मानवाधिकार का उल्लंघन है.

अब सरकारी कर्मचारियों को अपनी सैलरी का 15% बुजुर्ग माता-पिता के लिए देना होगा, अनदेखी पर कटौती

हैदराबाद  कलयुग के इस दौर में जहां आधुनिकता की चकाचौंध में अक्सर बूढ़े माता-पिता को उनके ही घर में बेगाना कर दिया जाता है, वहां तेलंगाना सरकार ने एक ‘श्रावण कुमार’ वाली भूमिका अपनाई है. मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सोमवार को एक ऐसी घोषणा की, जिसने उन संतानों की नींद उड़ा दी है जो अपने माता-पिता को बेसहारा छोड़ देते हैं. अब गुहार और मिन्नतों का दौर खत्म हुआ क्योंकि सरकार ने सीधा प्रहार जेब पर किया है. यह महज एक प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि उन थकी हुई आंखों को इंसाफ दिलाने की कोशिश है जो उम्र के आखिरी पड़ाव पर अपनों का साथ तलाशती हैं. तेलंगाना की धरती से उठी यह गूंज अब पूरे देश के लिए एक नजीर बनने जा रही है.  बुजुर्गों की अनदेखी करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर नकेल कसने के लिए तेलंगाना सरकार एक ऐतिहासिक और मानवीय फैसला लेने जा रही है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट कर दिया है कि जो कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करेंगे, उनके वेतन से सीधे तौर पर कटौती की जाएगी। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इस प्रस्तावित कानून की रूपरेखा साझा की। उन्होंने कहा कि यह कदम समाज में बुजुर्गों के प्रति गिरती जिम्मेदारी और उनके सम्मान को बचाने के लिए उठाया जा रहा है। तेलंगाना सरकार के नए फैसलों से जुड़े सवाल 1. क्या निजी क्षेत्र के कर्मचारियों पर भी यह 10% सैलरी वाला नियम लागू होगा? फिलहाल यह घोषणा सरकारी कर्मचारियों के लिए की गई है. सरकार इसके लिए जल्द ही एक विस्तृत कानून (Act) लाने वाली है. 2. सैलरी कटवाने के लिए माता-पिता को कहाँ शिकायत करनी होगी? इसके लिए सरकार एक विशेष शिकायत तंत्र विकसित कर रही है, जिसकी जानकारी कानून बनने के साथ साझा की जाएगी. 3. ‘प्रणाम’ केंद्र क्या हैं? ये वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाए गए विशेष डे-केयर सेंटर हैं, जहाँ उनके मनोरंजन, स्वास्थ्य और सामाजिक मेलजोल का ध्यान रखा जाएगा. 4. ट्रांसजेंडर को-ऑप्शन सदस्य का क्या लाभ होगा? इससे ट्रांसजेंडर समुदाय को स्थानीय शासन में अपनी आवाज उठाने और अपनी समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुँचाने का मौका मिलेगा. 5. क्या दिव्यांगों के लिए रोजगार में कोई विशेष आरक्षण है? हाँ, मुख्यमंत्री ने शिक्षा और रोजगार में दिव्यांगों के लिए विशेष कोटा प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई है. वेतन से होगी 15% तक कटौती मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार आगामी बजट सत्र में एक विशेष विधेयक (Bill) पेश करने की तैयारी में है। इस कानून के लागू होने के बाद:     जो कर्मचारी अपने माता-पिता की उपेक्षा करेंगे, उनके वेतन से 10 से 15 फीसदी की कटौती की जाएगी।     काटी गई यह राशि बिना किसी देरी के सीधे माता-पिता के बैंक खाते में हस्तांतरित (Transfer) कर दी जाएगी।     सीएम ने कड़े शब्दों में कहा, "जो लोग अपने जन्मदाताओं की देखभाल नहीं कर सकते, वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी कभी नहीं निभा पाएंगे।" 'प्रणाम' डे केयर सेंटर और सख्त कार्रवाई सरकार केवल वेतन कटौती तक ही सीमित नहीं रहेगी। वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान के लिए अन्य घोषणाएं भी की गईं:     प्रणाम सेंटर: बुजुर्गों के लिए 'प्रणाम' नाम से अत्याधुनिक डे केयर सेंटर बनाए जाएंगे।     त्वरित शिकायत निवारण: बुजुर्ग माता-पिता द्वारा अपने बच्चों के खिलाफ की गई शिकायतों पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।     सम्मानजनक जीवन: सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का हर बुजुर्ग गरिमापूर्ण जीवन जी सके। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी बड़ी घोषणा सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सीएम रेड्डी ने ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने घोषणा की कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में प्रत्येक नगर निगम में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक सह-सदस्य पद (Co-option member post) आरक्षित किया जाएगा।  

भारत का पिनाका रॉकेट सिस्टम अमेरिकी रिपोर्ट में सराहा गया, पढ़ें इसकी ताकत और क्षमता

नई दिल्ली भारत के नए पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) ने भारतीय सेना की युद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सेना अब अंधाधुंध फायरिंग से आगे बढ़कर सटीक और गहरे लक्ष्य पर प्रहार की क्षमता हासिल कर रही है। अमेरिका की एक पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नया रॉकेट सिस्टम पारंपरिक तोपखाने को दूर से मार करने वाले प्रभावी प्रतिरोधक हथियार में बदल देता है। इससे सीमावर्ती इलाकों तक सीमित प्रभाव के बजाय दुश्मन के भीतर गहरे तक असर डालना संभव होगा। रिपोर्ट के अनुसार, डीआरडीओ ने पिछले साल एलआरजीआर-120 का सफल परीक्षण किया था, जिसमें रॉकेट ने 120 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों को बेहद सटीकता से भेदा। यह पूरी तरह स्वदेशी हथियार प्रणाली है और इसे मौजूदा पिनाका लॉन्चरों से ही दागा जा सकता है, जिससे लागत भी कम होती है। एलआरजीआर-120 में इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (आईएनएस), बीच रास्ते में अपडेट और अंतिम चरण की गाइडेंस का इस्तेमाल किया गया है, जिससे उच्च सटीकता सुनिश्चित होती है। पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर (एमबीआरएल) से एक साथ आठ गाइडेड रॉकेट दागे जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल दुश्मन के कमांड सेंटर, तोपखाने और लॉजिस्टिक ठिकानों पर सटीक हमलों के लिए किया जा सकता है। फ्रांस ने दिखाई रुचि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फ्रांस ने पिनाका सिस्टम में रुचि दिखाई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में इस भारतीय प्रणाली की मांग बढ़ने के संकेत मिलते हैं। हालांकि, अमेरिका के एचआईएमएआरएस की रेंज अधिक है, लेकिन पिनाका भारत को लंबी दूरी के हमलों में बड़ी मजबूती देता है और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा देता है। भविष्य में रेंज बढ़ाने की योजना रिपोर्ट के मुताबिक, पिनाका एक स्थिर प्रणाली नहीं है। भविष्य में इसकी रेंज बढ़ाने की योजना है और 200 से 300 किलोमीटर तक की क्षमता वाले संस्करणों पर भी चर्चा चल रही है। इससे चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली चुनौतियों के बीच भारत की सैन्य तैयारियां और मजबूत होंगी।

चीन-पाकिस्तान की मिसाइल फोर्स से भारत को कितनी चुनौती, जानिए सैन्य संतुलन की पूरी तस्वीर

 नई दिल्ली दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में तनाव बढ़ता जा रहा है, जहां पाकिस्तान और चीन अपनी मिसाइल ताकत को तेजी से मजबूत कर रहे हैं. SIPRI 2025, अमेरिकी पेंटागन की 2025 रिपोर्ट, CSIS और अन्य स्रोतों के अनुसार, दोनों देशों की रॉकेट और मिसाइल फोर्स भारत के लिए गंभीर खतरा बनी हुई हैं. ये मिसाइलें परमाणु या सामान्य हथियार ले जा सकती हैं. दो-मोर्चे पर युद्ध की स्थिति में भारत की सुरक्षा को चुनौती दे सकती हैं.  पाकिस्तान की रॉकेट-मिसाइल फोर्स: नई ARFC की शुरुआत पाकिस्तान ने अगस्त 2025 में आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) बनाई, जो मुख्य रूप से सामान्य (नॉन-न्यूक्लियर) मिसाइलों और रॉकेट्स पर फोकस करती है. ये फैसला मई 2025 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद लिया गया. जहां पाकिस्तान को लंबी दूरी के सटीक हमलों की कमी महसूस हुई. ARFC चीन की PLARF की तर्ज पर बनाई गई है. इसमें फतह सीरीज की मिसाइलें प्रमुख हैं.  पाकिस्तान की फोर्स छोटी लेकिन तेजी से बढ़ रही है. अनुमानित 100-200 लॉन्चर हैं, जिनमें SRBM और MRBM शामिल हैं. SIPRI 2025 करीब 170 परमाणु वॉरहेड हैं. प्रमुख मिसाइलें…     फतह-1 (140 किमी रेंज), फतह-2 (250-400 किमी), फतह-4 (750 किमी क्रूज मिसाइल, 2025 में टेस्ट) और फतह-5 (2026 में संभावित टेस्ट, 1000 किमी रेंज).     अन्य: गजनवी (290 किमी), शाहीन-3 (2750 किमी, पूरे भारत को कवर). ये मिसाइलें सटीक, मोबाइल और सैचुरेशन अटैक (बहुत सारी एक साथ) के लिए डिजाइन की गई हैं. पाकिस्तान चीन से टेक्नोलॉजी ले रहा है, जैसे PL-15 मिसाइलें. चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स: दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) दुनिया की सबसे शक्तिशाली मिसाइल फोर्स है. पेंटागन 2025 रिपोर्ट के अनुसार, इसमें 1250+ ग्राउंड-बेस्ड बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें हैं. परमाणु वॉरहेड 600+ हैं, जो 2030 तक 1000+ हो सकते हैं. मुख विशेषताएं 900+ छोटी दूरी (SRBM), 1300 मध्यम दूरी (MRBM), 500 इंटरमीडिएट (IRBM), 400+ ICBM (जैसे DF-41, 12,000+ किमी रेंज). हाइपरसोनिक मिसाइलें (DF-17, 5+ मैक स्पीड), एंटी-शिप और सटीक गाइडेंस वाली. नए साइलो (320+), सबमरीन-लॉन्च JL-3 और स्पेस-बेस्ड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम. चीन की फोर्स मात्रा, टेक्नोलॉजी और रेंज में बहुत आगे है, जो भारत के उत्तरी इलाकों को आसानी से निशाना बना सकती है. भारत की मिसाइल फोर्स: स्थिति और तुलना भारत की मिसाइल फोर्स मजबूत है, लेकिन संख्या और कुछ टेक्नोलॉजी में पीछे. SIPRI 2025 के अनुसार परमाणु वॉरहेड 180 हैं. प्रमुख मिसाइलें…     अग्नि सीरीज: अग्नि-1 (700 किमी), अग्नि-5 (5000+ किमी, MIRV क्षमता).     ब्रह्मोस (सुपरसोनिक क्रूज, 290-800 किमी), प्रलय (500 किमी).     कुल लॉन्चर 200-300+. तुलना      पाकिस्तान से: भारत क्वालिटी और रेंज में आगे, लेकिन पाकिस्तान की नई ARFC सैचुरेशन अटैक से चुनौती दे सकती है.     चीन से: चीन की संख्या (हजारों मिसाइलें) और हाइपरसोनिक टेक भारत से बहुत आगे. भारत की अग्नि-5 पूरे चीन को कवर करती है, लेकिन मात्रा में कमी है. भारत के लिए दो-मोर्चे की चुनौती पाकिस्तान पश्चिम से सीधा खतरा है- ARFC और फतह सीरीज सीमा पर तेज हमले कर सकती हैं. 2025 संघर्ष में पाकिस्तान ने मिसाइलों का इस्तेमाल किया. चीन उत्तर से (तिब्बत) पूरे भारत को निशाना बना सकता है. हाइपरसोनिक मिसाइलें S-400 जैसी डिफेंस को बायपास कर सकती हैं. दोनों मिलकर हमला करें तो भारत को दो मोर्चों पर लड़ना पड़ेगा- मिसाइलों की बाढ़ से डिफेंस ओवरलोड हो सकता है. भारतीय सेना प्रमुख ने भी रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाने की जरूरत बताई है. भारत की प्रतिक्रिया और भविष्य भारत अपनी इंडिजेनस मिसाइलों (अग्नि वेरिएंट, हाइपरसोनिक टेस्ट), S-400/S-500 डिफेंस और ब्रह्मोस विस्तार पर काम कर रहा है. रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाने की योजना है. लेकिन पाकिस्तान-चीन की बढ़ती ताकत से मिसकैलकुलेशन का खतरा है, जो छोटे संघर्ष को बड़ा युद्ध बना सकता है. कुल मिलाकर, पाकिस्तान की फोर्स फोकस्ड और सीधी चुनौती है, जबकि चीन की विशाल और एडवांस्ड. भारत को अपनी डिफेंस को लगातार मजबूत करना होगा ताकि रणनीतिक संतुलन बना रहे.

डायबिटीज से जूझता भारत, 2030 तक दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती बनेगा ये रोग

 नईदिल्ली  भारत डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के टाइम बम पर खड़ा है. लेंसेट इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगभग 10 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं. 2030 तक यह आंकड़ा दोगुना होने की आशंका है. अब नेचर जर्नल में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट ने बेहद भयावह भविष्यवाणी की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 30 सालों में यानी मोटा-मोटी 2050 तक डायबिटीज देश के लिए इतना परेशान करने वाला होगा कि यह देश पर अर्थव्यवस्था का दूसरा सबसे बड़ा बोझ बन जाएगा. रिपोर्ट में क्या है इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एप्लायड सिस्टम एनालिसिस और वियना यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनोमिक्स ने मिलकर 204 देशों मे डायबिटीज के बर्डन को लेकर यह अध्ययन किया है. इसी अध्ययन में बताया गया है कि डायबिटीज के कारण अगले 30 सालों में दुनिया की अर्थव्यवस्था पर 10 ट्रिलियन डॉलर का बोझ बढ़ने वाला है. 1 ट्रिलियन एक हजार अरब होता है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितना बड़ा बोझ है. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, भारत और चीन पर डायबिटीज का सबसे ज्यादा खर्च होने वाला है. डायबिटीज़ से होने वाला सबसे बड़ा आर्थिक बोझ संयुक्त राज्य अमेरिका पर होगा जहां यह 2.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च होगा. इसके बाद भारत को इस पर 1.6 ट्रिलियन डॉलर खर्च करना होगा और चीन को 1 ट्रिलियन डॉलर खर्च करना होगा. कैसे साल दर साल बढ़ रहे हैं केस दो-तीन दशक पहले भारत में सिर्फ कॉलरा, टायफॉयड, डेंगू मलेरिया जैसी इंफेक्शन वाली बीमारियों के बारे में ही चर्चा होती थी. डायबिटीज के बारे में तो अधिकांश लोग जानते भी नहीं थे लेकिन 2000 के बाद जब शहरीकरण ने तेजी से अपना पैर पसारना शुरू कर दिया, नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों की बाढ़ आ गई है. भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अचानक 2000 में डायबिटीज के 3.2 करोड़ मरीज सामने आ गए. 2007 में यह दोगुना हो गया. 2017 में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में डायबिटीज मरीजों की संख्या बढ़कर 7.3 करोड़ हो गई. फिलहाल यह माना जाता है कि भारत में 10 करोड़ लोग डायबिटीज की बीमारी से पीड़ित हैं लेकिन 10 करोड़ से कहीं ज्यादा प्री-डायबिटीज के शिकार हैं. यह आंकड़ा तो बहुत कम है, असली चिंता इस बात की है कि भारत में अधिकांश लोगों को पता ही नहीं कि उन्हें डायबिटीज की बीमारी है. यही कारण है नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन हम सब के लिए आंख खोलने वाला है. क्यों बढ़ रहे हैं डायबिटीज के मामले     परंपरागत भोजन में कमी-1960 से 70 के दशक तक भारतीयों का भोजन एकदम शुद्ध अनाज पर आधारित था. रिफाइंड, कृत्रिम रुप से बने भोजन, पैकेटबंद फूड, प्रोसेस्ड फूड न के बराबर था. इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती थी जिसके कारण कई क्रोनिक बीमारियों का खतरा कम रहता था. लेकिन औद्योगिकरण के बाद चावल और गेहूं पॉलिस्ड होने लगा जिसके बाद फाइबर की मात्रा में कमी आने लगी. वहीं रिफाइंड और तेल का प्रयोग ज्यादा होने लगा. इस कारण से हमारे परंपरागत भोजन में कटौती आने लगी.     प्रोसेस्ड फूड-पिछले दो दशक से लोगों के भोजन में प्रोसेस्ड और रिफाइंड फूड का चलन बढ़ा है. रिफाइंड तेल, चीनी, चीज, बटर, मैदा से बनी चीजें आदि खूब खाया जाने लगा है. हर दिन पिज्जा, बर्गर, सॉफ्ट ड्रिंक, सोडा, बिस्किट, चॉकलेट आदि लोगों के जीवन का हिस्सा बनने लगे हैं. अधिकांश चीजों में इन प्रोसेस्ड चीजों को इस्तेमाल होता है और इसे हम खाते हैं. ये प्रोसेस्ड चीजें डायबिटीज, शुगर आदि बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है.     फिजिकल एक्टिविटी में कमी-शारीरिक रूप से सक्रिय न होना इन क्रोनिक बीमारियों की बहुत बड़ी वजह है. पहले के लोग हमेशा किसी न किसी तरह के काम में लगे रहते थे. गांवों में खेतों में काम में पूरा परिवार लगा रहता था. मशीनों का इस्तेमाल बहुत कम होता था. किन आज लोगों के पास समय का बहुत अभाव है. अधिकांश लोग ऑफिस में चेयर पर बैठकर काम करते हैं. सुबह से लेकर शाम तक की ड्यूटी होती है जिनकी वजह से समय नहीं मिल पाता. वहीं शहरीकरण शारीरिक गतिविधियों को और अधिक प्रभावित किया है. जब तक आप शारीरिक गतिविधियां नहीं करेंगे डायबिटीज, हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का खतरा नहीं घटेगा.     तनाव और डिप्रेशन-आधुनिकरण के बाद लोगों में तनाव और डिप्रेशन की समस्या काफी बढ़ गई है. लोगों के उपर काम का बोझ बहुत ज्यादा रहता है जिसके कारण उनके उपर दबाव बहुत अधिक होता है. वहीं लोगों की महत्वाकांक्षा बहुत बढ़ गई जिसके कारण वह उन चीजों को पाने के लिए वह किसी भी बद तक जाने के लिए तैयार रहते हैं. तनाव के कारण शरीर में खतरनाक केमिकल की बाढ़ जाती है जो कई क्रोनिक बीमारियों की वजह बनती है.     पॉल्यूशन-क्रोनिक बीमारियों के बढ़ने की बड़ी वजह पॉल्यूशन भी है. औद्योगिकीकरण के बाद लाखों फैक्ट्रियों से खतरनाक रसायन निकल रहे हैं जो हवा में घुलकर हमारी सांसों में आते हैं और हमें बीमार करते हैं. फिर इन बीमारियों से कैसे छुटकारा पाएं इस विषय पर जब हमने मोरेंगो एशिया अस्पताल में डायबेट्स एंड मेटाबोलिक डिसॉर्डर के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल से बात की तो उन्होंने कहा कि डायबिटीज के खतरे को टालना बहुत आसान है. बस जो चीजें डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाता है, उन्हें अपने जीवन से निकाल दीजिए. पुराने वाली लाइफस्टाइल अपना लीजिए. जैसा हमारे पूर्वज खाते-पीते और रहते थे, वैसा जीवन अपना लीजिए. मसलन शुद्ध अनाज, हरी सब्जियां, दाल, फल, सीड्स आदि का सेवन कीजिए. आज की जितनी खाने पीने की चीजें और वो प्रोसेस्ड है, उन्हें मत खाइए और अपनी शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाइए. रोज कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज कीजिए. खूब वॉक कीजिए. खूब पानी पीजिए, पर्याप्त नींद लीजिए और तनाव को भगाकर खुश रहिए. इन आदतों से सिर्फ डायबिटीज ही नहीं, हार्ट डिजीज, किडनी डिजीज और लिवर डिजीज का जोखिम भी कम हो जाएगा.

महिलाओं का भरोसा खो चुकीं ममता बनर्जी, झूठ पर टिकी है राजनीति– सुकांत मजूमदार

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि इस बार राज्य की महिलाएं ममता बनर्जी के खिलाफ वोट करेंगी। सुकांत मजूमदार ने आईएएनएस से कहा कि ममता बनर्जी को झूठ बोलने की आदत बहुत पहले से है। किसी भी तरह से महिलाओं को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं है। महिलाएं ही इस बार ममता बनर्जी के खिलाफ वोट करने जा रही हैं। राज्य की महिलाएं मौजूदा हालात से चिंतित हैं और बदलाव चाहती हैं। भाजपा नेता ने आगे कहा कि महिलाओं को इस बात का डर है कि कहीं पश्चिम बंगाल की स्थिति बांग्लादेश जैसी न हो जाए। उन्होंने दावा किया कि इसी आशंका के चलते महिलाओं ने मन बना लिया है कि वे ममता बनर्जी के खिलाफ मतदान करेंगी। राज्य की जनता, खासकर महिलाएं, अब सच्चाई को समझ रही हैं। सुकांत मजूमदार ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि अनाप-शनाप बोलना ममता बनर्जी की आदत बन चुकी है। इस बार पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी को सबक सिखाने वाली है। लोग अब मौजूदा सरकार से परेशान हो चुके हैं और बदलाव की दिशा में कदम उठाएंगे। दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि चुनाव आयोग ने एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल कर मतदाता सूची से नाम काटे हैं। इस आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए सुकांत मजूमदार ने कहा कि एआई का इस्तेमाल करना कोई अपराध नहीं है। अगर उन्हें एआई नहीं आता, तो वे इसका इस्तेमाल न करें। आज हर जगह एआई का उपयोग हो रहा है। हम भी एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं और हमारे बच्चे भी स्कूलों में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी का जितना ज्यादा इस्तेमाल होगा, व्यवस्था उतनी ही पारदर्शी और मजबूत होगी।