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आसिम मुनीर की बेटी का निकाह सगे भाई के बेटे से, तस्वीरें नहीं और आयोजन रहा सीक्रेट

 इस्लामाबाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बेटी की शादी हो गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि मुनीर ने अपने ही सगे भाई के बेटे से अपनी बेटी की शादी कराई है। यह शादी पिछले हफ्ते रावलपिंडी में हुई और इसमें तमाम राजनीतिक हस्तियों और सैन्य अफसरों ने हिस्सा लिया। हालांकि हाई प्रोफाइल मेहमानों के बावजूद, इसे बिल्कुल निजी रखा गया था। पत्रकार ने की परिवार में शादी की पुष्टि पाकिस्तानी पत्रकार जाहिद गिशकोरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि आसिम मुनीर की बेटी का निकाह उनके भाई के बेटे से हुआ है। एक अन्य पत्रकार रजा मुनीब ने भी इस बात की पुष्टि की है। रजा ने कहा कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपनी बेटी की शादी, भाई कासिम मुनीर के बेटे से की है। यह शादी रावलपिंडी में हुई। आसिम मुनीर की बेटी की शादी क्यों रही इतनी सीक्रेट  पाकिस्तान में आसिम मुनीर की ताकत के तौर पर भी देखा जा रहा है क्योंकि इसमें देश-दुनिया के 400 वीआईपी मेहमान जुटे थे। आसिम मुनीर ने बेटी की शादी अपने भाई सैयद कासिम मुनीर के बेटे अब्दुल रहमान से ही की है। इस तरह अपने भतीजे से ही आसिम मुनीर ने बेटी की शादी कर दी है, जो आपस में चचेरे भाई-बहन ही थे। इस शादी को लेकर भारत में कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं, लेकिन यह भी सच है कि पाकिस्तान में ऐसी शादियां सामान्य हैं। करीब दो तिहाई शादियां पाकिस्तान में ऐसी ही होती हैं, जिनमें कजिन के बीच रिश्ते होते हैं। इस तरह यह कोई हैरानी वाली बात नहीं है। मुख्य बात यह है कि आसिम मुनीर की बेटी की शादी रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय में ही हुई। ऐसा इसलिए क्योंकि मुख्यालय की सुरक्षा व्यवस्था एकदम पुख्ता है। आसिम मुनीर पाकिस्तान में सबसे मजबूत शख्सियत बन चुके हैं और वह किसी भी तरह का रिस्क बाहर आयोजन करके नहीं लेना चाहते थे। यही नहीं इस शादी को इतना सीक्रेट रखा गया कि एक तस्वीर तक मीडिया या सोशल मीडिया में नहीं आई है। पाकिस्तानी पत्रकार जाहिद गिशकोरी ने कहा कि यह शादी रावलपिंडी में हुई थी। आसिम मुनीर की तीसरी बेटी की शादी उनके ही भाई के बेटे यानी भतीजे से हुई। इस हाईप्रोफाइल शादी में करीब 400 लोग शामिल थे। अपने भाई सैयद कासिम मुनीर के बेटे अब्दुल रहमान को ही आसिम मुनीर ने अपना दामाद चुना है। पहले वह पाकिस्तान की आर्मी में कैप्टन के तौर पर काम करते थे। इसके बाद उन्होंने आर्मी कोटा से ही सिविल सर्विसेज जॉइन किया था और फिलहाल असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। इस आयोजन में आसिफ अली जरदारी, पीएम शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी पंजाब की सीएम मरियम नवाज भी मौजूद थे। पिछले हफ्ते हुआ निकाह अपने वीडियो में गिशकोरी ने बताया कि दूल्हे का नाम अब्दुर रहमान है। यह एक हाई प्रोफाइल शादी थी। उन्होंने आगे बताया कि रहमान पहले पाकिस्तान आर्मी में कैप्टन था। गिशकोरी ने इस वीडियो में आसिम मुनीर की बेटियों के बारे में भी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मुनीर की चार बेटियां हैं। यह उनकी तीसरी बेटी की शादी है, जिसका नाम महनूर है। कौन है पाकिस्तान का नया दामाद जनरल असीम मुनीर की तीसरी बेटी महनूर का निकाह भाई कासिम मुनीर के बेटे अब्दुल रहमान से हुआ है. अब्दुल रहमान पहले पाकिस्तान सेना में कैप्टन के पद पर थे. इसके बाद वो सेना के कोटे से ही सिविल सर्विसेज में आए और वर्तमान में असिस्टेंट कमिश्नर के रूप में तैनात हैं. दावा किया जा रहा है कि अब्दुल रहमान, मुनीर के करीबी हैं और दोनों के बीच पहले से ही काफी अच्छे संबंध रहे हैं. बता दें कि मुनीर की चार बेटियां हैं, जिसमें से तीसरी बेटी की ये आलीशान शादी पिछले हफ्ते हुई है. बताया जा रहा है कि मुनीर ने अपनी बेटी की शादी आलीशान तरीके से की है, सुरक्षा कारणों से इस समारोह की कोई तस्वीर बाहर नहीं आने दी गई. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस वेडिंग सेरेमनी में पाकिस्तान की लगभग पूरी सरकार ही आ गई थी. बताया जा रहा है कि गेस्ट लिस्ट में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पंजाब की सीएम मरियम नवाज, आईएसआई (ISI) चीफ, रिटायर्ड जनरल्स और सेना के कई पूर्व प्रमुख शामिल थे. दावा किया जा रहा है कि रावलपिंडी में हुई इस शादी में 400 खास मेहमानों को ही न्योता दिया गया था. क्या करता है दूल्हा? दूल्हे के बारे में और ज्यादा जानकारी देते हुए गिशकोरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना में कैप्टन रहने के बाद वह सिविल सर्विसेज की तरफ चला गया। फिलहाल वह आर्मी अफसरों के सिविल सर्विसेज कोटा के तहत असिस्टेंट कमिश्नर है। गिशकोरी ने बताया कि इस शादी में वर्तमान पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पाकिस्तान स्थित पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ समेत कई रिटायर्ड जनरल्स और पूर्व आर्मी चीफ मौजूद रहे। पूरी तरह गोपनीय रखी गई शादी इस शादी में यूएई के राष्ट्रपति के शामिल होने की भी खबरें थीं। हालांकि गिशकोरी ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया कि यूएई के राष्ट्रपति वहां आए नहीं थे। उन्होंने बताया कि इस शादी में 400 से ज्यादा मेहमान मौजूद थे और सुरक्षा कारणों से शादी को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था।

ताइवान सीमा पर तनाव, ड्रैगन ने रॉकेटों से किया सैन्य प्रदर्शन

बीजिंग  ताइवान के समुद्री किनारों पर चीन की सेनाओं की कारगुजारियां युद्ध जैसी ही हैं. चीन की आर्मी ताइवान को चारों ओर से घेर रही है. लंबी दूरी के लाइव रॉकेट फायर कर रही है और जंगी जहाजों को तैनाती असली जंग को ध्यान में रखकर की गई है.  चीन ने ताइवान के आस-पास दो दिन की मिलिट्री ड्रिल में 10 घंटे की लाइव फायरिंग ड्रिल की है. इस दौरान चीनी सेना ने ताइवान को घेरने और उसके मुख्य बंदरगाहों को ब्लॉक करने का अभ्यास किया. इन अभ्यासों में ताइवान और उसके मुख्य बंदरगाहों, कीलुंग और काओशुंग की नाकेबंदी का भी अभ्यास किया गया. चीन की सेना ने शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ ताइवान के खिलाफ इन्फॉर्मेशन वॉर भी तेज कर दिया है. एक विदेशी चीनी मिलिट्री कमेंटेटर ने कहा कि इस कैंपेन का मकसद विदेशी लोगों को यह यकीन दिलाना है कि ताइवान की सेना और उपकरण PLA के हमले का सामना नहीं कर पाएंगे.  उकसावे की इतनी कार्रवाई के बाद भी चीन ताइवान को माहौल बिगाड़ने का दोषी ठहरा रहा है.  चीन के विदेश मंत्री  वांग यी ने कहा कि, "ताइवान का मुद्दा चीन का अंदरूनी मामला है और यह चीन के मुख्य हितों का केंद्र है. ताइवान की आजादी की ताकतों की लगातार उकसावे वाली हरकतों और अमेरिका द्वारा ताइवान को बड़े पैमाने पर हथियार बेचने के जवाब में, हम निश्चित रूप से उनका कड़ा विरोध करेंगे और जवाबी कार्रवाई करेंगे." चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि, 'कानून के अनुसार ताइवान का पूरी तरह से एकीकरण हासिल करना और हमारी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना हमारा ऐतिहासिक मिशन है जिसे हमें पूरा करना ही है.' सोमवार को PLA के ईस्टर्न थिएटर कमांड ने ताइवान के आस-पास के पानी और एयरस्पेस में नौसेना के जहाजों और विमानों के साथ मिलकर जॉइंट ड्रिल की. इन अभ्यासों में समुद्र और जमीन पर मौजूद टारगेट पर नकली हमले, एयर-कंट्रोल ऑपरेशन और एंटी-सबमरीन मिशन पर फोकस किया गया. इन ड्रिल्स का मकसद चीन की वायु सेना और नौसेना के बीच बेहतर तालमेल दिखाना था. मंगलवार को ताइवान के आस-पास के पानी में लंबी दूरी के लाइव-फायर अभ्यासों के साथ ये और तेज हो गए. बता दें कि चीन की ओर से उकसावे वाली ये हरकतें वाशिंगटन द्वारा 18 दिसंबर को ताइवान को नए हथियारों की बिक्री की घोषणा के बाद शुरू हुईं है. अमेरिका ने ताइवान को 11 बिलियन डॉलर की हथियारों की बिक्री की घोषणा की है. ये डील ताइवान के लिए सबसे बड़ी डील है.  इस डील में रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम, लंबी दूरी की मिसाइलें, सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर, मानवरहित निगरानी प्लेटफॉर्म और संबंधित मिलिट्री सॉफ्टवेयर शामिल हैं. ताइवान के कोस्टगार्ड ने बताया कि मुख्य द्वीप के आसपास दो ड्रिल ज़ोन में सात रॉकेट दागे गए.  अलजजीरा ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने सोमवार सुबह 6 बजे से मंगलवार सुबह 6 बजे के बीच चीनी विमानों की 130 हवाई उड़ान, 14 नौसैनिक जहाजों और आठ "आधिकारिक जहाजों" को ट्रैक किया है.  इन 24 घंटों के दौरान, 90 हवाई उड़ानें ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन (ADIZ) में घुस गईं, जो ताइपे द्वारा मॉनिटर किया जाने वाला जमीन और समुद्र का एक इलाका है. ताइवान ने कहा कि यह 2022 के बाद इस तरह की दूसरी सबसे बड़ी घुसपैठ है. चीन के ड्रिल को देखते हुए ताइवान ने मंगलवार को 80 से ज़्यादा घरेलू उड़ानें रद्द कर दीं और चेतावनी दी कि लाइव-फायर ड्रिल के दौरान फ्लाइट रूट बदलने की वजह से 300 से ज़्यादा इंटरनेशनल फ्लाइट्स में देरी हो सकती है.  ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि कोस्टगार्ड ने बाहरी द्वीपों के पास अभ्यासों पर नजर रखी और यह भी बताया कि नौसेना के कुछ जहाज भी पास में तैनात किए गए थे, जिनकी संख्या नहीं बताई गई है. ताइपे ने अपने ADIZ में होने वाली सभी घुसपैठ पर भी नज़र रखी, जिसमें ताइवान जलडमरूमध्य, तटीय चीन के कुछ हिस्से और ताइवान के आसपास का पानी शामिल है.  

भारत को मिलेगा फायदा, 1 जनवरी 2026 से ऑस्ट्रेलिया में भारतीय उत्पाद होंगे ड्यूटी-फ्री

नई दिल्ली भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते के तीन साल पूरे होने पर बड़ी खबर सामने आई है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार, 29 दिसंबर को घोषणा की कि 1 जनवरी 2026 से ऑस्ट्रेलिया भारतीय निर्यात के लिए अपनी सभी टैरिफ लाइनों को शून्य ड्यूटी (zero-duty) कर देगा. यानी भारत से ऑस्ट्रेलिया जाने वाले किसी भी सामान पर कोई भी शुल्क नहीं लगेगा. ये समझौता 29 दिसंबर 2022 को लागू हुआ था और इसे 'अर्ली हार्वेस्ट' डील कहा जाता है. जिसमें शुरुआती चरण में कुछ प्रमुख व्यापारिक मुद्दों को शामिल किया गया था. अब तीन साल बाद ये डील अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है, जहां ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय सामान के लिए पूरी तरह ड्यूटी-फ्री मार्केट एक्सेस देने का फैसला किया है. पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, पीयूष गोयल का पोस्ट. उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में इस समझौते ने निर्यात में लगातार वृद्धि की है. बेहतर बाजार तक पहुंच और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में मदद की है. इससे भारतीय निर्यातक, MSME, किसान और काम करने वाले लोगों को खास फायदा हुआ है.  रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत का ऑस्ट्रेलिया को निर्यात 8 प्रतिशत बढ़ा है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन (trade balance) में सुधार हुआ है. विभिन्न क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है. मैन्युफैक्चरिंग, केमिकल्स, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और जेम्स एवं ज्वेलरी जैसे सेक्टर में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई. निर्यात में 8% की शानदार बढ़ोतरी वाणिज्य मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात 8 प्रतिशत बढ़ा है। इस वृद्धि में रसायन, कपड़ा, प्लास्टिक, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम उत्पाद और रत्न व आभूषण (जेम्स एंड जूलरी) जैसे प्रमुख क्षेत्रों का बड़ा योगदान रहा है। पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर कहा, "1 जनवरी, 2026 से भारतीय निर्यात के लिए 100 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई टैरिफ लाइन्स (उत्पाद श्रेणियां) जीरो-ड्यूटी होंगी। इससे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।" समझौते के 3 साल के दौरान क्या-क्या हुआ? भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यह अंतरिम व्यापार समझौता 29 दिसंबर, 2022 को लागू हुआ था। आज इसके तीन साल पूरे हो गए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना और शुल्क बाधाओं को कम करना था। मंत्री ने समझौते की सफलता के बारे में बताते हुए कहा, "पिछले तीन वर्षों में इस करार ने निरंतर निर्यात वृद्धि, बाजार तक गहरी पहुंच और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने का काम किया है। इसका सीधा लाभ भारतीय निर्यातकों, एमएसएमई, किसानों और श्रमिकों को मिला है।" श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सबसे ज्यादा फायदा विशेषज्ञों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने से भारतीय उत्पाद वहां चीन और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले ज्यादा किफायती हो जाएंगे। चूंकि कपड़ा, चमड़ा और आभूषण उद्योग में बड़ी संख्या में रोजगार सृजन होता है, इसलिए यह कदम भारत की रोजगार वृद्धि में भी सहायक होगा। भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते में क्या खास?     समझौता लागू हुआ: 29 दिसंबर, 2022     पूर्ण शुल्क माफी: 1 जनवरी, 2026 से (100% टैरिफ लाइन्स पर)     मौजूदा वित्त वर्ष में वृद्धि: निर्यात में 8% का इजाफा     लाभ लेने वाले सेक्टर: टेक्सटाइल, फार्मा, केमिकल्स, जेम्स एंड जूलरी नए साल में लागू होने वाली 100 प्रतिशत टैरिफ छूट के साथ, भारत सरकार को उम्मीद है कि ऑस्ट्रेलिया के साथ द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़ों में और तेजी देखने को मिलेगी।  कृषि निर्यात में भी व्यापक प्रगति हुई है. फल-सब्जियां, समुद्री उत्पाद, मसाले और खास तौर पर कॉफी में खासा उछाल देखा गया है. श्रम-प्रधान क्षेत्र जैसे टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स-ज्वेलरी और प्रोसेस्ड फूड को इस नई व्यवस्था से सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि टैरिफ खत्म होने से इनके लिए ऑस्ट्रेलियाई बाजार में पहुंच आसान और सस्ती हो जाएगी. ये कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के चलते भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लग रहा है. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित बाजार में ड्यूटी-फ्री एक्सेस भारत के लिए निर्यात की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा. दोनों देश फिलहाल व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (Comprehensive Economic Cooperation Agreement – CECA) पर बातचीत कर रहे हैं, जो और भी गहरा और व्यापक होने की उम्मीद है. पीयूष गोयल ने कहा कि Economic Cooperation and Trade Agreement (ECTA) इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की आर्थिक मौजूदगी को मजबूत करता है और 'मेक इन इंडिया' तथा 'विकसित भारत@2047' के विजन से जुड़ा है.

1 जनवरी 2026 से लागू होंगे ये 7 बड़े नियम, LPG से लेकर UPI और PAN तक आपकी जेब पर होगा असर

नई दिल्ली यह नया साल केवल कैलेंडर बदलने वाला नहीं, बल्कि आपकी जेब, बिल, निवेश, ट्रैवल और रोजमर्रा की डिजिटल लाइफ पर कई बड़े बदलाव सीधे असर डालने वाले हैं. 1 जनवरी 2026 से देशभर में कई रूल्स अप्लाई हो रहे हैं,गैस बिल से लेकर UPI, PAN, LPG और ट्रेड पॉलिसी तक सब कुछ बदल रहा है.तो आइए जानते हैं आने वाले महीने की पहली तारीख से कौन से नियम बदलने वाले हैं. गैस टैरिफ अब पूरे देश में एक समान      पहली बार देश में "One Nation – One Tariff" लागू होगा.     PNGRB ने यूनिफाइड गैस टैरिफ मंजूर किया,     0–300 किमी: ₹54/MMBTU,     300 किमी से ऊपर: ₹102.86/MMBTU     अब टैरिफ दाम पूरे भारत में एक जैसे होंगे,     CNG के दाम ₹2–₹3 तक घटेंगे,     THINK Gas ने CNG में ₹2.50/kg कटौती की होगी,     PNG में ₹2–₹5/SCM तक कमी,किचन खर्च होगा कम. LPG सिलेंडर और ATF के दाम भी घट सकते हैं     कच्चे तेल के भाव नीचे आए तो 1 जनवरी को LPG कीमतों में कटौती संभव है.     घरेलू और कमर्शियल,दोनों सिलेंडर सस्ते हो सकते हैं,     ATF (एविएशन फ्यूल) के दाम भी कम होने के संकेत हैं.     OCL–BPCL–HPCL हर महीने रेट रिव्यू करते हैं.     नए साल की शुरुआत ,गैस बिल कम होने की उम्मीद. भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौता      1 जनवरी 2026 से बड़ा बदलाव लागू की उम्मीद है.     भारत का 100% निर्यात ऑस्ट्रेलिया में अब ड्यूटी-फ्री.     हले सिर्फ 96–98% उत्पाद शामिल थे.     अब इंजीनियरिंग, मशीनरी, स्टील,सब कवर है.      MSME व एक्सपोर्ट सेक्टर को सीधा फायदा.     पीयूष गोयल: निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर है. IndiGo पायलटों का वेतन बढ़ा     लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन के बाद नीति में बदलाव.     डोमेस्टिक लेओवर: कैप्टन ₹3,000, फर्स्ट ऑफिसर ₹1,500.     डेडहेड अलाउंस: कैप्टन ₹4,000, फर्स्ट ऑफिसर ₹2,000.     नाइट अलाउंस: कैप्टन ₹2,000 प्रति घंटा (12 AM–6 AM).     नया "टेल-स्वैप" अलाउंस लागू.     मकसद-संचालन स्मूद, यात्रियों को बेहतर शेड्यूल मिले. UPI और डिजिटल पेमेंट      1 जनवरी से सुरक्षा नियम सख्त हो जाएंगे.     UPI ऐप्स पर अतिरिक्त KYC जरूरी.      मोबाइल–डिवाइस लिंकिंग जरूरी है.     संदिग्ध / फर्जी अकाउंट ब्लॉक होंगे.      Google Pay, PhonePe, Paytm, WhatsApp Pay सभी पर लागू.     फ्रॉड रोकना मुख्य उद्देश्य है,     डिजिटल पेमेंट अब और सुरक्षित बनेंगे. स्मॉल सेविंग्स स्कीम     स्मॉल सेविंग्स स्कीम की ब्याज दरें 31 दिसंबर को RBI रिव्यू करेगा.     G-Sec यील्ड कम होने से जनवरी–मार्च 2026 में दरें घट सकती हैं.     PPF, SSY, SCSS, FD निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत. PAN-Aadhaar लिंकिंग      PAN-Aadhaar लिंकिंग की लास्ट 31 दिसंबर 2025 है.     टाइम पर लिंक न किया तो 1 जनवरी 2026 से PAN इनऑपरेटिव हो जाएगा.     *ITR फाइल और वेरिफाई नहीं हो पाएगा.     रिफंड अटक सकता है, TDS/TCS 20% तक कटेगा.     बैंक, डीमैट, म्यूचुअल फंड–प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन में दिक्कतें आएंगी. नतीजे भी समझें     ITR फाइल और वेरिफाई नहीं कर पाएंगे.     टैक्स रिफंड रुकेगा.     TDS/TCS 20% तक लगेगा.     बैंक अकाउंट-डीमैट-म्युचुअल फंड-प्रॉपर्टी खरीद में दिक्कत. नया साल, नए नियम     2026 के ये बदलाव घर, जेब, बिज़नेस, ट्रैवल और डिजिटल मनी,सब पर असर डालेंगे.     अगर आप चाहते हैं कि नया साल पैसों की बचत और सही प्लानिंग के साथ शुरू हो .     PAN-Aadhaar लिंक करें, UPI अकाउंट अपडेट करें और गैस-LPG दरों को ध्यान से चेक करें.

लॉकहीड मार्टिन का भारत को बड़ा प्रस्ताव: 80 C-130J विमान और अरबों डॉलर का दांव, ‘भारत में बनाएंगे, दुनिया पर होगा कब्जा’

नई दिल्ली भारत करीब 80 सैन्य परिवहन विमानों की खरीद की तैयारी में है. इस बीच अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने अपने C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान को मजबूत दावेदार बताते हुए पेश किया है. कंपनी का कहना है कि यह विमान भारत को क्वाड देशों के बीच सामरिक एयरलिफ्ट में और मजबूत बनाएगा. कंपनी भारत में प्रोडक्शन हब लगाएगी लॉकहीड मार्टिन के  अधिकारियों ने कहा है कि अगर भारत C-130J का चयन करता है. तो कंपनी भारत में इस विमान के निर्माण के लिए एक बड़ा प्रोडक्शन हब लगाएगी. यह अमेरिका के बाहर दुनिया का पहला ऐसा फाइनल असेंबली सेंटर होगा. अब तक C-130J परिवार के 560 से ज्यादा विमान बन चुके हैं. जो 23 देशों की 28 वायु सेनाओं में सेवा दे रहे हैं. 30 लाख से ज्यादा फ्लाइट ऑवर्स पूरे कर चुके हैं. IAF के पास पहले से 12 C-130J विमान भारतीय वायुसेना (IAF) के पास पहले से 12 C-130J विमान हैं. यह विमान सिर्फ ट्रांसपोर्ट ही नहीं, बल्कि स्पेशल फोर्स ऑपरेशन, खुफिया मिशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सर्च एंड रेस्क्यू और कमांड रोल जैसे कई कामों में इस्तेमाल हो सकता है. भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भी C-130J का संचालन कर रहे हैं. लॉकहीड मार्टिन की उपाध्यक्ष कहा कि C-130J ने हर मुश्किल माहौल में अपनी क्षमता साबित की है. यह भारत के लिए सबसे बेहतर विकल्प है. कंपनी का दावा है कि यह विमान 20 से ज्यादा अलग-अलग मिशन प्रोफाइल में इस्तेमाल हो सकता है. इसके नाम 54 वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं. IAF ने 2022 में पुराने AN-32 और IL-76 विमानों को बदलने के लिए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी. करीब 80 विमानों की यह डील कई अरब डॉलर की है. आने वाले हफ्तों में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) से इसे मंजूरी मिलने की संभावना है. इस रेस में ब्राजील की एम्ब्राएर का KC-390 और एयरबस का A-400M भी शामिल हैं. C-130J में लगातार नए फीचर्स जोड़े जा रहे लॉकहीड मार्टिन इस प्रोजेक्ट के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ साझेदारी में बोली लगा रही है. कंपनी ने कहा कि C-130J में लगातार नए फीचर्स जोड़े जा रहे हैं. इनमें F-35 फाइटर जेट में इस्तेमाल होने वाला डिस्ट्रिब्यूटेड अपर्चर सिस्टम (DAS) भी शामिल है. यह सिस्टम छह इन्फ्रारेड कैमरों के जरिए पायलट को बेहतर सिचुएशनल अवेयरनेस और मिसाइल चेतावनी देता है. लॉकहीड मार्टिन के अधिकारियों का कहना है कि MTA प्रोग्राम भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को नई मजबूती देगा. भारत के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को भी मजबूत करेगा. कंपनी का दावा है कि उसके पास तेज डिलीवरी की क्षमता है. वह अपने प्रतिद्वंद्वियों से पहले विमान सप्लाई कर सकती है. भारत में C-130J के टेल सेक्शन पहले से बनाए जा रहे कंपनी ने यह भी बताया कि हैदराबाद स्थित टाटा लॉकहीड मार्टिन एयरोस्ट्रक्चर्स लिमिटेड में C-130J के टेल सेक्शन पहले से बनाए जा रहे हैं. हाल ही में यहां 250वां C-130J टेल तैयार किया गया है. आगे चलकर भारत में MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सुविधा भी स्थापित की जाएगी. इससे भारत इस विमान का क्षेत्रीय हब बन सकता है. अगर भारत C-130J को चुनता है. उसे न सिर्फ एक भरोसेमंद और बहुउपयोगी ट्रांसपोर्ट विमान मिलेगा. बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा निर्यात के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे.

बांग्लादेश में संकट, यूनुस की जिद के कारण ₹9 हजार करोड़ का नुकसान, भारतीय सूत पर रोक के बावजूद समस्या बरकरार

नई दिल्ली भारत से दुश्मनी का बांग्लादेश अब खामियाजा भुगतने लगा है. मोहम्मद यूनुस के भारत से पंगा लेने का नुकसान बांग्लादेशियों को खूूब हो रहा है. भारत के कारण बांग्लादेश को 9 हजार करोड़ रुपए का चूना लगने वाला है. जी हां, बांग्लादेश की स्थानीय कताई मिलें गंभीर संकट का सामना कर रही हैं. भारतीय सस्ते सूत की वजह से बंगलादेश की मिलों के पास करीब 9 हजार करोड़ रुपए का बिना बिका स्टॉक जमा हो गया है. बांग्लादेश को 9 हजार करोड़ रुपए के सूत का कोई खरीददार नहीं मिल रहा है. बांग्लादेश टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन के मुताबिक, मौजूदा वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत से सूत का आयात 137 प्रतिशत बढ़ गया है. भारतीय व्यापारी घरेलू कीमतों से 0.30 डॉलर प्रति किलोग्राम से भी कम दाम पर सूत बांग्लादेश में बेच रहे हैं. इसके चलते प्रतिस्पर्धा में टिक न पाने के कारण लगभग 50 स्थानीय स्पिनिंग मिलें बंद हो चुकी हैं. भारत पर बैन का क्या मकसद? दरअसल, बांग्लादेश मिल्स एसोसिएशन भारतीय सूत पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है. इन लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर हम भारतीय सूत पर ज्यादा निर्भर रहे और भारत अचानक आपूर्ति बंद कर दे, तो हमारा परिधान उद्योग भी मुश्किल में पड़ सकता है. अब इसी का असर बांग्लादेश पर उल्टा पड़ रहा है. बांग्लादेश ने क्या फैसला लिया था? गौरतलब है कि अप्रैल में बांग्लादेश ने लैंड पोर्ट के जरिए भारत से सूत आयात पर प्रतिबंध लगाया था, ताकि घरेलू उद्योग को संरक्षण मिल सके. हालांकि, यह प्रतिबंध समुद्री मार्ग से होने वाले आयात पर लागू नहीं होता. बावजूद इसके भारत के सस्ते सूत से बांग्लादेश की कताई मिलें संकट में आ गई है. बांग्लादेश के मिल मालिकों की नहीं सुन रहे यूनुस हालांकि, बांग्लादेश के मिल मालिकों ने कहा है कि वे भारतीय सूत पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं चाहते, बल्कि द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन कम करने की मांग कर रहे हैं, जो फिलहाल भारत के पक्ष में है…इसके अलावा मिल मालिक उन किस्मों के सूत के आयात पर रोक लगाने की मांग की, जिनका उत्पादन देश में पर्याप्त मात्रा में हो रहा है…     बांग्लादेश टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन चाहता है कि बांग्लादेश की सरकार कपास व्यापारियों के लिए वेयरहाउसिंग की सुविधा दे ताकि अमेरिकी कपास का भंडारण कर स्थानीय मिलों में उपयोग किया जा सके. क्योंकि ये वादा पारस्परिक टैरिफ वार्ताओं के दौरान किया गया था. भारत का माल है सस्ता अन्य मिल मालिकों ने बताया कि वे भारतीय सूत से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं, जहां भारतीय सूत 2.50 डॉलर प्रति किलोग्राम बिक रहा है, वहीं कच्चे माल, खासकर कपास की कमी के कारण स्थानीय मिलों को सूत 3 डॉलर प्रति किलोग्राम में बेचना पड़ रहा है. क्यों इंटरनेशनल ब्रांड भी भारतीय सूत की रखते हैं चाहत सस्ते दामों के कारण अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी भारतीय सूत को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे बांग्लादेश का स्पिनिंग सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान आयात 950 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 137 प्रतिशत अधिक है…बांग्लादेश अब भारतीय सूत का सबसे बड़ा आयातक बन चुका है और कुल आयात का 44 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है. बांग्लादेश में कितनी मिलें बंद? उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि भारत कपास किसानों से लेकर फैक्ट्रियों और निर्यातकों तक कई स्तरों पर प्रोत्साहन देता है, जिससे भारतीय सूत बेहद प्रतिस्पर्धी बन गया है. बांग्लादेश में करीब 40-50 मिलें बंद हो चुकी हैं और कई और बंद होने की कगार पर हैं. श्रम कानून में संशोधन से भी अशांति बढ़ सकती है. BTMA ने बांग्लादेश सरकार से 72 घंटे के भीतर नीतिगत समर्थन देने की अपील की है और कहा कि 25 प्रतिशत नकद प्रोत्साहन, बैक-टू-बैक एलसी सुविधा और EDF के जरिए यह क्षेत्र अब भी संभल सकता है.

Overview 2025 : ऑपरेशन सिंदूर समेत 10 बड़ी उपलब्धियों के साथ भारतीय सेना ने रचा नया सैन्य इतिहास

नई दिल्ली  वर्ष 2025 भारतीय सेना के लिए उपलब्धियों से भरा साल रहा है। इसी वर्ष ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के तहत मई 2025 की निर्णायक कार्रवाई की गई। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस ऑपरेशन की योजना सेना के मिलिट्री ऑपरेशन्स ब्रांच में तैयार की गई, जबकि संचालन की निगरानी डीजीएमओ के ऑप्स रूम से सीडीएस और तीनों सेनाध्यक्षों की मौजूदगी में की गई। इस ऑपरेशन में सीमा पार 9 आतंकी कैंप तबाह किए गए। भारतीय सेना ने 7 और वायुसेना ने 2 आतंकी कैंप ध्वस्त किए। यह एक सटीक, सीमित और नियंत्रित कार्रवाई रही, जिससे बढ़त तो मिली ही, पर तनाव अनियंत्रित नहीं हुआ। यही नहीं, भारत ने पाकिस्तान के ड्रोन हमलों को भी नाकाम किया। 7 से 10 मई तक पाकिस्तान की ओर से भारत के सैन्य एवं नागरिक ठिकानों पर ड्रोन हमलों की कई कोशिशें की गईं। इन सभी हमलों को भारतीय सेना की एयर डिफेंस यूनिट्स ने पूरी तरह विफल किया। सेना ने एलओसी पर आतंकवादियों के लॉन्च पैड्स नष्ट किए। भारतीय सेना के मुताबिक, दर्जन भर से अधिक आतंकी लॉन्च पैड भारतीय सेना की ग्राउंड-बेस्ड फायर द्वारा नष्ट किए गए। इससे घुसपैठ के मार्ग और आतंकियों की लॉजिस्टिक्स बुरी तरह प्रभावित हुई। 10 मई को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क कर युद्धविराम की मांग की, जिसके बाद गोलीबारी रोकने का समझौता हुआ। सेना की लंबी दूरी की फायरपावर में ब्रह्मोस और पिनाका जैसी बड़ी प्रगति देखने को मिली। बीते दिनों ही 1 दिसंबर को दक्षिणी कमान की एक ब्रह्मोस यूनिट ने अंडमान एवं निकोबार कमांड के सहयोग से वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में मिसाइल फायर किया। इससे लंबी दूरी की प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता और मजबूत हुई है। विस्तारित रेंज ब्रह्मोस पर 2025 में लगातार परीक्षण और विकास की खबरें सामने आती रहीं। पिनाका रॉकेट सिस्टम की बात करें तो 24 जून 2025 दो अतिरिक्त पिनाका रेजिमेंट्स का संचालन शुरू किया गया। इससे सेना की ‘स्टैंड-ऑफ फायर’ क्षमता बढ़ी है। एक दिन पहले ही यानी 29 दिसंबर को पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया गया। वहीं वर्ष भर 300 किमी तक की भविष्य क्षमता वाले पिनाका सिस्टम पर भी कार्य तेजी से बढ़ा है। सेना की एविएशन शक्ति में भी वृद्धि हुई है। 22 जुलाई 2025 को सेना को पहले तीन एएच -64 ई अपाचे हेलिकॉप्टर मिले। इसके बाद दिसंबर तक बाकी तीन और हेलिकॉप्टर्स भी शामिल हुए। इन अपाचे हेलिकॉप्टरों से सेना की आक्रमण, सटीक निशाने और लक्ष्यों को भेदने की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। यह वर्ष नई सैन्य संरचनाओं का भी रहा। सेना को नई 'भैरव बटालियन' और 'अशनि प्लाटून' मिली हैं। 24 अक्टूबर 2025 को राजस्थान में एक बड़ा क्षमता-प्रदर्शन किया गया। इसमें भैरव बटालियन, अशनि प्लाटून और नई तकनीकी प्रणालियों का प्रदर्शन हुआ। वर्ष 2025 में योजना सामने आई कि सेना 25 भैरव लाइट कमांडो बटालियनों को तेजी से स्थापित करेगी। अशनि प्लाटूनों को इंफैंट्री के साथ जोड़कर ड्रोन-आधारित स्ट्राइक की क्षमता बढ़ाई जाएगी। वहीं शक्तिबान रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरियां भी भविष्य के युद्धक्षेत्र को ध्यान में रखते हुए यूएवी व लोटर म्यूनिशन से लैस नई संरचनाओं के रूप में उभरी हैं। यही नहीं, रक्षा खरीद, आत्मनिर्भरता और क्षमता-निर्माण में भी अहम बढ़ोतरी हुई है। सेना में जहां 6 अपाचे हेलिकॉप्टरों का इंडक्शन हुआ। वहीं 91 प्रतिशत गोला–बारूद का स्वदेशी स्रोतों से हासिल किया गया। यहीं नहीं अब सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले लगभग सभी प्रकार के एम्युनिशन भारत में बन रहे हैं। अनमेंड एयरक्राफ्ट सिस्टम (यूएएस) के इंडक्शन में बड़ा विस्तार हुआ है। 3000 से अधिक रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम, लगभग 150 टिथर्ड ड्रोन, झुंड में उड़ने वाले ड्रोन, हाई–एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक ड्रोन और कामिकाजी ड्रोन सेना में तैनात किए गए हैं। इस वर्ष 5 अगस्त 2025 रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों के लिए थर्मल इमेजर-आधारित ड्राइवर नाइट साइट की खरीद को मंजूरी दी। 29 दिसंबर को परिषद की बैठक में भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट्स के लिए लोइटर म्युनिशन सिस्टम, लो लेवल लाइट वेट रडार, पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (एमआरएलएस) के लिए लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट आयुध, और इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एवं इंटरडिक्शन सिस्टम एमके-II की खरीद को मंजूरी दी गई है। सेना ने पूरे वर्ष डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को गति दी है। आधुनिक डेटा सेंटर्स स्थापित हुए, जिससे ‘डेटा–टू–डिसीजन’ समय बहुत कम हुआ। अनेक इन–हाउस सॉफ्टवेयर विकसित किए गए हैं। इक्यूपमेंट हेल्पलाइन, सैनिक यात्री मित्र जैसे ऐप आए। इनसे सैनिक हितैषी सेवाएं अधिक कुशल हुई हैं। जैसेलमेर में अक्टूबर 2025 में कमांडर्स कांफ्रेंस आयोजित की गई। सेना के मुताबिक इस सम्मेलन में ग्रे जोन वॉरफेयर, संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन जैसे विषय केंद्र में रहे। सैन्य कूटनीति और संयुक्त अभ्यास पर भी विशेष ध्यान दिया गया। 2025 में भारत ने कई प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय अभ्यास किए, जिनका उद्देश्य इंटरऑपरेबिलिटी, काउंटर-टेरर, और अर्बन ऑप्स क्षमताएं बढ़ाना था। फ्रांस, अमेरिका, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, यूके व यूएई समेत कई देशों के साथ सैन्य अभ्यास किए गए। 

सीमा सुरक्षा में रोड़ा? बंगाल सरकार पर BSF को जमीन न देने का आरोप, बोले अमित शाह — 7 चिट्ठियां भेजीं

कोलकाता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को बीएसएफ को कंटीली बाड़ लगाने के लिए पर्याप्त जमीन न देने का आरोप पश्चिम बंगाल सरकार पर लगाया। शाह ने कहा कि बांग्लादेश से लगने वाली अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए उन्होंने बीएसएफ को जमीन मुहैया कराने के लिए सीएम ममता बनर्जी को सात पत्र भेजे, लेकिन उन्होंने सबको नजरअंदाज कर दिया। कोलकाता में मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, "मैंने बीएसएफ को जमीन देने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री को सात चिट्ठियां भेजी हैं। इस खास मुद्दे पर पश्चिम बंगाल में तीन सेक्रेटरी-लेवल की मीटिंग्स हुई हैं। इसके बाद भी पश्चिम बंगाल सरकार कंटीली बाड़ लगाने के लिए जमीन देने में आनाकानी क्यों कर रही है।"  उन्होंने कहा कि अब बीएसएफ पर अवैध घुसपैठ रोकने में नाकाम रहने का आरोप लग रहा है। मेरा सवाल यह है कि सही कंटीली बाड़ के बिना बीएसएफ सीमाओं पर असरदार सीमा सुरक्षा कैसे कर पाएगी? केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, "मैं भरोसा दिलाना चाहता हूं कि भाजपा किसी भी हालत में उस राजनीतिक पार्टी के साथ कोई समझौता नहीं करेगी, जो अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देती है और अपने पक्के वोट बैंक को बचाने के लिए घुसपैठियों को पालती-पोसती है। घुसपैठ एक बहुत गंभीर मुद्दा है, क्योंकि इस खतरे की वजह से राज्य की डेमोग्राफी बदल रही है। जब तक घुसपैठ को रोका नहीं जाता तो आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल के लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाएंगी।" उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार पर चीफ सेक्रेटरी और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस जैसे सीनियर ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति करते समय भी सेंट्रल सर्विस अधिकारियों की कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी, डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग के नियमों को कमजोर करने का आरोप लगाया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मतुआ समुदाय को आश्वासन दिया है कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों के वोटिंग अधिकार सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा, "मतुआ समुदाय के लोगों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। भारत आए हर शरणार्थी को नागरिक माना जाएगा। यह बीजेपी का वादा है। कोई भी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकता। ममता बनर्जी भी नहीं।" उन्होंने कहा कि घुसपैठियों के खिलाफ अभियान के साथ-साथ शरणार्थियों की सुरक्षा जारी रहेगी।

डिजिटल इंडिया की राह पर रेलवे, टिकट बुकिंग करने वालों को मिलेगी छूट की सौगात

जम्मू  रतीय रेलवे ने नए साल 2026 की शुरुआत से यात्रियों को डिजिटल टिकटिंग के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। रेलवे ने “रेल वन” मोबाइल ऐप के माध्यम से अनारक्षित टिकट बुक करने पर 3 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की है। यह योजना 14 जनवरी 2026 से 14 जुलाई 2026 तक लागू रहेगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह छूट रेल वन ऐप पर सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों से अनारक्षित टिकट बुक करने पर मिलेगी, हालांकि आर-वॉलेट के माध्यम से किए गए भुगतान इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे।   उल्लेखनीय है कि रेल वन ऐप को 1 जुलाई 2025 को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा लॉन्च किया गया था। यह ऐप यात्रियों को अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट बुकिंग, यात्रा के दौरान भोजन ऑर्डर, ट्रेन की लाइव स्थिति, शिकायत निवारण सहित कई सुविधाएँ एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है।   रेलवे बोर्ड द्वारा किए गए हालिया सुधारों के तहत इस छूट योजना को लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य टिकट काउंटरों पर भीड़ कम करना और यात्रियों को डिजिटल माध्यम अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इस संबंध में जानकारी देते हुए वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, जम्मू मंडल, उचित सिंघल ने कहा कि भारतीय रेलवे अपने यात्रियों को सरल, सुरक्षित और आधुनिक डिजिटल अनुभव देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि रेल वन ऐप डिजिटल इंडिया पहल को मजबूती प्रदान करता है और यात्रियों को आर्थिक लाभ भी देता है। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से रेल वन ऐप डाउनलोड कर इस सुविधा का अधिकतम लाभ उठाएं।

US हथियार डील पर चीन का आक्रामक जवाब, ताइवान की नाकेबंदी जारी; लगातार दूसरे दिन रॉकेट फायरिंग

बीजिंग  चीन की सेना ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन ताइवान द्वीप के आसपास संयुक्त अभ्यास किया। बीजिंग ने इसे अलगाववादी और ‘‘बाहरी हस्तक्षेप'' वाली ताकतों के खिलाफ "कड़ी चेतावनी" बताया वहीं ताइवान ने कहा कि उसने अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है। ताइवान ने चीन की सरकार को ‘‘शांति का सबसे बड़ा दुश्मन'' करार दिया। दो दिनों तक जारी रहने वाले इन सैन्य अभ्यासों को ‘‘जस्टिस मिशन 2025'' नाम दिया गया है। चीन के ये अभ्यास ताइवान को संभावित रूप से अब तक की सबसे बड़ी अमेरिकी हथियार बिक्री पर आक्रोश व्यक्त करने और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के उस बयान के बाद किए जा रहे हैं कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ कार्रवाई करता है तो उनकी सेना हस्तक्षेप कर सकती है। चीन का कहना है कि ताइवान को उसके शासन के अधीन आना होगा। चीन की सेना ने सोमवार को अपने बयान में अमेरिका और जापान का नाम नहीं लिया, लेकिन विदेश मंत्रालय ने ताइवान की सत्तारूढ़ पार्टी पर अमेरिका से समर्थन मांगकर स्वतंत्रता हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।   मंगलवार सुबह, आधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने एक सरकारी प्रवक्ता के हवाले से कहा कि इस दिशा में किए गए किसी भी प्रयास का ‘‘निष्फल होना तय है"। चीन के रक्षा मंत्रालय में अधिकारी झांग शियाओगांग ने कहा, "हम संबंधित देशों से आग्रह करते हैं कि वे चीन को नियंत्रित करने के लिए ताइवान का उपयोग करने का भ्रम त्याग दें और अपने मूल हितों की रक्षा करने के चीन के संकल्प को चुनौती देने से बचें।"