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तीन नई एयरलाइंस को NOC जारी, जानें क्यों जरूरी थी नई कंपनियों की एंट्री, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली  भारत सरकार ने देश में एविएशन सेक्टर को और मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तीन नई एयरलाइंस-शंख एयर, अलहिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस को परिचालन के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इन एयरलाइंस के शुरू होने से न सिर्फ इंडिगो और एयर इंडिया पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देशभर में हवाई कनेक्टिविटी को भी नया विस्तार मिलेगा। सरकार ने इन तीनों कंपनियों को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया है। इंडिगो से जुड़ी हालिया परिचालन चुनौतियों और बढ़ती यात्रियों की संख्या को देखते हुए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।  कब से शुरू होंगी नई एयरलाइंस? NOC मिलने का मतलब यह नहीं है कि ये एयरलाइंस तुरंत उड़ानें शुरू कर देंगी। इसका अर्थ केवल इतना है कि अब ये कंपनियां एयरलाइंस स्थापित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती हैं। यात्रियों को इन सेवाओं का लाभ मिलने में अभी कुछ समय लगेगा। एयरलाइंस शुरू करने के लिए क्या प्रक्रियाएं होंगी पूरी? NOC मिलने के बाद एयरलाइंस कंपनियों को DGCA से एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (AOC) प्राप्त करना होगा। इसके अलावा विमानों की व्यवस्था, पायलट और केबिन क्रू की नियुक्ति, रूट नेटवर्क की योजना और मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। यह पूरी प्रक्रिया आमतौर पर कई महीनों में पूरी होती है, जिसके दौरान एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति और परिचालन क्षमता की भी जांच होती है। अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस परिचालन बेड़े में शामिल होने को तैयार  अल हिंद एयर को केरल-स्थित अलहिंद ग्रुप का समर्थन प्राप्त है। फ्लाईएक्सप्रेस ऐसे इच्छुक एयरलाइंस समूह में शामिल हो रही है, क्योंकि भारत दुनिया के तेजी से बढ़ते एयरलाइन बाजारों में व्यापक भागीदारी के लिए प्रयास कर रहा है।   यह कदम अक्टूबर में क्षेत्रीय खिलाड़ी फ्लाई बिग के निलंबन के बाद आया, जिससे परिचालन घरेलू कैरियरों की संख्या घटकर 9 रह गई। इन 3 एयरलाइंस की मंजूरी हाल के दिनों में प्रमुख एयरलाइंस, खासकर इंडिगो में हुए परिचालन व्यवधानों से उत्पन्न बाजार चिंताओं के बीच आई है।  क्षेत्रीय भागीदारी आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रोत्साहन  नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उड़ान योजना के तहत, विशेषकर कम-सेवा वाले क्षेत्रों में एयरलाइन भागीदारी बढ़ाने पर अपना केन्द्रित रखा है।   इस योजना के माध्यम से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में विस्तार हुआ है, जहां स्टार एयर, फ्लाई91, और इंडियावन एयर जैसे छोटे कैरियर कम-ज्ञात मार्गों पर सेवाएँ दे रहे हैं।   नवमंजूर एयरलाइंस संभवतः ऐसे मार्गों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर केंद्रीकृत उद्योग में अपने परिचालन स्थापित करेंगी।  हालिया बाजार रुझान और पिछली एयरलाइन विफलताएँ  नए कैरियरों का प्रवेश उस अवधि के बाद हो रहा है जब जेट एयरवेज और गो फर्स्ट जैसी एयरलाइंस वित्तीय चुनौतियों के कारण परिचालन से बाहर हो गईं।   नागरिक उड्डयन क्षेत्र में अस्थिरता ने स्थिरता और लागत प्रबंधन को प्रमुख परिचालन प्राथमिकताएँ बना दिया है।   वर्तमान में, भारत की अनुसूचित एयरलाइंस में इंडिगो, एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, एलायंस एयर, अकासा एयर, स्पाइसजेट, स्टार एयर, फ्लाई91, और इंडियावन एयर शामिल हैं।  निष्कर्ष  अल हिंद एयर, फ्लाईएक्सप्रेस, और शंख एयर का जुड़ना भारत के काफी केंद्रीकृत एयरलाइन उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। ये अनुमोदन मौजूदा प्रमुख कैरियरों पर यात्रियों की निर्भरता कम करने में सहायक हो सकते हैं।  नई एयरलाइंस की ज़रूरत क्यों पड़ी? भारत का एविएशन बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है। नई एयरलाइंस के जुड़ने से यात्रियों को ज़्यादा सीटें, बेहतर कनेक्टिविटी और प्रतिस्पर्धी किराए मिलेंगे। साथ ही बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा और यात्रियों के पास फ्लाइट चुनने के अधिक विकल्प होंगे। ये हैं नई एयरलाइंस जो होंगी शुरू शंख एयरः उत्तर प्रदेश स्थित शंख एयर की उड़ानें 2026 की शुरुआत में शुरू होने की संभावना है। कंपनी अगले तीन वर्षों में अपने बेड़े में 20 से 25 विमान शामिल करने की योजना बना रही है। इसका लक्ष्य देश के प्रमुख शहरों और राज्यों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। अलहिंद एयरः अलहिंद एयर केरल स्थित अलहिंद ग्रुप की पहल है, जिसे ट्रैवल और टूरिज़्म सेक्टर का लंबा अनुभव है। यह एयरलाइन क्षेत्रीय और लो-कॉस्ट उड़ानों पर फोकस करेगी, ताकि आम लोग भी किफायती दरों पर हवाई सफर कर सकें। फ्लाई एक्सप्रेसः फ्लाई एक्सप्रेस का उद्देश्य यात्रियों के साथ-साथ एयर-कार्गो सेवाओं को भी बढ़ावा देना है। कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पादों की ढुलाई को आसान बनाते हुए यह एयरलाइन घरेलू कार्गो सेक्टर की बढ़ती मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है। विमानन क्षेत्र में एकाधिकार खत्म करने की कवायद वर्तमान में भारतीय आसमान पर टाटा समूह की एअर इंडिया और इंडिगो का एकछत्र राज है। डीजीसीए  के आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू बाजार का 90% से अधिक हिस्सा इन्हीं दो समूहों के पास है। इसमें भी करीब 65% हिस्सेदारी अकेले इंडिगो के पास है। इस 'डुओपोली' के कारण अक्सर यात्रियों को सीमित विकल्पों और मनमाने किरायों का दंश झेलना पड़ता है। हाल ही में इंडिगो एयरलाइन में आई तकनीकी खामियों ने यह साबित कर दिया कि बाजार का एक ही खिलाड़ी पर अत्यधिक निर्भर होना कितना जोखिम भरा हो सकता है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि सरकार का उद्देश्य विमानन बाजार में नए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना है ताकि बाजार में संतुलन बना रहे और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। कौन हैं विमानन बाजार के नए खिलाड़ी? 1. अल-हिंद एयर  केरल स्थित अल-हिंद ग्रुप द्वारा प्रवर्तित यह एयरलाइन दक्षिण भारत से अपनी शुरुआत करने जा रही है। अल-हिंद ग्रुप पहले से ही ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर में एक बड़ा नाम है, जिसका टर्नओवर लगभग 20,000 करोड़ रुपये बताया जाता है। कंपनी की योजना शुरुआत में एटीआर-72 (ATR-72) विमानों के साथ क्षेत्रीय मार्गों पर उड़ान भरने की है, और भविष्य में एयरबस A320 विमानों के साथ अंतरराष्ट्रीय मार्गों, विशेषकर खाड़ी देशों (Gulf countries) को जोड़ने का लक्ष्य है। अल हिन्द एयर का प्रवर्तक केरल स्थित अल हिन्द ग्रुप है। इस समूह की जड़ें 1990 के दशक की शुरुआत में जमी थीं, जब इसने एक छोटी ट्रैवल एजेंसी के रूप में शुरुआत की थी।  मीडिया रिपोर्ट्स और कंपनी के दावों के अनुसार, समूह का कुल टर्नओवर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक है ।  ट्रैक्सन (Tracxn) के आंकड़ों के अनुसार, … Read more

महिला यात्रियों के लिए नया नियम: कैब बुक करते समय चुन सकेंगी महिला ड्राइवर

नई दिल्ली देश में अब बहुत से लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बजाय ओला, उबर और रैपिड जैसी कैब सर्विसेज का सहारा ले रहे हैं. लेकिन इन कैब में कई बार कुछ ऐसी घटनाएं भी हो जाती है. जो यात्रियों को असहज और असुरक्षित महसूस करवा देती हैं. खासतौर पर महिला यात्रियों के साथ ऐसा होता ज्यादा देखा गया है. यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने  ने मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स गाइडलाइंस 2025 में बदलाव किए हैं.  इन नए नियमों का सीधा असर कैब बुकिंग के तरीके पर पड़ेगा. खास बात यह है कि महिला यात्रियों को अब राइड बुक करते समय महिला ड्राइवर चुनने का ऑप्शन मिल सकता है. लंबे समय से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच इसे एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है.  कब से लागू होंगे नए नियम? सरकार की ओर से नोटिफिकेशन के जारी होने के बाद अब महिला यात्रियों के मन में सवाल आ रहा है आखिर यह नियम कब से लागू होगा. तो बता दें नोटिफिकेशन में किसी तय तारीख का साफ तौर पर जिक्र नहीं किया गया है. आमतौर पर ऐसी गाइडलाइंस जारी होते ही प्रभावी मानी जाती हैं. लेकिन इन्हें जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी राज्यों की होती है. इससे पहले जब जुलाई 2025 में एग्रीगेटर गाइडलाइंस लागू की गई थीं. तब राज्यों को तीन महीने का समय दिया गया था.  माना जा रहा है कि संशोधित नियमों के लिए भी राज्यों को इसी तरह का वक्त मिल सकता है. राज्य सरकारें अपने स्तर पर लाइसेंसिंग नियमों में बदलाव करेंगी और उसके बाद ही यह नियम पूरी तरह लागू हो पाएंगे. जब तक राज्य इन गाइडलाइंस को अपनाकर नोटिफिकेशन जारी नहीं करते. तब तक अलग अलग जगहों पर इसकी टाइमलाइन अलग हो सकती है. कब से लागू होगा नया नियम नए नोटिफिकेशन में किसी खास तारीख का जिक्र नहीं किया गया है. आमतौर पर ऐसी गाइडलाइंस जारी होने की तारीख से ही प्रभावी मानी जाती हैं. इससे पहले जुलाई 2025 में जब गाइडलाइंस आई थीं, तब राज्यों को उन्हें लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था. हालांकि अभी कोई तय समय-सीमा घोषित नहीं की गई है, लेकिन संशोधित नियमों के लिए भी कुछ ऐसा ही समय मिल सकता है. जेंडर चॉइस फीचर: कैसे होगा लागू ये नियम केंद्र सरकार ने बनाए हैं, लेकिन इन्हें जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी. राज्य अपने लाइसेंसिंग सिस्टम में इन बदलावों को शामिल करेंगे. कैब कंपनियों को अपने ऐप्स में जरूरी बदलाव करने होंगे, ताकि यात्रियों को ड्राइवर का जेंडर चुनने का विकल्प मिल सके. यह फीचर गाइडलाइंस के क्लॉज के तहत अनिवार्य किया गया है. अगर कोई एग्रीगेटर इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसका लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है. हालांकि, ऐप अपडेट और सिस्टम में बदलाव करने में कंपनियों को कुछ समय लग सकता है. महिला ड्राइवरों की कम संख्या बनी चुनौती इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस नियम को पूरी तरह लागू करना आसान नहीं होगा. फिलहाल देश में कुल कैब ड्राइवरों में महिलाओं की हिस्सेदारी 5 फीसदी से भी कम है. ऐसे में हर समय महिला ड्राइवर उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे ऑन-डिमांड सर्विस प्रभावित हो सकती है और वेटिंग टाइम बढ़ सकता है, खासकर रात के समय जब डिमांड ज्यादा और ड्राइवर कम होते हैं. इस मुद्दे पर फिलहाल Ola, Uber और Rapido ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. टिपिंग सिस्टम में भी बदलाव सरकार ने टिप देने के नियमों को भी पारदर्शी बना दिया है. अब यात्री सफर पूरा होने के बाद ड्राइवर को अपनी मर्जी से टिप दे सकेंगे.     टिप देने का विकल्प सिर्फ ट्रिप खत्म होने के बाद ही मिलेगा.     पूरी टिप ड्राइवर को ही मिलेगी, इसमें से कोई कटौती नहीं होगी.     कंपनियां टिप के लिए किसी भी तरह के भ्रामक या दबाव बनाने वाले तरीकों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी. कुल मिलाकर, नए नियमों से यात्रियों की सुरक्षा और ड्राइवरों की कमाई दोनों को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है. जेंडर चॉइस फीचर कैसे होगा लागू? यह नियम केंद्र सरकार ने बनाए हैं. लेकिन इनका क्रियान्वयन राज्य सरकारों के हाथ में होगा. राज्यों को अपने कैब एग्रीगेटर लाइसेंस सिस्टम में इस जेंडर चॉइस फीचर को शामिल करना होगा. इसके बाद Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियों को अपने ऐप्स में जरूरी तकनीकी बदलाव करने पड़ेंगे. राइड बुक करते समय यात्रियों को ड्राइवर का जेंडर चुनने का ऑप्शन दिखेगा. यह फीचर गाइडलाइंस के एक मैंडेटरी क्लॉज के तहत रखा गया है. अगर कोई एग्रीगेटर इन नियमों का पालन नहीं करता है. तो उस पर जुर्माना लग सकता है या लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है. हालांकि ऐप अपडेट और सिस्टम इंटीग्रेशन में कंपनियों को कुछ वक्त लगना तय माना जा रहा है. तो कह सकते हैं फिलहाल इसमें वक्त लग सकता है और लागू होने के बाद भी महिला ड्राइवरों की कमी इस कदम को थोड़ा कमजोर कर सकती है. 

ISIS पर अमेरिका की बड़ी कार्रवाई, नाइजीरिया में हवाई हमला; स्ट्राइक का वीडियो वायरल

वाशिंगटन  क्रिसमस के मौके पर अमेरिका ने पश्चिम अफ्रीका में आतंकवाद के खिलाफ अपनी अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी वायुसेना ने उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में आतंकी संगठन ISIS के ठिकानों पर भीषण एयर स्ट्राइक की। इस हमले की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए की है। ट्रंप का कड़ा संदेश: नरसंहार बर्दाश्त नहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' हैंडल पर इस ऑपरेशन की जानकारी देते हुए इसे ईसाइयों की हत्याओं का बदला बताया। ट्रंप ने कहा, मैंने इन आतंकवादियों को पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर निर्दोष ईसाइयों का कत्लेआम नहीं रुका तो उन्हें इसके भयानक परिणाम भुगतने होंगे। आज रात वही हुआ। राष्ट्रपति के अनुसार कमांडर-इन-चीफ के रूप में उनके निर्देश पर युद्ध विभाग (Department of War) ने ISIS के ठिकानों पर सटीक और घातक हमले किए। हमले का वीडियो आया सामने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इस ऑपरेशन का एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें अंधेरी रात में आतंकियों के ठिकानों को तबाह होते देखा जा सकता है। अमेरिका ने इस सैन्य अभियान को शक्ति के बल पर शांति (Peace through Strength) का प्रदर्शन बताया है। यह नाइजीरिया की धरती पर अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक हमले में बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे गए हैं।    हमले की असली वजह (Context) यह हमला महज एक जवाबी कार्रवाई नहीं बल्कि अमेरिका की नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है:     ईसाई समुदायों की सुरक्षा: ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ISIS सदियों से इस क्षेत्र में धार्मिक आधार पर हिंसा फैला रहा है और अमेरिका अब कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं देगा।     हालिया संघर्ष: कुछ दिनों पहले सीरिया के पल्मायरा में अमेरिकी और सीरियाई बलों के काफिले पर हमला हुआ था जिसके बाद से ही अमेरिका ISIS के खिलाफ बड़े एक्शन की तैयारी में था।     क्रिसमस मैसेज: ट्रंप ने अपनी पोस्ट का समापन अमेरिकी सेना को आशीर्वाद देते हुए और देशवासियों को क्रिसमस की शुभकामनाएं देकर किया।  

अल्पसंख्यक हत्याओं से घिरे बांग्लादेश में अंतरराष्ट्रीय छवि बचाने की मुहिम में यूनुस

नई दिल्ली  बांग्लादेश में जिस तरह के हालात बने हुए हैं और जो हिंसक घटनाएं सामने आ रही हैं, उनसे यूनुस की अंतरिम सरकार की छवि धूमिल हुई है। यूनुस की सरकार में कानून व्यवस्था को लेकर सीधा सवाल उठ रहा है। इस बीच बिगड़ी छवि सुधारने के लिए अपने प्रयास में यूनुस के विशेष सहायक खुदा बख्श चौधरी ने इस्तीफा दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। एक हालिया मामले में बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय का एक और युवक भीड़ के हत्थे चढ़ गया। बुधवार को हिंदू युवक अमृत मंडोल की हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, राजबाड़ी जिले में अमृत मंडल, जिसे सम्राट के नाम से भी जाना जाता है, पैसा वसूली करने वाला था। अमृत पर कथित तौर पर भीड़ ने तब हमला किया, जब वह वसूली के पैसे मांगने पहुंचा था। पुलिस ने कहा कि इस बात के कोई साफ संकेत नहीं थे कि उसे उसके धर्म की वजह से टारगेट किया गया था या नहीं। वहीं, भारत और अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ उसके कथित कनेक्शन को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। चौधरी के इस्तीफा देने के तुरंत बाद उसे मंजूर कर लिया गया। इससे एक बात तो साफ हो गई है कि सरकार का इरादा कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़े लोगों को दोषी ठहराना है। इस कदम ने यूनुस सरकार को एक हफ्ते के अंदर दो हिंदू युवकों की हत्या की वजह से हो रही आलोचना से थोड़ी सी राहत जरूर दे दी है। यह हत्या उस्मान हादी की मौत के बाद फैली अशांति के बीच हुई। हादी पिछले साल अगस्त में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वालों में से एक था। वह स्टूडेंट से नेता बना था, और बदमाशों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। 27 साल के हिंदू कपड़ा मजदूर दीपू को ईशनिंदा के आरोप में भालुका में भीड़ ने मार डाला। उसे बुरी तरह पीटा गया। प्रशासन ने हत्या की निंदा की और कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया, लेकिन इस घटना ने अल्पसंख्यकों की कमजोरी और राजनीतिक अशांति के समय में बिना रोक-टोक के अफवाहों से होने वाली हिंसा के खतरों को दिखाया। वहीं दूसरी ओर सम्राट पर हत्या समेत कई अपराध के मामले चल रहे थे। स्थानीय रिपोर्ट्स में गांववालों के हवाले से कहा गया कि वह एक गैंग का हिस्सा था और अगस्त 2024 के विद्रोह के बाद हसीना के सत्ता से हटने के बाद भारत में कहीं छिपा हुआ था। हालांकि, यह साफ नहीं था कि उसने वापस लौटने और मौजूदा हालात में फिर से अपराध करने का फैसला क्यों किया? खुदा बख्श चौधरी पहले पुलिस इंस्पेक्टर जनरल (आईजीपी) थे। हालांकि, उन्हें पिछले साल 10 नवंबर को मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस का विशेष सहायक बनाया गया था। द डेली स्टार ने बिना नाम बताए सीनियर अधिकारियों के हवाले से कहा कि उन्हें पिछले साल के बड़े विद्रोह के बाद इस उम्मीद के साथ नियुक्त किया गया था कि वह कानून लागू करने वाली एजेंसियों, खासकर पुलिस में अनुशासन बहाल करने और हौसला बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने दावा किया कि उम्मीद के मुताबिक काम न कर पाने और क्राइसिस मैनेजमेंट में कमियों के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

आस्था का महासागर: सबरीमाला मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 30 लाख से अधिक तीर्थयात्री

नई दिल्ली  सबरीमाला मंदिर में इस वर्ष दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 30 लाख को पार कर गई है जो पिछले वर्ष की तुलना में दो लाख से अधिक की कमी को दर्शाती है। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। 25 दिसंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक 30,01,532 श्रद्धालु मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। पिछले वर्ष (2024) 30 लाख का आंकड़ा 23 दिसंबर तक ही पार हो गया था जब 30,78,044 श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए थे। पिछले साल 25 दिसंबर तक कुल 32,49,756 श्रद्धालु मंदिर में दर्शन कर चुके थे। वहीं 2023 में इस तारीख तक यह संख्या करीब 28.42 लाख थी।  हालांकि वर्ष की शुरुआत से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली लेकिन उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने 'वर्चुअल क्यू' (ऑनलाइन दर्शन) और मंदिर परिसर में जाकर दर्शन के लिए बुकिंग (स्पॉट बुकिंग) के लिए नियम कड़े कर दिए। एक दिन में सबसे अधिक दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 19 नवंबर को दर्ज की गई थी जब मंदिर खुलने के चार दिन बाद 1,02,299 भक्तों ने दर्शन किये थे। सबसे कम भीड़ 12 दिसंबर को रही,जब 49,738 श्रद्धालु पहुंचे।  अधिकारियों के अनुसार छुट्टी होने के बावजूद रविवार के दिन पिछले वर्षों की तुलना में कम भीड़ रही। 21 दिसंबर, जो रविवार था, उस दिन 61,576 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। अन्य दिनों में रोजाना श्रद्धालुओं की संख्या 80,000 से अधिक रही। मंडला पूजा के मद्देनजर शुक्रवार और शनिवार (26 और 27 दिसंबर) को वर्चुअल क्यू के जरिए दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घटाकर क्रमशः 30,000 और 35,000 कर दी गई है जबकि स्पॉट बुकिंग को 2,000 तक सीमित किया गया है।  ‘थंगा अंकी' जुलूस के चलते शुक्रवार सुबह से पंपा से श्रद्धालुओं की आवाजाही भी नियंत्रित कर दी गई। सुबह नौ बजे तक 22,039 श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। अधिकारियों ने बताया कि मंडला पूजा शनिवार को होगी। इस अवसर पर भगवान का स्वर्ण जड़ित वस्त्रों और आभूषणों से श्रृंगार किया जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10.10 बजे से 11.30 बजे के बीच है। सबरीमाला मंदिर शनिवार रात 11 बजे ‘हरिवरसनम' (भक्ति गीत) के बाद बंद हो जाएगा और 30 दिसंबर को मकरविलक्कु उत्सव के लिए फिर से खोला जाएगा। 

अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर भारत ने जताई गहरी चिंता, बांग्लादेश से उठे सवाल

नई दिल्ली भारत ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों के खिलाफ “अविराम शत्रुता” एक गंभीर विषय है और भारत वहां के हालात पर करीब से नजर बनाए हुए है। शुक्रवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत मयमनसिंह में एक हिंदू युवक की हत्या की कड़ी निंदा करता है और उम्मीद करता है कि इस जघन्य अपराध के दोषियों को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा।  उन्होंने बताया कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ 2,900 से अधिक हिंसक घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें हत्या, आगजनी और जमीन पर कब्जे जैसी घटनाएं शामिल हैं। जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि इन घटनाओं को मीडिया की अतिशयोक्ति या केवल राजनीतिक हिंसा बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने बांग्लादेश में भारत विरोधी “झूठे नैरेटिव” को भी सिरे से खारिज किया और कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है। इस बीच, बांग्लादेशी मीडिया ने गुरुवार को एक और हिंदू युवक (29 वर्षीय अमृत मंडल) की हत्या की खबर दी। बताया गया कि बुधवार देर रात उन्हें भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। इससे पहले 18 दिसंबर को 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की झूठे ईशनिंदा आरोपों के बाद भीड़ द्वारा नृशंस हत्या कर दी गई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और बांग्लादेशी अधिकारियों के संपर्क में है। भारत ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा दी जाए। इससे पहले 17 दिसंबर को भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह को तलब कर वहां की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। मंत्रालय ने यह भी चिंता जताई कि कुछ चरमपंथी तत्व ढाका स्थित भारतीय मिशन के आसपास सुरक्षा संकट पैदा करने की योजना बना रहे हैं। भारत ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अपील की है कि वह अपनी कूटनीतिक जिम्मेदारियों के तहत भारतीय मिशनों और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

आर्थिक बदहाली के बीच पाकिस्तान को IMF से राहत, नियमों की अनदेखी के बाद भी मिली मदद

नई दिल्ली  पाकिस्तान वर्षों से एक के बाद एक आर्थिक संकट में फंसता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बेलआउट पैकेजों पर उसकी निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि आईएमएफ की शर्तों का बार-बार उल्लंघन करने के बावजूद पाकिस्तान को लगातार कर्ज मिलता रहा है। अब पाकिस्तान अपने 25वें आईएमएफ ऋण कार्यक्रम की ओर बढ़ चुका है। ताजा समझौते के तहत पाकिस्तान को 7 अरब डॉलर का एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (ईएफएफ) पैकेज 37 महीनों के लिए मिला है, साथ ही 1.4 अरब डॉलर का रेज़िलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फंड (आरएसएफ) भी शामिल है। अक्टूबर में हुए स्टाफ-लेवल एग्रीमेंट के अनुसार, पाकिस्तान को ईएफएफ के तहत 1 अरब डॉलर और आरएसएफ के तहत 20 करोड़ डॉलर मिलेंगे। इस तरह दोनों व्यवस्थाओं के तहत अब तक कुल 3.3 अरब डॉलर का वितरण हो चुका है। एशियन लाइट अखबार में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, यह वित्तीय मदद अस्थायी राहत जरूर देती है, लेकिन यह पाकिस्तान की बाहरी बेलआउट पर बढ़ती निर्भरता को भी उजागर करती है। आईएमएफ के कार्यक्रमों का उद्देश्य आर्थिक स्थिरता और अनुशासन लाना होता है, लेकिन पाकिस्तान अब तक दीर्घकालिक सुधार लागू करने में असफल रहा है। आईएमएफ का काम घरेलू नीतियों का सूक्ष्म प्रबंधन करना नहीं, बल्कि राजकोषीय घाटा कम करना, राजस्व बढ़ाना और सब्सिडी को तर्कसंगत बनाना है। इसके बावजूद, पाकिस्तान की सरकारें राजनीतिक रूप से सुविधाजनक लेकिन सामाजिक रूप से प्रतिगामी फैसले लेती रही हैं। इसका नतीजा यह है कि वेतनभोगी वर्ग और आम उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ता गया, जबकि कृषि, रियल एस्टेट और रिटेल जैसे शक्तिशाली क्षेत्रों को कर के दायरे से बाहर रखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में केवल करीब 2 प्रतिशत लोग ही आयकर देते हैं, जो कर व्यवस्था की गंभीर असमानता को दर्शाता है। नवंबर 2025 में जारी आईएमएफ की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान में भ्रष्टाचार की लगातार बनी हुई समस्या को रेखांकित करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए 15-सूत्रीय सुधार एजेंडा तुरंत लागू करने की मांग की गई थी। आईएमएफ की गवर्नेंस एंड करप्शन डायग्नोस्टिक असेसमेंट रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान का बजट विश्वसनीय नहीं है। कई परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने के बावजूद उन्हें पूरे कार्यकाल में पर्याप्त धन नहीं मिल पाता, जिससे देरी और लागत में भारी वृद्धि होती है। वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने 9.4 ट्रिलियन रुपये के अतिरिक्त खर्च को मंजूरी दी, जो पिछले वर्ष की तुलना में पांच गुना अधिक है। सांसदों के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाले निर्वाचन क्षेत्र विकास कोष भी पूंजी निवेश को प्रभावित करते हैं और निगरानी को कमजोर बनाते हैं, जिससे सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है। आईएमएफ भले ही वित्तीय अनुशासन पर जोर देता हो, लेकिन असली समस्या पाकिस्तान के शासक वर्ग की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। सरकारी संस्थानों के विलासितापूर्ण खर्च जारी हैं, सब्सिडी का गलत दिशा में इस्तेमाल हो रहा है और अभिजात वर्ग के विशेषाधिकार बने हुए हैं। वहीं पेंशनरों को कटौती झेलनी पड़ रही है और गरीब उपभोक्ताओं पर गैस के फिक्स्ड चार्ज का बोझ डाला जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में यह असमानता साफ दिखती है। खपत आधारित बिलिंग के बजाय फिक्स्ड चार्ज लागू किए गए हैं, जिससे कम आय वाले परिवारों पर बेमेल असर पड़ता है। आईएमएफ लागत वसूली की बात करता है, लेकिन प्रगतिशील टैरिफ और लाइफलाइन स्लैब लागू करना पूरी तरह पाकिस्तान सरकार के हाथ में है। आईएमएफ और पेरिस स्थित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) दोनों ने डेटा आधारित सुरक्षा उपायों, भ्रष्टाचार-रोधी दिशानिर्देशों और उचित जांच की जरूरत पर जोर दिया है, लेकिन इन सिफारिशों को लागू करने में प्रगति बेहद धीमी रही है।

भीड़ नियंत्रण की नई व्यवस्था: बांके बिहारी मंदिर में अब एक समय में 200 श्रद्धालु ही कर सकेंगे दर्शन

नई दिल्ली  ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को सुव्यवस्थित करने के लिए रेलिंग लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने निर्णय लिया है कि मंदिर के चबूतरे से ही रेलिंग की व्यवस्था की जाएगी, जो गर्भगृह के सामने से होते हुए निकास द्वार तक जाएगी। इसके तहत श्रद्धालु निर्धारित रेलिंग के भीतर चलते हुए दर्शन करेंगे और दर्शन के बाद सीधे बाहर निकल सकेंगे, जिससे मंदिर परिसर में रुकने और अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनेगी। नई व्यवस्था के अनुसार एक रेलिंग के भीतर तीन कतारें बनाई जाएंगी, जिनमें एक समय में लगभग 200 श्रद्धालु प्रवेश से लेकर निकास द्वार तक रहेंगे। समिति के अनुसार श्रद्धालुओं को दर्शन में करीब तीन से चार मिनट का समय लगेगा। रेलिंग निर्माण की जिम्मेदारी मेरठ की कनिका कंस्ट्रक्शन को सौंपी गई है और दावा किया जा रहा है कि नए वर्ष से श्रद्धालु इसी व्यवस्था के तहत दर्शन कर सकेंगे। वर्तमान में मंदिर के अंदर श्रद्धालुओं के ठहराव के कारण भीड़ नियंत्रण में कठिनाई आ रही है। इसी समस्या को देखते हुए समिति ने कतारबद्ध दर्शन व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। तय डिजाइन के अनुसार गेट संख्या तीन और दो से श्रद्धालुओं को रेलिंग के जरिए मंदिर परिसर में प्रवेश दिया जाएगा। गेट संख्या तीन से प्रवेश करने वाली रेलिंग में तीन कतारें होंगी, जिनमें एक कतार महिलाओं के लिए और दो कतारें पुरुष श्रद्धालुओं के लिए निर्धारित रहेंगी। यहां से श्रद्धालु गर्भगृह के सामने दर्शन कर निकास द्वार संख्या चार से बाहर निकलेंगे। वहीं गेट संख्या दो के बाहर चबूतरे से शुरू होने वाली रेलिंग में भी तीन कतारें होंगी। इनमें एक कतार महिलाओं, एक पुरुषों और तीसरी वीआईपी श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित की गई है। इस मार्ग से प्रवेश करने वाले श्रद्धालु ठाकुरजी के दर्शन कर जगमोहन के सामने से घूमते हुए गेट संख्या एक से बाहर निकलेंगे। दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उन्हें गेट संख्या पांच से प्रवेश दिया जाएगा और वे गेट संख्या तीन की ओर से बनाई गई रेलिंग के सहारे गर्भगृह तक पहुंचकर दर्शन करने के बाद गेट संख्या चार से बाहर निकल सकेंगे। रेलिंग की डिजाइन विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों द्वारा तैयार की गई है। इन्हें दस गेज मोटी चादर से बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि आवश्यकता पड़ने पर इन रेलिंगों को एक-दो दिन के लिए फोल्ड कर हटाया भी जा सकेगा और बाद में दोबारा लगाया जा सकेगा।  

‘हत्याओं को इग्नोर नहीं किया जा सकता’: MEA ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों को लेकर यूनुस राज पर जताई चिंता

नई दिल्ली बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार को लेकर भारत का रुख अब बहुत आक्रामक है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में कहा कि भारत विरोधी झूठे नैरेटिव को भारत पहले ही खारिज कर चुका है. कानून व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखना पूरी तरह बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है. भारत हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है और अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी शत्रुता पर गहरी चिंता जताता है. MEA ने मयमनसिंह में एक हिंदू युवक की हालिया हत्या की निंदा करते हुए कहा कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों के खिलाफ 2900 से ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं. इन घटनाओं को मीडिया की अतिशयोक्ति या महज राजनीतिक हिंसा बताकर खारिज नहीं किया जा सकता. जायसवाल ने कहा कि ये घटनाएं कोई मीडिया का बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया आंकड़ा नहीं है. यह एक कड़वी हकीकत है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता. इसके साथ ही अमेरिका में H-1B वीजा के संकट को लेकर भी भारत ने वॉशिंगटन में आवाज उठाई है. कई भारतीयों की नौकरी और पढ़ाई पर संकट मंडरा रहा है. सरकार ने साफ किया है कि वह अपने नागरिकों के हितों के साथ समझौता नहीं करेगी. क्या बांग्लादेश में हिंदुओं के नरसंहार को झुठला रही है यूनुस सरकार? बांग्लादेश में हालात बद से बदतर हो चुके हैं. हिंदुओं के साथ ईसाई और बौद्ध भी वहां असुरक्षित हैं. जायसवाल ने साफ कहा कि सुरक्षा देना अंतरिम सरकार का काम है. 2900+ घटनाओं का सबूत अब दुनिया के सामने है. इसे राजनीतिक हिंसा बताकर टालना बिल्कुल गलत है. भारत वहां की हर पल की खबर ले रहा है. अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाना बंद होना चाहिए. दोषियों को कड़ी सजा दिलाना वहां की सरकार की जिम्मेदारी है. भारत ने स्पष्ट किया कि इसे मीडिया का बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया मामला नहीं कहा जा सकता. यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का समर्थन, तारिक रहमान की वापसी को उसी नजरिए से देखने की अपील बांग्लादेश की राजनीति से जुड़ी एक अन्य अहम घटना पर MEA ने कहा कि भारत वहां स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का समर्थन करता है. BNP नेता तारिक रहमान की वापसी को भी इसी व्यापक लोकतांत्रिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए. भारत का जोर इस बात पर है कि बांग्लादेश में स्थिरता, समावेश और कानून का राज कायम रहे. बॉन्डी बीच आतंकी हमले पर ऑस्ट्रेलिया से संपर्क में भारत एक अलग प्रेस ब्रीफिंग में MEA प्रवक्ता ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच आतंकी हमले से जुड़े जिम्मेदार लोगों को लेकर आई रिपोर्ट्स की जानकारी भारत को है. ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी इस मामले में भारतीय एजेंसियों के संपर्क में हैं. भारत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और सूचना साझा करने को बेहद अहम मानता है. H-1B वीजा अपॉइंटमेंट रद्द होने से भारतीयों की मुश्किलें, अमेरिका से उठाया मुद्दा H-1B वीजा अपॉइंटमेंट कैंसिलेशन के सवाल पर MEA ने बताया कि कई भारतीय नागरिकों ने वीजा शेड्यूल और री-शेड्यूल में देरी को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं. वीजा जारी करना संबंधित देश का संप्रभु अधिकार है, फिर भी भारत ने नई दिल्ली और वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह चिंता उठाई है. MEA के अनुसार, देरी के चलते पढ़ाई और पारिवारिक जीवन पर असर पड़ा है. सरकार अमेरिकी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में है ताकि भारतीय नागरिकों पर पड़ रहे प्रभाव को कम किया जा सके.

PAK ने LoC के पास लगाया काउंटर-ड्रोन सिस्टम, ऑपरेशन सिंदूर का असर अभी भी महसूस

 नई दिल्ली भारत की ऑपरेशन सिंदूर में हुई सटीक ड्रोन हमलों से घबराया पाकिस्तान अब नियंत्रण रेखा (LoC) के साथ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के आगे के इलाकों में बड़े पैमाने पर काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैनात कर रहा है. पाकिस्तान को 'ऑपरेशन सिंदूर 2.0' का डर सता रहा है, इसलिए उसने रावलाकोट, कोटली और भिंबर सेक्टरों के सामने नए एंटी-ड्रोन उपकरण लगाए हैं. 30 से ज्यादा एंटी-ड्रोन यूनिट तैनात LoC के साथ पाकिस्तान ने 30 से अधिक विशेष एंटी-ड्रोन यूनिट तैनात की हैं. यह काम मुख्य रूप से 12वीं इन्फैंट्री डिवीजन (मुर्री मुख्यालय) और 23वीं इन्फैंट्री डिवीजन के सैनिक कर रहे हैं. कोटली-भिंबर इलाके में 23वीं डिवीजन की ब्रिगेड काम संभाल रही हैं. इसका मकसद LoC के पास हवाई निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर को मजबूत करना है. सेक्टर के हिसाब से तैनाती     रावलाकोट सेक्टर: यहां 2nd आजाद कश्मीर ब्रिगेड जिम्मेदार है, जो पूंछ सेक्टर के सामने भारतीय चौकियों को देखती है.     कोटली सेक्टर: 3rd आजाद कश्मीर ब्रिगेड संभाल रही है, जिसका इलाका राजौरी, पूंछ, नौशेरा और सुंदरबनी के सामने है.     भिंबर सेक्टर: 7th आजाद कश्मीर ब्रिगेड यहां तैनात है. पाकिस्तान ने लगाए ये हथियार पाकिस्तान ने इलेक्ट्रॉनिक और हथियारों वाले दोनों तरह के काउंटर-ड्रोन सिस्टम लगाए हैं…     स्पाइडर काउंटर-UAS सिस्टम: यह रेडियो फ्रीक्वेंसी से ड्रोन का पता लगाता है. 10 किलोमीटर तक छोटे-बड़े ड्रोन को डिटेक्ट कर सकता है.     सफरा एंटी-UAV जैमिंग गन: यह कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली बंदूक है, जो 1.5 किलोमीटर दूर तक ड्रोन का कंट्रोल, वीडियो और GPS सिग्नल जाम कर देती है. इसके अलावा पुराने हवाई रक्षा हथियार भी इस्तेमाल हो रहे हैं…     ओर्लिकॉन GDF 35 mm ट्विन बैरल एंटी-एयरक्राफ्ट गन (रडार के साथ).     अंजा Mk-II और Mk-III MANPADS – ये धीमे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन को मार गिरा सकते हैं. तुर्की और चीन से नई खरीदारी की कोशिश पाकिस्तान तुर्की और चीन से नए ड्रोन और रक्षा सिस्टम खरीदने की बातचीत कर रहा है. लेकिन अभी भारत की आक्रामक सैन्य तैयारी से डरा हुआ है. भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना पश्चिमी सीमा पर लगातार युद्धाभ्यास कर रही हैं, जिससे पाकिस्तान में घबराहट बढ़ गई है. यह तैनाती साफ बताती है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अब भारतीय ड्रोन हमलों से बेहद डरा हुआ है. LoC पर अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने में जुट गया है.