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TTP का बयान तेज: पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर को खुले आम चुनौती, कहा – ‘मां का दूध पिया है तो मैदान में आओ’

काबुल  पाकिस्तान के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) एक ऐसा नासूर बन गया है, जिसे खत्म करना उसके लिए चुनौती बन चुका है. टीटीपी के लड़ाके न केवल पाकिस्तानी सेना को खुली चुनौती दे रहे हैं, बल्कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर को भी सीधे ललकार रहे हैं.  हाल ही में टीटीपी ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कुर्रम जिले में 8 अक्टूबर को किए गए हमले का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उनके दावे के अनुसार 22 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे. हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने इस हमले में अपने 11 सैनिकों के मारे जाने की बात कही थी. वीडियो में टीटीपी ने पाकिस्तानी सैनिकों से छीने गए हथियार, वाहन और एक क्वाडकॉप्टर ड्रोन भी दिखाया है.  आसिम मुनीर को टीटीपी कमांडर की धमकी टीटीपी द्वारा जारी वीडियो में उसका शीर्ष कमांडर अहमद काजिम पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर को सीधे चुनौती दे रहा है. काजिम के सिर पर पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में 10 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया है. वीडियो में काजिम कहता है, 'आपके सामने यह जो गाड़ी खड़ी है, यह मुजाहिद्दीन को अल्लाह ने दे दी है. दो दिन पहले हुई जंग में दुश्मन के जान और माल का भारी नुकसान हुआ.' अहमद काजिम वीडियो में दावा कर रहा है कि टीटीपी के हमले में पाकिस्तान के तकरीबन 22 फौजी मारे गए, जिनमें मेजर तैयब और कर्नल जुनैद भी शामिल थे. वह कहता है, 'उनकी गाड़ी हमने जला दी. मुजाहिद्दीन को कई हथियार मिले हैं. इंशा अल्लाह यह जंग का सिलसिला जारी रहेगा. अगर आप (पाक सेना के बड़े अधिकारी) मर्द हैं, मां का दूध पिया है तो आम सैनिकों को भेड़-बकरियों की तरह भेजने की जगह खुद मैदान में आओ. हम आपको जंग का मजा चखाएंगे.' कुर्रम जिले के डोगर में TTP ने किया था हमला टीटीपी ने कुर्रम जिले के डोगर इलाके में जोगी सैन्य किले पर किए गए हमले का वीडियो जारी किया है. टीटीपी ने दावा किया है कि इस हमले में उसके लड़ाकों ने पाकिस्तानी सैनिकों से भारी मात्रा में गोला-बारूद, 20 राइफलें, दो हिलक्स पिकअप वाहन और एक क्वाडकॉप्टर ड्रोन कैमरा अपने कब्जे में ले लिया. इस हमले की अगुआई खुद कमांडर अहमद काजिम ने की थी, जो TTP का ‘शैडो गवर्नर’ माना जाता है. टीटीपी का कहना है कि पाकिस्तानी सेना को अपने सैनिकों को बेकार में मरने के लिए भेजने की बजाय अपने शीर्ष अधिकारियों को जंग के मैदान में उतारना चाहिए. गत 21 अक्टूबर को पाकिस्तानी अधिकारियों ने टीटीपी कमांडर अहमद काजिम की गिरफ्तारी या सूचना देने के लिए 10 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की थी. यह इनाम TTP के इस शीर्ष कमांडर की बढ़ती सक्रियता और हमलों को देखते हुए घोषित किया गया. पाकिस्तानी सेना ने टीटीपी  के इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.  

पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव: अफगानिस्तान भी रोकेगा पानी, कुनार नदी पर बांध का ऐलान

काबुल  भारत के बाद अब अफगानिस्तान भी पाकिस्तान की जल आपूर्ति को प्रतिबंधित कर सकता है. तालिबान के उप सूचना मंत्री मुजाहिद फाराही ने ऐलान किया है कि जल एवं ऊर्जा मंत्रालय को तालिबान के सर्वोच्च नेता शेख हिबतुल्लाह अखुंदजादा से कुनार नदी पर बिना किसी देरी के बांधों का निर्माण शुरू करने के निर्देश मिले हैं. यह नदी पाकिस्तान में बहती है और पाकिस्तान के लिए पानी का एक बड़ा सोर्स है.  मुजाहिद फाराही के मुताबिक, अमीर अल-मुमिनीन ने मंत्रालय को विदेशी फर्मों का इंतजार करने के बजाय घरेलू अफगान कंपनियों के साथ अनुबंध करने का आदेश दिया है. इस बीच, जल एवं ऊर्जा मंत्री मुल्ला अब्दुल लतीफ मंसूर ने जोर देते हुए कहा, "अफगानों को अपने जल संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार है." घरेलू कंपनियों से जल्द अनुबंध करने का निर्देश उप सूचना मंत्री मुजाहिद फाराही ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि सर्वोच्च नेता शेख हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने कुनार नदी पर बांधों का निर्माण तुरंत शुरू करने के लिए जल एवं ऊर्जा मंत्रालय को निर्देश दिए हैं. इन निर्देशों में यह भी शामिल है कि विदेशी कंपनियों के बजाय घरेलू अफगान कंपनियों के साथ अनुबंध किए जाएं, जिससे काम में देरी न हो. अफगानों को अपने जल पर अधिकार जल एवं ऊर्जा मंत्री मुल्ला अब्दुल लतीफ मंसूर ने इस कदम का सपोर्ट करते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ किया है कि अफगानों को अपने जल संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार है.  काबुल और कुनार नदी, जो पाकिस्तान में बहती है, पाकिस्तान में पानी का एक बड़ा स्रोत रही है. जब भारत ने रोका पानी… पिछले दिनों पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने भी पाकिस्तान के साथ हुई जल संधि रद्द कर दी और जल आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाने की बातें की गई थीं. कश्मीर में 26 नागरिकों के मारे जाने के तुरंत बाद, सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि में अपनी भागीदारी सस्पेंड कर दी थी, जो सिंधु नदी सिस्टम के इस्तेमाल को कंट्रोल करती है. इनमें से एक मुख्य योजना चिनाब नदी पर रणबीर नहर की लंबाई को दोगुना करके 120 किमी करने की है, जो भारत से होकर पाकिस्तान के पंजाब के कृषि क्षेत्र तक जाती है. 

पेंशन स्कीम में EPFO के 5 अहम अपडेट, जानें कैसे होगा फायदा

नई दिल्ली अगर आप नौकरीपेशा व्यक्ति हैं और हर महीने आपकी सैलरी से PF  कटता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने Employee Pension Scheme (EPS) में कुछ बड़े बदलाव किए हैं, जो सीधे तौर पर आपकी पेंशन की राशि और प्रोसेस को प्रभावित करेंगे। आइए जानते हैं कौन से हैं ये 5 अहम बदलाव… अब औसत वेतन पर तय होगी पेंशन पहले पेंशन की गणना आखिरी वेतन के आधार पर की जाती थी। अब EPFO ने इसे बदलते हुए पिछले 60 महीनों (5 साल) के औसत वेतन को आधार बनाया है। इससे उन कर्मचारियों को फायदा होगा जिनकी सैलरी धीरे-धीरे बढ़ी है। यह नियम पहले से लागू है, लेकिन अब प्रोसेस को और आसान बना दिया गया है ताकि किसी को पेंशन कैलकुलेशन में नुकसान न हो। पेंशन की लिमिट बढ़कर ₹15,000 प्रति माह EPFO ने पेंशन लिमिट को बढ़ा दिया है। अब अधिकतम पेंशन ₹7,500 से बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया यह फैसला उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है जिनकी सैलरी तो अधिक थी, लेकिन पेंशन लिमिट की वजह से उन्हें कम रकम मिलती थी। अब 50 साल की उम्र में भी मिलेगी पेंशन अब कर्मचारियों को 50 वर्ष की आयु पूरी होते ही पेंशन निकालने का विकल्प मिल गया है। पहले न्यूनतम उम्र 58 साल थी, लेकिन अब इसे घटा दिया गया है। हालांकि, जल्दी पेंशन लेने पर राशि थोड़ी कम हो सकती है। अब पेंशन क्लेम होगा ऑनलाइन EPFO ने डिजिटल क्लेम प्रोसेस को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया है। अब फॉर्म भरने से लेकर दस्तावेज अपलोड करने तक की प्रक्रिया आप EPFO की वेबसाइट या मोबाइल ऐप से पूरी कर सकते हैं। इससे पहले जो काम महीनों में होता था, अब कुछ हफ्तों में पूरा हो जाएगा। नौकरी बदलने पर नहीं होगा नुकसान EPFO ने Pension Portability System को बेहतर बना दिया है। अब अगर आप नौकरी बदलते हैं, तो आपकी पुरानी सर्विस अपने आप नई कंपनी के रिकॉर्ड में जुड़ जाएगी। यानी पेंशन कंटिन्यूटी बनी रहेगी और पुरानी सर्विस का फायदा भी मिलेगा। EPFO के इन बदलावों से न सिर्फ कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी बल्कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन भी ज्यादा पारदर्शी और आसान तरीके से प्राप्त होगी।  

FAO रिपोर्ट: भारत का वन क्षेत्र तेजी से बढ़ा, एक दशक में 1.91 हेक्टेयर का विस्तार, विश्व में 9वां स्थान हासिल

नई दिल्ली भारत ने वैश्विक स्तर पर कुल वन क्षेत्र के मामले में नौवां स्थान हासिल करके वैश्विक पर्यावरण संरक्षण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को बाली में खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा शुरू किए गए वैश्विक वन संसाधन आकलन (GFRA) का हवाला देते हुए यह घोषणा की. उन्होंने कहा कि यह उल्लेखनीय प्रगति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों की सफलता को रेखांकित करती है, जिनका उद्देश्य वन संरक्षण, वनीकरण और समुदाय के नेतृत्व में पर्यावरणीय कार्रवाई करना है. यादव ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "भारत वैश्विक वन आकलन 2025 में शीर्ष 9 में है. हमने पिछले आकलन में 10वें स्थान की तुलना में वैश्विक स्तर पर वन क्षेत्र के मामले में 9वां स्थान हासिल किया है. हमने वार्षिक लाभ के मामले में भी वैश्विक स्तर पर अपना तीसरा स्थान बनाए रखा है.एफएओ ने बाली में वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (जीएफआरए) 2025 शुरू किया है.” एक पेड़ मां के नाम पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल – 'एक पेड़ मां के नाम' से पूरे देश को पौधारोपण की प्रेरणा मिल रही है। उन्होंने कहा कि पौधारोपण अभियानों में बढ़ती जन भागीदारी, विशेष रूप से 'एक पेड़ मां के नाम' पहल के तहत, और राज्य सरकारों द्वारा बड़े पैमाने पर चलाए गए अभियानों ने इस प्रगति में योगदान दिया है। सभी भारतीयों के लिए खुशी उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ''यह सभी भारतीयों के लिए खुशी का कारण है। हमने पिछले मूल्यांकन में 10वें स्थान की तुलना में वैश्विक स्तर पर वन क्षेत्र के मामले में 9वां स्थान हासिल किया है। हमने वार्षिक लाभ के मामले में भी वैश्विक स्तर पर अपना तीसरा स्थान बनाए रखा है। वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (जीएफआरए) 2025 को एफएओ द्वारा बाली में जारी किया गया है।'' दुनिया के शीर्ष 10 वन-समृद्ध देशों में शामिल है भारत एफएओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया का कुल वन क्षेत्र 4.14 बिलियन हेक्टेयर है, जो पृथ्वी की 32 प्रतिशत भूमि को कवर करता है। इसका आधे से ज्यादा (54 प्रतिशत) हिस्सा सिर्फ पांच देशों – रूस, ब्राजील, कनाडा, अमेरिका और चीन में केंद्रित है। आस्ट्रेलिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और इंडोनेशिया के बाद भारत दुनिया के शीर्ष 10 वन-समृद्ध देशों में शामिल है। चीन ने दर्ज की सबसे ज्यादा वृद्धि चीन ने 2015 और 2025 के बीच वन क्षेत्र में सबसे ज्यादा शुद्ध वार्षिक वृद्धि दर्ज की, जो 1.69 मिलियन हेक्टेयर प्रति वर्ष थी, उसके बाद रूस 9,42,000 हेक्टेयर और भारत 1,91,000 हेक्टेयर के साथ दूसरे स्थान पर है। महत्वपूर्ण वन विस्तार वाले अन्य देशों में तुर्किये (1,18,000 हेक्टेयर), आस्ट्रेलिया (1,05,000 हेक्टेयर), फ्रांस (95,900 हेक्टेयर), इंडोनेशिया (94,100 हेक्टेयर), दक्षिण अफ्रीका (87,600 हेक्टेयर), कनाडा (82,500 हेक्टेयर) और वियतनाम (72,800 हेक्टेयर) शामिल हैं। वन क्षेत्र में वृद्धि दर्ज करने वाला एकमात्र क्षेत्र है एशिया मूल्यांकन से पता चला है कि 1990 और 2025 के बीच वन क्षेत्र में वृद्धि दर्ज करने वाला एशिया एकमात्र क्षेत्र है, जिसमें चीन और भारत में वृद्धि सबसे ज्यादा है। वैश्विक स्तर पर शुद्ध वन हानि की वार्षिक दर में आधे से भी ज्यादा की कमी आई है, जो 1990 के दशक के 10.7 मिलियन हेक्टेयर से घटकर 2015-2025 के दौरान 4.12 मिलियन हेक्टेयर हो गई है। एफएओ ने कहा कि एशिया के वन विस्तार ने वैश्विक वनों की कटाई को धीमा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 20 प्रतिशत वन अब कानूनी रूप से स्थापित संरक्षित क्षेत्रों में हैं, जबकि 55 प्रतिशत का प्रबंधन दीर्घकालिक योजनाओं के तहत किया जाता है। यादव ने कहा कि बढ़ती जन भागीदारी हरित और टिकाऊ भविष्य के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की मजबूत भावना को बढ़ावा दे रही है. एफएओ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया का कुल वन क्षेत्र 4.14 अरब हेक्टेयर है, जो पृथ्वी की 32 फीसदी जमीन पर है. रिपोर्ट के अनुसार आधे से अधिक वनक्षेत्र (54 प्रतिशत) सिर्फ पांच देशों – रूस, ब्राजील, कनाडा, अमेरिका और चीन में है. वहीं ऑस्ट्रेलिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और इंडोनेशिया के बाद भारत दुनिया के शीर्ष 10 वन-समृद्ध देशों में शामिल है. इतना ही नहीं चीन में 2015 से 2025 के बीच वन क्षेत्र में सबसे ज्यादा वार्षिक शुद्ध वृद्धि 1.69 मिलियन हेक्टेयर प्रति वर्ष दर्ज की गई, उसके बाद रूसी संघ 9,42,000 हेक्टेयर और भारत 1,91,000 हेक्टेयर के साथ दूसरे स्थान पर है. इसके अलावा अहम वन विस्तार वाले अन्य देशों में तुर्किये (1,18,000 हेक्टेयर), ऑस्ट्रेलिया (1,05,000 हेक्टेयर), फ्रांस (95,900 हेक्टेयर), इंडोनेशिया (94,100 हेक्टेयर), दक्षिण अफ्रीका (87,600 हेक्टेयर), कनाडा (82,500 हेक्टेयर) और वियतनाम (72,800 हेक्टेयर) शामिल हैं. गौरतलब है कि मूल्यांकन से पता चला है कि एशिया इकलौता ऐसा इलाका है जहां 1990 से 2025 के बीच वन क्षेत्र में इजाफा दर्ज किया गया. इसमें चीन और भारत का योगदान सबसे ज्यदा है. एफएओ ने कहा कि एशिया में वनक्षेत्र विस्तार ने वैश्विक वनों की कटाई को धीमा करने में अहम भूमिका निभाई है जबकि दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में वनों की सबसे अधिक कटाई हुई है. विशेषज्ञ की राय नीतिगत फोकस का स्पष्ट प्रतिबिंब है : वोहरा इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, पर्यावरण कार्यकर्ता बीएस वोहरा ने ईटीवी भारत को बताया, "कुल वन क्षेत्र में भारत का विश्व स्तर पर 9वें स्थान पर पहुंचना और वार्षिक वन वृद्धि में तीसरे स्थान पर बने रहना, निरंतर वनीकरण कार्यक्रमों और नीतिगत फोकस का स्पष्ट प्रतिबिंब है. यह संकेत देता है कि समुदाय-आधारित वृक्षारोपण अभियान, नीति-स्तरीय वन प्रशासन और 'एक पेड़ के नाम' जैसी पहल जैसे बड़े पैमाने के प्रयास अपना प्रभाव दिखा रहे हैं." हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि अब ध्यान मात्रा से हटकर गुणवत्ता पर केंद्रित होना चाहिए, ताकि दीर्घकालिक पर्यावरणीय और जलवायु लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए जैव विविधता, पारिस्थितिक स्वास्थ्य और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके.  

अग्निवीरों की नौकरी सुरक्षित, 75 फीसदी बने रहेंगे फोर्स का हिस्सा

नई दिल्ली सेना में भर्ती के लिए आई अग्निवीर स्कीम पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। इस स्कीम के तहत अब तक 25 फीसदी जवानों को ही 4 साल के कार्यकाल के बाद भी नौकरी में बनाए रखने का प्रावधान है। अब इस लिमिट में बड़ा इजाफा हो सकता है और इसे 75 फीसदी तक किया जा सकता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इस संबंध में जैसलमेर में आज आयोजित होने वाली आर्मी कमांडर्स की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी इसके बारे में कोई निर्णय हो सकता है। अहम बात यह है कि अगले साल ही अग्निवीरों के पहले बैच के 4 साल की अवधि पूरी हो रही है। ऐसे में इन लोगों को फायदा मिल सकता है और 75 फीसदी लोगों की सेना में सेवा बरकरार रहेगी। मई में भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ ऐक्शन लेते हुए पाक में सक्रिय आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर किया था। उसके बाद आज पहली बार आर्मी कमांडर्स की कॉन्फ्रेंस होने वाली है। इस कॉन्फ्रेंस में सेना की टॉप लीडरशिप तमाम मसलों पर बात करती है और प्रमुख मुद्दा सुरक्षा की समीक्षा होता है। एक और विषय पर विचार हो सकता है कि सेना के पास रिटायर सैनिकों का एक बड़ा पूल है। इनकी सेवाओं का कैसे प्रयोग किया जा सकता है। इस पर भी विचार होगा। फिलहाल इन लोगों को आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसायटी, एक्स सर्विसमेन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम में ही लगाया गया है। अब इन लोगों की भागीदारी को बढ़ाने पर भी विचार होगा। मौजूदा सैनिकों के कल्याण के लिए भी कुछ फैसले लिए जा सकते हैं। सबसे अहम मसला यह होगा कि कैसे तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बने और जॉइंट कमांड में काम हो सके। कोलकाता में बीते महीने कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ था। इसमें पीएम नरेंद्र मोदी भी पहुंचे थे। उस मीटिंग में सरकार की ओर से ऐलान हुआ था कि तीन जॉइंट मिलिट्री स्टेशन बनेंगे। इसके अलावा आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की शैक्षणिक शाखाओं का विलय किया जाएगा। यदि कोई हमला होता है या कोई ऑपरेशन करना है तो भारतीय बल कितनी देर में तैयार हो सकते हैं। हथियारों या विमानों की रिपेयर में कितना टाइम लग सकता है। इन मसलों पर भी आज बात होगी।

चीन का सैन्य दांव: ताइवान के खिलाफ बढ़ती चुनौती, फाइटर जेट्स और नौसैनिक घेरा

ताइवान चीन और ताइवान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। ताइवान के समुद्री क्षेत्रों से लेकर हवाई सीमाओं तक चीनी लड़ाकू विमान और नौसैनिक जहाजों की मौजूदगी देखी जा रही है। इसी क्रम में ताइवान के रक्षा मंत्रालय (एमओडी) ने गुरुवार सुबह (स्थानीय समयानुसार) अपने जलक्षेत्र के निकट तीन चीनी सैन्य विमानों की उड़ानों तथा चार चीनी नौसेना के जहाजों की गतिविधियों का पता लगाया। इनमें एक विमान ने मध्य रेखा को पार करते हुए ताइवान के उत्तरी हवाई रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) में प्रवेश कर लिया। एक्स पर जारी एक पोस्ट में एमओडी ने बताया कि सुबह 6 बजे (यूटीसी+8) तक ताइवान के आसपास पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के तीन विमानों की उड़ानें और चार पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (पीएलएएन) के जहाजों की उपस्थिति दर्ज की गई। इनमें एक उड़ान ने मध्य रेखा पार की और उत्तरी एडीआईजेड में दाखिल हो गई। हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और जरूरी उपाय कर रहे हैं। दरअसल, पिछले बुधवार को भी ताइवान के रक्षा मंत्रालय (एमएनडी) ने अपने आसपास दो पीएलए विमानों, चार पीएलएएन जहाजों और एक आधिकारिक चीनी जहाज की गतिविधियां महसूस की थीं। एक्स पर पोस्ट में एमएनडी ने बताया कि सुबह 6 बजे (यूटीसी+8) तक ताइवान के परिवेश में दो पीएलए विमान, चार पीएलएएन जहाज तथा एक आधिकारिक जहाज सक्रिय थे। इनमें दोनों उड़ानें मध्य रेखा को पार कर उत्तरी एडीआईजेड में प्रवेश कर गईं। हमने परिस्थिति की निगरानी की और समुचित कार्रवाई की। यह घुसपैठ चीन के ताइवान पर निरंतर सैन्य दबाव की रणनीति का एक हिस्सा मानी जा रही है, जहां बीजिंग ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा घोषित करता है। ये लगातार होने वाली हवाई व समुद्री अतिक्रमणें ताइवान-चीन संबंधों में उभरते तनाव को रेखांकित करती हैं, जो वर्षों से भू-राजनीतिक विवादों से जूझ रहे हैं। उधर, चीन की परमाणु क्षमताओं में हो रही तेज प्रगति और विविधीकरण ने चिंताएं और बढ़ा दी हैं कि यदि पश्चिमी राष्ट्र ताइवान विवाद में हस्तक्षेप करते हैं, तो बीजिंग उनके खिलाफ 'परमाणु धमकी' या यहां तक कि पूर्ण परमाणु युद्ध का सहारा ले सकता है।

पुतिन की ‘विषकन्या’ पर फिर से लगी नजरें, रूस की लाल बालों वाली हसीना को मिला नया टास्क

रूस रूस की मशहूर जासूस अन्ना चैपमैन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उन्हें रूस से एक नया और महत्वपूर्ण मिशन सौंपा गया है, और अब वह 'म्यूजियम ऑफ रशियन इंटेलिजेंस' की प्रमुख के पद पर आसीन हो गई हैं। यह म्यूजियम रूस की प्रमुख विदेशी जासूसी एजेंसी SVR (जो पहले KGB के नाम से जानी जाती थी) से सीधे जुड़ा हुआ है। बता दें कि अन्ना चैपमैन (उम्र 43 वर्ष) का वास्तविक नाम 'अन्ना रोमानोवा' है। वह पहले यूनाइटेड किंगडम (UK) की नागरिक थीं। 2010 में अमेरिका में गिरफ्तारी के बाद वह वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में छाई रहीं, लेकिन एक हाई-प्रोफाइल जासूसी अदला-बदली के समझौते के तहत उन्हें मॉस्को वापस भेज दिया गया था। बता दें कि जिस म्यूजियम से अन्ना चैपमैन जुड़ी हैं, वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की विदेशी जासूसी एजेंसी SVR के प्रेस कार्यालय के अंतर्गत रजिस्टर्ड है, जो मॉस्को के गोर्की पार्क के निकट स्थित है। इसका उद्देश्य रूसी जासूसी के गौरवशाली इतिहास और 'उपलब्धियों' को जनता के सामने लाना है। SVR के वर्तमान प्रमुख और पुतिन के करीबी सहयोगी सर्गेई नारीश्किन की निगरानी में यह म्यूजियम रूसी जासूसों की विरासत का उत्सव मनाएगा और उनकी सफलताओं को वैश्विक पटल पर प्रदर्शित करेगा। अन्ना चैपमैन कौन हैं? रूस की इस लाल बालों वाली 'ब्लैक विडो' पर पश्चिमी देशों की गोपनीय सूचनाएं हासिल करने का आरोप लगा था। लंदन में उन्हें पहली बार प्रसिद्धि मिली, जहां उनके करिश्माई व्यक्तित्व ने उन्हें प्रभावशाली व्यापारियों, राजनेताओं और हाई-प्रोफाइल लोगों के बीच घुसपैठ करने में सहायता की। 'द सन' अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन में एक रूसी एजेंट ने उनके नेटवर्किंग कौशल पर नजर रखी और उन्हें भर्ती कर लिया। उनकी कहानी इतनी रोमांचक थी कि सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उन्हें मार्वल कॉमिक्स की लोकप्रिय किरदार 'ब्लैक विडो' से तुलना करने लगे। बाद में उन्होंने एलेक्स चैपमैन से शादी के माध्यम से ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त की, हालांकि यह शादी उतनी ही अचानक खत्म हो गई जितनी अचानक शुरू हुई थी। पिछले साल जारी अपनी किताब 'बॉन्डीअन्ना: टू रशिया विद लव' में चैपमैन ने खुद को वास्तविक जिंदगी की महिला जेम्स बॉन्ड (007) के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी खूबसूरती और आत्मविश्वास ने उन्हें शक्तिशाली व्यक्तियों तक पहुंचाने में मदद की। किताब में उन्होंने लिखा कि मुझे मालूम था कि पुरुषों पर मेरा प्रभाव कैसा होगा। प्रकृति ने मुझे उदारतापूर्वक आवश्यक गुण प्रदान किए थे। पतली कमर, उभरी हुई छाती और लहराते लाल बाल। बस, इन गुणों को उभारना था। मैंने सादे लेकिन सेक्सी आउटफिट्स, हल्के मेकअप और सहजता का सहारा लिया। सबसे महत्वपूर्ण, मैंने उन्हें खुश करने की अधिक कोशिश नहीं की। और यह जादू की तरह असरदार साबित हुआ। गिरफ्तारी और अमेरिका से निर्वासन चैपमैन 2010 में न्यूयॉर्क में FBI द्वारा एक रूसी 'स्लीपर सेल' के सदस्य के रूप में पकड़ी गईं। यह एक दशक लंबी जांच का हिस्सा था, जिसमें अमेरिका में अवैध रूप से सक्रिय गुप्तचरों का पर्दाफाश हुआ। हालांकि, बाद में एक जासूसी अदला-बदली के सौदे के तहत उन्हें रिहा कर दिया गया। इस सौदे में ब्रिटेन के डबल एजेंट सर्गेई स्क्रिपल को भी शामिल किया गया था, जो बाद में ब्रिटेन लौटे। रूस लौटने के बाद चैपमैन ने अपनी छवि को नया रूप दिया। उन्होंने एक सफल व्यवसायी के रूप में शुरुआत की और फिर टेलीविजन और सोशल मीडिया पर छा गईं। वह आज भी व्लादिमीर पुतिन की कट्टर समर्थक हैं और अब एक बच्चे की मां हैं। अब वह अपने असली नाम 'अन्ना रोमानोवा' से सार्वजनिक मंचों पर एक्टिव हो रही हैं।

H-1B वीज़ा विवाद तेज़: कानूनी अड़चन के बाद संसद में भी तनाव

वॉशिंगटन  अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा आवेदनों पर शुल्क बढ़ाकर 1 लाख डॉलर करने का अब सत्ता पक्ष और विपक्ष यानी रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों ने विरोध किया है और राष्ट्रपति से इस फैसले पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया है। अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से नए H-1B वीजा आवेदनों पर लगाए गए नए 1,00,000 डॉलर के शुल्क पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए चेतावनी दी है कि यह नीति अमेरिकी नवाचार और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचा सकती है। 21 अक्टूबर को वाइट हाउस और वाणिज्य विभाग को भेजी गई चिट्ठी में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों समेत अमेरिसी संसद कांग्रेस के सात सांसदों ने नाराजगी और चिंता जताई है। पत्र में कहा गया है कि वीजा पर लगाया गया भारी भरकम शुल्क शुरुआती स्तर के नियोक्ताओं और छोटी कंपनियों, खासकर उन कंपनियों पर विपरीत प्रभाव डालेगा जो अभी तक लाभ कमाने वाली कंपनियों के दायरे में नहीं आ सकी हैं। चिट्ठी में कहा गया है कि नया वीजा शुल्क स्टार्टअप्स और छोटी कंपनियों को तबाह कर सकता है क्योंकि ये कंपनियां बड़ी कंपनियों की तरह भारी वीजा शुल्क का बोझ वहन नहीं कर सकती हैं। सांसदों ने ये चिट्ठी तब लिखी है, जब ट्रंप प्रशासन का यह कदम पहले ही कानूनी अड़चनें झेल रहा है। चैंबर ऑफ कॉमर्स ने वीजा आवेदनों पर लगाए गए शुल्क के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जिस पर अभी सुनवाई जारी है। किस-किस ने किए चिट्ठी पर दस्तखत दरअसल, यह भारी भरकम शुल्क वीज़ा कार्यक्रम की निगरानी को कड़ा करने और उसमें सुधार लाने की रिपब्लिकन की योजना के तहत लाया गया था लेकिन यह विवादों में घिर गई है।न्यूजवीक की रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप को भेजे गए पत्र पर कैलिफोर्निया के सांसद सैम लिकार्डो, कैलिफोर्निया के सांसद जे ओबरनोल्टे, फ्लोरिडा की सांसद मारिया एल्विरा सलाजार, नेब्रास्का के सांसद डॉन बेकन, वर्जीनिया के सुहास सुब्रमण्यम और एरिजोना के ग्रेग स्टैंटन ने हस्ताक्षर किए हैं। प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी दोनों दलों के सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को लिखी चिट्ठी में कहा, “हम इस बात से सहमत हैं कि एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम में सुधार किया जा सकता है और इस प्रणाली को अमेरिका के मूल्यों और कार्यबल की ज़रूरतों के साथ बेहतर ढंग से संरेखित करने के लिए उसमें सुधार जरूरी है। साथ ही, हम इस बात से भी चिंतित हैं कि एच-1बी वीज़ा आवेदनों से संबंधित हालिया घोषणा अमेरिकी नियोक्ताओं के लिए गंभीर चुनौतियाँ पैदा करेगी और कुल मिलाकर हमारी प्रतिस्पर्धात्मकता को कमजोर करेगी।” द्विदलीय समाधान योजना पर जोर सांसदों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी कंपनियों को आवश्यक प्रतिभाएँ नहीं मिल पातीं हैं, तो कई उच्च कुशल कर्मचारी भारत, चीन, इजरायल या यूरोप जैसे देशों में वापस लौटकर ऐसी कंपनियाँ शुरू कर सकते हैं जो सीधे अमेरिकी कंपनियों से मुकाबला करेंगी। सांसदों ने चिट्ठी में ट्रंप प्रशासन को आव्रजन सुधार के लिए द्विदलीय समाधान पर जोर देने के लिए आमंत्रित किया है।

टीटीपी का सीधे शब्दों में चैलेंज — अगर मां का दूध पिया है तो आकर लड़ो: आसिम मुनीर ललकारे गए

काबुल अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। भले ही सीजफायर को आगे बढ़ाया गया हो, लेकिन बीच-बीच में संघर्ष के मामले सामने आ ही जाते हैं। इस बीच, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP या पाकिस्तानी तालिबान) ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर को धमकी दी है। पाकिस्तानी तालिबान ने मुनीर से कहा है कि अगर तुम मर्द हो तो हमारा सामना करो। टीटीपी के सामने आए वीडियोज में उसके कमांडर का कहना है कि मुनीर को अपने सैनिकों को मरने के लिए भेजने के बजाए, अपने टॉप अधिकारियों को जंग के मैदान में भेजना चाहिए। खबर के अनुसार, तमाम वीडियोज में आठ अक्टूबर को खैबर पख्तनूख्वा के कुर्रम इलाके में हुए हमले के फुटेज भी शामिल हें। इसमें टीटीपी ने 22 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था, जिससे हड़कंप मच गया। हालांकि, पाकिस्तान ने संख्या को छिपाते हुए सिर्फ 11 सैनिकों के मारे जाने की ही बात स्वीकारी। एक वीडियो में टीटीपी का सीनियर कमांडर जिसकी पहचान कमांडर काजिम से हुई है, वह पाकिस्तानी आर्मी चीफ मुनीर को धमकी देते हुए दिखाई दे रहा। वीडियो में काजिम कहता है, ''अगर तुम मर्द हो तो हमारा सामना करो।'' वीडियो में आगे कहता है कि अगर तुमने अपनी मां का दूध पिया है, तब हमसे लड़ाई करो। इस वीडियो से पाकिस्तानी सेना में दहशत व्याप्त हो गई है। पाकिस्तान ने काजिम पर दस करोड़ (पाकिस्तानी रुपये) का इनाम रख दिया है। माना जा रहा है कि काजिम हाल ही में पाक सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर की हत्या में शामिल था। पाकिस्तान के एक अधिकारी ने बताया कि काजिम, जो कुर्रम जिले का रहने वाला है, पाराचिनार जा रहे मिलिट्री काफिलों और शिया समुदाय की गाड़ियों पर हमलों के पीछे भी था। उस पर कुर्रम के डिप्टी कमिश्नर जावेदुल्लाह महसूद की हत्या की कोशिश की साज़िश रचने का भी आरोप है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच रिश्ते 2023 से ही खराब हैं, लेकिन अब ज्यादा तनाव पैदा हो गया है। इस्लामाबाद ने बार-बार इस बात पर चिंता जताई है कि आतंकवादी बॉर्डर पार से हमले करने के लिए अफगान जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

छठ पूजा में बढ़ी IRCTC की डिमांड, यात्री नहीं ले जा रहे घर का बना खाना

नई दिल्ली  छठ पूजा के कारण इस समय उत्तर भारत जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ है। इस दौरान ट्रेन यात्रा को लेकर एक नया ट्रेंड सामने आया है। लंबी यात्रा पर जा रहे यात्री अब घर से खाना ले जाने के बजाय IRCTC की ई-कैटरिंग सेवा से भोजन ऑर्डर करना पसंद कर रहे हैं। इस बढ़ती डिमांड के कारण IRCTC की बेस किचन में अब दोगुना खाना बनाया जा रहा है। IRCTC मील बुकिंग ने तोड़ा रिकॉर्ड आईआरसीटीसी की ई-कैटरिंग सेवा इस त्योहारी सीजन में यात्रियों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गई है: सामान्य बुकिंग: अप्रैल से सितंबर 2025 तक, IRCTC द्वारा रोजाना औसतन 1 लाख से ज्यादा मील बुक किए गए। त्योहारी सीजन में बढ़ोतरी: छठ के त्योहारी सीजन में यह संख्या बढ़कर रोजाना 1.84 लाख भोजन बुकिंग तक पहुंच गई है। इस बढ़ी हुई डिमांड ने लंबी यात्राओं में यात्रियों को बेहतर और स्वादिष्ट भोजन का विकल्प दिया है। अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड्स का मेन्यू और सुविधा IRCTC की इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत इसका विस्तृत मेन्यू है, जिसमें बाजार के हिसाब से कीमतें और ढेर सारे विकल्प शामिल हैं: मेन्यू के विकल्प: यात्री भारतीय व्यंजनों से लेकर पिज्जा जैसे फास्ट फूड तक चुन सकते हैं। शामिल ब्रांड्स: मैकडॉनल्ड्स, डोमिनोज, केएफसी, पिज्जा हट, बीकानेरवाला, हल्दीराम, बिरयानी बाय किलो, फासूस, बेहरोज बिरयानी, ला पिनोज पिज्जा, लंचबॉक्स, ओवन स्टोरी और स्वीट ट्रुथ जैसे बड़े और प्रसिद्ध फूड ब्रांड्स इस सेवा से जुड़े हैं। Zomato और Swiggy से भी करार IRCTC ने यात्रियों को और अधिक रेस्तरां विकल्प देने के लिए फूड एग्रीगेटर्स जोमैटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy) के साथ भी करार किया है। यात्री IRCTC की ई-कैटरिंग वेबसाइट या 'फूड ऑन ट्रैक’ ऐप के माध्यम से आसानी से अपना भोजन ऑर्डर कर सकते हैं। आगे का लक्ष्य आईआरसीटीसी भविष्य में इस सेवा का विस्तार करने और मेन्यू में और प्रसिद्ध फूड ब्रांड्स को शामिल करके खाने की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने की योजना बना रहा है। यह पहल भारतीय रेलवे की यात्रियों को बेहतर और आरामदायक सफर देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।