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यूक्रेन-रूस संघर्ष पर ट्रंप की राय: जेलेंस्की से मुलाकात के बाद कही ये चौंकाने वाली बात

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ शुक्रवार को ‘व्हाइट हाउस' (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में लंबी बैठक के बाद यूक्रेन एवं रूस से युद्ध समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा कि ‘‘वे जहां हैं वहीं रुक जाएं।'' ट्रंप ने राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद से यह युद्ध समाप्त नहीं होने को लेकर कई बार हताशा जताई है लेकिन उनकी ताजा टिप्पणी यूक्रेन के लिए यह संदेश प्रतीत होती है कि वह रूस के हाथों गंवाई भूमि को वापस लेने का प्रयास छोड़ दे। ट्रंप ने जेलेंस्की और उनकी टीम की दो घंटे से अधिक की बातचीत के तुरंत बाद ‘ट्रुथ सोशल' पर एक ‘पोस्ट' में कहा, ‘‘काफी खून-खराबा हो चुका है, संपत्ति की सीमाएं युद्ध और साहस से तय हो रही हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें वहीं रुक जाना चाहिए जहां वे हैं। दोनों को जीत का दावा करने दें, इतिहास को फैसला करने दें!'' ट्रंप ने बाद में फ्लोरिडा पहुंचने के तुरंत बाद दोनों पक्षों से ‘‘तुरंत युद्ध रोकने'' का आग्रह किया और संकेत दिया कि रूस यूक्रेन से छीना गया क्षेत्र अपने पास रखे। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘आप युद्ध रेखा के अनुसार चलें, चाहे वह कहीं भी हो वरना यह बहुत जटिल हो जाएगा।'' ट्रंप ने कहा, ‘‘आप युद्ध रेखा पर रुक जाएं और दोनों पक्षों को वापस जाना चाहिए, अपने परिवारों के पास जाना चाहिए, हत्याएं बंद करनी चाहिए।''   शुक्रवार की बैठक के बाद जेलेंस्की ने कहा कि युद्धविराम और बातचीत का समय आ गया है। उन्होंने जमीन छोड़ने के लिए ट्रंप द्वारा यूक्रेन पर दबाव डाले जाने के बारे में पूछे गए सवाल का सीधा जवाब देने से परहेज किया। जब पत्रकारों ने जेलेंस्की से ट्रंप के पोस्ट के बारे में सवाल किया तो यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति सही हैं। हमें वहीं रुकना होगा जहां हम हैं और फिर बात करनी होगी।'' युद्ध को लेकर ट्रंप का रुख पुतिन के साथ बृहस्पतिवार को लंबी फोन वार्ता के बाद बदला। फोन पर वार्ता के बाद उन्होंने घोषणा की कि वह आगामी सप्ताहों में हंगरी के बुडापेस्ट में रूसी नेता से मिलने की योजना बना रहे हैं। जेलेंस्की ने गाजा में पिछले सप्ताह हुए युद्धविराम और बंधक समझौते को लेकर ट्रंप को शुक्रवार को बधाई देते हुए कहा कि अब ट्रंप के पास रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने का बड़ा मौका है। अमेरिकी नेता ने संकेत दिया है कि वह कीव को लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली बेचने की सहमति देने को तैयार नहीं हैं। हालांकि यूक्रेन को इसकी सख्त जरूरत है। हाल में ट्रंप ने यूक्रेन को लंबी दूरी की ‘टॉमहॉक क्रूज' मिसाइल बेचने की मंशा दिखाई थी, जबकि पुतिन ने चेतावनी दी थी कि इस तरह के कदम से अमेरिका-रूस संबंधों में और तनाव पैदा होगा।    

सरकारी अधिकारी की करारी नाकामी: रिश्वत लेते रंगे हाथों CBI ने किया गिरफ्तार, पेटी में जमा 10 लाख की रकम देखकर हैरान रह जाएंगे!

गुवाहाटी  गुवाहाटी में सोमवार की शाम एक हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामले ने सरकारी सिस्टम की सच्चाई को उजागर कर दिया। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने नेशनल हाईवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) के कार्यकारी निदेशक और क्षेत्रीय प्रमुख मैसनाम रितेन कुमार सिंह को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कोई सामान्य घूसखोरी का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्ट तंत्र की बानगी है। कैसे रचा गया ‘ऑपरेशन ट्रैप’ CBI को पहले से ही खबर मिल चुकी थी कि एक सरकारी अधिकारी एक ठेकेदार से मोटी रकम की उगाही करने वाला है। इसके बाद जांच एजेंसी ने 14 अक्टूबर 2025 को एक सुनियोजित ऑपरेशन को अंजाम दिया। जैसे ही एक निजी प्रतिनिधि अधिकारी को ₹10 लाख की रिश्वत सौंप रहा था, टीम ने तुरंत पहुंचकर दोनों को मौके पर ही दबोच लिया। गिरफ्तार दूसरा शख्स है विनोद कुमार जैन, जो कोलकाता की निजी फर्म मेसर्स मोहनलाल जैन का प्रतिनिधि बताया गया है। यह रिश्वत NH-37 पर डेमो से मोरन बाईपास तक बन रहे चार लेन सड़क परियोजना में Completion Certificate और समय विस्तार (Extension of Time) दिलाने के नाम पर मांगी गई थी। छापेमारी में मिला 'भ्रष्टाचार का महल' गिरफ्तारी के बाद CBI की टीमें गुवाहाटी, गाजियाबाद और इंफाल स्थित उनके घर और दफ्तरों पर छापेमारी के लिए निकल पड़ीं। तलाशी के दौरान जो कुछ सामने आया, वह भ्रष्टाचार की गहराई को बयान करता है: ₹2.62 करोड़ नकद दिल्ली-एनसीआर में 9 हाई-एंड फ्लैट्स, 1 ऑफिस स्पेस और 3 प्लॉट बेंगलुरु में 1 फ्लैट और 1 प्लॉट गुवाहाटी में 4 अपार्टमेंट और 2 प्लॉट इंफाल में 2 भूखंड और 1 कृषि भूमि 6 लग्जरी कारों के दस्तावेज लाखों की कीमत वाली 2 ब्रांडेड घड़ियां चांदी की सिल्ली, जो संपत्ति की भव्यता को और बढ़ाती है इन जब्त सामग्रियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि घूसखोरी सिर्फ एक ट्रांजैक्शन नहीं, बल्कि एक सुनियोजित धन संग्रह अभियान था, जो वर्षों से चलता आ रहा था। अब कानून के शिकंजे में CBI ने दोनों आरोपियों को गुवाहाटी स्थित विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे भ्रष्टाचार नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है, और इतनी बड़ी रकम को कहाँ-कहाँ निवेश किया गया।  NHIDCL के लिए बड़ा झटका NHIDCL जैसी संस्था, जो देश के सड़क एवं बुनियादी ढांचे के विकास की रीढ़ मानी जाती है, उसके एक शीर्ष अधिकारी का इस तरह भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस तंत्र का पर्दाफाश है, जहां सरकारी ठेकों के नाम पर घूस की खुली मंडी चलती है।

दुर्गापुर गैंगरेप मामले में अहम सबूत मिले, तो क्या 12 लोग शामिल थे?

दुर्गापुर दुर्गापुर गैंगरेप केस में कंडोम की एंट्री हुई है। मामले में पुलिस को अबतक का सबसे बड़ा सबूत हाथ लगा है। पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में MBBS छात्रा से गैंगरेप केस में पुलिस ने 12 कंडोम जब्त किया है। 11 कंडोम पीड़िता के बॉयफ्रेंड के कमरे से और एक कंडोम जंगल से बरामद हुआ है। वहीं पीड़िता का बॉयफ्रेंड लगातार अपने बयान बदल जिससे उसकी भूमिका संदिग्ध हो गई है। 12 कंडोम मिलने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या 11 लोगों ने मिलकर MBBS छात्रा से गैंगरेप किया था। दरअसल पुलिस ने शुक्रवार को पीड़िता के बॉयफ्रेंड के कमरे और जंगल (रेप वाली जगह) पर तलाशी ली। इस दौरान पीड़िता के बॉयफ्रेंड के कमरे से कंडोम का पैकेट बरामद हुआ, जिसमें 11 कंडोम है। पैकेट में कुल 11 अनयूज्ड कंडोम रखे हुए थे। वहीं एक कंडोम वारदात की जगह पर मिला। पुलिस अब इसे भी अहम सबूत के रूप में देख रही है। बता दें कि पुलिस ने इस गैंगरेप की वारदात के बाद अब तक 5 आरोपियों और पीड़िता के बॉयफ्रेंड को पहले ही गिरफ्तार किया है। पुलिस ने पूरे मामले में अब जांच शुरू की और आरोपियों से पूछताछ की। वहीं पीड़िता के साथ जहां पर रेप हुआ उस जगह पर भी पुलिस ने जांच की है और बॉयफ्रेंड का रूम भी अच्छे से खंगाला। पुलिस ने बताया कि पीड़िता का बॉयफ्रेंड लगातार अपने बयान बदल रहा है, साथ ही पहले जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था उनके बयानों से भी बॉयफ्रेंड के बयानों में काफी अंतर है, जिससे पुलिस का शक बढ़ गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है। बॉयफ्रेंड की भूमिका संदिग्ध पुलिस ने बताया कि छात्रा और उसका बॉयफ्रेंड जिस रास्ते जंगल गए थे और उस रास्ते की भी जांच हो रही है। पुलिस घटनास्थल पर आरोपियों को लेकर पहुंची और वहां पर सीन रीक्रिएट किया, जिससे आरोपियों की भूमिका तय हो सके। पुलिस ने आरोपियों के उन कपड़ों को भी बरामद किया है जो कि उन्होंने वारदात के वक्त पहने थे। पीड़िता के बॉयफ्रेंड के खिलाफ भी पुलिस अब सबूत इकट्ठा कर रही है और इसी कड़ी में उसके रूम की तलाशी ली गई। पुलिस ने बताया कि उसके रूम से 12 कंडोम वाला पैकेट बरामद हुआ है जिसमें 11 कंडोम ही बरामद हुए हैं। 14 अक्टूबर को बॉयफ्रेंड को अरेस्ट किया गया था पुलिस ने मंगलवार को पीड़ित के दोस्त वासिफ अली को गिरफ्तार किया था। इससे पहले पुलिस ने मुख्य आरोपी सफीक एसके को भी गिरफ्तार कर लिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्य आरोपी की बड़ी बहन रोजीना ने अपने फरार भाई को गिरफ्तार कराने में मदद की। रोजीना ने बताया कि 13 अक्टूबर को जब उसका भाई दुर्गापुर में अंडाल पुल के नीचे उससे मिलने पहुंचा तो वह पुलिस को लेकर वहां पहुंच गई। इसके बाद पुलिस ने उसे घेरकर गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले एसके रियाजुद्दीन, अपू बरुई और फिरदौस एसके को 12 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। रियाजुद्दीन पहले पीड़ित छात्रा के मेडिकल कॉलेज में गार्ड था। उसे पांच साल पहले नौकरी से निकाल दिया था। दुर्गापुर पुलिस मंगलवार को पांचों आरोपियों और पीड़ित के दोस्त को लेकर जंगल में घटनास्थल पर पहुंची और उनसे 10 अक्टूबर की रात गैंगरेप के समय अपना-अपना रोल दोहराने को कहा।

भारत-पाक बॉर्डर पर नहीं होगा हाथ मिलाना, रिट्रीट सेरेमनी का टाइम बदला

नई दिल्ली  भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा अटारी बॉर्डर पर होने वाला रिट्रीट सेरेमनी का समय बदल दिया गया है। अब सर्दियों के चलते यह आधा घंटा पहले शुरू होगा। बीएसएफ के प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण महल ने बताया कि अब यह समारोह शाम 5 बजे से 5:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। पहले इसका समय शाम 5:30 बजे से 6 बजे तक था। नया समय तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सुरक्षा कारणों के चलते अब भारत-पाक सीमा गेट बंद रहेंगे और इस दौरान दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच कोई पारंपरिक अभिवादन या रस्में नहीं होंगी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद बंद किया था समारोह पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर छह व सात मई को ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत आतंकी ठिकानों को तबाह किया। इसके बाद 7 मई से रिट्रीट सेरेमनी पर सात मई को विराम लगा दिया था। भारत-पाकिस्तान के बीच 10 दिन के युद्धविराम के बाद सीमा सुरक्षा बल ने 20 मई को पंजाब के अटारी-वाघा, हुसैनीवाला और फाजिल्का सीमाओं पर छोटे स्तर पर बीटिंग रिट्रीट समारोह फिर से शुरू किया था। अटारी, हुसैनीवाला और सादकी बॉर्डर पर रोजाना समारोह जारी है, चाहे पाकिस्तानी पक्ष शामिल हो या नहीं। हर मौसम के मुताबिक बदलता है समय बीटिंग रिट्रीट अमृतसर के पास दोनों देशों की सीमा पर साल 1959 से हो रही है, जिसमें राष्ट्रीय झंडे उतारने की प्रक्रिया शामिल होती है। अटारी-वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी, भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर रोजाना होती है। यह समारोह बीएसएफ और पाकिस्तान रेंजर्स के जवानों द्वारा साझा रूप से आयोजित किया जाता है। इस समारोह को देखने के लिए देश और विदेश से लोग आते हैं। समारोह का समय हर मौसम के मुताबिक बदलता रहता है।

‘भारत की गोद में तालिबान’, बौखलाया पाकिस्तान बोला – अब कोई रिश्ता नहीं!

इस्लामाबाद अफ़ग़ानिस्तान के साथ तनाव के बीच, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी ज़हर उगला है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच पुराने रिश्तों का दौर खत्म हो गया है। आसिफ ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान में रह रहे अफ़ग़ान नागरिकों को तुरंत अपने देश लौट जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "अब उनकी अपनी सरकार है। हमारी ज़मीन और संसाधन सिर्फ़ 25 करोड़ पाकिस्तानियों के लिए हैं।" गौरतलब है कि पाकिस्तान के हवाई हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफ़ी बढ़ गया था। सीमा पर गोलीबारी में दोनों पक्षों के लोग हताहत हुए थे। इसके बाद 48 घंटे का युद्धविराम हुआ। शुक्रवार शाम 6 बजे युद्धविराम समाप्त होने से पहले ही यह घोषणा कर दी गई कि दोहा में वार्ता समाप्त होने तक इस अस्थायी युद्धविराम को बढ़ाया जा रहा है। इसके बावजूद, पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के पटिका प्रांत में हवाई हमला किया। तालिबान अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों के बीच समझौता टूट गया है। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान ने अफ़गानिस्तान को 836 विरोध पत्र भेजे हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान पर 13 माँगें रखी गई हैं, जो सभी सीमा पार आतंकवाद से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि अब कोई भी प्रतिनिधिमंडल काबुल नहीं जाएगा। अब कोई विरोध पत्र या शांति की अपील नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जहाँ भी आतंकवाद पनपता है, उसे उसकी कीमत चुकानी पड़ती है। भारत का भी ज़िक्र किया गया आसिफ ने भारत का भी ज़िक्र करते हुए कहा कि तालिबान सरकार भारत की ओर से काम कर रही है और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ साज़िश रच रही है। उन्होंने कहा, "काबुल के शासक अब भारत की गोद में आ गए हैं। वे कभी हमारे संरक्षण में रहते थे।" ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अगर अफ़गानिस्तान सीमा पर कोई भड़काऊ गतिविधि करता है, तो उसका मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। गौरतलब है कि अफ़गान विदेश मंत्री के भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान ने काबुल पर हवाई हमला किया था। यह साफ़ दर्शाता है कि पाकिस्तान आतंकवादी घटनाओं से ज़्यादा भारत और अफ़गानिस्तान के बीच बढ़ती नज़दीकियों को लेकर चिंतित है।

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट घोटाले पर खुद लिया संज्ञान, सरकारों से मांगा जवाब

नई दिल्ली देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम के मामलों पर अब सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार (MHA सेक्रेटरी), सीबीआई, हरियाणा सरकार और अंबाला के साइबर क्राइम विभाग को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीशों के फर्जी हस्ताक्षरों के साथ जारी किए गए फर्जी न्यायिक आदेश न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास की नींव को हिला देते हैं। यह कार्य न केवल कानून के शासन पर हमला है बल्कि न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा प्रहार भी है। वरिष्ठ नागरिक दंपति की शिकायत से शुरू हुआ मामला यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई जिसमें एक वरिष्ठ नागरिक दंपति से पिछले महीने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के जरिए उनकी जीवनभर की बचत ठगी गई थी। इस गंभीर घटना को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस पर संज्ञान लिया। जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और अंबाला साइबर क्राइम के एसपी से अब तक हुई जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के साइबर अपराधों पर सख्त कदम जरूरी हैं ताकि लोगों का भरोसा डिजिटल व्यवस्था पर बना रहे।

भारत का अगला फाइटर जेट गेम चेंजर! S-400 और THAAD भी इसके आगे पड़ेंगे फीके

बेंगलुरु देश और दुनिया के हालात लगातार बदल रहे हैं. अमेरिका और इजरायल का ईरान पर हमला और रूस-यूक्रेन युद्ध ने सामरिक स्थिति को बदलकर रख दिया है. इधर, ऑपरेशन सिंदूर ने दक्षिण एशिया के नेशनल डिफेंस सिस्‍टम में हलचल पैदा कर दी है. इन्‍हें देखते हुए हर देश अपनी सुरक्षा को मजबूत करने में जुटा है. मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्‍टम के साथ ही एडवांस्‍ड फाइटर जेट डेवलप करने या फिर उसे खरीदने की प्रक्रिया तेज हो गई है. भारत की सीमा एक तरफ चीन और बांग्‍लादेश से लगती है तो दूसरी तरफ पाकिस्‍तान है, ऐसे में नेशनल सिक्‍योरिटी को अपग्रेड करने के साथ ही उसे मजबूत करना काफी जरूरी है. ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव के आधार पर एयर डिफेंस सिस्‍टम के साथ ही अल्‍ट्रा मॉडर्न हाइपरसोनिक मिसाइल को डेवलप करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. दूसरी तरफ, 5th जेनरेशन फाइटर जेट को देश में ही बनाने के लिए एडवांस्‍ड मीडियम कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का प्रोटोटाइप डिजाइन तैयार करने के लिए सरकार ने ₹15000 करोड़ का फंड भी आवंटित कर दिया है. अब इसके इंजन में ऐसी टेक्‍नोलॉजी एड की जा रही है, जिससे 6th जेनरेशन के फाइटर जेट बनाने की राह काफी आसान हो जाएगी. इस टेक्‍नोलॉजी की खासियत ऐसी है, जिसके सामने अमेरिकी फिफ्थ जेन जेट F-35 और चीन का J-35 जेट भी बौना साबित हो जाएगा. AMCA प्रोजेक्‍ट को पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट डेवलप करने के लिए लॉन्‍च किया गया है. इसमें भारत-फ्रांस द्वारा संयुक्‍त रूप से डेवलप किए जाने वाले 120kN इंजन का इस्‍तेमाल किया जाएगा. अब इस शक्तिशाली जेट इंजन में एक और टेक्‍नोलॉजी एड किया जाने वाला है, जिससे यह 6वीं पीढ़ी के फाइटर जेट की कैटेगरी में आ जाएगा. इस एयरक्राफ्ट में यूज होने वाले इंजन को डीआरडीओ का गैस टर्बाइन रिसर्च इस्‍टेब्लिशमेंट (GTRE) और फ्रांस की डिफेंस कंपनी साफ्रान मिलकर डेवलप कर रहा है. इस इंजन में फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (FADEC) सिस्‍टम एड किया जा रहा है. FADEC को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिससे परफॉर्मेंस बढ़ने के साथ ही इसका मेंटेनेंस कॉस्‍ट भी कम होगा. इसके अलावा इसका इस्‍तेमाल AMCA Mk1 और एडवांस्‍ड AMCA Mk2 फाइटर जेट में भी किया जा सकेगा. FADEC सिस्‍टम की 4 प्रमुख विशेषताएँ 120kN इंजन के लिए अगली पीढ़ी की FADEC प्रणाली को इस तरह विकसित किया गया है कि यह AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) की स्टील्थ, सुपरक्रूज़ और मल्‍टीपल मिशन से जुड़ी आवश्यकताओं के अनुरूप हैं. इस सिस्‍टम की ये खासियत काफी महत्‍वूर्ण हैं -: डेटा कैप्चर और एनालिसिस: नई FADEC सिस्‍टम इंजन के सेंसर से कहीं अधिक मात्रा में डेटा एकत्र करने में सक्षम है, जिससे उसके संचालन की स्थिति की गहरी समझ प्राप्त होती है. उन्नत एनालिटिक्स के उपयोग से यह प्रणाली न केवल रखरखाव की जरूरतों का पहले से अनुमान लगा सकती है, बल्कि संभावित खराबियों की पहचान कर सकती है और डुप्लिकेट इनपुट सिग्नलों के बीच विसंगतियों को भी हल कर सकती है. यह पूर्वानुमानित रखरखाव क्षमता (predictive maintenance capability) AMCA की सर्विस उपलब्धता बढ़ाने और रखरखाव लागत घटाने में अहम भूमिका निभाएगी. बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी: FADEC के अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर इंजन के पैरामीटर को मिशन की जरूरतों के अनुसार डायनामिक रूप से समायोजित करते हैं, जिससे ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी आती है. सूत्रों के अनुसार, यह नई प्रणाली ईंधन बचत में उल्लेखनीय सुधार लाती है, जिससे AMCA की रेंज और उड़ान अवधि (endurance) बढ़ती है, विशेष रूप से Mach 1.3 की सुपरक्रूज़ गति पर बिना आफ्टरबर्नर के. यह क्षमता AMCA के लंबी दूरी के मिशनों और स्टील्थ प्रोफाइल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग: इस FADEC प्रणाली की कंप्यूटिंग क्षमता पहले के संस्करणों की तुलना में 10 गुना अधिक है. इससे इंजन का नियंत्रण अत्यधिक तेज़ और सटीक हो जाता है, जो सबसोनिक से सुपरसोनिक गति तक सभी उड़ान परिस्थितियों में इंजन को सक्षम बनाता है. इसका उन्नत हार्डवेयर जटिल एल्गोरिद्म को सुलझाने में सक्षम है, जिससे भारत की गर्म और ऊंचाई वाले इलाकों में भी इंजन का प्रदर्शन सर्वोत्तम रहता है. भविष्य के वैरिएंट्स के लिए स्केलेबिलिटी: FADEC की मॉड्यूलर डिज़ाइन इसे भविष्य के अपग्रेड्स के साथ संगत बनाती है. यह AMCA Mk1 (जो प्रारंभ में GE F414 इंजन से संचालित होगी) और Mk2 (जिसमें 120kN इंजन एकीकृत किया जाएगा) दोनों के लिए उपयुक्त है. इसे संभावित 6वीं पीढ़ी के फीचर्स जैसे डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन्स (निर्देशित ऊर्जा हथियार) और स्वॉर्म ड्रोन नियंत्रण प्रणाली के साथ इंटीग्रेट करने के लिए भी तैयार बनाती है. इनका उपयोग AMCA Mk2 में साल 2040 तक किए जाने की योजना है. 6th जेनरेशन फाइटर जेट भारत के स्वदेशी 120 किलोन्‍यूटन (kN) श्रेणी के इंजन के लिए विकसित किया जा रहा नया FADEC (Full Authority Digital Engine Control) सिस्टम एयरो-इंजन टेक्नोलॉजी में नया मानक स्थापित करने जा रहा है. यह अत्याधुनिक प्रणाली 5वीं और संभावित रूप से 6वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए तैयार की जा रही है. FADEC आधुनिक एयरो-इंजनों का सबसे अहम हिस्सा है, जो इंजन के परफॉर्मेंस को नियंत्रित करता है. यह फ्यूल फ्लो, थ्रस्ट और इंजन की वैरिएबल ज्योमेट्री जैसे मानकों को डिजिटल तरीके से सटीकता से नियंत्रित करता है. ‘idrw.org’ के अनुसार, नए FADEC में अपने पिछले वर्जन की तुलना में 10 गुना अधिक कंप्यूटिंग क्षमता होगी. इससे यह बेहद जटिल एल्गोरिद्म को प्रोसेस करने और रीयल-टाइम डेटा को अत्यंत सटीकता से प्रबंधित करने में सक्षम होगा. इससे इंजन के परफॉर्मेंस का ऑप्टिमाइजेशन और ऑपरेशनल लागत में कमी जैसे लाभ मिलेंगे. यह बढ़ी हुई कम्प्यूटिंग क्षमता एडवांस्ड एनालिटिक्स के एकीकरण को भी संभव बनाती है, जिससे इंजन अपने आप प्रदर्शन सुधारने और भविष्य की मेंटेनेंस जरूरतों का अनुमान लगाने में सक्षम होगा. AMCA और TEDBF कार्यक्रम को मिलेगी ताकत 120kN श्रेणी के इस इंडो-फ्रेंच इंजन का विकास भारत और फ्रांस की कंपनी सैफरन (Safran) के सहयोग से हो रहा है. यह परियोजना एक सरकार-से-सरकार समझौते (G2G) के तहत संचालित है, जिसमें इंजन की पूर्ण बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) भारत के पास रहेंगे. इसका अर्थ है कि भारत भविष्य में इस तकनीक को स्वतंत्र रूप से विकसित और अनुकूलित कर सकेगा. नया FADEC सिस्टम भारतीय वायुसेना के एडवांस्ड … Read more

मुस्लिम देशों की नई पसंद भारत, पाकिस्तान हो रहा अलग-थलग — जानिए कारण

नई दिल्ली मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती का दो दिवसीय दौरे पर भारत आना और भारत-मिस्र रणनीतिक वार्ता में शामिल होना, एक ऐसे समय में हुआ है जब ज‍ियोपॉल‍िट‍िकल इक्‍वेशन तेजी से बदल रहे हैं. यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है और संकेत देता है कि कश्मीर का राग अलापने वाले पाकिस्तान की पकड़ मुस्लिम देशों से ढीली होती जा रही है. अब मुस्लिम देश भी आतंक और युद्ध की विचारधारा से निकलकर आर्थिक, सामाजिक विकास और स्थिरता की ओर देख रहे हैं. भारत अब इन देशों का पसंदीदा पार्टनर है. पाकिस्तान लंबे समय से खुद को इस्लामिक जगत का लीडर बताता रहा है और यह मानता रहा है कि सभी मुस्लिम देश हर मुद्दे पर उसका साथ देंगे. कश्मीर मुद्दे को इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) में उठाने की उसकी कोशिशें इस रणनीति का हिस्सा रही हैं. लेकिन हाल के घटनाक्रम और OIC के भीतर से ही भारत को लेकर नरम होते रुख ने पाकिस्तान को परेशान कर द‍िया है. जैसा कि ऑपरेशन सिंदूर या अफगानिस्तान के साथ सीमा पर तनाव के दौरान देखा गया. तुर्की और अजरबैजान को छोड़कर ज्‍यादातर प्रमुख मुस्लिम देशों ने पाकिस्तान का खुला समर्थन नहीं किया. यहां तक कि उसके पारंपरिक सहयोगी सऊदी अरब और यूएई ने भी भारत के साथ रिश्तों को तवज्‍जो दी. खाड़ी देशों का बदलता रुख यूएई और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देश अब पाकिस्तान की कश्मीर केंद्रित कूटनीति से दूरी बना रहे हैं. ये देश अब अपनी ऊर्जा जरूरतों, निवेश, व्यापार और प्रवासी भारतीयों की विशाल संख्या के कारण भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार मानते हैं. हाल ही में, यूएई और सऊदी अरब ने पाकिस्तान के कुछ शहरों के नागरिकों को वीजा देने पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाए हैं, जो पाकिस्तान के प्रति उनके बदलते नजरिए को दर्शाते हैं. ये देश भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं और भारत के साथ स्‍ट्रेटजि‍क पार्टनरश‍िप बढ़ा रहे हैं. वजह सिर्फ आर्थिक मजबूरी या फ‍िर कुछ और मुस्लिम मुल्‍क, खासकर खाड़ी देश अब अपनी अर्थव्यवस्थाओं की निर्भरता तेल से हटाकर इन्‍वेस्‍टमेंट पर करना चाहते हैं. भारत की मजबूत और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था उनके लिए एक आकर्षक बाजार और इन्‍वेस्‍टमेंट डेस्‍ट‍िनेशन है. वे आतंक, अस्थिरता और संघर्ष की राजनीति से दूर हटकर लंबे समय तक वाली आर्थिक साझोदारी चाहते हैं, जो सिर्फ भारत उन्‍हें दे सकता है. यही वजह है क‍ि मुस्लिम देशों में भारत को लेकर नजरिया काफी हद तक बदल गया है. अब वे पाकिस्तान के मुकाबले भारत को एक ज्यादा स्थिर, आर्थिक रूप से मजबूत और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखते हैं. तीन प्‍वाइंट में समझें भारत क्‍यों बन रहा पसंद     भारत, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और खाड़ी देशों के लिए एक बड़ा व्यापारिक भागीदार है. लाखों भारतीय प्रोफेशनल्‍स खाड़ी देशों की इकोनॉमी में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहरीन, UAE, फिलिस्तीन और सऊदी अरब जैसे देशों से सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना, इन देशों के साथ भारत के प्रगाढ़ होते संबंधों को दर्शाता है.     मिस्र के साथ भारत के संबंध अशोक के शिलालेखों तक पुराने हैं. महात्मा गांधी और साद जघलौल ने दोनों देशों के र‍िश्तों को एक नया मुकाम द‍िया था. इस तरह के गहरे सभ्यतागत संबंध कई मुस्लिम देशों के साथ भारत के हैं, जो केवल धर्म पर आधारित नहीं हैं, बल्कि इतिहास और साझा मूल्यों पर टिके हैं.     तुर्की और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग भारत के लिए चिंता का विषय रहा है, लेकिन दूसरी तरफ, भारत कई अरब देशों के साथ सैन्य अभ्यास और रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है. यह ज‍ियोपॉल‍िटकल बैलेंस को भारत के पक्ष में झुकाता है. अफगानिस्तान ने पलटा सारा गेम     अफगानिस्तान के मामले में भारत ने ज‍िस तरह की भूमिका ली है, उससे मुस्‍ल‍िम देशों में साख बढ़ी है. भारत वहां अरबों डॉलर का इन्‍वेस्‍टमेंट क‍िया है. स्कूल, सड़कें और यहां तक कि अफगान संसद भवन का निर्माण भी कराया. 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भी भारत ने इंगेजमेंट विदाउट रिकॉग्निशन की नीति अपनाई और काफी मदद की.     भारत की इस नीत‍ि ने अफगानिस्तान के लोगों का द‍िल जीत ल‍िया. पाकिस्तान से बढ़ते तनाव के बीच तालिबान के साथ भारत का ‘टेक्निकल मिशन’ के माध्यम से सीमित जुड़ाव पाकिस्तान के विरोधियों के साथ संबंध बनाने की चाणक्य नीति जैसा है, जिससे मुस्लिम देशों में भी भारत की कूटनीतिक कुशलता का संदेश जाता है. फिलिस्तीन कनेक्‍शन भी अहम फिलिस्तीन का मुद्दा मुस्‍ल‍िम देशों के ल‍िए द‍िल से जुड़ा हुआ है. चाहे ईरान हो, कतर, मिस्र, सऊदी या फ‍िर यूएई सब वहां शांत‍ि चाहते हैं. एक स्‍वतंत्र फ‍िल‍िस्‍तीन बनाने की ख्‍वाह‍िश रखते हैं. ऐसे वक्‍त में जब पूरी दुन‍िया अमेर‍िका के आगे जी हजूरी करने में लगी है, भारत फ‍िल‍िस्‍तीन की आवाज बनकर डटकर खड़ा है. लगातार अमीर देशों को चेता रहा है क‍ि फ‍िल‍िस्‍तीन की बात सुने. फ‍िल‍िस्‍तीन से क‍िए वादे पूरे करो. भारत ने वहां मदद भी भेजी है. इन सब चीजों ने मुस्‍ल‍िम देशों को भारत के साथ जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है. मिस्र के विदेश मंत्री का यह दौरा स्वयं भारत के बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है. इसके अलावा, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत तेज होना भारत के साथ रिश्तों की नई कहानी कहता है.  

सीजफायर डेडलाइन के करीब आते ही पाकिस्तान में बढ़ा तनाव, खैबर पख्तूनख्वा के CM ने बढ़ाई शहबाज की टेंशन

खैबर पख्तूनख्वा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच के 48 घंटे के सीजफायर की मियाद खत्म होने जा रही है. पाकिस्तान, अफगानिस्तान के अगले कदम से सकपकाया हुआ है. ऐसे में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ देश में अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं.खैबर पख्तूनख्वा (KP) के नए मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उच्चस्तरीय बैठकों का बहिष्कार किया है. खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री ने खुद को प्रधानमंत्री की बैठक से दूर कर लिया है. खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सचिवालय से जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि जरूरी प्रतिबद्धताओं की वजह से मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी 17 अक्तूबर को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में होने जा रही बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे. इस चिट्ठी में पीएम शहबाज के सैन्य सचिव से अनुरोध किया गया कि खैबर पख्तूनख्वा सरकार में पूर्व वित्त सलाहकार मुज्जमिल असलम को पीएम की बैठकों में प्रांत की ओर से प्रतिनिधित्व करने की मंजूरी दी जाए.सूत्रों का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी, इस्लामाबाद में मौजूद होने के बावजूद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता वाली अंतर-प्रांतीय बैठक में शामिल नहीं हुए. पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच घोषित 48 घंटे का अस्थाई सीजफायर छह बजे के आसपास खत्म होने वाला है. यह सीजफायर 15 अक्टूबर 2025 को शाम 6 बजे शुरू हुआ था, जो चमन और स्पिन बोल्डक सीमा पर हुई घातक झड़पों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए लागू किया गया.  बता दें कि पिछले हफ्ते पाकिस्तान ने काबुल में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के कैंपों पर निशाना लगाया. 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद से यह दोनों मुल्कों के बीच इस तरह की सबसे भयावह झड़प थी. यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ, जब तालिबान के विदेश मंत्री भारत के दौरे पर थे.

लंबी कानूनी लड़ाई का नतीजा: डॉक्टर की कोशिशों के बाद FSSAI ने ORS प्रतिबंधित किया

हैदराबाद एक हैदराबाद की बाल रोग विशेषज्ञ की सालों लंबी जद्दोजहद ने आखिरकार मीठे पेयों की झूठी मार्केटिंग पर शिकंजा कस ही दिया। डॉ. शिवरांजनी संतोष की सतत कानूनी मुहिम के चलते भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा कदम उठाया है। अब कोई भी फूड या ड्रिंक प्रोडक्ट तब तक ‘ORS’ (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट्स) नाम का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा, जब तक वह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तय मानकों पर खरा न उतरे। FSSAI का नया आदेश: ‘ORS’ नाम पर फुल स्टॉप FSSAI ने 14 अक्टूबर को आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि अब किसी भी ब्रांड को ‘ORS’ शब्द का प्रयोग अपने उत्पादों के नाम में करने की अनुमति नहीं है, जब तक वह WHO द्वारा अनुशंसित फॉर्मूले के अनुसार न बना हो। इसके साथ ही 14 जुलाई 2022 और 2 फरवरी 2024 के वे पुराने आदेश भी रद्द कर दिए गए, जिनमें ब्रांड नाम के साथ ORS का प्रयोग कुछ शर्तों के साथ मान्य किया गया था। ‘डिस्क्लेमर’ भी अब काम का नहीं पहले कुछ कंपनियों को यह छूट दी गई थी कि वे अपने उत्पाद पर “यह WHO द्वारा अनुशंसित ORS फॉर्मूला नहीं है” जैसे डिस्क्लेमर के साथ ORS शब्द का प्रयोग कर सकती हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। 15 अक्टूबर को FSSAI ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी कर दो टूक कहा कि कोई भी फल-आधारित, गैर-कार्बोनेटेड या रेडी-टू-ड्रिंक पेय जिसमें WHO मानक न हो, वह ‘ORS’ नहीं कहलाया जा सकता।FSSAI ने ऐसे नामकरण को “गुमराह करने वाला, भ्रामक, झूठा और उपभोक्ताओं को धोखा देने वाला” करार दिया है, जो फूड सेफ्टी एक्ट 2006 के तहत गैरकानूनी है। WHO के अनुसार क्या है असली ORS? WHO के अनुसार मानक ORS में कुल 245 mOsm/L की ऑस्मोलैरिटी होनी चाहिए। इसमें प्रति लीटर पानी में होना चाहिए: सोडियम क्लोराइड: 2.6 ग्राम पोटैशियम क्लोराइड: 1.5 ग्राम सोडियम साइट्रेट: 2.9 ग्राम डेक्सट्रोज़ (चीनी): 13.5 ग्राम कंपनियों के ‘झूठे ORS’ में क्या है? कई नामी फार्मा कंपनियों के पेय जिनमें ORS लिखा होता है, उनमें चीनी की मात्रा करीब 120 ग्राम प्रति लीटर होती है – जो WHO मानक से लगभग 9 गुना अधिक है। इन पेयों में: सोडियम: 1.17 ग्राम पोटैशियम: 0.79 ग्राम क्लोराइड: 1.47 ग्राम यह मात्रा WHO के ORS मानकों से मेल नहीं खाती। ज़्यादा शक्कर बच्चों और बीमार व्यक्तियों के लिए और अधिक खतरनाक साबित हो सकती है। एक डॉक्टर की जिद ने बदला सिस्टम डॉ. शिवरांजनी संतोष ने लगभग 8 साल पहले इन झूठे दावों के खिलाफ आवाज़ उठानी शुरू की थी। 2022 में उन्होंने तेलंगाना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की, जिसमें इन नकली ORS उत्पादों की बिक्री को चुनौती दी गई थी। उन्होंने यह मुद्दा उठाया कि कैसे बच्चे और उनके माता-पिता इन पेयों को सही ORS समझकर इस्तेमाल करते हैं, जबकि ये शरीर को फायदा पहुंचाने की बजाय नुकसान पहुंचाते हैं। “यह एक जंग थी” – डॉ. शिवरांजनी FSSAI के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. शिवरांजनी ने कहा, “यह सिर्फ मेरी जीत नहीं है, यह लोगों की ताकत की जीत है — सभी डॉक्टरों, वकीलों, माताओं और जागरूक लोगों की। मैंने कभी हार नहीं मानी, और आज सिस्टम ने सुनी। यह 8 साल की जंग थी, जिसमें 3 साल PIL में, और कई साल सिस्टम की चुप्पी से लड़ने में लगे। लेकिन अब एक बदलाव आया है।”